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उप मुख्यमंत्री देवडा ने खजुरिया सारंग में उप स्वास्थ्य केंद्र का किया भूमि पूजन

तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा – उप मुख्यमंत्री देवड़ा उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने खजुरिया सारंग में निर्मित होने वाले आयुष्मान आरोग्यम मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र का भूमि पूजन किया उप मुख्यमंत्री देवडा ने खजुरिया सारंग में उप स्वास्थ्य केंद्र का किया भूमि पूजन भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने मंदसौर जिले में ग्राम खजुरिया सारंग में 65 लाख रुपए की लागत से निर्मित होने वाले आयुष्मान आरोग्यम मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र का भूमि पूजन किया। कार्यक्रम में ग्राम खजुरिया सारंग के शिक्षक, शिक्षिका एवं 10वीं कक्षा में 85% लाने वाली बालिका कुमारी दिव्या पाटीदार का सम्मान किया गया। उप मुख्यमंत्री देवडा ने कहा कि तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा। हम सबको साथ मिलकर काम करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार जनता की हर मूलभूत आवश्यकता को पूरा करने का कार्य कर रही है। इसमें पीने का शुद्ध पानी, सड़क, बीमार के लिए इलाज का प्रबंध, पढ़ाई की व्यवस्था, घर, बिजली, युवाओं को रोजगार जैसी अनेक आवश्यकताओं को पूरा किया जा रहा है। यह देश हमारा परिवार है। प्रजातंत्र में जनता मालिक हैं। पहले बहुत से परिवार खुले आसमान के नीचे सोते थे, लेकिन पीएम आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवार को पक्के आवास मिले हैं। अभी जो भी आवास से वंचित हैं, उन्हें भी पीएम आवास योजना का लाभ दिया जा रहा है। सरकार का संकल्प है कि एक भी परिवार बिना पक्के मकान के नहीं रहेगा। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि पहले इलाज के अभाव में बहुत से लोगों की असामायिक मृत्यु हो जाती थी, लेकिन आयुष्मान कार्ड से अब हर व्यक्ति का निशुल्क 5 लाख तक का इलाज हो रहा है। यह आयुष्मान कार्ड गारंटी कार्ड हैं। प्रदेश में 70 से अधिक उम्र के व्यक्तियों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। उन्होंने उपस्थित जन समूह को स्वच्छता का संदेश दिया। इस अवसर पर मंदसौर विधायक विपिन जैन, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा विजय पाटीदार सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।  

मंत्री शाह ने बताया पीवीटीजी समुदाय के सभी जनजातीय बंधुओं के बड़ी तेजी से आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे

सबके उपचार का पुख्ता प्रबन्ध पीएम जन-मन में 7 लाख से अधिक पीवीटीजी आबादी के बने आयुष्मान कार्ड पीएम जन-मन में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों के विशेष प्राथमिकता से आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे मंत्री शाह ने बताया पीवीटीजी समुदाय के सभी जनजातीय बंधुओं के बड़ी तेजी से आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे भोपाल प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के विशेष प्राथमिकता से आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे हैं। प्रदेश में निवासरत बैगा, भारिया एवं सहरिया जनजातियां पीवीटीजी में आती हैं। नवम्बर 2024 के अंत तक पीवीटीजी समुदाय की कुल 7 लाख 85 हजार 324 लक्षित आबादी में से 7 लाख 969 आबादी के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं। लक्ष्य के विरूद्ध करीब 90 प्रतिशत सफलता हासिल कर ली गई है। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि पीवीटीजी समुदाय के सभी जनजातीय बंधुओं के बड़ी तेजी से आयुष्मान कार्ड बनाये जा रहे हैं। अब तक 7 लाख से अधिक पीवीटीजी आबादी के कार्ड बनाये जा चुके हैं। इससे अब इन सबको 5 लाख रूपये तक के नि:शुल्क उपचार की स्थायी सुविधा उपलब्ध हो गई है। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि पीएम जन-मन योजना प्रदेश के 24 पीवीटीजी बहुल जिलों में संचालित है। इन पीवीटीजी बहुल जिलों में शिवपुरी जिले में 1 लाख 33 हजार 369, श्योपुर 95 हजार 593, शहडोल 69 हजार 832, उमरिया 69 हजार 460, अशोकनगर में 49 हजार 613, गुना 44 हजार 622, मंडला 32 हजार 952, ग्वालियर 30 हजार 386, डिंडोरी 28 हजार 147, सिंगरौली 25 हजार 374, छिंदवाड़ा 24 हजार 854, विदिशा जिले में 22 हजार 140, सीधी 20 हजार 312, बालाघाट में 17 हजार 365, अनूपपुर में 16 हजार 197, दतिया 7 हजार 406, जबलपुर 5 हजार 65, सिवनी 2 हजार 215, नरसिंहपुर 2 हजार 126, मुरैना 1 हजार 625, रायसेन 1 हजार 269, कटनी में 780, भिंड में 214 तथा मैहर जिले में 53 पात्र पीवीटीजी व्यक्तियों के आयुष्मान कार्ड तैयार कर हितग्राहियों को वितरित भी किये जा चुके हैं। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि मैहर, रायसेन, कटनी एवं भिंड जिले के शत-प्रतिशत पीवीटीजी हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड़ बना दिये गये हैं। बाकी 20 जिलों के शेष रह गये पीवीटीजी हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड भी जल्द से जल्द तैयार कर वितरित कर दिये जायेंगे। आयुष्मान भारत (निरामयम) योजना में सभी को 5 लाख रूपये तक के नि:शुल्क उपचार का लाभ दिया जाता है। राज्य सरकार सभी पात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड तैयार कर सबके नि:शुल्क स्वास्थ्य उपचार की दिशा में बेहद संवेदनशील होकर इस दिशा में प्रयासरत है।  

रोहिंग्या शरणार्थियों को पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जम्मू कश्मीर सरकार की जिम्मेदारी: अब्दुल्ला

कठुआ/जम्मू नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि क्षेत्र में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जम्मू कश्मीर सरकार की जिम्मेदारी है। अब्दुल्ला ने कठुआ के दौरे के दौरान संवाददाताओं से कहा, ‘भारत सरकार शरणार्थियों को यहां लेकर आई। हम उन्हें यहां नहीं लाए। उन्होंने उन लोगों को यहां बसाया है और जब तक वे यहां हैं, उनके लिए पानी और बिजली मुहैया कराना हमारा कर्तव्य है। यह हमारी जिम्मेदारी है।’ उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जम्मू शहर में रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों के बसने को एक बड़ी ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया था और इसमें शामिल लोगों की पहचान के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग की थी। जम्मू में उन्हें पानी और बिजली कनेक्शन देने संबंधी टिप्पणी को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) सरकार पर निशाना साधते हुए भाजपा ने यह भी आरोप लगाया था कि ऐसा उन्हें बचाने के लिए किया गया है, क्योंकि वे (रोहिंग्या और बांग्लादेशी) एक विशेष समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 13,700 से ज्यादा विदेशी जम्मू और दूसरे जिलों में बसे हुए हैं जिनमें से अधिकतर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक हैं। वर्ष 2008 से 2016 के बीच उनकी आबादी में 6,000 की वृद्धि हुई है। अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की भी जोरदार वकालत की और कहा कि जम्मू कश्मीर में केवल एक ही सत्ता केंद्र होगा। उन्होंने कहा, ‘डबल इंजन वाली सरकार यहां काम नहीं करेगी। राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। जम्मू कश्मीर में सत्ता का केवल एक ही केंद्र होगा।’ बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा, ‘भारत सरकार को इस पर गौर करना चाहिए। यह आरएसएस के नेतृत्व वाली सरकार है। हमें इस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है।’ जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के सवाल पर अब्दुल्ला ने फिर से कहा, ‘राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। यह भारत सरकार का वादा है और उच्चतम न्यायालय के सामने भी इसका वादा किया गया है। जिस तरह उनके चुनावी वादे पूरे किए गए, उसी तरह उच्चतम न्यायालय की प्रतिबद्धता का भी सम्मान किया जाएगा और राज्य का दर्जा वापस आएगा।’ अब्दुल्ला ने क्षेत्र में बिजली कटौती के मुद्दे पर कहा कि इसके लिए बारिश और बर्फबारी की कमी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, ‘हम बिजली कटौती को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। बर्फबारी या बारिश न होने की वजह से बिजली की कमी है। बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।’ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती के हिंदुत्व पर दिए गए हालिया बयानों के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा, ‘मुझे उनके बयानों पर टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है।’ जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘ईवीएम को लेकर सवाल आज ही नहीं उठे हैं, बल्कि जब से ये मशीनें आई हैं, तब से उठ रहे हैं। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोग इन मशीनों पर भरोसा करें।’ जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए अब्दुल्ला ने कहा, ‘कई शिक्षित लड़के और लड़कियां बेरोजगार हैं। कई रिक्तियां हैं, लेकिन उन्हें भरा नहीं गया है। सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए ताकि हमारे युवाओं को काम मिल सके।’ अब्दुल्ला ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा और शैक्षिक बुनियादी ढांचे की स्थिति की भी आलोचना की और कहा कि इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है।  

प्रियंका चतुर्वेदी ने अमित शाह को पत्र है, बेलगावी (बेलगाम) को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग

मुंबई शिवसेना (यूबीटी) नेता और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह को पत्र है, जिसमें उन्होंने बेलगावी (बेलगाम) को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग की है। प्रियंका चतुर्वेदी ने पत्र में कहा कि महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर बेलगावी सहित कई शहरों और गांवों को लेकर सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। कर्नाटक विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत के साथ ही तनाव बढ़ गया है, जिसके कारण बेलगावी में महाराष्ट्र एकीकरण समिति (एमईएस) के कार्यकर्ताओं और नेताओं को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, शुरुआत में यह घोषणा की गई थी कि एमईएस की महा मेलावा रैली और अन्य शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों की अनुमति दी जाएगी, लेकिन पुलिस ने अब रैली को रोकने के लिए व्यापक व्यवस्था की है, जिससे शहर में तनाव और बढ़ गया है। उन्होंने पत्र में आगे कहा कि 2022 में, केंद्र ने दोनों राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक कोई भी कार्रवाई न करें। इसके बावजूद, कर्नाटक विधानसभा ने महाराष्ट्र को किसी भी प्रकार की जमीन देने से रोकने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया। इसके जवाब में, महाराष्ट्र विधानसभा ने मराठी भाषी गांवों को अपने राज्य में शामिल करने के लिए कानूनी रूप से आगे बढ़ने के लिए एक जवाबी प्रस्ताव पारित किया, जो इस विवादास्पद मुद्दे पर आम सहमति की कमी को उजागर करता है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई लंबित है, एमईएस की ओर से प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए बार-बार अनुरोध किया गया है। शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि दोनों राज्य सरकारों के बीच आम सहमति की कमी और आगे भी अशांति की संभावना को देखते हुए, मैं आपसे (अमित शाह) बेलगावी को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने पर विचार करने का आग्रह करता हूं। इससे शहर में सीमा विवाद को सुलझाने में मदद मिलेगी और नागरिकों को न्याय सुनिश्चित होगा, साथ ही केंद्रीय शासन के माध्यम से सभी भाषाई समुदायों को समायोजित किया जा सकेगा। बता दें कि बेलगाव या बेलगावी विवाद महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच एक लंबे समय से चली आ रही सीमा विवाद है। यह विवाद मुख्य रूप से बेलगावी जिले को लेकर है। वर्तमान में यह जिला कर्नाटक का हिस्सा है। 1956 में जब भारत में राज्यों का पुनर्गठन भाषाई आधार पर किया गया, तब बेलगावी जिले को कर्नाटक को आवंटित किया गया था। महाराष्ट्र का कहना है कि इस जिले में मराठी भाषी लोगों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए यह क्षेत्र भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से महाराष्ट्र का हिस्सा होना चाहिए। जबकि कर्नाटक का तर्क है कि बेलगावी सदियों से कर्नाटक का हिस्सा रहा है। यहां की संस्कृति कन्नड़ संस्कृति से गहरे जुड़ी हुई है।  

महाराष्ट्र चुनाव को लेकर EC ने खारिज किए विपक्ष के दावे, कहा- VVPAT और EVM के आंकड़ों में कोई भी असमानता नहीं

मुंबई हाल ही में संपन्न हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में विपक्ष द्वारा लगाए गए वोटों में गड़बड़ी के आरोपों को मुख्य चुनाव अधिकारी ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि VVPAT (वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) और EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के आंकड़ों में कोई भी असमानता नहीं पाई गई है। महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी ने अपने बयान में कहा, “हमने प्रत्येक मतदान केंद्र पर EVM और VVPAT का मिलान किया है और सभी परिणाम एकदम सटीक पाए गए हैं। यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना नहीं है।” सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रैंडम तरीके से चयनित पांच मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों की गिनती करना और ईवीएम में संख्याओं के साथ उसका मिलान करना अनिवार्य है। महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र में मतगणना के दिन 23 नवंबर को प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रैंडम तरीके से चयनित 5 मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों की गणना, मतगणना पर्यवेक्षक और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों के सामने की गई। अधिकारी ने कहा, “इसके अनुसार, महाराष्ट्र राज्य के 288 विधानसभा क्षेत्रों से 1440 वीवीपीएटी यूनिट की पर्ची काउंट को संबंधित नियंत्रण इकाई डेटा के साथ मिलान किया गया है। संबंधित जिला चुनाव अधिकारियों (डीईओ) से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार वीवीपीएटी पर्ची गणना और ईवीएम नियंत्रण इकाई गणना के बीच कोई विसंगति नहीं पाई गई है। ईसीआई द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया है।”   विपक्ष ने उठाए थे सवाल विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि मतदान के दौरान EVM में छेड़छाड़ की गई है और VVPAT की पर्चियों से वोटों का मिलान नहीं हो रहा है। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने चुनाव आयोग से चुनाव परिणाम की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। हालांकि, मुख्य चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है। महाराष्ट्र विधानसभा के 95 निर्वाचन क्षेत्रों के 104 उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग से ईवीएम और वीवीपैट डेटा का सत्यापन और मिलान करने की मांग की थी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के मुताबिक 31 जिलों को कवर करने वाले 95 विधानसभा क्षेत्रों से पुनः सत्यापन की मांग की गई थी। पिछले महीने आए चुनावी नतीजों में शिवसेना, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखी तथा एमवीए को हाशिये पर धकेल दिया। महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय विधानसभा में महायुति गठबंधन को 230 सीट और एमवीए को केवल 46 सीट मिलीं। ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) 20 सीट जीतकर विपक्षी खेमे में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, उसके बाद कांग्रेस ने 16 सीटें जीतीं, जबकि राकांपा (शरदचंद्र पवार) 10 सीट के साथ सबसे पीछे रही।

कुलदीप सिंह सेंगर को मेडिकल ग्राउंड पर दी अंतरिम जमानत, दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को 20 दिसंबर तक के लिए मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत दी है। कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की सजा काट रहा है। जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने मेडिकल ग्राउंड पर कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को 20 दिसंबर तक के लिए अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में जेल की सजा काट रहे कुलदीप सिंह सेंगर को दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को एम्स में भर्ती होने और मेडिकल बोर्ड की देखरेख में जांच कराने का निर्देश दिया था। इससे पहले साल 2023 में कुलदीप सिंह सेंगर को बेटी की शादी में शामिल होने के लिए जमानत दी गई थी। कुलदीप सिंह सेंगर पोक्सो मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। कुलदीप सिंह सेंगर ने मेडिकल ग्राउंड पर सजा के अंतरिम निलंबन की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अधिवक्ता कन्हैया सिंघल ने अपनी दलील में कहा कि कुलदीप सिंह सेंगर को इससे पहले पोक्सो मामले में मेडिकल ग्राउंड पर दो हफ्ते के लिए राहत दी गई थी। उनकी सजा पर अदालत ने दो हफ्ते के लिए अंतरिम रोक लगाई थी। बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 दिसंबर को मेडिकल आधार पर कुलदीप सिंह सेंगर को दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी थी लेकिन वह बाहर नहीं आ सके थे। वकील सिंघल ने अपनी दलील में कहा कि हिरासत में मौत के मामले में सजा निलंबित होने का आदेश नहीं होने के कारण कुलदीप सिंह सेंगर जेल से बाहर इलाज के लिए नहीं आ सके थे। कुलदीप सेंगर को 2018 में उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराया गया था। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस अमित शर्मा की खंडपीठ ने इलाज के लिए कुलदीप सिंह सेंगर को दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दी। हालांकि कुलदीप सेंगर के वकील ने इलाज के लिए 30 दिनों के लिए सजा को निलंबित करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि सेंगर को कम से कम 2 से 3 दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाए। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद, वह जांच अधिकारी के संपर्क में जानकारी वाली जगह पर रहेंगे। वह दिल्ली नहीं छोड़ेंगे।

पहले करेंसी नोटों से शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर हटाई गई और अब ‘जय बांग्ला’ को राष्ट्रीय नारे के दर्जे से भी हटाया

ढाका बांग्लादेश में एक के बाद एक शेख मुजीबुर्रहमान की निशानियों को मिटाया जा रहा है। पहले करेंसी नोटों से शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर हटाई गई और अब ‘जय बांग्ला’ को राष्ट्रीय नारे के दर्जे से भी हटा दिया गया है। यह कदम अंतरिम सरकार द्वारा हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को चुनौती देने के बाद उठाया गया। दरअसल ‘जय बांग्ला’ नारा 1971 के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक रहा है और इसे बांग्लादेश के पहले प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर्रहमान ने जन-जन में लोकप्रिय बनाया। 2020 में शेख हसीना सरकार के दौरान हाई कोर्ट ने इसे राष्ट्रीय नारा घोषित किया था। अदालत ने कहा था कि सरकारी कार्यक्रमों, राष्ट्रीय दिवसों और शैक्षिक संस्थानों में इसका उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने लगाई हाई कोर्ट के फैसले पर रोक मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की अपील डिवीजन ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगाते हुए ‘जय बांग्ला’ को राष्ट्रीय नारे का दर्जा समाप्त कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सैयद रिफात अहमद की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय बेंच ने यह निर्णय लिया। अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल अनिक आर हक ने कहा, “‘जय बांग्ला’ अब राष्ट्रीय नारे के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं रहेगा।” पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश के राजनीतिक और सांस्कृतिक प्रतीकों में बदलाव तेजी से हुआ है। शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर को पहले ही बैंक नोटों से हटा दिया गया था। अब ‘जय बांग्ला’ पर हुई कार्रवाई से यह सवाल उठने लगा है कि क्या बांग्लादेश की नई अंतरिम सरकार शेख मुजीब की विरासत को खत्म करने की कोशिश कर रही है? हसीना के जाते ही बदलने लगी बांग्लादेश की तस्वीर 5 अगस्त को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर बदलाव देखे जा रहे हैं। ‘जय बांग्ला’ को हटाए जाने को इस बदलाव का अहम हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, यह नारा न केवल राजनीतिक पहचान था बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम का भावनात्मक प्रतीक भी था। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के इस कदम ने देश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। मुजीब समर्थक इसे स्वतंत्रता संग्राम और उनकी विरासत के खिलाफ साजिश मान रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार इसे ‘न्यायिक प्रक्रिया’ का हिस्सा बता रही है। क्या ‘जय बांग्ला’ का हटना महज एक कानूनी निर्णय है, या यह इतिहास बदलने की एक सोची-समझी रणनीति? यह सवाल बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम है।

जस्टिस शेखर यादव ने कहा था कि देश बहुसंख्यक के हिसाब से चलेगा, इस बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

नई दिल्ली इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस शेखर यादव के बयान का सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जवाब मांगा है। दरअसल, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के एक कार्यक्रम में जस्टिस शेखर यादव ने कहा था कि देश बहुसंख्यक के हिसाब से चलेगा। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “सुप्रीम कोर्ट ने समाचार पत्रों में छापे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश शेखर कुमार यादव के भाषण का संज्ञान लिया है। उच्च न्यायालय से ब्योरा मंगवाया गया है। मामला विचाराधीन है। वीएचपी के कार्यक्रम में दिया था भाषण आठ दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के लाइब्रेरी हॉल में विश्व हिंदू परिषद के विधि प्रकोष्ठ ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, लैंगिक समानता और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देना है। एक दिन बाद न्यायाधीश एक वीडियो सामने आया। शाहबानो केस का किया जिक्र जस्टिस शेखर यादव ने कहा कि जब देश और संविधान एक हैं तो कानून एक क्यों नहीं है? अपने भाषण में जस्टिस यादव ने शाहबानो केस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि तीन तलाक गलत है। मगर उस समय की सरकार को झुकना पड़ा।

आरक्षण की मांग को लेकर कर्नाटक में लिंगायत समुदाय ने की मांग, विरोध प्रदर्शन में पुलिस ने किया लाठीचार्ज

बेंगलुरु कर्नाटक के बेलगावी में लिंगायतों के सबसे बड़े उप-संप्रदाय पंचमसाली समुदाय आरक्षण की मांग पर प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन मंगलवार को उनका आंदोलन तब हिंसक हो गया, जब इस समुदाय के धार्मिक प्रमुख बसवजय मृत्युंजय स्वामीजी के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरा तोड़कर विधान सौध (विधानसभा) की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। सोमवार से ही विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने धमकी दी थी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे विधान सौध का घेराव करेंगे। आज जब प्रदर्शनकारी इसी मंशा से विधान सभा की ओर बढ़ने लगे और बैरिकेडिंग तोड़ी तो पुलिस ने उन्हें खदेड़ने के लिए उन पर लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने इस दौरान भाजपा के कई सांसदों और मृत्युंजय स्वामीजी के साथ-साथ उनके कई समर्थकों को ऐहतियातन हिरासत में लिया है। इस घटना के बाद सड़क पर जूते बिखरे पड़े मिले। लाठीचार्ज से पहले प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बहस भी हुई। बता दें कि स्वामी ने मंगलवार को बेलगावी में ट्रैक्टर रैली की योजना बनाई थी, लेकिन जिला प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर दी और शहर में ट्रैक्टरों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। दरअसल, कुदाल संगम के पंचमसाली गुरु पीठ के पुजारी दिसंबर 2012 से ही पंचमसाली समुदाय को अन्य पिछड़ी जातियों की 2ए श्रेणी के अंतर्गत लाने के लिए राज्य सरकार पर दबाव डाल रहे हैं। यह समुदाय फिलहाल 3बी श्रेणी के अंतर्गत आता है और सरकारी शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में इसे पांच प्रतिशत आरक्षण मिलता है। उनकी मांगें अगर पूरी हो जाती हैं तो समुदाय को 15 प्रतिशत आरक्षण मिल सकेगा। लिंगायतों को कर्नाटक में सबसे बड़ा जाति समूह माना जाता है और यह राज्य की आबादी का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा है। यह सब अनौपचारिक अनुमानों के आधार पर कहा जाता है क्योंकि इस दावे का साबित करने के लिए कोई अनुभवजन्य डेटा उपलब्ध नहीं है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने संत से मुलाकात की और उनके संघर्ष को समर्थन दिया। विजयेंद्र ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने स्वामी को बताया कि जब उनके पिता बी एस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री थे, तो पंचमसाली समुदाय को 3बी के तहत आरक्षण दिया गया था। उन्होंने कहा कि यह धारणा बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि भाजपा इस संघर्ष का समर्थन नहीं करती है क्योंकि येदियुरप्पा इसके विरोध में हैं, जो गलत है और सच्चाई से कोसों दूर है।

‘बेटी की शादी पर 1 लाख रुपए देगी दिल्ली सरकार’, किये 5 बड़े ऐलान, ऑटो चालकों के साथ मेरा पुराना रिश्ता- केजरीवाल

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के ऑटो चालकों के लिए पांच बड़े ऐलान किए हैं। उन्होंने कहा कि अब किसी भी ऑटो चालक की बेटी की शादी होगी तो दिल्ली सरकार उसे एक लाख रुपए की मदद देगी। इसके अलावा, हर ऑटो चालक को 10 लाख रुपए का लाइफ इंश्योरेंस और 5 लाख रुपए का हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा। ऑटो चालकों के साथ मेरा पुराना रिश्ता- केजरीवाल केजरीवाल ने ऑटो चालकों के साथ अपने पुराने रिश्ते का जिक्र करते हुए कहा, “मेरा ऑटो चालकों के साथ बहुत पुराना रिश्ता है। 2013 में जब मेरी पार्टी नई थी और दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी, तब ऑटो चालकों को अक्सर तिरस्कृत किया जाता था। उस समय मैंने ऑटो चालकों के समर्थन में सभा की थी। ये लोग व्यवस्था के शिकार हैं और अगर हमारी सरकार बनी तो हम सिस्टम को ठीक करेंगे।”     सरकार बनने के बाद हमने काफी सुधार किए उन्होंने आगे कहा, “हमारी सरकार बनने के बाद हमने कई सुधार किए हैं। हाल ही में मैंने ऑटो चालकों के साथ अपने घर पर बैठक की थी, जहां मुझे बहुत अच्छे से भोजन पर आमंत्रित किया गया था। मैं कह सकता हूं कि मैंने ऑटो चालकों का नमक खाया है।” बताते चलें कि, 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा के लिए चुनाव अगले साल फरवरी में होने हैं। भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ खड़ी आप लगातार तीसरी बार सत्ता बरकरार रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। 

श्री माता वैष्णो देवी के भक्तों के लिए भक्तों की सहूलियत के लिए रोप-वे की सुविधा जल्द मिलने जा रही

जम्मू-कश्मीर श्री माता वैष्णो देवी के भक्तों के लिए खुशी भरी खबर सामने आई है। 31 दिसंबर से 1 जनवरी तक भारी संख्या में भक्त माता के दरबार पहुंचते हैं। इसी बीच साल के आखिर तक भक्तों की सहूलियत के लिए रोप-वे की सुविधा मिलने जा रही है। वहीं जल्द ही माता के भक्तों को भवन पर पहली बार यज्ञ और फैमिली रूम्स की सुविधा भी मिलने जा रही है। बता दें कटरा से भवन तक रोप-वे से लोगों का सफर आसान हो जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सीईओ ने बताया की 2025 के लिए पाइपलाइन में कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।  परिवार के कमरों के साथ नया वैष्णवी भवन, ऑल वेदर क्यू कंप्लेक्स जल्द ही तैयार हो जाएगा, जिससे यहां आने वाले भक्तों को काफी सुविधा मिलेगी। इसी के साथ नए साल पर माता के दरबार में भारी संख्या में भक्तों के आने को लेकर सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। बता दें कि श्री माता वैष्णो देवी के दरबार हर साल लाखों भक्त दर्शने के लिए पहुंचते हैं। पहाड़ों और बादलों के बीच स्थित माता वैष्णो देवी का दरबार बेहद खास माना जाता है। वैष्णो देवी मंदिर तक की यात्रा को कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक माना जाता है। वैष्णो देवी दरबार जम्मू-कश्मीर स्थित त्रिकूट पर्वत पर एक गुफा में है, जहां तक पहुंचने के लिए 12 किलोमीटर की मुश्किल चढ़ाई करनी पड़ती है। ये यात्रा भले ही कठिन है, लेकिन यहां का दृश्य बेहद अलौकिक है, जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। 

लोकसभा अध्यक्ष ने संसद परिसर में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के विरोध प्रदर्शन के तौर-तरीकों को अशोभनीय बताया

नई दिल्ली लोकसभा में विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के कारण मंगलवार को भी प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सका और कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दोपहर करीब 12.17 बजे दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद परिसर में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के विरोध प्रदर्शन के तौर-तरीकों को अशोभनीय तथा प्रतिपक्ष के बड़े नेताओं के आचरण को संसदीय परंपराओं को प्रतिकूल बताया और कहा कि सभी को संसद की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा को बनाए रखना चाहिए। बिरला ने लोकसभा की कार्यवाही पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होने पर इस विषय का उल्लेख किया और अफसोस जताया। इस दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों ने अपने मुद्दे उठाने का प्रयास करते हुए हंगामा किया जिसके चलते सदन की कार्यवाही आरंभ होने के करीब पांच मिनट बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर 12 बजे सदन की बैठक पुन: शुरू होने पर पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने आवश्यक कागजात सदन के पटल पर प्रस्तुत कराए। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने ‘वाणिज्य पोत परिवहन विधेयक, 2024′ हंगामे के बीच ही प्रस्तुत किया। सैकिया ने विपक्ष के सदस्यों से कार्यवाही चलने देने का आग्रह करते हुए कहा, ‘‘आपके कारण सदन नहीं चल रहा, ऐसा संदेश नहीं जाना चाहिए।” संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘आपके शर्मनाक व्यवहार की वजह से सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है, इसके लिए आपको माफी मांगनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस और देश विरोधी ताकतों से क्या रिश्ते हैं, पता चलना चाहिए और इसके लिए विपक्षी दल को सदन में माफी मांगनी चाहिए। रीजीजू ने कांग्रेस और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ये लोग जॉर्ज सोरोस के साथ तालमेल करके देश के खिलाफ काम करते हैं और रग-बिरंगे पहनकर आपत्तिजनक बातें करते हैं।.पीठासीन सभापति सैकिया ने आसन के समीप हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से अपने स्थान पर जाने और कार्यवाही चलने देने की अपील की। जिसका कोई असर नहीं होने पर उन्होंने कार्यवाही करीब 12 बजकर 17 मिनट पर बुधवार पूर्वाह्न 11 बजे तक स्थगित कर दी। गौरतलब है कि भाजपा पिछले कुछ दिन से कांग्रेस, पार्टी नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर सोरोस के साथ देश की सरकार, संसद और अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने के लिए काम करने का आरोप लगा रही है। इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी दलों द्वारा संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किए जाने का उल्लेख सदन में किया और क्षोभ जताया। एक दिन पहले ही नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उद्योगपति गौतम अदाणी का मुखौटा पहने दो कांग्रेस सांसदों का प्रतीकात्मक साक्षात्कार करते हुए सरकार एवं प्रधानमंत्री पर निशाना साधा था। कांग्रेस सांसद शिवाजी कलगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मणिकम टैगोर ने उद्योगपति गौतम अदाणी का मुखौटा पहन रखा था। पार्टी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा के कुछ नेताओं के आरोपों से जुड़े मुद्दे उठाने का भी प्रयास कर रही है। कांग्रेस तथा कई अन्य विपक्षी दल अदाणी मामले को लेकर संसद परिसर में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष का हंगामा अशोभनीय-  ओम बिरला बिरला ने मंलगवार को सदन में कहा, ‘‘संसद एक पवित्र स्थल है और इस भवन की उच्च गरिमा, प्रतिष्ठा और मर्यादा है। इसी भवन में हमने आजादी प्राप्त की है। यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था है। इस संस्था में लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा किया जाता है। सहमति-असहमति हमारे लोकतंत्र की परंपरा रही है, जो संविधान बनते समय भी हमने अभिव्यक्त की थी।” उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों से मैं देख रहा हूं कि संसद परिसर में जिस प्रकार के प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जिस प्रकार के नारे, पोस्टर और मुखौटों का उपयोग किया जा रहा है, वह न सिर्फ अशोभनीय है, बल्कि हमारी नियम प्रक्रियाओं और संसदीय परंपराओं के अनुरूप भी नहीं है।” अध्यक्ष को सत्तापक्ष का भी नाम लेना चाहिए- कांग्रेस बिरला ने कहा, ‘‘मुझे बहुत अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि इसमें प्रतिपक्ष के बड़े नेताओं का आचरण-व्यवहार भी संसदीय व्यवहार के अनुकूल नहीं है।” इस पर कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों ने टोका-टोकी करते हुए कहा कि अध्यक्ष को सत्तापक्ष का भी नाम लेना चाहिए। इस पर बिरला ने कहा कि चाहे सत्तापक्ष हो या प्रतिपक्ष हो, सभी दलों के लोग संसद की गरिमा, परंपरा, मर्यादा और प्रतिष्ठा को बनाए रखें। उन्होंने कहा, ‘‘मर्यादित आचरण रखेंगे तो जनता में सकारात्मक संदेश जाएगा। इस लोकतंत्र के मंदिर के प्रति लोगों की बहुत गहरी आस्था और विश्वास है। आजादी के 75 वर्ष में हमने यहां चर्चा, संवाद और तीखी आलोचना देखी है। यह यहां की परंपराएं रही हैं।” बिरला ने सदस्यों से अपील की, ‘‘आप सकारात्मक सहयोग करें। जो मुद्दे हैं उन पर आप आकर चर्चा करें। सत्तापक्ष से प्रतिपक्ष के लोग बैठकर चर्चा करें, सदन को चलाने का प्रयास करें।”

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिन्दुओं से की अपील- बात को उठाओ ताकि पता चले हिंदुत्व बीमारी है या दवा

भोपाल   जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी इल्तिजा मुफ्ती हिंदुत्व को लेकर दिए बयान से सत्ता पक्ष समेत संत समाज के निशाने पर हैं। अब इस मुद्दे पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश धीरेंद्र शास्त्री ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इल्तिजा को ‘मूर्ख’ बताते हुए अपने दिमाग का इलाज कराने की नसीहत दे दी। पंडित धीरेंद्र शास्त्री हिंदुत्व को लेकर विवादित बयान देने वाली इल्तिजा मुफ़्ती पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि इल्तिजा मूर्ख हैं। उन्हें अपने दिमाग का इलाज कराना चाहिए। हिंदुत्व वह है जो बेटी में गौरी और नर में नारायण देखता है धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, “मुझे लगता है कि उन्हें वो मूर्ख हैं। हिंदुत्व एक जीवन शैली है। हिंदुत्व एक जीवन जीने की विचार धारा है। इस संसार में एकता के लिय सबसे अति आवश्यक हिंदुत्व है। हिंदुत्व इस देश और पूरी दुनिया के लिय एक दवा है। हिंदुत्व वो है जो वसुधैव कुटुम्बकम की चर्चा करता है। हिंदुत्व वो है जो सब में राम देखता है। हिंदुत्व वो है जो नर में नारायण देखता है। हिंदुत्व वह है जो बेटी में गौरी देखता है। हिन्दुओं से की अपील- बात को उठाओ ताकि पता चले हिंदुत्व बीमारी है या दवा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदुओं से अपील की है कि आप लोग आगे आकर इस बात को पुरजोर तरीके से उठाओ ताकि ऐसे लोगों को पता चल सके कि हिंदुत्व बीमारी है या दवा। विरोध के बाद इल्तिजा मुफ्ती बोली- हिंदू नहीं हिंदुत्व के खिलाफ कहा अपने बयान के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा था, “यह महात्मा गांधी का भारत है। मैंने हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं, हिंदुत्व के खिलाफ बोला है। मैंने वीर सावरकर के इस फिलॉसफी के खिलाफ बोला है कि भारत केवल हिंदुओं के लिए है। मैं जानती हूं कि हिंदू धर्म एक ऐसा धर्म है जो शांति और करुणा को बढ़ावा देता है। मैं हिंदुत्व के खिलाफ हूं क्योंकि यह एक बीमारी है जिसे जड़ से खत्म करने की जरूरत है।” क्यों हो रहा विवाद? दरअसल, रतलाम का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा था, जिसमें एक युवक विशेष समुदाय के तीन बच्चों को थप्पड़ और चप्पल से पीटते हुए उनसे ‘जय श्री राम’ बुलवा रहा है। इस वायरल वीडियो पर इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा था, “यह सब देखकर राम भी बेबसी और शर्म से सिर झुका लेंगे, कि उनके नाम का इस्तेमाल करके नाबालिग मुस्लिम बच्चों को सिर्फ इसलिए चप्पलों से मारा जा रहा है क्योंकि उन्होंने राम का नाम लेने से इनकार किया। हिंदुत्व एक बीमारी है जिसने लाखों भारतीयों को प्रभावित किया है और भगवान के नाम को कलंकित किया है।”

जनता दर्शन में आए लोगों से योगी न कहा- तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में रात्रि प्रवास के बाद मंगलवार सुबह जनता दर्शन में आए लोगों से मुलाकात की। सीएम ने लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन समस्याओं का समाधान जल्द किया जाए। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीएम योगी ने कहा कि हर समस्या का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और संतुष्टिपरक होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनता की हर समस्या का समाधान सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन में कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक सीएम योगी खुद पहुंचे और एक-एक करके सभी की समस्याएं सुनीं। उन्होंने करीब 150 लोगों से मुलाकात की। सीएम ने सभी को आश्वस्त किया कि हर व्यक्ति को न्याय दिलाया जाएगा। सभी के प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए तत्काल निस्तारण का निर्देश देने के साथ ही सीएम ने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए। हर पीड़ित के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उसकी सहायता की जानी चाहिए। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले, कमजोरों को उजाड़ने वाले किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री के समक्ष जनता दर्शन में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी। उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी एस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करा कर शासन को उपलब्ध कराया जाए। गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह सीएम योगी की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने प्रातःकाल गोरखनाथ मंदिर में गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर मत्था टेका। सीएम योगी जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं तो गोसेवा उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रहती है। मंगलवार सुबह वह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए मंदिर की गोशाला में पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया। गोवंश को दुलार कर उन्होंने अपने हाथों से उन्हें गुड़ खिलाया। इस दौरान एक गोवंश के साथ सीएम योगी स्नेहिल भाव से कुछ देर खेलते भी रहे।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है: केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल

चंडीगढ़ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “30-40 साल पहले 30 फीसद के अंदर ही शहरीकरण था। अब यह 70 फीसद क्रॉस कर गया है। पिछले 10 साल हमारे लिए महत्वपूर्ण रहे। हमने बहुत काम किया। पिछले 10 सालों में हमने 2014 से 2024 तक बहुत कुछ हासिल किया है। अब इस कार्यकाल में 6 महीने हो गए हैं।” उन्होंने कहा, “कई योजनाओं का विस्तार धीरे-धीरे कर रहे हैं और उसकी गति पहले से ज्यादा कैसे तेज हो, इसके लिए भी बहुत काम किए हैं।” उन्होंने कहा, “इस बार यह तय किया गया है कि बिना मांग के भी पहले चरण में आवासों को सैंक्शन दिया जाएगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया, क्योंकि मांग आने में बहुत समय लगता है, और उसके बाद प्रक्रिया पूरी करने में भी समय लग जाता है। खासतौर पर, पांच साल के इस प्रोग्राम में शहरी क्षेत्र में एक करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य है, और उसका एक छोटा हिस्सा यानी लगभग 6 फीसद या 7 फीसद पहले चरण में अनुमोदित किया जाएगा।” उन्होंने कहा, “इसमें एक विशेष पहल की गई है कि कुछ राज्यों को पहले ही अनौपचारिक सैंक्शन मिल जाएगा, और यह सात लाख मकानों के लिए होगा। इस सैंक्शन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इन राज्यों में जितने मकान निर्धारित हैं, उन्हें इस साल पूरा किया जा सके। यह एक तरह का प्रावधान होगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि इन राज्यों को सैंक्शन मिलने पर उनके पास इस साल के लिए एक निश्चित संख्या में मकानों की गारंटी होगी।” उन्होंने कहा, “हम प्रधानमंत्री आवास योजना में जो भी डिमांड आती थी, उसके हिसाब से आवासों का आवंटन करते थे। लेकिन, इस बार यह तय किया गया है कि जो डिमांड आती है, उसे सेंक्शन करने में बहुत समय लग जाता है। इसलिए पहले चरण का जो हमारा सैंक्शन है, वह डिमांड के बिना किया जाएगा, क्योंकि यह पांच साल का प्रोग्राम है। इस पांच साल के प्रोग्राम में एक करोड़ मकान शहरी क्षेत्र में बनाए जाने हैं। इसका एक छोटा हिस्सा, यानी छह या सात प्रतिशत, अभी तय नहीं है।” उन्होंने कहा, “अगर किसी राज्य में किसी कारणवश किसी प्रकार का घाटा होता है, तो हम पहले किस्त के पैसे का ट्रांसफर कर देंगे। इसके अलावा, जो भी डिमांड 31 मार्च तक आएगी, उसकी समीक्षा कर अगले वर्षों के लिए सैंक्शन प्रारंभ में ही बता दिए जाएंगे। ताकि कोई भी लाभार्थी या निर्माण करने वाला व्यक्ति यह जान सके कि पांच साल में उसे कब मकान मिलेगा।”  

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