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पिछले साल का टूटा रिकॉर्ड, छत्तीसगढ़-धान खरीदी में 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस खरीफ सीजन में भी धान की रिकॉर्ड खरीदी हुई है। धान खरीदी के अंतिम दिन शाम 6:45 बजे तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 149 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है। राज्य के 25 लाख 49 हजार पंजीकृत किसानों ने अब तक धान बेचा है। धान खरीदी के एवज में किसानों को बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत 31 हजार 89 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। पिछले वर्ष 144.92 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मीलिंग के लिए तेजी के साथ धान का उठाव किया जा रहा है। अभी तक 121 लाख मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डीओ और टीओ जारी कर दिया गया है। जिसके विरूद्ध 100 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है। राज्य सरकार की ओर से इस खरीफ वर्ष के लिए 27.78 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। इसमें 1.59 लाख नए किसान शामिल है।

सदस्यों ने ज्ञापन सौंपकर की कार्रवाई की मांग, छत्तीसगढ़-रायगढ़ के धान खरीदी केंद्र पर कर्मचारी से मारपीट व गाली-गलौज

रायगढ़। रायगढ़ जिले में धान खरीदी केंद्र पहुंचकर रायगढ़ विधानसभा के पूर्व विधायक प्रकाश नायक के द्वारा धान खरीदी में तौलाई को लेकर वहां के फड़ प्रभारी के साथ गाली-गलौज व मारपीट करने का मामला सामने आया है। इस मामले में फड़ प्रभारी ने पुसौर थाना में शिकायत की है। इसके बाद रायगढ़ जिला सहकारी कर्मचारी संघ के सदस्यों के साथ एसपी कार्यालय पहुंचकर त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस अधीक्षक के नाम सौंपे गए ज्ञापन पत्र में कहा गया है कि धान उपार्जन केंद्र छिछोर उमरिया के फड़ प्रभारी शिशुपाल भोय को रायगढ़ के पूर्व विधायक प्रकाश नायक एवं सुखसागर गुप्ता, बजरंग गुप्ता, संहित पटेल, कैलाश गुप्ता, रेशम गुप्ता, उत्तम सिदार और अन्य उनके 10-12 सहयोगी साथियों के साथ मिलकर शासकीय कार्य कर रहे थे। कर्मचारी शिशुपाल भोय के साथ शराब के नशे में गाली-गलौज कर मारपीट की गई, जो कि निंदनीय अपराधिक कृत्य है। ज्ञापन में कहा गया है कि शासन की धान खरीदी का कार्य महत्वपूर्ण है और इस तरह हमारे कर्मचारियों के साथ मारपीट करना हतोत्साहित कर रहा है एवं भय का वातावरण निर्मित हो रहा है। इस भय के वातावरण में कार्य करने में परेशानी हो रही है। साथ ही साथ जिले के सभी कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त हो रहा है। पुलिस अधीक्षक के नाम सौंपे गए ज्ञापन में रायगढ़ जिला सहकारी कर्मचारी संघ के सदस्यों द्वारा मांग की गई है कि इस घटना में शामिल समस्त आरोपियों के विरूद्ध उचित कार्रवाई की जाए, जिससे समस्त कर्मचारी भय मुक्त होकर शासन का महत्वपूर्ण कार्य धान खरीदी कार्य सुचारू रूप से कर सके। पीड़ित को न्याय दिलाने की मांग रायगढ़ जिला सहकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामाधर गबेल ने बताया कि छिछोर उमारिया में मारपीट की जो घटना हुई है, वह बेहद दुखद घटना है। हमारे साथी कर्मचारी छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण कार्य धान खरीदी किसानों के साथ ताल-मेल जमाकर किया जा रहा है। उसमें कर्मचारियों के साथ जो मारपीट किया गया उससे रायगढ़ जिले के समस्त कर्मचारी संघ क्षुब्ध हैं। हमारी मांग है कि पीड़ित कर्मचारी के साथ न्याय हो। आरोप निराधार   इस संबंध में रायगढ़ के पूर्व विधायक प्रकाश नायक ने बताया कि कांग्रेस के पोल खोल योजना के तहत आज वह पुसौर ब्लॉक के ग्राम छिछोर उमरिया पहुंचे थे। यहां के किसानों ने शिकायत की थी कि यहां ज्यादा धान लिया जा रहा है। ऐसे में वे धान उर्पाजन केन्द्र का निरीक्षण करने यहां पहुंचे तब पाया गया कि यहां 40 किलो 700 ग्राम की जगह 42, 43, 44, 59 किलो तक धान मिला। उसके खिलाफ आवाज बुलंद किया। मारपीट का जो आरोप लगाया जा रहा है वह निराधार है। चूंकि मौके पर सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है, उसमें साफ देखा जा सकता है। मैंने जरूर ऊंची आवाज में बात की था।  मामले में कार्रवाई जारी इस मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश मरकाम ने बताया कि छिछोर उमरिया धान खरीदी केन्द्र के फड़ प्रभारी शिशुपाल के द्वारा पुसौर थाना में आवेदन दिया गया है। जिसमें उनके द्वारा कहा गया है कि पूर्व विधायक प्रकाश नायक और 8-10 साथियों ने गाली-गलौज व मारपीट किया है। इसके अलावा सेवा सहकारी कर्मचारी संघ द्वारा भी आवेदन दिया गया है। इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार, छत्तीसगढ़-दुर्ग के धान खरीदी केंद्र से 80 बोरियां चोरी

दुर्ग। दुर्ग धमधा थाना क्षेत्र में एक सेवा सहकारी समिति केंद्र से धान चोरी का मामला सामने आया है। चोर धान खरीदी केंद्र से 80 बोरियां धान की चोरी कर लिए गए। धान चोरी को शिकायत के बाद पुलिस ने धान खरीदी केंद्र से धान चोरी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है। धमधा थाना प्रभारी युवराज साहू ने बताया कि ग्राम घोठा धान खरीदी केंद्र के सहायक प्रबंधक राजू पटेल ने थाना पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को बताया कि धान खरीदी केन्द्र ग्राम हिरेतरा में 14 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ हुआ है। जहां किसानों का धान खरीदी कर धान के बोरों को रखा गया था। 13 दिसंबर को धान बोरों का मिलान करने के बाद मंडी के चौकीदारों को बताकर वह ऑफिस काम से दूसरी सोसायटी ग्राम घोठा धान खरीदी केंद्र चला गया था। इसके बाद फिर 16 दिसंबर को निरीक्षण करने में धान बोरा की दो-तीन लाइन कम दिखाई दीं। इस पर गिनती कर मिलान किया तो पता चला कि करीब 80 बोरा धान गायब था। जिसका मंडी परिसर के आसपास तलाश की गई। लेकिन नहीं मिलने पर इसकी शिकायत पुलिस ने की गई। पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों की तलाश में जुट गई थी। धान खरीदी केंद्र से 80 बोरा धान की कीमत 73 हजार 600 बताई है। पुलिस से घटना में इस्तेमाल मोटर साइकिल और चोरी के धान बरामद की है। आरोपी धान खरीदी पहुंचकर मोटर साइकिल में धान लोड कर चोरी की वारदात को अंजाम देते थे इस गिरोह के द्वारा धमधा के आसपास अन्य धान खरीदी केंद्र से धान के बोरा चोरी कर देवकर के एक व्यापारी को बेचते थे। इस गिरोह के सदस्य हिरेतरा धान खरीदी केंद्र में चोरी करने पहुंचे थे। धान चोरी करने ग्रामीणों ने करण पारधी और रघु पारधी को पकड़ लिया। और अन्य उनके साथी फरार हो गए ग्रामीणों ने पकड़े आरोपियों की जमकर पिटाई की। जिसके बाद पुलिस को इसकी सूचना दी गई। पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि अपने साथी प्रकाश पारधी, चंदन पारधी, गोविंद पारधी और नंदू पारधी को साथ मिलकर धान खरीदी केंद्रों से धान चोरी की वारदात को अंजाम देते थे पुलिस उनके साथी को तलाश में जुटी है।

बीजेपी ने भ्रम फैलाने के लगाए आरोप, छत्तीसगढ़-धान खरीदी केंद्रों में घूम रहे कांग्रेसी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में धान खरीदी पर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। पक्ष और विपक्ष दोनों एक दूसरे पर जमकर आरोप लगा रहे हैं। एक दूसरे को घेरने में लगे हैं। कांग्रेस के प्रदेशव्यापी विरोध के ऐलान के बाद अब बीजेपी ने पलटवार किया है। उसका कहना है कि कांग्रेसी सिर्फ भ्रम फैलाने के लिए धान खरीदी केंद्रों में घूम रहे हैं। कांग्रेस के तीन-तीन पूर्व मंत्री टोकन नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं। यह कांग्रेस का एक और नया झूठ है। हम यह आंकड़ा पेश कर सकते हैं कि धान खरीदी से कितने कांग्रेसी नेता और पूर्व मंत्री लाभान्वित हुए हैं। किन-किन कांग्रेस नेताओं ने कितना-कितना धान बेचा है और उसका कितना भुगतान उनके खातों में जमा हुआ है? भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष शिवरत शर्मा ने शनिवार को एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में प्रेस ब्रीफ में आरोप लगाते हुए कहा कि ये बेहद आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस सरकार के अनेक पूर्व मंत्री तक यह स्वीकार कर रहे हैं कि पहले कुछ दिक्कत थी अब दिक्कत नहीं है। तब कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों की टोकन नहीं मिलने की बात हास्यास्पद और सफेद झूठ साबित हो रही है। इसी प्रकार कांग्रेस सरकार के पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी स्वीकार किया है कि पहले सोसाइटी में धान खरीदने के लिए बारदाने के लिए परेशानियां होती थी, लेकिन अब बारदाने सोसाइटियों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। चूंकि अभी त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव सामने हैं, तो अपने वजूद की तलाश के लिए कांग्रेस नेता आंदोलन कर रहे हैं। ‘समीक्षा करके कोई सबक नहीं ले रही  कांग्रेस’ शर्मा ने ने कहा कि कांग्रेस की हुई समीक्षा बैठक के मद्देनजर कहा है कि कांग्रेस समीक्षा करके कोई सबक नहीं लेती, इसीलिए लगातार उसकी दुर्गति हो रही है। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में हार के बाद हार की समीक्षा के लिए कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री वीरप्पा मोइली के नेतृत्व में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई थी। लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। मोइली कमेटी छत्तीसगढ़ पहुंची तब कार्यकर्ताओं ने बड़े नेताओं की जिद और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की बात की थी। आज उस कमेटी की रिपोर्ट कहां है और उस पर क्या कार्रवाई हुई? अब रायपुर दक्षिण के चुनाव में कांग्रेस की बड़ी हार के लिए भी क्या कांग्रेस कोई कमेटी बनाएगी? कांग्रेस के लोग बंटे हैं, बिखरे हैं और नाराज हैं। और यह बात स्वयं कांग्रेस नेता पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने भी कही है कि भाजपा एक कैडर आधारित पार्टी है और जिस प्रकार से वह कार्य करती है, उस तक पहुंचने में हमें 25 साल लगेंगे। इस दौरान प्रदेश मीडिया सह प्रभारी अनुराग अग्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता नलिनीश ठोकने, सुनील चौधरी मौजूद रहे।

‘धान भीगा तो केंद्र प्रभारी होगा जिम्मेदार’, छत्तीसगढ़-बलौदा बाजार कलेक्टर की दो टूक

बलौदा बाजार. मौसम में नमी एवं संभावित बारिश को देखते हुए कलेक्टर दीपक सोनी ने पत्र जारी कर सभी धान खरीदी केंद्र के प्रभारी को धान को बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं. इसके तहत सभी केंद्रों में कवर कैंप रखने कहा गया है. उन्होंने दो टूक कहा है कि बारिश से धान भीगा तो सीधा कार्रवाई खरीदी केंद्र प्रभारी पर होगा। इसके लिए जिम्मेदार स्वयं होगा। कलेक्टर ने कहा है कि किसान सुबह सुबह धान बेचने आते है तो उनके लिए अलाव जलाने की व्यवस्था भी करनी चाहिए। अभी एकाएक तापमान में गिरावट दर्ज की गयी है जिससे जिले में ठंड बढ़ गयी है। इसके साथ ही सभी एसडीएम,नायब तहसीलदार, तहसीलदार,जनपद सीईओ,सहकारिता, बैंक,खाद्य विभाग के अधिकारियों को फील्ड में जाकर निरीक्षण कर कार्यालय को प्रतिवेदन जमा करने के निर्देश दिए हैं।

मध्य प्रदेश में आज से धान खरीदी शुरू, किसानों को मिलेगा उपज का इतना दाम

भोपाल मध्य प्रदेश में खरीफ विपणन मौसम 2024-25 के लिए धान की खरीदी 2 दिसंबर से शुरू हो जाएगी. धान कॉमन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 और धान ग्रेड-ए का 2320 रुपये प्रति क्विंटल है. किसानों की एफएक्यू गुणवत्ता की उपज इन्हीं दरों पर खरीदी की जाएगी. धान की खरीदी 3  दिसंबर से 20 जनवरी 2025 तक किया जाएगा. उपार्जन सोमवार से शुक्रवार तक होगा. 45 लाख मीट्रिक टन होगी धान की खरीदी केन्द्र सरकार की ओर से निर्धारित मात्रा के अनुसार, समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 45 लाख मीट्रिक टन की जाएगी. गोदाम स्तर पर खाद्यान्न की गुणवत्ता का परीक्षण उपार्जन एजेंसी के गुणवत्ता सर्वेयर द्वारा स्टेक लगाने के पहले किया जाएगा. वहीं परिवहनकर्ता की ओर से उपार्जित खाद्यान्न का परिवहन समय-सीमा में नहीं करने पर पेनाल्टी की व्यवस्था साप्ताहिक रूप से की जाएगी. कब तक होगी धान की खरीदी मध्य प्रदेश सरकार धान की खरीदी 2 दिसंबर से 20 जनवरी 2025 तक करेगी. वहीं किसान सोमवार से शुक्रवार तक केंद्र में धान बेच सकते हैं. अवैध बिक्री रोकने के लिए कलेक्टर को दिए गए निर्देश समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के बाद भुगतान कृषक पंजीयन के दौरान आधार नम्बर से लिंक बैंक खाते में किया जाएगा. धान उपार्जन अवधि के दौरान पड़ोसी राज्यों से उपार्जन केन्द्र पर लायी जाने वाली उपज की अवैध बिक्री को रोकने के लिए सभी जिले के कलेक्टर को निर्देश दिए गए हैं. ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था बनाई गई खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सामान्य किस्म की धान 2,300 और ग्रेड ए धान का समर्थन मूल्य 2,320 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदी जाएगी। गुणवत्तायुक्त उपज का ही उपार्जन हो, इसके लिए ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था बनाई गई है। उपज में कचरा मिला तो उसे लौटा देंगे राज्य और जिला स्तर पर उपार्जन पोर्टल पर दर्ज होने वाली उपज संबंधी जानकारी के आधार पर आकलन किया जाएगा। यदि उपज में कचरा, टूटन या नमी अधिक होती है तो उसे लौटा दिया जाएगा। जब किसान उपज ठीक कराकर निर्धारित मापदंड के अनुसार लाएगा, तब ही उसे स्वीकार किया जाएगा। दरअसल, धान किसान से लेने के बाद उसे चावल बनाने के लिए मिलर्स को दी जाती है। उस समय कई बार नमी, कचरा और टूटन अधिक होने की शिकायत सामने आती है। ऐसी उपज मिलर्स नहीं लेते हैं क्योंकि प्रति क्विंटल धान से 67 किलोग्राम चावल लिया जाता है। जब यह मात्रा नहीं मिलती है तो मिलर्स को नुकसान होता है। यही कारण है कि इस बार गुणवत्तायुक्त उपज की खरीदी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी उपार्जन केंद्रों पर नमी की जांच करने के लिए नमी मापक यंत्र (मायश्चर मीटर) रखे जाएंगे। मिलिंग भी समय पर होगी नमी जांचने के बाद धान लेकर सीधे उपार्जन केंद्र से ही मिलिंग के लिए मिर्लस को दी जाएगी। इससे परिवहन और भंडारण व्यय में कमी आने के साथ मिलिंग भी समय पर होगी। भारतीय खाद्य निगम ने मिलिंग के लिए अंतिम सीमा जून रखी है। मंत्री, प्रमुख सचिव और आयुक्त करेंगे औचक निरीक्षण उपार्जन के दौरन या उसके बाद होने उपार्जन में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी और आयुक्त सिबि चक्रवर्ती औचक निरीक्षण करेंगे। किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उड़नदस्ते भी जिला स्तर पर गठित होंगे, जो उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करेंगे। किसानों को समाधान के लिए किए गए ये व्यवस्था पंजीयन और उपार्जन में आने वाली तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए जिले में और राज्य स्तर पर भी तकनीकी सेल का गठन किया गया है. जिला स्तरीय समिति उपार्जन संबंधी सभी विवादों का अंतिम निराकरण और उपार्जित खाद्यान्न की गुणवत्ता की निगरानी करेगी. इसके अलावा राज्य स्तर पर एक कंट्रोल-रूम भी स्थापित किया गया है. अगर आप किसी भी जानकारी के लिए कंट्रोल रूम में संपर्क करना चाहते हैं इस नंबर 0755-2551471 पर कॉल कर हैं. ये उपार्जन अवधि में सुबह 9 से रात 7 बजे तक संचालित रहेगा.

किसानों को 1575.16 करोड़ रुपये का भुगतान, छत्तीसगढ़ में अब तक 8.95 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का सिलसिला अनवरत जारी है। 14 नवंबर से शुरू हुए धान खरीदी अभियान में अब तक 8.95 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी हो चुकी है। राज्य में अब तक 1.91 लाख किसानों ने अपना धान बेचा है। धान खरीदी के एवज में किसानों को बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत 1575 करोड़ 16 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। धान खरीदी का यह अभियान 31 जनवरी 2025 तक चलेगी। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस खरीफ वर्ष के लिए 27.68 लाख किसानों द्वारा पंजीयन कराया गया है। इसमें 1.45 लाख नए किसान शामिल है। इस वर्ष 2739 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी अनुमानित है। अधिकारियों ने बताया कि 25 नवंबर को 47296 किसानों से 2.17 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी हुई है। इसके लिए 51170 टोकन जारी किए गए थे। आगामी दिवस के लिए 53439 टोकन जारी किए गए हैं।

कई वर्षों से मंडी में हितग्राही बेच रहा अनाज, छत्तीसगढ़-सूरजपुर के गांव की सड़क पर उगती है धान

सूरजपुर. सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत करसी पंचायत करसी का बताया जा रहा है। जहां सड़क की पूरी जमीन का फर्जी तरीके से वन अधिकार पट्टा बनाकर हितग्राही के द्वारा हर साल बिना खेती के ही मंडी में धान बेचा जा रहा है। अब वन अधिकार पट्टा जारी का मामला उजागर होने के पश्चात फर्जीवाड़े में सम्मिलित लोगों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग उठने लगी है। ग्राम करसी के खसरा नंबर 791/ 2 का मामला है। जहाँ उक्त भूमि सड़क की बताई जा रही है। लेकिन इसमें हर साल धान उगता है। मामला प्रतापपुर तहसील के धान खरीदी के नाम पर विचौलियों को सक्रियता और फर्जीवाड़े की बातें हमेशा कार्यवाही हो या न हो, लेकिन अब जो मामला प्रतापपुर तहसील के करसी से सामने आ रहा है। वह अजीब है। यहां एक ऐसी सड़क है जो धान पैदा करती है। लेकिन वास्तविकता में नहीं बल्कि कागजों में  इस सड़क का वन अधिकार पट्टना बन गया है। हर साल धान टुकूडांड समिति में बिक भी रहा है। हर साल लाखों का सरकार को चुना इसके बाद से लगातार वे टुकुडांड समिति में धान बेच रहे हैं और हर साल लाखों का चुना सरकार को लगा रहे हैं। चूंकि यह जमीन सड़क है इसलिए इसमें खेती नहीं होती है और धान कागजों में पैदा होता है और कागजों में ही बिक जाता है। सड़क धान उगाता है और इसका फर्जी मालिक धड़ल्ले से धान बेच हर साल लाखों कमा रहा है जो राशि उसे धान की कीमत और बोनस के रूप में मिल रही है। बरहाल यह गंभीर मामला है, जांच का विषय है कि सड़क की जमीन उसके नाम से कैसे हो गई। बन अधिकार पट्टा कैसे बन गया और इस जमीन के नाम से वह धान कैसे बेच रहा है। मामले जांच के साथ दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग हो रही है। गिरदावरी में भी धान की खेती छत्तीसगढ़ में धान की खरीदी से पहले गिरदावरी का नियम बनाया गया है जिसमें संबंधित पटवारी जमीन बार इस चात का सत्यापन करते हैं कि उक्त जमीन में धान की खेती हुई है या नहीं। मिली जानकारी के अनुसार खसरा नंबर 791/2 जो रिकॉर्ड में सड़क है को भी गिरदावरी में खरीफ फसल बता दिया गया। इससे यह साफ हो रहा है कि और भी जमीनें होंगी जहां के नाम से फर्जी तरीके से धान बेचा गया होगा और जांच के बाद ही सामने आ सकता है। कलेक्टर से शिकायत, वृहद जांच की मांग मिली जानकारी के अनुसार मामले को लेकर कलेक्टर सूरजपुर से शिकायत की गई है, शिकायत में टुकुडांड समिति में अब तक वर्षवार बिके धान से संबंधित जमीनों का भौतिक सत्यापन करने, जमीन किस मद में दर्ज है. धान किसने बेचा और पैसे किसके खाते में आए वन अधिकार पट्टा वाली जमीनें कितनी हैं जिनमें धान बिका, पट्टा सही है फर्जी सहित अन्य बिंदुओं पर जांच की मांग की गई है। शिकायत में इस समिति से खाद वितरण की जांच भी करने की मांग की गई है जिससे यह पता चल सके कि खाद सही किसानों ने लिया है या फर्जी। फर्जीवाड़े का ऐसे खुला राज भू अधिकार अभिलेख में सड़क मद में दर्ज इस जमीन का मूल खसरा नंबर 791 है. सड़क बड़कापारा से ग्राम पंचायत के बॉर्डर तक है और इसी सड़क के आधे हिस्से में धान पैदा हो रहा है, इसका वन अधिकार पट्टा बन गया है ।स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह बात तब सामने आई जब पंचायत इसमें सीसी सड़क बनाना चाहता था और स्वीकृति के लिए जरूरी नक्शा खसरा लेने राजस्व विभाग गए। बताया जा रहा है कि यह मामला पूरे गांव में सामने आ गया है और दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग हो रही है।

धान, ज्वार और बाजरा उपार्जन के लिए 6 जिलों में किसान पंजीयन 21 अक्टूबर तक

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि किसानों की मांग पर 6 जिलों में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार और बाजरा के उपार्जन के लिए किसान पंजीयन की अवधि 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। किसान पंजीयन की अवधि नर्मदापुरम, रीवा, सतना, सिंगरौली, दमोह और बैतूल जिले के लिए बढ़ाई गई है। गौरतलब है कि पूरे प्रदेश में 7 लाख 66 हजार से अधिक किसान पंजीयन कर चुके हैं। मोटे अनाज का उपार्जन 22 नवंबर और धान का उपार्जन 2 दिसंबर से किया जाएगा।  

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