LATEST NEWS

वाहन पंजीकरण, लाइसेंस और परमिट का दिल्ली में जल्द होगा डिजिटलीकरण

नई दिल्ली  दिल्ली में जल्द ही ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) और वाहनों के पंजीकरण प्रमाणपत्र (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) (आरसी) डिजिटल हो सकते हैं। राज्य सरकार वाहन मालिकों को सत्यापन प्रक्रिया (वेरिफिकेशन प्रोसेस) और अन्य उद्देश्यों के लिए इसे आसान बनाने के लिए डिजिटल डीएल और डिजिटल आरसी पेश करने की योजना बना रही है। इस कदम का मकसद राष्ट्रीय राजधानी में ड्राइविंग लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने में होने वाली देरी को कम करना है, जहां दोनों दस्तावेज इस समय भौतिक कार्ड में जारी किए जाते हैं। डीएल और आरसी के इलेक्ट्रॉनिक वर्जन को आधार कार्ड की तरह इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्टोर (संग्रहीत) किया जा सकता है और विभिन्न स्मार्टफोन एप के जरिए सुलभ होगा।   डिजिटल दस्तावेजों के फायदे बता दें कि डिजिटल डीएल और आरसी को आधार कार्ड की तरह इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्टोर किया जा सकेगा और स्मार्टफोन एप्स के माध्यम से सुलभ बनाया जाएगा। इस प्रक्रिया से भौतिक कार्ड की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी, जिससे वाहन मालिकों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने हाल ही में फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के अधिकारियों के साथ बैठक में इस योजना पर चर्चा की। गहलोत ने कहा, “हम पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सहज और सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भौतिक आरसी से डिजिटल वर्जन में शिफ्ट होने से प्रशासनिक देरी कम होगी।” डीएल और आरसी पीडीएफ फॉर्मेट में डिजिटल डीएल और आरसी पीडीएफ फॉर्मेट में ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। वाहन मालिक अपने स्मार्टफोन के माध्यम से इन्हें डाउनलोड और प्रिंट कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, ये दस्तावेज DigiLocker या mParivahan जैसे एप्स पर अपलोड किए जा सकेंगे। प्रत्येक डिजिटल दस्तावेज में एक विशिष्ट आईडी और क्यूआर कोड होगा, जो दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा सत्यापन के दौरान उपयोग किया जाएगा। मौजूदा स्थिति वर्तमान में, वाहन मालिकों को भौतिक कार्ड में ड्राइविंग लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त होते हैं। मार्च 2021 में दिल्ली ने डीलरों द्वारा वाहनों का सेल्फ-रजिस्ट्रेशन शुरू किया, जिसके तहत अब तक 15 लाख से अधिक आरसी जारी किए जा चुके हैं।

उत्तराखंड में होटल और ढाबा कर्मचारियों के पुलिस वैरिफिकेशन को अनिवार्य किया, नहीं तो लगेगा 1 लाख का जुर्माना

देहरादून उत्तराखंड सरकार ने  खाने में थूकने से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. उन्होंने ऐसा करने वालों पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने की घोषणा की है. इसके साथ ही होटल और ढाबा कर्मचारियों के पुलिस वैरिफिकेशन को अनिवार्य किया गया है और उनकी रसोई में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का आदेश है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ऐसी घटनाओं पर चिंता जताए जाने के कुछ दिनों बाद राज्य पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने अलग-अलग दिशानिर्देश जारी किए और कहा कि अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. हाल ही में मसूरी में दो लोगों को पर्यटकों को जूस परोसने से पहले गिलासों में कथित तौर पर थूकने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इसके अलावा देहरादून से एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें एक रसोइये को रोटी के लिए आटा बनाते समय कथित तौर पर थूकते हुए देखा जा सकता है. ‘किसी भी तरह की अशुद्धता बर्दाश्त नहीं’   स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि आने वाले त्योहारी सीजन के दौरान खाने की सुरक्षा और शुद्धता उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. रावत ने कहा, त्योहारों के दौरान किसी भी तरह की अशुद्धता या असामाजिक गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी.पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार ने अपराधियों को मुख्यमंत्री की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए जिला पुलिस प्रमुखों को दिशानिर्देश जारी किए. ‘व्यापार प्रबंधकों की रसोई में हों CCTV’ दिशानिर्देशों में कहा गया है कि होटल और ढाबों जैसे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले लोगों का 100 प्रतिशत वैरिफिकेशन किया जाना चाहिए, साथ ही व्यापार प्रबंधकों को अपनी रसोई में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. खूफिया यूनिट की मदद से कार्ट्स की निगरानी जिला पुलिस को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, खोखे और पुशकार्ट जैसी खुली जगहों पर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वे स्थानीय खूफिया यूनिट की मदद ले सकते हैं.दिशानिर्देशों में कहा गया है कि गश्त के दौरान इस पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए. होटलों और ढाबों की होगी रैंडम चेकिंग प्रावधानों के मुताबिक पुलिस होटलों और ढाबों पर रैंडम चेकिंग के लिए स्वास्थ्य और खाद्य विभाग की मदद भी ले सकती है. डीजीपी ने कहा कि अपराधियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 274 (बिक्री के लिए खाद्य और पेय पदार्थों में मिलावट) और उत्तराखंड पुलिस अधिनियम की धारा 81 (सार्वजनिक उपद्रव पैदा करने, जानबूझकर अफवाह फैलाने या गलत अलार्म पैदा करने के लिए बिना वारंट के गिरफ्तारी) के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए.   यदि अधिनियम का धर्म, जातियता, भाषा आदि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो प्रासंगिक धारा 196 (1) (बी) (धर्म, जाति, भाषा, जन्म स्थान के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) या बीएनएस की धारा 299 (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य जिनका उद्देश्य भारत में नागरिकों के किसी भी वर्ग के धार्मिक विश्वासों या धर्म का अपमान करना है) के तहत भी कार्रवाई की जानी चाहिए. 1 लाख रुपये तक के जुर्माने सहित सख्त कार्रवाई दिशानिर्देशों में कहा गया है कि स्वास्थ्य और खाद्य विभाग, नगर निगम/जिला पंचायत, नगर परिषदों और स्थानीय लोगों के समन्वय से एक जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाना चाहिए.स्वास्थ्य सचिव और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त आर राजेश कुमार ने एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की, जिसमें अपराधियों के खिलाफ 25,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के जुर्माने सहित सख्त कार्रवाई का आदेश दिया गया है. कुमार ने कहा कि देहरादून और मसूरी में होटलों और ढाबों जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों में थूकने की घटनाओं के वीडियो का संज्ञान लेते हुए और मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में दिशानिर्देश जारी किए गए हैं.इधर मंगलवार को, पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ने कहा कि वह थूकने या किसी अन्य मानव अपशिष्ट को मिलाकर भोजन को प्रदूषित करने को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बनाने के लिए दो अध्यादेश लाएगी.    

उज्जैन से मक्सी के बीच 36 किलोमीटर लंबा है ये रास्ता, मार्गों को चौड़ा करने के साथ 14 नए पुल भी बनाए जाएंगे

उज्जैन उज्जैन-मक्सी टू-लेन रोड 704 करोड़ रुपये से फोरलेन सड़क में तब्दील किया जाएगा। उज्जैन शहरी क्षेत्र में आइटीआई के सामने इंदौर रेल सेक्शन पर बने रेलवे ओवर ब्रिज के समानांतर एक ओर पुल बनाया जाएगा। सड़क निर्माण के लिए पांच महीने पहले मिली प्रशासकीय स्वीकृति के बाद डीपीआर और फिजिबिलिटी सर्वे का काम पूर्ण होने की कगार पर है। वर्तमान में मार्ग पर यूजर फी योजना अंतर्गत महिला स्वसहायता समूह द्वारा टोल टैक्स का संचालन हो रहा है। मालूम हो कि मध्यप्रदेश की सरकार उज्जैन में औद्योगिकी पारिस्थति तंत्र का निर्माण करने के लिए शहर के सभी पहुंच मार्गों को फोरलेन सड़क में बदल रही है। ये फोरलेन भी हैं प्रस्तावित आगर रोड, देवास रोड का निर्माण हो चुका है। गरोठ, बड़नगर-बदनावर रोड का निर्माण प्रगति पर है। इंदौर रोड़ को सिक्सलेन में बदलने को भी धरातल पर पिछले महीने काम शुरू करवा दिया गया है। अगले चरण में 36 किलोमीटर लंबा मक्सी रोड, 44 किमी लंबा उन्हेल-नागदा-जावरा रोड, 49 किलोमीटर लंबा नया इंदौर रोड फोरलेन (चिंतामन गणेश से इंदौर एयरपोर्ट तक) सड़क मार्ग बनाना प्रस्तावित है। 14 पुल भी बनाने की तैयारी ये सारा काम कराने को मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम ने योजना बनाई है जो सिंहस्थ- 2028 की कार्य योजना का हिस्सा है। कहा गया है कि उज्जैन में ट्रांसपोर्टेशन, यातायात की सुविधा सुलभ होगी तो उज्जैन तेजी से विकास करेगा। यहां उद्योग स्थापित करने को बड़े-बड़े समूह भी निवेश करेंगे। इसलिए विभिन्न मार्गों को चौड़ा करने के साथ 14 नए पुल बनाने की भी तैयारी की जा रही है। तीन पुल निर्माण के लिए ठेकेदार फर्म का चयन करने की कार्रवाई प्रक्रियाधिन है। ये पुल फ्रीगंज क्षेत्र में चामुंडा माता मंदिर चौराहे से फ्रीगंज के बीच, तीन बत्ती चौराहे से मुल्लापुरा मार्ग पर, लालपुल के समीप शिप्रा नदी पर बनाना प्रस्तावित है। सारा निर्माण कार्य 2028 में लगने वाले महाकुंभ सिंहस्थ से पहले कराने का लक्ष्य रखा गया है। इंदौर रोड सिक्सलेन के लिए मिट्टी परीक्षण का काम शुरू इदौर रोड सिक्सलेन निर्माण का निर्माण 735 करोड़ रुपये से होना है, जिसकी शुरुआत करने से पहले मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) से अनुबंधित ठेकेदार फर्म उदयपुर की रवि इन्फ्राबिल्ड ने मिट्टी परीक्षण कराना शुरू किया है। पिछले माह इंदौर क्षेत्र में ये काम किया था अब उज्जैन में किया जा रहा है। 46.475 किलोमीटर लंबे मार्ग में दो वृहद पुल, दो फ्लाई ओवर, छह अंडरपास बनाया जाना है। पुल, फ्लायओवर बनाने के लिए नींव स्तर पर कितनी खोदाई करना होगी, किस डिजाइन के कितनी लोडिंग क्षमता के बीम-काम खड़े करना होंगे, इसके लिए मिट्टी परीक्षण यानी जियो टेक्निकल सर्वेक्षण कार्य किया जा रहा है। टीम ने त्रिवेणी शनि मंदिर के समीप शिप्रा नदी पर बने पुल के समक्ष नया पुल बनाने के लिए यहां जमीनी सर्वे की शुरूआत की।

जंग की त्रासदी से जूझते गाजा में शवों को अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं हो रहा, लाशों को कुत्ते नोच रहे

गाजा इजरायल और हमास के बीच जंग छिड़े अब एक साल से भी ज्यादा का समय बीत चुका है। पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास के इजरायल पर हमले के बाद से गाजा में संघर्ष जारी है। अब युद्धग्रस्त गाजा से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में आवारा कुत्ते लावारिश शवों को खाते नजर आ रहे हैं। गाजा के आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख फारेस अफाना ने बताया है कि उन्हें और उनके सहयोगियों को उत्तरी गाजा में मारे गए फिलिस्तीनियों के शव मिले हैं जिनमें से कई पर जानवरों द्वारा शवों को खाए जाने के निशान हैं। फारेस अफाना ने सीएनएन को बताया, “भूखे आवारा कुत्ते सड़क पर इन शवों को खा रहे हैं। इससे हमारे लिए शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है।” उन्होंने उत्तरी गाजा और जबालिया क्षेत्र में हवाई और जमीनी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि इजरायली सेना का कहर जारी है। अब त्रासदी से जूझते गाजा में शवों को अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं हो पा रहा है। वहीं इजरायल ने दावा किया है कि हमास के लड़ाके इन इलाकों में फिर से संगठित हो रहे हैं। ‘स्थिति बदतर होती जा रही है’ पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर हमला किया था। इन हमलों में 1,206 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें से ज़्यादातर आम लोग थे। तब से इजरायल के हमले में गाजा में 42,409 लोग मारे गए हैं वहीं 99,153 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बुधवार को गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि पिछले 24 घंटों में इजरायली सैन्य हमलों में 65 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। अफ़ाना ने बताया कि सोमवार को इजरायली सैनिकों ने फिलिस्तीन शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी (UNRWA) द्वारा संचालित एक राहत शिविर केंद्र में खाने की तलाश कर रहे भूखे लोगों पर गोलीबारी की है। उन्होंने कहा, “स्थिति बदतर होती जा रही है। उत्तरी गाजा में जो हो रहा है वह वास्तव में नरसंहार है।” गाजा में अकाल का डर इस बीच UNRWA ने गाजा में अकाल के जोखिम की चेतावनी दी है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में UNRWA के प्रमुख फिलिप लाज़ारिनी ने कहा है कि गाजा में अकाल और तीव्र कुपोषण की संभावना बनी हुई हैं।” उन्होंने कहा कि यह एक तरह की बंजर जमीन बन गई है और यह जगह रहने लायक भी नहीं है”।

कांग्रेस ने खाद संकट पर घेरा, दिग्विजय सिंह-जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से मांगे जवाब

Congress surrounded on fertilizer crisis, Digvijay Singh-Jitu Patwari sought answers from CM Mohan Yadav मध्य प्रदेश में में चल रहे खाद संकट को लेकर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने मौजूदा सरकार पर बड़ा हमला बोला है. दोनों नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनसे कुछ सवाल भी किए हैं. मध्य प्रदेश में खाद संकट को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार (17 अक्तूबर) को भोपाल में एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य में चल रहे खाद संकट को लेकर कांग्रेसी नेताओं ने मौजूदा सरकार पर बड़ा हमला बोला और उनसे कुछ सवाल भी किए. उन्होंने कहा, देश में डीएपी (खाद) की किल्लत सरकार की नीतियों के कारण है. वर्तमान में देश में 100 लाख टन डीएपी (खाद) की आवश्यकता है, जिसमें से देश में 4 लाख टन प्रति माह का उत्पादन होता है. इसके लिए कच्चा माल भी आयात करना पड़ता है. आयात में समस्या से 20 फीसदी करीब कम उत्पादन हुआ है, बाकी लगभग 5 लाख टन डीएपी का आयात होता, तब जाकर हमारी आवश्यकता पूरी हो रही है. इस साल देश में अप्रैल से अगस्त तक 16 लाख टन करीब डीएपी आया था, जबकि पिछले साल 32.5 लाख टन का आयात हुआ था, जो 16.5 लाख टन यानी 50 फीसदी कम है. मध्य प्रदेश में डीएपी की 9 लाख टन से ज्यादा की जरूरत है, जिसके एवज में अभी तक मध्य प्रदेश में लगभग 4.5 लाख टन डीएपी आया है, बाकी 5 से 6 लाख टन की कमी है. कांग्रेस नेताओं ने क्या कहा?उन्होंने कहा, अगले 15 दिन मध्य प्रदेश के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. बड़े रकबे में बुवाई एक साथ शुरू होगी. सरकार डीएपी की जगह एनपीके (खाद) डालने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. डीएपी में 18 फीसदी नाइट्रोजन और 46 फीसदी फास्फोरस होता है. यदि डीएपी की जगह एनपीके देते हैं तो 6 लाख टन डीएपी की कमी को पूरा करने के लिए 9 लाख टन एनपीके की जरुरत रहेगी. जबकि अभी तक कुल 3 लाख टन डीएपी आया है, जो पिछले साल से 1 लाख टन कम है. मतलब 350 रैक सिर्फ एनपीके चाहिए. यह इस बात का प्रमाण है कि मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री के जिले मुरैना में 24,500 मीट्रिक टन डीएपी की डिमांड है. इसके मुकाबले किसानों के लिए महज 8,247 मीट्रिक टन डीएपी ही उपलब्ध है. मतलब कृषि मंत्री के क्षेत्र में 33 फीसदी खाद आपूर्ति हुई है. 25 सितम्बर को प्रकाशित खबर के अनुसार जब कृषि मंत्री के क्षेत्र के ये हाल हैं तो बाकी जगह कितनी उपलब्धता हुई होगी इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है. पहले बात तो आयात 50 फीसदी कम हुआ, दूसरा मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी डिमांड वास्तविक जरूरत से कम भेजी, तीसरा अग्रिम भंडारण पिछले साल की तुलना में इस साल 3.51 लाख मीट्रिक टन डीएपी का कम हुआ. सरकार की एपीसी की संभाग स्तर की पिछली बैठकों, कलेक्टरों के स्टेटमेंट देखिये वो सब कह रहे हैं कि डीएपी की जगह दूसरे उर्वरक डाले तो सरकार बताये कि किसान कौन से उर्वरक डाले और उनकी गुणवत्ता की गारंटी कौन लेगा? किसानों तो डीएपी की ही मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, पूर्व में खाद की उपलब्धता सहकारी समितियों के माध्यम से कराई जाती थी, जिससे किसानों को उनके गांव में गुणवत्ता युक्त शासकीय दाम पर बिना किसी परेशानी के खाद उपलब्ध होता था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अपने लोगों को उपकृत करने के लिए खाद की लगभग आधी मात्रा में खुले बाजार में बिक्री की छूट दे रखी है, जिससे किसानों को शहर आकर महंगे दाम में खाद खरीदना पड़ता है. वहीं खुले बाजार में बिक्री से खाद के साथ अन्य सामग्री जैसे अन्य उर्वरक, कीटनाशक दवाई, टॉनिक, बीज, सल्फर, जिंक के अलावा ऐसे उत्पाद जो किसानों की आवश्यकता नहीं है उन्हें भी मजबूरन टैग करके खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है. सरकार खोखले दावे करती है कि किसानो को जीरो ब्याज पर लोन उपलब्ध कराएंगे, लेकिन जब किसानों को साख समितियों से खाद नहीं मिलेगा, नगद ऋण नहीं मिलेगा तो फिर कैसे जीरो ब्याज का फायदा किसानों को मिलेगा. अभी तो उल्टा किसान की जेब से अतिरिक्त पैसा जा रहा है. मध्य प्रदेश में रवि की फसल के लिए 22 लाख टन यूरिया की जरुरत है, जबकि अभी 10.12 लाख मीट्रिक टन यूरिया की उपलब्धता है. जैसे कि अक्टूबर माह में 4.5 लाख टन यूरिया की मांग है, लेकिन 2 लाख 90 हजार टन ही उपलब्ध हो पाया. आगामी माह में भी इस कमी की पूर्ति होना असंभव है, जिसके कारण अगला माह भी किसानों के लिए परेशानी का सबब बनेगा. सरकार द्वारा नेनो यूरिया और नेनो डीएपी का बड़े स्तर पर क्षेत्र में प्रचार-प्रसार दानेदार यूरिया और दानेदार डीएपी के विकल्प के रूप में किया जा रहा है, जबकि नेनो यूरिया और नेनो डीएपी को पिछले साल फसलों पर डालने पर वो प्रभाव नहीं देखा गया जो दानेदार यूरिया और डीएपी का होता है. कांग्रेस ने सरकार से पूछे ये सवाल डीएपी की उपलब्धता के सम्बन्ध में सरकार की क्या योजना है.क्या सरकार अन्य उर्वरकों से डएपी के तत्वों की पूर्ती करना चाहती है. इसके सम्बन्ध में सरकार की क्या कार्य योजना है.क्या अन्य उर्वरकों से पूर्ती हेतु सरकार द्वारा किसानों के बीच में जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया है.सरकार द्वारा अग्रिम भंडारण योजना के अंतर्गत यूरिया डीएपी का अग्रिम भंडारण क्यों नहीं कराया गया. यदि आनन-फानन में सरकार द्वारा उर्वरकों की उपलब्धता की जाती है तो गुणवत्ता की सुनिश्चितत्ता कैसे होगी. अगले 15 दिनों में गेंहू, चना, सरसों, आलू एवं प्याज की लगभग बुवाई हेतु किसान अपनी तैयारियों में लगा हुआ है जिसमे लगभग 90 प्रतिशत यानी लगभग 9 लाख मीट्रिक टन डीएपी की आवश्यकता है. जिसकी समय पर पूर्ती नहीं होने पर फसलों का उत्पादन घटना तय है इसकी जवाबदेही किसकी होगी. मध्य प्रदेश के सभी जिलों में लम्बे समय से एक ही जगह पर जमे हुए जिम्मेदार अधिकारियों के कारण गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया प्रभावित हो चुकी है और नकली और अमानक आदान खाद, बीज, दवाई की बिक्री को बढ़ावा देकर किसानों … Read more

महाकाल मंदिर में सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे की पूजा: नियमों की अनदेखी पर सवाल

Worship of CM Eknath Shinde’s son in Mahakal temple: Question on ignoring rules उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आम और खास सभी के लिए एक ही नियम का दावा किया जाता रहा है, लेकिन वीआईपी कल्चर और प्रभावशाली लोगों के नियम तोड़ने के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं. अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने परिवार सहित गर्भगृह में पूजा अर्चना कर मंदिर के नियम को तोड़ा है. हालांकि, अधिकारियों ने इस मामले में बिना अनुमति दर्शन के लिए गर्भगृह में जाने का दावा किया है. गुरुवार (17 अक्तूबर) की शाम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और मुंबई से सांसद श्रीकांत शिंदे परिवार के साथ महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने वीआईपी पॉइंट के जरिए दर्शन के लिए अधिकारियों से आग्रह किया. इसके बाद महाकालेश्वर मंदिर समिति के बड़े अधिकारी के पीए के साथ श्रीकांत शिंदे का परिवार गर्भगृह तक पहुंच गया. इस दौरान उनके साथ उज्जैन जिले के एक बीजेपी विधायक भी मौजूद रहे. यहां सभी ने उस समय गर्भगृह में जाकर पूजा अर्चना की, जब भगवान महाकाल का भांग से श्रृंगार चल रहा था. इस घटना के बाद हंगामा मच गया है. कांग्रेस के विधायक महेश परमार ने मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा, “भगवान के दरबार में भी बीजेपी सरकार आम और खास के बीच मतभेद कर रही है. यह न्यायोचित नहीं है.” महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष ने क्या कहा?महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष और उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर में नियम सबके लिए बराबर है. उन्होंने कहा, किसी को भी अनुमति नहीं दी गई है कि वह गर्भगृह में जाकर पूजा अर्चना करे. प्रोटोकॉल के तहत जिन्हें अनुमति है, केवल वही प्रवेश कर सकते हैं. इनमें महामंडलेश्वर, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित वीआईपी शामिल हैं. महाकालेश्वर मंदिर समिति के प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ का भी कहना है कि उन्होंने भी किसी को गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं दी थी. महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश बंद हुए कई महीने हो गए हैं. महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं. ऐसे में सभी को गर्भगृह से दर्शन कराया जाना मुश्किल है. यदि महाकालेश्वर मंदिर समिति गर्भगृह दर्शन शुरू करवा देती है, तब भी 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं को अंदर से दर्शन कराया जाना मुश्किल है. जबकि गर्भगृह में जब दर्शन शुरू होते हैं तो बाहर से श्रद्धालुओं के दर्शन में परेशानी होती है. इस वजह से मंदिर समिति ने गर्भगृह दर्शन को पूरी तरह बंद कर रखा है. पहले 750 रुपये की रसीद कटवा कर श्रद्धालुओं को अंदर प्रवेश दिया जाता था. ऐसा नहीं है कि महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में जाकर पहली बार किसी जनप्रतिनिधि ने नियम तोड़ा है. पहले भी कई बार इस तरह की तस्वीरें आ चुकी हैं. मंदिर समिति द्वारा आम लोगों के गर्भगृह में प्रवेश की कोशिश करने पर भी एफआईआर दर्ज कर दी जाती है, लेकिन रसूखदार लोगों पर अभी तक महाकालेश्वर मंदिर समिति का नियम पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहा है. यही वजह है कि शिव भक्तों में भी मंदिर समिति की दोहरी नीति को लेकर आक्रोश है. महाकालेश्वर मंदिर के भक्त राजेश प्रजापति का कहना है कि मंदिर में सभी के लिए नियम बराबर होना चाहिए.

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live