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विधायक की बेटी से घर में घुसकर मारपीट, सागर में पीड़ित बोलीं-गला दबाया, जान से मारने की धमकी दी

सागर मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक बड़ा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिले की देवरी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक बृजबिहारी पटेरिया की बेटी के साथ घर में घुसकर मारपीट की गई है। विधायक के भतीजे पर मारपीट का आरोप है। घटना की सूचना मिलने पर विधायक बेटी को साथ लेकर शिकायत दर्ज करवाने एसडीओपी ऑफिस पहुंचे। पुलिस ने मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। घर में घुसकर मारपीट विधायक की बेटी प्रियंका पटेरिया के साथ गुरुवार को मारपीट की गई। प्रियंका ने बताया कि उनका घर बिजौरा गांव में है। जब सुबह वह अपने घर पर थीं तब उनके चचेरे भाई और जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि विनीत पटेरिया एवं उनके बेटे कुशाल पटेरिया घर में दाखिल हुए। दोनों ने उनपर जान से मारने की नीयत से हमला किया। विधायक की बेटी ने बताया कि आधे घंटे तक उनके साथ मारपीट की गई। इस दौरान वह किसी तरह घर से बाहर निकलीं तो आरोपियों ने उनका गला पकड़ लिया। उन्हें जान से मारने की कोशिश की। उन्हें धमकी दी कि क्षेत्र में घूमना बंद कर दो। अगर अब दिखाई दी तो जान से मार देंगे। परिवार के सदस्यों ने किसी तरह उनकी जान बचाई। लोगों से मिलने पर विपक्षियों के निशाने पर टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्टके अनुसार, विधायक की बेटी प्रियंका ने कहा कि पिता काम के सिलसिले में अक्सर भोपाल आया-जाया करते हैं। जब पिता घर पर नहीं रहते तब वह क्षेत्र के लोगों से मिलती हैं। उनके सुख-दुख में शामिल होती है। क्षेत्र में किए जा रहे विकास कार्यों का जायजा लेती हैं। यही वजह है कि वह शायद विपक्षियों के निशाने पर आ गई हैं। मामला दर्ज बेटी के साथ मारपीट किए जाने की सूचना मिलने पर विधायक बृजबिहारी पटेरिया घर पहुंचे। इसके बाद बेटी प्रियंका को लेकर सीधे एसडीओपी ऑफिस पहुंचे। जहां बेटी ने चचेरे भाई विनीत और उनके बेटे कुशाल पटेरिया पर मामला दर्ज कराया। पुलिस ने उनकी मेडिकल जांच कराई। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।

नाजिया इलाही ने कहा सैकड़ों साल पुराने मंदिर वक्फ बोर्ड कैसे हो गए, विधायक टी राजा भी खंडवा में जमकर गरजे

खंडवा  खंडवा में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील नाजिया इलाही ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिससे मुस्लिम समाज के लोग आगबबूला हैं। उन्होंने वक्फ बोर्ड को लैंड माफिया कह दिया है। साथ ही कह दिया है कि जिन्ना को मानने वाले लोग पाकिस्तान का टिकट कटवा लें। इसी बात को लेकर मुस्लिम समाज में नाराजगी है। यह है मामला दरअसल, एमपी के खंडवा में आतंकवाद के खिलाफ और वीर शहीदों की याद में एक मशाल मार्च निकाला गया था। मशाल मार्च में बड़े-बड़े हिंदू नेताओं को बुलाया गया था। 28 नवंबर को आयोजित हुए इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील नाजिया इलाही और तेलंगाना के विधायक टी. राजा सिंह ने भी शिरकत की। मंदिर इनके अब्बा कैसे हो गए नाजिया इलाही ने कहा कि मुसलमान के मंदिर 1400 साल पुराने हैं। इतने सौ साल पुराने मंदिर इनके अब्बा का कैसे हो गए। इतना ही नहीं नाजिया इलाही ने आगे कहा की वक्फ बोर्ड एक लैंड माफिया है। वक्फ बोर्ड का नाम न ही कुरान में लिखा है और न ही संविधान में वक्फ बोर्ड को पूरी तरह से मिटा देना चाहिए। साथ ही पूरे भारत में जिस हिसाब से थूक जिहाद , लव जिहाद , लैंड जिहाद का जो सारा कार्यक्रम चल रहा है, उससे भी पर्दा उठाना जरूरी है । साथ ही अगर मुसलमान जिन्ना को मानता है तो उनका टिकट भी पाकिस्तान के लिए करना चाहिए। वहीं, दूसरी ओर इस मशाल मार्च में शामिल होने आए टी राजा ने भी हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर बड़ी बात कह दी। टी राजा ने कहा कि बांग्लादेश से हिंदुओं को सीखने की जरूरत है , भारत में भी ऐसे कई राज्य है, जहां हिंदुओं की हालत बांग्लादेश से भी ज्यादा बदतर है । फिलहाल नाजिया इलाही और टी राजा के बयानों ने खंडवा में सुस्त पड़ा सियासी माहौल गर्म कर दिया है । गौरतलब है कि इन नेताओं के बयान से खंडवा के मुस्लिम समाज में आक्रोश है। साथ ही उनका कहना है कि इससे सामाजिक समरसता बिगड़ सकता है।

पहली बार PM PM के सुरक्षा घेरे में दिखी महिला SPG कमांडर, वायरल हो रही तस्वीर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में कथित तौर पर शामिल एक महिला एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) कमांडो की तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस तस्वीर ने ऑनलाइन बहस को जन्म दे दिया है। जहां कुछ लोगों ने दावा किया कि यह पहली बार है जब किसी महिला कमांडो को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में देखा गया है। वहीं, अन्य ने बताया कि यह महिला कमांडो पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सुरक्षा में भी देखी जा चुकी हैं। तस्वीर शेयर कर रहे भाजपा सांसद कई भाजपा सांसद इस तस्वीर को शेयर कर रहे हैं। मंडी से सांसद कंगना रनौत ने भी इसे अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया है।केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात महिला SPG कमांडो की तस्वीर शेयर करते हुए उनकी बहादुरी और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने लिखा, “भारत की शान, नारी शक्ति की पहचान! SPG में ड्यूटी पर तैनात हमारी साहसी महिला सुरक्षा अधिकारी देश की सेवा और सुरक्षा में नया मानदंड स्थापित कर रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। यह नया भारत है, जहां महिलाएं आत्मनिर्भरता और ताकत की मिसाल बन रही हैं।” चिक्काबल्लापुरा से भाजपा के लोकसभा सांसद डॉक्टर के सुधाकर ने भी यही तस्वीर शेयर की है। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री की एसपीजी में महिला कमांडो! अग्निवीर से लेकर लड़ाकू पायलट तक, लड़ाकू पदों से लेकर प्रधानमंत्री की एसपीजी में कमांडो तक, सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व कर रही हैं। महिलाओं को और अधिक शक्ति मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद।” पहले भी देखी जा चुकी हैं महिला SPG कमांडो इसके अलावा, कई अन्य लोगों ने भी सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को शेयर करते हुए दावा किया है कि ऐसा पहली बार है जब पीएम की सुरक्षा में कोई महिला SPG कमांडो तैनात है। ऐसा ही दावा सात साल पहले भी किया गया था जब एक वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में एक महिला कमांडो को देखा गया था। यानी ये साफ है कि महिला SPG कमांडे पहले भी पीएम मोदी के सुरक्षा घेरे में देखी जा चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, एसपीजी ने 2013 से महिला कमांडो को अपने दस्ते में शामिल करना शुरू किया था, जिससे महिलाओं को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में भागीदारी का अवसर मिला। कथित तौर पर यह तस्वीर संसद की है, जहां महिला एसपीजी कमांडो तैनात हैं। इन कमांडो को आम तौर पर महिला विजिटर्स की तलाशी लेने के लिए गेट पर तैनात किया जाता है और वे परिसर में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले लोगों की निगरानी करने में भी शामिल होती हैं। इसके अलावा, जब कोई महिला अतिथि प्रधानमंत्री से मिलती है, तो महिला एसपीजी अधिकारी ही सुरक्षा जांच, एस्कॉर्टिंग और प्रधानमंत्री तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं। हालांकि जो तस्वीर वायरल हो रही है उसमें दिख रही महिला अधिकारी PM मोदी की सुरक्षा में नहीं राष्ट्रपति मुर्मू की सुरक्षा में तैनता थीं। बताया जा रहा है कि यह फोटो 26 नवंबर को उस वक्त की है जब राष्ट्रपति मुर्मू संसद को संबोधित करने जा रही थीं। 2015 से, महिलाओं को एसपीजी की क्लोज प्रोटेक्शन टीम (CPT) में भी शामिल किया गया है। यानी अब पीएम के सबसे करीबी सुरक्षा घेरे में भी महिला कमांडो तैनात होती हैं। प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के दौरान, महिला एसपीजी कमांडो सुरक्षा दल का हिस्सा होती हैं। वर्तमान में, एसपीजी में कथित तौर पर करीब 100 महिला कमांडो हैं। पहली बार 2013 में महिला एसपीजी कमांडो को किसी उच्च-स्तरीय हस्ती की सुरक्षा में तैनात किया गया था। उस समय दो महिला कमांडो को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर की सुरक्षा करते देखा गया था। महिला कमांडो की उपस्थिति प्रधानमंत्री की सुरक्षा के प्रति एसपीजी की व्यापक सोच और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाती है। यह कदम न केवल महिलाओं को समान अवसर प्रदान करता है, बल्कि सुरक्षा क्षेत्र में उनकी बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता करता है। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप क्या है? स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) भारत का एक बेहद खास और एलीट सुरक्षा बल है, जिसे देश के सर्वोच्च नेतृत्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गठित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री, उनके निकट परिजन, और पूर्व प्रधानमंत्रियों को संभावित खतरों से सुरक्षित रखना है। एसपीजी की स्थापना 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद की गई थी। इसे संसद द्वारा 1988 में पारित एसपीजी अधिनियम के तहत कानूनी मान्यता दी गई। इस अधिनियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार को किसी भी आतंकी, विदेशी या अन्य खतरों से अत्यंत सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए। एसपीजी के जवान भारतीय पुलिस सेवा (IPS), सशस्त्र बलों, और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) से चुने जाते हैं। चयनित कर्मियों को कठोर ट्रेनिंग और हाई फिजिकल एवं मानसिक फिटनेस के मानदंडों को पूरा करना होता है। एसपीजी कर्मियों को हथियार संचालन, मार्शल आर्ट्स, भीड़ नियंत्रण, ड्राइविंग, और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। एसपीजी अत्याधुनिक हथियारों और संचार तकनीकों से लैस होता है। इसके अलावा, यह टीम बुलेटप्रूफ गाड़ियां, जैमर, और अन्य आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करती है। एसपीजी की कार्यप्रणाली अत्यंत गोपनीय होती है। इसके अभियान और रणनीतियां सार्वजनिक नहीं की जातीं। 2019 में, केंद्र सरकार ने एसपीजी अधिनियम में संशोधन किया, जिसके तहत एसपीजी सुरक्षा अब केवल मौजूदा प्रधानमंत्री और उनके परिवार तक सीमित कर दी गई। पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार को यह सुरक्षा केवल पांच साल तक दी जाती है, वह भी विशेष परिस्थितियों में। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तस्वीर वायरल होने के बाद लोगों ने इसे लेकर अपनी राय व्यक्त की। कुछ ने इसे “नारी शक्ति” का उदाहरण बताया, तो कुछ ने महिलाओं की भागीदारी को देश के सुरक्षा तंत्र की प्रगतिशीलता का प्रतीक कहा। एसपीजी, जो प्रधानमंत्री और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, देश के सबसे प्रतिष्ठित सुरक्षा दस्तों में से एक मानी जाती है। महिला कमांडो का इसमें योगदान भारत के सुरक्षा तंत्र में महिलाओं की भूमिका को और सशक्त करता है।

एयरलाइन फ्लाइट को शाम 5:20 बजे दिल्ली से इंदौर लाने और 5:50 बजे बेंगलुरु भेजने की तैयारी

भोपाल इंदौर एयरपोर्ट से बेंगलुरु जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट के समय में बदलाव किया जाएगा। दरअसल, यह फ्लाइट शुरू होने के बाद से लगातार अपने शेड्यूल से देरी से उड़ान भर रही है। फ्लाइट के रोजाना लेट होने से यात्री परेशान हो रहे हैं। इस समस्या को देखते हुए एयरलाइन ने समय बदलने का निर्णय लिया है। एयरपोर्ट प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार अब इस फ्लाइट का संचालन दोपहर के बजाय शाम को किया जाएगा। ट्रेवल एजेंट्स के मुताबिक, इंदौर से शारजाह के बीच अंतरराष्ट्रीय उड़ान का संचालन करने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस ने 28 अक्टूबर से इंदौर से दो नई घरेलू उड़ानें शुरू की थीं। इनमें से एक, IX2513, दोपहर 3:20 बजे दिल्ली से इंदौर आकर 3:50 बजे बेंगलुरु जाती है। लेकिन यह फ्लाइट शुरुआत से ही 2-3 घंटे की देरी से उड़ान भर रही है। गुरुवार को यह फ्लाइट 6:05 बजे रवाना हुई, जबकि मंगलवार और बुधवार को भी 1 से 1.5 घंटे की देरी हुई। एयरपोर्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एयरलाइन ने इस फ्लाइट को शाम 5:20 बजे दिल्ली से इंदौर लाने और 5:50 बजे बेंगलुरु भेजने की तैयारी की है। हालांकि, यह बदलाव कब से लागू होगा, इसकी अभी जानकारी नहीं है। समर शेड्यूल में बदल पाएगा फ्लाइट का समय एयरपोर्ट अधिकारियों कहना है कि विंटर शेड्यूल में इस फ्लाइट का समय बदलना मुश्किल है। यह बदलाव समर शेड्यूल में ही संभव हो पाएगा। बता दें इस फ्लाइट की देरी से सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को हो रही है, जिनकी बेंगलुरु से आगे कनेक्टिंग फ्लाइट्स हैं। गुरुवार को 5 फ्लाइट्स लेट हुईं     गुरुवार को इंदौर एयरपोर्ट से 5 फ्लाइट्स देरी से रवाना हुईं। इनमें खराब मौसम को कारण बताया गया।     एयर इंडिया एक्सप्रेस (IX2511): दिल्ली के लिए 7:50 बजे की फ्लाइट 8:52 पर रवाना हुई।     इंडिगो (6E7154): नाशिक के लिए 1:10 बजे की फ्लाइट 2:04 पर रवाना हुई।     एयर इंडिया एक्सप्रेस (IX2513): बेंगलुरु के लिए 2 घंटे की देरी से रवाना हुई।     इंडिगो (6E7109): जयपुर के लिए 4:10 बजे की फ्लाइट 5:42 पर रवाना हुई।     एयर इंडिया (AI2912): दिल्ली के लिए 8:50 बजे की फ्लाइट 10:00 बजे रवाना हुई।  

निवेशक हमारे लिये मेहमान नहीं, हमारा परिवार हैं, प्रक्रियात्मक कठिनाइयां नहीं आने देंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पुरुषार्थ और परमार्थ का संगम है जर्मनी, इससे जुड़कर उद्योग के नये मार्ग होंगे प्रशस्त : मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध करायेंगे हर सुविधा प्रक्रियात्मक कठिनाइयां नहीं आने देंगे निवेशक हमारे लिये मेहमान नहीं, हमारा परिवार हैं मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिये उपलब्ध है स्वर्णिम अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जीआईएस : 2025 के लिए किया जर्मनी के निवेशकों को आमंत्रित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत और जर्मनी के आपसी संबंध हमेशा से बेहतर रहे हैं। पुरुषार्थ और परमार्थ से परिपूर्ण जर्मनी ने भारत के साथ हमेशा उद्योग मैत्री का रवैया रखा है। उन्होंने जर्मनी के निवेशकों को उन्नत तकनीकी के साथ मध्यप्रदेश में आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए आये निवेशकों को हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। हमनें निवेशकों के हित में जटिलताओं को समाप्त/सरलीकृत कर प्रक्रियात्मक कठिनाइयों को दूर करने का काम किया है। निवेशकों को प्रदेश में उद्योग लगाने पर बिजली और पानी की कमी नहीं आने दी जायेगी। निवेशक हमारे लिये मेहमान नहीं, हमारे परिवार का एक अंग हैं। हम उन्हें किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होने देंगे। प्रदेश में ग्रीन एनर्जी के लिये भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को म्यूनिख (जर्मनी) में अपनी 3 दिवसीय यात्रा के प्रथम दिन इन्टरैक्टिव सेशन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में फरवरी माह में हो रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में आने के लिए जर्मनी के उद्योगपतियों को आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत और जर्मनी के अतीतकाल से बहुत गहरे संबंध है। विशेष रूप से उद्योग और व्यवसाय जगत में भी हमारे संबंध बहुत मजबूत हैं। हमने इन संबंधों को निभाया भी है। यूरोप के सभी देशों से तुलना की जाए तो जर्मनी मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा निवेश करने वाला देश है। मेरी यात्रा इन संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज यहां मैं एक स्पष्ट उद्देश्य से आया हूँ। हम जर्मनी के साथ एक नई तरह की साझेदारी चाहते हैं। साझेदारी केवल व्यापार तक ही सीमित न हो। हम चाहते हैं कि जर्मनी की कम्पनियां अपनी उन्नत तकनीक के साथ मध्यप्रदेश में निवेश करें। मध्यप्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक और मानव संसाधनों के साथ जर्मनी की तकनीक का संगम हो। मध्यप्रदेश एक सम्पूर्ण इन्वेस्टमेंट डेस्टीनेशन है। मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए स्वर्णिम अवसर भी उपल्बध हैं। जब मध्यप्रदेश की क्षमताओं की बात की जाती है, तो आंकड़े स्वयं बोलते हैं। मध्यप्रदेश आज भारत की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। हमारी अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में तीन गुना बढ़ी है। हमारी विकास दर दोहरे अंक में है। लेकिन यह तो शुरूआत है। हम एक पॉवर सरप्लस स्टेट हैं। सिर्फ यही नहीं, प्रदेश में बिजली देने के लिए वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। ग्रीन एनर्जी की दिशा में मध्यप्रदेश काफी आगे बढ़ा है। इसके साथ ही पर्याप्त जल और भूमि की उपलब्धता भी मध्यप्रदेश की विशेषता है। हमारी यूएसपी है मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि जर्मनी के उद्योगपति जर्मनी ही नहीं, विश्व के कई देशों में ख्याति प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जर्मन विद्वान मैक्स मूलर का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय ग्रंथों और वेदों का जर्मनी सहित अन्य भाषाओं में अनुवाद किया। वे संस्कृत के भी विद्वान थे। स्वामी विवेकानंद भी उनकी प्रतिभा की प्रशंसा करते थे। जर्मनी ने विश्व युद्ध सहित अनेक कठिनाईयों का सामना किया है। लेकिन जर्मनी के नागरिकों की जीवटता सराहनीय है। उद्योग स्थापना की महत्वपूर्ण स्वीकृतियाँ 30 दिन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग स्थापना में आने वाली मुश्किलों को दूर करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार ने विशेष प्रयास किये हैं। मध्यप्रदेश को देश का इकलौता प्रदेश कहा जा सकता है, जहाँ उद्योग संबंधी सभी प्रकार की अनुमतियाँ और स्वीकृतियाँ मात्र 30 दिन में दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण विभाग की मॉनीटरिंग उत्साही, जिज्ञासु और कर्मठ अधिकारियों के हाथों में है। इसके अतिरिक्त वे स्वयं निरंतर इस विभाग की मॉनीटरिंग करते हैं। मेहमान नहीं, परिवार बनकर आयें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जर्मनी के निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की धरती पर मेहमान की बजाये परिवार बनकर आये हैं। सभी को सुखद औद्योगिक माहौल मिलेगा। भारत के भावी आर्थिक लक्ष्यों का भी हृदय प्रदेश है मध्यप्रदेश ‘इन्वेस्ट अपोर्चुनिटीज इन एमपी’ के लिए गुरुवार को जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन को जर्मनी में भारत के कौंसुलेट जनरल शत्रुघन सिन्हा ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत का भौगोलिक हृदय प्रदेश तो है ही, साथ ही यह भारत के आर्थिक विकास का भी प्रमुख गंतव्य बन रहा है। सिन्हा ने जर्मनी के निवेशकों से मध्यप्रदेश में निवेश का आव्हान कर उन्हें आश्वस्त करते हुए बताया कि यहां 5 पूर्ण विकसित हवाई अड्डे, 4 हजार किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग और विस्तृत रेलवे नेटवर्क है। मध्यप्रदेश के शहरों से देश के उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक किसी भी स्थान पर आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां से देश भर के पोर्ट्रस तक सुगम पहुंच इसे देश की सप्लाई चेन के लिए महत्वपूर्ण केन्द्र बनाती है। सिन्हा ने मध्यप्रदेश में निवेश की अपार संभावनाओं पर जोर देते हुए मध्यप्रदेश सरकार की इंडस्ट्री फ्रैंडली नीतियों की तारीफ की। उन्होंने जर्मन निवेशकों को बताया कि मध्यप्रदेश में कृषि, नवकरणीय ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश न सिर्फ मध्यप्रदेश, बल्कि निवेशकों के लिए भी विकास के नए द्वार खोल सकता है। जर्मन निवेशकों के लिए मध्यप्रदेश आइडियल डेस्टिनेशन डॉ. टोबियास रोसेन्थाल, चेयरमेन, बेयरलोशर ने कहा कि जर्मन निवेशकों के लिये मध्यप्रदेश आइडियल डेस्टिनेशन है। मध्यप्रदेश में एडिटिव प्लास्टिक उत्पादक कंपनी बेयरलोशर के चेयरमेन डॉ. रोसेन्थाल ने मध्यप्रदेश में उद्यमिता के अपने 25 वर्ष के अनुभव साझा करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में उनका इतना अच्छा अनुभव रहा कि उनकी कंपनी ने दुनिया भर के 15 प्लांट्स में सबसे बड़ा प्लांट मध्यप्रदेश में स्थापित किया। डॉ. रोसेन्थाल ने जर्मन निवेशकों को बताया मध्यप्रदेश निवेश के लिये आइडियल डेस्टिनेशन है, क्योंकि यहाँ अच्छे व कुशल मानव संसाधन, उपयुक्त इन्फ्रॉस्ट्रक्चर असिस्टेंस और प्रदेश सरकार की ओर … Read more

राजेश आर रावत एवं टीम का परिजनों ने किया भव्य स्वागत ।

The family members gave a grand welcome to Rajesh R Rawat and the team. हरिप्रसाद गोहेआमला। नेशनल रेल्वे मजदूर यूनियन मान्यता चुनाव नार्थ साईड प्रभारी कामरेड राजेश आर रावत को बनाए जाने पर सामाजिक, ग्रामिणजनो एवं ईस्ट मित्रो में हर्ष व्याप्त है। गौरतलब हो की कामरेड राजेश आर रावत मूलतः आमला विकास खंड के ग्राम खापा ग्राम के स्थाई निवासी है । कामरेड राजेश आर रावत ,महामंत्री कामरेड वेणु पी नायर,मंडल अध्यक्ष कामरेड मनोज चोइथानी, मंडल सचिव कामरेड एस के झा के मान्यता चुनाव प्रचार प्रसार पर प्रथम बार आमला नगर आगमन पर परिजनों एवं ईस्ट मित्रो ने ग्राम कजली जोड़ पर एकत्रित होकर कामरेड राजेश आर रावत एवं उनकी टीम का फूल माला पहनाकर एवं गुलदस्ता भेंटकर जोरदार स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। इस मौके पर प्रमुख रूप से रामपाल मोड़क भाजपा किसान मोर्चा आमला मंडल अध्यक्ष ,रामदास कापसे,मनोज रहड़वे ग्राम खापा खतेड़ा सरपंच संघ उपाध्यक्ष आमला राजू कापसे ग्राम छावल सरपंच,रामदास तुलसीराम माथानकर ग्राम काजली, मनोज नावंगे जिला अध्यक्ष भारतीय किसान संघ राजेश रावत ग्राम छावल राजू पोटफोड़े , मारोति खवादे,मुकेश मोड़क, बंटी कापसे, राजेश रहड़वे,सुखदेव पटवारी, मुकेश रहदवे,प्रेम शंकर बेदरे,टीकाराम रहदेवे आदि मौजूद रहे।सभी ग्राम वासियों ने नेशनल रेल्वे मजदूर यूनियन के चुनाव चिन्ह लेंप पर ही वोट देने अपील की ।

अक्टूबर में हुए एक सर्वे में 103 सीटों को कवर किया गया, उसमें एमवीए केवल 44 सीटों पर आगे चल रही थी

मुंबई महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व द्वारा ईवीएम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, पार्टी में ही इसको लेकर मतभेद की स्थिति है। महाराष्ट्र की हार इसलिए भी करारी थी क्योंकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने शानदार प्रदर्शन किया था। चुनाव से पहले कांग्रेस के द्वारा कराए गए गए आंतरिक सर्वे में ही हार के संकेत मिल गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में हुए एक सर्वे में 103 सीटों को कवर किया गया था। उसमें एमवीए केवल 44 सीटों पर आगे चल रही थी। वहीं, लोकसभा चुनावों में यह आंकड़ा 54 था। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ‘लड़की बहिन योजना’ ने चुनाव परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कांग्रेस के एक आंतरिक सर्वेक्षण के अनुसार, 88% लोगों को इस योजना के बारे में जानकारी थी। 17% ने स्वीकार किया कि इस योजना के कारण उनके मतदान की प्राथमिकता बदल गई। एमवीए की रणनीति में इस योजना का प्रभाव समझने में देरी हुई। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि एक बैठक में रणनीतिकारों ने एमवीए को महिलाओं को 3000 रुपये की मासिक सहायता देने का सुझाव दिया था। लेकिन महायुति ने पहले ही योजना के तहत 2100 मासिक सहायता की घोषणा कर दी थी, जिससे उन्हें महिलाओं के बीच व्यापक समर्थन मिला। हार के बाद ईवीएम पर सवाल हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का निर्णय लिया। हालांकि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह रणनीति महाराष्ट्र और केंद्रीय नेतृत्व का चेहरा बचाने की एक कोशिश है। आपक बता दे कि कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) शुक्रवार को विधानसभा चुनाव परिणामों की समीक्षा करेगी। संभावना है कि समिति ईवीएम के खिलाफ अभियान तेज करने और मतपत्र (पेपर बैलट) की वापसी की मांग करने का प्रस्ताव पारित कर सकती है।

मुख्यमंत्री ने जनजातीय अस्मिता, अस्तित्व और विकास विषय पर आयोजित संगोष्ठी को किया संबोधित

रायपुर मुख्यमंत्री ने जनजातीय अस्मिता, अस्तित्व और विकास विषय पर आयोजित संगोष्ठी को किया संबोधित जनजातीय समाज का इतिहास धरती पर मनुष्य के पहले पदचाप के साथ जुड़ा हुआ है। जनजातीय संस्कृति ने भगवान श्रीराम को अपने हृदय में बसा रखा है। भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में ही वनवास बिताया, यहीं पर उन्होंने माता शबरी के जूठे बेर खाए। जनजातीय अस्मिता का प्रश्न भारत की सनातन परंपरा की अस्मिता से जुड़ा हुआ प्रश्न है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में जनजातीय अस्मिता, अस्तित्व और विकास विषय पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि आज हमें जनजातीय समुदायों की अस्मिता और विरासत के प्रति संवेदनशील यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का नेतृत्व मिला है। आज जनजातीय समुदाय की हमारी बहन श्रीमती द्रौपदी मुर्मु भारत के सर्वाेच्च पद पर आसीन हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजाति समाज सांस्कृतिक रूप से समृद्ध समाज है। यह समाज कुप्रथाओं का मुखर विरोध करता है। भारत की संस्कृति और देश की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जनजातीय जननायकों के योगदान को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर पूरे देश में 13 से 15 नवम्बर तक जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज की परंपराओं, संस्कृति रीति-रिवाज, तीज-त्यौहार और शासन द्वारा जनजातीय उत्थान के लिए शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 13 नवंबर को जशपुर जिले में आयोजित पदयात्रा इतनी सफल रही कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी खुलकर तारीफ की और ऐसे आयोजनों को जनजातीय समाज के विकास और उत्थान में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर हुए राष्ट्रीय आयोजन ने अन्य प्रांतों से आए आदिवासी समुदाय को एक दूसरे की संस्कृति को जानने-समझने का सुंदर अवसर दिया। साय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल जी ने अपने कार्यकाल के दौरान सबसे पहले पृथक जनजातीय कल्याण मंत्रालय बनाया और आदिवासियों के विकास के लिए एक मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि हम मैदानी और जनजातीय क्षेत्रों में अवसरों की समानता स्थापित करने के लिए अपनी योजनाएं और नीतियां बना रहे हैं ताकि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक समुदाय के पास विकास के समान अवसर हों और जनजातीय समाज अपनी प्राकृतिक और भौगोलिक जटिलताओं पर जीत हासिल करते हुए समग्र भारत के विकास की मुख्य धारा में शामिल हो सकें। जब हम जनजातीय समुदायों की अस्मिता की रक्षा करेंगे, उनकी संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन करेंगे, उनके इतिहास और उनके नायकों का गौरवगान करेंगे तो निश्चित रूप से मां भारती का यश बढ़ेगा, उसका गौरव गान होगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत के जनजातीय समुदायों के समग्र विकास के लिए मोदी जी पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी योजनाएं चला रहे हैं। ये योजनाएं जनजातीय समुदायों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए क्रांतिकारी योजनाएं साबित हो रही है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी अनेक योजनाओं से जनजातीय समुदायों को बड़ा संबल मिला है। पिछले 11 महीने में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर अंचल में शांति स्थापित करने के लिए तेजी से अपने कदम बढ़ाए हैं। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से शासन की योजनाओं को दूरस्थ अंचलों तक पहुंचाने की अनूठी पहल की गई है। बस्तर अंचल में सुरक्षाबलों के 34 नए कैंप खोले गए हैं और लगभग 96 गांवों में शासकीय योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जनजातीय महानायकों के गौरवशाली इतिहास की जानकारी आने वाली पीढ़ी को हो इसलिए ऐसे आयोजन आवश्यक हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि उनके मूल्यों को अगली पीढ़ी तक ले जाएं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने सदैव प्रकृति के संरक्षण की दिशा में कार्य किया है। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता अतुल जोग ने कहा कि बिना स्वार्थ के जनजातीय समाज ने मानव सेवा का काम किया है। इसका सुंदर उदाहरण पद्म पुरस्कारों की घोषणाओं में भी देखने को भी मिला, जिसमें बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय के लोग शामिल रहे हैं। संगोष्ठी को पवन साय और अनुराग जैन ने भी संबोधित किया। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जनजातीय समुदाय के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

चित्रोत्पला फिल्म सिटी से छत्तीसगढ़ी फिल्मों, नाटकों के साथ पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

छत्तीसगढ़ में 147 करोड़ रूपए की लागत से बनेगी चित्रोत्पला फिल्म सिटी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस पर प्रदेशवासियों को बड़ी सौगात चित्रोत्पला फिल्म सिटी से छत्तीसगढ़ी फिल्मों, नाटकों के साथ पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा पद्मविभूतियों की सम्मान राशि प्रतिमाह 5 हजार रूपए से बढ़ाकर 10 हजार रुपए करने की घोषणा रायपुर छत्तीसगढ़ में 147 करोड़ रूपए की लागत से  चित्रोत्पला फिल्म सिटी बनेगी। इसके लिए भारत सरकार ने 147 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा में दिए गए अपने सम्बोधन में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार द्वारा फिल्म सिटी के निर्माण की स्वीकृति प्रदान करते हुए राशि की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा कि चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण से छत्तीसगढ़ी फिल्मों, छत्तीसगढ़ी नाटकों को प्रोत्साहन तो मिलेगा ही, साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।     मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में पद्मसम्मान से विभूषित छत्तीसगढ़ की विभूतियों को दी जाने वाली सम्मान राशि प्रतिमाह 5 हजार रूपए से बढ़ाकर 10 हजार रूपए करने की घोषणा की।     मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। छत्तीसगढ़ी गुरतुर भाषा है, जो हमें आपस में दिल से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ी फिल्में काफी लोकप्रिय हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देने में छत्तीसगढ़ी फिल्मों का भी बड़ा योगदान है।     मुख्यमंत्री ने साहित्य परिषद में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के विलय की समाप्ति की घोषणा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग राजभाषा छत्तीसगढ़ी को बढ़ावा देने का कार्य करता रहेगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का साहित्य परिषद में विलय कर दिया गया था।     मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा को समृद्ध करने वाले छह साहित्यकारों को शॉल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखित 12 पुस्तकों का विमोचन भी किया।     कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा को लोकप्रिय बनाने और राजभाषा का सम्मान देने के लिए यह जरूरी है कि हम छत्तीसगढ़ी भाषा में बातचीत करें और नई पीढ़ी को भी छत्तीसगढ़ी बोलना सिखाए। उन्होंने साहित्यकारों से छत्तीसगढ़ी भाषा में उपन्यास, कविता और इतिहास का लेखन करने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा में सदस्य छत्तीसगढ़ी में अपना सम्बोधन दे सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सांसद के रूप में वे छत्तीसगढ़ी को संविधान की आठवें अनुसूची में शामिल कराने का प्रयास करेंगे।     कार्यक्रम में पद्डॉ. सुरेन्द्र दुबे और डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी., संचालक संस्कृति एवं राजभाषा विवेक आचार्य ने छत्तीसगढ़ी राजभाषा में सम्बोधन दिया। राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने बताया कि आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ी में 2700 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। आयोग द्वारा अब तक छत्तीसगढ़ी भाषा की 1400 पुस्तकों का प्रकाशन किया जा चुका है।

शावकों के शव क्षत-विक्षत कैसे हुए, 36 घंटे बाद भी फारेस्ट नहीं ढूंढ पा रहें है जवाब

How did the bodies of the cubs get mutilated, the forest is not able to find the answer even after 36 hours उदित नारायणभोपाल। कूनो नेशनल पार्क से जन्मे दोनों शावकों की मौत पर प्रबंधन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शावकों के शव क्षत-विक्षत कैसे हुए..? क्या बाड़े में कोई और वन्य प्राणी पहुंचे थे या फिर मां स्वयं ही अपने शावकों पर हमला करके उन्हें मौत के घाट उतार दिया..? मौत के चार दिन बाद भी वन विभाग द्वारा अधिकृत जवाब नहीं आया है। सबसे बड़ा सवाल लिया है कि प्रधानमंत्री की ड्रीम प्रोजेक्ट में इतनी बड़ी लापरवाही के लिए कौन अफसर जवाबदेह है।श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों के वंश वृद्धि की कड़ी में 22 नवंबर को चीता निर्वा ने शावकों को जन्म दिया था। जन्म के 2 दिन बाद यानि 25 को दोनों शावकों की मौत हो गई। डीएफओ कुनो के अधिकृत प्रेस नोट में दोनों मृत शावकों के शव को क्षति-विक्षिप्त बताया। अर्थात शावकों की मौत किन जानवरों के हमले से हुई? इस सवाल का उत्तर खोजा जा रहा है। हालांकि सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने आशंका व्यक्त की है कि निर्वा पहली बार मां बनी है, इसलिए वहीं हमले कर सकती है। बिल्ली प्रजाति के एनिमल का यह स्वभाव भी होता है। इसके बावजूद भी आखिरकार कुनो पार्क के प्रबंधन पर सवाल उठना लाजमी है। 24 घंटे की मॉनिटरिंग कैसे की जा रही थी? सभी चीता को कॉलर आईडी से मीनिंग हो रही है तो फिर निर्वा के मूवमेंट पर नजर क्यों नहीं रखी गई..? यदि निर्वाह पर नजर रखी जाती तो उसके हमले से शावकों को बचाया जा सकता था।

मध्यप्रदेश में जर्मन निवेश का नया अध्याय प्रारंभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जर्मनी यात्रा ने प्रदेश के औद्योगिक विकास को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। गुरूवार को डॉ. यादव ने निवेशकों से मिलने के बाद एसीईडीएस को भोपाल में भूमि आवंटित की। यह निर्णय मध्यप्रदेश को वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर एक नए केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। भोपाल को मिलेगा वैश्विक औद्योगिक केंद्र का दर्जा भोपाल के अचारपुरा में जर्मन कंपनी एसीईडीएस लिमिटेड को 27,200 वर्गमीटर (6.72 एकड़) जमीन आवंटित की गई है। इस समझौते के तहत कंपनी ने भोपाल में अपनी औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए 100 करोड़ रूपये से ज्यादा का प्रस्ताव दिया है। इस कम्पनी की स्थापना से सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा। इस उद्योग की स्थापना से एक्स-रे मशीन निर्माण एवं अन्य उपकरण, सौर ऊर्जा पॉवर प्लांट सहित नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में कार्य किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस यात्रा ने प्रमाणित कर दिया है कि मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए अब ऐसा माहौल तैयार हो चुका है, जहां व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्हें हरसंभव सहयोग दिया जा रहा है। उनकी दूरदर्शी सोच और निवेशकों के प्रति सकारात्मक रवैया ने ही जर्मन कंपनी को प्रदेश में अपने विस्तार की प्रेरणा दी है। भोपाल में जर्मन कंपनी एसीईडीएस को भूमि आवंटन मात्र एक शुरुआत है। यह साझेदारी न केवल औद्योगिक विकास की एक नई लहर लाएगी, बल्कि इसे प्रदेश के समग्र विकास के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस ऐतिहासिक यात्रा ने यह भी प्रमाणित कर दिया है कि मध्यप्रदेश न केवल भारत बल्कि वैश्विक निवेश का अगला प्रमुख केंद्र बनने की पूरी क्षमता रखता है।  

जन सेवा और विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : राज्यमंत्री श्रीमती गौर

भोपाल जनता की सेवा और जनहित में जरूरी विकास कार्य कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के वार्ड-53 में विभिन्न विकास कार्यों के भूमि-पूजन अवसर पर यह बात कही। उन्होंने दानिश नगर में 27 लाख 53 हजार रुपए की लागत से बनने वाली सीसी रोड का लोकार्पण किया। हनुमान नगर में 12 लाख की लागत से बनने वाली सीसी रोड और 5 लाख 30 हजार की लागत से बनने वाली बाउंड्री वॉल निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया। गगन विहार कॉलोनी सेंट राफेल स्कूल के पास 14 लाख से बनने वाली सीसी रोड के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया। शिवनगर जाटखेड़ी में नाली निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया। बाबा साहेब अंबेडकर पार्क जाटखेड़ी में 18 लाख से बनने वाले सामुदायिक भवन निर्माण कार्य का भूमि-पूजन किया। संजय नगर जाटखेड़ी के संत शिरोमणि रविदास महाराज परिसर में बाउंड्री वॉल का भूमि-पूजन किया। पार्क एवेन्यू में 9 लाख रुपये से बनने वाली सीसी रोड का भूमि-पूजन किया। शंकराचार्य नगर में 6 लाख की लागत से बनने वाली सीसी रोड और नाली निर्माण के कार्य का भूमि-पूजन किया। गायत्री विहार फेज-1 बागमुगलिया में पार्क का लोकार्पण किया। इस दौरान पार्षद प्रताप वारे, शीला पाटीदार, जितेन्द्र शुक्ला, रामबाबू पाटीदार, धर्मेंद्र पाटीदार, रमाकांत मालवीय सहित स्थानीय जन मौजूद रहे।  

आबकारी विभाग की कार्यवाही में अवैध शराब के 04 प्रकरण कायम

 डिंडौरी कलेक्टर  हर्ष सिंह के निर्देशानुसार जिले में अवैध मदिरा के विनिर्माण, संग्रहण, परिवहन व विक्रय के रोकथाम हेतु 27 नवंबर 2024 को आबकारी विभाग वृत्त शहपुरा और वृत डिंडोरी में अवैध शराब रखने व बिक्री संबंधी प्राप्त शिकायतों के आधार पर दबिश कर कार्यवाही की गई। जिसमे आरोपी चैती बाई पति जहांगीर ग्राम अमेरा से 7 लीटर हाथ भट्टी कच्ची शराब, चूरामन पिता समनू लाल ग्राम कोहानी देवरी से 05 लीटर हाथ भट्टी कच्ची शराब, तीतो बाई पति स्व.  बालाराम ग्राम कोहानी देवरी  से 06 लीटर हाथ भट्टी कच्ची शराब और समनी बाई पति वीर सिंह ग्राम विक्रमपुर से 5 लीटर हाथ भट्टी कच्ची शराब बरामद किया गया।     इस प्रकार पंजीबद्ध कुल 4 प्रकरण में जप्त कुल 23 लीटर हाथ भट्टी कच्ची शराब जप्त हुई, जिसकी अनुमानित कीमत 4600/- रुपए है। उक्त सभी प्रकरण मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34 (1) ” क” तहत पंजीबद्ध किए गए।

मध्यप्रदेश में जनवरी 2025 से 3 प्रतिशत बढ़ेगा महंगाई भत्ता, नए साल पर कर्मचारियों को तोहफा!

भोपाल प्रदेश के 7 लाख से अधिक कर्मचारियों का महंगाई भत्ता सरकार नए साल में फिर बढ़ाएगी। यह जनवरी 2024 से 46 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया है। जबकि, केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई 2024 से 53 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है।  जनवरी 2025 में केंद्र सरकार महंगाई भत्ता और राहत में फिर वृद्धि करेगी। इसे देखते हुए वित्त विभाग भी 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने की तैयारी में है। राज्य सरकार ने महंगाई भत्ता बढ़ाने में की देरी मध्य प्रदेश में 2024 के पहले तक जब-जब केंद्र सरकार महंगाई भत्ते व राहत में वृद्धि करती थी, तब राज्य सरकार भी अपने कर्मचारियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता और राहत बढ़ा देती थी। अब इसमें विलंब हो रहा है। अभी भी केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत का अंतर है। राज्य के कर्मचारी और पेंशनरों को नहीं मिला लाभ अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों का जुलाई 2024 से महंगाई भत्ता 53 प्रतिशत किया जा चुका है, लेकिन राज्य के कर्मचारी और पेंशनरों को इसका लाभ नहीं मिला है। सूत्रों का कहना है कि सरकार नए साल में 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ा सकती है, क्योंकि केंद्र सरकार फिर इसमें वृद्धि कर सकती है। उल्लेखनीय है कि बजट में 56 प्रतिशत के हिसाब से महंगाई भत्ते का प्राविधान है। विभागों का स्थापना व्यय भी इसके अनुसार ही तैयार हुआ है, यानी बजट प्राविधान की कोई समस्या नहीं है। दिसंबर में मिलेगी एरियर की पहली किस्त सरकार ने महंगाई भत्ते में वृद्धि जनवरी 2024 से की है, लेकिन इसका भुगतान अक्टूबर के वेतन यानी नवंबर से किया गया। जनवरी से सितंबर के महंगाई भत्ते के अंतर की राशि का भुगतान चार समान किस्तों में किया जाना है। पहली किस्त दिसंबर में दी जाएगी। दूसरी जनवरी, तीसरी फरवरी और चौथी किस्त की राशि खातों में मार्च 2025 में आएगी।

“छत्तीसगढ़ी भाखा के मान अऊ सम्मान के दिशा म एक नवा पहल”

छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस पर विशेष लेखः  “छत्तीसगढ़ी भाखा के मान अऊ सम्मान के दिशा म एक नवा पहल”  “छत्तीसगढ़ी भाखा ल संजोय म मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के महत्वपूर्ण योगदान” महेन्द्र सिंह मरपच्ची मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जय जोहार जय छत्तीसगढ़ ! आप सब मन भलीभाती जानथव कि छत्तीसगढ़ी अपन समृद्ध भाखा, संस्कृति अउ परंपरा खातिर पूरा देश म अपन अलग पहिचान बना लिहिस हे। इहा के माटी, तिहार, लोककला अउ संस्कृति जीवन जिये के तरीका म एक अलग ही मिठास झलकथे। हमर छत्तीसगढ़ के आत्मा हर जम्मों छत्तीसगढ़ियां मन के बोली अउर भाखा में बसे हे। इ भाखा म केवल बात करे के साधन नइ हे, बल्के हमर छत्तीसगढ़ियां भाई बहिनि के परंपरा, रीति-रिवाज अउ हमर संस्कृति के अमूल्य धरोहर हर झलकत हे। छत्तीसगढ़ी भाखा के सम्मान अउ प्रचार-प्रसार के खातिर हमर तत्कालिन सरकार हर 28 नवंबर के दिन ल “छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस” बनाये के घोषणा करे रहिस। एही दिन हमर भाखा के महत्त्व ल पहिचान करे बर, अउ ओला संजोय बर, अउ नई पीढ़ी ला छत्तीसगढ़ के जम्मों इतिहास से जोड़य के अवसर आय हे। छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस के शुरुआत हर 28 नवंबर 2007 के होइस, जब छत्तीसगढ़ी भाषा ल आधिकारिक रूप म राज्य के राजभाषा के दर्जा मिलिस। ये ऐतिहासिक फैसला ल डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व म पूर्ववर्ती सरकार हर अपनाये रहिस ये निर्णय हर केवल भाषा के प्रचार-प्रसार के माध्यम नइ बने रहिस, बल्कि ये छत्तीसगढ़वासियन के खातिर एक गौरव के विषय बन गईस। एकर बाद छत्तीसगढ़ी भाखा ल सरकारी दफ्तर, स्कूल अउ कॉलेज म भी बढ़ाये के काम ल शुरू करे गइस । छत्तीसगढ़ी भाखा के इतिहास, भाषा, संस्कृति अउ प्राकृत भाषा ले उभरिस हे। छत्तीसगढ़ी म लोकगीत, कहानी, कहावत अउ जनवला जइसन साहित्यिक धरोहर समेटे हावे। ये भाखा हर हमर लोकजीवन, परंपरा अउ रीति-रिवाज के सच्चा प्रतिबिंब आय। छत्तीसगढ़ी लोकगीत अउ कथा ये छत्तीसगढ़ी भाखा ल अउ जियादा सुघ्घर अउ जीवंत बनावत हे। छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस केवल तिहार नइ, बल्कि हमर भाखा अउ संस्कृति के जीवित रखे अउ ओकर नई ऊँचाई म पहुंचाय के संकल्प के प्रतीक आय। ये दिन पूरा छत्तीसगढ़ म अलग-अलग सांस्कृतिक अउ शैक्षणिक कार्यक्रम होथे। संगोष्ठी, निबंध लेखन, कविता पाठ, लोकगीत अउ नाटक के आयोजन घलो होथे। ये कार्यक्रम मन केवल भाषा अउ संस्कृति के प्रति जागरूकता नइ फैलाथे, बल्कि लोगन ल अपन जड़ से भी जोड़थे। आज के समय म छत्तीसगढ़ी भाखा अउ संस्कृति ल नई दिशा देहे में हमर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के बहुत बडे  योगदान हे। ओकर मानना हे कि छत्तीसगढ़ी भाखा केवल संवाद के माध्यम नइ हे, बल्कि हमर छत्तीसगढ़ के आत्मा अउ पहचान आय। हमर मुख्यमंत्री के दूरदर्शी सोच अउ नीति के कारण छत्तीसगढ़ी भाषा अउ संस्कृति के संरक्षण अउ विकास के खातिर नवा जोश आइस हे। शिक्षा म छत्तीसगढ़ी भाखा ल बढ़ावा देय बर स्कूल अउ कॉलेज के पाठ्यक्रम म छत्तीसगढ़ी साहित्य अउ संस्कृति ल सामिल करे गय हे। सरकारी दफ्तर म छत्तीसगढ़ी भाखा के उपयोग ल बढ़ाय खातिर भी जरूरी नीति लागू करे गय हे, ऐकर ले हमर राजभाषा हर छत्तीसगढ़ी म अउ मजबूत बने हे। हमर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व म छत्तीसगढ़ी साहित्य, लोकगीत अउ नाट्यकला के संरक्षण अउ विकास के खातिर विशेष योजना बनाये जाथ हे। हमर लोक कलाकार अउ साहित्यकार मन ल प्रोत्साहित देहे के खातिर कई ठन आर्थिक सहायता कार्यक्रम ल चलावत हे। छत्तीसगढ़ी साहित्य अकादमी के स्थापना, साहित्यिक मेला अउ डिजिटल प्लेटफॉर्म में छत्तीसगढ़ी भाखा के प्रोत्साहन, ल आगे बढ़ाये के प्रयास करत हे। राजभाषा दिवस के कार्यक्रम मन लोगन ल अपन भाषा अउ संस्कृति के महत्त्व ल समझावत हे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय मानथें कि हमर भाषा अउ संस्कृति हमर राज्य के एकता अउ पहचान ल मजबूत करथे। छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस हर हम सबला ये बात के याद दिलाथे कि भाषा अउ संस्कृति कोनो भी समाज के आत्मा होथे। जऊन समाज अपन भाखा अउ संस्कृति ल जिंदा रखथे, वही समाज हर अपन पहचान ल बनाय राखथे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व म छत्तीसगढ़ी भाखा अउ संस्कृति ल नई ऊँचाई मे पहुंचाय के प्रयास हे छत्तीसगढ़िया बर गौरव के बात आय कि आज ये अवसर म हम सबला ये संकल्प लेना चाही कि अपन भाखा अउ संस्कृति ल केवल संरक्षित करबो, बल्कि हमर बोली भाखा ल अगली पीढ़ी तक पहुंचाय के जिम्मेदारी ला भी निभाबो। छत्तीसगढ़ी भाखा हमर राज्य के आत्मा अउ सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक आय। ऐला सहेजे अउ सम्मान करे बर हमर हर छत्तीसगढ़ियां के जिम्मेदारी हर आय। हम सब मिलके अपन-अपन प्रयास से अपन  धरोहर ल अउ मजबूत बनाय बर काम करबो।

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