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स्टार चेहरों को किनारा, 75 MLA आउट—ममता की ‘रिस्क वाली’ रणनीति क्या दिलाएगी जीत?

कोलकाता पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने हुंकार भर दी है। मंगलवार को ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के 291 सीट के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। राज्य में लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही पार्टी ने इस बार चर्चित हस्तियों की जगह संगठन पर पकड़ रखने वाले नेताओं को तरजीह दी है। बता दें कि राज्य में आगामी 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होने हैं और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले कालीघाट स्थित अपने आवास से उम्मीदवारों की सूची की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा है कि पार्टी दार्जिलिंग पहाड़ियों की तीन सीटें सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के लिए छोडेगी, जिसका नेतृत्व अनित थापा कर रहे हैं। टीएमसी की लिस्ट जारी होते ही यह साफ हो गया है कि भवानीपुर में ममता बनर्जी-शुभेंदु अधिकारी की प्रतिद्वंद्विता नया चुनावी रंग लेने जा रही है, जहां मुख्यमंत्री अपनी सीट बचाने उतरेंगी, जबकि भाजपा ने यहां से नेता प्रतिपक्ष को मैदान में उतारा है। यह 2 प्रतिद्वंद्वियों के बीच सीधा आमना-सामना होगा, जो पहली बार 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में भिड़े थे। तब अधिकारी ने ममता को नजदीकी अंतर से हराया था। 226 सीटों पर जीत का दावा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 226 सीट जीतने का दावा भी किया है। मुख्यमंत्री बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी के साथ उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करते हुए कहा, ”हम 291 सीट पर चुनाव लड़ेंगे और 226 से अधिक सीट जीतेंगे।” किसे दिया मौका, किसका कटा पत्ता? तृणमूल ने 291 उम्मीदवारों में से 135 मौजूदा विधायकों को बरकरार रखा है। वहीं लगभग 75 विधायकों को हटा दिया है और 15 अन्य को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया है, जिसे पार्टी सूत्रों ने “लक्षित सत्ता-विरोधी लहर से निपटने की कवायद” के रूप में वर्णित किया है। इस सूची में पेशेवर व्यक्तियों, खिलाड़ियों और विभिन्न क्षेत्र के चेहरों का मिश्रण भी शामिल है। हालांकि पूरा जोर मशहूर हस्तियों के बजाय संगठनात्मक चेहरों पर बना हुआ है, जो पहले के चुनावों से एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पार्टी ने फरहाद हकीम, जावेद अहमद खान, अरूप बिस्वास, इंद्रनील सेन और चंद्रिमा भट्टाचार्य सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों को उनके मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों से फिर से उतारा है। ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं और एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन को राजगंज से मैदान में उतारा गया है, जबकि पूर्व क्रिकेटर शिव शंकर पाल को तूफानगंज से उम्मीदवार बनाया गया है। अभिनेता-नेता सोहम चक्रवर्ती इस बार तेहट्टा से चुनाव लड़ेंगे और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष को बेलियाघाटा से मैदान में उतारा गया है, जो उनका पहला विधानसभा चुनाव होगा। नामी चेहरों में, बरासात के विधायक चिरंजीत चक्रवर्ती, बेहला पश्चिम के विधायक पार्थ चटर्जी और बेलियाघाटा के विधायक परेश पाल को टिकट नहीं दिया गया है। पार्टी ने कई नए चेहरे भी पेश किए हैं, जिनमें मानिकतला से श्रेया पांडे और उत्तरपाड़ा से टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के बेटे सिर्सन बनर्जी शामिल हैं। पार्टी के आंकड़ों के अनुसार उम्मीदवारों में से 52 महिलाएं, 95 अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति और 47 अल्पसंख्यक हैं। किसे दी गई प्राथमिकता? तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने चर्चित हस्तियों की तुलना में जमीनी स्तर पर जुड़ाव रखने वाले नेताओं को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, ”नेतृत्व ने जानबूझकर स्टार चेहरों से परहेज किया। जोर उन उम्मीदवारों पर है जो बूथ का प्रबंधन कर सकें, मतदाताओं को गोलबंद कर सकें और स्थानीय नेटवर्क बनाए रख सकें।” नंदीग्राम में तृणमूल ने पूर्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े पंचायत नेता पबित्र कर को मैदान में उतारा है, जो हाल में पार्टी में वापस लौटे हैं। इसके अलावा पार्टी ने बीरभूम, उत्तर 24 परगना और दक्षिण बंगाल के ग्रामीण इलाकों जैसे प्रमुख चुनावी क्षेत्रों में मजबूत जिला स्तरीय चेहरे बरकरार रखे हैं।  

पश्चिम बंगाल चुनाव: TMC ने पूरी ताकत झोंकी, भवानीपुर से चुनाव लड़ेंगी ममता बनर्जी

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी भवानीपुर से विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए सभी 294 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी। टीएमसी द्वारा जारी इस लिस्ट में ममता बनर्जी समेत पश्चिम बंगाल के कई दिग्गज टीएमसी नेताओं के नाम शामिल हैं, जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया है। बता दें कि सीएम ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा सीट से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगी। वहीं, हाल ही में टीएमसी में शामिल हुए पवित्र कर को नंदीग्राम से टिकट दिया गया है, जहां उनका भी मुकाबला सुवेंदु अधिकारी से होगा। भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों विधानसभा सीटों से टिकट दिया है। इसके साथ ही सुजापुर सीट से सबीना यास्मीन, जंगीपुर सीट से जाकिर हुसैन, सागरदिघी सीट से बायरन बिस्वास, दिनहाटा सीट से उदयन गुहा चुनाव लड़ेंगे। वहीं, सिलीगुड़ी सीट से गौतम देव चुनाव मैदान में उतरे हैं। खगराम सीट से आशीष मारजीत चुनाव लड़ेंगे। करीमपुर सीट से सोहम चक्रवर्ती चुनाव लड़ेंगे। कंडी सीट से अपूर्व सरकार चुनाव लड़ेंगे। सिताई सीट से संगीता रॉय बसुनिया चुनाव लड़ेंगी। कृष्णानगर उत्तर सीट से अभिनव भट्टाचार्य चुनाव लड़ेंगे। नवद्वीप सीट से पुण्डरीकाक्ष साहा चुनाव लड़ेंगे। वहीं, हरिन्घाटा सीट से राजीव विश्वास चुनाव लड़ेंगे। स्वरूपनगर सीट से बीना मंडल चुनाव लड़ेंगी। राजगंज सीट से सपना बर्मन चुनाव लड़ेंगी। हबरा सीट से ज्योतिप्रिया मल्लिक चुनाव लड़ेंगे। कृष्णानगर नगर दक्षिण सीट से उज्जवल विश्वास चुनाव लड़ेंगे। राणाघाट दक्षिण सीट से सौगत कुमार बर्मन चुनाव लड़ेंगे। कल्याणी सीट से अतींद्रनाथ मंडल चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले, सोमवार को भाजपा ने 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी, जिसमें सुवेंदु अधिकारी समेत कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल थे। वहीं, वाम दल ने भी अपनी लिस्ट जारी की थी। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे, पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं, वोटों की गिनती 4 मई को होगी।

बंगाल की सियासत गरमाई: ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने, सीट का ऐलान

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा चुनावी मुकाबला तय हो गया है। भाजपा ने सोमवार को बंगाल में 144 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी। इसमें शुभेंदु अधिकारी का भी नाम था। उन्हें नंदीग्राम सीट से उतारा गया है, जहां से उन्होंने पिछली बार ममता बनर्जी को हराया था। इसके अलावा भबानीपुर से भी वह मुकाबले में उतरे हैं, जहां से फिलहाल ममता बनर्जी विधायक हैं। अब ममता बनर्जी ने भी ऐलान कर दिया है कि वह खुद भबानीपुर से ही उतरेंगी। इस तरह साफ हो गया है कि पिछली बार नंदीग्राम वाली स्थिति भबानीपुर में दोहराएगी। नंदीग्राम से ममता बनर्जी के शुभेंदु अधिकारी के मुकाबले हार जाने की काफी चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि इस बार भबानीपुर में हाईवोल्टेज मुकाबला देखने को मिल सकता है। ममता बनर्जी ने मंगलवार को यह भी कहा कि हम राज्य में 226 सीटें जीतकर लगातार चौथी बार सत्ता हासिल करेंगे। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी तीखा हमला बोला है। दीदी ने कहा कि ईद से ठीक पहले बड़े-बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर चुनाव आयोग कर रहा है। ऐसा लगता है कि बंगाल चुनाव से पहले राज्य में दंगे कराने की तैयारी है। ऐसा कुछ भी हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार चुनाव आयोग ही रहेगा। ममता ने कहा कि भाजपा के इशारे पर चुनाव आयोग ऐसा कर रहा है। यदि राज्य में कोई भी अप्रिय घटना हुई तो उसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग और भाजपा की ही रहेगी। उन्होंने कहा कि पूरा खेल चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर कर रहा है। अच्छा तो यही होगा कि वह सीधे तौर पर भाजपा के लिए चुनाव प्रचार भी करे। इस तरह ममता बनर्जी ने संकेत दे दिए हैं कि वह चुनाव आयोग पर भी सीधे निशाना साधेंगी। पहले ही वह SIR को लेकर इलेक्शन कमिशन को टारगेट करती रही हैं। बता दें कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी के बीच हाईवोल्टेज मुकाबला हुआ था। 2021 में हाईवोल्टेज चुनाव में 77 सीटें जीती थी भाजपा यहां तक कयास लगने लगे थे कि भाजपा कहीं पहली बार सत्ता ही हासिल ना कर ले। हालांकि नतीजे आए तो भाजपा को 77 सीटें ही मिलीं। वहीं वामपंथी दलों और कांग्रेस का तो सूपड़ा ही साफ हो गया। फिर भी भाजपा के लिए यह बड़ी सफलता थी क्योंकि 2016 में उसे तीन सीटें ही मिली थीं। इस तरह 5 साल के अंदर तीन सीटों वाली पार्टी यदि 77 पर आ गई तो वह बड़ी चुनावी सफलता था। इस बार भी भाजपा टफ फाइट के मूड में नजर आ रही है और इसी क्रम में उसने करीब आधी सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का ऐलान पहले ही कर दिया है।

तीन स्कीम, तीन फैक्टर और ममता का मैजिक: पश्चिम बंगाल में टीएमसी की ताकत का राज, भाजपा कहां खड़ी?

नई दिल्ली, कोलकाता पश्चिम बंगाल में चुनाव का ऐलान हो चुका है। 4 मई को नई सरकार बन जाएगी और उससे पहले 23 और 29 अप्रैल को मतदान होने वाला है। इस इलेक्शन को लेकर भाजपा काफी उत्साहित है और उसे लगता है कि वह 2021 के मुकाबले और मजबूत हो सकती है। वहीं ममता बनर्जी लगातार चौथे कार्यकाल के लिए मैदान में उतरेंगी। ममता बनर्जी को केंद्र सरकार से टकराव और तुनकमिजाजी के लिए जाना जाता है। 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सघन प्रचार किया था और हाईवोल्टेज चुनाव में उन्होंने लगातार तीसरी बार विजय पाई थी। हालांकि वह खुद शुभेंदु अधिकारी के मुकाबले अपनी सीट नंदीग्राम में हार गई थीं। चुनाव की तारीखें आते ही एक ओपिनियन पोल भी सामने आया है, जिसमें ममता बनर्जी को बढ़त दिखाई गई है। अब सवाल है कि आखिर क्यों टीएमसी और ममता तीन कार्यकालों के बाद भी इतनी मजबूत हैं। इसके पीछे तीन योजनाओं और तीन फैक्टर को वजह माना जा रहा है। ये तीन योजनाएं हैं- लक्ष्मी भंडार, स्वास्थ्य साथी और युवा साथी। इनके माध्यम से ममता बनर्जी ने महिला, युवा और बुजुर्ग तीनों वर्ग साधने के प्रयास किए हैं। इसके अतिरिक्त उनकी कोशिश रही है कि SIR को एक बड़ा मुद्दा बना दें और वोटरों के खिलाफ इसे लेकर केंद्र सरकार के प्रति गुस्सा पैदा किया जाए। अब तीन फैक्टरों की बात करें तो पहला यह कि ममता बनर्जी की महिलाओं के बीच अच्छी पकड़ मानी जाती है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप कांड के मामले में भले ही उनकी पार्टी घेरे में आई थी, लेकिन अब भी महिलाओं का उन पर भरोसा दिखता है। इसके अतिरिक्त वह बांग्ला अस्मिता का सवाल उठाने में भी आगे रही हैं। इसके जरिए उन्होंने अकसर यह कोशिश की है कि किसी भी मामले को दिल्ली बनाम बंगाल की शक्ल दे दी जाए। इसके जरिए उन्होंने बांग्ला राष्ट्रवाद को मजबूत करने के प्रयास किए हैं। अब यदि भाजपा की बात करें तो उसके पास बांग्ला अस्मिता वाला कार्ड कमजोर पड़ जाता है। इसके अलावा उसके पास ममता बनर्जी जैसे एक बड़े चेहरे का अभाव है, जो पूरे राज्य में वोटरों को लुभा सके। हालांकि टीचर घोटाला, आरजी कर रेप और मर्डर केस जैसे मामलों ने भाजपा को कुछ मुद्दे दिए हैं। इसके अतिरिक्त बंगाल में बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ हमेशा से एक बड़ा मामला रहा है। ऐसे में देखना होगा कि भाजपा इस बार अपने हाथ लगने मुद्दों को किस तरह से भुना पाती है।  

प्रोटोकॉल विवाद पर ममता का जवाब: ‘बंगाल को बदनाम करने की कोशिश

कोलकाता पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम में हुई अव्यवस्था के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं है। कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी निजी आयोजकों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की थी। इसलिए अगर कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं पर आती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को शनिवार को होने वाले राष्ट्रपति के कार्यक्रम की पूरी जानकारी भी नहीं दी गई थी और न ही सरकार को इस आयोजन में शामिल किया गया था। उनके मुताबिक, जब राज्य सरकार को कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी ही नहीं थी, तो उस पर प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप लगाना सही नहीं है। सीएम ममता ने यह भी कहा कि गंदगी, ग्रीन रूम की समस्या और महिलाओं के टॉयलेट की कमी जैसी शिकायतें भी आयोजकों और एएआई की जिम्मेदारी हैं। पीएम मोदी के आरोपों पर पलटवार मुख्यमंत्री ने कोलकाता के केंद्रीय धरना स्थल से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीएमसी सरकार पर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाया, जबकि वास्तविकता अलग है। उन्होंने प्रधानमंत्री की एक तस्वीर दिखाते हुए कहा कि तस्वीर में प्रधानमंत्री बैठे हैं और राष्ट्रपति खड़ी हैं। सीएम ममता ने कहा कि हम कभी ऐसा नहीं करते। यह भाजपा की संस्कृति है, हम कभी राष्ट्रपति का अपमान नहीं करते। संविधान का पूरा सम्मान करती हैं बंगाल सरकार- ममता ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार राष्ट्रपति के पद और संविधान का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और राज्य सरकार हमेशा उसकी गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहती है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। राष्ट्रपति का सम्मान हर सरकारी की जिम्मेदारी- ममता उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं ताकि राज्य सरकार की छवि खराब की जा सके। ममता बनर्जी ने दोहराया कि राज्य सरकार ने राष्ट्रपति के दौरे के दौरान अपनी तरफ से सभी जरूरी सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और संविधान का सम्मान करना हर सरकार और नागरिक की जिम्मेदारी है, और पश्चिम बंगाल सरकार इस जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाती है। लोगों के अधिकार के लिए धरना पर बैठी हूं- ममता ममता बनर्जी ने यह भी बताया कि सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब ने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए राष्ट्रपति का बैगडोगरा हवाई अड्डे पर स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं धरना पर बैठी हूं ताकि लोगों के अधिकार सुरक्षित रहें। मैं इसे कैसे छोड़ सकती हूं? उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। ममता बनर्जी ने दोहराया कि राज्य सरकार हमेशा राष्ट्रपति और संविधान का सम्मान करती है और कार्यक्रम में किसी भी तरह की अव्यवस्था के लिए इसे जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। क्या है पूरा मामला, समझिए गौरतलब है कि बंगाल की राजनीति में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोपों के मामले में सियासत सातवें आसमान पर पहुंच गई है। इसकी शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति मुर्मू ने शनिवार को दार्जिलिंग में 9वें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन के आयोजन को लेकर असंतोष व्यक्त किया था और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति पर टिप्पणी की थी। इसके बाद क्या था, भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार पर राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप लगाया और खूब बयानबाजी की। दूसरी ओर जबकि टीएमसी ने प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप को खारिज किया है।

राष्ट्रपति मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन पर केंद्र की सख्त कार्रवाई, ममता सरकार से रिपोर्ट की मांग

 नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन और कार्यक्रम स्थल में अचानक बदलाव को लेकर विवाद गहरा गया है।सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पूरे मामले का बड़े स्तर पर संज्ञान लिया है. केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शाम पांच बजे तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें प्रोटोकॉल न दिए जाने, रास्ते की सही जानकारी न प्रदान करने और अन्य व्यवस्थाओं में चूक के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है। दरअसल, ये विवाद राष्ट्रपति मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान सामने आया, जहां वह दार्जिलिंग जिले में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं थीं. मूल रूप से कार्यक्रम बिधाननगर (फांसीदेवा ब्लॉक) में प्रस्तावित था, जहां बड़ी संख्या में संथाल आदिवासी समुदाय के लोग पहुंच सकते थे. लेकिन राज्य प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़भाड़ और अन्य कारणों का हवाला देकर इसे बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोशाईपुर (या गोसाईंपुर) में स्थानांतरित कर दिया. राष्ट्रपति ने खुद इस बदलाव पर नाराजगी जताई और कहा कि नया स्थान छोटा था, जिससे कई लोग पहुंच नहीं पाए। उन्होंने ममता बनर्जी को छोटी बहन बताते हुए पूछा कि क्या वो उनसे नाराज हैं, क्योंकि न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने पहुंचीं, जबकि पद की गरिमा के लिए प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है। इन प्रोटोकॉल्स का हुआ उल्लंघन सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल में कई पैमानों पर सुरक्षा संबंधित ब्लू बुक के नियमों का उल्लंघन हुआ है. जिसमें- प्रेसिडेंट को रिसीव करने और सी-ऑफ करने के लिए CM, CS और DGP क्यों नहीं थे?. सिर्फ सिलीगुड़ी के मेयर ही उन्हें रिसीव करने के लिए वहां थे. प्रेसिडेंट के लिए बने वॉशरूम में भी पानी नहीं था. एडमिनिस्ट्रेशन जिस रास्ते से गुज़रा, वह कचरे से भरा हुआ था. सूत्रों का ये भी कहना है कि इस परिस्थितियों के लिए दार्जिलिंग के डीएम, सिलीगुड़ी के CP और ADM जिम्मेदार हैं। अमित शाह ने ममता को घेरा इस मामले में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक्स पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की TMC सरकार ने अराजक व्यवहार करते हुए भारत के राष्ट्रपति का अपमान कर एक नया निचला स्तर छू लिया है. उन्होंने इसे भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों पर आघात बताया और कहा कि आज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर नागरिक आहत और दुखी महसूस कर रहा है.कार्यक्रम में प्रोटोकॉल की खुली अनदेखी कर राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है। शाह ने आरोप लगाया कि ये घटना टीएमसी सरकार में व्याप्त अव्यवस्था और गिरावट को दिखाती है. सरकार न सिर्फ नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, बल्कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद का भी सम्मान नहीं करती. खास तौर पर आदिवासी भाई-बहनों के कार्यक्रम में हुआ ये व्यवहार पूरे देश के लिए अपमानजनक है। केंद्रीय गृह ने इस घटना को भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों पर आघात करार दिया है. आज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर नागरिक आहत और दुखी महसूस कर रहा है। ममता ने आरोपों को किया खारिज दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं, लेकिन अगर कोई 50 बार भी आए तो हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि वह इस वक्त धरने पर बैठी हैं और जिस कार्यक्रम का जिक्र किया जा रहा है, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने इस कार्यक्रम के राज्य को जानकारी न होने की बात करते हुए कहा, ‘उस कार्यक्रम के आयोजकों, फंडिंग या आयोजन को लेकर राज्य सरकार को कोई जानकारी नहीं दी गई थी. जब भी राष्ट्रपति राज्य में आती हैं या जाती हैं तो इसकी सूचना मिलती है, लेकिन संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और न ही राज्य सरकार उस कार्यक्रम का हिस्सा थी।

एलपीजी दाम बढ़ने पर सड़कों पर उतरेगी TMC, ममता बनर्जी ने कोलकाता में मार्च का किया ऐलान

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध जताया और कोलकाता में रविवार को बड़े पैमाने पर विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया है। सीएम ममता बनर्जी ने लोगों से अपील की है कि वे रसोई के बर्तन और घरेलू सामान लेकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हों। उन्होंने कहा कि बढ़ती गैस कीमतों का सबसे अधिक असर आम परिवारों, खासकर महिलाओं पर पड़ रहा है, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर माताओं और बहनों को सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराना चाहिए। कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में धरने पर बैठीं सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी आम जनता के लिए बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार मध्य रात्रि से घरेलू उपयोग वाले गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। तीन दिन पहले ही कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में 49 रुपए का इजाफा किया गया था। उन्होंने कहा कि बड़े सिलेंडर की कीमत करीब 2,100 रुपए तक पहुंच गई है, जबकि छोटे सिलेंडर की कीमत लगभग 1,000 रुपए हो गई है। मुख्यमंत्री ने गैस बुकिंग से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब एलपीजी सिलेंडर 21 दिन पहले बुक करना होगा। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अगर किसी घर में गैस खत्म हो जाए तो क्या वह परिवार 21 दिन तक बिना खाना बनाए रह सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियां बनाते समय सरकार को यह भी सोचना चाहिए कि आम लोग क्या खाएंगे और उनकी रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। धरने के मंच से सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि रविवार को निकाले जाने वाले जुलूस में लोग बर्तन, कटोरी, चम्मच और रसोई के अन्य सामान लेकर आएं, ताकि यह दिखाया जा सके कि गैस के बिना घरों में खाना बनाना संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर संभव हो तो गैस स्टोव भी साथ लेकर आएं और टोकरी में कच्चा अनाज लेकर विरोध जताएं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़े तो महिलाएं काली साड़ी पहनकर भी इस विरोध में शामिल हो सकती हैं। मुख्यमंत्री ने इसे मानवता की रक्षा का आंदोलन बताते हुए महिलाओं से बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। इस बीच, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के खतरे के बीच, केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है। सरकार ने भारतीय रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अतिरिक्त खरीदी गई एलपीजी मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं को ही उपलब्ध कराई जाए। केंद्र सरकार के फैसले के तहत 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद पहले 879 रुपए में मिलने वाला सिलेंडर अब 939 रुपए में मिलेगा। नई कीमतें शनिवार से लागू हो गई हैं। वहीं, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में भी प्रति सिलेंडर 50 रुपए का इजाफा किया गया है, जिससे इसकी कीमत बढ़कर लगभग 1,990 रुपए तक पहुंच गई है। गैस की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर रेस्तरां और होटल उद्योग पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे बाहर खाना खाने का खर्च बढ़ सकता है। इसी दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य सरकार की नई योजना ‘बांग्लार युवा साथी’ को लेकर भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत लाभार्थियों को शनिवार से ही वित्तीय सहायता मिलनी शुरू हो जाएगी। योजना के तहत राज्य के ऐसे छात्र जिन्होंने माध्यमिक परीक्षा पास कर ली है, लेकिन अभी तक उन्हें नौकरी नहीं मिली है, उन्हें प्रति माह 1,500 रुपए का भत्ता दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले इस योजना की राशि 1 अप्रैल से देने की बात कही गई थी, लेकिन अब इसे पहले ही लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने वादों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाला अनुदान फरवरी से ही दिया जा रहा है। ममता बनर्जी ने कहा, “हम जो कहते हैं, वो करते हैं।”

राज्यपाल के इस्तीफे पर ममता का आरोप, कहा- ‘अमित शाह की साजिश के बिना ऐसा नहीं हो सकता’

कोलकाता पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल सीवी आनंदबोस के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह सब गृह मंत्री अमित शाह के दबाव की वजह से हो रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह का फैसला अमित शाह ही ले सकते हैं। बनर्जी ने कहा कि सीवी आनंदबोस ने किसलिए इस्तीफा दिया इसको लेकर कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा कता लेकिन इतना साफ है कि राजनीतिक फायदे को देखते हुए ही इस तरह का परिवर्तन किया जा रहा है। नवंबर 2027 तक था कार्यकाल सीएम बनर्जी ने कहा कि उन्हें शाह से पता चला है कि बोस के जाने के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल एवं पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) आरएन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। बोस ने दिल्ली से बताया, ”हां, मैंने इस्तीफा दे दिया है। मैं साढ़े तीन साल तक बंगाल का राज्यपाल रहा हूं; यह मेरे लिए पर्याप्त है।’ उन्होंने हालांकि अचानक इस्तीफा देने के कारणों का खुलासा नहीं किया, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं क्योंकि उनका कार्यकाल नवंबर 2027 तक था। बनर्जी ने कहा कि शाह ने थोड़ी देर पहले ही उन्हें इस फैसले के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा हैं। इस तरह से एकतरफा फैसले किसी राज्य के हित में नहीं हैं बल्कि पार्टी विशेष के हित में हैं। ‘लोक भवन’ के अधिकारियों ने पुष्टि की कि त्यागपत्र राष्ट्रपति भवन भेजा जा चुका है। बोस ने 17 नवंबर, 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्होंने अपने कार्यकाल की समाप्ति से लगभग 20 महीने पहले ही पद छोड़ दिया। इसके साथ ही वह पश्चिम बंगाल के लगातार दूसरे ऐसे राज्यपाल बन गए जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही पद छोड़ दिया। बनर्जी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वह अचानक हुए इस घटनाक्रम से ”स्तब्ध और बेहद चिंतित” हैं और दावा किया कि उन्हें इसके कारणों का पता नहीं है। उन्होंने कहा, ”हालांकि, यदि बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल बोस पर केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से राजनीतिक कारणों से दबाव डाला गया हो तो मुझे हैरानी नहीं होगी।’ टीएमसी चीफ बनर्जी ने कहा, ”मुझे केंद्रीय गृह मंत्री (अमित शाह) से पता चला है कि आरएन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में सीवी आनंद बोस का स्थान लेंगे।’ लोकतांत्रिक ढांचे पर प्रहार मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि शाह ने उन्हें बोस की जगह रवि के आने की जानकारी दी, लेकिन इस मामले में उनसे परामर्श नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “केंद्र को सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए और ऐसे एकतरफा फैसले लेने से बचना चाहिए जो लोकतांत्रिक परंपराओं और राज्यों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हों।’ इस बीच बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने संघीय भावना पर हमले के बारे में बनर्जी की टिप्पणियों को ”बेबुनियाद” करार दिया। उन्होंने कहा, ”राजभवन में बदलाव होना आम बात है। मैंने सुना है कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया है। इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है। तृणमूल कांग्रेस सिर्फ इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है।” यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समय पर सामने आया है, क्योंकि निर्वाचन आयोग द्वारा जल्द ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित किये जाने की उम्मीद है। अपने कार्यकाल के दौरान, बोस ने कई बार राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ उनका अक्सर टकराव होता रहता था। गुरुवार शाम को दिल्ली से उनके अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक विश्लेषकों और राज्य प्रशासन दोनों को आश्चर्यचकित कर दिया। लोक भवन के अधिकारियों ने बताया कि बोस दिन में पहले दिल्ली गये थे और वहीं से उन्होंने राष्ट्रपति भवन को अपना त्यागपत्र भेजा था। इस घटनाक्रम ने बोस के पूर्ववर्ती जगदीप धनखड़ के पद से इस्तीफा देने की यादें ताजा कर दीं, जिन्होंने राज्यपाल के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया था, क्योंकि वह 2022 में उपराष्ट्रपति चुने गए थे। धनखड़ ने पिछले साल अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।  

‘ममता बनर्जी बनें चेहरा’, राहुल गांधी पर उठे सवाल; मनमोहन सिंह के पूर्व सहयोगी की बड़ी सलाह, TMC का समर्थन

नई दिल्ली भारतीय राजनीति में इस समय पर सत्ताधारी पार्टी भाजपा के पास एक चेहरा प्रधानमंत्री मोदी के रूप में मौजूद है। लेकिन सामने की तरफ बिखरा हुआ विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, समय- समय पर इस पद को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार ने विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व को लेकर ममता बनर्जी का नाम आगे बढ़ाया है। उन्होंने लिखा कि वर्तमान समय में ममता बनर्जी ही एक ऐसी नेता है जो एक राजनीतिक दल और सरकार दोनों का नेतृत्व कर रही हैं। वह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं के बीच में एक अलग पहचान रखती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने टेलीग्राफ में लिखे अपने लेख में ममता को एक कद्दावर नेत्री करार दिया। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह से अपनी ताकत से उभरी हैं, और पहली पीढ़ी की नेता है, जो कि उन्हें और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाता है। इतना ही नहीं बारू ने कांग्रेस नेतृत्व के ऊपर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी-मनमोहन सिंह मॉडल को राहुल और खरगे के साथ दोहराने का कोई खास लाभ भी पार्टी और इंडिया ब्लॉक को नहीं हुआ है। ऐसे में अब ममता को नेतृत्व संभालना चाहिए। एक महिला प्रधानमंत्री का समय बारू ने लिखा कि काफी समय हो गया है कि अब देश को एक महिला प्रधानमंत्री मिलना चाहिए। उन्होंने लिखा, “यह देखते हुए कि सत्ताधारी भाजपा एक पुरुष प्रधान पार्टी है, अगर विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व किसी महिला नेत्री के हाथ में हो तो यह महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत आधार होगा। इससे भाजपा के महिला मतदाताओं में सेंध लग सकती है। वैसे भी काफी समय हो गया है, जब हमारे पास महिला प्रधानमंत्री रही हो।” गौरतलब है कि आजाद भारत के इतिहास में केवल इंदिरा गांधी ही भारत की महिला प्रधानमंत्री रही हैं। बारू के इस लेख को तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी शेयर किया। उन्होंने लिखा,”एक विचार ऐसा भी जिसका समय आ गया है।’ भारत की राजनीति में कांग्रेस भले ही अभी कमजोर स्थिति में हो लेकिन उसके सामने कोई भी नेता अभी इतनी मजबूत स्थिति में नहीं आया है। ममता बनर्जी का पश्चिम बंगाल में एक मजबूत आधार है, लेकिन दूसरे राज्यों में उनकी खास पहचान नहीं है। इसके अलावा विरोधी प्रचार की वजह से आम जनमानस के मन ममता की छवि एक तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली महिला नेता के तौर पर बनी हुई है, जबकि राहुल गांधी अभी भी एक मजबूत राष्ट्रीय नेता के तौर पर उभर रहे हैं। कई राज्यों में कांग्रेस का एक मजबूत आधार है। ऐसे में भले ही ममता का नाम आगे बढ़ाया जा रहा हो, लेकिन इसका कोई मजबूत आधार नजर नहीं आता।  

सियासत से सीधे अदालत तक: ममता बनर्जी अब सुप्रीम कोर्ट में SIR केस की पैरवी को तैयार

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। वह वकील के तौर पर शीर्ष अदालत में पहुंची हैं। आज का दिन अदालत के इतिहास में अनोखा है क्योंकि पहली बार कोई मौजूदा सीएम सुप्रीम कोर्ट में वकील की हैसियत से दलीलें देगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण को अदालत में चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई जारी है और इसी मामले में दलीलें देने के लिए ममता बनर्जी शीर्ष अदालत पहुंची हैं। चीफ मिनिस्टर ने अदालत में इंटरलॉक्युटरी ऐप्लिकेशन भी दाखिल की है। इसमें उन्होंने अदालत में पेश होने और निजी तौर पर दलीलें देने की मांग रखी है। मंगलवार को ही ममता बनर्जी के नाम का गेट पास सुप्रीम कोर्ट में बन गया था। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार SIR वाले केस की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही है। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल हैं। इस मामले में ममता बनर्जी के अलावा तीन और याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें से दो तो टीएमसी के सांसद ही हैं- डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन। ममता बनर्जी ने बंगाल में SIR को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आखिर विपक्ष की सत्ता वाले तीन राज्यों में ही यह क्यों हो रहा है, जबकि असम में इसकी प्रक्रिया नहीं चल रही है, जहां भाजपा की सरकार है। यह याचिका 28 जनवरी को दाखिल हुई थी, जिसमें बंगाल सरकार ने कहा था कि चुनाव आयोग की कार्यवाही गैर-संवैधानिक है। बंगाल सरकार की दलील है कि SIR की पूरी प्रक्रिया जल्दबाजी में और अपारदर्शी तरीके से कराई जा रही है। इसकी कोई जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी और अन्य याचियों की विशेष आपत्ति इस बात को लेकर है कि आखिर Logical Discrepancy वाली कैटेगरी में जिन वोटर्स के नाम डाले गए हैं, उनका ऑनलाइन प्रकाशन क्यों नहीं किया गया है। ममता बनर्जी का कहना है कि इन लोगों के नाम लिस्ट में ना डालने से साफ है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट से यदि किसी का भी नाम कटता है तो उसके बारे में जानकारी देनी चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी मिलना चाहिए। बता दें कि ममता बनर्जी की चुनाव आयोग में भी एक मीटिंग हुई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से ही वह बैठक के दौरान भिड़ गई थीं। उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं बंगाल से यहां 1 लाख लोगों को ला सकती हूं।  

INDIA गठबंधन की लीडरशिप पर ममता बनर्जी ने ठोका दावा, भाजपा ने कहा- राहुल गांधी पर किसी को नहीं भरोसा

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने INDIA गठबंधन और राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाया है। भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, “INDIA गठबंधन का कोई भी नेता राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के नेतृत्व पर भरोसा नहीं करता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि INDIA गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति है। उन्होंने कहा, “कभी अखिलेश यादव कहते हैं कि वह नेता हैं, कभी ममता बनर्जी कहती हैं कि वह नेता हैं और कभी स्टालिन कहते हैं। लेकिन सभी एक स्वर में कहते हैं कि राहुल गांधी नेता नहीं हैं।” भंडारी ने आगे कहा कि भाजपा राहुल गांधी को ‘बालक बुद्धि’ नहीं कहती, बल्कि यह INDIA गठबंधन के नेता ही हैं जो इस तरह के विचार रखते हैं। ममता बनर्जी का बयान यह बयान ममता बनर्जी की टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने गठबंधन के भीतर नेतृत्व की स्पष्टता पर जोर दिया। ममता बनर्जी ने कहा था कि INDIA गठबंधन को एक समन्वित और सक्षम नेतृत्व की आवश्यकता है, जो चुनावों में भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर काम कर सके। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैंने इंडिया गठबंधन का गठन किया था। अब इसे प्रबंधित करना मोर्चे का नेतृत्व करने वालों पर निर्भर है। अगर वे यह नहीं कर सकते तो मैं क्या कर सकती हूं? मैं बस यही कहूंगी कि सभी को साथ लेकर चलने की जरूरत है।’’ यह पूछे जाने पर कि एक मजबूत भाजपा विरोधी ताकत के रूप में अपनी साख को देखते हुए वह गठबंधन का प्रभार क्यों नहीं ले रही हैं, ममता बनर्जी ने कहा, ‘‘यदि अवसर दिया गया तो मैं इसका सुचारू संचालन सुनिश्चित करूंगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं बंगाल से बाहर नहीं जाना चाहती, लेकिन मैं इसे यहां से संचालित कर सकती हूं।’’ आपको बता दें कि प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी को ‘राजनीतिक फ्लेयर’ बताते हुए कहा कि उनका नेतृत्व गठबंधन के भीतर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, “INDIA गठबंधन राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर एकमत नहीं है। यह स्पष्ट दिखता है।” राहुल गांधी और INDIA गठबंधन पर भाजपा के इस तंज ने आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है। गठबंधन के नेता भले ही सार्वजनिक रूप से एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन भाजपा का दावा है कि भीतरखाने असहमति की स्थिति बनी हुई है। अब यह देखना होगा कि INDIA गठबंधन इस आलोचना का कैसे जवाब देता है और क्या वह नेतृत्व को लेकर स्पष्टता प्रदान कर पाएगा।

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही घटनाओं से मैं निराश हूं, भारत सरकार इस पर गौर करेगी, मोदी के साथ आईं ममता

कोलकाता बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसक घटनाओं और इस्कॉन मंदिर से जुड़े चिन्मय कृष्ण दास को जेल भेजे जाने पर ममता बनर्जी की भी प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि इस पर केंद्र सरकार को कदम उठाने चाहिए। ममता बनर्जी ने कहा कि हम केंद्र सरकार के साथ हैं, वह चाहे जो कदम उठाए। ममता बनर्जी ने गुरुवार को कहा कि यह दूसरे देश का मामला है। इसलिए मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहती क्योंकि यह हमारे अधिकार क्षेत्र के बाहर का मामला है। बनर्जी ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को केंद्र सरकार को सुलझाना है और राज्य सरकार केंद्र के निर्णय का पालन करेगी। बनर्जी ने कहा, ‘बांग्लादेश एक अलग देश है। भारत सरकार इस पर गौर करेगी। यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। हमें इस बारे में बात नहीं करनी चाहिए और न ही इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। हालांकि हमें (बांग्लादेश में वर्तमान स्थिति को लेकर) अंदर से दुख है, लेकिन हम केंद्र द्वारा निर्धारित नीतियों का पालन करते हैं।’ मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने इस मामले पर ‘इस्कॉन’ के प्रतिनिधियों से बात की है। हालांकि उन्होंने इस्कॉन अधिकारियों से हुई बातचीत के संबंध में अधिक जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही घटनाओं से मैं निराश हूं। बंगाल की सीएम ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि किसी भी धर्म के लोगों को नुकसान पहुंचे। मैंने यहां इस्कॉन के प्रतिनिधियों से बात की। यह घटना दूसरे देश की है, इसलिए हम कुछ नहीं कर सकते। केंद्र सरकार को इस मामले में जरूरी ऐक्शन लेना चाहिए। हम इस मसले पर उनके साथ हैं।’ ममता बनर्जी से पहले उनके भतीजे अभिषेक ने भी बांग्लादेश के हालातों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। केंद्र सरकार को इस मामले में निर्णायक कदम उठाना चाहिए। उनके अलावा पार्टी के सीनियर नेता सौगत रॉय ने भी बांग्लादेश को लेकर बयान दिया है। बता दें कि कांग्रेस की ओर से भी बांग्लादेश को लेकर बयान जारी किया गया है और कहा कि वहां जो हो रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने एक बयान में कहा, ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने आ रहे असुरक्षा के माहौल पर गहरी चिंता व्यक्त करती है। इस्कॉन संत की गिरफ्तारी इसका ताजा उदाहरण है।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत सरकार बांग्लादेश की सरकार पर आवश्यक कदम उठाने और अल्पसंख्यकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दबाव डालेगी।

जूनियर डॉक्टरों से भूख हड़ताल खत्‍म करने की अपील, आमरण अनशन वापस ले लें: ममता बनर्जी

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को मुख्य सचिव मनोज पंत के मोबाइल फोन पर जूनियर डॉक्टरों से अपील की कि वे आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की जूनियर महिला डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या के विरोध में अपनी मांगों के समर्थन में आमरण अनशन वापस ले लें। पंत, गृह सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और कोलकाता पुलिस की केंद्रीय संभाग की उपायुक्त इंदिरा मुखर्जी के साथ अचानक मध्य कोलकाता के एस्प्लेनेड में सात जूनियर डॉक्टरों की भूख हड़ताल के मंच पर पहुंच गए। वहां मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री से उनके मोबाइल फोन पर संपर्क किया और मुख्‍यमंत्री ने स्पीकर के माध्यम से प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों से भूख हड़तान खत्‍म करने की अपील की। बनर्जी ने कहा, “मैं आपसे भूख हड़ताल वापस लेने का अनुरोध करती हूं। कृपया चर्चा के लिए आएं। आपकी अधिकांश मांगें पहले ही पूरी हो चुकी हैं। कृपया मुझे तीन से चार महीने का समय दें। मैं सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में विभिन्न परिषदों के लिए चुनाव कराने की व्यवस्था करूंगी। कृपया भूख हड़ताल वापस लें।” स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम को हटाने की जूनियर डॉक्टरों की मांग पर उन्होंने कहा कि यदि एक महत्वपूर्ण विभाग के सभी प्रमुख अधिकारियों को एक ही समय में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, तो प्रशासनिक कठिनाइयां आएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने पहले ही कोलकाता पुलिस आयुक्त और कुछ अन्य अधिकारियों को हटा दिया है।” उन्होंने कहा कि अगर आम लोगों को सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं नहीं मिलती हैं, तो वे खुद को असहाय महसूस करते हैं। मैं मानवता के पक्ष में हूं। मैं भी न्याय चाहती हूं। लेकिन साथ ही आम लोगों का इलाज भी सुनिश्चित करना होगा। इसलिए मैं आपसे फिर से अनुरोध करती हूं कि आप भूख हड़ताल खत्‍म कर दें और काम पर वापस लौट आएं। शुक्रवार रात को ही जूनियर डॉक्टरों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर उनकी लंबित मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे अगले मंगलवार से पूर्ण रूप से काम बंद कर देंगे। मुख्यमंत्री की यह अपील ऐसे समय में आई है जब कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अपनी सहकर्मी के साथ हुए बलात्कार और हत्या के खिलाफ जूनियर डॉक्टरों के एक समूह का आमरण अनशन 15वें दिन में प्रवेश कर गया है।  

बजट 2024 : ‘हमें किसी की भीख नहीं चाहिए, बंगाल से जलते हैं पीएम मोदी’, ममता बनर्जी

Budget 2024: 'We do not want anyone's alms, PM Modi is jealous of Bengal', Mamata Banerjee

Budget 2024: ‘We do not want anyone’s alms, PM Modi is jealous of Bengal’, Mamata Banerjee कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को संसद में पेश आम बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे जनविरोधी व गरीब विरोधी बजट करार दिया है। विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत में ममता ने कहा कि आम बजट में बंगाल के साथ फिर सौतेला व्यवहार किया गया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी पश्चिम बंगाल से जलते हैं। बंगाल की जनता जवाब देगीममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल को किसी की भीख नहीं चाहिए। बंगाल की जनता फिर इसका जवाब देगी। ममता ने कहा कि बजट में आम आदमी व गरीबों के लिए कुछ भी नहीं है। बंगाल के साथ फिर पूरी तरह भेदभाव किया गया है। बंगाल का केंद्र पर 1.71 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है, पर हमारे राज्य को एक रुपया भी बजट में नहीं दिया गया है। दूसरे राज्यों से भेदभाव नहीं होना चाहिएबनर्जी ने कहा कि बजट में बिहार और आंध्र प्रदेश को विशेष तरजीह देने के सवाल पर ममता ने कहा कि हमें उससे कोई आपत्ति नहीं है लेकिन बंगाल सहित दूसरे राज्यों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। यह पूरी तरह राजनीतिक बजट है। ममता ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बंगाल से जलते हैं।

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