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3.72 करोड़ का शिक्षा विभाग घोटाला मैहर में, स्कूल निर्माण के लिए किए गए वित्तीय कुप्रबंधन का पर्दाफाश

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मैहर  मध्य प्रदेश के मैहर जिले में स्कूलों में लघु निर्माण कार्य जैसे पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड बनाने के नाम पर हुए 3.72 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच शुरू हो गई है. दरअसल खबर प्रसारित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच दल गठित कर दिया गया. जांच में सामने आया कि जिन स्कूलों में लाखों रुपये का भुगतान दिखाया गया, वहां ज़मीन पर कोई ठोस निर्माण कार्य नजर ही नहीं आया. जांच टीम को क्या मिला? एसडीएम एस.पी. मिश्रा के नेतृत्व में बनी टीम ने कई स्कूलों का भौतिक सत्यापन किया. टीम में संदीपनी विद्यालय मैहर के प्राचार्य दिनेश गोस्वामी, तहसीलदार ललित धार्वे, बीईओ राजेश द्विवेदी, बीआरसीसी चंद्र प्रताप शुक्ला, सहायक लेखपाल विनय सिंह और पटवारी आनंद पांडेय शामिल थे. टीम ने पाया कि अधिकांश स्कूलों में सिर्फ रंगाई-पुताई दिखाई दी, जबकि पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड जैसे निर्माण कार्य का कोई प्रमाण नहीं मिला. किन फर्मों को हुआ भुगतान जांच में सामने आया कि भोपाल की वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर, मैहर की श्री रुद्र इंटरप्राइजेज और सतना की श्री महाकाल ट्रेडर्स को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया. विभिन्न स्कूलों से 21 लाख से 24 लाख रुपये तक के बिलों का भुगतान दर्शाया गया है. कुल मिलाकर 17 स्कूलों में लगभग 3 करोड़ 72 लाख रुपये के बिल पास किए गए.  फर्जी हस्ताक्षरों की आशंका कई प्राचार्यों का कहना है कि उन्होंने न तो कोई वर्क ऑर्डर जारी किया और न ही ऐसे किसी बिल को मंजूरी दी. इससे फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजी हेराफेरी की आशंका गहरा गई है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है. रिपोर्ट में संबंधित फर्मों के साथ-साथ लगभग 14 प्राचार्यों की भूमिका की जांच की सिफारिश की गई है. माना जा रहा है कि जल्द ही निलंबन, एफआईआर और वित्तीय वसूली जैसी कड़ी कार्रवाई हो सकती है. फिलहाल, मामला संभागीय स्तर तक पहुंच चुका है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं.

प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी का एक और मामला सामने आया, डाक्यूमेंट की जांच में पकड़ा गया आरोपी, पुलिस ने किया केस दर्ज

 इंदौर  मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी का एक और मामला सामने आया है। मल्हारगंज पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसने लिखित एवं शारीरिक दक्षता परीक्षा पास कर ली थी। बुधवार को दस्तावेजों का परीक्षण करने के दौरान उसकी पोल खुल गई। पूछताछ में पता चला परीक्षा तो साल्वर ने पास की थी। मामला 15वीं वाहिनी (महेश गार्ड लाइन) का है। निरीक्षक रोहित कास्डे द्वारा दुर्गेश राठौर और राघवेंद्र रावत के विरुद्ध केस दर्ज करवाया गया है। पुलिस के अनुसार एमएस रोड द्वारकापुरी बस्ती जौरा (मुरैना) निवासी दुर्गेश ने आरक्षक (जेडी) एवं आरक्षक (रेडियो) चयन परीक्षा वर्ष-2023 में भाग लिया था। दुर्गेश का केंद्र रतलाम (मारुति एकेडमी) आया था। उसके द्वारा शारीरिक एवं लिखित परीक्षा पास कर ली गई थी। चयनित अभ्यर्थियों को आधार इतिहास, दस्तावेज परीक्षण एवं चरित्र सत्यापन के लिए कमेटी द्वारा बुलाया गया था। पूछताछ में उसने बहाना बनाया 4 जून को दुर्गेश लिखित हस्तलिपि में संदिग्ध प्रतीत हुआ। पूछताछ में उसने बहाना बनाया और कहा कि चाकू से चोट लगने के कारण उस वक्त छोटे भाई ने लिखा था। परंतु हस्ताक्षर उसने ही किए हैं। शक होने पर अफसरों ने फोटो, बायोमेट्रिक आदि की जांच की गई। सख्ती से पूछताछ भी की दुर्गेश से सख्ती से पूछताछ भी की गई। उसने साल्वर राघवेंद्रसिंह रावत निवासी सबलगढ़ (मुरैना) का नाम स्वीकार कर लिया। बुधवार को उसके विरुद्ध थाना में एफआईआर दर्ज करवा दी गई। टीआई वेदेंद्रसिंह कुशवाह के मुताबिक दुर्गेश का परीक्षा केंद्र रतलाम का है। शून्य पर केस दर्ज कर डायरी रतलाम भेजी जा रही है।

गुवाहाटी का बहुचर्चित घोटाला, मास्टरमाइंड Khusdeep Bansal पर गंभीर आरोप

गुवाहाटी गुवाहाटी में हाल ही में सामने आए एक बहुचर्चित आर्थिक घोटाले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस मामले का मुख्य मास्टरमाइंड खुसदीप बंसल को बताया जा रहा है, जो आरोपों के केंद्र में हैं। उनके साथ, इस आपराधिक षड्यंत्र में प्रमुख भूमिका निभाने वाले परथा भारद्वाज को अदालत ने आज जमानत देने से इनकार कर दिया। मामले की पृष्ठभूमि यह मामला पी.आर. केस नंबर 2252/2024 के तहत दर्ज है। मामले की जांच में पाया गया कि खुसदीप बंसल और उनके साथी, परथा भारद्वाज, ने करोड़ों रुपये की ठगी और जालसाजी के जरिए सैकड़ों लोगों को धोखा दिया। यह घोटाला सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में फैला हुआ है। आरोपों की गंभीरता आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120(B) (आपराधिक षड्यंत्र), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 418 (धोखा देकर नुकसान पहुंचाना), 419 (प्रतिरूपण), 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी), 467 (महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी), और 471 (जाली दस्तावेजों का उपयोग) के तहत आरोप लगाए गए हैं। अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस मामले में साजिश की गहराई और आर्थिक नुकसान का स्तर इतना बड़ा है कि इसे साधारण अपराध नहीं माना जा सकता। खुसदीप बंसल: मास्टरमाइंड की भूमिका जांच के दौरान पता चला कि खुसदीप बंसल ने एक सुव्यवस्थित नेटवर्क बनाया, जिसमें नकली दस्तावेज़, फर्जी कंपनियां और जालसाजी के अन्य तरीकों का उपयोग किया गया। इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य भोले-भाले निवेशकों और व्यवसायियों को धोखा देना था। बंसल ने अपने संपर्कों और प्रभाव का उपयोग करके कई सरकारी और गैर-सरकारी परियोजनाओं में निवेश के नाम पर भारी धनराशि इकट्ठा की। उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों के अनुसार, इस पूरे घोटाले की योजना और क्रियान्वयन उनकी निगरानी में हुआ। परथा भारद्वाज की संलिप्तता परथा भारद्वाज, जिन्हें इस घोटाले में खुसदीप बंसल का दाहिना हाथ माना जाता है, पर आरोप है कि उन्होंने जाली दस्तावेज तैयार करने, गवाहों को डराने और धन के लेन-देन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अदालत ने आज उनकी जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। अदालत की टिप्पणी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने कहा, “आर्थिक अपराधों को गंभीरता से लेना जरूरी है। ये अपराध न केवल व्यक्तिगत धन हानि पहुंचाते हैं बल्कि देश की आर्थिक स्थिति को भी कमजोर करते हैं।” अभियोजन पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि खुसदीप बंसल और परथा भारद्वाज जैसे अपराधी अगर जमानत पर बाहर आते हैं, तो वे गवाहों को डराने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की पूरी कोशिश करेंगे। जमानत याचिका पर सुनवाई अदालत में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के बीच लंबी बहस हुई। अभियोजन पक्ष ने कई सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए यह स्थापित किया कि इस तरह के मामलों में जमानत देना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि परथा भारद्वाज को स्वास्थ्य कारणों से जमानत दी जानी चाहिए, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि जेल प्रशासन उनकी चिकित्सा आवश्यकताओं का ध्यान रखेगा। जांच की दिशा अभी तक की जांच में यह सामने आया है कि खुसदीप बंसल और उनके नेटवर्क ने सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देकर फर्जी दस्तावेजों को वैध ठहराने की कोशिश की। साथ ही, बंसल के विदेशी खातों की भी जांच की जा रही है, जहां घोटाले की धनराशि स्थानांतरित की गई हो सकती है। अगली सुनवाई की तारीख इस मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी 2025 को निर्धारित की गई है। अदालत ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया है कि वे जांच में तेजी लाएं और सभी सबूतों को प्रस्तुत करें। आम जनता के लिए संदेश यह मामला उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो बिना सोचे-समझे निवेश करते हैं। खुसदीप बंसल जैसे अपराधी आम लोगों की मेहनत की कमाई को अपने आपराधिक इरादों के लिए इस्तेमाल करते हैं।

शासकीय राशि का गमन एवं अनियमियता पर सरपंच से होगी वसूली, जिला पंचायत सीईओ ने आरसीसी के तहत वसूली हेतु तहसीलदार को दिए निर्देश.

Recovery of government funds and irregularities will be done through the Sarpanch, as directed by the District Panchayat CEO under the RCC, instructions given to the Tehsildar for the collection process. Special Correspondent कटनी । विकासखंड बहोरीबंद की ग्राम पंचायत डिहुटा के तत्कालीन सरपंच अंगद सिंह ठाकुर और अन्य चार के द्वारा सुदूर सड़क के निर्माण में वित्तीय अनियमितता कर, शासकीय धन का गबन और शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाए जाने के फलस्वरुप पांच अनावेदकों तत्कालीन सचिव, जीआरएस, उपयंत्रियो से 1,32,639 रुपए की वसूली निर्धारित की गई थी। अंगद सिंह को छोड़कर इन चार ने जमा की राशितत्कालीन सरपंच अंगद सिंह ठाकुर को छोड़कर जागेश्वर विश्वकर्मा तत्कालीन सचिव, मुस्ताक मोहम्मद ग्राम रोजगार सहायक, एस के पांडे और एम के कौशल तत्कालीन उपयंत्री द्वारा प्रकरण सुनवाई के दौरान वसूली योग्य अधिरोपित राशि जमा कर दी थी। इसलिए हुई कार्रवाई क्योंकि पेशी में तत्कालीन सरपंच अनुपस्थित रहे और न ही दिया जवाबआपको बता दें कि प्रकरण में सुनवाई हेतु विहित प्राधिकारी एवं जिला पंचायत के सीईओ श्री गेमावत ने ग्राम पंचायत डिहुंटा के तत्कालीन सरपंच (प्रधान) अंगद सिंह ठाकुर को वित्तीय अनियमितता को लेकर निर्धारित तिथि को उपस्थित होकर जवाब देने हेतु लेख किया था। किंतु श्री ठाकुर सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहे और जवाब प्रस्तुत नही किया। आरसीसी के तहत होगी वसूली और 6 साल के लिए निर्वाचन के लिए अयोग्य घोषित जिला पंचायत के सीईओ एवं विहित प्राधिकारी श्री गेमावत ने तत्कालीन सरपंच अंगद सिंह ठाकुर के विरुद्ध एक पक्षीय आदेश पारित करते हुए अधिरोपित वसूली योग्य राशि 36844 रुपए , भू राजस्व की भांति वसूल करने के निर्देश तहसीलदार बहोरीबंद को दिए हैं तथा कार्रवाई प्रारंभ होने की जाने से 6 वर्ष की कालावधि के लिए किसी पंचायत (या ग्राम निर्माण समिति तथा ग्राम विकास समिति या ग्राम सभा की समिति) का सदस्य होने के लिए निर्वाचन से निर्हरित घोषित किया है। शिकायतकर्ता प्रकाश चंद्र गुप्ता द्वारा सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से ग्राम पंचायत डिहुंटा में सुदूर सड़क निर्माण शांति नगर में बीच नहर की पुलिया से मुख्य नहर तक के निर्माण में फर्जी भुगतान की शिकायत की गई थी। शिकायत का परीक्षण,अनुश्रवण एवं जनपद पंचायत सीईओ बहोरीबंद से प्राप्त जांच प्रतिवेदन के अनुसार शासकीय धन का गबन और शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाया जाना परिलक्षित हुआ। तत्पश्चात आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण की जाकर उक्त कार्यवाही हुई।

MP में चने की सप्लाय में भी घोटाला, फफूंद लगा चना PDS के जरिए बांटने की तैयारी

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बैतूल। मध्यप्रदेश में घटिया अनाज वितरण के रोज नए घोटाले सामने आ रहे हैं। बालाघाट, मंडला,छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में बांटे गए घटिया चावल और गेहूं का मामला थमा भी नहीं था कि अब घटिया चना दूसरे प्रदेशों को भेजने का सनसनीखेज मामला बैतूल में सामने आया है। बैतूल से छत्तीसगढ़ भेजे जा रहे सौ टन चने की खेप में फफूंद लगा और घुन लगा चना मिला, जिसे रास्ते से ही वापस कर दिया गया। चने का भंडारण करने वाले एमपी लॉजिस्टिक वेयर हाउस कॉरपोरेशन की इसमे बड़ी लापरवाही सामने आई है। छत्तीसगढ़ भेजे जा रहे इस चने को वहां गरीबो में बांटा जाना था। लेकिन इसके फफूंद लगे और गुणवत्ता हीन होने की शिकायत के बाद घटिया सप्लाय का यह खेल उजागर हो गया। बताया जा रहा है कि साल 2018 में नेफेड ने समर्थन मूल्य पर चने की खरीदी की थी, जिसे वेयरहाउस कॉरपोरेशन के जरिये सरकारी और प्राइवेट वेयर हाउसो में रखा गया था। इस चने को कोरोना काल मे केंद्र सरकार ने गरीबों की मदद के लिए उन्हें राशन के तौर पर देने का फैसला किया है। फ्री में बांटे जाने वाले इस चने को छत्तीसगढ़ सरकार को देने के आदेश दिए गए थे। इसका ठेका रायपुर की अनाज कंपनी भारत दाल इंडस्टीज को सौंपा गया है। इसके घटिया होने का खुलासा तब हुआ जब कंपनी के ट्रक ड्राइवर और क्लीनरों को इसका वजन और क्वालिटी घटिया होने का संदेह हुआ और उन्होंने पूरे खेप की जांच करना शुरू किया। कम्पनी के ट्रक ड्राइवर बैतूल के चिचोली स्थित निजी वेयर हाउस से चार ट्रक में लगभग 100 टन चना लेकर रायपुर के लिए रवाना हुआ थे, लेकिन ड्राइवर को कम वजन और वाटर डैमेज का संदेह हुआ तो उसने ठेकेदार को इसकी सूचना दी। ठेकेदार की शिकायत पर एमपी वेयर हाउसिंग लॉजिस्टिक कॉरपोरेशन, बैतूल की टीम ने इनके सैम्पल लिए तो उसमें फफूंद वाला चना निकला। इसके अलावा चने में कचरा और उसमें घुने लगे होने के भी प्रमाण मिले। गड़बड़ी के उजागर होते ही चारो ट्रकों को तुरंत प्राइवेट वेयर हाउस वापस भेजा दिया गया। गड़बड़ी के सामने आने के बाद अधिकारी अब जांच करने की बात कर रहे हैं। वहीं, ठेकेदार का कहना है कि ऐसा चना तो गाय भी नहीं खाएगी। भले ही अधिकारी जांच की बात कर रहे हों, लेकिन इस मामले से साफ है कि वेयर हाउस में गड़बड़ी हो रही है। ठेकेदार ने एक ट्रक में 3 क्विंटल चना कम होने का भी संदेह व्यक्त किया है। अब तक बैतूल से 25 सौ टन चना छत्तीसगढ़ भेजा जा चुका है और चार से पांच सौ टन चना अभी और भेजा जाना बाकी है।

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