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कल सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक की मौजूदगी में देवेंद्र फडणवीस के नाम पर मुहर लग जाएगी!

मुंबई  पांच साल के सीएम, फिर 72 घंटे के मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और फिर ढाई साल के डिप्टी सीएम। पिछले 10 साल तक अलग-अलग रोल में देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र की राजनीति की राजनीति के हीरो बने रहे। अब पांच दिसंबर को वह तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे हैं। महाराष्ट्र में अब पांच साल के मराठा राज के बाद ‘पेशवा’ की ‘पेशवाई’ की चलेगी। बीजेपी ने फडणवीस के नाम को सीएम पद के लिए फाइनल कर लिया है। चार दिसंबर को सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक निर्मला सीतारमन और विजय रूपाणी की मौजूदगी में उनके नाम पर मुहर लग जाएगी। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण नेता, जो दूसरी बार सीएम बनेंगे मराठा इतिहास में पंतप्रधान यानी ‘पेशवा’ अपने कूटनीति और युद्धनीति के लिए जाने जाते थे। देवेंद्र फडणवीस के प्रशंसक भी उन्हें ‘पेशवा’ और देवा भाऊ ही कहते हैं। देवेंद्र फडणवीस पहले भी दो बार महाराष्ट्र के सीएम रह चुके हैं, मगर उनके लिए यह कुर्सी ‘लॉलीपॉप’ की तरह नहीं मिली। हर बार उन्होंने बड़े चैलेंज को स्वीकार किया और हर दांव से पार्टी को जीत दिलाई। उनकी खासियत यह है कि उन्होंने युवा पार्षद के तौर पर राजनीति में एंट्री ली है, इसलिए वह जनता और कार्यकर्ताओं के नब्ज को पहचानते हैं। देवेंद्र फडणवीस संघ के ‘लाडले’ हैं और शाह-मोदी के प्रिय भी। काबिलियत के कारण ही वह मराठा राजनीति वाले राज्य में दूसरे ब्राह्मण सीएम बने। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण सीएम शिवसेना के नेता मनोहर जोशी थे, मगर वह पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। कांग्रेस-एनसीपी के 15 साल के शासन का किया था अंत 2014 में पहली बार देवेंद्र फडणवीस जब सीएम बने थे, तब उन्होंने एनसीपी-कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत किया था। फडणवीस ने विधानसभा से सड़क तक कांग्रेस-एनसीपी शासन में हुए सिंचाई घोटाले को लेकर आवाज बुलंद की। मोदी लहर के बीच प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र ने चुनाव का ताना-बाना बुना और जीत हासिल की। दूसरी बार भी एंटी इम्कबेंसी को दरकिनार कर गठबंधन के साथ बहुमत हासिल किया, मगर सत्ता हासिल नहीं कर सके। 72 घंटे की सरकार बनाई, तब उन्होंने शरद पवार से बातचीत की थी। जब सरकार गिरी, तब फडणवीस ने विधानसभा में चेतावनी के लहजे में पवार और ठाकरे को एक शेर सुनाया था। ‘मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना। मैं समंदर हूं…लौटकर आऊंगा।’ ढाई साल बाद ही शिवसेना दो हिस्सों में टूट गई। एनसीपी के दो टुकड़े हो गए। बीजेपी को फडणवीस सत्ता में ले आए। 2024 में एक बार फिर अपनी रणनीति से एंटी इम्कबेंसी की हवा बदल दी। बीजेपी सर्वाधिक 132 सीटें जीती ही, महायुति ने भी इतिहास रच दिया। नरेंद्र मोदी क्यों हुए देवेंद्र फडणवीस के मुरीद ? रिपोर्टस के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में रैली के दौरान नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट पर बीजेपी के बड़े नेताओं से बातचीत कर रहे थे। वहां नितिन गडकरी, गोपीनाथ मुंडे और देवेंद्र फडणवीस भी थे। नरेंद्र मोदी ने पूछा कि महाराष्ट्र में बीजेपी को कितनी सीटें मिलेंगी? गडकरी और मुंडे 17-18 के आंकड़े तक पहुंच सके। तब देवेंद्र फडणवीस ने 40 सीटें जीतने की भविष्यवाणी की और यह सच साबित हुई। फिर विधानसभा चुनाव के दौरान फडणवीस ने शिवसेना से अलग चुनाव लड़ने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को राजी किया। यह प्रयोग भी सफल हुआ। 2014 में पहली बार शिवसेना से अलग प्रदेश में बीजेपी अकेले चुनाव लड़ी और 125 सीटें हासिल कीं। उनकी इस रणनीति का बीजेपी के बड़े नेताओं ने विरोध किया था, मगर फडणवीस की रणनीति कामयाब रही और बीजेपी को महाराष्ट्र की पहली बार सत्ता मिली। उद्धव ठाकरे के घमंड को तोड़ने वाले ‘पेशवा’! यह कहानी महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में सुनाई जाती है। सच या झूठ, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के केंद्रीय नेताओं ने उद्धव ठाकरे को बातचीत का निमंत्रण दिया था। बताया जाता है कि उद्धव ठाकरे ने संदेश दिया कि बीजेपी नेता मातोश्री में आकर उनसे चर्चा करे। यह बात बीजेपी को पसंद नहीं आई। तब देवेंद्र फडणवीस ने इसे चुनौती के तौर पर लिया। पहले बीजेपी अकेले चुनाव लड़कर बड़ी पार्टी बनी। 44 साल की उम्र में जब पहली बार सीएम बने, तब फडणवीस ने पहली बार शिवसेना को गठबंधन का जूनियर पार्टनर बनाया। पांच साल तक सरकार चलाई। दूसरी बार बीजेपी और शिवसेना साथ में उतरी। महायुति को बहुमत मिला, मगर उद्धव ठाकरे सीएम पोस्ट पर अड़ गए। देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी के क्षणिक बागी अजित पवार के साथ 80 घंटे के लिए सरकार बनाई, मगर चल नहीं सकी। फडणवीस विपक्ष में बैठे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ढाई साल में ही दो हिस्सों में बंट गई। जब चुनाव में उतरे तो ठाकरे की सेना को 20 पर समेट दिया। धीरे-धीरे देवेंद्र बनते गए मराठा राजनीति के सूरमा देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधर फडणवीस जनसंघ और बीजेपी के नेता रहे। नागपुर के गंगाधर फडणवीस को नितिन गडकरी भी अपना राजनीतिक गुरु बताते रहे हैं। 22 साल की उम्र में फडणवीस ने नागपुर के पार्षद से राजनीति शुरूआत की, फिर 27 साल की आयु में युवा मेयर बनने का रेकॉर्ड बनाया। 1999 में दक्षिण पश्चिम नागपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़े और लगातार जीतते रहे। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले गोपीनाथ मुंडे के आकस्मिक निधन के बाद नेतृत्व की चर्चा चल रही थी। नितिन गडकरी और एकनाथ खडसे जैसे दिग्गज कतार में थे। चुनाव के दौरान दिल्ली में नरेंद्र, महाराष्ट्र में देवेंद्र का नारा काफी लोकप्रिय हुआ। देखते ही देखते वह बीजेपी के पोस्टर बॉय बन गए। अपनी बेदाग छवि और लोकप्रियता के कारण आरएसएस ने भी उन्हें नेक्स्ट जेनरेशन के नेता के तौर पर चुना, जिसमें वह खरे साबित हुए। उन्होंने गठबंधन की सरकार चलाकर अपने नेतृत्व क्षमता को भी साबित कर दिया।

बर्तन में छुपा सेहत का खजाना

सेहतमंद खाना पकाने के लिए आप तेल-मसालों पर तो पूरा ध्यान देती हैं, पर क्या आप खाना पकाने के लिए बर्तनों के चुनाव पर भी ध्यान देती हैं? अगर आपका जवाब न है तो आज से ही इस बात पर भी ध्यान देना शुरू कर दें। बर्तन कैसे आपको सेहतमंद बना सकते हैं… खाना पौष्टिक और सेहतमंद हो इसके लिए हम न जाने कितने जतन करते हैं। कम तेल इस्तेमाल से लेकर सब्जियों और दालों को सफाई से धोना, आटा साफ हाथ से गुनना, घर और किचन में साफ-सफाई का खास ख्याल रखना, भोजन की गुणवत्ता, ताजापन, सही मसालों का उपयोग और भी बहुत कुछ हमारी आदत में शुमार हो चुका है। लेकिन एक अहम चीज हम अकसर भूल जाते हैं और वह है हमारे बर्तन। जी हां, भोजन की पौष्टिकता में यह बात भी मायने रखती है कि आखिर उन्हें किस बर्तन में बनाया जा रहा है। आपको शायद मालूम न हो, लेकिन आप जिस धातु के बर्तन में खाना पकाते हैं उसके गुण भोजन में स्वतः ही आ जाते हैं। डाइटीशियन ईशी खोसला के मुताबिक भोजन पकाते समय बर्तनों का मैटीरियल भी खाने के साथ मिक्स हो जाता है। एल्यूमीनियम, तांबा, लोहा, स्टेनलेस स्टील और टेफलोन बर्तन में इस्तेमाल होने वाली आम सामग्री हैं। बेहतर है कि आप अपने घर के लिए कुकिंग मटेरियल चुनते समय कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखें और इसके लिए आपको उन बर्तनों के फायदे नुकसान के बारे में जानकारी होना जरूरी है। कास्ट लोहे के बर्तन:- देखने और उठाने में भारी, महंगे और आसानी से न घिसने वाले ये बर्तन खाना पकाने के लिए सबसे सही पात्र माने जाते हैं। शोधकर्ताओं की माने तो लोहे के बर्तन में खाना बनाने से भोजन में आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व बढ़ जाते है। एल्यूमीनियम के बर्तन:- एल्यूमीनियम के बर्तन हल्के, मजबूत और गुड हीट कंडक्टर होते हैं। साथ ही इनकी कीमत भी ज्यादा नहीं होती। भारतीय रसोई में एल्यूमीनियम के बर्तन सबसे ज्यादा होते हैं। कुकर से लेकर कड़ाहियां आमतौर पर एल्यूमीनियम की ही बनी होती हैं। एल्यूमीनियम बहुत ही मुलायम और प्रतिक्रियाशील धातु होता है। इसलिए नमक या अम्लीय तत्वों के संपर्क में आते ही उसमें घुलने लगता है। खासकर टमाटर उबालने, इमली, सिरका या किसी अम्लीय भोजन के बनाने जैसे कि सांभर आदि के मामले में यह ज्यादा होता है। इससे खाने का स्वाद भी प्रभावित होता है। खाने में एल्यूमीनियम होना गंभीर चिंता का विषय है। यह खाने से आयरन और कैल्शियम तत्वों को सोख लेता है। यानी यदि पेट में गया तो शरीर से आयरन और कैल्शियम सोखना शुरू कर देता है। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। कुछ अल्जाइमर (याद्दाश्त की बीमारी) के मामलों में मस्तिष्क के उत्तकों में भी एल्यूमीनियम के अर्क पाए गए हैं। जिससे यह तो स्पष्ट है कि एल्यूमीनियम के तत्व मानसिक बीमारियों के संभावित कारण भी हो सकते हैं। शरीर में एल्यूमीनियम की मात्रा अधिक हो जाए, तो टीबी और किडनी फेल होने का सबब बन सकता है। यह हमारे लिवर और नर्वस सिस्टम के लिए भी फायदेमंद नहीं होता। शोधकर्ताओं की मानें तो एल्यूमीनियम के बर्तन में चाय, टमाटर प्यूरी, सांभर और चटनी आदि बनाने से बचना चाहिए। इन बर्तनों में खाना जितनी देर तक रहेगा, उसके रसायन भोजन में उतने ही ज्यादा घुलेंगे। तांबा और पीतल के बर्तन:- कॉपर और पीतल के बर्तन हीट के गुड कंडक्टर होते हैं। इनका इस्तेमाल पुराने जमाने में ज्यादा होता था। ये एसिड और सॉल्ट के साथ प्रक्रिया करते हैं। नेशनल इंस्टीटय़ूट आफ हेल्थ के अनुसार खाने में मौजूद ऑर्गेनिक एसिड, बर्तनों के साथ प्रतिक्रिया करके ज्यादा कॉपर पैदा कर सकता है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह होता है। इससे फूड प्वॉयजनिंग भी हो सकती है। इसलिए इनकी टिन से कोटिंग जरूरी है। जिसे कलई भी कहते हैं। स्टेनलेस स्टील बर्तन:- स्टेनलेस स्टील के बर्तन अच्छे, सुरक्षित और किफायती विकल्प हैं। इन्हें साफ करना भी बहुत आसान है। स्टेनलेस स्टील एक मिश्रित धातु है, जो लोहे में कार्बन, क्रोमियम और निकल मिलाकर बनाई जाती है। इस धातु में न तो लोहे की तरह जंग लगता है और न ही पीतल की तरह यह अम्ल आदि से प्रतिक्रिया करती है। इसकी सिर्फ एक कमी है कि इससे बने बर्तन जल्द गर्म हो जाते हैं। इसलिए इन्हें खरीदते वक्त ऐसे बर्तन चुनें जिनके नीचे कॉपर की लेयर लगी हो। लेकिन इसे साफ करते समय सावधानी बरती जानी चाहिए क्योंकि इसकी सतह पर खरोंच आने से क्रोमियम और निकल निकलता है। नॉन-स्टिक बर्तन:- नॉन-स्टिक बर्तनों की सबसे खास बात यह है कि इनमें तेल की बहुत कम मात्रा या न डालो तो भी खाना पढिया पकता है। नॉन-स्टिकी होने की वजह से इनमें खाना चिपकता भी नहीं। लेकिन नॉन-स्टिक बर्तनों को बहुत ज्यादा गर्म करने या इनकी सतह पर खरोंच आने से कुछ खतरनाक रसायन निकलते हैं। इसलिए विशेषज्ञ हमेशा इन बर्तनों को बहुत ज्यादा गर्म करने या जलते गैस पर छोड़ने की सलाह नहीं देते हैं।  

बैहर में थप्पड़कांड का वीडियो वायरल, कांग्रेस नेता रणजीत बैस पर एफआईआर दर्ज

बालाघाट एक अनुसूचित आदिवासी छात्र को स्कूल में थप्पड़ मारने के आरोप में मध्य प्रदेश युवक कांग्रेस प्रदेश सचिव और बैहर जनपद उपाध्यक्ष रणजीत बैस पर एफआईआर दर्ज हो गया है. कांग्रेस के दोनों नेताओं पर गढ़ी थाने में एसटी/एससी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. बता दें, थप्पड़कांड का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद कार्रवाई हुई है. युवक कांग्रेस नेताओं पर एसटी-एससी एक्ट के तहत दर्ज हुई प्राथमिकी गौरतलब है युवक कांग्रेस नेताओं ने आदिवासी छात्र को स्कूल के अंदर गुटखा लाने से इनकार करने पर थप्पड़ जड़ दिया था. स्कूल छात्र को थप्पड़ मारने की घटना का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ था. अब गढ़ी पुलिस ने दोनों कांग्रेस नेताओ के ऊपर एसटी-एससी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है. स्कूल में गुटखा लाने से इनकार करने पर कांग्रेस नेताओं ने मारा थप्पड़ रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल पहुंचे युवक कांग्रेस सचिव और युवक कांग्रेस उपाध्यक्ष ने आदिवासी छात्र से गुटखा खरीदकर लाने के कहा, लेकिन ने स्कूल में गुटखा खरीदकर लाने से आदिवासी छात्र ने इनकार कर दिया. आदिवासी छात्र के इनकार से कांग्रेस नेता को गुस्सा आ गया और उसने छात्र को थप्पड़ जड़ दिया.  

IANS की रिपोर्ट के अनुसार चिन्मय दास की बेल के लिए पैरवी करने को कोई वकील ही तैयार नहीं, बेल के लिए करना होगा इंतजार

ढाका इस्कॉन के संत चिन्मय कृष्ण दास को बांग्लादेश में जेल से बाहर निकलने के लिए इंतजार करना होगा। मंगलवार को केस की सुनवाई थी, लेकिन उनकी पैरवी के लिए कोई वकील ही नहीं पहुंचा। खबर है कि कट्टरपंथियों के डर से वकील उनका केस लेने से ही डर रहे हैं। इसी के चलते जब मंगलवार को अदालत लगी तो उनकी पैरवी के लिए कोई नहीं था। इस पर बेंच ने उनकी बेल अर्जी पर सुनवाई के लिए 2 जनवरी, 2025 की नई तारीख तय की है। IANS की रिपोर्ट के अनुसार चिन्मय दास की बेल के लिए पैरवी करने को कोई वकील ही तैयार नहीं हुआ है। इससे पहले उनके एक वकील पर हमला भी हुआ है, जो फिलहाल आईसीयू में एडमिट हैं और उनकी हालत गंभीर है। बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोते के प्रवक्ता रहे चिन्मय कृष्ण दास को बीते सोमवार को देशद्रोह के मामले में अरेस्ट कर लिया गया था। वह हिंदुओं और इस्कॉन के खिलाफ हिंसा के विरोध में हुए एक प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इसके बाद उन पर देशद्रोह का आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया गया और एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया। चिन्मय कृष्णदास पर इस तरह की कार्रवाई किए जाने की भारत समेत दुनिया भर में निंदा हो रही है। कनाडा, अमेरिका जैसे देशों में रह रहे हिंदुओं ने भी इस ऐक्शन की निंदा की है और वहां विरोध प्रदर्शन हुए हैं। चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी का बांग्लादेश में अच्छा प्रभाव रहा है। वह बांग्लादेश चटग्राम में इस्कॉन के डिविजनल ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी रहे हैं। उनके वकील रामेन रॉय पर भी सोमवार को हमला हुआ है। वह फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। चिन्मय दास ने भी इस पर बयान जारी किया है। उनका कहना है कि रामेन रॉय का अपराध यही था कि अदालत में उन्होंने उनकी पैरवी की थी। खबरों के अनुसार इस्लामिक कट्टरपंथियों ने रामेन रॉय के घर पर हमला किया था और फिर उन्हें भी जमकर पीटा गया। इस घटना में वह गंभीर रूप से घायल होने के बाद अस्पताल में एडमिट हैं। इस्कॉन कोलकाता के प्रवक्ता ने कहा कि रामेन रॉय फिलहाल अस्पताल में एडमिट हैं। वह अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘एडवोकेट रामेन रॉय के लिए प्रार्थना करें। उनकी एक ही गलती थी कि उन्होंने अदालत में चिन्मय कृष्ण दास की पैरवी की थी।’ बता दें कि भारत ने भी बांग्लादेश के हालातों पर चिंता जताई है और वहां की सरकार से कहा है कि हिंदुओं पर हमले न किए जाएं।

कौन है अबू मुहम्मद अल-जोलानी, इन विद्रोहियों ने एक हफ्ते से भी कम समय में सीरियाई सेना को घुटनों पर ला दिया

सीरिया मिडिल ईस्ट में सीरिया के बड़े शहर अलेप्पो पर सरकार विरोधी विद्रोहियों हयात तहरीर अल-शाम ने कब्ज़ा कर लिया है। इन विद्रोहियों ने एक हफ्ते से भी कम समय में सीरियाई सेना को घुटनों पर ला दिया। सीरिया को इन विद्रोहियों को पीछे धकेलने के लिए रूसी सेना की मदद लेनी पड़ी, लेकिन फिर भी पलड़ा विद्रोहियों का ही भारी लग रहा है। तहरीर अल-शाम सीरिया में इस्लामिक कानून चाहता है, इसका अभी सीरिया से बाहर ऐसा कुछ करने का इरादा नहीं है। आठ साल पहले सीरिया को इसे हराने के लिए रूस और ईरान की मदद लेनी पड़ी थी। इजरायल भी इस आतंकी ग्रुप को अपने लिए खतरा मानता है। ये आतंकी यहूदियों को अपना दुश्मन मानते हैं। इस लिहाज से सीरिया में इनकी बढ़त इजरायल के लिए खतरे की घंटी भी है। इन विद्रोहियों का सरदार है- अबू मुहम्मद अल-जोलानी। अबू मुहम्मद अल-जोलानी के सिर पर अमेरिकी सरकार ने 10 मिलियन डॉलर का ईनाम रखा है। इसके बावजूद उसका और उसकी विद्रोही सेना का उत्तर-पश्चिम सीरिया के महत्वपूर्ण इलाकों पर कब्जा है। जोलानी उत्तर-पश्चिमी सीरिया में बशर अल-असद शासन के खिलाफ आंदोलन का मुख्य नेता है और अलेप्पो प्रांत के कई क्षेत्रों पर उसका नियंत्रण है। यह इलाका सीरियाई गृहयुद्ध से विस्थापित हुए लगभग 30 लाख लोगों का घर है और इसे सरकार विरोधी आंदोलन का गढ़ माना जाता है। कौन है जोलानी आठ साल बाद फिर से सीरिया गृह युद्ध की चपेट में है। सप्ताह भर पहले आश्चर्यजनक रूप से सीरिया के भीतर विद्रोही गुट उभर आए हैं और बशर अल-असद की सरकार को जड़ से उखाड़ने के लिए आतुर हैं। बीबीसी मॉनिटरिंग के मुताबिक, जोलानी का असली नाम, जन्मतिथि और जन्म स्थान और नागरिकता को लेकर एक नहीं कई जानकारियां हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, जोलानी का जन्म 1975 से 1979 के बीच हुआ था, जबकि इंटरपोल के मुताबिक, उनकी जन्मतिथि 1975 है। अमेरिकी टीवी नेटवर्क पीबीएस के अनुसार, उसका असली नाम अहमद हुसैन है। चैनल को दिए इंटरव्यू में उसका बताया था कि उसका जन्म 1982 में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुआ था, जहां उनके पिता पेट्रोलियम इंजीनियर के तौर पर काम करते थे। 1989 में, उसका परिवार सीरिया लौट आया और उनका पालन-पोषण दमिश्क के पास हुआ। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, उसने दमिश्क में मेडिकल की पढ़ाई की, लेकिन पढ़ाई के दौरान ही वह अलकायदा के संपर्क में आ गया। वह 2003 में अमेरिका पर हमले का भी जिम्मेदार था। अलकायदा से इस्लामिक स्टेट में रहा ऐसा कहा जाता है कि वह जल्द ही इराक में अल-कायदा के नेता अबू मुसाब अल-जरकावी का करीबी सहयोगी बन गया, लेकिन 2006 में अल-जरकावी की मृत्यु के बाद, वह लेबनान चला गया, जहां उसने लेबनानी आतंकवादी समूह जुंद अल-शाम के आतंकियों को ट्रेनिंग दी। उसके बाद उसके इराक लौटने की खबरें हैं जहां उसे अमेरिकी सेना ने गिरफ्तार कर लिया और कुछ समय तक जेल में रहने के बाद जब 2008 में रिहा किया गया तो वह तथाकथित इस्लामिक स्टेट में शामिल हो गया। 13 साल पहले सीरिया लौटा कुछ रिपोर्टों के अनुसार, जोलानी अगस्त 2011 में सीरिया लौट आया और राष्ट्रपति बशर अल-असद से लड़ने के लिए अल-कायदा की एक शाखा खोली। हालांकि, एक लेबनानी अखबार का दावा है कि जोलानी वास्तव में इराकी नागरिक हैं और उसका नाम फालुजा के अल-जुलान नामक क्षेत्र के नाम पर रखा गया है और वह उसी क्षेत्र का है।

सुरक्षाबलों को आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी, किया एक आतंकी ढेर, मुठभेड़ जारी

जम्मू जम्मू-कश्मीर में दाचीगाम जंगल के ऊपरी इलाकों में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में एक आतंकी को मार गिराया है। सुरक्षाबलों को इस इलाके में आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी। इसी सूचना के आधार पर सुरक्षाकर्मियों ने इलाके में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। आतंकियों ने खुद को गिरा देख सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी। इसके बाद जवानों में भी जवाबी कार्रवाई शुरू की। जवानों ने एक आतंकी को मार गिराया है। फिलहाल, अभी दोनों ओर से गोलीबारी जारी है। इससे पहले कश्मीर जोन पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ एक पोस्ट में कहा, “विशिष्ट खुफिया इनपुट के आधार पर, सुरक्षाबलों के संयुक्त दलों ने दाचीगाम जंगल के ऊपरी इलाकों में सीएएसओ (घेराबंदी और तलाशी अभियान) शुरू किया है। ऑपरेशन जारी है।” बता दें कि आतंकवादियों द्वारा किए गए कई हमलों के बाद हाल के दिनों में सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। 20 अक्टूबर को आतंकवादियों ने गांदरबल जिले के गगनगीर इलाके में एक बुनियादी ढांचा परियोजना कंपनी के श्रमिकों के शिविर पर हमला किया था। इस हमले में सात लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद 24 अक्टूबर को बारामूला जिले के गुलमर्ग के बोटापथरी इलाके में सेना के वाहन पर हमला कर आतंकवादियों ने सेना के तीन जवानों और दो नागरिक कुलियों की हत्या कर दी थी। वहीं, 2 नवंबर को श्रीनगर में पर्यटक स्वागत केंद्र के पास व्यस्त संडे मार्केट में आतंकवादियों ने ग्रेनेड फेंका था। इसमें एक 42 वर्षीय महिला की मौत हो गई थी, जबकि नौ अन्य नागरिक घायल हो गए थे। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इन दो हमलों के बाद कहा कि इन हमलों में शामिल लोगों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।  

दिल्ली में इस बार भाजपा विधानसभा चुनाव में मुफ्त लारही है योजनए, आप पार्टी के दाव से पटकने की तैयारी

नई दिल्ली दिल्ली में अपना ‘वनवास’ खत्म करने को बेकरार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जहां इस बार आम आदमी पार्टी (आप) के खिलाफ एंटी इंकंबेंसी की आस है तो अरविंद केजरीवाल को परास्त करने के लिए इस बार उनके ही ‘हथियार’ को अपनाने की तैयारी है। मुफ्त बिजली, पानी और महिलाओं को मुफ्त बस सफर जैसी स्कीमों के जरिए लगातार तीन बार दिल्ली की सत्ता में पहुंची ‘आप’ से ‘विधानसभा की चौथी जंग’ में भाजपा मुफ्त पर खूब दांव लगाने जा रही है। भाजपा ने साफ कर दिया है कि यदि वह सत्ता में आई तो दिल्लीवालों को मुफ्त बिजली, पानी और बस सफर की सुविधा मिलती रहेगी। भाजपा ने यह वादा ऐसे समय पर किया है जब केजरीवाल जनता से कह रहे हैं कि यदि भाजपा जीत गई तो मुफ्त वाली स्कीमों को बंद कर देगी। पार्टी के मेनिफेस्टो कमिटी के चेयरमैन और सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यदि भाजपा को विधानसभा में बहुमत मिलता है तो भाजपा मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी और महिलाओं के लिए मुफ्त बस सफर जैसी स्कीमों को जारी रखेगी। बिधूड़ी ने कहा कि गुरुवार से पार्टी दिल्लीवालों से संकल्प पत्र के लिए सुझाव लेने की शुरुआत करेगी। भाजपा नेता ने कहा कि आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल और दूसरे पार्टी नेता प्रोपेगेंडा के जरिए लोगों को गुमराह करना चाहते हैं कि भाजपा की सरकार बनी तो मुफ्त वाली स्कीमों को बंद कर दिया जाएगा। बिधूड़ी ने कहा कि ना सिर्फ भाजपा इन योजनाओं को जारी रखेगी बल्कि इनमें सुधार किए जाएंगे। पार्टी के एक नेता ने बताया कि दिल्ली में इन स्कीमों का बड़ा लाभार्थी वर्ग है, जो अरविंद केजरीवाल सरकार के कामकाज से संतुष्ट तो नहीं है, लेकिन इन योजनाओं का लाभ चाहती है। आम लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी और महिलाओं के लिए बस सफर जैसी योजनाओं को जारी रखने का वादा किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को 2100 रुपए प्रति माह आर्थिक सहायता देने का वादा भी किया जा सकता है। वह मध्य प्रदेश से महाराष्ट्र तक कई राज्यों में भाजपा को मिली चुनावी सफलता में इसके योगदान का जिक्र करते हैं। गौरतलब है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार 200 यूनिट मुफ्त बिजली और हर महीने 20 हजार लीटर पीने का पानी मुफ्त देती है। इसके अलावा महिलाओं के लिए बस में सफर भी मुफ्त है। माना जाता है कि पिछले दो चुनावों में ‘आप’ को मिली बंपर जीत में इन योजनाओं का अहम योगदान है। भाजपा ने पहले इन योजनाओं का ‘रेवड़ी कल्चर’ कहकर विरोध किया, लेकिन दिल्ली की जनता में इन योजनाओं की स्वीकार्यता को देखते हुए पार्टी अपने स्टैंड को बदलती दिख रही है। दिल्ली में अगले साल जनवरी या फरवरी में विधानसभा के चुनाव हो सकते हैं। 70 सदस्यीय विधानसभा में अभी भाजपा के महज 8 विधायक हैं, जबकि 2015 में केवल उसे तीन सीटों पर जीत मिली थी। जुमले में नहीं आएंगे दिल्लीवाले: AAP भाजपा की ओर से मुफ्त बिजली, पानी और बस सफर योजना को जारी रखने के वादे पर पलटवार करते हुए आम आदमी पार्टी ने कहा है कि यह जुमला है और लोग इस पर भरोसा नहीं करेंगे। आप की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंक कक्कड़ ने एएनआई से बातचीत में कहा, ‘दिल्लीवाले भाजपा के जमुलों में नहीं आने वाले हैं। हमें पता है कि भाजपा के पास 20 राज्य हैं, वे कहीं भी आज तक मुफ्त बिजली या मुफ्त पानी नहीं दे पाए हैं। अगर गलती से भी भाजपा दिल्ली में जीत जाती है तो सबसे पहले दिल्लीवालों की मुफ्त बिजली और मुफ्त पानी बंद करेगी। सीधा डिस्कॉम को अडाणी के हाथ में देगी जो महंगी बिजली और लंबे-लंबे पावर कट देंगे,जैसा कि उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में होता है।’

पुलिस के साथ कुछ लोग ढोल-नगाड़े बजाते हुए मस्जिद में प्रवेश कर गए, तोड़फोड़ की आशंका हुई और अशांति फैली: रामगोपाल

नई दिल्ली संभल हिंसा का मामला मंगलवार को लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी उठा। समाजवादी पार्टी (सपा) की तरफ से रामगोपाल यादव ने संभल में हुई हिंसा का मुद्दा उठाया और दावा किया कि विधानसभा उपचुनाव के दौरान हुई ‘चुनावी गड़बड़ियों’ से ध्यान भटकाने के लिए हिंसा को ‘योजनाबद्ध तरीके’ से अंजाम दिया गया। जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के साथ कुछ लोग ढोल-नगाड़े बजाते हुए मस्जिद में प्रवेश कर गए। इससे तोड़फोड़ की आशंका हुई और अशांति फैली। रामगोपाल यादव ने शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाया और फिर बाद में उनकी पार्टी के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया। रामगोपाल ने कहा कि संभल में 500 साल पुरानी मस्जिद के सर्वे के लिए 19 नवंबर को एक वकील ने मुंसिफ मजिस्ट्रेट के यहां एक आवेदन दिया और दो घंटे के अंदर शांतिमय तरीके से सर्वे भी हो गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद 24 नवंबर को सुबह छह बजे पूरे संभल को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया और थोड़ी देर बाद वहां के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, आवेदन देने वाले वकील और कुछ लोग ढोल-नगाड़े बजाते हुए मस्जिद में प्रवेश कर गए। रामगोपाल ने कहा कि इससे स्थानीय लोगों को संदेह हुआ कि वे मस्जिद में तोड़फोड़ करने जा रहे हैं और फिर वहां अशांति फैली। उन्होंने कहा कि पुलिस ने गोली चलाई, पांच लोग मारे गए और 20 से अधिक लोग घायल हुए। सैकड़ों लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। बहुत सारे लोग जेलों में हैं और जिन्हें पकड़ लिया गया उन्हें बुरी तरह मारा गया। उन्होंने कहा कि मेरा और लोगों का यह मानना है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश में जो चुनाव हुए थे… उसमें बगल के जिलों में किसी को वोट डालने नहीं दिया गया और जबरदस्ती चुनाव पर कब्जा कर लिया था, उससे ध्यान बंटाने के लिए यह सब योजनाबद्ध तरीके से कराया गया। रामगोपाल अभी बोल ही रहे थे कि सभापति जगदीप धनखड़ ने उन्हें टोकते हुए कहा कि आपसे आशा करता हूं कि आप संयम बरतेंगे। सभापति ने यादव से कहा कि आपने अपनी बात रख दी। इसके बाद उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के पी संदोष कुमार का नाम पुकारा। रामगोपाल ने आसन से कहा कि अभी तीन मिनट तो हुए भी नहीं है फिर भी उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। शून्यकाल के दौरान सदस्य को अपनी बात रखने के लिए उन्हें तीन मिनट का समय दिया जाता है। इसके बाद सपा के सदस्य सदन से वाकआउट कर गए।

मौसम विभाग का अलर्ट, टला नहीं चक्रवात फेंगल का खतरा, कई राज्यों में हो रही बारिश , बढ़ी सर्दी

नई दिल्ली उत्तर भारत में सर्दियां दस्तक दे चुकी हैं। लोग गर्म कपड़ों, रजाई और कंबल पर आश्रित हो रहे हैं। वहीं दक्षिण भारत में चक्रवात और भारी बारिश ने लोगों को परेशान किया है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने केरल के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। विभाग ने खासकर केरल और माहे में बहुत भारी बारिश का अनुमान लगाया है, जबकि तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, लक्षद्वीप, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इस बार कम पड़ेगी सर्दी वहीं मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, इस साल दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 तक सर्दी का मौसम कुछ नरम रहने की उम्मीद है। देश के ज्यादातर हिस्सों में ठंड की तीव्रता कम होगी और न्यूनतम तापमान औसत से ज्यादा रहेगा। जहां आमतौर पर सर्दियों में 5-6 दिन शीतलहर चलती है, इस बार यह संख्या घटकर 2-4 दिनों तक सीमित रह सकती है। दक्षिण प्रायद्वीपीय इलाकों में हालांकि सामान्य या उससे कम तापमान रहने की संभावना है। पिछले नवंबर में पश्चिमी विक्षोभ की अनुपस्थिति ने मौजूदा गर्म मौसम को और बढ़ावा दिया। वहीं, दक्षिण भारत में चक्रवात फेंगल के कारण भारी बारिश जारी है। केरल में रेड अलर्ट, कई इलाकों में भारी बारिश का खतरा केरल के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। चक्रवात ‘फेंगल’ अब कमजोर होकर तमिलनाडु और कर्नाटक के अंदरूनी इलाकों में निम्न दबाव का क्षेत्र बन चुका है। इसके चलते उत्तर और मध्य केरल में भारी बारिश और गरज के साथ बिजली चमकने की संभावना है। मौसम विभाग ने कासरगोड, कन्नूर, वायनाड, कोझिकोड, और मलप्पुरम जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। पलक्कड़, इडुक्की, और कोट्टायम जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किए गए हैं। बंगलुरु और कर्नाटक में बारिश का सिलसिला जारी चक्रवात के असर से बंगलुरु समेत दक्षिण कर्नाटक में भी बारिश जारी है। दक्षिण कन्नड़ जिले में 3 दिसंबर को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए स्कूल और कॉलेज बंद रखने के आदेश दिए गए थे। पुडुचेरी में भारी बारिश के चलते सभी स्कूल और कॉलेज आज 3 दिसंबर को बंद रहे। वहीं मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी ने घोषणा की कि चक्रवात से प्रभावित राशन कार्ड धारकों को 5 हजार रुपये की राहत राशि दी जाएगी। हिमाचल में रिकॉर्ड सूखा, 124 साल का टूटा रिकॉर्ड हिमाचल प्रदेश में नवंबर 2024 सबसे सूखे महीनों में से एक रहा। राज्य में सामान्य 19.7 मिमी की तुलना में केवल 0.2 मिमी बारिश हुई। आईएमडी के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर में वर्षा की कमी का कारण मौसमी सिस्टम में बदलाव है। इस मौसम का असर देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग तरह से महसूस हो रहा है, लेकिन विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन का संकेत मान रहे हैं।

राज्यपाल डेका की अध्यक्षता में सैनिक कल्याण बोर्ड छत्तीसगढ़ के राज्य प्रबंधन समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर, राज्यपाल रमेन डेका की अध्यक्षता में आज राजभवन में सैनिक कल्याण बोर्ड छत्तीसगढ़ के राज्य प्रबंधन समिति की 16वीं बैठक सम्पन्न हुई। इस बैठक में भूतपूर्व सैनिकों, विधवाओं, व उनके आश्रितों के लिए सशस्त्र सेना झंडा दिवस निधि द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा की गई एवं भूतपूर्व सैनिकों के हितों में महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। राज्यपाल ने कहा कि भारत माता की सेवा में अपना जीवन गुजारने वाले वीर सपूतों का कल्याण करना सबका दायित्व और कर्त्तव्य है। इसमे मानवीय संवेदना के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। इस दिशा में हम सभी को विशेष ध्यान देना चाहिए। राज्यपाल श्री डेका ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि ‘‘सशस्त्र सेना झंडा‘‘ दिवस निधि के लिए संग्रह बढ़ाने के लिए राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड एवं गृह विभाग के प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि संग्रह बढ़ाने के लिए सभी तरीकों पर ध्यान देना चाहिए। सरकार की सहायता पर ही निर्भर ना रहते हुए समुदाय को भी इसके लिए प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों के कल्याण के लिए और अधिक योजनाएं शुरू की जा सकें। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आज की बैठक में लिये गये सभी निर्णयों से छत्तीसगढ़ में भूतपूर्ण सैनिक उनके लाभान्वित होंगे। श्री डेका ने राज्य के दूरदराज के इलाकों में कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ की सैनिक कल्याण टीम द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की और कहा कि समर्पण के साथ देश की सेवा करने वाले हमारे बहादुर पूर्व सैनिकों की अच्छी तरह से देखभाल की जाए। बैठक के दौरान भूतपूर्व सैनिकों, विधवाओं एवं उनके आश्रितों के हित में कई बिदुओं पर निर्णय लिये गये। जिसमें जवानों की भांति जूनियर कमिश्नड ऑफिसर (जे.सी.ओ.) के लिये भी पुत्री विवाह हेतु 50 हजार रूपए का आर्थिक अनुदान तथा चार्टेड एकाउटेन्ट, कंपनी सेक्टरी के व्यवसायिक पाठयक्रम का अध्ययन करने वाले बच्चों को 20 हजार रूपए एकमुश्त प्रतिवर्ष का आर्थिक अनुदान प्रदान किया जायेगा। आईटीआई प्रशिक्षण के दौरान भूतपूर्व सैनिक प्रशिक्षु को देय 5 हजार रूपए प्रति माह के स्थान पर प्रशिक्षु द्वारा संस्थान को देय वास्तविक शुल्क प्रदान किया जायेगा तथा लघु व्यवसाय हेतु देय आर्थिक अनुदान 15 हजार रूपए जो सैम्फेक्स योजनाओं में सम्मिलित नहीं थे उनको वृद्धि कर 25 हजार रूपए कर दिया गया है। समिति ने जिला सैनिक कल्याण कार्यालय जगदलपुर के द्वितीय तल पर सभागार का निर्माण एवं भूतल पर दिव्यांग भूतपूर्व सैनिकों के लिए कमरा निर्माण के प्रस्ताव को अनुमोदित किया। बैठक में सैनिक कल्याण बोर्ड के संचालक विवेक शर्मा ने बोर्ड की अब तक की गतिविधियों एवं बजट के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिया।   बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह विभाग मनोज पिंगुआ, राज्यपाल के सचिव यशवंत कुमार, गृृह विभाग के सचिव  हिम शिखर गुप्ता, वित्त विभाग की सचिव शारदा वर्मा, ब्रिगेडियर प्रशासन, मध्य भारत एरिया, ब्रिगेडियर एस. के. मल्होत्रा, कार्यवाहक सचिव केंद्रीय सैनिक बोर्ड, नई दिल्ली कैप्टेन (भा.नौ.) शाश्वत पूर्णानंद, अतिरिक्त महानिदेशक, पुनर्वास परिक्षेत्र मध्य कमान, लखनऊ ब्रिगेडियर विक्रम हिरू, कर्नल सुमीत शर्मा प्रभारी कमान्डर मुख्यालय छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा सब एरिया (कोसा) ने भाग लिया। इसके अलावा बैठक में अशासकीय सदस्यगण मेजर जनरल संजय शर्मा (से.नि.), विंग कमाण्डर ए श्रीनिवास राव (से.नि.), गैर शासकीय सदस्य द्वय श्री कैलाश नाहटा एवं श्री टी आर साहू उपस्थित थे।

एनसीपी विधायक के समर्थक बैलेट पेपर से करवा रहे थे ‘चुनाव’, ग्राम पंचायत ने इस मतदान को रद्द करने का फैसला किया गया

सोलापुर महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के मरकावाडी गांव में एनसीपी (SP) विधायक के समर्थन में बैलेट पेपर से रीपोलिंग करवाने की योजना बनाई गई थी। मंगलवार को ही यह चुनाव होना था। हालांकि प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए इस मॉक पोल को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया है। इसके बाद ग्रामीणों ने इस मतदान का प्लान कैंसल कर दिया। बताया गया कि पुलिस ने धमकी दी कि इस प्रक्रिया में भाग लेने वालों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। इसके बाद ग्राम पंचायत की बैठक हुई और इस मतदान को रद्द करने का फैसला किया गया। मालशिरस सीट के तहत आने वाले इस गांव के लोगों का कहना था कि यहां ज्यादातर महाविकास अघाड़ी के समर्थक रहते हैं, इसके बावजूद चुनाव आयोग के आंकड़ों में महायुति को ज्यादा वोट हासिल हुए। ऐसे में उन्होंने बैलेट पेपर से अनाधिकारिक चुनाव कराने का फैसला कर लिया था। पुलिस प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए कुछ ग्रामीणों को पहले ही नोटिस भेजा था। इस सीट पर एनसीपी (SP) प्रत्याशी उत्तम जांकर ने ही जीत दर्ज की है। जांकर ने कहा, गांव के लोगों से सलाह के बाद हमने फैसला किया है कि कानूनी तरीके से हम ईवीएम के खिलाफ जंग लड़ेंगे क्योंकि पुलिस हमें यह मतदान नहीं करवाने दे रही है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, यह गतिविधि पूरी तरह से गैरकानूनी है और अगर कोई इस तरह मतदान करवाएगा तो उसपर कार्रवाई होगी। एनसीपी (एसपी) के नवनिर्वाचित विधायक उत्तम जांकर ने ही पहले रीपोलिंग की अपील की थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने सख्ती बरती। गांव में पुलि की तैनाती कर दी गई। कुछ गांव के लोगों का कहना था कि गांव में महाविकास अघाड़ी के वोटर ज्यादा हैं लेकिन ईवीएम गलत आंकड़े दिखा रही है। वहीं बीजेपी समर्थकों ने पहले ही कर दिया था कि वे इस मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे। एक ग्रामीण ने कहा, गांव के लोगों ने मॉक रीपोल का प्लान बनाया था। ग्रामीणों का मानना है कि वीवीपैट और ईवीएम मशीन में गड़बड़ी थी। इसीलिए हमने बैलेट पेपर से चुनाव करवाने का फैसला किया था। लेकिन कल सेही 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी गांव में आ गए और दबाव देने लगे। 30 लोगों को नोटिस दिया गया कि अगर कल चुनाव हुए तो आपका भविष्य खत्म हो जाएगा और कोर्ट में मुलाकात होगी। 700 लोग के करीब वोटिंग के लिए पहुंच भी गए थे। लेकिन फिर यही निर्णय हुआ कि इसे पोस्टपोन कर दिया जाए और अन्य तरीके से यह लड़ाई लड़ी जाए।

डोनाल्ड ट्रंप के आने से घबराया है व्यापार जगत? जयशंकर बोले- लेन-देन होता रहेगा

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति का पदभार संभालने वाले हैं। उससे पहले भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर संभावित ट्रंप प्रशासन के प्रभाव को लेकर चिंताएं उठ रही हैं। अब इन चिंताओं को दूर करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच हमेशा कुछ न कुछ लेन-देन होता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक मेलजोल में हाल के वर्षों में गहराई आई है। इससे आपसी सहयोग को और बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल बना है। विदेश मंत्री ने सीआईआई पार्टनरशिप समिट में बोलते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे प्रशासन का आगमन व्यापारिक क्षेत्रों के लिए एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने कहा, “एकमात्र सुरक्षित भविष्यवाणी यह है कि इसमें अनिश्चितता का कुछ स्तर रहेगा। विभिन्न देशों ने पहली ट्रंप सरकार से अनुभव लिए हैं और संभवतः इससे सीखकर दूसरे कार्यकाल के लिए अपनी रणनीतियां बनाएंगे।” जयशंकर ने कहा, “जहां तक भारत का संबंध है, मैं यकीन से कह सकता हूं कि अमेरिका के साथ रणनीतिक मेलजोल समय के साथ केवल गहरा हुआ है। इससे सहयोग के लिए अधिक संभावनाएं बनी हैं। निश्चित रूप से, दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच हमेशा कुछ लेन-देन होते रहेंगे। लेकिन आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में भरोसेमंद साझेदारी का मामला हाल के वर्षों में और मजबूत हुआ है।” जयशंकर ने अमेरिक के राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल और भारत के लिए इससे जुड़े निहितार्थों पर कहा कि अमेरिका के साथ भारत का रणनीतिक तालमेल समय के साथ और गहरा हुआ है जो कई सहयोगी अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा, ‘‘दूसरे ट्रंप प्रशासन का आगमन भी स्पष्ट रूप से व्यापारिक हलकों में एक प्रमुख विचारणीय विषय है। जाहिर है, एकमात्र सुरक्षित भविष्यवाणी एक हद तक अप्रत्याशित ही है।’’ सुरक्षा और निवेश को लेकर सतर्कता जरूरी उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ऐसे साझेदारी के ढांचे तैयार करने होंगे जो परस्पर लाभकारी माने जाएं। बिना चीन का नाम लिए जयशंकर ने कहा कि आर्थिक निर्णयों और निवेश को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने चीन द्वारा अपनाई जा रही आक्रामक व्यापार प्रथाओं को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच सोमवार को कहा कि निवेश समेत आर्थिक निर्णयों के दौरान “राष्ट्रीय सुरक्षा की शर्त” को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “यह पसंद हो या नहीं, हम तेजी से शस्त्रीकरण के युग में नहीं बल्कि (सुविज्ञ निर्णयों का) लाभ उठाने के युग में हैं। इसलिए, नीति निर्माताओं को निवेश सहित आर्थिक निर्णयों के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखना होगा।’’ वैश्विक दक्षिण पर आर्थिक दबाव और भारत की भूमिका जयशंकर ने अमेरिका-चीन विवाद और यूक्रेन संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि ग्लोबल साउथ महंगाई, कर्ज, मुद्रा की कमी और व्यापार में अस्थिरता का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा, “दुनिया कठिन दौर से गुजर रही है और ऐसे समय में अधिक मित्र और साझेदारों की जरूरत होती है।” पड़ोस में हाल में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि आज के समय में अर्थव्यवस्थाएं और समाज पहले से कहीं अधिक जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “कोविड, यूक्रेन संघर्ष या वित्तीय संकट के दौरान हमने साथ मिलकर काम किया और इसका सामूहिक लाभ उठाया। हालांकि, आतंकवाद जैसी चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सहयोग से हटने की लागत चुकानी पड़ती है।” जयशंकर ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि चुनौतियों के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच मजबूत रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी के लिए अभी भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जाते-जाते यूक्रेन को दी सहायता, दिया ऐसा घातक हथियार भड़क उठे मानवाधिकार संगठन

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अगले महीने खत्म हो रहे अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में यूक्रेन को 725 मिलियन डॉलर यानी करीब 6139 करोड़ रुपए की बड़ी सैन्य मदद देने जा रहे हैं। इसका उद्देश्य युद्ध के मैदान में न केवल रूस का मुकाबला करना है बल्कि कीव को रणक्षेत्र में आगे बढ़ाना है। इस सहायता पैकेज के साथ अमेरिका यूक्रेन को कई किस्म के हथियार भी उपलब्ध करा रहा है, जिसमें कई ड्रोन रोधी सिस्टम, हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) और एंटी पर्सनल लैंड माइंस भी शामिल है। राष्ट्रपति बाइडेन द्वारा HIMARS जैसे घातक हथियार सौंपने के बाद चर्चा का बाजार गर्म है और आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) को लेकर कई किस्म की अटकलें लगाई जा रही है, जिसकी लंबी दूरी की मारक क्षमता है। यूक्रेन लंबे समय से इसका इस्तेमाल रूस के खिलाफ 186 मील अंदर तक करना चाह रहा है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यूक्रेन को भेजे जा रहे इस सैन्य खेप में ATACMS को शामिल किया जा रहा है या नहीं। बड़ी बात ये है कि अमेरिका इस नए खेप में यूक्रेन को एंटीपर्सनल लैंड माइंस देने जा रहा है, जिसका कई मानवाधिकार संगठनों ने आलोचना की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बाइडेन प्रशासन के इस कदम को विनाशकारी करार दिया है और कहा है कि इसके इस्तेमाल से नागरिक आबादी को लंबे समय तक खतरा हो सकता है। बता दें कि एंटी-पर्सनल माइन या एंटी-पर्सनल लैंडमाइन (APL) एक प्रकार की बारूदी सुरंग है, जिसे मनुष्यों के खिलाफ उपयोग के लिए डिजायन किया गया है, जबकि एंटी-टैंक माइन्स का टारगेट वाहन होते हैं। उधर, अमेरिकी सरकार ने इसे यूक्रेन के लिए तत्काल जरूरी बताया है और कहा है कि यह स्थाई नहीं है। अमेरिका का तर्क है कि इससे नागरिकों को अप्रत्याशित नुकसान से बचाने के उपाय किए गए हैं। अमेरिका का कहना है कि इसका डिजायन ऐसा है कि ये लैंड माइन्स एक निश्चित समयावधि के बाद निष्क्रिय हो जाते हैं। पिछले करीब तीन साल से यूक्रेन और रूस 620 मील लंबी सीमा रेखा पर युद्ध लड़ रहे हैं, इसलिए यूक्रेन को भौगोलिक इलाकों में रूसी सैनिकों की बढ़त को रोकने के लिए इस एंटी पर्सनल लैंड माइन्स को तुरूप का पत्ता समझा जा रहा है।

खत्म हुआ अनुज कपाड़िया का सफर, गौरव खन्ना ने छोड़ा ‘अनुपमा’

मुंबई अक्टूबर में ‘अनुपमा’ में 15 साल के टाइम लीप में कई किरदार बाहर हो गए लेकिन गौरव खन्ना का रोल अनुज कपाड़िया कई दिनों से सीक्रेट बना हुआ था। दो महीने तक सेट से दूर रहने के बाद एक्टर ने आखिरकार शो में अपने किरदार के बारे में बता दिया है। गौरव खन्ना ने हाल ही में खुलासा किया है कि वो अब शो का हिस्सा नहीं हैं और उन्होंने ‘अनुपमा’ को छोड़ दिया है। गौरव ने कहा, ‘लोग मुझसे अनुपमा में मेरी वापसी के बारे में लगातार पूछ रहे हैं। राजन सर (निर्माता राजन शाही) ने कैरेक्टर के लिए मुझसे बात की और हमने इसके लिए दो महीने तक इंतजार किया। हालांकि, कहानी को आगे बढ़ना था और इंतज़ार करने का अब कोई मतलब नहीं रह गया था। उन्होंने भी महसूस किया कि अब मेरे लिए कुछ बड़ा तलाशने का समय आ गया है। तो, अभी के लिए अनुज का चैप्टर बंद हो गया है लेकिन मैं इसे अल्पविराम के रूप में देखता हूं, पूर्ण विराम के रूप में नहीं। यदि कहानी की मांग है तो मुझे वापस लौटने में खुशी होगी।’ खत्म हुआ अनुज कपाड़िया का रोल उन्होंने आगे कहा कि उनके रोल की शुरुआत एक गेस्ट के तौर पर होनी थी। उन्होंने कहा, ‘अनुज के रोल की प्लानिंग तीन महीने के कैमियो के तौर पर बनाई गई थी, लेकिन यह तीन साल तक चलने वाले मेरे करियर का एक बड़ा हिस्सा बन गया। इस तरह का प्यार दुर्लभ है और मैं इसके लिए अपने फैंस को धन्यवाद कहता हूं।’ रूपाली गांगुली से अनबन पर कहा ये लीड रोल करने वाली रूपाली गांगुली के साथ अनबन की अफवाहों के बारे में पूछे जाने पर गौरव खन्ना ने कहा, ‘मैं ऐसे इंटरव्यूज में शामिल नहीं होता या अफवाहों पर रिएक्शन नहीं देता। जो काम हमने मिलकर बनाया है वह मायने रखता है। मैंने हमेशा अपने स्किल पर ध्यान दिया है और ‘एक्शन’ और ‘कट’ से परे क्या होता है यह मायने नहीं रखता है।’ गौरव खन्ना के शोज गौरव को फेमस शो ‘अनुपमा’ में अनुज कपाड़िया के रोल के लिए बहुत सराहना मिली, जिसमें रूपाली गांगुली और सुधांशु पांडे भी लीड रोल में थे। अनुज और अनुपमा के रोल में गौरव और रूपाली की ऑन-स्क्रीन जोड़ी को फैंस ने खूब पसंद किया। ‘अनुपमा’ के अलावा एक्टर ‘सीआईडी’, ‘कुमकुम- एक प्यारा सा बंधन’, ‘मेरी डोली तेरे अंगना’, ‘जीवन साथी’, ‘ससुराल सिमर का’, ‘तेरे बिन’ और ‘गंगा’ जैसे शो में भी दिखाई दिए हैं।

नशीले इंजेक्शन से फैला संक्रमण!, छत्तीसगढ़-गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में 252 HIV संक्रमित

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में एड्स (HIV) संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 252 तक पहुँच गई है, जो स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बन गई है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, बीते नवंबर माह में ही 8 नए HIV पॉजिटिव मरीज मिले हैं, यह संख्या जो एक छोटे जिले के काफी चौंकाने वाली है। इनमें जनरल मरीजों के अलावा ऐसे कम उम्र के युवा भी शामिल हैं, जो इंजेक्शन के माध्यम से नशा करते हैं। बता दें कि HIV दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक बिमारी है। बीते दिन अंतरराष्ट्रीय विश्व एड्स दिवस भी मनाया गया था, जिसमें एड्स से बचने के उपायों पर चर्चा की गई। जैसे असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित खून का इस्तेमाल आदि के विषय में जानकारी जिला अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा कार्यक्रम के जरिए लोगों को उपलब्ध कराई गई थी। हम लोगों की कर रहे काउंसलिंग – CMHO रामेश्वर शर्मा CMHO रामेश्वर शर्मा ने बताया कि जिले में HIV पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 250 के पार पहुँच गया है, जो काफी चिंता का विषय है। हम लगातार इस संक्रमण को फैलाने से रोकने के उद्देश्य से काम कर रहे हैं। बीते 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस पर हमने इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया था, ताकि लोग इससे डरे नहीं बल्कि खुद भी जागरूक हो और दूसरे लोगों की मदद के लिए आगे आए। अगर कोई एड्स से संक्रमित है तो उसे भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि HIV का ट्रीटमेंट उपलब्ध है और हमारे पास भी इसकी व्यवस्था है। हम लोगों की काउंसलर के माध्यम से काउंसलिंग कर रहे हैं। लोगों को यह जानना जरूरी है कि किसी बीमारी को छिपाने से उसका इलाज संभव नहीं है, उन्हें निश्चिन्त होकर जांच कराना चाहिए। नशीले इंजेक्शन का सेवन बन रहा HIV फैलने का कारण – ICTC काउंसलर अजरा खान ICTC (Integrated Counselling and Testing Centre) काउंसलर अजरा खान ने बताया कि जब से जिला हॉस्पिटल बना है, तब से जांच में बढ़ोतरी हुई है, जिससे HIV के नए मामले लगातार सामने आ रहे हैं। मौजूदा समय में जिले में 250 से ज्यादा एक्टिव केस हैं, जिनमें से 8 बीते नवंबर महीने में सामने आए हैं। HIV मामलों में वृद्धि के लिए नशीली दवाओं के दुरुपयोग को जिम्मेदार ठहराते हुए अजरा खान ने बताया कि इन 8 मरीजों में से 4 मरीज सामान्य हैं और अन्य 4 को इंजेक्शन की वजह से HIV हुआ है। उन्होंने बताया कि इंजेक्शन से HIV फैलने के मुख्य तौर पर दो कारण होते हैं, इनमें से पहला कारण संक्रमित व्यक्ति की सुई किसी दूसरे पर इस्तेमाल करने पर और दूसरा इंजेक्शन से नशीली दवाओं का सेवन है। आजकल युवाओं में नशीली इंजेक्शन लेने का चलन बढ़ रहा है, जिन्हें IDU (Injecting drug user) कहा जाता है। ऐसे मरीज जिले के कई इलाकों से सामने आए हैं। हैरानी की बात यह है कि सबकी उम्र 30 साल से भी कम है। इंजेक्शन से ऐसे फैलता है HIV का संक्रमण ICTC काउंसलर अजरा खान ने बताया कि जो युवा नशे के लिए इंजेक्शन वाली दवाएं लेते हैं, वह एक ही इंजेक्शन को आपस में साझा कर बार-बार इस्तेमाल करते हैं। ऐसे ग्रुप में दो, चार या उससे ज्यादा युवक शामिल हो सकते हैं। कोई युवक अगर एक संक्रमित के साथ नशा कर दूसरे ग्रुप में जाता है और वहां उनके साथ उसी सिरिंज या सुई का इस्तेमाल नशा करता है तो ऐसे में संक्रमण तेजी से फैलता है। ऐसे में अगर कोई शादीशुदा है तो फिर वह अपनी पत्नी को संक्रमित कर देता है और अगर वह गर्भवती है तो फिर यह संक्रमण उसके बच्चे तक भी पहुँच जाता है।

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