राहुल गांधी ने स्मृति ईरानी को लेकर किया पोस्ट सियासी गलियारों में हलचल
Rahul Gandhi’s post regarding Smriti Irani creates stir in political circles
Rahul Gandhi’s post regarding Smriti Irani creates stir in political circles
बाराबंकी देश के अलग-अलग हिस्सों में इस समय भारी बारिश हो रही है। जिसके चलते नदियों का जल स्तर बढ़ गया है। इस कारण तलहटी में बसे गांवों में पानी भर गया है। ऐेसे में शादी करने दूल्हा बारात लेकर गाजे बाजे के साथ नाव से पहुंचा। जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। नाव से शादी करने पहुंचा दूल्हा चर्चा का विषय बन गया। दरअसल, सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से तलहटी में बसे गांवों में पानी भर गया है। तटबंध के अंदर बने मकानों में पानी घुस गया है। यहां के लोगों ने पलायन कर ऊंचे स्थानों पर शरण ली है। किसानों की सैकड़ों एकड़ फसलें भी जलमग्न हो गई हैं। बाढ़ आने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में किसी के घर में शादी है तो किसी के घर में कोई दूसरा आयोजन है। लेकिन बाढ़ के चलते लोग तरह तरह के जतन कर रहे हैं। अनोखी शादी का यह मामला बाराबंकी जिले के मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र का है। नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इसी बीच बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की ग्राम पंचायत बल्लोपुर द्वितीय में माधव पुरवा के रहने वाले राम आसरे की बेटी की शादी होनी थी। सूरतगंज ब्लॉक के सैलक गांव से राघवराम की बारात आनी थी। लेकिन गांव को जाने के लिए रास्ता नहीं था। सड़क मार्ग न होने पर दूल्हा राघवराम दुल्हनिया लेने के लिए डीजे, बाजा और बराती लेकर नाव से निकल पड़ा। वह नाव से बारात लेकर शादी करने के लिए लड़की के गांव पहुंच गया। नाव सवार दूल्हे को देखने के लिए गांव के लोगों की भीड़ जुट गई। क्षेत्र में नाव सवार बारातियों की खूब चर्चा हो रही है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बता दें कि सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.70 से 47 सेंटीमीटर ऊपर है। हालांकि, मंगलवार रात से जलस्तर घट रहा है। नेपाल के गिरजा व शारदा बैराज से मंगलवार को चार लाख तीस हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। जिससे सरयू नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया। इससे नदी के किनारे बसे गांव में पानी भर गया है। लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर अपना ठिकाना बनाया है।
Mahatma Gandhi’s statue uprooted, political uproar in Assam; Congress condemned
रांची फूड डिलीवरी करने वालों से लेकर ऐप बेस्ड कंपनियों के लिए गाड़ियां चलाने वाले और इस नेचर के काम से जुड़े वर्कर्स के लिए झारखंड में कानून का ड्राफ्ट तैयार हो रहा है। ऐसे वर्कर्स को गिग वर्कर्स के रूप में जाना जाता है। इस कानून का प्रस्ताव जुलाई महीने में ही कैबिनेट में लाने और उसके बाद राज्य विधानसभा के मानसून सेशन में पारित कराए जाने की तैयारी है। राज्य के श्रम एवं नियोजन मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने यह जानकारी दी। प्रस्तावित कानून का नाम ‘झारखंड प्लेटफार्म बेस्ड गिग वर्कर रजिस्ट्रेशन एंड वेलफेयर एक्ट 2024’ रखा गया है। इसका लक्ष्य इंटरनेट और मोबाइल बेस्ड ऐप के जरिए संचालित कंपनियों के लिए काम करने वाले वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं और न्यूनतम मजदूरी से जुड़े प्रावधानों के दायरे में लाना है। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वर्कप्लेस और ड्यूटी के दौरान कर्मियों को आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। कानून का जो ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है, उसके अनुसार राज्य के सभी गिग वर्कर्स का सर्वे कराया जाएगा और इसके बाद उनका रजिस्ट्रेशन कराते हुए उन्हें यूनिक आईडी दी जाएगी। इस कानून के लागू होने के बाद इंप्लायर या वर्कर्स से काम लेने वाली थर्ड पार्टी एवं गिग वर्कर्स के बीच होने वाले कॉन्ट्रैक्ट के नियमों में पारदर्शिता होगी। गिग वर्कर्स को यह अधिकार होगा कि वे कभी भी कॉन्ट्रैक्ट को अपनी ओर से खत्म कर सके। कानून का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए अपीलीय प्राधिकरण और वेलफेयर का भी गठन होगा। यह भी प्रावधान किया जा रहा है कि सरकार इन वर्कर्स के लिए वेलफेयर कोष गठित करेगी। गिग वर्कर्स के लिए वेलफेयर बोर्ड के चेयरमैन श्रम नियोजन विभाग के मंत्री होंगे। श्रम सचिव, आईटी सचिव, कल्याण सचिव, परिवहन सचिव, वित्त सचिव अन्य प्रमुख विभागों के पदाधिकारी सदस्य सचिव होंगे। बोर्ड के मेंबर का कार्यकाल तीन साल का होगा। बोर्ड समय-समय पर बैठक कर गिग वर्करों की समस्याओं व उसके निदान पर विचार करेगा। मॉनिटरिंग सिस्टम डेवलप किया जाएगा और कैंटीन, स्वास्थ्य सुविधा, कल्याणकारी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। राज्य में गिग वर्कर्स की अनुमानित संख्या लगभग एक लाख होने का अनुमान है। गिग वर्कर्स के कल्याणार्थ दुनिया भर में किये जा रहे कार्यों की जानकारी लेने के लिए इसी वर्ष मार्च में राज्य के श्रम विभाग के अफसरों की एक टीम ने तुरिन शहर का दौरा किया था। उन्होंने वहां गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा पर आईएलओ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया था।
रायपुर, मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन से महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर राज्य के सभी संभागायुक्त और कलेक्टर्स की वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक ली। उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न संस्थानों में भर्ती परीक्षाओं सहित अन्य रोजगार परीक्षाओं में सुचिता और सुरक्षा को लेकर भारत सरकार द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए सभी जिलो के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक भविष्य में आयोजित होने वाली परीक्षाओं को लेकर सर्तकता एवं संवेदनशीलता से कार्य करें। इस संबंध में मुख्य सचिव ने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार परीक्षा केन्द्रों पर सतर्कता बरती जाए। इसी तरह से भारत सरकार द्वारा एक जुलाई से 31 अगस्त 2024 तक स्टॉप डायरिया अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य सचिव ने डायरिया नियंत्रण के लिए सभी आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने आगामी दिनों में आयोजित होने वाली नीट-पीजी, यूजीसीे-नेट सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अत्यंत सतर्कता बरतने के निर्देश दिए है। उन्होंने प्रत्येक जिले में आयोजित होने वाली परीक्षाओं के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा है जिले के अंदर आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं के लिए बनाये जाने वाले परीक्षा केन्द्रों पर अत्यंत सुरक्षा और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की जाए। इसी तरह से स्टॉप डायरिया अभियान के अंतर्गत ऐसे संवेदनशील क्षेत्र जहां पिछले वर्षों में डायरिया के प्रकरण हुए है वहां अत्यंत सतर्कता बरती जाए। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को ओआरएस और जिंक की गोलियां घर-घर जाकर मितानिनों के माध्यम से वितरित की जाए। जहां पर कहीं डायरिया के प्रकरण की जानकारी मिलती है तो वहां पर तुरंत मेडिकल टीम भेजकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। डायरिया से पीड़ितों का समुचित इलाज कराया जाए। मुख्य सचिव ने पेयजल के स्त्रोतों की साफ-सफाई, पाइपों के लिकेज होने की शिकायत पर तत्काल पाइपों का सुधार एवं नए पाइप लगाए जाने की कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। बैठक में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, गृह एवं जेल विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, सभी संभागायुक्त एवं कलेक्टर सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
Will Rahul Gandhi become the new face of farmer strategy? Such is the preparation to bring private bill on MSP
नई दिल्ली देश का पूर्वोत्तर राज्य असम इन दिनों बाढ़ की भीषण विभीषिका से जूझ रहा है। ब्रह्मपुत्र नद सहित राज्य की सभी नदियां उफान पर हैं और जन-जीवन दूभर हो गया है। लोगों के घर-बार डूब गए हैं और बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।ऐसे में हमेशा की तरह सेवा भारती (पूर्वांचल) के कार्यकर्ता पहले ही दिन से बचाव और राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। सामान्य तौर पर असम में बाढ़ हर वर्ष आती है और उसके लिए सेवा भारती के लोग पहले से तैयार रहते हैं। पर इस वर्ष की बाढ़ ने भीषण रूप से लिया है और आपदा बड़ी हो गई है। ऐसे में सेवा भारती (पूर्वांचल) ने देश भर से सहयोग का आह्वान किया है. सेवा भारती ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा है कि असम के बाढ़ पीड़ितों के सहायतार्थ आगे आएं और बड़े मन से आर्थिक सहायता दें।सेवा भारती ने इसके लिए अपना बैंक डिटेल भी साझा किया है। सहायता राशि इस खाते में दी जा सकती है-नाम- सेवा भारती पूर्वांचलबैंक- स्टेट बैंक ऑफ इंडियाशाखा- लाचित नगर, गुवाहाटीखाता संख्या- 35545221261आईएफएससी कोड- एसबीआईए0014255सेवा भारती पूर्वांचल ने इस संबंध में एक व्हाट्सअप नंबर भी जारी किया है, जिस पर दान देने के बाद जानकारी और अपना पैनकार्ड नंबर भेजा जा सकता है।ताकि आपके दान की पावती भेजी जा सके। यह नंबर है-8011422133।इसके साथ ही सेवा भारती का कहना है कि वह नए कपड़े, नए कंबल, बच्चों की खाद्य सामग्री, दवाइयां, मच्छरदानी के साथ ही फिनाइल और बिलिचिंग पाऊडर जैसी सामग्री भी सीधे स्वीकार कर सकते हैं।
भोपाल मध्य प्रदेश में त्योहारों का मौसम करीब आते ही हर साल छोटे शहरों से बड़े शहरों में दूषित मावे की आपूर्ति बढ़ जाती है। इस बार भी ऐसा होगा, इसके संकेत अभी से मिलने लगे हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के अधिकारी चौकस हो गए हैं, मगर इसे रोकना एक बड़ी चुनौती है। राज्य का ग्वालियर-चंबल अंचल वह इलाका है जहां से प्रदेश के बड़े शहर ही नहीं देश के कई इलाकों में मावा की आपूर्ति होती है। शादी समारोहों का सिलसिला शुरू हो चुका है, वहीं स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का पर्व कुछ दूर है, इसके साथ ही मावे की आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है। आने वाले समय में यह क्रम और तेजी से बढ़ने की संभावना है। इसी के चलते खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाइयां भी बढ़ने लगी हैं। दूषित मावे की आपूर्ति की मिल रही सूचनाओं के बीच खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग को ग्वालियर से भोपाल मावा आने की सूचना मिली। इस सूचना के आधार पर भोपाल रेलवे स्टेशन पर आए मावा को जब्त कर लिया गया, मगर जो दो लोग मावा लेकर आए थे, वे रफूचक्कर हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 36 क्विंटल मावा जब्त किया गया है, जिसकी कीमत आठ लाख रुपए आंकी गई है। इस मावे के सैंपल को जांच के लिए लेबोरेटरी भेजा जाएगा। उसके बाद ही इस बात का खुलासा हो सकेगा कि यह मावा ठीक था अथवा दूषित। जानकारों का कहना है कि राज्य में दूषित मावा की आपूर्ति को रोकना सरकारी अमले के लिए आसान नहीं होता, क्योंकि राज्य के अलग-अलग हिस्सों से यह मावा ट्रेन के जरिए या सड़क मार्ग के जरिए पहुंचता है। विभाग को या पुलिस अमले को जब किसी मुखबिर से सूचना मिलती है तभी कार्रवाई हो पाती है। इस बार देखना होगा कि प्रशासन दूषित मावे की आपूर्ति को कैसे रोकता है।
रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर के अटल नगर स्थित जैव विविधता पार्क में ‘एक पेड़ मां के नाम’ महावृक्षारोपण अभियान-2024 का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने पूर्ण विधि विधान से पूजन कर पीपल के पौधे का रोपण कर महावृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की। मुख्यमंत्री द्वारा अभियान का बैनर जारी किया गया। इस अभियान के तहत वन विभाग द्वारा प्रदेशभर में 4 करोड़ वृक्ष लगाये जाएंगे। इसी के अंतर्गत में आज प्रदेश के 33 जिलों में कुल 4 लाख पेड़ लगाए गए। आज महावृक्षारोपण अभियान के शुभारंभ के मौके पर जैव विविधता पार्क में मुख्यमंत्री श्री साय के साथ सभी कैबिनेट मंत्रीगणों, स्कूली बच्चों, सीआरपीएफ के जवानों, पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने 20 हजार पेड़ लगाए। मुख्यमंत्री श्री साय ने ओपन जिप्सी में वृक्षारोपण क्षेत्र का भ्रमण कर अभियान में हिस्सा ले रहे लोगों का उत्साह वर्धन किया। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री द्वय श्री अरूण साव एवं श्री विजय शर्मा, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, खेल मंत्री श्री टंकराम वर्मा, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू एवं श्री गुरु खुशवंत साहेब उपस्थित थे। सभी ने एक पेड़ मां के नाम वृक्षारोपण किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश के 140 करोड़ लोगों से आह्वान किया है कि सभी अपनी मां के नाम से एक पेड़ लगाएं। उनके आह्वान पर यह एक आंदोलन बन गया है, हम लोग छत्तीसगढ़ में भी इसको अभियान के रूप में ले रहे हैं और अकेले वन विभाग का 4 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के 33 जिलों में वन विभाग द्वारा 6 लाख पौधे लगाए जा रहे हैं। बहुत सी प्रजातियों के पेड़ लगाएं जा रहे हैं। पीपल का पेड़ जो 24 घंटा ऑक्सीजन देता है, नीम का पेड़, हर्रा बहेड़ा आंवला जैसे गुणकारी पौधे लगाए जा रहे हैं हर किसी को पेड़ लगाना बहुत आवश्यक है आप सब लोग देख रहे हैं कि पेड़ कम होने से गर्मी के दिनों में गर्मी बहुत बढ़ रही है इस साल तो रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पूरे देश में पड़ी है। पारा 50 डिग्री पहुंच गया। पूरे विश्व में गर्मी से मरने वालों की संख्या बहुत बढ़ गई है, ऐसे समय में बहुत आवश्यक हो जाता है कि हम सभी पेड़ लगाएं। आज वृक्षारोपण अभियान में हमारे स्कूली बच्चे शामिल हुए, हमारे सीआरपीएफ के जवान शामिल हुए, हमारे वन और पुलिस विभाग का अमला भी शामिल हुआ। इन सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद। मुख्यमंत्री ने सभी स्कूलों से भी आह्वान किया है कि बच्चे अपने स्कूल परिसर में अपनी मां के नाम पर एक पेड़ अवश्य लगाएं। महतारी वंदन योजना की बहनों से भी करेंगे पेड़ लगाने की अपील मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना की बहनों को राशि वितरण के लिए अगस्त माह में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में वे माता-बहनों से अपनी मां के नाम पर एक पेड़ लगाने की अपील करेंगे। यदि 70 लाख महिलाएं पेड़ लगाएंगी तो लक्ष्य आसानी से पूरा होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर एक वृक्ष अपने मां के सम्मान में लगाकर उसकी देखभाल करें, उसकी रक्षा करें। यह गौरव का विषय है कि आज हमारे राज्य के सभी वन रेंज में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यह प्रत्येक चंद्र माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को आती है, यानी एक माह में दो बार एकादशी होती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। वहीं, सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है। इसे आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन मनाया जाता है। इसे हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन से चतुर्मास की शुरुआत होती है। इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीनों तक शयन करते हैं। इस अवधि के दौरान शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, आदि नहीं किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के व्रत का पालन करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है। साथ ही उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, इस व्रत को करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। उनकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। इस दिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, घर के कुछ स्थानों तुलसू का पत्ता रखने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इन जगहों पर रखें तुलसी पत्ता रसोई घर को घर का अग्नि कोण माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में होना चाहिए। रसोई घर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने से घर में समृद्धि बनी रहती है। खाना बनाने वाली का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इस स्थान पर तुलसी का पत्ता अवश्य रखें। घर की पूर्व दिशा को सूर्य की ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। इस दिशा को साफ-सुथरा और खुला रखना चाहिए। पूर्व दिशा में खिड़कियां और दरवाजे होने चाहिए ताकि सुबह सूर्य की किरणें घर में प्रवेश कर सकें। इसलिए ऐसी जगह पर भी तुलसी का पत्ता अवश्य रखें। मुख्य द्वार को घर की सबसे महत्वपूर्ण दिशा माना जाता है। इसे हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। मुख्य द्वार पर शुभ प्रतीकों (जैसे स्वस्तिक, ओम) का चिह्न बनाएं। दरवाजे पर सुंदर रंगोली और दीपक लगाने से सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है। पूजा कक्ष में तुलसी दल रखने से पूजा की पवित्रता और प्रभावशीलता बढ़ती है। यह देवताओं को प्रसन्न करता है और उनकी कृपा प्राप्त होती है। देवशयनी एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते इन स्थानों पर रखने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और बरकत आती है। इस दिन उपवास रखने और तुलसी की पूजा करने से भी विशेष लाभ होता है।
नई दिल्ली पिछले दस साल में देश की इकॉनमी काफी तेजी से बढ़ी है और इसके साथ ही देश में रईसों की संख्या तेजी से बढ़ी है। Henley Private Wealth Migration Report के मुताबिक 2013 से 2023 के बीच भारत में मिलिनेयर्स की संख्या में 85 फीसदी तेजी आई है। मिलिनेयर का मतलब ऐसे लोगों से है जिनकी नेटवर्थ 10 लाख डॉलर यानी 8,35,76,500 रुपये या उससे अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक 2013 से 2023 के बीच तीन देशों में मिलिनेयर्स की संख्या भारत से ज्यादा तेजी से बढ़ी। इनमें वियतनाम, चीन और मॉरीशस शामिल हैं। हालांकि वियतनाम और मॉरीशस की आबादी भारत से बहुत कम है। वियतनाम की आबादी 9.82 करोड़ और मॉरीशस की महज 12.6 लाख है। 2013 से 2023 के बीच वियतनाम में मिलिनेयर्स की संख्या में 98 फीसदी इजाफा हुआ। चाइना प्लस वन पॉलिसी के तहत कई कंपनियां चीन से बाहर शिफ्ट हुई हैं और वियतनाम को इसका अच्छा फायदा मिला है। इन दस साल में चीन में मिलिनेयर्स की आबादी में 92 फीसदी तेजी आई जबकि हिंद महासागर के द्वीपीय देश मॉरीशस में मिलिनेयर्स की संख्या में 87 फीसदी की उछाल आई। इस लिस्ट में भारत 85% के साथ चौथे नंबर पर है। यूएई 77 फीसदी के साथ पांचवें, माल्टा (74%) छठे, मोनाको (68%) सातवें, सिंगापुर (64%) आठवें, अमेरिका (62%) नौवें और न्यूजीलैंड (48%) दसवें नंबर पर है। अमेरिका का दबदबा पिछले दस साल में ताइवान में मिलिनेयर्स की आबादी में 42% तेजी आई है जबकि स्विट्जरलैंड में उनकी आबादी 38% बढ़ी है। ऑस्ट्रेलिया में मिलिनेयर्स की संख्या 35%, सऊदी अरब में 35%, पुर्तगाल में 32%, कनाडा में 29%, साउथ कोरिया में 28%, इटली में 16%, जर्मनी में 15%, फ्रांस में 14%, ग्रीस में 14% और स्पेन में छह फीसदी बढ़ी है। अगर दुनिया के टॉप अमीरों की लिस्ट पर नजर डालें तो इसमें अमेरिका का दबदबा है। टॉप 10 में अमेरिका के नौ रईस शामिल हैं। केवल फ्रांस के बर्नार्ड अरनॉल्ट इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं। एलन मस्क पहले और जेफ बेजोस दूसरे नंबर पर मौजूद हैं।
जगदलपुर बारिश के दौरान बस्तर में विजिबिलिटी कम हो जाती है और पहुंच विहीन क्षेत्र में पहुंचना मुश्किल होता है। इसलिए पुलिस के ऑपरेशन मानसून को ज्यादा आक्रामक और सफल बनाए रखने के लिए पुलिस माओवादियों की गतिविधि को यूएवी से नजर रखने की तैयारी कर रही हैं। जो नक्सल क्षेत्र के 200 किलोमीटर के दायरे में निगरानी रखेगा। साथ ही सेटेलाइट रडार से भी नजर रखने की योजना सुरक्षा बलों ने बना ली है। बता दें कि पिछले कुछ सालों से एनटीआरओ का बेस बस्तर में बनाए जाने के बाद बड़े ड्रोन से माओवादियों की गतिविधि भी कैद हो रहा है। बताया जा रहा है कि रडार का कनेक्शन सीधे सेंट्रल मॉनिटरिंग कंट्रोल रुम से होगा और नक्सल क्षेत्रों में लगे रडार अपनी तस्वीरों को सेन्ट्रल मॉनिटरिंग रूम को भेजेगा। जिसके बाद इनपुट के आधार पर नक्सल ऑपरेशन को चलाया जाएगा। इधर नक्सल क्षेत्र में यूएवी 15 हजार फीट की ऊंचाई से नजर बनाये रखेगा और बारिश में जंगल के भीतर माओवादियों के इमेज को कैप्चर भी करेगा। वहीं सुरक्षा बल अब हर तरीके से माओवादियों पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले भी जनवरी महीने से लगातार पुलिस को अत्याधुनिक संसाधनों की मदद से माओवादियों की एग्जैक्ट लोकेशन मिली जिससे ऑपरेशन सफल हुए हैं। बताया जाता है कि बस्तर में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए आसमान से नजर रखी जा रही है। रात के समय नक्सलियों के मूवमेंट और उनके ठिकानों को चिन्हाकिंत करने की क्षमता होने के कारण इसका उपयोग किया जा रहा है। नक्सल आपरेशन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सीधे टारगेट पाॅइंट को कवर करने में काफी मदद मिल रही है। नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने में योजना में कारगार साबित हो रहा है। बता दें कि पहले यह ड्रोन को दुर्ग-भिलाई के नंदनी स्थित सेंटर से उड़ान भरता था। इसके बाद में जगदलपुर शिफ्ट किया गया था। इसकी उपयोगिता को देखते हुए जम्मू और कश्मीर में पत्थरबाजी एवं आतंकवादियों से निपटने के लिए कश्मीर ले जाया गया था। 15000 फीट की ऊंचाई से निगहबानी रिमोट से उड़ान भरने वाला ईंधन चलित अत्याधिक ड्रोन एक बार में 8-10 घंटे तक उड़ान भर सकता है। वहीं करीब 1000-15000 फीट की उचांई से जंगल के अंदर की गतिविधियों को देख सकता है। इससे मिले इमेज और फ्रीक्वेंसी को कैप्चर करने के बाद नक्शे से संबंधित इलाके चिन्हाकिंत किए जा रहे हैं। सटीक जानकारी देने की क्षमता को देखते हुए राज्य के बार्डर और इसके आसपास के इलाकों को कवर किया जा रहा है। बताया जाता है कि उत्तर और दक्षिण बस्तर में नक्सलियों की गतिविधियों को देखते हुए इसका उपयोग किया जा रहा है।
नई दिल्ली भारत की जनसंख्या साल 2024 में 1,441.7 हो गई है और अगर जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार इसी तरह की रही, तो अगले 77 सालों में भारत की आबादी दोगुनी हो जाएगी. यह सूचना सामने आई है यूनाइडेट नेशन की रिपोर्ट से. यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड की नवीनतम रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तो कई सावधान करने वाले आंकड़े मौजूद हैं. यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड संयुक्त राष्ट्र की यौन और प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी है, जो लोगों को जनसंख्या वृद्धि और उससे उत्पन्न चुनौतियों के बारे में शिक्षित करती है. आखिर किस तरह भारत की आबादी अगले 77 साल में दोगुनी हो जाएगी इस जानने के लिए कुछ आंकड़ों को भी जानना बहुत जरूरी है. भारत की कुल आबादी का 68.7% 15-64 साल की आयुवर्ग का पॉपुलेशन फंड की रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल आबादी का 68.7% 15-64 साल की आयुवर्ग का है. 0-14 साल की आबादी का प्रतिशत 24.2 प्रतिशत है, जबकि 7.1 प्रतिशत आबादी 65 साल से अधिक आयुवर्ग के लोगों की है. इसमें 10-19 साल की आबादी 17 प्रतिशत है, जबकि 10-24 साल की आबादी 26 प्रतिशत है. कुल आबादी में एक महिला की औसत आयु 74 वर्ष और पुरुष की 71 साल है, वहीं एक महिला पर कुल प्रजनन दर 2 है, यानी औसतन एक महिला दो बच्चों को जन्म देती है. भारत की आबादी अगले 77 सालों में दोगुनी हो जाएगी यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फंड की रिपोर्ट को अगर सच मानें तो आंकड़े यह कहते हैं कि भारत की आबादी अगले 77 सालों में दोगुनी हो जाएगी. हालांकि भारत में प्रजनन दर में गिरावट आई है, लेकिन जो आबादी है वो धीरे-धीरे बड़ी हो रही है और लड़कियां प्रजनन की उम्र में प्रवेश करती जाती हैं, इसलिए प्रजनन दर कम होने के बावजूद भी जनसंख्या वृद्धि जारी रहती है. भारत की जनसंख्या में वृद्धि की एक और बड़ी वजह मृत्यु दर में कमी आना है. संस्थागत प्रसव यानी डाॅक्टर्स की देखरेख में प्रसव की संख्या में वृद्धि होने की वजह से भी जनसंख्या में वृद्धि दर्ज हो रही है. संस्थागत प्रसव के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में साल 2004 से 2020 के बीच 89 प्रतिशत प्रसव कुशल और ट्रेंड लोगों की देखरेख में हुए हैं. इसका परिणाम यह हुआ है कि प्रति एक लाख बच्चों पर 103 बच्चों की मौत प्रसव के दौरान हो रही है. यह आंकड़ा पहले के आंकड़ों से बेहतर है. बात अगर परिवार नियोजन की करें, तो देश में 15-49 साल की 78 प्रतिशत महिलाएं परिवार नियोजन के आधुनिक तरीके अपनाती हैं. वहीं अगर किसी भी तरीके की बात करें तो 51 प्रतिशत महिलाएं परिवार नियोजन के तरीकों को अपना रही हैं. वहीं विवाहित और विवाह योग्य महिलाओं में यह आंकड़ा 68 प्रतिशत का है. परिवार नियोजन के आधुनिक तरीकों से संतुष्टि की अगर बात करें तो यह 78 प्रतिशत है. 103 वर्ष पहले 1 करोड़ 39 लाख लोग थे जानकारी के अनुसार, 103 वर्ष पहले मध्यप्रदेश की जनसंख्या 1 करोड़ 39 लाख थी। अब हर साल 15 लाख से ज्यादा लोग राज्य में बढ़ रहे हैं। यही आंकड़ा धीरे-धीरे बढ़ते हुए 8 करोड़ 45 लाख से अधिक हो गया है। अब एमपी की मौजूदा जनसंख्या की तुलना थाईलैंड, फ्रांस, इटली और साउथ अफ्रीका जैसे देशों की कुल आबादी से की जाए तो भी मध्यप्रदेश ही आगे है। इन चार देशों को पीछे छोड़ा आपको बता दें कि थाईलैंड की आबादी 7 करोड़ 17 हजार, फ्रांस की जनसंख्या 6 करोड़ 8 हजार, इटली की आबादी 5 करोड़ 89 हजार और साउथ अफ्रीका की पॉपुलेशन 5 करोड़ 99 हजार के आसपास है। मतलब अपना मध्यप्रदेश इन देशों से आगे निकल चुका है। आबादी बढ़ने की रफ्तार यही रही तो इस बात की पूरी संभावना है कि मध्यप्रदेश की जनसंख्या अगले डेढ़ दशक में 10 करोड़ से भी ज्यादा हो जाएगी। क्या कहते हैं प्रदेश और देश के आंकड़े प्रदेश में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या भी बढ़ रही है। 2011 की जनगणना के मुताबिक तब प्रदेश में उम्रदराज लोगों की आबादी कुल जनसंख्या में 7.5 फीसदी थी, जो 2021 में बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गई। वर्ष 2011 में राज्य में 52 फीसदी यानी 3.76 करोड़ पुरुष और 48 प्रतिशत यानी 3.50 करोड़ महिलाएं थीं। 10 वर्ष बाद यानी 2021 में पुरुषों का प्रतिशत 51.6, जबकि महिलाओं का 48.4 हो गया। मध्यप्रदेश में टू चाइल्ड पॉलिसी मतलब ‘हम दो, हमारे दो’ का नियम वर्ष 2001 से 2005 तक माना गया। इसमें तीसरा बच्चा होने पर व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होता था। बाद में विवाद हुआ तो सरकार ने इसे हटा दिया। देश की बात करें तो भारत ने इसी साल आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ा है। UNFPA की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जनसंख्या 77 वर्षों में दोगुनी हो गई है। यानी अब 144 करोड़ 17 लाख से ज्यादा भारतीय हैं। UNFPA की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की कुल आबादी का 24 प्रतिशत हिस्सा 0 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का है। 15 से 64 वर्ष आयुवर्ग की आबादी सबसे ज्यादा 64 फीसदी है। जनसंख्या वृद्धि और चुनौतियां ये आंकड़े इस बात के प्रमाण हैं कि देश में जनसंख्या वृद्धि कई तरह की चुनौतियों को पेश कर सकते हैं. जनसंख्या के लिहाज से भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है, चीन को भारत ने अप्रैल 2023 में ही पीछे छोड़ दिया था. वहीं क्षेत्रफल की बात करें तो भारत सातवें नंबर पर है. विश्व की कुल आबादी का 17.76 प्रतिशत भारत में रहता है, जबकि विश्व के कुल क्षेत्रफल का मात्र 2. 4 प्रतिशत भारत के हिस्से में है. इस वजह से कई तरह की चुनौतियों हमारे सामने खड़ी हैं, जिसमें रोजगार की समस्या, संसाधनों की समस्या, गरीबी की समस्या और पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं स्पष्ट तौर पर सामने नजर आ रही हैं. सेक्सुअल हेल्थ में भारत 30 साल में सबसे बेहतर UNFPA की इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में सेक्सुअल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ 30 सालों के सबसे बेहतर स्तर पर है। यही कारण है कि डिलीवरी के दौरान होने वाली मौतों की संख्या में भी गिरावट आई … Read more
रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज छत्तीसगढ़ के प्रवास पर आए 16वें वित्त आयोग के साथ बैठक में राज्य की विशेष परिस्थितियों एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ को विशेष अनुदान देने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ नवोदित राज्य है, जो जनजातीय बहुल, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से घिरा एवं माओवाद प्रभावित है। छत्तीसगढ़ को विकसित राज्यों की बराबरी में लाने के लिए अधिक वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी। बैठक में 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया, उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव और श्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, जल संसाधन मंत्री श्री केदार कश्यप, उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, वित्त आयोग के सदस्य श्री अजय नारायण झा, श्रीमती एन्नी जार्ज मैथ्यू, डॉ. मनोज पांडा, डॉ. सौम्यकांति घोष, सचिव श्री रित्विक पांडे सहित दल के सदस्य उपस्थित थे। बैठक में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं, साथ ही माओवाद पर अंकुश लगाने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। इन क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अधोसंरचना विकास के कार्यों में अतिरिक्त व्यय भार आता है। नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्रीय वित्त आयोग से राज्य को अधिक वित्तीय सहायता की अनुशंसा की जाती है, तो निश्चित ही पिछड़े इलाकों में लोकहित के कार्यों को बड़े पैमाने पर किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि देश तेजी से आर्थिक महाशक्ति बन रहा है और इसके लिए छत्तीसगढ़ भी पूरी मेहनत से काम कर रहा है। विकसित भारत के साथ ही विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण हम करेंगे। हमारी अपेक्षा है केंद्रीय वित्त आयोग छत्तीसगढ़ के हमारे विजन को अमल में लाने के लिए अधिक वित्तीय सहायता प्रदान करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कठिन भौगोलिक परिस्थ्तिियों के कारण रेल, सड़क, दूरसंचार, ऊर्जा, सिंचाई की परियोजनाओं की लागत एवं समय-सीमा में वृद्धि के कारण हमें अतिरिक्त व्यय भार वहन करना पड़ रहा है। खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरण को होने वाली क्षति और लोगों पर स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों से निपटने के लिए हमें अतिरिक्त धनराशि खर्च करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जीएसटी खपत एवं गन्तव्य आधारित कर प्रणाली के कारण खनन गतिविधियों का वास्तविक लाभ छत्तीसगढ़ को न मिलकर उन राज्यों को मिल रहा है जहां खनिजों का वैल्यू-एडिशन हो रहा है और खनिजों की खपत हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन के समय मात्र 29 हजार 539 करोड़ रुपए की छोटी सी अर्थव्यवस्था के साथ इस राज्य ने शुरूआत की थी। वर्ष 2023-24 में राज्य 5 लाख 9 हजार करोड़ रुपए के जीएसडीपी के लक्ष्य को प्राप्त कर चुका है। आने वाले पांच वर्षों में हम जीएसडीपी के आकार को दोगुना करने के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी योजनाएं जिनका संचालन केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के अंशदान से हो रहा है, उनमें केन्द्र सरकार से मिलने वाली राशि का अनुपात बढ़ाया जाए। केंद्रीय वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविन्द पनगढ़िया ने छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति की रफ्तार की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रदेश में तेजी से प्रगति हो रही हैै। नवा रायपुर को बहुत सुन्दर और व्यवस्थित तरीके से बसाया गया है। छत्तीसगढ़ बहुत ही सुन्दर राज्य है। विकसित भारत एवं विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के संकल्प को पूरा करने के लिए मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ मंे राजकोषीय स्थिरता के साथ आर्थिक वृद्धि एवं सामाजिक सूचकांकों में तेजी से सुधार हुआ है। छत्तीसगढ़ एक नवोदित एवं तेजी से बढ़ता राज्य है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के संबंध में कहा कि यहां का सबसे बड़ा संसाधन मानव शक्ति है। जिनको मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के लिए स्किल्ड बनाना होगा। वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने राज्य के वित्तीय परिदृश्य पर प्रस्तुतीकरण देते हुए कहा कि नवा रायपुर को ग्रीन स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां अधोसंरचना विकास के लिए केन्द्र से और अधिक संसाधन मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ निर्धारित मापदंडों के अनुसार वित्तीय अनुशासन का पालन कर रहे हैं और आगे भी इसे जारी रखेंगे। कर प्रणाली में आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग कर लीकेज को समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने केन्द्रीय वित्त आयोग द्वारा केन्द्र और राज्यों के बीच करों के बटवारें के मापदंडों के बारे में महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उप मुख्यमंत्रियों और मंत्रिगणों ने भी वित्त आयोग के समक्ष अपने विभाग से संबंधित योजनाओं की जानकारी देते हुए अधिक संसाधन उपलब्ध कराने का आग्रह किये। मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन ने स्वागत भाषण दिया। पुलिस महानिदेशक श्री अशोक जुनेजा ने पुलिस बल के लिए संसाधनों की आवश्यकताओं पर तथा एनआरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सौरभ कुमार ने नवा रायपुर की परियोजनाओं के लिए संसाधनों की जरूरतों पर प्रस्तुतीकरण दिया।
मुंबई देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को लेकर बड़ी खबर आई है. विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) ने गुरुवार 11 जुलाई को एक रिपोर्ट में मुकेश अंबानी के जियो को लेकर प्लान का खुलासा किया है. जेफरीज के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम (Reliance Jio IPO) का आईपीओ अगले साल आ सकता है. ये एक मेगा IPO होगा. इसमें कंपनी की वैल्यूएशन 9.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है. ये आंकलन आज के डॉलर भाव (एक डॉलर- 83.49 रुपये) के आधार पर निकाला गया है. कब आएगा रिलायंस जियो का IPO? रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में रिलायंस जियो 112 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर सूचीबद्ध हो सकता है और इससे RIL के शेयर में 7 से 15 फीसदी तक उछाल आ सकता है. इसके अलावा, जेफरीज ने कहा कि पूरा रिलायंस जियो का पूरा आईपीओ ऑफर-फॉर-सेल (OFS) हो सकता है, जिसके जरिए माइनॉरिटी शेयरधारक कंपनी के शेयरों में अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक जियो के आईपीओ की धमाकेदार लिस्टिंग हो सकती है. इस बीच कंपनी ने मोबाइल टैरिफ में बढ़ोतरी के साथ ही अपने 5G कारोबार को भुनाने की दिशा में आगे बढ़ी है. जानकारों के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज की अगले महीने संभावित AGM में जियो की आईपीओ के बारे में तस्वीर साफ हो सकती है. ये हो सकता है कंपनी का प्लान लिस्टिंग के बाद जियो टेलीकॉम में रिलायंस की हिस्सेदारी घटकर 33.3% रह जाएगी. जबकि जियो फाइनेंशियल के मामले में रिलायंस की हिस्सेदारी लिस्टिंग पर 45.8% थी. जियो में 33.7% माइनोरिटी स्टेक के साथ रिलायंस इसमें 10% को लिस्ट करके आईपीओ की जरूरत को भी पूरा कर सकता है. RIL के शेयरों में तेजी की संभावना इस बीच ब्रोकरेज ने रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों पर ‘Buy’ की रेटिंग बरकरार रखी है और इसका टारगेट प्राइस 3,580 रुपये प्रति शेयर तय किया है. यह बुधवार के बंद भाव से करीब 13 प्रतिशत ज्यादा है, वहीं इस साल अब तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में करीब 22 फीसदी की तेजी आ चुकी है. ब्रोकरेज ने कहा कि इस बात की संभावना है कि रिलायंस पहले स्पिन-ऑफ प्रक्रिया के जरिए जियो को अलग करे और फिर प्राइस डिस्कवरी सिस्टम के जरिए इसे शेयर बाजार में लिस्ट कराए. घरेलू और विदेशी दोनों निवेशक स्पिन-ऑफ के जरिए ही जियो की लिस्टिंग के पक्ष में हैं. इससे पहले अगस्त 2023 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी फाइनेंशियल सर्विस यूनिट, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज को इसी तरह स्पिन-ऑफ करके प्राइस डिस्कवरी सिस्टम के जरिए शेयर बाजार में लिस्ट कराया था.