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शिवाजी महाराज की भूमिका में दिखा ऋषभ शेट्टी का ऐतिहासिक लुक

मुंबई, भारतीय राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता अभिनेता ऋषभ शेट्टी ने इस ऐतिहासिक फिल्म “द प्राइड ऑफ भारत: छत्रपति शिवाजी महाराज” में छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म का पहला पोस्टर कुछ ही देर पहले ऋषभ शेट्टी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया है, जिसे लेकर कंतारा स्टार ऋषभ के प्रशंसक बेहद खुश और उत्साहित हैं। ऋषभ ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का पोस्टर साझा किया और लिखा, ”हमारा सम्मान और विशेषाधिकार, भारत के महानतम योद्धा राजा – भारत के गौरव की महाकाव्य गाथा प्रस्तुत है।” इसके साथ ही ऋषभ ने बताया कि फिल्म 21 जनवरी 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी शिवाजी की बायोपिक शिवाजी की बायोपिक निर्देशक के तौर पर यह संदीप की पहली फीचर फिल्म होगी। इस प्रोडक्शन में महान योद्धा राजा की कहानी को पर्दे पर लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय तकनीकी और बेहतरीन ग्राॉफिक्स का इस्तेमाल किया जाएगा।  ऋषभ शेट्टी निर्देशक संदीप की फिल्म “द प्राइड ऑफ भारत: छत्रपति शिवाजी महाराज” में छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमिका में नजर आएंगे। ऋषक्ष शेट्टी ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमिका निभाना शब्दों से परे सम्मान की बात है। वे एक राष्ट्रीय नायक हैं जिनका प्रभाव इतिहास से परे है और मुझे उनकी कहानी को स्क्रीन पर लाने में बहुत गर्व महसूस होगा।”   फिल्म को लेकर संदीप सिंह का बयान संदीप सिंह ने टोरंटो टाइटल, बॉक्सिंग बायोपिक ”मैरी कॉम” में उन्होंने सह-निर्माता के रूप में काम किया। इसके अलावा संदीप ने “अलीगढ़” और स्लम सॉकर फिल्म “झुंड” सहित कई फिल्मों का निर्माण किया है। उन्होंने ZEE5 स्ट्रीमिंग ओरिजिनल, ट्रांसजेंडर-थीम वाली “सफेद” के साथ अपने निर्देशन की शुरुआत की थी। संदीप ने बायोपिक “पीएम नरेंद्र मोदी” और बायोपिक “मैं अटल हूं” का भी निर्माण किया है। संदीप सिंह ने कहा, “ऋषभ शेट्टी इस भूमिका के लिए मेरी पहली और एकमात्र पसंद थे। ऋषक्ष वाकई में छत्रपति शिवाजी महाराज की ताकत, भावना और वीरता का प्रतीक हैं। यह फिल्म कई सालों से मेरा सपना रही है और इस कहानी को सिल्वर स्क्रीन पर लाना मेरे लिए सौभाग्य और सम्मान की बात है।” शिवाजी महाराज शिवाजी (1630-1680), ने मराठा साम्राज्य की स्थापना उस समय की थी, जब भारत का अधिकांश हिस्सा मुस्लिम राजाओं के शासन में था। उन्होंने सैन्य चालों और रणनीतिक सूझबूझ के मिश्रण का उपयोग करके अपने क्षेत्रों को जीता था। ऐसे समय में जब मुगल सम्राट औरंगजेब हिंदुओं पर अत्याचार कर रहा था, समुदाय ने शिवाजी के नेतृत्व में एकजुट होकर उन्हें छत्रपति (सम्राट) का ताज पहनाया। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान, शिवाजी को एक हिंदू राष्ट्रवादी नायक के रूप में बहुत सम्मान दिया गया था, जिसे लोग आज भी नहीं भुला पाए हैं।    

मुनगंटीवार ने कहा कि 2025 दीपावली से लड़की बहन योजना की राशि 1500 से बढ़ाकर 2100 कर दी जाएगी

मुंबई महाराष्ट्र में महायुति की जीत में बड़ा फैक्टर मानी जा रही लड़की बहन योजना में विस्तार की तैयारी चल रही है। खबर है कि राज्य की नई सरकार अगले साल से रकम बढ़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने ऐसे संकेत दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुनगंटीवार ने कहा कि 2025 दीपावली से लड़की बहन योजना की राशि 1500 से बढ़ाकर 2100 कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के घोषणापत्र में राशि बढ़ाने की बात कही गई थी, जिसक चलते पार्टी पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए राशि में इजाफा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर वादा पूरा नहीं किया गया, तो इससे पूरे देश में पार्टी की छवि खराब होगी। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखेंगे। उन्होंने कहा, ‘हमें अपने वादा पूरा करना चाहिए।’ रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार हमारी प्यारी बहनों को 2100 रुपये देने में सक्षम है। हम फैसला करेंगे कि इसे जनवरी, जुलाई या फिर अगले महीने से शुरू किया जाए। हम लोगों से किया वादा पूरा करेंगे।’ रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘हमने बीते साल भाई दूज पर योजना की शुरुआत की थी और हम अगले साळ भाई दूज से राशि बढ़ा देंगे।’ उन्होंने जानकारी दी है कि मुख्यमंत्री की प्यारी बहनों के खाते में पहले ही पांच किश्तें जमा हो चुकी हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को हुआ था जिसके परिणाम तीन दिन बाद घोषित हुए थे, ‘महायुति’ गठबंधन ने 288 विधानसभा सीट में से 230 सीट पर जीत दर्ज की थी। भाजपा 132 सीट के साथ आगे रही जबकि शिवसेना को 57 और राकांपा को 41 सीट मिली थीं। कब तक सरकार का गठन संभव महाराष्ट्र में बड़ी जीत के बाद भी मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं हो सका है। खबरें हैं कि बुधवार को भाजपा के पर्यवेक्षक विधायक दल के नेता का चुनाव करेंगे। इसके बाद 5 दिसंबर को शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। सीएम पद भाजपा के खाते में आने के आसार हैं। जबकि, डिप्टी सीएम शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से बनाए जा सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस: 6 सूत्रीय मांगों को लेकर आज रायपुर पहुंचे दिव्यांग, विरोध- प्रदर्शन करने से रोका

रायपुर इसे लाचारी कहें, या फिर मजबूरी. अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर आज दिव्यांग विरोध- प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदेश के सभी जिलों से राजधानी रायपुर पहुंचे है. सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करते इससे पहले ही दिव्यांगों को पुलिस ने रोक दिया. दिव्यांग 6 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें से प्रमुख मांग है कि फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे नौकरी कर रहे लोगों का राज्य मेडिकल बोर्ड से भौतिक परीक्षण कराकर बर्खास्त किया जाए. दिव्यांगजनों को प्रतिमाह 5000 रुपए पेंशन दिया जाए. बीपीएल की बाध्यता को ख़त्म किया जाए. इसके अलावा 18 वर्ष से ऊपर की अविवाहित दिव्यांग युवती-महिला को महतारी वंदन योजना में शामिल किया जाए. दिव्यांगजनों के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया जाए. शासकीय दिव्यांग कर्मियों को पदोन्नति में 4% आरक्षण दिया जाए, बेरोजगार दिव्यांगों को बिना गारंटी के लोन दिलाया जाए और कोरोना पूर्व दिए गए समस्त ऋण माफ़ किया जाए.

दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार रहा, सांस पर संकट बरकरार

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली के लोगों को मंगलवार को भी प्रदूषण से राहत नहीं मिली है। दिल्ली के अधिकांश इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 300 के पार रहा। लोगों में सांस लेने की समस्या, आंखों में जलन की शिकायत भी देखने को मिली है। हालांकि, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार लगातार युद्ध स्तर पर काम कर रही है। दिल्ली सरकार के द्वारा एंटी स्मॉग गन चलाई जा रही हैं। जिससे डस्ट प्रदूषण को कम किया जा सके। इसके अलावा प्रदूषण को कम करने के लिए कई चीजों पर प्रतिबंध भी लगाया गया है। बता दें कि केंद्रीय प्रदूषण एवं नियंत्रण बोर्ड सीपीसीबी के अनुसार 3 दिसंबर को सुबह 7:30 बजे तक औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक 274 अंक बना हुआ है। दिल्ली से सटे फरीदाबाद में 255, गुरुग्राम में 222, गाजियाबाद में 181, ग्रेटर नोएडा में 195 और नोएडा में 162 अंक बना हुआ है। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में एक्यूआई 300 से लेकर 400 के बीच दर्ज किया गया है। बवाना में 305, जहांगीरपुरी में 307, मुंडका में 325, नेहरू नगर में 304, आरके पुरम में 303, रोहिणी में 302, शादीपुर में 342, सिरी फोर्ट में 306 बना हुआ है। वहीं, दिल्ली के अन्य इलाकों में एक्यूआई का स्तर 200 से ऊपर 300 के बीच रहा है। अलीपुर में 272, आनंद विहार में 293, अशोक विहार में 285, चांदनी चौक में 249, मथुरा रोड में 235, डॉ करणी सिंह शूटिंग रेंज में 293, डीटीयू में 265, द्वारका सेक्टर 8 में 299, आईजीआई एयरपोर्ट में 257, दिलशाद गार्डन में 262,आईटीओ में 235, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 250, लोधी रोड में 232, मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में 271, मंदिर मार्ग में 262, नजफगढ़ में 237, नरेला में 260, नॉर्थ कैंपस डीयू में 261, द्वारका में 252, ओखला फेस 2 में 278, पटपड़गंज में 271, पंजाबी बाग में 252, पूषा में 248, सोनिया विहार में 289, श्री अरविंदो मार्ग में 238 दर्ज किया गया है।  

प्रधान पाठक और महिला बीईओ के बीच हुई हाथापाई, पुलिस ने प्रधान पाठक के खिलाफ दर्ज किया मामला

अभनपुर अभनपुर में महिला बीईओ के साथ प्रधान पाठक का विवाद इस कदर बढ़ा कि मामला हाथापाई तक जा पहुंचा. बीईओ की शिकायत पर अभनपुर पुलिस प्रधान पाठक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है. बताया जा रहा है कि सोमवार को परसदा गांव स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रधान पाठक राजन बघेल अपने CR में श्रेणी की मार्किंग करवाने के लिए अभनपुर स्थित विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय आए थे. इस दौरान श्रेणी की मार्किंग के लिए बीईओ धनेश्वरी साहू पर दबाव बनाने लगे. बीईओ के इंकार करने पर गाली-गलौज करते हुए फाइलों को उनके टेबल पर पटकने लगे. इस पर कार्यालय स्टाफ ने उन्हें नियंत्रित कर कक्ष से बाहर लाकर पानी पिलाया गया. लेकिन इसके बाद प्रधान पाठक फिर से बीईओ कक्ष में गए और अपनी CR श्रेणी में तत्काल सुधार करने का दबाव बनाने लगा. बीईओ के पुनः इनकार करने पर वे इस कदर आक्रोशित हो गए मामला हाथापाई तक पहुंच गया. कार्यालय के स्टाफ ने बीच-बचाव कर दोनों को छुड़ाते हुए प्रधान पाठक को बाहर ले गए. पूरी घटना विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है. मामले में प्रार्थीया की रिपोर्ट पर थाना अभनपुर द्वारा प्रधान पाठक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 115(2), 296 और 351(2) के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है.

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0: शहर के 40 वार्डों में शिविर और घर-घर किया गया रेपिड सर्वे

धमतरी भारत सरकार द्वारा सितम्बर 2024 में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 लागू किया गया। योजना के तहत लाभ लेने के लिए परिवार के सभी सदस्यों का आधार कार्ड, 31 अगस्त 2024 के पूर्व निवासरत होने संबंधी दस्तावेज, भारत वर्ष में किसी सदस्य के नाम पर पक्का मकान नहीं होने का शपथ पत्र, आय प्रमाण पत्र (सक्षम अधिकारी से सत्यापित), भू-स्वामित्व संबंधी दस्तावेज(पट्टा/ऋण पुस्तिका/बी.1 पी.2), जाति प्रमाण पत्र (एस.सी./एस.टी./ओ.बी.सी.), हितग्राही का बैंक पासबुक की छायाप्रति, राशन कार्ड की छायाप्रति तथा अन्य योजनाओं का विवरण (एसबीएम/एनयूएलम/सूर्यघर बिजली/प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना/पूर्व में लाभार्थी आवास) आदि दस्तावेज आवश्यक हैं।   बता दें कि प्रदेश में बीते 15 नवम्बर को उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0  की शुरूआत की थी। कलेक्टर नम्रता गांधी के निर्देश पर इसके तहत जिले में बीते 15 नवम्बर से 24 नवम्बर तक धमतरी नगरपालिक निगम के 40 वार्डों में शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान 1200 आवेदन प्राप्त किए गए। इसके अलावा रेपिड सर्वे के माध्यम से प्रत्येक वार्ड में संभावित पात्र हितग्राहियों का डोर-टू-डोर सर्वे किया गया।

अपने गैजट्स में जोड़िए फंक्शन, बनाइए बेहतर

आप अपने पास मौजूद कई गैजट्स (स्मार्टफोन, टैबलट, वाई-फाई राउटर, कैमरे) में ऐसे फीचर्स जोड़ सकते हैं, जिनकी सुविधा कंपनी ने नहीं दी है। इसके लिए बस आपको थोड़ा सा दिमाग लगाने की जरूरत होती है। बाकी हितेश राज भगत और करण बजाज बता देते हैं कि इसे आप कैसे कर सकते हैं, आगे क्लिक करते जाइए और जानिए… आपका मल्टिफंक्शनल स्मार्टफोन:- क्या आपके लैपटॉप में वेबकैम नहीं है? तो आपको फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है। फ्री ऐंड्रॉयड ऐप ड्रॉइडकैम के जरिए आप फोन के कैमरे और माइक्रोफोन का इस्तेमाल कर स्काइप, गूगल हैंगआउट और बाकी प्लैटफॉर्म पर दोस्तों से बात कर सकते हैं। इसके लिए फ्री ऐप और फ्री विंडोज, लाइनक्स सर्वर सॉफ्टवेयर चाहिए। इसके बारे में आपको विस्तार से जानकारी ‘डब्लूडब्लूडब्लू डॉट डीईवी7एप्पस डॉट कॉम’ पर मिल सकती है। वाई-फाई रेंज दुगनी-तिगुनी करिए:- वाई-फाई एक अजीब साइंस है। आप ठीक-ठीक नहीं पता लगा सकते कि आपका वाई-फाई कहीं पर क्यों कमजोर होता है, लेकिन आप कुछ गाइडलाइंस के मुताबिक काम करके वाई-फाई की रेंज बढ़ा सकते हैं। बेहतर कवरेज के लिए राउटर को घर के बीचो-बीच रखिए और इसे 6 फीट या इससे ज्यादा की ऊंचाई पर रखिए। ऐसा इस वजह से क्योंकि वाई-फाई सिग्नल ओमनी-डायरेक्शनल होते हैं और वे ऊपर जाने की जगह नीचे की तरफ आते हैं। अगर आपके पास दो ऐंटेना वाला राउटर है, तो एक को वर्टिकल रखिए, दूसरे को हॉरिजनटल। अगर आप ये न कर सकें या इन तरीकों से फायदा न हो, तो रेंज बढ़ाने के लिए पुराने राउटर्स को वाई-फाई सिग्नल रिपीटर्स के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं या आप किसी इलेक्ट्रिकल आउटलेट में सीधे लगाने के लिए डीलिंक और नेटगियर जैसे ब्रैंड्स के छोटे रिपीटर्स (कीमत करीब 1500 रुपए) खरीद सकते हैं। रिपीटर अपने नेटवर्क की सीमा पर लगाएं, जिससे वह वहां से सिग्नल को आगे भेज सके। इसे लगाना बहुत आसान होता है। इसमें रिपीटर मोड चुनिए, अपने वाई-फाई नाम और पासवर्ड को डालिए, बस हो गया। आप दुगना या तिगुना या आउटडोर तक सिग्नल पहुंचाने के लिए और रिपीटर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। अपने कैमरे की क्षमता बढ़ाइए:- किसी कैमरे से आरएडब्लू फॉर्मैट की इमेज उस तस्वीर का डिजिटल नेगेटिव होता है। सही सॉफ्टवेयर की मदद से आप आरएडब्लू इमेज को बेहतर प्रोसेस कर सकते हैं, ताकि आपको अच्छी तस्वीर मिल सके। आम तौर पर डीएसएलआर कैमरों में आरएडब्लू का ऑप्शन होता है। कई मिड-रेंज और एंट्री लेवल कैमरों में यह नहीं होता, जबकि कई बार उनका हार्डवेयर इसे सपॉर्ट करता है। आप एक टेंपररी फर्मवेयर (एक तरह का सॉफ्टवेयर) की मदद से आप अपने कैमरे को ऐसा ऐसा बना सकते हैं कि वह आरएडब्लू इमेज ले सके और आपको कुछ अतिरिक्त सेटिंग्स दे सके। कैनन के कैमरे रखने वाले लोग ले सकते हैं। आप अपने कैमरा मॉडल को सर्च करिए और सही फर्मवेयर डाउनलोड कर लीजिए। इसमें स्टेप-बाई-स्टेप बताया गया है कि कैमरे में फर्मवेयर कैसे लोड करें। एक बार फर्मवेयर अपडेट होने के बाद आप आरएडब्लू ऑप्शन के अलावा कई और सेटिंग्स देख सकेंगे। यह ध्यान रखिएगा कि आरएडब्लू इमेज सेव करने में ज्यादा वक्त और ज्यादा जगह लगती है। कैनन डीएसएलआर यूजर मैजिक लैंटर्न नाम का फर्मवेयर ले सकते हैं। इससे वे अपने म्व्ै कैमरे में और फंक्शनैलिटी डाल सकते हैं। इससे लाइव हिस्टोग्राम, फोकस पीकिंग, स्पॉटमीटर, एचडीआर विडियो, अनकम्प्रेस्ड रॉ विडियो सपॉर्ट, मोशन डिटेक्शन जैसे कई फीचर मिलेंगे. सपोर्टेड डीएसएलआर कैमरों की लिस्ट के लिए डबलूडबलूडबलू डॉट मैजिकक्लैंटर्न डॉट एफएम पर जा सकते हैं। वायरलेस हार्ड ड्राइव और प्रिंटर:- वाई-फाई शेयर करने का शानदार जरिया है। लिहाजा आपके पास मौजूदा प्रिंटर (नॉन-वायरलेस) या एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव है, तो आपको इन बिल्ट यूएसबी पोर्ट और प्रिंट सर्वर से लैस राउटर लेना चाहिए। मिसाल के तौर पर बेल्किन का प्लेमैक्स एन600 (8, 000 रुपए) वाई-फाई एन सर्टिफाइड राउटर है और ड्यूल यूएसबी पोर्ट भी है। साथ ही, इसे परंपरागत वायरलेस राउटर की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। आप इसमें एक साथ यूएसबी हार्ड ड्राइवर और यूएसबी प्रिंटर कनेक्ट कर सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि इस नेटवर्क पर कोई भी कंप्यूटर घर में किसी जगह से प्रिंट करने में सक्षम होगा। साथ ही, हार्ड ड्राइव में मौजूद कॉन्टेंट का भी ऐक्सेस मुमकिन होगा। टीवी का वायरलेस विडियो सिग्नल:- अगर आपको अपने स्टाइलिश एलईडी-एलसीडी टीवी के केबल के कारण आने वाली खड़खड़ाहट पसंद नहीं है, तो आप अपने टीवी को वायरलेस बना सकते हैं। आपको अपनी मौजूदा डिवाइसेज (मसलन केबल सेट टॉप बॉक्स, डीवीडी प्लेयर और गेम कंसोल) के लिए वायरलेस एडीएमआई अडॉप्टर खरीदना होगा। इसके बाद टीवी के एचडीएमआई पोर्ट में रिसीवर और बाकी डिवाइस में ट्रांसमीटर लगाना होगा। वायरलेस एवी ट्रांसमीटर और रिसीवर की कॉस्ट 4, 000 लेकर 65, 000 रुपए तक बैठती है। कॉन्टेंट (फोटो, म्यूजिक, विडियो) की स्ट्रीमिंग के लिए मौजूदा वाई-फाई कनेक्शन का इस्तेमाल करते हुए स्मार्टफोन या टैबलट जैसी डिवाइस से टीवी को जोड़ने के लिए डीएलएनए टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया जा सकता है। आईपैड को बनाइए दूसरा डिस्प्ले:- आईपैड का डिस्प्ले काफी शानदार है। चाहे आप आईपैड 2 इस्तेमाल करें या फस्र्ट जेनरेशन आईपैड मिनी, डिस्प्ले की क्वॉलिटी काफी बेहतरीन है। इस वजह से आपको इसे अपने कंप्यूटर के लिए दूसरे डिस्प्ले की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। यह ट्रिक विंडोज और मैक दोनों पर काम करती है। इसके लिए सबसे पहले यह पक्का करें कि कंप्यूटर और आईपैड दोनों एक ही वाई-फाई नेटवर्क से जुड़े हों। साथ ही, एयर डिस्प्ले 2 (9.99 डॉलर) या डिस्प्लेपैड (2.99 डॉलर) और कंप्यूटर के लिए संबंधित सर्वर ऐप लेना होगा। यह ऐप आपके आईपैड को वायरलेस सेकंड डिस्प्ले में बदल देगा, जो एक्सटेंडेड डिस्प्ले हो सकता है।  

तालाब में तैरता मिला नवजात शिशु का शव, ग्रामीणों में आक्रोश

खैरागढ़ जिले में मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां तालाब में एक नवजात शिशु का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है. यह मामला ग्राम देवरी का है. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है. वहीं इस घटना को लेकर गांव के लोगों में आक्रोश है. ग्रामीण दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहे. जानकारी के मुताबिक, आज सुबह गांव के कुछ लोग तालाब पहुंचे तो उन्होंने तालाब में एक अज्ञात वस्तु को तैरते हुए देखा. करीब जाकर जांच की तो यह नवजात शिशु का शव निकला. यह दृश्य देखकर ग्रामीण स्तब्ध रह गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही खैरागढ़ थाना क्षेत्र की पुलिस मौके पर पहुंची और तालाब से शव को बाहर निकाला. प्रथम दृष्टया यह मामला किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा शिशु को तालाब में फेंकने का प्रतीत होता है. शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है. पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है. वहीं गांव के लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश है. ग्राम देवरी के निवासी इसे मानवता के खिलाफ एक क्रूर घटना मान रहे हैं. गांव के बुजुर्ग और युवा इस कृत्य के दोषी को कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं. घटना की जांच कर रहे, दोषियों पर होगी कार्रवाई : थाना प्रभारी खैरागढ़ थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया, हम हर पहलू से इस घटना की जांच कर रहे हैं. नवजात के माता-पिता की पहचान और घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है. जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. मूढ़ीपार में भी मिला था नवजात शिशु का शव बता दें कि इसके पहले भी खैरागढ़ जिले के ग्राम मूढ़ीपार में नवजात शिशु का शव मिला था, जिसके बाद आज फिर जिले के ग्राम देवरी में एक नवजात शिशु का शव मिला है. यह घटना समाज के लिए एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है. एक नवजात शिशु को इस तरह तालाब में फेंकना न केवल अमानवीय है, बल्कि यह समाज में बढ़ती संवेदनहीनता का भी संकेत है. इस मामले ने शिशु संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठाए हैं. फिलहाल पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों से पूछताछ कर रही है. साथ ही आसपास के अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों से हाल ही में हुए प्रसव के मामलों की भी जांच की जा रही है.

सीएम साय ने ”नालंदा परिसर” का किया भूमिपूजन, महतारी वंदन योजना की जारी की 10वीं किश्त

रायगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज रायगढ़ में वित्त मंत्री ओपी चौधरी के ड्रीम प्रोजेक्ट हाईटेक लाइब्रेरी नालंदा परिसर के भूमिपूजन समेत 137 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसके अलावा, सीएम ने महतारी वंदन योजना की 10वीं किश्त की राशि ऑनलाइन जारी की। साथ ही रायगढ़ में रिंग रोड बनाने और रामलला दर्शन योजना से लाभ देने की भी घोषणा की है। वहीं कांग्रेस के धान खरीदी निरीक्षण के फैसले का स्वागत करते हुए निशाना भी साधा। बता दें कि रायगढ़ के शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी मिनी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने रायपुर की तर्ज पर रायगढ़ के मरीन ड्राइव एरिया में 42 करोड़ की लागत से बनने वाले नालंदा परिसर का भूमिपूजन किया, इसके साथ ही उन्होंने रायगढ़ जिले को 137 करोड़ रुपये की लागत वाले विकास एवं निर्माण कार्यों की सौगात दी, जिसमें 97 करोड़ 51 लाख रुपये की लागत से निर्मित 67 कार्यों का लोकार्पण और 37 करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 13 कार्यों का शिलान्यास शामिल है। वहीं रायगढ़ में रिंग रोड की घोषणा भी सीएम साय ने की। रायगढ़ में प्रदेश का सबसे बड़ा नालंदा परिसर गौरतलब है कि रायगढ़ के मरीन ड्राइव में सर्वसुविधायुक्त नालंदा परिसर प्रदेश का सबसे बड़ा नालंदा परिसर होगा। इसके लिए नगर निगम और एनटीपीसी के मध्य 42 करोड़ 56 लाख का करार हुआ है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। बता दें कि नालंदा परिसर एक अत्याधुनिक लाइब्रेरी होगी। इसमें वह सारी सुविधाएं होंगी जो अमूमन बड़े शहरों और विश्वविद्यालयों की को लाइब्रेरी में देखने को मिलती हैं। इसमें आने वाले समय के मांग और जरूरतों के अनुसार सुविधा संसाधन होंगे। यहां अध्ययन-अध्यापन का एक ऐसा इको सिस्टम छात्रों को मिलेगा, जिससे वे खुद को प्रदेश के साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर सकेंगे। नालंदा परिसर स्मार्ट लाइब्रेरी और स्टडी जोन होगा। कार्यक्रम के बाद रायगढ़ में पत्रकारों से चर्चा करते हुए सीएम विष्णुदेव साय ने कहा- रायगढ़ के बेटा-बेटियों के लिए नालंदा परिसर बनाया जा रहा है। शहर को रिंग रोड की जरूरत थी, वह भी पूरी की जाएगी। रामलला दर्शन योजना का भी रायगढ़ वासियों को लाभ मिल रहा है। सीएम साय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा- कि कांग्रेस के धान खरीदी निरीक्षण का स्वागत है। वह धान खरीदी केंद्रों में जाएं और वस्तुस्थिति की जानकारी लें।

ब्रेक पर जाना चाहते हैं तो..

कामकाजी जीवन में निजी या अन्य कारणों से कुछ न कुछ रुकावटें आती रहती हैं। कई प्रोफेशनल्स के करियर में चाहे-अनचाहे ब्रेक्स आ जाते हैं। हालांकि, महिलाओं के करियर में ऐसे ब्रेक्स ज्यादा आते हैं, फिर भी महिला कर्मचारी हों या पुरुष, ऐसे लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है, जो अपने काम से कुछ देर या लंबे समय के लिए दूर चले जाते हैं। पहले जरूरत यह समझने की है कि ब्रेक पर जाना क्यों जरूरी हो जाता है? आज वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण जरूरी हो गया है कि संस्थान अपने कार्यकारी ढांचे में जरूरी तब्दीलियां लाएं। इस कारण कुछ कर्मचारियों का काम से दूर जाना उनकी मजबूरी बन जाता है। एक अन्य कारण कर्मचारी का एक ही बंधे-बंधाए ढांचे में लंबे समय तक काम करने से जुड़ी बोरियत भी हो सकता है या फिर अपना काम शुरू करने के प्रयास में मिली असफलता, जिसके बाद उन्हें लौटने में कुछ समय लगता है। ऐसे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। ब्रेक के दौरान:- हम अक्सर अपनी मान्यताओं के रूप में कई ऐसी भ्रामक धारणाएं पाले रखते हैं, जिन्हें खुद से दूर रखना ही बेहतर होता है। यह धारणाएं अपनी क्षमताओं (या कमियों) के रूप में भी हो सकती हैं या सही-गलत से जुड़े निजी पूर्वाग्रहों की भी। जाहिर है कि यह धारणाएं लंबे कार्यानुभव के आधार पर ही बनती हैं, जिन पर ब्रेक के दौरान आप पुनर्विचार कर सकते हैं। यह भी जरूरी है कि आप इस दौरान अपनी खूबियों-खामियों पर भी सोचें, ध्यान दें कि कार्य से जुड़ी आपकी असली दक्षता उसके किस पक्ष से जुड़ी है। बेशक आप अपने काम से दूर हैं, परंतु आपके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष, जो अभी तक कुछ पीछे रहा था, अब उसे आगे लाना होगा। यहां आशय है आपके परिवार से। परिवार के साथ फुर्सत के कुछ पल बिताना भी खासा स्फूर्तिदायक होता है, जो किसी भी समस्या पर नए सिरे से सोचने के लिए भी प्रेरित करता है। आपको अपने कार्यक्षेत्र में लौटना ही है तो क्यों न किसी नए उद्देश्य को ध्यान में रख कर वापसी की जाए। फिर चाहे यह नयापन किसी नए करियर की ही नींव क्यों न रखे। इससे न केवल आप खुद से जुड़ी एक नई खोज कर पाएंगे, बल्कि एक नया परिदृश्य आपके सामने रूपांतरित होगा, जिसमें आप अपनी कुछ शर्तों को पूरा करने में सफल होंगे। मुमकिन है जब आप बाहर थे, तब इंडस्ट्री में कुछ व्यापक परिवर्तन आए हों; हो सकता है आपकी सोच-समझ के अनुसार इंडस्ट्री का नया रूप सामने आ चुका हो, इसलिए जरूरी है कि ब्रेक के दौरान कुछ नए हुनर भी सीख लें। अन्य जरूरी बातें:- विदेशों में करियर ब्रेक और विश्राम काल (सैबेटिकल) के बीच कुछ फर्क होता है। विश्राम काल से जुड़ी पॉलिसी किसी कंपनी में हो सकती है और वह अपेक्षाकृत अधिक औपचारिक होती है। इसके अंतर्गत, कर्मचारी मैनेजमेंट की रजामंदी से कुछ समय का ब्रेक लेता है, जिस दौरान आय और पेंशन के लिए कटने वाली राशि रोकी जा सकती है। विश्राम काल की अवधि कंपनी तय कर सकती है और इसकी जद में सीनियर मैनेजर्स या फुल-टाइम स्टाफ ही आता है। दरअसल यह सुविधा उन लोगों को मिलती है, जिन्हें लौट कर अपनी पुरानी जिम्मेदारी संभालनी हो। इस अवधि के दौरान व्यक्ति अपने करियर की दशा-दिशा को लेकर मनन कर सकता है। बेशक यह सुविधा सुनने में नई लगे, परंतु दुनिया में कई जगह इसका अभ्यास जारी है। क्या सोचते हैं एम्प्लॉयर्स:- करियर में ब्रेक लेने की जरूरत बेशक आपको महसूस हो रही हो, लेकिन इस बारे में कंपनी या मैनेजमेंट के भी कुछ विचार हो सकते हैं, इसलिए जरूरी है कि उन्हें भी जान लिया जाए। आपका ब्रेक लेना इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस इंडस्ट्री से जुड़े हैं। यदि ब्रेक के दौरान आप अपने ही पेशे से जुड़ा कोई प्रोजेक्ट निजी तौर पर करते हैं तो उसका जिक्र अपने रिज्यूमे में कर सकते हैं, जो तथ्य संभवतः आपको भविष्य में किसी अन्य स्थान पर नौकरी खोजने में सहायक बने। आपकी एग्जिट स्ट्रैटजी:- आपकी एग्जिट स्ट्रैटजी यानी ब्रेक पर जाने की तैयारी बॉस के साथ आपके रिश्तों पर बहुत निर्भर करती है। इस बारे में अपनी कंपनी के नियम-कायदों को भी जान लें। उदाहरण के लिए यदि आप आगे शिक्षा प्राप्ति की योजना बना रहे हैं तो हो सकता है कि कंपनी इसमें आपकी कुछ मदद भी कर सके; शिक्षा से जुड़े कुछ भत्ते आपको मिल सकते हैं। यदि इस विषय में कोई स्पष्ट पॉलिसी नहीं है तो भी आप वेतनरहित छुट्टी की बात कर सकते हैं। यदि ब्रेक से जुड़ी बात कंपनी के साथ नहीं बन पाती और आपको मजबूरन नौकरी को अलविदा भी कहना पड़ता है तो पूरे शिष्ट तरीके से इस प्रक्रिया पर अमल करें। याद रखें, यह दुनिया अगर कई मायनों में बड़ी है तो छोटी भी है, इसलिए आपके भावी अवसर आपके व्यवहार की बलि न चढ़ें, ब्रेक पर जाने से जुड़ा नोटिस पीरियड भी दें, आपके स्थान पर जो काम संभालेंगे उन्हें काम समझा दें, आवेदन पत्र में शिष्टता झलकनी चाहिए और उसे आप खुद प्रेषित करें और अंततः एग्जिट इंटरव्यू में प्रोफेशनल व्यवहार दिखाएं। नई शुरुआत:- यदि आप अपने सहकर्मियों को अंतिम विदा देने जा रहे हैं तो इस बदलाव के कुछ शुरुआती हफ्तों की एक स्पष्ट योजना आपके दिमाग में या लिखित रूप से हो। सामाजिकता अपनाएं और अकेलेपन को दूर रखें। नए स्थानों, अनुभवों और काम सीखने में व्यस्त रहें और साथ ही पुराने संबंधों को भी ताजा करते रहें। यदि रिटायरमेंट से पहले कोई व्यक्ति लंबे ब्रेक पर जाने की मंशा रखता है तो इस अवधि की सफलता का सारा दारोमदार उसके अपने व्यवहार और योजना पर निर्भर करता है। यदि वह सही दिशा में जा रहा है तो उसे सहयोग भी स्वतः ही मिलेगा। जानें ये बातें भी:- निश्चित तिथि और विमर्श:- ब्रेक पर जाने के कई अलग-अलग कारण भी हो सकते हैं। जरूरी यह है कि ब्रेक की शुरुआत एक निश्चित तिथि से हो, जल्दी ही या निकट भविष्य में जैसी अनिश्चितता विकल्प नहीं होती। यदि संभव हो तो अपने ब्रेक को जीवन के किसी महत्वपूर्ण उपलक्ष्य से जोड़ें। ऐसा … Read more

‘देशी टॉक कवि सम्मेलन’ का फिर होगा आयोजन, सीएम साय ने पोस्टर का किया विमोचन

रायपुर प्रदेश में अपनी एक अलग पहचान बना चुके ‘देशी टॉक कवि सम्मेलन’ का एक बार फिर से आयोजन किया जा रहा है. ‘देशी टॉक कवि सम्मेलन 5.0’ के पोस्टर का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज विमोचन किया. मुख्यमंत्री निवास में कार्यक्रम के दौरान चैनल के चेयरमैन नमित जैन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सरकार के एक साल पूरे होने पर बधाई दी. इस मौके पर न्यूज चैनल के चेयरमैन नमित जैन के अलावा संपादकीय निदेशक मनोज सिंह बघेल, सलाहकार संपादक संदीप अखिल, स्थानीय संपादक आशीष तिवारी, राजनीतिक संपादक डॉ. वैभव शिव पाण्डेय, जनसंपर्क आयुक्त डॉ. रवि मित्तल, जनसंपर्क संचालक अजय अग्रवाल और प्रेस अधिकारी आलोक सिंह मौजूद रहे. देशी टॉक कवि सम्मेलन के इस आयोजन में टाइटल स्पॉन्सर हीरा ग्रुप (eblu) हैं. साथ ही पावर्ड बाय में सिंघानिया बिल्डकॉन, शुभम के मार्ट और संभव स्टील पाइप्स एंड ट्यूब्स हैं. इस कार्यक्रम में डिजिटल पार्टनर डेली हंट है. कवि सम्मेलन में शामिल होने वाले कवि देशी टॉक कवि सम्मेलन 5.0 का आयोजन इंडोर स्टेडियम में 18 दिसंबर को किया जाएगा. कवि सम्मेलन में वीर रस के कवि डॉ हरिओम पवार, हास्य व्यंग के कवि डॉ सुनील जोशी, डॉ सुरेंद्र दुबे, अनिल चौबे, श्रृंगार रस की कवियित्री अनामिका जैन, गीतकार स्वयं श्रीवास्तव और रमेश विश्वहार शामिल होंगे. बता दें कि देशी टॉक कवि सम्मेलन का पांचवीं बार आयोजन किया जा रहा है. इसके पहले हुए चार आयोजन 2019, 2021, 2022, 2023-24 में दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है. न केवल आयोजन में शामिल होने प्रदेश से कोने-कोने से पहुंचे दर्शकों ने भी सराहा है.

डकैती थ्रिलर ज्वेल थीफ में नजर आएंगी निकिता दत्ता

मुंबई,  फिल्म घराट गणपति में बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने वाली अभिनेत्री निकिता दत्ता अब बहुप्रतीक्षित डकैती थ्रिलर ज्वेल थीफ में नजर आएंगी। इस फिल्म में सैफ अली खान और जयदीप अहलावत भी अहम भूमिका में हैं। इस थ्रिलर फिल्म की शूटिंग अब आधिकारिक रूप से पूरी हो गई है, और निकिता दत्ता ने सेट पर अपने आखिरी दिन की एक झलक सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए अपनी खुशी जाहिर की। निकिता ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में फिल्म के कलाकारों और क्रू के साथ एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह मुस्कुराती हुई नजर आ रही हैं। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, फिल्म की शूटिंग हमेशा भावनात्मक होती है। लेकिन यह फिल्म अलग तरह से प्रभावित कर रही है। स्क्रीन पर मिलते हैं, मारफलिक्सपी। इसके अलावा, निकिता ने फिल्म की निर्माता ममता आनंद के साथ भी एक तस्वीर शेयर की और लिखा, जस्ट प्यार। ज्वेल थीफ फिल्म एक रोमांचक डकैती थ्रिलर है, जिसे रॉबी ग्रेवाल द्वारा निर्देशित किया गया है। फिल्म में सैफ अली खान और निकिता दत्ता की जोड़ी को लेकर दर्शक काफी उत्साहित हैं। यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी और इसके सिनेमाई सफर को लेकर कई प्रशंसक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। निकिता दत्ता के लिए यह फिल्म बेहद खास है, क्योंकि उन्होंने इस दौरान शानदार अभिनय किया है, और वह एक नए अवतार में दर्शकों के सामने आने वाली हैं।

जनादेश दिवस पर कांग्रेस ने भाजपा पर कसा तंज, पूर्व पीसीसी चीफबोले- सरकार अपनी उपलब्धि बताए

रायपुर भाजपा आज जनादेश दिवस मना रही. इस पर पूर्व पीसीसी चीफ धनेंद्र साहू ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि यह जीत जनादेश नहीं था, ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़ के कारण जीत हुई थी. एक साल में सरकार ने प्रदेश के विकास के लिए क्या किया, अपनी उपलब्धि बताते तो अच्छा होता. उसका उत्सव मनाते तो ठीक था, ये चुराई हुई जीत का जश्न मना रहे हैं. कांग्रेस का धान खरीदी केंद्र चलो अभियान पर पूर्व विधायक धनेंद्र साहू ने कहा, आज से धान खरीदी केंद्र चलो अभियान चलाया जा रहा है. आज पहला दिन है. आज धरसींवा और तिल्दा ब्लॉक के सांकरा गांव के धान खरीदी केंद्र में निरीक्षण के लिए जाएंगे. किसान चिंतित हैं, क्योंकि जो लिमिट तय किए हैं उसके अंदर धान खरीदी नहीं हो पाएगा. किसानों के मन में शंका है कि सरकार धान खरीदना नहीं चाहती है. साहू ने कहा, पॉलिसी बदलने की जरूरत ही क्या थी ? सभी अव्यवस्थाओं को लेकर निरीक्षण के लिए जाएंगे. इसके बाद सरकार को समस्याओं से अवगत कराएंगे. नतीजा नहीं आने पर आगे धरना प्रदर्शन और घेराव हमारा लक्ष्य रहेगा. डायरेक्ट मेयर चुनाव पर धनेंद्र साहू बोले – डरी हुई है सरकार अब डायरेक्ट मेयर चुनाव होगा. इस पर धनेन्द्र साहू ने कहा, अभी साय सरकार ने ये फैसला लिया है. आज इसकी जरूरत क्यों पड़ रही है? पुरानी पद्धति को बदलकर सरकार प्रत्यक्ष पद्धति से चुनाव कर रही है. सरकार डर रही है कि पुरानी पद्धति से चुनाव कराने पर उनको जनादेश नहीं मिल पाएगा. साहू ने कहा, काम तो कुछ हुआ नहीं है. सरकार पांच ही योजना बता दे. मुझे लगता है कि ये नगरीय निकाय चुनाव भी मोदी की गारंटी पर लड़ेंगे, क्योंकि इनकी तो कोई उपलब्धि नहीं है.

जरा कान की भी सुनिए

आजकल सुनने की क्षमता में कमी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। एक शोध कहता है कि 20 से 40 आयु वर्ग के 80 प्रतिशत लोगों में यह समस्या मोबाइल फोन के ज्यादा उपयोग के कारण बढ़ रही है। इसके अलावा भी इस समस्या के अनेक कारण हैं, जो आपके कानों को परेशान करते हैं। आप अपने कानों का कैसे रख सकते हैं ख्याल… विज्ञान के विकास ने हमारी जीवनशैली को काफी बदल दिया है। मोबाइल और गाडियों के बढ़ते उपयोग से ध्वनि प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है और उसी अनुपात में कानों की समस्याएं भी बढ़ी हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कानों की समस्याएं युवाओं में तेजी से बढ़ रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक भारत के 20-22 प्रतिशत लोग कान की किसी न किसी बीमारी के शिकार हैं। इनमें कानों में दर्द होना, धीमी आवाजें सुनाई न देना, कान में किसी तरह का दबाव महसूस होना, कान में सूजन आ जाना या कान से तरल पदार्थ का बहना प्रमुख हैं। इसके अलावा कानों की एक गंभीर समस्या और है कि जब बाहर कोई आवाज नहीं है, तब भी आवाज सुनाई देना या कानों में घंटी बजना। ये समस्याएं आपके एक या दोनों कानों में हो सकती हैं। ध्वनि प्रदूषण का स्वास्थ्य पर प्रभाव:- ध्वनि प्रदूषण का सबसे अधिक जाना-पहचाना नुकसान है सुनने की क्षमता प्रभावित होना या कुछ निश्चित आवाजों को सुनने में अक्षमता, लेकिन ध्वनि प्रदूषण के कुछ दूसरे प्रभाव भी हैं। -ब्लड प्रेशर, हृदय की धड़कनें और सांस की गति बढ़ जाना -पाचन तंत्र गड़बड़ा जाना -कुछ लोगों में शोर माइग्रेन के ट्रिगर का कार्य करता है -ध्यान केंद्रन की शक्ति कमजोर होना और इम्यून तंत्र का कमजोर हो जाना -शोर घावों के भरने और स्वस्थ होने की गति को भी धीमा कर देता है -शोर तनाव के स्तर को बढ़ाता है -कभी-कभी अत्यधिक तेज ध्वनि या वायु दाब में परिवर्तन से कान का पर्दा फट जाता है -अधिक शोर वाले स्थानों में रहने वाले लोगों का व्यवहार चिड़चिड़ा हो जाता है। ईयरफोन से दूरी जरूरी:- आजकल युवाओं में ईयरफोन या हेडफोन का बड़ा क्रेज है। इनके लगातार इस्तेमाल से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक तेज ध्वनि सुनने से कान के पर्दे की मोटाई प्रभावित होती है। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होती है और धीमी आवाजें सुनाई नहीं देती हैं। इसके अलावा इससे याददाश्त और बोलने की क्षमता भी प्रभावित होती है। शोधों में यह बात सामने आई है कि यदि कोई व्यक्ति रोज एक घंटे से अधिक 80 डेसीबल्स से तेज वॉल्यूम में संगीत सुनता है तो उसे अगले पांच वर्षों में सुनने में कठिनाई हो सकती है या स्थाई रूप से बहरा हो सकता है। कान के पर्दे में छेद होना:- जानलेवा घटना जैसे विस्फोट या वाहन चलाते समय कोई दुर्घटना घटित होने से कान में अचानक तेज दर्द हो तो हो सकता है कि कान के पर्दे में छेद हो गया हो। अगर दुर्घटना के समय तेज दर्द हो और फिर सुनाई पड़ना बंद हो जाए तो समझिए की कान के मध्य भाग को नुकसान पहुंचा है। अगर कान के पर्दे में छोटा छेद है तो वह खुद ही भर जाता है, लेकिन अगर बड़ा छेद हो जाए तो सर्जरी की आवश्यकता होती है। स्विमिंग से संक्रमण:- देर तक पानी में रहने से कानों में पानी चला जाता है। इससे कानों में दर्द होना या तरल पदार्थ बहने की समस्या हो सकती है। बचाव के लिए ईयर प्लग का इस्तेमाल करें। हवाई यात्रा में बरतें सावधानी:- हवाई यात्रा के दौरान अक्सर लोगों को कान में दर्द की शिकायत होती है। यह समस्या प्लेन के लैंडिंग करते समय अधिक होती है। बचाव के लिए ईयर प्लग का इस्तेमाल करें। च्यूइंगम चबा कर भी बच सकते हैं। सावधानी से करें सफाई:- कान से मैल अपने आप न निकल पाने के कारण अंदर जमा होने लगता है। इस पर तेल, धूल, धुआं, कचरा आदि लगने के कारण यह कड़ा हो जाता है, जिसे निकालना बेहद जरूरी होता है। कुछ दवाओं की मदद से मैल को मुलायम करके उसे निकाला जाता है। शोर-शराबे से रहें दूर:- मशीनों, फैक्ट्रियों और खासतौर पर ऑटोमोबाइल से निकलने वाले शोर के कारण वातावरण में ध्वनि प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। इस शोर-शराबे का हमारे स्वास्थ्य पर दो तरह से प्रभाव होता है। प्राथमिक स्तर पर इससे हमारी सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। दूसरे स्तर पर एंग्जाइटी और अनिद्रा की समस्या होती है। 20-40 वर्ष की आयु वर्ग के 80 प्रतिशत लोगों में सुनने की समस्या अत्यधिक मोबाइल फोन का उपयोग करने से होती है। हालांकि अभी इसका कोई डॉंक्टरी आधार नहीं है, लेकिन कई शोधों में मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशंस को इसका सबसे प्रमुख कारण माना गया है। कानों को स्वस्थ रखने के टिप्स:- -अपने कानों को अत्यधिक सावधानी से साफ करें। कान में कोई नुकीली चीज न डालें। इससे ईयर कनैल या ईयरड्रम क्षतिग्रत हो सकता है। -ईयर वैक्स स्वयं ही कान की सफाई करता है। अगर यह अधिक मात्रा में एकत्र हो जाए और सुनने में दिक्कत हो तो डॉक्टर से संपर्क करें। -कान के संक्रमण से बचने के लिए गले और नाक के संक्रमण को गंभीरता से लें और तुरंत इलाज कराएं। -कई बीमारियां भी सुनने की क्षमता को प्रभावित करती हैं, इसलिए अगर कोई ऐसा लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। -अगर कानों से मवाद बह रहा है तो इसे गंभीरता से लें और जितनी जल्दी हो सके डॉक्टर को दिखाएं। -कई दवाएं भी सुनने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। अगर कानों में घंटी बजे या दूसरी आवाजें आएं तो इसे गंभीरता से लें। -अत्यधिक तेज आवाज में संगीत न सुनें। -बारिश में भी कई बार नमी के कारण कान की नली में संक्रमण हो जाता है, इससे बचने के लिए कान को सूखा रखें। -कान का मैल साफ करने के लिए नुकीली चीजों या ईयर बड का उपयोग न करें। -नहाने के तुरंत बाद कानों को अच्छी तरह साफ करके सुखाना चाहिए। -कान में कभी कोई तेल न डालें।  

महतारी वंदन योजना: पोषणयुक्त आहार लेकर ममता अपने मजबूत भविष्य की रख रहीं नींव

अम्बिकापुर जिन छोटी-मोटी जरूरतों के लिए पहले महिलाओं को बार-बार अपने बजट में जोड़-तोड़ करनी पड़ती थी, अब महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह मिलने वाली 1 हजार रुपए की सहायता राशि से वे पूरी हो रहीं हैं। यही नहीं, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार के क्षेत्र में भी महिलाएं इस राशि का उपयोग कर सामाजिक-आर्थिक रुप से सशक्त हो रही, और ऐसी महिलाओं की कहानी रोजाना हमें देखने मिल रही है। ऐसी ही एक कहानी अम्बिकापुर के खालपारा की ममता दास की है। ममता बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत उनके खाते में हर महीने 1 हजार रुपए आते हैं। ये राशि मेरे लिए बहुत अहम है, क्योंकि यह मेरे होने वाले शिशु के अच्छे स्वास्थ्य के लिए आधार साबित होगा। इस राशि से पोषणयुक्त आहार लेकर ममता अपने मजबूत भविष्य की नींव रख रहीं हैं। ममता ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं, पति मेहनत मजदूरी करते हैं, छोटी-सी आय में जीवनयापन हो रहा है, पर मैं अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर आगे बढ़ाना चाहती हूं, इसलिए बच्चों के स्वास्थ्य एवं खान-पान का पूरा ध्यान रखती हूं। फल, सब्जी, दूध आदि पोषणयुक्त आहार महतारी वंदन योजना की राशि से खरीदकर मैं स्वयं अपने स्वास्थ्य एवं पोषण का ध्यान रख रही हूं, ताकि होने वाला बच्चा स्वस्थ एवं तंदरूस्त हो। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता ने मातृशक्ति को आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ाया है।

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