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हिन्दू पक्ष की याचिका पर जामा मस्जिद को लेकर संभल ज़िला कोर्ट का सर्वे का आदेश

संभल. एक स्थानीय अदालत ने शहर में स्थित शाही जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया है. वकील विष्णु शंकर जैन की याचिका पर कोर्ट ने सर्वेक्षण के लिए निर्देश दिया. याचिकाकर्ता ने खुद ‘एक्स’ पर मंगलवार को इस बात की जानकारी दी. इस कथित मस्जिद को हरि हर मंदिर के नाम से भी जाना जाता था. विष्णु शंकर जैन ने लिखा, “आज सिविल कोर्ट संभल ने मेरी याचिका पर संभल में कथित जामी मस्जिद, जिसे हरि हर मंदिर के नाम से जाना जाता था, में एडवोकेट कमिश्नर द्वारा सर्वेक्षण का निर्देश दिया है. 1529 में बाबर ने इस स्थान को आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया. ऐसा माना जाता है कि कल्कि अवतार संभल में होगा.” कौन हैं विष्णु शंकर जैन विष्णु शंकर जैन वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन के पुत्र हैं. यह पिता-पुत्र की जोड़ी श्रीकृष्ण जन्मभूमि, ज्ञानवापी शृंगार गौरी समेत 110 मामलों की पैरवी कर रही है. विष्णु शंकर जैन अपने पिता की तरह ही वकालत कर रहे हैं. आपको बता दें कि विष्णु शंकर जैन ने 2010 में बालाजी लॉ कॉलेज से डिग्री हासिल की थी. इसके साथ ही इन्होंने अपने वकालत करियर की शुरूआत विश्व प्रसिद्ध श्रीराम जन्मभूमि केस से की थी. इस केस के अलावा पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने 2021 में ज्ञानवापी मस्जिद, श्री कृष्ण जन्मभूमि, ताजमहल के पूर्व शिवमंदिर होने का दावा, वर्शिप एक्ट और वक्फ एक्ट 1995 को भी चुनौती देते हुए कोर्ट में वाद दायर किए हुए हैं. जामा मस्जिद का क्या है इतिहास संभल शहर के मध्य में स्थित जामा मस्जिद मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है. इसका निर्माण मुगल काल के दौरान हुआ था. हालांकि, इसके निर्माण के ठीक समय और अन्य विवरणों के बारे में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है. लेकिन यह माना जाता है कि इसका निर्माण पूरे उत्तर भारत पर मुगल साम्राज्य के शासन के दौरान 16वीं शताब्दी के आस-पास हुआ होगा.

गोब्लू विश्व बाल दिवस की थीम है, जो बाल अधिकारों के लिए खड़ा है

भोपाल बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ ने बाल अधिकारों के मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए अपनी “गो ब्ल्यू” थीम के तहत ऐतिहासिक इमारतों को नीले रंग में रंगने के लिए मध्यप्रदेश पर्यटन (एमपीटी) विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के साथ साझेदारी की है. दरअसल, 20 नवंबर को विश्व बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है. यूनिसेफ, नागरिक संस्था संगठन इस दिन और सप्ताह को बाल अधिकार सप्ताह के रूप में मनाते हैं. गो ब्ल्यू इस साल के विश्व बाल दिवस की थीम में से एक है, जिसक अर्थ बाल अधिकारों के लिए खड़ा होना है’ भोपाल में जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी का पिरामिड नीला किया गया यूनिसेफ मध्यप्रदेश के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने बताया कि, शुरुआत में, 17 नवंबर को भोपाल में जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी का पिरामिड नीला किया गया, जबकि सोमवार की रात को मप्र के धार जिले के मांडू में जहाज महल या शिप पैलेस को नीले रंग से रौशन किया गया. साझेदारी के लिए एएसआई और एमपीटी के प्रति आभार भी व्यक्त किया उन्होंने बाल अधिकारों के वास्ते साझेदारी के लिए एएसआई और एमपीटी के प्रति आभार भी व्यक्त किया. इसके अलावा यूनिसेफ राज्य सरकार के साथ साझेदारी में बच्चों द्वारा ली गई थीम पर चित्र प्रदर्शित करके जलवायु परिवर्तन पर बच्चों की अभिव्यक्ति को एक मंच प्रदान करने का काम भी कर रहा है. यूनिसेफ के एक अधिकारी ने बताया कि कहा कि इस दिन को मनाने के लिए राज्य पर्यटन विभाग की सभी संपत्तियां और एएसआई की विरासत संपत्तियों, जैसे धार जिले के मांडू में जहाज महल और अन्य संपत्तियां नीली रोशनी से रौशन किया गया। हर बच्चा सुरक्षित और समर्थित हो और अपने दिन में नीले रंग को शामिल करे विश्व बाल दिवस के लिए यूनिसेफ का “गो ब्ल्यू” अभियान लोगों को कुछ नीला पहनकर, ऑनलाइन अपनी प्रोफ़ाइल तस्वीर बदलकर, एक ऐसी दुनिया की मांग करने के लिए याचिका पर हस्ताक्षर करके बच्चों के अधिकारों के लिए समर्थन दिखाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जहां हर बच्चा सुरक्षित और समर्थित हो और अपने दिन में नीले रंग को शामिल करे. बाल दिवस पर भारत में राष्ट्रपति भवन भी नीले रंग की रोशनी से जगमगाता है उल्लेखनीय है विश्व बाल दिवस पर, दुनिया भर के स्कूल और ऐतिहासिक इमारतें नीले रंग की रोशनी से जगमगाती हैं. यूनिसेफ की वेबसाइट के अनुसार, अतीत में नीले रंग से रोशन की गई कुछ ऐतिहासिक इमारतों में एथेंस (ग्रीस) का एक्रोपोलिस, एम्पायर स्टेट बिल्डिंग (न्यूयॉर्क), अल नूर मस्जिद (न्यूजीलैंड), बेल्जियम में यूरोपीय संसद, चीन में शंघाई टॉवर, इथियोपिया में हाउस ऑफ पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव्स, भारत में राष्ट्रपति भवन, जॉर्डन में पेट्रा और मैक्सिको में फ्रिदा काहलो हाउस शामिल हैं.

थाना टीलाजमालपुरा पुलिस ने चंद घंटों में किया नकबजनी का पर्दा-फाश

Police station Tilajamalpura exposed Nakbajani in a few hours भोपाल ! पुलिस आयुक्त महोदय नगरीय पुलिस भोपाल श्रीमान हरिनारायण चारी (भा.पु.से.), अतिरिक्त पुलिस आयुक्त(का.व्य.) महोदय नगरीय पुलिस जिला भोपाल श्रीमान अवधेश कुमार गोस्वामी (भा.पु.से.) , पुलिस उपायुक्त महोदय जोन 03 भोपाल श्रीमान रियाज इकबाल(भा.पु.से.), अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त महोदय जोन 03 भोपाल श्रीमति शालिनी दीक्षित (रा.पु.से.), सहायक पुलिस आयुक्त महोदय शाह.बाद संभाग भोपाल श्रीमान निहित उपाध्याय (रा.पु.से.) के मार्गदर्शन मे अपराधो की रोकथाम एवं चोरी/नकबजनी/वाहन चोरो की धडपकड का अभियान चलाया जा रहा है ।घटना का विवरण :- दिनांक 18/11/24 को फरियादिया श्रीमती लता सिरमोरिया पति मनोज सिरमोरिया उम 36 साल निवासी म.न. 365 गली न. 04 कबीटपुरा थाना टीलाजमालपुरा भोपाल ने थाना उपस्थित आकर रिपोर्ट किया कि वह दिनाँक 17/11/2024 के रात्री नौ बजे मैं अपने पति के साथ घर के दरवाजे मे ताला लगाकर अपने अपने पति के साथ रिश्तेदार के यहाँ शादी में छोला भोपाल गऐ थे दिनांक 18/11/2024 को सुबह 06/00 बजे घर आए तो देखा की लगा हुआ दरवाजे पर ताला नही था दरवाजे खुले थे अन्दर जा कर देखा तो गोदरेज की अलमारी के लॉकर टूटा हुआ था लाकर में रखे हुए सोने चाँदी के नये व इस्तेमाली आभूषण कीमती करीबन 5,00,000/- रूपये कोई अज्ञात चोर चौरी करके ले गया है। कि रिपोर्ट पर थाना टीलाजमालपुरा में असल अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। एवं सूचना से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया जिनके मार्गदर्शन में टीम घठित कर अज्ञात चोरो की तलाश मुखविर तंत्र विकसित कर निगरानी गुण्डा बदमाशो की चैकिंग व पूछताछ की गयी। संदेहियों (1)अजहर अली पिता अनवर अली, (2)सरवर अली पिता अनवर अली को अभिरक्षा मे लेकर ‍हिकमतअमली व सख़्ती से पूछताछ करने पर संदेहियों के द्वारा उक्त चोरी नकबजनी की घटना कारित करना स्वीकार किए। आरोपीगणों से चोरी गये सोने चांदी के आभूषण व नगदी रूपये कुल कीमती 5,00,000/- रूपये बरामद किये गये।नकबजनों से बरामद नगदी व आभूषण –(01) मगलंसूत्र बडा लोकेट 06 चपटे मोती वाला (10 ग्राम करीबन)(02) मंगलसूत्र मिडियम लोकेट 06 चावल मोती 06 छोटे गोल मोती वाला। (6 ग्राम करीबन)(03) एक छोटे लोकेट वाला मंगलसूत्र 06 चावल दाने लगे है। (2 ग्राम करीबन)(04) 4 सोने के कडे (25 ग्राम करीबन)(05) सोने के एक जोड झुमकी (7 ग्राम करीबन)(06) सोने के एक जोड झुमकी (6 ग्राम करीबन)(07) सोने के एक जोड टॉप्स (4 ग्राम करीबन)(08) सोने के एक जोड टॉप्स (3 ग्राम करीबन)(09) दो लोकेट सोने के गणेश जी के छोटे बडे । (1 ग्राम करीबन)(10) नाक की चार नत्थ छोटी एक नाक की लोंग सोने की नग लगे हुए। (1 ग्राम करीबन)(11) एक मोती ढोलक सोने की परत चढी हुई । (1 ग्राम करीबन)(12) एक सोने की चेन (06 ग्राम करीबन)(13) एक सोनी हाय चंद्रमा लोकेट चार सोने की मोती छोटे । (1 ग्राम करीबन)(14) बडी पायल एक जोड (250 ग्राम करीबन)(15) मझौली पायल एक जोड (125 ग्राम करीबन)(16) छोटी पायल एक जोड (150 ग्राम करीबन)(17) एक जोड चाँदी के कढे एक जोड बडे एक जोड नग लगे (60 ग्राम करीबन)(18) एक जोड चाँदी के कढे एक जोड बडे एक जोड नग लगे (40 ग्राम करीबन)(19) चार चूडी पतली (20 ग्राम करीबन)(20) बच्चो के कडे 08 (50 ग्राम करीबन)(21) 01 हाफ करधन (250 ग्राम करीबन)(22) 01 पतला चाँदी का फुल करधन (50 ग्राम करीबन)(23) 01 जोड हाथ फुल (40 ग्राम करीबन)(24) 01 कमर गुच्छा चाँदी का (100 ग्राम करीबन)(25) 02 चाँदी की चेन (20 ग्राम करीबन)(26) 04 चाँदी की अंगुठी (10 ग्राम करीबन)(27) 11 जोड बिछिया (70 ग्राम करीबन)(28) 02 ब्रेसलेट चाँदी के बच्चो के (20 ग्राम करीबन)(29) 02 चाँदी के सिक्के (20 ग्राम करीबन)(30) 02 बच्चो के कंमर डोरा (50 ग्राम करीबन)(31) 5000/- रूपये नकदी (पांच हजार रूपये)(32) कुल कीमती 5,00,000/- रुपये (पांच लाख रूपये) का माल बरामद किया गया । गिरफ्तारशुदा आरोपी- सराहनीय भूमिका – थाना प्रभारी निरीक्षक सरिता बर्मन, उनि बी पी विश्वकर्मा, सउनि अमर सिंह, प्रआर 749 लोकेश जोशी, आर 4599 जितेन्द्र पाल, आर 1295 हरिओम, की सराहनीय भूमिका रही।

चार दिनों में सवा तीन लाख से अधिक विजिटर्स ने किया अवलोकन

भोपाल विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार थीम पर आयोजित राष्ट्रीय स्तर के विज्ञान मेले 2024 में एम.पी. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के स्टॉल को द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस उपलब्धि पर ट्रांसको के अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई दी है। महाकौशल विज्ञान परिषद द्वारा वेटरनरी कॉलेज जबलपुर में पहली बार आयोजित महाकौशल विज्ञान मेले में केन्द्र, राज्य, सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न उपक्रमों सहित शैक्षणिक संस्थाओं के 111 स्टॉल प्रदर्शित किये गये थे। इसमें से एम.पी. ट्रांसको के स्टॉल को द्वितीय स्थान के लिये चयनित किया गया। चार दिवसीय इस विज्ञान मेले में एम.पी. ट्रांसको के स्टॉल में स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थियों से लेकर आम नागरिकों ने काफी दिलचस्पी दिखाई। कुल 3 लाख 25 हजार 949 आगंतुको ने एम.पी. ट्रांसको के स्टॉल में विजिट कर जानकारी हॉसिल की। एम.पी. ट्रांसको को यह पुरूस्कार मध्यप्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क में विभिन्न नवाचार करने, ट्रांसमिशन एलीमेंटस एच.एम.आई तकनीक से नियंत्रित और ऊर्जीकृत करने के साथ ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेन्स में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के विभिन्न मॉडलो के प्रदर्शन और सरल भाषा में आगंतुको को व्याख्या करने की उत्कृष्ट प्रस्तुति के आधार पर दिया गया है। यह चयन देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, विद्वान शिक्षाविदों और नामी अभियंताओं की कमेटी द्वारा किया गया। एम.पी. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध संचालक इंजी. सुनील तिवारी ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुये सभी कार्मिकों को बधाई दी है।  

ट्रैफिक जाम सहित अन्य कारणों को समझने भोपाल में बनाई जाएगी समिति

भोपाल  शहर में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए एक बार फिर से जिला प्रशासन ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसको लेकर चार विभाग जिला प्रशासन, नगर निगम, यातायात पुलिस और परिवहन के अधिकारियों की समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति शहर के यातायात पर सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करेगी और उसी के आधार पर आगे व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। यह निर्देश कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने सोमवार को यातायात सुरक्षा समिति की बैठक के दौरान अधिकारियों को दिए हैं।उन्होंने कहा कि वह जल्द ही अगली बैठक लेंगे जिसमें समिति को प्रजेंटेशन देना होगा।बता दें नवदुनिया द्वारा लगातार शहर में अवैध पार्किंग और अव्यवस्थित यातायात को लेकर खबरें प्रकाशित की जार ही है। एक वर्ष पहले हुई थी बैठक, सड़क पर उतरे थे कलेक्टर शहर के यातायात को सुधारने को लेकर एक वर्ष पहले तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक ली थी। साथ ही वह स्वयं पिछले साल 15 जून, 10 जुलाई और 21 नवंबर को सडक़ों पर उतरे थे। इस दौरान कलेक्टर ने विभिन्न चौराहों की रोटरियों, लेफ्ट टर्न और कई ब्लाइंड स्पाट चिह्नित कर नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को सुधारने के निर्देश दिए थे, लेकिन चुनावी वर्ष होने के कारण यह काम पूरा नहीं हो सका है। अब कलेक्टर ने एक बार फिर से प्रयास शुरू किए हैं। चार जोन में विभाजित किया जाएगा शहर यातायात व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए शहर को चार जोन में विभाजित किया जाएगा। इसमें जाम का समय, जाम का कारण और जाम के दौरान दूसरे रूट पर डायवर्सन को लेकर भी अध्ययन होगा। जाम का समय : यातायात पुलिस शहर के चार जोन को कनेक्ट करने वाली प्रमुख सडक़ों पर होने वाले जाम के समय को चिह्नित करेगी। जाम के कारण : परिवहन और नगर निगम बड़ी रोटरियाें, भारी यातायात सडक़ पर बने खतरनाक टर्न, पुराने निर्माण और अवरोधों का भी अध्ययन होगा। इसके अलावा मुख्य मार्गों पर दौडऩे वाले ई रिक्शा, आटो चालकों की जानकारी जुटाएगी। अतिक्रमण : विभिन्न मार्गों पर खड़े होने वाले ठेले और अन्य अतिक्रमण जिनके कारण जाम लगता है चिह्नित किए जाएंगे और इन्हें शिफ्ट करने की योजना बनाई जाएगी। इन मार्गों पर जाम व दुर्घटनाएं अधिक करोंद चौराहा, नादरा बस स्टैंड, भारत टाकीज चौराहा, बागसेवनिया थाना चौराहा, राजीव गांधी चौराहा, 10 नंबर मार्केट, व्यापमं चौराहा, बंसल अस्पताल के सामने वाली सडक़, अन्ना नगर, प्रभात चौराहा,रंग महल से टीटी नगर थाना जाने वाली सड़क सहित अन्य क्षेत्रों में यातायात जाम और दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इनका कहना है शहर के यातायात को व्यवस्थित करने के लिए विभागों के साथ मिलकर समस्याओं को चिन्हित किया जाएगा। अगली सुरक्षा समिति की बैठक में ट्रैफिक की समस्या के समाधान पर चर्चा होगी। – संजय सिंह, डीसीपी यातायात शहर में विभिन्न स्थानों पर निर्माण कार्य भी चल रहे हैं। जहां यातायात व्यवस्था बिगड़ती है, जबकि अन्य स्थानों पर अन्य कारणों से जाम के हालात बनते हैं। इन सभी कारणों का पता लगाने समिति बनाई जाएगी। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर यातायात सुधार कार्य किए जाएंगे। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर

हाथियों के बाद इंसानों को मुसीबत बढ़ा रहा है कोदो कुटकी खाने से लोग बीमार

After elephants, people are facing problems, people are falling ill after eating Kodo Kutki. सतना। मध्य प्रदेश में एक ओर जहां कोदो खाने से 10 हाथियों की मौत हो गई, वहीं अब कोदो की रोटी खाने से एक परिवार की जान पर बन आई है। मामला सतना से सामने आया है। जहां पति-पत्नी और बेटी को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। दरअसल, सतना जिले के रैगांव चौकी क्षेत्र अंतर्गत डिलौरी गांव में पति दयाराम कुशवाहा, पत्नी शंखी कुशवाहा और 18 वर्षीय बेटी सरोज कुशवाहा की तबियत कोदो की रोटी खाने के बाद अचानक बिगड़ गई। तीनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनका इलाज किया जा रहा है। दयाराम के भतीजे ने बताया कि, आज तीनों ने घर में कोदो की रोटी खाई है। तब ही से इन्हें उल्टियां हो रही और अब बेहोशी की हालत में सतना जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बतादें कि, अभी हाल ही में बांधवगढ़ में 10 हाथियों की मौत के पीछे भी हाथियों द्वारा कोदो की फसल खाने की बात बताई गई थी। वहीं अब इस घटना पर कोदो अनाज को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। मामला जांच का विषय बन गया है। देखना होगा कि अब जिला प्रशान इस मामले को लेकर कितना संजीदा नजर आता है। हालाकि इस घटना को लेकर अबतक जिला प्रशान ने कोई सुध नहीं ली है। इतना ही नहीं गंभीर बीमार मरीज जैसे तैसे ऑटो से सतना जिला अस्पताल पहुंचे तो, न तो उन्हें स्ट्रेचर नसीब हुआ और न ही बेड। एक बेड पर मां बेटी तो जमीन में अर्ध नग्न हालत में पिता तड़पता नजर आया। हालांकि कुछ देर बाद दयाराम को बिस्तर नसीब हुआ। इस घटना ने गंभीर मरीजों को मिलने वाली बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के सरकारी सिस्टम की भी पोल खोल कर रख दी है।

मध्य प्रदेश में हथकरघा बुनाई और रंगाई कौशल की सदियों पुरानी परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही

भोपाल मध्यप्रदेश की समृद्ध हथकरघा कला प्रदेश की विविध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जो सदियों से चली आ रही परंपरा को समेटे हुए है। चमचमाते रंगों के साथ आंखों में बस जाने वाली डिजायन और खूबसूरत बुनावट वाले इन कपड़ों की पहचान दुनियाभर में है। टेक्सटाइल पर्यटन का विशेष महत्व है क्योंकि यह विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक विरासत को जीवंत रखता है। यह अनुभव आधारित पर्यटन का एक अद्वितीय पहलु है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा परंपरा में निहित और नवाचार से प्रेरित बुनकरों एवं शिल्पकारों की कला को संरक्षित करते हुए विभिन्न स्तर पर पहल की जा रही है। मध्य प्रदेश में हथकरघा बुनाई और रंगाई कौशल की सदियों पुरानी परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। चंदेरी साड़ियां चंदेरी साड़ी मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी शहर से बुनकरों द्वारा निर्मित की जाती हैं। यह अपने कम वजन एवं स्पष्ट बनावट के लिए जानी जाती है, जो इसे गर्म मौसम के लिए आदर्श बनाती है। रेशम, कपास और ज़री (धातु के धागे) का उपयोग करके साड़ी को हाथ से बुना जाता है। अपनी चमक, स्पष्ट बनावट और बेहतरीन डिजाइन के लिए प्रसिद्ध यह साड़ियां पारंपरिक बुनाई तकनीकों और आधुनिक डिजाइनों का अनूठा संयोजन भी है। शादी हो, उत्सव हो या फिर कोई कारपोरेट आयोजन, चंदेरी साड़ी हर महिला की पसंद रहती है। म.प्र. टूरिज्म विभाग द्वारा बुनकरों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वस्त्र मंत्रालय की मदद से चंदेरी के पास प्राणपुर गांव में देश का पहला ‘क्रॉफ्ट हैंडलूम टूरिज्म विलेज’ भी विकसित किया है। महेश्वरी साड़ियां नर्मदा नदी के तट पर स्थित, महेश्वर हथकरघा बुनाई का सदियों पुराना केंद्र है, जो अपनी खूबसूरत महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। इन साड़ियों की विशेषता जीवंत रंगों, सोने की ज़री और अद्वितीय पिटलूम बुनाई तकनीक है। परंपरागत रूप से कपास से बनी साड़ियां एवं कुर्ते सादे, धारीदार और यहां तक ​​कि चेकर पैटर्न सहित विभिन्न प्रकार के डिज़ाइन में उपलब्ध होते हैं। महेश्वर भ्रमण के दौरान आप यहां महेश्वरी साड़ियां बनती हुई देख सकते हैं। महेश्वर में सीधे बुनकरों से ही साड़ियां खरीद भी सकते हैं। बाग प्रिंट ऐतिहासिक शहर मांडू के पास बाग नाम का छोटा सा कस्बा बाग प्रिंट की 1000 साल पुरानी परंपरा को समेटे हुए है, जो प्राकृतिक डाई ब्लॉक प्रिंटिंग का एक अनूठा रूप है। यह बाग प्रिंट सूती, रेशमी, टसर, कॉटन-सिल्क, जूट और क्रेप के साथ दूसरे अन्य कपड़ों पर किया जा सकता है। बाग प्रिंट के कपड़ों के साड़ी, सूट, चादर के साथ-साथ नए पैटर्न के डिजाइर और मार्डन ड्रेसेस भी बनाई जाती हैं। आज बाग प्रिंट को दुनियाभर में पहचाना जाना है। भैरवगढ़ बटिक बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के निकट भैरवगढ़ बटिक प्रिंट का केन्द्र है, जिसको जीआई टैग मिला है। सदियों पुरानी मोम प्रतिरोधी रंगाई और छपाई शिल्प मिस्र, जापान और भारत में 2000 वर्षों से अधिक समय से प्रचलित है। आकर्षक प्रिंट्स बढ़ा देते हैं शोभा मध्यप्रदेश में प्रिंट लोक कला की एक समृद्ध परंपरा है। विभिन्न क्षेत्रों के चित्रों में अनूठी विशेषताएं हैं। नीमच और उमेदपुरा के तारापुर गांव में निर्मित नंदना प्रिंट एक रंगीन ब्लॉक प्रिंट है। यह आरामदायक पोशाख भील और बाग भिलाला जनजातियों की पारंपरिक पोशाख है। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रदेश के टेक्साइल पर्यटन की क्षमता को दुनिया के सामने प्रचारित करने के लिये विभिन्न स्तरों पर प्रयास किया जा रहा है। जब भी आप प्रदेश के रमणीय पर्यटन स्थलों पर भ्रमण पर आए, तो अपने साथ सोवेनियर के रूप में यह टेक्सटाइल उत्पाद जरूर साथ ले जाएं।  

अब रतलाम-चंदेरिया, नागदा-भोपाल सेक्शन में कवच लगने से नीमच, मंदसौर, उज्जैन, भोपाल तक ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी

रतलाम  ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के साथ ही सुरक्षा को लेकर रेलवे संसाधन मजबूत कर रहा है। दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग के साथ ही रतलाम रेल मंडल में रतलाम से चंदेरिया और नागदा से भोपाल तक का सेक्शन भी कवच युक्त होगा। इसके लिए रेल मंडल से टेंडर जारी हो गए हैं। काम पूरा करने के लिए दो साल की समय सीमा रखी गई है। इससे नीमच, मंदसौर के साथ ही उज्जैन, भोपाल तक ट्रेनों की स्पीड बढ़ाई जा सकेगी। रतलाम-चंदेरिया और नागदा-भोपाल सेक्शन पर कवच संस्करण 4.0 का प्रावधान किया जाएगा। इसमें 120.72 करोड़ रुपये की लागत आएगी। रतलाम रेल मंडल के 427.83 किलोमीटर के पूर्ण ब्लाक सेक्शन में यह प्रणाली लगाई जाएगी। चार दिसंबर तक टेंडर भरे जा सकेंगे। मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग के 789 किमी में से 503 में ट्रायल पूरा     इधर मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग पर ट्रेनों की स्पीड 160 किमी प्रति घंटा करने के लिए मिशन रफ्तार में ब्रिजों के मरम्मत, ओएचई का रख-रखाव, सिगनलिंग सिस्टम में सुधार, कर्व का री-अलाइनमेंट, एचबीम स्लीपर लगाए गए हैं।     वर्तमान में वडोदरा-अहमदाबाद खंड सहित मुंबई सेंट्रल-नागदा खंड पर 90 लोको के साथ 789 किलोमीटर पर कवच का काम चल रहा है। इसमें से 503 किलोमीटर तक लोको परीक्षण हो चुका है।     90 में से 73 लोकोमोटिव पहले ही कवच प्रणाली से लैस किया जा चुका है। वडोदरा-रतलाम-नागदा सेक्शन के 303 किलोमीटर में 173 पर लोको ट्रायल पूरा हो चुका है। मार्च 2025 तक काम पूरा होने की संभावना है। क्या है कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा तकनीक ‘कवच’ ट्रेन सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बढ़ाती है। इसमें इंजन पर लगे सेंसर, जीपीएस सिस्टम से एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के आमने-सामने आने पर स्वचालित ब्रेक लग जाते हैं। आरडीएसओ द्वारा विकसित कवच को ट्रेन टकरावों को रोकने, खतरे में सिगनल पासिंग से बचने में लोको पायलटों को सहायता मिलती है। इससे 200 किमी प्रति घंटे तक की गति को समायोजित किया जा सकता है। ट्रेनें तय गति सीमा के भीतर चले और इसकी रियल टाइम निगरानी भी होगी। यह काम भी किए ट्रैक पर पशु आदि न आए, इसके लिए नागदा-गोधरा खंड में लगभग 56 करोड़ की लागत से रेलवे ट्रैक के दोनों ओर कुल 160 किलोमीटर बाउंड्रीवाल का निर्माण होना है। करीब 100 किमी की बाउंड्रीवाल बनाई जा चुकी है।

चीन ने HLACM 4 हजार किलोमीटर तक 6100 km/hr की तेज गति से हमला करने वाली मिसाइल

बीजिंग 17 नवंबर 2024 को सिर्फ भारत ने ही हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण नहीं किया. बल्कि चीन ने अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल DF-100 यानी डॉन्गफेंग-100 का भी रेंज बढ़ा लिया. यह मिसाइल कहने को तो सुपरसोनिक है, लेकिन चीन चाहे तो इसे हाइपरसोनिक लैंड अटैक क्रूज मिसाइल – HLACM बना सकती है. HLACM यानी 4 हजार किलोमीटर तक 6100 km/hr की तेज गति से हमला करने वाली मिसाइल. इसकी सटीकता ही इसे सबसे ज्यादा घातक बनाती है. इसकी एक्यूरेसी 1 मीटर है. यानी टारगेट से सिर्फ एक मीटर ही इधर-उधर होगी. इससे ज्यादा नहीं. इसकी लॉन्चिंग के लिए चीन अपने H-6K बॉम्बर का इस्तेमाल भी करता है. पहले चीन के इस मिसाइल की रेंज 2 से 3 हजार किलोमीटर थी. जिसे अभी चीन ने बढ़ाकर 4 हजार कर दिया है. इसे लॉन्च करने के लिए 10×10 ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन बमवर्षक से भी लॉन्च की जा सकती है. अब यह मिसाइल 4700 km/hr की स्पीड से उड़ान भरते हुए 4 हजार किलोमीटर तक जा सकती है. सबसे आधुनिक गाइडेंस सिस्टम से लैस यह मिसाइल लॉन्च होने के बाद 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाती है, उसके बाद यह टारगेट की तरफ घूम जाती है. इसके उड़ान की ऊंचाई ऐसी रखी गई है ताकि इसे एटमॉस्फियरिक दबाव कम झेलना पड़े. साथ ही राडार की पकड़ में न आए. इसके गाइडेंस सिस्टम में इनर्शियल नेविगेशन है. टरेन मैचिंग, सीन मैचिंग और सैटेलाइट पोजिशनिंग जैसी सुविधा है. यानी दुश्मन टारगेट के बचने का कोई चांस ही नहीं. सटीकता और हथियार ही बनाता है इसे खास 9 मीटर लंबी यह मिसाइल अपने साथ 0.7 से 1 मीटर व्यास और 500 किलोग्राम वजन वाले हथियार को ले जा सकती है. इस मिसाइल में रैमजेट इंजन लगा है, जो इसे 6100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार देता है. जैसे ही मिसाइल का वेपन ग्लाइड फेज में आता है ये तेज गति में भी दिशा और दशा बदल सकती है. इसकी वजह से इसे एयर डिफेंस सिस्टम इंटरसेप्ट नहीं कर पाते. यह चलते-फिरते टारगेट पर भी हमला कर सकती है. अमेरिका-जापान के सैन्य अड्डे निशाने पर पहले इसकी रेंज सिर्फ ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान, फिलिपींस जैसी जगहों तक ही थी. लेकिन रेंज बढ़ने के बाद अब यह गुआम में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस पर भी हमला कर सकती है. यानी अमेरिका और जापान के दूसरे सैन्य अड्डों को भी इस मिसाइल से खतरा है. यह मिसाइल रुके हुए और चलते हुए किसी भी जहाज पर भी हमला कर सकती है. ऐसे में पश्चिमी प्रशांत महासागर में इस मिसाइल का खतरा बना रहेगा.  

आंध्र प्रदेश में पैदा कर सकेंगे 2 से ज्यादा बच्चे, 30 साल बाद सरकार ने वापस लिया ये आदेश

 हैदराबाद आंध्र प्रदेश सरकार ने बच्चे पैदा करने को लेकर एक बड़ा फैसला किया है. सरकार ने यह नियम खत्म कर दिया है कि दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले उम्मीदवार स्थानीय निकाय चुनाव नहीं लड़ सकते हैं. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि है कि अब ज्यादा बच्चे पैदा करने की जरूरत है. सरकार ने एपी पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2024 और एपी नगरपालिका कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित करते हुए यह फैसला पास किया. 1994 में लागू हुई थी व्यवस्था ख्याल रहे कि तीस साल पहले, मई 1994 में, तत्कालीन आंध्र प्रदेश विधानसभा ने एक संशोधन विधेयक पारित किया था, जिसके तहत ग्राम पंचायतों, मंडल प्रजा परिषदों और जिला परिषदों के चुनाव लड़ने वालों के लिए 2 बच्चों का मानदंड अनिवार्य कर दिया गया था. दो से ज्यादा बच्चों वाले उम्मीदवारों को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य या अयोग्य माना जाता था. इसका मकसद जनसंख्या पर नियंत्रण रखना था. चंद्रबाबू का बयान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इस बात की वकालत कर रहे हैं कि परिवार नियोजन के पिछले सफल क्रियान्वयन के बाद अब वक्त आ गया है कि महिलाओं और परिवारों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. नायडू ने तर्क दिया है कि यह एक आर्थिक अनिवार्यता है. विधेयक में क्या है? विधेयकों के अनुसार, “चूंकि प्रजनन दर में गिरावट, जनसंख्या स्थिरीकरण और बदलती सामाजिक-आर्थिक स्थितियां पुरानी और प्रतिकूल साबित हुईं, इसलिए सरकार ने महसूस किया कि जनसंख्या को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बनाए गए प्रावधानों को निरस्त करने से समावेशी शासन को बढ़ावा मिलेगा.”

वर्षवार भर्ती कैलेंडर जारी, युवाओं को मिलेंगे शासकीय सेवा में नौकरियों के अवसर

भोपाल राज्य शासन अगले 5 वर्षों में 2 लाख 50 हजार सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराने प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के सीधी भर्ती के रिक्त पदों की पूर्ति करने के आदेश जारी कर दिए हैं। रिक्त पदों पर भर्ती के लिए हर साल सरकारी परीक्षा कैलेंडर जारी किया जायेगा। पदों की गणना करने के दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार ने संकल्प पत्र 2024 के बिन्दु “रोजगार के अवसर” में युवाओं को सरकारी नौकरियों में सेवा का अवसर देने संकल्प दोहराया है। इस संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकारी नौकरियों में भर्ती की सभी औपरिकताएं पूरी की जा रही हैं और जल्दी ही भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जायेगी। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सभी विभागों को भर्ती की प्रक्रिया संबंधी औपचाकिताएं पूरी करने के निर्देश दिये हैं, जिससे वर्षवार भर्ती की प्रक्रिया बिना रूकावट पूरी की जा सके। राज्य शासन के इस निर्णय से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा पहले जारी निर्देश एवं आदेश निष्प्रभावी होंगे। लेकिन पहले जारी आदेशों, परिपत्रों के आधार पर ऐसे रिक्त पदों पर, जिन पर विभागों द्वारा दिनांक 30 अक्टूबर, 2024 तक भर्ती की कार्यवाही कर दी गई है, वह निरस्त नहीं मानी जायेगी। इनमें सीधी भर्ती के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए कार्यवाही कर्मचारी चयन मण्डल, म.प्र. लोक सेवा आयोग/ अन्य संस्था को प्रेषित किये गये हैं। इसके अलावा नियुक्ति की जा चुकी है परंतु कार्यभार ग्रहण किया जाना शेष है या परीक्षा परिणाम के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी किया जाना शेष है। मुख्य रूप से संवर्ग में स्वीकृत पदों के आधार पर 5% पदों की ही सीधी भर्ती से पदपूर्ति करने के लिए प्रशासकीय विभाग को अधिकृत किया गया है। यह परिपत्र वर्ष 2028-29 तक के लिये स्थगित किया जाता है। राज्य शासन द्वारा प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी एवं तृतीय श्रेणी के सीधी भर्ती के रिक्त पदों की पूर्ति गणना के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया है। इसके अनुसार सर्वप्रथम प्रत्येक संवर्ग में 1 अप्रैल 2024 की स्थिति में सीधी भर्ती के रिक्त पदों की गणना की जायेगी। इनमें ऐसे पद जिनके संबंध में कार्यवाही कर्मचारी चयन मंडल/ एमपीपीएससी या अन्य संस्थाओं में प्रचलन में है, रिक्त पदों की गणना में शामिल नहीं किए जायेंगे। ऐसे 13% पद जो पिछड़ा वर्ग के लिए अंतिम परीक्षा परिणाम के बाद रोके गए हैं, इनको भी रिक्त पदों की गणना में नहीं लिया जायेगा। ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 1 से 50 तक है, की पद पूर्ति दो चरणों में की जायेगी (अर्थात 50% पद वित्तीय वर्ष 2024-25 में एवं शेष 50% पद वित्तीय वर्ष 2025-26 में भरे जायेंगे)। ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 51 से 200 तक है, उनमें पद पूर्ति तीन चरणो में आधार पर की जायेगी। यदि 33% से कम है, तो एक बार में रिक्त पदों की पूर्ति, यदि 33% अथवा अधिक है पर 66% से कम है तो वर्षवार पदपूर्ति होगी। प्रथम वर्ष 2024-25 में 8% द्वितीय वर्ष 2025-26 में 46% और तृतीय वर्ष 2026-27 में 46% की पदपूर्ति होगी। यदि रिक्त पदों की संख्या यदि 66% अथवा अधिक है तो वर्षवार पदपूर्ति में, प्रथम वर्ष 2024-25 में 8%, द्वितीय वर्ष 2025-26 में 31%, तृतीय वर्ष 2026-27 में 31%, चतुर्थ वर्ष 2027-28 में 30% भर्ती होगी। ऐसे संवर्ग जिनमें रिक्त पदों की संख्या 200 से अधिक है वहां पदपूर्ति के संबंध में निम्न सिद्धांत अपनाए जायेंगे। सीधी भर्ती के रिक्त पदों की संख्या यदि 25% से कम है, तो एक बार में रिक्त पदों की पूर्ति होगी। यदि 25% अथवा अधिक है, पर 50% से सीधी भर्ती के रिक्त पद कम है तो वर्षवार पदपूर्ति होगी। इसमें प्रथम वर्ष 2024-25 में 8%, दूसरे साल 2025-26 में 46% और तीसरे साल 2026-27 में 46% पदों की पूर्ति होगी। रिक्त पद यदि 50% या उससे अधिक या 75% से कम है, तो प्रथम वर्ष 2024-25 में 8%, दूसरे साल 2025-26 में 31%, तीसरे साल 2026-27 में 31% और चौथे साल 2027-28 में 30% पदों की पूर्ति होगी। इसी प्रकार यदि रिक्त पर 75% या उससे ज्यादा है, तो प्रथम वर्ष 2024-25 में 8%, सीधी भर्ती के कुल पद द्वितीय वर्ष 2025-26 में 23% तृतीय वर्ष 2026-27 में 23%, चतुर्थ वर्ष 2027-28 में 23%, और वर्ष 2028-29 में 23% पदों पर भर्ती होगी। डाईंग संवर्गों में भर्ती नहीं राज्य शासन द्वारा डाईंग संवर्ग घोषित किये जा चुके संवर्गों में किसी भी प्रकार से कोई भर्ती नहीं की जायेगी। अनुबंधित वाहन के लिए वाहन चालको के पद पर सीधी भर्ती आवश्यक नहीं है। जिन विभागों के पास स्वयं के वाहन है, वे भी वाहन चालक के कार्य हेतु सेवायें आउटसोर्स के माध्यम से प्राप्त करने पर विचार करें। विशिष्ट विभाग जहाँ वाहन चालकों के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती अतिआवश्यक है, वे वित्त विभाग को तथ्यों सहित प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुये स्वीकृति प्राप्त करें। राज्य शासन के विभिन्न कार्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के पदों के विरूद्ध कार्य करने के लिये व्यक्तियों की पूर्ति आउटसोर्स पर करने के लिए चतुर्थ श्रेणी के कार्मिकों की सेवायें प्राप्त करने संबंधी नीति-निर्देश के अनुसार कार्यवाही की जायेगी। विशिष्ट विभाग जहाँ चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती अतिआवश्यक है, वे वित्त विभाग को तथ्यों सहित प्रस्ताव प्रेषित करते हुये स्वीकृति प्राप्त करेंगे। इस बात का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिये गये हैं कि रिक्त पदों की पूर्ति के समय कैडर मेनेजमेंट प्रभावित न हो।  

महाराष्ट्र और झारखंड में अगली सरकार किसकी बनेगी, आज जनता कर रही मताधिकार का इस्तेमाल

नई दिल्ली  महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव प्रचार का शोर थम चुका है।आज  20 नवंबर यानी बुधवार को हो रही वोटिंग । इसी के साथ लोगों को चुनाव नतीजों का इंतजार रहेगा। हर कोई ये जानना चाहता है कि आखिर महाराष्ट्र और झारखंड में अगली सरकार किसकी बनेगी। आखिर दोनों ही राज्यों की जनता के मन में क्या है? क्या दोनों राज्यों में मौजूदा सरकार की वापसी होगी या फिर आवाम बदलाव को लेकर वोट करेगी? इन सभी सवालों के जवाब 23 नवंबर को मिल जाएंगे। जी हां… 23 नवंबर, यही वो दिन है जब दोनों राज्यों की जनता का फैसला सबके सामने आएगा। आज 20 को वोटिंग, 23 नवंबर को नतीजे 288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र और 81 सीटों वाले झारखंड राज्य में बाकी बची 38 विधानसभा सीटों के लिए बुधवार को मतदान है। सोमवार को दोनों राज्यों के साथ ही उपचुनाव के लिए भी चुनाव प्रचार थम गया। अब कोई भी उम्मीदवार, पार्टी या नेता कोई चुनावी रैली या किसी भी तरह से प्रचार नहीं कर सकता। दोनों राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव और 15 राज्यों की 48 विधानसभा और दो लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भी वोटों की गिनती 23 नवंबर को की जाएगी। महाराष्ट्र-झारखंड में कौन बनाएगा सरकार? महाराष्ट्र और झारखंड में नई सरकार किसकी बनेगी ये 23 नवंबर यानी शनिवार को फाइनल हो जाएगा। इसी के साथ करीब महीनेभर से ज्यादा समय से जारी चुनावी घमासान थम जाएगा। जनता का फैसला इस बार किसके हक में जाएगा, चुनाव परिणाम में कौन बाजी मारेगा ये सब कुछ 23 नवंबर को सुबह 8 बजे वोटों की गिनती शुरू होने के साथ ही साफ हो जाएगा। दोपहर तक कौन नई सरकार बनाएगा ये भी स्पष्ट हो जाएगा। क्या है जनता का मूड, 23 नवंबर को हो जाएगा साफ महाराष्ट्र की बात करें तो यहां बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति गठबंधन की सरकार है। इसमें भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (पवार गुट) शामिल हैं। इस चुनाव में भी महायुति गठबंधन एक साथ चुनावी रण में उतरी है। उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), एनसीपी (शरद पवार गुट) के महा विकास अघाड़ी गठबंधन से हैं। वहीं झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी गठबंधन की सरकार चल रही। इस चुनाव में प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी का सीधा मुकाबला इंडिया गठबंधन यानी कांग्रेस-जेएमएम-आरजेडी गठबंधन से है। देखना होगा कि दोनों राज्यों की जनता किसके पक्ष में अपना फैसला सुनाती है। बस करिए 23 नवंबर का इंतजार।

शादी कैंसिल होने पर मैरिज गार्डन संचालक लौटाएंगे पूरी राशि : ‘आगे एडजस्ट कर लेंगे’ कह कर पैसे नहीं रख सकते; कंज्यूमर आयोग का फैसला

Marriage garden operators will return the entire amount if the wedding is cancelled: They cannot keep the money saying ‘we will adjust it later’; Consumer Commission’s decision भोपाल। अगर आप शादी हॉल या मैरिज गार्डन बुक करते हैं और किसी कारणवश कार्यक्रम कैंसिल हो जाए, तो मैरिज गार्डन या शादी हॉल संचालक को बुकिंग कैंसिल होने के तुरंत बाद रकम लौटानी होगी। संचालक एडवांस राशि वापस करने से यह कहकर इनकार नहीं कर सकते कि ‘आगे एडजस्ट कर लेंगे’ या ‘जब कार्यक्रम होगा, तब एडजस्ट कर लेंगे’। दरअसल, भोपाल कंज्यूमर आयोग की बेंच-1 ने ऐसा ही एक फैसला सुनाया हैं। आयोग ने कहा कि विपक्षी द्वारा बुकिंग राशि वापस न करना सेवा में कमी के तहत आता है। यह फैसला अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल ने सुनाया। कोलार के वैभव मैरिज गार्डन के खिलाफ सुनाया फैसला शिवाजी नगर निवासी राजरूप पटेल ने अपनी बेटी की शादी के लिए नवंबर 2022 में कार्यक्रम रखा था। इसके लिए उन्होंने जून 2022 में 21 हजार रुपये में कोलार स्थित वैभव मैरिज गार्डन बुक किया। बाद में विवाह कैंसिल हो गया, और उन्होंने जुलाई 2022 में बुकिंग निरस्त कर दी। उन्होंने बार-बार गार्डन प्रबंधन से जमा राशि वापस करने की गुजारिश की। गार्डन प्रबंधन ने कहा कि भविष्य में होने वाले विवाह के समय राशि एडजस्ट कर दी जाएगी। इसके बावजूद लगभग दो वर्ष बीत गए, और विवाह गार्डन में आयोजित नहीं हुआ। इसके बाद भी गार्डन प्रबंधन ने राशि वापस करने से इनकार कर दिया। दूसरी तरफ नोटिस जारी होने के बाद भी गार्डन प्रबंधन की ओर से कोई भी आयोग में उपस्थित नहीं हुआ। आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया उपभोक्ता ने 21 हजार रुपये एडवांस के तौर पर दिए थे। मामले में विपक्षी ने बुकिंग राशि वापस करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। नोटिस के बावजूद विपक्षी ने न तो आयोग में उपस्थिति दर्ज कराई और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए। आयोग ने कहा कि बुकिंग राशि वापस न करना सेवा में कमी का प्रमाण है। अब देना होगी ब्याज सहित राशि आयोग ने आदेश दिया कि विपक्षी, आदेश की प्रति प्राप्ति दिनांक से 2 माह के भीतर परिवादी को 21,000 रुपये की राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। साथ ही, मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये और परिवाद व्यय के लिए 3,000 रुपये भी अदा किए जाएं। यदि राशि तय समय पर अदा नहीं की जाती, तो परिवाद प्रस्तुति दिनांक से अदायगी दिनांक तक 9% वार्षिक ब्याज देय होगा।

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