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18 दिसम्बर को मद्य निषेध दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने परिपत्र जारी

 गौरेला पेण्ड्रा मरवाही बाबा गुरू घासीदास जयंती 18 दिसम्बर को मद्य निषेध दिवस के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाता है। कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी ने समाज कल्याण संचालनालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप 18 दिसम्बर को मद्य निषेध दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने जिला शिक्षा अधिकारी, सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नगरपालिका परिषद अधिकारी गौरेला एवं पेण्ड्रा, मुख्य नगर पंचायत अधिकारी मरवाही एवं सभी प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय गौरेला पेण्ड्रा एवं मरवाही को परिपत्र जारी किया है।            कलेक्टर ने मद्य निषेध दिवस पर ग्राम पंचायत स्तरों पर गठित भारत माता वाहिनी स्वसहायता समूहों के सहयोग से नशा मुक्ति प्रदर्शनी, रैली, गोष्ठी, नुक्कड़ नाटक, नारे, दीवार लेखन आदि आयोजित करने कहा है। इसके साथ ही रेडियों एवं दूरदर्शन से नशा मुक्ति कार्यक्रमों का प्रसारण, यथा संभव नशा पीड़ितों से प्रत्यक्ष संवाद विकसित कर उन्हें नशापान के दुष्परिणामों के जानकारी देने, नशा मुक्ति साहित्यों का वितरण, सोशल मीड़िया में प्रेरक स्लोगन, विद्यार्थियों में नशापान के विरूद्ध जागरूकता लाने तथा नशामुक्त भारत अभियान के अन्तर्गत ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में चयनित मास्टर, वालिंटियर्स के माध्यम से नशापान के विरूद्ध विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कराने कहा है। कार्यक्रम आयोजित करने के पश्चात पालन प्रतिवेदन भी उपलब्ध कराने कहा गया है।

सरकार ने जारी किया नया आदेश, अब रजिस्ट्री में भूमि पर वृक्ष का नहीं होगा मूल्यांकन

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने लोगों को वृक्षों वाली भूमि के कारण रजिस्ट्री में होने वाली परेशानी से बचाने के लिए नया आदेश जारी किया है. अब रजिस्ट्री में भूमि पर वृक्ष का मूल्यांकन नहीं होगा, इससे रजिस्ट्री शुल्क के साथ पटवारी के पास चक्कर लगाने से मुक्ति मिल जाएगी. बता दें कि अब तक भूमि पर लगे वृक्ष का भी रजिस्ट्री के दौरान हिसाब देना होता था. इसमें सागौन, सरई जैसे मूल्यवान लकड़ियों के पेड़ों के लिए दर निर्धारित थी, जो भूमि के गाइडलाइन रेट में जुड़ जाती थी. इस कवायत से रजिस्ट्री शुल्क में वृद्धि तो होती ही थी, लेकिन उससे ज्यादा परेशानी पटवारियों के पास बिना वृक्ष की भूमि के प्रमाणपत्र बनाने में होती थी. पटवारी इस छोटी सी कवायद के लिए बार-बार चक्कर लगाते थे, और आखिर में लेन-देन से ही बात बनती थी.

रिपोर्ट : भारत में लगातार बेहतर परफॉर्म करने वाली कंपनियों की संख्या अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर

 नई दिल्ली भारत ने ग्लोबल लेवल पर अपनी आर्थिक ताकत का मजबूत प्रदर्शन किया है. डीएसपी म्यूचुअल फंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगातार बेहतर परफॉर्म करने वाली कंपनियों की संख्या अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है. ये भारतीय स्टॉक मार्केट के साथ ही देश के बिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत का भी सबूत है. रिपोर्ट के मुताबिक 39 भारतीय कंपनियों ने बीते 20 साल में अपनी बुक वैल्यू में लगातार इजाफा किया है, इनमें 7 कंपनियों का परफॉर्मेंस बेहद शानदार रहा है. भारतीय कंपनियों ने 2008 की ग्लोबल इकोनॉमिक मंदी और कोविड-19 महामारी के बावजूद बेहतरीन प्रदर्शन किया है. चुनौतियों के बावजूद भारतीय कंपनियों का जोरदार परफोरमेंस रिपोर्ट बताती है कि इन भारतीय कंपनियों ने अपनी मजबूत फाइनेंशियल सेहत और मैनेजमेंट क्षमता के चलते लंबे समय तक स्टेबिलिटी बनाए रखी है. डीएसपी म्यूचुअल फंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दशक से ज्यादा समय से भारतीय कंपनियां इक्विटी पर लगातार 20 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दे रही हैं. 75 फीसदी से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने चुनौतीपूर्ण आर्थिक स्थितियों में भी पॉजिटिव बुक वैल्यू दर्ज की है. किसी कंपनी की बुक वैल्यू में लगातार बढ़ोतरी बताती है कि वो अपने इन्वेस्टर्स को लंबे समय तक हाई रिटर्न देने की क्षमता रखती है. ये रिपोर्ट इस बात का भी संकेत देती है कि भारतीय इकोनॉमी ने 2008 की मंदी और कोविड-19 महामारी जैसी चुनौतियों का डटकर सामना किया है. भारतीय शेयर बाजार में भी बेहतर रिटर्न घरेलू शेयर बाजार में कंपनियों के बेहतर परफॉर्मेंस ने भारत को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर मजबूत पोज़िशन में ला खड़ा किया है. डीएसपी म्यूचुअल फंड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार के बेहतर प्रदर्शन की मुख्य वजह इसका मजबूत रिटर्न ऑन इक्विटी यानी ROE है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत के पास तेज इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए मजबूत आधार होने के साथ ही किसी भी ग्लोबल संकट से निपटने की ताकत है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय कंपनियों की ये स्टेबिलिटी इन्वेस्टर्स के कॉन्फिडेंस को बढ़ाने के साथ ही देश की आर्थिक तरक्की का भी मजबूत बेस है. भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर की मजबूती ने घरेलू स्टॉक मार्केट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. ये रिपोर्ट इस बात का सबूत है कि भारतीय कंपनियों का प्रदर्शन ना केवल डोमेस्टिक लेवल पर बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी सराहनीय है. मजबूत बुनियाद और फाइनेंशियल सेहत के दम पर भारतीय कंपनियां भविष्य में भी ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बनाए रखने की ताकत दिखा रही हैं.  

US ने यूक्रेनी सेना में भर्ती हुए नए रंगरूटों को सैन्य प्रशिक्षण और हथियार देने का प्रस्ताव दिया

कीव अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में हैं। उनका कार्यकाल अब एक महीने से भी कम बचा है। इस बीच बाइडेन प्रशासन ने रूस के साथ चल रहे युद्ध में सैन्य शक्ति और सैनिकों की संख्या में इजाफा करने के लिए यूक्रेन को एक प्रस्ताव सुझाया है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के इस सुझाव से यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की टेंशन में हैं। दरअसल, अमेरिका ने यूक्रेन में सैनिकों की भर्ती के लिए आयु सीमा को 25 से घटाकर 18 साल करने का सुझाव दिया है और सेना में भर्ती हुए नए रंगरूटों को सैन्य प्रशिक्षण और हथियार देने का प्रस्ताव दिया है लेकिन जेलेंस्की को इस सुझाव को मानने में दिक्कत हो रही है। उनका मानना है कि इसके दूरगामी और हानिकारक प्रभाव देखने को मिलेंगे और देश की जनसांख्यिकी बुरी तरह से प्रभावित हो जाएगी। कई विशेषज्ञों का मानना है कि सैनिकों की भर्ती की उम्र सीमा घटाकर 18 साल करने से यूक्रेन में जन्म दर पर बुरा असर पड़ सकता है, जबकि देश पहले से ही कम जन्म दर की मार झेल रहा है। न्यूज वीक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल 10 लाख से ज्यादा यूक्रेनी सैनिक रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहे हैं। बावजूद यूक्रेन करीब 43000 सैनिकों की भारी कमी झेल रहा है। यूक्रेन को रूस जैसे देश से मुकाबला करने के लिए अभी 1.60 लाख अतिरिक्त सैनिकों की जरूरत है। सैनिकों की कमी की समस्या से निजात पाने के लिए जेलेंस्की सरकार ने इस साल अप्रैल में सैनिकों की भर्ती में न्यूनतम उम्र सीमा 27 से घटाकर 25 साल की है। अगस्त में रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की थी कि एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत सैनिकों की भर्ती की न्यूनतम उम्र सीमा 25 से घटाकर 17 साल करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने जा रही है। इसके तहत 17 से 25 साल की उम्र के युवाओं को बिना किसी मेडिकल टेस्ट के सैन्य भर्ती के लिए पंजीकृत कर दिया जाएगा लेकिन जेलेंस्की सरकार को अब इसमें बड़ा जोखिम दिख रहा है। जानकारों का कहना है कि इस उम्र में नौजवानों के सेना में भर्ती होने और युद्ध में लड़ने से देश में जन्म दर प्रभावित हो सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में सैनिक हताहत हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने इस बात को लेकर भी चेतावनी जारी की है कि अगर इस पॉलिसी को अपनाया गया तो 2050 तक देश की जनसंख्या 15 फीसदी गिरकर 31,990,132 पर पहुंच सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पिछले साल यूक्रेन की आबादी, 37,732, 836 थी जो लगातार घट रही है। CIA के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार यूक्रेन की जनसंख्या पिछले साल से घटकर अब 35,661, 826 है, जिसमें 17,510,149 पुरुष और 18.151, 677 महिलाएं हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के कारण अगस्त तक यूक्रेन की मृत्यु दर जन्म दर की तुलना में तीन गुनी हो गई है।

space technology: अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने की होड़, पूरी दुनिया बड़े संकट की ओर

Space technology: The race to send rockets into space, the whole world is headed for a big crisis आजकल अंतरिक्ष में जाने वाली कंपनियों की संख्या बढ़ रही है. अंतरिक्ष कचरा सिर्फ अंतरिक्ष में ही नहीं, बल्कि धरती पर भी समस्याएं पैदा कर सकता है. आजकल हम जिंदगी के कई जरूरी कामों के लिए अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी पर निर्भर हैं, जैसे मौसम की जानकारी हासिल करना, एक-दूसरे से बात करना और रास्ता ढूंढना आदि. लेकिन अंतरिक्ष में हो रहे कामों का हमारे पर्यावरण पर भी असर पड़ रहा है. अंतरिक्ष में भेजे जा रहे सैटेलाइट की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है. इससे अंतरिक्ष में कचरा (Space Debris) भी बढ़ रहा है. यह कचरा पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाता रहता है और दूसरे सैटेलाइट और अंतरिक्ष यान के लिए खतरा बन सकता है. अंतरिक्ष में बहुत ज्यादा सैटेलाइट होने से मौसम की जानकारी इकट्ठा करने वाले सिस्टम में भी रुकावट आ सकती है. वहीं अंतरिक्ष के इस्तेमाल को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट कानून नहीं हैं. इससे यह खतरा है कि अंतरिक्ष का इस्तेमाल गैर-जिम्मेदाराना तरीके से हो सकता है. पर्यावरण को कैसे हो रहा है नुकसान? जब भी कोई रॉकेट अंतरिक्ष में जाता है, तो वो अपने पीछे बहुत सारा धुआं छोड़ता है. इस धुएं में कार्बन डाइऑक्साइड, ब्लैक कार्बन और पानी की वाष्प होता है. ब्लैक कार्बन एक ऐसा पदार्थ है जो सूरज की रोशनी को बहुत ज्यादा सोखता है. यह कार्बन डाइऑक्साइड से भी 500 गुना ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि यह ग्लोबल वार्मिंग को और बढ़ा देता है.रॉकेट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए जो ईंधन इस्तेमाल किया जाता है, उससे ओजोन परत को नुकसान पहुंचता है. खास तौर पर क्लोरीन वाले रसायनों से यह नुकसान ज्यादा होता है. ओजोन परत हमें सूरज से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है. अगर ओजोन परत कमजोर होगी, तो हमें त्वचा के कैंसर और आंखों की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. रॉकेट के धुएं से वातावरण में गड़बड़ी भी होती है जिससे मौसम पर भी असर पड़ता है. जब सैटेलाइट का मिशन पूरा हो जाता है और वातावरण में जल जाते हैं, तो उनसे निकलने वाली राख भी वातावरण और मौसम को नुकसान पहुंचा सकती है. सैटेलाइट बनाने से भी होता है प्रदूषण! सैटेलाइट बनाने के लिए भी कई तरह की चीजों की जरूरत होती है, जैसे धातु और अन्य सामग्री. इन चीजों को निकालने और तैयार करने में भी बहुत ऊर्जा खर्च होती है. इससे प्रदूषण भी होता है. सैटेलाइट में ऐसे सिस्टम भी होते हैं जो उन्हें अंतरिक्ष में सही जगह पर रखने और उनकी दिशा बदलने में मदद करते हैं. इन सिस्टम में भी ईंधन का इस्तेमाल होता है जिससे प्रदूषण होता है.भविष्य में हो सकता है कि कंपनियां अंतरिक्ष से खनिज पदार्थ निकालने लगें. इससे अंतरिक्ष और धरती दोनों जगह प्रदूषण बढ़ेगा. अंतरिक्ष में कितना है कचरा? अंतरिक्ष कचरा या ‘स्पेस जंक’ उन चीजों को कहते हैं जो अंतरिक्ष में बेकार हो चुकी हैं, जैसे पुराने सैटेलाइट, रॉकेट के टुकड़े और टूटे हुए सैटेलाइट्स के हिस्से. यह कचरा पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता रहता है और काफी खतरनाक हो सकता है.अंतरिक्ष में इतना कचरा हो गया है कि उस पर नजर रखना मुश्किल हो रहा है. अब तक लगभग 36,860 चीजें अंतरिक्ष में घूम रही हैं जो किसी काम की नहीं हैं. यह सब कचरा मिलकर 13,000 टन से भी ज्यादा वजन का है. यूरोपियन स्पेस एजेंसी के मुताबिक, 1957 से लेकर अब तक लगभग 6740 रॉकेट लॉन्च किए जा चुके हैं जिनसे 19,590 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे गए हैं. इनमें से लगभग 13,230 अभी भी अंतरिक्ष में हैं और 10,200 अभी भी काम कर रहे हैं.जैसे-जैसे अंतरिक्ष में कचरा बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे सैटेलाइट्स के बीच टकराव का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. यह कचरा बहुत तेज गति से घूमता है (लगभग 29,000 किलोमीटर प्रति घंटा). इतनी तेज गति से आ रहा एक छोटा सा धातु का टुकड़ा भी किसी सैटेलाइट को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा सकता है. अगर कोई सैटेलाइट क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो हमारे फोन, इंटरनेट और टीवी जैसी सेवाएं बाधित हो सकती हैं. मौसम की जानकारी देने वाले सैटेलाइट्स भी इस कचरे से प्रभावित हो सकते हैं, जिससे हमें मौसम का सही हाल नहीं पता चल पाएगा. यह कचरा अंतरिक्ष यात्रियों और अंतरिक्ष यान के लिए भी खतरा पैदा करता है. मेगा-कॉन्स्टेलेशन: इंटरनेट के लिए वरदान, पर्यावरण के लिए अभिशाप? मेगा-कॉन्स्टेलेशन ऐसे सैटेलाइट्स का समूह होता है जो एक साथ काम करते हैं. इनका मकसद दुनिया के हर कोने में तेज इंटरनेट पहुंचाना होता है. अभी अंतरिक्ष में लगभग 10,000 सैटेलाइट्स हैं. लेकिन अगले कुछ सालों में यह संख्या 10 गुना बढ़कर 1 लाख हो सकती है. यह ज्यादातर मेगा-कॉन्स्टेलेशन की वजह से होगा.स्पेसएक्स कंपनी का स्टारलिंक अभी सबसे बड़ा मेगा-कॉन्स्टेलेशन है. इसमें अभी 6,500 सैटेलाइट्स हैं और 2030 तक इनकी संख्या 40,000 से ज्यादा हो जाएगी. अमेजन, ई-स्पेस और चीन जैसी कंपनियां भी अपने मेगा-कॉन्स्टेलेशन बना रही हैं. इनमें भी हजारों या दसियों हजार सैटेलाइट्स होंगे. इतने सारे सैटेलाइट्स से अंतरिक्ष में कचरा बहुत बढ़ जाएगा. वैज्ञानिकों को भी अंतरिक्ष से पृथ्वी का अध्ययन करने में मुश्किल हो सकती है. ये सैटेलाइट्स रात में आकाश में चमकते हैं जिससे तारों को देखना मुश्किल हो जाता है. पुराने vs नए सैटेलाइट पहले जो सैटेलाइट बनाए जाते थे, वो सरकार द्वारा वित्त पोषित होते थे और 20-30 साल तक चलते थे. लेकिन अब निजी कंपनियां मेगा-कॉन्स्टेलेशन बना रही हैं जिनमें हजारों सैटेलाइट्स होते हैं. ये कंपनियां हर 5 साल में अपने सैटेलाइट्स बदलना चाहती हैं ताकि नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकें.पुराने सैटेलाइट्स को वातावरण में जलाकर नष्ट किया जाता है. इससे अंतरिक्ष में कचरा तो नहीं बढ़ता, लेकिन इससे वातावरण में प्रदूषण जरूर फैलता है. इतने सारे सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने के लिए बहुत सारे रॉकेट लॉन्च करने पड़ते हैं. इन रॉकेट से भी प्रदूषण होता है. 2019 में लगभग 115 सैटेलाइट वातावरण में जल गए थे. लेकिन 2024 में यह संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है. नवंबर 2024 तक 950 से ज्यादा सैटेलाइट वातावरण में जल चुके हैं. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2033 तक हर साल 4000 टन … Read more

बिजली कार्मिकों ने ली ऊर्जा संरक्षण की शपथ

भोपाल ऊर्जा हमारे जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है। ऊर्जा ने विभिन्न रूपों में हमारी जीवन-शैली में महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है। विभिन्न रूपों में बिजली ऊर्जा का वह प्रकार है जो सबको सुगमता से हर कहीं उपलब्ध और सुलभ है। यही कारण है कि ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों को भी बिजली के रूप में बदलकर उसका उपयोग प्रकाश, यातायात, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कृषि जैसी मूलभूत आवश्यताओं के साथ मनोरंजन, दूरसंचार एवं पर्यटन जैसे सुख-साधन में भी किया जा रहा है। निदेशक (तकनीकी) दीप्तापाल सिंह यादव ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण सप्ताह के अवसर पर कार्मिकों से कहा कि बिजली की बचत ही बिजली का उत्पादन है। उन्होंने कार्मिकों से आव्हान किया कि बिजली की बचत करने के लिए उचित प्रबंधन करते हुए गुणवत्तापूर्ण विद्युत के उपयोग के लिए ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करें और अनावश्यक बिजली के उपयोग पर अंकुश लगाएं। राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण सप्ताह के अवसर पर कम्पनी के निदेशक (तकनीकी) दीप्तापाल सिंह यादव ने गोविंदपुरा स्थित कम्पनी मुख्यालय में कार्मिकों को बिजली बचत की शपथ दिलाई।  

रूस और भारत के गहराते रिश्तों के बीच भारतीयों के लिए एक अच्छी खबर, वीजा फ्री ट्रैवल की शुरुआत जल्द

मॉस्को रूस और भारत के गहराते रिश्तों के बीच भारतीयों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. अब भारत के लोग जल्द ही बिना वीजा के रूस घूम सकते हैं. भारत और रूस के बीच 2025 में इसे लेकर एक सिस्टम विकसित होने की संभावना है. इससे पहले जून में ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि भारत और रूस ने वीजा फ्री ट्रैवल के लिए एक-दूसरे के वीजा प्रतिबंधों को कम करने के लिए द्विपक्षीय समझौते पर चर्चा की है. रूस ने भारतीयों के लिए अगस्त 2023 से ई-वीजा की शुरुआत की थी जिसकी प्रक्रिया पूरे होने में लगभग 4 दिन लगते हैं.  रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल रूस ने जितने ई-वीजा जारी किए, उसमें भारत शीर्ष पांच देशों में शामिल था. रूस ने भारतीयों को 9,500 ई-वीजा दिए. वर्तमान में भारत के नागरिकों को रूस में एंट्री करने, वहां रहने और बाहर निकलने के लिए रूसी दूतावास या फिर वाणिज्य दूतावास की तरफ से जारी वीजा लेना जरूरी होता है जो कि एक लंबी प्रक्रिया है. रिकॉर्ड संख्या में रूस जा रहे भारतीय ज्यादातर भारतीय बिजनेस या अपने काम के सिलसिले में रूस जाते हैं. 2023 में, रिकॉर्ड 60,000 से ज्यादा भारतीयों ने रूस का दौरा किया जो 2022 की तुलना में 26 प्रतिशत ज्यादा है. रूस अपने वीजा फ्री टूरिस्ट एक्सचेंज के तहत चीन और ईरान के यात्रियों को वीजा फ्री एंट्री दे रहा है. चीन और ईरान के साथ रूस का यह सहयोग सफल रहा है जिसे देखते हुए माना जा रहा है कि भारत के साथ भी ऐसा ही सिस्टम शुरू किया जाएगा. वर्तमान में भारतीय पासपोर्टधारियों को 62 देशों में वीजा फ्री एंट्री का अधिकार हासिल है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 में भारत का पासपोर्ट 82वें स्थान पर है जिसकी मदद से भारतीय इंडोनेशिया, मालदीव और थाईलैंड जैसे ट्रैवल डेस्टिनेशन्स पर बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन प्राधिकरण (IATA) के डेटा के आधार पर जारी किया जाता है. इंडेक्स मानता है कि किसी देश का पासपोर्टधारी सभी बुनियादी एंट्री जरूरतों को पूरा करता है, अकेले यात्रा करने वाले वयस्क नागरिक है, और कम समय के प्रवास या घूमने या फिर बिजनेस के मकसद से एंट्री चाहता है. इस इंडेक्स में हालांकि, राजनयिक यात्रा, आपातकालीन या अस्थायी पासपोर्ट और ट्रांजिट स्टे शामिल नहीं है.  

हिन्दी भाषा पाठ्यक्रम का बैगानी और गोंडी बोली में हो रहा अनुवाद

शिक्षा के प्रसार के लिए डिंडोरी के बजाग में नया प्रयोग जनजातीय विद्यार्थियों को उनकी बोली में प्राथमिक शिक्षा देने का प्रयास हिन्दी भाषा पाठ्यक्रम का बैगानी और गोंडी बोली में हो रहा अनुवाद पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को पढ़ाई में मिलेगा लाभ भोपाल जनजातियों की देशज कला, संस्कृति, वानस्पतिक ज्ञान और जड़ी-बूटी रोग उपचार कौशल के संरक्षण और संवर्धन के लिए केन्द्र और मध्यप्रदेश सरकार विभिन्न कदम उठा रही हैं। जनजातियों की अपनी बोलियां होती हैं। वे अपनी बोली में ही बात करना पसंद करते हैं। ज्ञान अर्जन हो या तथ्यों को समझने की बात हो, जनजातीय समुदाय अपनी बोली में ही ज्यादा सहज होते हैं। जनजातियों के इसी मानस को समझकर केन्द्र एवं राज्य सरकार ने अब जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को उनकी बोली में प्राथमिक शिक्षा देने का मन बना लिया है। इस काम की शुरुआत ट्राईबल डामिनेटेड डिंडोरी जिले से की जा रही है। यहां विशेष रूप से पिछड़ी और आर्थिक रूप से कमजोर मानी जाने वाली (पीजीटीजी समूह की) बैगा जनजाति के अलावा गोंड जनजाति की बड़ी आबादी रहती है। जन सांख्यिकीय अनुपात में इन जनजातियों के बड़ी संख्या में विद्यार्थी स्कूली शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन्हीं विद्यार्थियों के हित में डिंडोरी जिले के बजाग ब्लॉक में एक अनोखा और प्रेरणादायक कदम उठाया जा रहा है। अत्यंत पिछड़ी बैगा जनजाति की विलुप्त होती बोलियां और संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए प्राथमिक स्तर पर पहली से पांचवीं तक के छात्रों के लिए हिन्दी भाषा के पाठ्यक्रम का बैगानी और गोंडी बोली में अनुवाद किया जा रहा है। यह नवाचार न केवल शिक्षा को सरल और सुलभ बनाएगा, बल्कि जनजातीय छात्रों के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बोली संरक्षण के लिए बड़ा कदम कार्य योजना के तहत हिंदी भाषा में तैयार विषयवार पाठ्यपुस्तकों को बैगानी और गोंडी बोली की शब्दावली में अनुवादित किया जा रहा है। विशेष रूप से हिंदी, गणित और पर्यावरण विज्ञान विषयों पर जोर दिया गया है, जबकि अंग्रेज़ी भाषा को पाठ्यक्रम से बाहर रखा गया है। जनजातीय कार्य विभाग के अधीन ट्राईबल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (टीआरआई) भोपाल की पहल पर इस परियोजना को राज्य शिक्षा केंद्र के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। बैगानी बोली के संरक्षण और शिक्षा में उपयोग के लिए शब्दकोश से शब्दों का संग्रह किया गया है। यह प्रयास जनजातीय छात्रों को उनकी ही बोली में सुलभ शिक्षा देने का अनूठा प्रयास है। यह बैगा जनजाति की बोली और सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित करेगा। शिक्षकों और विशेषज्ञों की टीम कार्य योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए 35 शिक्षकों और भाषा/बोली विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है। ये शिक्षक दो शिफ्टों में काम करते हुए हिंदी भाषा के पाठ्यक्रम को बैगानी और गोंडी बोली की शब्दावली में अनुवादित कर रहे हैं। परियोजना का लगभग 55 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। इसे अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने की योजना है। शासकीय कन्या शिक्षा परिसर, बजाग के ऑडिटोरियम हॉल में छह मेजों पर इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। विशेषज्ञ शिक्षक हर शब्द और वाक्य की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं, ताकि पाठ्यक्रम जनजातीय छात्रों की समझ और उनकी संस्कृति के अनुरूप ही हो। उम्मीदों का उज्जवल भविष्य जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि जनजातियों की बोलियों के संरक्षण के लिए केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ मिलकर राज्य सरकार पूरा प्रयास कर रही है। डिंडोरी जिले में बैगानी और गोंडी बोली में पाठ्यक्रम का अनुवाद एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया जा रहा है। सफल होने पर अन्य जनजातीय क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकेगा। इस नवाचार से न केवल बोलियों और संस्कृति के संरक्षण में मदद मिलेगी, बल्कि बैगा जनजाति के सभी विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार होकर उनका बौद्धिक विकास भी होगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में डिंडोरी जिले (बैगांचल) के वन्या रेडियो केंद्र, चांडा ने भी बैगानी बोली में कार्यक्रम प्रसारित किए थे। अब इस योजना के माध्यम से वही प्रयास और अधिक बेहतर स्वरूप में क्रियान्वित किया जा रहा है। जिले के लिए यह कदम न केवल शैक्षणिक विकास, वरन् संस्कृति संरक्षण के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। इस अनूठी पहल से बैगा जनजाति की आने वाली पीढ़ियां अपनी कला, संस्कृति, बोली और पहचान से जुड़ी रहेंगी। डिंडोरी जिले में इस कार्य के नोडल अधिकारी धनेश परस्ते बताते हैं कि हमने बैगानी और गोंडी बोली की शब्दावली तैयार कर ली है। हम हिन्दी भाषा के पाठ्यक्रम को जिले की जनजातियों की सामान्य बोलचाल की भाषा में अनुवादित कर रहे हैं। चूंकि यहां की जनजातियां मुख्यतः बैगा और गोंडी बोली में सहज होकर वार्तालाप करती हैं, इसीलिए हम टीआरआई के मार्गदर्शन में आंगनवाड़ी में पढ़ाई जाने वाली पुस्तकों और प्रायमरी कक्षाओं के पाठ्यक्रमों का इन्हीं दो बोलियों में अनुवाद कर रहे हैं। हम जल्द ही यह काम पूरा कर लेंगे।  

शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के डाटा का सत्यापन आईएफएमआईएस के तहत समग्र आईडी से सत्यापित किया जायेगा : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि सभी शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के डाटा का सत्यापन आईएफएमआईएस के तहत समग्र आईडी से सत्यापित किया जायेगा। साथ ही शासकीय सेवकों का वेतन भुगतान आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस) के माध्यम से होगा। इस व्यवस्था में सभी शासकीय सेवकों का दायित्व होगा कि वे आईएफएमआईएस के अंतर्गत एम्प्लाई सेल्फ सर्विस प्रोफाइल के माध्यम से अपनी समग्र आईडी की प्रविष्टि कर जानकारी सत्यापित करना सुनिश्चित करें। आईएफएमआईएस में समग्र आईडी की प्रविष्टि करने की सुविधा प्रारंभ कर दी गई है। एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएफएमआईएस) में समग्र आईडी की प्रविष्टि एवं सत्यापन से पूर्व समस्त शासकीय सेवकों द्वारा उनकी समग्र आईडी का पंजीयन/अद्यतन एवं आधार से लिंक समग्र पोर्टल के माध्यम से कराया जाना होगा। कर्मचारियों के वेतन प्राप्त करने वाले बैंक खातों को भी आधार से लिंक कराया जाना अनिवार्य होगा। इस संबंध में शासन के समस्त विभागों के बजट नियंत्रण अधिकारी एवं आहरण संवितरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि 28 फरवरी 2025 तक समस्त शासकीय सेवकों की समग्र आईडी की प्रविष्टि आईएफएमआईएस अंतर्गत एम्प्लाई प्रोफाइल में हो जाये। आईएफएमआईएस अंतर्गत बजट नियंत्रण अधिकारी/आहरण संवितरण अधिकारियों की लॉगइन पर मॉनिटरिंग हेतु रिपोर्ट उपलब्ध करायी जायेगी। कर्मचारियों के डाटा के समग्र आईडी से सत्यापन कार्य के प्रथम चरण में नियमित शासकीय सेवकों के लिये समग्र आईडी के प्रविष्टि की कार्यवाही की जाना है। द्वितीय चरण में मानदेय/संविदा/दैनिक वेतनभोगी शासकीय सेवकों का भी सत्यापन एवं आधार से लिंक किया जायेगा। समग्र पोर्टल से संबंधित सहयोग/सहायता के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा निर्देश जारी कर दिये गये हैं। समग्र आईडी बनवाने/अद्यतन करवाने/सुधार करवाने संबंधी जानकारी/यूजर मैनुअल समग्र पोर्टल https://samagra.gov.in/ से प्राप्त किये जा सकते हैं।…पत्र के लिए क्लिक करें  

प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 की हुई शुरूआत, 22 हजार 800 करोड़ रूपये की राशि हुई जारी

भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 की शुरूआत हो गई है। इस योजना में प्रदेश के जरूरतमंद हितग्राहियों के लिये 10 आवास बनाये जायेंगे। इस योजना का लाभ उन हितग्राहियों को दिया जायेगा, जिन्हें किसी कारण से अब तक आवास योजना का लाभ प्राप्त नहीं हुआ है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मैदानी अमले को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिये हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के आवेदन संबंधी जानकारी नजदीकी नगरीय निकायों से प्राप्त की जा सकती है। योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिये केन्द्र सरकार ने यूनीफाइड वेब पोर्टल पर भी जानकारी अपलोड की है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 में 4 प्रकार के घटक शामिल किये गये हैं। हितग्राही आवेदन करते समय अपनी पात्रता और आवश्यकता के अनुसार घटक का चयन कर सकते हैं। योजना संबंधी निर्देशिका https://pmaymis.gov.in/PMAYMIS2_2023/PmayDefault.aspx पोर्टल से प्राप्त की जा सकती है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 में देश में एक करोड़ आवास और मध्यप्रदेश में 10 लाख आवास बनाये जाने का कार्यक्रम तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 में विशेष वर्गों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। इनमें पीएम स्वनीधि योजना, भवन निर्माण श्रमिक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पीएम विश्वकर्मा योजना के कारीगर, सफाई कर्मी और झुग्गी बस्ती में रहने वाले परिवार शामिल है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 1.0 में 8 लाख 25 हजार आवास बनकर हो गये हैं तैयार प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में अब तक 8 लाख 25 हजार जरूरतमंद हितग्राहियों के आवास निर्माण पूरे किये जा चुके हैं। प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के पहले चरण में 9 लाख 45 हजार आवास स्वीकृत किये गये थे। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के प्रथम चरण के क्रियान्वयन की सम्पूर्ण अवधि में मध्यप्रदेश देशभर में अग्रणी स्थान पर है। योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिये मध्यप्रदेश और प्रदेश की कई नगरीय निकायों को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के प्रथम चरण में प्रभावी क्रियान्वयन का श्रेय न्यूनतम दर पर आवास उपलब्ध कराने के लिये राज्य सरकार द्वारा किये गये कई नवाचारों को जाता है। स्वीकृत आवासों के निर्माण कि लिये केन्द्रांश और राज्यांश की अनुदान राशि 19 हजार 700 करोड़ रूपये एवं क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) घटक के लिये ब्याज अनुदान के रूप में 3 हजार 900 करोड़ रूपये, इस प्रकार कुल राशि 23 हजार 600 करोड़ रूपये स्वीकृत की जा चुकी है। हितग्राहियों को अब तक 22 हजार 800 करोड़ रूपये की राशि जारी की जा चुकी है।  

खुलासा : शादी करने वाले कैडर आंदोलन से मुंह मोड़ सकते हैं, नतीजतन, शादी करने वाले किसी भी कैडर के लिए नसबंदी अनिवार्य है

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में गृहमंत्री अमित शाह के साथ मिलने आए पूर्व नक्सलियों ने नक्सली नेताओं के बारे में कई खुलासे किए हैं. उनका कहना है कि यदि कोई नक्सल कैडर शादी करना चाहता है, तो उसे पहले नसबंदी करवानी पड़ती है. माओवादी शब्दावली में नसबंदी एक बहुत ही आम शब्द है. शादी से वरिष्ठ सीपीआई (माओवादी) नेताओं के निर्देश पर इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. तेलंगाना के एक पूर्व नक्सली को शादी से पहले नसबंदी की प्रक्रिया से गुजरने का निर्देश दिया गया था. कई साल बाद जब उसने सरेंडर किया, तो प्रक्रिया को उलटने के लिए दूसरी सर्जरी करवाई. इसके बाद एक लड़के का पिता बन पाया. ज्यादातर नक्सली सरेंडर के बाद इसी तरह परिवार शुरू करने के लिए प्रक्रिया को चुनते हैं.  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इसके प्रभाव से अवगत कराया गया. पूर्व नक्सली ने बताया, “जब मैं सीपीआई (माओवादी) का सदस्य था, तो मुझे शादी से पहले नसबंदी करवानी पड़ी. लेकिन जब मैं सरेंडर के बाद मुख्यधारा में शामिल हो गया, तो मैंने एक ऑपरेशन करवाया ताकि मैं पिता बन सकूं. दूसरे ऑपरेशन के बाद, मैं एक बच्चे का पिता बन गया.” दरअसल, नक्सल नेताओं के बीच ये धारणा है कि बच्चे पैदा होने के बाद उनके कैडर के लोग परिवार के मोह में पड़ जाएंगे. इस वजह से नक्सल आंदोलन को नुकसान पहुंचेगा. इस बात की भी आशंका है कि शादी करने वाले कैडर आंदोलन से मुंह मोड़ सकते हैं. नतीजतन, शादी करने वाले किसी भी कैडर के लिए नसबंदी अनिवार्य है. छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली मरकम दुला ने कहा कि नक्सली नेता नहीं चाहते कि कोई भी सदस्य भावनात्मक रूप से अपनी संतान से जुड़े, इसलिए ‘नसबंदी’ करवा दी जाती है. ओडिशा के मलकानगिरी के एक पूर्व माओवादी ने भी ऐसी ही कहानी साझा की है. सुकांति मारी ने कहा, “मेरे साथी कैडर से शादी करने से पहले उसे ‘नसबंदी’ करवानी पड़ी.” उसके पति को पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया. इसके बाद में उसने अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. इस बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा कि वो इस बात से बेहद संतुष्ट हैं कि युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर हथियार डाल रहे हैं. उन्होंने नक्सलियों से हथियार छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि उनका पुनर्वास सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा, “मैं नक्सलियों से अपील करता हूं कि कृपया आगे आएं. हथियार छोड़ दें, आत्मसमर्पण करें और मुख्यधारा में शामिल हों. आपका पुनर्वास हमारी जिम्मेदारी है.” केंद्र ने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों और नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति बनाई है.  

आईटी रिटर्न में गड़बड़ी वालों से सरकार ने डेटा और एनालिटिक्स का उपयोग कर, वसूले 37,000 करोड़ रुपये

नई दिल्ली इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पिछले 20 महीनों में ऐसे लोगों से ₹37,000 करोड़ वसूले हैं, जो टैक्सेबल इनकम होने के बावजूद रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस के एनालिसिस के बाद ऐसे लोगों की पहचान की। यह खर्च नकद में किया गया था। इन लोगों ने 2019-20 के दौरान रत्न और आभूषणों की खरीद, प्रॉपर्टी और लग्जरी होलिडेज पर जमकर खर्च किया था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने ईटी को बताया कि ये ऐसे मामले हैं, जहां लोग बड़ी खरीदारी करने के बावजूद टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे थे। विभाग ने पिछले 20 महीनों में उनसे संपर्क किया था। अधिकारी ने कहा कि व्यापक और अधिक सख्त टैक्स कलेक्शन और स्रोत पर कटौती (TDS) व्यवस्था ने हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन को ट्रैक करने में मदद की है। ये ऐसे ट्रांजैक्शन थे जो किसी तरह टैक्स अधिकारियों की नजरों से छूट गए थे। कई ऐसे भी मामले भी हैं जिनमें लोगों ने जमकर खर्च किया और टैक्स देनदारी के बावजूद जीरो इनकम घोषित करते हुए रिटर्न दाखिल किया। अधिकारी ने कहा कि ₹37,000 करोड़ में से हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन करने वाले लोगों से ₹1,320 करोड़ की वसूली की गई। विभाग उन टैक्सपेयर्स से संपर्क साध रहा है जिनका खर्च पैटर्न और आईटी रिटर्न में गड़बड़ी है। कैसे पकड़ी गई चोरी इनकम टैक्स विभाग टैक्स चोरी का पता लगाने के लिए डेटा और एनालिटिक्स का उपयोग कर रहा है और ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने के लिए वित्त वर्ष 2021 से गैर-फाइलर मॉनीटरिंग सिस्टम को तैनात किया गया है। अधिकारी ने कहा कि कई स्रोतों से प्राप्त डेटा टैप और सिंक्रोनाइज किया जा रहा है। इससे विभाग के लिए टैक्स चोरी की पहचान करना और ऐसे लोगों को पकड़ना आसान हो जाता है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-नवंबर में प्रत्यक्ष कर संग्रह 15.4% बढ़कर ₹12.10 लाख करोड़ हो गया। इसमें ₹5.10 लाख करोड़ का कॉर्पोरेट कर और ₹6.61 लाख करोड़ का गैर-कॉर्पोरेट कर शामिल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Navi Mumbai के खारघर में Iskcon Temple का करेंगे उद्घाटन

 मुंबई नवी मुंबई के खड़गपुर में 12 साल की मेहनत के बाद भव्य इस्कोन मंदिर बनकर तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने 15 तारीख को इस मंदिर का उद्घाटन करने वाले हैं। मंदिर का नाम राधा मदनमोहनजी मंदिर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक इस मंदिर के निर्माण में 170 करोड़ रुपये का खर्च आया है। मंदिर के ट्रस्टी और अध्यक्ष सूरदास प्रभु ने कहा कि आधुनिक समय में यह मंदिर बड़ा आध्यात्मिक केंद्र बनने वाला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां कल्चरल सेंटर और वैदिक संग्रहालय का भी शिलान्यास करेंगे। इसमें भारत की महान संस्कृति की छवि देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर देखने आ चुके हैं। 12 अक्टूबर को नवी मुंबई दौरे के समय वह यहां आए थे। उन्होंने कहा कि नवी मुंबई में हरियाली के बीच यह मंदिर बहुत बहुत भव्य नजर आता है। मंदिर के उद्घाटन का कार्यक्रम 9 जनवरी से ही शुरू हो जाएगा। इसके बाद यह कार्यक्रम एक सप्ताह तक चलेगा। 15 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। मंदिर की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक मकर संक्रांति के मौके पर इसका उद्घाटन किया जाना है। इस मंदिर में भक्तिवेदंत कॉलेज ऑफ वैदिक एजुकेशन, एक लाइब्रेरी, आयुर्वेदिक हीलिंग सेंटर, गौशाला, वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रम, जैविक खेत भी होंगे। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन,मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार भी शामिल हो सकते हैं। एक सप्ताह के कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक सेमिनार, भजन संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। इस मंदिर में दशावतार की मूर्तियां भी स्थापित की गई हैं।

फ्रांस में चक्रवात आने से 1000 लोगों के मरने की आशंका, हर तरफ तबाही

पेरिस फ्रांस के मायोट क्षेत्र में चक्रवात ‘चिडो’ के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है। कई इलाकों पर तबाही का ऐसा मंजर पसरा हुआ है, मानो परमाणु हमले के बाद की तबाही हो। स्थानीय लोगों का हाल इतना बुरा है कि कई दिनों से पीने को पानी नहीं है, खाने को भोजन नहीं और कइयों के तो घर तूफान में उड़ गए। अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या हजारों में भी जा सकती है। चक्रवात चिडो के कारण मायोट इलाके में 225 किमी/घंटा (140 मील प्रति घंटे) से अधिक की गति से हवाएं चलीं। इससे वे क्षेत्र नष्ट हो गए जहां बेसहारा लोग टिन की छत वाली झुग्गियों में रह रहे थे। इलाके के एक स्थानीय ममूदज़ौ ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “हमें तीन दिनों से पानी नहीं मिला है।” एक अन्य ने कहा, “मेरे कुछ पड़ोसी भूखे और प्यासे हैं।” मलबे से शवों को निकालने में लगेंगे कई दिन बचावकर्मी मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं। बचाव कर्मियों का कहना है कि इलाके में तबाही इतनी ज्यादा है कि मलबे से शवों को निकालने में ही कई दिन लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि मरने वालों की संख्या हज़ारों तक पहुंच सकती है। चक्रवात के कारण हवाई अड्डे सहित सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, इलाके तबाह हो गए हैं और बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। फ्रांस ने 90 साल बाद देखी ऐसी तबाही फ्रांस के एक टीवी चैनल मायोट लाएरे की रिपोर्ट के मुताबिक, यह 90 वर्षों में आया अब तक का सबसे भयंकर तूफान है। इस तबाही में सैकड़ों लोग मारे गए हैं, शायद संख्या लगभग एक हजार के करीब हो सकती है या फिर हजारों में भी पहुंच सकती है।” फ्रांस के गृह मंत्रालय ने सोमवार को कम से कम 11 लोगों की मौत और 250 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की थी लेकिन कहा कि यह संख्या काफी बढ़ने की आशंका है। अफ्रीका के तट से दूर दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर में स्थित मायोट, फ्रांस का सबसे गरीब द्वीप क्षेत्र और यूरोपीय संघ का सबसे गरीब क्षेत्र है।

सीहोर के कारोबारी मनोज परमार के बच्चों से मिलेंगे पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, भेंट करेंगे ‘गुल्लक’

Former minister Sajjan Singh Verma will meet the children of Sehore businessman Manoj Parmar, will present ‘gullak’ MP News: सज्जन सिंह वर्मा ने बताया कि मनोज परमार के दोनों बच्चों की जीवन भर की पढ़ाई का खर्च उनकी ओर से उठाया जाएगा. इस संबंध में कांग्रेस के कई नेताओं ने आगे बढ़कर मदद करने का वादा भी किया है. मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा सीहोर जिले के कारोबारी मनोज परमार के बच्चों को आज मंगलवार (17 दिसंबर) को बड़ी गुल्लक भेंट करने वाले हैं. इसके अलावा पूर्व मंत्री बच्चों को कई और सुविधा देंगे, जिसके जरिए वह अच्छी तालीम ग्रहण कर सकेंगे. कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान मनोज परमार के बच्चों ने उन्हें गुल्लक भेंट की थी. सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि जब बच्चों ने गुल्लक भेंट की थी, उस समय वे वहीं मौजूद थे. बच्चों ने कहा था, “राहुल गांधी जी, आप अच्छा काम कर रहे हैं और भारत जोड़ने के लिए निकले हैं, हमने अपनी गुल्लक में जो राशि एकत्रित की है वह आपको भेंट कर रहे हैं, आपको जहां भी कोई अच्छा कार्य लगे उस पर यह राशि खर्च कर दीजिएगा.” उन्होंने बताया कि अब वह उन बच्चों को उनकी गुल्लक लौटने जा रहे हैं. मंगलवार को पूर्व मंत्री परमार दंपती के घर जाकर बड़ी गुल्लक बच्चों को सौंपेगे. उन्होंने बताया कि दोनों बच्चों की जीवन भर की पढ़ाई का खर्च उनकी ओर से उठाया जाएगा. इस संबंध में कांग्रेस के कई नेताओं ने आगे बढ़कर मदद करने का वादा भी किया है. परमार दंपती का परिवार कांग्रेस का परिवार है. बड़ी गुल्लक में पांच लाख रुपये पूर्व मंत्री ने कहा कि पीड़ित परिवार के जीवन की मुश्किलें आसान करने के लिए उनकी ओर से छोटा सा प्रयास किया जा रहा है. वे बड़ी गुल्लक के रूप में पांच लाख रुपये पीड़ित परिवार के बच्चों को भेंट करने जा रहे हैं. दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय के छापे के बाद परमार दंपती ने आत्महत्या कर ली थी. कांग्रेस से जुड़े मनोज परमार उनकी पत्नी नेहा परमार खुदकुशी करते हुए सुसाइड नोट भी लिखा था. वहीं बच्चों का आरोप है कि उन्हें बीजेपी ज्वाइन करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था. दूसरी तरफ बीजेपी का कहना है कि मनोज परमार पर आपराधिक मामले दर्ज थे. बीजेपी में उनके लिए कोई जगह नहीं थी. इन सबके बीच अब कांग्रेस पूरे मामले को प्रदेश स्तर पर ले जाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है.

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