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महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की महत्वपूर्ण भूमिका

   उज्जैन  महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिससे निपटने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति की संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है। महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की भूमिका ·  सुरक्षित आश्रय एवं तात्कालिक सहायता – वन स्टॉप सेंटर उन महिलाओं को तत्काल आश्रय और सुरक्षा प्रदान करता है जो घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन हिंसा अथवा किसी भी प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती है। सेंटर में महिलाओं को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाती है और उन्हें सुरक्षित वातावरण में आश्रय दिया जाता है। ·  कानूनी सहायता और परामर्श – वन स्टॉप सेंटर पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सके और आवश्यक कानूनी कदम उठा सकें। कानूनी परामर्श और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहायता मिलने से महिलाएँ अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय पाने की दिशा में सशक्त हो सकें। ·  चिकित्सा सहायता – वन स्टॉप सेंटर पर महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलती है। हिंसा या प्रताड़ना से घायल महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य सेवाएँ के साथ समन्वय कर चिकित्सा सेवाएँ दी जाती है। ·  मनोवैज्ञानिक परामर्श – हिंसा की शिकार महिलाएँ अक्सर मानसिक आघात से गुजरती है, वन स्टॉप सेंटर पर प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं को मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते है जिससे उनका आत्म-विश्वास मजबूत होता है। ·  पुनर्वास सेवाएँ एवं समाज में पुनर्स्थापना – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को पुनर्वास सेवाएँ भी प्रदान करते है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को उनके परिवार के साथ पुनर्स्थापित करने अथवा उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने, अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर प्रदान करता है। ·  आर्थिक सशक्तिकरण के लिये प्रशिक्षण और रोजगार – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार देने के लिये प्रशिक्षण देने का भी प्रयास करते है। महिलाओं को विभिन्न कौशल में प्रशिक्षित किया जाता है। इससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें।        प्रदेश के 52 जिलों में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित किये जा रहे है। प्रारंभ से अगस्त 2024 तक 98 हजार 636 महिलाओं को पंजीकृत कर विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की गई, जिसमें लगभग 78 प्रतिशत महिलाएँ (76,499) को घरेलू हिंसा से संबंधित सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दहेज उत्पीड़न, बलात्कार, यौन अपराध, बाल विवाह, गुमशुदा, अपहरण, निराश्रित आदि से संबंधित प्रकरणों में यथोचित मदद की गई। वर्ष 2019-20 में कुल 6 हजार 352 महिलाओं को सहायता दी गई थी। वर्ष 2023-24 में 21 हजार 490 महिलाओं को मदद प्रदान की गई। अब सभी वन स्टॉप सेंटर में वाहनों का प्रावधान भी किया गया है, जिससे दूरस्थ महिलाओं को भी त्वरित सहायता मिल सकेगी। क्रमांक 1881         

उत्तर प्रदेश को 31 हजार 962 हजार करोड़ टैक्स डिवोल्यूशन मिला

लखनऊ केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को  1,78,173 करोड़ रुपये का टैक्स डिवॉल्यूशन जारी किया है. इसमें सबसे ज्यादा यूपी को 31हजार 962 करोड़ रुपये मिले हैं. सभी राज्यों के संदर्भ में देखें तो इस टैक्स डिवॉल्यूशन में अक्टूबर, 2024 में देय नियमित किस्त के अलावा ₹89,086.50 करोड़ की एक अग्रिम किस्त भी शामिल है. वित्त मंत्रालय ने कहा है कि आगामी त्यौहारी सीज़न को देखते हुए और राज्यों को पूंजीगत खर्चे में तेजी लाने और उनके विकास/कल्याण संबंधी खर्चे को वित्तपोषित करने में सक्षम बनाने के लिए अग्रिम किस्त जारी की गई. केंद्र के इस फैसले पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रतिक्रिया भी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कर हस्तांतरण के तहत उत्तर प्रदेश को समय पर 31,962 करोड़ रुपये करने के लिए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्रालय का हार्दिक आभार. यह अग्रिम किस्त हमारे त्यौहारी सीजन की तैयारियों को काफी बढ़ावा देगी और पूरे राज्य में विकास और कल्याणकारी पहलों को गति देगी. हम सब मिलकर एक मजबूत और अधिक समृद्ध उत्तर प्रदेश का निर्माण कर रहे हैं. बता दें इन रुपयों को राज्य सरकार उन अलग-अलग योजनाओं और स्कीम्स में खर्च करेगी जिनका ऐलान किया गया है. सरकार ने बीते दिनों कर्मचारियों को बोनस देने, बीपीएल श्रेणी वालों को त्यौहारी सीजन में दो सिलेंडर मुफ्त देने का ऐलान किया था. इन योजनाओं में राज्य सरकार का करोड़ों रुपया खर्च होता है. ऐसे में केंद्र से टैक्स डिवॉल्यूशन का रुपया मिलने पर राज्य सरकार को काफी राहत मिलेगी.  

ग्वालियर में होगा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी जिम्मेदारी संभाल रहे प्रचारकों का चार दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग

भोपाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी सम-वैचारिक संगठनों के संगठन मंत्री और अन्य पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रचारकों का चार दिवसीय अखिल भारतीय प्रशिक्षण वर्ग इस बार ग्वालियर में आयोजित किया जा रहा है। 1 से 4 नवंबर तक यह वर्ग चलेगा। इसके लिए 30 अक्टूबर को सभी प्रचारक ग्वालियर के केदारधाम सरस्वती शिशु मंदिर में एकत्र होंगे। इसमें सरसंघचालक डा. मोहन भागवत और अखिल भारतीय टोली के सभी प्रमुख सदस्य शामिल होंगे। स्वयंसेवकों के लिए संघ शिक्षा वर्ग की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने प्रचारकों के लिए भी समय-समय पर प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन करता है। आमतौर पर हर पांच वर्ष में संघ की ओर से सभी सम-वैचारिक संगठनों के उन संगठन मंत्रियों का प्रशिक्षण वर्ग किया जाता है, जो पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय मजदूर संघ, आरोग्य भारती, प्रज्ञा प्रवाह, चित्र भारती जैसे संगठनों में काम कर रहे हैं। इसी क्रम में ग्वालियर में संघ के सम-वैचारिक संगठनों में कार्यरत प्रचारकों को संघ चार दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा।   नए पाठ्यक्रम की बनेगी रूपरेखा संघ की स्थापना के अगले वर्ष 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यही वजह है कि संघ इस वर्ग में अपने सम-वैचारिक संगठनों में भेजे गए प्रचारकों के प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में भी बदलाव करने जा रहा है। संघ की अखिल भारतीय टोली की मौजूदगी में ही नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा तय की जाएगी। इसमें संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित अन्य सहसरकार्यवाह भी उपस्थित रहेंगे। वर्ग के लिए संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत 30 अक्टूबर को ग्वालियर पहुंचने की संभावना है। 31 अक्टूबर को अखिल भारतीय टोली की बैठक हो सकती है। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

कर्मचारियों के लिए वेतन एक या दो नवंबर को देने के स्थान पर 28-29 अक्टूबर को दे दिया जाए, अच्छे से मना पाएंगे दीपावली: मप्र सरकार

भोपाल दीपावली पर्व को देखते हुए सरकार 11 लाख से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को अक्टूबर का अग्रिम वेतन दे सकती है। वित्त विभाग ने इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को इस संबंध में प्रस्ताव दिया जा रहा है। अक्टूबर में कई त्योहार हैं। वेतन एक या दो नवंबर को देने के स्थान पर 28-29 अक्टूबर को दे दिया जाए। ऐसा होने से वह त्योहार अच्छे से मना सकेंगे। प्रदेश में नियमित अधिकारियों-कर्मचारियों की संख्या 7 लाख और पेंशनरों की 4 लाख के आसपास है। इन्हें वेतन, पेंशन और भत्ते देने में लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये लगते हैं। प्रतिमाह एक-दो तारीख को वेतन का भुगतान किया जाता है, जिसके लिए कोषालय में बिल 28-29 तारीख को लगाए जाते हैं। मुख्यमंत्री का होगा अंतिम निर्णय दीपोत्सव को देखते हुए इस बार वेतन चार-पांच दिन पहले दिया जा सकता है, जिससे सभी कर्मचारी अच्छे से त्योहार मना सकें। इसके लिए वित्त विभाग ने पूर्व के उदाहरण देते हुए प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मुख्य सचिव अनुराग जैन के माध्यम से अंतिम निर्णय के लिए मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। संगठनों ने की अग्रिम भुगतान की मांग कर्मचारी संगठनों ने भी अग्रिम भुगतान की मांग सरकार से की है। संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने मांग की है कि दीपावली को देखते हुए 25 अक्टूबर तक संविदा और आउटसोर्स वाले सभी कर्मचारियों को अग्रिम भुगतान किया जाए, जिससे वे अच्छे से त्योहार मना सकें।

बंगाल में ममता सरकार पर बरसे जेपी नड्डा, सत्ता में बैठे हैं उनके मन में करुणा आए, अन्याय के खिलाफ लड़ सकें

कोलकाता भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हो रहे अन्याय से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। दुर्गा पूजा में कोलकाता के एक दिवसीय दौरे पर आए नड्डा ने महानगर के प्रसिद्ध पूजा आयोजक संतोष मित्रा स्क्वायर के पूजा पंडाल का परिदर्शन के बाद यह बात कही। कोलकाता में सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला चिकित्सक से दुष्कर्म व हत्या के मामले को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। नड्डा सुबह करीब 11 बजे कोलकाता पहुंचने के बाद महासप्तमी के अवसर पर सबसे पहले हावड़ा में रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ पहुंचे। दुर्गा पूजा में हुए शामिल नड्डा बेलूर मठ में दुर्गा पूजा में भी शामिल हुए। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री सुकांत मजूमदार और बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी भी उनके साथ थे। यहां दर्शन पूजन के बाद नड्डा दोपहर में मध्य कोलकाता के संतोष मित्रा स्क्वायर पूजा कमेटी के पंडाल में पहुंचे, जिसके प्रमुख कोलकाता नगर निगम में भाजपा के पार्षद सजल घोष हैं। लास वेगास क्षेत्र की तर्ज पर बनाए गए इस पंडाल का परिदर्शन और देवी दुर्गा के समक्ष प्रार्थना करने के बाद नड्डा ने बंगाल में अन्याय से लड़ने के लिए भाजपा की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा हमें नया जोश और तब तक अन्याय के खिलाफ लड़ने की नई ऊर्जा देती है, जब तक कि सत्य और न्याय की जीत न हो जाए। ममता सरकार पर बोला हमला जेपी नड्डा ने कहा, ‘मां दुर्गा करुणा और शक्ति की प्रतीक हैं, लेकिन जब मैं बंगाल आता हूं और यहां महिलाओं के साथ हो रही क्रूरता देखता हूं तो मैं मां दुर्गा से विशेष प्रार्थना करता हूं कि यहां जो सत्ता में बैठे हैं उनके मन में करुणा आए और हम यहां हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ सकें।’ उन्होंने ममता सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की संस्कृति ‘धमकी संस्कृति’ बन गई है। गुंडागर्दी और कट मनी संस्कृति टीएमसी का पर्याय बन गई है। जनता हकीकत जानती है और मुझे पूरा भरोसा है कि वे टीएमसी को कड़ा सबक सिखाएंगे। नड्डा ने दुर्गा पूजा के अवसर पर राज्य के लोगों को शुभकामनाएं दीं और इस त्योहार के सांस्कृतिक महत्व तथा अन्याय से लड़ने की भावना को पुनर्जीवित करने में इसके महत्व को रेखांकित किया। इसके बाद नड्डा ने बांग्ला को शास्त्रीय भाषा घोषित करने के केंद्र के हालिया फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करने के वास्ते कोलकाता के न्यूटाउन स्थित एक पांच सितारा होटल में आयोजित प्रतिष्ठित हस्तियों की एक बैठक में भाग लिया। हाल में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बांग्ला सहित पांच भाषाओं को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिल सकता है 4 और विधायको का साथ, जम्मू-कश्मीर में अपने दम पर बना सकती है सरकार

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए निर्वाचित सात निर्दलीय उम्मीदवारों में से तीन नेशनल कान्फ्रेंस में अपनी घर वापसी के लिए तैयार हैं। इनके अलावा कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले एक विजयी उम्मीदवार भी हाथ के बजाय हल (नेकां का चुनाव चिन्ह) थामने के मूड में हैं। वहीं, कांग्रेस के बागी निर्दलीय उम्मीदवार को उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में मंत्री बनाए जाने की भी चर्चा है। चुनाव परिणाम में सात निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे हैं। इनमें से तीन नेशनल कान्फ्रेंस के बागी हैं, जिन्होंने टिकट न मिलने पर पार्टी से नाता तोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता है। राजौरी के थन्नामंडी सीट पर भाजपा के मोहम्मद इकबाल मलिक को 6179 वोटों के अंतर से हराने वाले पूर्व जज मुजफ्फर इकबाल खान का संबंध नेकां से रहा है। जज की नौकरी छोड़ थामा था नेकां का दामन मुजफ्फर खान को नेकां ने उम्मीदवार बनाने का वादा किया था, लेकिन कांग्रेस से गठबंधन समझौते में यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। पूर्व जज के पिता असलम खान 2002 में राजौरी से विधायक चुने गए थे। 2019 में मुजफ्फर खान ने जज की नौकरी छोड़कर नेकां का दामन थाम लिया था, लेकिन टिकट न मिलने पर निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतर पड़े और जीत गए। अब वह फिर से नेकां में शामिल हो जाएंगे। थन्नामंडी से कांग्रेस के मोहम्मद शब्बीर खान ने गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और हार गए। ये विधायक कर सकते हैं घर वापसी किश्तवाड़ जिले के इंद्रवाल से निर्दलीय चुनाव जीते प्यारे लाल शर्मा भी नेकां के सदस्य रहे हैं। नेकां-कांग्रेस गठजोड़ होने के कारण इंद्रवाल से गठबंधन की तरफ से कांग्रेस के मोहम्मद जफरुल्लाह ने चुनाव लड़ा। अपना टिकट कटने से नाराज प्यारे लाल शर्मा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गए। वहीं नेकां में वापस जाने का एलान कर चुके हैं। पुंछ के सुरनकोट से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले चौधरी अकरम खान ने वर्ष 2014 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। कई निर्दवीय विधायक आ सकते हैं नेकां में करीब चार वर्ष पहले वह जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी का हिस्सा बने थे और कुछ समय बाद उन्होंने उससे नाता तोड़ नेकां का दामन थाम लिया था। सुरनकोट सीट से कांग्रेस के पक्ष में उम्मीदवार न उतारने के नेकां नेतृत्व के फैसले से आहत होकर अकरम खान ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता। उन्होंने गठबंधन के उम्मीदवार मोहम्मद शहनवाज चौधरी को 8851 वोटों के अंतर से हराया है। ये सभी निर्दलीय नेकां में लौटने को तैयार हैं। सभी नेकां नेतृत्व के साथ लगातार संवाद और संपर्क बनाए हुए हैं। इंद्रवाल से निर्वाचित प्यारे लाल शर्मा तो बुधवार को किश्तवाड़ से श्रीनगर के लिए रवाना हुए हैं। उनके गुरुवार को नेकां विधायक दल की बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। ये निर्दलीय भी हैं कतार में जम्मू के छंब से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तारांचद को हराने वाले निर्दलीय सतीश शर्मा (कांग्रेस के बागी) भी कथित तौर पर नेकां में शामिल होने के मूड में हैं। नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भी उनके साथ कथित तौर पर संपर्क किया है। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व भी उन्हें मनाने का प्रयास कर रहा है। अलबत्ता, वह कांग्रेस नेतृत्व द्वारा की गई अपनी उपेक्षा से आहत हैं और लौटने के मूड में नहीं हैं। सतीश शर्मा से जब इस बावत संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन बंद था। वहीं कठुआ जिले के बनी में भाजपा उम्मीदवार व पूर्व विधायक जीवन लाल को हराने वाले निर्दलीय डा. रामेश्वर सिंह भी नेकां में जाने का मन बना चुके हैं और वह भी अगले एक दो दिन में हल के निशान वाला लाल झंडा थाम लेंगे।

सीएम योगी ने दी प्रतिक्रिया, केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को 1,78,173 करोड़ रुपये का कर हस्तांतरण जारी किया

लखनऊ केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्य सरकारों को 1,78,173 करोड़ रुपये का कर हस्तांतरण (टैक्स रिवॉल्यूशन) जारी किया है, इसमें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश को 31,962 करोड़ रुपये मिले हैं। त्योहारों से पहले मिली यह राशि राज्यों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक होगी। मुख्यमंत्री ने कर हस्तांतरण के हिस्से के रूप में उत्तर प्रदेश को मिली धनराशि के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री के प्रति आभार प्रकट किया है। इंटरनेट मीडिया अकाउंट एक्स पर किए गए पोस्ट में सीएम योगी ने लिखा कि, यह अग्रिम किस्त त्योहारों के मौसम की तैयारियों को बढ़ावा और पूरे राज्य में विकास व कल्याण की पहल को गति देगी। हम सभी मिलकर मजबूत व समृद्ध उत्तर प्रदेश का निर्माण कर रहे हैं।  

इस वर्ष देश में विदेशियों का आगमन 10 मिलियन से ज्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा

नई दिल्ली भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या में आने वाले समय में बढ़ोतरी होने की उम्मीद की जा रही है। इस वर्ष ही देश में विदेशियों का आगमन 10 मिलियन से ज्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। बुकिंग डॉट कॉम द्वारा एक्सेंचर के सहयोग से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में विदेशी पर्यटकों का आगमन इस वर्ष 10.1 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2022 में 9.2 मिलियन से अधिक है। यह अभी भी 2019 में कोविड महामारी के पूर्व स्तर 10.9 मिलियन से कम है। ‘हाउ इंडिया ट्रैवल्स 2024 – द इनबाउंड एडिट’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 2025 तक कोरोना महामारी के पहले की आगमन की संख्या को भी पार कर जाएगा। विदेशी आगमन में देरी के बावजूद, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपने समकक्षों की तुलना में भारत में पर्यटकों के खर्च में सुधार उल्लेखनीय रूप से तेज रहा है, जो 2023 तक 2019 के खर्च का 94 प्रतिशत हो गया है। इसी अवधि के दौरान भारतीय यात्रियों द्वारा औसत खर्च में भी 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और यूएई भारत के शीर्ष इनबाउंड स्रोत बाजारों के रूप में उभरे हैं। पहले चीन, कनाडा और बांग्लादेश जैसे देश भारत के स्रोत थे। यह एक बड़े बदलाव को भी दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, हम्पी, लेह और खजुराहो जैसे उभरते स्थलों की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इस रिपोर्ट में लिमिटेड कस्टमाइजेशन ऑप्शन (49 प्रतिशत), बंडल ट्रैवल पैकेज की कमी (51 प्रतिशत), सूचनाओं का अतिभार (43 प्रतिशत) जैसी चुनौतियों को भी रेखांकित किया गया है। इनकी वजह से यात्रियों के अनुभव में बाधा आती है। कई अंतरराष्ट्रीय आगंतुक व्यक्तिगत यात्रा कार्यक्रम चाहते हैं। लेकिन, सहज यात्रा की योजना बनाने के लिए संघर्ष करते हैं। रिपोर्ट में उद्योग द्वारा डिजिटल संसाधनों में सुधार, सीधी उड़ानों का विस्तार, वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने और भारत की विविध यात्रा पेशकशों को बढ़ावा देकर इन मुद्दों को हल करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। बुकिंग डॉट कॉम में भारतीय उपमहाद्वीप और इंडोनेशिया के कंट्री हेड संतोष कुमार के अनुसार, “भारत का इनबाउंड पर्यटन अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आतिथ्य के कारण अभूतपूर्व वृद्धि का अनुभव कर रहा है।” उन्होंने कहा कि विश्व आर्थिक मंच के यात्रा और पर्यटन विकास सूचकांक-2024 में भारत का 39वें स्थान पर पहुंचना, जो 2021 में 54वें स्थान से ऊपर है, वैश्विक गंतव्य के रूप में देश की बढ़ती अपील को रेखांकित करता है।

न्यायिक आयोग के सामने पेश हुए हाथरस सत्संग में 121 श्रद्धालुओं की मौत मामले में बाबा नारायण साकार

लखनऊ उत्तर प्रदेश के हाथरस सत्संग में 121 श्रद्धालुओं की मौत मामले में बाबा नारायण साकार हरि गुरुवार को लखनऊ स्थित सचिवालय में न्यायिक आयोग के सामने पेश हुए। इस दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया गया था। वकील डॉ. एपी सिंह ने आईएएनएस से खास बातचीत करते हुए बताया कि हाथरस में घटी दुखद घटना को लेकर बाबा नारायण साकार न्यायिक आयोग के सामने पेश हुए। उनसे करीब 2 घंटे से अधिक समय तक बयान लिए गए। बयान लेने के बाद उनको वापस भेज दिया गया, अब उनको यहां पर पेश होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने आगे बताया कि ऐसी घटना पहले भी बहुत हुई है, मक्का मदीना में भी हो चुका है, लेकिन सनातन धर्म सॉफ्ट टारगेट है, इसलिए यहां ज्यादा हो जाता है। हम चाहते हैं कि ऐसा मैकेनिज्म बनना चाहिए, जिससे भविष्य में दोबारा जो सनातन विरोधी या राज्य सरकार विरोधी हो, वो ऐसी साजिश में कामयाब नहीं हो सके। जो गाइडलाइन तैयार की जाएगी, उसको हम भी और सेवादार भी फॉलो करेंगे। उसको पुलिस और शासन-प्रशासन भी फॉलो करेगी। वकील ने आगे बताया कि क्रिमिनल केस में चार्जशीट फायर हो चुकी है, 11 लोगों के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है और जो दूसरे एंगल पर जांच चल रही है, वो सही ढंग से हो रही है। एसपी हाथरस पर हमें पूरा भरोसा है। जो हमने 1,100 शपथ पत्र और देव प्रकाश मधुकर की तरफ से लिखित शिकायत दी है, उस पर पूरी कार्रवाई होनी चाहिए। कोई भी दोषी नहीं बचना चाहिए और कोई निर्दोष फंसना नहीं चाहिए। वकील ने हादसे को साजिश बताते हुए कहा कि घटना वाले दिन 15-16 युवकों ने जहरीला स्प्रे किया और वहां से भाग गए थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन जुलाई को हाथरस त्रासदी और भगदड़ के पीछे किसी साजिश की संभावना की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग गठित किया था। इस हादसे में मुख्य सेवादार देवप्रकाश मधुकर सहित अन्य सेवादारों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, प्राण घातक हमला करने, गंभीर चोट पहुचाने, लोगों को बंधक बनाने, निषेध्याज्ञा का उल्लंघन करने और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। इन पर यह भी आरोप था कि सत्संग में 80 हजार लोगों के जुटने की शर्त का उल्लंघन कर ढाई लाख लोगों की भीड़ जुटाई गई। यातायात प्रबंधन में भी मदद नहीं की गई। मामले में पुलिस ने एक अक्टूबर को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। 3,200 पेज की इस चार्जशीट में 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था। घटना के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी देव प्रकाश मधुकर, मेघ सिंह, मुकेश कुमार, मंजू देवी, मंजू यादव, राम लड़ेते, उपेंद्र सिंह, संजू कुमार, राम प्रकाश शाक्य, दुर्वेश कुमार और दलवीर सिंह को गिरफ्तार किया था। गौरतलब है कि 2 जुलाई को सिकंदराराऊ के गांव फुलरई मुगलगढ़ी में नारायण साकार हरि भोले बाबा उर्फ सूरजपाल के सत्संग में मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हो गई थी। उनका काफिला निकालने के लिए सेवादरों ने भीड़ को रोक दिया था, इस दौरान उनकी चरण रज लेने की होड़ में लोग गिरते गए। इस मामले में पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनाव में कांग्रेस से सीट न मिलने के बाद भी अखिलेश यादव यूपी में इस गठबंधन के साथ

लखनऊ अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन जारी रहने की बात कही है। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनाव में कांग्रेस से सीट न मिलने के बाद भी सपा प्रमुख अखिलेश यादव यूपी में इस गठबंधन के साथ उपचुनाव में खड़े होने के लिए तैयार हैं। अखिलेश यादव ने सैफई में अपने पिता और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि देने के बाद कहा कि यूपी के आने वाले उपचुनाव के बारे में आज बहुत कुछ नहीं बोलना है। उन्होंने सपा-कांग्रेस गठबंधन के बारे में स्पष्ट करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन जारी रहेगा। दरअसल, हाल ही में पूरे हुए हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों से पहले सपा ने कांग्रेस से दोनों राज्यों में सीट की मांग की थी। यूपी में चल रहे गठबंधन के बाद से संभावना थी की कांग्रेस इन राज्यों में सपा को सीट देगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेस ने दोनों राज्यों में अकेले चुनाव लड़े। अब यूपी में 10 सीटों पर उपचुनाव की तैयारी है। इनमें से 6 सीटों पर सपा अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है। प्रत्याशियों की लिस्ट जारी होने के एक दिन बाद ही अखिलेश ने ये साफ कर दिया कि कांग्रेस के साथ गठबंधन भी रहेगा। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि बची हुई 4 सीटों में से कुछ सीट कांग्रेस को मिल सकती हैं। हालांकि यूपी कांग्रेस का 5 सीटों पर दावा था। पहले कांग्रेस 10 में से उन पांच सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी थी जो भाजपा के पास थी। इसके लिए कांग्रेस और सपा प्रदेश एवं शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत चल रही थी। मगर इसी बीच सपा ने बुधवार को छह सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए। इन सीटों में करहल से तेज प्रताप यादव, सीसामऊ से नसीम सोलंकी, फूलपुर से मुस्तफा सिद्दीकी, मिल्कीपुर से अजीत प्रसाद, कटेहरी से शोभावती वर्मा, मझवां से डॉ.ज्योति बिंद को सपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस जिन सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती थी उनमें मीरापुर, गाजियाबाद, खैर, फूलपुर, मझवां थी। इनमें अभी मीरापुर, गाजियाबाद, खैर सीटें ही बची है। कांग्रेस की प्राथमिकता में शामिल मझवां और फूलपुर पर सपा ने प्रत्याशी उतार दिए। इनके अलावा कुंदरकी सीट पर इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी की घोषणा होनी है। खाली हुई दस सीटों में से पांच सीसामऊ, कटेहरी, करहल, मिल्कीपुर और कुंदरकी सपा के पास थीं। वहीं, फूलपुर, गाजियाबाद, मझवां और खैर भाजपा के पास थीं। मीरापुर सीट भाजपा के सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के पास थी। करहल सीट सपा प्रमुख अखिलेश यादव के कन्नौज से सांसद चुने जाने के कारण खाली हुई है, जबकि कटेहरी (अंबेडकर नगर) सीट पार्टी के लालजी वर्मा के अंबेडकर नगर लोकसभा सीट से चुने जाने के कारण खाली हुई है।

हरियाणा में जातिवार किन-किन नामों पर हो रही चर्चा, कितने दलित, जाट और कितने ब्राह्मण होंगे मंत्री

नई दिल्ली हरियाणा में ऐतिहासिक जीत के बाद अब भाजपा का फोकस राज्य में नई सरकार के गठन पर केंद्रित हो गया है। आज (गुरुवार को) भाजपा के नवनिर्वाचित विधायक दल की बैठक होने वाली है, जिसमें सभी 48 विधायक शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकार गठन को लेकर चर्चा हो सकती है लेकिन अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व लेगा। बहरहाल पार्टी के अंदरखाने इस बात की चर्चा हो रही है कि जातिगत सनीकरणों को साधते हुए राज्य में किस जाति से कितने और कौन-कौन मंत्री हो सकते हैं। नई सरकार के मुखिया नायब सिंह सैनी ही होंगे, भाजपा ने पहले से ही इसकी मंजूरी दे दी है। नायब सिंह सैनी ने एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। अब उनकी सरकार में मंत्रियों के नामों पर मंथन चल रहा है। मुख्यमंत्री समेत अधिकतम कुल 14 मंत्री हो सकते हैं। पिछली सरकार के दो ही मंत्री (मूलचंद शर्मा और महिपाल ढांडा) अपनी सीट बचा पाए हैं, इसलिए कैबिनेट में 11 नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है और उनकी तलाश तेज हो गई है। पार्टी इसके लिए जातिगत समीकरणों का भी ख्याल रख रही है। भाजपा की ऐतिहासिक जीत में दलित समुदाय का अहम योगदान रहा है राज्य की कुल 17 आरक्षित सीटों में से 9 पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। इसलिए नई सरकार में उनकी नुमाइंदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। चुनाव नतीजों के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाबी मूल के आठ, ब्राह्मण समुदाय से सात, जाट और यादव समुदाय से छह-छह विधायक जीतकर आए हैं। इनके अलावा गुर्जर, राजपूत, वैश्य और एक ओबीसी विधायक भी हैं। किस समुदाय से कौन बन सकते हैं मंत्री? दलित विधायकों में कृष्णलाल पंवार छह बार के विधायक हैं, जबकि कृष्ण बेदी दो बार के विधायक हैं। इन दोनों के नामों का चर्चा मंत्री पद के लिए हो रही है। पंजाबी मूल के आठ विधायकों में अनिल विज भी एक नाम हैं, जो राज्य के पूर्व गृह मंत्री हैं और सात बार के विधायक हैं। वह इसी साल मार्च में नाराज हो गए थे, जब खट्टर की जगह नायब सिंह सैनी को सीएम बनाया गया था। इसी समुदाय से जींद के विधायक कृष्णन मिड्ढा भी हैं, जो तीसरी बार इस सीट से जीते हैं। इनके अलावा इस समुदाय से दो और नेताओं के नाम की चर्चा है। इनमें यमुनानगर से घनश्याम दास अरोड़ा और हांसी से विधायक विनोद भयाना का नाम शामिल है। अरोड़ा का पत्ता इसलिए कट सकता है क्योंकि वह भौगोलिक रूप से अंबाला क्षेत्र से आते हैं, जबकि वहां से अनिल विज की दावेदारी पहले से ही मजबूत मानी जी रही है। ब्राह्मण और जाट समुदाय में किसकी चर्चा ब्राह्मण समुदाय से बल्लभगढ़ से तीन बार विधायक रह चुके मूलचंद शर्मा को मंत्रिमंडल में बनाए रखा जा सकता है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, इनके अलावा अरविंद शर्मा का भी नाम संभावित है, जो दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और जिन्होंने गोहाना सीट जीती है। इनके अलावा राम गौतम, जिन्होंने सफीदो सीट जीती, जिसे भाजपा ने कभी नहीं जीत पाई थी, उनके नाम के भी चर्चे हैं। अहीरवाल बेल्ट से भाजपा के छह विधायक जीते हैं। इस इलाके ने भाजपा को बंपर वोट किया, इसलिए जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बादशाहपुर से छह बार के विधायक रहे राव नरबीर सिंह का नाम मंत्री पद के लिए आगे चल रहा है। वह 2014 की मनोहर लाल खट्टर सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। इनके अलावा केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत की बेटी आरती राव ने पहली बार अटेली सीट जीती है, उनके भी नाम के चर्चे हैं। दो बार विधायक रह चुके लक्ष्मण यादव भी रेस में बताए जा रहे हैं। जाट समुदाय से कौन होगा मंत्री? जाट नेता महिपाल ढांडा निवर्तमान सैनी सरकार में मंत्री थे। वह पानीपत (ग्रामीण) से दोबारा जीते हैं। उन्हें कैबिनेट में बरकरार रखने की संभावना है। राई से दूसरी बार निर्वाचित कृष्णा गहलावत भी इस दौड़ में बताई जा रही हैं। इनके अलावा राज्यसभा सांसद किरण चौधरी की बेटी और पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी, जो तोशाम से जीती हैं, उनका भी नाम मंत्रियों के संभावित चेहरों में है। अन्य संभावित नामों में वैश्य समुदाय से पूर्व मंत्री विपुल गोयल शामिल हैं। एक बड़ा नाम सावित्री जिंदल का है, जो भारत की सबसे अमीर महिला हैं और हिसार से निर्दलीय विधायक हैं, जिन्होंने कल औपचारिक रूप से भाजपा को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है। राजपूत समुदाय से श्याम सिंह राणा और तीन बार के विधायक हरविंदर कल्याण को मंत्री बनाया जा सकता है। इसके अलावा रणबीर गंगवा ओबीसी समुदाय का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं; वे पिछली सरकार में डिप्टी स्पीकर थे। तिगांव से दो बार के विधायक राजेश नागर को गुर्जर चेहरे के रूप में कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है।

उपराज्यपाल कार्यालय ने जारी बयान में कहा- अभी तक उन्हें अधिकृत रूप से बंगला आवंटित नहीं किया गया

नई दिल्ली उपराज्यपाल कार्यालय ने गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास को सील करने और मुख्यमंत्री आतिशी का सामान बाहर किए जाने पर बयान दिया है। उपराज्यपाल की तरफ से कहा गया है कि आतिशी को आधिकारिक रूप से सरकारी बंगला आवंटित नहीं किया गया था। इसके बावजूद उन्होंने अवैध रूप से सरकारी बंगले में घुसने की कोशिश की थी और जब आप किसी के घर में घुसते हैं, तो स्वाभाविक है कि उस घर का मालिक आपके खिलाफ कार्रवाई करेगा ही। उपराज्यपाल कार्यालय ने अपनी तरफ से जारी बयान में कहा, “मुख्यमंत्री आतिशी ने सरकारी बंगले के लिए अनुरोध किया था, जो विचाराधीन था। अभी तक उन्हें अधिकृत रूप से बंगला आवंटित नहीं किया गया था। इसके बावजूद वे बंगले में दाखिल हुईं, जिसके परिणामस्वरूप लोक निर्माण विभाग ने उनके खिलाफ यह कार्रवाई की है।” आम आदमी पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार मुख्यमंत्री का सरकारी बंगला भाजपा नेता को आवंटित करना चाहती है, जबकि नियमों के अनरूप यह बंगला मुख्यमंत्री को आवंटित किया जाता है, लेकिन केंद्र सरकार इन नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमानी कर रही है, जिसे हम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। बता दें कि बुधवार दिल्ली विकास प्राधिकरण ने हैंडओवर का हवाला देकर मुख्यमंत्री आतिशी का सरकारी बंगला सील कर दिया था और उनका सामान भी बाहर कर दिया था। जिस पर आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सरकारी बंगला खाली कर चुके हैं। ऐसे में अब यह बंगला नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री आतिशी को आवंटित किया जाना था, लेकिन भाजपा का दावा है कि अभी तक आतिशी को अधिकृत रूप से यह बंगला आवंटित नहीं किया गया है, जिसे लेकर दोनों दलों के बीच सियासी तकरार अपने चरम पर है। भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने शीशमहल (सरकारी बंगले) में कई तरह के राज दफन करके रखें हैं, जिसे वो दिल्ली की जनता से छुपाकर रखना चाहते हैं। वो नहीं चाहते हैं कि दिल्ली की जनता इन राजों से वाकिफ हो सकें। उधर, मुख्यमंत्री का सरकारी बंगला सील किए जाने पर वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी के पाप का घड़ा भर चुका है।

केला, सेब सहित अन्य फलों के दाम में 20 से 25 प्रतिशत बढ़ौतरी हुई, जनता पर महंगाई की दोहरी मार

पंजाब नवरात्रि में सब्जियों के बाद अब फलों के दाम असमान छूने लगे हैं। केला, सेब सहित अन्य फलों के दाम में 20 से 25 प्रतिशत बढ़ौतरी हुई है। शहर के फल विक्रेताओं का कहना है कि 1-2 दिन के अंदर कई फलों के दाम बढ़ गए हैं। नवरात्रि के बाद ही अब फलों के दाम में कमी आने की उम्मीद है। पिछले 15 दिन से सब्जियों के दाम बढ़ने से पहले ही लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया था, लेकिन अब फल महंगे होने से महंगाई की दोहरी मार पड़ रही है। केला 80 से 100, सेब 120 से 150, नारियल 70 से 80, अमरूद 100 से 120, अनान्नास 120 से 140, अनार 120, नाशपाती 80, कीवी 150 और फूल माला 50 से 200 रुपए के हिसाब से बिकी। वहीं गेंदे के फूल का दाम प्रति किलो 250 से 300 के बीच रहा। नवरात्रि से पहले गेंदे के फूल का दाम 150 रुपए प्रति किलो था। नवरात्रि में फूलों की मांग बढ़ जाने के कारण दाम भी बढ़े हैं। शहर के फल विक्रेताओं के अनुसार केला 25 प्रतिशत तक महंगा हुआ है। नारियल के दाम 15 प्रतिशत और सेब के दाम 25 प्रतिशत तक बढ़े हैं। नवरात्रि में फलों की मांग ज्यादा होती है। कई लोग नवरात्रि के दौरान व्रत रखते हैं तो फलों का सेवन करते हैं। मंदिरों में चढ़ाने के लिए भी लोग फल खरीदते हैं।

रेलवे द्वारा अतिरिक्त यात्री यातायात के चलते अस्थाई तौर पर विभिन्न श्रेणी के 14 डिब्बों की बढोतरी की गई

रेवाड़ी हरियाणा में रेवाड़ी के अलावा अन्य शहरों के रास्ते चलने वाली जोड़ी ट्रेनों में त्योहार के सीजन को देखते हुए रेलवे की तरफ से अतिरिक्त कोच लगाए गए हैं। रेलवे के मुताबिक, अतिरिक्त यात्री यातायात के चलते अस्थाई तौर पर विभिन्न श्रेणी के 14 डिब्बों की बढोतरी की गई है। गाड़ी संख्या 14118/14117, भिवानी-प्रयागराज-भिवानी ट्रेन में भिवानी से 10 से 31 अक्टूबर तक एवं प्रयागराज से 11 अक्टूबर से 1 नवंबर तक 1 द्वितीय शयनयान श्रेणी डिब्बे की अस्थाई बढ़ोतरी की गई है। गाड़ी संख्या 22464/22463, बीकानेर-दिल्ली सराय-बीकानेर ट्रेन में बीकानेर से 12 से 29 अक्टूबर तक और दिल्ली सराय से 13 अक्टूबर से 1 नवंबर तक 1 थर्ड एसी व 2 द्वितीय शयनयान श्रेणी डिब्बों की अस्थाई बढ़ोतरी की गई है। गाड़ी संख्या 12463/12464, दिल्ली सराय-जोधपुर-दिल्ली सराय ट्रेन में दिल्ली सराय से 16 से 30 अक्टूबर तक और जोधपुर से 17 से 31 अक्टूबर तक 1 थर्ड एसी व 2 द्वितीय शयनयान श्रेणी डिब्बों की अस्थाई बढ़ोतरी की गई है। गाड़ी संख्या 14714/14713, दिल्ली सराय-सीकर-दिल्ली सराय ट्रेन में 16 से 30 अक्टूबर तक 1 थर्ड एसी व 2 द्वितीय शयनयान श्रेणी डिब्बों की अस्थाई बढ़ोतरी की गई है। गाड़ी संख्या 12985/12986, जयपुर-दिल्ली सराय-जयपुर ट्रेन में 14 से 31 अक्टूबर तक 1 वातानुकूलित कुर्सीयान श्रेणी डिब्बे की अस्थाई बढ़ोतरी की गई है। गाड़ी संख्या 04717/04718, हिसार-तिरूपति-हिसार स्पेशल ट्रेन में हिसार से 12 से 30 अक्टूबर तक और तिरूपति से 14 अक्टूबर से 2 दिसंबर तक 1 थर्ड एसी व 2 द्वितीय शयनयान श्रेणी डिब्बों की अस्थाई बढोतरी की गई है।

हरियाणा में आज आचार संहिता को हटाने सभी नोटिफिकेशन चुनाव आयोग ने जारी की

नई दिल्ली हरियाणा में 5 अक्तूबर को विधानसभा चुनाव हुए, जिसका रिजल्ट 8 तारीख को घोषित कर दिया गया। निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव तारीखों के एलान के बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो गई थी। आज आचार संहिता को हटाने सभी नोटिफिकेशन चुनाव आयोग ने जारी कर दी है। क्या होती है आदर्श आचार संहिता? आदर्श आचार संहिता को राजनीतिक दलों की सहमति से तैयार किया गया है। सभी दलों ने आचार संहिता के सिद्धांतों, मानकों के अक्षरश: पालन करने की सहमति दी है। खास बात यह है कि आदर्श आचार संहिता किसी कानून के तहत नहीं बनी है। यह सिर्फ सहमति पर बनी है। कब से कब तक लागू? भारत निर्वाचन आयोग जिस दिन से चुनाव की अधिसूचना जारी करता है, उसी दिन से आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। जब तक चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तब तक यह लागू रहती है। लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता पूरे देश में लागू होती है। विधानसभा चुनाव में सिर्फ संबंधित राज्य में लागू होती है।   नई भर्ती और नई परीक्षाओं का आयोजन किया जा सकता है। शराब ठेकों और तेंदु के पत्तों की नीलामी आदि की जा सकती है। आचार संहिता हटने के बाद विज्ञापन, होर्डिंग और पोस्टर का इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकारी योजनाओं की घोषणा, शिलान्यास और उद्घाटन भी किया जा सकता है। सुबह 6:00 बजे से पहले और शाम 10 बजे के बाद जनसभाओं पर लगी रोक हट जाएगी। सरकार अधिकारियों का तबादला कर सकती है। अखबारों और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया समेत अन्य मीडिया पर सरकारी खर्चे से विज्ञापन जारी किया जा सकता है। राज्य दिवस पर मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और मंत्री शामिल हो सकते हैं और राजनीतिक भाषण भी दे सकते हैं। तीनों का फोटोयुक्त विज्ञापन भी जारी किया जा सकता है। राज्यों के मुख्यमंत्री दीक्षांत समारोह में भाग ले सकते हैं। मंत्री सायरन और बीकन प्रकाश वाली पायलट कार का इस्तेमाल कर सकते हैं।  

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