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नई शिक्षा नीति:2020 के अंतर्गत प्रदेश में अनेक नवाचार हुए, विश्वविद्यालय अपने स्तर पर भी उच्च शिक्षा के जुड़े नवाचार करें- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नई शिक्षा नीति:2020 के अंतर्गत प्रदेश में अनेक नवाचार हुए हैं। विश्वविद्यालय अपने स्तर पर भी उच्च शिक्षा के जुड़े नवाचार करें। अच्छे प्रयोगों का सदैव स्वागत है। शिक्षा की गुणवत्ता को निरंतर श्रेष्ठ बनाने के प्रयास हों। पैरामेडिकल और नर्सिंग पाठ्यक्रम भी विश्वविद्यालयों द्वारा संचालित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सक्षम युवाओं का निर्माण सशक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए सबसे बड़ी गारंटी मानते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की पहल से इस संदर्भ में नई शिक्षा नीति में अनेक महत्वपूर्ण प्रावधान भी हुए हैं। इस नीति में युवाओं को ज्ञानवान और अनेक विषयों में पारंगत बनाने की रणनीति बनाई गई है। इस नाते मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनेक अभिनव प्रयास इस दिशा में किए गए हैं। मध्यप्रदेश में महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जहां भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यशालाएं आयोजित की गईं, वहीं राज्य सरकार द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा शीर्ष समिति और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में टास्क फोर्स का गठन किया गया। विद्यार्थियों को उनकी रूचि, दक्षता और क्षमता के अनुसार शिक्षा व्यवस्था करने के प्रसार सफल हो रहे हैं। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में प्रदेश अग्रणी है। मध्यप्रदेश का सकल पंजीयन अनुपात राष्ट्रीय अनुपात 28.4 प्रतिशत के मुकाबले 28.9 प्रतिशत है जो एक उपलब्धि है। बहुविषयक शिक्षा में आगे मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालयों द्वारा बहुविषयक शिक्षा प्रदान करने और रोजगार के लिए उपयोगी पाठ्यक्रमों के संचालन की सराहना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में प्रदेश में उच्च शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं पर कुलगुरूओं और उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की है। बताया गया कि विद्यार्थियों को बहुविषयक दृष्टिकोण (मल्टी डिस्पलीनरी एप्रोच) के माध्यम से अन्य विषयों के अध्ययन के लिए प्रेरित करने के निरंतर प्रयास किए जाएं। वर्तमान में प्रदेश के लगभग एक लाख विद्यार्थी वाणिज्य के साथ कला और विज्ञान की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। कला संकाय के 18 हजार विद्यार्थी वाणिज्य और विज्ञान की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। मध्यप्रदेश में विज्ञान संकाय के ऐसे विद्यार्थियों की संख्या 11 हजार है, जिन्होंने कला और वाणिज्य विषय का चयन किया है। इस तरह एक लाख 29 हजार विद्यार्थियों ने बहुविषयक शिक्षा का लाभ लिया है। विद्यार्थी ले रहे खेती किसानी की शिक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनेक बिन्दुओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है। उच्च शिक्षा व्यवस्था में स्नातक स्तर पर कृषि जैसे विषय के अध्ययन के प्रावधान के भी अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं। सात विश्वविद्यालयों और 18 शासकीय स्वशासी महाविद्यालयों में बी.एससी. कृषि पाठ्यक्रम का संचालन हो रहा है। इन पाठ्यक्रामों का लाभ 1189 विद्यार्थी ले रहे हैं। विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में सर्वाधिक 240 विद्यार्थी खेती किसानी की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश में पायलेट ट्रेनिंग के कोर्स के संचालन और एविएशन के सर्टिफिकेट कोर्स के लिए पांच विश्वविद्यालयों ने पहल की है। निश्चित ही युवाओं को इन पाठ्यक्रमों का रोजगार की दृष्टि से पूर्ण लाभ प्राप्त होगा। इन्क्यूबेशन केन्द्रों की सक्रिय भूमिका, र्स्टाट अप्स को पूर्ण प्रोत्साहन प्रदेश में उच्च शिक्षा क्षेत्र में कौशल विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 47 इन्क्यूबेशन सेन्टर प्रारंभ किए गए हैं। इनमें शासकीय विश्वविद्यालय में 16, निजी विश्वविद्यालय में 12 एवं शासकीय स्वशासी महाविद्यालय में 19 इन्क्यूबेशन केंद्र संचालित हैं। देवी अहिल्या विश्व विद्यालय इंदौर को केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पांच करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर इन्क्यूबेशन सेंटर को अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग ने अटल कम्युनिटी इन्नोवेशन सेंटर के लिए 2.5 करोड़ रूपए स्वीकृत किए हैं। इसी तरह जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के लिए 13.4 लाख रूपए स्वीकृत हुए हैं। प्रदेश के 2 निजी विश्वविद्यालयों में भी अटल इन्क्यूबेशन सेंटर्स स्थापित किए गए हैं। इनमें रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल और लक्ष्मीनारायण कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी (एलएनसीटी) भोपाल शामिल हैं। इन्क्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से स्टार्टअप को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय स्तर पर 65 स्टार्ट अप्स तथा 2 निजी विश्वविद्यालयों में कुल 295 स्टार्ट अप्स प्रारंभ हुए हैं। स्टार्ट अप्स को विश्वविद्यालयों ने प्रोत्साहन राशि भी दी है। वर्तमान में कुल लाभान्वित विद्यार्थी संख्या 620 है। पेटेंट के अंतर्गत पेटेंट कार्यालय, भारत सरकार से विश्वविद्यालयों के इन्क्यूबेशन सेंटर्स को कुल 14 पेटेंट प्राप्त हुए हैं। इनमें देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में छह, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में चार, विक्रम विश्वविद्यालय में तीन और बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में एक पेटेंट शामिल हैं। समस्त विश्वविद्यालयों के कुल 27 पेटेंट के आवेदन स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं।  

सीएम ने मंत्री टंक राम वर्मा की मांग पर बीएड कॉलेज खोलने और ट्रांसपोर्ट नगर की व्यवस्था करने की घोषणा

रायपुर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh)  के सीएम विष्णु देव साय ( CM Vishnu Dev Sai) ने बलौदा बाजार (Baloda Bazar)  जिले को बड़ा तोहफा (Gift) दिया. गुरुवार को सीएम बनने के बाद साय पहली बार बलौदा बाजार पहुंचे.इस दौरान सीएम ने दीपावली, राज्य स्थापना दिवस और छठ की बधाई देते हुए जिले वासियों की झोलियां भर दी. सीएम ने कई विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया.  60.20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले विभिन्न 48 निर्माण कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण करने के बाद उन्होंने सभा को संबोधित किया. जिले को मिली ये बड़ी सौगातें इस दौरान सीएम ने मंत्री टंक राम वर्मा की मांग पर बीएड कॉलेज (B.Ed College) खोलने और ट्रांसपोर्ट नगर की व्यवस्था करने की घोषणा की. गुरुवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य गोपाल नारायण व्यास के निधन के कारण प्रोग्राम कैंसल किया गया था. उन्होंने स्व. व्यास के निधन को छत्तीसगढ़ की बड़ी क्षति बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि 60.20 करोड़ रुपए के कामों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया गया. इनको सौंपी घर की चाभी सीएम ने आवास योजना में 2100 मकानों की स्वीकृति और 51 लाभान्वित हितग्राहियों को मकान की चाभी सौंपी. कलेक्टर बलौदा बाजार दीपक सोनी के नवाचार हम होंगे कामयाब से 51 बेटियां बैंगलोर में नौकरी करेंगी. उनको नियुक्ति पत्र दिया गया. उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री रहते डॉक्टर रमन सिंह ने जिला का निर्माण किया.इसे विकसित किया. ‘कोई परेशानी किसानों को नहीं होगी’ सीएम ने कहा- यहां बाबा गुरु घासीदास जी की तपोभूमि गिरौदपुरी में कुतुब मीनार से भी ऊंचा जैतखाम बनाया गया. यहां संत कबीर का आश्रम है, मावली माता और सिद्धेश्वर महादेव का मंदिर है. संस्कृति और उद्योग में भी यह जिला आगे है. नया उद्योग नीति से यह जिला और आगे बढ़ेगा. सिंगल विंडो सिस्टम से फायदा होगा. उन्होंने कहा कि 14 नवंबर से होने वाली धान खरीदी में इतनी व्यवस्था होगी कि कोई परेशानी किसानों को नहीं होगी. ‘समितियों से सुलह कर लिया जाएगा’ इस बीच सीएम ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने यहां की मांग पर कहा कि बीएड कॉलेज और ट्रांसपोर्ट नगर बनाए जाने की घोषणा करता हूं. उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ बनाना है. इसके लिए विधर्मी और असामाजिक तत्व के बातों से गुमराह नहीं होना है. वहीं, सहकारी समिति के हड़ताल से धान खरीदी प्रभावित होने के सवाल पर कहा कि 14  नवंबर से ही धान की खरीदी होगी, समितियों से सुलह कर लिया जाएगा.

बड़ा खुलासा: पंजाब उपचुनाव में गैंगस्टर की एंट्री! इलेक्शन कमिशन को लिखी चिट्ठी में बड़ा खुलासा

पंजाब पंजाब में होने जा रहे विधानसभा उप-चुनाव से पहले एक बड़ी खबर सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार इन उपचुनाव में गैंगस्टर की एंट्री हो गई है। अभी-अभी एक खबर सामने आई है कि गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और गृह मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखी है, जिससे बड़ा खुलासा हुआ है। इस चिट्ठी में सुखजिंदर सिंह रंधावा ने चुनाव कमिशन को गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया की शिकायद दी है। उन्होंने कहा कि जग्गू भगवानपुरिया डेरा बाबा नानक के लोगों को धमका रहा हैं। जेल में बंद होने के बावजूद वह Video call करके लोगों को धमकी दे रहे हैं। डीएसपी को शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। बता दें कि डेरा बाबा नानक से सांसद रंधावा की पत्नी जतिंदर कौर रंधावा कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। इस मामले को लेकर AAP ने पलटवार किया है। ने कहा कि ये मामला बेबुनियाद है। का इस गैंगस्टर कल्चर से कोई लेना देना नहीं है। गैंगस्टर कल्चर कांग्रसव अकाली दल की देन है। कांग्रेस को अपनी हार स्पष्ट नजर आ रही है। सभी सीटों पर कांग्रेस हार रही है।

भाजपा विधायकों को मार्शलों के जरिए हटाए जाने पर मुख्यमंत्री साय बोले – कांग्रेस के मंसूबे नहीं होंगे कामयाब

रायपुर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गुरुवार को धारा 370 को हटाए जाने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे भाजपा विधायकों को मार्शल द्वारा हटाए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए कहा कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में अशांति बहस करना चाहती है, लेकिन वह कभी अपने मंसूबे में कामयाब नहीं होने वाली है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जब से जम्मू कश्मीर में केंद्र द्वारा धारा 370 और 35 ए को हटाया गया है, तब से जम्मू कश्मीर में खुशहाली आई है, अमन चैन स्थापित हुआ है वहां शांति आई है, और आतंकवाद की घटनाओं में 70% की कमी आई है, नागरिकों की मृत्यु में 80% की कमी आई है, और विदेशी नागरिकों के पर्यटन में 300% का इजाफा हुआ है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का बजट शत-प्रतिशत बढ़ा है, और आतंकवाद दो-तीन जिलों में सिमट कर रह गया है. केंद्र शासन द्वारा 80,000 करोड़ का विशेष पैकेज दिया गया, और 56000 करोड़ का निवेश वहां पर आया है. केंद्र द्वारा यह सब धारा 370 और 35 से हटाने के कारण हुआ, जो कांग्रेस को रास नहीं आ रही है. इसी के साथ मुख्यमंत्री साय ने गुरुवार को विधानसभा में धारा 370 के बहाली के पक्ष में प्रस्ताव लाए जाने को ठीक नहीं बताते हुए कहा कि जिस तरीके से भाजपा की विधायकों को मार्शल के द्वारा विधानसभा से बाहर किया गया, यह लोकतंत्र की हत्या है. इसको देश की जनता कभी बर्दाश्त करने वाली नहीं है.

किसान संजय पोरला ने अपनी पुरानी कार को लकी मानते हुए कार को फूलों से सजाकर समाधि दी

गुजरात आपने अक्सर साधु-संतों को समाधि लेते सुना होगा लेकिन यहां एक शख्स ने अपनी कार को ढोल-नगाड़े के साथ समाधि दे दी। दरअसल, संजय पोरला नामक एक किसान ने 2013 खरीदी अपनी कार को बेहद लकी मानता था और उसे बेचना नहीं चाहता था। फिर उसने अपनी पुरानी कार को विधि-विधानपूर्वक समाधि देने का सोचा। इसके लिए किसान ने एक भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया। दरअसल, पूरा मामला गुजरात के अमरेली जिले में लाठी तालुका का है। यहां के पाडरशिंगा गांव में रहने वाले किसान संजय पोरला ने अपनी पुरानी कार को लकी मानते हुए कार को फूलों से सजाकर समाधि दी। बताया जा रहा है कि संजय पोरला ने साल 2013 में कार खरीदी थी जिसे वह अपने लिए लकी मानते हैं। संजय पोरला का मानना है कि जबसे उन्होंने कार खरीदी, उसके बाद से उन्हें आर्थिक समृद्धि नसीब हुई। साथ ही मान-प्रतिष्ठा भी बढ़ी। इसके बाद उन्होंने सूरत जाकर बिजनेस भी शुरू किया। वहीं अब कार पुरानी हुई तो किसान ने उसे बेचना मुनासिब नहीं समझा और उसे समाधि देने की सोची। इसे लिए उन्होंने समाधि कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने आसपास के साधु-संतों समेत अपने रिश्तेदारों को भी आमंत्रित किया। संजय पोरला ने इस कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए 4 लाख रुपए का खर्च किया। संजय पोरला ने आमंत्रण कार्ड बांटकर रिश्तेदारों सहित 1500 लोगों को आमंत्रित किया, सबके लिए भंडारे का आयोजन किया। वहीं ढोल-नगाड़ों के साथ गरबा कार्यक्रम आयोजित करके अपनी लकी कार को अपनी ही जमीन कार में समाधि दी और इन लम्हों हमेशा के लिए कैद कर लिया। संजय पोरला कहते हैं कि कार को जिस जमीन में समाधि दी गई है अब आने वाले दिनों में वहां वृक्षारोपण करेंगे।  

मुख्यमंत्री ने ‘हरियाणा सदस्यता अभियान’ की शुरुआत की, सदस्यता का नवीनीकरण कर अत्यंत गौरवान्वित हूं

चंडीगढ़ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संत कबीर कुटीर पर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से ओत-प्रोत विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के ‘हरियाणा सदस्यता अभियान’ की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस अभियान के अंतर्गत अपनी सदस्यता का नवीनीकरण कर अत्यंत गौरवान्वित हूं। सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर-कमलों से शुरू हुआ यह अभियान प्रदेश के ‘हर गांव-हर गली-हर घर-हर व्यक्ति’ तक पहुंचेगा और सभी को ‘विकसित भारत-विकसित हरियाणा’ के हमारे संकल्प से जोड़ेगा। उन्होंने हरियाणा की जनता से अपील की कि वह टोल-फ्री नंबर-8800002024 पर मिस्ड-कॉल अथवा #NamoApp के माध्यम से या https://narendramodi.in/bjpsadasyata2024/GG5TY1 इस लिंक पर क्लिक करके भाजपा की सदस्यता ग्रहण करें और ‘अंत्योदय’ के संकल्प और नॉन-स्टॉप हरियाणा को विकसित बनाने के हमारे ध्येय को साकार करने में अपनी भूमिका निभाएं।  

फिरोजाबाद में भीषण सड़क हादसा, हादसे में तीन की दर्दनाक मौत, कैंटर से टकराया था टेंपो ट्रैवलर

फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा हो गया। यहां पर अयोध्या से वृंदावन जा रहे श्रद्धालुओं से भरा टेंपो-ट्रैवलर एक कैंटर से टकरा गया। इस भयानक दुर्घटना में बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो गई। ट्रैवलर चालक सहित पांच से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। जानकारी होने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। चालक समेत 5 से अधिक लोग घायल जानकारी के मुताबिक, अयोध्या-वृंदावन दर्शन करने जा रहे टेंपो-ट्रैवलर सवार श्रद्धालुओं को कैंटर ने एक्सप्रेसवे पर टक्कर मार दी। इस घटना में एक बच्चे और महिला सहित 3 की मौत हो गई। वहीं, ट्रैवलर चालक समेत पांच से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए जिला संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। अन्य घायलों को सैफई पीजीआई और मेडिकल कॉलेज फिरोजाबाद भेजा गया है। मनीष कुमार (38) निवासी गांव मारौली थाना उम्मरगांव जिला बलसाड़, गुजरात जो कि टेंपो-ट्रैवलर का चालक है। वह ट्रैवलर में 19 श्रद्धालुओं को लेकर अयोध्या और वृंदावन दर्शन के लिए गत 2 नवंबर को निकला था। हादसे में बच्चे समेत हुई तीन की मौत बताया जा रहा है कि अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के बाद ट्रैवलर चालक सभी श्रद्धालुओं को लेकर 7 नवंबर की शाम अयोध्या से वृंदावन दर्शन के लिए जा रहा था।शुक्रवार सुबह वह थाना नसीरपुर क्षेत्र के अंतर्गत किलोमीटर संख्या 54 के समीप पहुंचा। अचानक पीछे से एक कैंटर उसको ओवरटेक करते हुए तेजी से निकल गया। कैंटर से बचने के लिए ट्रैवलर चालक ने वाहन को बाईं ओर मोड़ा। इस दौरान एक्सप्रेस-वे पर पहले से खड़े एक कैंटर में टेंपो-ट्रैवलर घुस गया। इस घटना में युग (13) निवासी खरड़पुर जिला सिलवास दमन, दादरनगर हवेली की मौत हो गई। मृतकों की अभी कुल संख्या तीन बताई जा रही है। फिलहाल, पुलिस इस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।

2 करोड़ लागत से बनाया पुल अपनी असली उद्देश्य के बजाय फसल सुखाने के आ रहा काम

गरियाबंद गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र के गोहरापदर में एक उच्च स्तरीय पुल का निर्माण पिछले कुछ सालों से चर्चा का विषय बना हुआ है. ओडिसा सीमा से लगे इस गांव में 75 मीटर लंबे और 2 करोड़ की लागत से बने पुल का निर्माण 2015 में पीडब्ल्यूडी के सेतु निगम शाखा ने किया था. हालांकि, यह पुल अब अपनी असली उद्देश्य के बजाय फसल सुखाने और मिंजाई के लिए इस्तेमाल हो रहा है. दरअसल, यह पुल पंचायत मुख्यालय को दूसरे मोहल्ले से जोड़ता है और आगे जाकर ओडिशा के कोतमेर गांव से जुड़ता है. यह क्षेत्र एक ग्रामीण इलाका होने के कारण प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के मापदंडों पर खरा नहीं उतरता था. बावजूद इसके, 2015 में यहां उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया गया. पुल पर वाहनों की आवाजाही कम होने के कारण अब किसान इस पुल पर धान और मक्का की फसलें सुखाने के लिए उपयोग कर रहे हैं. इतना ही नहीं, फसलों की रखवाली के लिए पुल के ऊपर किसान अस्थायी झोपड़ियां भी बना चुके हैं. ग्रामीण इलाके में स्थित इस पुल से वाहनों का आवागमन काफी कम होता है. हालांकि, धान सप्लाई सीजन के दौरान ओडिशा से हर दिन 10 से 12 पिकअप और ट्रैक्टर पुल से गुजरते हैं. इस पुल की मुख्य समस्या यह है कि इसका इस्तेमाल केवल कृषि कार्यों के लिए हो रहा है, जबकि इसे यातायात के लिए बनवाया गया था. तूआस नाले की चौड़ाई और पुल निर्माण जिस नाले पर यह पुल बनाया गया है, उसकी चौड़ाई 15 मीटर से भी कम थी, लेकिन सर्वे में इसका डूबान क्षेत्र 30 मीटर से ज्यादा पाया गया था. इसके बाद 2015 में इस पुल के निर्माण की मंजूरी दी गई थी. 2014 में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, धुपकोट जलाशय का उलट भी किया गया था, जिससे नाले में पानी का दबाव कम हुआ और बाढ़ का खतरा भी टल गया. इस पुल के बनने के बाद से अब तक किसी प्रकार की बाढ़ की समस्या उत्पन्न नहीं हुई है. अधिकारियों ने मामले से पल्ला झाड़ा जब इस मामले में पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस कार्य को “पुराना मामला” बताकर जवाब देने से इंकार कर दिया. अधिकारियों ने इसे एक पुरानी परियोजना मानते हुए मामले से पल्ला झाड़ लिया. नकली पुल पर किया गया फिजूलखर्ची का आरोप मैनपुर ब्लॉक के ग्रामीणों ने गोहरापदर पुल की तुलना में शोभा क्षेत्र में पांच अन्य नदियों और नालों पर पुल निर्माण की मांग की है. जिला पंचायत उपाध्यक्ष संजय नेताम ने कहा कि शासन ने गैर-जरूरी स्थानों पर करोड़ों रुपए खर्च किए, जबकि जरूरतमंद इलाकों की अनदेखी की गई. उन्होंने इस पूरी स्थिति को “फिजूलखर्ची” करार देते हुए कहा कि अगर इस पुल का सही इस्तेमाल हुआ होता तो यह ग्रामीण क्षेत्र की यातायात व्यवस्था में सुधार करता, लेकिन अब इसे कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. जरूरतमंद क्षेत्रों में पुल निर्माण की मांग तेज बता दें, ग्रामीणों ने लंबे समय से पुल निर्माण के लिए संघर्ष किया है, और अब उनकी यह मांग और भी जोर पकड़ रही है कि जरूरतमंद क्षेत्रों में प्राथमिकता के साथ पुलों का निर्माण किया जाए. इस मामले पर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया आने की संभावना है, क्योंकि ग्रामीण इस मुद्दे को लेकर और अधिक सक्रिय हो गए हैं.

हिंदुओं पर कहर जारी, खामोश यूनुस सरकार, पुलिस और सेना भी शामिल, अब भारत ने दी सख्त चेतावनी

ढाका बांग्लादेश के चटगांव में हिदू समुदाय पर हालिया संगठित हमले से तनाव बढ़ता जा रहा है। इन घटनाओं में बांग्लादेशी पुलिस और सेना पर अत्याचार में शामिल होने के आरोप लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में हिदुओं के खिलाफ हिंसा के खौफनाक दृश्य दिखाई दे रहे हैं, जो भारत के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। भारत सरकार ने इस घटना पर सख्त प्रतिक्रिया दी है और बांग्लादेश सरकार से हिदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है। गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्टों के चलते ये हिंसा भड़की। उन्होंने बांग्लादेश में चरमपंथियों पर सख्त कार्रवाई की अपील करते हुए मांग की कि हिदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। चटगांव में क्या हुआ था? चटगांव के हजारी गली इलाके में 5 नवंबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई एक विवादित टिप्पणी के बाद तनाव बढ़ा। जमात-ए-इस्लामी के सदस्य उस्मान अली द्वारा हिदू धर्म और इस्कॉन पर अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट की गई, जिससे हिदू समुदाय में आक्रोश फैल गया। जब हिदू समुदाय ने इस टिप्पणी के खिलाफ प्रदर्शन किया, तो पुलिस और सेना ने उन पर कार्रवाई की। इस दौरान कई हिदू लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया, और 49 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने करीब 582 लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया है। तसलीमा नसरीन ने शेयर किया था वीडियो प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें पुलिस और सुरक्षाबलों को प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाते और गोलियां चलाते देखा जा सकता है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, सुरक्षा बलों ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी तोड़ दिया, जिससे हिंसा के सबूत जुटाना मुश्किल हो गया। हिदू नेताओं ने लगाए भेदभाव के आरोप चटगांव मेट्रोपॉलिटन पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर ईंट और एसिड फेंके, जिससे नौ अधिकारी घायल हो गए। लेकिन हिदू नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने भेदभावपूर्ण तरीके से हिदू समुदाय को निशाना बनाया और उनके घरों में भी तोड़फोड़ की, जबकि हिंसा में मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल थे। भारत की तरफ से कड़ा विरोध बांग्लादेश में हिदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर भारत सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर चिंता जाहिर की है। बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस ने हिंसा की निंदा की है, लेकिन हिदुओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम न उठाने पर उनके रवैये पर सवाल उठ रहे हैं। भारत ने यूनुस सरकार से मांग की है कि हिदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और चरमपंथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

पटवारी अपने हल्के के लोगों के राजस्व समस्याओं का प्रकरण दर्ज कर करें निराकरण-कलेक्टर

पटवारी अपने हल्के के लोगों के राजस्व समस्याओं का प्रकरण दर्ज कर करें निराकरण-कलेक्टर कलेक्टर ने तहसील पुष्पराजगढ़ के पटवारियों की की ओरियन्टेशन बैठक  अनूपपुर कलेक्टर  हर्षल पंचोली ने कहा है कि तहसील पुष्पराजगढ़ के पटवारी अपने कार्य में गंभीरता लाएं तथा लंबित राजस्व प्रकरणों का निराकरण गंभीरता के आधार पर कराएं। उन्होंने कहा कि पटवारी प्रधानमंत्री किसान कल्याण योजना की पेंडेंसी, फौती नामांतरण, बंटवारा, नक्शा तरमीम के प्रकरणों का निराकरण जल्द से जल्द करें तथा पटवारी हर माह फौती नामांतरण प्रकरणों के प्रतिवेदन तहसील कार्यालय में प्रस्तुत करें। इसी प्रकार कलेक्टर ने पटवारियों को यह भी निर्देश दिए कि पटवारी खुद अपने हल्के में जाकर लोगों के राजस्व समस्याओं के प्रकरण दर्ज कर कार्यों का निराकरण कराएं। लोगों के सामने अपनी सकारात्मक छवि एवं साख बनाएं। सभी प्रकरणों को आरसीएमएस पोर्टल में मौके पर जाकर दर्ज कराएं। कलेक्टर  हर्षल पंचोली आज अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ तहसील कार्यालय में आयोजित ओरियन्टेशन बैठक में पटवारियों को निर्देश दे रहे थे। बैठक में अनुविभागीय अधिकारी पुष्पराजगढ़  सुधाकर सिंह बघेल, अधीक्षक भू अभिलेख प्रदीप मोगरे, तहसीलदार पुष्पराजगढ़  गौरीशंकर शर्मा, नायब तहसीलदार  कौशलेन्द्र मिश्रा सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं पटवारी उपस्थित थे। बैठक में कलेक्टर ने पटवारी को निर्देशित किया कि पटवारी टेक्निकल कार्यों को जल्द से जल्द सीखने तथा राजस्व प्रकरणों का निराकरण संवेदनशीलता एवं गंभीरता के आधार पर कराए तथा अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र के लंबित प्रकरणों को भी निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने नए पटवारियों को भी निर्देशित किया की नए पटवारी अपने कार्य को संवेदनशीलता से रुचि लेकर करें। राजस्व का कार्य सारा पोर्टल पर किया जाता है, इस पोर्टल पर सभी पटवारी को कार्य करना आना चाहिए। सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों का भी निराकरण गंभीरता के आधार पर कराएं तथा पीएम किसान योजना के पेंडिंग कार्य जल्द से जल्द पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि तहसील स्तर पर भी जहां पीएम किसान सम्मान निधि योजना के प्रकरण ज्यादा है, वहां लोक सेवा केन्द्र व बैंकर्स से संपर्क कैंप आयोजित कर लोगों के लंबित कार्यों का निराकरण कर पीएम किसान योजना के कार्यों में अच्छा रिजल्ट लाकर दिखाएं। बैठक में कलेक्टर ने पटवारी को यह भी निर्देश दिए की जो व्यक्ति बटवारा करना चाहते हैं, पटवारी मौके पर पहुंचकर उनका बंटवारा करने की कार्यवाही सुनिश्चित करें तथा बंटवारा के पश्चात उनका ई-केवाईसी भी करना सुनिश्चित करें तथा आधार सीडिंग के लंबित प्रकरणों का भी कलेक्टर ने समीक्षा की तथा पटवारी को आवश्यक दिशानिर्देश दिए।

व्हाइट हाउस के मुताबिक राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर होने के फैसले को सही मानते हैं बाइडेन !

वाशिंगटन व्हाइट हाउस के मुताबिक प्रेसिडेंट जो बाइडेन का मानना है कि राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर होने का उनका फैसला ‘सही’ था। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरिन जीन-पियरे ने एक ब्रीफिंग के दौरान यह बात कही। यह राष्ट्रपति-चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत की घोषणा के बाद पहली ब्रीफिंग थी। बता दें इस चुनाव में बाइडेन की जगह डेमोक्रेट उम्मीदवार बनीं कमला हैरिस जीत दर्ज नहीं कर सकी। पियरे ने कहा, “उन्हें (बाइडेन) बहुत गर्व था। जब उन्होंने मशाल उपराष्ट्रपति को सौंपने का फैसला किया, तो उन्हें लगा कि उस समय यह सही फैसला था। उन्हें (बाइडेन) विश्वास था कि वह (कमला हैरिस) तैयार थीं।” पियरे ने सीधे तौर पर यह जवाब नहीं दिया कि क्या बाइडेन को अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ से हटने का अफसोस है या नहीं? जीन-पियरे ने राष्ट्रपति के रूप में बाइडेन की उपलब्धियों का बखान करने की कोशिश की, जबकि डेमोक्रेट्स की हार के लिए कोई सीधा कारण नहीं बताया। व्हाइट हाउस अधिकारी ने कहा, “हम जो भी उपलब्धियां हासिल कर सके, उसके बावजूद, कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल परिस्थितियां रहीं, जाहिर है, कोविड-19 के कारण सप्लाई चेन में व्यवधान उत्पन्न हुआ, और इसका राजनीतिक प्रभाव कई पदाधिकारियों पर पड़ा।” इससे पहले राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ऐलान किया कि उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ‘लड़ाई जारी रखेंगी’ भले ही वह राष्ट्रपति पद का चुनाव हार गई हों। उन्होंने हैरिस को ‘पीढ़ियों का नेता’ करार दिया। बाइडेन ने बुधवार को एक बयान में कहा, “वह उद्देश्य, दृढ़ संकल्प के साथ लड़ाई जारी रखेंगी। वह सभी अमेरिकियों के लिए चैंपियन बनी रहेंगी।” उन्होंने कहा, “सबसे बढ़कर, वह एक ऐसी नेता बनी रहेंगी, जिन्हें हमारी पीढ़ियां याद रखेंगी।’ बाइडेन ने कहा, “आज अमेरिका ने उस कमला हैरिस को देखा, जिन्हें मैं जानता हूं और जिनका मैं प्रशंसक हूं।” बाइडेन ने कहा कि 2016 में अपनी पार्टी का नामांकन प्राप्त करने के बाद कमला को अपना उपराष्ट्रपति चुनना उनका पहला फैसला था और यह ‘मेरा सबसे अच्छा निर्णय था।’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “उनकी दास्तां अमेरिका की सबसे अच्छी कहानी का प्रतिनिधित्व करती है। और जैसा कि उन्होंने आज स्पष्ट किया, मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह उस कहानी को लिखना जारी रखेंगी।”

टेक्निकल विंग के लिये 177 पद मंजूर, ट्राईबल टेक्निकल विंग सेट-अप को मंजूरी

अब ट्राइबल का खुद का टेक्निकल विंग बनायेगा जनजातीय विकास की अधोसंरचनाएँ प्रदेश में जनजातियों के विकास से जुड़ी सभी प्रकार की अधोसंरचनाएँ अब जनजातीय कार्य विभाग का खुद का टेक्निकल विंग बनायेगा टेक्निकल विंग के लिये 177 पद मंजूर, ट्राईबल टेक्निकल विंग सेट-अप को मंजूरी भोपाल प्रदेश में जनजातियों के विकास से जुड़ी सभी प्रकार की अधोसंरचनाएँ अब जनजातीय कार्य विभाग का खुद का टेक्निकल विंग बनायेगा। विभाग में नये टेक्निकल विंग की स्थापना की गई है। राज्य शासन द्वारा ट्राईबल टेक्निकल विंग सेट-अप को मंजूरी दे दी गई है। इसके लिये 177 नये पद भी शासन ने स्वीकृत किये हैं। इसमें अधीक्षण यंत्री (एस.ई) का एक पद, कार्यपालन यंत्री (ई.ई) के 6, सहायक यंत्री (सिविल) के 25, सहायक यंत्री (विद्युत) के 3, उपयंत्री (सिविल) के 123, उपयंत्री (विद्युत) के 9, प्रगति सहायक के 7 तथा निर्माण सहायक, सहायक मानचित्रकार एवं अनुरेखक के एक-एक पद को मंजूरी दी गई है। पदों की मंजूरी मिलने के बाद अब जनजातीय कार्य विभाग द्वारा विभागीय स्तर या अन्य शासकीय भर्ती एजेन्सीज के माध्यम से टेक्निकल विंग स्टॉफ की भी जल्द से जल्द भर्ती की जायेगी। ट्राईबल टेक्निकल विंग के हेड अधीक्षण यंत्री (एसई) होंगे, जो जनजातीय कार्य मुख्यालय से विभागीय निर्माण कार्यों का सुपर विजन करेंगे। इनके अधीन 6 ईई होंगे। एक ईई मुख्यालय के कार्यों के अलावा भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग के सभी जिलों का काम देखेंगे। एक ईई इंदौर मुख्यालय से इंदौर एवं उज्जैन संभाग के सभी जिलों का काम संभालेंगे। सागर और जबलपुर संभाग के जिलों के कार्यों के लिये भी एक-एक ईई को दायित्व सौंपा गया है। ग्वालियर के ईई ग्वालियर के साथ-साथ चंबल संभाग तथा शहडोल में पदस्थ ईई शहडोल सहित रीवा संभाग के सभी जिलो में विभागीय निर्माण कार्यों को समय पर पूरा कराने तथा मॉनीटरिंग के लिये उत्तरदायी होंगे। उल्लेखनीय है कि अब तक जनजातीय कार्य विभाग के अधीन स्कूल, छात्रावास, आश्रम शालाएँ, क्रीड़ा परिसर, कन्या शिक्षा परिसर, प्रशासनिक भवन आदि विभागीय संरचनाएँ पीडब्ल्यूडी, पीआईयू, भवन निर्माण इकाई, एम.पी. हाऊसिंग बोर्ड जैसी निर्माण एजेंसियों से कराये जाते थे। इसमें बहुत समय ज्यादा लग जाता था और निर्माण कार्य की लागत भी बढ़ जाती थी। अब जनजातीय कार्य विभाग अपने खुद के टेक्निकल विंग के जरिये निर्धारित लागत तक के विकास एवं उन्नयन कार्य ओपन टेण्डर के जरिये अपने नियम-शर्तों एवं तय समय-सीमा में ही करा सकेगा। इस टेक्निकल विंग कितनी लागत के निर्माण कार्य कराये जाने हैं, यह जनजातीय कार्य विभाग तय करेगा।  

कमलनाथ ने बताया नोटबंदी भारतीय अर्थव्यवस्था का काला दिन

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आठ साल पहले आज ही के दिन नौ नवंबर 2016 को लागू की गई नोटबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि नोटबंदी ने देश की अर्थव्‍यवस्था की कमर तोड़ दी थी। इतिहास में इसका उल्‍लेख भारतीय अर्थव्यवस्था के काले दिन के रूप में हमेशा होता रहेगा। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार को कहा, आज ही के दिन आठ नवंबर 2016 को नरेंद्र मोदी सरकार ने नोटबंदी लागू कर देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी थी। नोटबंदी के आठ वर्ष बाद भी आज तक देश उसकी मार से उबर नहीं पाया है। जिन उद्देश्यों को लेकर नोटबंदी की गई थी, उसका भी कहीं अता पता नहीं है। कमलनाथ ने नोटबंदी के चलते बैंको तक वापस आई रकम का हवाला देते हुए कहा, एक आंकड़े के मुताबिक नोटबंदी के बाद लगभग 99 प्रतिशत पैसा वापस बैंकों में आ गया, जो साबित करता है कि नोटबंदी से कालेधन पर वार करने का सरकार का दावा झूठा निकला। नोटबंदी से आतंकवाद की कमर तोड़ने की भी बात कही गई थी, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। देश में आतंकी घटनाएं नोटबंदी के बाद भी लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा, नोटबंदी से सिर्फ गरीबों की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर डाका डाला गया। गरीबों की छोटी-छोटी बचत नोटबंदी से खत्म हो गई। सैकड़ों लोग कतार में मर गए, कई शादियां टूट गईंं, लेकिन इस सरकार के पास नोटबंदी की सफलता के नाम पर सिर्फ झूठे दावे और आंकडे़ ही हैं। 1000 रुपये के नोट बंद कर 2000 रुपये के नोट चलन में लाना और फिर ये कहना कि बडे़ नोट भ्रष्टाचार रोकने के लिए बंद किए गए, सरकार का हास्यास्पद तर्क नजर आया। 2000 रुपये का नोट क्यों लाया गया था, और क्यों वापस लिया गया, आज तक इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ज्ञात हो कि काले धन पर रोक, आतंकवाद पर अंकुश, भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के मकसद से नौ नवंबर 2016 को नोटबंदी अमल में लाई गई थी।

नए एंड्रायड फोन की परफॉर्मेंस बरकरार रखने के लिए करें ये जरूरी उपाय

आपने बेस्ट स्पेसिफिकेशन वाला नया फोन खरीद तो लिया, लेकिन यह सालो साल चलें इसके लिए जरूरी है कुछ बातों का ख्याल रखा जाएं। आज आपको इसके बारे में कुछ आसान टिप्स देते हैं। फोन के सेटअप को देखें आपने फोन खरीद तो लिया, लेकिन लेते समय उसके सेटअप चेक करना जरूरी है। फोन के सेटअप के लिए सबसे पहले उसमें सिम लगाकर ऑन करें और जो भी स्वीकृति वह मांगे उसे देकर सेटअप का प्रोसेस आगे बढ़ाएं। अब मोबाइल नेटवर्किंग सेटिंग और वाइ-फाइ के ऑप्शन पर जाएं। अगर वाइ-फाइ उपलब्ध है तो जरूर कनेक्ट करके देखें, इससे कनेक्टिविटी की समस्या का अंदाजा हो जाएगा। अगर कोई इशू दिखें तो अपनी डिवाइस को आप समय रहते चेंज करा सकते हैं। मोबाइल नेटवर्क पर इंटरनेट कनेक्टिविटी का कोई इशू तो नहीं यह भी चेक करें। चार्जर चेक करें आपके नए फोन का चार्जर ठीक तरह से काम कर रहा है या नहीं चेक करें। इसके लिए इसे खरीदते समय शॉप पर ही चार्ज करके देखें, साथ ही ध्यान दे कि ठीक से कनेक्ट हो रहा है या नहीं। चार्जिंग में कोई भी परेशानी दिखें तो फौरन विक्रेता से शिकायत करें। सभी एक्सेसरीज चेक करें आपको फोन के साथ सभी एक्सेसरीज मिली है या नहीं। इस बात को सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल फोन के सेल्स पैक पर प्रिंटेड एक्सेसरीज लिस्ट को चेक करें और अपने सेल्स पैक के अंदर देखें कि वहीं सारी एक्सेसरीज है या नहीं। फोन का डिस्प्ले व कैमरा या अन्य किसी जगह कोई स्क्रैच या टूट फूट दिखें तो उसी समय वापिस कर दें।अगर फोन ऑनलाइन लिया है तो 24 घंटे के अंदर कंप्लेंट रजिस्टर करें। कॉलिंग चेक करें नए फोन में कॉलिंग चेक करने की क्या जरूरत है? ऐसा सोचकर हम इसे चेक नहीं करते, लेकिन यह सबसे बड़ी परेशानी बन सकता है। फोन का मुख्य काम तो कॉलिंग ही होता है इसलिए कॉल करके देखें कि आपकी कॉल में स्पीकर से आवाज क्लियर आ रही है, आवाज में कोई डिस्टर्बेंस तो नहीं, डबल वॉयस तो नहीं आ रही आदि। अगर ऐसी कोई भी परेशानी महसूस हो तो शिकायत करें। जब आप कॉल करके देखेंगे तभी सभी परेशानियों का सटीक रूप से पता चलेगा। प्रीलोडेड अनवांटेड एप्स को डिसेबल करें आजकल सभी स्मार्टफोन में कुछ प्रीलोडेड एप्स आते हैं। इनमें से जिनका आप इस्तेमाल नहीं करते, उन्हें हटा सकते है। इसके लिए सेटिंग में जाकर एप को अनइंस्टॉल करें, अगर अनइंस्टॉल नहीं हो रहा तो डिसेबल कर दे। ऐसा करने का फायदा यह होगा कि मैमोरी खाली हो जाएगी और स्टोरेज कैपेसिटी बढ़ जाएगी। नए फोन में जीमेल अकाउंट को एक्टिवेट करें नए स्मार्टफोन में जीमेल अकाउंट को एक्टिवेट करें। इससे आप फोन में न केवल मेल चेक कर सकेंगे बल्कि अपने सभी जरूरी कॉन्टैक्ट्स को सिंक भी कर सकेंगे। आप गूगल प्ले स्टोर से भी जरूरी एप्स डाउनलोड कर सकेंगे। इसलिए फोन में जीमेल का सेटअप होना जरूरी है। सॉफ्टवेयर अपडेट करें भले ही आपका फोन नया है लेकिन इसे भी अपडेट करते रहने की जरूरत है और निर्माता कंपनियां समय-समय पर अपडेट नोटिफिकेशन भेजती रहती है क्योंकि आपका फोन फैक्ट्री से बनने के फौरन बाद आपको नहीं मिल जाता और जब तक यह बिकता है तब तक बहुत से एप्स में नए अपडेट आ चुके होते है।जब आप अपने स्मार्टफोन का सेटअप कर लें तो सॉफ्टवेयर अपडेट को भी चेक करें। अगर किसी नए अपडेट का नोटिफिकेशन दिखें तो फौरन अपडेट करें। फोन में सॉफ्टवेयर अपडेट करते रहने से उसकी परफॉर्मेंस बढ़ती है। खरीदते समय कुछ एप्स भी डाउनलोड करके देखें अगर कोई परेशानी आएं तो फोन को चेंज करा दें क्योंकि बहुत से फोन में गूगल प्ले स्टोर क्रैश होने की शिकायत मिलती है। डिवाइस मैनेजर आपके एंड्रायड फोन में एक फीचर एंड्रायड डिवाइस मैनेजर होता है, अगर फोन खो जाएं तो एंड्रायड डिवाइस मैनेजर आपको इंफॉर्म करेगा कि डिवाइस कहां है, इतना ही नहीं फोन चोरी हो गया तो आप इस फीचर को इनेबल करने के बाद डाटा को डिलीट भी कर सकते है। इसलिए फोन की सेटिंग में जाकर एंड्रायड डिवाइस मैनेजर को इनेबल जरूर करें। फोन में बैकअप और नोटिफिकेशन की सेटिंग करें फोन में नोटिफिकेशन और बैकअपक की सेटिंग करके देखें। आपको जिन एप्स के नोटिफिकेशन नहीं चाहिए, उन्हें टिक कर दें। इससे बैटरी और मैमोरी दोनों बचेंगे। फोन में डाटा बैकअप की सेटिंग करे,ऐसा करने से डाटा सेव होगा। नए फोन में फेसबुक, व्हाट्स एप चलाकर देखें। बहुत बार इन एप्स के क्रैश होने की समस्या भी नजर आई है।  

एमपी हाईकोर्ट ने सीजी के लोहारीडीह हत्याकांड मामला में रिपोस्टमार्टम की दी अनुमति

जबलपुर छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के लोहारीडीह में संदिग्ध मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। कोर्ट ने मृतक शिवप्रसाद साहू की बेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए रिपोस्टमार्टम की अनुमति दी है। साथ ही अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार को सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की डबल बैंच में हुई। दरअसल, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को मध्यप्रदेश के जूरिडिक्शन में केस फाइल करने की छूट दी थी। याचिकाकर्ता ने रिपोस्टमार्टम की मांग को लेकर एमपी की जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताते हुए कब्र खोदकर शव को निकालने और दोबारा पोस्टमार्टम कराने का निर्देश दिया। इससे पहले इस मामले को सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया था। सिंगल बेंच के निर्णय को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में याचिका दायर की गई थी। ये है पूरा मामला छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के लोहारीडीह में एक सप्ताह के अंदर 3 लोगों की अलग-अलग वजह से जान चली गई। 14 सितंबर की दरमियानी रात शिवप्रसाद साहू की लाश मध्यप्रदेश के बिरसा थाने के क्षेत्र में पेड़ से लटकती मिली थी। शव मिलने के बाद ग्रामीणों ने हत्या के शक पर पूर्व सरपंच रघुनाथ साहू के घर को आग लगा दी, जिससे रघुनाथ साहू की जलने से मौत हो गई। वहीं इस मामले में पुलिस ने 33 महिला समेत 69 ग्रामीणों को हत्या के शक में गिरफ्तार किया था। इसी बीच 19 सितंबर को हत्या के आरोप में बंद प्रशांत साहू की जेल में मौत हो गई थी। मृतक के बॉडी में गहरे चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशांत साहू की मौत पुलिस पिटाई के चलते जेल में मौत हुई है। इसके बाद सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए कबीरधाम जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थ आईपीएस विकास कुमार को निलंबित किया। वहीं रेंगाखार थाने के निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक सहित वहां पदस्थ कुल 23 पुलिसकर्मियों को भी हटा दिया गया। इसके अलावा कबीरधाम एसपी और कलेक्टर पर भी गाज गिरी। दोनों का ट्रांसफर कर दिया गया। SIT कर रही जांच लोहारीडीह मामले की जांच को लेकर एसआईटी का गठन किया गया है। जिले के एएसपी पंकज पटेल के नेतृत्व में सात सदस्यीय टीम गठित की गई है। यह टीम मामले की जांच कर रही है। इस मामले में छत्तीसगढ़ और मध्‍य प्रदेश की पुलिस भी जांच कर रही है। मध्‍य प्रदेश की पुलिस इस मामले में इसलिए जुड़ गई है, क्‍योंकि शिवप्रसाद साहू की लाश एणपी की सीमा पर मिली थी। जिसके चलते मध्‍य प्रदेश की हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हो रही है।

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