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नक्सलमुक्त भारत अभियान: मुठभेड़ में चलपती की पत्नी समेत 3 बड़े नक्सली ढेर

रायपुर/ अल्लूरी  छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश सीमा पर सुकमा लगे एएसआर जिले के देविपटनम के कोंडामोडालु गांव के मारेडमिली के जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में नक्सली चलपति की पत्नी अरुणा समेत तीन बड़े नक्सलियों के मारे जाने की खबर है. अल्लुरी सीताराम जिले के SP ने की मुठभेड़ की पुष्टि की है. चलपती की पत्नी समेत 3 बड़े नक्सली ढेर यह मुठभेड़ बुधवार तड़के किंटुकुरु गांव (मारेडुमिल्लि और रामपचोड़ावरम क्षेत्र के बीच), अल्लूरी सीताराम राजू जिले में हुई. पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में 16 माओवादियों के एक समूह को देखा और लगभग 25 मिनट तक फायरिंग चली. इसके बाद मौके पर तीन शव मिले, इनकी पहचान नक्सली चलपति की पत्नी रावी वेंकट चैतन्य उर्फ अरुणा (SZCM, AOBSZC), अंजू (ACM / AOBSZC) और जोनल कमेटी के सदस्य गजराला रवि उर्फ उदय के रूप में हुई. वहीं बाकी माओवादी जंगलों में भाग निकले, और क्षेत्र में सघन सर्च ऑपरेशन जारी है. इस मुठभेड़ में रवि के अलावा छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में मारे गए पोलित ब्यूरो सदस्य अप्पा राव उर्फ चलपति की पत्नी अरुणा उर्फ वेंकट चैतन्य या रवि चैतन्य भी मारी गई। अरुणा आंध्र प्रदेश ज़ोनल कमेटी की सदस्य थी। इस मुठभेड़ में एक नक्सली अंजू भी मारा गया है। गजराला रवि उन माओवादी नेताओं में शामिल था, जिन्होंने पीपुल्स वार ग्रुप में रहते हुए, 2004-05 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार से शांति वार्ता में भाग लिया था। पुलिस का दावा है कि सुरक्षा बलों ने मारेडुमिल्ली और रामपचोदावरम के बीच स्थित किंतुकुरु गांव के पास माओवादियों के एक 16-सदस्यीय दल को देखा। लगभग 25 मिनट तक चली गोलीबारी के बाद, तीन शव बरामद हुए, जिन्हें उदय, अरुणा और अंजू के रूप में पहचाना गया। पुलिस का दावा है कि मौके से एके-47 राइफलें और अन्य हथियार बरामद किए गए हैं. क्षेत्र में तलाशी अभियान जारी है। बता दें कि बीजापुर के नेशनल पार्क एरिया में नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी मेंबर सुधाकर उर्फ नर सिंहाचलम मारा गया था। वो तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में वांटेड था। सुधाकर पर 1 करोड़ रुपए का इनाम भी घोषित था। वहीं 12 दिन पहले बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने 45 लाख रुपए के इनामी नक्सली भास्कर (45 साल) को भी मार गिराया। मुठभेड़ इंद्रावती नेशनल पार्क इलाके में हुई, यहां जवानों ने भास्कर के शव के साथ ही ऑटोमैटिक हथियार भी बरामद किए थे। भारी मात्रा में हथियार बरामद यह मुठभेड़ मारेडुमिल्लि थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई. मौके से भारी मात्रा में हथियार बरामद किया गया. मुठभेड़ की पुष्टि आंध्र के अल्लुरी सीताराम जिले के एसपी ने की है.  मोस्टवांटेड नक्सली गजराला रवि गजराला रवि, नक्सलियों के आंध्र ओडिसा बॉर्डर स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव था. यानी कि आंध्र ओडिसा बॉर्डर में सबसे बड़ा नक्सली था. आंध्र ओडिसा बॉर्डर पर जितनी भी नक्सली घटनाएं होती थी वो गजराला रवि के इशारे पर ही होती थी. साथ ही वो सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का सदस्य भी है. जो कि नक्सलियों का सैन्य विंग है. 400 लोग परेशान गजरला रवि AK-47 लेक चलता था, ये एनआईए का मोस्टवांटेड नक्सली था. इसे सैन्य रणनीतिकार और पार्टी के विचारक के रूप में भी जाना जाता था पोलित ब्यूरो के सदस्य राम कृष्णन के साथ मलकानगिरी में हमले के दौरान मौजूद था. वहीं गजरला को नए सिरे से भर्ती और सुरक्षा तैनाती के साथ मलकानगिरी क्षेत्र का पुनर्निर्माण करने की ज़िम्मेदारी थी.  

बालाघाट में बड़ा नक्सल ऑपरेशन, पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 3 महिला नक्सली समेत चार ढेर

 बालाघाट मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई एक मुठभेड़ में 4 नक्सलियों के मारे जाने की खबर है। यह मुठभेड़ पचामा दादर के पहाड़ी क्षेत्र में हुई। पिछले कुछ समय से बालाघाट जिले में नक्सली गतिविधियां बढ़ी थीं और इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। सूत्रों के अनुसार, इस मुठभेड़ में तीन महिला नक्सली और एक पुरुष नक्सली मारे गए। पुलिस ने की हथियारों की बरामदगी मध्य प्रदेश पुलिस और हॉक फोर्स ने इस मुठभेड़ में महत्वपूर्ण हथियार बरामद किए, जिनमें एक ग्रेनेड लॉन्चर और एसएलआर शामिल हैं। यह पुलिस की नक्सल उन्मूलन के प्रयासों में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। मारे गए नक्सलियों से हथियारों के अलावा अन्य उपकरण भी मिले हैं। फिलहाल, मुठभेड़ के बाद सर्च ऑपरेशन जारी है और शवों की बरामदगी की उम्मीद जताई जा रही है। नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों कर रहे लगातार कार्रवाई यह मुठभेड़ बालाघाट जिले के लांजी थाना क्षेत्र के आसपास हुई, जहां पहले भी कई बार नक्सली गतिविधियों की खबरें आई थीं। इससे पहले भी पुलिस चौकी डाबरी में माओवादियों के साथ मुठभेड़ हुई थी, जिसमें सुरक्षाबलों ने जवाबी फायरिंग कर नक्सलियों को भगाने में सफलता प्राप्त की थी। इस मुठभेड़ में 20 से 30 राउंड फायरिंग की गई थी। आदित्य मिश्रा की अगुवाई में मिली बड़ी सफलता बालाघाट में नक्सल उन्मूलन के लिए नए एसपी आदित्य मिश्रा की अगुवाई में यह बड़ी सफलता मिली है। मिश्रा ने नक्सलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की योजना बनाई है और उनकी कोशिशों से पुलिस को इस मुठभेड़ में सफलता मिली है। नक्सलियों के खिलाफ जारी इस अभियान से राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही इस खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सकेगा।  जवानों की बड़ी सफलता मिशन 2026 के मद्देनजर इसे हॉक फोर्स और बालाघाट पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है। जहां लगातार एक्शन से नक्सलियों के मारे जाने के साथ ही उनके मंसूबो को नाकामयाब करने में पुलिस और फोर्स लगातार जुटी हुई है। हाल ही में नवागत पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्र ने बालाघाट एसपी का पदभार ग्रहण किया हैं। जिसमें उन्होंने मिशन 2026 को प्राथमिकता बताते हुए बालाघाट ने नक्सलवाद से उन्मूलन की बात कही थी। वहीं पद संभालने के 1 सप्ताह के भीतर ही बालाघाट पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मिशन के लिए तैयार जवान इससे पहले भी पुलिस चौकी डाबरी में माओवादियों के साथ मुठभेड़ हुई थी, जिसमें सुरक्षाबलों ने जवाबी फायरिंग कर नक्सलियों को भगाने में सफलता प्राप्त की थी। इस मुठभेड़ में 20 से 30 राउंड फायरिंग की गई थी। सुरक्षाबल के जवान नक्सलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की योजना बनाई है और उनकी कोशिशों से पुलिस को इस मुठभेड़ में सफलता मिली है। नक्सलियों के खिलाफ जारी इस अभियान से राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही इस खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सकेगा। मुठभेड़  में 4 नक्सली ढेर हुए हैं- ADG पंकज श्रीवास्तव ADG पंकज श्रीवास्तव ने इस मामले पर आधिकारिक जानकारी दी है. बालाघाट नक्सली मुठभेड़ मामले में उन्होंने कहा कि अब तक कुल 4 नक्सली ढेर हुए हैं. 3 महिला 1 पुरुष नकस्ली की मारे जाने की पुष्टी की है. नक्सलियों के पास से 1 ग्रेनेड लॉन्चर 1 SLR और खाने- पीने के समान थे. जिसे बरामद कर लिया गया है. नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन अभी जारी…  

बीजापुर में बड़ी मुठभेड़ पांच नक्सली हुए ढेर, सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी

छत्तीसगढ़  छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा के जंगल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 5 नक्सली मारे गए हैं। सुरक्षा बलों ने 3 दिन पहले सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया था। तलाशी अभियान और मुठभेड़ जारी है। पुलिस अधिकारियों ने ये जानकारी दी है। तेलंगाना, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ इन तीनों राज्यों के हजारों की संख्या में जवान ऑपरेशन पर हैं। इलाके में सर्च अभियान जारी नक्सलियों के खिलाफ इस अभियान में कई सुरक्षा इकाइयां शामिल हैं, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती वन क्षेत्रों में नक्सलियों की मौजूदगी और बुनियादी ढांचे को खत्म करना है। जानकारी के अनुसार, नक्सलियों को चारों ओर से घेर लिया गया है। ऑपरेशन में 10,000 सुरक्षाकर्मी शामिल पुलिस ने बताया कि यह अभियान बस्तर क्षेत्र में शुरू की गई सबसे बड़ी आतंकवाद रोधी कार्रवाइयों में से एक है, जिसमें जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), बस्तर फाइटर्स, विशेष कार्य बल (एसटीएफ), राज्य पुलिस की सभी इकाइयों के साथ-साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और इसके विशिष्ट कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन (कोबरा) सहित विभिन्न इकाइयों के लगभग 10,000 सुरक्षाकर्मी शामिल थे। तीन दिन पहले शुरू हुआ था अभियान पुलिस ने बताया कि माओवादियों के सबसे मजबूत सैन्य संगठन बटालियन नंबर 1 और माओवादियों की तेलंगाना राज्य समिति के वरिष्ठ कैडरों की मौजूदगी के बारे में मिली जानकारी के आधार पर सोमवार को अभियान शुरू किया गया और यह कई दिनों तक चलेगा। पुलिस ने आगे ये भी बताया कि घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा यह इलाका माओवादियों की बटालियन नंबर 1 का बेस माना जाता है। जानकारी के मुताबिक, बीजापुर में 5 हजार से अधिक जवानों को नक्सलियों ने घेर लिया है। बीजापुर में बड़ी मुठभेड़, 40 लाख का इनामी नक्सली सुधाकर मारा गया छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है. डीआरजी और एसटीएफ ने नेशनल पार्क इलाके में नक्सलियों के खिलाफ एक संयुक्त अभियान चलाया. इस दौरान जवानों और नक्सलियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई. मुठभेड़ में नक्सली संगठन की सेंट्रल कमेटी का सदस्य सुधाकर मारा गया. सुधाकर पर सरकार ने 40 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था. यह मुठभेड़ बीजापुर के घने जंगलों में हुई, जहां लंबे समय से नक्सली गतिविधियां चल रही थीं. 40 लाख का इनामी नक्सली मारा गया बीजापुर के पुलिस अधीक्षक डॉक्टर जितेंद्र यादव ने मुठभेड़ की पुष्टि की है. हालांकि सुधाकर के मारे जाने को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है. जवान अभी भी इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. बताया जा रहा है कि मारे गए नक्सलियों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि मुठभेड़ के बाद इलाके में लगातार तलाशी ली जा रही है. मुठभेड़ के दौरान भारी मात्रा में हथियार और अन्य सामान भी बरामद किए गए हैं. मुठभेड़ के बाद इलाके में तलाशी अभियान जारी सुधाकर नक्सली संगठन में एक अहम भूमिका निभाता था और कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था. उसकी मौत को सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है. फिलहाल सुरक्षाबल पूरी सतर्कता के साथ ऑपरेशन में जुटे हुए हैं और जंगल के हर हिस्से की बारीकी से जांच कर रहे हैं.  

बालाघाट गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्राया, हॉक फोर्स पर फायरिंग कर भागे नक्सली

बालाघाट बालाघाट में मंगलवार को एक बार फिर पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है. जहां मौके का फायदा उठाकर नक्सली भाग खड़े हुए. जानकारी के मुताबिक, जिले के लांजी क्षेत्र अंतर्गत पुलिस चौकी डाबरी में जीआरबी डिवीजन के 10 से 15 नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना प्राप्त हुई थी. जिसके चलते हॉकफोर्स तथा सीआरपीएफ बी 217 कोबरा की कुल 12 टीमों ने नक्सल विरोधी अभियान के तहत मंगलवार को सर्चिंग अभियान शुरू किया. नक्सलियों की पुलिस पर फायरिंग सर्चिंग के दौरान हॉकफोर्स की टीम बिलालकसा ग्राम से लगे जंगल क्षेत्र में पहुंची. जहां पुलिस टीम की उपस्थिति का पता लगने पर 15 से 20 सशस्त्र माओवादियों के समूह ने पुलिस पार्टी पर 20 से 30 राउंड फायर किए. जिससे पुलिस टीम को आत्मरक्षा के लिए पेड़ों तथा पत्थरों का सहारा लेना पड़ा. तब नक्सली सतर्क होकर पुलिस टीम पर फायर कर मौके से भागने में सफल हो गए. पुलिस ने बरामद किया नक्सलियों का सामान हॉकफोर्स की टीम ने भी आत्मरक्षा में जवाबी संतुलित फायर किए. मुठभेड़ के दौरान नक्सल पार्टी के भागने की दिशा में हॉकफोर्स तथा सीआरपीएफ कोबरा की टीम को तैनात कर सम्पूर्ण क्षेत्र को सर्च किया जा रहा हैं. मुठभेड़ में बालाघाट पुलिस ने मौके से नक्सलियों द्वारा उपयोग की जा रही सोलर प्लेट तथा बड़ी संख्या में दैनिक उपयोग की सामग्री तथा दवाइयां भी बरामद कर ली. पुलिस अधीक्षक नागेंद्र सिंह ने बताया कि, ”मुठभेड़ में किसी पक्ष को कोई नुकसान नहीं हुआ है. घटना के बाद क्षेत्र में सर्चिंग अभियान और भी तेज कर दिया गया है. जवानों ने नक्सलियों की सोलर प्लेट, दैनिक उपयोग की सामग्री और दवाइयां बरामद की हैं. थाने में नक्सलियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है.” एंटी-नक्सल ऑपरेशन पकड़ जोर जहां एक ओर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबल एंटी नक्सल ऑपरेशन चला रहे हैं. वहीं छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे बालाघाट में सुरक्षाबलों का सर्चिंग अभियान जारी है. पिछले कई महीने से यहां का जवानों और नक्सलियों का आमना-सामना हुआ है. 19 फरवरी को बालाघाट जिले के ही गढ़ी पुलिस थाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में 62 लाख रुपये की 4 महिला इनामी नक्सली मारी गई थीं. नक्सलियों का सामान जब्त पुलिस अधीक्षक नगेन्द्रसिंह ने बताया कि मुठभेड़ में किसी पक्ष को कोई नुकसान नहीं हुआ। घटना के बाद क्षेत्र में बड़ा सर्चिंग अभियान चल रहा है। सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के इस्तेमाल की सोलर प्लेट, दैनिक उपयोग की सामग्री और दवाइयां बरामद की हैं। पुलिस थाने में नक्सलियों के खिलाफ केस दर्ज किया जा रहा है। फरवरी में 4 महिला नक्सलियों को मारा गया था इससे पहले 19 फरवरी को बालाघाट पुलिस ने गढ़ी थाना क्षेत्र में एक मुठभेड़ में 62 लाख रुपए के इनामी 4 महिला नक्सलियों को मार गिराया था। कान्हा के वनक्षेत्र सूपखार के जंगलों में हुई इस मुठभेड़ में भोरमदेव कमेटी की एक कमांडर और तीन एसीएम स्तर की महिला नक्सली मारी गई थीं।

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में 30 नक्सली ढेर, सुरक्षा बलों के साथ जारी है मुठभेड़

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के बीजापुर इलाके में बड़ा एनकाउंटर हो रहा है. अबूझमाड़ में डीआरजी के जवान लगातार ऑपरेशन चल रहा है. एनकाउंटर में अब तक 31 नक्सलियों के मारे जाने की खबर है. बताया जा रहा है कि मारे गए नक्सलियों की संख्या और बढ़ सकती है. नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा डीआरजी के जवानों से नक्सलियों की मुठभेड़ जारी है. माड़ के इलाके में सुबह से फायरिंग हो रही है. बताया ज रहा है कि DRG के जवानों ने बड़े नक्सली लीडर्स को घेर लिया है. मिली जानकारी के मुताबिक मुठभेड़ में नक्सल संगठन के जनरल सेक्रेटरी वसवा राजू के मारे जाने की भी खबर सामने आ रही है. वसवा राजू काफी उम्रदराज नक्सली लीडर है. ये दंडकारण्य में नक्सल संगठन की बुनियाद रखने वालों में से एक है. पिछले कई सालों से माड़ में पनाह लिया हुआ था. इस पर इंटरस्टेट 1 करोड़ का इनाम है. बताया जा रहा है कि नक्सलियों के सबसे गोपनीय ठिकाने पर जवानों ने अटैक किया है. माना जा रहा है कि अगर वसवा मारा जाता है तो जवानों की नक्सलियों पर अब तक की सबसे बड़ी फतह होगी. बताया जा रहा है इस मुठभेड़ में एक जवान भी शहीद हो गया है। मुठभेड़ अबूझमाड़ के जाटलूर इलाके में चल रही है। अभी मुठभेड़ की शुरुआती जानकारी ही सामने आई है। सुरक्षाबलों को इसमें बड़ी सफलता मिल सकती है। नारायणपुर एसपी प्रभात कुमार के मुताबिक माओवादियों के के माड़ डिवीजन के बड़े कैडर की सूचना मिलने पर डीआरजी नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंडागांव का अबूझमाड़ में ऑपरेशन चलाया है। बुधवार सुबह से मुठभेड़ जारी है। फिलहाल घटना की जांच जारी है बीजापुर में 5 नक्सली मारे गए वहीं इससे कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा के जंगल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 5 नक्सली मारे गए थे। सुरक्षा बलों ने सबसे बड़ा नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया था।तलाशी अभियान और मुठभेड़ जारी है। पुलिस अधिकारियों ने ये जानकारी दी है। तेलंगाना, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ इन तीनों राज्यों के हजारों की संख्या में जवान ऑपरेशन पर हैं। इससे पूर्व छत्तीसगढ़ में 20 मार्च गुरुवार की दोपहर तक 30 नक्सली ढेर हुए हैं। इनमें बीजापुर जिले के गंगालुर थाना क्षेत्र में पुलिस नक्सल मुठभेड़ में 26  और कांकेर सीमा पर हुई मुठभेड़ में 4 नक्सली मारे गये हैं। दो अलग-अलग मुठभेड़ में कुल 30  नक्सली मारे जा चुके हैं। मारे गए सभी नक्सलियों के शव बरामद कर लिए गए हैं। मौके से हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं। इससे पहले 9 फरवरी 2025 को छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बॉर्डर पर बीजापुर जिले के इंद्रावती नेशनल पार्क इलाके में 31 नक्सली ढेर हुए थे। विज्ञापन छत्तीसगढ़ में इस साल अब तक 71 नक्सली मारे जा चुके हैं। साल 2024 में अलग-अलग एनकाउंटर में जवानों ने करीब 300 नक्सलियों को मार गिराया है। वहीं 290 ने हथियार जब्त किये गये हैं। साल 2025 में हुई नक्सली मुठभेड़-     5 जनवरी 2025 को अबूझमाड़ के जंगल में एक महिला नक्सली समेत पांच नक्सली ढेर।     12 जनवरी 2025 को बीजापुर के मद्देड़ इलाके में एनकाउंटर में दो महिला समेत पांच नक्सली मारे गये थे।     16 जनवरी 2025 को बीजापुर जिले के उसूर ब्लॉक के पुजारी कांकेर और मारुड़बाका के जंगल में गुरुवार को सुरक्षाकर्मियों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। इसमें फोर्स ने 18 नक्सलियों को मार गिराया था।     21 जनवरी 2025 को गरियांबद जिले में 14 नक्सली मारे गये थे।     2 फरवरी 2025 को बीजापुर जिले के गंगालुर थाना क्षेत्र के तोड़का जंगल में मुठभेड़ में जवानों ने आठ नक्सलियों को मार गिराया था।     9 फरवरी 2025 को छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बॉर्डर पर बीजापुर जिले के इंद्रावती नेशनल पार्क इलाके में 31 नक्सली ढेर।     20 मार्च को बीजापुर में पुलिस नक्सल मुठभेड़ में 26 और कांकेर मुठभेड़ में 4 नक्सली मारे गये हैं। इस तरह 20 मार्च को कुल 30 नक्सली मारे गये।   साल 2024 के नक्सली मुठभेड़- 16 अप्रैल 2024 को कांकेर में पुलिस नक्सली मुठभेड़ में 33 नक्सली मारे गये थे। यह साल 2024 की देश की सबसे बड़ी नक्सली मुठभेड़ थी, जिससे नक्सली डर के भय से कांप उठे थे। 30 अप्रैल को 9 घंटे तक चली मुठभेड़ जवानों ने 10 नक्सलियों को मार गिराया था। बूझमाड़ के टेकामेटा के जंगलों में डीआरजी और एसटीएफ के जवानों का सामना नक्सलियों से हुआ था। मारे गए नक्सलियों में 3 महिला और 7 पुरुष माओवादी शामिल थे। प्राथमिक तौर पर मुठभेड़ में मारे गये माओवादियों में से 2 की शिनाख्तगी डीवीसीएम जोगन्ना और डीवीसीएम विनय उर्फ अशोक के रूप में हुई थी। इस साल बस्तर रेंज में 141 माओवादी ढेर हो चुके हैं। पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज पी ने बताया कि वर्ष 2024 में अब तक प्रतिबंधित एवं गैर कानूनी सीपीआई नक्सली संगठन के विरूद्ध चले अभियानों में बस्तर रेंज के तहत कुल 141 नक्सलियों के शव बरामद करने के साथ ही अत्याधुनिक हथियारों में दो एलएमजी, चार एके-47- 04, एक एसएलआर, तीन इंसास, चार  303 रायफल और चार 9एमएम पिस्टल सहित बड़ी संख्या में अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद हुई हैं। 27 मार्च 2024 को नक्सल डिप्टी कमांडर समेत 6 नक्सलियों का किया एनकाउंटर 27 मार्च को छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के चिपुरभट्टी-पुसबाका के पास वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ जवानों ने एक नक्सली डिप्टी कमांडर समेत छह नक्सलियों को मार गिराया था। घटना स्थल से नक्सलियों के शव समेत हथियार बरामद हुए थे। मारे गए नक्सलियों में एक महिला नक्सली भी शामिल थी। मामला बासागुड़ा थाने क्षेत्र का था। 2 अप्रैल 2024 को 13 नक्सली ढेर दो अप्रैल को बीजापुर के गंगालूर थाना क्षेत्र के कोरचोली और लेंड्रा के जंगल में हुई जबरदस्त मुठभेड़ में पुलिस ने तीन महिला नक्सली समेत 13 नक्सलियों को मार गिराया था। घटनास्थल से पुलिस ने कई अत्याधुनिक हथियार बरामद किये थे। इनमें 1 नग 7.62 एलएमजी -58 राउंड, 1 नग 303 रायफल -39 राउंड, 12 बोर सिंगल शॉट 1 नग, बीजीएल लांचर 3 नग – 17 सेल, एयर गन 2 नग, विस्फोटक – हेंड ग्रेनेड 1, यूबीजीएल सेल 1, टिफिन बम 7 नग, जिलेटिन स्टीक कार्डेक्स वायर, सेफ्टी फ्यूज, डेटोनेटर, इलेक्ट्रिक वायर, उपकरण -लेपटॉप, डीव्हीडी … Read more

CG-Telangana border पर ऑपरेशन चेयुथा से कांपे नक्सली, सुरक्षा बलों ने 31 नक्सलियों को ढेर किया

कर्रेगुट्टा हिल्स छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर कर्रेगुट्टा हिल्स के आसपास के घने जंगलों में ‘ऑपरेशन संकल्प’ के दौरान 31 संदिग्ध नक्सलियों के शव बरामद किए हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस ने सोमवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नक्सली कब मारे गए। बीजापुर के एसपी जितेंद्र यादव ने कहा कि ऑपरेशन के बारे में डिटेल जानकारी बुधवार को बीजापुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शेयर की जाएगी। पुलिस ने बताया कि 31 मृतक नक्सलियों में से 20 की पहचान कर ली गई है। पहचाने गए 20 में से 11 नक्सलियों के शव पोस्टमॉर्टम और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनके परिवारों को सौंप दिए गए हैं। बीजापुर पुलिस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, “बाकी 11 शवों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके शव भी उनके परिजनों को दे दिए जाएंगे।” 3 अप्रैल को इसी ऑपरेशन में एक महिला नक्सली मारी गई थी, जिसकी पहचान अब तक नहीं हो पाई है। इससे पहले सुरक्षा बलों ने 24 अप्रैल को इसी क्षेत्र में 3 महिला नक्सलियों को मार गिराया गया था और हथियारों, विस्फोटकों और अन्य सामग्रियों का एक बड़ा जखीरा जब्त किया गया था। बता दें कि, इस क्षेत्र में ‘ऑपरेशन संकल्प’ नाम से 21 अप्रैल को अभियान शुरू हुआ था। नाम नहीं बताने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ”अब तक दक्षिण-पश्चिम बस्तर में चल रहे नक्सल विरोधी ऑपरेशंस में हमें अच्छे परिणाम मिले हैं। सभी सुरक्षा बल सुरक्षित हैं और बस्तर क्षेत्र को सेफ और सिक्योर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। ऑपरेशन अब भी चल रहा है, इसलिए सुरक्षा कारणों से अभी इसके बारे और डिटेल का खुलासा नहीं किया जा सकता। अधिकृत अधिकारी सही समय पर आगे की जानकारी शेयर करेंगे।” महिला माओवादी की पहचान नहीं ऑपरेशन में मारी गई एक महिला माओवादी की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। इससे पहले, 24 अप्रैल को, उसी क्षेत्र में तीन महिला माओवादियों को मार गिराया गया था और हथियारों, विस्फोटकों और अन्य सामग्रियों का एक महत्वपूर्ण जखीरा जब्त किया गया था। सही समय पर मिलेगी और जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सुरक्षा बलों को इस ऑपरेशन में अच्छी सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि सभी सुरक्षा बल सुरक्षित हैं और बस्तर क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सही समय आने पर और जानकारी दी जाएगी। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि इस ऑपरेशन में 28,000 से अधिक सुरक्षा बलों को शामिल किया गया था और 21 अप्रैल से अब तक करीब 35 मुठभेड़ हो चुकी हैं। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने 400 से अधिक आईईडी और करीब 40 हथियार तथा लगभग 2 टन विस्फोटक सामग्री बरामद की है।” इस ऑपरेशन को बस्तर में सबसे बड़े आतंकवाद विरोधी अभियानों में से एक बताया जा रहा है, जिसमें छत्तीसगढ़ पुलिस के जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), बस्तर फाइटर्स, स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और इसकी विशिष्ट कोबरा यूनिट सहित विभिन्न यूनिटों के करीब 28,000 जवान शामिल हैं। नक्सली गढ़ में ऑपरेशन से बड़ी चोट तेलंगाना स्टेट कमेटी और भारी हथियारों से लैस ‘बटालियन नंबर 1’ के नेताओं सहित टॉप नक्सली लीडर्स की मौजूदगी के बारे में खुफिया जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों ने यह ऑपरेशन शुरू किया था। ‘बटालियन नंबर 1’ नक्सलियों की सबसे मजबूत मिलिट्री विंग मानी जाती है। पुलिस के अनुसार, कर्रेगुट्टा हिल्स का इलाका बटालियन नंबर 1 का गढ़ है। खुफिया रिपोर्टों से पता चलता है कि ऑपरेशन के दौरान कई सीनियर नक्सली कैडर मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। अब तक सैकड़ों नक्सली ठिकाने और बंकर नष्ट कर दिए गए हैं और बड़ी मात्रा में विस्फोटक, डेटोनेटर, खाद्य आपूर्ति और दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद की गई हैं। एसटीएफ, डीआरजी और कोबरा यूनिट के छह सुरक्षाकर्मी अलग-अलग प्रेशर आईईडी विस्फोट की घटनाओं में घायल हो गए, लेकिन बताया जा रहा है कि वे खतरे से बाहर हैं। ताजा कार्रवाई के साथ, इस साल अब तक छत्तीसगढ़ में अलग-अलग एनकाउंटरों में 168 नक्सली मारे जा चुके हैं। इनमें से 151 नक्सली बस्तर डिवीजन में मारे गए, जिसमें बीजापुर समेत सात जिले शामिल हैं।

कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर ऑपरेशन जारी, महिला नक्सली ढेर; 303 राइफल बरामद, अब तक 4 को मारा

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में एक महिला नक्सली ढेर हो गई. यह मुठभेड़ कर्रेकट्टा की पहाड़ियों में हुई, जो छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित है. यहां पिछले दो हफ्तों से सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम बड़े पैमाने पर नक्सल विरोधी अभियान चला रही है. एजेंसी के अनुसार, बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने बताया कि मुठभेड़ के बाद जब इलाके की तलाशी ली गई तो मौके से एक महिला नक्सली का शव बरामद हुआ. उसके पास से एक .303 रायफल भी मिली है. यह इस ऑपरेशन में मारी गई चौथी महिला माओवादी है. आईजी सुंदरराज ने बताया कि 21 अप्रैल से सुरक्षा बलों का यह संयुक्त ऑपरेशन चल रहा है, जिसमें CRPF, कोबरा बटालियन, डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की टीमें शामिल हैं. जंगलों में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, जहां नक्सली गतिविधियों की खुफिया सूचना पहले से मिली थी. मुठभेड़ के दौरान दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई. इसके बाद जब नक्सली पीछे हटे, तो सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया. इसी दौरान महिला नक्सली का शव बरामद हुआ. अभी तक उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि वह किस पद पर थी और उसके खिलाफ कितने मामले दर्ज थे. बस्तर संभाग में महिला नक्सलियों की भागीदारी काफी अधिक देखी जाती है. हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि महिलाएं नक्सली संगठनों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, चाहे वह हथियार चलाना हो या रणनीति बनाना. फिलहाल सुरक्षा बलों ने इलाके में अपनी मौजूदगी और बढ़ा दी है और ऑपरेशन को और तेज किया गया है. वहीं एक दिन पहले सोमवार को यहां CRPF के सहायक कमांडेंट सागर बोराडे IED ब्लास्ट की चपेट में आ गए। धमाका इतना जोरदार था कि उन्हें अपना पैर गंवाना पड़ा। घायल कमांडेंट को दिल्ली रेफर किया गया है। यहां एम्स में उनका इलाज जारी है। मंत्री रामविचार नेताम ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। महिला नक्सली का शव बरामद जानकारी के मुताबिक, कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर 22 अप्रैल को सुरक्षा बलों को निकाला गया था। DRG, CRPF, कोबरा, STF और बस्तर फाइटर्स के हजारों जवान पहाड़ को घर रहे हैं। खड़ी चढ़ाई चढ़ रहे हैं। वहीं 5 मई सोमवार को नक्सलियों की एक टीम के साथ जवानों की मुठभेड़ हो गई। दोनों तरफ से रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही। वहीं धीरे-धीरे कर जवान आगे बढ़े। घटनास्थल से विस्फोटक भी बरामद इसके बाद मौके से एक महिला नक्सली का शव को बरामद किया गया। जवानों ने घटनास्थल से 303 हथियार समेत अन्य विस्फोटक पदार्थ भी बरामद किए हैं। मंगलवार को बस्तर IG सुंदरराज पी ने बताया कि, नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी है। अब तक अलग-अलग मुठभेड़ में कुल चार नक्सलियों की डेड बॉडी रिकवर कर ली गई है। नक्सलियों के कई बड़े कैडर्स को भी नुकसान हुआ है। कई घायल भी हो सकते हैं। पिछले एनकाउंटर में 8-8 लाख रुपए की 3 इनामी महिला नक्सली मारी गई थी। IG ने कहा कि ऑपरेशन जारी है। ऑपरेशन खत्म होने के बाद और जानकारी दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ नक्सली ऑपरेशन में जवानों को बड़ी सफलता, करेगुट्टा पहाड़ी पर फहराया गया तिरंगा

कर्रेगुट्टा   छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ी, लंबे समय से नक्सलियों का अभेद्य गढ़ मानी जाती थी। लेकिन अब ये पहाड़ी भारतीय सुरक्षाबलों के नियंत्रण में है। ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत 9 दिनों की कठिन चढ़ाई और रणनीतिक अभियान के बाद सुरक्षाबलों ने इस पहाड़ी पर कब्जा कर लिया और वहां तिरंगा झंडा फहरा दिया है। इस ऐतिहासिक जीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें जवान गर्व से तिरंगा लहराते नजर आ रहे हैं। ऑपरेशन संकल्प: नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान कर्रेगुट्टा पहाड़ी समुद्र तल से लगभग 5,000 फीट की ऊंचाई पर है। बताया जाता है कि ये पहाड़ी लंबे समय से नक्सलियों के पीपुल्स लिबरेशन गेरिला आर्मी (PLGA) के बटालियन नंबर 1 का मुख्य ठिकाना थी। इस क्षेत्र में करीब 500-1,000 नक्सली छिपे हुए थे। यह क्षेत्र हिड़मा, देवा, दामोदर, आजाद और सुजाता जैसे शीर्ष नक्सली कमांडरों का केंद्र रहा है। 21 अप्रैल से शुरू हुए ‘ऑपरेशन संकल्प’ में करीब 10,000 सुरक्षाकर्मियों ने हिस्सा लिया, जिसमें छत्तीसगढ़ पुलिस, तेलंगाना पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन, एसटीएफ, डीआरजी और बस्तर फाइटर्स शामिल थे। अभियान के दौरान 500 विशेष रूप से प्रशिक्षित जवानों को हेलिकॉप्टरों के जरिए पहाड़ी पर उतारा गया। 40-45 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी, दुर्गम रास्तों और नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की चुनौतियों के बावजूद जवानों ने नक्सलियों को खदेड़कर पहाड़ी के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। इस दौरान दो जवान आईईडी विस्फोट में घायल हुए, और कई जवान डिहाइड्रेशन का शिकार हुए। नक्सलियों का गढ़ अब जवानों के कब्जे में कर्रेगुट्टा पहाड़ी को नक्सलियों का ‘ब्लैक फॉरेस्ट’ या ‘ब्लैक हिल्स’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह क्षेत्र इतना घना और दुर्गम है कि शाम 4 बजे के बाद अंधेरा छा जाता है। स्थानीय लोग इस इलाके में जाने से डरते थे। सुरक्षाबलों ने न केवल पहाड़ी पर कब्जा किया, बल्कि वहां एक अस्थायी कैंप भी स्थापित किया, जिससे निगरानी और अभियान को और मजबूती मिलेगी। रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान में नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 को चारों ओर से घेर लिया गया है। करीब 2,000 नक्सलियों को घेरने की खबर है, जबकि कुछ शीर्ष नक्सली नेता, जैसे हिड़मा, तेलंगाना की ओर भाग गए हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नक्सलियों की गुफा का खुलासा अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर एक विशाल गुफा मिली, जो इतनी बड़ी थी कि इसमें 1,000 नक्सली छिप सकते थे। इस गुफा में हथियार, गोला-बारूद और अन्य सामग्री रखने की व्यवस्था थी। गुफा के अंदर एक प्राकृतिक सुरंग भी मिली, जो नक्सलियों के लिए भागने का रास्ता थी। जवानों ने इस गुफा पर भी कब्जा कर लिया। नक्सलियों का शांति प्रस्ताव, सरकार का इनकार नक्सलियों ने ऑपरेशन के दबाव में शांति वार्ता और युद्धविराम का प्रस्ताव दिया। सीपीआई (माओवादी) के केंद्रीय प्रवक्ता अभय और तेलंगाना कैडर के नक्सली शांता ने इसके लिए बयान और प्रेस नोट जारी किए। हालांकि, छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने को कहा। स्थानीय लोगों में राहत, विकास की उम्मीद कर्रेगुट्टा पर सुरक्षाबलों के कब्जे के बाद आसपास के गांवों में रहने वाले ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। उन्होंने इस अभियान का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि अब क्षेत्र में शांति और विकास के रास्ते खुलेंगे। सुरक्षाबलों की योजना इस क्षेत्र में एक स्थायी चौकी (फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस) स्थापित करने की है, ताकि नक्सली गतिविधियों पर स्थायी रूप से रोक लगाई जा सके। वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर उत्साह सुरक्षाबलों द्वारा जारी किए गए वीडियो और तस्वीरों में जवान कर्रेगुट्टा पहाड़ी की चोटी पर तिरंगा फहराते दिख रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक्स पर कई यूजर्स ने इसे ‘नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक जीत’ करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर लाल आतंक का पर्याय रही कर्रेगुट्टा पहाड़ी अब तिरंगे की शान के साथ जवानों के कब्जे में है।” सरेंडर और नक्सलियों पर बढ़ता दबाव अभियान के दौरान बीजापुर में 28.50 लाख रुपये के इनामी 14 नक्सलियों समेत कुल 24 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण किया, जिनमें 11 महिलाएं शामिल थीं। इससे नक्सलियों पर बढ़ते दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बालाघाट में पुलिस के जवानों ने 4 खूंखार महिला नक्सलियों को किया ढेर, 62 लाख रुपये का था इनाम

बालाघाट मध्य प्रदेश के बालाघाट में सुरक्षबलों ने बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। यहां पर जवानों ने 4 महिला नक्सलियों को ढेर कर दिया है। इन सभी पर कुल मिलाकर 62 लाख रुपए का इनाम घोषित था। एमपी के साथ ही देश के नक्सल प्रभावित सभी इलाकों में अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें अभी तक हजारों नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है और सैकड़ों नक्सलियों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया है। इस घटना की जानकारी देते हुए बालाघाट के एसपी नागेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कान्हा नेशनल पार्क के सुपखार वन रेंज में जवानों ने 4 महिला नक्सलियों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया है। उन्होंने बताया कि इन महिला नक्सलियों पर कुल 62 लाख रुपए का इनाम घोषित था। एसपी ने बताया कि नक्सलियों के खिलाफ मध्य प्रदेश में लगातार कार्रवाई की जा रही है। हाल के दिनों में एमपी में नक्सलियों के खिलाफ अभियान में तेजी आई है। एसपी नागेंद्र ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ यह अभियान अब लगातार जारी रहेगा। बैकफुट पर हैं नक्सली एसपी नागेंद्र सिंह ने आगे कहा कि अब उन्होंने अपना ये अभियान तेज कर दिया है। हमारी अपील है कि अगर कोई नक्सली सरेंडर करना चाहता है तो वह सरकार का सहयोग करें। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। नहीं तो यह हमारी आखिरी लड़ाई है। हम ‘मिशन 2026’ के लिए प्रतिबद्ध हैं। बता दें कि ‘मिशन 2026’ के तहत मार्च 2026 तक नक्सलवाद का खात्मा करने का लक्ष्य रखा गया है। इधर देश के नक्सल प्रभावित इलाकों में भी अभियान चल रहा है। इस अभियान में कई नक्सलियों ने सरेंडर किया है। वहीं, कई नक्सली एनकाउंटर में मारे गए हैं। पुलिस और सुरक्षा बल नक्सलियों को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। बीतें दिनों छत्तीसगढ़ – तेलंगाना बॉर्डर पर भी नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हुई थी। इस दौरान 5 नक्सली मारे गए थे। 1000 से ज्यादा नक्सलियों को घेर लिया गया था। 72 घंटे से ज्यादा चले इस ऑपरेशन में कई नक्सली मारे गए थे। बाद में नक्सलियों ने ऑपेशन को रोकने की मांग की थी। नक्सलियों से SSP की अपील बालाघाट के एसपी नागेंद्र कुमार सिंह ने महिला नक्सलियों के एनकाउंटर में ढेर होने के बाद बाकी बचे नक्सलियों से एक अपील की है। नागेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि जो भी नक्सली गतिविधियों में शामिल हैं और सरेंडर करना चाहते हैं तो वो सरकार का साथ दें। उन्होंने कहा कि सरेंडर करने वालों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। बता दें कि देशभर में नक्सलियों के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय ऐक्शन मोड में है। इस दौरान झारखंड से लेकर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ में भी नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में कई नक्सली मारे जा चुके हैं और कई नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है। सुरक्षाबलों ने बीते कुछ महीनों में सबसे बड़ी कार्रवाई छत्तीसगढ़ के अलग-अलग नक्सल प्रभावित इलाकों में की है, जिसमें सैकड़ों नक्सलियों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया है और सैकड़ों की संख्या में नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है। बीते दिनों छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर भी नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई थी। इस कार्रवाई में 5 नक्सली मारे गए थे। जवानों ने यहां 1 हजार से ज्यादा नक्सलियों को घेर लिया था। 72 घंटे से ज्यादा चले इस ऑपरेशन में कई नक्सली मारे गए थे। बाद में नक्सलियों ने चिट्ठी जारी कर ऑपरेशन को रोकने की अपील की थी।

सुकमा में 40 लाख रुपये के 22 इनामी नक्सलियों ने किया सरेंडर, दंपति भी है शामिल

 सुकमा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से एक बड़ी खबर है. यहां 22 नक्सलियों ने एक साथ पुलिस और सीआरपीएफ के अफसरों के सामने सरेंडर किया है. इन पर कुल 40 लाख रुपये का इनाम घोषित है. ये सभी नक्सली माड़ डिवीजन और नुआपाडा डिवीजन में सक्रिय रहे हैं. पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर किया है सरेंडर प्रदेश में नक्सलियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई के बीच नक्सल संगठन घबराया हुआ है. इस बीच सरकार की पुनर्वास नीति भी नक्सलियों को काफी प्रभावित कर रही है. इस बीच सुकमा में शुक्रवार को एक साथ 22 नक्सलियों ने हिंसा का साथ छोड़कर सरेंडर कर दिया है. इसमें एक दंपति भी शामिल हैं. इन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित है. इनके सरेंडर को पुलिस बड़ी सफलता मान रही है. 22 माओवादियों का सरेंडर: सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि जिले में लगातार नक्सल उन्नमूलन अभियान चलाया जा रहा है. पुनर्वास नीति का भी प्रचार प्रसार किया जा रहा है. नियद नेल्लानार योजना के तहत विकास कार्य भी कराया जा रहा है, जिससे प्रभावित होकर 9 महिला समेत 22 माओवादियों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सरेंडर किया है. नक्सलियों को 50-50 हजार की प्रोत्साहन राशि: पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह सभी माओवादी माड़ डिवीजन और नुआपाड़ डिवीजन में सक्रिय थे. सभी समर्पित माओवादियों को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के साथ ही कपड़े भी दिए गए हैं. एसपी ने कहा कि सभी सरेंडर करने वालों को पुनर्वास नीति के तहत अन्य सुविधाएं भी जल्द उपलब्ध कराई जाएगी. आत्मसमर्पित 1 पुरुष और 1 महिला नक्सली पर आठ आठ लाख का इनाम. वहीं 1 पुरूष और 1 महिला नक्सली पर पांच पांच लाख, 2 पुरूष और 5 महिला पर 2-2 लाख, 1 पुरूष नक्सली पर 50 हजार यानी कुल 40 लाख 50 हजार रुपए का इनाम था. पुलिस अधिकारी ने बताया कि नक्सलियों को आत्मससमर्पण के लिए प्रोत्साहित कराने में जिला बल, डीआरजी सुकमा, रेंज फिल्ड टीम (आरएफटी) कोंटा, सुकमा, जददलपुर सीआरपीएफ 02, 74, 131, 217, 219, 223, 226,227,241 एवं कोबरा 203 वाहिनी के आसूचना शाखा कार्मिकों की विशेष भूमिका रही है. सरेंडर माओवादियों की लिस्ट 1. मुचाकी जोगा पिता बुधरा उम्र लगभग 33 वर्ष है. उसकी जाति मुरिया है. वह सुकमा जिले के भेज्जी थाना के रेगड़गट्टा गांव का निवासी है. उसका पद माड़ डिवीजन अन्तर्गत पीएलजीए कम्पनी नंबर 01, प्लाटून नंबर 01 का डिप्टी कमाण्डर/सीवायपीसीएम और इनाम 8 लाख था. 2. मुचाकी जोगी पति जोगा उम्र 28 वर्ष है. उसकी जाति मुरिया है. वह सुकमा जिले के भेज्जी थाना के रेगड़गट्टा गांव की निवासी है. उसका पद पीएलजीए कम्पनी नम्बर 01 प्लाटून नम्बर 01 सदस्य/पीपीसीएम और इनाम 8 लाख था. 3. किकिड़ देवे पिता स्वर्गीय नंदा उम्र लगभग 30 वर्ष है. उसकी जाति मुरिया है. वह सुकमा जिले के थाना गादीरास के दोक्कापारा गुफड़ी गांव का निवासी है. वह नुवापाड़ा डिवीजन सीतानदी एरिया कमेटी सदस्या एसीएम और पांच लाख की इनामी थी. 4. मनोज उर्फ दूधी बुधरा पिता चमरू उम्र लगभग 28 वर्ष. जाति मुरिया, निवासी चिंतनार दूधीपारा थाना पुसपाल, जिला सुकमा. माड़ डिवीजन डीके प्रेस टीम सदस्य/एसीएम, इनाम 5 लाख 5. माड़वी भीमा पिता नंदा उम्र लगभग 30 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी सुरपनगुड़ा थाना चिंतलनार, जिला सुकमा. सुरपनगुड़ा आरपीसी डीएकेएमएस अध्यक्ष. इनाम 2 लाख. 6. माड़वी सोमड़ी पति माड़वी भीमा उम्र लगभग 48 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी मेट्टागुड़ा सरपंचपारा, थाना पामेड़, जिला बीजापुर. मेट्टागुड़ा आरपीसी केएमएस अध्यक्ष, इनाम-02 लाख. 7. संगीता उर्फ हड़मे माड़वी पिता स्वर्गीय सुकड़ा, उम्र लगभग 24 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी पैतुलगुट्टा थाना किस्टाराम जिला सुकमा. उसूर एलओएस पार्टी सदस्या. इनाम 02 लाख. 8. माड़वी कोसी पिता हुंगा उम्र लगभग 24 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी वेलपोच्चा पेरमापारा, थाना कोंटा, जिला सुकमा. गोमपाड़ आरपीसी सीएनएम अध्यक्षा. इनाम 02 लाख. 9- वंजाम सन्नी पति वंजाम माड़ा उम्र लगभग 24 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी दुलेड़ वंजामपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी सीएनएम अध्यक्षा. इनाम 02 लाख 10. माड़वी मंगली पिता हुंगा उम्र लगभग 35 वर्ष. जाति मुरिया, निवासी दुलेड़ वंजामपारा थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी केएमएस अध्यक्षा. इनाम 02 लाख. 11. ताती बण्डी पिता स्वर्गीय हड़मा, उम्र 35 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी गोमगुड़ा ईत्तापारा, थाना पामेड़, जिला बीजापुर. पालागुड़ा आरपीसी मिलिशिया कमांडर, इनाम 02 लाख. 12. पुनेम जोगा पिता स्वर्गीय जोगा, उम्र लगभग 28 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी एर्रनपल्ली किकिरपारा, थाना पामेड़, जिला बीजापुर. एर्रनपल्ली आरपीसी सीएनएम सदस्य, इनाम 50 हजार रुपए. 13. पुनेम नरसिंग राव पिता स्वर्गीय मल्ला, उम्र लगभग 25 वर्ष. जाति दोरला. निवासी दुलेड़ वंजामपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य. 14. सोड़ी हुंगा पिता स्व0 हड़मा उम्र लगभग 30 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी दुलेड़ वंजामपारा, थाना चिंतागुफा जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य. 15. वंजाम रामा पिता स्वर्गीय पोज्जा, उम्र लगभग 26 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी बगड़ेगुड़ा करकापारा, थाना केरलापाल, जिला सुकमा. पूर्व बगड़ेगुड़ा पंचायत मिलिशिया सदस्य. 16. हेमला नंदे पति गुण्डा उम्र लगभग 37 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी नागाराम सरपंचपारा, थाना चिंतलनार, जिला सुकमा. नागाराम आरपीसी केएमएस सदस्या. 17. हेमला मुके पति नंदा उम्र लगभग 38 वर्ष जाति मुरिया निवासी नागराम सरपंचारा थाना चिंतलनार जिला सुकमा. नागाराम आरपीसी केएमएस सदस्या. 18. गोंडसे/मड़कम हुंगा पिता बण्डी उम्र लगभग 25 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी दुलेड़ बंजामपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी मिलिशिया डिप्टी कमाण्डर. 19. मड़कम गंगा पिता मुक्का उम्र लगभग 33 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी बड़ेकेड़वाल, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. सिंघनमड़गू आरपीसी शाखा अध्यक्ष. 20. माड़वी सोना पिता रामा उम्र लगभग 27 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी दुलेड पोकड़ीपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य. 21. माड़वी हिड़मा पिता स्व. भीमा, उम्र लगभग 30 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी दुलेड़ पोकड़ीपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य. 22. पुनेम कन्हैया पिता कन्ना, निवासी चिमलीपेंटा, थाना चिंतलनार, जिला सुकमा. सुरपनगुड़ा आरपीसी मिलिशिया सदस्य पुलिस ने चलाया था ऑपरेशन समाचार एजेंसी आईएएनएस ने भी नक्सलियों के सरेंडर का वीडियो साझा किया है। आत्म समर्पण करने वाले नक्सलियों में 9 लड़कियां और 13 लड़के शामिल हैं। नक्सलियों के खिलाफ सुकमा में ऑपरेशन चलाया गया था। इस ऑपरेशन में सुकमा के अलावा जगदलपुर के डीआईजी ऑफिस समेत कई सीआरपीएफ बटालियनों ने हिस्सा लिया था। पुलिस का यह ऑपरेशन कामयाब रहा और 22 नक्सलियों ने नक्सलवाद को अलविदा कहने का फैसला … Read more

कोंडागांव में जवानों को मिली बड़ी सफलता.. मुठभेड़ में दो खूंखार नक्सली ढेर, AK-47 समेत अन्य हथियार बरामद

रायपुर  कोंडागांव और नारायणपुर जिले की सीमा पर पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में दो खूंखार माओवादी मारे गए। मारे गए नक्सलियों में ईस्ट बस्तर डिवीजन का DVCM हलदर और ACM रामे शामिल हैं। पुलिस ने उनके पास से AK-47 राइफल और अन्य हथियार बरामद किए हैं। इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। मुखबिर से मिली थी सूचना कोंडागांव और नारायणपुर जिले के किलम-बरगुम मरकाम पाल इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की खबर मिली थी। इसके बाद कोंडागांव DRG/बस्तर फाइटर्स की टीम नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन पर निकली थी। 15 अप्रैल की शाम को सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई। इस मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए। अब तक की जानकारी के अनुसार, मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की पहचान पूर्वी बस्तर के खूंखार माओवादी कमांडर DVCM हलदर कश्यप और ACM रामे शोरी उर्फ रामू के रूप में हुई है। दोनों पर कुल 13 लाख रुपये का इनाम घोषित था – हलदर कश्यप पर 8 लाख और रामे शोरी पर 5 लाख रुपये। सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ स्थल से दो नक्सलियों के शव बरामद किए हैं, जिन्हें कोंडागांव जिला मुख्यालय लाया गया है। फिलहाल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन जारी है, ताकि अन्य नक्सलियों की तलाश की जा सके और इलाके को पूरी तरह से सुरक्षित किया जा सके। यह कार्रवाई सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है, जिससे नक्सलियों के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। 13 लाख के इनामी थे नक्सली सुरक्षा बलों को ईस्ट बस्तर डिवीजन के खूंखार माओवादी कमांडर DVCM हलदर और ACM रामे को मारने में सफलता मिली। मारे गए माओवादियों पर कुल 13 लाख रुपये का इनाम घोषित था। हलदर पर 8 लाख और रामे पर 5 लाख का इनाम था। विस्फोटक और हथियार बरामद मुठभेड़ स्थल से 01 AK-47 राइफल, अन्य हथियार, विस्फोटक और माओवादी सामग्री बरामद हुई है। सुरक्षाबल घेराबंदी कर तलाशी ले रहे हैं। इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है। बस्तर आईजी ने की पुष्टि बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने पुष्टि करते हुए कहा, ‘मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से 2 नक्सलियों के शव बरामद किए गए। मारे गए दोनों नक्सली की शिनाख्त की गई है। इसमें एक बस्तर ईस्ट डिवीजन का खूंखार माओवादी कमांडर डीवीसीएम हलदर है और दूसरा एसीएम रामे है।’

छत्तीसगढ़ : बीजापुर में मुठभेड़ में 3 नक्सली ढेर, सुरक्षा बलों की सर्च ऑपरेशन जारी

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के कोलनार इलाके में शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे सुरक्षाबलों ने तीन नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया। यह कार्रवाई CRPF की 202 कोबरा और 210 कोबरा इकाइयों, राज्य पुलिस के विशेष कार्य बल (STF) और जिला रिजर्व गार्ड (DRG) की संयुक्त टीम द्वारा अंजाम दी गई। CRPF के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान जवान पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। इलाके में रुक-रुक कर गोलीबारी अब भी जारी है और ऑपरेशन को सतर्कता से आगे बढ़ाया जा रहा है। सुरक्षाबलों की यह कार्रवाई नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, इलाके में तलाशी अभियान जारी है और अन्य नक्सलियों की तलाश की जा रही है।  गोलीबारी जारी, और शव बरामद होने की संभावना दरअसल, सीआरपीएफ की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया गया कि शनिवार सुबह 9.30 बजे सुरक्षा बलों ने एक संयुक्त अभियान चलाकर एक नक्सली को ढेर कर दिया है। सीआरपीएफ की 202 कोबरा और 210 कोबरा इकाई, छत्तीसगढ़ पुलिस के विशेष कार्य बल और जिला रिजर्व गार्ड की मौजूदगी में यह अभियान चल रहा है। किसी भी जवान के घायल होने की खबर नहीं है। रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है। इंद्रावती नदी कें जंगलों में मुठभेड़ पीटीआई की खबर में छत्तीसगढ़ पुलिस के हवाले से लिखा गया कि नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में दो नक्सलियों को मार गिराया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के इंद्रावती क्षेत्र के तहत आने वाले जंगलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए हैं। उन्होंने बताया कि इंद्रावती नदी क्षेत्र के अंतर्गत जंगलों में नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना पर सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान पर रवाना किया गया था। नक्सलियों को भारी नुकसान की संभावना पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अभियान के दौरान आज सुबह लगभग नौ बजे सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई और सुरक्षाबलों ने घटनास्थल से अब तक दो नक्सलियों के शव बरामद कर लिए हैं। उन्होंने बताया, “क्षेत्र में सुबह से रुक रुक कर गोलीबारी जारी है। मुठभेड़ में नक्सलियों को भारी नुकसान की संभावना है। क्षेत्र में खोजी अभियान जारी है।”  नक्सलियों के खिलाफ बड़ा अभियान यह मुठभेड़ ऐसे समय पर हुई है जब राज्य सरकार लगातार नक्सल विरोधी अभियान को तेज कर रही है। हाल ही में दंतेवाड़ा में 26 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें से तीन पर नकद इनाम भी घोषित था। आत्मसमर्पण की यह घटना DRG मुख्यालय में हुई थी और यह ‘लोन वर्राटू’ (घर लौटो) अभियान का हिस्सा थी। मुख्यमंत्री का शांति और विकास का संदेश 10 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विश्नु देव साय ने मीडिया से बातचीत में शांति और विकास की राह पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर विकास की मुख्यधारा से जुड़ें। CM साय ने कहा, “हमने शुरुआत से ही नक्सलियों के लिए आत्मसमर्पण का रास्ता खुला रखा है। बार-बार हम यह अपील कर रहे हैं कि आप बंदूक और गोली की भाषा छोड़िए और विकास के रास्ते पर आइए। सरकार आपको न्याय देगी और रोजगार से जोड़ेगी।”

छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव सरकार नक्सली संगठन से बातचीत के लिए तैयार

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एक महत्वपूर्ण गतिविधि में एक ओर प्रतिबंधित नक्सली संगठन ने एक बार फिर राज्य सरकार के सामने शांति वार्ता का प्रस्ताव रखा है वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार नक्सलियों से बातचीत के लिए तैयार है। नक्सलियों के उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी ‘रुपेश’ की ओर से जारी प्रेस नोट पर गुरुवार को अपने निवास कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के उपमुख्यमंत्री, जिनके पास गृह विभाग का भी प्रभार है, विजय शर्मा ने कहा कि सरकार नक्सलियों से बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा,“सरकार के पास नक्सलियों के पुनर्वास के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी नीति है। साथ ही उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे हथियार छोड़कर सामने आएं और बातचीत का रास्ता अपनाएं।” बातचीत करना चाहते हो तो मुख्यधारा में आओ डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि मैं सभी नक्सलियों से कहना चाहता हूं कि वे बंदूक छोड़ें। मैं उनसे बात करने के लिए तैयार हूं। बंदूक का जवाब बंदूक से होता है। अगर आप चर्चा चाहते हैं तो मुख्यधारा में आना होगा। आप लोग अवैध गतिविधियों में शामिल हैं और भारत के संविधान को नहीं मान रहे हैं। यह भारत है, यहां लोकतंत्र है…। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि देश के गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। सरकार की नई पॉलिसी के तहत यदि कोई नक्सली सरेंडर करता है तब भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति सरेंडर करना चाहता है तो हम तैयार हैं। हम छोटे-बड़े सभी समूहों के साथ चर्चा करने के लिए तैयार हैं। इससे पहले भी रखी थी शांति वार्ता की बात बता दें कि इससे पहले नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी ने पर्चा जारी किया था। उन्होंने शांति वार्ता की अपील करते हुए कहा था कि पिछले 15 महीनों में उनके 400 साथी एनकाउंटर मारे गए हैं। अगर नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन रुकती है, तो हम शांतिवार्ता के लिए तैयार हैं। इस पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा था कि वे शांतिवार्ता को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए कोई शर्त न हो। सिर्फ सरेंडर करें और बातचीत करें। केंद्रीय कमेटी का पर्चा पहले तेलगू में आया था और अब उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के प्रभारी रूपेश का पत्र सामने आया है, जिसमें शांति और सीजफायर की बात कही गई है।  शर्मा ने कहा, “अगर कोई एक व्यक्ति भी बातचीत के लिए तैयार है तो सरकार भी तैयार है। चाहे वह छोटा समूह हो या बड़ा, सरकार हर स्तर पर चर्चा के लिए तत्पर है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में की जा रही है। शर्मा ने यह भी कहा कि बंदूक के जवाब में केवल चर्चा नहीं की जा सकती, जरूरत पड़ने पर सरकार कड़ी कार्रवाई भी करेगी। उन्होंने नक्सल संगठन की ओर से आया पत्र ‘सही और प्रामाणिक’ बताते हुए कहा कि इसमें सरकार से बातचीत की अपील की गई है। नक्सल संगठन ने इस नोट में स्पष्ट किया है कि वे पुलिस जवानों को अपना दुश्मन नहीं मानते और बार-बार पोस्टरों एवं पर्चों के माध्यम से इसी संदेश को दोहराया है। प्रेस नोट में नक्सलियों ने कहा है, “हमें समझना होगा कि आपसी संघर्ष की स्थिति बनाई गई है। हम जनता और अपने कैडर को ही अपना मानते हैं, उन पर गोली न चलाई जाए। शांति वार्ता के हमारे प्रयास का समर्थन करें।”श्री शर्मा ने कहा कि इस प्रस्ताव पर सरकार का मानना है कि शांति वार्ता के जरिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायित्व और विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है। गौरतलब है कि केंद्र व छत्तीसगढ़ सरकार के 31 मार्च तक नक्सल समस्या को समाप्त किए जाने के प्रयासों से माओवादियों ने एक बार फिर से शांति का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है। प्रतिबंधित नक्सली संगठन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो की ओर से रूपेश ने आठ अप्रैल की तारीख में सरकार से शांति वार्ता के लिए एक सशर्त प्रेस नोट जारी किया है। इस प्रेस नोट में नक्सली संगठन ने साफतौर पर लिखा है कि हम सरकार से शांति वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए अनुकूल वातावरण पहले बनना चाहिए। इस प्रेस नोट में कहा गया है कि शांति वार्ता के लिए सुरक्षा बलों की कार्रवाई रुकनी चाहिए। वार्ता एकपक्षीय न होकर दोनों तरफ से होनी चाहिए। नक्सलियों ने ये रखा प्रस्ताव बता दें, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो की ओर से प्रस्ताव जारी किया गया था. बयान में शांति वार्ता के लिए तैयार होने की बात कहते हुए इसके लिए अनुकूल माहौल बनाए जाने की जरूरत बताई है. उन्होंने इस पेशकश का मुख्य उद्देश्य बस्तर में हो रहे हिंसा (हत्याकांड) तुरंत रोकना बताया है. पहले भी रखा था प्रस्ताव वहीं, सप्ताह भर पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) केंद्रीय समिति की ओर से तेलगु में जारी बयान के जरिए शांति वार्ता का प्रस्ताव दिया गया था. इसके बाद अब भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) उत्तर-पश्चिम सब जोनल ब्यूरो की ओर हिन्दी में शांति वार्ता का प्रस्ताव दिया गया है. कहा कि वार्ता के लिए अनुकूल माहौल बनाने की मांग को गृह मंत्री विजय शर्मा ने ठुकरा दिया था. इससे जाहिर है कि सरकार अपनी वर्तमान नीति को जारी रखना चाहती है. इसके साथ ही सरकार की आत्मसमर्पण की नीति को समस्या के पूर्ण समाधान बताए जाने का भी विरोध किया गया है. माओवादियों ने कहा कि शांति वार्ता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने संबंधित निर्णय लेने के लिए हमें कुछ नेतृत्वकारी साथियों से मिलना है. स्थानीय नेतृत्व का राय लेना भी जरूरी है. लगातार चल रहे अभियानों के बीच में यह सब नहीं हो पाएगा. ऐसे में अनुकूल माहौल के लिए कगार अभियान को रोकना जरूरी है, वार्ता का प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अनुकूल माहौल बनाना जरूरी है, यह सरकार की जिम्मेदारी है. अब सरकार ने दिया जवाब इस पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों ने शांति … Read more

बीजापुर में सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने बताया कि माओवादी विचारधारा से वह परेशान हो गए

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले सुरक्षाबल के जवानों को बड़ी सफलता मिली है। मंगलावर को 22 नक्सलियों ने जवानों के सामने सरेंडर कर दिया। सरेंडर करने वाले 22 में से चार नक्सलियों के सिर पर 26 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने बताया कि माओवादी विचारधारा से वह परेशान हो गए थे। इसलिए समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते थे। जिन नक्सलियों ने सरेंडर किया उनके खिलाफ कई मामलों में केस दर्ज है। नक्सलियों के सरेंडर की जानकारी पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में चार इनामी नक्सलियों कमली हेमला उर्फ सोमे, मुया माड़वी उर्फ राजेश, सोनू तांती और महेश पुनेम समेत 22 उग्रवादियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाली नक्सली कमली हेमला पीएजीए बटालियन नंबर एक की सदस्य है तथा उसके सर पर आठ लाख रुपए का इनाम है। उन्होंने बताया कि नक्सली मुया माड़वी तेलंगाना स्टेट कमेटी के अंतर्गत पार्टी सदस्य है तथा उस पर भी आठ लाख रुपए का इनाम है। आत्मसमर्पण करने वाले पश्चिम बस्तर डिवीजन प्रेस टीम के कमांडर सोनू ताती और पीएलजीए सदस्य महेश पुनेम पर पांच-पांच लाख रुपए का इनाम है। अधिकारियों ने बताया कि मुया माड़वी उर्फ राजेश 19 साल का है, सोनू तांती 28 और महेश पुनेम 20 साल का है। संगठन के भीतर बड़ा मतभेद सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने बताया कि नक्सली संगठन के विचारों से मोहभंग हो गया है तथा वह संगठन के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेद से परेशान थे। उन्होंने समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सुरक्षित पारिवारिक जीवन जीने के लिए आत्मसमर्पण करने का फैसला किया है। उन्होंने खुलासा किया की जवानों की लगातार हो रही कार्रवाई से नक्सली संगठन खौफ में हैं। संगठन कमजोर हो रहे हैं। 50-50 हजार मिली सहायता राशि अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में जुड़ने वाले सभी माओवादियों को प्रोत्साहन के रूप में 50-50 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक नक्सली घटनाओं में शामिल 172 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं तथा 179 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। जिले में अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 83 नक्सली मारे गए हैं। एसपी ने की सरेंडर की अपील बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक डॉक्टर जितेंद्र कुमार यादव ने नक्सलियों से अपील की है कि वे सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और समाज की मुख्यधारा में शामिल हों। उन्होंने नक्सलियों से कहा है कि वे बाहरी लोगों की भ्रामक बातों और विचारधारा से बाहर निकलें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हों, जहां वे निर्भीक रूप से सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें।

बीजापुर में सुरक्षाबल के जवानों ने की बड़ी कार्रवाई, माओवादी संगठन के 13 एक्टिव मेंबर अरेस्ट, कई वारदातों में थे शामिल

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षाबल के जवानों ने एक बड़ी कार्यवाही में 1 लाख रुपये के इनामी माओवादी सहित 13 सक्रिय माओवादियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार माओवादियों में से 7 थाना उसूर क्षेत्र में पुलिस पार्टी पर आईईडी विस्फोट करने के मामले में शामिल थे, जबकि 6 माओवादी थाना बासागुड़ा क्षेत्र में पुतकेल के ग्रामीण और मारूड़बाका के ग्रामीण की हत्या में शामिल थे। कई हथियार बरामद किए गए गिरफ्तार माओवादियों के कब्जे से विस्फोटक, टिफिन बम, कार्डेक्स वायर, इलेक्ट्रिक वायर आदि बरामद किए गए हैं। पकड़े गए माओवादियों के विरुद्ध थाना उसूर और बासागुड़ा में वैधानिक कार्यवाही के बाद न्यायिक रिमांड पर माननीय न्यायालय बीजापुर के समक्ष पेश किया गया है। गिरफ्तार माओवादियों की पहचान इस प्रकार है:     बामन माडवी (गलगम आरपीसी डीएकेएमएस सदस्य)     सोढ़ी हिडमा (मारूड़बाका आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सेक्शन कमांडर)     बारसे अंदा (गलगम आरपीसी सीएनएम सदस्य)     बारसे हिडमा (गलगम आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य)     देवेंद्र रवा (गलगम आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य)     इरपा अर्जुन (संघम सदस्य)     सुक्का ओयाम (मारूड़बाका आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य)     कोसा उर्फ जागेश कुंजाम (गलगम आरपीसी डीएकेएमएस अध्यक्ष)     कोसा माडवी उर्फ बोल्ली (गलगम आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य)     बंडी माडवी उर्फ राजेश (गलगम आरपीसी सीएनएम सदस्य)     देवा मुचाकी (ग्राम टेकमेटला डीएकेएमएस उपाध्यक्ष)     माडवी जोगा (पिता गुडरा)     देवा मुचाकी (गलगम आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य) न्यायिक रिमांड पर भेज गए नक्सली गिरफ्तार माओवादियों के विरुद्ध थाना उसूर और बासागुड़ा में वैधानिक कार्यवाही के बाद न्यायिक रिमांड पर माननीय न्यायालय बीजापुर के समक्ष पेश किया गया है। बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। इसी कार्रवाई के दौरान इन नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया था। सर्चिंग पर निकली थी टीम पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिन नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है वह कई घटनाओं में शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई सर्चिंग के दौरान की गई।

हॉक फोर्स और एसएसयू में कई पदों पर भर्ती की तैयारी, 300 पद व विशेष सहयोगी दस्ते में 800 पदों पर होगी भर्ती

बालाघाट नक्सलियों के सफाए के लिए पुलिस अपनी रणनीति और संख्या बल को मजबूत करने में जुटी है। नक्सल प्रभावित लांजी और बैहर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से लेकर अनुविभागीय पुलिस अधिकारी की कमान भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी संभालेंगे। अभी यहां युवा अधिकारियों की तैनाती की गई है। पुलिस अधीक्षक नगेंद्र सिंह का कहना है कि युवा आईपीएस को नक्सल आपरेशन की कमान देकर उनके कौशल, सूझबूझ और ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा है। बल संख्या को मजबूत करते हुए जल्द ही हॉक फोर्स के 300 पद और विशेष सहयोगी दस्ता(एसएसयू) के करीब 800 पदों पर भर्ती की तैयारी है। छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ के बाद गश्त तेज ये बड़े और अहम फैसले ‘मिशन 2026’ को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं। 20 मार्च को छत्तीसगढ़ में हुईं दो अलग-अलग मुठभेड़ में 30 नक्सलियों को मार गिराने के बाद यहां पुलिस ने अपनी गश्त और तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों से लगे करीब 12 कैंप के 700 से अधिक जवान दिन-रात गश्त कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में पुलिस को नक्सलियों की गतिविधि से जुड़े इनपुट भी मिले हैं, जिससे पुलिस पहले से ज्यादा सतर्क है। मिशन 2026 के लिए बढ़ा रहे पद दिसंबर 2022 में नक्सल उन्मूल अभियान के तहत पुलिस ने तीन जिलों के क्षेत्रीय युवक-युवतियों का विशेष सहयोगी दस्ता बनाया था। तब बालाघाट में विशेष सहयोगी दस्ता के 80, मंडला में 30 और डिंडौरी में 40 पदों पर युवाओं की अस्थाई भर्ती की गई थी। मिशन 2026 को देखते हुए बालाघाट पुलिस इन पदों को बढ़ाने जा रही है। युवा आईपीएस अधिकारियों को मौका     मिशन 2026 को देखते हुए मुख्यालय स्तर से हॉक फोर्स और पुलिस के कई पदों पर युवा आईपीएस अधिकारियों को मौका दिया गया है। हॉक फोर्स के 300 और एसएसयू के 800 पदों पर भर्ती की तैयारी है। हमारी कोशिश है कि युवा पुलिस अधिकारियों के कौशल, उनकी सूझबूझ और ऊर्जा का सही उपयोग हो। – नगेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक, बालाघाट   वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटकर हुई ’38 वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) के खतरे से समग्र रूप से निपटने के लिए, भारत सरकार (जीओआई) ने 2015 में ‘एलडब्ल्यूई से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना’ को मंजूरी दी थी। इस नीति में सुरक्षा संबंधी उपायों, विकास हस्तक्षेपों, स्थानीय समुदायों के अधिकारों और हकों को सुनिश्चित करने आदि से जुड़ी एक बहुआयामी रणनीति की परिकल्पना की गई है। नीति के दृढ़ कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप हिंसा और भौगोलिक विस्तार में लगातार कमी आई है। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। अप्रैल 2018 तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 90 रह गई है, जुलाई 2021 तक यह संख्या 70 और फिर अप्रैल 2024 तक 38 रह गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश में वामपंथी उग्रवाद को पूरी तरह से समाप्त करने की घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही है। उन्होंने बताया, वामपंथी उग्रवादियों (एलडब्ल्यूई) द्वारा हिंसा की घटनाएं जो 2010 में अपने उच्चतम स्तर 1936 पर पहुंच गई थीं, 2024 में घटकर 374 रह गई हैं। यानी 81 प्रतिशत की कमी आई है। इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिक + सुरक्षा बल) की संख्या भी 85 प्रतिशत घटकर 2010 में 1005 से 2024 में 150 हो गई है। पिछले 06 वर्षों के दौरान, वामपंथी उग्रवादियों द्वारा हिंसा की घटनाएं जो 2019 में 501 थीं, 2024 में घटकर 374 हो गई हैं, यानी 25 प्रतिशत की कमी। इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिक + सुरक्षा बल) की संख्या भी 26 प्रतिशत घटकर 2019 में 202 से 2024 में 150 हो गई है। वर्ष 2022 और 2023 में हिंसा में वृद्धि वामपंथी उग्रवादियों के खिलाफ बढ़े हुए अभियानों के कारण है, क्योंकि सुरक्षा बलों ने सीपीआई (माओवादी) के मुख्य क्षेत्रों में प्रवेश करना शुरू कर दिया है। सुरक्षा के मोर्चे पर, भारत सरकार (जीओआई) वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बटालियन, राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए प्रशिक्षण और धन, उपकरण और हथियार, खुफिया जानकारी साझा करना, किलेबंद पुलिस स्टेशनों का निर्माण आदि प्रदान करके क्षमता निर्माण के लिए सहायता करती है। सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत सुरक्षा बलों की परिचालन और प्रशिक्षण आवश्यकताओं से संबंधित आवर्ती व्यय, आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादियों के पुनर्वास के लिए राज्यों द्वारा किए गए व्यय, सामुदायिक पुलिसिंग, ग्राम रक्षा समितियों और प्रचार सामग्री आदि के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत 2014-15 से 2024-25 के दौरान 3260.37 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। विशेष अवसंरचना योजना के तहत विशेष खुफिया शाखाओं, विशेष बलों, जिला पुलिस को मजबूत करने और फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशनों (एफपीएस) के निर्माण के लिए धनराशि प्रदान की जाती है। एसआईएस के तहत 1741 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस योजना के तहत पहले से निर्मित 400 एफपीएस के अलावा 226 एफपीएस का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, वामपंथी उग्रवाद प्रबंधन के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता (एसीएएलडब्ल्यूईएम) योजना के तहत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों और सुरक्षा शिविरों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए 2014-15 से 2024-25 की अवधि के दौरान केंद्रीय एजेंसियों को 1120.32 करोड़ रुपये दिए गए हैं। विकास के मोर्चे पर, प्रमुख योजनाओं के अलावा, भारत सरकार ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में कई विशिष्ट पहल की हैं, जिसमें सड़क नेटवर्क के विस्तार, दूरसंचार संपर्क में सुधार, कौशल और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया गया है। सड़क संपर्क के विस्तार के लिए 14,618 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में दूरसंचार संपर्क में सुधार के लिए 7,768 टावर लगाए गए हैं। कौशल विकास के संबंध में 46 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और 49 कौशल विकास केंद्र (एसडीसी) चालू किए गए हैं। आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए 178 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) चालू किए गए हैं। वित्तीय समावेशन के लिए, डाक विभाग ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में बैंकिंग सेवाओं के साथ 5731 … Read more

दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर जारी है मुठभेड़, 5 नक्सली ढेर होने की खबर

रायपुर  छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा-बीजापुर-नारायणपुर जिले की सीमा पर पुलिस और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ जारी है। अब तक 5 से अधिक नक्सलियों के मारे जाने की खबर है। मौके से 3 शव और इंसास राइफल बरामद की गई है। नक्सलियों के बड़े कैडर्स की मौजूदगी की सूचना पर सुरक्षा बलों ने कोर इलाके में घेराबंदी की। करीब 500 जवान इस अभियान में शामिल हैं। फायरिंग सुबह 8 बजे से जारी है। इंद्रावती नदी के पार ऑपरेशन पुलिस को जानकारी मिली थी कि इंद्रावती नदी के पार भारी संख्या में नक्सली मौजूद हैं। इसी आधार पर एक दिन पहले दंतेवाड़ा और बीजापुर से जवानों को अभियान के लिए रवाना किया गया था। 25 मार्च की सुबह नक्सलियों के साथ मुठभेड़ शुरू हो गई। सूत्रों के मुताबिक, फोर्स ने नक्सलियों को चारों ओर से घेर लिया है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय और एएसपी आरके बर्मन ने बताया कि मुठभेड़ जारी है। पूरी स्थिति सर्च ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही स्पष्ट होगी। दोनों ओर से हो रही फायरिंग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जंगल में पहले से मौजूद नक्सलियों ने जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की। दोनों तरफ से लगातार गोलियां चल रही हैं। खबर है कि जवानों ने नक्सलियों को घेर लिया है। मुठभेड़ के बारे में पूरी जानकारी कुछ देर बाद पता चलेगी। लेकिन माना जा रहा है कि फोर्स ने बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है, जिससे कई नक्सली मारे जा सकते हैं। नक्सलियों को हो सकता है भारी नुकसान दंतेवाड़ा के SP गौरव राय ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जवानों को नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद ऑपरेशन शुरू किया गया। फिलहाल मुठभेड़ जारी है और ज्यादा जानकारी का इंतजार है। यह मुठभेड़ ऐसे समय में हो रही है जब बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। सुरक्षा बल लगातार नक्सलियों को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुठभेड़ से नक्सलियों को बड़ा नुकसान होने की संभावना है। चार दिन पहले इसी इलाके में 30 नक्सली मारे गए थे चार दिन पहले इसी इलाके में दो अलग-अलग मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों ने 30 नक्सलियों को मार गिराया था। दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर 26 और कांकेर में 4 नक्सली ढेर हुए थे। यह नक्सलियों के लिए उनके TCOC (टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन) माह में सबसे बड़ा नुकसान माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह हमला हाल ही में सरेंडर किए नक्सली दिनेश मोड़ियाम की सूचना के आधार पर किया गया था।

Chhattisgarh में नक्सलियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन, सुरक्षाबल ने 30 से ज्यादा नक्सलियों को मार गिराया

बीजापुर / कांकेर छत्तीसगढ़ में आज सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। बीजापुर और कांकेर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुए एनकाउंटर में अब तक कुल 30 नक्सली मारे गए हैं। इसमें बीजापुर में 26 और कांकेर में 4 नक्सली मार गिराए गए हैं। आज सुबह 7 बजे से ही लाल आतंक के खिलाफ जवानों का अभियान जारी था। एक बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा के वन क्षेत्र में मुठभेड़ हुई तो दूसरी कांकेर में हुई है। इसमें एक जवान की भी शहादत हुई है। कुल 30 नक्सली एनकाउंटर में ढेर बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा क्षेत्र के अलावा कांकेड़ में भी सुरक्षाबलों ने नक्सलियों को ठिकाने लगाने में सफलता मिली है। कांकेर जिले में हुई मुठभेड़ में कुल 4 नक्सलियों को मार गिराया गया है। इस ऑपरेशन में अब कुल 30 नक्सलियों को मार गिराया गया है, जिसमें बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा के वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में 26 और कांकेर जिले में हुए एनकाउंटर में 4 नक्सली मारे गए हैं। जानकारी के मुताबिक नक्सलियों के खिलाफ आने वाले दिनों में और भी बड़े ऑपरेशन होंगे. नक्सली कमांडर हिडमा की तलाश में सुरक्षा बल जुटे हुए हैं. हिडमा की तलाश के लिए 125 से ज्यादा गांवों की टेक्निकल मैपिंग की जा रही है. सिक्योरिटी फोर्स छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बॉर्डर पर स्थित करीब 125 गांव का थर्मल इमेजिंग करवा रही है. सुरक्षाबलों ने इस साल अब तक 77 नक्सली ढेर किए हैं. कांकेर में जारी नक्सली ऑपरेशन के बार में जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलेसेला ने बताया कि मुठभेड़ अभी जारी है और अब तक हमने चार शव और एक स्वचालित राइफल बरामद की है। यह मुठभेड़ कांकेर-नारायणपुर सीमा क्षेत्र में हुई, जब माओवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद एक संयुक्त पुलिस दल को तलाशी अभियान के लिए भेजा गया था। एसपी ने बताया कि तलाशी अभियान अभी भी जारी है और शाम तक विस्तृत जानकारी दी जाएगी। गुरुवार को यह दूसरी मुठभेड़ है क्योंकि सुकमा में भी एक और मुठभेड़ चल रही है,जिसमें अब तक 18 शव बरामद किए जा चुके हैं। सीएम ने थपथपाई पीठ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दो अलग-अलग ऑपरेशनों के बाद,कांकेर और बीजापुर में 26 नक्सलियों के शव मिले हैं। हम अपने सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री का भी यह संकल्प है कि 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को खत्म कर दिया जाए। हमें विश्वास है कि उनका संकल्प पूरा होगा। यह डबल इंजन सरकार का लाभ है। सुबह से चल रहा था ऑपरेशन छत्तीसगढ़ सरकार के नक्सलियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत आज बीजापुर और दंतेवाड़ा के सरहदी में थाना गंगालूर क्षेत्रान्तर्गत माओवादी विरोधी अभियान पर संयुक्त टीम निकली थी। सुबह 7 बजे से माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच लगातार फायरिंग जारी थी। एनकाउंटर वाले क्षेत्र में भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद के साथ दो नक्सलियों के शव बरामद हुआ था। टीम की तरफ से सर्चिंग जारी थी।

छत्तीसगढ़ : बीजापुर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में कई नक्सली मारे गए

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाकर्मियों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों की सीमा पर स्थित जंगल में उस समय शुरू हुई जब सुरक्षाकर्मियों की एक संयुक्त टीम गंगालूर थाना क्षेत्र (बीजापुर) में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। अधिकारी ने बताया कि दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है। पुलिस के अनुसार मुठभेड़ अभी भी जारी है और क्षेत्र में सर्चिंग आपरेशन तेज कर दिया गया है। पुलिस ने बताया कि विस्तृत जानकारी का इंतजार है। सूत्रों के मुताबिक, इस मुठभेड़ में कई नक्सली मारे गए हैं, हालांकि उनकी संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सुरक्षा बलों को इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। जवानों ने चारों तरफ से घेराबंदी कर नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, और अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं, ताकि छिपे हुए नक्सलियों को पकड़कर इलाके को सुरक्षित किया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही मारे गए नक्सलियों की सही संख्या और उनके संगठन से जुड़ी जानकारी सामने आ पाएगी। नक्सलियों के खिलाफ एक्शन इससे पहले बीजापुर और नारायणपुर से लगी महाराष्ट्र की सीमा पर सुरक्षाबल और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई थी। इसमें 31 नक्सलियों की मौत हो गई थी। जानकारी के मुताबिक मारे गए नक्सलियों की संख्या बढ़ सकती है। साथ ही मुठभेड़ की जगह से ऑटोमैटिक हथियार भी बरामद किए गए हैं। बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव ने बीजापुर दंतेवाड़ा बॉर्डर पर गंगालूर थाना क्षेत्र में मुठभेड़ होने की पुष्टि की है. गंगालूर के एएंड्री जंगलों में जवानों की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान के लिए निकली थी. इसी दौरान मुठभेड़ शुरू हो गई. इलाके में जवानों का सर्चिंग अभियान भी चल रहा है. टीसीओसी क्या है ?: TCOC यानी टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन ( Tactical Counter Offensive Campaign) हैं. गर्मी के दिनों में बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी TCOC कैंपेन चलाते हैं. मार्च से शुरू होकर टीसीओसी जून तक चलता है. इस दौरान माओवादी संगठन सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं. इस दौरान सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही सड़क निर्माण में लगी गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश नक्सली करते हैं. नक्सलियों के टीसीओसी के दौरान बस्तर में बीते सालों में कई बड़ी नक्सली घटनाएं हुई. जिनमें जवानों को काफी नुकसान हुआ.     3 अप्रैल 2021 को सुकमा बीजापुर बॉर्डर पर टेकलगुड़ा में नक्सली घटना में 22 जवान शहीद     21 मार्च 2020 में सुकमा के मीनपा में नक्सली घटना में 17 जवान शहीद     अप्रैल 2017 में सुकमा जिले के बुर्कापाल में नक्सली घटना में 25 जवान शहीद लेकिन टीसीओसी के दौरान साल 2023 और साल 2024 में जवानों की कड़ी सुरक्षा के कारण नक्सली किसी भी बड़ी घटना को अंजाम नहीं दे सके, बल्कि इस दौरान नक्सल संगठन को बड़ा नुकसान पहुंचा है. साल 2024 में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन से नक्सलियों को बड़ा नुकसान हुआ है. 2024 में सुरक्षाबलों ने 217 माओवादियों को मार गिराया. 15 अप्रैल 2024 में जवानों ने कांकेर जिले के छोटे बेठिया में एक एनकाउंटर को अंजाम दिया. इस एनकाउंटर में 29 माओवादी मारे गए. 4 अक्टूबर 2024 को नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले के थुलथुली में एनकाउंटर में 38 माओवादियों को जवानों ने मार गिराया. साल 2023 में नक्सलियों को नुकसान: टीसीओसी के दौरान साल 2023 में 22 मुठभेड़ हुए जिसमें जवानों ने चार हार्डकोर नक्सलियों को मार गिराया. इस साल 150 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, 78 नक्सलियों ने सरेंडर किया.

सभी की हुई शिनाख्त, छत्तीसगढ़-बीजापुर में मुठभेड़ में मारे गए 16 लाख के इनामी नक्सली

बीजापुर। बीजापुर में बीते दिनों गंगालुर थाना क्षेत्र के तोड़का व कोरचोली के जंगल में हुई मुठभेड़ में मारे  गये आठ नक्सलियों की शिनाख्त हो गई है। मारे सभी नक्सलियों पर 16 लाख रुपये का ईनाम घोषित है। मारे गए नक्सली पश्चिम बस्तर डिवीजन के गंगालुर एरिया कमेटी एसीएम समेत मिलिशिया कंपनी के सदस्य शामिल है। पुलिस ने बताया कि तोड़का कोरचोली मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की पहचान कर ली गई है। मुठभेड़ में मारे गए 8 नक्सलियों में 5 लाख के इनामी गंगालुर एरिया कमेटी एसीएम कमलेश नीलकंठ उम्र 24, 3 लाख के इनामी गंगालुर एलओएस सदस्य ताती कमलू पिता सोमा उम्र 30, 3 लाख के इनामी गंगालुर एलओएस सदस्य मंगल ताती पिता सुक्कू ताती उम्र 35, 1 लाख के इनामी मिलिशिया कमाण्डर लच्छू पोटाम पिता बुड़ता उम्र 40, 1 लाख के इनामी आरपीसी उपाध्यक्ष शंकर ताती पिता सुक्कू ताती उम्र 26, 1 लाख के ईनामी सावनार आरपीसी उपाध्यक्ष राजू ताती पिता सुक्कू ताती, 1 लाख के ईनामी मिलीशिया कंपनी सदस्य विज्जु पदम पिता मुन्ना पदम उम्र 22 व 1 लाख के इनामी जनताना सरकार कमाण्डर सावनार आरपीसी सन्नू ताती पिता स्व. मासा उम्र 40 शामिल है। पुलिस के मुताबिक मुठभेड़ के बाद घटना स्थल से 1 इंसास रायफल 3 मैगजीन, 2 नग 12 बोर रायफल व सेल, 1 नग बीजीएल लांचर, 10 नग सेल व पोच, 4 नग मुजल लोडिंग रायफल, स्क्रेनर सेट व भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री माओवादी साहित्य व दैनिक उपयोगी सामान बरामद की गई है।

छत्तीसगढ़ सरकार 2026 तक नक्सलियों के सफाये के लक्ष्य पर खरी उतरती नजर आ रही, अब तक 237 नक्सलियों को ढेर किया

जगदलपुर  छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में 2024 में अब तक 237 नक्सली ढेर किए जा चुके है। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि इस वर्ष मिली अभूतपूर्व सफलता के बाद जवानों का हौंसला बढ़ा हुआ है। बस्तर में नक्सलियों के लिए कोई रास्ता नहीं बच गया है। नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें क्योंकि आने वाले दिनों में अभियान और भी तेज किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष बस्तर में अब तक 237 नक्सलियों को ढेर किया जा चुका है जिनमें से 217 के शव पुलिस को मिले हैं। अन्य 20 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि नक्सली स्वयं कर चुके हैं। इस अवधि में 925 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है तो 792 नक्सली अपने हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौट आए हैं। इन मुठभेड़ में पुलिस को नक्सलियों के 284 हथियार पुलिस को मिले हैं जिसमें इंसास, एके-47 राइफल समेत कई बड़े हथियार हैं। इनमें से कई हथियार नक्सलियों ने पुलिस से लूटे थे। जानिए कितने नक्सली एक साल में ढेर इन मुठभेड़ में पुलिस को नक्सलियों के 284 हथियार पुलिस को मिले हैं, जिसमें इंसास, एके-47 राइफल समेत कई बड़े हथियार हैं। इनमें से कई हथियार नक्सलियों ने पुलिस से लूटे थे। इस वर्ष सुरक्षा बल ने सीधे नक्सलियों को निशाना बनाकर अभियान चलाया। बीते चार दशक में एक वर्ष के भीतर सर्वाधिक 124 बार पुलिस व नक्सलियों के बीच आमना-सामना हुआ। इन मुठभेड़ों में नौ करोड़ 24 लाख रुपये के इनामी शीर्ष नक्सलियों को ढेर किया गया है। इनमें 25 लाख रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली रणधीर, नीति, रुपेश उर्फ कोलू जोगन्ना शामिल थे। 28 नए कैंप सीधे नक्सलियों के गढ़ में प्रदेश में इस वर्ष 28 नवीन सुरक्षा कैंप सीधे नक्सलियों के गढ़ में खोले गए हैं। विगत माहभर में ही लगभग दस नए कैंप नक्सलियों के आधार क्षेत्र तेलंगाना राज्य सीमा से सटे दक्षिण व पश्चिम बस्तर क्षेत्र में खोले गए हैं। इसी तरह अबूझमाड़ में भी सुरक्षा कैंपों की दीवार खड़ी कर दी गई है। आईजीपी सुंदरराज पी. ने कहा कि इस वर्ष मिली सफलता के बाद जवानों का हौसला बढ़ा हुआ है। बस्तर में नक्सलियों के लिए कोई रास्ता नहीं बच गया है। नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। अबूझमाड़ में 130 नक्सली हुए ढेर अबूझमाड़ में पिछले एक साल यानि 2024 में सुरक्षाबलों और पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में 130 नक्सलियों को मार गिराने में सफलता मिली है, वहीं पूवर्ती गांव जो नक्सली कमांडर हिडमा का गांव था वहां भी पुलिस ने कैंप खोला है, अबूझमाड़ इलाके में कुल सात नए पुलिस कैंप खोले गए हैं, जहां पहले पगडंडियों के सहारे जाना मुश्किल होता था वहां पर अब चार पहिया गाड़ियां दौड़ती नजर आ रही है, नियद नेल्लानार योजना के तहत गांवों में विकास के कार्य कर दशकों से मूलभूत सुविधाओं से नक्सली दहशत के चलते महरूम रहने वाले ग्रामीणों के लिए सुविधाओं का विस्तार भी तेजी से होने लगा है. वहीं सरकार की सरेंडर नीति से प्रभावित होकर पिछले पांच साल में जितने नक्सलियों ने सरेंडर किया था, उतने नक्सली एक साल में सरेंडर कर समाज की मुख्यधारा में वापस लौट आए है. जो अबूझमाड़ में सफलता की कहानी कहता नजर आता है. अबूझमाड़ में बनी पक्की सड़कें 2024 की शुरुआत में अबूझमाड़ से नारायणपुर जिला मुख्यालय तक जाने के लिए सड़क मार्ग सोनपुर, कोहकामेटा और आंकाबेड़ा तक ही सीमित था, लेकिन 2024 में नक्सलियों के खिलाफ शुरु हुए अभियान के बाद यहां की स्थिति बदली है. नक्सलियों के खिलाफ प्रहार की रणनीति में बदलाव आने के साथ ही नक्सलियों के आधार इलाके में पुलिस बेस कैंप स्थापित करने के साथ ही सड़को का निर्माण कार्य भी तेजी से होने लगा. एक साल के अंदर अबूझमाड़ के घोर नक्सल प्रभावित घने जंगलों से घिरे कस्तूरमेटा, मोहंदी, इरकभट्टी, कच्चापाल, मसपूर, होरादी और गारपा तक पुलिस ने पहुंच कर पुलिस कैंप खोलने के साथ ही इन इलाकों तक सड़को का निर्माण कार्य नियद नेल्लानार योजना के तहत तेजी से कराया जहां चार दशकों से लोग नक्सलियों के दहशत के साए में जीवन जीने को मजबूर हुआ करते थे, वहां पुलिस ने उन्हें अपनी अभिव्यक्ति की आजादी दिलाई है. 2025 में 6 नए थाने बनाने की योजना 2025 के साल में नारायणपुर पुलिस अबूझमाड़ में 6 नए थाने का विस्तार करने वाली हैं, जिसमे गारपा और कस्तूरमेटा में पुलिस ने अपने कैंप स्थापित कर दिए है, जिन्हें थाने का दर्जा मिलेगा वहीं फारसबेडा, तोके, कुतुल और गोमागल में थाना खोलना है जो बताता है कि अब नारायणपुर पुलिस नक्सलियों के कोर इलाके में घुसने की 2025 में योजना बना चुकी है. आने वाला साल अबूझमाड़ में एक नया इतिहास फिर लिखता नजर आएगा. क्योंकि 2024 में अबूझमाड़ में नक्सलियों के खिलाफ बड़े आपरेशन करने की रणनीति में बदलाव करते हुए नारायणपुर पुलिस ने अबूझमाड़ से लगे कोंडागांव, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिले की पुलिस के साथ मिलकर नक्सलियों के आधार इलाके में आपरेशन लांच किया है. पुलिस की रणनीति में आए बदलाव का एक बड़ा असर नक्सलियों के कोर इलाके अबूझमाड़ में देखने को मिला. 2024  में नारायणपुर पुलिस अन्य जिलों के साथ मिलकर 130 नक्सलियों को अबूझमाड़ में मार गिराने में सफलता हासिल किया. 130 नक्सलियों को उन इलाको में जाकर पुलिस के जवानों ने मारा जहां कभी फोर्स नहीं पहुंच पाई थी और उन इलाकों को नक्सलियों ने अपना ठिकाना बना दिया लिया था, लेकिन अब यहां से नक्सलियों ने अपना ठिकाना बदला है. नक्सलियों के गढ़ से नाम से जाने जाने वाले अबूझमाड़ और वहां रहने वाले ग्रामीणों के लिए 2024 का साल बड़े बदलाव लेकर आया जहा लोगों को नक्सलियों के दहशत और भय के साए में जीवन जीने से आजादी मिली, वही इन इलाकों में नियद नेल्लानार योजना के तहत विकास के रास्ते के निर्माण की नई बयार लिखी गई, अब इन रास्तों से विकास से महरूम रहने वाले ग्रामीणों को दशकों बाद 2025 के नए साल में विकास की किरण की सौगात मिलेगी. यह जानकारी नारायणपुर जिले के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार की तरफ से मिली है.   

अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों को हर माह 10 हजार के साथ जमीन, मकान और रोजगार से जुड़े संसाधन भी दिए जाएंगे

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने नई एंटी नक्सल नीति में विस्तार किया है. बीजेपी की राज्य सरकार सरेंडर करने वाले नक्सलियों की सुविधाओं को बढ़ाने जा रही है. गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में नक्सल नीति को लेकर बात करते हुए बताया अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों को हर माह 10 हजार की राशि दी जाएगी. साथ ही रहने के लिए जमीन, मकान और रोजगार से जुड़े संसाधन भी दिए जाएंगे. सरकार का प्लान है कि घर जमीन के साथ ही नक्सलियों को खास ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिससे उन्हें रोजगार हासिल करने में आसानी हो. नई नीति के तहत नक्सलियों पर जो इनाम की राशि होती है वो भी नक्सलियों को दी जाएगी. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को रखने के लिए पांच जिलों में भवन बन रहे हैं. शर्मा ने बताया  नक्सलवाद को कम करने के लिए कई आयामों पर काम हो रहे हैं. आगे की जिंदगी जीने के लिए तमाम सुविधाएं दी जाएगी। फिर चाहे वह रहने के लिए जमीन-मकान हो या फिर रोजगार से जुड़े संसाधन। अलग खास भवनों में रखकर नक्सलियों को ट्रेंड किया जाएगा। उन्हें काम सिखाया जाएगा ताकि वह आगामी जीवन में रोजगार हासिल कर सकें। शर्मा बोले- मुझसे किसी ने कहा, नक्सली बनना अच्छा नई नीतियों को बेहतर बताते हुए विजय शर्मा  सुविधाएं गिनाते हुए बोले- ये फायदे सुनने के बाद मुझसे एक सीनियर पत्रकार ने कहा था कि ऐसे में तो नक्सली बनना ही अच्छा है। यह कहकर गृहमंत्री मुस्कुराए। मांझी तय करेंगे गांव में क्या बनेगा गृहमंत्री ने बताया कि, पंचायती राज के माध्यम से बस्तर के विकास का काम हम करने जा रहे हैं। गांवों के मांझियों (बस्तर के अंदरूनी इलाकों के जनप्रतिनिधि) की भागीदारी सुनिश्चित की जाने की मांग उठी थी, तो अब बस्तर के जिला पंचायत के सभागृह में मांझियों की बैठक होगी। जिलेवार ये बैठकें होंगी और मांझी बताएंगे कि उनको क्या-क्या निर्माण कार्य करवाने हैं। इन सभी आयामों को मिलाकर नया सॉल्यूशन समाज को देने की कोशिश है। नक्सल नीति से जुड़ी गृहमंत्री की कुछ बड़ी बातें-     हम अनेक आयामों में काम हो रहे हैं। हम ये भी कर रहे हैं कि सरेंडर बढ़े, लोग नक्सलवाद में न जाए।     अब बस्तर के पांच जिलों में ऐसे भवन तैयार हैं, जहां पर सरेंडर करने वाले नक्सलियों को रखा जाएगा।     इन भवनों में उनका स्किल डेवलपमेंट किया जाएगा। वहां उनके रहने खाने के लिए 3 साल की व्यवस्था होगी।     जो हथियार वह लेकर के आएंगे उस हथियार से जुड़ी जो राशि घोषित है वह भी उनको दी जाएगी।     उनको प्लॉट दिया जाएगा, उनको प्रधानमंत्री आवास दिया जाएगा।     ये पॉलिसी इस उद्देश्य के साथ तैयार हुई है कि लोग मुख्यधारा में आएं। सरकार एक भी गोली नहीं चलाना चाहती।     IED ब्लास्ट कर और बंदूक के दम पर गांव की उन्नति को रोक देना कब तक सहा जाएगा।     नक्सल घटनाओं से पीड़ित और प्रभावितों के लिए अलग योजना बनी है, केंद्र से भी और राज्य की भी।     बस्तर के युवाओं को लगातार रायपुर लाया जाएगा, उनके एजुकेशन और स्पोर्ट्स को लेकर कार्यक्रम चलाए जाएंगे। मार्च 2026 तक खत्म करना है नक्सलवाद हाल ही में छत्तीसगढ़ दौरे पर आए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। इसके बाद से ही प्रदेश में एनकाउंटर और नक्सलियों के खिलाफ दूसरे तरीकों की कार्रवाई बढ़ी है। प्रदेश सरकार का दावा है कि एक साल में 212 से अधिक नक्सली एनकाउंटर में मारे गए हैं। इतने एनकाउंटर पिछली सरकारों के 5-5 साल के कार्यकाल में भी नहीं हुए थे।

123 ग्रामीणों के मोबाइल भी लूटे, छत्तीसगढ़-बस्तर में नक्सलियों ने की ग्रामीण की हत्या

बस्तर. छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों पर कार्रवाई के बीच उनका भी उत्पात जारी है. वे ग्रामीणों को अपना निशाना बना रहे हैं. सुकमा जिले में शुक्रवार को एक ग्रामीण की हत्या कर दी. इतना ही नहीं नक्सली गांव के 123 ग्रामीणों का मोबाइल भी लूटकर ले गए हैं. नक्सली वारदात के बाद गांव में दहशत का माहौल है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज शनिवार से छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगे. वे बस्तर में रात भी बताएंगे. इससे पहले नक्सली बस्तर में  दहशत फैलाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है. बौखलाए नक्सली ग्रामीणों की हत्या कर रहे हैं. बीजापुर के बाद अब सुकमा जिले में भी नक्सलियों का तांडव देखने को मिल रहा है. यहां चिंतागुफा थाना क्षेत्र के कहर दुलेड़ गांव में नक्सलियों ने 31 साल के ग्रामीण मड़कम हड़मा की हत्या कर दी. वे उसे उसके घर से किडनैप करके ले गए थे. नक्सलियों ने इस पर मुखबिरी का शक जताया और उसकी हत्या करके सड़क पर शव फेंक दिया. इसके बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है. मोबाइल भी लूटे इतना ही नहीं नक्सलियों ने गांव के ग्रामीणों के मोबाइल भी छीन लिए.123 ग्रामीणों के मोबाइल को लूटकर अपने साथ ले गए. बताया जा रहा है कि नक्सलियों को इस बात का अंदेशा है कि ग्रामीण उनके मूवमेंट की जानकारी सुरक्षाबलों और पुलिस तक पहुंचा रहे हैं.क्षेत्र में ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि पूरे गांव के ग्रामीणों के मोबाइल नक्सलियों ने लूटे हैं. इस घटना के बाद सिर्फ दुलेड़ गांव ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में देखने को मिल रहा है.

फूलबगड़ी पुलिस व डीआरजी की संयुक्त टीम ने दो नक्सलियों को विस्फोटक समेत गिरफ्तार किया

सुकमा सुकमा| जिले के फूलबगड़ी पुलिस व डीआरजी की संयुक्त टीम ने दो नक्सलियों को विस्फोटक समेत गिरफ्तार किया है। नक्सलियों की निशानदेही पर जंगल से 5 किलो वजनी टिफिन बम, इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, जिलेटिन रॉड, बरामद की हैं। दोनों ने अपना नाम माड़वी मंगा और माड़वी भीमा बताया। दोनों को फुलबगड़ी थाने में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर न्यायालय में पेश किया। जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। नक्सलियों की मौजूदगी की खबर पर 7 दिसंबर को थाना फुलबगड़ी से जिला बल की पार्टी बड़सेट्टी व आस-पास क्षेत्र रवाना की थी। इस दौरान बड़ेसट्टी बुरदापारा, करकापारा के बीच नाले के पास के जंगल में 2 संदिग्ध व्यक्ति जवानों को देखकर भागने लगे, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा। दोनों जवानों को नुकसान पहुंचाने के लिए विस्फोटक को प्लांट करने की तैयारी में थे।  

बीजापुर में सुरक्षाबलों को मिली सफलता, दस हजार के इनामी समेत तीन नक्सली गिरफ्तार

बीजापुर  माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में बीजापुर जिले में संयुक्त सुरक्षा बल को बड़ी सफलता मिली है. मिरतुर व नेलसनार पुलिस ने अलग अलग कार्रवाई में तीन अलग अलग क्षेत्रों से 3 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है. विस्फोटक के साथ 1 नक्सली गिरफ्तार: अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीजापुर के अनुसार 1 दिसंबर 2024 को माओवादियों के खिलाफ नक्सल ऑपरेशन चलाया जा रहा था. इसी दौरान मिरतुर पुलिस व छत्तीसगढ़ 15 ई बटालियन चेरली पिनकोंड़ा में साप्ताहिक बाजार की सुरक्षा व्यवस्था से लौट रही थीं. तभी पाटलीगुड़ा पुलिया के पास 5 किलोग्राम विस्फोटक के साथ 24 वर्षीय सुरेश कारम को गिरफ्तार किया गया. उसके साथ एक अन्य नक्सली भी गिरफ्तार किया गया.  अभियान से वापसी के दौरान पाटलीगुडा पुलिया के पास दो संदिग्ध व्यक्ति पुलिस पार्टी को देखकर भागने का प्रयास कर रहे थे। जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा गया। इनमें जन मिलिशिया सदस्य सुरेश कारम पिता स्व. कोसा कारम उम्र 24 निवासी हुर्रेपाल व जन मिलिशिया सदस्य राजेश माड़वी पिता स्व. मंगू माड़वी उम्र 23 निवासी हुर्रेपाल शामिल है। इनके पास रखे थैला की चेकिंग करने पर 5 किलो का टिफिन बम, कॉर्डेक्स वायर बरामद किया गया है। वही थाना नेलसनार की टीम द्वारा बोदली मरी नदी के किनारे से जनताना सरकार सदस्य व सीएनएम कमाण्डर दशरथ हेमला पिता वेल्ला उर्फ मंगू उम्र 29 निवासी फुलादी कुंजामपारा थाना मिरतुर को पकड़ा गया। पकड़ा गया नक्सली 17 अप्रैल 2019 को नगर सैनिक राजूराम गोंदे की हत्या में शामिल था। जिसकी गिरफ्तार के लिए पुलिस अधीक्षक बीजापुर ने 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। पकड़े गए नक्सलियों के विरुद्ध मिरतुर व नेलसनार थाना में वैधानिक कार्यवाही कर न्यायिक रिमांड पर न्यायालय बीजापुर के समक्ष पेश किया  है। नगर सैनिक की हत्या में शामिल कमांडर गिरफ्तार: नक्सलियों के खिलाफ दूसरी कार्रवाई नेलनसार पुलिस ने किया. जवानों ने सीएनएम कमांडर दशरथ हेमला को गिरफ्तार किया. जो साल 2019 में नगर सैनिक राजू राम गोंदे की हत्या में शामिल था. दशरथ हेमला पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित था. पकड़े गए तीनों नक्सली सीएनएम सदस्य व जनताना सरकार से जुड़े माओवादी बताए जा रहे हैं. बीजापुर में मोबाइल टावर में नक्सलियों ने लगाई आग: रविवार देर रात नक्सलियों ने बीजापुर के मोरमेड गांव में लगाए गए निजी मोबाइल कंपनी के मोबाइल टावर में आग लगा दी. नक्सली सादी वेशभूषा में पहुंचे और टावर में लगे उपकरणों को जला दिया. हाल ही में दूरस्थ अंचल में कनेक्टिविटी बढ़ाने मोबाइल टावर लगाया गया था.

भैरमगढ़ एरिया कमेटी का मिला पर्चा, छत्तीसगढ़-बीजापुर में नक्सलियों ने ने मुखबिरी में युवक का घोंटा गला

बीजापुर. बीजापुर जिले में नक्सलियों ने शनिवार रात पुलिस मुखबिरी के आरोप में एक ग्रामीण युवक की गला घोंटकर निर्ममता पूर्वक हत्या कर दी। भैरमगढ़ एरिया कमेटी द्वारा जारी पर्चा छोड़ा गया है। इसमें ग्रामीण युवक पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाते हुए हत्या करने की बात लिखी हुई है। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के डालेर निवासी युवक कुममेश कुंजाम (25) की शनिवार रात नक्सलियों ने गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद नक्सलियों ने शव को चिहका टिन्डोडी जोडान मार्ग पर डाल दिया। घटनास्थल से भैरमगढ़ एरिया कमेटी द्वारा जारी पर्चा छोड़ा गया है। इसमें ग्रामीण युवक पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाते हुए हत्या करने की बात लिखी हुई है। भैरमगढ़ पुलिस शव को कब्जे में लेकर वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

मध्य प्रदेश में अब सिर्फ तीन नक्सली बचे, इन्हें पकड़ने के लिए सालाना 70 करोड़ रुपए खर्च

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अब सिर्फ 3 नक्सली बचे हैं. ये तीनों नक्सली बालाघाट और मंडला जिले में एक्टिव हैं और इनके खात्मे के लिए राज्य में 7500 से ज्यादा सुरक्षा बल तैनात है. पुलिस के मुताबिक ये तीनों बालाघाट और मंडला में एक्टिव हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने इन तीनों को पकड़ने और खत्म करने के लिए 7 हजार 500 से ज्यादा सुरक्षा बलों को तैनात किया है। हालांकि, ये अभी भी सुरक्षा बलों की पकड़ से दूर नजर आ रहे हैं। इन नक्सलियों को खत्म करने के लिए दो जिलों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 3 बटालियन समेत 7 हजार 500 से ज्यादा पुलिस बल तैनात हैं। बता दें कि इस मिशन में एक आईजी, एक डीआईजी और 6 एसपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र से सीआरपीएफ की दो और बटालियन मांगी हैं ताकि इन तीनों नक्सलियों को पकड़ा जा सके। 24 साल से गिरफ्तार नहीं     अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस पिछले 24 सालों में इन 3 नक्सलियों में से एक को भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है। आखिरी बार साल 2000 में एक नक्सली पकड़ा गया था, उसे भी 2004 में रिहा कर दिया गया था। अफसरों का कहना है कि इन नक्सलियों का ग्रामीण इलाकों में मजबूत नेटवर्क है। ये छापेमारी से पहले ही फरार हो जाते हैं। पुलिस का ये भी कहना है कि यहां छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से 60 नक्सलियों का मूवमेंट है, इसलिए भारी सुरक्षा बल तैनात हैं। केवल बालाघाट में 6 हजार जवान तैनात बता दें कि अकेले बालाघाट में 6 हजार पुलिस जवान तैनात हैं। जबकि मंडला में 1 हजार 500 पुलिस बल हैं। इन जवानों को तैनात करने की वजह यह बताई जा रही है कि बालाघाट में दूसरे राज्यों यानी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र से करीब 60 नक्सलियों का मूवमेंट रहता है। इनके साथ मुठभेड़ होती रहती है, जिसके चलते यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। किसकी कितनी टीमें तैनात     सीआरपीएफ – 3 बटालियन     एसएएफ – 1 बटालियन     हॉक फोर्स – 1 बटालियन     कोबरा – 1 कंपनी     स्टेट आईबी टीम 1     जिला पुलिस बल 2500 ये हैं तीन नक्सली जिन तीन नक्सलियों की तलाश पूरी पुलिस फोर्स कर रही है उनमें पहला नाम दीपक उर्फ ​​सुधाकर का है, जिसकी उम्र 50 साल है। उस पर 29 लाख का इनाम घोषित है। बताया जा रहा है कि वो बालाघाट के ग्राम पालागोंदी चौकी सोनावाली थाना रूपझर का रहने वाला है। दीपक पर बालाघाट में 125 मामले दर्ज हैं। दूसरी नक्सली जिसकी पुलिस तलाश कर रही है उसका नाम संगीता उर्फ ​​सेवंती पंद्रे है, जिसकी उम्र 38 साल है। इस पर 14 लाख का इनाम है। तीसरे का नाम राम सिंह उर्फ ​​संपत्ता है, जिसकी उम्र 60 साल है। पुलिस ने उस पर भी 14 लाख का इनाम रखा है। वो 1991 से सक्रिय है। उस पर करीब 60 मामले दर्ज हैं। राम सिंह उर्फ ​​संपत्ता को 2000 में गिरफ्तार किया गया था लेकिन 2004 में उसे छोड़ दिया गया था। तीन नक्सली को पकड़ने में 70 करोड़ रुपए खर्च मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन तीनों नक्सलियों को पकड़ने के लिए सालाना 70 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। यह खर्च नक्सल इलाकों में कैंप, हथियार, वाहन, पेट्रोलिंग, ट्रेनिंग, डीजल-पेट्रोल, बिजली-पानी आदि पर होता है। मुखबिरों का खर्च भी इसमें शामिल है। सीआरपीएफ की 3 बटालियन और दूसरे बलों के वेतन और भर्तियों पर होने वाला खर्च अलग है।

जवानों ने सफल अभियान का उत्सव हथियार हाथ में उठाकर जवान नाचते-गाते हुए मनाया

सुकमा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वर्ष 2026 तक छत्‍तीसगढ़ से नक्सलियों का सफाया करने का जो लक्ष्य तय किया था, पिछले 11 माह में डबल इंजन की सरकार ने नक्सलियों के विरुद्ध अभियान को गति देते हुए नक्सलियों की कमर तोड़ दी है। शुक्रवार को बस्तर संभाग के सुकमा जिले में भेज्जी थाना क्षेत्र के ग्राम कोराजुगुड़ा, दंतेसपुरम, नागाराम, भंडारपदर के जंगल-पहाड़ी में शुक्रवार को हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बल ने तीन महिला समेत दस नक्सलियों को ढेर कर दिया है। सभी के शव बरामद किए गए हैं। मुठभेड़ स्थल से एके-47, इंसास, सेल्फ लोडिंग राइफल (एसएलआर), एक सिंगल शाट व पांच भरमार व पिस्टल बरामद किए गए हैं। नक्सलियों का लैपटाप भी मिला है। सफल अभियान का नाच कर मनाया जश्‍न सफल अभियान के बाद नक्सलियों के शव व हथियार लेकर जवान कोताचेरु स्थित सीआरपीएफ कैंप पहुंचे। डीआईजी कमलोचन कश्यप ने जवानों का मुंह मीठा कर सफल अभियान की बधाई दी। जवानों ने सफल अभियान का उत्सव हथियार हाथ में उठाकर जवान नाचते-गाते हुए मनाया। इससे पहले कांकेर में मिली सफलता का उत्सव भी जवानों ने इसी तरह से मनाया था। कुछ वर्ष पहले जब बस्तर में नक्सली मजबूत स्थिति में थे, तो सुरक्षा बल पर हमले के बाद इसी तरह से सफलता का जश्न मनाते थे। झीरम कांड में भी नक्सलियों ने नेताओं व जवानों को मारने के बाद शवों पर नाचकर जश्न मनाया था। नक्सलियों के विरुद्ध यह सर्वाधिक सफल वर्ष राज्य गठन के बाद से नक्सलियों के विरुद्ध यह सर्वाधिक सफल वर्ष रहा है। सुकमा मुठभेड़ में मारे गए 10 नक्सलियों के साथ इस वर्ष 207 नक्सलियों के शव पुलिस को मिल चुके हैं, जबकि इससे अधिक नक्सलियों को मार गिराने का पुलिस का दावा है। इस अवधि में 787 नक्सलियों को गिरफ्तार, 789 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया व 262 हथियार पुलिस को मिले हैं। 21 लाख के इनामी छह नक्सली की पहचान पुलिस के अनुसार मारे गए नक्सलियों में छह की पहचान कर ली गई है। इनमें आठ लाख का इनामी मड़कम मासा दक्षिण बस्तर डिविजन एमआइ प्रभारी व प्लाटून नंबर चार व आठ का प्रभारी था। पांच लाख का इनामी डिविजनल स्माल एक्शन टीम कमांडर व एरिया कमेटी सदस्य लखमा माड़वी भी मारा गया। अन्य सभी पांच प्लाटून नंबर चार के सदस्य दो-दो लाख के इनामी हैं। इनमें मासा की पत्नी दूधी मासा, मड़कम जीतू, मड़कम कोसी, कोवासी केसा की पहचान कर ली गई है। चार अन्य की पहचान की जा रही है। मारे गए नक्सलियों के शव को कांधे पर लेकर जवान मुख्यालय पहुंच चुके हैं। सभी जवान सुरक्षित हैं। 50 किमी चलकर पहुंचे जवान पुलिस को भेज्जी थाना क्षेत्र में कई दिनों से नक्सलियों के उपस्थिति की सूचना मिली रही थी। नक्सली भंडारपदर की पहाड़ी पर बड़ी साजिश रचने के इरादे से एकत्र हो रहे थे। इस पर तीन दिन पहले एक अभियान लांच किया गया। डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की छह टीम को एलारमड़गू, पालोड़ी और पोटकपल्ली से डीआरजी व सीआरपीएफ की टीम को अभियान पर भेजा गया था जवान लगभग 50 किमी की दूरी तय कर मुठभेड़ स्थल तक पहुंचे थे। शुक्रवार की सुबह डीआरजी की टीम के साथ भंडारपदर में नक्सलियों से मुठभेड़ हुई। दस किमी की घेराबंदी के बाद नक्सलियों को आत्मसमर्पण की चेतावनी दी गई, पर नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई के बाद रुक-रुक कर लगभग चार घंटे तक मुठभेड़ चली। जवानों को भारी पड़ता देख नक्सली वहां से भाग खड़े हुए। जवानों के शौर्य के आगे साथियों के शव व हथियार को भी छोड़ना पड़ा।

सुकमा में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में10 नक्सली को किया ढेर, मुख्यमंत्री ने की सराहना

सुकमा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई की है। कोन्टा थाना क्षेत्र के भेज्जी इलाके में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच एक बड़ी मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में नक्सलियों को भारी नुकसान हुआ। साथ ही, कई हथियार भी बरामद किए गए हैं। फिलहाल, सुरक्षाबल इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुरक्षाबलों की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार नक्सलवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम बस्तर क्षेत्र में विकास, शांति और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।” खबरों के अनुसार, मुठभेड़ में 10नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। इस दौरान सुरक्षाबलों ने तीन ऑटोमैटिक राइफल्स समेत कई अन्य हथियार बरामद किए। मुठभेड़ सुबह के समय शुरू हुई, जब सुरक्षाबल ने नक्सलियों की घेराबंदी की। दोनों ओर से सैकड़ों राउंड गोलीबारी की गई। नक्सलियों के पास से अत्याधुनिक हथियार भी बरामद किए गए हैं। डीआरजी की टीम के साथ मुठभेड़ खबर के मुताबिक डीआरजी की टीम नक्सलियों की घेराबंदी के लिए निकली थी। सूचना मिली थी कि ओडिशा के रास्ते नक्सली छत्तीसगढ़ के जंगल में प्रवेश किए हैं। इसके बाद ही टीम घेराबंदी के लिए गई थी। डीआरजी जवानों के साथ सीआरपीएफ के जवान भी मुठभेड़ में शामिल। वहीं, बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने की मुठभेड़ की पुष्टि की है। मारे गए नक्सलियों की संख्या और हथियारों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि दोनों ओर से गोलीबारी हो रही है। सुकमा एसपी ने नक्सलियों के शव मिलने की पुष्टि कर दी है। कोराजुगुड़ा, दंतेसपुरम, नागाराम, भंडारपदर के जंगल-पहाड़ी में यह मुठभेड़ हुई है। यह मुठभेड़ उस समय हुई जब जवान इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने जवानों पर हमला कर दिया। जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की। दोनों ओर से काफी देर तक गोलीबारी हुई। DRGऔर CRPFकी टीम की संयुक्त कार्रवाई DRG(डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और CRPF(केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की टीम ने नक्सलियों की घेराबंदी के लिए संयुक्त कार्रवाई की। सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि ओडिशा से नक्सली छत्तीसगढ़ के जंगलों में घुस आए हैं। इसके बाद, सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन और घेराबंदी की योजना बनाई थी। IGऔर SPने मुठभेड़ की पुष्टि की बस्तर के IGपी सुंदरराज ने मुठभेड़ की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई। उन्होंने यह भी बताया कि मारे गए नक्सलियों की संख्या और बरामद हथियारों की आधिकारिक जानकारी जल्द जारी की जाएगी। सुकमा के SPने भी नक्सलियों के शव मिलने की पुष्टि की है। मुठभेड़ कोराजुगुड़ा, दंतेसपुरम, नागाराम और भंडारपदर के जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में हुई। सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने किया हमला यह मुठभेड़ उस समय हुई जब सुरक्षाबल इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर हमला कर दिया, जिससे दोनों ओर से लंबी गोलीबारी हुई। सुरक्षाबलों की यह कार्रवाई नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। सुकमा के SP किरण चव्हाण ने कहा है कि यह बड़ी सफलता है. जवान मौके पर ही हैं. लौटेंगे तो ज्यादा जानकारी मिलेगी. सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि भेज्जी के जंगल में नक्सलियों का जमावड़ा है. जवानों ने इस इलाके को घेर लिया और ऑपरेशन चलाया. सुरक्षाबलों को जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में नक्सली ओडिशा के रास्ते छत्तीसगढ़ में घुसे हैं.   पांच दिन पहले छत्तीसगढ़ के कांकेर में जवानों और नक्सलियों के बीच रविवार को मुठभेड़ हुई थी. इस दौरान पुलिस ने पांच नक्सलियों को ढेर कर दिया था. इनमें 2 महिलाएं शामिल थीं. इस साल 1 जनवरी से 22 नवंबर तक 207 नक्सली मारे गए हैं. इससे पूर्व 16 नवंबर को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर और कांकेर जिले की सीमा में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में पांच नक्सलियों को मार गिराया था.

नक्सलियों ने 24 घंटे में तस्वीर जारी कर ली जिम्मेदारी, ‘छत्तीसगढ़-सुकमा के बाजार में जवानों से हमने लूटे हथियार’

सुकमा. सुकमा जिले के जगरगुंडा में दो जवानों के ऊपर हमला करते हुए उनके पास से हथियार भी लूट कर ले गए। घटना के बाद घायल जवानों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। वहीं घटना के 24 घंटे के बाद नक्सलियों ने इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए लूटे हुए हथियार की फोटो के साथ ही प्रेस नोट जारी किया है। बताया जा रहा है कि बीते रविवार को सुकमा जिले के जगरगुंडा साप्ताहिक बाजार की ड्यूटी में तैनात जवानों पर नक्सलियों ने हमला करते हुए उनके पास रखे हथियार को लूट कर फरार हो गए, जवानों पर हुए अचानक से हमले के बाद बाजार में दहशत फैल गई। घटना के तत्काल बाद जहां घायलों को अस्पताल ले जाया गया। वहीं बाजार में शांति देखी गई। आसपास के लोगों का कहना था कि बाजार में ड्यूटी कर रहे दो जवानों पर नक्सलियों की स्माल एक्शन टीम ने हमला कर दिया। हमले में दो जवान घायल हुए, जिन्हें जगरगुंडा अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया। बाजार में घटना के बाद अफरा तफरी होते ही पुलिस ने इलाके को घेर लिया। घटना के 24 घंटे के बाद दक्षिण सब जोनल ब्यूरो के प्रवक्ता समता ने प्रेस नोट जारी किया। बता दें कि इस घटना को नक्सलियों की पीएलजीए के लड़ाकुओं ने आठ बजे अंजाम दिया। जिसके बाद हथियार को लूट कर ले गए। नक्सलियों ने लुटे हुए हथियार की फोटो भी जारी की है।

इलाके में दहशत, छत्तीसगढ़-बीजापुर में नक्सलियों ने मुखबिरी के शक में ली दो ग्रामीणों की जान

बीजापुर. नक्सलियों ने बीती रात एक बार फिर से पुलिस मुखबिरी के आरोप में एक ग्रामीण की निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी है। नक्सलियों ने शव के पास मद्देड़ एरिया कमेटी के नाम का एक पर्चा भी छोड़ा है। बीते शुक्रवार की रात गंगालुर के सावनार में भी नक्सलियों ने मुखबिरी के आरोप में दो युवकों की हत्या कर दी थी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जिले के भोपालपटनम थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बामनपुर के पोषणपल्ली गांव में बीती रात नक्सलियों ने ग्रामीण ताटी कन्हैया की मुखबिरी के आरोप में निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी है। नक्सलियों ने हत्याकर शव गांव में फेंक दिया है। शव के पास नक्सलियों ने मद्देड़ एरिया कमेटी के नाम का पर्चा छोड़ा है। भोपालपटनम थाना प्रभारी जीवन कुमार जांगड़े ने बताया कि घटना की खबर मिली है। लेकिन अभी तक किसी ने रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। उन्होंने कहा कि टीम रवाना हो रही हैं। बता दें कि शुक्रवार की रात गंगालुर थाना क्षेत्र के सावनार में नक्सलियों ने मुखबिरी के आरोप में जन अदालत लगाकर दो युवकों की हत्या कर दी थी।

सुरक्षा बलों का ध्यान भटकाकर हमला कर रहे नक्सली, छत्तीसगढ़ में पटाखे और अगरबत्तियों से धमाके

रायपुर/नई दिल्ली. दिवाली पर फोड़े जाने वाले पटाखे और पूजा के लिए जलाई जाने वाली अगरबत्तियां नक्सलियों का नया हथियार बन गई हैं। नक्सली दूरदराज के इलाकों में सुरक्षा बलों के कैंपों पर हमला करने के लिए इनका सहारा ले रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि नक्सलियों की ओर से 25 सितंबर को तेलंगाना के कोठागुडेम जिले में सीआरपीएफ के पुसुगुप्पा शिविर के आसपास राकेट हमला और गोलीबारी के लिए अगरबत्ती के जरिए पटाखे फोड़ कर सुरक्षा बल के जवानों का ध्यान भटकाने का अनोखा तरीका अपनाया गया था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 25 सितंबर की शाम को करीब साढ़े छह बजे जब अंधेरा छा रहा था तभी तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर कैंप में तैनात जवानों को धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। उन्होंने बेस सीमा से करीब 200 मीटर दूर धुआं निकलते देखा। घने जंगल वाले इलाके में जब CRPF जवानों ने उधर मोर्चा संभाला तो कुछ ही देर में दूसरी ओर छिपे नक्सलियों की ओर से गोलीबारी होने लगी। नक्सलियों ने रॉकेट या ग्रेनेड लांचर (बीजीएल) से हमला किया। जवानों ने इंसास और एके सीरीज की असॉल्ट राइफलों से जवाबी फायरिंग की, जबकि कुछ बम और ग्रेनेड भी दागे गए। करीब 45 मिनट तक आवाजें और फायरिंग जारी रही, जिसके बाद जवानों को पता चला कि नक्सली पीछे हट गए हैं। एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि कैंप की बाड़ को कुछ नुकसान पहुंचा क्योंकि उनके पास रॉकेट गिरे थे। हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ था। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जांच करने पर पता चला कि दिवाली के पटाखे रस्सियों के सहारे पेड़ों पर लटकाए गए थे और उनको जलाने के लिए अगरबत्तियों का इस्तेमाल किया गया था। इससे पहले भी कुछ घटनाएं हुई हैं, जिनमें जवानों का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह से पटाखे फोड़े गए थे। फिर शिविरों पर गोलीबारी की गई थी। रॉकेटों से भी हमला किया गया था। हालांकि तब इस हथकंडे के कोई सबूत नहीं मिले थे। तेलंगाना की घटना का जिक्र करने वाले अधिकारी ने बताया कि पिछले महीने पुसुगुप्पा सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले ने नक्सलियों की इस नई तरकीब की पोल खोली है। विशेषज्ञों के अनुसार, नक्सली अगरबत्तियों का इस्तेमाल टाइमर के रूप में कर रहे हैं। वे पटाखों के पास इन्हें जलाते हैं। जब तक पटाखों में धमाका होता है तब तक वे कैंपों के पास गोलीबारी के लिए पोजीशन ले चुके होते हैं। नक्सली अगरबत्तियों से पटाखे फोड़कर सुरक्षा बलों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं। वे सुरक्षा बल के जवानों को कैंपों से बाहर निकालना चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि नक्सली आमने-सामने की लड़ाई करने की स्थिति में अब नहीं हैं, इसलिए वे प्रॉक्सी हमले कर रहे हैं। जवानों पर हमले करने के लिए वह आईईडी का इस्तेमाल सहित इन तकनीकों का सहारा ले रहे हैं।

वायर देखकर जवानों को हुआ शक, छत्तीसगढ़-नारायणपुर में नक्सलियों ने सड़क के बीच में लगाया कुकर बम

नारायणपुर. नारायणपुर जिले के कस्तूरमेटा और मोहंदी के बीच नक्सलियों के द्वारा जवानों को नुकसान पहुंचाने के लिए सड़क के बीचोबीच कुकर बम लगाया गया था, लेकिन जवानों ने सड़क पर वायर देखा। इससे उन्हें शक हुआ, जिसके बाद जवानों ने सड़क खोदकर बम को बाहर निकाल कर उसे डिफ्यूज कर दिया। आला अधिकारियों ने बताया कि रोजाना की तरह आज सुबह भी जवानों की एक टुकड़ी सर्चिंग पर निकली थी, जहां नक्सलियों के द्वारा जवानों को नुकसान पहुंचाने के लिए कस्तूरमेटा और मोहंदी के बीच में पांच-पांच किलो के तीन कुकर बम को दबा कर रखे थे। अचानक से जवानों की नजर तार पर गई, जहां जवानों ने बीडीएस की टीम को बुलाया गया। टीम ने तीनों बम को बाहर निकालकर उसे नष्ट कर दिया। इसके पहले भी हुई वारदातें — 25 नवंबर 2019 : बारसूर-पल्ली मार्ग पर पुसपाल के आगे नक्सलियों ने आईईडी बिछा रखी है। सर्चिंग के दौरान जवानों को 3 फीट गहरे गड्ढे में प्रेशर कुकर में 3 किलो आईईडी दबी मिली। जिसे पत्थरों व पत्तों से दबाकर रखा गया था। 22 नवंबर 2019 : इसी इलाके में नक्सलियों की लगाई आईडी की चपेट में आकर सड़क निर्माण में लगे 2 मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 6 अगस्त 2019 : नक्सली सप्ताह के चौथे दिन पुसपाल सीआरपीएफ कैम्प से करीब 700 मीटर की दूरी विस्फोट हुआ। सीआरपीएफ के जवान रात करीब 11 बजे गश्त से लौट रहे थे। वहीं 3 किमी दूर बोदली की सड़क के किनारे गिट्टी का ढेर रखा हुआ था। इसी के नीचे दो बम को जोड़कर प्रेशर कूकर में नक्सलियों ने आईईडी दबाकर रखी थी। इसी गिट्टी पर जवान रोशन कुमार का पैर आते ही ब्लास्ट हो गया और उनकी मौत हो गई।

नक्सलियों की अब नहीं खैर 200 किमी के दायरे में इजराइली ड्रोन करेंगे जासूसी

जगदलपुर  बारिश के दौरान बस्तर में विजिबिलिटी कम हो जाती है और पहुंच विहीन क्षेत्र में पहुंचना मुश्किल होता है। इसलिए पुलिस के ऑपरेशन मानसून को ज्यादा आक्रामक और सफल बनाए रखने के लिए पुलिस माओवादियों की गतिविधि को यूएवी से नजर रखने की तैयारी कर रही हैं। जो नक्सल क्षेत्र के 200 किलोमीटर के दायरे में निगरानी रखेगा। साथ ही सेटेलाइट रडार से भी नजर रखने की योजना सुरक्षा बलों ने बना ली है। बता दें कि पिछले कुछ सालों से एनटीआरओ का बेस बस्तर में बनाए जाने के बाद बड़े ड्रोन से माओवादियों की गतिविधि भी कैद हो रहा है। बताया जा रहा है कि रडार का कनेक्शन सीधे सेंट्रल मॉनिटरिंग कंट्रोल रुम से होगा और नक्सल क्षेत्रों में लगे रडार अपनी तस्वीरों को सेन्ट्रल मॉनिटरिंग रूम को भेजेगा। जिसके बाद इनपुट के आधार पर नक्सल ऑपरेशन को चलाया जाएगा। इधर नक्सल क्षेत्र में यूएवी 15 हजार फीट की ऊंचाई से नजर बनाये रखेगा और बारिश में जंगल के भीतर माओवादियों के इमेज को कैप्चर भी करेगा। वहीं सुरक्षा बल अब हर तरीके से माओवादियों पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले भी जनवरी महीने से लगातार पुलिस को अत्याधुनिक संसाधनों की मदद से माओवादियों की एग्जैक्ट लोकेशन मिली जिससे ऑपरेशन सफल हुए हैं। बताया जाता है कि बस्तर में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए आसमान से नजर रखी जा रही है। रात के समय नक्सलियों के मूवमेंट और उनके ठिकानों को चिन्हाकिंत करने की क्षमता होने के कारण इसका उपयोग किया जा रहा है। नक्सल आपरेशन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सीधे टारगेट पाॅइंट को कवर करने में काफी मदद मिल रही है। नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने में योजना में कारगार साबित हो रहा है। बता दें कि पहले यह ड्रोन को दुर्ग-भिलाई के नंदनी स्थित सेंटर से उड़ान भरता था। इसके बाद में जगदलपुर शिफ्ट किया गया था। इसकी उपयोगिता को देखते हुए जम्मू और कश्मीर में पत्थरबाजी एवं आतंकवादियों से निपटने के लिए कश्मीर ले जाया गया था। 15000 फीट की ऊंचाई से निगहबानी रिमोट से उड़ान भरने वाला ईंधन चलित अत्याधिक ड्रोन एक बार में 8-10 घंटे तक उड़ान भर सकता है। वहीं करीब 1000-15000 फीट की उचांई से जंगल के अंदर की गतिविधियों को देख सकता है। इससे मिले इमेज और फ्रीक्वेंसी को कैप्चर करने के बाद नक्शे से संबंधित इलाके चिन्हाकिंत किए जा रहे हैं। सटीक जानकारी देने की क्षमता को देखते हुए राज्य के बार्डर और इसके आसपास के इलाकों को कवर किया जा रहा है। बताया जाता है कि उत्तर और दक्षिण बस्तर में नक्सलियों की गतिविधियों को देखते हुए इसका उपयोग किया जा रहा है।  

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