पुरुष मानसिक स्वास्थ्य एनजीओ द्वारा बैतूल में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर सफल कार्यक्रम का आयोजन आयोजित किया, सौपा ज्ञापन ।
Male Mental Health NGO organized a successful program on World Suicide Prevention Day in Betul, submitted a memorandum. हरिप्रसाद गोहे आमला। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर SIF बैतूल द्वारा बैतूल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य पुरुषों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर जागरूकता फैलाना था। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. संदीप गोहे , संस्थापक SIF बैतूल, द्वारा किया गया, जो पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी विशेषज्ञ हैं। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा, “यह जरूरी है कि हम आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर ध्यान दें और पुरुषों को मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करें। आत्महत्या के पीछे के मानसिक कारणों को समझना और समय पर सहायता लेना अत्यावश्यक है।” कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बिश्वजीत मण्डल की व्यक्तिगत कहानी रही, जिन्होंने अपने जीवन के संघर्षों को साझा किया। उन्होंने बताया कि 12 साल के वैवाहिक जीवन के बाद उनकी पत्नी ने उन्हें और उनके बच्चे को छोड़ दिया, जिससे वे गहरे अवसाद में चले गए और आत्महत्या का प्रयास किया। उनके मकान मालिक की सतर्कता से उनकी जान बची, और बाद में SIF बैतूल से जुड़कर उन्हें मानसिक सहायता मिली। उन्होंने कहा, “एनजीओ से जुड़ने के बाद मुझे मानसिक रूप से बहुत सहारा मिला, और अब मैं अपने जीवन को बेहतर तरीके से जी पा रहा हूँ।” इसके अलावा, SIF बैतूल द्वारा पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने और सरकारी कदम उठाने के लिए जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया गया: 1. मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना : पुरुषों के लिए विशेष मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना का अनुरोध किया गया है, ताकि वे अपनी समस्याओं का समाधान गोपनीय और सुरक्षित रूप से प्राप्त कर सकें। 2. मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान : पुरुषों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए सरकार से अनुरोध किया गया कि वे व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं। 3. झूठे आरोपों के मामलों का त्वरित निपटारा : झूठे मामलों में फंसे पुरुषों के लिए एक विशेष आयोग या त्वरित न्यायिक प्रणाली की स्थापना की मांग की गई है। 4. मानसिक स्वास्थ्य योजनाओं का विस्तार : पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष सरकारी योजनाओं का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। कार्यक्रम के अन्य आकर्षणों में शामिल थे: विशेषज्ञ व्याख्यान : मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आत्महत्या के कारणों और बचाव के तरीकों पर गहन चर्चा की। व्यक्तिगत अनुभवों का आदान-प्रदान : कई प्रतिभागियों ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए, जिनसे आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली। कार्यशालाएं और समूह चर्चाएं : इन सत्रों में मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-संरक्षण के उपायों पर चर्चा की गई, जिनमें तनाव प्रबंधन, परिवार और समाज का सहयोग जैसे विषयों को कवर किया गया। पुलिस ग्राउंड में हुए इस कार्यक्रम में भारी संख्या में लोगों ने भाग लिया। सभी ने इस प्रयास की सराहना की और इस बात पर सहमति जताई कि पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की अत्यंत आवश्यकता है। सौपा ज्ञापन कार्यक्रम के दौरान, SIF बैतूल द्वारा पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने और सरकार से आवश्यक कदम उठाने के लिए एक ज्ञापन बैतूल जिला कलेक्टर और बैतूल SP को सौंपा गया। इस ज्ञापन में मुख्यतः निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया: 1. मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना : पुरुषों के लिए विशेष मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की मांग की गई है, जहां वे गोपनीय और सुरक्षित रूप से मानसिक समस्याओं का समाधान पा सकें। 2. मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान : सरकारी स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का अनुरोध किया गया, ताकि समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो सके। 3. झूठे आरोपों के मामलों का त्वरित निपटारा : झूठे आरोपों में फंसे पुरुषों के लिए एक विशेष आयोग या त्वरित न्याय प्रणाली की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया गया है। 4. मानसिक स्वास्थ्य योजनाओं का विस्तार : पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष योजनाओं का विस्तार और परामर्श सेवाओं की उपलब्धता पर जोर दिया गया। डॉ. संदीप गोहे ने कार्यक्रम के समापन पर कहा, हमारा उद्देश्य है कि समाज में कोई भी व्यक्ति अपने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अकेला महसूस न करे। आज का यह कार्यक्रम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और समाज में हर व्यक्ति को इस पर सतर्क रहना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की त्रासदी को रोका जा सके।