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मरीज रातभर में 6 से 7 अस्पताल भटके, नहीं मिले बेड, एक या दो दिन में ही मौत

इंदौर। इंदौर में 80 साल की महिला को 28 अगस्त की रात सांस में तकलीफ होने पर मेदांता अस्पताल ले गए। वहां एक्सरे करने पर पता चला कि निमोनिया है। बेड नहीं होने से अरविंदो अस्पताल भेजा। वहां भी दो घंटे तक बेड नहीं मिला। फिर इंडेक्स ले गए। वहां भी बेड नहीं मिला। वहां से ग्रेटर कैलाश अस्पताल ले गए। बावजूद महिला ने दम तोड़ दिया। यह काेई एक वाक्या नहीं है, ऐसे ढेरों दुखद मामले आपको कोरोनाकाल में सुनाई दे जाएंगे, जहां बेड नहीं मिल पाया और मिला भी तो भर्ती होने के एक दिन बाद ही मरीज ने दम तोड़ दिया। कोरोना संक्रमण से होने वाली मौत के कारणों का पता लगाने के लिए प्रशासन डेथ-ऑडिट करवा रहा है। जिसके लिए 8 सदस्यीय समिति बनाई गई है। इस समिति ने भी इस बार माना है कि मरने वाले कुछ मरीज ऐसे थे जो रातभर कई अस्पताल भटके हैं। उन्हें बेड नहीं होने का बताकर रैफर कर दिया गया। कुछ तो 5 से 7 अस्पताल भटके थे, जिसके कारण कुछ की एक या दो दिन में ही मौत हो गई। इनमें से 90 फीसदी डायबिटीज, अस्थमा और हाइपरटेंशन सरीखी पुरानी बीमारियों से भी पीड़ित थे। इस रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ डेंगू के एक मरीज को कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। बावजूद अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई। अस्पतालों में भटके, लेकिन किसी ने भर्ती नहीं किया। दो दिन बाद वह पॉजीटिव आ गई, लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई। धार, झाबुआ, बड़वानी से आए मरीजों को भी यहां लाने में देर की गई। समिति ने सैंपलिंग और क्वारैंटाइन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कहा गया है। इसमें तीनों मेडिकल कॉलेजों को यह निर्देश दिए गए हैं कि यह जानकारी ली जाए कि मरीजों को क्यों निजी अस्पतालों से रैफर किया जा रहा है। इसके अलावा यह टिप्पणी भी की गई है कि मरीज निजी अस्पताल जाना इसलिए पसंद कर रहे हैं, क्योंकि वहां सफाई और सुविधाएं सरकारी अस्पतालों से बेहतर है। केस 1: 64 वर्षीय महिला को चार दिन से बुखार आ रहा था। डेंगू की जांच कराई तो डेंगू की पुष्टि हुई। फेरिटिन लेवल भी 1600 हो गया। प्लेटलेट्स भी कम हो गए थे। दवा चल रही थी। मरीज काे सर्दी-जुकाम भी नहीं था और सांस लेने में भी कोई दिक्कत नहीं थी। यानी कोरोना बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे। 29 अगस्त को अचानक सीने में दर्द हुआ तो उन्हें चोइथराम अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने कहा कि कोरोना नहीं है। अभी भर्ती नहीं कर सकते। वहां भर्ती करने से मना किया। यही स्थिति एप्पल हॉस्पिटल में भी हुई। इसके बाद परिजनों ने इंडेक्स अस्पताल में बात की। वहां पर भी मना कर दिया गया। परिजन फिर मयूर अस्पताल ले गए और महिला को भर्ती करवाया गया। 30 अगस्त को कोरोना वायरस जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई, लेकिन उसी दिन उनकी मौत हो गई। मरीज को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा की समस्या थी। बीमार होने के बाद अस्पताल में यह सिर्फ एक ही दिन भर्ती रहे। केस 2: इसी तरह 58 साल के मरीज को जब सांस लेने में तकलीफ हुई तो उन्हें विशेष हॉस्पिटल ले जाया गया। यह अस्पताल नेमावर रोड पर शिफ्ट हो गया था तो परिजन सुयश अस्पताल ले गए। वह भर्ती करने से मना कर दिया गया। इसके बाद से सैम्स अस्पताल ले गए। जहां बैठ की समस्या के कारण भर्ती नहीं किया गया। परिजन गोकुलदास अस्पताल ले गए तो वहां बताया गया कि बेड खाली हैं, लेकिन ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। इसके बाद परिजन राजश्री अपोलो अस्पताल ले गए। वहां भी बेड खाली नहीं था। मेदांता अस्पताल में फोन करने पर पता चला बेड खाली नहीं है। 29 अगस्त को मरीज को सिनर्जी अस्पताल में भर्ती किया गया। जहां पर ऑक्सीजन सेचुरेशन 30 फीसदी बताया गया। 29 अगस्त की सुबह ही उनका ऑक्सीजन लेवल 80 से 87 फीसदी हो गया था, लेकिन उसी दिन उसकी मौत हो गई। मरीज का अस्पताल स्टे केवल एक ही दिन पाया गया।

MP : इंदौर बुजुर्ग के शव को चूहों ने कुतरा, एक लाख जमा करने के बाद ही दिया शव

इंदौर में कोरोना के मरीजों का इलाज करने वाले एक और अस्पताल ने सोमवार को मानवता को शर्मसार कर दिया। अन्नपूर्णा इलाके में स्थित यूनीक अस्पताल में तीन दिन पहले भर्ती हुए 87 साल के बुजुर्ग की रविवार देर रात मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि अस्पताल ने शव को रखने में लापरवाही दिखाई। पूरी बॉडी को चूहों ने कुतर दिया। परिजन को शव तभी सौंपा गया, जब उन्होंने एक लाख का बिल चुका दिया। मामला सामने आने के बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच एडीएम अजय देव शर्मा करेंगे। इतवारिया बाजार के रहने वाले नवीन चंद जैन (87 साल) को सांस लेने में तकलीफ होने पर 17 सितंबर को यूनीक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। परिजन के अनुसार, बुजुर्ग का कोविड वार्ड में इलाज चल रहा था। रविवार रात करीब 3 बजे उनकी मौत की सूचना दी गई। कहा गया कि निगम की गाड़ी उन्हें अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाएगी। जब हम दोपहर 12 बजे अस्पताल पहुंचे तो हमने देखा कि शव को जगह-जगह चूहों ने कुतर रखा है। हमने प्रबंधन से बात की तो उनका कहना था कि हमसे गलती हो गई। एक लाख रुपए का बिल थमाया, शव पर गंभीर घाव थे परिजन प्राची जैन का कहना है, ‘जब अस्पताल पहुंचे तो एक लाख से ज्यादा का बिल थमा दिया गया। बिल जमा करने के बाद शव दिया गया। शव देखकर तो हमारे होश उड़ गए। चेहरे और पैर में गंभीर घाव थे। अस्पताल प्रबंधन ने शव को कहीं ऐसी जगह पटक दिया था, जहां चूहों ने कुतर दिया। आंख पर गंभीर घाव हो गया था।’ आक्रोशित परिजन ने शव अस्पताल के बाहर रखकर हंगामा किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाइश दी। हालांकि, काफी देर होने के बाद भी अस्पताल की तरफ से कोई जिम्मेदार नहीं आया, जो परिजन को पूरी जानकारी दे सके। हमें मिलने नहीं दिया गया, शाम को अच्छे से बात की थी परिजन के अनुसार, अस्पताल वालों ने भर्ती करने के बाद हमें मिलने नहीं दिया। रविवार शाम 4 बजे फोन पर बात हुई तो वे अच्छे से बात कर रहे थे। रात साढ़े 8 बजे अस्पताल वालों ने हमें बुलाया और हालत गंभीर बताते हुए हमसे कागज पर साइन करवा लिए। देर रात साढ़े 3 बजे हमें बताया कि उनकी मौत हो गई। यदि वे कह देते तो हम रात में ही शव लेकर चले जाते। अस्पताल वालों ने इस तरह से बॉडी क्यों छोड़ा? हमारे साथ अन्याय हुआ है। इंदौर में दो मामले पहले भी सामने आए थे 9 सितंबर को एमवायएच में एक कोरोना मरीज की मौत हो गई थी, लेकिन परिजन को उनकी मौत का पता 10 दिन बाद चला। परिजन को लगता रहा कि मरीज का इलाज चल रहा है। (पूरी खबर यहां पढ़ें)

शिवराज जी, ये इंदौर में क्या हो रहा है? ना जीवित इंसान सुरक्षित है और ना शव?

पिछले एक हफ्ते में इंदौर में मरीजों के साथ-साथ शवों से भी जो बदसलूकी की घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे शहर की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। एमवाय की मर्चुरी में शव का कंकाल बन जाना, पांच दिन तक दो महीने के बच्चे का शव बॉक्स में पड़ा रहना, कोरोना मरीज की मौत के बाद परिजन को बिना बताए शव रूम में रखवा देने के बाद सोमवार को यूनिक अस्पताल में एक कोविड मरीज के शव को चूहों द्वारा कुतरा जाना और एमटीएच अस्पताल में एक मरीज की फिर से मौत हो जाना जैसे मामले ने शहर की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवालिया निशान खड़ा कर दिए हैं। इस पूरे मामले में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी ट्वीट कर चिंता जाहिर की है। उन्होंने लिखा – मुख्यमंत्री शिवराज जी, ये आपके सपनों के शहर इंदौर में क्या हो रहा है? ना जीवित इंसान सुरक्षित है और ना शव? पूर्व सीएम का ट्वीट मुख्यमंत्री शिवराज जी, ये आपके सपनों के शहर इंदौर में क्या हो रहा है? ना जीवित इंसान सुरक्षित है और ना शव? शव कंकाल बन रहे हैं, नवजात का शव मुर्दाघर में रख भुला दिया जाता है और अब शव को चूहे द्वारा कुतरे जाने की घटना सामने आयी है। मानवता को शर्मशार करने वाली इन घटनाओं से परिवार की भावनाएं आहत हो रही हैं, इंसानियत – मानवता तार-तार हो रही है? स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की सामने आ रही इन तस्वीरों पर सरकार कड़ा निर्णय ले, दोषियों पर सख़्त कार्यवाही करे। यह है मामला इतवारिया बाजार के रहने वाले नवीन चंद जैन (87 साल) को सांस लेने में तकलीफ होने पर 17 सितंबर को यूनीक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। परिजन के अनुसार, बुजुर्ग का कोविड वार्ड में इलाज चल रहा था। रविवार रात करीब 3 बजे उनकी मौत की सूचना दी गई। कहा गया कि निगम की गाड़ी उन्हें अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाएगी। जब हम दोपहर 12 बजे अस्पताल पहुंचे तो हमने देखा कि शव को जगह-जगह चूहों ने कुतर रखा है। हमने प्रबंधन से बात की तो उनका कहना था कि हमसे गलती हो गई।

MP : सिंधिया को घेरने के लिए पायलट को चुनाव मैदान में उतारेगी कांग्रेस

भोपाल। मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा के उप-चुनाव में कांग्रेस ने अपने से अलग हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को घेरने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए उनके पुराने दोस्त और राहुल गांधी के करीबियों को चुनाव प्रचार के मैदान में उतारा जा सकता है। राज्य में होने वाले विधानसभा के उप-चुनाव सियासी तौर पर कांग्रेस के पूर्व नेता और वर्तमान में भाजपा के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए सबसे अहम माने जा रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा तो कमलनाथ की सरकार गिर गई और भाजपा को फिर से सत्ता संभालने का मौका मिला। राज्य में जिन 28 विधानसभा सीटों पर उप-चुनाव होने वाले हैं उनमें से 16 सीटें ग्वालियर-चंबल इलाके से आती हैं और इन क्षेत्रों की हार-जीत सिंधिया के राजनीतिक भविष्य से जुड़ी हुई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ग्वालियर-चंबल इलाके को सिंधिया का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इस इलाके में भारी बढ़त मिली थी। सिंधिया के करीब रहे नेताओं को मैदान में उतार सकती है कांग्रेस कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने सिंधिया को घेरने के लिए युवाओं की टीम चुनाव प्रचार में उतारने का मन बनाया है। इस टीम में राहुल गांधी के करीबियों में शामिल सचिन पायलट, आरपीएन सिंह, जितेंद्र सिंह सहित कई युवा नेताओं को प्रचार में आगे किया जा सकता है। कांग्रेस युवा नेताओं की जरिए सिंधिया को घेरना चाहती है और उसके लिए कभी सिंधिया के करीबी रहे साथी सबसे ज्यादा उपयोग के लायक लग रहे हैं। सिंधिया के दोस्त पायलट करेंगे कांग्रेस का प्रचार सूत्रों के मुताबिक, बीते रोज प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ के दिल्ली दौरे के दौरान भी चुनाव प्रचार की रणनीति पर चर्चा हुई है। राज्य में कई विधानसभा क्षेत्रों में गुर्जर मतदाता है और वे चुनावी नतीजों को भी प्रभावित करते है। लिहाजा कमलनाथ चाहते हैं कि पायलट को उप-चुनाव के प्रचार में उनका उपयोग किया जाए। कमलनाथ पायलट को प्रचार के लिए राज्य में लाकर दूसरे नेताओं के प्रभाव को भी पार्टी के भीतर कम करना चाह रहे हैं। सिंधिया के प्रभाव को पायलट कम कर सकते हैं राजनीतिक विश्लेषक अरविंद मिश्रा का मानना है कि कांग्रेस में सचिन पायलट की पहचान उर्जावान और अपनी बात को बेवाक तरीके से कहने वाले नेता की तो है ही, साथ ही आमजन के बीच भी पायलट को पसंद किया जाता है। सिंधिया के जाने से कांग्रेस को नुकसान हुआ है, उप-चुनाव में सिंधिया के प्रभाव को रोकने में कांग्रेस का नए और चमकदार चेहरे का उपयोग कारगर हो सकता है। कांग्रेस अगर ऐसा करने में सफ ल होती है तो चुनाव और भी रोचक हो जाएंगे। कांग्रेस चार सचिवों की नियुक्ति पहले ही कर चुकी है कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सियासत के नए समीकरण बन रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ चाहते हैं कि राज्य के उन नेताओं को ही सक्रिय किया जाए जो उनके करीबी हैं, वही दूसरे राज्यों के उन नेताओं को राज्य में प्रचार के लिए भेजा जाए जिनकी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से नजदीकियां हैं। राज्य में आगामी विधानसभा के उपचुनाव में नई कांग्रेस देखने को मिल सकती है। वैसे भी उपचुनाव के लिए पार्टी हाईकमान ने चार सचिवों की पहले ही तैनाती की है और वे कमलनाथ के साथ पार्टी हाईकमान के बीच रहकर चुनावी रणनीति को जमीनी स्तर पर उतारने में लगे हैं।

ब्याह रचाओ, पैसा पाओ : जापान में युवा शादी से कतरा रहे, जोड़ों को चार लाख रुपए देगी

टोक्यो। जापान में सरकार ने घर बसाने के इच्छुक जोड़ों को छह लाख येन यानी करीब 4.25 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि देने का फैसला किया है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि लोग शादी कर जल्द बच्चे पैदा करें और देश में तेजी से गिरती जा रही जन्म दर पर काबू पाया जा सके। इसके लिए सरकार अप्रैल से बड़े पैमाने पर इनाम देने का कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। जापान की आबादी करीब 12.68 करोड़ है पिछले साल जापान में ऐतिहासिक रूप से सबसे कम 8 लाख 65 हजार बच्चों का जन्म हुआ। जन्म की तुलना में मौत का आंकड़ा पांच लाख 12 हजार ज्यादा रहा। यह भी जन्म, मृत्यु में सबसे बड़ा अंतर है। सरकार काे उम्मीद है कि इस साल जन्मदर पिछले साल के 1.42% से कुछ अधिक 1.8% रहेगी। जापान की आबादी करीब 12.68 करोड़ है। जनसंख्या के हिसाब से जापान दुनिया का सबसे बुजुर्ग देश है। यहां 100 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या भी सबसे ज्यादा है। लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर जन्म दर की स्थिति यही रही तो यहां 2040 तक बुजुर्गों की आबादी 35% से ज्यादा हो जाएगी। इस अंतर को पाटने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर यह अभियान शुरू किया है। योजना में शामिल होने के लिए सरकार ने कुछ शर्तें रखी हैं योजना में शामिल होने के लिए सरकार ने कुछ शर्तें रखी हैं। जैसे जोड़े की उम्र 40 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए और दोनों की कुल कमाई 38 लाख रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसी तरह जिन जोड़ों की उम्र 35 साल से नीचे की होगी, उनकी कुल कमाई 33 लाख रुपए से अधिक न हो। उन्हें 2.11 लाख रुपए की मदद दी जाएगी। युवा पैसों की कमी की वजह से शादी नहीं कर रहे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन एंड सोशल सिक्योरिटी रिसर्च ने 2015 में एक सर्वे किया था। इसमें यह यह बात सामने आई कि 25-34 साल के करीब 30% अविवाहित लड़कों और 18% अविवाहित लड़कियों ने शादी न करने के फैसले की वजह धन की कमी को बताया। और भी देशों में जन्म दर बढ़ाने पर इनाम मिलता है इटली: यह इटली दूसरा ऐसा देश है, जहां तेजी से जन्म दर गिर रही है। यहां हर जोड़े को एक बच्चा होने पर सरकार की ओर से 70 हजार रुपए दिए जाते हैं। एस्ताेनिया: यूरोपीय देश एस्ताेनिया में जन्म दर बढ़ाने के लिए नौकरी करने वाले को डेढ़ साल तक पूरे वेतन के साथ छुट्‌टी दी जाती है। साथ ही तीन बच्चे वाले परिवार को हर महीने 300 यूरो यानी करीब 25 हजार रुपए का बोनस मिलता है। ईरान: यहां पुरुषों की नसबंदी पर पाबंदी है। यहां गर्भनिरोधक दवाएं उन्हीं महिलाओं को दी जाती हैं जिनको स्वास्थ्य कारणों से यह दवा लेना जरूरी होता है। ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले परिवार को अतिरिक्त राशन दिया जाता है।

मध्य प्रदेश से बड़ी खबर, कोरोना से एक दिन में 42 लोगों की मौत

भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। मध्य प्रदेश में अब तक के सर्वाधिक 2607 मरीज एक ही दिन में मिले है। वहीं पहली बार 24 घंटे के दौरान 42 मरीजों की मौत हुई है। इस तरह मध्य प्रदेश में अब तक एक लाख 3 हजार 65 मरीज कोरोना के शिकार हो चुके हैं। वहीं 1943 संक्रमित मरीजों की मौत हो गई है। प्रदेश में अब तक 79158 मरीज स्‍वस्‍थ होकर घर रवाना हो गए हैं। वहीं 21964 मरीजों का अब भी कोविड केयर अस्‍पताल में इलाज चल रहा है। राजधानी में सर्वाधिक, एक दिन में मिले 307 पॉजिटिव मरीज कोरोना का संक्रमण बेकाबू हो गया है। शहर में हर दिन 200 से ज्‍यादा मरीज मिले रहे थे लेकिन शनिवार को पॉजिटिव मरीजों का आंकडा 300 के पार हो गया। पहली बार एक ही दिन में 307 पॉजिटिव मरीज मिले है। इसके चलते शहर में कोरोना अलर्ट जारी किया गया है। वहीं एक ही दिन में पांच कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हुई है। इधर, पॉजिटिव पाए गए लोगों में सीएम हाउस से एक व्यक्ति कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वहीं भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्‍ठ अधिकारी भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए है, हालांकि इनकी सेवाएं केंद्र शासन को दे दी गई है लेकिन वे फिलहाल भोपाल में ही है। इधर, एक अन्‍य युवा आईपीएस अधिकारी भी कोरोना पॉजिटिव आया है। विधानसभा से एक व्‍यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अब तक विधानसभा से करीब एक दर्जन कर्मचारियों की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आ चुकी है। अस्‍पतालों की बात की जाए तो शनिवार को जवाहर लाल नेहरू कैंसर अस्‍पताल में एक, एम्‍स में एक, जीएमसी में तीन, जेपी में दो और चिरायु में एक व्‍यक्ति कोरोना संक्रमित पाया गया है। इस तरह शहर में अब कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्‍या बढकर 14909 हो गई है। वहीं अब तक 354 कोरोना मरीजों की जान जा चुकी है। कोविड केयर अस्‍पतालों से 12575 मरीज स्‍वस्‍थ होकर अब तक घर रवाना हो चुके है। इस तरह 1980 मरीज ऐसे है जिनका उपचार अब भी अस्‍पताल में चल रहा है। पुलिस और सेना के जवानों में बढ़ रहा है संक्रमण संक्रमित पाए गए लोगों में 25 वीं बटालियन से 7 जवानों की रिपोर्ट कोरोना पॉजीटिव आई है। वहीं ईमई सेंटर में भी चार जवान कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। पुलिस रेडियो कॉलोनी से तीन लोग पॉजिटिव आए हैं। वहीं शाहजहांनाबाद थाने से एक पुलिसकर्मी कोरोना पॉजिटिव आया है। इधर, सेंट्रल जेल में 6 कैदी कोरोना संक्रमित पाए गए है। पॉश क्षेत्र में भी तेजी से फैला कोरोना का संक्रमण शनिवार को पॉजिटिव मिले लोगों में अरेरा कालोनी से 12 लोग कोरोना संक्रमित निकले हैं। वहीं साउथ टीटीनगर से 6 लोगों की कोरोना की रिपोर्ट पॉजीटिव आई है। प्रोफेसर कॉलोनी से 2 लोग संक्रमित मिले हैं। चार ईमली में चार लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। कंसाना कोठी केरवा रोड में दो लोग कोरोना संक्रमित निकले हैं। इधर, रेलवे कॉलोनी हबीबगंज से 2 लोग संक्रमित पाए गए। वहीं इब्राहिमगंज से 3 लोग और बरखेड़ी गांव से 4 लोग कोरोना संक्रमित मिले।

बॉलीवुड में #MeToo: अनुराग कश्यप पर एक्ट्रेस पायल घोष ने लगाए यौन शोषण के आरोप

मुंबई . बॉलीवुड में जारी बहस में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले फिल्ममेकर अनुराग कश्यप पर एक्ट्रेस पायल घोष ने यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। एक्ट्रेस ने एक तेलुगू न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू के दौरान ये बड़ा खुलासा किया था। अब उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए अपनी आपबीती सुनाते हुए पीएम नरेंद्र मोदी से मदद मांगी है। पायल घोष में ट्विटर पर अपना इंटरव्यू शेयर करते हुए लिखा, ‘उन्होंने काफी बुरी तरह खुद को मुझ पर फोर्स किया और बेहद बुरी तरह से। पीएमओ इंडिया, नरेंद्र मोदी जी प्लीज एक्शन लीजिए और देश को इस क्रिएटिव इंसान के पीछे छिपा हुआ राक्षस दिखाइए। मैं जानती हूं कि इससे मुझे नुकसान हो सकता है और मेरे सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। प्लीज मदद करें’। जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाना चाहते थे अनुराग कश्यपः पायल तेलुगू न्यूज चैनल एबीएम को दिए इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने बताया कि उनके साथ ये घटना 2014 या 2015 में हुई थी मगर उस समय वो डर के चुप रहीं। एक्ट्रेस ने बताया कि वो काम के सिलसिले में अनुराग से मिलने गई थीं जहां फिल्ममेकर अकेले कमरे में ले जाकर उनके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश कर रहे थे। जब पायल ने उन्हें रोकना चाहा और कहा कि वो मेंटली इसके लिए तैयार नहीं है तो अनुराग का कहना था कि उनके साथ काम कर चुकीं सभी एक्ट्रेस महज एक फोन कॉल की दूरी पर हैं। इसके बावजूद जब एक्ट्रेस ने मना किया तो वो अनुराग ने उनसे जबरदस्ती करने की कोशिश की। बाद में दोस्तों के समझाने पर एक्ट्रेस ने इसकी शिकायत नहीं की थी। कौन है पायल घोष ? पायल घोष बांग्ला मूल की एक्ट्रेस हैं और ज्यादातर कन्नड़ फिल्मों में काम करती हैं। बॉलीवुड में पायल ने ऋषि कपूर और परेश रावल अभिनीत 2017 की कॉमेडी फिल्म, पटेल की पंजाबी शादी से डेब्यू किया था। एक्ट्रेस फिलहाल हिंदी फिल्म कोई जाने ना का हिस्सा हैं। फिल्मों के अलावा पायल स्टार प्लस के पॉपुलर शो साथ निभाना साथिया का भी हिस्सा रह चुकी हैं। एक्ट्रेस ने इस शो में साल 2016 में राधिका का किरदार निभाया था। कंगना भी आई पायल के सपोर्ट में अनुराग कश्यप के साथ बीते दो दिन से ट्विटर पर भिड़ रहीं कंगना रनोट भी पायल के सपोर्ट में उतर आई हैं। उन्होंने पायल के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा है कि, हर आवाज मायने रखती है। इसके साथ ही कंगना #MeToo और #ArrestAnuragKashyap हैशटेग भी शेयर किए हैं।

दूसरे दिन संक्रमितों से ज्यादा ठीक होने वालों की संख्या बढ़ी; देश में 53.98 लाख केस

नई दिल्ली. देश में कोरोना मरीजों की संख्या 53 लाख 98 हजार 230 हो गई है। पिछले 24 घंटे के अंदर रिकॉर्ड 12 लाख से ज्यादा लोगों की जांच हुई। एक दिन में टेस्टिंग का ये सबसे ज्यादा आंकड़ा है। इन 12 लाख लोगों में 7.66% यानी 92 हजार 574 नए मरीज बढ़े। अब तक 42 लाख 99 हजार 724 लोग ठीक हो चुके हैं। शनिवार को 94 हजार 384 मरीजों को ठीक होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अच्छी बात है कि यह लगातार दूसरा दिन था जब देश में संक्रमितों से ज्यादा ठीक होने वालों की संख्या बढ़ी। इसी के साथ भारत अब मरीजों के ठीक होने के मामले में पहले नंबर पर हो गया है। यहां अब तक अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा मरीज ठीक हुए हैं। अमेरिका अब दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। (भारत में 100 संक्रमितों में से 79 रिकवर, पूरी खबर पढ़ें) मरने वालों का आंकड़ा 86 हजार के पार शनिवार को देश में 1,149 संक्रमितों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसी के साथ मरने वालों की संख्या अब 86 हजार 774 हो गई है। अभी 10 लाख 10 हजार 975 मरीज ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है। ये मरीज घर में रहकर या फिर अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं। इनमें करीब 9 हजार मरीजों की हालत गंभीर है। कल से कोरोना वैक्सीन का आखिरी ट्रायल शुरू होगा कोरोना के लिए बनाए जा रहे ऑक्सफोर्ड वैक्सीन का आखिरी और फेज-3 ट्रायल सोमवार से पुणे में शुरू हो जाएगा। इसके लिए 150 से 200 वालंटियर्स डोज लेने के लिए तैयार हैं।

MP : गोदामों में रखा 7610 क्विंटल चावल जानवरों वाला निकला, 43 हजार क्विंटल बंट चुका

शिवपुरी . जानवराें का चावल शिवपुरी में भी इंसानाें काे बांटा गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत शिवपुरी जिले में कटनी और रीवा से दो रैक में 51 हजार क्विंटल चावल इसी साल जुलाई महीने में आया था। घटिया चावल शिवपुरी में भी बांटे जाने की शिकायत के बाद भारतीय खाद्य निगम के गुणवत्ता निरीक्षकों ने 29 और 30 अगस्त काे चावल के सैंपल लिए थे। सैंपल में चावल मापदंड पर खराब निकला है। दाे रैक में आए 51 हजार क्विंटल में से 43 हजार 390 क्विंटल चावल गरीबाें काे बांटा जा चुका है। अब गाेदामाें में सिर्फ 7610 क्विंटल चावल बचा है। कोरोना काल में बांटने के लिए भेजे खराब चावल का मामला प्रदेश स्तर पर गरमाने के बाद शिवपुरी में भी जांच शुरू हुई। मंडला और बालाघाट में जो खराब चावल बांटा गया, वही चावल शिवपुरी जिले में भी बांटने लिए रैक भेजी थी। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय खाद्य निगम के गुणवत्ता निरीक्षकों ने 29 और 30 अगस्त को जिले के विभिन्न गोदामों में रखे चावल की गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल लिए। सैंपलों की विश्लेषण रिपोर्ट से पता चला कि चावल निर्धारित मापदंड अनुसार नहीं है। इसलिए एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड जिला शिवपुरी ने आदेश जारी कर गोदामों में रखे संबंधित चावल के वितरण पर रोक लगा दी है। घटिया चावल की कालाबाजारी होती है फिर वही वापस वितरण के लिए आ जाता है पीडीएस सूत्रों की मानें तो इस चावल की कालाबाजारी होती है और यही चावल वापस वितरित होने के लिए आ जाता है। वहीं 17 जुलाई को पिछोर में एसडीएम ने व्यापारी के गोदाम से 230 क्विंटल चावल जब्त किया था। चावल घटिया होने पर स्वयं व्यापारी निर्मल गुप्ता ने कहा था कि गरीबों को कंट्रोल पर सरकार जो चावल भेज रही है, उसे गधे भी नहीं खाएंगे। लेकिन जिले के अधिकारी गंभीरता नहीं हुए। मामले की बड़े स्तर पर शिकायत के बाद कार्रवाई हो सकी है। दोनों रैक में आया खराब चावल, गुणवत्ता जांच के लिए केंद्र प्रभारी जिम्मेदार शिवपुरी जिले में चावल की दोनों रैक आईं। उनमें खराब चावल भेजा गया। उक्त चावल की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी मप्र स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन के संबंधित केंद्र प्रभारी की रहती है। अब उक्त मामले में तत्कालीन जिला प्रबंधक और संबंधित केंद्र प्रभारी कार्रवाई की जद में आ गए हैं। उचित मूल्य दुकानाें से खराब चावल बंटने के मामले में जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी से लेकर ब्लॉकों में पदस्थ खाद्य निरीक्षक भी जिम्मेदार हैं। नमूने में पोल्ट्री ग्रेड का चावल, इससे पहले जिले में और भी खराब चावल बंटा प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई शिकायत के बाद केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय नींद से जागा। भारतीय खाद्य निगम के गुणवत्ता निरीक्षक शिवपुरी आए और सात स्टेक के सैंपल लिए और जांच मेंं यह चावल मापदंड अनुसार नहीं निकला। सातों स्टैक में कुल 7610 क्विंटल चावल है। सभी नमूने पोल्ट्री ग्रेड के बताए जा रहे हैं। लेकिन पीडीएस के काम में लगे सूत्रों की मानें तो इससे पहले जिले में और भी ज्यादा खराब चावल गरीबों को बांटा जा चुका है।

कमलनाथ ने शिवराज को नालायक कहा.. शिवराज का जवाब- लायक कौन, जनता तय करेगी

भोपाल. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बीच उपचुनाव से पहले तल्ख बयानबाजी शुरू हो गई है। शनिवार को ग्वालियर में कमलनाथ ने शिवराज को नालायक तक कह डाला। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कमलनाथ को आरोपों की कीचड़ ही अच्छी लग रही है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। कौन लायक है, कौन नालायक, यह तो जनता तय करती है। अब कमलनाथ खुद इस पर विचार करें। 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के पहले मध्य प्रदेश में सियासी घमासान बढ़ता जा रहा है। इसके पहले शुक्रवार को कमलनाथ ने भोपाल में कहा था- मुझे शर्म आती है, जब मैं दिल्ली जाता हूं और लोग पूछते हैं कि आपके प्रदेश की छवि बिकाऊ वाली बन गई। इस पर शिवराज ने जवाब देते हुए कहा था- ऐसा कहना प्रदेश की 8 करोड़ जनता का अपमान है। कमलनाथ को जनता से माफी मांगनी चाहिए। ग्वालियर दौरे पर थे कमलनाथ कमलनाथ ग्वालियर के दो दिन के दौरे पर पहुंचे थे। आखिरी दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कमलनाथ ने कहा- मैंने अपने कार्यकाल में 26 लाख किसानों के कर्ज माफ किए। अब शिवराज इतने नालायक तो हैं नहीं कि वह समझ न सकें कि ये कैसे किया गया है। हमने दो लाख तक के सभी किसानों के कर्ज माफ करके मदद की। जबकि, शिवराज के 15 साल के कार्यकाल में किसानों को आत्महत्या तक पर मजबूर होना पड़ा। शिवराज का पलटवार कमलनाथ के बयान पर शिवराज ने कहा- जो सभी को एक भाव से देखे, गरीबों का सम्मान करे, किसान के कल्याण की योजना बनाए, वो लायक है या नालायक, यह फैसला जनता को करना है। 15 महीने कमलनाथ की सरकार थी। उन्होंने क्या किया? यह बड़ी लायकी की बात थी कि वल्लभ भवन को दलालों के अड्डा बना दिया। पूरे प्रदेश के विकास को ठप कर दिया? आपको जवाब देना पड़ेगा कि 10 दिन में 2 लाख तक का कर्ज आपने क्यों माफ नहीं किया। कर्ज माफी के झूठे सर्टिफिकेट पकड़ाकर आपने सहकारी बैंकों तक को पूरा पैसा नहीं दिया। क्या यह बैंकों के साथ धोखा नहीं है? आपको जवाब देना पड़ेगा कि किसान सम्मान निधि का पैसा जो प्रधानमंत्री सीधे किसानों को देते हैं आपने उसे क्यों अटकाया? शराब माफिया कौन, रेत माफिया कौन, क्या यह बयान आपको याद नहीं हैं। क्या यह भी भूल गए कमलनाथ कि ग्वालियर-चंबल संभाग से एक मंत्री जो आज नदी बचाने का नाटक कर रहे थे। वो जनता से कह रहे थे कि हमें माफ कर दो, हम रेत का अवैध खनन नहीं रोक पाए। क्या किसानों से झूठ बोलना, बेरोजगारों से छल करना, बेटियों को ठगना लायकी है? कमलनाथ कौन सी लायकी और नालायकी की बात कर रहे हैं? ‘कितने भोले हैं आप कमलनाथ, क्या ये जनता मान लेगी?’ मुझे कोई नालायक कहे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं तो वैसे भी जनता का सेवक हूं। 15 महीनों में 5 मिनट के लिए भी आप ग्वालियर नहीं गए। आज आप कह दो कि मैंने तो किसी और के भरोसे छोड़ दिया था या लायकी है, वह भी तब जब चुनाव में उनका उपयोग करना था। मुख्यमंत्री जब भारत के संविधान की शपथ लेता है तब समान भाव की शपथ लेता है, लेकिन अब आप कह रहे हो कि मैंने तो ग्वालियर छोड़ दिया था। कितने भोले हैं कमलनाथ आप, क्या जनता इस भोलेपन को मान लेगी? ‘चंबल एक्सप्रेसवे को ठंडे बस्ते में क्यों डाला?’ लायक पूर्व मुख्यमंत्री जी बताएं कि जरारोग्य अस्पताल के निर्माण को आपने क्यों रोका? जरारोग्य अस्पताल को बाईपास सर्जरी के पैसे क्यों नहीं दिए गए? आप को बताना पड़ेगा कि ग्वालियर और चंबल से जो हमारी पानी लाने की योजना थी उसे क्यों रोका? चंबल एक्सप्रेस वे के निर्माण को आपने ठंडे बस्ते में क्यों डाला? आपके पास ग्वालियर संभाग और चंबल संभाग के जनप्रतिनिधियों के लिए 1 मिनट का टाइम क्यों नहीं था?

सोयाबीन लगाई ही नहीं उसका भी बीमा मिला, 50 किसानों को मिली 4 और 8 रुपए की राशि

खरगोन. सरकार ने जोर शोर से समारोह कर किसानों को बीमा क्लेम की राशि का वितरण किया है लेकिन हकीकत में जब बीमा राशि किसानों के खातों में आई तो किसानों की आंखों से आंसू आ गए। बीमा क्लेम में हुई लापरवाही के कारण किसानों के खातों में 4, 8, 16 व 32 रुपए की राशि डाली गई। जिसे लेकर किसानों में आक्रोश है। खरीफ सीजन 2019 में अतिवृष्टि से खराब हुई फसलों की राशि सरकार ने किसानों के खातों में तो डाली लेकिन नागझिरी के 50 से अधिक किसानों के खातों में अतिवृष्टि के सर्वे के दौरान हुई लापरवाही से बीमा क्लेम की राशि मात्र 4, 8, 16, 23, 29 व 39 रुपए आई है। वहीं कई किसानों ने बताया हमने सोयाबीन की तो फसल ही नहीं लगाई फिर भी हमारे नाम के आगे सोयाबीन का क्लेम देना बताया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि सर्वे में कितनी लापरवाही हुई है। केस 1 : दो बीघा साेयाबीन की फसल हुई नष्ट, राशि मिली 23 रु. किसान जितेश धारवाल ने बताया मेरा नागझिरी स्थित 27 बीघा खेत है। जिसमें मैंने 2 बीघा में सोयाबीन व 25 बीघा में कपास की फसल लगाई थी। दो बीघा में सोयाबीन की फसल लगाई थी। जिसका बीमा क्लेम मुझे 23 रुपए मिला है। मक्का फसल के नाम पर 6224 रुपए इफ्को टोकियो बीमा कंपनी के द्वारा खाते में राशि आई। जबकि मैंने मक्का की फसल लगाई ही नहीं है। 25 बीघा में कपास की फसल लगाई थी जिसमें 4 से 5 लाख का खर्च हुआ था। जिसकी बीमा क्लेम राशि 13344 रुपए लिस्ट में दिखाए है। केस 2 : कपास व पपीता के स्थान पर सोयाबीन का मिला क्लेम करही के किसान प्रेमचंद पाटीदार ने बताया मेरा खेत नागझिरी में हैं। मैंने कभी भी सोयाबीन की फसल नहीं लगाई थी। मैं सिर्फ कपास व पपीता की फसल ही लगाता हूं। मुझे एक किसान से पता लगा कि मुझे सोयाबीन के बीमा क्लेम की राशि मिली है। वह भी मात्र 8 रुपए। इस पर आक्रोशित किसान ने कहा 8 रुपए मेरी ओर से सरकारी खजाने में जमा किए जाएंगे। किसान दिनेश यादव ने बताया 7 बीद्या में सोयाबीन की फसल खराब हुई थी। जिसके मुझे करीब 937 रुपए आए है जबकि 40 हजार का खर्च ही लगा था। अब इतनी कम राशि में नुकसान कैसे पूरा होगा। केस 3 : हजारों रुपए जमा कराते हैं, भीख में मिले सिर्फ 8 रुपए किसान ललित मालवीया ने बताया साढे सात बीद्या की सोयाबीन की फसल को नुकसान हुआ था। बीमा कंपनी ने मुझे भीख के तौर पर मात्र 8 रुपए दिए है जबकि बीमा कंपनी हर साल किसानों से हजारों की राशि प्रीमियम के रुप में जमा कराती है। फसलों का नुकसान होने पर हर साल हमें कुछ रुपए की भीख दे देते हैं। इसी प्रकार धरमचंद मालवीया को सोयाबीन नुकसानी के 29 रुपए, चिंताराम यादव को 4 रुपए बीमा क्लेम के मिले है। और इधर, बारिश से खराब हो रही फसल पिपलिया बुजुर्ग ग्राम में शनिवार शाम को हुई बारिश से किसान चिंतित है। मौसम के मिजाज को देखते हुए अगले दो तीन दिनों तक मौसम साफ नहीं होगा। बारिश ने किसानों की आशाओं पर फिर से एक बार पानी फेर दिया है। कपास और सोयाबीन की फसल पूरी तरह से नष्ट हो रही है। किसान दादू दरबार, जगदीश मुकाती व महेंद्र सिन्हा ने कहा पिछली बार अतिवृष्टि के कारण फसले बर्बाद हो गई। इस वर्ष अच्छी फसल की उम्मीद थी लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण फसल खराब हो रही है। कीटनाशक व्यवसायी निलेश जैन व खेमराज जैन ने कहा किसानों की कमजोर स्थिति का असर उनके व्यापार पर भी पड़ेगा।  

कल से स्कूल खुलेंगे, रेगुलर क्लास नहीं लगेगी, दो घंटे के लिए स्कूल जा पाएंगे छात्र

भोपाल . 9वीं से 12वीं तक के ज्यादातर सरकारी व प्राइवेट स्कूल सोमवार से खुल जाएंगे। लेकिन रेगुलर क्लासेस नहीं लगेंगी। स्कूलाें में सिर्फ दाे घंटे का डाउट क्लीयिरिंग सेशन हाेगा। इसमें छात्र पढ़ाई में आ रही कठिनाइयाें का हल जानने के लिए स्कूल पहुंच सकेंगे। लेकिन इसके लिए भी अभिभावकाें की लिखित सहमति अनिवार्य हाेगी। शिक्षकाें से यह मार्गदर्शन लेने के बाद बच्चे इस सेशन की अवधि के अलावा स्कूल में नहीं रुक सकेंगे। केंद्र व राज्य सरकार द्वारा स्कूलाें के बारे एसओपी जारी करने के बाद से ही ज्यादातर निजी स्कूल प्रबंधनों ने तैयारी शुरू कर दी थी। प्राइवेट स्कूलाें के संगठन एसोसिएशन ऑफ अन-एडेड प्राइवेट स्कूल्स से जुड़े 33 स्कूलाें ने बच्चाें के अभिभावकाें काे ऑनलाइन फार्म भेजकर उनसे फीडबैक मांगा था कि बच्चाें काे ऐसे सेशन के लिए स्कूल भेजना चाहते हैं या नहीं। एसाे. के उपाध्यक्ष विनीराज माेदी ने बताया कि सिर्फ 55 फीसदी अभिभावकाें ने इसके लिए हामी भरी है। 24 फीसदी पालकाें ने बच्चाें काे भेजने से साफ मना कर दिया। बाकी ने अभी काेई रिस्पांस नहीं दिया। माेदी ने बताया कि कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियाें के 18201 पालकाें के फॉर्म अब तक मिल चुके हैं। कलेक्टर अविनाश लवानिया ने बताया कि बच्चे अभिभावकों की लिखित सहमति लेकर ही पढ़ाई में आ रही कठिनाइयों का हल जानने पहुंच सकेंगे। ताे स्कूल भेजने में क्या दिक्कत- साेसायटी फार प्राइवेट स्कूल्स के प्रदेशाध्यक्ष डाॅ आशीष चटर्जी ने बताया कि 50 फीसदी पालकाें का यह तर्क है कि जब हमारे बच्चे मार्केट, शाॅपिंग माॅल्स जैसे अन्य सार्वजनिक स्थानाें पर जा सकते हैं ताे उन्हें स्कूल भेजने में काेई दिक्कत नहीं है। 50% ही शिक्षक रहेंगे मौजूद – 9वीं से 12 वीं तक के स्कूलों में भी 50 फीसदी शिक्षकों को ही बुलाया जाएगा। ये शिक्षक ही पढ़ाई के दौराना आ रही समस्याओं का निराकरण करेंगे। ये सेशन सुबह 9 से 11 या दोपहर 12 से 2 बजे तक चल सकते हैं।

भाजपा नेता की धमकी के बाद सीएसपी का ट्रांसफर, थाना प्रभारी से धक्का-मुक्की

उज्जैन . मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के उज्जैन आगमन के दौरान हेलीपेड पर शुक्रवार सुबह भाजपा नेताओं से विवाद के बाद 24 घंटे में सीएसपी ऋतु केवरे का ग्वालियर तबादला कर दिया गया है। मप्र शासन के गृह विभाग ने शनिवार शाम सीएसपी केवरे का तबादला आदेश जारी किया। उन्हें तत्काल प्रभाव से आईजी कार्यालय ग्वालियर भेजा है। दो साल के दौरान भाजपा व कांग्रेस नेता वीआईपी की अगवानी के दौरान हुए विवाद के बाद तीन एएसपी का भी तबादला करवा चुके है। शनिवार को तबादला आदेश के बाद सीएसपी केवरे ने कहा कि भाजपा नेता संक्रमित पार्षद की पत्नी को सीएम से मिलाने हेलीपेड के अंदर ले जा रहे थे। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर उन्हें रोका तो विवाद किया, मुझे अपशब्द कहे व ट्रांसफर की धमकी दी थी। सीएसपी ने कहा कि नेता सिर्फ तबादला ही करवा सकते है लेकिन कहीं भी भिजवा दे, मैं नौकरी तो दमखम से ही करूंगी। मैं तो इसी दमदारी से ही नौकरी करूंगी..धन्यवाद उज्जैन-सीएसपी हेलीपेड पर भाजपा नेताओं के अपशब्दों का शिकार हुई नानाखेड़ा सीएसपी केवरे ने कहा कि फिलहाल तबादला आदेश मुझे नहीं मिला है लेकिन अगर नेताओं ने ग्वालियर तबादला करवा दिया तो कोई फर्क नहीं पड़ता। ड्यूटी यहां भी कर रही थी और ड्यूटी वहां भी इसी दमखम से करूंगी। मेरे काम पर इस तबादले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उज्जैन में अच्छा-बुरा सारे अनुभव मिले, धन्यवाद उज्जैन। सांसद ने एएसपी को धमकाया था-तवज्जो नहीं दे रहे हो पुलिस अधिकारियों से वीआईपी ड्यूटी के दौरान विवाद करना भाजपा नेताओं का ही शगल नहीं है बल्कि यही स्थिति कांग्रेस की भी है। इससे पूर्व कांग्रेस की प्रदेश में सरकार रही तो यहां के कांग्रेस नेता व जनप्रतिनिधि भी विवाद करने में पीछे नहीं रहे। इसी का नतीजा का है कि वीआईपी के आगमन के दौरान नेताओ को रोकने-टोकने पर दो साल में उज्जैन से यह चौथे पुलिस अधिकारी का तबादला हुआ है। दिसंबर 2018 में शिवराजसिंह महाकाल दर्शन करने आए थे तब हेलीपेड पर एएसपी अभिषेक दीवान से सांसद चिंतामणि मालवीय व अन्य भाजपा नेता भिड़ गए थे। दीवान से यह तक बोले थे कि हमारी सरकार जाने वाली है इसलिए तवज्जो नहीं दे रहो हो। इस घटना के बाद भी एएसपी दीवान का भोपाल एआईजी रेडियो में तबादला करवा दिया था।

MP : प्रीमियम भरा 1 हजार 50 रुपये, किसान को फसल बीमा के नाम पर मिली 1 रुपये की राशि

बैतूल. बैतूल में बीमा राशि के नाम पर किसानों के साथ जो कुछ हुआ है, वह उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं है. जिले के हजारों किसानों के खातों में 100 या 50 रुपये से भी कम बीमा राशि आई है. हद तो तब हो गई जब गोधना गांव के एक किसान के खाते में बीमा राशि केवल 1 रुपये आई. किसान इसे धोखा मान रहे हैं और वे सरकार को ये राशि वापस करने की तैयारी में हैं. वे उग्र प्रदर्शन शुरू कर चुके हैं. हास्यास्पद बीमा राशि प्रदेश सरकार ने बड़े जोर-शोर से सूबे के 22 लाख से ज्यादा किसानों को फसल बीमा की राशि दी. लेकिन इसमें हास्यास्पद बात यह रही कि कुछ किसानों के हिस्से महज 1 रुपये की राशि आई. बैतूल के गोधना गांव के रहनेवाले किसान पूरनलाल का नाम ऐसे ही किसानों में एक है. उन्होंने 1 हजार 50 रुपये बीमा प्रीमियम अदा किया था, लेकिन उन्हें इनके हिस्से बीमा राशि केवल 1 रुपये आई. बीमा राशि की जानकारी मिलते ही पूरनलाल सदमे की स्थिति में आ गए. पूरनलाल बताते हैं कि ढाई हेक्टेयर के रकबे में लगभग एक लाख की फसल खराब हुई थी, लेकिन जब उन्हें केवल एक रुपये बीमा राशि मिली तो अब ये समझ नहीं आ रहा है कि इस राशि पर हंसे या रोएं. वह लिस्ट जिसमें किसान को एक रुपये की राशि बतौर फसल बीमा मिली,वह लिस्ट जिसमें किसान को एक रुपये की राशि बतौर फसल बीमा मिली. सरकार को वापस देंगे बीमा कम्पनी से मिले 1 रुपये पूरनलाल की तरह ऐसे हजारों किसान हैं, जिनके खातों में बीमा की राशि 100 रुपये या 50 रुपये से भी कम आई है. किसान इस भद्दे मजाक से दुखी हैं और आक्रोशित भी. गोधना गांव के ही किसान पवन के मुताबिक ये एक-दो रुपये बीमा राशि उन्हें देकर अपमानित किया गया है, इस राशि को वो सम्मान के साथ सरकार को लौटा देंगे. कृषि विभाग ने पल्ला झाड़ा, बीमा कम्पनी से करेंगे पूछताछ फसलों के नुकसान के एवज में मिली बीमा राशि को लेकर कृषि विभाग के पास भी सही जानकारी उपलब्ध नहीं है. कृषि अधिकारियों के मुताबिक बीमा कम्पनी द्वारा नुकसान का आकलन करने का अपना तरीका है. लेकिन जिन किसानों के खातों में 200 रुपये से कम राशि आई है, उनकी लिस्ट दोबारा बीमा कम्पनी को भेजी जा रही है. हालांकि किसानों के खातों में एक रुपये डालने जैसा मजाक क्यों हुआ – इसे लेकर जरूर बीमा कम्पनी से पूछताछ होगी. कुल 64 हजार 893 किसानों को मिली फसल बीमा की राशि बैतूल जिले में कुल 64 हजार 893 किसानों को फसल बीमा की राशि दी गई है. जिसके लिए 81 करोड़ 71 लाख की राशि जारी की गई थी. लेकिन अधिकतर किसान बीमा की राशि को लेकर आक्रोशित हैं, जिससे ये तो जाहिर हो रहा है कि राजस्व अमले, बीमा कम्पनी या फिर किसी तीसरे की लापरवाही से ही किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है.

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