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जयंती पर दी श्रद्धांजलि, छत्तीसगढ़-रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरदार वल्लभ भाई पटेल को किया नमन

रायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज  जशपुर जिले के बगिया सीएम कार्यालय में देश के प्रथम उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री स्वर्गीय सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के अवसर पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री ने देश के लिए लौह पुरुष सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि सरदार पटेल अपनी देशभक्ति, दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस के लिए जाने जाते थे। देश के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अग्रणी भूमिका थी। इस मौके पर विधायक श्रीमती गोमती साय भी मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्र भारत के नवनिर्माण में सरदार पटेल जी की अविस्मरणीय भूमिका को देखते हुए उनकी स्मृति और सम्मान में प्रत्येक वर्ष उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय एकता किसी भी देश की शक्ति और विकास का मूल स्तंभ होती है। भारत विविधताओं का देश है, जहां हर क्षेत्र की अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा है। उन्होंने कहा कि हम सभी का कर्तव्य है कि एकजुट होकर अपने प्रदेश और  देश की प्रगति में अपना योगदान दें।

अब घर बैठे भी जीवन प्रमाण बनवा सकते हैं Digital Life Certificate, जाने क्या है तरीका

नई दिल्ली देश में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन या किसी अन्य सरकारी संगठन के करोड़ों पेंशनर्स हैं। इन पेंशनर्स के लिए अक्टूबर और नवंबर का महीना काफी महत्वपूर्ण होता है। इन दिनों में उन्हें अपने बैंक में जा कर जीवित होने का प्रमाण जमा करना होता है। हालांकि अब सरकार ने कुछ ऐसी व्यवस्था कर दी है कि पेंशनर्स घर बैठे भी जीवन प्रमाण पत्र डिजिटल तरीके से बनवा और जमा कर सकते हैं। हम बता रहे हैं इसका तरीका।     क्या है डिजिटल जीवन प्रमाण?     डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (जीवन प्रमाण पत्र) पेंशनभोगियों के लिए बायोमेट्रिक-सक्षम डिजिटल सेवा है। केंद्र या राज्य सरकार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन या किसी अन्य सरकारी संगठन के पेंशनभोगी जिनकी पेंशन वितरण एजेंसी डीएलसी के लिए सक्रिय है, वे इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।     कौन जारी कर रहा है?     इस समय इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक India Post Payments Bank (IPPB) डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जारी कर रहा है। इसके लिए बैंक ने भारत सरकार के नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर या एनआईसी से हाथ मिलाया है। दरअसल, DLC एनआईसी के अप्लिकेशन पर जारी किया जा रहा है।     कैसे बनवाएं डिजिटल जीवन प्रमाण ?     यदि पेंशनर के पास वक्त हो या वे सक्षम हों तो किसी भी डाकघर में पहुंचें। ऐसा नहीं कर सकते हैं तो अपने पोस्टमैन/ग्रामीण डाक सेवक के माध्यम से दरवाजे पर इन सेवाओं का लाभ उठाएं। डाक सेवक को अपने पेंशन खाते से संबंधित बेसिक जानकारी प्रदान करें, वह आपका डिजिटल जीवन प्रमाण जनरेट करने में मदद करेगा।     डीएलसी जारी करने के लिए कौन से कागजात हैं जरूरी?     यदि आपको डिजिटल जीवन प्रमाण चाहिए तो आपके पास पेंशन भुगतान आदेश या पेंशन पेमेंट आर्डर की मूल कॉपी होनी चाहिए। साथ ही बैंक खाता विवरण, मोबाइल नंबर, आधार संख्या भी होना चाहिए।     डीएलसी बनवाने के लिए क्या जानकारी देनी होगी?     पेंशनभोगी को आधार नंबर, नाम, मोबाइल नंबर और स्व-घोषित पेंशन संबंधी जानकारी जैसे पीपीओ नंबर, पेंशन खाता संख्या, बैंक विवरण, पीएसए, पीडीए का नाम आदि देना होगा। पेंशनभोगी को अपनी बायोमेट्रिक्स, या तो आईरिस या फिंगरप्रिंट भी देना होगा। वर्तमान में, केवल फिंगरप्रिंट विकल्प आईपीपीबी के माध्यम से लाइव है।     क्या कोई शुल्क भी देना होगा?     घर बैठे जीवन प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आपको महज 70 रुपये का छोटा सा शुल्क चुकाना होगा। इसमें सर्विस टैक्स भी शामिल है।     डीएलसी बन जाने के बाद इसे बैंक या डाकघर जा कर जमा करना होगा‌?     अक्सर पेंशनभोगी सवाल करते हैं कि डीएलसी बनवाने के बाद अपने बैंक/डाकघर आदि में जीवन प्रमाण पत्र या डीएलसी जमा करने की आवश्यकता है? इसका उत्तर है नहीं। पेंशनभोगी को बैंक/डाकघर/पीडीए में डीएलसी जमा करने की आवश्यकता नहीं है। डीएलसी स्वचालित रूप से उन्हें इलेक्ट्रॉनिक रूप से मिल जाएगा।

शहादत दिवस पर किया नमन, छत्तीसगढ़-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अमर शहीद संत कंवर राम को किया याद

रायपुर. मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 01 नवंबर को अमर शहीद संत कंवर राम साहिब जी के शहादत दिवस पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सन्त कंवर राम जी ने भक्ति के माध्यम से सत्य, अहिंसा, साम्प्रदायिक सौहार्द, मानवीय प्रेम, समता और नैतिक आचरण का संदेश लोगों पहुंचाया। मानव सेवा ही उनका मुख्य ध्येय था। सेवा के क्षेत्र में संत कंवर राम साहिब का नाम सर्वाेच्च स्थान पर आता है।उन्होंने दिव्यागों, रोगियों,एवं कुष्ठ-रोगियों की सेवा स्वयं अपने हाथों से की।  उनके परोपकारी एवं आध्यात्मिक जीवन ने मानव के संस्कारो में कल्याण, सर्व धर्म समभाव, परोपकार एवं मानव आदर्शों को नई दिशा प्रदान की है।

MP में बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने सरकारी स्कूल और छात्रवासों में कराटे ताइक्वांडो और मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दी जा रही

भोपाल  भोपाल से कुछ ही दूरी पर स्थित मुबारकपुर की रहने वालीं चांदनी कुशवाहा की उम्र 14 साल है. इस छोटी सी उम्र में वो बड़ी बात कहती हैं. वो कहती हैं- मेरी दो और छोटी बहनें हैं. मुझे और इन दोनों को पहले मेरे माता-पिता स्कूल भेजने से डरते थे. अब मैं रोज इन्हें लेकर अकेले स्कूल जाती हूं. क्योंकि हमें गुड टच और बैड टच बताया गया है. कोई हमें परेशान करेगा तो हम उनको पंच मारेंगे. हम जानते हैं बुरे लोगों को कैसे निबटाना है. चांदनी में बुरे लोगों का मुकाबला करने का आत्मविश्वास यूं ही ही नहीं आया…दरअसल मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूल (Government Schools of Madhya Pradesh) और छात्रावासों में बच्चियों को कराटे ताइक्वांडो और मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दी जा रही है. इस योजना के तहत शासकीय विद्यालयों, 408 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (Kasturba Gandhi Girls School) और 324 नेताजी सुभाषचंद्र बोस बालिका विद्यालयों में बालिकाएं सशक्त बन रहीं है.इस योजना में कन्या शालाओं के साथ उन सभी माध्यमिक स्कूलों का चयन किया गया है, जिनमें बालिकाओं की संख्या ज़्यादा है. यहां महिला प्रशिक्षक बेटियों को शारीरिक और मानसिक तौर पर तैयार कर रही है. चांदनी जैसी लड़कियां सिर्फ भोपाल में ही नहीं है. रायसेन में रहने वाली आठवीं क्लास की महक मीना और साक्षी लोधी भी पिछले दो साल से हॉस्टल में रहकर कराटे की ट्रेनिंग ले रही हैं. वे आदिवासी इलाके से आती हैं. अब वे कराटे का हर दांवपेंच जानती है. महक कहती हैं उन्हें अब अकेले आने-जाने में डर नहीं लगता. दूसरी तरफ साक्षी का कहना है कि मैं अपने बहनों को भी आत्मरक्षा के गुण सीखा रही हूं. मैं अब बहुत सुरक्षित महसूस करती हूं. बता दें कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश में संचालित 207 कस्तूरबा गाँधी विद्यालय और 324 नेताजी सुभाष चंद्र बोद बालिका छात्रावास में छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है,महिला प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए रखा गया है,जहाँ रोज़ बच्चियों को ट्रेनिंग के साथ मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है,गुड और बैड टच भी सिखाया जाता है. कराटे ट्रेनर  अलीशा बतती हैं कि लड़कियों की सुरक्षा के लिए ये बेहद ज़रूरी है. हम उनको ब्लॉक और अन्य चीज़ों की ट्रेनिंग देते हैं. यदि कोई मनचला जबरन हाथ पकड़े तो कैसे बचना है ये बताया जाता है. एक सुभाष चंद्र बोस छात्रावास केन्द्र की प्रभारी अर्चना तिवारी बताती हैं कि  हम लम्बे समय से ये सब सिखाते आ रहे हैं. लड़कियों को इसके आलावा मानसिक तौर पर भी तैयार किया जाता है. उन्होंने बताया कि एक बार एक लड़की को उसके पिता ही शोषित कर रहे थे,उसने हमें बताया , हमने उनके चंगुल से उसे छुड़ाया. दरअसल इस ट्रेनिंग में लड़कियां हर तरह के दांवपेंच सीख रही है. चाहे किसी भी दांव की बात करें,ट्रिपल पंच, मिडिल पंच, सिंगल हैंड ग्रिप, चिन पंच, फेस पंच, चेस्ट अटैक, थाई डिफेंस, नेक अटैक, एल्बो अटैक, बैक साइड डिफेंस, रिब अटैक और फारवर्ड ब्लाक जैसे दांव हमारी बेटियां सीख रही हैं. बता दें कि प्रदेश के सरकारी छात्रवासों में कुल 61 ,450 बच्चियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है , साथ ही स्कूल की 74 ,466 छात्राएं ट्रेनिंग के ज़रिये आत्मनिर्भर बन रहीं हैं. अहम ये है कि ट्रेनिंग के दौरान छात्राओं की इन विधाओं में परीक्षा भी ली जाती है. जिसके बाद उन्हें पुरुस्कृत कर सर्टिफिकेट दिए जाते हैं. इस ट्रेनिंग के माध्यम से लड़कियां टूर्नामेंट भी खेल रही हैं.

लुलु ग्रुप ला रही है USE का इस साल का सबसे बड़े इश्यू, कंपनी खाड़ी के छह देशों में 240 से अधिक स्टोर चलाती है

नई दिल्ली  हाइपरमार्केट चेन और मॉल ऑपरेटर लुलु ग्रुप इंटरनेशनल के बहुप्रतीक्षित आईपीओ की डेट आ गई है। भारतीय मूल के उद्यमी यूसुफ अली की यह कंपनी यूएई में इस साल का सबसे बड़ा आईपीओ ला रही है और उसकी लिस्टिंग अबू धाबी में होगी। इस ग्रुप का बिजनस कई सेक्टर्स में फैला है। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, हॉस्पिटैलिटी और रियल एस्टेट बिजनस शामिल है। इसका बिजनस 20 से अधिक देशों में फैला है और सालाना टर्नओवर करीब 8 अरब डॉलर है। कंपनी में 65,000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। भारत में कंपनी ने 20,000 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। साल 2025 तक उसकी भारत में 30,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना है। 2020 में अबू धाबी के शाही परिवार की निवेश कंपनी ने लुलु ग्रुप में 20 फीसदी हिस्सेदारी करीब एक अरब डॉलर में खरीदी थी। आईपीओ के तहत कंपनी अपनी 25 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है। कंपनी का आईपीओ 28 अक्टूबर को खुलेगा और इस पर 5 नवंबर तक बोली लगाई जा सकती है। शेयरों की लिस्टिंग 14 नवंबर को हो सकती है। माना जा रहा है कि कंपनी इससे 1.8 अरब डॉलर जुटा सकती है। हालांकि कंपनी ने इसकी वैल्यू बताने से इन्कार कर दिया। रिटेल निवेशकों को 10 फीसदी हिस्सा रखा गया है। भारत में बिजनस कंपनी की स्थापना 1974 में भारतीय मूल के यूसुफ अली ने की थी। यह कंपनी खाड़ी के छह देशों में 240 से अधिक स्टोर चलाती है। इनमें 116 हाइपरमार्केट्स, 102 एक्सप्रेस स्टोर्स और 22 मिनी मार्केट्स शामिल हैं। कंपनी के यूएई में 103 स्टोर, सऊदी अरब में 56 स्टोर और दूसर बाजारों में 81 स्टोर शामिल हैं। रिटेल इनवेस्टर्स के लिए मिनिमम सब्सक्रिप्शन 5,000 दिरहम है। गल्फ देशों के ग्रॉसरी बाजार में इस कंपनी की 13.5 फीसदी हिस्सेदारी है। भारत में कोच्चि, तिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु, लखनऊ और कोयंबटूर कंपनी के शॉपिंग मॉल हैं।

आज के समय में नौकरी कर रहा पारिवारिक जीवन को ख़तम

आज के जमाने में बढ़ रहे काम के बोझ के साथ पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना एक चुनौती बन गई है. जहां एक तरफ बढ़ती प्रतिस्पर्धा और जरूरतें के कारण लोग अपने करियर पर सबसे ज्यादा ध्यान देने पर मजबूर हैं, तो वहीं दूसरी तरफ पारिवारिक जीवन की जरूरतें अनदेखी होती जा रही हैं. सुबह से रात तक की व्यस्त दिनचर्या, देर से घर लौटने और काम से संबंधित तनाव का असर न केवल व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, बल्कि यह पारिवारिक संबंधों में भी दरार पैदा कर सकता है. इस संकट का मुख्य कारण है “वर्क-लाइफ बैलेंस” का अभाव. कई लोग अपनी नौकरी को प्राथमिकता देते हुए परिवार के सदस्यों के साथ बिताने वाले समय को कम करते जा रहे हैं. यह स्थिति बच्चों के विकास, दांपत्य संबंधों और परिवार के सामूहिक खुशी पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है. शोध बताते हैं कि लंबे समय तक काम करने से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी खतरनाक तरीके से प्रभावित कर सकता है. कैसे नौकरी कर रही है पारिवारिक जीवन, 5 प्वाइंट में समझिए 1. कार्य का तनाव और मानसिक स्वास्थ्य काम का तनाव एक सामान्य समस्या बन गई है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो उच्च-प्रेशर वाले वातावरण में काम कर रहे हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, यह तनाव व्यक्ति की मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है. तनाव के कारण व्यक्ति में चिंता, अवसाद, और थकान जैसे लक्षण विकसित हो सकते हैं. जब कोई व्यक्ति तनाव में होता है, तो उसकी मानसिक स्थिति सीधे तौर पर उसके पारिवारिक जीवन को प्रभावित करती है. तनावग्रस्त व्यक्ति अक्सर अपने भावनात्मक और मानसिक संसाधनों को काम में लगाने के कारण घर लौटने पर थका हुआ महसूस करता है. इस थकान का नकारात्मक प्रभाव परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत पर पड़ता है. तनावग्रस्त व्यक्ति अक्सर अपने परिवार के साथ संवाद करने में संकोच करता है. वे ज्यादातर चुप रहना पसंद करते हैं या केवल जरूरत पड़ने पर ही बातें किया करते हैं, जिससे पारिवारिक बातचीत की गुणवत्ता घट जाती है.  इसके अलावा जब व्यक्ति तनाव में होता है, तो वह अपने परिवार के सदस्यों से भावनात्मक रूप से भी दूरी बना लेता है. यह स्थिति रिश्तों में दरार का कारण बन सकती है. परिवार के सदस्यों को यह अनुभव हो सकता है कि उनका प्रिय व्यक्ति उन्हें सुन नहीं रहा या उनके प्रति उदासीन है, जिससे अवसाद और नकारात्मक भावनाएं बढ़ सकती हैं. 2. समय की कमी साल 2022 में किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 70% कामकाजी माता-पिता अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पा रहे हैं. यह समय की कमी परिवारों में असंतोष और संघर्ष को जन्म देती है. काम के कारण देर से घर लौटना, छुट्टियों का न लेना और परिवार के आयोजनों में भाग न लेना, सभी पारिवारिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं. 3. सामाजिक जीवन का अभाव काम की व्यस्तता के कारण लोग अपने सामाजिक जीवन को भी अनदेखा करने लगते हैं. एक रिसर्च में पाया गया कि 60% लोग काम के कारण अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलने की योजना नहीं बना पाते. इससे व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे अकेलापन और अवसाद बढ़ सकता है. 4. बच्चों पर प्रभाव एक अन्य अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ कि जिन माता-पिता की नौकरी अत्यधिक मांग वाली होती है, उनके बच्चों में व्यवहार संबंधी समस्याएं बढ़ने की संभावना अधिक होती है. शोध से पता चला है कि ऐसे बच्चे ज्यादा समय तक अकेले रहते हैं और यह उनके सामाजिक विकास को प्रभावित करता है. 5.रिश्तों में तनाव काम के दबाव के चलते दांपत्य संबंधों में भी तनाव बढ़ता है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया कि काम के कारण होने वाली समस्याएं विवाहित जोड़ों के बीच आपसी संघर्ष को बढ़ाती हैं. लगभग 50% जोड़े जो काम के तनाव का सामना कर रहे थे, उन्होंने बताया कि यह उनके रिश्ते में दरार का कारण बन रहा है. तो क्या है इसका समाधान वर्क-लाइफ बैलेंस: लचीलापन प्रदान करना- गलूप 2022 की एक अध्ययन में पाया गया कि लगभग 82% कर्मचारी लचीले काम के घंटे को प्राथमिकता देते हैं और इसे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार का एक प्रमुख कारक माना जा रहा है. कंपनियां भी वर्क फ्रॉम होम और फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स जैसी नीतियां अपनाकर अपने कर्मचारियों की उत्पादकता और संतोष बढ़ा सकती हैं. पारिवारिक अवकाश- अमेरिकन साइकोलॉजी एसोसिएशन 2021 की एक रिपोर्ट में अलग अलग शोधों के आधार पर बताया है कि पारिवारिक छुट्टियों में भाग लेने से कर्मचारियों की मानसिक स्वास्थ्य में 30% सुधार होता है. ऐसे में कंपनियां अपने कर्मचारियों को साल में या 6 महीने में इस तरह की छुट्टियां देने पर विचार कर सकती हैं जो कर्मचारियों को अपने परिवार के साथ समय बिताने की अनुमति दें. संवाद को बढ़ावा: नियमित पारिवारिक बैठक- जर्नल ऑफ फैमली साइकोलॉजी, 2020 की एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन परिवारों में नियमित संवाद होता है, वहां तनाव और अवसाद की दर 50% तक कम हो जाती है. ऐसे में हर व्यक्ति को कोशिश करनी चाहिये कि भले ही पूरा दिन वो अपने परिवार के सदस्यों से नहीं कर पाए हों. लेकिन, सुबह का नाश्ता या रात का खाना एक साथ खाएं और इस बीच आपस में दिनभर की बातें साझा करें. फैमली रिलेशन 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार भावनाओं को व्यक्त करने वाले परिवारों में आपसी समझ 70% अधिक होती है, जिससे रिश्तों में तनाव कम होता है. यह परिवार के सदस्यों के बीच अधिक सहयोग और समर्थन को बढ़ावा देता है.

अलग-अलग धर्मों के लोग कैसे आए साथ, अमेरिका का मंदिर जहां पूजा करने से नहीं झिझकते लोग

धर्म को लेकर भेदभाव आजकल आम बात है। अलग-अलग धर्म के लोग ही नहीं, एक धर्म के विभिन्न पंथों में भी अक्सर तकरार हो जाती है। ऐसे में आपको यह जानकर अचंभा होगा कि अमेरिका में ऐसे मंदिर हैं, जहां एक ही धर्म के अलग-अलग पंथों और कहीं-कहीं हिंदू व जैन संप्रदायों के लोग एक ही मंदिर में पूजा करने से नहीं झिझकते। बॉस्टन (Boston) से करीब 20 मील दूर, नॉर्वुड (Norwood) नाम के शहर में ऐसा ही एक मंदिर है। गिरजाघरों की खाली बेंचें ईसाई धर्म के लूथरन संप्रदाय की चर्च 1893 में स्थापित की गई थी। लेकिन अमेरिका और तमाम पश्चिमी देशों में लोग धर्म से विमुख हो रहे हैं। जो लगातार चर्च जाने वाले लोग थे वे या तो दूसरे धर्मों में दिलचस्पी ले रहे हैं, या योगासन में, और अन्य आध्यात्मिक विकल्पों में नए धर्म खोज रहे हैं। कुछ सर्वे में पाया गया कि करीब 30% अमेरिकी नागरिक संस्थागत धर्म से दूर हो रहे हैं। पादरियों के अनुसार, गिरजाघरों की बेंचें खाली होती जा रही हैं। चर्च का बदलता रूप ऐसे में कई सारे गिरजाघर अपना रूप बदलते जा रहे हैं। कई सारी ऐसी चर्च हैं जो डिवेलपर्स को बेची जा चुकी हैं और उनकी जगह म्यूजियम, आर्ट गैलरी और अपार्टमेंट्स ने ले ली है। हालांकि, कुछ मामलों में चर्च की जगह मंदिर, मस्जिद और बौद्ध मठ स्थापित हो गए हैं। न्यू यॉर्क के नज़दीक बफैलो (Buffalo) शहर में बैतूल ममूर जामी मस्जिद और मस्जिद जकरिया दो गिरजाघरों के स्थान पर बनी हैं। एक चर्च का नाम था सेंट जोचिम्स रोमन कैथलिक चर्च (St. Joachim’s Roman Catholic Church) और दूसरी, होली मदर ऑफ द रोजरी पोलिश नैशनल कैथलिक कैथीड्रल (Holy Mother of the Rosary Polish National Cathedral)। डेमोग्राफी में बदलाव आज के अमेरिका में ये धर्मस्थान यहां के बदलते डेमोग्राफिक को जाहिर करते हैं। सर्वे दिखाते हैं कि 1990 में करीब 90% अमेरिकी ईसाई धर्म को मानते थे, लेकिन 2007 के बाद यह संख्या घटकर 63% हो गई। आज अलग-अलग धर्मों और देशों के लोग अमेरिका में बस रहे हैं। बफैलो जैसे शहर के नए नागरिक अधिकतर दक्षिण एशिया, वियतनाम, इराक और मध्य अफ्रीका से हैं। मिलकर करते हैं देखभाल ऐसा नहीं कि अलग-अलग धर्मों के लोगों में आपसी मेलजोल न हो। Purdue University की आशिमा कृष्णा ने अपनी रिसर्च में पाया कि ईसाई, यहूदी, मुसलमान और अन्य धर्मों के लोग कुछ धर्मस्थानों की साथ मिलकर सफ़ाई व देखभाल भी करते हैं। काफी जगहों पर तो गिरजाघरों की वास्तुकला को भी बरकरार रखा गया है, सिर्फ क्रॉस और बाकी ईसाई धर्म के चिह्न हटा दिए गए हैं। हिंदू-जैन सद‌्भाव ऐसा ही समन्वय हिंदू और जैन मंदिरों में भी देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, लास वेगस में एक मंदिर में हिंदू और जैन, दोनों एक ही मंदिर में पूजा करते हैं। हिंदू धर्म मानने वालों के लिए वहां दुर्गा, राम-सीता-हनुमान, शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण, एवं बालाजी की प्रतिमाएं हैं और जैन श्रद्धालुओं के लिए भगवान आदिनाथ, पार्श्वनाथ, महावीर की प्रतिमाएं। इस मंदिर में अगर गणेश विसर्जन का आयोजन होता है, तो जैन धर्म के नियमों के अनुसार दसलक्षण पर्व का भी। पहला जैन मंदिर नॉर्वुड के जैन मंदिर में भी कुछ ऐसा ही माहौल है। जब 1981 में इसकी स्थापना हुई थी, यह पूरे अमेरिका में पहला जैन मंदिर था। उस वक्त बॉस्टन में रह रहे कुछ प्रवासी जैनियों ने 32,000 डॉलर इकट्ठा करके जमीन ख़रीदी थी। भगवान पार्श्वनाथ के मूर्तिपूजन से इस मंदिर की स्थापना की गई थी। आज मंदिर में भगवान आदिनाथ, पार्श्वनाथ और महावीर की प्रतिमाएं दोनों पंथों – श्वेतांबर और दिगंबर – की पद्धति को दर्शाती हुई विराजमान हैं। दीवारों पर जैन धर्म के दर्शन के बारे में जानकारी है और मार्बल से बनी वेदियों पर तीर्थंकरों की प्रतिमाएं हैं। यहां दिगंबर पद्धति से देवशास्त्र पूजा होती है और श्वेतांबर स्नात्र पूजा भी होती है, जिसमें भगवान महावीर का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

जुलाई-सितंबर में दूसरी श्रेणी के शीर्ष 30 शहरों में घरों की बिक्री 13 प्रतिशत घटी: प्रॉपइक्विटी

नई दिल्ली जुलाई-सितंबर, 2024 की तिमाही के दौरान 30 प्रमुख दूसरी श्रेणी के शहरों में घरों की बिक्री 13 प्रतिशत घटकर 41,871 इकाई रह गई। रियल एस्टेट विश्लेषण फर्म प्रॉपइक्विटी के अनुसार उच्च आधार प्रभाव और नई आपूर्ति घटने के कारण यह गिरावट हुई। प्रॉपइक्विटी सूचीबद्ध इकाई पी ई एनालिटिक्स लिमिटेड का हिस्सा है। कंपनी ने सोमवार को शीर्ष 30 दूसरी श्रेणी के शहरों की आवास रिपोर्ट जारी की। इसके मुताबिक, दूसरी श्रेणी के 30 शीर्ष शहरों में घरों की बिक्री जुलाई-सितंबर तिमाही में 13 प्रतिशत घट गई, जबकि नई पेशकश में 34 प्रतिशत की गिरावट आई है। समीक्षाधीन अवधि में आवास बिक्री घटकर 41,871 इकाई रह गई, जो इससे पिछले वर्ष की समान अवधि में 47,985 इकाई थी। जुलाई-सितंबर, 2024 तिमाही में नई पेशकश 28,980 इकाई थी, जो इससे पिछले वर्ष की समान अवधि में 43,748 इकाई थी। अहमदाबाद, वडोदरा, गांधीनगर, सूरत, गोवा, नासिक और नागपुर सहित पश्चिमी क्षेत्र ने कुल बिक्री में 72 प्रतिशत का योगदान दिया। प्रॉपइक्विटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और संस्थापक समीर जसूजा ने कहा कि उच्च आधार प्रभाव के कारण बिक्री और नई पेशकश में गिरावट हुई है। पूरे भारत के संदर्भ दूसरी श्रेणी के शीर्ष 30 शहरों का प्रदर्शन कमजोर रहा है।  

राहुल गांधी की कारीगर समुदाय से मुलाकात: पेंटरों और कुम्हारों की चुनौतियों पर चर्चा और आर्थिक सशक्तिकरण की अपील

Rahul Gandhi meets artisan community: discusses challenges in life of painters and potters नेता विपक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में पेंटर और कुम्हार समुदाय के सदस्यों के साथ समय बिताया, उनके काम की बारीकियों को समझा और उनकी जिंदगी से जुड़ी परेशानियों पर गहन चर्चा की। राहुल गांधी ने इन मेहनतकश कारीगरों के साथ काम में हाथ बंटाया और उनकी कठिनाइयों को नजदीक से जानने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि ये कारीगर हमारे घरों को अपनी कला से रोशन करते हैं, लेकिन उनके खुद के जीवन में खुशहाली और स्थिरता की कमी है। इसके लिए समाज की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह इन हुनरमंदों को न केवल पहचान दे, बल्कि उनके जीवन को बेहतर बनाने में सहयोग भी करे। पेंटर समुदाय की चुनौतियाँ: सीमित अवसर, जोखिमपूर्ण काम और स्थायित्व की कमी राहुल गांधी ने पेंटर समुदाय के साथ चर्चा करते हुए पाया कि उनके काम में कई तरह की चुनौतियाँ हैं। इन कलाकारों का काम चाहे घरों की दीवारों पर हो या बड़े भवनों पर, इनमें कई जोखिम जुड़े होते हैं। अधिकतर पेंटर अनौपचारिक श्रम बाजार में काम करते हैं, जिसके चलते उन्हें नियमित आय या भविष्य में स्थायित्व की कोई गारंटी नहीं मिलती। कई पेंटरों ने अपनी परेशानियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनके पास पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं होते, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। राहुल गांधी ने इस पर चिंता जताई और कहा कि इस समुदाय को बेहतर उपकरण और सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करना अत्यंत जरूरी है। साथ ही, उन्होंने पेंटरों के बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का समाधान करने पर भी जोर दिया, ताकि इस समुदाय को एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य मिल सके। कुम्हार समुदाय से बातचीत: पारंपरिक कला के संरक्षण की जरूरत राहुल गांधी ने कुम्हार समुदाय के साथ बातचीत करते हुए उनकी कला की बारीकियों को समझा। कुम्हारों की कला भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न हिस्सा है। लेकिन आज, आधुनिकता के इस दौर में यह कला विलुप्त होने के कगार पर है। कुम्हारों ने बताया कि पारंपरिक मिट्टी के बर्तन और मूर्तियाँ बनाने का काम पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है, लेकिन अब प्लास्टिक और मशीनी उत्पादों के कारण उनकी मांग घटती जा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार और समाज को मिलकर कुम्हारों को उचित बाजार और सहयोग प्रदान करना चाहिए। यदि उनके उत्पादों को बढ़ावा दिया जाए, तो ये लोग न केवल आर्थिक रूप से सशक्त होंगे बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर को भी संजीवनी मिलेगी। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि इस कला को आधुनिक बाजार में स्थान दिलाने के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की भी आवश्यकता है। हुनरमंदों को मौके देने पर जोर: स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण राहुल गांधी का मानना है कि यदि सही प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता मिले तो कारीगर और कलाकार अपनी कला से समाज में योगदान कर सकते हैं और एक आर्थिक संबल पा सकते हैं। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि पेंटरों और कुम्हारों जैसे कारीगरों के लिए विशेष योजनाएं लाई जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे कलाकारों के लिए वित्तीय योजनाओं, लोन स्कीम और सरकारी सब्सिडी की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि उन्हें अपनी कला को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक आधार मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय बाजारों और कला मेलों का आयोजन करने का सुझाव दिया, जहां ये कलाकार सीधे अपने उत्पादों को बेच सकें और उचित मुनाफा कमा सकें। समाज के प्रति संदेश: कला और मेहनत की इज्जत करें राहुल गांधी ने इस मुलाकात के दौरान एक संदेश दिया कि समाज को इन मेहनतकशों के योगदान को समझना चाहिए और उनकी कला का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेंटर और कुम्हार जैसे लोग हमारे घरों और समाज को सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर हम इनकी कला और मेहनत की इज्जत करेंगे और इन्हें सहयोग देंगे, तो एक समृद्ध और सशक्त समाज की स्थापना हो सकती है। राहुल गांधी की यह पहल न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने एक उदाहरण प्रस्तुत किया कि कैसे नेता जनता के करीब जाकर उनकी असली समस्याओं को समझ सकते हैं और उनके समाधान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

दिवाली पर दिल्ली में डबल मर्डर की पूरी कहानी, मिठाई लेकर आया, फिर पैर छूकर बरसा दीं गोलियां

नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के शाहदरा के फर्श बाजार इलाके में दो हथियारबंद लोगों ने गुरुवार शाम अपने घर के बाहर दिवाली मना रहे एक चाचा-भतीजे की गोली मारकर हत्या कर दी। वहीं, एक बच्चा घायल हो गया। इस घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी अब सामने आ गया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 17 दिन पहले ही हत्या की योजना बना ली थी। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि घटना में आकाश शर्मा उर्फ ​​छोटू (40) और उसके भतीजे ऋषभ शर्मा (16) की मौत हो गई, जबकि कृष शर्मा (10) गोली लगने से घायल हो गया। उन्होंने बताया कि पीड़ित शाहदरा के फर्श बाजार इलाके में अपने घर के बाहर दिवाली मना रहे थे, तभी रात लगभग 8 बजे उन पर हमला हुआ। यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई थी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरोपी ने 17 दिन पहले ही हत्या की योजना बना ली थी। हिरासत में लिए गए नाबालिग और मृतक आकाश और उसके परिवार के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज हैं। जांच के अनुसार मृतक और आरोपी के बीच पैसों को लेकर विवाद चल रहा था। प्रारंभिक जांच में आपसी रंजिश का मामला सामने आया है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया, पूछताछ जारी है। मिठाई देने के बहाने आया हत्यारा मृतक आकाश की मां ने कहा, “लक्ष्य नाम का एक लड़का पिछले 3-4 दिनों से हमारी गली में चक्कर लगा रहा था। कल वह मिठाई का डिब्बा लेकर हमारे घर आया और मुझसे कहा कि मैं वो डिब्बा ले लूं। जिस समय मेरा बेटा पटाखे फोड़ने की तैयारी कर रहा था, उसी समय लक्ष्य सहित दो लोग आए और फिर मैंने गोलियां चलने की आवाज सुनी। इसके बाद मैंने देखा कि मेरे बेटे को गोली मार दी गई।” अधिकारी ने बताया, ‘‘रात लगभग साढ़े 8 बजे पीसीआर कॉल आने पर पुलिस की एक टीम भेजी गई। टीम को घटनास्थल पर खून के धब्बे मिले।’’ प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने आकाश शर्मा पर गोली चलाने से पहले उसके पैर छुए थे। सभी पीड़ितों को अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने बताया कि पास में खड़े आकाश शर्मा के बेटे कृष और भतीजे ऋषभ को भी गोलियां लगीं। अधिकारी ने बताया कि आकाश शर्मा और ऋषभ शर्मा को अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि कृष शर्मा का इलाज चल रहा है। सीसीटीवी वीडियो में आकाश शर्मा, अपने भतीजे ऋषभ शर्मा (16) और बेटे कृष शर्मा (10) अपने घर के बाहर पतली सी सड़क पर पटाखे फोड़ते नजर आ रहे हैं। इसके बाद एक व्यक्ति दोपहिया वाहन पर आता है और आकाश शर्मा के पैर छूता है, जबकि दूसरा वहीं खड़ा रहता है। कुछ सेकेंड बाद, दूसरा व्यक्ति आकाश पर करीब पांच राउंड गोलियां चलाता है, जिससे उसकी मौत हो जाती है और उनका बेटा घायल हो जाता है। जब आकाश का भतीजा हमलावरों के पीछे भागा, तो बदमाशों ने उसे भी गोली मार दी। पुलिस ने बताया कि प्रथमदृष्टया यह आपसी दुश्मनी का मामला लगता है। रिपोर्ट के अनुसार, आकाश की पत्नी ने कहा कि वह हमलावरों को जानती है और उनके बीच कई सालों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस ने बताया कि पीड़ित परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए जाएंगे और इस संबंध में जांच जारी है।

मध्य प्रदेश के डिंडोरी में जमीनी विवाद में 3 लोगों की हत्या

डिंडोरी मध्य प्रदेश के डिंडोरी में जमीनी विवाद में एक पक्ष ने 3 लोगों की हत्या कर दी। मृतक खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोग पहुंचे और कुल्हाड़ी से वार कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। दो लोगों के शव खेत में मिले, वहीं एक शख्स ने अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ दिया। मामला गाड़ासरई थाना क्षेत्र का है। बताया जा रहा है कि लालपुर गांव में रहने वाले परिवार का दूसरे पक्ष से जमीन को लेकर काफी लंबे समय से विवाद चल रहा था। दिवाली पर वे फसल काटने खेत में पहुंचा था। इसी दौरान कुछ लोग वहां पहुंचकर उनसे विवाद करने लगे। इस दौरान आरोपियों ने आक्रोश में आकर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार कर दिया और मौके से फरार हो गए। इस हमले में दो लोगों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। एक शख्स को ग्रामीण अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी। मृतकों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

बिना प्रीमियम, 1.5 लाख का कैशलेस इलाज, जानिए क्या है नई स्कीम

नई दिल्ली हर साल सड़क हादसों में घायल ना जाने कितने लोग महज इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं, क्योंकि उन्हें समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे हादसों में अक्सर अस्पतालों का महंगा खर्च भी लोगों से उनके अपनों को छीन लेता है। साल 2022 के आंकड़ों को ही अगर देखें तो सड़क हादसों में लगभग 1.68 लाख लोगों की जान गई थी। केंद्र सरकार अब इस तरह के मामलों के लिए एक ऐसी स्कीम लेकर आई है, जिसमें सड़क हादसे के पीड़ित को 1.5 लाख रुपए का कैशलेस इलाज दिया जाएगा। ये स्कीम अभी पायलट प्रोग्राम के तौर पर केवल चंडीगढ़ में लागू की गई है और इसके परिणाम को देखते हुए बाद में इसे देशभर में लागू किया जाएगा। क्या है ये पूरी स्कीम ? केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने गुरुवार को कैशलेस इलाज के इस पायलट प्रोग्राम को लॉन्च किया। इसके तहत किसी भी तरह के सड़क हादसे में घायल को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा और उसे 1.5 लाख रुपए का कैशलेस इलाज मिलेगा। पीड़ित को इसके तहत 7 दिनों तक कैशलेस इलाज दिया जाएगा। मंत्रालय के मुताबिक, इस प्रोग्राम का मकसद एक ऐसा सिस्टम तैयार करना है, जिसमें समय रहते पीड़ित को इलाज मिले। खासकर शुरुआती एक घंटे के भीतर, जो उसकी जिंदगी बचाने के लिए सबसे ज्यादा अहम समय है। सड़क पर होने वाली मौतों को रोकना है मकसद सूत्रों के मुताबिक, सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस बात को माना है कि सड़क हादसों के करीब 97 फीसदी मामलों में औसत मेडिकल खर्च लगभग 60 हजार रुपए तक आता है। बहुत कम मामले ऐसे होते हैं, जहां घायल को लंबे इलाज या आईसीयू केयर की जरूरत पड़ती है। साथ ही सड़क हादसों को लेकर हुई कई रिसर्च में ये भी पता चला है कि एक्सीडेंट के शुरुआती एक घंटे के भीतर अगर पीड़ित को तुरंत इलाज मिल जाए, तो सड़क पर होने वाली करीब आधी मौतों को रोका जा सकता है। इस पायलट प्रोग्राम को पुलिस, अस्पतालों और स्टेट हेल्थ एजेंसी के साथ मिलकर नेशनल हेल्थ अथॉरिटी लागू करेगी। किस तरह के हादसों में मिलेगा कैशलेस इलाज इस पायलट प्रोग्राम के तहत सभी तरह की सड़कों पर गाड़ियों की वजह से होने वाले रोड एक्सीडेंट को कवर किया जाएगा। अगर केस ट्रॉमा या पॉली ट्रॉमा का है, तो आयुष्मान भारत पैकेज भी इस योजना में शामिल होगा। वहीं, योजना से सरकार के खजाने पर किसी तरह का बोझ नहीं पड़ेगा, क्योंकि घायल के इलाज का पूरा खर्च इंश्योरेंस कंपनियों से आएगा। दरअसल इंश्योरेंस कंपनियां वाहन मालिक से जो प्रीमियम लेती हैं, ये खर्च उसी प्रीमियम का छोटा सा हिस्सा होगा। सड़क हादसे में घायल पीड़ित को तुरंत इलाज देने से मौतों की संख्या में कमी आएगी और मुआवजे का खर्च घटने से आखिरकार इसका फायदा इंश्योरेंस कंपनी को ही मिलेगा। पीड़ित का इलाज करने के बाद अस्पताल को इलाज की रकम मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड के जरिए वापस दी जाएगी।

नगर निगम आयुक्त ने सफाई मित्रो के साथ मनाई दिवाली, सफाई मित्रो को दी शुभकानाएं वितरित किये मिष्ठान

सिंगरौली नगर पालिक निगम सिंगरौली के आयुक्त श्री डी.के शर्मा ने आज निगम के सभी जोनो मोरवा, नवजीवन विहार, ग्रामीण एवं बैढ़न जो संलग्न सफाई मित्रो के बीच पहुचकर उनके साथ दीपावली त्योहार की खुशियां बाटी साथ ही निगमायुक्त के द्वारा सफाई मित्रो को मिष्ठान के पैकेट, दिया एवं बाती का वितरण कर सफाई मित्रो को रोशनी के त्योहार दीपावली की शुभकामना प्रेषित की।   इस अवसर पर निगमयुक्त ने सफाई मित्रो को संबोधित करते हुये कहा कि  किसी भी नगर को स्वच्छ और सुंदर बनाने में सफाईकर्मी नींव के पत्थर होते हैं। किसी भी नगर को सुन्दर बनाने का सर्वाधिक श्रेय स्वच्छता के वाहक सफाई मित्रो को ही जाता है। आप सब के अभिवन प्रयासो का ही परिणाम है कि हमारा नगर साफ एवं सुन्दर दिखता है। आज हम सब रोशनी के पर्व दीपावली पर एक साथ सकल्प ले कि आगे भी अपने नगर को स्वच्छ सुन्दर बनाने के लिए वर्ष भर पूरी कर्तव्य निष्ठा से अपने दायित्वों का निर्वहन करेगे।  इस अवसर पर नगर निगम के उपायुक्त आरपी बैस, स्वक्षता निरीक्षक संतोष तिवारी, राजीव सिंह, रामदरश पाण्डे, कैलाश शाह सफाई दरोगा लखमीचंद, छोटू, रामशरण, अशोक त्रिपाठी, राजू, कमलेश भंडारी, दिनेश, रामप्रकाश आईसीमैनेजर आशीष शुक्ला एवं रोहित चौरसिया तथा सफाई मित्र उपस्थित रहे।

हनीमून के नए अंदाज और नई जगहें

अक्सर नवविवाहित जोड़े चाहते हैं कि उन्हें अकेले में वक्त बिताने का समय मिले और हनीमून के लिए भी जगह ऐसी हो जहां भीड़ न हो, शहर के शोर से कहीं दूर और बस वो दोनों और प्यार ही प्यार हो। गोवा, पेरिस, स्विट्जरलैंड, डिज्नी वल्र्ड ये सब पुराने हनीमून ट्रिप हो गए लेकिन अपने पार्टनर के साथ पहली ट्रिप के लिए आप अलग सी जगहें जा सकते हैं। कोस्टा रिका व बेलिज इन्हें दुनिया में सबसे तेजी से उभरते हनीमून स्थलों के रूप में बताया जा रहा है। चूंकि नए जोड़े अब बीच पर मस्ती के अलावा भी कुछ तलाश रहे हैं इसलिए मध्य अमेरिका में स्थित कोस्टा रिका व बेलिज तमाम तरह की गुंजाइश उपलब्ध कराते हैं। चाहे वह घने जंगल में पेड़ की सबसे ऊंची डाल पर मचान से नीचे लटकने का आनंद हो या फिर झरने में नहाने का या माया सभ्यता के अवशेषों को देखने का। बीच तो खैर यहां एक से बढ़कर एक हैं ही। यहां आपको चार सौ डॉलर रोजाना की दर में हनीमून कॉटेज मिल सकती है। ट र्क्स एंड काइकोस अमेरिका में मियामी से एक छोटी सी उड़ान आपको यहां ले जाती है। सैलानियों के लिए यह जगह अपेक्षाकृत नई है। यहां के सफेद महीन रेत वाले बीच आपको ज्यादा सुकूनभरे लगेंगे। यहां के पानी के भीतर की कोरल रीफ भी आपको ज्यादा छेड़छाड़-मुक्त मिलेगी। यहां का पैरट के रिसॉर्ट तमाम सेलेब्रिटीज की पसंद है। यहां आपको 315 डॉलर प्रतिदिन की दर से कमरे मिल जाएंगे। यहां शैम्पेन की मस्ती के बीच गुलाब की पंखुड़ियां पर आप हनीमून मना सकते हैं। यह जगह सुकून से कुछ दिन बिताने के लिए उपयुक्त है। क्रोएशिया इसे हमेशा से यूरोप के सबसे खूबसूरत इलाकों में माना जाता रहा है। नब्बे के दशक में युद्ध ने इसे उजाड़ बना दिया था। लेकिन अब सैलानी फिर से एड्रियाटिक तट पर स्थित इस देश का रुख कर रहे हैं। इसका लंबा तट ही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है। यहां आपको साइक्लिंग, गोल्फ, कैंपिंग, घुड़सवारी, क्लाइंबिंग, डाइविंग, फिशिंग, राफ्टिंग, कयाकिंग, एडवेंचर रेसिंग, गुब्बारे में उड़ान, आदि के लिए पूरा अवसर मिलेगा। धार्मिक पर्यटन और हेल्थ पर्यटन के भी यहां बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं। सेंट लूसिया कैरेबियाई समुद्र के सबसे खूबसूरत इलाकों में से एक। पिछले कुछ समय से यह पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में रहा है लेकिन सैलानियों की संख्या अभी इतनी नहीं हुई है कि यहां की शक्लो-सूरत बदल दे। दरअसल अब भी यहां केले का व्यवसाय पर्यटन से बड़ा माना जाता है। यहां लोग सिर्फ और सिर्फ सुकून के लिए आते हैं। आपको ऐसे रिसॉर्ट मिल जाएंगे जिनमें न फोन है, न रेडियो और न ही टीवी। जेड माउंटेन रिसॉर्ट के कमरों में तो केवल तीन दीवारें हैं और चैथी दिशा में कमरा आपके निजी अंतहीन पूल में खुलता है जो आपको बेरोकटोक नजारा देता है। ऐसे कमरे आपको कई अन्य रिसॉर्ट में भी मिल जाएंगे। बोरा बोरा प्रशांत महासागर में स्थित फ्रांसीसी आधिपत्य वाला यह द्वीप कई दशकों से एक पसंदीदा हनीमून डेस्टिनेशन रहा है। इसे सबसे लोकप्रिय द्वीप के तौर पर भी माना जाता है। यहां आने पर जन्नत का सा अहसास होता है। लैगून में पानी के बीच में बने बंगले बोरा-बोरा के ज्यादातर रिसॉर्ट की खासियत हैं। यहां से मिलने वाला नजारा और यहां की प्राइवेसी, दोनों ही दुर्लभ हैं। इस द्वीप की कुल आबादी नौ हजार से भी कम है। जाहिर है कि यहां के तमाम रिसॉर्ट में हनीमून पर आए जोड़ों को सहूलियतें देने की होड़ सी रहती है। कोई नाव से मुफ्त में लाने-ले जाने की सुविधा देता है तो कोई शैम्पेन के साथ कैंडललाइट डिनर। कोई क्रूज का आकर्षण पेश करता है तो कोई जोड़े के लिए बॉडी ट्रीटमेंट का। लेकिन सुविधाओं की कीमत भी है। आपकी सारी चीजें चाहिए तो तीन रात का पैकेज चार हजार डॉलर तक आपकी जेब हल्की कर सकता है। थाईलैंड यूं तो थाईलैंड अपने तटों के लिए दुनियाभर में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। खास तौर पर फुकेट द्वीप में सैलानी उमड़े पड़े रहते हैं। लेकिन जो लोग समुद्र तट से उकता चुके हों, उनके लिए भी थाईलैंड में काफी कुछ हैं। जैसे कि गोल्डन ट्राइएंगल इलाका जहां थाईलैंड, बर्मा व लाओस मिलते हैं। यहां बीच भले ही न हो लेकिन जोड़े यहां नाव पर बैठकर नदी के रास्ते रिसॉर्ट में पहुंचते हैं, पूल व स्पा का मजा ले सकते हैं, मेकोंग नदी में क्रूज कर सकते हैं, पिकनिक मना सकते हैं या हाथियों के साथ खेल सकते हैं। रात में नदी किनारे कैम्पफायर करते-करते डिनर कर सकते हैं। यहां पुराने शहर हैं, प्राचीन मंदिर हैं, शॉपिंग के लिए बर्मा जाया जा सकता है। यहां के कई रिसॉर्ट में टेंटनुमा स्यूट का किराया प्रतिदिन हजार डॉलर से शुरू होता है। न्यूजीलैंड न्यूजीलैंड आकार-प्रकार में ब्रिटेन व जापान सरीखा भले ही हो लेकिन इसकी आबादी महज चालीस लाख है। इस लिहाज से इसे दुनिया के सबसे कम भीड़-भाड़ वाले देशों में माना जा सकता है। लेकिन प्रकृति व संस्कृति के मामले में यह अपार है। ऐसी जगह, जहां आप साल में कभी-भी मौज-मस्ती के लिए जा सकते हैं, आपको चाहे सुकून भरे पल चाहिए हों या फिर रोमांचकारी रोमांस। यहां कई द्वीप ऐसे हैं जो आपको ऐसी प्राइवेसी देते हैं जो आपको शायद कहीं न मिले। बानगी देखिए कि बे ऑफ आईलैंड्स में एक रिसॉर्ट में केवल चार विला हैं और हर विला अपने आपमें एक मिनी होटल सरीखा है जहां किसी और को आने-जाने की इजाजत नहीं है। रोजाना 650 डॉलर में आपको अपना अलग पूल, जैक्वेजी, और चारों तरफ कांच लगा स्नानघर मिलेगा। स्कॉटलैंड अगर आप ठेठ अंदाज और महलों-किलों के शौकीन है तो आपके हनीमून के लिए स्कॉटलैंड से बेहतर जगह कुछ नहीं.. खास तौर पर यदि आपको वहां के कुछ चुनिंदा कैसल यानी पुराने महलों में टिकने की जगह मिल जाए जो अब होटलों में तब्दील हो चुके हैं। इनके किराये प्रति रात 600 डालर से शुरू होते हैं। स्कॉटिश हाईलैंड्स में स्कीबो कैसल में तो मैडोना व गाय रिची ने शादी रचाई थी। यह कैसल इतना खास है कि इसमें महज 21 बेडरूम हैं और कोई मेहमान इनमें से किसी एक बेडरूम में जीवनकाल में … Read more

कलेक्टर ने नागरिकों को दी दीपावली और गोवर्धन पूजा की बधाई

सिंगरौली कलेक्टर  श्री चन्द्रशेखर शुक्ला जिले के सभी निवासियों को दीपोत्सव और गोवर्धन पूजा की बधाई और शुभकामनाएं दी है । अपने बधाई संदेश में श्री शुक्ला ने नागरिकों के सुखी और समृद्ध जीवन की कामना करते हुये कहा कि रोशनी का यह पर्व सभी के जीवन को ज्ञान, ऊर्जा और आरोग्य से आलोकित करे।आप सबको मेरी एवं जिला प्रशासन की ओर से दीपोत्सव एवं गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामनए।

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