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आदि और अंत से परे है सनातन : कंगना रनौत का बड़ा बयान

मुंबई  बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने हाल ही में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। समिति के अनुसार, केदारनाथ और बद्रीनाथ समेत कई मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश को वर्जित किया जाएगा। अब केवल वही गैर-हिंदू मंदिर में प्रवेश कर पाएंगे, जो प्रवेश से पहले सनातन धर्म में आस्था का औपचारिक शपथ पत्र जमा करते हैं, जिससे मंदिर में दर्शन की अनुमति मिलेगी। फैसले को लेकर मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने उदाहरण देते हुए अभिनेत्री सारा अली खान का नाम जोड़ा। उन्होंने कहा कि अगर सारा अली खान जैसी हस्ती भी केदारनाथ आती हैं, सनातन में अपनी आस्था जताती हैं और अगर एफिडेविट देती हैं, तो उन्हें दर्शन से नहीं रोका जाएगा। अभिनेत्री अक्सर केदारनाथ के दर्शन के लिए जाती रहती हैं। साल 2018 में उन्हें अपनी पहली फिल्म ‘केदारनाथ’ की शूटिंग के दौरान इस स्थान से विशेष लगाव हो गया था। बुधवार को भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने संसद परिसर आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सारा को यह कहने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि वे भी सनातन धर्म में विश्वास रखती हैं और अगर बद्रीनाथ और केदारनाथ में दर्शन करना चाहती हैं, तो वे लिखित रूप में दें। यहां पर सभी लोग सनातनी हैं, क्योंकि जन्म से ही हम इस परंपरा से जुड़े हुए हैं। ‘सनातन’ का अर्थ है, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत। कंगना ने आगे कहा कि सारे अन्य धर्म कुछ ही साल पुराने हैं, लेकिन सनातन ही सत्य है और अनादि-अनंत है, तो मुझे लगता है कि सारा को शपथ पत्र देने में कोई घबराहट नहीं होनी चाहिए। अभिनेत्री ने आगे लोकसभा के नेता विपक्ष राहुल गांधी के व्यवहार पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का संसद में व्यवहार अमर्यादित है। कंगना ने कहा, “वे तू-तड़ाक करके बोलते हैं। अगर कोई इंटरव्यू दे रहा हो तो अनुचित शब्द इस्तेमाल करते हैं, जो बहुत अनकम्फर्टेबल फील करवाते हैं।” संसद पहुंचा ‘सरके चुनर तेरी’ सॉन्ग विवाद, अश्विनी वैष्णव बोले- गाने पर लगाया बैन केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि नोरा फतेही के विवादित गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ पर बैन लगा दिया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी उचित पाबंदियों के दायरे में ही होनी चाहिए, जो समाज और संस्कृति का सम्मान करती हों। लोकसभा में बोलते हुए वैष्णव ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी पूरी तरह से असीमित नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, ‘इस गाने पर बैन लगा दिया गया है। हमें बोलने की आजादी के तहत तय की गई उचित पाबंदियों के हिसाब से ही काम करना चाहिए। बोलने की आजादी पूरी तरह से असीमित नहीं हो सकती; इसे समाज और संस्कृति के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।’ दरअसल, यह मुद्दा निचले सदन में समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने उठाया था। उन्होंने सरकार से इस विवादित गाने के बारे में स्पष्टीकरण मांगा था।   क्या है गाने पर विवाद? इस गाने में एक्ट्रेस नोरा फतेही और संजय दत्त नजर आए थे। यह गाना आने वाली कन्नड़ फिल्म ‘केडी: द डेविल’ का है। ऑनलाइन रिलीज होते ही यह गाना एक बड़े विवाद में घिर गया था। कई दर्शकों ने इसके लिरिक्स को अब तक का सबसे अश्लील और इसके सीन को काफी सेक्शुअल बताते हुए इस पर आपत्ति जताई। इस गाने का हिंदी वर्जन इसी हफ्ते की शुरुआत में यूट्यूब पर अपलोड किया गया था। गाने पर विरोध तेज होने पर इसे बाद में हटा दिया गया। हालांकि  कन्नड़, मलयालम, तेलुगु और तमिल भाषाओं वाले वर्जन अभी भी वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। यह फिल्म 30 अप्रैल को रिलीज होने वाली है और ये एक पैन इंडिया रिलीज है। इस गाने के ओरिजिनल लिरिक्स कन्नड़ भाषा में फिल्म के डायरेक्टर प्रेम ने लिखे थे। हिंदी वर्जन के गीतकार रकीब आलम ने इस विवाद से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने तो बस ओरिजिनल बोलों को ट्रांसलेट किया था।  

टीम इंडिया में बदलाव की आहट? रोहित-विराट की रिटायरमेंट पर अश्विन का खुलासा

नई दिल्ली भारतीय टीम के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अपने रिटायरमेंट और टीम मैनेजमेंट को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर कोच गौतम गंभीर को लगता है कि सीनियर खिलाड़ियों को आगे बढ़ना चाहिए, तो यह टीम के हित में सही फैसला हो सकता है। अश्विन का यह बयान उनके करियर के अंत और टीम में बदलाव को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। अचानक रिटायरमेंट ने चौंकाया रविचंद्रन अश्विन ने दिसंबर 2024 में भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज के दौरान अचानक संन्यास का ऐलान किया था।ब्रिस्बेन टेस्ट के बाद उनका यह फैसला पूरे क्रिकेट जगत के लिए चौंकाने वाला था। वह उस समय शानदार फॉर्म में थे और कई रिकॉर्ड्स तोड़ने के करीब भी थे। फिर भी उन्होंने अपने करियर को अपने फैसले के अनुसार खत्म करने का निर्णय लिया। खुद लिया फैसला, कोई पछतावा नहीं अश्विन ने कहा कि निर्णय लेना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उन्होंने संकेत दिया कि टीम कॉम्बिनेशन में लगातार बदलाव और मौका न मिलना इस फैसले की बड़ी वजह थी। उनके मुताबिक, जब उन्हें लगा कि अब टीम में उनकी जगह स्थायी नहीं है, तो उन्होंने पीछे हटना बेहतर समझा। उन्होंने यह भी कहा कि वह वापसी के लिए इंतजार करने वालों में से नहीं हैं। कोच के फैसले पर खुलकर बोले रविचंद्रन अश्विन ने कोच गौतम गंभीर का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कोच का काम टीम के लिए सही फैसले लेना होता है, चाहे उसमें बड़े खिलाड़ियों को बाहर करना ही क्यों न शामिल हो। अश्विन ने साफ कहा कि अगर गंभीर को लगा कि उन्हें, विराट कोहली या रोहित शर्मा को आगे बढ़ना चाहिए, तो इसमें कुछ गलत नहीं है। यह टीम के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला हो सकता है। ‘ईगो छोड़ना जरूरी’ अश्विन ने अपने बयान में ईगो (अहम) को लेकर भी बड़ी बात कही। उन्होंने माना कि क्रिकेट में मिलने वाली लोकप्रियता कभी-कभी खिलाड़ियों को खुद को अजेय समझने पर मजबूर कर देती है। लेकिन अगर खिलाड़ी अपने अहम को अलग रखे, तो चीजें साफ नजर आती हैं। अश्विन के मुताबिक, वह खुद भी लगातार अपने ईगो को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।  

2 करोड़ के नुकसान पर उठे सवाल, क्या BCCI करेगा Jasprit Bumrah की भरपाई?

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के एक फैसले की वजह से भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को दो करोड़ रुपये का फटका लगा है। ये फैसला फरवरी में बीसीसीआई ने लिया था। ये फैसला है सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा हुआ, क्योंकि बीसीसीआई ने 2025-26 के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का ऐलान किया था तो उसमें जसप्रीत बुमराह का डिमोशन हो गया था। जसप्रीत बुमराह पिछली बार ए प्लस कैटेगरी का हिस्सा थे, लेकिन नए कॉन्ट्रैक्ट में उन्हें ए कैटेगरी में डाल दिया गया। इसके पीछे की वजह ये थी कि ए प्लस कैटेगरी को ही बोर्ड ने खत्म कर दिया था। पिछली बार के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में चार खिलाड़ी ए प्लस कैटेगरी में थे। इनमें विराट कोहली, रोहित शर्मा, रविंद्र जडेजा और जसप्रीत बुमराह का नाम शामिल था। विराट, रोहित और जडेजा का डिमोशन तो जायज है, क्योंकि विराट और रोहित एक ही फॉर्मेट खेल रहे हैं, जबकि जडेजा दो फॉर्मेट के प्लेयर हैं, लेकिन जसप्रीत बुमराह तो तीनों फॉर्मेट में एक्टिव हैं और लगातार खेल रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि इस खिलाड़ी के साथ नाइंसाफी हुई है और दो करोड़ का फटका भी उन्हें लगा है, क्योंकि ए प्लस कैटेगरी में सालाना करार की राशि 7 करोड़ थी, जबकि ए कैटेगरी में 5 करोड़ है। इस तरह 2 करोड़ का नुकसान बुमराह का हुआ है, लेकिन बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया है कि उन्हें किसी न किसी तरह उनके नुकसान की भरपाई की जाएगी। TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, BCCI अब ये पता लगाने की कोशिश में है कि बुमराह को कैसे मुआवजा दिया जा सकता है। BCCI के एक सोर्स ने कहा, “बोर्ड यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि बुमराह को कैसे मुआवजा दिया जा सकता है। यह समझा जा सकता है कि उनकी फीस 7 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये करना गलत होगा। कुछ और खिलाड़ी भी हैं, जो अच्छा परफॉर्म करने के बावजूद एक ग्रेड से नीचे चले गए हैं। कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यूएशन में बदलाव हो सकता है।”  

अब ऐसे बनेगा PAN Card! 1 अप्रैल से नियमों में बड़ा बदलाव, जानें क्या करना होगा जरूरी

नई दिल्ली अगर आप नया PAN Card बनवाने की सोच रहे हैं या आने वाले समय में आपको पैन कार्ड बनवाना है तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। सरकार ने PAN कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। नए नियम के मुताबिक, अब PAN Card के लिए अप्लाई करते समय सिर्फ Aadhaar का ही इस्तेमाल किया जाएगा। यानी अब अलग-अलग पहचान पत्र और एड्रेस प्रूफ देने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे आवेदन प्रक्रिया आसान, तेज और ज्यादा सुरक्षित बनेगी। 31 मार्च 2026 तक पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी, लेकिन उसके बाद पूरा Aadhaar आधारित हो जाएगी। 1 अप्रैल से बदल जाएगा PAN अप्लाई करने का तरीका सरकार ने PAN Card अप्लाई करने के प्रोसेस को और सरल बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। 1 अप्रैल 2026 से PAN के लिए आवेदन करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। अब तक जहां लोगों को अलग-अलग डॉक्युमेंट्स जैसे पहचान पत्र, एड्रेस प्रूफ और जन्मतिथि प्रमाण देना पड़ता था, वहीं अब यह प्रोसेस काफी आसान होने जा रहा है। इस वजह से किया जा रहा यह बड़ा बदलाव सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद PAN सिस्टम को ज्यादा ट्रांसपेरेंट और सुरक्षित बनाना है। Aadhaar के जरिए वेरिफिकेशन होने से फर्जी PAN कार्ड बनने की संभावना कम होगी और एक ही व्यक्ति के नाम पर कई PAN जारी होने की समस्या भी खत्म होगी। इसके अलावा, Aadhaar आधारित सिस्टम से अप्लाई करने का प्रोसेस तेज होगा और कम समय में PAN जारी किया जा सकेगा। क्या इससे आम लोगों पर असर पड़ेगा? इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर नए PAN आवेदकों पर पड़ेगा। अब उन्हें अलग-अलग डॉक्युमेंट्स जुटाने की जरूरत नहीं होगी, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होगी। हालांकि जिन लोगों के पास Aadhaar नहीं है, उनके लिए यह बदलाव थोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है। ऐसे लोगों को पहले Aadhaar बनवाना होगा, तभी वे PAN के लिए आवेदन कर पाएंगे।  

सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी को झटका, ED कार्रवाई में हस्तक्षेप पर उठाए सवाल

कोलकाता पश्चिम बंगाल में पिछले दिनों आई-पैक के दफ्तर पर हुई ईडी की छापेमारी के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाई। राज्य सरकार ने ईडी की याचिका पर सुनवाई टालने की अपील की थी, जिसके बाद कोर्ट ने दो टूक जवाब दिया कि आप हुक्म नहीं चला सकते हैं। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा, जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही थी। इसके अलावा, ईडी रेड के दौरान ममता बनर्जी के अचानक बीच में आने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आपने जो किया, वह गलत था। कोर्ट ने कहा, ”जो हुआ, वह कोई अच्छी स्थिति नहीं थी। यह असामान्य है।” दरअसल, इस साल की शुरुआत में ईडी ने तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव की रणनीति बनाने वाली आईपैक एजेंसी और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापेमारी की थी। इस दौरान, ममता बनर्जी मौके पर पहुंची थीं, जिसके बाद उनका जांच एजेंसी के अधिकारियों से आमना-सामना भी हुआ था। ममता ने आरोप लगाया था कि ईडी टीएमसी के संवेदनशील डेटा और हार्ड डिस्क ले जा रही थी। ईडी ने हवाला कारोबार और कोयला तस्करी से जुड़े एक मामले में आईपैक व उसके प्रमुख पर रेड डाला था। लाइव लॉ के अनुसार, सुनवाई की शुरुआत में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने सुनवाई टालने के लिए कहा। उन्होंने ईडी द्वारा दाखिल किए गए जवाबी हलफनामे पर जवाब दायर करने के लिए समय मांगा। इस पर ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह सुनवाई में देरी करने की चाल है। हलफनामा तो चार हफ्ते पहले ही दायर कर दिया गया था और जवाब दाखिल करने के लिए उनके पास लंबा समय था। दीवान ने कहा कि अगर कोर्ट ईडी के जवाब को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ रही है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अगर इस पर विचार किया जाना है तो… इस पर जस्टिस मिश्रा ने तुरंत जवाब दिया, ”हम किसी भी चीज को नजरअंदाज क्यों करें। आप हम पर हुक्म नहीं चला सकते हैं। हम हर चीज पर विचार करेंगे।” उन्होंने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार की स्थिति काफी कमजोर है, क्योंकि हमें ईडी के आरोपों का जवाब देने के लिए बिना किसी लिखित जवाब के ही बहस करनी पड़ रही है। यह एक संवेदनशील मामला है, जिसमें एक विस्तृत जवाब की जरूरत है। बंगाल सरकार ने बुधवार को I-PAC पर हुई छापेमारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ को मामला भेजने की मांग की। सरकार ने दलील दी कि यह मामला संवैधानिक व्याख्या से जुड़े अहम सवाल उठाता है, खासकर केंद्र-राज्य संबंधों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका की स्वीकार्यता को लेकर। राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ के सामने कहा कि मौजूदा कार्यवाही पर दो जजों की पीठ फैसला नहीं दे सकती, क्योंकि इसमें संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े बुनियादी सवाल शामिल हैं। उन्होंने दलील दी कि यह विवाद केंद्र और किसी राज्य के बीच के मुद्दों को सुलझाने के लिए सही मंच और तरीके से जुड़ा है, जिसकी, उनके अनुसार, संविधान की संघीय संरचना के आधार पर जांच की जानी चाहिए। दीवान ने दलील दी, “यह संविधान की व्याख्या से जुड़ा मामला है। इस मुद्दे की जांच करने का एक ढांचा और तरीका है… अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल इस तरह से नहीं किया जा सकता। यह संघीय संरचना को कमज़ोर करता है, जो संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।” दीवान ने आगे कहा कि ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसी को किसी राज्य के खिलाफ सीधे अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल करने की अनुमति देना, केंद्र-राज्य विवादों को सुलझाने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किए गए संवैधानिक ढांचे को दरकिनार करना होगा  

राष्ट्रपति मुर्मु के दौरे से पहले वृंदावन चमका, गोवर्धन हाई अलर्ट पर, अफसरों की बढ़ी हलचल

वृंदावन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तीन दिवसीय प्रवास पर गुरुवार की शाम वृंदावन आ रही हैं। राष्ट्रपति अपनी धार्मिक यात्रा की शुरुआत इस्कॉन मंदिर से करेंगी तो अंतिम दिन गिरिराजजी की सात कोसीय परिक्रमा करने के साथ दौरा संपन्न होगा। राष्ट्रपति वृंदावन के विभिन्न आश्रम, मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचेंगी। ऐसे में राष्ट्रपति जिस रूट से गुजरेंगी, वहां तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। स्वागत के लिए वृंदावन को सजाया जा रहा है। तीन दिन के प्रवास पर गुरुवार को वृंदावन आएंगी राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु राष्ट्रपति 19 मार्च गुरुवार की शाम करीब पांच बजे वृंदावन पहुंचेंगी। यहां होटल रेडिशन में पहुंचने के बाद राष्ट्रपति सबसे पहले साढ़े छह बजे इस्कॉन मंदिर से अपनी धार्मिक यात्रा शुरू करेंगी। राष्ट्रपति का दौरा प्रेममंदिर, नीबकरौरी आश्रम, उड़िया बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम का भी रहेगा। दीवारों पर रंग और रोगन के साथ चित्रकारी सभी कार्यक्रम स्थलों तक साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की कमान नगर निगम ने संभाली है। दीवारों पर रंग और रोगन करने के साथ चित्रकारी हो रही है। डिवाइडरों पर रंग लगाने के साथ जीर्ण-शीर्ण पड़े फुटपाथों पर नई टाइलें बिछाई जा रही हैं। तैयारियों का जायजा लेने पहुंच रहे अधिकारी राष्ट्रपति जहां भी कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगी। यहां की तैयारियों का जायजा लेने के लिए मंगलवार को मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप, एडीजी अनुपम कुलश्रेष्ठ, डीआइजी शैलेष कुमार पांडेय, डीएम सीपी सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार ने वृंदावन का दौरा किया। जहां-जहां राष्ट्रपति जाएंगी, वहां व्यवस्थाएं देखीं। राष्ट्रपति आगमन से पहले गोवर्धन में हाई अलर्ट, अफसरों ने संभाली कमान गोवर्धन। गोवर्धन में राष्ट्रपति के प्रस्तावित आगमन को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए मंगलवार को मंडलायुक्त, एडीजी, डीएम समेत आला अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मंडलायुक्त, एडीजी, डीआइजी व डीएम, एसएसपी ने दानघाटी मंदिर में तैयारी देखी। फिर गोल्फ कार्ट से परिक्रमा मार्ग का भ्रमण कर सफाई व्यवस्था देखी।

स्टार चेहरों को किनारा, 75 MLA आउट—ममता की ‘रिस्क वाली’ रणनीति क्या दिलाएगी जीत?

कोलकाता पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने हुंकार भर दी है। मंगलवार को ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के 291 सीट के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। राज्य में लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही पार्टी ने इस बार चर्चित हस्तियों की जगह संगठन पर पकड़ रखने वाले नेताओं को तरजीह दी है। बता दें कि राज्य में आगामी 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होने हैं और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले कालीघाट स्थित अपने आवास से उम्मीदवारों की सूची की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा है कि पार्टी दार्जिलिंग पहाड़ियों की तीन सीटें सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के लिए छोडेगी, जिसका नेतृत्व अनित थापा कर रहे हैं। टीएमसी की लिस्ट जारी होते ही यह साफ हो गया है कि भवानीपुर में ममता बनर्जी-शुभेंदु अधिकारी की प्रतिद्वंद्विता नया चुनावी रंग लेने जा रही है, जहां मुख्यमंत्री अपनी सीट बचाने उतरेंगी, जबकि भाजपा ने यहां से नेता प्रतिपक्ष को मैदान में उतारा है। यह 2 प्रतिद्वंद्वियों के बीच सीधा आमना-सामना होगा, जो पहली बार 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में भिड़े थे। तब अधिकारी ने ममता को नजदीकी अंतर से हराया था। 226 सीटों पर जीत का दावा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 226 सीट जीतने का दावा भी किया है। मुख्यमंत्री बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी के साथ उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करते हुए कहा, ”हम 291 सीट पर चुनाव लड़ेंगे और 226 से अधिक सीट जीतेंगे।” किसे दिया मौका, किसका कटा पत्ता? तृणमूल ने 291 उम्मीदवारों में से 135 मौजूदा विधायकों को बरकरार रखा है। वहीं लगभग 75 विधायकों को हटा दिया है और 15 अन्य को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया है, जिसे पार्टी सूत्रों ने “लक्षित सत्ता-विरोधी लहर से निपटने की कवायद” के रूप में वर्णित किया है। इस सूची में पेशेवर व्यक्तियों, खिलाड़ियों और विभिन्न क्षेत्र के चेहरों का मिश्रण भी शामिल है। हालांकि पूरा जोर मशहूर हस्तियों के बजाय संगठनात्मक चेहरों पर बना हुआ है, जो पहले के चुनावों से एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पार्टी ने फरहाद हकीम, जावेद अहमद खान, अरूप बिस्वास, इंद्रनील सेन और चंद्रिमा भट्टाचार्य सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों को उनके मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों से फिर से उतारा है। ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं और एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन को राजगंज से मैदान में उतारा गया है, जबकि पूर्व क्रिकेटर शिव शंकर पाल को तूफानगंज से उम्मीदवार बनाया गया है। अभिनेता-नेता सोहम चक्रवर्ती इस बार तेहट्टा से चुनाव लड़ेंगे और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष को बेलियाघाटा से मैदान में उतारा गया है, जो उनका पहला विधानसभा चुनाव होगा। नामी चेहरों में, बरासात के विधायक चिरंजीत चक्रवर्ती, बेहला पश्चिम के विधायक पार्थ चटर्जी और बेलियाघाटा के विधायक परेश पाल को टिकट नहीं दिया गया है। पार्टी ने कई नए चेहरे भी पेश किए हैं, जिनमें मानिकतला से श्रेया पांडे और उत्तरपाड़ा से टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के बेटे सिर्सन बनर्जी शामिल हैं। पार्टी के आंकड़ों के अनुसार उम्मीदवारों में से 52 महिलाएं, 95 अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति और 47 अल्पसंख्यक हैं। किसे दी गई प्राथमिकता? तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने चर्चित हस्तियों की तुलना में जमीनी स्तर पर जुड़ाव रखने वाले नेताओं को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, ”नेतृत्व ने जानबूझकर स्टार चेहरों से परहेज किया। जोर उन उम्मीदवारों पर है जो बूथ का प्रबंधन कर सकें, मतदाताओं को गोलबंद कर सकें और स्थानीय नेटवर्क बनाए रख सकें।” नंदीग्राम में तृणमूल ने पूर्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े पंचायत नेता पबित्र कर को मैदान में उतारा है, जो हाल में पार्टी में वापस लौटे हैं। इसके अलावा पार्टी ने बीरभूम, उत्तर 24 परगना और दक्षिण बंगाल के ग्रामीण इलाकों जैसे प्रमुख चुनावी क्षेत्रों में मजबूत जिला स्तरीय चेहरे बरकरार रखे हैं।  

संसद के ऊपरी सदन में NDA की बढ़त, 140 पार के साथ भाजपा का दबदबा कायम

नई दिल्ली भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनाव में 240 सीटें मिली थीं तो माना गया था कि यह उसके लिए झटका है। यही नहीं 2014 और 2019 के आम चुनाव के मुकाबले नई बनने वाली सरकार के भविष्य पर भी सवाल उठे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि पहली बार पीएम नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में भाजपा को गठबंधन पर निर्भर रहते हुए सरकार चलानी थी। इन सब आशंकाओं के बाद भी भाजपा और उसके नेतृत्व में एनडीए ने जिस तरह से सफलताएं हासिल की हैं, वह चौंकाने वाला है। भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों के चुनाव 2024 के झटके के बाद ही जीते हैं। यही नहीं अब इसका असर राज्यसभा में भी दिखा है और उसकी संख्या पहली बार 100 के पार हुई है। फिर एनडीए भी पहली बार 141 सीटों पर पहुंच गया है। 250 सदस्यों वाली राज्यसभा में इतना एनडीए के पक्ष में इतना बड़ा बहुमत आना उसके लिए बड़ी सफलता है। खासतौर पर हाल ही में खाली हुईं 37 राज्यसभा सीटों में से 22 पर जीत हासिल करके एनडीए ने अपने स्कोर को 135 से बढ़ाकर 141 कर लिया है। ओडिशा, बिहार में भाजपा ने अतिरिक्त सीटें हासिल कर ली हैं। भाजपा के पास उच्च सदन में 101 निर्वाचित सांसद हैं, जबकि 5 मनोनीत सांसद भी उसके पक्ष में हैं। ऐसी स्थिति में उसके यहां 106 सदस्य हो जाते हैं। एनडीए में भाजपा के बाद एआईएडीएमके और जेडीयू के 5-5 सांसद हैं। फिर महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी एनसीपी के 4 सांसद हो गए हैं तो वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना के भी 2 सदस्य हैं। आंध्र प्रदेश में सत्ता चला रही टीडीपी के पास भी 2 राज्यसभा मेंबर हैं। भाजपा और एनडीए की इस ताकत से यह स्पष्ट है कि अब लोकसभा के साथ ही राज्यसभा में भी सत्ताधारी गठबंधन किसी भी बिल को आसानी से पास कराने की स्थिति में है। भले ही बीते दो कार्यकालों के मुकाबले लोकसभा में भाजपा और एनडीए के पास पहले मुकाबले कम सीटें हैं, लेकिन राज्यसभा में उसकी ताकत निरंतर बढ़ रही है। इससे स्पष्ट है कि 2029 में भी एनडीए के पास अपरहैंड रहेगा। अब यदि INDIA ब्लॉक की बात करें तो उसकी धुरी कही जाने वाली कांग्रेस के पास 29 सीटें हो गई हैं। भाजपा के मुकाबले यह संख्या एक तिहाई से भी कम है। इसके साथ ही विपक्ष की कुल सीटों की संख्या 62 है। विपक्ष में भी डीएमके को झटका लगा है, जिसके सांसदों की संख्या राज्यसभा में अब 8 ही रह गई है, जो पहले 10 हुआ करती थी। इसी तरह आरजेडी के सांसद भी अब 5 के मुकाबले तीन ही रह गए हैं।  

मीनाक्षी गोयत का दमदार प्रदर्शन, अंतिम पंघाल को हराकर एशियाई चैंपियनशिप टीम में जगह पक्की

नई दिल्ली भारतीय महिला कुश्ती के 53 किग्रा वर्ग में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। सोनीपत में पूर्व राष्ट्रीय कोच कुलदीप मलिक के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाली मीनाक्षी गोयत ने दिग्गज पहलवान अंतिम पंघाल को शिकस्त देकर आगामी एशियाई चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में अपना स्थान पक्का कर लिया है। ट्रायल के दौरान मीनाक्षी ने अपने पुराने “आत्म-संदेह” को पीछे छोड़ते हुए शानदार रक्षात्मक खेल दिखाया। उन्होंने पहले 6-2 की बढ़त बनाई और फिर मुकाबले के आखिरी क्षणों में ‘विन बाय फॉल’ (चित करके) के जरिए दो बार की विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता अंतिम को धूल चटा दी। विनेश फोगाट के वर्ग बदलने के बाद इस कैटेगरी में अंतिम का दबदबा माना जा रहा था, जिसे मीनाक्षी ने अपनी मजबूत पकड़ से तोड़ दिया। इस जीत के साथ ही मीनाक्षी अब 6 से 11 अप्रैल तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित होने वाली एशियाई चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। जीत के बाद उत्साहित मीनाक्षी ने कहा कि उन्होंने पिछली गलतियों से सीखा और बड़े नाम के दबाव में आने के बजाय अपनी क्षमता पर भरोसा किया। इसी ट्रायल के दौरान 50 किग्रा वर्ग में नीलम ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए टीम में जगह बनाई। अन्य महिला वर्गों में मानसी अहलावत (62 किग्रा), मनीषा भानवाला (57 किग्रा), नेहा सांगवान (59 किग्रा) और हर्षिता (72 किग्रा) सहित कई अन्य पहलवानों ने भी अपने-अपने भार वर्ग में जीत दर्ज कर भारतीय दल में स्थान सुरक्षित किया है। महिला पहलवानों के साथ-साथ पुरुष फ्रीस्टाइल वर्ग के ट्रायल भी संपन्न हुए, जिसमें स्टार पहलवानों ने अपना दबदबा कायम रखा। 57 किग्रा में अंकुश और 61 किग्रा में अमन सहरावत ने शानदार जीत के साथ टीम में प्रवेश किया। इसके अलावा सुजीत कलकल (65 किग्रा), जयदीप (74 किग्रा) और विक्की (97 किग्रा) ने भी अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराकर एशियाई चैंपियनशिप का टिकट हासिल किया है। भारतीय कुश्ती संघ को उम्मीद है कि युवाओं और अनुभवी पहलवानों का यह संतुलित दल किर्गिस्तान में पदकों की झड़ी लगाएगा। मीनाक्षी की इस जीत ने साबित कर दिया है कि भारतीय कुश्ती में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और नए चेहरे वैश्विक मंच पर चमकने को तैयार हैं।  

गेस्ट फैकल्टी नियमितीकरण पर हाईकोर्ट का फैसला, लंबी सेवा से नहीं मिलता नियुक्ति का अधिकार

जबलपुर  मध्यप्रदेश के कॉलेजों में अध्यापन का भार सम्भाल रहे 5000 से ज्यादा गेस्ट फैकल्टी को हाईकोर्ट के फैसले से तगड़ा झटका लगा है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा नियमित नियुक्ति करने की स्थिति में सालों यही अतिथि विद्वान अध्यापन की व्यवस्था संभाल रहे हैं।कॉलेजों में नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया के दौरान गेस्ट फैकल्टी ने हाईकोर्ट में याचिका पेश कर नियमितीकरण की मांग की थी। सेवा के बदले मांगा नियमितीकरण याचिकाकर्ता अतिथि विद्वानों की याचिका के अनुसार वे एक से दो दशक से स्वीकृत और खाली पदों पर काम कर रहे हैं। नई भर्ती की जगह उन्हें सहायक प्राध्यापक, खेल अधिकारी और ग्रंथपाल के पदों पर नियमित किया जाए।   गेस्ट फैकल्टी द्वारा याचिका के माध्यम से उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर फॉलेन आउट किए अतिथि विद्वानों की वापसी की मांग भी कर रहे थे। वहीं सरकार द्वारा नए सिरे से नियमित भर्ती के लिए जारी विज्ञापनों को रद्द करने की भी मांग की गई थी। गेस्ट फैकल्टी को सामाजिक सुरक्षा देने बनी समिति तीन दिन में ही बदली, उठे सवाल 20 साल से कार्यरत होने का दिया था हवाला याचिका में पन्ना निवासी डॉ. कमल प्रताप सिंह सहित 290 अन्य ने बताया था कि वे पिछले 20 सालों से शासकीय कॉलेजों में कार्यरत हैं। वे यूजीसी के मानकों के अनुसार पढ़ाई और अन्य कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ 50 हजार रुपए मानदेय मिलता है। हर साल 89 दिन का अनुबंध याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्हें हर साल 89 दिन के अनुबंध पर रखा जाता है। इसके बाद सेवा समाप्त कर फिर नई प्रक्रिया से नियुक्ति दी जाती है। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को बताया कि गेस्ट फैकल्टी को आयु सीमा में छूट, अनुभव के आधार पर वेटेज और 25 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है, ताकि वे नियमित भर्ती में शामिल हो सकें। नियमित भर्ती प्रक्रिया को बताया वैध सरकार ने कहा कि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति एक वैधानिक आयोग के माध्यम से होती है। नियमों के विपरीत कोई भी नियुक्ति असंवैधानिक होगी। कोर्ट ने भी इस तर्क को सही माना। “फॉलन आउट” नियम को भी सही ठहराया हाईकोर्ट ने अपने फैसले में “फॉलन आउट” नियम को वैध बताया। कोर्ट ने कहा कि नियमित भर्ती होने पर गेस्ट फैकल्टी को हटाना कानूनन सही है, क्योंकि यह पद को स्थायी रूप से भरने की प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु 1. भर्ती प्रक्रिया में अंतर नियमित भर्ती (1990 के नियमों के तहत) एमपीपीएससी (MPPSC) के माध्यम से होती है। इसका आधार खुली प्रतियोगिता परीक्षा और अखिल भारतीय स्तर है। जबकि अतिथि विद्वानों का चयन केवल पोस्ट ग्रेजुएशन के अंकों के आधार पर मध्य प्रदेश के मूल निवासियों के लिए ही सीमित है। 2. आरक्षण नियमों का पालन नहीं: नियमित भर्ती में SC, ST, OBC और दिव्यांगों के लिए संवैधानिक आरक्षण लागू होता है। अतिथि विद्वानों की नियुक्ति में ऐसा कोई प्रावधान प्रभावी नहीं।है। अभ्यर्थी को इसमें केवल अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं।   नियमित भर्ती के लिए हटाना गलत नहीं फैसले के अनुसार यदि किसी पद पर नियमित नियुक्ति या तबादले के कारण अतिथि विद्वान को हटाया जाता है, तो यह गलत नहीं है। नियम स्पष्ट है कि एक अस्थायी कर्मचारी की जगह दूसरा अस्थायी कर्मचारी नहीं रखा जा सकता। जबकि अस्थायी कर्मचारी की जगह स्थायी  कर्मचारी की नियुक्ति सही है।   जानकारी का अभाव नहीं सुनवाई पूरी करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अतिथि विद्वानों को नियुक्ति के पहले दिन से इस नियुक्ति की प्रकृति की सारी जानकारी थी।  उनकी नियुक्ति केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए थी इसलिए वे नियमित लाभ के हकदार नहीं होंगे। उमादेवी केस का हवाला हाईकोर्ट ने कहा कि ‘उमादेवी’ केस के लाभ यहां सीधे लागू नहीं होते। प्रोफेसर और लाइब्रेरियन जैसे उच्च शैक्षणिक पदों की योग्यता और कार्य की प्रकृति एक दिहाड़ी मजदूर से पूरी तरह अलग होती है।   भर्ती विज्ञापन को चुनौती नहीं अदालत ने कहा कि सरकार को नियमित भर्ती करने का पूरा अधिकार है। अतिथि विद्वान केवल इस आधार पर भर्ती विज्ञापन को चुनौती नहीं दे सकते कि वे लंबे समय से काम कर रहे हैं। यह कहते हुए हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

सीएम योगी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे 555 श्रद्धालुओं को ₹1 लाख की मदद दी

कैलाश मानसरोवर की यात्रा से लौटे 555 श्रद्धालुओं को सीएम योगी ने प्रदान की ₹1-1 लाख की सहायता राशि तीर्थ यात्राओं से मजबूत हो रहा ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का संकल्प: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने कहा, तीर्थ यात्राएं सिर्फ आस्था नहीं, समाज व राष्ट्र को जोड़ने का माध्यम, तीर्थ स्थलों पर सुविधाओं का किया जा रहा विस्तार काशी, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर बढ़ती भीड़ चुनौती भी और अवसर भी: सीएम योगी धार्मिक पर्यटन से विकास और रोजगार को बढ़ावा, महाकुंभ बना आस्था के साथ आर्थिक मजबूती का बड़ा उदाहरण: मुख्यमंत्री महाकुंभ में श्रद्धालुओं ने अफवाहों को नकारा, आस्था को रखा सर्वोपरि: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे 555 श्रद्धालुओं को ₹1-1 लाख की सहायता राशि वितरित करते हुए आस्था, संस्कृति और विकास के समन्वय का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ जैसे आयोजनों में उमड़ी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था न केवल भारत की सांस्कृतिक शक्ति को दर्शाती है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देती है। इसी दृष्टि के साथ सरकार तीर्थ यात्राओं को सुविधाजनक, सुरक्षित और व्यापक बनाकर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत कर रही है। तीर्थ यात्रा आस्था के साथ एकता व संस्कारों की परंपरा कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिनाइयों, चुनौतियों और विषम प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच इस यात्रा को पूर्ण करना एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव है। भारतीय सनातन परंपरा में तीर्थ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने का सशक्त माध्यम रही है। पूर्वकाल में लोग अपने परिश्रम से अर्जित संसाधनों का उपयोग यात्रा व सेवा में करते थे, जिससे उन्हें पुण्य के साथ-साथ समाज को समझने की नई दृष्टि मिलती थी। भारत के धर्मस्थलों की स्थापना के पीछे भी यही भावना रही है। आदि शंकराचार्य द्वारा चारों दिशाओं में पीठों की स्थापना इस सांस्कृतिक एकता का प्रमाण है, जब अलग-अलग शासन व्यवस्थाओं के बावजूद भारत एक सांस्कृतिक राष्ट्र के रूप में स्थापित था। आज भी यह परंपरा जीवित है और आवश्यक है कि धार्मिक यात्राओं में श्रद्धा को सर्वोपरि रखते हुए उनकी पवित्रता व गरिमा को बनाए रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन मूल्यों से प्रेरित होती रहें। बढ़ती आस्था के बीच तीर्थ स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए वर्ष 2017-18 में गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण कराया गया, जो यात्रा का पहला पड़ाव है और जहां विदेश मंत्रालय की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होती हैं। बदलते समय के साथ तीर्थ यात्राओं का स्वरूप भी बदला है। अब श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2025 में प्रदेश में करीब 164 करोड़ श्रद्धालुओं का आगमन हुआ, जिनमें 66 करोड़ केवल प्रयागराज महाकुंभ में पहुंचे। काशी, अयोध्या और मथुरा-वृंदावन जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या एक ओर चुनौती है तो दूसरी ओर अवसर भी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार आवागमन, ठहरने और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लगातार सुदृढ़ कर रही है। कैलाश यात्रा और तीर्थ स्थलों पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा विदेश में होने के कारण वहां की भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौतियां बनी रहती हैं, ऐसे में भारत सरकार और प्रदेश सरकार देश के भीतर ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा सकती हैं, जबकि आगे की यात्रा में अन्य देशों के सहयोग की आवश्यकता होती है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालु अपनी आस्था के बल पर भगवान शिव के दर्शन के लिए यह यात्रा पूर्ण करते हैं। सीएम योगी ने बताया कि डबल इंजन सरकार का फोकस धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को आगे बढ़ाते हुए विकास व रोजगार के अवसर सृजित करना है। पिछले आठ-नौ वर्षों में अयोध्या, काशी, प्रयागराज, चित्रकूट, विंध्याचल, नैमिषारण्य और मथुरा-वृंदावन सहित कई तीर्थस्थलों पर व्यापक विकास कार्य किए गए हैं। साथ ही, यात्रियों द्वारा बताई गई मेडिकल और अन्य सुविधाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय कर गाजियाबाद में अतिरिक्त व्यवस्थाएं विकसित करने के प्रयास किए जाएंगे। सरकार का यह भी जोर है कि निर्मित सुविध…

राज्यव्यापी अभियान में आंगनबाड़ी केंद्रों में न्योता भोज कार्यक्रम, पोषण और शिक्षा पर जोर

आंगनबाड़ी केन्द्रों में न्योता भोज कार्यक्रम : पोषण, शिक्षा और जनभागीदारी का राज्यव्यापी अभियान प्रदेशभर में 9,763 न्योता भोज आयोजित, 1.83 लाख से अधिक बच्चे हुए लाभान्वित  रायपुर आंगनबाड़ी केन्द्रों में संचालित ‘न्योता भोज’ कार्यक्रम प्रदेश में पोषण, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप शुरू की गई इस पहल के तहत अब समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। राज्य स्तर पर जनवरी से फरवरी 2026 तक कुल 9,763 न्योता भोज आयोजनों के माध्यम से 1,83,927 बच्चों को लाभान्वित किया गया है, जो इस योजना की व्यापक सफलता को दर्शाता है। जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बिलासपुर जिले में सर्वाधिक 884 आयोजन हुए, जिनमें 18,703 बच्चे लाभान्वित हुए। वहीं कोरबा में 720 आयोजनों के माध्यम से 13,944 बच्चों, रायगढ़ में 690 आयोजनों से 9,835 बच्चों तथा कांकेर में 636 आयोजनों से 7,915 बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया। इसी प्रकार धमतरी में 606 आयोजन कर 11,228 बच्चों, महासमुंद में 415 आयोजनों के माध्यम से 7,302 बच्चों तथा जांजगीर-चांपा में 439 आयोजनों से 10,518 बच्चों को लाभ पहुंचाया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत समाज के नागरिक, जनप्रतिनिधि, दानदाता एवं पालक अपने विशेष अवसरों—जैसे जन्मदिन, वर्षगांठ या अन्य पारिवारिक खुशियों—पर आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के साथ भोजन साझा कर रहे हैं। इससे बच्चों को अतिरिक्त पौष्टिक आहार मिल रहा है, साथ ही समाज में उनके प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी बढ़ रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने वाले अधिकांश बच्चे ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से होते हैं। ऐसे में ‘न्योता भोज’ जैसे प्रयास उनके शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह पहल न केवल कुपोषण को कम करने की दिशा में कारगर साबित हो रही है, बल्कि आंगनबाड़ी केन्द्रों के प्रति बच्चों और अभिभावकों का आकर्षण भी बढ़ा रही है। शासन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अपने सामाजिक एवं पारिवारिक अवसरों को आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ साझा कर इस अभियान को और मजबूत बनाएं।

योगी सरकार का सशक्त मॉडल: टैक्स से जनहित तक हर रुपये का उद्देश्य स्पष्ट

उत्तर प्रदेश की नई वित्तीय नीति: जनता के काम में सीधे खर्च हो रहा पैसा योगी सरकार का बेहतरीन मॉडल, टैक्स से सीधे जनहित तक हर रुपये का उद्देश्य तय कहां से पैसा आया और कहां खर्च हुआ, अब सब कुछ है स्पष्ट गो कल्याण, सड़क, खेती और विरासत को मिल रहा सीधा लाभ लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में एक स्पष्ट और व्यावहारिक बदलाव किया है। अब टैक्स को केवल राजस्व इकट्ठा करने का माध्यम नहीं माना जा रहा, बल्कि उसे सीधे किसी खास उद्देश्य से जोड़कर खर्च किया जा रहा है। सरल शब्दों में समझें तो कौन सा पैसा कहां से आया और कहां खर्च हुआ, यह अब स्पष्ट दिख रहा है। यह मॉडल इसलिए खास है क्योंकि आम नागरिक अब आसानी से समझ सकता है कि उसका दिया हुआ टैक्स किस काम में लग रहा है। इस पूरी नीति का सीधा मतलब है कि टैक्स अब सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि विकास का साधन बन चुका है। उत्तर प्रदेश ने दिखाया है कि अगर योजना स्पष्ट हो, तो हर रुपये का सही उपयोग करके समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति तीनों को एक साथ मजबूत किया जा सकता है। गो कल्याण सेस: छोटा टैक्स, बड़ा असर राज्य सरकार ने आबकारी से जुड़े राजस्व पर 0.5% का गो कल्याण सेस लगाया है। यह टैक्स शराब की बिक्री से जुड़ा है। आम उपभोक्ता पर इसका बहुत कम असर पड़ता है, लेकिन पूरे राज्य से यह मिलकर सैकड़ों करोड़ रुपये जुटाता है। इस पैसे को सीधे आवारा गोवंश की देखभाल में खर्च किया जाता है। प्रदेश में बने गोवंश आश्रय स्थल में हजारों पशुओं को रहने, खाने और इलाज की सुविधा मिल रही है। दरअसल, कृषि में मशीनों के बढ़ते उपयोग के कारण किसानों की पशुओं पर निर्भरता कम हुई है, जिससे आवारा पशुओं की समस्या बढ़ी। अब इस सेस के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान तैयार किया गया है। हर सेक्टर का पैसा उसी सेक्टर में लग रहा उत्तर प्रदेश ने एक और स्पष्ट नीति अपनाई है और वो ये कि जिस सेक्टर से राजस्व आता है, उसी सेक्टर के विकास में उसका उपयोग किया जाता है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझें: 1. रियल एस्टेट: धार्मिक और पर्यटन विकास संपत्ति की खरीद-फरोख्त से मिलने वाली स्टाम्प ड्यूटी का उपयोग काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट में किया जा रहा है। इससे पर्यटन बढ़ रहा है, रोजगार मिल रहा है और विरासत सुरक्षित हो रही है। 2. खनन: सिंचाई और पानी की व्यवस्था खनन से मिलने वाला पैसा गांवों में सिंचाई और जल प्रबंधन सुधारने में लगाया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है। 3. एक्सप्रेसवे: गांवों तक सड़क कनेक्टिविटी पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से मिलने वाला टोल छोटी सड़कों (फीडर रोड) के निर्माण में खर्च हो रहा है, जिससे दूर-दराज के गांव भी मुख्य सड़कों से जुड़ रहे हैं। 4. मंडी शुल्क: किसानों की सुरक्षा मंडी से मिलने वाली फीस का उपयोग फसल सुरक्षा और किसान योजनाओं में किया जा रहा है। अब टैक्स का उपयोग साफ दिख रहा इस नई नीति की सबसे बड़ी ताकत है, स्पष्टता। अब लोगों को साफ दिखता है कि शराब की बिक्री से मिला पैसा गो कल्याण में लग रहा है। टोल टैक्स का पैसा सड़क और कनेक्टिविटी में, प्रॉपर्टी टैक्स का पैसा धार्मिक और पर्यटन विकास में निवेश हो रहा है। इससे सरकार पर भरोसा बढ़ता है, क्योंकि टैक्स अब “कहां गया” का सवाल नहीं, बल्कि “यहीं लगा” का जवाब देता है। तेजी से विकास की मजबूत तैयारी उत्तर प्रदेश का लक्ष्य है 2029-30 तक $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए सरकार लगातार सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई और खेती, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्री, पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही है। राज्य के बजट में पूंजीगत खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे रोजगार, व्यापार और कनेक्टिविटी तीनों में तेजी आ रही है। दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक स्पष्ट रास्ता दिखाता है। मतलब साफ है कि जो राज्य जिस क्षेत्र में मजबूत है, वह उसी से मिलने वाले टैक्स को उसी क्षेत्र के विकास में लगा सकता है। जैसे, जहां पर्यटन ज्यादा है, वहां पर्यटन से मिलने वाले टैक्स को पर्यटन सुविधाएं बेहतर करने में खर्च किया जा सकता है। औद्योगिक राज्यों में उद्योगों से जुड़े शुल्क को पर्यावरण सुधार पर लगाया जा सकता है। वहीं कृषि प्रधान राज्यों में मंडी से मिलने वाली फीस को खेती और किसानों को मजबूत बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो, हर राज्य अपनी जरूरत और स्थिति के अनुसार टैक्स को विकास से जोड़कर ज्यादा प्रभावी परिणाम हासिल कर सकता है।

उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा: रींवा-रायपुर हवाई मार्ग से तेज होगा विकास

रींवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ेगी विकास की रफ्तार: उपमुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल रींवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ी नजदीकियां उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल का छत्तीसगढ़ दौरा रायपुर मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री  राजेन्द्र शुक्ल दो दिवसीय प्रवास पर आज शाम रायपुर पहुंचें। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल अपने प्रवास के यहां कई धार्मिक, सामाजिक और शिष्टाचार भेंट कार्यक्रमों में शामिल होंगे।       आज शाम रायपुर पहुंचने के बाद उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर में दर्शन कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात वे क्वींस क्लब में विंध्य समाज द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में शामिल हुए, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया।     उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा से रायपुर के लिए शुरू हुई हवाई सेवा से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सड़कों और रेल सेवाओं का बेहतर होना जरूरी है। इससे पहले रीवा से दिल्ली और इंदौर के लिए हवाई सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं, जिससे व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने रीवा से दुर्ग तक ट्रेन सेवा जल्द शुरू करने के लिए सकारात्मक प्रयास करने का भरोसा दिलाया।      कार्यक्रम में विंध्याचल कल्याण सर्व समाज द्वारा  शुक्ल का अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच संबंध बहुत गहरे हैं। उन्होंने कहा कि यह हवाई सेवा केवल दूरी ही नहीं, बल्कि दिलों को भी जोड़ने का कार्य करेगी। विधायक  किरण सिंहदेव ने कहा कि रीवा से रायपुर के लिए हवाई सेवा शुरू होना एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे आवागमन आसान हो गया है।      ज्ञात हो कि उपमुख्यमंत्री  शुक्ल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 18 मार्च को वे सुबह 11.15 बजे छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से उनके निवास (स्पीकर हाउस) में सौजन्य भेंट करेंगे। इसके पहले वे नालंदा परिसर का निरीक्षण करेंगे। दोपहर 12.05 बजे पहुंना गेस्ट हाउस में विंध्य क्षेत्र के नागरिकों से मुलाकात कर क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।       कार्यक्रम में विधायक  मोतीलाल साहू, रीवा के पूर्व विधायक  के.पी. त्रिपाठी, समाज के संरक्षक  शंकर सिंह गहरवार, अध्यक्ष  कल्याण प्रसाद पांडेय, डॉ. व्यास मुनि द्विवेदी,  मधुकर द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

एमपी के 40 IAS अधिकारी पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में तैनात, आयोग ने भेजे ऑब्जर्वर

भोपाल  देश के विभिन्न राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के लिए मध्य प्रदेश कैडर के 40 भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों को चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों को चुनाव आयोग द्वारा अलग-अलग राज्यों में प्रेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में तैनात किया गया है। इससे प्रदेश सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों के कामकाज पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के कई वरिष्ठ और अनुभवी आईएएस अधिकारियों को चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए तैनात किया गया है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी चुनावी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना, निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर नजर रखना होगी।  जिन राज्यों में इन अधिकारियों को प्रेक्षक बनाया गया है, उनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, केरला, पुडुचेंरी और आसाम शामिल हैं। इन राज्यों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने के लिए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती की गई है। मध्य प्रदेश से जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है, उनमें प्रमुख रूप से प्रमुख सचिव संदीप यादव, जॉन किंग्सले, श्रीमन शुक्ला, स्वतंत्र कुमार सिंह, शिल्पा गुप्ता, सिबी चक्रवर्ती, अजय कटसेरिया, निधि निवेदिता, रोहित सिंह और अनुराग वर्मा के नाम शामिल हैं। इसके अलावा राहुल फटिंग हरिदास, दीपक आर्य, हरहिका सिंह, आशीष भार्गव, अभिजीत अग्रवाल, दिलीप कुमार, वंदना वैद्य, सपना निगम, केवीएस चौधरी, मनीष सिंह, प्रबल सिपाहा, सौरव सुमन, अवि प्रसाद, सतेंद्र सिंह और बुद्धेश वैद्य सहित अन्य अधिकारी भी चुनाव ड्यूटी पर भेजे गए हैं। सूत्रों के अनुसार सूची जारी होने के बाद कुछ अधिकारियों ने अपनी चुनावी ड्यूटी निरस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी। हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग के स्तर पर ही लिया जाएगा। वहीं, यह भी चर्चा है कि इनमें कई अधिकारी राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत हैं। ऐसे में उनके चुनावी ड्यूटी पर जाने से विभागीय कामकाज की गति कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है।   

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