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रांची में नर्सरी के चार वर्षीय बच्चे से यौन उत्पीड़न, कैब ड्राइवर गिरफ्तार

रांची. झारखंड की राजधानी रांची में एक प्राइवेट स्कूल में नर्सरी के चार वर्षीय बच्चे के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी कैब ड्राइवर को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि, बच्चे की मां का आरोप है कि उन्हें एफआईआर दर्ज कराने में दो दिनों तक परेशान होना पड़ा। स्कूल के मैनेजमेंट ने भी उनकी शिकायत पर किसी तरह का नोटिस नहीं लिया है। घटना रांची के बीआईटी मेसरा ओपी क्षेत्र का है। बताया जाता है कि इस थाना क्षेत्र में स्पेक्ट्रम ग्लोबल स्कूल में नर्सरी में पढ़ाई करने वाले बच्चे ने घर के लोगों को स्कूल के कैब ड्राइवर की गंदी हरकत के बारे में जानकारी दी। उसकी मां ने स्कूल के प्रिंसिपल से इसकी शिकायत की, लेकिन उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया। इसके बाद वह बीआईटी मेसरा ओपी में शिकायत दर्ज कराने पहुंची। बच्चे की मां का कहना है कि यहां भी उन्हें दो दिनों तक दौड़ लगानी पड़ी। ओपी में कई बार उनके बच्चे से बयान लिया गया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, लेकिन स्कूल मैनेजमेंट की लापरवाही और अपराध को संरक्षण देने के आरोप पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने स्कूल मैनेजमेंट को बचाने की कोशिश की है। झारखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य उज्ज्वल प्रकाश तिवारी ने कहा कि यह घटना आयोग के संज्ञान में आई है। इस मामले में आयोग की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके पहले, रांची में इसी महीने एक स्कूल की नाबालिग छात्राओं से सरेआम छेड़खानी का वीडियो वायरल होने के बाद सीएम हेमंत सोरेन ने पुलिस को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी फिरोज को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इस मामले में लापरवाही के आरोप में वरीय पुलिस अफसरों के आदेश पर अब तक छह पुलिसकर्मी सस्पेंड किए जा चुके हैं।  

रियल एस्टेट सेक्टर में पीई निवेश 32 प्रतिशत बढ़कर 4.2 अरब डॉलर रहा

मुंबई. भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी (पीई) निवेश 2024 में सालाना आधार पर 32 प्रतिशत बढ़कर 4.2 अरब डॉलर हो गया है। इसकी वजह वेयरहाउसिंग सेक्टर में मांग मजबूत होना है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि 2024 में पीई निवेश हासिल करने में वेयरहाउसिंग सेक्टर सबसे आगे रहा, जिसकी कुल निवेश में 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। इसके बाद कुल निवेश में रेजिडेंशियल सेक्टर की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत और ऑफिस सेक्टर की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में बताया गया कि 2024 में रेजिडेंशियल सेक्टर में निजी इक्विटी निवेश दोगुने से अधिक बढ़ा है। इस दौरान पीई निवेश में 104 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो इस वर्ष 1.2 अरब डॉलर हो गया, जो इस क्षेत्र में निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि निवेशकों के फोकस और सेक्टर की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। पीई निवेश में वेयरहाउसिंग सेक्टर ने ऑफिस सेक्टर को पीछे छोड़ दिया, जिसकी 2017 से पीई निवेश में उच्चतम हिस्सेदारी थी, जो भारतीय रियल एस्टेट बाजार में वेयरहाउसिंग के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। मुंबई की कुल पीई निवेश में हिस्सेदारी 50 प्रतिशत रही है। इसकी वजह वेयरहाउसिंग में निवेश बढ़ना है। 2024 में देश की आर्थिक राजधानी में 2 अरब डॉलर का पीई निवेश आया है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि 2024 में मुंबई में आये कुल पीई निवेश में से 74 प्रतिशत वेयरहाउसिंग सेक्टर में आया है। इसकी वैल्यू 1.5 अरब डॉलर रही है। वहीं, शहर में रेजिडेंशियल सेक्टर में 406 मिलियन डॉलर का पीई निवेश हुआ है। 2024 में बेंगलुरु को कुल 833 मिलियन डॉलर का पीई निवेश प्राप्त हुआ। इनमें से लगभग 52 प्रतिशत या 430 मिलियन डॉलर निवेश ऑफिस सेक्टर में आया है।, जबकि शेष 48 प्रतिशत या 403 मिलियन डॉलर का निवेश रेजिडेंशियल सेक्टर में आया है। नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, “भारत में पिछले एक दशक में निवेश में बढ़त हुई है। इसकी वजह आर्थिक स्थिरता और लगातार हो रही ग्रोथ है। ई-कॉमर्स और थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स में वृद्धि से वेयरहाउसिंग सेक्टर में तेजी है। वहीं, बढ़ती हुई कंज्यूमर मांग का फायदा रेजिडेंशियल सेक्टर को मिल रहा है।”

नया साल शुरू होते ही आम उपभोक्ताओं की जेब पर और भार बढ़ने वाला, चाय से साबुन तक सब होगा महंगा

नई दिल्ली नया साल शुरू होते ही आम उपभोक्ताओं की जेब पर और भार बढ़ने वाला है। देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियां, जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर, डाबर, गोदरेज कंज्यूमर, पारले प्रोडक्ट्स, नेस्ले, और अडानी विल्मर, अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। उत्पादन लागत और कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी का असर अब चाय पत्ती, साबुन, तेल और क्रीम जैसे रोजमर्रा के उत्पादों पर साफ दिखाई देगा। सितंबर 2024 में खाद्य तेल आयात पर ड्यूटी में 22% की वृद्धि के साथ ही पिछले एक साल में इसकी लागत में 40% तक का इजाफा हुआ है। इसी तरह, चीनी, गेहूं के आटे और कॉफी के उत्पादन पर भी महंगाई का असर देखा गया है। पारले और डाबर जैसे ब्रांड्स ने बढ़ाई कीमतें पारले प्रोडक्ट्स के वाइस प्रेसिडेंट मयंक शाह ने पुष्टि की है कि कंपनी अपने उत्पादों की नई कीमतों के साथ पैकेजिंग तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी उपभोक्ताओं की मांग को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगी। वहीं, डाबर ने हेल्थकेयर और ओरल केयर उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं, जबकि नेस्ले ने अपने कॉफी प्रोडक्ट्स में बढ़ोतरी की है। ग्रामीण और शहरी बाजारों पर असर रिटेल डेटा के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में बढ़ती मांग ने अक्टूबर 2024 में एफएमसीजी सेक्टर को 4.3% की वार्षिक वृद्धि दी थी, लेकिन नवंबर में बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। कंपनियों को उम्मीद है कि शहरी उपभोक्ता इन बढ़ी कीमतों को वहन कर पाएंगे।

स्टार्टअप फर्म CFS ने कहा कि 400 मेगावाट बिजली ‘नकली सूर्य’ से मिलेगी, अमेरिका में 2030 तक ग्रिड से जोड़ने का प्लान, समझें

वॉशिंगटन  दुनिया के कई देश आज के समय ‘नकली सूर्य’ बनाने में लगे हैं। अगर सब ठीक योजना के अनुसार हुआ तो वर्जीनिया 2030 के शुरुआती दशक तक दुनिया का पहला ग्रिड-स्केल न्यूक्लियर फ्यूजन पावर प्लांट स्थापित करेगा। यह संयंत्र भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा को उपयोग में लाकर बिजली उत्पादन करेगा। मंगलवार को स्टार्टअप कॉमनवेल्थ फ्यूजन सिस्टम्स (CFS) ने इसकी घोषणा की। CFS सबसे बड़ी और सबसे चर्चित न्यूक्लियर फ्यूजन कंपनियों में से एक है। यह एक फैसिलिटी बनाने में अरबों डॉलर का निवेश करेगी। चालू होने पर प्लांट ग्रिड के साथ जोड़ने में सक्षम होगा और 400 मेगावाट का उत्पादन करेगा। कंपनी के सीईओ बॉब मुमगार्ड के मुताबिक यह लगभग 150,000 घरों को बिजली देने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा, ‘यह पहली बार होगा जब दुनिया में ग्रिड पैमाने पर फ्यूजन पावर उपलब्ध कराई जाएगी।’ वर्जीनिया के गवर्नर ग्लेन यंगकिन ने घोषणा का स्वागत करते हुए इसे वर्जीनिया और पूरी दुनिया के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। कैसे बनती है ऊर्जा यह संयंत्र परमाणु संलयन के व्यावसायीकरण की खोज में एक नए चरण का प्रतिनिधित्व करेगा। न्यूक्लियर फ्यूजन के जरिए ही हमारे सूर्य की तरह दूसरे तारों को ताकत मिलती है। लेकिन इस दिशा में अभी भी रास्ता आसान नहीं है। दुनिया को एक स्वच्छ और प्रचुर ऊर्जा स्रोत की सख्त जरूरत है जो जीवाश्म ईंधन की जगह ले सके। न्यूक्लियर फ्यूजन की टेक्नोलॉजी ऐसा ही वादा करती है। इसमें परमाणु कणों से फ्यूजन के जरिए ऊर्जा पैदा की जाती है। इसमें हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए टोकामैक नाम की डोनट के आकार वाली मशीन का इस्तेमाल होता है। क्या होता है फायदा संलयन ऊर्जा लगभग असीमित है, यह पर्यावरण को गर्म नहीं करती और वर्तमान में इस्तेमाल होने वाली विखंडन तकनीक की तरह रेडियोएक्टिव कचरा भी नहीं छोड़ता है। हालांकि, शोध परियोजनाओं से वाणिज्यिक इस्तेमाल तक इसे लाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। CFS ने कहा है कि संलयन में रातों-रात कुछ नहीं होता। 2018 में MIT से अलग होकर स्थापित इस स्टार्टअप ने अब तक 2 अरब डॉलर से ज्यादा जुटाए हैं। उनका दावा है कि वे तेजी से प्रगति कर रहे हैं।

कानपुर सेंट्रल स्टेशन से लेकर ट्रेनों के प्लेटफॉर्म तक हर जगह महाकुंभ की झलक दिखेगी

 कानपुर  महाकुंभ-2025 को दिव्य-भव्य बनाने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। कानपुर सेंट्रल स्टेशन से लेकर ट्रेनों के प्लेटफॉर्म तक हर जगह महाकुंभ की झलक दिखेगी। जैकेट पहने कर्मचारी क्यूआर कोड स्कैन कराकर महाकुंभ-2025 का एप डाउनलोड कराएंगे। हर प्लेटफॉर्म पर ये कर्मचारी तैनात रहेंगे। महाकुंभ की महत्ता बताती व्यवस्थाओं सुविधाओं के स्लोगन भगवा होंगे। शिवा अवस्थी, कानपुर। केंद्र व प्रदेश सरकार महाकुंभ-2025 को दिव्य-भव्य केवल स्लोगन तक ही नहीं, हकीकत में दिखाएगी। सेंट्रल स्टेशन, ट्रेनों से प्लेटफार्मों पर जैकेट पहने कर्मियों के माध्यम से दिव्य-भव्य महाकुंभ की झलक नजर आएगी। जैकेट पहने कर्मी क्यूआर कोड स्कैन करा महाकुंभ-2025 का एप डाउनलोड कराएंगे। इनकी जैकेट से ही क्यूआर कोड स्कैन करते ही एप डाउनलोड की सुविधा आपके मोबाइल फोन पर मिलेगी। हर प्लेटफार्म में ये कर्मचारी तैनात रहेंगे। महाकुंभ की महत्ता बताती व्यवस्थाओं, सुविधाओं के स्लोगन भगवा होंगे। कानपुर से बुंदेलखंड, आसपास जिलों तक प्लेटफार्म, प्रतीक्षालय, वीआइपी लाउंज, टिकट वेंडिंग मशीनें, कियास्क सजेंगे। ट्रेनों की आवाजाही में उद्घोषणा भी महाकुंभ के रंग में रंगी होगी। महाकुंभ की शुरुआत जनवरी से होनी है, लेकिन कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर अभी से सब कुछ महाकुंभ मय दिखने लगा है। आटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम) महाकुंभ-2025 का स्वागत करने लगे हैं। अब प्लेटफार्मों, उद्घोषणा, प्रतीक्षालय, वीआइपी लाउंज में इंतजाम शुरू हो गए हैं। कैंट छोर पर प्लेटफार्म संख्या एक और सिटी साइड में प्लेटफार्म संख्या 10 के प्रवेश द्वारों पर भी महाकुंभ आस्था की हिलोरे लेगा। हर आने-जाने वाले श्रद्धालु, विदेशी पर्यटकों की अगवानी होगी। रिंग रेल सेवा वाली ट्रेनों के साथ ही विशेष गाड़ियों में महाकुंभ-2025 से संबंधित चित्रकारी संगम तट का अहसास कराएगी। प्लेटफार्मों पर पहुंचते ही मोबाइल रिजर्व टिकट सिस्टम से तत्काल टिकट मिलेंगे। इसमें मल्टी एमयूटीएस भी महाकुंभ के रंग में दिखाई पड़ेंगे। बुकिंग आफिस से लेकर प्लेटफार्मों तक मिलने वाली ये सुविधा हर कदम आकर्षण का केंद्र रहेगी। अंगुली से छूते ही स्क्रीन बताएगी सब जानकारियां महाकुंभ के दौरान सेंट्रल स्टेशन समेत सभी स्टेशनों पर भगवा कियास्क लगाए जाएंगे। इनमें टच स्क्रीन होगी। इस स्क्रीन पर अंगुली से छूते ही ब्योरा आ जाएगा। इसमें ट्रेनों, प्लेटफार्म संख्या, आने व जाने के समय से लेकर रेलवे की महाकुंभ से संबंधित और जानकारियां मिल सकेंगी। यहां भी महाकुंभ की झलक     प्लेटफार्म संख्या एक पर यात्री सुविधा केंद्र में आठ-आठ घंटे की ड्यूटी पर 24 घंटा कर्मी बैठेंगे। यहां महाकुंभ से जुड़े स्लोगन व बैनर होंगे।     स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से प्रयागराज के संगम तट की झलक मिलेगी।     सभी छोटे-बड़े रेलवे स्टेशनों पर श्रद्धालुओं के स्वागत में महाकुंभ के बैनर लगेंगे।     हरे, लाल, पीले व नीले रंगों से महाकुंभ के क्षेत्रवार यात्री व आश्रय स्थल पता चलेंगे। कानपुर सेंट्रल स्टेशन के निदेशक, आशुतोष सिंह ने बताया     महाकुंभ-2025 के लिए मुख्यालय से मिले निर्देश के आधार पर व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं। प्लेटफार्मों से लेकर हर जगह महाकुंभ की झलक दिखेगी व श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के इंतजाम किए जा रहे हैं। सहायक वाणिज्य प्रबंधक कानपुर सेंट्रल, संतोष कुमार त्रिपाठी ने बताया     सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही पर प्लेटफार्म से लेकर कैंट व सिटी साइड के सर्कुलेटिंग एरिया तक महाकुंभ के मद्देनजर इंतजाम किए जा रहे हैं। यात्रियों की सहूलियत के लिए महाकुंभ-2025 के रंग में सब कुछ रंगा दिखेगा, जिससे उन्हें कोई सुविधा पाने के लिए भटकना न पड़े।  

राष्ट्रीय बाल रंग में अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता का सहेजे विभिन्न प्रांतों के बच्चे यहां पहुंचते

भोपाल विद्यालयीन छात्र-छात्राओं में सृजनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के मकसद से 3 दिवसीय राष्ट्रीय बाल रंग की शुरूआत 20 दिसम्बर से भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित इंदिरा मानव संग्रहालय में हो रही है। स्कूल शिक्षा विभाग का राष्ट्रीय बाल रंग स्कूली बच्चों की सृजनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित कर अभिव्यक्ति के विविध अवसर प्रदान करता है। यह महोत्सव भारत की शाश्वत संस्कृति का संदेश वाहक है। अनेकता में एकता, भारतीय संस्कृति की विशेषता है। अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता का सहेजे विभिन्न प्रांतों के बच्चे यहां पहुंचते हैं। 20 दिसम्बर को बाल रंग में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं प्रात: 10 बजे से शुरू होंगी। बालरंग समारोह का शुभारंभ स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह करेंगे। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में सांस्कृतिक, साहित्यिक, निबंध लेखन, चित्रकला और केलीग्राफी प्रतियोगिताएं मुख्य रूप से आयोजित होंगी। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 9 संभागों के करीब एक हजार बच्चे विभिन्न प्रतियोगिताओं में सहभागिता करेंगे। राष्ट्रीय बाल रंग 21 और 22 दिसम्बर को देश के 17 राज्यों सहित 5 केन्द्र शासित प्रदेश के 15 हजार बच्चे विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। राष्ट्रीय बाल रंग में लोक नृत्य प्रतियोगिता होगी। इनमें हिमाचल प्रदेश, बिहार, पंजाब, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मध्यप्रदेश, सिक्किम, गोवा, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, तेलंगाना, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली, झारखंड, दिल्ली, छत्तीसगढ़ एवं पुडुचेरी शामिल हैं। स्कॉउट केम्प इंदिरा मानव संग्रहालय में बच्चों में साहसिक एवं अनुशासन की भावना को मजबूत करने के लिये स्काउट केम्प भी लगाया जायेगा। इनमें बच्चे जंगल केम्प, रिवर क्रॉसिंग, मंकी ब्रिज, कमांडो ब्रिज, वॉच टॉवर, रॉक क्लाईम्बिंग और वॉल रेपलिंग जैसी गतिविधियों में अपना प्रदर्शन करेंगे। विजन-2047 पर केन्द्रित सजीव प्रदशर्नी बाल रंग के दौरान 20 से 22 दिसम्बर तक विजन-2047 थीम के अंतर्गत बच्चों द्वारा निर्मित सामग्री का प्रदर्शन किया जायेगा। प्रदर्शनी में देश की विविधता वाली संस्कृति देखने का अवसर भी मिलेगा। इनमें जीवन कौशल, एक भारत श्रेष्ठ भारत, खेलो इंडिया, अन्न खाद्यान्न, व्यावसायिक शिक्षा से रोजगार, अंतरिक्ष विज्ञान, जलवायु परिवर्तन विषय को प्रमुख रूप से शामिल किया गया है। फूड जोन बाल रंग में विभिन्न राज्यों के व्यंजनों के स्टॉल भी लगाये जायेंगे। इसके साथ ही परिसर में हस्तशिल्प पर केन्द्रित प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी। प्रतियोगिताएं बाल रंग में तात्कालिक भाषण, लोक गीत, शास्त्रीय नृत्य, सुगम संगीत, सामुहिक लोक नृत्य, दिव्यांगजनों की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं, वेद पाठ, नृत्य नाटिका, योग जैसी अनेक प्रतियोगिताएं होंगी। बाल रंग में 20, 21 और 22 दिसम्बर को प्रात: 9 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजन होंगे।  

200 वंदे भारत स्लीपर रेक के निर्माण का काम भी प्रौद्योगिकी भागीदारों को सौंपा गया : रेल मंत्री वैष्णव

नई दिल्ली वर्तमान में देश में लंबी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए 10 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का निर्माण कार्य चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पहला प्रोटोटाइप स्लीपर वंदे भारत निर्मित हो चुका है और इसका फील्ड ट्रायल किया जाएगा। 136 वंदे भारत ट्रेन सेवाएं चालू रेल मंत्री ने लोकसभा में एक वक्तव्य में कहा कि इसके अलावा 200 वंदे भारत स्लीपर रेक के निर्माण का काम भी प्रौद्योगिकी भागीदारों को सौंपा गया है। ट्रेन के रोलआउट की समय-सीमा परीक्षणों के सफल समापन पर निर्भर है। 2 दिसंबर तक, देशभर में छोटी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज विद्युतीकृत नेटवर्क पर 136 वंदे भारत ट्रेन सेवाएं चालू हैं। एलएचबी कोच का उत्पादन लगातार बढ़ा रेल मंत्री ने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि भारतीय रेलवे की उत्पादन इकाइयां अप्रैल 2018 से केवल एलएचबी कोच का उत्पादन कर रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में एलएचबी कोच का उत्पादन लगातार बढ़ा है। 2014-24 के दौरान निर्मित एलएचबी कोच की संख्या 2004-14 के दौरान निर्मित (2,337) संख्या से 16 गुना (36,933) अधिक है। भारतीय रेलवे (आईआर) ने एलएचबी कोचों की भरमार कर दी है जो तकनीकी रूप से बेहतर हैं और इनमें एंटी क्लाइम्बिंग व्यवस्था, विफलता संकेत प्रणाली के साथ एयर सस्पेंशन और कम संक्षारक शेल जैसी विशेषताएं हैं। दिव्यांगजनों और कम गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए सुगमता सुनिश्चित उन्होंने कहा कि “सुगम्य भारत मिशन” (सुलभ भारत अभियान) के हिस्से के रूप में, भारतीय रेलवे दिव्यांगजनों और कम गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए सुगमता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के दिशा-निर्देशों के तहत, रैंप, सुलभ पार्किंग, ब्रेल और स्पर्शनीय संकेत, कम ऊंचाई वाले काउंटर और लिफ्ट व एस्केलेटर जैसी व्यापक सुविधाएं प्रदान की गई हैं। नवंबर 2024 तक, भारतीय रेलवे ने 399 स्टेशनों पर 1,512 एस्केलेटर और 609 स्टेशनों पर 1,607 लिफ्टें स्थापित की थीं, जो पिछले दशक की तुलना में क्रमशः 9 और 14 गुना की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा, अधिकांश मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों में चौड़े प्रवेश द्वार, सुलभ शौचालय और व्हीलचेयर पार्किंग वाले समर्पित कोच उपलब्ध हैं, जबकि वंदे भारत ट्रेनें दिव्यांगजनों के लिए स्वचालित दरवाजे, निर्धारित स्थान और ब्रेल साइनेज जैसी सुविधाओं के साथ बेहतर सुगमता प्रदान करती हैं।  

मप्र में 23 दिसम्‍बर से पड़ेगी कड़ाके की सर्दी, भोपाल-उज्जैन में गिरेगा पारा, ग्वालियर-चंबल में गिरेगा पारा

भोपाल  मध्य प्रदेश में बुधवार से ठंड के तेवर थोड़े नरम पड़े है। राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के कई जिलों के न्यूनतम तापमान में से दो से तीन डिग्री बढ़ोतरी देखने को मिली है। लेकिन दिसम्‍बर के अंतिम सप्‍ताह फिर से पारा गिरने और ठंड बढ़ने के आसार हैं। मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दूसरा दौर 23 से 25 दिसंबर के बीच आएगा। यह जनवरी 2025 तक रहेगा। इससे पहले अगले 4-5 दिन तक प्रदेश के उत्तरी हिस्से यानी ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में कोहरा रहेगा। भोपाल, उज्जैन, जबलपुर में रात का पारा 8-10 डिग्री सेल्सियस से नीचे ही रहेगा। मौसम विभाग ने गुरुवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में कोहरा छाने का अनुमान जताया है। बाकी जगहों पर मौसम साफ रहेगा। दिन में तेज धूप हो सकती है। इससे पहले मंगलवार-बुधवार की रात प्रदेश में कड़ाके की ठंड से थोड़ी राहत मिली। रात के पारे में 2 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, कई शहर ऐसे हैं, जहां पारा 5 डिग्री सेल्सियस से कम ही रहा। पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां पारा 2.4 डिग्री दर्ज किया गया। मंडला में 3.5 डिग्री, उमरिया में 3.8 डिग्री, नौगांव में 4 डिग्री, टीकमगढ़ में 5.3 डिग्री, रीवा में 5.4 डिग्री और राजगढ़ में 5.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। बड़े शहरों की बात करें तो जबलपुर में 5.2 डिग्री, ग्वालियर में 5.4 डिग्री, भोपाल में 6.2 डिग्री, उज्जैन में 10 डिग्री और इंदौर में 11.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। हालांकि, बुधवार को दिन के तापमान में गिरावट देखने को मिली। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन समेत कई शहरों में पारा 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया। खंडवा और खरगोन जैसे शहरों में तापमान 30 डिग्री के पार दर्ज किया गया है। प्रदेश में अधिकतम तापमान खंडवा का दर्ज किया गया, जो 31.1 डिग्री रहा। इसके अलावा खरगोन में 30.2 डिग्री, नर्मदापुरम में 29.9 डिग्री, धार 29.5 डिग्री, भोपाल में 26 डिग्री और इंदौर में 28.4 डिग्री दर्ज किया गया। इसलिए बदला मौसम मौसम वैज्ञानिक वीएस यादव ने कहा– शीतलहर और कोल्ड डे यानी ठंडे दिन की कंडीशन खत्म हो गई है। चार से पांच दिन तक टेम्प्रेचर में बढ़ोतरी रहेगी। जिससे ठंड का असर कम होगा। उत्तर भारत में एक्टिव वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के गुजरने के बाद बर्फबारी होगी। उत्तरी हवाएं फिर चलने लगेंगी। इसके बाद प्रदेश में कड़ाके की ठंड का दौर दोबारा आएगा। दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी ठंड इस बार दिसंबर महीने में ही ठंड रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। स्थिति यह रही कि पूरे प्रदेश में जनवरी से भी ठंडा दिसंबर रहा। भोपाल समेत कई शहरों में ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 9 दिन शीतलहर चली। बुधवार से शीतलहर का दौर थमा। भोपाल में दिसंबर की सर्दी ने 58 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदल दी गई जबकि वन विहार नेशनल पार्क में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए हीटर लगा दिए गए। मंदिरों में भगवान को भी ठंड से बचाने के लिए जतन किए जा रहे हैं। यहां देखें तापमान पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 2.4 डिग्री दर्ज किया गया. कल्याणपुर (शहडोल) में 3.1 डिग्री, मंडला में 3.5 डिग्री, उमरिया में 3.8 डिग्री और नौगांव (छतरपुर) में 4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. सबसे अधिक तापमान खंडवा में 31.1 डिग्री दर्ज किया गया. यह प्रदेश में सबसे अधिक रहा. इसके अलावा खरगोन में 30.2 डिग्री, नर्मदापुरम में 29.9 डिग्री, धार में 29.5 डिग्री और इंदौर में 28.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से कड़ाके की ठंड और सर्द हवाओं से राहत मिलेगी, लेकिन इसके जाते ही पारा फिर गिरेगा और ठंड बढ़ने की संभावना है. पहले ही पखवाड़े में तेज सर्दी सीनियर वैज्ञानिक डॉ. वेदप्रकाश सिंह ने बताया, ‘उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही हो रहा है। इस कारण दिसंबर के पहले ही पखवाड़े में तेज सर्दी का दौर शुरू हो गया। अमूमन दिसंबर के दूसरे सप्ताह में तेज ठंड पड़ती है। पिछले 10 साल से यही ट्रेंड रहा है।’ बता दें कि नवंबर में भी सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। भोपाल में तो 36 साल का रिकॉर्ड टूटा है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में भी पारा सामान्य से 7 डिग्री तक नीचे रहा। भोपाल में 58 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुकी ठंड भोपाल में दिसंबर में दिन-रात में ठंड और बारिश का ट्रेंड रहा है। 10 में से पिछले 5 साल से भोपाल दिसंबर में भीग रहा है। आधा से पौन इंच तक बारिश हुई है। हालांकि, इस बार बारिश नहीं हुई लेकिन लगातार सात दिन तक शीतलहर और कोल्ड डे जैसी स्थिति रही। वहीं, रात के पारे में जबरदस्त गिरावट हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, दिसंबर में ठंड की बात करें तो 11 दिसंबर 1966 की रात में पारा 3.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। यह अब तक का ओवरऑल रिकॉर्ड है। 3 साल पहले 2021 में पारा 3.4 डिग्री पहुंच चुका है लेकिन 15-16 दिसंबर की रात में यह 3.3 डिग्री दर्ज किया गया यानी पिछले 10 साल में तो पारा सबसे कम रहा ही, साथ में ओवरऑल रिकॉर्ड के करीब भी है।

प्रयागराज महाकुंभ जाने के लिए कंफर्म टिकट का हो गया इंतजाम! रेलवे ने जारी की स्पेशल ट्रेनों की लिस्ट

भोपाल मध्य प्रदेश के श्रद्धालुओं को कुंभ मेले में जाने की राह आसान करने के लिए रेलवे विभाग द्वारा विशेष ट्रेनों का परिचालन किया जाएगा, जिसकी वजह से श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम हो सके. इस संबंध में रेलवे विभाग द्वारा स्पेशल ट्रेन की सूची भी जारी की गई है. पश्चिम रेल मंडल रतलाम के डीआरएम ने बताया कि जनवरी 2025 में प्रयागराज में आरंभ हो रहे महाकुंभ मेला के दौरान यात्रियों की यात्रा सुगम हो, इसका ध्यान रखते हुए पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के डॉ. अम्बेडकर नगर से बलिया के मध्य दोनों दिशाओं में  बलिया डॉ. अम्बेडकर नगर-बलिया- कुंभ स्पेशल ट्रेन का परिचालन किया जाएगा. उज्जैन होते हुए पहुंचेगी इंदौर यह स्पेशल ट्रेन दोनों दिशाओं में चार-चार फेरे चलेगी. उन्होंने बताया कि गाड़ी संख्या 09371 डॉ. अम्बेडकर नगर-बलिया-कुंभ स्पेशल 22 एवं 25 जनवरी 2025 तथा 08 एवं 22 फरवरी 2025 को डॉ. अम्बेडकर नगर से चलकर रतलाम मंडल के इंदौर , उज्जैन एवं शुजालपुर होते हुए अगले दिन बलिया पहुंचेगी.  इसी प्रकार वापसी में गाड़ी संख्‍या 09372 बलिया डॉ. अम्बेडकर नगर कुंभ स्पेशल 23 एवं 26 जनवरी तथा 09 एवं 23 फरवरी 2025 को  बलिया से चलकर रतलाम मंडल के उज्जैन होते हुए इंदौर पहुंचेगी. इन रेलवे स्टेशन से गुजरेगी ट्रेन पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल द्वारा चलाई जाने वाली स्पेशल ट्रेन दोनों दिशाओं में इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, संत हिरदाराम नगर, विदिशा, गंज बासौदा, बीना, ललितपुर, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, गोविंदपुरी, फतेहपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, चुनार, वाराणसी, जौनपुर, औड़िहार और ग़ाज़ीपुर सिटी स्टेशनों पर रुकेगी. इस ट्रेन में सेकंड एसी, थर्ड एसी, स्लीपर एवं जनरल सेकेंड क्लास कोच होंगे. ये है महाकुंभ स्पेशल ट्रेनों की पूरी लिस्ट 1. ट्रेन संख्‍या 09031/09032 उधना-बलिया महाकुंभ मेला स्पेशल (04 फेरे) ट्रेन संख्या 09031 उधना-बलिया महाकुंभ मेला स्पेशल उधना से सुबह 06:40 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 19:00 बजे बलिया पहुंचेगी. यह ट्रेन 17 जनवरी और 16 फरवरी, 2025 को चलेगी.  ट्रेन संख्या 09032 बलिया-उधना महाकुंभ मेला स्पेशल बलिया से 23:30 बजे प्रस्थान करेगी और तीसरे दिन 12:45 बजे उधना पहुंचेगी. यह ट्रेन 18 जनवरी और 17 फरवरी 2025 को चलेगी.  यह ट्रेन दोनों दिशाओं में भरूच, विश्वामित्री, गोधरा, दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन, शुजालपुर, संत हिरदाराम नगर, विदिशा, गंज बासौदा, बीना, ललितपुर, वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी, उरई, गोविंदपुरी, फ़तेहपुर, प्रयागराज, मिर्ज़ापुर, चुनार, वाराणसी, जौनपुर, औंड़िहार और ग़ाज़ीपुर सिटी स्टेशनों पर रुकेगी. ट्रेन संख्या 09031 का वडोदरा स्टेशन पर अतिरिक्त ठहराव होगा. इस ट्रेन में एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर क्लास और जनरल सेकेंड क्लास कोच होंगे.  2. ट्रेन संख्‍या 09019/09020 वलसाड-दानापुर महाकुंभ मेला स्पेशल (16 फेरे) ट्रेन संख्‍या 09019 वलसाड-दानापुर महाकुंभ मेला स्पेशल वलसाड से 08:40 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 18:00 बजे दानापुर पहुंचेगी. यह ट्रेन 08, 17, 21, 25 जनवरी और 08, 15, 19, 26 फरवरी, 2025 को चलेगी.  ट्रेन संख्‍या 09020 दानापुर-वलसाड महाकुंभ मेला स्पेशल दानापुर से 23:30 बजे प्रस्थान करेगी और तीसरे दिन 09:30 बजे वलसाड पहुंचेगी. यह ट्रेन 09, 18, 22, 26 जनवरी और 09, 16, 20, 27 फरवरी, 2025 को चलेगी. यह ट्रेन दोनों दिशाओं में नवसारी, भेस्तान, नंदुरबार, भुसावल, खंडवा, इटारसी, जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्ज़ापुर, चुनार, पं. दीन दयाल उपाध्याय, बक्सर और आरा स्टेशनों पर रुकेगी. इस ट्रेन में एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर क्लास और जनरल सेकेंड क्लास कोच होंगे.  3. ट्रेन संख्‍या 09021/09022 वापी-गया महाकुंभ मेला स्पेशल (20 फेरे) ट्रेन संख्या 09021 वापी-गया महाकुंभ मेला स्पेशल वापी से 08:20 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 19:00 बजे गया पहुंचेगी. यह ट्रेन 09, 16, 18, 20, 22, 24 जनवरी और 07, 14, 18, 22 फरवरी, 2025 को चलेगी.  ट्रेन संख्या 09022 गया-वापी महाकुंभ मेला स्पेशल गया से 22:00 बजे प्रस्थान करेगी और तीसरे दिन 10:00 बजे वापी पहुंचेगी. यह ट्रेन 10, 17, 19, 21, 23, 25 जनवरी और 08, 15, 19, 23 फरवरी, 2025 को चलेगी. यह ट्रेन दोनों दिशाओं में वलसाड, नवसारी, भेस्तान, नंदुरबार, भुसावल, खंडवा, इटारसी, जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्ज़ापुर, चुनार, पं. दीन दयाल उपाध्याय, भभुआ रोड, सासाराम, डेहरी ऑन सोन और अनुग्रह नारायण रोड स्टेशनों पर रुकेगी. इस ट्रेन में एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर क्लास और जनरल सेकेंड क्लास कोच होंगे.  4. ट्रेन संख्‍या 09029/09030 विश्वामित्री-बलिया महाकुंभ मेला स्पेशल (02 फेरे) ट्रेन संख्या 09029 विश्वामित्री-बलिया महाकुंभ मेला स्पेशल 17 फरवरी, 2025 को विश्वामित्री से 08:35 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 19:00 बजे बलिया पहुंचेगी.  ट्रेन संख्या 09030 बलिया-विश्वामित्री महाकुंभ मेला स्पेशल 18 फरवरी, 2025 को 23:30 बजे बलिया से प्रस्थान करेगी और तीसरे दिन 10:05 बजे विश्वामित्री पहुंचेगी. यह ट्रेन दोनों दिशाओं में गोधरा, दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन, शुजालपुर, संत हिरदाराम नगर, विदिशा, गंज बासौदा, बीना, ललितपुर, वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी, उरई, गोविंदपुरी, फ़तेहपुर, प्रयागराज, मिर्ज़ापुर, चुनार, वाराणसी, जौनपुर, औंड़िहार और ग़ाज़ीपुर सिटी स्टेशनों पर रुकेगी. ट्रेन संख्या 09029 का वडोदरा स्टेशन पर अतिरिक्त ठहराव होगा. इस ट्रेन में एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर क्लास और जनरल सेकेंड क्लास कोच होंगे.    5. ट्रेन संख्‍या 09413/09414 साबरमती-बनारस महाकुंभ मेला स्पेशल (10 फेरे) ट्रेन संख्या 09413 साबरमती-बनारस महाकुंभ मेला स्पेशल साबरमती से 11:00 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 14:45 बजे बनारस पहुँचेगी. यह ट्रेन 16 जनवरी और 05, 09, 14, 18 फरवरी, 2025 को चलेगी.  ट्रेन संख्या 09414 बनारस-साबरमती महाकुंभ मेला स्पेशल बनारस से 19:30 बजे प्रस्थान करेगी और तीसरे दिन 00:30 बजे साबरमती पहुँचेगी. यह ट्रेन 17 जनवरी और 06, 10, 15, 19 फरवरी 2025 को चलेगी.  यह ट्रेन दोनों दिशाओं में महेसाणा, पालनपुर, आबू रोड, पिंडवाड़ा, फालना, रानी, मारवाड़, ब्यावर, अजमेर, किशनगढ़, जयपुर, बांदीकुई, भरतपुर, आगरा फोर्ट, टूंडला, इटावा, गोविंदपुरी, फतेहपुर, प्रयागराज और ज्ञानपुर रोड स्टेशनों पर रुकेगी. इस ट्रेन में एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर क्लास और जनरल सेकेंड क्लास कोच होंगे. 6. ट्रेन संख्‍या 09421/09422 साबरमती-बनारस (वाया गांधीनगर केपिटल) महाकुंभ मेला स्पेशल [06 फेरे] ट्रेन संख्या 09421 साबरमती-बनारस महाकुंभ मेला स्पेशल साबरमती से 10:25 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 14:45 बजे बनारस पहुँचेगी. यह ट्रेन 19, 23 और 26 जनवरी, 2025 को चलेगी.  ट्रेन संख्या 09422 बनारस-साबरमती महाकुंभ मेला स्पेशल बनारस से 19:30 बजे प्रस्थान करेगी और तीसरे दिन 01:25 बजे साबरमती पहुँचेगी. यह ट्रेन 20, 24 और 27 जनवरी 2025 को चलेगी.  यह ट्रेन दोनों दिशाओं में गांधीनगर केपिटल, महेसाणा, पालनपुर, आबू रोड, पिंडवाड़ा, फालना, रानी, मारवाड़, ब्यावर, … Read more

प्रधानमंत्री मोदी जाएंगे कुवैत यात्रा पर, 43 साल बाद किसी PM का होगा दौरा

 नईदिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21-22 दिसंबर को कुवैत के ऐतिहासिक दौरे पर जाएंगे. 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी. पीएम मोदी की यह यात्रा कुवैत के अमीर शेख मेशल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह के निमंत्रण पर हो रही है. भारतीय समुदाय और कुवैत नेतृत्व से बातचीत करेंगे पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कुवैत दौरे में भारतीय समुदाय के लोगों से और वहां के टॉप नेतृत्व से बातचीत करेंगे. कुवैत में 10 लाख से अधिक प्रवासी भारतीय रहते हैं. देश की अर्थव्यवस्था में भारतीय समुदाय का सबसे बड़ा योगदान है. वैसे में उनके अधिकार पर भी पीएम मोदी बात करेंगे. कुवैत के विदेश मंत्री आए थे भारत उसके बाद कुवैत के विदेश मंत्री अबदुल्लाह अली अल-याहया ने दिसंबर के पहले हफ्ते में ही नई दिल्ली की यात्रा की थी। इस दौरे से यह संदेश देने की कोशिश है कि भारत ऊर्जा संसाधनों का अकूत भंडार रखने वाले इस देश के साथ अपने संबंधों को लेकर कितना गंभीर है। प्रधानमंत्री कुवैत में भारतीय समुदाय के लोगों से भी बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और कुवैत के बीच पारंपरिक रूप से घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, जिनकी जड़ें इतिहास में हैं और जो आर्थिक और लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर आधारित हैं। भारत कुवैत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है। भारतीय समुदाय कुवैत में सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। यह यात्रा भारत और कुवैत के बीच बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी। बता दें कि बीते दिनों कुवैत के विदेश मंत्री अब्दुल्ला अली अल-याह्या भारत दौरे पर आए थे। इस दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी। विदेश मंत्रालय की ओर से कुवैत के विदेश मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह यात्रा भारत और कुवैत के बीच बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करेगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) का एकमात्र देश है, जहां पीएम मोदी ने अभी तक दौरा नहीं किया है। कुवैत वर्तमान में जीसीसी का अध्यक्ष है। जीसीसी में कुवैत के अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन, सऊदी अरब, ओमान और कतर भी शामिल हैं। ज्ञात हो कि सितंबर में पीएम मोदी ने न्यूयॉर्क में यूएनजीए के 79वें सत्र के मौके पर कुवैत राज्य के क्राउन प्रिंस शेख सबा खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबा से मुलाकात की थी, जो दोनों नेताओं के बीच पहली मुलाकात थी। पीएम मोदी का दौरा क्यों है खास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कुवैत दौरा बेहद खास माना जा रहा है. कुवैत खाड़ी सहयोग परिषद का प्रमुख सदस्य है और फिलहाल जीसीसी की अध्यक्षता भी कर रहा है. वैसे में भारत का संबंध जीसीसी सदस्य देशों से बेहतर हो जाएगा. साथ ही कुवैत भारत के लिए कच्चे तेल और LPG का सबसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश है. 43 साल पहले इंदिरा गांधी ने किया था कुवैत का दौरा 43 साल पहले 1981 में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कुवैत का दौरा किया था. हालांकि 2009 में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी दौरा किया था.

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण सप्ताह पर स्कूली बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता आज

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के द्वारा 14 दिसम्बर से 21 दिसम्बर 2024 तक पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण सप्ताह मनाया जा रहा है। साथ ही बिजली बचाने को लेकर विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा भोपाल के चिनार पार्क में 20 दिसंबर को प्रातः 10 बजे से दोपहर 12:30 तक स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए “पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना” थीम पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इस प्रतियोगिता के माध्यम से स्कूली छात्र-छात्राएं ऊर्जा बचत और संरक्षण के महत्व को समझेंगे। साथ ही चित्रों के माध्यम से अपनी अभिरूचि व्यक्त कर सकेंगे। इस अवसर पर उत्कृष्ट चित्रकारी करने वाले छात्रों को पुरस्कृत किया जाएगा।  

इंदौर मेट्रो की बंगाली चौराहे से पलासिया तक अंडर ग्राउंड लाइन पर 1600 करोड़ रुपये की जरूरत

इंदौर  इंदौर मेट्रो का बंगाली चौराहे से पलासिया तक हिस्सा अंडर ग्राउंड करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए करीब 1600 करोड़ रुपये की जरूरत है। केंद्रीय आर्थिक कार्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार हमें इस संबंध में जो प्रस्ताव देगी, उस पर नियमानुसार विचार किया जाएगा। मंत्रालय की यह टीम पहली बार निरीक्षण के लिए इंदौर आई।  मंत्रालय के अन्य बहुपक्षीय संस्थाएं प्रभाग की अवर सचिव नीलिमा मिंज व सेक्शन ऑफिसर हिमांशु सिंह ने इंदौर मेट्रो डिपो व प्रायोरिटी कॉरिडोर के स्टेशन नंबर पांच व तीन का निरीक्षण किया। प्रायोरिटी कॉरिडोर के स्टेशनों का निरीक्षण वे इंदौर मेट्रो निर्माण कार्य की प्रगति से संतुष्ट दिखे। नेशनल डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) के सदस्यों ने भी मेट्रो के कास्टिंग यार्ड, सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर के सभी स्टेशनों का निरीक्षण किया। गौरतलब है कि मेट्रो के प्रथम चरण में 17 किलोमीटर हिस्से के लिए एनडीबी ने 1600 करोड़ रुपये लोन के रूप में देना तय किया है। इसमें से एनडीबी अभी तक लगभग 50 फीसद राशि दे चुकी है। ऐसे में एनडीबी के सदस्य यह आकलन कर रहे हैं कि मेट्रो को दी गई राशि का उपयोग किस तरह हुआ है। एनसीआर, ग्रेटर नोएडा में कुछ नहीं था, मेट्रो बनी तो विकास हुआ, ऐसा यहां भी होगा केंद्रीय आर्थिक कार्य मंत्रालय की अवर सचिव नीलिमा मिंज ने कहा कि जब एनसीआर में ग्रेटर नोएडा में मेट्रो चलाई गई थी तो उस समय वह क्षेत्र भी इंदौर के आज के सुपर कॉरिडोर की तरह हुआ करता था। मेट्रो बनने के बाद वहां विकास हुआ। ऐसे में इंदौर में सुपर कॉरिडोर आज भले आउटर एरिया है, लेकिन यहां पर कॉलेज, शैक्षणिक संस्थान आएंगे। रिक्त जमीन पर माल व अन्य निर्माण होंगे। यह भी भविष्य में रहवासी व व्यवसायिक हब के रूप में विकसित होगा। मंत्रालय के सेक्शन आफिसर हिमांशु सिंह ने बताया कि मेट्रो के लिए बजट की कोई कमी नहीं है। इंदौर में मेट्रो का निर्माण कार्य ठीक चल रहा है। हम पहली बार मेट्रो का भौतिक व वित्तीय निरीक्षण करने के लिए आए हैं। अभी तक मेट्रो का कार्य संतोषजनक है। मेट्रो की रिंग बनने के बाद होगा फायदे का सौदा सुपर कॉरिडोर पर मेट्रो के 5.9 किमी हिस्से पर फिलहाल कमर्शियल रन शुरू होना है। वहीं इसके बाद रेडिसन चौराहे तक 17 किलोमीटर हिस्से में कमर्शियल रन होगा। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक मेट्रो का अंडर ग्राउंड हिस्सा बनने क बाद जब मेट्रो की रिंग तैयार हो जाएगी तो इस पर काफी ज्यादा संख्या में यात्री सफर करेंगे। उसके बाद इंदौर मेट्रो फायदे में होगी। शुरुआती स्तर पर मेट्रो स्टेशन पर विज्ञापन व दुकानों की बिक्री कर मेट्रो की आय बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। यात्री किराए से मेट्रो को आय स्तर पर ज्यादा लाभ नहीं होगा।

अमेरिका-रूस के बाद चीन दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी परमाणु शक्ति, एक साल में जुटाए 100 हथियार

वॉशिंगटन मिडिल ईस्ट और यूरोप के कई देश फिलहाल जंग की मार झेल रहे हैं। बीते साल इजरायल ईरान और रूस यूक्रेन की जंग में दुनिया के कई देश उलझे रहे। इस दौरान पूरी दुनिया का ध्यान गाजा और यूक्रेन पर ही रहा। हालांकि इस बीच भी चीन अपनी चालबाजियों में जुटा रहा। अमेरिका में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल चीन की परमाणु शक्ति कई गुणा बढ़ गई है। यह रिपोर्ट बुधवार को सामने आई है जिसमें कई खुलासे और दावे किए गए हैं। पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन अपने परमाणु शक्ति बढ़ा रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने ताइवान के खिलाफ आक्रमकता बढ़ा दी है। वहीं पिछले एक साल में चीन ने रूस के साथ नजदीकियां भी बढ़ाई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मई तक चीन के पास लगभग 600 परमाणु हथियार थे। दावा किया गया है कि 2030 तक यह आंकड़ा 1,000 से भी ज्यादा होगा। चीन ने 2020 की तुलना में तीन गुना किया परमाणु भंडार अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की इस रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 2020 की तुलना में अपने परमाणु हथियारों का भंडार लगभग तीन गुना बढ़ाया है। यानी पिछले 4 साल में उसकी एटमी ताकत काफी बढ़ चुकी है। 18 दिसंबर को जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024 में चीन के परमाणु बमों की संख्या 600 से ज्यादा हो चुकी है। 2030 तक चीन के पास होंगे 1000 परमाणु बम रिपोर्ट के मुताबिक, चीन जिस स्पीड से अपने परमाणु भंडार को बढ़ाने में लगा है, उसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि 2030 तक उसके पास 1000 से ज्यादा परमाणु बम होंगे। इनमें से कई एटम बम को ड्रैगन पूरी तरह से तैनाती वाले मोड में रखेगा। अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारी के मुताबिक, चीन न सिर्फ एटमी हथियार बढ़ा रहा है, बल्कि इन्हें कई तरह से डेवलप कर रहा है। ड्रैगन इस वक्त कम क्षमता वाली सटीक स्ट्राइक मिसाइलों से लेकर ICBM तक की प्रणालियों पर काम कर रहा है। सालभर पहले चीन के पास थे 500 परमाणु बम पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल पहले यानी 2023 तक चीन के पास परमाणु बमों की संख्या 500 के आसपास थी। यानी बीते एक साल में उसने 100 न्यूक्लिकर हथियार बना लिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन प्लूटोनियम का उत्पादन करने के लिए अपने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टरों का इस्तेमाल कर सकता है। इतना ही नहीं, चीन की पीपुल्स रिपब्लिक आर्मी की बढ़ती ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसकी रेंज में अमेरिका के कई बड़े शहर हैं। चीन के लिए भ्रष्टाचार बना सबसे बड़ी चुनौती रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से परमाणु बम बना रहे चीन के लिए भ्रष्टाचार सबसे बड़ी चुनौती है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 2050 तक पीपुल्स आर्मी को दुनिया की सबसे बड़ी सेना बनाना चाहते हैं, लेकिन चीनी सरकार के साथ ही सेना में बढ़ते भ्रष्टाचार ने उनके लक्ष्य को पीछे धकेलने का काम किया है। चीन का आया जवाब इस रिपोर्ट पर चीन ने भी जवाब दिया है। चीन ने कहा है कि वह सेल्फ डिफेंस के लिए परमाणु रणनीति को अपनाता है। चीन ने हमेशा पहले आक्रमण ना करने की नीति का पालन किया है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी न्यूनतम स्तर पर अपनी परमाणु क्षमताओं को बनाए रखा है। चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंग्यू ने बुधवार को कहा कि पेंटागन की ऐसी रिपोर्ट कोल्ड वार की मानसिकता से भरी हुई हैं, जिसका चीन दृढ़ता से विरोध करता है। क्या प्लानिंग कर रहा चीन एक अमेरिकी अधिकारी ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि बीजिंग तकनीकी रूप से लैस परमाणु शक्ति विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। परमाणु हथियारों की अपेक्षित संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। अधिकारी ने कहा कि चीन अलग-अलग तरह के लक्ष्यों पर हमला करने, अधिक नुकसान करने और जवाबी हमलों के लिए अधिक विकल्प रखने में सक्षम होने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने कई मौकों पर चीन से अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में अधिक पारदर्शी होने की अपील की है।

डीओएम से देश में ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया

नईदिल्ली केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मानसून मिशन, मिशन मौसम और डीप ओशन मिशन (डीओएम) शुरू किए हैं। इनमें से डीओएम से देश में ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है। यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी है। डीप ओशन मिशन को भारत सरकार के ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए अहम परियोजना के रूप में देखा जा सकता है। वर्ष 2021 से डीप ओशन मिशन शुरू किया गया था पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में 7 सितंबर 2021 से डीप ओशन मिशन शुरू किया गया था। दरसल ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) में मछली पकड़ना और अन्य गतिविधियाँ शामिल हैं, जो देश के लिए बेहद फायदेमंद है। वहीं, डीओएम एक बहु-मंत्रालयी, बहु-विषयक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य गहरे समुद्र में रहने वाले और निर्जीव संसाधनों की खोज करना है ताकि ब्लू इकोनॉमी का समर्थन किया जा सके और महासागर संसाधनों का सतत दोहन किया जा सके। डीओएम के उद्देश्य गहरे समुद्र के संसाधनों की बेहतर समझ के लिए हैं, जिससे नीली अर्थव्यवस्था का विस्तार करने के प्रयासों में सहायता मिलेगी। डीओएम की गतिविधियाँ डीओएम की गतिविधियाँ ब्लू इकोनॉमी के घटकों, जैसे मत्स्य पालन, पर्यटन और समुद्री परिवहन, नवीकरणीय ऊर्जा, जलीय कृषि, समुद्र तल संसाधन अन्वेषण गतिविधियाँ और समुद्री जैव प्रौद्योगिकी में मदद करेंगी। डीओएम के तहत विकसित की गई प्रौद्योगिकियाँ महासागरों की खोज करने और संभवतः ऊर्जा, मीठे पानी और रणनीतिक खनिजों जैसे निर्जीव संसाधनों का दोहन करने में मदद करेंगी। मिशन के तहत विकसित की जाने वाली सलाह सामाजिक और आर्थिक लाभों के लिए उपयोगी समुद्र के स्तर, तीव्रता और तूफानों की आवृत्ति आदि के बारे में मिशन के तहत विकसित की जाने वाली सलाह भारतीय तटीय क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक लाभों के लिए उपयोगी होगी। गहरे समुद्र में रहने वाले और निर्जीव संसाधनों की बेहतर समझ और कोबाल्ट, निकल, तांबा और मैंगनीज जैसे रणनीतिक खनिजों की खोज से इन संसाधनों के भविष्य के वाणिज्यिक दोहन का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है। महासागर तापीय ऊर्जा रूपांतरण अध्ययन अपतटीय ऊर्जा और मीठे पानी के उत्पादन के लिए हैं। डीओएम के उद्देश्यों में गहरे समुद्र की प्रौद्योगिकियों का विकास है शामिल गहरे समुद्र मिशन ( डीओएम) के उद्देश्यों में गहरे समुद्र की प्रौद्योगिकियों का विकास शामिल है, जिसमें गहरे समुद्र में खनन के लिए प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ 6000 मीटर पानी की गहराई के लिए निर्धारित मानवयुक्त पनडुब्बी का विकास, महासागर जलवायु परिवर्तन सलाहकार सेवाओं का विकास, गहरे समुद्र में खनिज संसाधनों और समुद्री जैव विविधता की खोज, गहरे समुद्र में सर्वेक्षण और बहु-विषयक अनुसंधान पोत की खोज और अधिग्रहण, तथा समुद्री जीव विज्ञान और गहरे समुद्र प्रौद्योगिकी में क्षमता निर्माण के साथ-साथ महासागर जीव विज्ञान के लिए एक उन्नत समुद्री स्टेशन की स्थापना शामिल है। हो रहा है व्यापक सर्वेक्षण और अन्वेषण कार्य वहीं दूसरी ओर डीओएम के एक भाग के रूप में , निकेल, कोबाल्ट, तांबा, मैंगनीज इत्यादि से समृद्ध पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स (पीएमएन) के लिए मध्य हिंद महासागर बेसिन में और तांबा, जस्ता इत्यादि से समृद्ध पॉलीमेटेलिक सल्फाइड्स (पीएमएस) के लिए मध्य और दक्षिण पश्चिम भारतीय कटकों में व्यापक सर्वेक्षण और अन्वेषण कार्य किया जा रहा है। भारत ने 75,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लिए मध्य हिंद महासागर बेसिन में पीएमएन और 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लिए मध्य और दक्षिण पश्चिम भारतीय तटों में पीएमएस के अन्वेषण के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। गहरे महासागरीय संसाधनों की खोज और उनके सतत उपयोग के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास करने से समुद्री संसाधनों का अति-शोषण नहीं होगा। ‘उच्च समुद्र’ संधि पर हस्ताक्षर को मंजूरी इसके अलावा, वर्ष 2021 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत को राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से अलग जैव विविधता (BBNJ) समझौते या ‘उच्च समुद्र’ संधि पर हस्ताक्षर करने की मंज़ूरी दी। बीबीएनजे संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के तहत एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों में समुद्री जैविक विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग को सुनिश्चित करना है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय देश में बीबीएनजे समझौते के कार्यान्वयन का नेतृत्व करेगा।

MP Assembly के चौथे दिन 7 महत्वपूर्ण विधेयक पारित, खाद संकट को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा

7 important bills passed on fourth day of MP Assembly, Congress cornered government over fertilizer crisis भोपाल ! मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन 7 महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के बाद उन्हें पारित कर दिया गया. इनमें मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम संशोधन विधेयक 2024, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर तृतीय संशोधन विधेयक 2024, मध्यप्रदेश निजी विद्यालय फीस व संबंधित विषयों का विनियमन संशोधन विधेयक 2024 समेत अन्य विधेयक शामिल हैं. इधर सदन में कांग्रेस विधायकों ने किसानों के खाद संकट को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. वहीं संसद में बाबा साहब अंबेडकर को लेकर केंद्रीय ग्रह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई टिप्पणी के मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिघार ने माफी मांगने की मांग की. साथ ही लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह द्वारा राहुल गांधी को दिए गए बयान को लेकर कांग्रेस विधायक सदन से वाक आउट कर गए. हालांकि, कुछ देर बाद फिर वापस सदन में लौट आए. खाद संकट और नकली खाद पर चर्चा शाम 6 बजे के बाद सदन में किसानों के खाद संकट पर चर्चा शुरु हुई. इसमें कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने कहा, ” मालवा निमाड़ क्षेत्र में किसानों को पानी तो मिल रहा है. लेकिन उनको खेती करने के लिए पर्याप्त खाद नहीं मिल रही है, जिससे किसानों की लंबी लाइनें लग रही हैं.” वहीं कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने कहा, ” लंबे समय से हमारे देश का किसान हरियाणा और दिल्ली बॉर्डर पर जमा हैं. उनकी सुनवाई नहीं हो रही है. आप कहते हैं कि खेती को लाभ का धंध बनाएंगे. लेकिन प्रदेश में एक बोरी खाद के लिए किसान को अधिकारी के सामने गिड़गिड़ाना पड़ रहा है. किसानों को प्रदेश में नकली खाद मिल रही है. ऐसे लोगों को सत्तापक्ष का संरक्षण मिल रहा है.” 3 साल से पहले नहीं हटेंगे नगर पालिका अध्यक्ष मध्यप्रदेश नगर पालिका निगम द्वितीय संशोधन विधेयक 2024 को सदन में मंजूरी मिल गई है. अब नगर पालिका अध्यक्ष और नगर परिषद अध्यक्ष को 3 साल से पहले नहीं हटाया जा सकेगा. यानी इनके खिलाफ 3 साल से पहले अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जाएगा. अब तक यह सीमा 2 साल थी. वहीं अब अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए तीन चौथाई सदस्यों की जरुरत होगी. अब तक अविश्वास प्रस्ताव के लिए दो तिहाई बहुमत की जरुरत होती थी. इसके साथ ही नगर पालिका निगम और परिषद के अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होगा. निजी स्कूलों के खिलाफ सुनवाई के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था मध्यप्रदेश निजी विद्यालय फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन संशोधन विधेयक 2024 को पारित करने से पहले इस पर सदन में पर्याप्त चर्चा हुई. पक्ष और विपक्ष के आठ से अधिक विधायकों ने इस चर्चा में हिस्सा लिया. कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने कहा कि इस बिल में 25 हजार रु से कम फीस वाले निजी स्कूलों को शामिल नहीं किया गया है. ऐसे में स्कूल वाला यदि 50 हजार रु फीस लेता है, तो वह ट्यूशन फीस 25 हजार रु दिखाएगा, जबकि बाकी खर्च किसी अन्य मद में दिखा देगा. इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि इस बिल में संशोधन के बाद निजी स्कूल द्वारा बच्चों से ली जाने वाले ट्रांसपोर्टेशन शुल्क को भी फीस में जोड़ा गया है. हम स्कूलों के खिलाफ सुनवाई के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था बना रहे हैं. एससी-एसटी और ओबीसी छात्रों को समय पर मिले स्कालरशिप चर्चा के दौरान फूल सिंह बरैया ने कहा कि जब एससी, एसटी या ओबीसी का कोई छात्र कालेज में एडमिशन लेता है, तो संचालक उससे कहता है कि तुम फीस मत देना स्कालरशिप दे देना. लेकिन जब इन बच्चों को समय पर स्कालरशिप नहीं मिलती तो कालेज संचालक ऐसे बच्चों को परीक्षा में नहीं बैठने देता है. बरैया ने कहा कि सरकार को एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के विद्यार्थियों को समय पर स्कालरशिप दिया जाना चाहिए, जिससे उनकी पढ़ाई में रुकावट न आए. नगर पालिक के विधेयक से नेता प्रतिपक्ष असहमत नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, ” नगर पालिका के विधेयक में संशोधन से पहले हर धारा और उपधारा पर चर्चा होनी चाहिए. इसके अंदर काफी पेचीदिगियां हैं. आप घर बनवाने के लिए ऑनलाइन परमिशन की बात करते हैं लेकिन इसके लिए लोगों को अधिकारियों के कितने चक्कर लगाने पड़ते हैं. एक पेड़ काटने के लिए ही लोगों को नगर निगम के आयुक्त से बात करनी पड़ती है. ऐसे में इस बिल में संशोधन से पहले इसे प्रवर समिति में भेजा जाना चाहिए, फिर इस पर विचार होना चाहिए.” विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष खुद भरेंगे आयकर मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष वेतन और भत्ता संशोधन विधेयक 2024 और मध्यप्रदेश विधानसभा नेता प्रतिपक्ष वेतन और भत्ता संशोधन विधेयक 2024 को भी पारित कर दिया गया है. इसके तहत अब विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का इंनकम टैक्स सरकार नहीं भरेगी. उनको खुद अपना इनकम टैक्स भरना पड़ेगा. इसके पहले तक विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का टैक्स सरकार देती थी. विधानसभा में ये विधेयक हुए पारित

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