Tribal ‘Ho’ community of Jharkhand can get great news, Home Minister assured
रमेश अग्रवाल
रांची ! झारखंड और अन्य राज्यों में बसे आदिवासी ‘हो’ समाज के लिए केंद्र सरकार से एक बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। ‘हो’ समाज के लोग लंबे समय से अपनी भाषा, वारंग क्षिति लिपि, को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग कर रहे हैं। इस संदर्भ में, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री हिमंता ने इस मुलाकात की जानकारी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी साझा की। उन्होंने कहा कि “हो भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा और अखिल भारतीय हो भाषा एक्शन कमेटी के प्रतिनिधिमंडल के साथ गृहमंत्री से मुलाकात की। गृहमंत्री ने उनकी मांगों को गंभीरता से सुना और इस पर विचार करने का आश्वासन दिया।”
झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में रहने वाले आदिवासी "हो" समाज के परिवारजनों की कई वर्षों से माँग थी कि "हो" भाषा (वारंग क्षिति लिपि) को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। इस संदर्भ में, कल मैंने आदिवासी "हो" समाज युवा महासभा और अखिल भारतीय हो भाषा एक्शन… pic.twitter.com/zJPrgHfx2F
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) September 17, 2024
गृहमंत्री अमित शाह ने यह भी कहा कि मोदी सरकार देश के हर समाज की संस्कृति और भाषा को संरक्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस बैठक के बाद ‘हो’ समाज के लोगों में उम्मीद जगी है कि जल्द ही उनकी भाषा को आधिकारिक मान्यता मिल सकती है।
गौरतलब है कि झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम में ‘हो’ समाज के लोग बड़ी संख्या में निवास करते हैं, और लंबे समय से अपनी भाषा के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। हिमंता बिस्वा सरमा, जो झारखंड चुनाव के सह प्रभारी हैं, इन दिनों झारखंड में भी सक्रिय हैं। उन्होंने हाल ही में चंपाई सोरेन को भाजपा में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई थी।
इस खबर के बाद ‘हो’ समाज में उम्मीद की लहर दौड़ गई है, और सभी की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं






