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RBI इस महीने जारी करेगा 50 रुपये का नया नोट, क्या है नए नोट की खासियत?

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 50 रुपए के नए नोट को लेकर एक अहम घोषणा की है, जिससे इस नोट को लेकर जनता में हलचल मच गई है। नए 50 रुपए के नोट में गवर्नर संजय मल्होत्रा के हस्ताक्षर होंगे, और इसे जल्द ही सर्कुलेशन में लाया जाएगा। RBI ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे पहले जारी किए गए सभी 50 रुपए के नोट वैध बने रहेंगे, यानी पुराना नोट चलन से बाहर नहीं होगा। साथ ही, यह नया नोट महात्मा गांधी (NEW) सीरीज के डिज़ाइन के अनुरूप होगा, जो पहले से जारी किए गए 50 रुपए के नोटों जैसा ही होगा। नए नोट का आकार और डिज़ाइन भी पहले जैसे होंगे, जिसमें फ्लोरोसेंट नीला रंग और हम्पी के रथ का चित्र शामिल होगा, जो भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है। क्या है नए नोट की खासियत?- इस नोट के पीछे हम्पी के रथ का चित्र है, जो भारतीय संस्कृति की समृद्धि और इतिहास को प्रदर्शित करता है। महात्मा गांधी (नई) सीरीज में जारी होने वाले इस नोट में कुछ नई सुरक्षा विशेषताएं भी होंगी, जो इसे और अधिक सुरक्षित बनाएंगी। पुराने नोट भी रहेंगे वैध- RBI ने यह भी कहा कि पुराने 50 रुपए के नोट जो पहले जारी किए गए थे, वे वैध मुद्रा बने रहेंगे और उनका कोई भी असर नए नोट पर नहीं पड़ेगा। 2000 रुपये के नोट की वापसी का अपडेट- वहीं, 2000 रुपए के नोटों को लेकर भी हाल ही में एक महत्वपूर्ण अपडेट आया है। रिजर्व बैंक ने बताया कि 31 जनवरी 2025 तक 98.15% 2000 रुपए के नोट वापस बैंकिंग सिस्टम में लौट चुके हैं, और अब भी कुछ पुराने नोट लोगों के पास हैं। नए नोट के जारी होने से पहले, यह एक अहम वक्त है जब जनता को पुराने और नए नोटों के बीच अंतर समझने और उनका इस्तेमाल सही तरीके से करने की आवश्यकता है।

RBI को मिल गया चौथा डिप्टी गवर्नर, इकोनॉमिस्ट पूनम गुप्ता को किया नियुक्त, तीन साल का रहेगा कार्यकाल

नई दिल्ली सरकार ने प्रतिष्ठित शोध संस्थान नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लॉयड इकनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की महानिदेशक पूनम गुप्ता को तीन साल के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का डिप्टी गवर्नर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। माइकल देबव्रत पात्रा के जनवरी में पद छोड़ने के बाद आरबीआई में डिप्टी गवर्नर का पद खाली हो गया था। सूत्रों ने कहा कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने गुप्ता की आरबीआई में डिप्टी गवर्नर पद पर नियुक्ति को उनके कार्यभार संभालने की तारीख से तीन साल के लिए मंजूरी दी है। वर्तमान में, गुप्ता एनसीएईआर की महानिदेशक हैं। वह प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य और 16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद की संयोजक भी हैं। वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक में लगभग दो दशक तक वरिष्ठ पदों पर काम करने के बाद वह 2021 में एनसीएईआर में शामिल हुईं। गुप्ता ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स, यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड (अमेरिका) में पढ़ाया और आईएसआई (भारतीय सांख्यिकी संस्थान), दिल्ली में ‘विजिटिंग फैकल्टी’ के रूप में काम किया। वह राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) में आरबीआई चेयर प्रोफेसर और आईसीआरआईईआर में प्रोफेसर भी रही हैं। गुप्ता के पास अमेरिका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नात्कोत्तर डिग्री और पीएचडी तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र पर पीएचडी के लिए 1998 में एक्जिम बैंक पुरस्कार जीता था।

डॉलर के मुकाबले रुपया 17 पैसे मजबूत, आयात पर निर्भर इंडस्ट्री को फायदा होगा

मुंबई भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 86 रुपये से ऊपर पहुंच गया है. यह उसका पिछले दो साल में किसी भी एक सप्ताह का सबसे अच्छा प्रदर्शन है. तेल की कीमतों में स्थिरता, डॉलर इंडेक्स में गिरावट, और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा बाजार में किए गए हस्तक्षेप जैसे कारकों ने रुपये को मजबूती दी है. इस सप्ताह रुपये ने 1.2 फीसदी की बढ़त दर्ज की, जो जनवरी 2023 के बाद से सबसे अधिक है. विशेषज्ञों का कहना है कि RBI द्वारा डॉलर की तरलता (लिक्विडिटटी) बढ़ाने और नियमित हस्तक्षेप के कारण रुपया लगातार मजबूत हो रहा है. इसके अलावा, विदेशी निवेश, तेल की कीमतों में स्थिरता, घरेलू महंगाई में कमी, और व्यापार घाटे (ट्रेड डेफिसिट) में सुधार ने भी रुपये को सबल दिया है. फरवरी में भारत का व्यापार घाटा घटकर 14.05 अरब डॉलर (लगभग 1.17 लाख करोड़ रुपये) रह गया, जो जनवरी में 23 अरब डॉलर (लगभग 1.91 लाख करोड़ रुपये) था. यह सुधार निर्यात और आयात में गिरावट के कारण हुआ है. रुपये की मजबूती के मुख्य कारण     RBI का हस्तक्षेप: RBI ने डॉलर/रुपया स्वैप ऑक्शन के जरिए डॉलर की लिक्विडिटी बढ़ाई. स्वैप नीलामी का मतलब है कि RBI ने बैंकों से डॉलर खरीदे और उन्हें भविष्य में वापस बेचने का वादा किया.     तेल की कीमतों में स्थिरता: तेल की कीमतें स्थिर रहने से भारत का आयात बिल कम हुआ, जिससे रुपये को सपोर्ट मिला.     विदेशी निवेश: विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों में पैसा लगाया, जिससे डॉलर की आपूर्ति बढ़ी.     व्यापार घाटे में सुधार: फरवरी में व्यापार घाटा कम होकर 14.05 अरब डॉलर रह गया, जो अगस्त 2021 के बाद से सबसे कम है. विशेषज्ञों का मानना है कि RBI की सही और समय पर नीतियों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है. इससे रुपये की मजबूती जारी रह सकती है. हालांकि, वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और तेल की कीमतों में बदलाव जैसे कारक रुपये को प्रभावित कर सकते हैं. रुपये की मजबूती से किन सेक्टरों को लाभ रुपये की मजबूती से कई सेक्टरों को फायदा होगा, खासकर आयात पर निर्भर रहने वाली इंडस्ट्री को. जब रुपया मजबूत होता है, तो आयात होने वाला सामान जैसे कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, और मशीनरी सस्ते हो जाते हैं. इससे पेट्रोलियम, ऑटोमोबाइल, और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को लागत में कमी आती है. साथ ही, विदेशी यात्रा करने वालों को भी फायदा होगा, क्योंकि डॉलर के मुकाबले उनकी खरीदारी क्षमता बढ़ जाती है. हालांकि, निर्यातकों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि मजबूत रुपये से उनके उत्पाद विदेशों में महंगे हो जाते हैं. खासकर आईटी कंपनियों को डॉलर के कमजोर होने और रुपये के मजबूत होने से दिक्कत होती है. बाजार पर विदेशी निवेश का असर   गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 3,239.14 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. इसके अलावा, भारतीय बॉन्ड मार्केट में भी 5,500 करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला. विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत की रियल यील्ड (Real Yield) 3.028% होने के कारण विदेशी निवेशक यहां निवेश को आकर्षक मान रहे हैं.    डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल में बढ़त डॉलर इंडेक्स (Dollar Index), जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाता है, 0.13% की बढ़त के साथ 103.98 पर रहा. ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) वायदा कारोबार में 0.44% बढ़कर 72.32 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था.   शेयर बाजार में भी दिखी मजबूती   घरेलू शेयर बाजार भी सकारात्मक कारोबार कर रहे हैं. दोपहर के कारोबार में 12 बजकर 7 मिनट के करीब BSE सेंसेक्स (Sensex) 581.34 अंक या 0.76% की बढ़त के साथ 76,929.40 पर कारोबार कर रहा था. Nifty 50 भी 165.10 अंक या 0.71% की बढ़त के साथ 23,355.75 पर पहुंच गया.   भारतीय बाजार के प्रति विदेशी निवेशकों की भरोसा कायम रुपये की मजबूती भारतीय बाजार के प्रति विदेशी निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है. आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव, तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स की चाल रुपये की दिशा तय करेगी. वहीं,  फेडरल रिजर्व के फैसले और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर रुपये की चाल पर पड़ सकता है.

RBI को सेंट्रल बैंकिंग, लंदन ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अवार्ड 2025 के लिए चुना

नई दिल्ली सेंट्रल बैंकिंग लंदन ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का चयन किया है। RBI ने X पर एक पोस्ट में कहा, “भारतीय रिजर्व बैंक को सेंट्रल बैंकिंग लंदन, यूके द्वारा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अवार्ड 2025 के लिए चुना गया है। RBI को इन-हाउस डेवलपर टीम द्वारा विकसित प्रवाह और सारथी सिस्टम सहित अपनी पहलों के लिए सम्मानित और मान्यता दी गई है। पुरस्कार समिति ने उल्लेख किया कि कैसे इन डिजिटल पहलों ने कागज़-आधारित सबमिशन के उपयोग को कम किया है, जिससे RBI की आंतरिक और बाहरी प्रक्रियाओं में बदलाव आया है।” सेंट्रल बैंकिंग लंदन ने एक प्रेस रिलीज में कहा कि ये दोनों पहल इस काम के लिए महत्वपूर्ण रही हैं। सारथी ने RBI के सभी आंतरिक वर्कफ़्लो को डिजिटल कर दिया। यह जनवरी 2023 में लाइव हुआ, जिससे कर्मचारियों को दस्तावेज़ों को सुरक्षित रूप से संग्रहीत और साझा करने, रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार करने और रिपोर्ट और डैशबोर्ड के माध्यम से डेटा विश्लेषण के विकल्पों को बढ़ाने में मदद मिली। डिजिटल परिवर्तन प्रक्रिया के दूसरे चरण को मई 2024 में हिंदी में प्रवाह ‘सुचारू प्रवाह’ के रूप में लॉन्च किया गया, जिसने बाहरी उपयोगकर्ताओं के लिए RBI को विनियामक आवेदन प्रस्तुत करने के लिए एक डिजिटल माध्यम बनाया। प्रवाह पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत और संसाधित किए गए दस्तावेज़ों को फिर सारथी डेटाबेस में प्लग किया जाता है, जहाँ उन्हें केंद्रीकृत साइबर सुरक्षा प्रणालियों और डिजिटल ट्रैकिंग के साथ RBI के कार्यालयों में डिजिटल रूप से संभाला जा सकता है। इसने यह भी कहा कि सारथी को सफलतापूर्वक अपनाना आंशिक रूप से आवश्यक समर्थन संरचनाओं को स्थापित करने में टीम के काम के कारण है। आईटी टीम ने सिस्टम बनाने से पहले कर्मचारियों की ज़रूरतों को समझने के लिए उनके साथ एक लंबी सहयोगी प्रक्रिया में भाग लिया और उन्नयन को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक विभाग से वरिष्ठ ‘नोडल अधिकारी’ नियुक्त किए। ऑनलाइन सारथी पाठशाला (‘स्कूल’) उपयोगकर्ताओं को सिस्टम से परिचित होने में मदद करती है और पाठशाला को व्यापक व्यक्तिगत प्रशिक्षण के साथ शुरू किया गया था। इसके अतिरिक्त सारथी मित्र (‘मित्र’) प्रत्येक RBI कार्यालय में ऐसे लोग होते हैं, जो सिस्टम को अच्छी तरह से जानते हैं और किसी भी मुद्दे पर सहकर्मियों की मदद कर सकते हैं।

RBI वित्तीय वर्ष 2025-26 में रेपो रेट कम कर सकता है, 1 अप्रैल के बाद लोन लेने वालों के लिए मिलेगी बड़ी राहत

नई दिल्ली अगर आप नया लोन लेने की सोच रहे हैं या पहले से कर्ज चुका रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) आने वाले वित्तीय वर्ष 2025-26 में रेपो रेट (Repo Rate) को 50 से 75 बेसिस प्वाइंट (bps) तक कम कर सकता है। क्रिसिल (CRISIL) की ताजा रिपोर्ट में इस बात का अनुमान लगाया गया है। इसका मकसद आम लोगों को राहत देना, खपत बढ़ाना और देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाना है। रेपो रेट और ब्याज दर में कटौती से क्या होगा फायदा? रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर घटती है तो बैंक भी लोगों को कम ब्याज दर पर लोन देते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे कर्ज सस्ते हो जाते हैं। इससे लोगों का खर्च करने की क्षमता बढ़ती है जिससे बाजार में मांग बढ़ती है और अर्थव्यवस्था में तेजी आती है।   फरवरी में भी हुई थी कटौती फरवरी 2025 में RBI ने पांच साल बाद पहली बार रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी जिससे यह 6.5% से घटकर 6.25% पर आ गया। इससे पहले 2022-23 के दौरान महंगाई रोकने के लिए RBI ने रेपो रेट में 250 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की थी लेकिन अब महंगाई को काबू में रखने के बाद ब्याज दरों को कम करने की योजना बनाई जा रही है ताकि लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़े और निवेश में इजाफा हो। महंगाई को 4% के दायरे में लाने की कोशिश RBI लंबे समय से महंगाई दर को 4% के आसपास लाने की कोशिश कर रहा है। अप्रैल 2023 से रेपो रेट 6.5% पर स्थिर बना हुआ था लेकिन अब नई कटौती से आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की योजना है। CRISIL की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार और RBI मिलकर 2025-26 में ब्याज दरों में कटौती करके अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे। ब्याज दर में कटौती से होने वाले बड़े फायदे: ➤ लोन होगा सस्ता – घर, गाड़ी या बिजनेस के लिए कर्ज लेना सस्ता होगा। ➤ खपत और निवेश में बढ़ोतरी – लोग ज्यादा खर्च कर पाएंगे जिससे बाजार में तेजी आएगी। ➤ GDP को मिलेगा सपोर्ट – बाजार में पैसा बढ़ने से देश की जीडीपी ग्रोथ को फायदा होगा। ➤ इन्फ्रास्ट्रक्चर और सरकारी योजनाओं को बढ़ावा – सरकार ने FY26 के लिए पूंजीगत व्यय को 10.1% तक बढ़ाने की योजना बनाई है जिससे नए प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ेगा। ➤ वित्तीय घाटे में कमी – सरकार वित्तीय घाटे को 4.8% से घटाकर 4.4% तक लाने की कोशिश कर रही है जिससे आर्थिक स्थिरता बनी रहेगी। ग्लोबल रिस्क और भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर हालांकि CRISIL की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताएं भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता से निर्यात प्रभावित हो सकता है और विदेशी निवेशक जोखिम भरे बाजारों से दूर रह सकते हैं। हालांकि घरेलू मांग और सरकारी नीतियां अर्थव्यवस्था को मजबूती से बनाए रखेंगी।   महंगाई दर में कमी की उम्मीद रिपोर्ट के अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में महंगाई दर में और गिरावट हो सकती है। रबी फसलों की बुवाई 1.5% बढ़ी है जिससे खाद्य आपूर्ति बेहतर होगी। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी कम हो सकती हैं। FY26 में तेल की कीमतें 70-75 डॉलर प्रति बैरल रह सकती हैं जो FY25 के 78-83 डॉलर प्रति बैरल से कम होगी। इससे महंगाई पर और नियंत्रण होगा। अगर CRISIL की रिपोर्ट सही साबित होती है और RBI 2025-26 में ब्याज दरों में कटौती करता है तो यह आम जनता के लिए बहुत फायदेमंद होगा। इससे लोन सस्ते होंगे बाजार में पैसा बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। हालांकि ग्लोबल परिस्थितियों को देखते हुए सरकार और RBI को सतर्क रहना होगा ताकि आर्थिक स्थिरता बनी रहे।  

RBI ने मुंबई के न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक पर रोक लगा दी

नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने मुंबई के न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक पर रोक लगा दी है। बैंक के ग्राहक अपना पैसा भी नहीं निकाल सकते। यही नहीं, केंद्रीय बैंक ने इस बैंक पर नए लोन देने, पैसा जमा करने, एफडी आदि पर भी रोक लगा दी है। रिजर्व बैंक का कहना है कि बैंक की स्थिति सुधरने तक ये प्रतिबंध लागू रहेंगे। रिजर्व बैंक के इस आदेश के बाद शुक्रवार को बैंकों की ब्रांच के बाहर ग्राहकों की भीड़ जमा हो गई। रिजर्व बैंक को इस बैंक में कुछ गड़बड़ियों के बारे में पता चला है। इसके बाद ही केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया। मार्च 2024 के आखिर तक इस बैंक में कुल 2436 करोड़ रुपये जमा थे। जिन लोगों का पैसा इस बैंक में जमा है, उन्हें डिपॉजिट इंश्योरेंस स्कीम के तहत 5 लाख रुपये तक का बीमा मिलेगा। मतलब, अगर बैंक डूब भी जाता है तो भी आपको 5 लाख रुपये तक वापस मिल जाएंगे। इन चीजों पर लगाई रोक RBI ने घोषणा की है कि 13 फरवरी 2025 से न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक कोई भी नया लोन नहीं देगा। पुराने लोन को भी रिन्यू नहीं करेगा। नए निवेश या नई जमा राशि भी स्वीकार नहीं करेगा। किसी भी तरह का पेमेंट भी नहीं कर पाएगा। यहां तक कि अपनी कोई भी संपत्ति भी नहीं बेच पाएगा। यह पाबंदी 13 फरवरी 2025 से शुरू होकर अगले छह महीने तक लागू रहेगी। क्यों लगाई रिजर्व बैंक ने पाबंदी? रिजर्व बैंक को पता चला है कि इस बैंक की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। बैंक के पास पर्याप्त पैसा है या नहीं, इसको लेकर आरबीआई सवाल उठा रहा है। इसलिए लोगों को अपने सेविंग अकाउंट, करंट अकाउंट या किसी भी दूसरे खाते से पैसे निकालने से रोका गया है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि ये पाबंदियां ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए लगाई गई हैं। ग्राहक हुए परेशान रिजर्व बैंक की पाबंदी की यह खबर शुक्रवार को आग की तरह फैल गई। इस बैंक के ग्राहक अपनी-अपनी ब्रांच पहुंच गए। इसमें ज्यादातर लोग बैंक से अपना पैसा निकालना चाहते हैं। लेकिन रिजर्व बैंक के बैन के कारण वे ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे कई फोटो और वीडियो सामने आ रहे हैं जिसमें बैंकों के बाहर ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है। बैंक का दरवाजा बंद है जिस कारण वे इसमें जा नहीं पा रहे हैं।

नए साल से किसानों को बिना गारंटी के मिलेगा ₹2 लाख तक का लोन, आरबीआई ने दी बड़ी राहत

नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने किसानों को बड़ी राहत दी है। खेती में बढ़ते खर्च को देखते हुए सेंट्रल बैंक ने किसानों को बिना गारंटी के किसानों को मिलने वाले लोन की सीमा को 2 लाख रुपये तक बढ़ा दिया है। पहले लिमिट 1.6 लाख रुपये थी। एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री ने शनिवार को जारी किए गए बयान में कहा है कि यह नई लिमिट 1 जनवरी 2025 से प्रभावी रहेगी। उम्मीद की जा रही है कि इस योजना का फायदा करोड़ों किसानों को मिलेगा। आरबीआई ने कृषि क्षेत्र को बिना गांरटी के लोन देने की शुरुआत 2010 में की थी। तब सेंट्रल बैंक ने एक लाख रुपये बिना गांरटी के देने का ऐलान किया। 2019 में जिसकी सीमा बढ़ाकर 1.6 लाख रुपये कर दी गई थी। अब एक बार इसमें इजाफा किया गया है। छोटे किसानों को होगा बड़ा फायदा एग्रीकल्चर सेक्टर में बढ़ती महंगाई की वजह से छोटे और मझोले किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। जिसकी वजह से उनकी खेती प्रभावित हो रही थी। रिजर्व बैंक ने जो सीमा बढ़ाई है उसका इन किसानों को होगा। खेती किसानी करने वाले लोगों के पास बहुत सीमित संसाधन होते थे। ऐसे में बिना गारंटी के मिलने वाले इस लोन का फायदा किसानों को होगा। कृषि मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है “यह कदम विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों (क्षेत्र के 86% से अधिक) के लिए लोन पहुंच को बढ़ाता है। ये कम उधार लागत और अतिरिक्त आवश्यकताओं को हटाने से लाभान्वित होते हैं।” सेंट्रल बैंक का यह फैसला संशोधित ब्याज अनुदान योजना (MISS) जैसी सरकारी कोशिश के अनुरूप है। जोकि किसानों को 3 लाख रुपये के लोन पर 4 प्रतिशत के ब्याज की पेशकश करता है। ये फैसले भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने के प्रयास से किया जा रहा है। सरकार की तरफ से मिलता है डायरेक्ट पैसा किसानों को केंद्र सरकार की तरफ से साल में 2000-2000 रुपये की तीन किश्त मिलती है। कुछ राज्य सरकारें अपनी तरफ से भी किसानों को इस राशि में कुछ जोड़कर अलग से भुगतान करती हैं। बता दें, इसके अलावा किसानों को सब्सिडी के जरिए सस्ती खाद भी उपलब्ध करवाई जाती है।

RBI ने बिना कुछ गिरवी के कृषि लोन की सीमा 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का निर्णय लिया

मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक ने कोलैटरल फ्री कृषि लोन की सीमा को 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया है। इसके जरिए सरकार की कोशिश छोटे और सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाना है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक द्वारा वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंक को यूपीआई के माध्यम से पूर्व-स्वीकृत क्रेडिट लाइनें देने की अनुमति दी गई है। आरबीआई की ओर से इन दोनों निर्णय का ऐलान शुक्रवार की एमपीसी के बाद किया गया। कोलैटरल फ्री कृषि लोन के लिए पहले यह लिमिट 1.60 लाख रुपये थी, जिसे 2019 में तय किया गया था। इससे पहले यह लिमिट 2010 में एक लाख रुपये थी। आरबीआई ने जारी बयान में कहा कि तब से लेकर अब तक की कुल मुद्रास्फीति और कृषि इनपुट लागत में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, बिना कुछ गिरवी के कृषि लोन की सीमा 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इससे औपचारिक ऋण प्रणाली में छोटे और सीमांत किसानों का कवरेज बढ़ेगा। इसका सर्कुलर जल्द ही जारी किया जाएगा। अधिक वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई ने स्मॉल फाइनेंस बैंक (एसएफबी) को यूपीआई के माध्यम से पूर्व-स्वीकृत क्रेडिट लाइनें प्रदान करने की अनुमति देने का भी निर्णय लिया है। सितंबर 2023 में यूपीआई के दायरे का विस्तार किया गया था। इससे पूर्व-स्वीकृत क्रेडिट लाइनों को यूपीआई के माध्यम से जोड़ा जा सकता है। पहले कमर्शियल बैंकों को ही यूपीआई के माध्यम से पूर्व-स्वीकृत क्रेडिट लाइन जारी करने की अनुमति थी। पेमेंट्स बैंकों, एसएफबी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को इस दायरे से बाहर रखा गया था। आरबीआई ने कहा, “यूपीआई पर क्रेडिट लाइन में नए ग्राहकों को कम-टिकट, कम-अवधि के लोन उपलब्ध कराने की क्षमता है। एसएफबी ग्राहकों तक पहुंचने के लिए एक उच्च तकनीक, कम लागत वाले मॉडल पर काम करते हैं और इससे पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।”

शक्तिकांत दास बोले- हमारा काम महंगाई को काबू में रखना…, ब्‍याज दरों में नहीं हुआ बदलाव, रेपो रेट 6.50% पर बरकरार

मुंबई आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक के नतीजे आ गए हैं. सुबह 10 बजे नतीजे घोषित करते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकान्‍त दास (RBI Governor Shaktikanta Das) ने बताया कि इस बार भी ब्‍याज दरों में बदलाव नहीं किया गया है. रेपो रेट फिलहाल 6.50% पर ही बरकरार रहेगा. MPC के 6 में से 4 सदस्‍य ब्‍याज दरों में बदलाव के पक्ष में नहीं. मतलब साफ है कि अभी आपके होम लोन, ऑटो लोन समेत तमाम तरह के कर्ज भी फिलहाल सस्‍ते नहीं होंगे. बता दें कि RBI ने आखिरी बार फरवरी 2023 में ब्‍याज दरों में बदलाव किया था. उस समय दरें 0.25% बढ़ाकर 6.5% की गई थीं, तब से ये जस से तस बनी हुई हैं. बता दें कि गवर्नर शक्तिकान्‍त दास के मौजूदा कार्यकाल की आखिरी एमपीसी बैठक है. उनका कार्यकाल 10 दिसंबर को समाप्त हो रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने अपने कार्यकाल का आखिरी मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करते हुए कहा कि मेजोरिटी में सदस्‍यों ने तय किया है कि रेपो रेट को अनचेंज रखा जाए. एमपीसी ने तय किया गया है कि महंगाई को टारगेट पर लाने का फोकस रहेगा. इस लिए अभी रेपो रेट में कटौती नहीं की जा रही है. Repo Rate का EMI पर असर RBI की MPC की बैठक हर दो महीने में होती है और इसमें शामिल रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास समेत छह सदस्य महंगाई समेत अन्य मुद्दों और बदलावों (Rule Changes) पर चर्चा करते हैं. यहां बता दें कि रेपो रेट का सीधा कनेक्शन बैंक लोन लेने वाले ग्राहकों से होता है. इसके कम होने से लोन की ईएमआई घट जाती है और इसमें इजाफा होने से ये बढ़ जाती है. दरअसल, रेपो रेट (Repo Rate) वह दर है जिस पर किसी देश का केंद्रीय बैंक धन की किसी भी कमी की स्थिति में वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है. रेपो रेट का उपयोग मौद्रिक अधिकारियों द्वारा इंफ्लेशन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.

अब RBI के कस्टमर केयर सेंटर को मिली धमकी, खुद को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख बताया

नई दिल्ली हाल के दिनों में देश के एयरपोर्ट को धमकी भरे फोन कॉल आए थे। अब रिजर्व बैंक इंडिया के कस्टमर केयर में कॉल करके धमकी दी गई है। मुंबई में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कस्टमर केयर सेंटर को रविवार को एक धमकी कॉल मिली, जिसमें कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख बताया। अधिकारियों के अनुसार, कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को “लश्कर-ए-तैयबा का सीईओ” बताते हुए अधिकारियों से कहा कि वे बैंक के पीछे वाले रास्ते को ब्लॉक कर दें क्योंकि एक इलेक्ट्रिक कार खराब हो गई है। इस कॉल के बाद आरबीआई अधिकारियों ने मामले को तुरंत मुंबई पुलिस को सूचित किया और पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में तलाशी ली, लेकिन किसी भी संदिग्ध वस्तु या घटना का कोई पता नहीं चला। अधिकारियों ने कहा कि इस धमकी कॉल की जांच शुरू कर दी गई है और कॉलर की पहचान करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने मामले की छानबीन के लिए साइबर ट्रैकिंग तकनीकों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, ताकि कॉल करने वाले व्यक्ति को पकड़ा जा सके। यह घटना एक गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में सामने आई है, क्योंकि ऐसे धमकी कॉल आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए हो सकते हैं। पुलिस और आरबीआई अधिकारियों ने इस मामले को पूरी गंभीरता से लिया है और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

चुनाव में ट्रंप जीतते हैं तो RBI, विदेशी धन के संभावित और अचानक आई गिरावट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार

नईदिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में अगर रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते जीतते हैं तो भारत का केंद्रीय बैंक, RBI, विदेशी धन के संभावित और अचानक आउटफ्लो और रुपये में किसी भी तरह की भारी गिरावट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. बैंक से संबंधित दो सूत्रों ने इसकी जानकारी दी है. विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करेगा रिजर्व बैंक न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक वैश्विक बाजार में अस्थिरता और विदेशी फंड के आउटफ्लो की स्थिति में घरेलू मुद्रा की रक्षा के लिए अपने बड़े विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करेगा. एक सूत्र ने कहा, ‘ये रिजर्व अस्थिरता से निपटने में मदद करेगा. अगर आउटफ्लो तेज होता है, तो आरबीआई इसे प्रबंधित करने के लिए कदम उठाएगा, जैसा कि वह करता रहा है.’ चीन से आयात पर 60 प्रतिशत शुल्क लगाने का वादा सूत्रों ने यह भी चेतावनी दी कि चीन के प्रति अमेरिकी टैरिफ में किसी भी तरह की भारी वृद्धि से भारत और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. ट्रंप ने चीन से आयात पर 60 प्रतिशत शुल्क लगाने का वादा किया है. इस महीने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगभग 50 बेसिक पॉइंट्स की वृद्धि हुई है और चुनाव के दिन नजदीक आने पर डॉलर इंडेक्स 3.3% मजबूत हुआ है. भारतीय शेयरों से विदेशी फंडों में रिकॉर्ड 10 अरब डॉलर से अधिक का आउटफ्लो हुआ है, जबकि विदेशियों ने ऋण बाजार से 700 मिलियन डॉलर निकाले हैं. लगातार तीसरे हफ्ते गिरा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस महीने रुपया लगातार रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे केंद्रीय बैंक को हस्तक्षेप करना पड़ा. हालांकि यह सबसे कम अस्थिर प्रमुख एशियाई मुद्राओं में से एक रहा है, जो प्रति डॉलर 83.79-84.09 की एक सीमा पर बना हुआ है. आरबीआई के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार तीसरे हफ्ते गिरकर 18 अक्टूबर तक 688.27 अरब डॉलर पर आ गया है, जो कि एक महीने से अधिक में सबसे कम है. हालांकि यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा भंडार बना हुआ है. वोटर आईडी की मांग कर रहे ट्रंप बता दें कि अमेरिका में 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव है. उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कड़ा मुकाबला है. पोल में बहुत कम अंतर से जीत मिलने के बाद, दोनों उम्मीदवारों ने अपना ध्यान सन बेल्ट के राज्यों पर केंद्रित कर दिया है. चुनाव से पहले ट्रंप ने देश के मौजूदा वोटिंग सिस्टम को लेकर नाराजगी जाहिर की है और वोटिंग के लिए पहचान पत्र को अनिवार्य करने पर जोर दिया है. पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि चुनावों के लिए पहचान पत्र (Voter ID) को अनिवार्य रूप से लागू करना चाहिए. लेकिन डेमोक्रेट्स वोटर आईडी कार्ड का विरोध कर रहे हैं ताकि ये लोग चुनाव में धांधली कर सकें.  

दिवाली से पहले Home Loan लेने वालों को बड़ी राहत, आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने EMI पर बड़ा फैसला

नई दिल्ली नेशनल डेस्क आरबीआई गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की पिछली 9 बैठकों में ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया गया है। बुधवार को तीन दिवसीय मीटिंग के बाद भी समिति ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। फरवरी 2023 में आखिरी बार रेपो रेट में संशोधन किया गया था, जब इसे 6.50% पर लाया गया था, और तब से यह दर स्थिर बनी हुई है। रेपो रेट में बदलाव न होने से आम जनता के होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्जों पर ब्याज दरों में कोई असर नहीं पड़ेगा। रेपो रेट वही दर है, जिस पर केंद्रीय बैंक अन्य बैंकों को अल्पकालिक कर्ज प्रदान करता है, जिससे यह देशभर में उधारी की लागत को प्रभावित करता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के मद्देनजर रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला इसलिए लिया है, क्योंकि दरों में कटौती से रुपये की कमजोरी बढ़ सकती है। रुपये के कमजोर होने से आयात की लागत बढ़ेगी और भारतीय कंपनियों के लिए इनपुट लागत भी प्रभावित हो सकती है। ग्रोथ पर रहेगा फोकस RBI का मुख्य फोकस आर्थिक विकास पर है, और दिसंबर या फरवरी में होने वाली आगामी मौद्रिक नीति समितियों (MPC) में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (BPS) की कटौती की संभावना अधिक है। मौजूदा समीक्षा बैठक सोमवार से शुरू हुई थी, और आज RBI दरों पर अपना फैसला सुनाएगा। 2023 के बाद से RBI ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, जबकि उससे पहले दरों में तेजी से वृद्धि हुई थी।

खुशखबरी – नहीं बढ़ेगी होम लोन की EM , लगातार 10वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, 6.5% पर कायम

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक की 51वीं एमपीसी बैठक के नतीजे (RBI MPC Meeting Results) आ गए हैं. केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) दो दिवसीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों का ऐलान करते हुए कहा कि इस बार भी नीतिगत दरों (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आपके लोन की ईएमआई न बढ़ेगी और न ही घटने वाली है. ये लगातार 10वीं बार है जबकि रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. इसके बाद रेपो रेट 6.50% पर बरकरार है. जबकि रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर और बैंक रेट 6.75% पर स्थिर रखा गया है. 6 में से 5 सदस्य बदलाव के पक्ष में नहीं RBI गवर्नर ने 7 अक्टूबर को शुरू हुई MPC Meet में लिए गए फैसलों के बारे में बताते हुए कहा कि इस बार एमपीसी में 3 नए सदस्य जुड़े हैं और ग्लोबल हालातों समेत अन्य पहलुओं पर विचार करने के बाद बैठक के दौरान 6 में से 5 सदस्यों ने ब्याज दरों को यथावत रखने पर अपना वोट दिया. इसके साथ ही आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पॉलिसी का रुख विद्ड्रॉल ऑफ अकमॉन्डेशन से चेंज करते हुए अब Neutral कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बने उतार-चढ़ाव भरे हालातों के बावजूद देश में महंगाई (Inflation) को काबू में रखने में हम कामयाब रहे हैं और इसके साथ ही Economic Growth को भी गति मिली है. Repo Rate का EMI पर असर RBI की MPC की बैठक हर दो महीने में होती है और इसमें शामिल रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास समेत छह सदस्य महंगाई समेत अन्य मुद्दों और बदलावों (Rule Changes) पर चर्चा करते हैं. यहां बता दें कि रेपो रेट का सीधा कनेक्शन बैंक लोन लेने वाले ग्राहकों से होता है. इसके कम होने से लोन की ईएमआई घट जाती है और इसमें इजाफा होने से ये बढ़ जाती है. दरअसल, रेपो रेट (Repo Rate) वह दर है जिस पर किसी देश का केंद्रीय बैंक धन की किसी भी कमी की स्थिति में वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है. रेपो रेट का उपयोग मौद्रिक अधिकारियों द्वारा इंफ्लेशन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. जब लगातार बढ़ाया गया था रेपो रेट Repo Rate फिलहाल 6.5 फीसदी पर बना हुआ है. इससे पहले जब देश में महंगाई बेकाबू हो गई थी और 7 फीसदी के पार पहुंच गई थी. तब इसे काबू में लाने के लिए RBI ने लगातार रेपो रेट बढ़ाया था. इसमें मई 2022 से फरवरी 2023 तक कई बार बढ़ोतरी की गई थी और ये 2.5 फीसदी बढ़ा था. हालांकि, इसके बाद से ही केंद्रीय बैंक की ओर से किसी भी तरह का कोई बदलाव रेपो रेट में नहीं किया गया था. GDP को लेकर आरबीआई का अनुमान एमपीसी बैठक के नतीजों के बारे में जानकारी देते हुए केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने FY2025 की दूसरी तिमाही के लिए GDP अनुमान 7.2 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी करने का ऐलान किया, तो वहीं तीसरी तिमाही के लिए ये 7.3 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी करने की जानकारी दी है. चौथी तिमाही के लिए भी जीडीपी ग्रोथ रेट को पहले के 7.2 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी किया गया है. इसके अलावा RBI ने अगले साल 2026 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी 7.3 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद जाहिर की है. महंगाई को लेकर गवर्नर ने क्या कहा? रेपो रेट को लगातार 10वीं बार स्थिर रखने के ऐलान के साथ ही रिजर्व बैंक के गवर्नर ने FY25 के लिए रिटेल महंगाई के अनुमान के बारे में भी बताया और कहा कि ये 4.5 फीसदी पर बरकरार रखा गया है. Q2 के लिए अनुमान 4.1 फीसदी, Q3 के लिए 4.8 फीसदी और Q4 के लिए 4.2 फीसदी रखा गया है. वहीं अगले साल की पहली तिमाही में ये 4.3 फीसदी रहने का अनुमान है. इधर नतीजों का ऐलान उधर बाजार ने लगाई दौड़ आरबीआई ने लगातार 10वीं बार रेपो रेट को स्थिर रखने का ऐलान किया, तो इस खबर का असर सीधे शेयर बाजार पर दिखाई दिया. मिडिल ईस्ट में तनाव के माहौल के बीच Repo Rate स्थिर रखने का फैसला बाजार को पसंद आया और करीब 150 अंक की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा BSE Sensex अचानक दौड़ लगाते हुए 411 अंक चढ़कर 82,046.48 के लेवल पर पहुंच गया. BSE Nifty की बात करें, तो 25,190 के पार निकल गया.  

अभी भी लोगो के पास है 2000 रुपये के 7,117 करोड़ रुपये के नोट, RBI ने दी जानकारी

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बताया कि 2000 रुपये के 98% नोट वापस आ चुके हैं, जबकि अभी भी 7,117 करोड़ रुपये के नोट लोगों के पास बचे हुए हैं। अक्टूबर 2024 में जारी आंकड़ों के अनुसार, नोटों की वापसी की रफ्तार धीमी हो गई है। प्रमुख बातें: कब और क्यों बंद हुए: 19 मई 2023 को क्लीन नोट पॉलिसी के तहत 2000 रुपये के नोट वापस लेने का निर्णय लिया गया था। वापसी की समयसीमा: 23 मई से 30 सितंबर 2023 तक नोट जमा करने की समयसीमा थी, लेकिन इसे कई बार बढ़ाया गया। अभी भी जमा कर सकते हैं नोट: 2000 रुपये के नोट अब सिर्फ आरबीआई की 19 क्षेत्रीय शाखाओं और डाकघरों में जमा कराए जा सकते हैं। नोट वापसी के आंकड़े: मई 2023 में बाजार में: 3.56 लाख करोड़ रुपये के नोट थे। सितंबर 2024 तक: 7,000 करोड़ रुपये के नोट वापस नहीं हुए हैं। आरबीआई ने 2018-19 से 2000 रुपये के नोटों की छपाई बंद कर दी थी क्योंकि बाजार में अन्य मूल्यवर्ग के नोट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो चुके थे।

RBI की बड़ी कार्रवाई, बनारस मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस किया कैंसिल, अब ग्राहकों के पैसे का क्या होगा?

नईदिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए बनारस मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। इस निर्णय के बाद बैंक के ग्राहकों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि वे अब अपने खातों में पैसा जमा या निकाल नहीं सकेंगे। दरअसल बैंक की खराब होती वित्तीय स्थिति इस कदम के पीछे का प्रमुख कारण है। बनारस मर्केंटाइल सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बनारस मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द करने का फैसला किया है। यह निर्णय बैंक की वित्तीय स्थिति के अत्यधिक खराब होने के कारण लिया गया है। 4 जुलाई के बाद से यह बैंक किसी भी प्रकार का बैंकिंग कार्य नहीं कर सकेगा। जानकारी के अनुसार RBI ने उत्तर प्रदेश के सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से बैंक के लिए लिक्विडेटर नियुक्त करने का अनुरोध किया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, बनारस मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक के पास न तो आय के पर्याप्त स्रोत हैं और न ही पर्याप्त पूंजी। ऐसे में बैंक का संचालन जमाकर्ताओं के हित में नहीं है। बैंक की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वह अपने जमाकर्ताओं को पूर्ण भुगतान करने में असमर्थ है। जानकारी दे दें कि दिसंबर में बैंक पर प्रतिबंध लगाए गए थे और अब लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। जानिए कैसे मिलेगा ग्राहकों का पैसा वापस? दरअसल बनारस मर्केंटाइल सहकारी बैंक के जमाकर्ताओं को अपना पैसा निकालने के लिए जमा बीमा और लोन गारंटी निगम (DICGC) के पास आवेदन करना होगा। वहीं बैंक के अनुसार, 99.98% जमाकर्ता DICGC के जरिए अपना पूरा पैसा वापस पा सकते हैं। DICGC किसी भी जमाकर्ता को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की राशि लौटाती है। 30 अप्रैल तक, DICGC ने 4.25 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर दिया है। जमाकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी: लाइसेंस रद्द: 4 जुलाई के बाद से बनारस मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक कोई भी बैंकिंग कारोबार नहीं कर पाएगा। DICGC आवेदन: जमाकर्ताओं को DICGC के माध्यम से अपने पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। अधिकतम वापसी: DICGC अधिकतम 5 लाख रुपये तक की राशि किसी भी जमाकर्ता को वापस करती है। लिक्विडेशन प्रक्रिया: उत्तर प्रदेश के सहकारिता आयुक्त और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से बैंक के लिए लिक्विडेटर अपॉइंट किया जाएगा।

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