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वक्फ संशोधन कानून के तहत एमपी की 1,178 संपत्तियां बाहर, सरकार ने 24,696 वक्फ दावे किए खारिज

भोपाल  वक्फ संपत्तियों के रख-रखाव और उनके जनहित में उपयोग के लिए केंद्र सरकार की ओर से लाए गए वक्फ संशोधन कानून के परिणाम सामने आने लगे हैं। वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया के बीच सरकार ने अब तक 24,696 वक्फ दावे खारिज (अस्वीकार) कर दिए हैं। यानी इन दावों में शामिल संपत्तियों को फिलहाल वक्फ संपत्तियां नहीं माना गया है। अस्वीकार होने वाले मामलों में सबसे अधिक 4,802 दावे राजस्थान में हैं। तेलंगाना 4,458 खारिज मामलों के साथ दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश में 1,178 दावे निरस्त किए गए हैं। संशोधित कानून में वक्फ संपत्तियों के अनिवार्य पंजीकरण के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र ने जून में ‘उम्मीद’ पोर्टल शुरू कर वक्फ संपत्तियों का डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य किया था। देश में 8,72,802 वक्फ अचल संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से 5,82,541 का विवरण अपलोड किया जा चुका है। 1. डीड या घोषणा का अभाव यदि किसी संपत्तियों को वक्फ घोषित करने का विधिवत दस्तावेज उपलब्ध नहीं है या रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। 2. राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज न होना राज्य के भू-राजस्व अभिलेख (खसरा, खतौनी, जमाबंदी आदि) में संपत्ति वक्फ के नाम दर्ज नहीं हो, या निजी/सरकारी भूमि के रूप में दर्ज हो  3. स्वामित्व विवाद यदि संपत्ति पर निजी व्यक्ति का दावा हो, कोर्ट में मामला लंबित हो, सरकारी भूमि के रूप में दर्ज होने पर 4. डुप्लीकेट या ओवरलैप एंट्री एक ही संपत्ति को दो बार दर्ज या सीमांकन स्पष्ट न होना 5. अधूरी जानकारी पोर्टल पर दस्तावेज अधूरे, नक्शा या सर्वे विवरण न हो, क्षेत्रफल में विसंगति क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया? अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण पारदर्शिता बढ़ाने, फर्जी दावों पर रोक लगाने और वक्फ संपतियों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से किया जा रहा है।

वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 7700 संपत्तियों की जानकारी दी, कब्रिस्तानों पर बने सरकारी दफ्तरों पर चलेंगे बुलडोजर

भोपाल नए वक्फ बिल के बाद राजधानी में जल्द ही वक्फ की जमीनों पर कब्जे हटाने शुरू होगें। वक्फ रेकॉर्ड के अनुसार सबसे ज्यादा कब्जे कब्रिस्तानों पर हैं। करीब 100 कब्रिस्तान खत्म हो चुके हैं। इनमें कहीं बस्तियां हैं तो कहीं काम्पलेक्स तो सरकारी दफ्तर भी काबिज हैं।  बोर्ड के रेकॉर्ड में राजधानी में 7700 वक्फ सम्पत्तियां हैं इसमें 135 कब्रिस्तान हैं। लेकिन इनमें से 30 ही बचे हैं। कब्रिस्तानों के संरक्षण के लिए काम कर रहे जमीयत के सचिव इमरान हारून के मुताबिक वर्तमान में भोपाल टॉकीज चौराहा, पुराना आरटीओ ऑफिस, नरेला संकरी, कोलार, जहांगीराबाद सहित कई इलाकों में कब्रिस्तानों के नामोनिशान भी नहीं बचा। पीएचक्यू के पास सरकारी दफ्तर के पीछे कब्रों के निशान अब भी हैं। वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 7700 संपत्तियों की जानकारी दी है। राजस्व रेकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है। इसके आधार पर बोर्ड का रिकॉर्ड भी अपडेट होगा। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल के मुताबिक प्रशासन को सभी की जानकारी दी चुकी है। इमरान हारून ने बताया कि शहर में करीब 70 प्रतिशत कब्रिस्तान खत्म हो गए हैं। कब्रिस्तान पर बस्तियां बस गई हैं तो कहीं लोगों ने अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया है। नए बिल से निजी कब्जों पर तो कार्रवाई संभव है सरकारी के लिए क्या होगा कुछ पता नहीं। उसके बदले बोर्ड क्या सरकार से जमीन लेेगी। मुस्लिम महासभा के मुन्नवर अली ने बताया कि ये भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। बीते साल ही शहर के कब्रिस्तानों में दफनाने के लिए जगह की कमी की बात सामने आई। निजी कब्जेधारियों पर तो कार्रवाई हुई लेकिन जिन जमीनों पर सरकार का कब्जा है उनके बदले क्या होगा। कब्रिस्तान के बदले जमीन मिलनी चाहिए। जानें वक्फ के नए कानून में क्या है वक्फ का नया कानून बनने के बाद होने वाले बदलावों को लेकर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने शनिवार को विस्तृत जानकारी दी है। इसमें लोगों के बीच बनी धारणा और कानून के प्रावधानों की सच्चाई को सामने रखते हुए सरकार ने साफ किया है कि नया कानून बनने के बाद न तो वक्फ संपत्तियां वापस ली जाएंगी और न ही निजी भूमि पर कब्जा किया जाएगा। इसी पर एक नजर… सवाल : वक्फ संपत्तियां वापस ले ली जाएंगी? सच्चाई : वक्फ कानून 1995 के तहत पंजीकृत कोई भी संपत्ति वक्फ के रूप में वापस नहीं ली जाएगी। क्योंकि एक बार जब कोई संपत्ति वक्फ की घोषित हो जाती है तो स्थायी रूप से उसी रूप में रहती है। विधेयक जिला कलेक्टर को उन संपत्तियों की समीक्षा करने की अनुमति देता है जिन्हें वक्फ के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया जा सकता है, खासकर अगर सरकारी संपत्ति है तो। वैध वक्फ संपत्तियां संरक्षित रहती हैं। सवाल : क्या वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण नहीं होगा? सच्चाई : एक सर्वेक्षण होगा। कानून सर्वेक्षण आयुक्त की पुरानी भूमिका के स्थान पर जिला कलेक्टर को नियुक्त करता है। जिला कलेक्टर मौजूदा राजस्व प्रक्रियाओं का उपयोग करके सर्वेक्षण करेंगे। इसका उद्देश्य सर्वेक्षण प्रक्रिया रोके बिना रिकॉर्डों की सटीकता में सुधार करना है।   सवाल : क्या मुसलमानों की निजी भूमि अधिग्रहित की जाएगी? सच्चाई : कोई निजी भूमि अधिग्रहित नहीं की जाएगी। यह केवल उन संपत्तियों पर लागू होता है जिन्हें वक्फ घोषित किया गया है। निजी या व्यक्तिगत संपत्ति को प्रभावित नहीं करता है जिसे वक्फ के रूप में दान नहीं किया गया है। केवल स्वैच्छिक और कानूनी रूप से वक्फ के रूप में समर्पित संपत्तियां ही नए नियमों के अंतर्गत आती हैं। सवाल : क्या वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएंगे? सच्चाई : बोर्ड में गैर-मुस्लिम शामिल होंगे लेकिन वे बहुमत में नहीं होंगे। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में पदेन सदस्यों को छोड़कर दो गैर-मुस्लिमों को सदस्य के रूप में शामिल करने की आवश्यकता होगी, जिससे परिषद में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य और वक्फ बोर्ड में अधिकतम तीन सदस्य हो सकते हैं। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्डों में कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होने चाहिए। इसका उद्देश्य समुदाय के प्रतिनिधित्व को कम किए बिना विशेषज्ञता को जोड़ना है। सवाल : क्या सरकार इस विधेयक का उपयोग वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए करेगी? सच्चाई : कानून जिला कलेक्टर के पद से ऊपर के एक अधिकारी को यह समीक्षा करने और सत्यापित करने का अधिकार देता है कि क्या सरकारी संपत्ति को गलत तरीके से वक्फ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। लेकिन यह वैध रूप से घोषित वक्फ संपत्तियों को जब्त करने के लिए अधिकृत नहीं करता है। क्या कानून गैर-मुसलमानों को मुस्लिम समुदाय की संपत्ति पर नियंत्रण या प्रबंधन की अनुमति देता है? सच्चाई : संशोधन में प्रावधान किया गया है कि केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्ड में दो कुछ ही गैर-मुस्लिम होंगे। चूंकि अधिकांश सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे, जिससे धार्मिक मामलों पर समुदाय का नियंत्रण बना रहेगा। धारणा : क्या उपयोगकर्ता  द्वारा वक्फ का प्रावधान हटाने से लंबे समय से स्थापित परंपराएं खत्म हो जाएंगी? सच्चाई : यह प्रावधान हटाने का उद्देश्य संपत्ति पर अनधिकृत या गलत दावों को रोकना है। उपयोगकर्ता संपत्तियों (जैसे मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान) द्वारा ऐसे वक्फ को सुरक्षा प्रदान की गई है जो वक्फ संपत्ति के रूप में बनी रहेंगी, सिवाय इसके कि संपत्ति पूरी तरह या आंशिक रूप से विवाद में है या सरकारी संपत्ति है। उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जहां किसी संपत्ति को सिर्फ इसलिए वक्फ माना जाता है क्योंकि उसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है, भले ही मालिक द्वारा कोई औपचारिक, कानूनी घोषणा न की गई हो। सवाल : क्या मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान की पारंपरिक स्थिति प्रभावित होगी? सच्चाई : वक्फ संपत्तियों के धार्मिक या ऐतिहासिक चरित्र में हस्तक्षेप नहीं करता। इन स्थलों की पवित्र प्रकृति में बदलाव करना नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना ही इसका उद्देश्य है।

वक्फ बोर्ड बिल आज लोकसभा में पेश होगा, बिल के लिए एनडीए और इंडिया गठबंधन पूरी तरह से तैयार

नई दिल्ली: लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल आज पेश होगा। सदन में 8 घंटे की चर्चा के बाद अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू चर्चा का जवाब देंगे। इसके बाद बिल को पास कराने के लिए वोटिंग होगी। सरकार बिल को बुधवार को ही लोकसभा में पास कराने की तैयारी है। सरकार इसे राज्यसभा में पेश कर वहां से भी पास कराने की तैयारी में जुटी है। वहीं विपक्ष इस बिल का विरोध कर रहा है। इस बिल के खिलाफ कई जगह मुस्लिमों ने काली पट्टियां बांधकर ईद की नमाज अदा की। आइए जानते हैं वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 में क्या है-     वक्फ बिल लाने का सरकार का उद्देश्य क्या है?     8 अगस्त, 2024 को लोकसभा में दो बिल, वक़्फ़ (संशोधन) बिल, 2024 और मुसलमान वक़्फ़ (निरसन) बिल, 2024 पेश किए गए। इनका मकसद वक्फ बोर्ड के काम को सुव्यवस्थित और वक्फ की प्रॉपर्टीज का बेहतर मैनेजमेंट करना है। वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 का मकसद वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है, ताकि वक्फ संपत्तियों के रेगुलेशन और मैनेजमेंट में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों का समाधान किया जा सके। संशोधन विधेयक का उद्देश्य देश में वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट में सुधार करना है। इसका मकसद पिछले कानून की खामियों को दूर करना और अधिनियम का नाम बदलने जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्डों की कार्यकुशलता को बेहतर करना भी है। साथ ही वक्फ की परिभाषाओं को अपडेट करना, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में सुधार करना, वक्फ रिकॉर्ड के मैनेजटमेंट में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाना भी है।     भारत में वक्फ मैनेजमेंट के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक निकाय कौन से हैं और उनकी भूमिकाएं क्या हैं?     भारत में वक्फ संपत्तियों का प्रशासन फिलहाल वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत किया जाता है। वक्फ मैनेजमेंट में शामिल प्रमुख प्रशासनिक निकायों में शामिल हैं: केंद्रीय वक्फ परिषद (सीडब्ल्यूसी)- सरकार और राज्य वक्फ बोर्डों को नीति पर सलाह देती है, लेकिन वक्फ संपत्तियों को सीधे नियंत्रित नहीं करती है। राज्य वक्फ बोर्ड (एसडब्ल्यूबी) – प्रत्येक राज्य में वक्फ संपत्तियों का मैनेजमेंट और सुरक्षा करते हैं। वक्फ ट्रिब्यूनल- विशेष न्यायिक निकाय, जो वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों को संभालते हैं। यह प्रणाली बेहतर प्रबंधन और मुद्दों के तेज़ समाधान को सुनिश्चित करती है। पिछले कुछ वर्षों में, कानूनी बदलावों ने वक्फ प्रशासन को अधिक पारदर्शी, कुशल और जवाबदेह बना दिया है।     वक्फ बोर्ड से संबंधित मुद्दे क्या हैं?     1. वक्फ संपत्तियों की अपरिवर्तनीयताः ‘एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ’ के सिद्धांत ने विवादों को जन्म दिया है। 2. कानूनी विवाद और मिसमैनेजमेंटः वक्फ अधिनियम, 1995 और इसका 2013 का संशोधन प्रभावकारी नहीं रहा है जिसकी वजह से वक्फ भूमि पर अवैध कब्ज़ा, कुप्रबंधन और मालिकाना हक का विवाद, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और सर्वेक्षण में देरी, बड़े पैमाने पर मुकदमे और मंत्रालय को शिकायतें जैसे समस्याएं सामने आ रही हैं। 3. कोई न्यायिक निगरानी नहीं-वक्फ ट्रिब्यूनल्स के फैसलों को हाई कोर्ट्स में चुनौती नहीं दी जा सकती। इससे वक्फ मैनेजमेंट में पारदर्शिता और जवाबदेही कम हो जाती है। 4. वक्फ संपत्तियों का अधूरा सर्वेक्षण-सर्वेक्षण आयुक्त का काम खराब रहा है, जिससे देरी हुई है। गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में अभी तक सर्वेक्षण शुरू नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश में 2014 में आदेशित सर्वेक्षण अभी भी लंबित है। विशेषज्ञता की कमी और राजस्व विभाग के साथ खराब कोर्डिनेशन ने रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को धीमा कर दिया है। 5. वक्फ कानूनों का दुरुपयोग- कुछ राज्य वक्फ बोर्डों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है, जिसकी वजह से सामुदायिक तनाव पैदा हुआ है। निजी संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित करने के लिए वक्फ अधिनियम की धारा 40 का दुरुपयोग किया गया है, जिससे कानूनी लड़ाई और अशांति पैदा हुई है।30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से मिली जानकारी के अनुसार, केवल 8 राज्यों की तरफ से डेटा दिया गया, जहां धारा 40 के तहत 515 संपत्तियों को वक्फ घोषित किया गया है। 6. वक्फ अधिनियम की संवैधानिक वैधता-वक्फ अधिनियम केवल एक धर्म पर लागू होता है, जबकि अन्य के लिए इसके समान कोई कानून मौजूद नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) में सवाल उठाया गया है कि क्या वक्फ अधिनियम संवैधानिक है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।     बिल पेश करने से पहले मंत्रालय ने क्या कदम उठाए और स्टेकहोल्डर्स से क्या विचार-विमर्श किए?     अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से विचार विमर्श किए, जिसमें सच्चर कमेट की रिपोर्ट, जन प्रतिनिधियों, मीडिया और आम जनता द्वारा कुप्रबंधन, वक्फ अधिनियम की शक्तियों के दुरुपयोग और वक्फ संस्थाओं द्वारा वक्फ संपत्तियों के कम उपयोग के बारे में जाहिर की चिंताएं शामिल हैं। मंत्रालय ने राज्य वक्फ बोर्डों से भी परामर्श किया। मंत्रालय ने वक्फ अधिनियम, 1995 के प्रावधानों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की और स्टेकहोल्डर्स के साथ परामर्श किया। दो बैठकों में प्रभावित स्टेकहोल्डर्स की समस्याओं को सुलझाने के लिए इस अधिनियम में उपयुक्त संशोधन करने के लिए आम सहमति बनी। इनमें शामिल हैं- सीडब्ल्यूसी (केंद्रीय वक्फ परिषद) और एसडब्ल्यूबी (राज्य वक्फ बोर्ड) की संरचना का आधार बढ़ाना, मुतवल्लियों की भूमिका और जिम्मेदारियां, ट्रिब्यूनल का पुनर्गठन, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में सुधार, टाइटल्स की घोषणा, वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण, वक्फ संपत्तियों का म्यूटेशन, मुतवल्लियों द्वारा खातों फाइलिंग, वार्षिक खाता फाइलिंग में सुधार, निष्क्रांत संपत्तियों/परिसीमा अधिनियम से संबंधित प्रावधानों की समीक्षा, वक्फ संपत्तियों का वैज्ञानिक प्रबंधन।     वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को पेश करने की प्रक्रिया क्या थी?     • वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और शासन में कमियों को दूर करने के उद्देश्य से 8 अगस्त, 2024 को पेश किया गया था।• 9 अगस्त, 2024 को संसद के दोनों सदनों ने विधेयक को 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्यों की एक संयुक्त समिति को जांचने और उस पर रिपोर्ट देने के लिए भेजा।• विधेयक के महत्व और इसके व्यापक निहितार्थों को ध्यान में रखते हुए, समिति ने उक्त विधेयक के प्रावधानों पर आम जनता और विशेष रूप से विशेषज्ञों/हितधारकों और अन्य संबंधित संगठनों से विचार प्राप्त करने के लिए ज्ञापन आमंत्रित करने का निर्णय लिया था।• संयुक्त संसदीय समिति ने छत्तीस बैठकें कीं, जिसमें उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधियों के विचार/सुझाव सुने जैसे: अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, विधि एवं न्याय, रेलवे (रेलवे बोर्ड), आवास … Read more

वक्फ बोर्ड के नोटिस से हड़कंप, ग्रामीणों ने किया विरोध, ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में पहुंच कर न्याय की मांग की

रायसेन  मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के मखनी गांव से हैरान करने वाला मामला सामने आया। यहां वक्फ बोर्ड ने सात परिवारों को 7 दिन के अंदर उनकी जमीन खाली करने का नोटिस दिया है। वक्फ बोर्ड ने नोटिस देते हुए दावा किया है कि ये उसकी सपंत्ति है,और कहा 7 दिन के अंदर जमीन करें खाली नहीं तो करेंगे कानूनी कार्रवाई। वक्फ बोर्ड का नोटिस मिलने से किसान परेशान हो गए और न्याय के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे। कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा को आवेदन देकर हस्तक्षेप कर वक्फ बोर्ड पर कार्रवाई करने की मांग की है। आपको बता दें कि ग्राम माखनी के सात परिवार कई पीढ़ियों से इसी जमीन पर रहकर निवास कर रहे हैं। इतना ही नहीं सरकारी खसरे में ये जमीन सरकारी बताई जा रही है। ग्रामीणों को इसी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना की कुटीर भी मिली हुई है। इसके बाद भी अचानक वक्फ बोर्ड के नोटिस मिलने से ग्रामीण परेशान है। मंदिर और मुक्तिधाम को लेकर चिंतित नोटिस मिलने के बाद ग्रामीण रामकली का का कहना है कि हमारी जान चली जाए लेकिन इस जमीन को खाली नहीं करेंगे। वहीं, उन्होंने कहा कि प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर और शमशान घाट भी इसी जमीन पर बना है। एक किसान ने सवाल किया कि अगर यह बक्फ बोर्ड की जमीन थी तो फिर हमें प्रधानमंत्री आवास योजना की कुटीर कैसे मिली? इस मामले में ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि कुछ भी हो जाए ना हम अपने मंदिर को तोड़ने नहीं देंगे और ना ही ये जमीन को खाली करेंगे। ना ही मकान को तोड़ेंगे। हिंदू संगठनों ने दर्ज कराया विरोध लेकिन इस घटनाक्रम के बाद हिंदूवादी संगठन सक्रिय होकर ग्राम माखनी पहुंचे और स्पष्ट रूप से कहा कि इस जमीन पर प्राचीन मंदिर बना हुआ है। जिसे किसी भी सूरत में तोड़ने नहीं दिया जाएगा। जो परिवार यहां रह रहे हैं उनको नहीं हटाने दिया जाएगा। इतना कहते हुए हिंदू संगठनों ने आस्था पर हमला बोलते हुए विरोध शुरू कर दिया है। इस मामले में रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा कलेक्टर का कहना है कि मीडिया के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराएंगे कि आखिर बक्फ बोर्ड ने किस आधार पर नोटिस जारी किया है। दोनों पक्षों को सुनकर न्याय संगत कार्रवाई करेंगे। मामले में ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि कुछ भी हो जाए, हम अपने मंदिर को तोड़ने नहीं देंगे और न ही ये जमीन को खाली करेंगे और मकान को तोड़ेंगे। वहीं, इस मामले में रायसेन कलेक्टर का कहना है कि मीडिया के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराएंगे कि आखिर बक्फ बोर्ड ने किस आधार पर नोटिस जारी किया है और दोनों पक्षों को सुनकर न्याय संगत कार्रवाई करेंगे। लेकिन इस घटनाक्रम के बाद हिंदूवादी संगठन सक्रिय होकर ग्राम माखनी पहुंचे और स्पष्ट रूप से कहा कि इस जमीन पर प्राचीन मंदिर बना हुआ है, जिसे किसी भी सूरत में तोड़ने नहीं दिया जाएगा और जो परिवार यहां रह रहे हैं, उनको नहीं हटाने दिया जाएगा। जान चली जाए, जमीन नहीं छोड़ेंगे- ग्रामीण पीड़ित ग्रामीण रामकली बाई ने कहा, “हमारी जान चली जाए, लेकिन हम यह जमीन नहीं छोड़ेंगे।” रानू मालवीय ने सवाल किया, “अगर यह वक्फ की जमीन थी, तो हमें प्रधानमंत्री आवास कैसे मिला?” प्रभुलाल ने कहा, “हमारा मंदिर और श्मशान यहां है, हम इसे तोड़ने नहीं देंगे।” कलेक्टर का बयान कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने मीडिया से कहा, “मामला मेरे संज्ञान में आया है। वक्फ बोर्ड ने किस आधार पर नोटिस जारी किया, इसकी जांच की जाएगी। हम दोनों पक्षों को सुनकर न्यायसंगत कार्रवाई करेंगे।” जिला प्रशासन ने अभी तक इसकी भनक न लगने की बात स्वीकारी है, जिससे सवाल उठ रहे हैं।  

देश में 994 संपत्तियों पर वक्फ का अवैध कब्ज़ा, केंद्र ने संसद में दी राज्यों सहित पूरी डिटेल

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में वक्फ संपत्तियों पर 994 अवैध कब्जों की जानकारी मिली है। इनमें सबसे ज्यादा 734 संपत्तियां तमिलनाडु में हैं। यह जानकारी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने दी। वक्फ अधिनियम के तहत देश में 872,352 स्थायी और 16,713 अस्थायी वक्फ संपत्तियां पंजीकृत हैं। तमिलनाडु में सबसे ज्यादा अवैध कब्जे संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 994 अवैध कब्जों में तमिलनाडु में 734, आंध्र प्रदेश में 152, पंजाब में 63, उत्तराखंड में 11 और जम्मू-कश्मीर में 10 संपत्तियां शामिल हैं। 2019 के बाद वक्फ बोर्ड को जमीन नहीं मिली केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने बताया कि 2019 के बाद केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्ड को कोई जमीन नहीं दी है। राज्य सरकारों द्वारा दी गई जमीन का डेटा भी उपलब्ध नहीं है। विवादित वक्फ संपत्तियों पर जानकारी मांगी पिछले हफ्ते, जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने राज्य सरकारों को पत्र लिखकर विवादित वक्फ संपत्तियों का ब्योरा देने को कहा है।  

Bhopal में मिंटो हॉल के बाहर लगे ‘वक्फ बोर्ड हटाओ भारत बचाओ’ के पोस्टर

भोपाल  देशभर में इन दिनों वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सियासी हंगामा जारी है। सदन से लेकर सड़क पर इसे लेकर राजनीति हो रही है। इस बीच राजधानी भोपाल में मिंटो हॉल के बाहर वक्फ बोर्ड को हटाने के पोस्टर लगने से हड़कंप मच गया। पोस्टर में ‘वक्फ बोर्ड हटाओ-भारत बचाओ’ का नारा लिखा गया है। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस हरकत में आई और इसे फौरन हटाया गया। मामला अरेरा हिल्स थाना क्षेत्र का है। ‘वक्फ बोर्ड हटाओ, भारत बचाओ’ के लगे पोस्टर दरअसल, किसी ने मिंटों हॉल के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘वक्फ बोर्ड हटाओ-भारत बचाओ’ लिखा हुआ एक पोस्टर लगा दिया। जिसके बाद पूरे शहर में यह चर्चा की विषय बन गया। लोगों ने फौरन इसकी सूचना पुलिस को दी। जिसकी जानकारी मिलते ही एक टीम पहुंची और इसे हटाया गया। हालांकि, इस पोस्टर में किसी संगठन का नाम नहीं लिखा हुआ है, जिससे इसकी पुष्टि हो सके कि किसने इसे लगाया है।   CCTV की जांच कर रही पुलिस थाना प्रभारी मनोज पटवा ने इस मामले में बताया कि पोस्टर लगाने वाले की जानकारी नहीं मिली है। आस-पास लगे CCTV कैमरों की जांच की जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। भोपाल-इंदौर में लगे थे ‘भगवा ए हिंद’ और ‘हिंदुओं से सामान खरीदें’ जैसे पोस्टर बता दें कि इन दिनों मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में सनातन को लेकर पोस्टर लगाए जा रहे हैं। इससे पहले बजरंग दल और हिंदू संगठन ने दिवाली के समय राजधानी में हिंदुओं से सामान खरीदने की अपील करते हुए एक पोस्टर लगाया गया था। वहीं, इंदौर में ‘गजवा ए हिंद नहीं, चलेगा भगवा ए हिंद’ जैसे पोस्टर लग चुके हैं। लेकिन अब वक्फ बोर्ड को लेकर भी पोस्टर लगने शुरू हो गए हैं। जिसके बाद अब पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

आगामी संसद सत्र में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए नया बिल पेश किया जाएगा, विवादों का बढ़ता सिलसिला

नई दिल्ली वर्तमान समय में वक्फ संपत्तियां देशभर में विवादों का कारण बनी हुई हैं। इनमें से कुछ विवाद बेहद जटिल हो गए हैं, जहां वक्फ बोर्ड ने कई संपत्तियों पर दावा किया है, जिन पर पहले से ही दूसरे संस्थाओं का कब्जा था। इन संपत्तियों को लेकर कानूनी लड़ाइयाँ जारी हैं, और इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने वक्फ प्रबंधन कानून में संशोधन करने का निर्णय लिया है। आगामी संसद सत्र में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए नया बिल पेश किया जाएगा, जो मौजूदा कानून की खामियों को दूर करने का दावा करता है। वक्फ की संपत्तियां और विवाद वक्फ बोर्ड द्वारा संचालित संपत्तियां इस्लाम के नाम पर दान की जाती हैं और इनका कोई वारिस नहीं होता। यह संपत्तियां समाज के लाभ के लिए होती हैं, लेकिन इन्हीं संपत्तियों को लेकर देशभर में कई विवाद सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के 1998 के फैसले के अनुसार, एक बार जो संपत्ति वक्फ के रूप में घोषित हो जाती है, वह हमेशा के लिए वक्फ बनी रहती है। हालांकि, वक्फ की संपत्तियां अक्सर विवादों का शिकार हो जाती हैं, क्योंकि इन पर कोई स्पष्ट मालिकाना हक नहीं होता। हाल ही में एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि दिल्ली में 200 से अधिक संपत्तियों को वक्फ की संपत्ति घोषित किया गया है, जबकि ये संपत्तियां पहले से ही विभिन्न सरकारी संस्थाओं के नियंत्रण में थीं। इनमें से 108 संपत्तियां दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के पास और 138 संपत्तियां दिल्ली के लैंड एंड डेवेलपमेंट ऑफिस (L&DO) के पास थीं।  इसके अलावा, केरल, कर्नाटक, और गुजरात जैसे राज्यों में भी वक्फ की संपत्तियों को लेकर विवाद गहराते जा रहे हैं। इन विवादों के कारण लोग कानूनी लड़ाइयाँ लड़ रहे हैं और वक्फ बोर्ड के खिलाफ मुकदमे दायर कर रहे हैं। वक्फ संपत्तियों पर बड़े विवाद वक्फ संपत्तियों से संबंधित 5 प्रमुख विवादों ने हाल ही में काफी ध्यान आकर्षित किया है: 1. तिरुचेंतुरई गांव, तमिलनाडु    तमिलनाडु के तिरुचेंतुरई गांव की पूरी भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया है। यह दावा 1956 में नवाब अनवरदीन खान द्वारा दान की गई जमीन पर किया गया था। वक्फ बोर्ड ने इस जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के लिए इसे “जीरो वैल्यू” के रूप में रजिस्टर करने की मांग की थी, जिससे जमीन का कोई भी अवैध लेन-देन रोका जा सके। 2. ईदगाह ग्राउंड, बेंगलुरु      बेंगलुरु के ईदगाह ग्राउंड पर वक्फ बोर्ड का दावा है कि यह भूमि 1850 से वक्फ की संपत्ति है, जबकि सरकार का कहना है कि यह भूमि कभी भी वक्फ को नहीं दी गई थी। इस मामले में दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया है। 3. सूरत नगर निगम की बिल्डिंग, गुजरात    गुजरात वक्फ बोर्ड ने सूरत नगर निगम की बिल्डिंग पर दावा किया है। बोर्ड का कहना है कि मुग़ल काल में यह एक सराय हुआ करता था, जिसका उपयोग हज यात्रा के दौरान होता था। ब्रिटिश शासन के दौरान यह संपत्ति अंग्रेजों के पास चली गई थी, लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसे भारत सरकार के अधीन कर दिया गया। 4. बेट द्वारका के द्वीप, गुजरात      गुजरात वक्फ बोर्ड ने द्वारका के बेट द्वारका के दो द्वीपों पर दावा किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वक्फ बोर्ड कृष्ण नगरी द्वारका की जमीन पर दावा नहीं कर सकता। 5. शिव सोसायटी, सूरत    सूरत की एक हाउसिंग सोसाइटी में एक व्यक्ति ने अपनी संपत्ति को वक्फ बोर्ड को दे दिया, जिसके बाद यहां नमाज पढ़ी जाने लगी। इस प्रकार की घटनाओं से सोसायटी में तनाव बढ़ गया है, क्योंकि कोई व्यक्ति अपनी मंजूरी के बिना किसी स्थान को वक्फ बोर्ड को दान कर सकता है और उस पर मस्जिद बनाई जा सकती है। वक्फ संपत्तियां और विवादित क्षेत्र भारत में वक्फ संपत्तियों की कुल संख्या 8.72 लाख से अधिक है, जिनमें मस्जिदें, कब्रिस्तान, कृषि भूमि, और अन्य धार्मिक स्थल शामिल हैं। इनमें से लगभग 73,000 संपत्तियां ऐसी हैं, जिन पर विवाद है। जिन संपत्तियों पर मुकदमे चल रहे हैं या जो अतिक्रमण की स्थिति में हैं, उन्हें विवादित संपत्ति माना जाता है। वक्फ संपत्तियों के विवाद सबसे ज्यादा पंजाब, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में हैं। पंजाब में वक्फ की लगभग 56% संपत्तियां विवादित हैं। सरकार का वक्फ कानून में बदलाव का प्रस्ताव वर्तमान वक्फ कानून, जिसे 1954 में पेश किया गया था, में कई बार संशोधन हुए हैं। अब सरकार ने एक नया बिल लाने का प्रस्ताव किया है, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार करेगा। प्रस्तावित बिल के अनुसार, अब वक्फ संपत्तियों का सर्वे जिला कलेक्टर या डिप्टी कमिश्नर करेंगे। इसके अलावा, वक्फ बोर्ड के सभी सदस्य सरकारी द्वारा नामित किए जाएंगे, जिसमें दो सदस्य गैर-मुस्लिम होंगे। वक्फ ट्रिब्यूनल में भी बदलाव होगा, और अब यह तीन के बजाय दो सदस्यीय होगा, और फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, यदि वक्फ बोर्ड ने किसी संपत्ति पर कब्जा किया है तो वह संपत्ति उसके वास्तविक मालिक को वापस की जाएगी। इस बदलाव का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। वक्फ संपत्ति: एक कानूनी और धार्मिक दृष्टिकोण वक्फ वह संपत्ति होती है, जो किसी व्यक्ति द्वारा इस्लामिक धर्म के प्रचार और जरूरतमंदों की मदद के लिए अल्लाह के नाम पर दान की जाती है। इसे न तो खरीदा जा सकता है और न ही बेचा जा सकता है। 

वक्फ बोर्ड ने जुम्मे की नमाज को लेकर नया फरमान जारी, तकरीर से पहले बोर्ड से लेनी होगी इजाजत

रायपुर  छत्तीसगढ़ की मस्जिदों में जुमे यानी शुक्रवार की नमाज के बाद होने वाली तकरीर के लिए वक्फ बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी। तकरीर किस विषय पर है, इसकी जानकारी लिखित में देनी होगी। यह आदेश छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष व भाजपा नेता डॉ. सलीम राज ने प्रदेशभर की मस्जिदों के मुतवल्ली को पत्र लिखकर भेजा है। उन्होंने कहा कि मंजूरी के बाद ही तकरीर की जा सकेगी। आदेश 22 नवंबर से लागू हो जाएगा। आदेश नहीं मानने पर दर्ज होगा केस डॉ. सलीम ने बताया कि प्रदेशभर की मस्जिदों के मुतवल्लियों को जानकारी देने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप में मुतवल्ली तकरीर के विषय की जानकारी देंगे। बोर्ड से नियुक्त अधिकारी विषय को परखेंगे और अनुमति देंगे। आदेश नहीं मानने पर मुतवल्लियों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि हमने जो पत्र लिखा है, वह मुतवल्लियों के लिए है, मौलानाओं के लिए कोई निर्देश नहीं दिया है। वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ने किया विरोध इमामों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कहा गया है, जो अल्पसंख्यकों के लिए है। मुतवल्लियों को धार्मिक उपदेशों तक ही सीमित रहना चाहिए, राजनीति नहीं करनी चाहिए। मुतवल्लियों का व्हाट्सग्रुप वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेशभर की मस्जिदों के मुतवल्लियों को जानकारी देने के लिए व्हाट्सअप ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप में मुतवल्ली तकरीर के विषय की जानकारी देंगे। वक्फ बोर्ड से नियुक्त अधिकारी विषय को परखकर फिर अनुमति देंगे। उसी विषय पर ही तकरीर कर सकेंगे। आदेश नहीं मानने पर मुतवल्लियों पर एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ लाया था अविश्वास प्रस्ताव गौरतलब है कि पिछले महीने ही बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व जस्टिस मिन्हाजुद्दीन के खिलाफ अविश्वास पत्र लाकर उन्हें हटाया गया था। इसके बाद भाजपा के नेता डा.सलीमराज को नया अध्यक्ष चुना गया था। ओवैसी ने एक्स पर लिखा आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि अब भाजपाई हमें बताएंगे कि दीन क्या है? क्या हमें अपने दीन पर चलने के लिए अब इनसे इजाजत लेनी होगी? वक्फ बोर्ड के पास ऐसी कोई क़ानूनी ताकत नहीं है। यदि ऐसा होता भी तो यह संविधान के अनुच्छेद 25 के खिलाफ होता। देशभर में लागू करने की मांग छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ सलीम राज ने जी मीडिया से बातचीत में कहा- फैसले के बाद हमें धमकी मिल रही है, मैं शहीद होने के लिए तैयार हूं. इस मामले में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर देशभर में इसे लागू करने की मांग करूंगा. वहीं, डॉ सलीम राज ने सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर पलटवार करते हुए कहा- ओवैशी को इस्लाम की समझ नहीं है. व्हाट्सऐप ग्रुप से होगी मॉनिटरिंग छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के सदस्यों के मुताबिक, इसकी मॉनिटरिंग व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए की जाएगी. इस ग्रुप के में छत्तीसगढ़ की की मस्जिदों के मुतवल्लियों को जोड़ा जाएगा. जुम्मे की नमाज के बाद होने वाले तकरीर में किन मुद्दों पर चर्चा होगी, इसकी जानकारी मुतवल्ली ग्रुप में देंगे. इस जानकारी को को वक्फ बोर्ड के सदस्य पढ़ेगे और जो मुद्दे उन्हें विवादित लगेंगे, उनमें संसोधन करके दोबारा संबंधित मस्जिद के मुतवल्ली को वो भेजा जाएगा. जिसके बाद संसोधित मुद्दे पर ही तकरीर होगी. जो मुतवल्ली नियम का पालन नहीं करेंगे,  उन पर तुरंत एक्शन भी लिया जाएगा.

हाईकोर्ट में दी चुनौती, छत्तीसगढ़-वक्फ बोर्ड में अविश्वास प्रस्ताव पर विवाद

रायपुर। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ग़ुलाम मिन्हाजुद्दीन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस सरकार के समय नियुक्त किए गए वक़्फ़ बोर्ड के सदस्य इमरान मेमन, पूर्व विधायक खुज्जी, फ़िरोज़ ख़ान, फैसल रिज़वी और भाजपा सरकार में नियुक्त सदस्य सलीम राज ने वर्तमान राज्य शासन के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। अविश्वास प्रस्ताव के लिए दशरथ लाल साहू पिछड़ा वर्ग और अल्प संख्यक विकास विभाग पीठासीन अधिकारी नियुक्त किए गए थे। पीठासीन अधिकारी दशरथ लाल साहू ने इस प्रस्ताव के संबंध में वक़्फ़ बोर्ड के सभी सदस्यों को 26/09 /2024 की तारीख़ वाली नोटिस जारी की थी। जो वक़्फ़ बोर्ड के सदस्य रियाज़ हुसैन को 30/09/2024 की शाम छह बजे के बाद तामील की गई। इस अविश्वास प्रस्ताव की कारवाई के लिए दिनांक 14/10/2024 को दिन के साढ़े दस बजे वक़्फ़ बोर्ड कार्यालय में हाजिर होने की जानकारी दी गई थी। वक़्फ़ बोर्ड के सदस्य रियाज़ हुसैन ने इस नोटिस को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उनके द्वारा धारा 20क के तहत लाए गए अविशवास प्रस्ताव के संबंध में 20 क (घ)के परंतुक के तहत यह प्रावधान है :- ऐसी बैठक की सूचना कम से कम (एटलीस्ट) 15 दिन पहले दी जाएगी। अविश्वास प्रस्ताव की बैठक नोटिस तामिली दिनांक के 15 दिन के भीतर की जा रही जो धारा 20 क (घ) के (मेंडेटरी)अनिवार्य आदेशात्मक प्रावधान का उल्लंघन है बताया है। अविश्वास प्रस्ताव नियम विरुद्ध लाया जा रहा है इस संबंध में रियाज़ के द्वारा रिट पिटीशन फाइल किए जाने की जानकारी दी गई है, जिसकी सुनवाई के दौरान पीठासीन अधिकारी दशरथ लाल साहू जो अवर सचिव पिछड़ा एवं अल्प संख्यक विकास विभाग को हटाकर मार्टिन लकड़ा अवर सचिव पशुधन विकास विभाग को दिनांक 08/10/2024 को नियुक्त किए जाने की जानकारी दी गई। इस आदेश की कोई प्रति की तमीली रियाज हुसैन ने नहीं होना बताया, जबकि अविश्वास प्रस्ताव के लिए पीठासीन अधिकारी उसी विभाग का नहीं होना चाहिए। वक़्फ़ एक्ट में स्पष्ट लिखा है कि इस नोटिस के तामील होने के बाद भी कम से कम 15 दिन बाद अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होने के लिए बैठक बुलाई जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। रियाज ने अपने अविश्वास प्रस्ताव के लिए नियुक्त नए पीठासीन अधिकारी मार्टिन लकड़ा को आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के कार्यालय में दिनांक 09/10/2024 को एक तीन पेज की कई बिंदुओं वाली आपत्ति प्रस्तुत की, जिसमें बोर्ड के तीन सदस्य इमरान मेमन, फ़िरोज़ ख़ान और फैज़ल रिज़वी के वक़्फ़ बोर्ड के सदस्य के रूप में अधिवक्ता अज़ीमुद्दीन के द्वारा चुनौती देने की जानकारी याचिका पर 14/10/2024 से प्रारंभ होने वाले सप्ताह में लिस्ट होना है। अधिवक्ता अज़ीमुद्दीन की रिट याचिका 1947/2023 सिविल में पारित अंतरिम आदेश दिनांक 27/04/2023 की प्रति भी लगाई है, जिसमें आदेशित किया गया है कि याचिका के लंबित रहने के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य वक़्फ़ बोर्ड द्वारा लिए गए सभी निर्णय उपरोक्त याचिका में पारित होने वाले अंतिम आदेश के अधीन रहेंगे। आपत्तिकर्ता रियाज हुसैन छत्तीसगढ़ वक़्फ़ बोर्ड द्वारा अपनी आपत्ति में उच्च न्यायालय का हवाला देकर अविश्वास प्रस्ताव की कारवाई को आगे बढ़ाना आदेश की अवमानना बताया है। उक्त आपत्तियों के बावजूद देखने वाली बात है कि पीठासीन अधिकारी मार्टिन लकड़ा अवर सचिव पशुधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन क्या निर्णय इन आपत्तियों का करते हैं। पहली बार वक़्फ़ बोर्ड में आया अविश्वास प्रस्ताव गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में ये पहली बार है जब वक़्फ़ बोर्ड में अविश्वास प्रस्ताव प्रस्ताव आया है। क्यों लाया गया है, कारण भी नहीं बताया गया, जबकि पूर्ववर्ती मामलों में कई भ्रष्टाचार के मामले होने के बाद भी कभी अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया गया। साफ़ सुथरी छवि वाले अध्यक्ष के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, जिसको लेकर मुस्लिम समाज में चर्चा का बाज़ार गर्म है।

कोच्चि के एक गांव की जमीन पर Waqf Board ने किया दावा, सैकड़ो परिवार बेघर होने की कगार पर

कोच्चि केरल की व्यावसायिक राजधानी कोच्चि की हलचल से दूर मुनंबम उपनगर में मछुआरों का एक खूबसूरत गांव है- चेराई. समुद्र तट के करीब स्थित चेराई अपने बीच रिसॉर्ट्स के साथ आज पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है. लेकिन इस गांव के लोग पलायन के डर में जी रहे हैं. गांव के लगभग 610 परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन और संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया है. कानूनी विवाद में फंसने के कारण गांव वाले 2022 से ही न तो अपनी जमीन पर लोन ले सकते हैं, और न ही इसे बेच सकते हैं. सिरो-मालाबार चर्च और केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल जैसे प्रमुख ईसाई संगठनों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को एक पत्र भेजकर वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन के लिए अपने सुझाव दिए हैं.  इस खूबसूरत गांव में पहुंची और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. समुद्र तट के सामने एक छोटे से घर में बूढ़ी मां गौरी और उनकी विकलांग बेटी सिंटा से मुलाकात हुई. सिंटा ने बताया कि कुछ साल पहले उन्हें स्ट्रोक हुआ था, जिससे उनका जीवन कठिन हो गया. उन्होंने कहा, ‘मैं अब भी यहां लॉटरी टिकट बेचकर जीवन यापन करती हूं. हम यह घर नहीं छोड़ सकते. यह हमारा है. 2022 तक सब कुछ सामान्य था, अचानक हमें बताया गया कि जिस जमीन पर हम वर्षों से रह रहे, अब वह हमारी नहीं रही.’ ग्रामीणों ने की वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन की मांग सिंटा की पड़ोसी सीना के पास भी बताने के लिए ऐसी ही कहानियां थीं. सीना ने कहा कि उनका घर ही उनकी जिंदगी की एकमात्र कमाई है. उन्होंने कहा, ‘मेरे पति एक मछुआरे हैं. सालों की मेहनत के बाद उन्होंने यह घर बनाया है. हमने इस मकान के अलावा कुछ और नहीं बनाया है, जिसे अपना कह सकें. यदि यह घर हमारे हाथ से चला गया तो कुछ नहीं बचेगा. सरकार को वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन करना चाहिए और हमारी समस्याओं का समाधान ढूंढना चाहिए.’ इस गांव के हर घर की यही कहानी है. थोड़ी दूर पर, प्रदीप और उनकी पत्नी श्रीदेवी मिले. उनके हाथों में अपनी जमीन और घर से जुड़े दस्तावेज थे. उन्होंने आजतक की टीम को अपने दस्तावेज दिखाए और कहा कि यह साबित करने के लिए काफी है कि जमीन हमारी है. प्रदीप ने कहा, ‘मैंने यह जमीन 1991 में फारूक कॉलेज से उनके द्वारा मांगी गई राशि चुकाकर खरीदी थी. मेरे पास सभी सबूत हैं. मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती, इसलिए मैंने अब काम करना बंद कर दिया है. मेरा बेटा परिवार की देखभाल करता है. मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि भविष्य में उसे इस घर में रहने में कोई दिक्कत न हो. मैं हमारे अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाऊँगा. मैंने मेहनत से यह घर बनाया है.’ प्रदीप इसके आगे अपनी बात पूरी नहीं कर पाए और रोने लगे. गांव वाले न जमीन बेच सकते हैं न ही गिरवी रख सकते हैं इलाके के लोगों को उम्मीद है कि चर्चों द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को लिखे गए पत्र से उन्हें इस संकट से उबरने में मदद मिलेगी. ग्रामीणों ने कहा कि वे एक सदी से भी अधिक समय से चेराई गांव में रह रहे हैं. उनके अनुसार, यह जमीन 1902 में सिद्दीकी सैत ने खरीदी थी और बाद में 1950 में फारूक कॉलेज को दान कर दी थी. मछुआरों और कॉलेज के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद 1975 में सुलझ गया, जब उच्च न्यायालय ने कॉलेज के पक्ष में फैसला सुनाया. 1989 से स्थानीय लोगों ने कॉलेज से जमीन खरीदनी शुरू कर दी. हालांकि, 2022 में विलेज ऑफिस ने अचानक दावा किया कि गांव वक्फ बोर्ड की जमीन पर बसा है. इसके बाद ग्रामीणों को उनके राजस्व अधिकारों से वंचित कर दिया गया और उन्हें अपनी संपत्ति बेचने या गिरवी रखने से रोक दिया गया.  

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