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मनेंद्रगढ़ के झगराखांड में पिकनिक मनाने गए युवक की डूबने से मौत

मनेंद्रगढ़ के झगराखांड में पिकनिक मनाने गए युवक की डूबने से मौत “कोड़ा चौकी, झगराखांड थाना इलाके में युवक की मौत डैम में डूबने से हो गई। युवक पिकनिक मनाने के लिए डैम पर गया था” मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर झगराखांड थाना इलाके में डैम पर पिकनिक मनाने के लिए दस से 12 युवक पहुंचे। पिकनिक मनाने के दौरान एक युवक गहरे पानी में डूब गया। हादसे के वक्त मौजूद बाकी साथियों ने बताया कि सभी लोग नहाने के लिए डैम में उतरे थे। पानी गहरा होने के चलते एक युवक तेज बहाव में फंस गया। दोस्तों ने उसे बचाने की हर संभव कोशिश की लेकिन वो गहरे पानी में डूब गया। बाद में पुलिस की टीम ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। पिकनिक मनाने के दौरान हादसा शुरुआती जांच में ये बात सामने आई है कि मृतक युवक को पानी की गहराई का पता नहीं लग पाया. जिस डैम में हादसा हुआ उस डैम में हमेशा पानी भरा रहता है और पानी की धारा भी वहां तेज रहती है। डैम के आस पास कोई गार्ड भी तैनात नहीं रहता है। अगर मौके पर गार्ड की तैनाती होती तो हादसा होने से टल जाता। जान जोखिम में डालने से बचें पिकनिक मनाने के दौरान अक्सर इस तरह के हादसे हो जाते हैं। पुलिस और होम गार्ड के जवान अक्सर लोगों को हिदायत देते हैं कि डैम और नदी में नहाने के लिए नहीं उतरे। पानी की गहराई का अनुमान नहीं होने से अक्सर इस तरह के हादसे हो जाते हैं। पिकनिक स्पॉट और टूरिस्ट प्लेस पर लोगों को खतरा उठाने से बचना चाहिए। कई जगहों पर खतरे के साइन बोर्ड भी लगे होते हैं बावजूद इसके लोग जान जोखिम में डालकर नहाने उतर जाते हैं।

मेट्रो रेल लाइन पुराने भोपाल शहर में आसान नहीं, अड़चनों को दूर करने की जद्दोजहद जारी

भोपाल मेट्रो रेल लाइन के दूसरे चरण का काम पुराने शहर में शुरू हो चुका है। बैरसिया रोड पर करोंद चौराहे से लेकर सिंधी कालोनी तक मृदा परीक्षण का काम किया जा रहा है, जिससे जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सके। वहीं कई जगहों पर बड़ी-बड़ी अड़चनें बरकरार हैं, जिनकी वजह से मेट्रो रेल लाइन की राह आसान नजर नहीं आ रही है। इन्हें हटाने के लिए मेट्रो रेल कार्पोरेशन प्रबंधन को, जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों को जद्दोजहद करना पड़ रही है। बताया जा रहा है कि भोपाल रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म छह के पास के दुकानदारों और लोगों ने वहां से हटने के लिए सहमति पत्र दे दिए हैं। जबकि पुट्ठा मिल को हटाने पर सहमति बनाने का काम जारी है। असल में पुट्ठा मिल के स्थानीय प्रबंधन का कहना है कि इस मामले में सहमति देने का अधिकार दिल्ली स्थित उच्च प्रबंधन को है, क्योंकि मिल का मामला कोर्ट में लंबित है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मेट्रो प्रोजेक्ट में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए ईरानी डेरा, नर्मदा आइस फैक्ट्री और पुट्ठा मिल वालों के साथ बैठक की थी, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकल सका। इस क्षेत्र में मेट्रो के भूमिगत मार्ग और स्टेशन के लिए ढाई एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना है। इसमें अधिकांश जमीन सरकारी है। ईरानी डेरा, नर्मदा आइस फैक्ट्री के पास 28-28 दुकानदारों ने विस्थापन के लिए सहमति तो दी थी, लेकिन अब तक प्रक्रिया शुरू नहीं की है। वहीं होटल्स और दुकानदारों को रेलवे माल गोदाम के पास समानांतर रोड पर बसाया जाएगा। जबकि बड़ा बाग और पीजीबीटी के पास की जमीन के अधिग्रहण मामला फिलहाल अटका हुआ है। जब तक यह मामले सुलझ नहीं जाते हैं तब तक मेट्रो का काम रफ्तार नहीं पकड़ पाएगा। मेट्रो के लिए इन जमीनों का होना है अधिग्रहण     -पुल बोगदा पर मेन जंक्शन के लिए सर्वाधिक जगह की जरूरत। सिर्फ जंक्शन के लिए 0.48 एकड़।     -शहर सर्किल में एक तरफ 1.49 एकड़ पातरा नाले से पहले 0.53 एकड़, इससे आगे 0.54 एकड़ जमीन की आवश्यकता।     -आरा मिल के पास अलग-अलग टुकड़ों में 0.008, 0.184, 0.12, 0.10 एकड़ जमीन की जरूरत।     -ग्रांड होटल के आगे 0.13 और 0.092 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। निजी जमीन हैं।     -भोपाल रेलवे स्टेशन के पास 1.15 एकड़ जमीन नर्मदा आइस फैक्टरी की जमीन ली जाएगी, यहां पार्किंग और स्टेशन बनाया जाएगा।     -भोपाल रेलवे स्टेशन के पास एंट्री एग्जिट प्लाजा के लिए 0.18 एकड़ जमीन चाहिए, यहां ईरानी डेरा है। इनका कहना है मेट्रो रेल लाइन के दूसरे चरण का काम शुरू हो गया है। पुराने शहर में भोपाल रेलवे स्टेशन, पुट्ठा मिल सहित अन्य जगह पर जमीनों का अधिग्रहण किया जाना है। कुछ जगह पर सहमति बनी है, तो कुछ जगह पर मामला अटका हुआ है। जल्द ही इसे भी सुलझा लिया जाएगा। मेट्रो रेल लाइन बिछाने का काम नियमित रूप से जारी रहेगा।- कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर, भोपाल

हाथी- मानव सहअस्तित्व सुनिश्चित करने बनेंगे “हाथी मित्र”, फसलों को बचाने के लिए सोलर फेंसिंग की होगी व्यवस्था

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उमरिया में हाथियों की मृत्यु की घटना पर उठाए सख्त कदम राज्य स्तरीय हाथी टास्क फोर्स होगा गठित वन क्षेत्र में निगरानी की कमी के लिए फील्ड डायरेक्टर और प्रभारी एसीएफ का निलंबन हाथी- मानव सहअस्तित्व सुनिश्चित करने बनेंगे “हाथी मित्र” जिन जिलों के वन क्षेत्रों में हाथी अधिक, वहां चलेगा जन-जागरूकता अभियान फसलों को बचाने के लिए सोलर फेंसिंग की होगी व्यवस्था केंद्र सरकार का सहयोग लेंगे, राज्यों की बेस्ट प्रेक्टिसेस अपनाएंगे जनहानि प्रकरण में 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रूपये देने का लिया निर्णय किसानों को कृषि के अलावा वैकल्पिक कार्यों से भी जोड़ने के होंगे प्रयास भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में राज्य स्तरीय हाथी टास्ट फोर्स गठित किया जाएगा। हाथी- मानव सह अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए हाथी मित्र बनाए जाएंगे। जिन क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही अधिक है, वहां किसानों की फसलों को बचाने के लिए सोलर फेंसिंग की व्यवस्था होगी। साथ ही किसानों को कृषि के अलावा कृषि वानिकी एवं अन्य वैकल्पिक कार्यों से भी जोड़ने के प्रयास होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में आने वाले समय में ऐसे वन क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जिसमें हाथियों की बसाहट के साथ सहअस्तित्व की भावना मजबूत हो सके। केंद्रीय वन मंत्री से भी इस संबंध में चर्चा हुई है। वे मार्ग दर्शन करेंगे जिससे वन विभाग इस क्षेत्र में ठोस कार्यवाही कर सके। जिन जिलों में हाथी वन क्षेत्रों में रह रहे हैं वहां हाथी मित्र जन-जागरूकता के लिए कार्य करेंगे। घटना दुखद और दर्दनाक, वन अधिकारी सतर्क और सजग रहें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश में उमरिया जिले के वन क्षेत्र में पिछले दिनों 10 हाथियों की अलग-अलग दिन हुई मृत्यु की घटना दुखद एवं दर्दनाक है, जिसे राज्य शासन ने गंभीरता से लिया है। वन राज्य मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों के दल ने क्षेत्र का भ्रमण किया है। प्रारंभिक रिपोर्ट में कोई कीटनाशक नहीं पाया गया है। पोस्ट मार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आना शेष है। हाथियों के बड़े दल के रूप में आने की घटना गत दो तीन वर्ष में एक नया अनुभव भी है। उमरिया और सीधी जिले में बड़ी संख्या में हाथियों की मौजूदगी दिख रही है। ऐसे में फील्ड डॉयरेक्टर एवं अन्य अधिकारियों को सतर्क और सजग रहने की जरूरत है। दोषी अधिकारियों का निलंबन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाथियों की मृत्यु की इतनी बड़ी घटना के समय फील्ड डॉयरेक्टर का अवकाश से वापस न आना और पूर्व में हाथियों के दल आने के संदर्भ में जो आवश्यक चिंता की जाना चाहिए, वह नहीं की गई। इस लापरवाही के लिए फील्ड डॉयरेक्टर गौरव चौधरी को सस्पेंड किया गया है। साथ ही प्रभारी एसीएफ फतेह सिंह निनामा को भी निलंबित किया गया है। प्रदेश के अधिकारी कर्नाटक, केरल और असम जाकर करेंगे अध्ययन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बांधवगढ़ क्षेत्र एवं अन्य वन क्षेत्रों में हाथियों के रहने की अनुकूल और आकर्षक स्थिति है। वन क्षेत्रों का प्रबंधन उत्तम होने से हाथियों के दल जो छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों से आया करते थे और वापस चले जाते थे वे अब वापस नहीं जा रहे हैं। यहां बड़े पैमाने पर हाथियों द्वारा डेरा डालने की स्थिति देखी जा रही है। यह मध्यप्रदेश की वन विभाग की गतिविधियों का हिस्सा बन गए हैं। ऐसे में हाथियों की आवाजाही को देखते हुए स्वाभाविक रूप से स्थाई प्रबंधन के लिए शासन के स्तर पर हाथी टास्क फोर्स बनाने का निर्णय लिया जा रहा है। हाथियों को अन्य वन्य-प्राणियों के साथ किस तरह रहवास की सावधानियां रखना चाहिए, इसके लिए योजना बनाई जा रही है। इसमें कर्नाटक, केरल और असम राज्यों की बेस्ट प्रेक्टिसेस को शामिल किया जाएगा। इन राज्यों में बड़ी संख्या में हाथी रहते हैं। इन राज्यों में मध्यप्रदेश के अधिकारियों को भेजा जाएगा, जिससे सहअस्तित्व की भावना के आधार पर हाथियों के साथ बफर एरिया, कोर एरिया में बाकी का जन जीवन प्रभावित न हो, इसका अध्ययन किया जाएगा। हाथियों की सुरक्षा को भी खतरा न हो। इस पर हमने गंभीरता से विचार किया है। एक बात हमने और अनुभव की है। नजदीक के बफर एरिया के बाहर के जो मैदानी इलाके हैं वहां की फसलें उसमें सोलर फेंसिंग या सोलर पैनल द्वारा व्यवस्था कर फसलों को सुरक्षित किया जाएगा। यह मनुष्यों के लिए भी सुरक्षा का साधन होगा। वन विभाग को कहा गया है ऐसे क्षेत्रों में कहां-कहां कृषि हो रही है, उसे कैसे बचा सकते हैं। हाथी फसल नष्ट न कर पाएं, यह सुनिश्चित करना होगा। यह चिंता के साथ जागरूकता का भी विषय है। बफर क्षेत्र में ग्रामीण समुदाय की भागीदारी हाथियों और मानव के सहअस्तित्व को सुनिश्चित कर सके, जिससे यह एक दूसरे के साथ जीना सीख सकें। जनहानि पर 25 लाख रूपये प्रति व्यक्ति देने का निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उमरिया जिले में जो घटना घटी है इसमें जनहानि को लेकर 8 लाख रुपए प्रति व्यक्ति के परिजन को दिया जाता था, उसको बढ़ाकर अब 25 लाख रुपए प्रति व्यक्ति करने का निर्णय लिया है। इस घटना में दो व्यक्तियों की मृत्यु हुई है उनके परिवारों को भी इससे जोड़ा है। कृषि वानिकी में अन्य प्रकार से वन क्षेत्र के प्राइवेट सेक्टर को जोड़कर पम्परागत खेती के अलावा अन्य कार्यों के लिए किसानों को प्रोत्साहित करेंगे। इससे किसान सामान्य फसल लेने के बजाए वन क्षेत्र की व्यवस्थाओं से जुड़ें और उसका लाभ लें। महत्वपूर्ण उपाय लागू करने विशेषज्ञों को आमंत्रित करेंगे मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि वन क्षेत्र में जो अकेले हाथी घूमते हैं और अपने दल से अलग हो जाते हैं, इनको रेडियो ट्रेकिंग का निर्णय लिया गया है। ट्रेकिंग कर उन पर नजर रखी जा सकेगी। आने वाले समय में ऐसी घटना न हो, भविष्य में इसका ध्यान रखा जा सकेगा। यह इस दिशा में ठोस कार्यवाही होगी। ऐसे अन्य महत्वपूर्ण उपायों को लागू करने के लिए विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के प्रयास किए जाएंगे। हाथियों का दल स्थाई रूप से मध्यप्रदेश में रहने लगा है अत: आमजन से भी सहयोग की अपेक्षा है। जिन जिलों में हाथियों की बसाहट है … Read more

ब्यूटी के साथ जॉब भी

खूबसूरत दिखना हर किसी को अच्छा लगता हैं। खास तौर पर महिलाओ को। सुंदरता आपके करियर के लिए भी बेहद जरूरी होती हैं। आपकी खूबसूरती आपके अंदर के कॉन्फिडेंस को भी बढ़ाती हैं। लोगो में जैसे जैसे इसके लिए जागरूकता बढ़ती जा रही हैं। इस फील्ड में करियर के क्षेत्र भी बढ़ रहे हैं। यह क्षेत्र व्यापार और जॉब दोनों ही तरह से काफी महत्वपूर्ण हैं। यही नही इसकी मांग बॉलीवुड और फैशन के इस दौर में बढ़ती ही जा रही हैं। इससे आप अपने करियर को एक नई दिशा दे सकते हैं… जॉब के अवसर:- इस क्षेत्र में जॉब के कई अवसर हैं। अगर आपको पढ़ाने में भी थोड़ा इंट्रेस्ट हैं तो आप किसी भी ब्यूटी इंस्टिट्यूट में टीचिंग की जॉब कर सकती हैं। अगर आपके पास विशेष योग्यता हैं तो आप किसी बड़े इंस्टिट्यूट में भी जॉब कर सकती हैं। इससे आप 10 से 15 हजार रूपए आसानी से कमा सकती हैं। जिसमे आपके एक्सपीरियंस के साथ आपकी सैलेरी में भी बढ़ोतरी होगी। आप ब्यूटी ट्रीट्मेंट्स भी दे सकती हैं जिससे आपकी अच्छी खासी इनकम भी होगी। कोर्स:- इससे सम्बंधित भी कई कोर्सेस उपलब्ध होते हैं। आपको इस फील्ड से रिलेटेड कोई न कोई स्पेशलाइस्ड कोर्स जरूर करना चाहिए। फील्ड से जुडी कुछ खास बातें:- इस फील्ड में अधिकतर खूबसूरत महिलाये और लडकिया ही काम करती हैं। उन्हें इस फील्ड में काम करते समय इस बात का भी जरूर ध्यान रखना चाहिए की वे कभी भी गलत लोगो के सम्पर्क में न आये साथ ही ऐसे लोगो से दूर रहे जो उनकी योग्यता से ज्यादा महत्व उनकी खूबसूरती को देते हो। किसी भी जगह आप इंटरव्यू देने जाये तो उस आर्गेनाईजेशन के बारे में जानकारी निकाल कर ही जाये।  

भैंसाखेड़ी स्थित पं. दीनदयाल कृषि उपज मंडी में सन्नाटा, गेहूं की अपेक्षित नीलामी भी नहीं हो सकी थी

भोपाल किसानों की फसल बाजार में आने के बावजूद ग्राम भैंसाखेड़ी स्थित पं. दीनदयाल कृषि उपज मंडी में सन्नाटा है। इससे पहले यहां गेहूं की अपेक्षित नीलामी भी नहीं हो सकी थी। अब सोयाबीन, मक्का एवं धान की नीलामी नहीं हो पा रही है। किसान सीधे करोंद मंडी जा रहे हैं। अनाज व्यापारियों की भी नीलामी में रुचि नहीं है। इस बार गेंहूं की फसल लेकर कम ही किसान मंडी तक पहुंचे। मंडी समिति ने सोसायटियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर खरीदी की। व्यापारियों की घटती रुचि के कारण मंडी सुनसान होती जा रही है। अनाज व्यापारी संघ के अध्यक्ष जगदीश आसवानी के अनुसार बैरागढ़ एवं आसपास के इलाके में कृषि भूमि कम बची है। अधिकांश किसान फसल बेचने सीहोर एवं करोंद मंडी जा रहे हैं। इस कारण मंडी में कारोबार कम हो गया है। सोयाबीन की खरीदी की उम्मीद भी पूरी नहीं हो पा रही है। उधर, मंडी में धर्मकांटा लगाने के प्रस्ताव पर अमल नहीं हो पा रहा है। धर्मकांटा नहीं होने के कारण अनाज की तुलाई धीमी गति से होती है। पिछले दिनों किसानों ने अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था, लेकिन धर्मकांटा नहीं लग सका। दाल एवं आटा मिल शिफ्ट करने का सुझाव यहां पर कृषि उपज मंडी का निर्माण लंबे संघर्ष के बाद हुआ था। पहले मंडी को मुबारकपुर में बनाया जा रहा था। व्यापारिक संगठनों के संघर्ष और कांग्रेस एवं भाजपा नेताओं के बीच आपसी सहमति के बाद मंडी भैंसाखेड़ी में ही बनी। लेकिन इस मंडी में कारोबार बहुत कम हो गया है। मंडी समिति एवं व्यापारी संघ के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं। व्यापारी कहते हैं कि हम खरीद करना चाहते हैं, पर किसान ही नहीं आते। अनाज व्यापारी संघ के संस्थापक सदस्य नरेश पारदासानी का कहना है कि मंडी समिति को दाल एवं आटा मिलों को मंडी के अंदर जगह देनी चाहिए। इससे मंडी की रौनक बढ़ेगी। किसान भी आएंगे।

बहुप्रतीक्षित इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन परियोजना का जमीनी स्तर पर काम शुरू, पांच वर्ष में काम होगा पूरा

इंदौर बहुप्रतीक्षित इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन परियोजना का जमीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है। पांच वर्ष में तैयार होने वाली इस परियोजना में टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस नई रेल लाइन से धार, खरगोन और बड़वानी के आदिवासी अंचल से पहली बार रेल लाइन गुजरेगी। परियोजना से लगभग एक हजार गांवों और 30 लाख आबादी का रेल सेवा से सीधा संपर्क जुड़ेगा। परियोजना से पीथमपुर के औद्योगिक क्षेत्र को गति मिलेगी। प्रोजेक्ट पूरा होने पर 16 जोड़ी पैसेंजर ट्रेन का संचालन होगा, जिसमें 50 लाख यात्री शुरुआती वर्षों में सफर करेंगे। हर साल इस प्रोजेक्ट से रेलवे को 900 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलेगा। इंदौर से मुंबई की दूरी भी 830 किमी से घटकर 568 किमी रह जाएगी। संघर्ष समिति के मनोज मराठे ने बताया कि हाल ही में रेलवे ने जो जानकारी दी है, उसके अनुसार रेलवे ने प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य की टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रोजेक्ट पूरा होने से 24 मालगाड़ियों का संचालन होगा। टेंडर प्रक्रिया शुरू 16 हजार करोड़ रुपये से बनेगी 309 किमी लंबी नई रेल लाइन। इंदौर से मुंबई की दूरी घटकर 568 किमी रह जाएगी। पीथमपुर के औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगी गति।   यहां से गुजरेगी रेल लाइन नई रेल लाइन महू से धार होते हुए धरमपुरी, ठीकरी, राजपुर, सेंधवा, सिरपुर, शिखंडी, धुले, मालेगांव होकर मनमाड़ पहुंचेगी। पूरी परियोजना में 30 नए रेलवे स्टेशन भी बनाए जाएंगे। ये भी जानें 309 किमी लंबी लाइन लाइन बिछेगी। इंदौर-मुंबई के बीच सबसे छोटा रेल मार्ग बनेगा। मप्र के चार जिलों से होकर गुजरेगी रेल लाइन। 2028-29 तक पूरी होगी परियोजना।  

10 साल या उससे पुराने आधार कार्ड में जानकारी अपडेट न होने के कारन 65 हजार लोगों का आधार कार्ड हो सकते है रद्द!

नई दिल्ली आधार कार्ड उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। सरकार 65 हजार लोगों का आधार कार्ड कैंसिल कर सकती है। दरअसल, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने 10 साल या उससे पुराने आधार कार्ड में जानकारी अपडेट कराने के लिए मुफ्त ऑनलाइन सुविधा प्रदान की है। केंद्र सरकार ने आधार में जानकारी अपडेट करने के लिए कई बार डेडलाइन बढ़ाई है, लेकिन अब भी हजारों लोगों ने यह काम नहीं कराया है। भोपाल में ऐसे करीब 65 हजार लोगों का आधार कार्ड कैंसिल हो सकता है, जिन्होंने अब तक अपने आधार में अपडेट नहीं किया है। इसके लिए ‘MyAadhaar’ पोर्टल पर जाकर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। क्यों जरूरी है आधार अपडेट? आधार कार्ड आज एक महत्वपूर्ण पहचान पत्र बन गया है, जिसका उपयोग सरकारी योजनाओं से लेकर बैंक खाता खुलवाने तक में किया जाता है। 10 साल पुराने आधार में आपके पते और तस्वीर में बदलाव हो सकता है। जानकारी अपडेट कराने से धोखाधड़ी पर रोक लगेगी और सटीक जनसंख्यिकी जानकारी प्राप्त होगी। 14 दिसंबर डेडलाइन? UIDAI ने 10 साल पुराने आधार में जानकारी अपडेट के लिए 14 दिसंबर तक का समय दिया है। इससे पहले डेडलाइन को तीन बार बढ़ाया गया था: पहले 14 मार्च, फिर 14 जून, और उसके बाद 14 सितंबर। अब 14 दिसंबर अंतिम डेडलाइन मानी जा रही है। कैसे करें आधार कार्ड अपडेट? ‘MyAadhaar’ पोर्टल पर जाएं: यहां लॉगिन करके अपना आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करें। जरूरी दस्तावेज अपलोड करें: अपनी पहचान और पते के लिए नए दस्तावेजों को अपलोड करें। फ्री ऑनलाइन अपडेशन: यह सेवा मुफ्त है, जिसका लाभ उठाते हुए जल्द से जल्द अपडेट कराएं। आधार कार्ड अपडेट के लिए जरूरी दस्तावेज     राशन कार्ड     मतदाता पहचान पत्र     निवास प्रमाण पत्र     जन-आधार कार्ड     मनरेगा/एनआरईजीएस जॉब कार्ड     श्रम कार्ड     भारतीय पासपोर्ट     पैन/ई-पैन कार्ड     सीजीएचएस कार्ड     ड्राइविंग लाइसेंस आधार कार्ड को अपडेट कराकर आप अपनी पहचान को सुरक्षित और अद्यतन बनाए रख सकते हैं। इसके अलावा, इससे सरकारी योजनाओं का लाभ लेना भी सुगम हो जाएगा।  

बुजुर्गों को मिलेगा आयुष्मान वय वंदना कार्ड, 5 लाख तक का मुफ्त इलाज, जानिए कार्ड बनाने का पूरा प्रोसेस

नई दिल्ली आयुष्मान भारत योजना का लाभ अब 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को भी मिलेगा। केंद्र सरकार ने 70 वर्ष तक और उससे अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली के अवसर पर इस योजना की शुरुआत की, जिससे लगभग 1,17,129 बुजुर्ग लाभान्वित होंगे। योजना के लाभ इस योजना के अंतर्गत बुजुर्गों को सरकारी और निजी अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज मिल सकेगा। बुजुर्गों को विशेष रूप से कार्ड प्रदान किया जाएगा, जिसके माध्यम से वे इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। कौन से अस्पताल शामिल ? गोरखपुर जिले में इस योजना के अंतर्गत 13 सरकारी और 60 निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है, जहां बुजुर्ग इस योजना का लाभ ले सकते हैं। Ayushman Card कैसे बनवाएं Ayushman Card बनवाने के लिए बुजुर्गों को निम्नलिखित निर्देशों का पालन करना होगा: नजदीकी केंद्र पर जाएं: कार्ड बनाने के लिए जिला अस्पताल, सभी डिविजनल अस्पताल और कम्युनिटी हेल्थ सेंटर पर जाना होगा। आधार कार्ड और मोबाइल लिंकिंग: आधार कार्ड का मोबाइल नंबर से लिंक होना अनिवार्य है। यदि नंबर लिंक नहीं है, तो पहले इसे लिंक कराना होगा। साइट पर जाएं: बुजुर्ग यहां जाकर अपना कार्ड बनवा सकते हैं। आवश्यक दस्तावेज कार्ड बनवाने के लिए बुजुर्गों को निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे: आधार कार्ड मोबाइल नंबर बुजुर्ग का हालिया फोटो इसके अलावा, ओपीडी फॉर्म में नाम, पता, राज्य और परिवार का विवरण भरना होगा। इस प्रक्रिया में बुजुर्ग को नाम, पते और उम्र का विवरण देने के साथ ही उनकी फोटो भी खींची जाएगी, जो कार्ड पर प्रिंट की जाएगी। इस योजना के माध्यम से बुजुर्गों को स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।  

चारधाम यात्रा में इस वर्ष गंगोत्री और यमुनोत्री धाम आने वाले श्रद्धालुओं में 53 की मौत अब तक हुई, क्या है वजह?

नई दिल्ली उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2024 नवंबर महीने में अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। दो नवंबर को गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद आज 3 नवंबर को केदारनाथ धाम के कपाट बंद हो गए है। उसके बाद रविवार दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर यमुनोत्री धाम के कपाट भी विधि विधान से बंद कर दिए गए हैं। बीती 10 मई को शुरू हुई चारधाम यात्रा में इस वर्ष गंगोत्री और यमुनोत्री धाम आने वाले श्रद्धालुओं में 53 की मौत अब तक हुई है। जिनमें यमुनोत्री धाम में 40 और गंगोत्री धाम में 13 तीर्थयात्री शामिल हैं। बताया गया है कि कठिन चढ़ाई के साथ ही मौसम में बदलाव भक्तों की मौत का मुख्य वजह बन रहा है। इसके अलावा, डॉक्टरों का कहना है कि बीमार और बुजुर्ग भक्तों को अपना पूरा स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही चारधाम यात्रा पर जाना चाहिए। चारधाम यात्रा रूट पर 3 कांवड़िए लापता है। जिनका अभी अभी तक पता नहीं चल पाया है। गत वर्ष की बात करें तो वर्ष 2023 में यमुनोत्री धाम में 62 लोगों की मौत हुई थी। जिनमें यमुनोत्री में 41 और गंगोत्री में 21 तीर्थयात्री यात्रा के दौरान अपनी जान गंवाए थे। 15 लाख से अधिक लोग पहुंचे गंगोत्री-यमुनोत्री गंगोत्री धाम के कपाट शनिवार को विधिवत पूजा अर्चना के बाद बंद कर दिए गए हैं। वहीं यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। लेकिन छह माह के इस यात्राकाल में इस वर्ष रिकार्ड संख्या में तीर्थ यात्री इन दोनों धामों के धामों के दर्शन को पहुंचे हैं। दोनों धामों में अब तक 15,21,752 तीर्थयात्रियों दर्शन कर चुके हैं। जिनमे से यमुनोत्री धाम में 7,10,210 और गंगोत्री धाम में 8,11,542 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। अक्षय तृतीय के पर्व पर गत 10 मई को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाटोद्घाटन के साथ प्ररांभ हुई चारधाम यात्रा का वर्तमान सत्र अब समाप्त होने जा रहा है। यमुनोत्री मंदिर के कपाट आज रविवार को भाई दूज के पावन पर्व पर दोपहर 12:03 पर बंद कर दिए जाएंगे। इन दोनों धामों की तुलना में गत वर्ष का आंकलन करें तो 22 अप्रैल 2023 को कपाटोद्घाटन के बाद गंगोत्री मंदिर के कपाट 14 नवंबर 2023 को तथा यमुनोत्री मंदिर के कपाट 15 नवंबर 2023 को बंद हुए थे। इस प्रकार बीते वर्ष गंगोत्री धाम की यात्रा 207 दिन और यमुनोत्री धाम की यात्रा 208 दिनों तक संचालित हुई थी। जिसमें गंगोत्री धाम में 905456 यात्री तथा यमुनोत्री धाम में 737245 तीर्थ यात्रियों ने दर्शन किए थे। इस वर्ष गंगोत्री धाम का यात्रा काल 177 दिन और यमुनोत्री धाम का यात्रा काल 178 दिनों का रहा है। इसके बावजूद अभी तक 15 लाख से अधिक श्रद्धालु मां गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन कर लौट चुके हैं। बदरीनाथ धाम के कपाट 17 नवम्बर को होंगे बंद बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए 17 नवम्बर को रात्रि 9 बजकर 7 मिनट पर बंद होंगे। बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने से पूर्व श्रद्धालु भगवान के दर्शन करना चाहते हैं। इसलिए अक्तूबर से लेकर अभी तक प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्री बदरीनाथ धाम पहुंच रहे हैं। शनिवार को भी 6500 से अधिक श्रद्धालु बदरीनाथ पहुंचे। पुलिस प्रशासन द्वारा दिए आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार तक बदरीनाथ में यात्रा अवधि में 12 लाख 74 हजार से अधिक यात्री बदरीनाथ धाम दर्शन के लिए पहुंचे। पहाड़ में इस समय मौसम खुशगवार है। इसलिए बदरीनाथ सहित सभी मंदिरों में भारत ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु बदरीनाथ के कपाट बंद होने से पूर्व प्रकृति और भगवान दोनों के दर्शन के लिए यहां आ रहे हैं। आम और खास सब भगवान के दरबार में माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं।

राज्योत्सव : 6 नवम्बर को उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ राज्य अलंकरण एवं समापन समारोह में शामिल होंगे

रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस राज्योत्सव 2024 के आयोजन को लेकर तैयारियां जोर-शोर से जारी है। तीन दिवसीय राज्योत्सव का भव्य आयोजन 4 नवम्बर से 6 नवम्बर तक राज्योत्सव स्थल, नया रायपुर अटल नगर में होगा। राज्योत्सव स्थल में मुख्य मंच से लेकर पूरे परिसर की साज-सज्जा का काम तेजी से कराया जा रहा है। शासकीय योजनाओं एवं उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार के लिए सभी विभागों के अधिकारी अपने-अपने विभाग का प्रदर्शनी स्टॉल लगाए जाने की तैयारी में जुटे हैं। राज्य स्थापना दिवस राज्योत्सव 2024 का उद्घाटन 4 नवम्बर को संध्या 6 बजे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय करेंगे। छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि होंगे। राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में 5 नवम्बर को राज्योत्सव के कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। राज्य अलंकरण समारोह एवं राज्योत्सव का समापन 6 नवम्बर को उप राष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ के मुख्य आतिथ्य में होगा। इस अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि होंगे।   राज्योत्सव के तीन दिवसीय कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री द्वय श्री अरूण साव एवं श्री विजय शर्मा, मंत्री श्री रामविचार नेताम, श्री दयाल दास बघेल, श्री केदार कश्यप, श्री लखनलाल देवांगन, श्री श्याम बिहारी जायसवाल, श्री ओपी चौधरी, श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े एवं श्री टंकराम वर्मा, नेताप्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायक सर्वश्री राजेश मूणत, पुरन्दर मिश्रा, मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा, गुरू खुशवंत साहेब, इन्द्र कुमार साहू एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि होंगे।  राज्योत्सव में ख्याति प्राप्त कलाकार रंगारंग और मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां देंगे। 4 नवम्बर को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत संध्या 4.30 बजे से होगी। बालीवुड के प्रसिद्ध पाव गायक शांतुन मुखर्जी (शानु) की प्रस्तुति रात्रि 7.45 बजे से होगी। इससे पूर्व श्री रिखी क्षत्रीय की टीम द्वारा 12 लोक नृत्य की झलकियां, श्री मोहन चौहान एवं साथी द्वारा आदिवृंदम, श्री सुनील सोनी एवं टीम द्वारा क्षेत्रीय नृत्य संगीत तथा श्री विद्या वर्चस्वी द्वारा नाम रामायण की प्रस्तुति दी जाएगी। इसी तरह 5 नवम्बर को राज्योत्सव में संध्या 5 बजे से श्री पुरानिक साहू द्वारा सांस्कृतिक लहर गंगा, श्री सुरेन्द्र साहू, भोला यादव एवं साथियों द्वारा लोक धुन, श्री मोहन नायडू एवं साथियों द्वारा द मून लाईट रागा, राजेश अवस्थी, सुश्री आरू साहू एवं सुश्री नीति मोहन की प्रस्तुति होगी। 6 नवम्बर को सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत श्री अनुराग शर्मा द्वारा अनुराग स्टार नाईट, श्री मनोज प्रसाद द्वारा इंडियाज गॉट टैलेंट मल्लखंभ, श्री सवि श्रीवास्तव द्वारा जादू बस्तर एवं पवनदीप एवं अरूनिता के पाश्र्व गायन की प्रस्तुति होगी। राज्योत्सव के दौरान छत्तीसगढ़ शासन के सभी विभागों द्वारा राज्योत्सव स्थल पर भव्य एवं आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। यहां शिल्प ग्राम बनाया जा रहा है, जहां छत्तीसगढ़ के विविध शिल्प प्रदर्शन एवं विक्रय के लिए उपलब्ध होंगे। राज्योत्सव स्थल परिसर में शासकीय विभागों की प्रदर्शनी के लिए विशाल हैंगर (डोम) बनाए गए हैं। हैंगर-एक एवं दो में शासकीय विभागों के स्टॉल लगेंगे, जबकि हैंगर-तीन में वाणिज्यिक संस्थान अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाएंगे। हैंगर-चार में पब्लिक सेक्टर के संस्थानों की प्रदर्शनी लगेगी। राज्योत्सव में शिल्प ग्राम, फूड कोर्ट और मीना बाजार आम लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र होंगे।

पुलिस के वाणिज्यिक संस्थान जैसे पेट्रोल पंप, गैस रिफिलिंग केंद्र, सुपर बाजार, कैंटीन आदि में नकद होगा बंद

भोपाल पुलिस के वाणिज्यिक संस्थान जैसे पेट्रोल पंप, गैस रिफिलिंग केंद्र, सुपर बाजार, कैंटीन आदि में नकद लेन-देन एक जनवरी 2025 से बंद हो जाएगा। 15 नवंबर से यह व्यवस्था आंशिक रूप से लागू की जाएगी। इसमें ग्राहकों से नकद में भुगतान करने के बजाय कैशलेस भुगतान के लिए कहा जाएगा। यदि वह नगद राशि देते हैं तो केंद्र संचालक को ग्राहक का नाम और मोबाइल नंबर लिखकर रखना होगा, जिससे जरूरत पड़ने पर जांच में यह पता किया जा सके कि उसने भुगतान किया था या नहीं। यह है वजह पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि एक पेट्रोल पंप में वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। लेनदेन में पारदर्शिता रहे, इसलिए कैशलेस भुगतान को अनिवार्य कर दिया गया है। संभवत: मध्य प्रदेश पुलिस पहला सरकारी विभाग है, जिसमें नकद भुगतान पूरी तरह से बंद किया जा रहा है। अभी बड़े शापिंग मॉल में ऐसी अनिवार्यता नहीं है। अधिकतर सरकारी विभागों में बिल भुगतान भी नगद और कैशलेस दोनों तरह से हो रहा है। डीजीपी कांफ्रेंस में उठा था मुद्दा पुलिस मुख्यालय के एडीजी कल्याण एवं लेखा अनिल कुमार ने बताया कि इस संबंध में इंदौर और भोपाल के पुलिस आयुक्त, सभी पुलिस अधीक्षक और पुलिस इकाइयों के प्रमुखों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि डीजीपी कांफ्रेंस में यह विषय आया था। दो वर्ष से यह व्यवस्था लागू करने की कोशिश चल रही थी। कैशलेस भुगतान से एक-एक पैसे का हिसाब रहेगा, जिससे गड़बड़ी की आशंका नहीं रहेगी।

नए साल के जनवरी माह में नई दिल्ली से सीधी ट्रेन श्रीनगर-बारामूला तक केंद्र सरकार जल्द शुरू करेगी

जम्मू नव वर्ष पर कश्मीर घाटी के लोगों को रेलवे बड़ा तोहफा देने की तैयारियों में जुटी है। सूत्रों के अनुसार नए साल के जनवरी माह में नई दिल्ली से सीधी ट्रेन श्रीनगर-बारामूला तक शुरू करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य पूरा किया जा रहा है। यानी अब सालभर कोई भी मौसम हो कश्मीर घाटी रेल संपर्क से देश के अन्य राज्यों से जुड़ी रहेगी। बता दें कि 272 किलोमीटर लंबी ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना पर करीब शत-प्रतिशत काम पूर्ण किए जा चुके हैं। जानकारी के अनुसार इस रेल लिंक परियोजना पर कुछ ही स्थानों पर तकनीकी कार्य 19 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर जारी हैं जोकि रियासी व कटड़ा के बीच का है। जानकारी के अनुसार इस साल के अंत तक सभी कार्य पूरे कर लेने की पूरी-पूरी संभावना है। इसके बाद जनवरी माह में कमिश्नर रेलवे सेफ्टी द्वारा निरीक्षण के बाद सीधी ट्रेन नई दिल्ली से बारामूला तक शुरू हो सकती है। रेलवे ट्रैक पर कई दुर्गम सुरंगें, पुल व विहंगम दृश्य यात्रियों व पर्यटकों को कुदरती नजारों से निहाल कर देंगे। जबकि ट्रेन जब श्री माता वैष्णो देवी के त्रिकुटा पर्वत के नीचे से गुजरेगी तो वह अलग ही आस्था और मां के चरणों के नीचे से गुजरने का अनुभव करवाएगी। वहीं यात्रियों और पर्यटकों को विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुल चिनाब रेल ब्रिज, अंजी ब्रिज भी इसी रेलवे ट्रैक पर देखने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की कमला हैरिस और रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप के बीच कांटे की टक्कर, मतदान कल

वाशिंगटन अमेरिका अपने नए राष्ट्रपति को चुनने के लिए फिर तैयार है। वहां 5 नवंबर को वोटिंग है। कई अरबपतियों कवर स्टोरी ने वहां बेहिसाब पैसे खर्च किए हैं। आखिर अरबपतियों के लिए भी ये चुनाव इतने अहम क्यों हैं?  अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की कमला हैरिस और रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप  के बीच कांटे की टक्कर है। चुनाव में  अरबपतियों के बीच भी कड़ा मुकाबला चल रहा  है क्योकि इन्होंने अपने-अपने पसंदीदाप्रत्याशियों पर करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं। इन प्रत्याशियों के बहाने इन अरबपतियों का भी काफी कुछ दांव पर लगा हुआ है। दोनों मुख्य उम्मीदवारों के लिए उनके सहयोगी समूहों ने अक्टूबर के मध्य तक ही 3.8 अरब डॉलर (करीब 32 हजार करोड़ रुपए) से अधिक जुटा लिए थे।   एक विश्लेषण के अनुसार सिर्फ करोड़पतियों ने ही इस चुनाव में 69.5 करोड़ डॉलर (लगभग 5,800 करोड़ रुपए) खर्च किए हैं, जो कुल चंदे का 18 फीसदी हिस्सा है। इधर, चुनावी फंडिंग की जानकारी देने वाली साइट ओपनसीक्रेट्स ने दावा किया है कि 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव इतिहास के सबसे महंगे चुनाव होंगे। इस चुनाव पर कुल 15.9 अरब डॉलर (1.3 लाख करोड़ रुपए) खर्च हो सकते हैं। पिछले चुनाव में कुल खर्च 14.4 अरब डॉलर (1.2 लाख करोड़ रुपए) ही था।   उद्योगपति ट्रम्प के साथ क्यों? ये हैं तीन वजह    टैक्स में छूट  का लालच  अमेरिकी उद्योगपति आखिर डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन क्यों कर रहे हैं, इसका सीधा जवाब है टैक्स में कटौती। ट्रम्प ने कहा कि वे अधिकतम कॉर्पोरेट टैक्स को वर्तमान 21% से घटाकर 15% कर देंगे। जब ट्रम्प व्हाइट हाउस पहुंचे थे, तब अमेरिका में ये दर 35% थी। वहीं डेमोक्रेट्स इसे 28% तक बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। ट्रम्प वेल्थ टैक्स को कम करने का भी समर्थन करते हैं। वहीं बाइडेन 10 करोड़ डॉलर से अधिक की संपत्ति वाले परिवारों पर वेल्थ टैक्स लगाने की मांग कर रहे हैं।   सरकारी फैसलों में दखल की अपेक्षा ट्रम्प का समर्थन करने से कई अमेरिकी उद्योगपतियों को व्यक्तिगत फायदा है। उदाहरण के लिए इलॉन मस्क को लेते हैं। मस्क की कंपनी स्पेसएक्स और टेस्ला अमेरिकी सरकार पर काफी निर्भर हैं। स्पेसएक्स पेंटागन के सबसे बड़े पार्टनर्स में से एक है। टेस्ला को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है। मस्क की दोनों कंपनियों को एक दशक में 15.4 अरब डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं। यानी उनकी सफलता में सरकार का भी योगदान है। मस्क को लगता है कि ट्रम्प इसमें आगे भी काफी मददगार साबित हो सकते हैं। ऐसे में मस्क का ट्रम्प समर्थन उनके निजी फायदे से काफी हद तक जुड़ा हुआ है। टेक कंपनियों पर बाइडेन की सख्ती कई अरबपति बाइडन हैरिस प्रशासन की कार्रवाइयों से भी नाराज हैं। उदाहरण के लिए इस साल बाइडन प्रशासन ने दिग्गज टेक कंपनी एपल के खिलाफ उसके आईफोन एकाधिकार के दुरुपयोग के लिए कानूनी कार्रवाई तेज की थी। इसके अलावा गूगल मेटा के खिलाफ भी बाइडन प्रशासन ने ऐसे ही कड़े तेवर दिखाए थे। बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ डेमोक्रेट्स को इस वजह से भी पसंद नहीं कर रहे, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी नीतियों से व्यापार को नुकसान होगा। कारोबारियों का कमला के प्रति रुझान क्यों? 1. आर्थिक नीतियों में स्थिरता अमेरिका के कई अरबपति डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी कमला हैरिस का समर्थन कर रहे हैं और इसका एक बड़ा कारण यह है कि उनकी आर्थिक नीतियां अनेक व्यावसायिक हितों के साथ मेल खाती हैं। एक तो उन्हें डेमोक्रेट्स की नीतियों में स्थिरता नजर आती है। फिर हैरिस दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों चिप मैन्युफैक्चरिंग और रियल एस्टेट में अधिक निवेश किए जाने की पैरवी करती हैं। कई उद्योगपति इन दोनों क्षेत्रों में निवेश में लगातार बढ़ोतरी कर रहे हैं, जिससे उन्हें फायदे की उम्मीद है। 2. निजी दुश्मनी निभाते हैं ट्रम्प डोनाल्ड ट्रम्प की गिनती निजी दुश्मनी निभाने वालों में होती है। ट्रम्प के कार्यकाल में कई उद्योगपति निशाने पर थे। उदाहरण के तौर पर जब ट्रम्प टीवी चैनल सीएनएन के कवरेज से नाराज हुए थे, तब कहते हैं कि उन्होंने पिछले दरवाजें से एटी एंड एटी और टाइम वार्नर (सीएनएन की पैरेंट कंपनी) के बीच विलय को रोकने का प्रयास किया था। इससे दोनों कंपनियों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। इसी तरह अमेजॉन पर भी ट्रम्प ने गुस्सा निकाला था। इस वजह से पेंटागन के साथ हुआ 10 अरब डॉलर का क्लाउड- कंप्यूटिंग कांट्रैक्ट उसके हाथ से चला गया था। 3. हैरिस सामाजिक सुरक्षा में बेहतर  कई उद्योपति कमला हैरिस का समर्थन करते हैं और इसकी वजह यूबीएस सर्वे से समझी जा सकती है। इसमें कम से कम 10 लाख डॉलर की संपत्ति वाले अमीरों को शामिल किया गया था। सर्वे में सामने आया कि 57% हैरिस के लिए और 43% ट्रम्प के लिए वोट देने की योजना बना रहे हैं। सर्वे में 971 अमीरों को शामिल किया गया था। ये लोग हैरिस को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के मोर्चे पर बेहतर मानते हैं।

अब CJI चंद्रचूड़ के पास सुप्रीम कोर्ट में महज 5 कार्य दिवस शेष, रिटायर होने से पहले ये 5 बड़े फैसले सुनाएंगे

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उनके पास सुप्रीम कोर्ट में महज 5 कार्य दिवस बचा है। इन कार्य दिवसों में उन्हें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला देना है, जिनमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने से जुड़ा विवाद, मदरसा कानून की वैधता, संपत्ति के पुनर्वितरण सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। रिटायर होने से पहले मुख्य न्यायाधीश जिन मुद्दों पर फैसला सुनाएंगे, उनका न सिर्फ राजनीति बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी प्रभाव पड़ेगा। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय मामला मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली 7 जजों की संविधान पीठ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने से संबंधित मुद्दों पर 1 फरवरी, 2024 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि एएमयू को संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है या नहीं। भर्ती प्रक्रिया के बाद नियमों में बदलाव का मामला सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि क्या भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों और शर्तों में बदलाव हो सकता है? इस मामले में संविधान पीठ ने 23 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह कानूनी सवाल राजस्थान हाईकोर्ट में अनुवादकों की नियुक्ति से उठा था। एलएमवी लाइसेंस धारक मामला सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों के संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि क्या लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) लाइसेंस धारक चालक 7,500 किलोग्राम तक के वजन वाले परिवहन वाहन चलाने का अधिकार है या नहीं है। इस मुद्दे पर सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने 21 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है। मदरसा कानून की वैधता का मामला मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 3 जजों की पीठ ने अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश मदरसा अधिनियम की वैधता से जुड़े मसले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा है, जिसके तहत यूपी मदरसा अधिनियम को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया गया था। बच्चों को सरकारी स्कूलों में समायोजित करने का आदेश दिया था। संपत्ति के वितरण का मामला मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली 9 जजों की संविधान पीठ इस संवैधानिक सवाल पर फैसला सुनाएगी कि क्या सरकार को निजी संपत्ति अधिग्रहित कर उनका पुनर्वितरण करने का अधिकार है या नहीं। संविधान पीठ अनुच्छेद 39(बी) के प्रावधानों को लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस अनुच्छेद में जनहित के लिए संपत्ति के पुनर्वितरण से संबंधित है।

बांधवगढ़ में हाथियों की मौत: मुख्यमंत्री ने लिया एक्शन, फील्ड डायरेक्टर-प्रभारी एसीएफ निलंबित

Death of elephants in Bandhavgarh: Chief Minister took action, field director-in-charge ACF suspended बांधवगढ़ में हुई हाथियों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक्शन में हैं. सीएम ने बैठक आयोजित की, जिसमें राज्य स्तरीय ‘हाथी टास्क फोर्स’ गठित करने का निर्णय लिया गया. साथ ही सीएम ने बांधवगढ़ फील्ड डायरेक्टर और प्रभारी एसीएफ को निलंबित करने के निर्देश दिए. सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में उमरिया जिले के वन क्षेत्र में पिछले दिनों 10 हाथियों की अलग-अलग दिन हुई मृत्यु की घटना दुखद एवं दर्दनाक है, जिसे राज्य शासन ने गंभीरता से लिया है. वन राज्य मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों के दल ने क्षेत्र का भ्रमण किया है. प्रारंभिक रिपोर्ट में कोई कीटनाशक नहीं पाया गया है. पोस्ट मार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आना शेष है. हाथियों के बड़े दल के रूप में आने की घटना गत दो तीन वर्ष में एक नया अनुभव भी है. उमरिया और सीधी जिले में बड़ी संख्या में हाथियों की मौजूदगी दिख रही है. ऐसे में फील्ड डायरेक्टर एवं अन्य अधिकारियों को सतर्क और सजग रहने की जरूरत है. अवकाश पर जाना पड़ा महंगा सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हाथियों की मृत्यु की इतनी बड़ी घटना के समय फील्ड डायरेक्टर का अवकाश से वापस न आना और पूर्व में हाथियों के दल के संदर्भ में जो आवश्यक चिंता की जानी चाहिए, वह नहीं की गई. इस लापरवाही के लिए फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी को सस्पेंड किया गया. साथ ही प्रभारी एसीएफ फतेह सिंह निनामा को भी निलंबित किया गया. केरल-कर्नाटक-असम जाकर करे अध्ययन सीएम ने कहा कि बांधवगढ़ क्षेत्र एवं अन्य वन क्षेत्रों में हाथियों की रहने की अनुकूल और आकर्षक स्थिति हे. वन क्षेत्रों का प्रबंधन उत्तम होने से हाथियों के दल जो छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों से आया करते थे और वापस चले जाते थे वह अब वापस नहीं जा रहे हैं. यहां बड़े पैमाने पर हाथियों द्वारा डेरा डालने की स्थिति देखी जा रही है. यह मध्यप्रदेश की वन विभाग की गतिविधियों का हिस्सा बन गए हैं. ऐसे में हाथियों की आवाजाही को देखते हुए स्वाभाविक रूप से स्थाई प्रबंधन के लिए शासन के स्तर पर हाथी टास्क फोर्स बनाने का निर्णय लिया जा रहा है. हाथियों को अन्य वन्य प्राणियों के साथ किस तरह रहवास की सावधानियां रखना चाहिए, इसके लिए योजना बनाई जा रही है. इसमें कर्नाटक, केरल और असम राज्यों की बेस्ट प्रेक्टिसेस को शामिल किया जाएगा. इन राज्यों में बड़ी संख्या में हाथी रहते हैं. इन राज्यों में मध्यप्रदेश के अधिकारियों को भेजा जाएगा, जिससे सहअस्तित्व की भावना के आधार पर हाथियों के साथ बफर एरिया, कोर एरिया में बाकी का जन जीवन प्रभावित न हो, इसका अध्ययन किया जाएगा. हाथियों की सुरक्षा को खतरा न हो. इस पर हमने गंभीरता से विचार किया है.

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