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स्टाइपेंड के लिए रेजीडेंट डॉक्टरों कर रहे हड़ताल, राजस्थान-जयपुर में मरीज हो रहे परेशान

जयपुर. जयपुर के एसएमएस अस्पताल में पिछले 16 दिनों से जारी रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल ने मरीजों के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है। अस्पताल के बाहर लंबी कतारों में खड़े मरीज दर्द से कराह रहे हैं, लेकिन हड़ताल के कारण उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। एसएमएस अस्पताल में रोजाना 8000 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते थे, पर अब यह संख्या 4500 से भी कम हो गई है। मरीजों की तकलीफ को देखते हुए हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं, क्योंकि वार्डों के बेड खाली पड़े हैं और इलाज की प्रक्रिया धीमी हो चुकी है। रेजिडेंट डॉक्टर अपने स्टाइपेंड और वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान में रेजिडेंट्स को कई अन्य राज्यों, जैसे मध्य प्रदेश और तमिलनाडु, की तुलना में अधिक स्टाइपेंड मिलता है। उदाहरण के लिए, एमबीबीएस इंटर्न को राजस्थान में 14,000 रुपये स्टाइपेंड मिलता है जो मध्य प्रदेश के 13,409 रुपये से अधिक है। इसी प्रकार, एमडी/एमएस और डीएम/एमसीएच रेजिडेंट्स को भी अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर स्टाइपेंड मिलता है। मरीजों की स्थिति और अस्पताल का हाल हड़ताल से एसएमएस अस्पताल में ओपीडी सेवाओं पर भी भारी असर पड़ा है। सामान्य दिनों में जहां 8000 से अधिक मरीज ओपीडी में आते थे, अब यह संख्या घटकर 4500 से भी कम हो गई है। इसके बावजूद अस्पताल के गेट तक मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। इलाज के लिए दो से तीन घंटे तक का इंतजार करना पड़ रहा है। भर्ती मरीजों की संख्या भी तेजी से घट गई है। सामान्य दिनों में जहां 550 मरीज रोजाना भर्ती होते थे, अब हड़ताल के चलते केवल 150 मरीज ही भर्ती किए जा रहे हैं। सरकार और डॉक्टरों के बीच तनाव रेजिडेंट्स की मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि जब रेजिडेंट्स को अन्य राज्यों से अधिक स्टाइपेंड मिलता है, तो हड़ताल कितनी जायज है? सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे मरीजों की तकलीफें लगातार बढ़ती जा रही हैं। वहीं, सीनियर डॉक्टर सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक ओपीडी में मरीजों का इलाज कर रहे हैं, लेकिन हड़ताल की खबर फैलने के बाद मरीजों की संख्या भी कम हो गई है। मरीजों की जान जोखिम में रेजिडेंट्स की यह हड़ताल पिछले 10 महीनों में पांचवीं बार हो रही है, जबकि प्रदेश में डेंगू, वायरल और अन्य मौसमी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में इस हड़ताल से मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है, और यह सवाल उठता है कि मरीजों के दर्द को हथियार बनाकर हड़ताल करना कितना उचित है? रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल पर राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग, एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रशासन और जयपुर एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स के प्रतिनिधियों को कोर्ट ने तलब किया है। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने इस मामले में आदेश देते हुए कहा कि आज बुधवर दोपहर 2 बजे कोर्ट में सुनवाई होगी। हाईकोर्ट ने इस मामले में एडवोकेट अजय शुक्ला और शोभित तिवाड़ी को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है और उनसे रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में यह जानने की कोशिश की जाएगी कि हड़ताल के कारण चिकित्सा सेवाओं पर कितना असर पड़ा है और इसे जल्द से जल्द कैसे हल किया जा सकता है। आज की सुनवाई में यह तय हो सकता है कि हड़ताल समाप्त करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे और स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य स्थिति में कैसे बहाल किया जाएगा।

नीमच में दिवाली से पहले ही नप गया पटवारी, लोकायुक्त पुलिस ने ऐसे दबोचा

 नीमच जमीन बटवारे के नाम रिश्वत की मांग कर रहे नीमच के पटवारी की शिकायत उज्जैन लोकायुक्त में की गई थी। लोकायुक्त टीम ने नीमच पहुंचकर पटवारी को 7 हजार रुपए लेते रंगेहाथ दबोच लिया। लोकायुक्त डीएसपी सुनील तलान ने बताया कि नीमच के नया गांव स्थित ग्राम घुसंडी में रहने वाले पारसमल शर्मा ने 16 अक्टूबर को कार्यालय आकर दर्ज कराई और बताया कि हमारे पिता तीन भाइयों के बीच भूमि का बंटवारा करना चाहते हैं। इसके लिए ग्राम हल्का नम्बर-5 के पटवारी दिनेश चौरडिया से संपर्क किया गया। पटवारी ने आवेदन के नाम पर दो हजार रुपए लिए और कहा कि 25 हजार रुपए रिश्वत देना होगी। पटवारी ने भाइयों से 11 हजार रुपए ले लिए। शेष राशि की मांग कर रहा है। पारसमल शर्मा की शिकायत की पुष्टि की गई। इसमें पटवारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने की सच्चाई सामने आ गई। निरीक्षक दीपक शेजवार के साथ नीमच पहुंचकर पटवारी को रंगेहाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया। पारसमल को रिश्वत के 7 हजार रुपए देकर पंचायत कार्यालय ग्राम घुसंडी भेजा गया। जहां कार्यालय में पटवारी दिनेश ने रिश्वत की राशि प्राप्त की और जेब में रख ली। पटवारी को रिश्वत देने के बाद शिकायतकर्ता का इशारा मिलते ही टीम ने कार्यालय में पहुंचकर पटवारी को पकड़ लिया। उसके हाथ धुलवाए गए तो रिश्वत का रंग सामने आ गया। मौके पर ही पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम का प्रकरण दर्ज किया गया है।

हरियाणा बॉर्डर पर लगाएंगे चेकपोस्ट, राजस्थान-अलवर में रामगढ़ उपचनाव को लेकर प्रशासन अलर्ट

अलवर. अलवर में रामगढ़ उपचुनाव को लेकर पुलिस पूरी तरह से तैयार है। हरियाणा बॉर्डर पर चेकपोस्ट लगाए जाएंगे,  ताकि कोई अवांछित तत्व आकर चुनाव को प्रभावित न कर सके। अलवर मिनी सचिवालय में पुलिस महानिरीक्षक ने चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जिला स्तरीय पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें कई दिशा-निर्देश दिए गए। मीडिया से बातचीत में बताया गया कि रामगढ़ विधानसभा उपचुनाव को लेकर सभी विभाग अपने स्तर पर पूरी तैयारी में लगे हुए हैं। जिला पुलिस प्रशासन की ओर से भी चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं। बैठक में चुनाव को लेकर चर्चा की गई, जिसमें चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष कराने के लिए सभी को निर्देशित किया गया। इसमें विशेष ध्यान रखा जाएगा कि कोई भी ताकत चुनाव पर प्रभाव न डाल सके, चाहे वह बाहुबल हो या पैसों की ताकत। सभी जगह पुलिस द्वारा कड़ी निगरानी रखी जाएगी। रामगढ़ क्षेत्र हरियाणा और मेवात से सटा हुआ है, इसलिए खास ध्यान दिया जाएगा। हरियाणा और अन्य संबंधित क्षेत्रों के पुलिस अधिकारियों से भी इस मामले में बातचीत की जा रही है। भविष्य में उनकी आवश्यकता होने पर सहयोग लिया जाएगा। हर एक क्रॉसिंग और रामगढ़ को जोड़ने वाले पॉइंट्स पर स्थायी और अस्थायी चेकपोस्ट लगाए गए हैं। मुख्य रूप से SST, FST और पुलिस सहायक टीमें पूरे क्षेत्र पर निगरानी रख रही हैं और लगातार गश्त कर रही हैं। पुलिस के लिए चुनाव के दौरान दीपावली के हिंदू त्योहार को लेकर भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इस समय कई लोग अपने व्यवसाय और घरेलू सामान के लिए भारी मात्रा में नकद लेकर यात्रा करते हैं। इसे लेकर आईजी अजय पाल लांबा ने कहा कि आम आदमी नकद लेकर आ-जा सकता है, मामूली पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया जाएगा। हालांकि, इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि इनकी आड़ में कोई बड़ा लेन-देन न हो।

CM साय ने किया किसान सम्मेलन का शुभारंभ, चार दिनों तक चलेगा

रायपुर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के रायपुर (Raipur) में आज, बुधवार से चार दिवसीय एग्री कार्नीवाल-2024 (Agri Carnival 2024) का शुभारंभ हुआ . दोपहर तीन बजे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Dev Sai) इस मेले का उद्घाटन किया . मेले की शुरुआत युथ कॉन्क्लेव के साथ किया . उद्घाटन समारोह में कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री श्रामविचार नेताम भी मौजूद रहें. क्या रहेगा कार्निवल में खास रायपुर में आयोजित होने वाले चार दिवसीय कार्निवल में हर दिन कृषकों, छात्रों और आम नागरिकों को विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र में उगाई जा रही फसलों एवं कृषि प्रदर्शनी का भ्रमण करवाया जाएगा. इसके साथ ही लोगों को कृषि के क्षेत्र में जागरूक किया जाएगा.

देश के उद्योगपतियों को प्रोत्साहित करना हमारी प्राथमिकता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश को समृद्ध और संपन्न बनाना हमारा संकल्प : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा प्रदेश को समृद्ध और संपन्न बनाना हमारा संकल्प है देश के उद्योगपतियों को प्रोत्साहित करना हमारी प्राथमिकता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश को समृद्ध और संपन्न बनाना हमारा संकल्प है। उद्योग और निवेश गतिविधियों को विस्तार देने के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएँ मध्यप्रदेश में विद्यमान हैं। प्रदेश के उद्योगपतियों को प्रोत्साहित करना हमारी प्राथमिकता है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत उद्योग समूहों को प्रदेश में अपनी गतिविधियों के विस्तार के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश विकास पथ पर निरंतर अग्रसर हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव रीवा के लिए प्रस्थान करने से पहले निवास पर अपने संदेश में यह बात कही। प्रदेश में गतिविधियों के विस्तार के लिए उद्योगपति रूचि प्रकट कर रहे हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर और सागर में हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से 3 लाख 25 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सॄजित करने में मदद मिली और लगभग 2 लाख 45 हजार करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव भी तैयार हैं। प्रदेश में निवेश की संभावनाओं के दृष्टिगत निवेशक और उद्योगपति अपनी गतिविधियों के विस्तार में रुचि प्रकट कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को अपनी बौद्धिक क्षमता के अनुरूप स्थानीय स्तर पर कार्य करने का अवसर मिले, ब्रेन ड्रेन रुके, इस उद्देश्य से भी राज्य सरकार कार्य कर रही है। साथ ही प्रदेश में विभिन्न विभागों में 1 लाख से अधिक नौकरियों के लिए भर्ती प्रक्रिया आरंभ हो रही है।  

मुख्यमंत्री यादव ने किया रीवा रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का शुभारंभ, 4 हज़ार से अधिक उद्योगपति शामिल

 रीवा सीएम डॉ. मोहन यादव ने आज दीप प्रज्वलन करते हुए रीवा में 5वें रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का शुभारंभ किया। कृष्णा राज कपूर सभागार में आयोजित इस कॉन्क्लेव में 4,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं, जिसमें प्रमुख निवेशक और 3,000 एमएसएमई उद्यमी शामिल हैं। इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य विंध्य क्षेत्र को औद्योगिक अवसरों का केंद्र बनाना है, जिससे निवेश को आकर्षित किया जा सके। बता दें कि मुख्यमंत्री ने 2025 को ‘उद्योग एवं रोजगार वर्ष’ घोषित किया है, जिससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। आज हो रहे पांचवें इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का केंद्र ऊर्जा, खनन, कृषि, डेयरी, खाद्य प्र-संस्करण, पर्यटन और हस्तशिल्प जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करना है। इस कॉन्क्लेव में प्रेजेंटेशन, राउंडटेबल और सेक्टोरल सत्र हैं, जिनमें नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा पर विशेष चर्चा हो रही है। रीवा में 5वें रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का शुभारंभ मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल में इससे पहले चार प्रमुख इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन हो चुका है। इनमें पहला इंडस्ट्री कॉन्क्लेव उज्जैन में आयोजित किया गया था, जिसमें कई बड़े उद्योगपतियों और निवेशकों ने भाग लिया। दूसरा कॉन्क्लेव जबलपुर में हुआ, जहां विभिन्न उद्योगों के लिए निवेश के अवसरों पर चर्चा की गई। तीसरा इंडस्ट्री कॉन्क्लेव ग्वालियर आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने भाग लिया और हाल ही में 27 सितंबर को सागर में चौथा इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश के साढ़े चार हजार से अधिक उद्योगपति शामिल हुए थे। मध्यप्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से अब पांचवां रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव रीवा में हो रहा है। विंध्य में विकास का नया कीर्तिमान मुख्यमंत्री ने रीवा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह अंचल विंध्य और बुंदेलखंड को जोड़ते हुए विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर और सागर में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए जा चुके हैं और उन्हें सफल बनाने के लिए मुंबई, कोयंबतूर, बेंगलुरु और कोलकाता में रोड शो किए गए, जिनके परिणाम बेहद सकारात्मक रहे हैं। नए उद्योगों की शुरुआत होगी इस कॉन्क्लेव के दौरान प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कई उद्योगों का भूमि पूजन और लोकार्पण भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार के तहत प्रदेश के विकास को और तेज गति से आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।   मध्य प्रदेश को औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की पहल यह कॉन्क्लेव न सिर्फ विंध्य क्षेत्र के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश को एक औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। ‘इन्वेस्ट मध्यप्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025’ के लिए जारी किए गए विशेष आमंत्रण के साथ, यह सम्मेलन राज्य के आर्थिक विकास के लिए नए द्वार खोलेगा। इस कॉन्क्लेव में ओडीओपी (एक जिला-एक उत्पाद) और जी-2-सी (सरकार से नागरिक) स्टॉल भी स्थापित किए गए हैं। यहां एमपी इंडस्ट्रियल डेवेलपमेंट कॉर्पोरेशन, एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवेलपमेंट कॉर्पोरेशन, डायरेक्टोरेट ऑफ़ फ़ॉरेन ट्रेड, कस्टम विभाग, ईसीजीसी लिमिटेड, फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट और हस्तशिल्प विकास निगम सहित 16 से अधिक विभाग और संस्थान शामिल हैं।

कार्रवाई में जुटी वन विभाग की टीम, छत्तीसगढ़-पेंड्रा में सरपंच के घर मिली बेशकीमती लकड़ी

पेंड्रा. जिले में वन विभाग ने एक बार फिर से बड़ी कार्रवाई की है। जिसमें वन विभाग के द्वारा कार्रवाई करते हुए सरपंच के घर एवं बाड़ी से बेशकीमती इमारती लकड़ी को जब्त किया है। कार्रवाई के दौरान ग्राम सरपंच लगातार वन अमले के ऊपर कार्रवाई नहीं करने का दबाव बना रहा था। लेकिन उसकी एक नहीं चली और वन विभाग ने कार्रवाई कर इमारती लकड़ी जब्त कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है। दरअसल पूरा मामला, मरवाही वन मंडल के पेंड्रा वन परिक्षेत्र अन्तर्गत दूरस्थ ग्राम पंचायत खरड़ी का है, जहां पर मुखबिरों की सूचना पर आज वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से रखी गई बेशकीमती इमारती लकड़ी को घर एवं बाड़ी दोनों जगहों से जब्त किया है। सूचना को तत्काल संज्ञान में लेते हुए मरवाही वनमण्डल अधिकारी रौनक गोयल के निर्देशन एवं उप वनमण्डल के मार्गदर्शन के साथ ही पेंड्रा वन परिक्षेत्र अधिकारी ईश्वरी खूंटे के नेतृत्व और उड़नदस्ता दल मरवाही एवं पेंड्रा रेंज के स्टाफ के द्वारा कार्रवाई की गई थी। वहीं कार्रवाई के दौरान टीम को मुखबिरों से सूचना प्राप्त हुई थी कि दूरस्थ वन ग्राम खरड़ी का सरपंच बेशकीमती लकड़ी की तस्करी करता है। जिस पर वन विभाग ने कार्रवाई में सरपंच के घर एवं बाड़ी दोनों जगहों से जंगल से काटी गई बेशकीमती लकड़ी में साल पल्ला, लठ्ठा, चिरान, चौखट, खिड़की, एवं हाथ आरा दो, कुल 94 नग 1.43 घनमीटर की लकड़ी को जब्त कर कार्रवाई की गई है। जबकि लकड़ी का अनुमानित मूल्य कितने का है, इसकी पुष्टि नहीं हो सकती है। वहीं कार्रवाई के दौरान सरपंच ने नेतागिरी करते हुए कार्रवाई रोकने का काफी प्रयास किया पर उसकी एक नहीं चली और वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए लकड़ी की खेप जब्त कर आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

हाईकोर्ट ने सभी याचिकाएं कीं खारिज, छत्तीसगढ़-निकाय चुनाव से पहले होगा वार्ड परिसीमन

बिलासपुर. वार्ड परिसीमन के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाओं को आधारहीन पाया। इस फैसले के साथ ही निकाय चुनाव से पहले वार्ड परिसीमन का रास्ता साफ हो गया है। बता दें कि कोर्ट ने इससे पहले बिलासपुर और राजनांदगांव नगर निगम के साथ ही तखतपुर, कुम्हारी और बेमेतरा नगर पालिका में होने वाले वार्डों के परिसीमन पर रोक लगा दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच में हुई, कोर्ट से आये फैसले के बाद राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है। बिलासपुर सहित प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों में वार्डों के परिसीमन को लेकर अलग अलग 50 से अधिक याचिकाएं हाईकोर्ट में लगाई गई थीं।  इसमें से 7 याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने स्टे देते हुए परिसीमन पर रोक लगा दी थी। पिछली सुनवाई में 13 याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को फैसला देते हुए सभी को खारिज कर दिया है। परिसीमन के खिलाफ दायर याचिकाओं पर याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार ने प्रदेश भर के निकायों के वार्ड परिसीमन के लिए जो आदेश जारी किया है, उसमें वर्ष 2011 की जनगणना को आधार माना गया है। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने इसके पहले वर्ष 2014 और 2019 में भी वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का कार्य किया है। जब आधार एक ही है तो इस बार क्यों परिसीमन कराया जा रहा है। यह याचिका बिलासपुर में पूर्व कांग्रेसी विधायक शैलेश पांडेय और कांग्रेस के चार ब्लॉक अध्यक्ष विनोद साहू, मोती थारवानी, जावेद मेमन, अरविंद शुक्ला ने तो तखतपुर से टेकचंद कारड़ा ने दायर की थी। मामले की सुनवाई दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जनसंख्या के आधार पर पहले भी परिसीमन किया गया है। कभी भी कोई आपत्ति नहीं आई। इस बार जान बूझकर ऐसा किया जा रहा है ताकि प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके। इस पर कोर्ट ने पूछा कि वर्ष 2011 की जनगणना को वर्तमान परिदृश्य में आदर्श कैसे मानेंगे? दो बार परिसीमन कर लिया गया है तो तीसरी बार परिसीमन क्यों किया जा रहा है? इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि परिसीमन से पहले पूरी प्रक्रिया और नियमों का पालन किया गया है। जनसंख्या के आधार पर परिसीमन के लिए पहले नोटिस जारी किया गया। आपत्तियों का निराकरण भी किया गया। कोर्ट ने सरकार की बात को स्वीकार करते हुए परिसीमन के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

14 दिन की बढ़ी रिमांड, छत्तीसगढ़ की निलंबित IAS रानू साहू और माया वॉरियर की जेल में मनेगी दिवाली

रायपुर. डीएमएफ घोटाले में जेल में बंद छत्तीसगढ़ की निलंबित आईएएस ऑफिसर रानू साहू और एक अन्य अधिकारी माया वॉरियर को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। रायपुर की प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। इसके साथ ही आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग की उपायुक्त माया वॉरियर भी पांच नवंबर तक न्यायिक रिमांड में रहेगी। यानी इन दोनों ऑफिसर्स की दिवाली अब जेल में ही मनेगी। ईडी की रिमांड पूरी होने के बाद मंगलवार को रायपुर की स्पेशल कोर्ट ने दोनों आरोपियों को रायपुर सेंट्रल जेल में भेज दिया। डीएमएफ घोटाले में जेल में बंद छत्तीसगढ़ की निलंबित आईएएस ऑफिसर रानू साहू और एक अन्य अधिकारी माया वॉरियर को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। रायपुर की प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। इसके साथ ही आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग की उपायुक्त माया वॉरियर भी पांच नवंबर तक न्यायिक रिमांड में रहेगी। यानी इन दोनों ऑफिसर्स की दिवाली अब जेल में ही मनेगी। ईडी की रिमांड पूरी होने के बाद मंगलवार को रायपुर की स्पेशल कोर्ट ने दोनों आरोपियों को रायपुर सेंट्रल जेल में भेज दिया। इससे पूर्व प्रवर्तन निदेशालय की रायपुर टीम ने डीएमएफ घोटाले में निलंबित आईएएस ऑफिसर रानू साहू को 22 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में सौंपा था। वहीं 15 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ सरकार की महिला अधिकारी माया वॉरियर को गिरफ्तार किया था। ईडी ने रानू और अधिकारी वॉरियर को कथित जिला खनिज फाउंडेशन यानि डीएमएफ मामले में गिरफ्तारी किया था। माया वॉरियर 15 अक्टूबर को और रानू साहू को 17 अक्टूबर को कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें 22 अक्टूबर तक ईडी  की हिरासत में भेजा था। ईडी के वकील सौरभ पांडे ने बताया कि पिछले साल से ईडी की ओर से डीएमएफ मामले में यह पहली गिरफ्तारी थी। सबसे पहले ईडी ने छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई जगहों पर छापेमारी की थी। रानू साहू की करीबी हैं माया वॉरियर डीएमएफ घोटाले में ईडी ने कोरबा में आदिवासी विकास विभाग में सहायक उपायुक्त के पद पर पदस्थ माया वॉरियर को गिरफ्तार किया है। उन पर पद पर रहते हुए घोटाले करने का आरोप है। माया वॉरियर वर्तमान में आदिवासी विकास विभाग मंत्रालय में पदस्थ थीं। रानू साहू कोरबा में रह चुकी हैं और वॉरियर रानू साहू की करीबी रही हैं। कोरबा में अपने कार्यकाल के दौरान रानू साहू के ऊपर भी डीएमएफ में गड़बड़ी का आरोप है। वो पहले से ही जेल में हैं। मंगलवार को ईडी माया वॉरियर को पूछताछ के लिए बुलाया था। पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। कोरबा में कलेक्टर रही हैं रानू रानू साहू जून 2021 से जून 2022 तक कोरबा में कलेक्टर रहीं। इस दौरान माया वारियर भी कोरबा में पदस्थ थीं। तब डीएमएफ की बड़ी राशि आदिवासी विकास विभाग को दी गई थी, जिसमें घोटाले का आरोप है। इसका प्रमाण मिलने के बाद ईडी ने माया वारियर को गिरफ्तार किया गया है। चर्चा है कि की रकम का बड़ा हिस्सा कमीशनखोरी में खर्च किया गया था।

साय सरकार ने किए 11 IAS के तबादले, छत्तीसगढ़ के रवि मित्तल बने जनसंपर्क आयुक्त

रायपुर. छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार ने दिवाली से 10 दिन पहले बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की है। कुल 11 आईएएस ऑफिसर्स का तबादला किया गया है। राज्य सरकार ने जशपुर के कलेक्टर रवि मित्तल को छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें जनसंपर्क विभाग का आयुक्त बनाया है। आईएएस जन्मेजय महोबे को महिला एवं बाल विकास विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। मोहला मानपुर और सूरजपुर के कलेक्टर्स का भी ट्रांसफर किया गया है। सूरजपुर कलेक्टर रोहित व्यास को जशपुर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आईएएस अधिकारी एस जयवर्धन को सूरजपुर का कलेक्टर का दायित्व दिया गया है। मित्तल को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दूसरी ओर जशपुर के कलेक्टर रहे रवि मित्तल को जनसंपर्क विभाग का कमिश्नर बनाया गया है। इसके अलावा जन्मेजय महोबे को वर्तमान प्रभार के साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। यहां देखें, किसको क्या मिली जिम्मेदारी — 0- डॉक्टर रवि मित्तल – आयुक्त जनसंपर्क विभाग 0- जन्मेजय महोबे – संचालक, महिला एवं बाल विकास, एडिशनल चार्ज। 0- जगदीश सोनकर- मंत्रालय में संयुक्त सचिव 0- जनसंपर्क विभाग में कमिश्नर की जिम्मेदारी देख रहे मयंक श्रीवास्तव को गृह विभाग भेजा गया। 0- एस.जयवर्धन- कलेक्टर, सूरजपुर 0- विजय दयाराम- प्रबंध संचालक, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन का एडिशनल चार्ज 0- तुलिका प्रजापति- कलेक्टर, मोहला मानपुर 0- रोहित व्यास- कलेक्टर, जशपुर 0- प्रतिष्ठा ममगाई- सीईओ, जिला पंचायत बस्तर 0- कुमार बिश्वरंजन – उपसचिव, मंत्रालय 0- जयंत नाहटा – सीईओ, जिला पंचायत दंतेवाड़ा सत्तापक्ष को घेरने में लगी कांग्रेस छत्तीसगढ़ में विपक्ष में बैठी कांग्रेस लगातार बीजेपी सरकार पर सवाल दाग रही है। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा की पुलिस कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। सरकार को लगातार घेरने में लगे हैं।

फायर टीम ने एक घंटे मशक्कत कर बुझाया, छत्तीसगढ़-जगदलपुर में मोबाइल टावर में लगी भीषण आग

जगदलपुर. शहर के धरमपुरा स्थित विशाल मेगा मार्ट के पास बने मोबाइल टावर में आग लग गई। घटना की जानकारी लगते ही फायर टीम मौके पर पहुंची और आग को बुझाया गया। इस दौरान एक बड़ी हानि बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि बुधवार की सुबह विशाल मेगा मार्ट के पास एयरटेल, जिओ और आइडिया के कंबाइन मोबाइल टावर में अचानक से आग लग गई। अचानक से फैले आग और धुंए को देखकर आसपास के लोगों ने मामले की जानकारी नगर सेना सेनानी एस मार्बल को दी। मामले की जानकारी लगते ही फायर की एक टीम को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया, जहां एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग लगने की सूचना मिलते ही वहां लोगों की भीड़ लग गई। वहीं आग के फैलने के डर से लोग अपने घर से बाहर आ कर इकट्ठा हो गए। मामले की जानकारी लगते ही कोतवाली पुलिस टीम भी मौके पर पहुंच गई, फिलहाल आग को बुझा दिया गया है।

5वीं रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का M मोहन ने किया शुभारंभ करेंगे, झोली भरकर विंध्य आये खास मेहमान

रीवा  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि 5वीं रीजनल इंडस्ट्री कांन्क्लेव आज रीवा में है, जो सबसे ज्यादा सफल होगी। अभी तक मप्र में 2.45 लाख करोड़ का निवेश मिला… तीन लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार के अवसर मिले। रोजगार की दिशा में लगातार युवाओं को अवसर मिलेंगे मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने गठन के साथ ही लगातार मध्य प्रदेश के औद्योगिक निवेश और रोजगार की दिशा में लगातार युवाओं को अवसर मिले, हमारे हर युवा के हाथ में काम मिले इसलिए सभी सेक्टर में समान रूप से काम कर रही है। खासकर के हमारे आईटी का सेक्टर हो या एमएसएमई उद्योग का सेक्टर हो, हेवी इंडस्ट्री से लेकर फूड इंडस्ट्री तक सभी क्षेत्रों में लगातार रोजगार निवेश के अभियान में हम लगे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि अभी तक प्रदेश के अंदर उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर और सागर में हम रीजनल इंडस्ट्री कांन्क्लेव कर चुके हैं और इसे सफल बनाने के लिए मुंबई, कोयंबतूर, बेंगलुरु और कोलकाता इत्यादि स्थानों पर रोड शो करके भी आए हैं, जिसके सुखद परिणाम भी मिले हैं। डॉक्टर यादव ने कहा कि आज रीवा में पांचवीं रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि रीवा महत्वपूर्ण अंचल हैं जो विंध्य और बुंदेलखंड को जोड़ते हुए विकास के लिए एक नया कीर्तिमान बनाएगा। निवेश प्रस्तावों के संबंध में उद्योगपतियों से वन टू वन चर्चा करेंगे उद्घाटन समारोह के बाद मुख्यमंत्री विन्ध्य क्षेत्र में निवेश प्रस्तावों के संबंध में उद्योगपतियों से वन टू वन चर्चा करेंगे। कार्यक्रम के समापन के बाद मुख्यमंत्री शाम 6 बजे एयरपोर्ट रीवा से वायुयान से प्रस्थान कर शाम 6.50 बजे एयरपोर्ट भोपाल पहुंचेगे। विन्ध्य क्षेत्र में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं: उप मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि विन्ध्य क्षेत्र में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएँ हैं और इसे साकार करने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) जैसे आयोजन आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं। मुख्यमंत्री के विजनरी नेतृत्व में प्रदेश के समग्र विकास को मिल रही है नई दिशा यह क्षेत्रीय विशेषताओं के आधार पर निवेश संभावनाओं को प्रस्तुत कर औद्योगिक विकास में संतुलन लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजनरी नेतृत्व में यह पहल प्रदेश के समग्र विकास को एक नई दिशा प्रदान कर रही है। इसका पाँचवां संस्करण 23 अक्टूबर को रीवा में आयोजित किया जा रहा है। यह क्षेत्र निवेशकों के लिए एक आदर्श गंतव्य बन गया पहले उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर और सागर में सफलतापूर्वक कॉन्क्लेव आयोजित किए जा चुके हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय वल्लभ भवन में मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा की।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विन्ध्य क्षेत्र में औद्योगिक विकास के लिए आधुनिक और सशक्त इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, रेलवे और हवाई मार्ग का निरंतर विस्तार किया जा रहा है, जिससे यह क्षेत्र निवेशकों के लिए एक आदर्श गंतव्य बन गया है। सहयोगी पहलों से निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बना क्षेत्र में सीमेंट, खनिज और सरप्लस पावर जैसी प्राकृतिक संपदाओं की प्रचुरता इसे औद्योगिक गतिविधियों के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती हैं।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और सिंगल विंडो क्लीयरेंस और औद्योगिक सहयोगी पहलों से निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बना है। विन्ध्य क्षेत्र में उद्योगों के लिए 9,000 हेक्टेयर से अधिक का भूमि बैंक उपलब्ध इसी सकारात्मक माहौल के चलते अब तक 4,000 से अधिक निवेशकों ने रीवा में होने वाले इस कॉन्क्लेव के लिए पंजीकरण कराया है।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विन्ध्य क्षेत्र में उद्योगों के लिए 9,000 हेक्टेयर से अधिक का भूमि बैंक उपलब्ध है। यह कॉन्क्लेव विन्ध्य क्षेत्र के विकास में एक नया अध्याय लिखेगी कॉन्क्लेव में आईटी, पर्यटन, माइनिंग, एमएसएमई, कुटीर उद्योग, और कृषि क्षेत्र में निवेश पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विन्ध्य क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं, जिनका विकास प्रदेश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्वास जताया कि यह कॉन्क्लेव विन्ध्य क्षेत्र के विकास में एक नया अध्याय लिखेगी। मध्यप्रदेश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में औद्योगिक विकास का नया केंद्र बना रीवा संभाग रीवा संभाग, जो मध्य प्रदेश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित है, आज तेजी से एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। अपनी सांस्कृतिक धरोहर, प्राचीनता, प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता और खनिज भंडारों के साथ यह क्षेत्र निवेशकों के लिए अनगिनत अवसर प्रस्तुत करता है। यहां न सिर्फ औद्योगिक विकास के लिए मजबूत आधारभूत संरचना तैयार की गई है, बल्कि इसके पर्यटन और ऐतिहासिक महत्व ने भी इसे और अधिक आकर्षक बना दिया है। रीवा संभाग के औद्योगिक क्षेत्र चोरहटा, गुढ़, बाईपास, और त्योथर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन क्षेत्रों में निर्माण सामग्री, कृषि आधारित उद्योग, धातु उद्योग, और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उद्योग प्रमुखता से उभर रहे हैं। रीवा का हवाई संपर्क जुड़ने के बाद इन क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों की रफ्तार और भी बढ़ गई है, जिससे निवेशकों को माल की ढुलाई और उत्पादों की आपूर्ति में आसानी हो रही है। सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर रीवा संभाग का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व इसे पर्यटन के नजरिए से भी महत्वपूर्ण बनाता है। यहां स्थित रीवा किला, गोविंदगढ़ का किला, और मुक्ति धाम जैसे स्थान न केवल ऐतिहासिक धरोहर हैं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, रीवा के साथ जुड़ी बघेलखण्ड की संस्कृति ने भी इस क्षेत्र को एक विशिष्ट पहचान दी है। खनिज और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता रीवा संभाग खनिज संसाधनों से समृद्ध है। यहां प्रचुर मात्रा में चूना पत्थर, डोलोमाइट, और बॉक्साइट जैसे खनिज पाए जाते हैं, जो औद्योगिक गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन खनिज संसाधनों का दोहन स्थानीय उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराता है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बल मिलता है। पर्यटन और पौराणिक महत्व रीवा संभाग अपने प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है। केऊटी जलप्रपात, चित्रकूट और सिद्ध बाबा जैसे स्थानों का पर्यटन महत्व है, जो न सिर्फ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, इस क्षेत्र … Read more

मोहन सरकार सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में, राजनीतिक हलचल तेज

Mohan government preparing to bring no-confidence motion against sarpanches, political stir intensifies मध्य प्रदेश सरकार पंचायत राज अधिनियम में संशोधन कर सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रावधान करने जा रही तीन चौथाई पंचों के हस्ताक्षर के साथ यह प्रस्ताव सरपंच की तीन साल की कार्यावधि पूरी होने पर लाया जा सकेगा।Ordinance against Sarpanch : मध्य प्रदेश सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है। यह कदम पंचायत राज अधिनियम में संशोधन से संभव होगा। अब सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन-चौथाई पंचों (पंचायत सदस्यों) के हस्ताक्षर की आवश्यकता होगी और यह प्रस्ताव सरपंच का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही लाया जा सकेगा। सरकार इस नए प्रावधान को लागू करने के लिए एक अध्यादेश का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में है। जिसे अगले महीने कैबिनेट में पेश किया जाएगा। ऐसी होगी अविश्वास प्रस्ताव की नई व्यवस्था वर्तमान में, नगरीय निकायों के अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रावधान है। इसी तरह का प्रावधान अब पंचायतों में भी लागू किया जाएगा। इस संशोधन में नगरीय निकायों की तरह सरपंचों के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन चौथाई पंचों का समर्थन आवश्यक होगा। साथ ही, यह प्रस्ताव केवल तब लाया जा सकेगा जब सरपंच की कार्यावधि को तीन साल पूरे हो चुके हों। चूंकि अभी विधानसभा का सत्र प्रस्तावित नहीं है, इसलिए सरकार अध्यादेश के माध्यम से यह संशोधन करेगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस संशोधन का प्रारूप तैयार कर लिया है, जिसे वरिष्ठ सचिव समिति को भेजा जाएगा। इसके बाद, विधि एवं विधायी विभाग से परिमार्जन कटाने के बाद अंतिम रूप से इसे कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। लंबे समय से हो रही मांग पंचायत और ग्रामीण संगठनों की लंबे समय से यह मांग थी कि सरपंचों के खिलाफ भी नगरीय निकायों की तरह अविश्वास प्रस्ताव लाने की व्यवस्था होनी चाहिए। इस मुद्दे पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल (Prahlad Singh Patel) ने संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और सहमति व्यक्त क। जिसके बाद इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की नई व्यवस्था क्या है? मध्य प्रदेश सरकार ने पंचायत राज अधिनियम में संशोधन किया है। जिसके तहत सरपंचों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन-चौथाई पंचों के हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। यह प्रस्ताव केवल तब लाया जा सकेगा जब सरपंच का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका हो। कब तक यह नया प्रावधान लागू होगा? सरकार इस नए प्रावधान को लागू करने के लिए एक अध्यादेश का मसौदा तैयार कर रही है, जिसे अगले महीने केबिनेट में पेश किया जाएगा। अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कितने पंचों का समर्थन आवश्यक है? अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए तीन-चौथाई पंचों (पंचायत सदस्यों) का समर्थन आवश्यक होगा। यह व्यवस्था कब से मांग की जा रही थी? यह व्यवस्था पंचायत और ग्रामीण संगठनों द्वारा लवे समय से मांगी जा रही थी, ताकि सरपंचों के खिलाफ भी नगटीय निकायों के समान अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार हो। क्या यह संशोधन विधानसभा में पेश होगा? 2 वर्तमान में विधानसभा का सत्र प्रस्तावित नहीं है, इसलिए यह संशोधन अध्यादेश के माध्यम से किया जाएगा। विधि एवं विधायी विभाग के परिमार्जन के बाद इसे कैविनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

नगर पंचायत सफाई कर्मचारी ने सीएमओ के चेंबर में गतका जहर

आगर मालवा आगर मालवा जिले के नलखेड़ा नगर परिषद के एक सफाई कर्मचारी ने सीएमओ के केबिन में जहर निगलकर आत्महत्या की कोशिश की. चेम्बर में मौजूद अन्य कर्मचारियों ने तुरंत उसे पकड़ने की कोशिश की और हॉस्पिटल में भर्ती करवाया. फिलहाल कर्मचारी का इलाज चल रहा है. जिले के नलखेड़ा नगर परिषद का सफाईकर्मी मेहरुद्दीन अपना वेतन समय पर न मिलने और वेतन कटौती की शिकायत को लेकर नगर परिषद सीएमओ के केबिन में पहुंचा. जहां बातचीत के दौरान सफाईकर्मी ने अपनी जेब में से एक शीशी निकाली और कोई जहरीला पदार्थ पी गया. वहां मौजूद अन्य लोगों ने आनन-फानन में कर्मचारी को इलाज के लिए सिविल अस्पताल पहुंचाया. जहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार कर उसे जिला अस्पताल रेफर किया. मामले में सीएमओ मुकेश भंवर कहा, ”सफाई कर्मचारी मेहरुद्दीन केबिन में आया और अपने वेतन को लेकर शिकायत करने लगा, जिस पर मैंने कहा कि आवेदन दे दो, मैं जांच करवाता हूं, उसी दौरान कर्मचारी ने जेब से एक शीशी निकाल कर कोई पदार्थ पी लिया. तत्काल कर्मचारी को हॉस्पिटल ले जाया गया. जहां से उचित उपचार के लिए जिला अस्पताल में भेजा गया है.” वही, सफाई कर्मचारी मेहरुद्दीन ने बताया कि उसकी ड्यूटी गायों के लिए लगाई गई थी, लेकिन लेखापाल रौनक जैन हर माह गैर हजारी लगाकर वेतन काट रहा है. जिसके कारण घर चलाने  में परेशानी हो रही थी. फिलहाल कर्मचारी का जिला अस्पताल में उपचार किया जा रहा है. मामले में पुलिस ने सफाई कर्मी के बयान लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. 

बृजमोहन ने सबसे पहला चुनाव स्वरूपचंद जैन के खिलाफ लड़ा था

भोपाल बृजमोहन ने सबसे पहला चुनाव स्वरूपचंद जैन के खिलाफ लड़ा था, और 3 हजार से भी कम वोटों से जीते थे। इसके बाद स्वरूपचंद जैन ने चुनाव लडऩे से मना कर दिया, और फिर राजकमल सिंघानिया उतरे। सिंघानिया के बाद पारस चोपड़ा को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया। दिलचस्प बात यह है कि ये सभी पराजित प्रत्याशी दोबारा टिकट की मांग नहीं की, और क्षेत्र से कट गए। राज्य बनने के बाद पूर्व उप महापौर गजराज पगारिया चुनाव मैदान में उतरे। पगारिया के बाद योगेश तिवारी, और फिर डॉ. किरणमयी नायक को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया। इसके बाद वर्ष-2018 में कन्हैया अग्रवाल  को पार्टी ने टिकट दी। कांग्रेस के पक्ष में हवा थी फिर भी कन्हैया चुनाव हार गए। कन्हैया तकरीबन 15 हजार वोटों से चुनाव हारे। इसके बाद 2023 में महंत रामसुंदर दास को टिकट मिली। उन्हें सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि कन्हैया को छोडक़र बृजमोहन को हराने वाला कोई भी उम्मीदवार क्षेत्र में सक्रिय नहीं रहा। यही वजह है कि बृजमोहन अग्रवाल के लिए एक तरह से खुला मैदान ही रहा। अब कन्हैया सक्रिय थे, लेकिन पार्टी ने उनका नाम आगे नहीं बढ़ाया। ये अलग बात है कि बृजमोहन अग्रवाल चुनाव मैदान में नहीं है। देखना है आगे क्या होता है

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