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भारत ने 82 रन से दर्ज की जीत, सेमीफाइनल की उम्मीदों है बाकी

दुबई भारत और श्रीलंका के बीच महिला टी20 वर्ल्ड कप 2024 का 12वां मैच बुधवार (9 अक्टूबर) को खेला गया. मैच में भारतीय टीम ने 82 रनों से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद बरकरार रखी है. मैच में भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 173 रनों का टारगेट सेट किया. जवाब में श्रीलंकाई टीम 90 रनों पर ही सिमट गई. हरमन और मंधाना ने खेली अर्धशतकीय पारी भारतीय टीम ने पहले बैटिंग करते हुए 3 विकेट पर 172 रन बनाए. टीम के लिए कप्तान हरमनप्रीत कौर और उपकप्तान स्मृति मंधाना ने फिफ्टी जमाई. हरमन ने 27 गेंदों पर नाबाद 52 रनों की आतिशी पारी खेली. जबकि मंधाना ने 38 गेंदों पर 50 रन जड़े. इनके अलावा ओपनर शेफाली वर्मा ने 40 गेंदों पर 43 रन जड़े. मैच में हरमन और मंधाना ने 1-1 छक्का जमाया. जेमिमा रोड्रिग्ज ने 16 और ऋचा घोष ने 6 रन बनाए. श्रीलंका के लिए कप्तान चमारी अट्टापट्टू और अमा कंचना ने 1-1 विकेट लिया. टी20 वर्ल्ड कप में तेज फिफ्टी लगाने वाली भारतीय बैटर 27 – हरमनप्रीत कौर Vs श्रीलंका, दुबई, 2024 31 – स्मृति मंधाना vs ऑस्ट्रेलिया, गुयाना, 2018 32 – हरमनप्रीत कौर vs ऑस्ट्रेलिया, केपटाउन, 2023 33 – हरमनप्रीत कौर vs न्यूजीलैंड, गुयाना, 2018 36 – मिताली राज vs श्रीलंका, बासेतेर, 2010 पॉइंट्स टेबल में भारतीय टीम ने किया सुधार ग्रुप ए में भारत और श्रीलंका दोनों के लिए ही यह टूर्नामेंट का तीसरा मैच था. भारतीय टीम ने अब तक 2 मैच जीते और एक गंवाया है. भारत ने पिछले मैच में पाकिस्तान को 6 विकेट से धूल चटाई थी. श्रीलंका पांचवें पायदान पर है. उसने टूर्नामेंट में एक भी जीत दर्ज नहीं की है. यह मैच जीतने के साथ ही भारतीय टीम पॉइंट्स टेबल में दूसरे नंबर पर पहुंच गई है. साथ ही टीम का नेट रनरेट प्लस में 0.576 पर पहुंच गया है. जबकि मैच से पहले यह माइन में -1.217 था. पॉइंट्स टेबल में फिलहाल ऑस्ट्रेलिया 2 जीत के साथ टॉप पर है. उसका नेट रनरेट 2.524 है. मैच में भारत और श्रीलंका की प्लेइंग-11 भारतीय टीम: शेफाली वर्मा, स्मृति मांधना, जेमिमा रोड्रिग्स, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), ऋचा घोष (विकेटकीपर), दीप्ति शर्मा, सजीवन सजना, अरुंधति रेड्डी, श्रेयंका पाटिल, आशा सोभना और रेणुका ठाकुर सिंह. श्रीलंकाई टीम: विशमी गुणरत्ने, चमारी अट्टापट्टू (कप्तान), हर्षिता समरविक्रमा, कविशा दिलहारी, नीलाक्षी डी सिल्वा, अनुष्का संजीवनी (विकेटकीपर), अमा कंचना, सुगंधिका कुमारी, इनोशी प्रियदर्शनी, उदेशिका प्रबोधनी और इनोका राणावीरा.  

सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनाएगा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे पर फैसला

नई दिल्ली अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट जल्द फैसला सुना सकता है। इसकी संभावना इसलिए है क्योंकि मामले की सुनवाई करने वाली सात सदस्यीय संविधान पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने की थी जो 10 नवंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं। फैसले का अल्पसंख्यक राजनीति पर भी होगा असर 10 नवंबर तक सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ 15 कार्य दिवस बचे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक फरवरी को फैसला सुरक्षित रखा था। अभी तक आठ महीने से ज्यादा बीत चुके हैं। इस मामले में जो फैसला आएगा वह एएमयू का भविष्य तय करने वाला होगा। इससे तय होगा कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान माना जाएगा या नहीं। सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा उसका अल्पसंख्यक राजनीति पर भी असर होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती इस मामले में एएमयू ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पांच जनवरी 2006 के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने उस फैसले में एएमयू में पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम में मुसलमानों को 50 फीसद आरक्षण रद्द करते हुए कहा था कि एएमयू कभी भी अल्पसंख्यक संस्थान नहीं था, इसलिए पीजी पाठ्यक्रम में मुस्लिम छात्रों को आरक्षण नहीं दिया जा सकता। हाई कोर्ट ने मुस्लिम छात्रों को दिये जाने वाले आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के अजीज बाशा मामले में 1968 में दिए फैसले को आधार बनाया था, जिसमें कहा गया था कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। हाईकोर्ट ने अजीज बाशा फैसले के बाद एएमयू कानून में 1981 में संशोधन कर इसे अल्पसंख्यक दर्जा देने के प्रविधानों को भी रद्द कर करते हुए संशोधन को इसलिए गलत ठहराया था कि इससे सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्प्रभावी किया गया है।   बड़ी पीठ के पास विचार के लिए भेजा गया 12 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मामले को सात न्यायाधीशों की पीठ को विचार के लिए भेज दिया था। इसके अलावा, 1981 में भी अल्पसंख्यक दर्जे का एक मामला सात न्यायाधीशों को भेजा गया था, उसमें अजीज बाशा फैसले का मुद्दा भी शामिल था। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, संजीव खन्ना, सूर्यकांत, जेबी पार्डीवाला, दीपांकर दत्ता, मनोज मिश्रा और सतीश चंद्र शर्मा की सात सदस्यीय पीठ ने आठ दिनों तक दोनों पक्षों की बहस सुनी। क्या है एएमयू की दलील? एएमयू ने अल्पसंख्यक दर्जे का दावा करते हुए दलील दी थी कि एएमयू की स्थापना मुसलमानों ने की थी। एएमयू ने 1968 के अजीज बाशा फैसले पर भी पुनर्विचार का अनुरोध किया जबकि केंद्र सरकार ने एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि न तो एएमयू की स्थापना मुसलमानों द्वारा की गई है और न ही उसका प्रशासन अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित होता है। केंद्र की दलील थी कि एएमयू की स्थापना 1920 में ब्रिटिश कालीन कानून के जरिए हुई थी और उस समय एएमयू ने अपनी मर्जी से अल्पसंख्यक दर्जा छोड़ कर इंपीरियल कानून के जरिए विश्वविद्यालय बनना स्वीकार किया था।

मोदी सरकार ड्रोन क्षेत्र में अगली पीएलआई योजना लाने का प्रयास कर रही है

नई दिल्ली  सरकार ड्रोन क्षेत्र के लिए एक नई उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना लाने की योजना बना रही है। यह योजना कार्यान्वयन, दस्तावेजीकरण और अन्य पहलुओं के संदर्भ में अधिक प्रभावी होगी। नागर विमानन सचिव वुमलुनमंग वुआलनाम ने कहा कि सरकार ड्रोन क्षेत्र में अगली पीएलआई योजना लाने का प्रयास कर रही है। ड्रोन क्षेत्र के लिए पहली पीएलआई योजना 120 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 2021 में लाई गई थी। तीन वित्त वर्षों (2021-24) के लिए लाई गई यह योजना अब बंद हो गई है। नागर विमानन सचिव ने स्वीकार किया कि पहली योजना के तहत कुछ प्रक्रियाएं ड्रोन क्षेत्र में स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के लिए बोझिल थीं, लेकिन सरकार कार्यान्वयन, दस्तावेजीकरण और अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं के संदर्भ में अधिक कुशल पीएलआई योजना पर विचार करेगी। वुआलनाम के अनुसार, ड्रोन क्षेत्र को तीन खंडों- नागरिक उपयोग, सुरक्षा/रक्षा बलों द्वारा उपयोग, तथा ड्रोन के अवैध या अनियमित उपयोग में विभाजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें इस बारे में बहुत स्पष्ट होना होगा कि हम इन तीनों क्षेत्रों में कैसे काम करते हैं।” उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि ड्रोन के गलत उपयोग की कुछ घटनाएं युवाओं, स्टार्टअप और महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा ड्रोन का अधिक उपयोग किए जाने में बाधा बन सकती हैं। उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि… ड्रोन रोधी प्रौद्योगिकियां विकसित की जा रही हैं।” फिक्की ने एक परिचर्चा पत्र में सुझाव दिया है कि नई योजना के अंतर्गत परिव्यय को बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए, ताकि स्टार्टअप और नए उद्यमियों को अधिक स्वदेशी कलपुर्जों और उप-प्रणालियों के साथ ड्रोन विकसित करने में सहायता मिल सके। नागर विमानन सचिव ने कहा कि नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत 3,000 और ड्रोन खरीदने के लिए निविदाएं तैयार हैं। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को कृषि ड्रोन प्रदान करना है और 15,000 ड्रोन महिलाओं के नेतृत्व वाले एसएचजी को दिए जाएंगे। वुआलनाम ने कहा कि 1,000 ड्रोन की पहली खेप को हासिल कर लिया गया है और वितरित कर दिया गया है। योजना के तहत 3,000 ड्रोन के लिए निविदाएं तैयार हैं और संबंधित एजेंसियों द्वारा जल्द ही जारी की जाएंगी।    

शेन वॉटसन का मानना है कि स्मिथ को अब भारत के खिलाफ ओपन ही करना चाहिए

मुंबई  बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफ़ी में ऑस्ट्रेलिया के लिए ओपन कौन करेगा? क्या स्टीव स्मिथ को ही ओपन करना चाहिए या उन्हें अपने ओरिजनल नंबर चार के पोज़िशन पर वापस जाना चाहिए? ये सवाल अभी भी बने हुए हैं। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर शेन वॉटसन का मानना है कि स्मिथ को अब ओपन ही करना चाहिए। मुंबई में इंटरनेशनल मास्टर्स लीग लॉन्च इवेंट कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, “स्मिथ ने ओपन करने का निर्णय ख़ुद लिया था और मुझे लगता है कि उन्हें अब अपने निर्णय पर खड़ा रहना चाहिए। नंबर चार पर जाना एक सुरक्षित फ़ैसला हो सकता है, लेकिन मैं उन्हें ओपन ही करते देखना पसंद करूंगा। उनके पास वह क्षमता है और वह कर सकते हैं।” डेविड वॉर्नर के संन्यास के बाद स्मिथ ने ख़ुद ओपनिंग करना चुना था, लेकिन तब वॉटसन ने कैमरून ग्रीन का सलामी बल्लेबाज़ी के लिए समर्थन किया था। अब वॉटसन का कहना है, “ग्रीन ने पिछले कुछ मैचों में नंबर चार पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ उनका शतक विशेष था और अब वह भविष्य के परफ़ेक्ट नंबर चार हैं।” स्मिथ ने ओपनर के रूप में अब तक चार टेस्ट मैचों में 28.5 की औसत से 171 रन बनाए हैं, लेकिन वॉटसन को यह चिंता की बात नहीं लगती है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि थोड़ा सा मामला तकनीकी है। पिछले दो टेस्ट मैचों में वह जिस तरह से आउट हुए, मैंने उन्हें कभी भी ऐसे आउट होते नहीं देखा। लेकिन अभी सीरीज़ होने में समय है और वह अपनी तकनीक में यह सुधार कर सकते हैं। अगर वह उस सुधार के साथ ओपन करते हैं, वह एक बेहतरीन सलामी बल्लेबाज़ साबित हो सकते हैं।”    

हरियाणा-जम्मू में चला योगी का जादू, जहां-जहां किया प्रचार, खिल गया कमल

चंडीगढ़  हरियाणा विधानसभा चुनाव के कुछ महीनों पहले तक दुष्यंत डिप्टी सीएम पद पर काबिज थे, लेकिन भाजपा में हुई हलचल ने सारे समीकरण बदल दिए। जेजेपी और भाजपा का गठबंधन टूटा। इसके बाद उनकी पार्टी के कई विधायक भी टूट गए। उनकी वापसी की उम्मीद कहे जा रहे 2024 विधानसभा चुनाव भी बड़ा जेजेपी और दुष्यंत के लिए बड़े झटके की तरह रहे। हरियाणा की उचाना कलां सीट से मैदान में उतरे दुष्यंत 5वें स्थान पर रहे। उन्हें 5 फीसदी से भी कम वोट मिले। वह दल के उन नेताओं में शामिल थे, जिनकी जमानत जब्त हो गई थी। सीट पर भाजपा के देवेंद्र चतुर्भुज अत्तरी ने महज 32 वोट के अंतर से कांग्रेस के बृजेंद्र सिंह को हराया है। दुष्यंत इस सीट पर दो निर्दलीय उम्मीदवारों विकास और वीरेंद्र घोघारियां से भी पिछड़ गए। उन्होंने सीट 41 हजार से ज्यादा वोट से गंवाई।विधानसभा चुनाव में जेजेपी का एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका। यहां तक कि पार्टी का वोट शेयर भी 15 प्रतिशत से घटकर 1 फीसदी से भी कम पर आ गया था। दुष्यंत पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला के पोते और पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल के परपोता हैं। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री देवी लाल, बंसी लाल और भजन लाल के परिवार के सदस्य जीतने में कामयाब रहे। पूर्व सीएम भजन लाल के बेटे चंद्र मोहन पंचकूला से जीते, पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल के पोते आदित्य देवी लाल डबवाली से जीते, अर्जुन चौटाला रनिया से विजयी रहे। पूर्व सीएम बंसी लाल की परपोती श्रुति चौधरी तोषाम से जीतीं। हालांकि, भजन लाल के परिवार से भव्य बिश्नोई बड़ा झटका साबित हुआ। शुरुआती राउंड्स में आदमपुर सीट से आगे चल रहे भव्य को हार का सामना करना पड़ा। खास बात है कि आदमपुर सीट पर 50 सालों से ज्यादा समय तक भजन लाल परिवार का कब्जा रहा। हरियाणा-जम्मू में चला योगी का जादू, जहां-जहां किया प्रचार, खिल गया कमल  यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता ने हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में हालिया विधानसभा चुनावों में भी अपना प्रभाव दिखाया है। उनकी रैलियों की मांग हमेशा बनी रही और उम्मीदवारों के बीच उनकी उपस्थिति जीत की पक्की गारंटी मानी जाती है। योगी ने हरियाणा में 14 रैलियां और जम्मू में 4 रैलियां की थी। जम्मू में उन्होंने जिन विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया, वहां बीजेपी ने जीत हासिल की। हरियाणा में भी एंटी-इन्कंबेंसी माहौल के बावजूद योगी की रैलियों ने बीजेपी को 14 में से 9 सीटें जीतने में मदद की। क्योंकि पार्टी को पिछले दस सालों में सत्ता के खिलाफ जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। योगी की रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ और उनका बोलने का अंदाज चुनावी नतीजों में सीधे तौर पर परिवर्तित होता है। उनकी लोकप्रियता के चलते बीजेपी ने दोनों राज्यों में उनकी रैलियों को एक प्रमुख रणनीति का हिस्सा बनाया था। इन चुनावों के परिणाम ने यह साबित कर दिया कि सीएम योगी, पीएम मोदी के बाद, बीजेपी के सबसे लोकप्रिय चेहरे हैं। उनके प्रभावी प्रचार से न केवल बीजेपी की स्थिति मजबूत हुई, बल्कि उन्होंने पार्टी की जीत तय करने में भी अहम भूमिका निभाई है। इस प्रकार योगी की रैलियों की सफलता ने साबित किया है कि उनकी रणनीतियां अन्य राज्यों के चुनावों में भी बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।    

लद्दाख और अरुणाचल की मौजूदा स्थिति का जायजा लेगा सैन्य नेतृत्व

नई दिल्ली  चीन को कड़ा संदेश देने के लिए पहली बार सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी के नेतृत्व में भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास 10-11 अक्टूबर को सिक्किम में बैठक करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित शीर्ष रक्षा अधिकारी संबोधित करेंगे। शीर्ष सैन्य कमांडरों की महत्वपूर्ण बैठक वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब किसी स्थान पर होगी। बैठक में एलएसी पर संवेदनशील स्थिति, विशेष रूप से लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश की स्थिति का जायजा लिया जाएगा, जहां दोनों पक्ष नियमित आधार पर गतिरोध और टकराव में लगे हुए हैं। सम्मेलन का दूसरा चरण 28-29 अक्टूबर को दिल्ली में होने की संभावना है। अधिकारियों ने कहा कि शीर्ष अधिकारी मौजूदा वैश्विक संघर्षों के सबक और सेना के विभिन्न अंगों सहित भारतीय बलों के लिए सीख पर भी चर्चा करेंगे। जनरल द्विवेदी के नेतृत्व में शीर्ष सेना कमांडरों की यह पहली बैठक होगी। उन्होंने इस साल 30 जून को सेना प्रमुख का पद संभाला था। हाल ही में जनरल द्विवेदी ने सीमा पर चीन के साथ स्थिति स्थिर लेकिन सामान्य बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि संवेदनशील क्षेत्र में चीन के साथ लंबे समय से चल रहे सैन्य गतिरोध में भारतीय सेना और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच विश्वास को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। अप्रैल, 2020 जैसी स्थिति बहाल होने तक स्थिति संवेदनशील बनी रहेगी और हम किसी भी तरह की आकस्मिकता का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।    

केजरीवाल आज मेहराज मलिक के साथ ‘धन्यवाद रैली’ को संबोधित करेंगे

नई दिल्ली  आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज  गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के डोडा में धन्यवाद रैली को संबोधित करेंगे। डोडा विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी के मेहराज मलिक ने भाजपा के गजय सिंह राणा को चार हजार से अधिक मतों से हार का मुंह दिखाकर जीत का परचम लहराया है। केजरीवाल मेहराज मलिक के साथ इस रैली को संबोधित करेंगे। आम आदमी पार्टी द्वारा जम्मू-कश्मीर में खाता खोलना राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। ‘आप’ के लिए जम्मू-कश्मीर पांचवा ऐसा राज्य है, जहां यह पार्टी जीत का परचम लहराने में सफल हुई है। इससे पहले आम आदमी पार्टी दिल्ली के अलावा पंजाब, गुजरात और गोवा में भी अपने प्रत्याशियों को उतारकर जीत का परचम लहरा चुकी है। पार्टी अब धीरे-धीरे देशभर में अपनी सियासी जमीन को दुरूस्त करने में जुटी है। अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर मेहराज मलिक को जीत की बधाई। उन्हेंने कहा, “डोडा विधानसभा सीट से आप उम्मीदवार मेहराज मलिक को बीजेपी को हराने के लिए बधाई। आपने अच्छा चुनाव लड़ा।” मेहराज मलिक ने अपनी इस जीत को जनता की जीत बताया। उन्होंने कहा कि हमने सभी सीटों पर चुनाव न लड़कर बड़ी गलती कर दी। अगर हम सभी सीटों पर चुनाव लड़ते, तो निश्चित तौर पर और सीटों पर जीत का परचम लहराने में सफल होते। हमारी पार्टी हमेशा से ही जनता के हितों को तवज्जो देती हुई आई है और यह उसी का नतीजा है कि आज हम जम्मू-कश्मीर में भी अपना खाता खोलने में सफल हुए हैं। उन्होंने कहा, “जो लोग भ्रष्ट हैं, लूटपाट करते हैं, लोगों के हितों पर कुठाराघात करते हैं, मुझे लगता है कि अब ऐसे लोगों का समय समाप्त हो चुका है। ऐसे लोगों को रुक जाना चाहिए। ऐसे लोगों को जनता ने आईना दिखाकर लोकतंत्र की ताकत का एहसास दिला दिया है। घाटी की जनता ने इन लोगों को बता दिया है कि लोकतंत्र में कुछ भी मुमकिन है। इसके अलावा, जो लोग लोकतंत्र के सिद्धांतों पर कुठाराघात कर रहे हैं, ऐसे लोगों को ब्रेक ले लेना चाहिए।” वहीं, बात अगर जम्मू-कश्मीर के चुनावी नतीजों की करें, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के गठबंधन ने मिलकर 49 सीटों पर जीत का परचम लहराया है, जबकि बीजेपी 29 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही है। उधर, पीडीपी की बात करें, तो यह महज ती तीनों सीटों पर ही जीत दर्ज करने में सफल रही है। उधर, भाजपा की बात करें, तो यह 29 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही है, लेकिन वो इस जीत को अपने लिए अहम मान रही है। भाजपा का दावा है कि जम्मू-कश्मीर में हुए सफलतापूर्वक चुनाव लोकतंत्र की जीत है।  

बहुजन समाज के आत्म सम्मान की ‘सच्ची मंजिल’ है बसपा : मायावती

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को बहुजन समाज के आत्म सम्मान और स्वाभिमान के आंदोलन की राह में बाधा करार देते हुए दावा किया कि बसपा ही उनकी ‘सच्ची मंजिल’ है जो उन्हें ‘शासक वर्ग’ का हिस्सा बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। मायावती ने बसपा संस्थापक कांशीराम के 18वें परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट किया। उन्होंने कहा, ‘‘बामसेफ, डीएस4 व बसपा के जन्मदाता एवं संस्थापक बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम जी को आज उनके परिनिर्वाण दिवस पर शत-शत नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित तथा उत्तर प्रदेश एवं देश भर में उन्हें विभिन्न रूपों में श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले पार्टी के सभी लोगों व अनुयाइयों का तहेदिल से आभार।’’ बसपा प्रमुख ने विरोधी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘गांधीवादी कांग्रेस व आरएसएसवादी (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) भाजपा व सपा आदि उनकी (बहुजन समाज) हितैषी नहीं बल्कि उनके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आंदोलन की राह में बाधा हैं, जबकि अम्बेडकरवादी बसपा उनकी सही-सच्ची मंजिल है, जो उन्हें मांगने वालों से देने वाला शासक वर्ग बनाने के लिए संघर्षरत है। यही आज के दिन का संदेश है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश में करोड़ों लोगों के लिए गरीबी, बेरोजगारी व जातिवादी द्वेष, अन्याय-अत्याचार का लगातार तंग व लाचार जीवन जीने को मजबूर होने से यह साबित है कि सत्ता पर अधिकतर समय काबिज रहने वाली कांग्रेस व भाजपा आदि की सरकारें न तो सही से संविधानवादी रही हैं और न ही उस नाते सच्ची देशभक्त हैं।’’  भाजपा की हार सुनिश्चित करने के लिए जाटों ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन बसपा को छोड़ दिया : मायावती  बसपा नेता मायावती ने  इस बात पर अफसोस जताया कि हरियाणा में जाट समुदाय ने विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया। उन्हें लगता है कि दलितों के बारे में उनकी (जाटों की) मानसिकता बदलने की जरूरत है। पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि मनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आईं मायावती ने इस बात पर अफसोस जताया कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के साथ गठबंधन उनकी पार्टी के लिए लाभदायक नहीं रहा। मायावती ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने और उसे सत्ता से बाहर रखने के लिए हरियाणा में जाट समुदाय ने कांग्रेस को वोट दिया, लेकिन इस प्रक्रिया में उन्होंने बसपा को छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि दलित वोट जहां इनेलो की ओर चले गए, वहीं जाटों के मत उनकी पार्टी को नहीं मिले। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “बसपा उम्मीदवारों को केवल दलित वोट मिले। अगर हमें दो से तीन प्रतिशत जाट वोट भी मिल जाते तो हम कुछ सीटें जीत सकते थे।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों के प्रति जाट समुदाय की मानसिकता में बदलाव आया है, लेकिन हरियाणा में ऐसा होना अभी बाकी है। इनेलो ने राज्य में दो सीटें जीतीं, जबकि बसपा को एक भी सीट नहीं मिली। सत्ता विरोधी लहर के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा ने हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाई और सत्ता बरकरार रखी तथा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की वापसी की कोशिशों को विफल कर दिया। भाजपा ने 48 सीटें जीतकर अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि हासिल की। उसकी सीटों का आंकड़ा कांग्रेस से 11 अधिक था, जबकि जननायक जनता पार्टी (जजपा) और आम आदमी पार्टी जैसे दलों का सफाया हो गया और इनेलो को सिर्फ दो सीटें ही मिल पाईं। आप ने अकेले चुनाव लड़ा था। अगले वर्ष फरवरी में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए मायावती ने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ आप, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बसपा को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा। मायावती ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश से इतर अन्य राज्यों में बसपा को प्रत्यक्ष मुकाबलों में नुकसान उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बसपा अगले महीने महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले चुनाव भी लड़ेगी।  

14 अक्टूबर से दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस

पटना  यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने कई ट्रेनों के ठहराव में बदलाव किया है। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए वंदे भारत, हटिया एक्सप्रेस और श्रमजीवी एक्सप्रेस के ठहराव में बदलाव किए हैं। वंदे भारत ट्रेन का ठहराव 13 अक्टूबर से बख्तियारपुर में और हटिया एक्सप्रेस का दनियावां में होगा। श्रमजीवी एक्सप्रेस का पावापुरी रोड स्टेशन पर ठहराव भी 14 अक्टूबर से होगा। बख्तियारपुर स्टेशन पर रुकेगी पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चन्द्र ने बताया कि ये बदलाव यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि 13 अक्टूबर से पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस (22348) बख्तियारपुर स्टेशन पर रुकेगी। यह ट्रेन सुबह 08:37 बजे बख्तियारपुर पहुंचेगी और 08:39 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में हावड़ा-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस (22347) रात 21:32 बजे बख्तियारपुर पहुंचेगी और 21:34 बजे आगे के लिए रवाना होगी। बख्तियारपुर में नए ठहराव के कारण 22348 पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस मोकामा में 09:02/09:04 बजे और लखीसराय में 09:24/09:26 बजे रुकेगी। दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस इसी तरह, 14 अक्टूबर से इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस (18623) शाम 19:54 बजे दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी और 19.56 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में 15 अक्टूबर से 18624 हटिया-इसलामपुर एक्सप्रेस सुबह 07;38 बजे दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी और 07:40 बजे आगे के लिए रवाना होगी। दनियावां में नए ठहराव के कारण 18623 इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस के दनियावां बाजार हॉल्ट पर ठहराव समय में भी बदलाव किया गया है। यह ट्रेन अब दनियावां बाजार हॉल्ट पर 20:07/20:09 बजे रुकेगी। पावापुरी रोड स्टेशन राजगीर-नई दिल्ली श्रमजीवी एक्सप्रेस 14 अक्टूबर से राजगीर-नई दिल्ली श्रमजीवी एक्सप्रेस (12391) भी पावापुरी रोड स्टेशन पर रुकेगी। यह ट्रेन सुबह 08:20 बजे पावापुरी रोड स्टेशन पहुंचेगी और 08:22 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में 12392 नई दिल्ली-राजगीर श्रमजीवी एक्सप्रेस सुबह 09:15 बजे पावापुरी रोड स्टेशन पहुंचेगी और 09:17 बजे आगे के लिए रवाना होगी।

आईआईटी इंदौर ने स्वदेशी तकनीक से बनाया स्तन कैंसर की पहचान करने वाला उपकरण

इंदौर  इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं में स्तन कैंसर का समय रहते पता लगाने के लिए छोटा और किफायती उपकरण विकसित किया है। आईआईटी इंदौर के एक अधिकारी को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि आईआईटी इंदौर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर श्रीवत्सन वासुदेवन का विकसित किया गया यह उपकरण, शुरुआती चरण में ही स्तन कैंसर की पहचान कर मरीजों की जान बचाने के मकसद से ईजाद किया गया है। उन्होंने बताया कि ‘‘फोटोएकाउस्टिक स्पेक्ट्रल रिस्पॉन्स’’ के सिद्धांत पर आधारित उपकरण मानव शरीर के ऊतकों में असामान्य परिवर्तनों का पता लगाने के लिए ‘‘ऑप्टिकल’’ और ‘‘एकाउस्टिक’’ सिग्नल को एक साथ जोड़ता है। आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रोफेसर सुहास जोशी ने कहा, ‘बीमारियों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एमआरआई और सीटी स्कैनर आमतौर पर आयातित और महंगे होते हैं। इससे वे देश की आबादी के बड़े हिस्से की पहुंच से बाहर हो जाते हैं।’’ उन्होंने बताया कि इस चुनौती से निपटने के लिए आईआईटी इंदौर ने स्वदेशी तकनीक से किफायती उपकरण विकसित किया है ताकि खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों में कैंसर का वक्त रहते पता लगाकर उनकी जान बचाने में मदद मिल सके। प्रोफेसर वासुदेवन ने कहा कि यह उपकरण प्रकाश उत्पन्न करने के लिए ‘‘कॉम्पैक्ट पल्स्ड लेजर डायोड’’ का उपयोग करता है जो ऊतक के संपर्क में आता है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया से मिले परिणामों का विश्लेषण करके उपकरण पता लगाता है कि कहीं संबंधित ऊतक कैंसरग्रस्त तो नहीं है।      

वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है

वन स्टॉप सेंटर के प्रयासों से लौट रहा महिलाओं का सम्मान महिला सशक्तिकरण की दिशा में संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल वन स्टॉप सेंटर संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है भोपाल महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिससे निपटने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति की संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है। महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की भूमिका      सुरक्षित आश्रय एवं तात्कालिक सहायता – वन स्टॉप सेंटर उन महिलाओं को तत्काल आश्रय और सुरक्षा प्रदान करता है जो घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन हिंसा अथवा किसी भी प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती है। सेंटर में महिलाओं को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाती है और उन्हें सुरक्षित वातावरण में आश्रय दिया जाता है।      कानूनी सहायता और परामर्श – वन स्टॉप सेंटर पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सके और आवश्यक कानूनी कदम उठा सकें। कानूनी परामर्श और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहायता मिलने से महिलाएँ अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय पाने की दिशा में सशक्त हो सकें।      चिकित्सा सहायता – वन स्टॉप सेंटर पर महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलती है। हिंसा या प्रताड़ना से घायल महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य सेवाएँ के साथ समन्वय कर चिकित्सा सेवाएँ दी जाती है।      मनोवैज्ञानिक परामर्श – हिंसा की शिकार महिलाएँ अक्सर मानसिक आघात से गुजरती है, वन स्टॉप सेंटर पर प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं को मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते है जिससे उनका आत्म-विश्वास मजबूत होता है।      पुनर्वास सेवाएँ एवं समाज में पुनर्स्थापना – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को पुनर्वास सेवाएँ भी प्रदान करते है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को उनके परिवार के साथ पुनर्स्थापित करने अथवा उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने, अपने पैरों पर खड़ाहोने का अवसर प्रदान करता है।      आर्थिक सशक्तिकरण के लिये प्रशिक्षण और रोजगार – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार देने के लिये प्रशिक्षण देने का भी प्रयास करते है। महिलाओं को विभिन्न कौशल में प्रशिक्षित किया जाता है। इससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें। प्रदेश के 52 जिलों में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित किये जा रहे है। प्रारंभ से अगस्त 2024 तक 98 हजार 636 महिलाओं को पंजीकृत कर विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की गई, जिसमें लगभग 78 प्रतिशत महिलाएँ (76,499) को घरेलू हिंसा से संबंधित सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दहेज उत्पीड़न, बलात्कार, यौन अपराध, बाल विवाह, गुमशुदा, अपहरण, निराश्रित आदि से संबंधित प्रकरणों में यथोचित मदद की गई। वर्ष 2019-20 में कुल 6 हजार 352 महिलाओं को सहायता दी गई थी। वर्ष 2023-24 में 21 हजार 490 महिलाओं को मदद प्रदान की गई। अब सभी वन स्टॉप सेंटर में वाहनों का प्रावधान भी किया गया है, जिससे दूरस्थ महिलाओं को भी त्वरित सहायता मिल सकेगी।  

राशिफल गुरुवार 10 अक्टूबर 2024

मेष: आज के दिन मेष राशि के जातक अपना फोकस बनाए रखें। बेतहाशा सपनों का पीछा करने और उस चीज से मुक्त होने का दिन है, जो आपको रोक रही है। जंक फूड को नो कहें और सेल्फ-लव पर फोकस करें। सावधान रहें और उत्साह में अपने खर्च को कंट्रोल से बाहर न जाने दें। अगर आप किसी बदलाव या नए प्रोजेक्ट के बारे में सोच रहे हैं, तो अब जरूरी डिसीजन लेने का सही वक्त है। वृषभ: वृषभ राशि के जातकों को आज सेल्फ-केयर पर ध्यान देना चाहिए। आपका कॉन्फिडेंस व लीडरशिप स्किल्स दूसरों को प्रभावित करेंगी। मेडिटेशन के लिए समय अवश्य निकालें। धन से जुड़े निर्णय सोच समझकर ही लें। फिजिकल और मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने की कोशिश करें। परिवार में मतभेद होने की संभावना है। संयम से काम लें और खुद को बीजी रखें। बाहर के खाने से परहेज करें। मिथुन: आज मिथुन राशि के जातक नए लोगों के साथ बात-चीत शुरू करने से न डरें। जो जातक रिलेशनशिप में हैं, वो आज अपनी फीलिंग्स और विचार अपने साथी के साथ शेयर करें। बहुत ज्यादा तनाव लेने से बचें। चाहे आप नई नौकरी पाना चाहते हों या प्रोमोशन पाना चाहते हों, आज का दिन लकी है। खुद पर विश्वास करें। आपको अपनी खर्च करने की आदतों पर ध्यान देना चाहिए। कर्क: कर्क राशि के जातकों आज अपनी फाइनेंशियल बॉउन्डरी को मेन्टेन करने पर ध्यान दें। करियर के मामले में आज सावधानी के साथ प्लान करें। आप अपने धन संबंधी मामलों में सफलता देखेंगे। सही दृष्टिकोण और थोड़े से साहस के साथ आप अपने रोमांटिक सपनों को एक खूबसूरत हकीकत में बदल सकते हैं। हाइड्रेटेड रहें। अपने रूटीन में जरूरी बदलाव करें। सिंह: आज के दिन सिंह राशि के जातकों आपकी सेहत ही आपका धन है। आपकी कड़ी मेहनत और समर्पण बड़े पैमाने पर फल देंगे। पैसे कमाने के आज कई मौके मिल सकते हैं। रोमांस से भरपूर रहेंगे आज आप। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में संकोच न करें। अपने एनर्जी लेवल को बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी, जैसे कि कोई नया वर्कआउट ट्राई कर सकते हैं। कन्या: आज कन्या राशि के जातक अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए समय निकालें। नए अवसर पर अपना फोकस रखें, जो आपके करियर को अगले लेवल तक ले जा सकते हैं। अपने साथी से जुड़ने और अपना प्यार बांटने के लिए अपने अट्रैक्शन और कम्यूनिकेशन का इस्तेमाल करें। धन संबंधी मामलों में आज आप सफलता देखेंगे। संतुलित जीवनशैली बनाए रखें। तुला: तुला राशि के लोगों आज आपके लिए पैसों के लेन-देन से बचना बेहतर रहेगा। मौजूदा रिश्तों को आपकी सूझ-बूझ से आज काफी लाभ हो सकता है। हेल्थ पर ध्यान देने की जरूरत है। लव के मामले में कुछ बातों को इग्नोर करने से रिश्ते में दरार पड़ने से रोका जा सकता है। वित्तीय सलाह लेने या फ्यूचर के लिए प्लान बनाने के लिए भी आज एक अच्छा दिन है। अपने सभी टास्क समय पर पूरे करें। वृश्चिक: वृश्चिक राशि के जातकों आज के दिन आप बेहतर महसूस करेंगे। बेहतर दिखेंगे और दिनभर में जो भी चैलेंज आएंगे, उनसे निपटने के लिए आपके पास अधिक एनर्जी होगी। रिलेशन में रहने वालों के लिए रोमांस को फिर से जगाने का बेस्ट समय है। अपने कार्यों और डीसीजन को गाइड करने के लिए खुद पर भरोसा रखें। शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए समय-समय पर जांच करवाते रहें। धनु: आज धनु राशि के जातकों को सलाह दी जाती है कि वे खुद के प्रति सच्चे रहें। नया प्रोजेक्ट या कोई जिम्मेदारी आपके सामने आ सकती है। हमेशा अपने स्वास्थ्य को पहले स्थान पर रखना याद रखें, बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा। यूनिवर्स आज आपके पक्ष में रहेगा। धन के मामले में सावधानी जरूरी है। आपका कनेक्शन इमोशनल रूप से आज मजबूत होगा। मकर: आज मकर राशि के जातकों के लिए उत्साह से भरा दिन रहने वाला है। अपनी फीलिंग्स को खुलकर एक्सप्रेस करें। आगे बढ़ने और दुनिया को यह दिखाने से न डरें कि आप क्या करने में सक्षम हैं। धन के मामले में लकी रहने वाले हैं आज आप। अपनी डाइट को हेल्दी रखें। अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने के लिए तैयार रहें। प्रोफेशनल ग्रोथ जरूरी है। खुद को हाइड्रेटेड रखें। कुंभ: कुंभ राशि के जातकों आज के दिन फाइनेंशियल स्थिति में थोड़े बहुत उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। हेल्दी डाइट का सेवन करें। अपने रास्ते में आने वाले अवसरों का लाभ उठाने का दिन है। सावधानी के साथ योजना बनाने से आप अपनी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी को बढ़ा सकते हैं। स्किल्स में सुधार करना चाहते हैं, तो अब कदम उठाने का समय आ गया है। आज कंफर्ट जोन से बाहर निकलें। मीन: आज मीन राशि के जातकों का दिन पॉजिटिव रहेगा। जो लोग रिलेशन में हैं, उनके लिए आज अपने पार्ट्नर्शिप में फिर से स्पार्क लाने का सही समय है। अपने शरीर के संकेतों पर ध्यान देने से छोटी-मोटी समस्याओं को बढ़ने से रोका जा सकता है। आज पैसों से जुड़े मामलों को मैनेज करने में आपका पार्टनर मदद कर सकता है। अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए आज का दिन शुभ रहेगा।

हरियाणा : भाजपा के सामने जीत के बाद अब ‘मुख्यमंत्री’ चुनने की चुनौती

चंडीगढ़ हरियाणा में चुनावी संग्राम खत्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने एग्जिट पोल और राजनीतिक पंडितों को धता बताते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। हालांकि प्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे पर आखिरी मुहर लगानी बाकी है। जिस तरह भाजपा ने चुनाव से पहले इस मुद्दे को शांत रखा, वैसी ही उम्मीद मतगणना के बाद भी की जा रही है। कुल 90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा में बहुमत आंकड़ा 46 का बनता है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जननायक जनता पार्टी (जजपा) के साथ मिलकर इस लक्ष्य को हासिल किया था, लेकिन इस बार उसने अकेले चुनाव लड़ा और 48 सीटों पर पहुंच गई। लगातार तीन बार प्रदेश में जीत की हैट्रिक लगाना पार्टी के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। भारतीय जनता पार्टी ने एक नहीं बल्कि हर मोर्चे पर ऑलराउंड प्रदर्शन करके सबको दिखा दिया है कि जमीनी स्तर पर अच्छे काम करके सत्ता में लगातार वापसी की जा सकती है। भले ही चुनाव से पहले किसान और बेरोजगारी जैसे मुद्दे पार्टी के ऊपर हावी हो रहे थे, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता को मिल रही बिजली, पानी और सड़क की सुविधा ने ज्यादा असर दिखाया, तभी तो पार्टी ने सिर्फ सीट की संख्या ही नहीं बल्कि वोट शेयर में भी बढ़ोतरी दर्ज की है। पिछली बार 2019 में पार्टी को 36.49 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे और 40 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं इस बार उसने 39.94 प्रतिशत वोटों के साथ 48 सीटों पर जीत दर्ज की है। भले ही भाजपा अर्धशतक लगाने से चूक गई लेकिन पहले से बेहतरीन स्ट्राइक रेट के साथ टीम ने मैच को अपने पाले में कर लिया। अब मुख्यमंत्री का सेहरा किसके सिर बंधता है यह देखना दिलचस्प होगा। वैसे कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी नायब सिंह सैनी को ही एक बार फिर मौका दे सकती है। यह बात बहुत हद तक हरियाणा के दिग्गज भाजपा नेता अनिल विज के रुख पर भी निर्भर करेगा। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने की उनकी महत्वाकांक्षा जगजाहिर है। कई बार सार्वजनिक मंचों से भी वह इसका जिक्र कर चुके हैं।अनिल विज क्या अब अपनी इस मांग को और मुखर करेंगे या फिर पार्टी हाईकमान के फैसले की पूरे धैर्य से इंतजार करेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

सवारियों से भरी उत्तराखंड डिपो की बस पलटी, हादसे में 8 से 10 यात्री घायल हो गए

सोलन हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के अंतर्गत आते कंडाघाट के पास उत्तराखंड डिपो की एक बस सड़क में पलट गई। इस हादसे में 8 से 10 यात्री घायल हो गए हैं। यह 52 सीटर बस सवारियों से भरी हुई थी। बताया जा रहा है कि यह बस शिमला से हरिद्वार जा रही थी। जैसे ही बस कंडाघाट के पास बंदी टनल के पास पहुंची तो अचानक ड्राइवर ने बस पर से नियंत्रण खो दिया और बस सड़क में ही पलट गई। बस के पलटते ही मौके पर चीखोपुकार मच गई। वहीं हादसे का पता चलते ही स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंग गए और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। उधर, हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन व पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं तथा स्थानीय लोगों की सहायता से घायलों को दुर्घटनाग्रस्त बस से निकाल कर कंडाघाट अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज किया जा रहा है। बता दें कि नैशनल हाईवे-5 पर दुर्घटना के लगातार मामले सामने आ रहे हैं आ रहे हैं। पिछले 9 महीने में 140 दुर्घटनाओं के मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें से 14 लोगों की मौत और 250 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। ऐसा कोई दिन नहीं है जब परवाणू से लेकर कैथली घाट के बीच वाहन दुर्घटना का मामला सामने न आ रहा हो। अधिकतर दुर्घटनाएं तेज रफ्तारी या फिर लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हो रही हैं।

भाजपा विधायक दल की बैठक कल मुख्यमंत्री निवास या हरियाणा निवास में होने की संभावना, शपथ ग्रहण हो सकती है जल्द

चंडीगढ़ हरियाणा में विधानसभा चुनाव की मतगणना के बाद अब सरकार बनने की स्थिति साफ हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी जहां हैट्रिक लगाते हुए लगातार तीसरी बार प्रदेश में सरकार बनाने जा रही है। वहीं, मुख्यमंत्री के पद को लेकर पार्टी हाई कमान पहले से ही नायब सिंह सैनी का नाम घोषित कर चुकी है। इस प्रक्रिया में भाजपा विधायक दल की बैठक शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास या हरियाणा निवास में होने की संभावना है।इसी सिलसिले में चंडीगढ़ केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल भी वीरवार को पहुंच सकते हैं आ नए चुने विधायकों से मुलाकात कर सकते हैं।हरियाणा में वर्ष 2014 से 2019 तथा 2019 से 2024 तक कमान साढ़े 9 साल मुख्यमंत्री के रूप में मनोहर लाल के पास ही रही है। हालांकि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडोली ने दशहरा के पर्व के बाद विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा होने की बात कही है। इसी बीच अब मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले विधायकों के नामों को लेकर भी चर्चा शुरू हो चुकी है। इस चुनाव में पार्टी के कईं दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के सम्मुख मंत्रिमंडल का गठन किए जाने के समय भौगोलिक और जातीय सभी समीकरणों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। हालांकि अनिल विज, मूलचंद शर्मा, विपुल गोयल सरीखे कुछ नाम ऐसे है, जिनका मंत्री बनना लगभग तय है।घरोंडा से विधायक हरविंद्र कल्याण का नाम विधानसभा अध्यक्ष के इस पद के लिए चर्चा में हैं। मंत्री के लिए चर्चा में यह नाम मुख्यमंत्री के अलावा हरियाणा की नई बनने वाली सरकार में मंत्री बनने की चाह रखने वाले नेताओं की लंबी फेहरिस्त है। इनमें कुछ नामों के बारे में हम आपकों बताने जा रहे हैं। इन नामों में पूर्व की बीजेपी सरकार में मंत्री रहे अनिल विज का इस बार भी मंत्री बनना करीब-करीब तय माना जा रहा है। हालांकि वह मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन साथ ही वह यह भी कह चुके हैं कि वह किसी भी पद पर अपना दावा नहीं जताएंगे और पार्टी की ओर से उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, वह उसे बखूबी निभाएंगे। इसके अलावा पूर्व बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे मूलचंद शर्मा का इस बार भी मंत्री बनना तय माना जा रहा है। इनके अलावा मनोहर पार्ट वन में राज्य मंत्री रहे कृष्णलाल पंवार, विपुल गोयल और कृष्ण बेदी का भी मंत्री बनना तय माना जा रहा है। इनके अलावा केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत की बेटी आरती राव, रामकुमार गौतम, महीपाल ढांडा, प्रमोद विज, कृष्ण गहलावत, डॉ. कृष्ण मिड्ढा, विनोद भयाना, घनश्याम दास अरोड़ा, श्रुति चौधरी के नाम भी मंत्री पद की दौड़ में शामिल है। यह बन सकते हैं विधानसभा अध्यक्ष हरियाणा में चूंकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता इस बार विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाए है तो इस सूरत में बीजेपी को नए विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव करना होगा। ऐसे में पूर्व में डिप्टी स्पीकर रहे रणबीर गंगवा का अलावा घरोंडा से विधायक हरविंद्र कल्याण का नाम इस पद के लिए चर्चा में हैं।गंगवा मंत्री बनना चाहते हैं। विजयदशमी के दिन 12 अक्टूबर को झोट ग्रह की संभावना।देश के पी एम नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह में से कोई बड़ी हस्ती भी शपथ ग्रहण में मौजूद रह सकती है। मुख्यमंत्री समेत हो सकते हैं 14 मंत्री 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में मुख्यमंत्री समेत कुल 14 मंत्री हो सकते हैं। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि अपने कद्दावर नेताओं के अलावा भारतीय जनता पार्टी तीसरी पारी की सरकार में किन-किन नेताओं को मंत्री पद से नवाजने का काम करती है, क्योंकि मंत्री बनाते समय भारतीय जनता पार्टी को चुनावी समीकरण के साथ भौगोलिक और जातीय दोनों समीकरणों को ध्यान में रखन होगा।  

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