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हरियाणा विधानसभा चुनाव: नतीजे आने से पहले ही भूपिंदर सिंह हुड्डा ने दिल्ली में डाला डेरा, कहा-न टायर्ड हूं और न रिटायर्ड

नई दिल्ली हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले भूपिंदर सिंह हुड्डा दिल्ली पहुंच गए हैं। वह यहां पार्टी लीडर राहुल गांधी से मुलाकात करने वाले हैं। इससे पहले हुड्डा ने दिल्ली में मीडिया से भी बात की और कहा कि मैं न तो टायर्ड हूं और न ही रिटायर्ड हूं। इसके साथ ही हुड्डा ने संकेत दे दिए कि वह सीएम की रेस में बने हुए हैं। उन्होंने खुलकर तो इतना ही कहा कि हाईकमान और विधायक तय करेंगे कि सीएम कौन बनेगा, लेकिन खुद को टायर्ड और रिटायर्ड से परे बताकर सीनियर हुड्डा ने अपनी दावेदारी तो जता ही दी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा रिजल्ट से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस के मुख्यालय पहुंचे। उनके इस तरह से दिल्ली आने से हरियाणा कांग्रेस में हलचल बढ़ गई है। इस दौरान हरियाणा प्रभारी दीपक बावरिया ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ मुलाकात की‌। माना जा रहा है कि हुड्डा आज शाम राहुल गांधी के साथ भी मीटिंग कर सकते हैं। हुड्डा रात में अपने दिल्ली स्थित आवास पर रुकेंगे। भूपेंद्र हुड्डा को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है लेकिन कांग्रेस की कुमारी सैलजा, सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी मुख्यमंत्री पद के लिये अपनी-अपनी दावेदारी ठोक दी है। एग्जिट पोल के मुताबिक हरियाणा में कांग्रेस बहुमत से जीत रही है। हुड्डा, कुमारी सैलजा और सुरजेवाला सीएम पद की दौड़ में मुख्यमंत्री पद को लेकर पिछले कई महीनों से भूपेन्द्र हुड्डा, कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला के बीच खींचतान जारी है। चुनाव के नतीजों से पहले ही हुड्डा ने अपने समर्थक उम्मीदवारों से बातचीत शुरू कर दी है। वहीं सैलजा और सुरजेवाला को आलाकमान से उम्मीद बनी हुई है। तीनों ही नेता खुद को मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल बता रहे हैं। सैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला के मुख्यमंत्री पद के दावेदार होने के सवाल पर हुड्डा ने कहा था कि राजनीति में कोई भी आकांक्षा रख सकता है। मुख्यमंत्री पद के लिए एक तय प्रक्रिया होती है। पार्टी आलाकमान का फैसला करेगा और वहीं सर्व मान्य होगा। मतदान से पहले सोनिया गांधी से मुलाकात कर चुकी सैलजा कांग्रेस हाईकमान ने हरियाणा में मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं कर रखा है। रणनीति के तहत बिना चेहरे के ही चुनाव लड़ा गया। हालांकि, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहले दो बार सीएम रह चुके हैं और तीसरी बार के लिए भी मजबूत दावेदार हैं। कुमारी सैलजा मतदान से पहले ही सोनिया गांधी से मुलाकात कर चुकी हैं। मतदान से दो दिन पहले कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा सोनिया गांधी से मिलने 10 जनपथ पहुंची। दोनों के बीच करीब आधे घंटे बातचीत हुई थी। कुमारी सैलजा भी कर चुकी हैं सोनिया गांधी से मीटिंग सोनिया गांधी से मुकालात करने के बाद कुमारी सैलजा ने किसी से बात नहीं की। वो मीडिया से बात किए बगैर कार में वहां से निकल गईं। दोनों नेताओं की मुलाकात ने हरियाणा की राजनीति में हलचल मचा दी थी। अब सुरजेवाला भी जल्द ही हाईकमान के दरबार भी पहुंच सकते हैं। हुड्डा अभी तक हाईकमान की ओर से फ्री हैंड रहे हैं। पहले हुड्डा अपने समर्थक चौधरी उदयभान को प्रदेशाध्यक्ष बनाने में कामयाब रहे। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी ज्यादातर उनके ही समर्थकों को टिकट मिले।

गंभीर हालत में जयपुर रैफर, राजस्थान-अलवर में नशेड़ी बदमाशों ने युवक के सिर पर फोड़ी 6 बोतलें

अलवर. शहर के अरावली विहार थाना अंतर्गत इंदिरा गांधी स्टेडियम के समीप कल दोपहर तीन कुख्यात बदमाशों ने शराब के नशे में  एक युवक पर जानलेवा हमला कर दिया। जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के सोनावा निवासी 29 वर्षीय विनोद सैनी शिवाजी पार्क में मजदूरी कर दोपहर में खाना खाने के लिए अपने घर आ रहा था, तभी रास्ते में स्टेडियम के समीप पड़ोसी विजयपाल, अजीत और पवन ने उसे घेर लियाऔर उसके सिर पर पहले कातले से वार किया और उसके बाद ताबड़तोड़ 6 बोतलें उसके सिर पर फोड़ डाली। गौरतलब है कि स्टेडियम के पीछे ही शराब का ठेका है, जहां आए दिन शराब पीकर खुलेआम गुंडागर्दी होती है। बड़ी बात तो यह है कि पुलिस थाना भी स्टेडियम के पास ही है लेकिन इसके बावजूद यहां इस तरह की  गुंडागर्दी आम बात हो चुकी है। पीड़ित विनोद सैनी का कहना है कि किसी पुरानी रंजिश को लेकर उन्होंने हमला किया है, जबकि उसका उनसे कोई झगड़ा नहीं था। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति विजयपाल को हिरासत में ले लिया है। पुलिस बाकी दो बदमाशों की भी तलाश कर रही है, जो घटना के बाद ही फरार हो गए हैं। पुलिस दोनों आरोपियों के बारे में पकड़े गए आरोपी विजयपाल से पूछताछ कर रही है ताकि उन्हें भी हिरासत में लिया जा सके।

समिति की बैठक में होगा फैसला, राजस्थान-एसआई भर्ती परीक्षा होगी रद्द या नहीं

जयपुर. राजस्थान एसआई भर्ती परीक्षा 2021 में पेपर लीक मामले के बाद आज अहम बैठक होगी। पेपर लीक का खुलासा होने के बाद सरकार ने 6 मंत्रियों की एक समिति का गठन किया था, जो इस मामले की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई की सिफारिश करेगी। इस समिति की पहली बैठक आज सचिवालय में आयोजित होने वाली है। समिति की सिफारिशों के बाद सरकार परीक्षा रद्द करने या अन्य कोई कदम उठाने का निर्णय लेगी। एसआई भर्ती परीक्षा 2021 के पेपर लीक मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा की संलिप्तता सामने आई थी। जांच एजेंसी एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की पूछताछ में खुलासा हुआ कि कटारा ने पेपर लीक किया था, जो बाद में रामूराम राईका द्वारा अपने बेटे देवेश और बेटी शोभा को उपलब्ध कराया गया। इस मामले के गर्माने के बाद सरकार ने 6 मंत्रियों की समिति का गठन किया, ताकि परीक्षा रद्द करने या अन्य कार्रवाई के लिए सिफारिशें दी जा सकें। समिति की संरचना समिति का संयोजक संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल को बनाया गया है। अन्य सदस्यों में स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा, जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म और सार्वजनिक निर्माण राज्यमंत्री मंजू बाघमार शामिल हैं। समिति इस मामले में गहन समीक्षा करेगी और आगे की कार्रवाई के लिए सरकार को अनुशंसा देगी। परीक्षा रद्द करने पर मतभेद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने परीक्षा रद्द करने की मांग की है लेकिन इसके विरोध में कई सामाजिक संगठनों ने सरकार से इसे निरस्त न करने का आग्रह किया है। राजपूत और जाट समाज सहित विभिन्न संगठनों ने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि पेपर लीक में केवल 5% उम्मीदवार दोषी हैं, बाकी 95% निर्दोष अभ्यर्थियों को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए। उनका तर्क है कि परीक्षा रद्द करने से अन्याय होगा और बेरोजगार युवाओं के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ेगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समिति की सिफारिशों के बाद बैठक में क्या निर्णय लिया जाता है?

पंजाब जिले में बढ़ाई गई सुरक्षा, लगे हाईटेक नाके, नाकाबंदी का मकसद अमन-कानून को बनाए रखना

जालंधर पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा के दिशा-निर्देशों के तहत कमिश्नरेट पुलिस ने त्योहारों के सीजन और पंचायत चुनाव के दौरान अमन-कानून को सुनिश्चित बनाने के लिए 19 नाजुक बिंदुओं पर विशेष नाकाबंदी करते हुए शहर भर में अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस नाकाबंदी का मकसद अमन-कानून को बनाए रखना, संदिग्ध व्यक्तियों की कार्रवाई पर नजर रखना और ट्रैफिर नियमों को लागू करना था।   व्यापक नाकाबंदी ऑप्रेशन कमिश्नरेट पुलिस ने त्योहारी सीजन और आगामी ग्राम पंचायत चुनाव 2024 के दौरान कानून को यकीनी बनाने के लिए शहर के 19 नाजुक प्वांइटों पर विशेष नाकेबंदी की। इस ऑपरेशन की देखरेख हलका जी.ओ. द्वारा की गई और एस.एच.ओ. द्वारा कमिश्नरेट पुलिस, जालंधर की इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम (ERS) टीम के सहयोग से चलाई गई। त्योहारों के सीजन और चुनाव के दौरान सुरक्षा को सुनिश्चित करना इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य त्योहारी सीजन और आगामी ग्राम पंचायत चुनाव 2024 के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखना था। कमिश्नरेट पुलिस जालंधर ने इस कठिन समय के दौरान सुरक्षा, सुचारू यातायात और नागरिकों की सुविधा को पहल दी। संदिग्ध तत्वों पर फोकस विशेष नाकाबंदी में शहर में संदिग्ध तत्वों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दिया। बुरे तत्वों पर विशेष ध्यान दिया गया। इस दौरान टीमें किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सरगर्मी से उनकी गतिविधियों पर नजर रख रही है।    ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन एवं एनफोर्समेंट नाकाबंदी के दौरान ट्रैफिक नियमों की पालना न करने वालों के कुल 94 ट्रैफिक चालान किए गए और 13 वाहनों को दस्तावेजों की कमी के कारण जब्त कर लिया गया। नाकाबंदी के दौरान उल्लंघन जैसे बिना हेलमेट, ट्रिपल राइडिंग, बिना नंबर प्लेट के वाहन, अवैध काली फिल्म वाले वाहन, ध्वनि प्रदूषण  पैदा करने वाले बड़े वाहन, संशोधित साइलेंसर वाले बुलेट मोटरसाइकिल, रेड लाइट जंपिंग और अन्य  ट्रैफिक उल्लंघनों पर ध्यान केंद्रित किया। वाहनों की चेकिंग की गई अभियान के दौरान कुल 550 वाहनों की बारीकी से जांच की गई। पुलिस यह सुनिश्चित बनाया कि सभी वाहन सुरक्षा नियमों का पालन करें और गैर कानूनी गतिविधियां जैसे कि तस्करी, गैर कानूनी वस्तुओं के कब्जे या वाहनों के अनधिकृत उपयोग पर नजर रखी जाती है। त्योहारों का सीजन और चुनाव की तैयारी इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य त्योहारों के सीजन और आगामी ग्राम पंचायत चुनाव 2024 के दौरान शहर को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाना था। कमिश्नरेट पुलिस जालंधर सभी नागरिकों के लिए एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करने पर केंद्रित है। यह अभियान सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ाने, सुचारू यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करने और त्योहारी सीजन और आगामी ग्राम पंचायत चुनाव 2024 के दौरान किसी भी विघ्न को रोकने के लिए एक व्यापक पहल का हिस्सा है।

संजय रॉय ने ही किया था बलात्कार, फिर हत्या, ट्रेनी डॉक्टर के रेप एंड मर्डर केस में CBI ने दायर की चार्जशीट

कोलकाता कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में ट्रेनी डॉक्टर के रेप एंड मर्डर केस में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने आज चार्जशीट दाखिल कर दी है। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक मामले में मुख्य आरोपी संजय रॉय ने ही पीड़ित डॉक्टर से बलात्कार किया था और उसके बाद उसकी हत्या कर दी थी। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी है। कोलकाता की एक विशेष अदालत में दाखिल आरोप पत्र में सीबीआई ने कहा कि स्थानीय पुलिस के साथ स्वयंसेवक के रूप में काम करने वाले रॉय ने 9 अगस्त को अस्पताल के सेमिनार हॉल में घटना को कथित तौर पर अंजाम दिया था। अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी ने आरोप पत्र में सामूहिक बलात्कार के आरोप का उल्लेख नहीं किया है, जिससे संकेत मिलता है कि रॉय ने अकेले ही अपराध को अंजाम दिया। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने कथित तौर पर उस समय अपराध किया जब डॉक्टर रात में खाना खाने के बाद अस्पताल के सेमिनार हॉल में आराम करने गई थी। सीबीआई सूत्रों के अनुसार, रॉय को मुख्य आरोपी के रूप में नामित करने वाली चार्जशीट में लगभग 200 लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। हालांकि, अभी भी इस बात की जांच चल रही है कि क्या कोई और संदिग्ध इस मामले में शामिल था। ट्रेनी डॉक्टर 9 अगस्त को अस्पताल में मृत पाई गई थीं। इसके बाद की जांच में पता चला था कि उसके साथ हैविनयत और भयानक हादसा हुआ था। इस घटना के विरोध में देश भर में विरोध प्रदर्शनों के बीच कोलकाता हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दिया था। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इस बीच, इस मामले में महिला चिकित्सक के लिए न्याय और कार्यस्थल पर सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलनरत कनिष्ठ चिकित्सकों का आमरण अनशन सोमवार को लगातार तीसरे दिन जारी है। बहरहाल, राज्य सरकार ने उनकी मांगों पर अभी कुछ नहीं कहा है। छह कनिष्ठ चिकित्सक शनिवार शाम से ही आमरण अनशन कर रहे हैं और बाद में एक और चिकित्सक उनके साथ शामिल हो गए। ‘ज्वाइंट प्लेटफॉर्म ऑफ डॉक्टर्स इन वेस्ट बंगाल’ के छह सदस्य कनिष्ठ चिकित्सकों के साथ एकजुटता जताने के लिए अनशन में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। एक कनिष्ठ चिकित्सक अनिकेत महतो ने कहा, ‘‘हमारा आमरण अनशन जारी है। हमें राज्य सरकार से कोई संदेश नहीं मिला है। हम अपनी सभी मांगें पूरी होने तक इसे जारी रखेंगे। कोई भी बाहरी दबाव हमें अपनी मृतक बहन के लिए न्याय मांगने के वास्ते प्रदर्शन करने की हमारी राह से नहीं हटा सकता…अभी नहीं तो कभी नहीं।’’

उधार शराब नहीं देने पर हाईप्रोफाइल ड्रामा, राजस्थान-अलवर में पानी की टंकी पर चढ़ा युवक

अलवर. जिले के खेड़ली कस्बे में समीपवर्ती गांव खेरली रेल में एक शराबी युवक ने उधार की शराब नहीं मिलने पर हंगामा खड़ा कर दिया और पानी की टंकी पर जा बैठा। विकास जाटव नाम के इस युवक ने ग्राम पंचायत के सरपंच प्रशांत सिंह के पास जाकर बीयर की बोतल की मांग की। इस पर सरपंच ने अधिक शराब पीने पर युवक को डांटकर घर भेज दिया। इसके बाद नाराज युवक गांव में बनी पानी की टंकी पर चढ़ गया और जबरदस्त हंगामा किया, जिससे भारी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही खेड़ली थाना पुलिस और सरपंच मौके पर पहुंचे। उन्होंने काफी समझाइश के बाद बड़ी मशक्कत से युवक को नीचे उतारा और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने युवक द्वारा आत्महत्या की कोशिश का मामला दर्ज किया है। उधर गांव वालों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे शोले फिल्म के पानी की टंकी वाले सीन से जोड़कर देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि फिल्म में हीरो बसंती के लिए पानी की टंकी पर चढ़ा था और यहां यह युवक शराब के लिए।

दो अमेरिकी वैज्ञानिकों को वर्ष 2024 का चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार देने का हुआ ऐलान

स्टॉकहोम दो अमेरिकी वैज्ञानिकों विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन को वर्ष 2024 का चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार देने का ऐलान हुआ है। इन दोनों वैज्ञानिकों ने माइक्रो RNA की खोज की थी। पुरस्कार देने वाली संस्था ने सोमवार को बताया कि वैज्ञानिक विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन ने माइक्रो आरएनए की खोज और जीन विनियमन में इसकी भूमिका के लिए फिजियोलॉजी या मेडिसिन में 2024 का नोबेल पुरस्कार जीता है। चिकित्सा क्षेत्र के लिए नोबेल विजेताओं का चयन स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट मेडिकल यूनिवर्सिटी की नोबेल असेंबली द्वारा किया जाता है। विजेताओं को 11 मिलियन स्वीडिश क्राउन ($1.1 मिलियन) की पुरस्कार राशि दी जाती है। नोबेल असेंबली ने कहा कि दोनों वैज्ञानिकों की खोज “जीवों के विकास और कार्य करने के तरीके के लिए मौलिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो रही है।”

मेहंदीपुर बालाजी पुलिस ने चलाया विशेष अभियान, राजस्थान-दौसा में बांदीकुई फायरिंग के बदमाश हत्थे चढ़े

दौसा. बांदीकुई शहर में पिछले दिनों कुछ अज्ञात बदमाशों ने फायरिंग कर शहर में दहशत फैलाने का प्रयास किया था, जिसमें गैंग सरगना अजहर मोईन मलिक उर्फ आशू मलिक व देवराज गुर्जर उर्फ गोलू को वारदात में काम ली अवैध पिस्टल और कारतूस समेत लूटी गई मोटर साइकिल के साथ गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधीक्षक रंजीता शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि मेहन्दीपुर बालाजी थाना अधिकारी गौरव प्रधान के नेतृत्व में एक टीम द्वारा 6 अक्टूबर को बदमाश अजहर मोईन मलिक उर्फ आशू मलिक पुत्र रईसउद्दीन और देवराज उर्फ गोलू पुत्र रामसिंह को गिरफ्तार किया गया है। गौरतलब है कि आरोपियों ने बांदीकुई में आगरा फाटक पर एक कार चालक पर अज्ञात फायरिंग कर कार लूटने का प्रयास किया था और आगे जाकर एक मोटर साइकिल सवार को रोककर उसकी गाड़ी छीनकर ले भाग गए थे। आगे भी उन्होंने अन्य राहगीरों के साथ पिस्टल लगाकर पर्स छीनने की कोशिश की थी। मेहंदीपुर बालाजी पुलिस के थानाधिकारी गौरव प्रधान ने बताया कि बांदीकुई की घटना के बाद थाना इलाके में अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ गहन अभियान चलाकर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त बदमाशों की तलाश शुरू की गई थी, जिसके बाद मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर दोनों बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है।

सरकारी मदद की दिव्यांग ने लगाई गुहार, मांगे पूरी नहीं होने पर इच्छामृत्यु की मांग

गरियाबंद गरियाबंद के वार्ड क्रमांक 15 में रहने वाले दिव्यांग अनिल कुमार यादव ने कलेक्टोरेट परिसर के बाहर अपनी ट्रायसायकल में पोस्टर टांगकर दूसरी बार आमरण अनशन शुरू कर दिया है. अनिल ने अपनी जीविका और उपचार के लिए सरकारी मदद की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि उसकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वह इच्छामृत्यु की मांग करेगा. अनिल कुमार यादव इससे पहले भी एक सप्ताह पूर्व इसी तरह से अनशन पर बैठा था, लेकिन अफसरों की समझाइश के बाद उसने अपना अनशन समाप्त कर दिया था. अब दोबारा उसकी सुध न लेने पर उसने फिर से अनशन शुरू कर दिया है. अनिल प्रशासन के समक्ष अपनी दो सूत्रीय मांग को लेकर यह प्रदर्शन कर रहा है. पहला उसे डेली वेजेस नौकरी में वापस रखा जाए और दूसरा उसके दिव्यांग पैर का उपचार कराया जाए. अनिल ने कहा की यह मांग पूरी नहीं हुई तो आगे वह इच्छा मृत्यु की मांग करेगा. दरअसल, अनिल 2008 से 2017 तक वन विभाग में दैनिक वेतन भोगी पर कार्यरत था, अचानक ब्रेन में दिक्कत होने के कारण उसे नौकरी से निकाल दिया गया. पत्नी भी घर छोड़ कर चली गई. पिछले कुछ साल से वह किसी तरह पहचान वालों से मदद लेकर गुजारा कर रहा है. पीड़ित ने बताया कि वह लगातार साशन-प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहा है. मामले में वन मंडला अधिकारी लक्ष्मन सिंह ने कहा है कि आवेदन में अनिल ने खुद कहा है कि वो दिव्यांग है, काम नहीं कर पाने की स्थिति में उसे काम पर कैसे रख सकते हैं. अधिकारी ने कलेक्टर से अनुरोध किया है की पीड़ित को समाज कल्याण विभाग से दिव्यांग जन को मिलने वाली योजना का लाभ दिलाया जाए.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उग्रवाद से प्रभावित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक

रायपुर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज नई दिल्ली में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे. बैठक में शाह ने छत्तीसगढ़ सरकार की प्रशंसा की. उन्होंने कहा, नक्सल मोर्चे पर छत्तीसगढ़ सरकार बेहतर काम कर रही है. नक्सलियों के विरुद्ध अभियान को अभूतपूर्व सफलता मिल रही है. अमित शाह ने कहा, हमारी सरकार ने डिफेंसिव नीति को बदलकर आक्रामक नीति अपनाई है. छत्तीसगढ़ सरकार ने विकास का नया अभियान चलाया है. छत्तीसगढ़ में गांव-गांव तक विकास पहुंचा है. कई गांव में इलेक्शन में पहली बार वोटिंग हुई है. सरकार ने नक्सलियों के वित्तीय पोषण को भी रोका है. मोदी सरकार द्वारा बेहतर केंद्र-राज्य समन्वय से नक्सलवाद को देश से पूरी तरह से समाप्त किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में जनवरी से अब तक 194 नक्सली मारे गए अमित शाह ने कहा कि LWE से लड़ाई अब अपने अंतिम चरण में है. 2026 मार्च तक ये देश इस दशकों पुरानी समस्या से मुक्ति पा लेगा. LWE का 85 फीसदी कैडर स्ट्रैंथ छत्तीसगढ़ में सिमट कर रह गया है. छत्तीसगढ़ में जनवरी से लेकर अब तक 194 मारे गए , 801 ने हथियार छोड़े और 742 नक्सलियों ने सरेंडर किया. आज फिर नक्सलवाद से जुड़े युवाओं से अपील करता हूं कि हथियार छोड़िए. मुख्यधारा में लौट आएं और देश के विकास में अपना योगदान दीजिए. सालभर पहले शाह ने नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के दिए थे निर्देश बैठक में छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय समेत आंध्र प्रदेश, बिहार,, झारखंड, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल हैं. साथ ही वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने में राज्यों का सहयोग कर रहे केन्द्रीय मंत्रालयों के 5 केन्द्रीय मंत्री और उच्चाधिकारी भी बैठक में उपस्थित हैं. इसके अलावा उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं. इससे पहले केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक अध्यक्षता 6 अक्टूबर 2023 को की थी. इस बैठक में गृह मंत्री ने वामपंथी उग्रवाद को जड़ से खत्म करने के लिए दिशा निर्देश दिए थे. अपनी अंतिम लड़ाई लड़ रहा वामपंथी उग्रवाद गौरतलब है कि मोदी सरकार की रणनीति से वर्ष 2010 के मुक़ाबले 2023 में हिंसा में 72% और मृत्यु में 86% कमी आई है और आज वामपंथी उग्रवाद अपनी अंतिम लड़ाई लड़ रहा है. केन्द्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों के दूरदराज़ के इलाकों तक विकास योजनाएं पहुंचाने के लिए भी ठोस कदम उठाए हैं. इन क्षेत्रों में सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी पर विशेष बल दिया जा रहा है. वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 14,400 किलोमीटर सड़क निर्माण हो चुका है और करीब 6000 मोबाइल टावर लगाए जा चुके हैं.

भाजपा के दिल्ली अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा- केजरीवाल ने अभी तक सीएम आवास को खाली नहीं किया

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बड़ा आरोप लगाया है। भाजपा के दिल्ली अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि केजरीवाल ने अभी तक सीएम आवास को खाली नहीं किया है। सचदेवा ने कहा कि सुनीता केजरीवाल ने कैमरे के सामने बंगले की चाबी एक ऐसे अधिकारी को सौंपी जो उसके लिए अधिकृत नहीं थे। बाद में यह चाबी वापस ले ली गई और पीडब्ल्यूडी को अभी तक वापस नहीं की गई है। वीरेंद्र सचदेवा ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि नियमों के तहत चाबी अभी तक पीडब्ल्यूडी विभाग को नहीं सौंपी गई है और बंगला अब भी अरविंद केजरीवाल के नाम ही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चाबी भी उन्हीं के कब्जे में हैं। सचदेवा ने कहा, ‘अरविंद केजरीवाल के भ्रष्टाचार का प्रतीक शीशमहल कभी खाली नहीं किया गया। उस दिन की नौटंकी, जब केजरीवाल परिवार के साथ निकल रहे थे, वह हम सबने देखी। सरकारी नियमों के तहत वह शीशमहल वाला उनका आवास खाली नहीं किया गया, उस पर आज तक अरविंद केजरीवाल का कब्जा है।’ सचदेवा ने कहा, ‘उस दिन जो नौटंकी की गई, दिखाया गया कि चाबी सुनीता जी एक अधिकारी को पकड़ा रही हैं। वह अधिकारी थे सीएम ऑफिस के विशेष सचिव प्रवेश रंजन झा, जबकि चाबी देनी चाहिए थी पीडब्ल्यूडी विभाग के सेक्शन ऑफिसर विजय कुमार को। प्रवेश रंजन झा को चाबी दी जाती है और कुछ घंटे बाद वापस ले ली जाती है। वह चाबी आज भी उन्हीं के कब्जे में है। अगले दिन दिल्ली की खड़ाऊं मुख्यमंत्री आतिशी चिट्ठी लिखती हैं कि मैं उस आवास में जाऊंगी। कायदे कानूनों के तहत कोई कार्रवाई नहीं की गई। वह आवास मुख्यमंत्री आवास के लिए आवंटति नहीं है।’ सचदेवा ने कहा कि केजरीवाल नहीं चाहते कि बाकी लोग उसे देख सकें, उसमें क्या राज छिपे हैं। सचदेवा ने एक नोटिस भी मीडिया को दिखाया। इसे पीडब्ल्यूडी विभाग ने प्रवेश रंजन झा को भेजा है। इसमें लिखा है कि 6 फ्लैग स्टाफ रोड स्थित घर की चाबी पीडब्ल्यूडी को देकर कुछ समय बाद वापस ले ली गई। इसके बाद वापस नहीं किया गया ताकि प्रक्रिया पूरी हो सके। इसमें यह भी कहा गया है कि आवास के निर्माण को लेकर विजिलेंस जांच चल रही है और नए आवंटन से पहले इसका निरीक्षण करना है। स्टॉक की इनवेंटरी बनानी है।

48 घंटे में नक्सलियों से हुआ सबसे बड़ा एनकाउंटर, छत्तीसगढ़-दंतेवाड़ा में 12 किमी तक नदी-नाले और पहाड़ी चढ़कर पहुंचे जवान

दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले की सीमा में सुरक्षाबलों के लगभग 1500 जवानों ने 48 घंटे तक चले नक्सल विरोधी अभियान में 31 नक्सलियों को मार गिराया। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से यह पहली बार है जब सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों को मार गिराया है। इससे पहले अप्रैल माह में कांकेर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में उच्च पदस्थ कैडर सहित 29 नक्सलियों को मार गिराया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दंतेवाड़ा जिले के बारसूर थाना और नारायणपुर जिले के ओरछा थाना क्षेत्र के अंतर्गत गवाड़ी, थुलथुली, नेंदूर और रेंगावाया गांव के मध्य पहाड़ी पर माओवादियों के कंपनी नंबर छह तथा पूर्वी बस्तर डिवीजन आदि के नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना मिली थी। सूचना के बाद गुरुवार को दोपहर बाद दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिले से डीआरजी और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के लगभग 1500 जवानों को नक्सल विरोधी अभियान में रवाना किया गया था। एक बजे से शुरू हुई मुठभेड़ दंतेवाड़ा जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरके बर्मन ने बताया कि तीन अक्टूबर को शुरू किया गया यह अभियान दो दिनों तक चला और यह राज्य में अब तक का सबसे बड़ा सफल नक्सल विरोधी अभियान साबित हुआ। बर्मन ने बताया कि शुक्रवार दोपहर लगभग एक बजे सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई और देर शाम नेंदूर और थुलथुली गांवों के बीच जंगल में समाप्त हुई। 12 किमी की ऊंची पहाड़ी चढ़ना पड़ा उन्होंने बताया कि शुक्रवार को मुठभेड़ स्थल से 28 नक्सलियों के शव बरामद किए गए थे, जबकि शनिवार को तीन और शव बरामद किए गए। मारे गए कथित नक्सली ‘वर्दी’ में थे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों ने तलाशी अभियान में मदद की और नक्सलियों के शव दंतेवाड़ा लाए जा रहे हैं। बर्मन ने बताया कि मुठभेड़ स्थल तक पहुंचने के लिए खेतों और कच्चे रास्तों से मोटरसाइकिल पर लगभग 10 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है तथा करीब 12 किलोमीटर पहाड़ी रास्तों पर चढ़ना पड़ता है। कुछ स्थानों पर नक्सलियों के पोस्टर भी देखे जा सकते हैं। नदीं को करना पड़ा पार उन्होंने बताया कि इंद्रावती एरिया कमेटी, पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) कंपनी नंबर छह और माओवादियों के प्लाटून 16 का गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में प्रवेश करने के लिए छिंदनार गांव में इंद्रावती नदी से होकर गुजरना पड़ता है, जहां एक किलोमीटर से अधिक लंबा पुल बनाया गया है। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया, ”नक्सलियों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि वे पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) कंपनी नंबर छह, माओवादियों के प्लाटून 16 और माओवादियों के पूर्वी बस्तर डिवीजन के थे।” नक्सलियों की नहीं हुई पुष्टि सुंदरराज ने कहा कि पुलिस को डीकेएसजेडसी (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) के सदस्य कमलेश, नीति, कमांडर नंदू जैसे बड़े नक्सलियों की उपस्थिति की सूचना मिली थी। वे मारे गए लोगों में शामिल हैं या नहीं, यह उनकी पहचान सुनिश्चित होने के बाद पता चलेगा। अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान माओवादियों द्वारा दागे गए अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर (बीजीएल) के एक गोले में विस्फोट होने से राज्य पुलिस के जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) का एक जवान घायल हो गया। आधुनिक हथियार बरामद किए गए पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि सुरक्षाबलों ने शवों के साथ मुठभेड़ स्थल से एके-47 राइफल, एसएलआर (सेल्फ लोडिंग राइफल), इंसास राइफल, एलएमजी राइफल और .303 राइफल समेत हथियारों का जखीरा भी बरामद किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस सफल अभियान के लिए सुरक्षा बलों की सराहना की है और कहा है कि ‘डबल इंजन’ सरकार (राज्य और केंद्र में भाजपा सरकार) नक्सली खतरे को खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्प है। अब तक 188 नक्सली मारे गए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मुठभेड़ के बाद इस वर्ष अब तक दंतेवाड़ा और नारायणपुर समेत सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में अलग-अलग मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों ने 188 माओवादियों को मार गिराया है। इससे पहले 16 अप्रैल को कांकेर जिले में सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में 29 नक्सली मारे गए थे, जिनमें कुछ उच्च पदस्थ नक्सली भी शामिल थे।

युद्ध के दौरान अमेरिका ने इजरायल की करीब 18 बिलियन डॉलर की मदद की, हर हाल में सपोर्ट करता है अमेरिका

नई दिल्ली पिछले साल 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमास के हमले के बाद से मिडिल-ईस्ट में लगातार युद्ध जारी है। इजरायल ने पिछले एक साल में लगातार गाजा को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। दुनिया भर में मानवता की दुहाई देने वाला अमेरिका इन सब हमलों की केवल निंदा करके एक पिता और अच्छे दोस्त की तरह इजरायल सारे गुनाहों को नजरअंदाज करता दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक इस युद्ध के दौरान अमेरिका ने इजरायल की करीब 18 बिलियन डॉलर की मदद की है।  इस मदद के अलावा अमेरिका ने इजरायल में पिछले एक साल में 4.86 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त सैन्य निवेश किया है। इन सब के बावजूद अमेरिका लगातार इजरायल को हमला करने की कोशिश करता है लेकिन इजरायल यह जानते हुए कि अमेरिका हर हाल में उसका सपोर्ट करेगा वह अपनी योजना के अनुसार अपने दुश्मनों पर हमला करता है। हाल ही में इजरायल की  सुरक्षा को लेकर अमेरिका के वर्तमान विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकेन ने कहा कि हम हर हाल में इजरायल की सुरक्षा करेंगे। अमेरिका का इजरायल को दिए बिना शर्त समर्थन के पीछे एक नहीं कई कारण नजर आते हैं। अमेरिका की मजबूत यहूदी लॉबी, अमेरिकी राजनेताओं के परिवारों से यहूदी परिवारों के रिश्ते और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी हितों की रक्षा करने वाला इजरायल इनमें सबसे बड़े कारण हैं। यहां तक की अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन के तीनों बच्चों की शादी यहूदी परिवारों में हुई है वहीं कमला हैरिस के पति भी यहूदी ही है। लेकिन इससे इतर यहूदी परिवारों का अमेरिका की आंतरिक राजनीति में जबरदस्त प्रभाव है, जो कि अमेरिका को और ज्यादा प्रो इजरायल होने के लिए प्रेरित करता है।   इजरायल को 11 मिनट में देश के रूप यूएस ने दी मान्यता 14 मई 1948 को स्टेट ऑफ इजरायल की घोषणा होने के साथ ही केवल 11 मिनट के अंदर अमेरिका के 33 वें राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने प्रेस रिलीज जारी कर इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता दे दी थी। इस बात को लेकर एक ऐतिहासिक तथ्य यह भी है कि ट्रूमैन खुद एक यहूदी विरोधी व्यक्ति थे, लेकिन इस घोषणा के कुछ महीने पहले ही ऐडी जैकबसन( एक अमेरिकी यहूदी व्यापारी) के साथ हुई मीटिंग में उन्होंने बनने वाले स्टेट ऑफ इजरायल को अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी थी। हालांकि इजरायल को एक देश के रूप मे स्वीकार करने के बाद भी अमेरिका ने इसको अपना ज्यादा समर्थन नहीं दिया। 1956 में जब इजरायल ने अपने पश्चिमी मित्रों के साथ मिलकर स्वेज नहर पर कंट्रोल के लिए इजिप्ट पर हमला कर दिया। लेकिन अमेरिका इन सभी के खिलाफ खड़ा हो गया इससे इन सभी देशों की सेनाओं को वहां से पीछे हटना पड़ा। 1960 में इजरायल ने जब न्यूक्लियर बनाने की कोशिश की थी तो अमेरिका ने इसका मुखर होकर विरोध किया था। इजरायल से अमेरिका की दोस्ती की शुरुआत 1967 में अरब देशों और इजरायल के बीच हुए युद्ध के बाद अमेरिका को इजरायल के रूप में मिडिल ईस्ट में अपना एक पार्टनर दिखा। क्योंकि इजरायल एक मजबूत लोकतंत्र के साथ साथ पश्चिमी देशों का मुख्य सहयोगी भी था। 1973 में जब इजरायल के साथ अरब देशों के साथ एक बार फिर से युद्ध हुआ तो अमेरिका ने इजरायल का पूरा समर्थन किया। सैन्य साजो सामान के साथ-साथ उसने इजरायल को आर्थिक रूप से भी सहायता दी। 1979 में जब ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई और पूरे ईरान में अमेरिका विरोधी लहर चलने लगी तो अमेरिका अपनी मिडिल ईस्ट पॉलिसी में इजरायल के ऊपर और भी ज्यादा निर्भर हो गया। इस समय तक कोल्ड वॉर अपने चरम पर था। क्षेत्र में सोवियत प्रभाव को रोकने में इजरायल ने अपनी पूरी ताकत लगाकर अमेरिकी हितों को साधा। अमेरिका ने इजरायल को बनाया खास पार्टनर इसके बाद तो जैसे अमेरिका और इजरायल के रिश्तों को पंख लग गए। रीगन के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने तक अमेरिका हर साल इजरायल को 1.8 बिलियन डॉलर की मदद करने लगा। दोनों देश मिलकर एक साथ दुनियाभर का सैन्य साजो सामान बनाने लगे। इसके बदले में इजरायल ने अमेरिका की भरपूर मदद की। लेबनान की राजधानी बेरूत में अमेरिकी जवानों के कैंप पर हमला करके 200 से ज्यादा सैनिकों को मार डाला गया। अमेरिका ने इसके जवाब में इजरायल को खुली छूट दे दी। कुछ ही महीनों में इजरायल की सेना ने अपना बदला लेते हुए आधे लेबनान को रौंध डाला। इसके बाद 21 वीं सदी में अमेरिका और इजरायल के रिश्ते और भी ज्यादा मजबूती के साथ बढ़े। अमेरिका ने गोलन हाइट्स पर इजरायली दावे को स्वीकार कर लिया और यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के रूप में भी मान लिया। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका करता है इजरायल की पूरी मदद संयुक्त राष्ट्र संघ आज की तारीख में इजरायल के गाजा और अन्य क्षेत्रों में हमलों के सामने बौना नजर आता है। क्योंकि इजरायल के खिलाफ जब भी कोई प्रस्ताव लाया जाता है तो उसके खिलाफ अमेरिका वीटो कर देता है। अब तक इजरायल को बचाने के लिए अमेरिका 50 से ज्यादा बार वीटो का प्रयोग कर चुका है।  

मैडम देती थीं पैसे का लालच, छत्तीसगढ़-बिलासपुर के स्कूल में मासूम बच्चों से उठवाया दो क्विंटल चावल

बिलासपुरः छत्तीसगढ़ में शिक्षा की बदहाली के कई मामले सामने आ चुके हैं। कप-प्लेट धुलवाने से लेकर पान-गुटखा मंगवाने के कई मामले पहले ही वायरल हो चुके हैं। अब ताजा मामला बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड के प्राइमरी स्कूल का है। यहां का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है जिसमें स्कूली बच्चे साइकल पर 50-50किलो की चावल की बोरी ढोकर ले जाते दिख रहे हैं। दरअसल, मस्तूरी विकासखंड के सोन गांव स्थित प्राइमरी स्कूल में मिड डे मील के लिए चावल स्कूली बच्चों से ढुलवाने का मामला सामने आया है। यहां की हेड मास्टर पुष्पा साहू पर बच्चों से काम कराने का आरोप है। साइकिल में चावल लाने वाले छात्रों ने बताया कि चार बार में 50-50 किलो कर 2 क्विंटल स्कूल में लेकर आए। कभी पैसे का लालच तो कभी धमका कर काम स्कूल की हेड मास्टर पर आरोप है कि वह वह स्कूल के बच्चों को कभी पैसे का लालच देकर तो कभी धमकियों का सहारा लेकर चावल ढुलवाने के लिए मजबूर करती है। बच्चों के साइकिल पर चावल ढोते हुए देखकर गांव के कुछ युवकों ने इसका वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया में वायरल कर दिया। हालांकि इस तरह बच्चों से काम कराने के चलते उनकी पढ़ाई पर प्रभाव पड़ रहा है। हेड मास्टर ने कहा-बदनाम करने की कोशिश वहीं, सोशल मीडिया में वायरल वीडियो को लेकर हेडमास्टर ने कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए पुराना वीडियो सोशल मीडिया में वायरल किया जा रहा है। वीडियो सितंबर महीने का है जिसे अब शेयर कर उन्हें परेशान करने के लिए कर रहे हैं। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर ब्लाक शिक्षा अधिकारी सोनवानी ने बताया कि मामला पुराना है। उन्होंने कहा कि घटना की जानकारी मिलने पर स्कूल का निरीक्षण किया गया था। मामला सही पाए जाने पर चेतावनी दी गई थी। आपको बता दें कि यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले बिल्हा ब्लाक में बच्चों से कप प्लेट धुलवाने की घटना हुई थी। वहीं, मस्तूरी ब्लाक में ही प्यून के द्वारा बच्चों से पान-गुटखा मंगवाने का मामला सामने आया था।

छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने किया परियोजनाओं का बचाव, ‘जंगलों पर किया जा रहा अतिक्रमण’

रायपुर: छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने राज्य में कोयला खनन एवं अन्य विकास परियोजनाओं का बचाव करते हुए कहा कि लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए यह सब आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बाघ अभ्यारण्यों के मुख्य क्षेत्रों से गावों के स्थानांतरण में तेजी लाने के केंद्र सरकार हाल के निर्देशों के अनुरूप कानून का सख्ती से क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी। जैव विविधता से भरपूर हसदेव अरण्य वन में कोयला परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई के खिलाफ विरोध के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ लोगों ने कोयला खनन और अन्य विकास परियोजनाओं का विरोध किया है, लेकिन जोर देकर कहा कि अधिकतर लोगों ने इनका समर्थन किया है। उन्होंने कहा, ‘‘संसाधनों से भरपूर इस क्षेत्र के लोग कब तक गरीब रहेंगे? विकास और ऊर्जा समान रूप से महत्वपूर्ण है। लोगों को रोजगार चाहिए। हां, अगर पेड़ काटे जाते हैं, तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि उस नुकसान की भरपाई की जाए। हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रभावित समुदायों के स्वास्थ्य और आजीविका की रक्षा की जाए।’’ कोयले का तीसरा सबसे बड़ा भंडार ऐसी परियोजनाओं के लिए ग्राम सभा की सहमति के मुद्दे पर कश्यप ने कहा, ‘‘कानून ग्राम सभाओं को ‘इनकार’ करने की शक्ति देता है। कुछ मामलों में, उन्होंने इस शक्ति का इस्तेमाल किया है, लेकिन ज़्यादातर मामलों (कोयला खनन और अन्य परियोजनाओं) में समर्थन किया है।’’ छत्तीसगढ़ में 57 अरब टन कोयला भंडार है और यह झारखंड एवं ओडि़शा के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है। मध्यप्रदेश और अरुणाचल प्रदेश के बाद ओडिशा सबसे बड़े वन क्षेत्र वाला तीसरा राज्य है और इसके कुल भौगोलिक क्षेत्र का 44 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वनों से ढका हुआ है। हसदेव क्षेत्र दिल्ली से बड़ा छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में हसदेव अरण्य कोयला क्षेत्र में तीन समीपवर्ती कोयला ब्लॉक स्थित हैं । इसमें परसा, परसा ईस्ट केंटे बसन (पीईकेबी), और केंटे एक्सटेंशन कोल ब्लॉक (केईसीबी)। तीनों कोयला ब्लॉक राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित किए गए हैं। हसदेव अरण्य वन 1,70,000 हेक्टेयर में फैला हुआ है। यह वन क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से भी बड़ा है। भारतीय खान ब्यूरो के अनुसार, इस वन में 5,179.35 मिलियन टन कोयला भंडार है। जनवरी में, राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने पीईकेबी कोयला खनन परियोजना के दूसरे चरण के लिए पेड़ों की कटाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का स्वत: संज्ञान लिया और राज्य वन विभाग से रिपोर्ट मांगी। विभाग ने अपने जवाब में कहा कि पेड़ों की कटाई ‘‘केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा दी गई मंजूरी और अनुमति का सख्ती से पालन करते हुए’’ की जा रही है। इसमें कहा गया है कि पीईकेबी कोयला ब्लॉक 1,898 हेक्टेयर वन भूमि को कवर करता है। 762 हेक्टेयर में फैले पहले चरण का खनन पूरा हो चुका है, और शेष 1,136 हेक्टेयर में दूसरे चरण का काम चल रहा है। स्थानीय ग्रामीण कर रहे हैं विरोध स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के बीच अगस्त के अंत में दूसरे चरण के लिए पेड़ों की कटाई फिर से शुरू हुई। जुलाई में, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने संसद को सूचित किया कि हसदेव अरण्य वन में कोयला खनन के लिए पहले ही 94,460 पेड़ काटे जा चुके हैं, और आने वाले वर्षों में 2.73 लाख से अधिक पेड़ काटे जाने हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘खान पुनर्ग्रहण और स्थानांतरण’’ के लिए मुआवजे के रूप में कुल 53,40,586 पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से 40,93,395 पौधे विकसित हो गए हैं। बाघ अभयारण्यों के मुख्य क्षेत्रों से गांवों के स्थानांतरण के केंद्र के निर्देश को लेकर कश्यप ने कहा, ‘‘हम कानून के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ प्रयास कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि लोग पहले जंगलों में वन्यजीवों के साथ सद्भाव से रहते थे, लेकिन अब यह मनोवृत्ति बदल गई है। उन्होंने कहा, ‘‘बाघ मेरी दादी के घर से कुछ मीटर की दूरी पर घूमते थे। मनुष्य और जानवर अपनी सीमाओं को जानते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति बदल गई है।’’ जंगलों का किया जा रहा है अतिक्रमण उन्होंने कहा, ‘‘यह सच है कि जंगलों पर अतिक्रमण किया जा रहा है, जिससे जंगल में संतुलन बिगड़ रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ावा मिल रहा है।’’ राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने 19 जून को एक आदेश जारी किया, जिसमें वन अधिकारियों को 54 बाघ अभयारण्यों के मुख्य क्षेत्रों में स्थित 591 गांवों से 64,801 परिवारों के पुनर्वास में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। छत्तीसगढ़ के अचानकमार और उदंती-सीतानदी सहित कई बाघ अभयारण्यों में आदिवासी समुदायों ने वन अधिकार अधिनियम के तहत अपने अधिकारों का दावा करते हुए निर्देश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

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