LATEST NEWS

उभरते हुए वेडिंग और MICE डेस्टिनेशन के रूप में बना रहा पहचान

भोपाल प्राकृतिक सौंदर्य के बीच रोमांचक और साहसिक अनुभव का संगम “गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट” के तीसरे संस्करण की शुरुआत मंदसौर में हुई। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति और प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड, शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मंदसौर में गांधीसागर के बैकवाटर्स किनारे स्थापित गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट रोमांच, मनोरंजन और सांस्कृतिक अनुभवों का एक अद्भुत संगम होने के साथ साथ, उभरता हुआ MICE और वेडिंग डेस्टिनेशन भी है। ऑल वेदर टेंट सिटी में लग्जूरियस स्टे के साथ पर्यटक कई रोमांचक गतिविधियों जैसे हॉट एयर बैलूनिंग, पैरामोटरिंग, जेट स्कीइंग, कयाकिंग, मोटर बोटिंग का आनंद ले सकेंगे। गांधीसगर फॉरेस्ट रिट्रीट की शुरुआत रंगारंग लोकगीत लोकनृत्य के साथ हुईं। कार्यक्रम के अंत में नयासा म्यूजिक बैंड की परफॉर्मेंस भी हुई। अपने अनोखे और अद्वितीय स्वरूप में गांधी सागर अब वेडिंग और MICE डेस्टिनेशन के रूप में पहचान बना रहा है। पर्यटकों के लिए प्राकृतिक सौन्दर्य, रोमांचक गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का यह बेमिसाल संयोजन है। इच्छुक पर्यटक 07808780899 पर संपर्क कर बुकिंग संबंधी डिटेल्स जान सकते है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पर्यटन द्वारा नए टूरिज्म उत्पाद ऑफबीट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित और प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इसमें चंदेरी, गांधी सागर फॉरेस्ट रिट्वीट और हनुवंतिया टेंट सिटी प्रमुख रूप से पर्यटन की अधोसंरचना के विकास के साथ-साथ स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दे रहा है। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल दे रहा है।     

मंत्री तोमर ने उपनगर ग्वालियर के विभिन्न बाजारों व बस्तियों में भ्रमण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया

ऊर्जा मंत्री तोमर ने उपनगर ग्वालियर में भ्रमण कर सफाई व्यवस्था का लिया जायजा मंत्री तोमर ने फावड़ा लेकर राजामंडी क्षेत्र में साफ-सफाई कर आम जनता को दिया स्वच्छता का संदेश मंत्री तोमर ने उपनगर ग्वालियर के विभिन्न बाजारों व बस्तियों में भ्रमण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया ग्वालियर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने उपनगर ग्वालियर के विभिन्न बाजारों व बस्तियों में भ्रमण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सफाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कमी न हो। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय निवासियों से रू-ब-रू होकर उनकी समस्यायें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को निराकरण के निर्देश दिए। साथ ही लोगों से साफ-सफाई के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उपनगर ग्वालियर की राजा मंडी बस्ती से ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भ्रमण प्रारंभ किया। इस दौरान उन्हें गंदगी मिलने पर नाराजगी व्यक्त की तथा स्वयं ही फावड़ा मंगा कर नाली की सफाई की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया क्षेत्र में प्रतिदिन साफ-सफाई समय पर हो। कहीं भी कचरा इकठ्ठा नहीं हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही लोगों से कहा कि वे स्वच्छता को लेकर सजग रहें। ऊर्जा मंत्री तोमर ने राजा मंडी से किला गेट, गल्ला मंडी, कोटा वाला मोहल्ला, रामटापुरा, गुदड़ी, किलामेट होते हुए, बाबा कपूर की दरगाह, काशी नरेश की गली, मंगलेश्वर रोड, सुभाष विद्यालय होते हुए घास मंडी चौराहा, गोलंदाज घंटाघर, डोडापुर तिराहा, मिर्जापुर होते हुए शील नगर पहुँचे। इन क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के बाद उन्होंने शीलनगर के हनुमान जी मंदिर पर रात्रि विश्राम भी किया। भ्रमण के दौरान ऊर्जा मंत्री तोमर ने विद्युत, सीवर, साफ सफाई आदि सहित अन्य बुनियादी समस्याओं का निरीक्षण किया। उन्होंने भ्रमण के दौरान एक बुजुर्ग महिला की वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत करने के निर्देश मौके पर मौजूद अधिकारियों को दिए। उन्होंने रमटापुरा एवं गुदड़ी में गंदगी मिलने पर काफी नाराजगी व्यक्त की। भ्रमण के दौरान क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।  

अमेज़न सेल 2024: बेस्ट नेकबैंड ब्लूटूथ इयरफ़ोन पर 80% तक की छूट

Amazon ग्रेट इंडेन फेस्टिवल सेल 2024 से आज हम आपके लिए हैं शानदार नेकबैंड ईयरफोन की शानदार रेंज की जानकारी। ये सभी बेस्ट नेकबैंड ईयरफोन्स अलग-अलग आर्किटेक्चर के साथ आ रहे हैं। इन डिस्प्ले नेकबैंड में हाई साउंड के क्वालिटी के साथ ही डीप बेस भी है, जिससे आपका म्यूजिक और अन्य एंटरटेनमेंट का एक्सपीरियंस भी कई गुना बेहतर हो सकता है। इन नेकबैंड में 60 घंटे तक की प्लेटाइम भी देखी जा सकती है, जिसे आप देर तक इस्तेमाल कर सकते हैं। Amazon की सबसे बड़ी Sale में इन कास्टाल नेकबैंड पर 77% तक की भारी छूट भी मिल रही है। यदि आप बचत वाली इस डील का फ़ायदा उठाना चाहते हैं, तो इस लेख में मिल रही सूची आपके लिए काफी बढ़िया हो सकती है। ये सभी नेकबैंड टॉप नेटवर्क और काफी बेस्ट माने जाते हैं। वनप्लस बुलेट्स Z2 ब्लूटूथ वायरलेस इन ईयर ईयरफोन्स: इस दिलचस्प वाले वनप्लस बुलेट्स Z2 नेकबैंड का डिजाइन एर्गोनोमिक है। इस साल में नेकबैंड की शानदार क्वालिटी साउंड और बॉम्बास्टिक बेस भी काफी दमदार है। यह नेकबैंड 12.4mm के ड्राइवर के साथ आ रहा है। इसमें कुल 30 तक का प्लेटाइम भी है। सिर्फ 10 मिनट तक चार्ज करके आप इस नेकबैंड को 20 घंटे तक इस्तेमाल कर सकते हैं। यह अमैसिलिव रंग संयोजन में भी उपलब्ध है। boAt Rockerz 210 ANC ब्लूटूथ इन ईयर नेकबैंड: यह टॉप डेमोक्रेसी रेटिंग वाला काफी अच्छा boAt Rockerz 210 नेकबैंड है। यह नेकबैंड की खासियत भी सीमलेस है। इसका स्पैटिऑल ऑडियंस और कैमल का 30dB ANC सपोर्ट आपके एंड्रॉइड फ्री कॉलिंग के एक्सपीरियंस को काफी शानदार बना सकता है। यह 13mm ड्राइवर वाला काफी अच्छा नेकबैंड है। इस नेकबैंड में ड्यूल पेअरिंग और फास्ट पेयर का सपोर्ट भी मिल रहा है। इस नेकबैंड की मदद से आप गेमिंग का भी भरपूर मजा ले सकते हैं। रियलमी बड्स वायरलेस 3 नियो इन ईयर ब्लूटूथ नेकबैंड: यह टॉप ब्रांडेड और बेस्ट रियलमी बड्स वायरलेस नेकबैंड है। इस नेकबैंड में मिल रहा 13.4mm का ड्राइवर शानदार साउंड के साथ ही डीपी बेस क्वालिटी भी देता है। यह फास्ट बैकअप भी सपोर्ट करता है, जिससे आप इस नेकबैंड को कम समय में चार्ज करके देर तक इस्तेमाल भी कर सकते हैं। यह नेकबैंड म्यूजिक के साथ-साथ फ्री कॉल्स के लिए भी सुइटेबल माना जाता है। इसमें 45 एमएस की लो लेटेंसी भी दी जा रही है। JBL ट्यून 215BT, क्विक चार्ज के साथ 16 घंटे का प्लेटाइम: धाकड़ साउंड और बेस वाले इस JBL ट्यून 215BT नेकबैंड में आपको 16 घंटे तक का प्लेबैक टाइम मिल रहा है। इस नेकबैंड में मिल रही 12.5mm का ड्राइवर प्रीमियम क्वालिटी वाला है। यह प्योर बेस वाला जनरेटर नेकबैंड है। इस नेकबैंड से आप लगभग सभी सहयोग कंपनी के साथ जुड़ सकते हैं। यह वॉयस मार्केटिंग सपोर्ट के साथ आ रहा है। इसका इन बैलट माइक भी टॉप क्वालिटी वाला है। नॉइज़ एयरवेव प्रो ब्लूटूथ इन ईयर नेकबैंड: यह गैजेट नेकबैंड ईयर फोन आजकल काफी पसंद किया जा रहा है। यह नॉइज़ एयरवेव प्रो मैट ब्लैक कलर और शानदार लुक में आ रहा है। इसकी 40 एमएस लेटेंसी आपकी गेमिंग को भी काफी बेहतर बना सकती है। इसमें 3 हाई क्वालिटी वाले माइक भी दिए गए हैं। बेहतर साउंड के लिए आप इसके 3 ईक्यू मॉड्स को भी बदल सकते हैं। इसके बड्स में मैग्नेट भी दिए गए हैं, जिससे इसे कैरी करना आसान हो जाता है।

मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक का ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने लोकार्पण किया

संजीवनी क्लीनिक से घर के नजदीक मिलेगा नि:शुल्क इलाज – ऊर्जा मंत्री तोमर काशी नरेश की गली में किया संजीवनी क्लीनिक का लोकार्पण – ऊर्जा मंत्री तोमर मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक का ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने लोकार्पण किया भोपाल काशी नरेश की गली किला गेट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत निर्मित मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक का सोमवार को ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संजीवनी क्लीनिक के माध्यम से सब को स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार हर व्यक्ति को उसके घर के नजदीक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिये कटिबद्ध है। इसी उद्देश्य से संजीवनी क्लीनिक खोले जा रहे हैं। मंत्री तोमर ने कहा कि गरीब एवं जरूरतमंद को घर के नजदीक ही नि:शुल्क स्वास्थ्य लाभ मिले, इसी धारणा से सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वार्ड में संजीवनी क्लीनिक खोले जा रहे हैं, जहां दवाईयों के साथ ही कई प्रकार की स्वास्थ्य जाचों का लाभ निशुल्क मिलेगा। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं क्षेत्रीण गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

इंदौर की है प्रदेश में एक विशिष्ट पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर प्रदेश में विकास, उन्नति, प्रगति, व्यापार- व्यवसाय, कला, साहित्य और संस्कृति के लिए एक विशेष पहचान रखता हैं। इंदौर से मध्यप्रदेश की पहचान है जो हमारे लिए गर्व और आनंद की बात हैं। इंदौर जो करता है सबसे अलग करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दशहरे के मौके पर इंदौर को आज 4 फ्लाय-ओवर की बड़ी सौगात मिली हैं। यातायात की समस्या को हल करते हुए इंदौर को प्रायोरिटी पर लिया गया है। इंदौर में ट्रैफिक समस्या को देखते हुए फ्लाय-ओवर की श्रृंखला बनी है, जो निरंतर जारी रहेगी। विकास के नए पैमाने पर इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर काम किया जा रहा है, जिसके परिणाम जल्द आएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यात्रियों की समस्या को देखते हुए लोकार्पण करने का नया तरीका निकाला हैं। पहले ब्रिज बनने के बाद लोकार्पण करते थे, हमने थोड़ा बदलाव किया हैं। जनता की समस्या को देखते हुए अभी जितना ब्रिज बना है उतना ही शुरू कर रहे हैं। इससे लोगों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि विकास निरंतर जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को इन्दौर प्रवास के दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए यह बात कही।  

मुख्यमंत्री ने कहा- राज्य सरकार द्वारा 17-18 अक्टूबर 2024 को भोपाल में खनन कॉन्क्लेव आयोजित की जा रही है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के महत्वाकांक्षी विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए राज्य सरकार द्वारा 17-18 अक्टूबर 2024 को भोपाल में खनन कॉन्क्लेव आयोजित की जा रही है। यह महत्वपूर्ण आयोजन राज्य में खनन, तेल, गैस और खनिज आधारित उद्योगों की व्यापक संभावनाओं को प्रदर्शित करेगा, जो विकास की रीढ़ के रूप में कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश, खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य है और देश के खनन क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह देश का एकमात्र राज्य है जो हीरे का उत्पादन करता है साथ ही मैंगनीज और तांबा अयस्क के उत्पादन में भी अग्रणी है, जो विभिन्न औद्योगिक उपयोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा राज्य रॉक-फॉस्फेट उत्पादन में दूसरे, सीमेंट उद्योग के लिए आवश्यक चूना पत्थर उत्पादन में तीसरे और कोयला उत्पादन में चौथे स्थान पर है। कोल-गैस के उत्पादन में भी राज्य दूसरे स्थान पर है, जो वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और स्थिरता की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस कॉन्क्लेव से मध्यप्रदेश सरकार राज्य को खनन और खनिज-आधारित उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाने के लिये की पहल कर रही है। इससे राज्य में आर्थिक संमृद्धि और रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सभी हितधारकों, उद्योगपतियों और खनन क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल होने के लिये आमंत्रित किया गया है। इनकी रहेगी विशेष उपस्थिति खनन कॉन्क्लेव में केंद्रीय खनन मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी, केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री एस.सी. दुबे और सचिव केन्द्रीय खान मंत्रालय श्री वी.एल. कांता राव शामिल होंगे, जो राज्य में खनन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिये केन्द्र सरकार की ओर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराऐंगे इस कार्यक्रम में 600 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी। इसमें एन.सी.एल, एच.सी.एल, एन.एम.डी.सी., ओ.एन.जी.सी., और जी.ए.आई.एल जैसी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि और अन्य राज्यों के उद्योगपति शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि कॉन्क्लेव खनिज कंपनियों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाएगा, जिससे सहयोग और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा। इस आयोजन का उद्देश्य मध्यप्रदेश के समृद्ध खनिज संसाधनों को प्रदर्शित करना है, जिससे राज्य में निवेश को आकर्षित किया जा सके। इसमें कोयला, चूना पत्थर, तेल और गैस, सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की संभावनाओं पर चर्चा होगी। साथ ही खनन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग की भूमिका पर भी जोर दिया जाएगा। इस आयोजन में डिजिटल परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें खनन कार्यों में ऑटोमेशन के साथ एआई और मशीन लर्निंग के उपयोग पर चर्चा होगी। कोल गैस (CBM) जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की संभावनाओं का भी अन्वेषण किया जाएगा। सीमेंट, ऊर्जा, और खनिज-आधारित उद्योगों से संबंधित मुद्दों पर गहन चर्चा के लिए एक राउंड टेबल मीटिंग भी होंगी। कॉन्क्लेव में कई संस्थानों के साथ एमओयू भी होंगे, जो राज्य के खनन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए निवेश प्रस्तावों को औपचारिक रूप देंगे।

चीन की चाल का खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ, पैंगोंग झील किनारे बस्ती को आकार दिया जा रहा

बीजिंग भारत और चीन सीमा पर तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए हैं। हालांकि इस बातचीत का बहुत थोड़ा फायदा होता नजर आ रहा है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर कई बिंदु ऐसे हैं, जहां अब भी भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं। इसमें पूर्वी लद्दाख में स्थित पैंगोंग त्सो झील दोनों देशों के बीच तनाव का एक महत्वपूर्ण स्थल है। अब पता चला है कि चीन इन दिनों भारत से बातचीत की आड़ में पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी तट के पास बड़े पैमाने पर एक बस्ती का निर्माण कर रहा है। चीन की इस चाल का खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है, जिसमें बस्ती को आकार लेते देखा जा सकता है। पैंगोंग झील के उत्तर में बन रही बस्ती  हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी तट के पास एक बड़ी चीनी बस्ती का निर्माण चल रहा है। यह बस्ती भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच 2020 के गतिरोध बिंदुओं में से एक से लगभग 38 किलोमीटर पूर्व में स्थित है, हालांकि यह भारत के क्षेत्रीय दावों से बाहर है। दुनिया की सबसे ऊंची खारे पानी की झील पैंगोंग त्सो भारत, चीन प्रशासित तिब्बत और उनके बीच विवादित सीमा पर फैली हुई है। 17 हेक्टेयर के क्षेत्र में हो रहा निर्माण कार्य रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कंपनी मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा 9 अक्टूबर को कैप्चर की गई सैटेलाइट तस्वीरों में लगभग 17 हेक्टेयर क्षेत्र में तेजी से निर्माण कार्य दिखाया गया है। 4,347 मीटर की ऊंचाई पर येमागौ रोड के पास स्थित यह स्थल निर्माण और मिट्टी हटाने वाली मशीनरी से भरा हुआ है। तक्षशिला संस्थान में जियो पॉलिटिकल रिसर्च प्रोग्राम के प्रोफेसर और प्रमुख वाई निथ्यानंदम के अनुसार, “आवासीय संरचनाओं और बड़ी प्रशासनिक इमारतों सहित 100 से अधिक इमारतें बनाई जा रही हैं। खुली जगहें और समतल भूमि पार्कों या खेल सुविधाओं के लिए संभावित भविष्य के उपयोग का सुझाव देती हैं।” हेलीकॉप्टर के लिए हेलीपैड का भी किया गया निर्माण उन्होंने दक्षिण-पूर्व कोने में 150 मीटर लंबी आयताकार पट्टी की ओर भी इशारा किया, यह अनुमान लगाते हुए कि इसे हेलीकॉप्टर संचालन के लिए तैयार किया जा सकता है। ओपन-सोर्स सैटेलाइट इमेजरी के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि झील की ओर ढलान वाली नदी के किनारे अप्रैल 2024 की शुरुआत में निर्माण शुरू हुआ था। सैन्य सूत्रों के अनुसार, यह बस्ती संभवतः प्रशासनिक और परिचालन क्षेत्रों के बीच अंतर करते हुए दो भागों में विभाजित प्रतीत होती है। एक से दो मंजिला इमारतें बनाई जा रहीं संरचनाओं के छाया विश्लेषण से पता चलता है कि इस बस्ती में एक और दो मंजिला इमारतों का मिश्रण है, पास में छोटी झोपड़ियां हैं, जिनमें से प्रत्येक में छह से आठ लोग रह सकते हैं। दो बड़ी संरचनाएं प्रशासन और भंडारण सुविधाओं के रूप में काम कर सकती हैं। सीधी रेखाओं के बजाय अर्धचंद्राकार लाइनों में डिजाइन किया गया लेआउट लंबी दूरी के हमलों के प्रति असुरक्षा को कम करने के इरादे का सुझाव देता है। ऊंची चोटियों के पीछे बस्ती बना रहा चीन ऊंची चोटियों के पीछे बस्ती का स्थान इसके रणनीतिक लाभ को और बढ़ाता है, जिससे आस-पास के क्षेत्रों से दृश्यता सीमित हो जाती है। निथ्यानंदम ने कहा, “आस-पास की ऊंची चोटियां भूमि-आधारित निगरानी उपकरणों से साइट को अस्पष्ट करती हैं।” सैन्य सूत्रों का अनुमान है कि यदि सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है, तो बस्ती “एड-हॉक फॉरवर्ड बेस” के रूप में कार्य कर सकती है, जिससे चीनी सेना के लिए प्रतिक्रिया समय कम हो सकता है।

मोह रूपी मूर्च्छा से भागें नहीं, उसे साधें

कभी-कभी लोग कहते हैं, साधु-संन्यासी बहुत कष्ट सहते हैं। मैं इससे उल्टा सोचता हूं। साधुओं के लिए कष्ट कम हैं। गृहस्थ के लिए कष्टों का अंबार-सा लगा हुआ है। वह मूर्च्छा से घिरा हुआ है, इसलिए उसे ये कष्ट, कष्ट जैसे प्रतीत नहीं होते। मूर्च्छा दुख का कारण है। मूर्च्छा जागरण का अभाव है। आदमी सोता है, इसीलिए दुख होता है। सोना बहुत आवश्यक भी है और सोना एक समस्या भी है। सोते समय श्वास की गति बढ़ जाती है। वह छोटा हो जाता है। छोटा श्वास आयु को कम करता है। जो अधिक समय सोता है, वह अल्प आयुष्क होता है। परिमित समय तक सोता है तो आदमी ठीक-ठीक जी लेता है। हर प्रवृत्ति के साथ समस्या जुड़ी हुई होती है। सोना जरूरी है तो सोना खतरनाक भी है। दस-बारह घंटा सोना अल्पायु होना है। जो आदमी लंबा जीना चाहता है, उसे सोने की सीमा कम करनी चाहिए। जो मूर्च्छित है, वह सोया हुआ है। सामाजिक स्तर पर मूर्च्छा भी जरूरी मानी गई है। यदि मूर्च्छा नहीं होती है तो बच्चे का लालन-पालन नहीं हो सकता। कोई संबंध ही नहीं होता। कोई किसी चीज की सुरक्षा नहीं कर पाता। मूर्च्छा है इसीलिए प्रवृत्ति का यह चक्र चल रहा है। मूर्च्छा नहीं होती तो सोने को कौन इकट्ठा करता? मूर्च्छा नहीं होती तो हीरों-पन्नों को कौन संजोकर रखता? जैसे पत्थर ठोकर में पड़े रहते हैं, वैसे ही वे भी पड़े रहते। तो फिर वस्तु का यथार्थ मूल्यांकन नहीं होता। कहां पत्थर और कहां हीरा! किंतु मूर्च्छा सबको अपने-अपने स्थान पर टिकाए हुए है। फकीर के पास एक सम्राट आया। फकीर जानता था। सम्राट जब जाने लगा, तब फकीर ने पांच-दस कंकड़ सम्राट को देते हुए कहा, ‘मेरे ये कंकड़ ले जाओ। जब तुम मरकर अगले लोक में जाओगे, तब मैं वहां तुमसे मिलूंगा। तब मेरे ये कंकड़ मुझे दे देना।’ सम्राट हंसकर बोला, ‘बड़े भोले हो तुम! क्या कोई व्यक्ति मरकर भी अपने साथ कुछ ले जा सकता है? यह असंभव है।’ फकीर बोला, ‘तुम सच कह रहे हो?’ सम्राट बोला, ‘यह सच है। सब जानते हैं।’ फकीर ने कहा, ‘तो फिर प्रजा का शोषण कर तुम इतना वैभव क्यों एकत्रित कर रहे हो? मैं तो समझता था, और कोई ले जाए या नहीं, तुम तो अवश्य ही सारा वैभव साथ ले जाओगे। यदि नहीं ले जा सकते तो फिर इतनी मूर्खता क्यों कर रहे हो?’ सम्राट की आंख खुल गई। मूर्च्छा के कारण ही संचय किया जाता है। कभी-कभी मैं सोचता हूं, मूर्च्छा नहीं होती तो समाज और परिवार कैसे चलता? माता बच्चे के पालन-पोषण में इतना कष्ट सहती है। क्यों? मूर्च्छा है इसीलिए। पशु-पक्षियों की माताएं भी बच्चों के लिए, अपनी संतान के लिए क्या नहीं सहतीं? मूर्च्छा के कारण सारा कष्ट सह लिया जाता है। इस दृष्टि से सामाजिक प्राणी के लिए यह नहीं कहा जा सकता कि मूर्च्छा सर्वथा हेय है। वह छोड़ भी नहीं सकता। जो कुछ एक-दूसरे के लिए होता है या किया जाता है, वह सारा मूर्च्छा और मोह के कारण ही हो रहा है। मोह नहीं होता तो कौन पढ़ाता बच्चों को? कौन उन्हें तैयार करता? कौन उन्हें व्यवसाय सिखाता? फिर तो सब अकेले होते। सब विरागी या विरक्त होते। अकेला आदमी विरागी बनकर जीवनयापन कर सकता है, पर समाज वैसा नहीं कर सकता। संसार ऐसा बन नहीं सकता। यदि संसार ऐसा होता है तो वह फिर संसार नहीं, व्यक्ति होगा। आदमी अनगिन कष्टों को सहता हुआ भी जी रहा है। इसका मुख्य कारण है— मूर्च्छा। कभी-कभी लोग कहते हैं, साधु-संन्यासी बहुत कष्ट सहते हैं। मैं इससे उल्टा सोचता हूं। साधुओं के लिए कष्ट कम हैं। गृहस्थ के लिए कष्टों का अंबार-सा लगा हुआ है। वह मूर्च्छा से घिरा हुआ है, इसलिए उसे ये कष्ट, कष्ट जैसे प्रतीत नहीं होते। मूर्च्छा एक आवरण है। ऐसा आवरण कि जिसमें सारे कष्ट ढक जाते हैं। पति ने पत्नी को या पत्नी ने पति को तलाक दे दिया। पति चल बसा। पत्नी रह गई। पत्नी मर गई। पति रह गया। दोनों मर गए। छोटे-छोटे बच्चे रह गए। ये सारी कितनी कठिन परिस्थितियां हैं? दिल दहलानेवाली स्थितियां हैं। इन स्थितियों में भी आदमी सुख मानकर जीता ही चला जा रहा है। एक छोटे बच्चे से भी पूछा जाए कि तुम्हारे माता-पिता मर गए। तुम असहाय हो। क्या साधु बनोगे? वह तत्काल सिर हिलाकर कहेगा, साधु तो नहीं बनूंगा। इसका कारण है मूर्च्छा। उसे लगता ही नहीं कि वह असहाय है। एक मूर्च्छा हजारों कष्टों को शांत कर देती है, उनका निवारण कर देती है। यदि ऐसा नहीं होता तो इस दुखमय, कष्टमय और दारुण संसार में आदमी कभी जी नहीं पाता। उसको जीवित रखनेवाली वस्तु है मूर्च्छा। यह सबको जिला रही है। सब प्राणी इसकी बदौलत जी रहे हैं। बड़ा भाई— छोटे भाई को, पिता— पुत्र को तैयार करता है। आगे चलकर छोटा भाई, बड़े भाई को दर-दर का भिखारी बना देता है। पुत्र, पिता को घर से निकाल देता है। ऐसी स्थितियां होती हैं। इसे हम देखते हैं। पर बड़ा भाई, छोटे भाई को तैयार करता है और पिता, पुत्र को योग्य बनाता है। इन सबके पीछे मूर्च्छा काम करती है। इसलिए सामाजिक और पारिवारिक वातावरण को सजीव रखने के लिए मूर्च्छा की अनिवार्यता स्वीकार करनी होगी। सामाजिक व्यक्ति मूर्च्छा को सर्वथा छोड़ दे, यह असंभव बात है। किंतु मूर्च्छा के चक्रव्यूह को तोड़ना जरूरी है। या कहें कि इस मूर्च्छा रूपी मोह को साधना जरूरी है, ताकि आप इसके गुलाम न बनें। यह मूर्च्छा तमस और राजस का प्रतीक न बने, बल्कि सत्व का आधार लेकर सात्विक बनें। हमें यह ध्यान रखना है कि जब तक इस मूर्च्छा का चक्रव्यूह चलता रहेगा, तब तक दुखों का अंत नहीं होगा। उसकी एक सीमा हो। वह अनंत न बने, यह अपेक्षित है। मूर्च्छा केवल समाज को चलानेवाली कड़ी के रूप में स्वीकृत हो तो इतना अनर्थ नहीं होता। पर आज उसे अनंत आकाश प्राप्त है। यह अहितकर है। ध्यान का पुष्ट परिणाम है मूर्च्छा के चक्र का टूटना।

आईएमएफ के अनुसार कृषि और कपड़ा क्षेत्रों ने पाकिस्तान के विकास की संभावनाओं को दशकों से अवरुद्ध कर रखा है

कराची  आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान की मुश्किलें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहीं। बीते कुछ समय से विदेशी कर्जे पर निर्भर पाकिस्तान के कृषि और कपड़ा क्षेत्र पर आईएमएफ ने कड़ी टिप्पणी की है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान से कहा है कि वह इन क्षेत्रों को तरजीह देना और कर में छूट देना बंद करे। आईएमएफ के अनुसार इन क्षेत्रों ने देश के विकास की संभावनाओं को दशकों से अवरुद्ध कर रखा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपनी स्टॉफ रिपोर्ट में पाकिस्तान की संघर्षरत अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के कारणों पर चर्चा की है। रिपोर्ट में पाकिस्तान की खस्ताहाल आर्थिक स्थिति का जिम्मेदार कृषि और कपड़ा क्षेत्र को ठहराया गया है। आईएमएफ के अनुसार ये क्षेत्र देश के राजस्व में पर्याप्त योगदान नहीं दे रहे। ये क्षेत्र सरकारी पैसे का एक बड़ा हिस्सा मदद के दौर पर लेने के बावजूद अकुशल और अप्रतिस्पर्धी बने हुए हैं। हाल ही में वैश्विक ऋणदाता से सात अरब डॉलर की मदद (ईएफएफ) हसिल करने वाले पाकिस्तान को आईएमएफ ने कहा है कि उसे अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए 75 साल से जारी आर्थिक प्रथाओं को बदलना होगा। आईएमएफ ने 10 अक्तूबर को जारी रिपोर्ट में कहा कि अपने जैसे दूसरे देशों की तुलना में पाकिस्तान काफी पिछड़ा है। इससे यहां के लोगों का जीवनस्तर प्रभावित हुआ है और 40 प्रतिशत से ज्यादा आबादी गरीबी रेखा के नीचे पहुंच गई है। आईएमएफ के अनुसार पाकिस्तान निर्यात के लिए चीजें बनाने में असफल रहा। ज्ञान आधारित निर्यात भी कम बना हुआ है, क्योंकि यह क्षेत्र भी नवाचार (इनोवेशन) करने में विफल रहा। साल 2022 में पाकिस्तान आर्थिक जटिलता सूचकांक में 85वें नंबर पर रहा, इस इंडेक्स में पाकिस्तान वर्ष 2000 में भी इसी स्थान पर था।  

तूफान हेलेन और मिल्टन के कारण अमेरिका में हेल्थ केयर प्रोवाइडर को मेडिकल प्रोडक्ट्स की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा

सैक्रामेंटो  संयुक्त राज्य अमेरिका में हेल्थ केयर प्रोवाइडर को मेडिकल प्रोडक्ट्स की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। तूफान हेलेन और मिल्टन ने इंट्रावेनस (आईवी) फ्लुइड्स की सप्लाई चेन को गंभीर रूप से बाधित कर दिया है। अमेरिका में सबसे बड़े अस्पताल-बेस्ड रिसर्च एंटरप्राइज, मास जनरल ब्रिघम ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह  बुधवार तक गैर-आपातकालीन, वैकल्पिक प्रक्रियाओं को स्थगित कर देगा। इसने कहा कि यह साफ नहीं है कि आईवी फ्लुइड्स की आपूर्ति कब सुधरेगी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स कंपनी प्रीमियर इंक की तरफ से  जारी एक सर्वे के अनुसार, देश भर में 86 फीसदी से अधिक हेल्थ केयर प्रोवाइडर आईवी फ्लुइड्स की कमी का सामना कर रहे हैं। यह स्थिति तब शुरू हुई जब पिछले महीने के अंत में तूफान हेलेन ने उत्तरी कैरोलिना में बैक्सटर आईवी प्लांट को नुकसान पहुंचाया। इससे देश की 60 फीसदी आईवी सॉल्यूशन सप्लाई निकट भविष्य के लिए ऑफलाइन हो गई। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री जेवियर बेसेरा ने 9 अक्टूबर को स्वास्थ्य सेवा नेताओं को लिखे पत्र में कहा कि आने वाले हफ्तों में सप्लाई ‘बाधित रह सकती है’ और तूफान मिल्टन ‘पहले से ही कमजोर बाजार’ को और अधिक बाधित कर सकता है। खाद्य और औषधि प्रशासन और बैक्सटर, वैकल्पिक आईवी, डायलिसिस और न्यूट्रिशन प्रोडक्ट की पहचान कर रहे हैं।    

साय कैबिनेट की 15वीं बैठक 16 को, धान खरीदी और राज्योत्सव समेत कई मुद्दों पर होगी चर्चा

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 16 अक्टूबर को राज्य कैबिनेट बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण एजेंडों और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा, इस दौरान आगामी राज्योत्सव और धान खरीदी की तैयारियों की समीक्षा भी किये जाने की संभावना है। बता दें कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार ने इस साल राज्य में 160 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है और 15 नवंबर से खरीदी शुरू करने का प्रस्ताव है। इन प्रस्तावों पर कैबिनेट की मुहर लगने की संभावना है। इसके साथ ही प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों द्वारा 4% महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ाने की मांग पर विचार और कुछ विभागों में नए पदों की स्वीकृति के प्रस्ताव भी कैबिनेट के समक्ष रखे जा सकते हैं। कैबिनेट बैठक में विधायकों के यात्रा भत्ते में वृद्धि के प्रस्ताव को भी मंजूरी के लिए पेश किया ज सकता है। इसके अलावा, पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को एक साथ कराए जाने पर भी चर्चा हो सकती है। इस संदर्भ में गठित आईएएस ऋचा शर्मा की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, जिसमें दोनों चुनाव एक साथ कराने की अनुशंसा की गई है। गौरतलब है कि इससे पहले बीते 20 सितंबर को कैबिनेट की बैठक हुई थी, जिसके बाद मंत्रियों की व्यस्तता के कारण इस महीने की शुरुआत में प्रस्तावित बैठक स्थगित हो गई थी।

संस्कृत में हायर एजुकेशन कर बनायें शानदार करियर, पतंजलि यूनिवर्सिटी में कई कोर्स

संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति और दर्शन की आधारभूत भाषा है. धार्मिक ग्रंथों से लेकर साहित्य और कला तक, संस्कृत ने भारतीय संस्कृति को आकार दिया है. इसका वैज्ञानिक व्याकरण भाषा विज्ञान में महत्वपूर्ण रहा है. आज भी संस्कृत का उपयोग पूजा, संगीत और चिकित्सा में किया जाता है. कई अंतरराष्ट्रीय संगठन संस्कृत भाषा के संरक्षण और प्रचार के लिए काम कर रहे हैं, जिससे इसे विश्व स्तर पर मान्यता मिल रही है. संस्कृत को पिछले 3,500 वर्षों से पढ़ाया जा रहा है और इसकी विरासत भारत की सच्ची संस्कृति को समृद्ध करते हुए लंबे समय से जारी है. माना जाता है कि सबसे पुरानी इंडो-यूरोपियन भाषाओं में से एक, जिसके लिए पर्याप्त लिखित दस्तावेज मौजूद हैं. संस्कृत तेजी से आम लोगों के बीच एक लोकप्रिय भाषा विकल्प बन रही है. ऐसे में संस्कृत के पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वालों और संस्कृत भाषा में हायर एजुकेशन प्राप्त करने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही है. अगर आप भी संस्कृत में कोई कोर्स करना चाहते हैं, तो हम आपको पतंजलि यूनिवर्सिटी के द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले संस्कृत भाषा के पाठ्यक्रमों और करियर के विकल्पों के बारे में बताने जा रहे हैं. पतंजलि यूनिवर्सिटी में है संस्कृत विभाग हरिद्वार, उत्तराखंड में स्थित पतंजलि यूनविर्सिटी में संस्कृत विभाग की स्थापना 2009 में की गई थी. ये विभाग विभिन्न पाठ्यक्रम और रिसर्च के अवसर प्रदान करता है. संस्कृत व्याकरण और साहित्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए, विभाग प्राचीन ग्रंथों का विश्लेषण करने और उनको संरक्षित करने के लिए भी काम कर रहा है. यही नहीं, विभाग संस्कृत कम्प्यूटेशनल लैंग्वेज सांइस  जैसे क्षेत्रों में भी शामिल है. विभाग के छात्र और शोधकर्ता लगातार संस्कृत के रहस्यों की खोज कर रहे हैं और ज्ञान के नए रास्ते खोज रहे हैं. इस विभाग के अंतर्गत छात्रों को फीस में 50 प्रतिशत छूट दी जाती है. साथ ही, प्रामाणिकता से अध्ययन करने वाले योग्य छात्रों को नौकरी की गारंटी भी दी जाती है. इसके अलावा, अजीवन ब्रह्मचारियों और संन्यासियों को विशेष 100 प्रतिशत छूट दी जाती है. विद्यार्थी शास्त्र स्मरण के माध्यम से एक लाख रुपये तक की राशि प्राप्त कर सकते हैं. ये हैं पाठ्यक्रम, इतनी है फीस पतंजलि यूनिवर्सिटी में भी लगभग सभी विश्वविद्यालयों की तरह ही बीए, एमए, पीजी डिप्लोमा और पीएचडी प्रोग्राम ऑफर किए जाते हैं. साथ ही, शास्त्री, आचार्य, शिक्षा शास्त्री, शिक्षा आचार्य, संयुक्ताचार्य (एकीकृत), योग विज्ञान शास्त्री, योग विज्ञान, विद्यानिधि (पीएचडी के समकक्ष), ज्योतिष शास्त्र में सर्टिफिकेट / डिप्लोमा इत्यादि कोर्सेस भी उपलब्ध हैं. इन कोर्सेस की अवधि नियमानुसार एक वर्ष से छह वर्ष तक की हो सकती है. वहीं, कोर्सेस की फीस प्रति सेमेस्टर 11,000 रुपये से शुरू होती है. इसके अलावा, एप्लीकेशन फीस, काउंसलिंग फीस, रजिस्ट्रेशन फीस आदि शुल्क भी जोड़े जाते हैं. अधिक जानकारी के लिए पतंजलि यूनिवर्सिटी की अधिकारिक वेबसाइट में जा सकते हैं. संस्कृत में करियर की संभावनाएं यदि आप संस्कृत में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो हाई स्कूल की पढ़ाई से ही संस्कृत विषय का चुनाव करिए. 12वीं पास करने के बाद की उच्च शिक्षा भी संस्कृत विषय में कर सकते हैं. संस्कृत के माध्यम से छात्र शिक्षक बन सकते हैं, अपने डॉक्टरेट को पूरा कर सकते हैं और प्रोफेसर बन सकते हैं और यदि वे चाहते हैं तो अनुवादक, लेखक, कवि और बहुत कुछ बन सकते हैं. इसके अलावा और भी बहुत सारे विकल्प मौज़ूद हैं, जैसे- सलाहकार (संस्कृत प्रूफ़ पढ़ना), संस्कृत शिक्षक, कंटेंट राइटर, संस्कृत अनुवादक आदि.

इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा, “IDF सैनिक हिजबुल्लाह की संपत्तियों को जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह नष्ट कर रहे हैं

यरूशलम इजरायल का कहना है कि वह मिलिट्री ऑपरेशन खत्म होने के बाद हिजबुल्लाह को दक्षिणी लेबनानी सीमा क्षेत्र पर दोबारा कब्जा नहीं करने देगा। इजरायल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट ने कहा कि इजरायल ‘हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे वाले (दक्षिणी लेबनानी) गांवों की पूरी पहली पंक्ति’ को अपना ‘मिलिट्री टारेगट’ मानता है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, गैलेंट ने कहा कि हिजबुल्लाह आतंकवादियों ने इन गांवों में कई भूमिगत सुरंगों और हथियारों के गोदाम का निर्माण किया है। इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा, “आईडीएफ सैनिक वर्तमान में इन (हिजबुल्लाह) संपत्तियों को जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह नष्ट कर रहे हैं।” उन्होंने चल रहे छापों को ‘शक्तिशाली और प्रभावी’ बताया। गैलेंट ने कहा कि आईडीएफ सैनिकों के वापस चले जाने के बाद भी हम हिजबुल्लाह आतंकवादियों को इन क्षेत्रों में वापस नहीं आने देंगे। इजरायल-लेबनान सीमा पर  भी लड़ाई जारी रही। इजरायली सेना ने दावा किया कि उसने लेबनान में हिजबुल्लाह के लगभग 200 ठिकानों पर हमला किया, जिसमें रॉकेट लांचर, एंटी-टैंक मिसाइल पोजिशन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। सेना ने यह भी बताया कि हिजबुल्लाह लड़ाकों के साथ लड़ाई में 28 सैनिक घायल हुए हैं। आईडीएफ ने दक्षिणी लेबनान के 21 से अधिक गांवों के निवासियों से अवली नदी के उत्तर के इलाके को खाली करने का अल्टीमेटम दिया। इजरायली सैन्य प्रवक्ता अविचाय एड्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘अपनी सुरक्षा के लिए, आपको तुरंत अपने घर छोड़ देने चाहिए। बिना देरी किए खाली कर दें। हिजबुल्लाह के तत्व, सुविधाएं या हथियार क्षेत्र में हैं, जो आपकी जान को जोखिम में डाल रहे हैं।” वहीं हिजबुल्लाह की तरफ से इजरायली ठिकानों पर हमले जारी हैं। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, हिजबुल्लाह ने रविवार शाम तक उत्तरी इजरायल में कम से कम 90 रॉकेट दागे। हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल के बिन्यामीना में गोलानी ब्रिगेड के ट्रेनिंग बेस पर ड्रोन अटैक की जिम्मेदारी ली। यह हमला इजरायल में एक दुर्लभ घटना है, जिसके दौरान एक ड्रोन इजरायल की वायु रक्षा प्रणाली को भेद गया और भारी नुकसान पहुंचाया। हमलें में कम से कम चार इजरायली सैनिक मारे गए और दर्जनों अन्य घायल हो गए। इजरायल ने अक्टूबर की शुरुआत से लेबनान में ‘सीमित’ जमीनी अभियान शुरू किया, जिसमें दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसने बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हवाई हमले भी तेज कर दिए हैं, जो हिजबुल्लाह का गढ़ है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने  बताया कि 8 अक्टूबर, 2023 से लेबनान पर इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या 2,306 तक पहुंच गई है, जबकि कुल 10,698 लोग घायल हुए हैं।    

शरद पूर्णिमा 2024: धन, समृद्धि और सफलता के लिए उपाय और टोटके

शरद पूर्णिमा का दिन बहुत ही खास माना जाता है। सिद्धांत यह है कि इस दिन समुद्र तट के बीच मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इस दिन को मां लक्ष्मी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं। इसलिए इस दिन जो व्यक्ति मन से मां लक्ष्मी की पूजा करता है उसके सभी काम आसानी से पूरे हो जाते हैं। साथ ही उस व्यक्ति को कभी भी धन धान्य की कोई कमी नहीं रहती है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस बार शरद पूर्णिमा 16 अक्टूबर, रविवार का दिन है। इस दिन अगर आप सुबह-सुबह कुछ आसान उपाय कर लें तो आपके जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं रहेगी। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा के दिन कौन से पांच उपाय करें। शरद पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल शीघ्र अनादि काल से करें ये उपाय शरद पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल शीघ्र अनादिकाल में माँ लक्ष्मी की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएँ और इसके बाद माँ लक्ष्मी के जप का जाप करें। ऐसा करने से घर में धन धान्य की कोई कमी नहीं होगी साथ ही आपकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। शरद पूर्णिमा के दिन किसी भी गरीब व्यक्ति को जरूर दान करना चाहिए ये चीजें शरद पूर्णिमा के दिन किसी भी गरीब को ये चीजें जरूर दान करनी चाहिए। आप किसी भी प्रकार के अन्न का दान कर सकते हैं जैसे चावल, आटा आदि। अगर आप चावल का दान करते हैं तो यह काफी बेहतरीन रहेगा। इसके अलावा आप फ्लैट का दान भी कर सकते हैं। साधारण लोगों को कपड़े का दान करने से व्यक्ति को पुण्य मिलता है। शरद पूर्णिमा के दिन इस मंत्र के जाप से दूर होगी आर्थिक ऊर्जा शरद पूर्णिमा के दिन ऊँ ह्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूर-दूरये स्वाहा:। ।। इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को धन की प्राप्ति होती है। इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप अवश्य करें। ​शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी को पीले रंग की कौड़ी इस दिन माता लक्ष्मी को पीले रंग की कौड़ी दिखाएं। कौड़ी निर्विकार करने से पहले मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर उनकी पूरी विधि विधान से पूजा करने के बाद ही कौड़ी निर्वाण करें। इसके बाद अगले दिन सुबह इन कौड़ियों को अपने घर की रसोई में किसी लाल रंग के वस्त्र में रखा जाता है। इस उपाय को करने से आपकी जीवनशैली कभी खाली नहीं होगी। शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी को पान के पत्ते जरूर पहनने चाहिए। शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की पूजा में पान के पत्तों का प्रयोग अवश्य करें। इसके बाद इस पान के पत्ते को लेकर घर परिवार के सभी लोग प्रसाद के रूप में बंट जाते हैं। ऐसा करने से घर में सुख शांति के साथ धन की वर्षा भी होगी। माँ लक्ष्मी भी कभी आपके धन के भंडार से खाली नहीं रहेंगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, दुनियाभर में तेजी से आंखों से संबंधित समस्या मायोपिया के मामले बढ़ते जा रहे हैं

नईदिल्ली साल 2019 के अंत में शुरू हुई कोविड-19 महामारी का असर अब भले ही हल्का हो गया है पर संक्रमण का खतरा वैश्विक स्तर पर अब भी बना हुआ है। वायरस में म्यूटेशन से उत्पन्न होने वाले नए-नए वेरिएंट्स विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाते रहे हैं। इस बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दुनियाभर में बढ़ती एक नई महामारी को लेकर लोगों को अलर्ट किया है। विशेषज्ञों ने कहा, हम सभी तकनीक से प्रेरित इस दुनिया में दिनभर किसी ने किसी तरह के स्क्रीन से चिपके रहते हैं। मोबाइल, टेलीविजन हो या लैपटॉप, इनके अधिक उपयोग के कारण हमारा स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है जो एक नई महामारी को जन्म दे सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, दुनियाभर में बहुत तेजी से आंखों से संबंधित समस्या, विशेषतौर पर मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) के मामले बढ़ते जा रहे हैं। यह बच्चों में सबसे ज्यादा रिपोर्ट की जा रही समस्या है जिसके कारण कम दिखाई देने और समय के साथ अंधेपन का खतरा बढ़ जाता है। अगर समय रहते इसे नियंत्रित करने के लिए प्रयास न किए गए तो अगले एक-दो दशक में वयस्कों की बड़ी आबादी मायोपिया से पीड़ित हो सकती है। ये निश्चित ही गंभीर चिंता का विषय है। मायोपिया के बढ़ते मामले स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बचपन में मायोपिया का निदान होने से जीवन की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। यह प्रवृत्ति चिंताजनक है, यह सिर्फ चश्मे पर निर्भरता की समस्या नहीं है बल्कि इसके कारण ग्लूकोमा और रेटिनल डिटेचमेंट जैसी आंखों की अन्य बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है। कुछ अध्ययनों का अनुमान है कि वर्ष 2050 तक दुनिया की लगभग आधी आबादी मायोपिया से पीड़ित हो सकती है। भारत में, बच्चों में मायोपिया की घटना लगातार बढ़ रही है। कोरोना महामारी ने इसके जोखिमों को और भी बढ़ा दिया है। मायोपिया के कारण मानसिक रोगों का खतरा नेत्र रोग विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर मामलों में मायोपिया का निदान बचपन में ही किया जाता है। ये समस्या सिर्फ आंखों तक ही सीमित नही हैं, इसके कारण मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर होने का खतरा रहता है। मायोपिया के कारण बच्चों की विशिष्ट खेलों और अन्य गतिविधियों में भागीदारी कम हो जाती है। बाहर खेल-कूद में कमी के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो सकता है। मायोपिया के शिकार लोगों में भविष्य में स्ट्रेस-एंग्जाइटी और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कई तरह की अन्य विकारों का जोखिम अधिक हो सकता है। बच्चों में मायोपिया की बढ़ती समस्या ब्रिटिश जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में बच्चों में मायोपिया की बढ़ती समस्या को लेकर अलर्ट किया गया है। 50 देशों में पांच मिलियन (50 लाख) से अधिक बच्चों और किशोरों पर किए गए शोध में पाया गया है कि एशियाई देशों में इसका जोखिम सबसे अधिक देखा जा रहा है। जापान में 85% और दक्षिण कोरिया में 73% बच्चे निकट दृष्टि दोष से ग्रस्त हैं, जबकि चीन और रूस में 40% से अधिक बच्चे इससे प्रभावित हैं। मायोपिया के बारे में जानिए नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) आंखों की गंभीर समस्या है, जिसमें रोगी को अपने निकट की वस्तुएं तो स्पष्ट रूप से देखती हैं, लेकिन दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई पड़ती हैं। इसमें आंख का आकार बदल जाता है। सामान्यतौर पर आंख की सुरक्षात्मक बाहरी परत कॉर्निया के बड़े हो जाने के कारण ऐसी समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में आंख में प्रवेश करने वाला प्रकाश ठीक से फोकस नहीं कर पाता है। क्यों बढ़ रहे हैं मायोपिया के मामले ‘द लैंसेट डिजिटल हेल्थ जर्नल’ में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया था कि स्क्रीन टाइम ने बच्चों और युवाओं में मायोपिया के जोखिम को पहले की तुलना में काफी बढ़ा दिया है। स्मार्ट डिवाइस की स्क्रीन पर बहुत अधिक समय बिताना मायोपिया के खतरे को 30 फीसदी तक बढ़ा देता है। इसके साथ ही कंप्यूटर के अत्यधिक उपयोग के कारण यह जोखिम बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा कोरोना महामारी की नकारात्मक स्थितियों जैसे लोगों को ज्यादा से ज्यादा समय घरों में बीतना, बाहर खेलकूद में कमी और ऑनलाइन क्लासेज के कारण आंखों से संबधित इस रोग के मामले और भी बढ़ गए हैं। 

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet