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आज कई कार्यक्रमों में होंगे शामिल, छत्तीसगढ़-दंतेवाड़ा और बीजापुर के दौरे पर रहेंगे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

बीजापुर/दंतेवाड़ा. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज चार अक्टूबर को प्रदेश के नक्सल हिंसा प्रभावित दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले के दौरे पर रहेंगे।  वे इन जिलों में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। सीएम साय पुलिस ग्राउंड हेलीपेड रायपुर से हेलीकॉप्टर से रवाना होंगे और जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर में दंतेश्वरी मंदिर में मंदिर दर्शन एवं पूजा-अर्चना करने के बाद विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री अपरान्ह 01:50 बजे दंतेवाड़ा से हेलीकॉप्टर से रवाना होकर 2:10 बजे जिला मुख्यालय बीजापुर पहुंचेंगे। यहां वे 2:15 बजे सेंट्रल लायब्रेरी बीजापुर में युवा संवाद कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद सीएम साय 2:20 बजे वहां मिनी स्टेडियम में नक्सल पीड़ित परिवार के आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति आदेश एवं तेन्दूपत्ता बोनस वितरण कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री अपरान्ह 3:35 बजे पुलिस लाईन बीजापुर में सुरक्षा बलों के साथ चर्चा करने के बाद 3:50 बजे हेलीकॉप्टर से रायपुर के लिए रवाना होंगे। मुख्यमंत्री शाम 5:5 बजे रायपुर लौटेंगे।

परेतिन दाई भरती हैं सूनी गोद, छत्तीसगढ़-बालोद के मंदिर में ‘डायन’ को पूजते हैं लोग

बालोद. वैसे तो लोग प्रेत, प्रेतात्मा या फिर डायन नाम से ही डर जाते हैं क्योंकि इसको बुरी शक्ति माना जाता है। मगर झिंका गांव के लोगों की आस्था ऐसी है कि ये डायन (परेतिन माता) को माता मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं। इसका एक छोटा सा मंदिर भी है। सिकोसा से अर्जुन्दा जाने वाले रास्ते पर स्थित मंदिर को परेतिन दाई माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। झिंका सहित पूरे बालोद जिले के लोग परेतिन दाई के नाम से जानते हैं। नवरात्र में यहां विशेष अनुष्ठान की शुरुआत हो चुकी है और इस मंदिर में ज्योत भी जलाई गई है, आइए जानते हैं इस मंदिर की कहानी। झींका गांव की सरहद में बने परेतिन दाई मंदिर का प्रमाण उसकी मान्यता आस्था का वो प्रतीक है, जिससे आज इस मंदिर को पूरे प्रदेश में जाना जाता है। ग्रामीण गैंदलाल मिरी ने बताया कि बालोद जिले का यह मंदिर पहले एक पेड़ से जुड़ा हुआ था। माता का प्रमाण आज भी उस पेड़ पर है और उसके सामने शीश झुकाकर ही कोई आगे बढ़ता है। आज भी लोग गुजरते हैं तो शीश नवाकर गुजरते हैं और यहां पर जो कोई भी मनोकामना मांगते हैं, वो पूरी जरूर होता है। विशेष रूप से परेतिन दाई सूनी गोद को भरती हैं।

SC ने किया नई SIT का गठन, CBI और FSSAI के अधिकारी भी होंगे शामिल

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी के इस्तेमाल के आरोपों की जांच के लिए शुक्रवार को एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का सवाल है। कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच के पांच सदस्यीय एसआईटी गठित करने का आदेश दिया जिसमें सीबीआई, पुलिस और FSSAI के अधिकारी शामिल होंगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तिरुपति लड्डू विवाद पर सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यदि आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई है तो यह अस्वीकार्य है। तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया कि एसआईटी जांच की निगरानी केंद्र सरकार के किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाए। 30 सितंबर को इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मेहता से यह तय करने में सहायता करने को कहा था कि राज्य द्वारा नियुक्त एसआईटी द्वारा जांच जारी रहनी चाहिए या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की जानी चाहिए। तिरुपति मंदिर में प्रसाद के लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी के कथित इस्तेमाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच के अनुरोध वाली याचिका समेत अन्य दूसरी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम अदालत को राजनीतिक युद्धक्षेत्र के रूप में इस्तेमाल नहीं होने देंगे। पिछले महीने की शुरुआत में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया था कि राज्य में पिछली जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान तिरुपति में लड्डू तैयार करने में पशु चर्बी का उपयोग किया गया था, जिससे एक बड़ा राजनीतिक विवाद पैदा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के सार्वजनिक बयान पर सवाल उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि लैब रिपोर्ट बिल्कुल स्पष्ट नहीं है। कोर्ट ने पूछा कि इस बात का क्या सबूत है कि तिरुपति मंदिर में लड्डू बनाने में दूषित घी का इस्तेमाल किया गया था। अदालत को राजनीतिक लड़ाई का अखाड़ा नहीं बना सकते कोर्ट ने कहा कि हम अदालत को राजनीतिक लड़ाई के अखाड़े में तब्दील होने की इजाजत नहीं दे सकते. नई SIT में CBI के दो अधिकारी, आंध्र प्रदेश सरकार के दो प्रतिनिधि और FSSAI का एक सदस्य शामिल है. SIT जांच की निगरानी CBI डायरेक्टर करेंगे. इसके साथ ही स्पष्ट हो गया है कि तिरुपति बालाजी का प्रसाद बनाने में प्रयोग होने वाले घी में मिलावट के आरोपों की जांच राज्य सरकार की SIT नहीं करेगी. जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के वी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि SIT की क्षमता को लेकर उन्हें कोई संदेह नहीं है. हम चाहते हैं कि सेंट्रल पुलिस फोर्स के किसी सीनियर अधिकारी को जांच की निगरानी सौंप दी जाए. मैंने मुद्दे की जांच की. इसमें एक बात स्पष्ट है कि यदि इस आरोप में सच्चाई का कोई अंश है तो यह अस्वीकार्य है. देशभर में भक्त हैं. खाद्य सुरक्षा भी जरूरी है. मुझे एसआईटी के सदस्य जो जांच कर रहे है उन पर कोई आपत्ति नही है. वहीं, इससे पहले आंध्र प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि अगर SIT में किसी अधिकारी को कोर्ट जोड़ना चाहता है तो हमे कोई दिक्कत नहीं है. याचिकाकर्ता की ओर से कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि कल फिर इसको लेकर बयान जारी किया गया. सिब्बल ने मांग की कि कोर्ट इस मामले की जांच का जिम्मा SIT के बजाए किसी स्वतंत्र जाँच एजेंसी को सौप दे. इस पर कोर्ट ने कहा कि ये करोड़ों लोगों की आस्था का मामला है. हम नहीं चाहते कि ये सियासी ड्रामा बन जाए. कोर्ट ने सुझाव दिया कि पांच लोगों की SIT बनाई जा सकती है, जिसमें सीबीआई के दो अधिकारी और FSSAI का एक सदस्य शामिल हो. यानी इस मामले की जांच के लिए स्वतंत्र जांच एजेंसी हो, जिसमें सीबीआई के दो आधिकारी, राज्य सरकार के दो अधिकारी और एक अधिकारी FSSAI से होगा.

सुक्खू सरकार की ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’, जिस पर हो-हल्ला होने के बाद अब देना पड़ेगा TAX

शिमला हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार अब राज्य में टॉयलेट सीट टैक्स वसूल करने की तैयारी में है। लोगों पर अब उनके घरों में मौजूद टॉयलेट सीट्स की संख्या के आधार पर टैक्स चुकाना होगा। दरअसल, वित्तीय संकट से जूझ रही राज्य सरकार ने हाल ही में इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। सीवरेज और पानी के बिल से जुड़ी सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपने घर में बने टॉयलेट की हर एक सीट के लिए 25 रुपये का शुल्क देना होगा। सीवरेज बिल के साथ यह अतिरिक्त शुल्क जल शक्ति विभाग के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि सीवरेज बिल पानी के बिल का 30 प्रतिशत होगा। नोटिफिकेशन के अनुसार, जो लोग अपने सोर्स से पानी का उपयोग करते हैं और केवल सरकारी विभाग से सीवरेज कनेक्शन का उपयोग करते हैं, उन्हें हर महीने प्रति टॉयलेट सीट 25 रुपये का शुल्क देना होगा। विभाग ने इसे लेकर आदेश सभी मंडल अधिकारियों को जारी कर दिए हैं। इससे पहले पहाड़ी राज्य में पानी के बिल जारी नहीं किए जाते थे। बीजेपी सरकार ने घोषणा की थी कि अगर वह सत्ता में आई तो मुफ्त पानी दिया जाएगा। लेकिन हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने अब हर कनेक्शन पर 100 रुपये महीने पानी का बिल जारी करने का आदेश दिया है। इसकी शुरुआत अक्टूबर से हो गई है। शहरी क्षेत्रों में रहने वालों को इन नए सरकारी शुल्कों का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आमतौर पर लोग अपने घरों में कई टॉयलेट बनवाते हैं और अब प्रत्येक टॉयलेट सीट पर शुल्क लगाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश में कुल 5 नगर निगम, 29 नगर पालिकाएं और 17 नगर पंचायतें हैं, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 10 लाख लोग रहते हैं। सरकार के नए आदेश से राज्य की एक बड़ी आबादी पर असर पड़ने की उम्मीद है। टॉयलेट टैक्स को लेकर बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, ‘जहां भी कांग्रेस आई, वहां महंगाई लाई, बर्बादी लाई। अब हिमाचल प्रदेश में, अपने वादों से राज्य को दिवालिया बनाने के बाद, हम देख रहे हैं कि कैसे लोगों पर लगातार टैक्स लगाया जा रहा है। यहां तक ​​कि कांग्रेस पार्टी ने टॉयलेट को भी नहीं बख्शा। कांग्रेस पार्टी बहुत सारे वादे करती है, लेकिन वे कभी उन्हें पूरा नहीं करते। वे बस राज्यों को दिवालिया बनाते हैं और इस तरह के टैक्स लगाते हैं।’ कई मीडिया आउटलेट्स ने ऐसी खबरें प्रकाशित की थीं कि सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली हिमाचल प्रदेश सरकार ने पहाड़ी राज्य में टॉयलेट सीट टैक्स लगाने का फैसला किया है. इस नई नीति के तहत हिमाचल प्रदेश के लोगों से उनके घरों में टॉयलेट सीटों की संख्या के आधार पर हर महीने 25 रुपये सीवरेज टैक्स लिया जाएगा. हालांकि, सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने इन खबरों का खंडन किया है. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हिमाचल प्रदेश वर्तमान में वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. पिछले महीने राज्य कर्मचारियों का वेतन और पेंशनर्स की पेंशन समय पर नहीं ​जारी किया जा सकता था और इसमें 5 दिन की देरी हुई थी. अगस्त में सीएम सुक्खू ने ऐलान किया था कि वह और राज्य के मुख्य संसदीय सचिव अगले दो महीने तक अपना वेतन और भत्ते नहीं लेंगे.  उन्होंने विधानसभा के अन्य सदस्यों से भी अपील की थी कि वे स्वेच्छा से अपना वेतन और भत्ते छोड़कर इस आर्थिक संकट से निपटने में राज्य की मदद करें.

रानी दुर्गावती को जन-कल्याणकारी व्यवस्था को सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है

भोपाल वीरांगना रानी दुर्गावती महिला शासकों के भारतीय स्वर्णिम इतिहास का एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर है। रानी दुर्गावती ने 16वीं शताब्दी में गोंडवाना राज्य की शासक के रूप में अपने साहस और नेतृत्व के लिए ख्याति प्राप्त की। उनकी जन-कल्याणकारी व्यवस्था को सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। रानी ने एक संतुलित, न्यायपूर्ण और विकासात्मक प्रणाली के रूप में शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए गोंडवाना को एक मजबूत और समृद्ध साम्राज्य बनाया। वीरांगना रानी दुर्गावती के शासन में गोंड संस्कृति ने देश की सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध किया है। उन्होंने अपनी पारंपरिक प्रथाओं से पर्यावरण के संवर्धन और संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाई है। आज़ादी के प्रति असीम प्रेम और किसी की अधीनता स्वीकार न करने की जिद और जुनून गोंड समाज की पहचान रही है। रानी दुर्गावती गोंड समुदाय के पराक्रम, भारतीय वीरता और शूरता की साक्षात् प्रतिमूर्ति थीं। मुगल साम्राज्य की अधीनता स्वीकार न करने वाली रियासतों के लिए मुगल काल में सुरक्षित रहना बहुत कठिन माना जाता था, क्योंकि विशाल मुगल सेना के सामने युद्ध भूमि में सामना करना बहुत चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में गोंडवाना साम्राज्य की संरक्षिका के रूप रानी दुर्गावती के कार्य एवं अपूर्व वीरता के साथ राज्य के विकास में किया गया अभूतपूर्व योगदान सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। रानी दुर्गावती के कार्यों और वीरता का गुण-गान आज भी जनजातीय क्षेत्रों में विभिन्न बोलियों और कई भाषाओं में किया जाता है, जो भावी पीढ़ियों के लिये प्रेरणास्पद है। रानी दुर्गावती का संघर्ष मुगलों के खिलाफ था और वे जनजातीय संस्कृति और विरासत की सुरक्षा के प्रति कृत-संकल्पित थीं। उन्होंने मुगलों के खिलाफ एक सशक्त प्रतिरोध का आधार तैयार किया, जिसने देश के दूसरे क्षेत्रों में रहने वाले राजा-महाराजा और अधीनता स्वीकार न करने वाले अनेक समूहों को मुगल सत्ता के खिलाफ लगातार लड़ने के लिए प्रेरित किया। वर्तमान जबलपुर उनके साम्राज्य का केंद्र था। रानी ने करीब 16 वर्ष तक शासन किया। उन्होंने अपने कार्य-काल में अनेक मंदिर, मठ, कुएं, बावड़ियां तथा धर्मशालाएं बनवाईं। लोक कल्याणकारी कार्यों के लिए रानी की कीर्ति दूर-दूर तक फ़ैल गई। रानी दुर्गावती के गढ़ मंडला पर मुगल सूबेदार बाजबहादुर की बुरी नजर थी, लेकिन युद्ध में रानी दुर्गावती ने उसकी पूरी सेना का सफाया कर दिया और फिर वह कभी पलटकर नहीं आया। मुगल सेना के कई हमलों को नाकाम करने वाली रानी दुर्गावती का खौफ दिल्ली की मुगल सत्ता को भी प्रभावित करने लगा। रानी दुर्गावती को अपनी रणनीतिक योग्यता, पारम्परिक सैन्य संसाधन और सैन्य शक्ति पर इतना विश्वास था कि वे विशाल मुगल सेना से कभी विचलित नहीं हुईं। रणक्षेत्र में रानी ने मुगलों की अपेक्षा में बेहद छोटी सेना होने के बाद भी असीम वीरता का परिचय दिया। इस कारण मुगल सेना युद्ध मैदान से भाग खड़ी हुई। रानी दुर्गावती ने मुगलों के खिलाफ अपनी भूमि की रक्षा के लिए जिस अद्वितीय साहस का परिचय दिया, वह भारत की मातृशक्ति के पराक्रम, शौर्य और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। रानी दुर्गावती को भारतीय इतिहास की सर्वाधिक प्रसिद्ध महारानियों और बेहतर प्रशासकों में शुमार किया जाता है। उन्होंने जिस कुशलता से राज संभाला, उसकी प्रशस्ति इतिहासकारों ने भी की है। आईन-ए-अकबरी में अबुल फ़ज़ल ने लिखा है कि “दुर्गावती के शासनकाल में गोंडवाना इतना सुव्यवस्थित और समृद्ध था कि प्रजा लगान की अदायगी-स्वर्ण मुद्राओं और हाथियों से करती थी।” रानी दुर्गावती ने गोंडवाना की स्थिरता, विकास तथा कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिए प्रभावी न्याय प्रणाली की स्थापना की। उन्होंने स्व-शासन को बढ़ावा देते हुए गांवों को मजबूत किया, जिससे किसान खुशहाल हुए। रानी दुर्गावती ने कृषि, व्यापार और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया। उन्होंने कृषि सुधारों और सिंचाई योजनाओं को लागू किया, जिससे खाद्य उत्पादन बढ़ा। रानी दुर्गावती ने शिक्षा और संस्कृति के विकास पर अधिक जोर दिया। उन्होंने साहित्य, कला और संगीत को प्रोत्साहित किया, जिससे गोंडवाना की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा मिला। रानी दुर्गावती की नेतृत्व क्षमता, साहस और बलिदान, राजनैतिक समझ, सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने के कार्य, सांस्कृतिक समृद्धि और राज्य में स्थिरता बनाये रखने की कोशिशें अतुलनीय थी। जन-कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता और मातृभूमि की सुरक्षा के संकल्प ने रानी दुर्गावती को एक महान नेतृत्वकर्ता और शासक के रूप में इतिहास में अमर बना दिया। उनका जीवन और न्यायपूर्ण शासन आज भी प्रेरणा का ऊर्जा स्रोत है।  

इजरायली हमले में हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर हाशेम सफीदीन को निशाना बनाया

बेरूत हिजबुल्लाह के खतरनाक कमांडर नसरल्लाह को मारने के बाद भी इजरायल चैन से नहीं बैठा है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि बेरूत में हुए ताजा इजरायली हमले में हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर हाशेम सफीदीन को निशाना बनाया गया। नसरल्लाह की मौत के बाद कहा है जा रहा है कि हाशेम को ही हिजबुल्लाह की कमान मिलने वाला है। हालांकि, इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) या हिजबुल्लाह की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। न्यू यॉर्क टाइम्स के अनुसार आधी रात को इजरायल ने बेरूत पर लगातार कई हवाई हमले किए। इस बात की संभावना है कि उस समय सफीदीन एक भूमिगत बंकर में वरिष्ठ हिजबुल्लाह अधिकारियों के साथ बैठक में शामिल था। इजरायल द्वारा नसरल्लाह को मारे जाने के बाद से इस क्षेत्र में यह सबसे भारी बमबारी थी। समाचार आउटलेट एक्सियोस के अनुसार, इजरायली हमला नसरल्लाह को मारने वाले हमले से कहीं अधिक बड़ा था। इसमें कितने लोगों की जान गई है इसका अभी पता नहीं चल सका है। आपको बता दें कि 2017 में हाशेम सफीदीन को संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा आतंकवादी घोषित किया गया था। वह हिजबुल्लाह के राजनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह समूह की जिहाद परिषद का भी सदस्य है। नसरल्लाह के चचेरे भाई सफीदीन को आम तौर पर हिजबुल्लाह में ‘नंबर दो’ माना जाता था और ईरानी शासन के साथ भी उसके घनिष्ठ संबंध हैं। नसरल्लाह ने हिजबुल्लाह की परिषदों में सफीदीन को कई प्रभावशाली पदों पर नियुक्त किया था। सफीदीन कई मौकों पर समूह का प्रवक्ता भी रह चुका है। अमेरिकी विदेश विभाग ने 2017 में और सऊदी अरब ने भी उसे आतंकवादी घोषित किया है। इज़राइल ने यह भी दावा किया है कि उसने हाल ही में बेरूत में हिजबुल्लाह की खुफिया शाखा को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले में हिजबुल्लाह के एक और अधिकारी मोहम्मद अनीसी को मार गिराया है।

महंत यति रामस्वरूपानंद गिरि के बयान पर बवाल, पैगंबर मोहम्मद साहब को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी

गाजियाबाद गाजियाबाद के डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद ने एक बार फिर अपने विवादित बोल से हंगामा खड़ा कर दिया है। रावण परिवार की तारीफ करते हुए उन्होंने पैगंबर मोहम्मद साहब और कुरान को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। करीब एक सप्ताह पुराना वीडियो सामने आने के बाद जंगल में आग की तरह वायरल हो गया है। सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने यति को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया तो गाजियाबाद पुलिस से तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। दरअसल 29 सितंबर को गाजियाबाद के हिंदी भवन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। अमर बलिदानी मेजर आसाराम व्याग सेवा संस्थान की ओर से इसका आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में यति नरसिंहानंद भी आए थे। यति ने जब माइक संभाला तो अपने अंदाज में बोलना शुरू किया। उन्होंने मेघनाद, कुंभकरण की तारीफ की तो रावण को लेकर कहा कि उसने ‘छोटी गलती’ की। यति ने मेघनाद, कुंभकरण और रावण का पुतला ना जलाने की अपील की। इसके बाद वह पैगंबर पर बेहद आपत्तिजनक बातें करने लगे। यति ने कहा, ‘हम हर साल जलाते हैं मेघनाद को, उसके जैसा चरित्रवान व्यक्ति इस धरती पर पैदा नहीं हुआ। हम हर साल जलाते हैं मेघनाद को उसके जैसा वैज्ञानिक योद्धा पैदा नहीं हुआ। उनकी गलती क्या थी, रावण ने एक छोटा सा अपराध किया और आज लाखों साल हो गए हम रावण को जला रहे हैं।’ खुद कराया रिकॉर्ड रावण परिवार की तारीफ के बाद यति ने उन्हें ना जलाने की अपील की। इसके साथ ही वह पैगंबर पर विवादित बातें करने लगे। मोहम्मद साहब पर टिप्पणी से पहले यति ने यह भी सुनिश्चित करना चाहा कि जो वह बोलने जा रहे हैं उसकी रिकॉर्डिंग हो जाए। उन्होंने कहा- कोई रिकॉर्ड कर रहा है या नहीं, कर लेना। पैगंबर मोहम्मद साहब के अलावा उन्होंने कुरान को लेकर भी विवादित बातें कहीं। पुलिस ने दर्ज की एफआईआर पहले भी अपने विवादित बयानों से बवाल करा चुके यति नरसिंहानंद का वीडियो वायरल होने के बाद गाजियाबाद पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि केस दर्ज करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। सिहानी गेट पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। एसीपी नंदग्राम पूनम मिश्रा ने बताया कि उपनिरीक्षक की शिकायत पर महंत यति नरसिंहानंद के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का केस दर्ज कर आगामी कार्रवाई की जा रही है।

पुणे में दोस्त के साथ घूमने गई 21 साल की युवती से हैवानियत

पुणे महाराष्ट्र के पुणे में 21 साल की युवती से गैंगरेप करने के मामला सामने आया है। तीन आरोपियों ने इस वारदात को अंजाम दिया है। गैंगरेप की यह वारदात गुरुवार देर रात की है जब महिला अपने एक पुरुष मित्र के साथ बाहर घूमने गई थी। पुलिस के अनुसार, पीड़िता और उसका दोस्त कोंढवा इलाके में थे। तभी तीनों बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने युवती के दोस्त की पिटाई की। रात करीब 11 बजे आरोपियों ने युवती के साथ सामूहिक बलात्कार किया। पुलिस ने बताया कि उसने बाद युवती का दोस्त उसे अस्पताल ले गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे उन्हें मामले की सूचना मिली और वे आरोपियों की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए क्राइम ब्रांच की 10 टीमें बनाई गई हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि पीड़िता राज्य के जालगांव की रहने वाली है, जबकि उसका दोस्त गुजरात के सूरत का रहने वाला है।

PhonePe और Google Pay से बच्चों के दैनिक खर्चों को नियंत्रित करने के आसान तरीके

PhonePe और Google Pay ने उन मां-बाप को बड़ी राहत दी है, जो अपने बच्चों की फिजूलखर्ची से परेशान है। साथ ही उनके हर एक खर्च पर नज़र रखना चाहते हैं। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि आखिर आपका बच्चा कहां और कितना खर्च कर रहा है, तो UPI Circle एक शानदार ऑप्शन हो सकता है, जिसे गूगल पे के बाद फोनपे की तरफ से लॉन्च की तैयारी की जा रही है। 15 हजार रुपये तक कर पाएंगे यूपीआई पेमेंट NPCI का नया UPI Circle फीचर अपने बच्चों को अपने यूपीाई अकाउंट के साथ लिंक करने की सुविधा देता है। इसके बाद बच्चे अपने मां-बाप के यूपीआई अकाउंट से पेमेंट कर पाएंगे। इस पमेंट में मां-बाप के पास कंट्रोल रहेगा कि वो बच्चे के किस पेमेंट को अप्रूव करते हैं और किसे नहीं? इस फीचर के तहत बच्चे एक माह में अधिकतम 15000 रुपये खर्च कर पाएंगे। ET की रिपोर्ट की मानें, तो गूगल पे के बाद फोनपे और अन्य यूपीआई प्लेटफॉर्म ने नए यूपीआई सर्किल फीचर को रोलआउट करना शुरू कर दिया है पार्शियल डेलिगेशन पार्शियल डेलिगेशन में यूजर्स में पूरा कंट्रोल मां-बाप के पास होगा। बच्चा यूपीआई सर्किल के जरिए ऑनलाइन पेमेंट की रिक्वेस्ट करेगा, जिसे मां-बाप को अप्रूव करना होगा। अगर मां-बाप अप्रूव कर देते हैं, तो वो पेमेंट होगा। अगर उन्हें लगता है बच्चा फिजूलखर्च कर रहा हैं, तो उसे मना कर सकती हैं. फुल डेलिगेशन इस फीचर उन मां-बाप के लिए हैं, जिन्हें अपने बच्चे पर फुल कॉन्फिडेंस है। इसमें मां-बाप को बच्चे के पेमेंट को अप्रूव करने की जरूरत नहीं होती है। बच्चा खुद ओटीपी डालकर पेमेंट कर पाएगा। नोट – यूपीआई सर्किल फीचर में बच्चों को अलग बैंकिंग अकाउंट की जरूरत नहीं होगी, वो अपने मां-बाप के यूपीआई अकाउंट से सीधे पेमेंट कर पाएंगे। यह फीचर खासतौर पर बच्चों के लिए बेहद फायदेमंद होगा, जो पढ़ाई या किसी अन्य कामकाज के लिए घर से बाहर रहते हैं। साथ ही बुजुर्ग लोगों के लिए भी यूपीआई सर्किल फीचर बेहतर फायदेमंद माना जा रहा है।

कुकी-मैतेई के बीच सुलह का यह पहला कदम, 17 महीनों की जातीय संघर्ष के बीच हुआ

इंफाल  मणिपुर में पांच दिनों से बंधक बनाए गए दो मैतेई युवकों को रिहा कर दिया गया है। कुकी आदिवासी ग्रामीण स्वयंसेवकों ने उन्हें बंधक बनाया था। यह रिहाई 11 कुकी कैदियों के बदले में हुई है। इन्हें कुछ महीने पहले जमानत मिल गई थी। कैदियों पर हत्या से लेकर ड्रग तस्करी तक के आरोप थे। सुरक्षा कारणों से उन्हें जेल से बाहर नहीं निकाला जा सका था। यह घटना मणिपुर के कांगपोकपी जिले में हुई। कुकी गुट की कमिटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (CoTU) ने ओइनम थोइथोई सिंह और थोकचोम थोइथोइबा सिंह को रिहा किया। रिहाई सुबह 5 बजे के आसपास गमगीफाई में हुई। असम राइफल्स और CRPF की टीमों की मौजूदगी में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को दोनों युवकों को सौंपा गया। कुकी और मैतेई में सुलह का यह पहला कदम इन दोनों के साथ 27 सितंबर को एक और युवक लापता हो गया था, जो उसी दिन घर लौट आया। CoTU ने कुकी और मैतेई प्रतिनिधियों की तस्वीरें जारी कीं। इनमें वे गले मिल रहे थे और हाथ मिला रहे थे। यह तस्वीरें रिहाई के दौरान की हैं। 17 महीनों से चल रहे जातीय संघर्ष के बीच दोनों पक्षों की ओर से सुलह का यह पहला कदम है। इसी दौरान सुरक्षा बलों ने इंफाल की सजीवा जेल से 11 कुकी कैदियों को उनके गृह जिले कांगपोकपी के एक चर्च तक सुरक्षित पहुंचाया। अधिकारियों ने कहा कि दोनों मेइती युवकों और जमानत पर रिहा कैदियों की रिहाई अलग-अलग मामले हैं, लेकिन CoTU ने इसे अदला-बदली करार दिया। सौहार्दपूर्ण समाधान केंद्र की पहल से संभव संगठन के प्रवक्ता एनजी लून किपजेन ने एक वीडियो बयान में कहा कि सौहार्दपूर्ण समाधान केंद्र की पहल से संभव हुआ। उन्होंने कहा कि दोनों की रिहाई में देरी हमारे ग्रामीण स्वयंसेवकों की ओर से निर्धारित कुछ शर्तों के कारण हुई। उन्होंने कहा कि पहली मांग थी कि इंफाल से सभी (कुकी) जेल कैदियों को चुराचांदपुर जैसे कुकी-ज़ो क्षेत्र में ट्रांसफर किया जाए। दूसरा फाइलेंगमोंग इलाके में एक पुलिस स्टेशन बनाना था। उन्होंने कहा कि अगर CM (एन बीरन सिंह) ने उन दो बंदियों की परवाह की होती, तो वह कार्रवाई करते। हमने केंद्र से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया और अंततः केंद्र सरकार के कहने पर DGP ने सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुँचना संभव बनाया। मैतेई ने जताई चिंताघाटी में सक्रिय कई प्रभावशाली नागरिक समाज समूहों में से एक मैतेई हेरिटेज सोसाइटी ने भी एक बयान जारी कर बंधकों की रिहाई में शामिल केंद्रीय और राज्य बलों, मणिपुर सरकार और अन्य लोगों का आभार व्यक्त किया। लेकिन इसमें कहा गया है कि बंधकों को रिहा करने के लिए एक्सचेंज डील के हिस्से के रूप में कुकी बदमाशों और आतंकवादियों की रिहाई से हम बहुत चिंतित हैं क्योंकि यह एक खतरनाक मिसाल कायम करता है।

छत्‍तीसगढ़ में राज्य स्थापना दिवस पर स्कूल-कॉलेज और सरकारी कर्मियों की रहेगी छुट्टी, एक नवंबर को अवकाश की घोषणा

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 1 नवंबर, शुक्रवार को प्रदेश में स्थानीय अवकाश घोषित किया है। इस दिन प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों में छुट्टी रहेगी। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि 1 नवंबर को सभी सरकारी संस्थानों और कार्यालयों में अवकाश रहेगा। हालांकि, यह अवकाश बैंकों और कोषालयों पर लागू नहीं होगा, वहां सामान्य कामकाज जारी रहेगा। राज्योत्सव का आयोजन छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में राज्य सरकार ने 5 नवंबर को जिलास्तरीय एकदिवसीय राज्योत्सव मनाने का भी निर्णय लिया है। इसके अलावा, राजधानी रायपुर में मुख्य राज्योत्सव समारोह 4 या 5 नवंबर को आयोजित किया जा सकता है। मुख्य आयोजन की तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी। स्थापना दिवस की महत्ता 1 नवंबर का दिन छत्तीसगढ़ के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन 2000 में राज्य का गठन हुआ था। राज्य स्थापना दिवस पर हर साल विविध सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाता है। इस वर्ष भी राज्योत्सव का आयोजन पूरे जोश और उत्साह के साथ किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ के विकास, समृद्धि और संस्कृति को सम्मानित किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस आयोजन के लिए सभी आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दे दिए हैं।

निगम आयुक्त ने किया मेडिकल स्टोरो का औचक निरीक्षण, नियमो का उलंघन करने वाले पर हुई जुर्माने की कार्यवाही

सिंगरौली नगरीय क्षेत्र में संचालित मेडिकल स्टोर संचालको के द्वारा मेडिकल वेस्ट का उचित निस्तारण नहीं किया जाता l मेडिकल वेस्ट को नगर निगम के कचरा संग्रहण गड़ियो में डाला जा रहा है। जबकि नियमानुसार मेडिकल वेस्ट को बायोमेडिकल प्लांट में डिस्पोज किया जाना है। जिसकी शिकायत लंबे समय से मिल रही थी जिसके परिपालन में कुछ मेडिकल संचालकों को सूचना और नोटिस दी गई कि वह मेडिकल वेस्ट को नगर निगम की कचरा गाड़ी में ना डालें l नगर निगम आयुक्त श्री डी.के शर्मा को इस आशय की जानकारी मिली कि नोटिस मिलने के बाद भी कुछ मेडिकल संचालक मेडिकल वेस्ट का उचित निराकरण नही कर रहे। मेडिकल वेस्ट को निगम की कचरा परिवहन की गाड़ियो में लगातार पॉलीथिनो में बंद करके डाला जा रहा है। इसी को दृष्टिगत रखते हुये आज निगम आयुक्त द्वारा निगम अमले के साथ न्यायालय परिसर के सामने स्थित मेडिकल स्टोर, तुलसी मार्ग पर संचालित मेडिकल स्टोर तथा थाना रोड में संचालित मेडिकल स्टोरो का औचक निरीक्षण किया l मेडिकल वेस्ट निस्तारण और उनके रजिस्ट्रेशन की जाॅच की गई। मेडिकल वेस्ट का उचित निस्तारण न करने पर 5 मेंडिकल स्टोर संचालको के विरूद्ध जुर्माना की कार्यवाही की गई। इसके साथ ही हिदायत दी गई कि मेडिकल स्टोर का संचालन नियमानुसार करे अगर पुनः निरीक्षण के दौरान नियमो का उलंघन करना पाया गया तो मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ जुर्माने की कार्यवाही के साथ मेडिकल स्टोर को सील करने की कार्यवाई भी होगी l तत्पश्चात निगमायुक्त के द्वारा जिला चिकित्सालय सह ट्रामा सेन्टर का निरीक्षण कर मेडिकल वेस्ट निस्तारण के संबंध में जानकारी ली गई।इस दौरान नगर निगम के उपायुक्त आरपी बैस, सहायक यंत्री एस.एन द्विवेदी, सीटाडेल मैनेजर रावेन्द्र सिंह, सहित निगम अमला उपस्थित रहा।

मंडला में आकर्षक का केंद्र बनी 51 शक्तिपीठ की स्थापना

मण्डला  श्री सिद्ध सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति बड़ी खैरी मंडला द्वारा इस वर्ष नवरात्र पर भव्य आयोजन किया जा रहा है। नवरात्र के नौ दिनों तक विविध कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई गई है। जिसका प्रारंभ नवरात्र के प्रथम दिवस से प्रारंभ किया गया। सर्वप्रथम बड़ी खैरी स्थित रामघाट नर्मदा तट पर समिति के पदाधिकारी एवं मातृशक्तियां पहुंची जहां पर मां नर्मदा की प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन करते हुए घट पूजा की गई। और यहां से गाजे बाजे के साथ मां नर्मदा को पंडाल तक लाया गया जहां पर देर रात तक पूजन पाठ के साथ 51 शक्तिपीठ की स्थापना हुई। कार्यकर्ता नीतेश पटेल ने बताया कि मां दुर्गा के 53 वें स्थापना वर्ष को आकर्षक बनाने के लिए इस वर्ष श्री सिद्ध दुर्गोत्सव समिति द्वारा अनेक भव्य आयोजन करती है। नवरात्र में प्रत्येक दिन अनेक प्रकार की धार्मिक कार्यक्रम होंगे, जो जनमानस के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगा। यहां नवरात्रि के प्रथम दिवस पर वैदिक मंत्रोचारण के बीच घटस्थापना कर देवी माता का आव्हान किया जाता है। इसके बाद नवरात्रि का पूजन व व्रत रखा जाता है  मान्यता है कि शैलपुत्री की पूजा से चंद्र ग्रह से जुड़े नकरात्मक प्रभावों से मां रक्षा करती हैं चमेली का फूल देवी शैलपुत्री को काफी प्रिय है। देवी माता के शैलपुत्री रूप में उन्हें दो भुजाओं के साथ देखा जा सकता है उनके एक हाथ (दाहिने) में त्रिशूल होता है। वहीं दूसरे (बायें) हाथ में उन्हें कमल पुष्प के साथ देख सकते हैं। यहां पर झूला प्रदर्शनी सहित अनेक कलाकार आ चुकें हैं।  

रेलवे में 14 हजार से पदों के लिए RRB ने दोबारा शुरू की भर्ती, इस तारीख से आवेदन कर सकते हैं उम्मीदवार

नई दिल्ली  रेलवे भर्ती की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए खुशखबरी है. रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB) ने रेलवे टेक्निशयन भर्ती 2024 के लिए आवेदन करने का एक और मौका दिया है. इस भर्ती अभियान के माध्यम से 14000 से अधिक रिक्तियों को भरा जाएगा. जो योग्य उम्मीदवार पहले आवेदन नहीं कर पाए थे, वे अब 16 अक्टूबर 2024 तक ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. इससे पहले रेलवे टेक्निशियन ग्रेड I सिंगल और टेक्निकल ग्रेड III भर्ती 2024 की एप्लीकेशन विंडो 9 मार्च से 8 अप्रैल 2024 तक खोली गई थी. ओपन लाइन (17 श्रेणियों) के लिए भरी जाने वाली रिक्तियों की संख्या 9144 थी, जिसे क्षेत्रीय रेलवे/उत्पादन इकाइयों से अतिरिक्त मांग प्राप्त होने के बाद आरआरबी द्वारा बढ़ाकर 14298 कर दिया गया था. आरआरबी ने फिर से ऑनलाइन एप्लीकेशन विंडो खोलकर युवाओं को रेलवे में सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) पाने का मौका दिया है. भर्ती परीक्षा से संबंधित जानकारी जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दी जाएगी.   RRB Railway Technician Vacancy: यहां देखें वैकेंसी डिटेल्स टेक्नीशियन ग्रेड 1 सिग्नल: 1092 पद टेक्नीशियन ग्रेड 3 ओपन लाइन: 8052 पद टेक्नीशियन ग्रेड 3 वर्कशॉप एंड PUs: 5154 पद कुल खाली पदों की संख्या: 14298 शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा टेक्नीशियन ग्रेड 1 सिग्नल: मान्यता प्राप्त विश्विविद्यालय या संस्थान से फिजिक्स / इलेक्ट्रॉनिक्स / कंप्यूटर विज्ञान / इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी / इंस्ट्रूमेंटेशन में साइंस बैचलर डिग्री होनी चाहिए या बीएससी या बीई / बी.टेक / 3 वर्षीय इंजीनियरिंग पॉलिटेक्निक डिप्लोमा मांगा गया है. टेक्नीशियन ग्रेड 3 ओपन लाइन और टेक्नीशियन ग्रेड 3 वर्कशॉप एंड PUs: मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होने के साथ संबंधित ट्रेड में एनसीवीटी या एससीवीटी से आईटीआई सर्टिफिकेट होना चाहिए. अभी अप्लाई करने के लिए यहां क्लिक करें- आयु सीमा: 01/07/2024 तक उम्मीदवारों की कम से कम उम्र 18 वर्ष और अधिकतम टेक्नीशियन ग्रेड III के लिए 33 वर्ष और तकनीशियन ग्रेड I सिग्नल के लिए 36 वर्ष तक ही होनी चाहिए. हालांकि रेलवे भर्ती बोर्ड आरआरबी टेक्नीशियन भर्ती विज्ञापन संख्या सीईएन 02/2024 रिक्ति नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अधिक जानकारी के लिए रेलवे भर्ती नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें. आवेदन शुल्क सामान्य/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के उम्मीदवारों को 500 रुपये, एससी/एसटी/पीएच कैटेगरी और महिला उम्मीदवारों को 250 रुपये आवेदन शुल्क जमा करना होगा. स्टेज I परीक्षा में बैठने के बाद यूआर/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस को 400/- और एससी/एसटी/पीएच/महिलाओं को 250/- शुल्क वापसी की जाएगी. परीक्षा शुल्क का भुगतान केवल डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग शुल्क मोड के माध्यम से करें.  

नवरात्रि पर योगी का नया फरमान, व्रत रखने वाले बंदियों को विशेष फलाहार की व्यवस्था

लखनऊ उत्तर प्रदेश की जेलों में शारदीय नवरात्र के दौरान व्रत रखने वाले बंदियों के लिए विशेष फलाहार और खाद्य सामग्री की व्यवस्था की गई है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके लिए निर्देश दिया था. उसके बाद प्रदेश के सभी जेलों में बंदियों के लिए नौ दिनों के व्रत के दौरान विशेष व्यवस्था की गयी है. प्रदेश ऐसा करने वाला पहला राज्य होगा.   इस बार शारदीय नवरात्र पर यूपी सरकार ने जेल में बंद क़ैदियों के लिए विशेष व्यवस्था की है. जेल में बंद क़ैदी अपने धार्मिक रीतियों का पालन करते हुए नवरात्र में व्रत रखते हैं. इसलिए सरकार पूरे नौ दिन व्रत रखने वाले बंदियों के लिए उनके व्रत को देखते हुए जलपान,फलाहार और भोजन की व्यवस्था करेगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसके लिए निर्देश दिए थे. उसके बाद कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने इस संबंध में महानिदेशक कारागार प्रशासन को निर्देश जारी कर दिए. इसके अनुपालन के लिए इसके लिए हर जेल को उपयुक्त और पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री उपलब्ध करायी जाएगी. बंदियों की संख्या और खाद्य सामग्री की क्वालिटी पर भी ध्यान दिया जा रहा है. गौरतलब है कि यूपी के जेलों में रोज़ा इफ़्तार पहले भी होता रहा है पर ये पहली बार है जब जेल में नवरात्र के लिए व्रत के भोजन और फलाहार की व्यवस्था की गयी है. कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यूपी ऐसा करने वाला संभवतः देश का पहला राज्य होगा.  

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