किसान आंदोलन, कृषि कानून; क्या बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ा रहीं कंगना रनौत ?
Farmers movement, agricultural law; Is Kangana Ranaut creating problems for BJP? भोपाल ( कमलेश )। हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद कंगना रनौत के बयान बीजेपी के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। कुछ ही समय में कंगना ने ऐसे दो बयान दिए हैं, जिससे बीजेपी ने तुरंत किनारा कर लिया। साथ ही यह भी साफ कर दिया कि वह बीजेपी की ओर से बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हैं। पहले किसान आंदोलन और फिर अब तीनों कृषि कानूनों को लेकर कंगना ने जो कहा है, उससे पार्टी के अंदर भी उनके खिलाफ सुर उठने लगे हैं। कृषि कानूनों को लेकर कंगना रनौत ने पहले कहा कि मुझे पता है कि विवाद होगा, लेकिन मुझे लगता है कि निरस्त किए गए तीन कृषि कानूनों को वापस लाया जाना चाहिए। किसानों को भी इसकी मांग करनी चाहिए। हालांकि, विवाद बढ़ने पर कंगना ने खेत जताते हुए अपने शब्दों को वापस ले लिया। कंगना के बयान से बीजेपी को हरियाणा विधानसभा चुनाव में नुकसान होने की संभावना जताई जा रही थी। कंगना के बयान से हरियाणा में हो सकता था नुकसान हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए पांच अक्टूबर को सभी 90 सीटों पर वोटिंग है, जिसके नतीजे आठ अक्टूबर को आएंगे। राज्य में पिछले एक दशक से बीजेपी की सरकार होने से पार्टी को पहले से ही एंटी इनकमबेंसी का सामना करना पड़ रहा है। अग्निवीर, किसान संबंधी मुद्दे, बेरोजगारी आदि को लेकर राज्य की जनता में बीजेपी सरकार के खिलाफ कई बार नाराजगी भी देखी गई है। वहीं, टिकट कटने की वजह से बीजेपी कई नेताओं की बगावत भी झेल रही। ऐसे में चुनावी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कंगना के तीनों कृषि कानूनों को वापस लाने की मांग करने वाला बयान हरियाणा में बीजेपी को और नुकसान पहुंचा सकता था। यही देखते हुए बीजेपी ने कंगना के बयान का खंडन करते हुए कहा कि यह उनका निजी बयान है। कुछ साल पहले दिल्ली की सीमाओं पर हुए किसान आंदोलन के समय पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा के भी बड़ी संख्या में किसान आंदोलन के लिए लंबे समय तक बैठे थे। इसके बाद पीएम मोदी ने कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था। कांग्रेस ने मारा मौके पर चौका जैसे ही कृषि कानूनों पर कंगना रनौत ने बयान दिया, कांग्रेस ने मौके पर चौका मारते हुए उसे हरियाणा चुनाव में भुनाने की तैयारी शुरू कर दी। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने विभिन्न रैलियों में कंगना के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि वह इन कृषि कानूनों को फिर से वापस नहीं आने देंगे। दीपेंद्र हुड्डा ने रैली में कहा, “750 किसानों ने अपनी शहादत देकर MSP और मंडी प्रणाली को भाजपा की तानशाही सरकार से बचाया है। काले कृषि कानून वापस लाने के मंसूबे रखने वाले तमाम भाजपा सांसदों को हमारी चुनौती है कि हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद देश में ऐसी कोई ताकत नहीं जो ये कानून वापस लागू कर सके।” कांग्रेस के ओर से मुद्दा उठाए जाने के बीच बीजेपी ने भी कंगना के बयान से अपने आप को अलग किया। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, “बीजेपी सांसद कंगना रनौत का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह बयान उन 3 कृषि कानूनों से संबंधित है, जिन्हें पहले बीजेपी सरकार ने रद्द कर दिया था। इस प्रकार, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह बयान कंगना रनौत के व्यक्तिगत विचारों को दर्शाता है और किसी भी तरह से 3 कृषि कानूनों से संबंधित बयान में बीजेपी के विचारों को नहीं दर्शाता। मुझे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि कंगना रनौत को बीजेपी द्वारा 3 कृषि कानूनों के विषय पर बोलने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है।”