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कश्मीर में पहली बार मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों एक पार्टी से, अब हमारे विरोधी क्या कहेंगे : CMअब्दुल्ला

जम्मू जम्मू कश्मीर के नए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक बार फिर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस केवल मुस्लिमों की पार्टी नहीं है। यदि ऐसा होता तो किसी भी हिंदू को उपमुख्यमंत्री नहीं बनाते। परिणाम के बाद ही कुछ लोग कहना शुरू हो गए थे कि नेकां मुसलमानों और कश्मीरियों की पार्टी है, जिसमें जम्मू को कुछ नहीं मिलेगा, लेकिन हमने जम्मू से हिंदू उपमुख्यमंत्री बनाया।कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उमर ने कहा कि हिंदू उपमुख्यमंत्री बनाना उन लोगों को जवाब है, जो नेकां को परिवारवाद वाली पार्टी कहते थे। उपमुख्यमंत्री हिंदू है और जम्मू का है और मेरे परिवार से संबंध नहीं रखता है। पहले उपमुख्यमंत्री गठबंधन की मजबूरी में बनाए जाते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। बिना किसी मजबूरी या दबाव में हमने उपमुख्यमंत्री बनाया। पहली बार मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों एक पार्टी से हैं। अब हमारे विरोधी क्या कहेंगे। मुख्यमंत्री बनने के बाद उमर अब्दुल्ला  पहली बार जम्मू पहुंचे। पार्टी कार्यालय में उनका कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उमर भाजपा पर हमलावर रहे। सीएम ने कहा, कुछ लोगों ने बीते आठ सालों में नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) को खत्म करने के लिए हर हथकंडा अपनाया। जिस तरह से परिसीमन करवाया, आरक्षण में बदलाव किया, उसका उद्देश्य सिर्फ एक पार्टी को लाभ पहुंचना था, लेकिन लोगों ने उस सब को एक तरफ रखकर सोच-समझकर वोट दिया। भाजपा पर आरोप लगाते हुए सीएम ने कहा कि बीते आठ सालों में हमारे नेताओं को डराया गया। कुछ लोग पार्टी छोड़ गए तो उन्हें लगा था, उनके जाने से पार्टी खत्म हो जाएगी, लेकिन नेकां कार्यकर्ताओं ने साबित कर दिया कि पार्टी नेताओं की नहीं कार्यकर्ताओं की है। चुनाव में जीते निर्दलीय उम्मीदवारों ने बिना किसी शर्त के पार्टी के साथ जुड़ने का फैसला लिया। खुद के लिए कुछ नहीं मांगा। अब फैसले कार्यालय या सचिवालय में नहीं लिए जाएंगेसीएम ने कहा, पार्टी कार्यकर्ताओं को सरकार से उम्मीद है। उन्हें भी कई साल हुए हैं सचिवालय गए हुए। अधिकारियों को कुछ समय दो, उन्हें आदत हो जाए कि अब लोगों की सरकार है। अब फैसले बिना लोगों की राय के सचिवालय या अधिकारियों के कार्यालयों में नहीं लिए जाएंगे। अब प्रोजेक्ट और डीपीआर बनेंगे। लोग जो चाहेंगे, वह काम उनके इलाके में होगा।  

IPL कई फ़्रैंचाइज़ियों ने 100-बॉल लीग द हंड्रेड में औपचारिक रूप से रुचि दिखाई

नई दिल्ली  इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की आधा दर्जन से ज़्यादा फ़्रैंचाइज़ियों ने इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) द्वारा संचालित 100-बॉल लीग द हंड्रेड में औपचारिक रूप से रुचि दिखाई है। शुक्रवार, 18 अक्टूबर को पहले दौर की बोलियाँ जमा करने की समयसीमा थी, और आधिकारिक तौर पर रुचि दिखाने वालों में से ज़्यादातर भारतीय निवेशक हैं, ख़ास तौर पर आईपीएल फ़्रैंचाइज़ी। क्रिकबज के अनुसार, चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके), सनराइज़र्स हैदराबाद (एसआरएच), लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी), मुंबई इंडियंस (एमआई), कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) और दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) ने बोलियाँ जमा की हैं। हालाँकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन समझा जाता है कि राजस्थान रॉयल्स ने भी बोली लगाई है, साथ ही महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) की एक फ़्रैंचाइज़ी यूपी वॉरियर्स ने भी बोली लगाई है, जिसका स्वामित्व दुबई स्थित कैप्री ग्लोबल ग्रुप के पास है। मैनचेस्टर यूनाइटेड के सह-मालिक और आईएलटी20 में डेजर्ट वाइपर्स टीम के संचालक, एवरम ग्लेज़र की लांसर कैपिटल्स ने भी बोली में भाग लिया है। दिलचस्प बात यह है कि ब्रिटिश फर्म डियाजियो के स्वामित्व वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पंजाब किंग्स की तरह ही बोली नहीं लगाई, जिसने इंग्लिश लीग में टीम के मालिक बनने के अवसर से दूर रहने का विकल्प चुना। अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि गुजरात टाइटन्स बोली में हिस्सा ले रहा है या नहीं, लेकिन अहमदाबाद फ्रैंचाइज़ के मालिक सीवीसी कैपिटल का यू.के. में एक कार्यालय है। सीवीसी के भारतीय अधिकारियों को इस बात की जानकारी नहीं है कि यू.के. कार्यालय ने बोली लगाई है या नहीं। विभिन्न खेल संपत्तियों में सीवीसी कैपिटल की विश्वव्यापी भागीदारी को देखते हुए, ऐसी धारणा है कि उन्होंने भी रुचि दिखाई होगी। संयोग से, गुजरात टाइटन्स के परिचालन प्रमुख निक क्लैरी लंदन में रहते हैं, जिससे उनकी संभावित भागीदारी की संभावना बढ़ जाती है। चूंकि यह बोली का केवल पहला दौर है, इसलिए इस स्तर पर निवेशकों के लिए द हंड्रेड में आठ टीमों में से किसी एक का चयन करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह निर्णय दूसरे और अधिक गंभीर दौर में आएगा, जो ईसीबी के अनुसार, आईपीएल नीलामी समाप्त होने के बाद हो सकता है। दूसरे दौर में वाणिज्यिक चर्चाएँ भी अपेक्षित हैं, सूत्रों से पता चलता है कि ईसीबी 75 मिलियन पाउंड और 100 मिलियन पाउंड के बीच फ्रैंचाइज़ मूल्यांकन की उम्मीद कर रहा है। ईसीबी द्वारा साझा किए गए सूचना ज्ञापन (आईएम) के अनुसार, इंग्लिश बोर्ड वर्तमान में द हंड्रेड प्रतियोगिता और इसकी सभी टीमों का 100 प्रतिशत स्वामित्व रखता है। यह आठ टीमों में से प्रत्येक का कम से कम 49 प्रतिशत हिस्सा नए निवेशकों को बेचेगा, जिनके पास द हंड्रेड को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए दृष्टि, अनुभव और क्षमताएं हैं। किसी टीम में हिस्सेदारी खरीदने के इच्छुक निवेशकों को किसी एक टीम में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए 40 मिलियन पाउंड से 50 मिलियन पाउंड के बीच निवेश करना पड़ सकता है। बोली के दूसरे दौर के दौरान मूल्यांकन सामने आएगा। शेष 51 प्रतिशत प्रत्येक टीम से जुड़ी काउंटियों के पास रहेगा, जिससे नए निवेशक संबंधित काउंटी के साथ संयुक्त उद्यम में भागीदार बन जाएंगे। निवेशकों के पास काउंटियों के 51 प्रतिशत का कुछ या पूरा हिस्सा खरीदने का विकल्प भी है। आईएम के प्रासंगिक हिस्से में कहा गया है, ईसीबी फिर प्रत्येक टीम में अपनी शेष हिस्सेदारी उनके संबंधित मेजबानों को उपहार में देने की योजना बना रहा है, जिससे नए निवेशकों और दुनिया के कुछ प्रतिष्ठित क्रिकेट संस्थानों के बीच एक स्थायी साझेदारी बनेगी। इस प्रक्रिया के एक हिस्से के रूप में, मेजबानों के पास टीमों में अपनी इक्विटी का एक हिस्सा नए निवेशकों को बेचने का विकल्प भी होगा ताकि नियंत्रण की स्थिति का रास्ता मिल सके।    

बिजली उपभोक्ता अब

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के बिजली उपभोक्ताओं को सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के बैंकों की तर्ज पर शासन की योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ देने के उद्देश्य से शुरू की गई केवायसी प्रक्रिया के तहत अब तक 3 लाख 55 हजार 105 उपभोक्ताओं ने सफलतापूर्वक केवायसी करा ली है। कंपनी ने बताया है कि केवायसी प्रक्रिया में नर्मदापुरम ग्रामीण में 39 हजार 745, बैतूल ग्रामीण में 64 हजार 146, राजगढ़ ग्रामीण में 21 हजार 017, शहर वृत्त भोपाल में 25 हजार 573, भोपाल ग्रामीण में 29 हजार 078, गुना ग्रामीण में 26 हजार 083, विदिशा ग्रामीण क्षेत्र में 27 हजार 14, सीहोर ग्रामीण में 16 हजार 420, ग्वालियर ग्रामीण में 12 हजार 407, शहर वृत्त ग्वालियर में 8 हजार 336, अशोकनगर ग्रामीण में 10 हजार 620, दतिया ग्रामीण में 12 हजार 980, रायसेन ग्रामीण में 16 हजार 171, शिवपुरी ग्रामीण में 14 हजार 903, हरदा ग्रामीण में 11 हजार 765, श्योपुर ग्रामीण में 5 हजार 396 , मुरैना ग्रामीण में 8 हजार 631 एवं भिण्ड ग्रामीण में 4 हजार 820 बिजली उपभोक्ताओं की केवायसी की गई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल ने कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी मैदानी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे कंपनी द्वारा की जा रही केवायसी प्रक्रिया से आमजन और बिजली उपभोक्ताओं को अवगत कराना सुनिश्चित करें। साथ ही कंपनी द्वारा “उपाय” एप से घर बैठे उपलब्ध कराई जा रही केवायसी करने की सुविधा के बारे में भी अवगत कराएं। गौरतलब है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों के बिजली उपभोक्ताओं के बिजली संबंधी व्यक्तिगत विवरण को कंपनी के रिकार्ड में अपडेट करने के लिए नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया शुरू की है। कंपनी द्वारा नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया के तहत बिजली उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी जैसे समग्र आईडी, मोबाइल नंबर एवं बैंक खाता इत्यादि की जानकारी को अपडेट किया जा रहा है। नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया से बिजली उपभोक्ताओं को जहां राज्य शासन की योजनाओं का लाभ सीधे लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना से सुनिश्चित किया जा सकेगा वहीं दूसरी ओर प्रणाली में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। साथ ही केवायसी से वास्तविक उपभोक्ताओं के विद्युत संयोजन एवं उनके भार की स्थिति का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे कंपनी कार्यक्षेत्र में विद्युत संरचनाओं के भविष्य में विस्तार की योजना बनाने में आसानी होगी। कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं की सही पहचान और मोबाइल नंबर को सटीक रूप से टैग करने में मदद मिलेगी, जिससे कंपनी की सेवाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया है कि गूगल प्ले-स्टोर पर उपलब्ध उपाय एप डाउनलोड कर बिजली उपभोक्ता समग्र केवायसी में अपना उपभोक्ता क्रमांक एवं समग्र क्रमांक दर्ज करने के बाद लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी को दर्ज कर केवायसी प्रक्रिया को पूर्ण कर सकते हैं।  

संजौली मस्जिद के अवैध हिस्से को तोड़ने का काम मस्जिद कमेटी ने शुरू करा दिया

शिमला  संजौली मस्जिद के अवैध हिस्से को तोड़ने का काम मस्जिद कमेटी ने शुरू करा दिया है। नगर निगम शिमला के आयुक्त की कोर्ट ने मस्जिद की तीन मंजिलों को अवैध करार देते हुए मस्जिद कमेटी को अपने ख़र्चे पर इसे दो महीने में गिराने के फरमान दिए थे। कोर्ट के फरमान के 15 दिन बाद मस्जिद में बने अवैध हिस्से को तोड़ने का काम शुरू हो पाया है। यह मस्जिद रिहायशी इलाके में बनी है। मस्जिद के आसपास कई भवन सटे हैं। ऐसे में अवैध तीन मंजिलों को गिराने में काफी वक्त लगेगा। इस कार्य के लिए मजदूर लगाए गए हैं। मजदूरों ने पहले दिन मस्जिद की सबसे ऊपर की मंजिल में लगी टीन को उखाड़ना शुरू किया। मस्जिद कमेटी को अपने ख़र्चे पर अवैध निर्माण तोड़ने के आदेश हैं। संजौली मस्जिद कमेटी के प्रधान लतीफ मोहम्मद की देखरेख में अवैध निर्माण को तोड़ा जा रहा है। लतीफ मोहम्मद ने कहा कि अवैध हिस्से को गिराने में काफी खर्चा आएगा और इसके लिए फंड जुटाया जा रहा है। मस्जिद कमेटी अपने स्तर पर फंड की व्यवस्था कर रहा है। इस कार्य के लिए हमें राज्य सरकार व अन्य किसी संस्था से धनराशि नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक फंड की मैनेजमेंट नहीं हुई और काम करने के लिए काफी फंड की जरूरत है। ऐसे में अवैध हिस्से को तोड़ने में तीन से चार महीने का समय लग सकता है और अगली सुनवाई में कोर्ट से अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमन, शांति व भाईचारा कायम रखने के लिए मस्जिद कमेटी ने अवैध निर्माण तोड़ने का निर्णय लिया है और नगर निगम कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि मस्जिद कमेटी ने इन मंजिलों को गिराने के लिए खुद ही कोर्ट में लिखित आवेदन भी दिया था। मस्जिद की ऊपर की तीन मंजिले अवैध, दो माह में गिराने के आदेश सुर्खियों में रहने वाली इस विवादित चार मंजिला मस्जिद में अवैध निर्माण को लेकर बीते 5 अक्टूबर को नगर निगम के कोर्ट में सुनवाई हुई। नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर सुनवाई करते हुए मस्जिद कमेटी को अहम आदेश दिया है। मस्जिद की ऊपर की तीन मंजिलें अवैध रूप से बनी हैं। कोर्ट ने फरमान जारी किए हैं कि मस्जिद की दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिलों को गिराना होगा। 14 साल में आया फैसला, 46 बार हुई सुनवाई मस्जिद में अवैध निर्माण की पिछले 14 सालों से आयुक्त कोर्ट में सुनवाई चल रही है। 46वीं सुनवाई पर नगर निगम आयुक्त ने यह फैसला सुनाया है। वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी को अपने खर्चे पर तीन मंजिलें गिराने को कहा गया है। कोर्ट ने मामले की आगामी सुनवाई 21 दिसंबर 2024 को निर्धारित की है। मस्जिद में बिना अनुमति खड़ी कर दीं चार मंजिलें संजौली की इस विवादित मस्जिद का निर्माण वर्ष 2007 में शुरू हुआ था। स्थानीय लोगों ने मस्जिद को अवैध बताते हुए वर्ष 2010 में इसके खिलाफ नगर निगम की कोर्ट में याचिका दाखिल की। तब से यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। खास बात यह है कि तब से लेकर प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन किसी भी सरकार के कार्यकाल ने इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। मस्जिद कमेटी के पूर्व प्रधान ने कोर्ट में बताया कि वर्ष 2012 तक मस्जिद दो मंजिला थी। इसके बाद यहां अवैध निर्माण हुआ। संजौली मस्जिद विवाद पर हिंदु संगठनों ने किये थे उग्र प्रदर्शन संजौली की इस मस्जिद के मुद्दे पर पूरे प्रदेश में कोहराम का आलम रहा। सितंबर महीने में हिन्दू संगठनों के बैनर तले हिन्दू शिमला सहित अन्य जिलों में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर अवैध मस्जिदों को गिराने और बाहर से आने वाले विशेष समुदाय के लोगों की रजिस्ट्रेशन की मांग कर रहे हैं। संजौली में बीते 11 सितम्बर को हिंदूओं ने उग्र प्रदर्शन कर विवादित मस्जिद स्थल तक पहुंचने की कोशिश की थी।  

उज्जैन में साधु संतों, महंत, अखाड़ा प्रमुखों, महामंडलेश्वर आदि को स्थाई आश्रम बनाने की अनुमति दी जाएगी -मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन में हरिद्वार के तर्ज पर साधु संतों, महंत, अखाड़ा प्रमुखों, महामंडलेश्वर आदि को स्थाई आश्रम बनाने की अनुमति दी जाएगी। उज्जैन की पहचान साधु-संतों से है। साधु-संतों को उज्जैन में आने, ठहरने, कथा, भागवत इत्यादि और अन्य आयोजन के लिए पर्याप्त रूप से भूमि भूखंड की आवश्यकता पड़ती है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा साधु-संतों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्थायी आश्रम बनाए जाने की योजना बनाई गई है। निजी होटल्स में साधु-संतों और श्रद्धालुओं को इस प्रकार के आयोजनों के लिए चुनौतियां आती हैं और महंगा भी पड़ता है। यहां 12 वर्षों में एक बार आयोजित होने वाला सिंहस्थ का आयोजन 2028 में किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन में सिंहस्थ के संबंध में आयोजित प्रेस-वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, विधायक सतीश मालवीय,महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति कलावती यादव, संभागायुक्त संजय गुप्ता, आईजी संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा सहित मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार में जिस प्रकार साधु-संतों के अच्छे आश्रम बने हुए हैं, उसी प्रकार विकास के क्रम को जारी रखते हुए उज्जैन में भी साधु संतों के स्थायी आश्रम बनाने के प्रयास किए जाएंगे। उज्जैन विकास प्राधिकरण के माध्यम से इस बड़ी योजना को आकार दिया जाएगा। सभी साधु-संतों, महंत, अखाड़ा प्रमुखों, महामंडलेश्वर सभी को आमंत्रित कर उनके स्थायी आश्रम बनाने की दिशा में काम करेंगे। सिंहस्थ के दृष्टिगत सड़क, बिजली, पेयजल, जल निकासी इत्यादि मूलभूत सुविधाओं के लिए भी स्थाई अधोसंरचना का निर्माण किया जाएगा। ताकि अस्थाई निर्माण से होने वाली समस्याएं निर्मित ना हों। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की तरह उज्जैन को धार्मिक शहर के रूप में विकसित करने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर कार्ययोजना तैयार की गई है। सभी प्रकार के फोरलेन, सिक्सलेन ब्रिज आदि स्थायी अधोसंरचना विकास के कार्य किए जाएंगे। सभी मूलभूत सुविधाओं के विकास के साथ साधु-संतों के लिए आश्रम निर्माण के कार्य समानांतर रूप से किए जाएंगे। समाज के इच्छुक सनातन धर्मावलंबियों के माध्यम से अन्न क्षेत्र, धर्मशाला, आश्रम, चिकित्सा केंद्र, आयुर्वेद केंद्र आदि सार्वजनिक गतिविधियों के संचालन कार्य को भी प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन सहित प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रदेश सरकार निरंतर आगे बढ़ रही है। समान रूप से विकास से सभी की खुशहाली के द्वार खुलेंगे। सभी देव स्थानों के आसपास हमारे धर्माचार्य आ जाए यह हमारी प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि साधु-संतों को आश्रम निर्माण के लिए अनुमति इस प्रकार दी जाएगी कि पांच बीघा में से एक बीघा भूखंड पर ही भवन का निर्माण किया जा सकेगा। शेष चार बीघा भूखंड खुला रहेगा, जिसमें पार्किंग आदि व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त खुला स्थान रहे। यह अनुमति केवल साधु-संतों, महंत, अखाड़ा प्रमुखों, महामंडलेश्वर को ही दी जाएगी। व्यक्तिगत और कमर्शियल उपयोग के लिए इस प्रकार की अनुमति नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि महाकाल महालोक बनने के बाद से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। निरंतर यहां धार्मिक आयोजनों का क्रम जारी रहता है। ऐसे में यह योजना धर्मावलंबियों के लिए बड़ी लाभकारी सिद्ध होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए पूरी योजना तैयार की गई है। उज्जैन-इंदौर सिक्स लेन कार्य की भी टेंडर प्रक्रिया हो गई है। वहीं उज्जैन- जावरा ग्रीन फील्ड फोरलेन मार्ग का शीघ्र भूमिपूजन किया जाएगा। इसी प्रकार बृहद योजना के तहत इंदौर, उज्जैन, धार, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर आदि को विकसित किया जाएगा। उज्जैन के धार्मिक मूल स्वरूप को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन मेट्रो ट्रेन का संचालन की सैद्धांतिक स्वीकृति भी दे दी गई है। इसी के साथ उज्जैन, देवास, फतेहाबाद, इंदौर को जोड़ते हुए सर्किल वंदे मेट्रो ट्रेन का भी संचालन किया जाएगा, जिसकी गति मेट्रो ट्रेन की तुलना में अधिक होगी। रेल रूट के साथ उज्जैन के सभी मार्गों का भी सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। उज्जैन से निकलने वाले सभी मार्ग फोरलेन किए जाएंगे। वर्तमान एयरस्ट्रिप का भी उन्नयन कर टेक्निकल रूप से एयरपोर्ट बनाया जायेगा, ताकि 12 महीने हवाई यातायात सुविधा भी उज्जैन को मिल सके।      

उड़ानों पर धमकी भरे फर्जी कॉल पर केंद्र सरकार सख्त, कानून में बदलाव करने का निर्णय, जुर्माने के साथ सजा भी दी जाएगी

नई दिल्ली देश भर की तमाम एयरलाइन कंपनियों के विमानों में बम की धमकी मिलने का सिलसिला पिछले कई हफ्तों से जारी है। रविवार को भी 25 विमानों में बम होने की धमकी दी गई थी, जिसके बाद 25 विमानों में बम होने की धमकी दी गई। इन धमकियों को लेकर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के महानिदेशक आरएस भट्टी और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के महानिदेशक जुल्फिकार हसन ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस बैठक के दौरान गृह मंत्रालय को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर धमकी भरे फर्जी कॉल के बारे में अवगत कराया गया। केंद्र सरकार इस मामले में सख्त हो गई। उन्होंने कानून में बदलाव करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही अपराधी को जुर्माने के साथ सजा भी दी जाएगी। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने  विमानों को बम से उड़ाने की धमकी पर बात की। उन्होंने कहा, “अगर आवश्यक हुआ तो हमने मंत्रालय की तरफ से कुछ विधायी कार्रवाई के बारे में सोचा है। हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि ऐसे दो क्षेत्र हैं जिन पर हम काम कर सकते हैं। 1. विमान सुरक्षा नियमों में संशोधन। एन नियमों को बदलकर हम जो करना चाहते हैं , वह यह है कि अपराधी जब पकड़ा जाएगा तो हम उन्हें नो-फ्लाइंग सूची में डालना चाहते हैं। 2.  नागरिक उड्डयन सुरक्षा अधिनियम के विरुद्ध गैरकानूनी कार्यों को खत्म करना।” उन्होंने आगे कहा, “हम इसे संज्ञेय अपराधों की सूची में डाल रहे हैं और उस संशोधन के आधार पर जुर्माने के साथ सजा भी दी जाएगी।” लगातार मिल रहे इन धमकियों को देखते हुए गृह मंत्रालय ने हवाईअड्डों पर एहतियातन सतर्कता बढ़ा दी है। उन्होंने इन झूठी धमकियों की रिपोर्ट भी मांगी है। रविवार को इंडिगो, विस्तारा, एयर इंडिया और अकासा समेत 20 से अधिक भारतीय विमानों में बम की धमकी मिली। इंडिगो, विस्तारा और एयर इंडिया की छह-छह उड़ानों में बम होने की धमकी दी गई। इंडिगो के प्रवक्ता ने बताया कि इंडिगो की 6E 58 जेद्दा से मुंबई, 6E87 कोझिकोड से दम्मम, 6E11 दिल्ली से इस्तांबुल, 6E17 मुंबई से इस्तांबुल, 6E133 पुणे से जोधपुर और 6E112 गोवा से अहमदाबाद फ्लाइट में बम होने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विमानों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले हैंडल को ब्लॉक कर दिया गया। पिछले हफ्ते से अब तक 100 से अधिक उड़ानों में बम की धमकियां मिल चुकी हैं। सभी धमकियां अफवाह निकली हैं। 

अब मालदीव में भी भारत का UPI चलेगा, रिश्तों की बागडोर थाम मुइज्जू फिर भारत के दरवाजे पर आ खड़ा हुआ

नई दिल्ली  अब मालदीव में भी भारत का यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स सिस्टम) चलेगा। मोहम्मद मुइज्जू ने चुनाव प्रचार के दौरान से ही भारत के खिलाफ जो आक्रोश दिखाना शुरू किया था, अब वो ठंडा पड़ गया है। राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद मुइज्जू ने भारत के सैनिकों को मालदीव से निकाल दिया। इस बीच मुइज्जू की कुछ मंत्रियों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बहुत ओछी टिप्पणियां कीं। ये सब कुछ महीनों तक चलता रहा, लेकिन जब नफरत की गांठ खुली तो रिश्तों की बागडोर थाम मालदीव फिर भारत के दरवाजे पर आ खड़ा हुआ। इस वजह से भारत और मालदीव के बीच रिश्तों में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। मुइज्जू सरकार ने भारत के मुकाबले चीन की ओर अधिक झुकाव दिखाना शुरू किया। हालांकि, हाल के दिनों में भारत और मालदीव ने अपने रिश्तों को सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मालदीव में तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लागू करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। जयशंकर ने कहा कि यह डिजिटल इनोवेशन मालदीव में पर्यटन और आर्थिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। जैसा कि आप सभी जानते हैं, भारत ने अपने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से वास्तव में डिजिटल लेनदेन में क्रांति ला दी है। भारत में इसने वित्तीय समावेशन को नए स्तरों पर पहुंचाया है। आज दुनिया के 40 प्रतिशत रियल टाइम डिजिटल पेमेंट हमारे देश में होते हैं। हम अपने जीवन में हर दिन इस क्रांति को देखते हैं। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि आज समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके हमने मालदीव में इस डिजिटल इनोवेशन को लाने की दिशा में पहला कदम उठाया है। इसका पर्यटन पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भारत-मालदीव के रिश्तों में क्यों आई थी खटास? वर्ष 1988 से ही डिफेंस और सिक्यॉरिटी भारत और मालदीव के बीच सहयोग के बड़े क्षेत्र रहे हैं। भारत के रक्षा संस्थानों में मालदीव के सैनिकों को ट्रेनिंग दी जाती रही है। भारत और मालदीव के बीच अप्रैल 2016 में समन्वित रक्षा साझेदारी का भी समझौता हुआ था। भारत और मालदीव के बीच संबंधों में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारतीय सैन्य कर्मियों की वापसी की मांग की। यह घटना उस समय हुई जब उन्होंने भारतीय सैन्य सहायता को एक खतरे के रूप में देखा। इसके बाद, भारतीय सैन्य कर्मियों को मालदीव से हटा दिया गया। यह स्थिति भारत के लिए न केवल कूटनीतिक दृष्टि से बल्कि सामरिक दृष्टि से भी चिंता का विषय बन गई। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की सरकार ने चीन के साथ निकटता बढ़ाई थी और भारत के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया था। यामीन के कार्यकाल में भारत के खिलाफ ‘इंडिया आउट कैंपेन’ चलाया गया, जिसने भारत-मालदीव संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। ऊपर से मालदीव ने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में शामिल होकर भारत से अपने संबंधों को और कमजोर कर दिया। मालदीव हमारी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी की आधारशिलाओं में से एक है, यह हमारे विजन सागर में से एक है, साथ ही ग्लोबल साउथ के प्रति हमारी प्रतिबद्धता भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में संक्षेप में कहें तो भारत के लिए पड़ोस प्राथमिकता है और पड़ोस में मालदीव प्राथमिकता है। हम इतिहास और रिश्तेदारी के सबसे करीबी बंधन भी साझा करते हैं। मित्रता के दौर में वापसी हालांकि, हाल के महीनों में स्थिति में बदलाव आया है। राष्ट्रपति मुइज्जू के नेतृत्व में मालदीव ने भारत के साथ संबंधों को फिर से सुधारने का प्रयास किया है। उनका यह निर्णय आर्थिक संकट, भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और चीन से अपेक्षित समर्थन की कमी के कारण आया है। हाल ही में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मालदीव की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान यह घोषणा की कि भारत और मालदीव ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत मालदीव में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) लागू किया जाएगा। जयशंकर ने कहा, ‘यह डिजिटल इनोवेशन मालदीव में लाने की दिशा में पहला कदम है। इससे पर्यटन में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।’ मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जामीर ने भी भारत को अपना करीबी मित्र और विकास साझीदार बताया, जो आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित है। उन्होंने मालदीव दौरे में कहा, ‘जैसा कि आप सभी जानते हैं, भारत ने अपने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से वास्तव में डिजिटल लेनदेन में क्रांति ला दी है। भारत में इसने वित्तीय समावेशन को नए स्तरों पर पहुंचाया है। आज दुनिया के 40 प्रतिशत रियल टाइम डिजिटल पेमेंट हमारे देश में होते हैं। हम अपने जीवन में हर दिन इस क्रांति को देखते हैं। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि आज समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके हमने मालदीव में इस डिजिटल इनोवेशन को लाने की दिशा में पहला कदम उठाया है। मैं दोनों पक्षों के हितधारकों को शुभकामनाएं देता हूं और आशा करता हूं कि हम जल्द ही यहां पहला UPI लेनदेन देखेंगे। इसका पर्यटन पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।’ सहयोग की नई संभावनाएं भारत और मालदीव के बीच संबंधों में सुधार के लिए कई कारण सामने आए हैं। सबसे पहले, आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। मालदीव ने भारत से वित्तीय सहायता की मांग की है, जिसमें करेंसी स्वैप की सुविधा भी शामिल है। भारत ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए 750 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप की सुविधा की पेशकश की है। इसके अलावा, मालदीव और भारत के बीच व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाएं भी हैं। जामीर ने कहा कि ऐसे समझौते व्यापार उदारीकरण को सरल बनाएंगे और दोनों देशों के बीच व्यापारिक जोखिम को कम करेंगे। मालदीव दौरे पर जयशंकर ने कहा था, ‘मालदीव हमारी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी की आधारशिलाओं में से एक है, यह हमारे विजन सागर में से एक है, साथ ही ग्लोबल साउथ के प्रति हमारी प्रतिबद्धता भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में संक्षेप में कहें तो भारत के लिए पड़ोस प्राथमिकता है और पड़ोस में मालदीव प्राथमिकता है। हम इतिहास और रिश्तेदारी के सबसे करीबी बंधन भी साझा करते हैं।’ राजनीतिक … Read more

CM नायडू ने देश के जनसांख्यिकीय लाभ को बनाए रखने के लिए युवा आबादी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया

अमरावती आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बढ़ती उम्रदराज आबादी के बारे में चिंता जाहिर की है. इसे लेकर बढ़ती चिंताओं का हवाला देते हुए उन्होंने दक्षिणी राज्यों के परिवारों से अधिक बच्चे पैदा करने का आग्रह किया. नायडू ने देश के जनसांख्यिकीय लाभ को बनाए रखने के लिए क्षेत्र में युवा आबादी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया. अपने संबोधन के दौरान, मुख्यमंत्री ने बड़े परिवारों को प्रोत्साहित करने वाले कानून को पेश करने की योजना का खुलासा किया. नायडू ने घोषणा की, “सरकार केवल दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए पात्र बनाने के लिए कानून लाने की योजना बना रही है.” बढ़ती उम्रदराज आबादी पर जाहिर की चिंता इस कदम का उद्देश्य परिवारों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना और आने वाले वर्षों में एक युवा, अधिक जीवंत आबादी सुनिश्चित करना है. नायडू ने आंध्र प्रदेश सहित दक्षिण भारत में बढ़ती उम्रदराज आबादी के उभरते मुद्दे पर प्रकाश डाला.  उन्होंने कहा, “हालांकि हमारे पास 2047 तक जनसांख्यिकीय लाभ है, लेकिन दक्षिण भारत में उम्र बढ़ने की समस्या के संकेत दिखाई देने लगे हैं. जापान, चीन और कुछ यूरोपीय देशों जैसे कई देश इस मुद्दे से जूझ रहे हैं, जहां आबादी का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्ग है.” उन्होंने कहा कि बेहतर अवसरों की तलाश में युवा लोगों के देश के दूसरे हिस्सों या विदेश में पलायन के कारण दक्षिणी राज्यों में यह चुनौती और भी बदतर हो गई है. ट्रेंड जारी रहा तो दिक्कतें बढ़ेंगी- नायडू CM नायडू ने कहा, “आंध्र प्रदेश और देश भर के कई गांवों में केवल बुजुर्ग लोग ही बचे हैं. युवा पीढ़ी शहरों में चली गई है.” नायडू ने आगे कहा कि दक्षिणी राज्यों में प्रजनन दर पहले ही 1.6 तक गिर गई है, जो राष्ट्रीय औसत 2.1 से काफी कम है. उन्होंने चेताते हुए कहा, “अगर प्रजनन दर में गिरावट जारी रही, तो हम 2047 तक गंभीर वृद्धावस्था समस्या का सामना करेंगे, जो वांछनीय नहीं है.”

देश में सड़क हादसों में हर साल मरने वालों में 60% लोग 18-34 वर्ष की आयु वर्ग के होते हैं

नई दिल्ली भारत में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा चिंताजनक है। 2023 में देश में 1,73,000 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा बैठे। इनमें से लगभग 55% मौतें केवल छह बड़े राज्यों – उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई हैं। राजस्थान में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा इजाफा देखा गया है, जहां 2022 की तुलना में 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 6% की वृद्धि हुई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस बढ़ते हुए आंकड़े पर चिंता व्यक्त करते हुए शनिवार को अधिकारियों और इंजीनियरों से सड़क दुर्घटनाओं की जांच करने और सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया। सड़क हादसों में बुझ गए हजारों घरों के चिराग आंकड़ों से पता चलता है कि 2023 में इन छह राज्यों में 95,246 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई, जबकि 2022 में यह संख्या 91,936 थी। हालांकि सड़क परिवहन मंत्रालय और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा अभी तक सड़क दुर्घटनाओं और मौतों पर रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की गई है, लेकिन यह ट्रेंड बताता है कि भारत द्वारा अगले छह वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को आधा करने की कोशिश के बावजूद यह समस्या कितनी गंभीर होती जा रही है। पिछले साल देश में कहां हुए सबसे अधिक सड़क हादसे दिल्ली में संयुक्त आयुक्त (यातायात) रह चुके पूर्व आईपीएस अधिकारी सत्येंद्र गर्ग ने बताया कि दुर्घटनाओं की उचित जांच और हस्तक्षेप से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। दिल्ली के यातायात मुद्दों से निपटने के दौरान मुझे इसका एहसास हुआ था। ज़्यादातर दुर्घटनाओं और मौतों को रोका जा सकता है। हादसों की जांच जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अधिकारियों को इस मानसिकता से बाहर निकलने की जरूरत है कि बड़े राज्यों में सड़कें और वाहन ज्यादा होने के कारण सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या भी ज्यादा होगी। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ और ड्राइविंग मैनुअल के लेखक नरेश राघवन का कहना है कि कानूनों को लागू करने के साथ-साथ ड्राइवरों को शिक्षित करने पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। वह कहते हैं कि याद रखें कि केवल पांच या छह नियमों को ही पुलिस यातायात नियमों को लागू कर सकती है। शेष 45 बुनियादी सड़क नियम लोगों/ड्राइवरों को सिखाने होंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को सड़क और पुल निर्माण में उभरते रुझानों और तकनीकों पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले साल सड़क दुर्घटनाओं में हमने 1.73 लाख लोगों की जान गंवाई है और याद रखें कि हर साल मरने वाले लगभग 60% लोग 18-34 वर्ष की आयु वर्ग के होते हैं। सड़क दुर्घटनाओं की सामाजिक-आर्थिक लागत हमारे सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 3% है। कृपया इसे गंभीरता से लें। सड़क सुरक्षा के मुद्दों को संवेदनशीलता से निपटें, दुर्घटनाओं की जांच करें, खतरनाक जगहों को ठीक करें और मुद्दों का समाधान करें। हमने युद्धों में भी इतने लोगों को कभी नहीं खोया।

आज से 25 तक एग्री कानीर्वाल 2024, मुख्यमंत्री साय करेंगे शुभारंभ

रायपुर  इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा 22 से 25 अक्टूबर, 2024 तक चार दिवसीय एग्री कानीर्वाल झ्र 2024 राष्ट्रीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय 23 अक्टूबर को अपरान्ह 03 बजे एग्री कानीर्वाल 2024 राष्ट्रीय किसान मेला सह कृषि प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। समारोह की अध्यक्षता प्रदेश के कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रामविचार नेताम करेंगे। इस अवसर पर सांसद रायपुर श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक धरसींवा श्री अनुज शर्मा, विधायक रायपुर ग्रामीण श्री मोती लाल साहू एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस चार दिवसीय एग्री कानीर्वाल झ्र 2024 राष्ट्रीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी में राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के प्रतिनिधि, कृषि मशिनरी एवं कृषि उत्पाद निमार्ता कम्पनियां, स्टार्टअप्स उद्यमी, कृषक उत्पादक संगठन, महिला स्व-सहायता समूह, विभिन्न कृषि अनुसंधान संस्थान, छत्तीसगढ़ शासन के कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में प्रगतिशील कृषक शामिल होंगे। राष्ट्रीय किसान मेला के दौरान प्रत्येक दिन कृषकों, छात्रों एवं आम नागरिकों को विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र में उगाई जा रही फसलों एवं कृषि प्रदर्शनी का भ्रमण करवाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि चार दिवसीय राष्ट्रीय किसान मेला के दौरान विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिनमें प्रथम दिवस 22 अक्टूबर को रोजगार मेला का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 2000 से अधिक विद्यार्थि शामिल होंगे। इस अवसर पर 20 से अधिक निजी कम्पनियों द्वारा चयनित विद्यार्थियों को रोजगार प्रदान किया जाएगा एवं रोजगार प्राप्त करने की दिशा में कम्पनियों के प्रतिनिधियों द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। प्रथम दिवस उद्योग-शिक्षण संस्थाओं का सम्मेलन एवं अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा मेला का भी आयोजन किया जाएगा जिसमें विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों को विदेश में शिक्षा प्राप्त करे की दिशा में मार्गदर्शित किया जाएगा। इस अवसर पर स्व-रोजगार एवं स्टार्टअप पर आधारित कार्यशाला का भी आयोजन किया जाएगा जिसमें इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को स्टार्टअप विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण, मार्गदर्शन एवं स्टार्टअप स्थापित करने हेतु मिलने वाली अनुदान के बारे में स्तार से जानकारी प्रदान की जाएगी। द्वितीय दिवस 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ से कृषि उत्पादों के निर्यात पर संगोष्ठी, आधुनिक पादप प्रजनन तकनीक एवं डाटा एनालिसिस पर कार्यशाला एवं प्रशिक्षण तथा जैव विविधता पर प्रदर्शनी एवं कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। 24 अक्टूबर 2024 को क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर एवं प्राकृतिक खेती पर संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। अन्तिम दिवस 25 अक्टूबर 2024 को जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एण्ड डाटा एनालिसिस इन एग्रीकल्चर विषय पर पर संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।

देश के कई CRPF स्कूलों को बम से उड़ानों की धमकी, मैनेजमेंट को भेजा ई-मेल

Bomb threats to many CRPF schools in the country, e-mail sent to management देशभर के कई सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इन स्कूलों में दो दिल्ली और एक हैदराबाद में है। सूत्रों के मुताबिक यह धमकी ई-मेल के जरिए दी गई है। देशभर के कई सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इन स्कूलों में दो दिल्ली और एक हैदराबाद में है। सूत्रों के मुताबिक यह धमकी ई-मेल के जरिए दी गई है। यह ई-मेल स्कूल मैनेजमेंट्स को सोमवार देर रात भेजे गए थे। यह धमकी रोहिणी के प्रशांत विहार में हुए जोरदार धमाके के ठीक अगले ही दिन आई है। इस धमाके में सीआरपीएफ स्कूल की दीवार उड़ गई थी। हालांकि इस धमाके में कोई घायल नहीं हुआ। लेकिन पास की दुकान का एक साइनबोर्ड और वहां पर खड़े वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा है। दिल्ली पुलिस इस मामले में खालिस्तानी लिंक की जांच कर रहा है। सोमवार को दिल्ली पुलिस ने इस मामले में टेलीग्राम ऐप को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में टेलीग्राम से उस चैनल के बारे में जानकारी मांगी गई है, जिस पर बम की धमकी दी गई थी। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को बम की झूठी धमकी मिली है। इन धमकियों में 100 से ज्यादा विमानों को धमकी दी गई है।

मदरसों को राहत: सुप्रीम कोर्ट ने फंडिंग बंद करने और ट्रांसफर आदेश पर लगाई रोक

Relief to Madrassas: Supreme Court bans stop funding and transfer order नई दिल्ली ! सुप्रीम कोर्ट का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की उन सिफारिशों पर रोक लगा दी, जिनमें शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 (RTE Act 2009) का पालन न करने वाले मदरसों की मान्यता रद्द करने, उनकी सरकारी फंडिंग रोकने और सभी मदरसों का निरीक्षण करने की बात कही गई थी। इसके साथ ही, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गैर-मान्यता प्राप्त और सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले गैर-मुस्लिम विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित करने के आदेश पर भी रोक लगा दी है। NCPCR की सिफारिश क्या थी?NCPCR ने सिफारिश की थी कि जो मदरसे शिक्षा के अधिकार अधिनियम का पालन नहीं करते, उनकी सरकारी मदद बंद कर दी जानी चाहिए। आयोग ने सभी मदरसों का निरीक्षण करने की भी सिफारिश की थी, ताकि यह देखा जा सके कि वे शिक्षा के मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। सुप्रीम कोर्ट में इस सिफारिश के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने याचिका दायर की थी, जिस पर चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाने की अनुमति भी दी है, ताकि व्यापक रूप से सभी मदरसों की स्थिति पर विचार हो सके। पूरा मामला क्या है?एनसीपीसीआर ने उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा सरकार को पत्र लिखकर सभी मदरसों का निरीक्षण करने और उनकी जांच करने का निर्देश दिया था। यूपी के मुख्य सचिव ने इस पत्र के जवाब में सभी जिलाधिकारियों को मदरसों की विस्तृत जांच का आदेश दिया था। इसी तरह त्रिपुरा सरकार ने भी अगस्त में मदरसों की जांच के निर्देश दिए थे। उत्तर प्रदेश सरकार को दूसरा झटका:यह उत्तर प्रदेश सरकार को मदरसों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से मिला दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने मदरसा अधिनियम, 2004 को रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई थी। उस मामले की याचिका अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से स्पष्ट है कि मदरसों की फंडिंग फिलहाल जारी रहेगी और गैर-मुस्लिम विद्यार्थियों को जबरन सरकारी स्कूलों में ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई तक, मदरसे अपनी वर्तमान स्थिति में कार्यरत रहेंगे।

ओवरब्रिज निर्माण में तेजी, बैरागढ़ की दुकानें सर्विस रोड बनने के साथ हटने की तैयारी में

Acceleration in overbridge construction, Bairagarh shops preparing to move out with construction of service road आरओबी की डिजाइन में बदलाव के बाद लोगों के लिए संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पहुंचने में भी सुविधा होगी। इसका एक हिस्सा स्टेशन पहुंचकर समाप्त होगा। इससे स्टेशन के दूसरे छोर से बैरागढ़ तरफ आने वालों को आसानी होगी। भोपाल। संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के रेलवे फाटक क्रमांक 115 को फाटक मुक्त करने के लिए लोक निर्माण विभाग यहां ओवरब्रिज का निर्माण करा रहा है। फाटक के पास के कुछ हिस्से का काम रेल प्रशासन कर रहा है। रेलवे ने अपने हिस्से का काम तेज कर दिया है। मार्च 2025 तक यहां से आवाजाही शुरू हो सकती है। यहां पर यह बता दें कि आरओबी की डिजाइन में बदलाव के बाद लोगों के लिए संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन पहुंचने में भी सुविधा होगी। इसका एक हिस्सा स्टेशन पहुंचकर समाप्त होगा। इससे स्टेशन के दूसरे छोर से बैरागढ़ तरफ आने वालों को आसानी होगी। थर्ड लेग के लिए अतिरिक्त आठ करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। क्षेत्रीय विधायक रामेश्वर शर्मा की पहल पर हो रहे इस काम को रेल प्रशासन ने भी स्वीकृति दे दी है। अब नई डिजाइन के अनुसार ही काम किया जा रहा है।स्टेशन से जोड़ने की इसलिए पड़ी जरूरतभविष्य में संत हिरदाराम नगर स्टेशन का विस्तार होगा। ट्रेनों के स्टॉपेज बढ़ेंगे। ऐसे में आरओबी को स्टेशन से जोड़ने की जरूरत महसूस की जा रही थी। रेल प्रशासन ने फरवरी 2025 तक अपने हिस्से का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। फरवरी माह में ही थर्ड लेग का काम पूरा होगा।सर्विस रोड बना तो होगी तोड़फोड़ओवरब्रिज का कुछ हिस्सा दुकानों तक पहुंच रहा है। ब्रिज के नीचे दोनों तरफ सर्विस रोड बनाने का प्रस्ताव है। रोड बना तो कई दुकानों का बड़ा हिस्सा टूट सकता है। पिछले दो साल से काम चल रहा है। इस कारण यहां का बाजार सुनसान हो चुका है। कारोबार पूरी तरह ठप है। व्यापारी कारोबार को लेकर चिंतित हैं। व्यवसायी राजकुमार आसूदानी, गुरमीतसिंह आदि ने लोक निर्माण विभाग से व्यापारियों को दूसरे स्थान पर जगह आवंटित करने की गुहार की है।

स्वच्छता के बाद जल संरक्षण में भी इंदौर अव्वल… राष्ट्रपति ने दिल्ली में चौथी बार किया सम्मानित

After cleanliness, Indore also tops in water conservation… President honored for the fourth time in Delhi इंदौर (water conservation in Indore)। मध्य प्रदेश के इंदौर को एक और राष्ट्रीय उपलब्धि प्राप्त हुई है। फिफ्थ नेशनल वाटर अवॉर्ड में इंदौर जिला वेस्टर्न जोन में बेस्ट डिस्ट्रिक्ट कैटेगरी में प्रथम स्थान पर रहा है। मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जिला कलेक्टर आशीष सिंह, नगर निगम आयुक्त शिवम वर्मा और जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन को यह पुरस्कार प्रदान किया। गौरतलब है कि इंदौर को वर्ष 2018 व 2022 में पश्चिम जोन में प्रथम स्थान का पुरस्कार मिला था। वहीं वर्ष 2023 में बेस्ट नगरीय निकाय श्रेणी में इंदौर को दूसरा स्थान मिला था। चौथा अवार्ड लेते ही पांचवें की तैयारी में जुटा इंदौरचौथी बार वाटर अवार्ड लेने के साथ ही इंदौर ने पांचवीं बार भी पुरस्कार लेने की तैयारी कर ली। जिला पंचायत के सीईओ सिद्धार्थ जैन के मुताबिक अब जिले की सभी नदियों, तालाब व कुओं की जीआईएस मैपिंग की जाएगी।इसके माध्यम से जलाशयों की सतत निगरानी कर जल संरक्षण किया जाएगा। शहरी क्षेत्र में भूजल पुनर्भरण की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। अभी शहरी क्षेत्र में जहां एक लाख घरों में जल पुनर्भरण इकाइयां लगाई गईं, अगले एक वर्ष में दो से तीन लाख घरों में यह इकाइयां लगाई जाएंगी।इसके अलावा जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाया जाएगा। कान्ह व सरस्वती नदियों के कैचमेंट एरिया को बढ़ाने के साथ इन नदियों के पानी को किसी नए तालाब में ले जाकर सहेजने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

जबलपुर में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बड़ा ब्लास्ट, इमारत धराशायी, कई कर्मचारी गंभीर जख्मी

Big blast in ordinance factory in Jabalpur, building collapsed, many employees seriously injured जितेंद्र श्रीवास्तवJabalpur Ordinance Factory Blast: मध्य प्रदेश के जबलपुर में आर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया जबरदस्त धमाका हुआ. इस बड़े हादसे में 12 कर्मचारी हुए गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. वहीं, एक लापता और और तीन कर्मचारी बेहद गंभीर बताए जा रहा हैं. धमाका इतना बड़ा था कि पूरी बिल्डिंग धराशायी हो गई. मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका भी है. जबलपुर की फैक्ट्री में यह ब्लास्ट तब हुआ, जब बम में फिलिंग का काम चल रहा था. फिलहाल, फैक्ट्री प्रबंधन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है और घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जा रहा है. वहीं, मलबे में दबे लोगों को भी निकालने में टीम जुटी हुई है.

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