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30 महीने में बदल जाएगी क्षिप्रा नदी की तस्वीर, 12 किमी की टनल का काम शुरू,सिंहस्थ में पर्व स्नान के लिए नर्मदा से नहीं लाना होगा पानी

उज्जैन इंदौर की कान्ह नदी का गंदा पानी दिसंबर 2027 के बाद क्षिप्रा नदी को प्रदूषित नहीं कर पाएगा। न ही हर पर्व स्नान के लिए नर्मदा से करोड़ाें रुपए का पानी खरीदना पड़ेगा। इसी दावे के साथ कान्ह डायवर्जन की नई योजना पर काम शुरू कर दिया है। नाम है- क्लोज डक्ट। इसमें 18 किमी की डक्ट होगी और 12 किमी लंबी टनल रहेगी। इंदौर रोड़ स्थित जमालपुरा से शुरू हुई इस योजना का 20% काम हो चुका है। जल संसाधन विभाग के माध्यम से 400 मजदूर, इंजीनियर व तकनीकी एक्सपर्ट की टीम इसे पूरा कर रही है। इससे पहले कान्ह डायवर्जन के नाम पर पिछले सिंहस्थ में 150 करोड़ रुपए खर्च किए थे। राघोपिपलिया से लेकर कैडी पैलेस तक बड़े पाइप डालकर कान्ह के गंदे पानी को डायवर्ट किया था, लेकिन यह योजना फेल हो गई। पाइपों की ज्वाइंट की इंजीनियरिंग ठीक नहीं थी। वशिष्ठ कंस्ट्रक्शन हैदराबाद के साइट इंजीनियर बृजेंद्र राजपूत ने बताया इस बार हर किमी के लिए इंजीनियर व तकनीकी एक्सपर्ट लगे हैं। कान्ह नदी के डायवर्सन के लिए इंदौर रोड स्थित जमालपुरा से बनाई जा रही टनल की पहली तस्वीर। दावा है कि इस योजना का 20% काम हो चुका है। दिसंबर 2027 तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अनुसार, क्षिप्रा को कान्ह के गंदे पानी से मुक्त करने के लिए यह एक बहुत कारगर योजना है। कान्ह का दूषित जल नहीं मिल सकेगा क्षिप्रा में कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग मयंक सिंह ने बताया कि 919.94 करोड़ लागत की कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना के कार्य मौके पर प्रारंभ हो गए हैं, जिसमें ग्राम बमोरा और देवराखेड़ी में टनल बिछाने के लिए खुदाई और ग्राम जमालपुर में कट एंड कवर का कार्य जारी है. उन्होंने बताया कि यह परियोजना सिंहस्थ के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी. सन 2052 तक के सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना में 40 क्यूमैक्स जल बहाव क्षमता का भूमिगत क्लोज डक्ट का निर्माण किया जा रहा हैं, जिससे जमालपुर के समीप कान्ह नदी पर बैराज निर्माण कर दूषित जल को टनल में भेजा जाएगा, जिससे कान्ह का दूषित जल क्षिप्रा में नहीं मिल सकेगा. सेवरखेड़ी-सिलारखेडी मध्यम सिंचाई परियोजना क्षिप्रा नदी को निरंतर प्रवाहमान बनाए रखने लिए सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 614.53 करोड़ की विभाग को प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई हैं,  जिसकी कार्य एजेंसी निर्धारित कर जल्द मौके पर कार्य प्रारंभ किया जा रहा है. परियोजना में सेवरखेड़ी में बैराज का निर्माण कर मानसून के समय बैराज से 51 मिली घन मीटर जल को लिफ्ट कर सिलारखड़ी जलाशय में डाला जाएगा, जिसके लिए सिलारखेड़ी जलाशय का विस्तार भी किया जाएगा. परियोजना से ग्रीष्म ऋतु में भी क्षिप्रा नदी प्रवाहमान बनी रहेगी. परियोजना को पूर्ण करने के लिए 30 माह लक्ष्य निर्धारित किया गया.  कान्ह और क्षिप्रा नदी पर बनाए जाएंगे बैराज क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिए कान्ह नदी पर 5 और क्षिप्रा नदी पर 1 बैराज का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए कुल 36.6 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिसमें 6.24 करोड़ की लागत से गोठड़ा स्टॉपडेम, 5.06 करोड़ की लागत से पिपलिया राघो  बैराज, 6.35 करोड़ की लागत से रामवासा बैराज , 4.56 करोड़ की लागत से जमालपुरा स्टॉपडेम, 5.74 करोड़ की लागत से पंथपीपलई स्टॉपडैम और क्षिप्रा नदी पर 8.71 करोड़ की लागत से किठोदाराव बैराज का निर्माण किया जाएगा. क्लोज डक्ट योजना की टेंडर शर्त के अनुसार, 15 साल तक कंपनी को ही पूरा मेंटेेनेंस करना होगा। पिछली बार जो कान्ह डायवर्जन योजना थी, उसमें टेंडर में ये शर्तें नहींं थी। नई योजना में वर्षाकाल के बाद के पानी को बायपास करने की मात्रा पिछली कान्ह योजना से लगभग 7-8 गुना ज्यादा होगी। जो डक्ट बनेंगे, उनकी आसानी से जेसीबी तक की मदद से सफाई हो सकेगी। कुल मिलाकर हमारे सारे स्नान पर्व क्षिप्रा में बिना गंदे पानी के हो सकेंगे। 5 मीटर गहरी, 5 मीटर चौड़ी टनल पहले कान्ह डायवर्जन में सही से इंजीनियरिंग नहीं हुई, जिससे पाइपों के ज्वाइंट ठीक नहीं बैठ पाए। योजना फेल हुई। नई योजना में 400 लोगों की दक्ष टीम लगाई है। 5 मीटर गहरी व 5 मीटर चौड़ी टनल बना रहे है, इतनी ही लंबी-चौड़ी डक्ट रहेगी। दिसंबर 2027 में काम पूरा कर देंगे और 15 साल तक कंपनी ही मेंटेनेंस करेगी। -इंजीनियर शुभम पांडेय, डिप्टी प्रोजेक्ट इंचार्ज  

यूनियन कार्बाइड के 337 मीट्रिक टन कचरे के भस्मीकरण के बाद 900 मीट्रिक टन अवशेष बनेगा

भोपाल  राजधानी में 40 साल पहले यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था, जिससे हजारों लोग काल के गाल में समा गए थे. वहीं लाखों लोग इससे संक्रमित हुए और आज भी इसका दंश झेल रहे हैं. गैस कांड की वजह से बच्चे कई गंभीर बीमारियों के साथ पैदा होते हैं. वहीं अब इसके 337 मीट्रिक टन कचरे को जलाने की खबरों से लोग दहशत में हैं. दरअसल, 2015 में सरकार ने इसके 10 टन खतरनाक कचरे को बतौर ट्रायल जलाता था, इससे पैदा हुई 40 टन राख को इंदौर जिले के पीथमुर में दफनाया गया था लेकिन इससे 8 किमी क्षेत्र का भूजल दूषित हो गया था. वहीं अब सरकार यहां पड़े 337 मीट्रिक टन कचरे को जलाकर डिस्पोज करेगी. हालांकि, इसका क्या असर होगा, ये कह पाना मुश्किल है. यही वजह है कि जिस जगह पर यह जहरीला कचरा जलाया जाना है, वहां के लोग विरोध पर उतर आए हैं. ‘तीन गुना बढ़ेगा जहरीला कचरा’ भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा “यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के भस्मीकरण से पर्यावरण और वन मंत्रालय की तकनीकी प्रस्तुति के अनुसार, भस्मीकरण के बाद 900 मीट्रिक टन अवशेष बनेगा. यानी अभी जो कचरा जलाने जा रहे हैं, अवशेष उसका तीन गुना बचेगा. वहीं यह ध्यान रखने योग्य है कि इस 900 मीट्रिक टन में जहरीली धातुओं की बहुत अधिक मात्रा होगी. इधर, पीथमपुर में तथाकथित सुरक्षित लैंडफिल से पिछले कुछ सालों से जहरीला रिसाव जारी है. अधिकारियों के पास यह सुनिश्चित करने का कोई तरीका नहीं है कि 900 मीट्रिक टन अवशेषों से निकलने वाला जहर पीथमपुर और उसके आसपास के भूजल को प्रदूषित न करे.” ‘यूनियन कार्बाइड कंपनी अमेरिका ले जाए कचरा’ भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने कहा “सरकारी योजनाओं के अनुसार, भोपाल से निकलने वाले खतरनाक कचरे को साढ़े तीन महीने तक जलाया जाना है. इतने लंबे समय तक भस्मक से निकलने वाले धुएं में जहर और पार्टिकुलेट मैटर के चपेट में आने वाली आबादी की संख्या एक लाख से भी अधिक है. वर्तमान में जो काम जारी है वह जानबूझकर सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक हादसा पैदा करने से कम नहीं है.” रचना ढ़ींगरा ने कहा कि “यदि सरकार इस कचरे को इंदौर में जलाती है, तो वहां भी वायु और जल प्रदूषण बढ़ेगा. इससे अच्छा ये है कि या तो सरकार उस कचरे को वहीं पड़ा रहने दे या फिर यूनियन कार्बाइड कंपनी के प्रबंधन को यह जहरीला कचरा अमेरिका ले जाने का दबाव बनाए.” पूर्व मंत्री बाबूलाल गौर और जयंत मलैया ने किया था विरोध यूनियन कार्बाइड के खतरनाक कचरे को पीथमपुर में जलाने के विरोध के लंबे इतिहास पर बोलते हुए भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के नवाब खान ने कहा “पर्यावरण मंत्री के तौर पर जयंत मलैया और गैस राहत मंत्री के तौर पर बाबूलाल गौर ने कई सरकारी बैठकों में भोपाल के कचरे को पीथमपुर में जलाने की योजना का विरोध किया था. गैस राहत आयुक्त ने तो कचरे को पीथमपुर में जलाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा तक दाखिल किया था. हम ये तथ्य अब सबके सामने इसलिए ला रहे हैं ताकि पीथमपुर को धीमी गति से हो रहे भोपाल हादसे में बदलने की प्रक्रिया में लगे अधिकारी बाद में यह न कह सकें कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी.” एक किलो कचरा जलाने पर आएगी 3000 रु की लागत रचना ढींगरा ने बताया, “सरकार 337 मीट्रिक टन कचरे को जलाने में 126 करोड़ रु खर्च कर रही है. यह आंकड़ा पूरे विश्व में सबसे मंहगा है. जहां प्रति टन कचरा जलाने पर करीब 27 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. यानी एक किलो कचरा जलाने की लागत 3 हजार रुपये प्रति किलो से अधिक है.” रचना ने बताया, “इससे पहले 2010 से 2015 के बीच पीथमपुर संयंत्र में जहरीले कचरे के निपटान के सात में से छह परीक्षण विफल रहे. क्योंकि इससे डाइऑक्सिन और फ्यूरान की मात्रा स्वीकार्य सीमा से 16 गुना अधिक हो गई थी.”

जेक सुलिवन ने बांग्लादेश में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति और लोकतंत्र पर चिंता की व्यक्त

ढाका बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। हाल ही में व्हाइट हाउस से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस को एक सख्त संदेश भेजा गया। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन की ओर से की गई इस कॉल में बांग्लादेश में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति और लोकतंत्र पर चिंता व्यक्त की गई। गौरतलब है कि व्हाइट हाउस की तरफ यह बातचीत ऐसे वक्त पर हुई है जब राष्ट्रपति जो बाइडन के व्हाइट हाउस में कुछ ही दिन शेष हैं। व्हाइट हाउस ने अपने बयान में साफ किया कि हर नागरिक के मानवाधिकारों की रक्षा करना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। धर्म, जाति और किसी भी प्रकार के भेदभाव से परे, अमेरिका ने बांग्लादेश को चेतावनी दी है कि वह अपनी जमीन पर हो रहे अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। इस बातचीत में यूनुस ने भी मानवाधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का आश्वासन दिया, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह आश्वासन जमीनी हकीकत में बदलेगा? अंतरराष्ट्रीय मंच पर बांग्लादेश की किरकिरी पिछले कुछ महीनों से बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बनी हुई हैं। अमेरिकी विदेश विभाग पहले ही अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर बांग्लादेश सरकार की आलोचना कर चुका है। हाल ही में एक धार्मिक नेता चिन्मयकृष्ण दास की गिरफ्तारी और उनके वकीलों के साथ बदसलूकी ने अमेरिका का ध्यान विशेष रूप से खींचा है। इसके अलावा, अमेरिका में रह रहे बांग्लादेशी प्रवासियों ने भी अपने देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर प्रदर्शन किए हैं। इन प्रदर्शनों के चलते बांग्लादेश पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है। क्या बांग्लादेश सुधरेगा? बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अमेरिका को मानवाधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा का वादा किया है लेकिन हाल के दिनों में यूनुस सरकार हिंदुओं पर हुए हमलों पर चुप्पी ही साधे रही है।

20 जनवरी तक हो सकता है BJP के नए अध्यक्ष का ऐलान, जनवरी के दूसरे सप्ताह में बैठक

नई दिल्ली भाजपा को नया अध्यक्ष अगले सााल जनवरी-फरवरी में मिल सकता है। इसके लिए कुछ केंद्रीय मंत्रियों समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, इस बारे में फैसला होने से पूर्व भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं के बीच जनवरी के दूसरे सप्ताह में अनौपचारिक बैठक हो सकती है। इसके पहले पार्टी आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों में नये अध्यक्षों की नियुक्ति करेगी। भाजपा नेतृत्व नये अध्यक्ष को लेकर जल्दबाजी में नहीं है। वह संगठन स्तर पर अपनी स्थिति को व्यापक व मजबूत करने के साथ आगे बढ़ रहा है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा केंद्र में मंत्री बनने के बाद भी अपना दायित्व निभा ही रहे हैं और संगठन स्तर पर भी पूरी तरह सक्रिय हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि संगठन चुनाव चल रहे हैं। जनवरी-फरवरी में नया अध्यक्ष संगठन को मिल जाएगा। दिल्ली के विधानसभा चुनाव को लेकर इस नेता का कहना है कि यह संगठन पर निर्भर करेगा कि उसकी उस समय की प्राथमिकताएं और जरूरतें क्या हैं। चूंकि नया अध्यक्ष 15 जनवरी के बाद आना है, इसलिए अगर चुनाव के चलते संगठन एक माह का और समय लेता है तो उसमें कोई दिक्कत नहीं है। दरअसल, भाजपा अध्यक्ष के चयन के पहले पार्टी व संघ के नेताओं के बीच नये नेता को लेकर चर्चा होना बाकी है। अभी जो नाम चर्चा में है, वह अनुमानों पर है। सूत्रों के अनुसार, अभी तक न तो भाजपा नेतृत्व ने किसी नाम को लेकर संघ से चर्चा की है और न ही संघ ने किसी नाम का सुझाव दिया है। संभवतः जनवरी के दूसरे सप्ताह में भाजपा व संघ के शीर्ष नेताओं के बीच इस बारे में अनौपचारिक बैठक होगी, जिसमें नए अध्यक्ष को लेकर चर्चा होगी। जिन नामों की चर्चा है उनमें केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर, भूपेंद्र यादव, वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर, जी. किशन रेड्डी आदि शामिल हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज्यों के संगठन चुनावों में आधा दर्जन से ज्यादा प्रदेशों में नये अध्यक्ष आना तय हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात शामिल हैं। संगठन चुनावों की मौजूदा स्थिति में अधिकांश राज्यों में मंडल अध्यक्षों के चुनाव पूरे हो चुके हैं। इस माह के अंत और जनवरी के पहले सप्ताह तक जिलों के चुनाव पूरे किए जाने की तैयारी है। इसके बाद राज्यों के चुनाव होंगे। क्या कहता है बीजेपी का संविधान? भारतीय जनता पार्टी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले कम से कम आधे राज्य इकाइयों में संगठनात्मक चुनाव खत्म पूरे जाने चाहिए. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल 3 साल का होता है. हालांकि 2024 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए जेपी नड्डा के कार्यकाल को आगे बढ़ा दिया गया था. 2020 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे नड्डा फरवरी 2020 में जेपी नड्डा को बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था. नड्डा पार्टी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. इसके बाद जनवरी 2023 में नड्डा का कार्यकाल पूरा हो रहा था उससे पहले ही अमित शाह ने कहा कि बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा का कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ाने का फैसला किया. तब से लेकर अभी तक नड्डा बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. अब बीजेपी का नया अध्यक्ष सरकार या संगठन किसी से भी हो सकता है. बीजेपी का राष्ट्रीय पार्टी या फिर संगठन से कोई भी हो सकता है. अभी तक किसी का भी नाम सामने नहीं आया है. आने वाले कुछ दिनों में इसे लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है.

मध्यप्रदेश में सीजन का पहला मावठा गिरा, कोहरा भी छाया: 27 दिसंबर को ओले-बारिश गिरने कि सम्भावना ; भोपाल, सहित कई जिलें भीगेंगे

The first drizzle of the season fell in Madhya Pradesh, fog also prevailed: Strong system of hail and rain on 27 December; Bhopal, along with many other districts will get wet मंगलवार सुबह ग्वालियर-चंबल संभाग में कोहरा छाया रहा। भोपाल । मध्यप्रदेश में सीजन का पहला मावठा गिर रहा है। पिछले 24 घंटे में 10 से ज्यादा जिलों में हल्की बारिश हुई, जबकि ग्वालियर-चंबल संभाग में कोहरा छाया रहा। ऐसा ही मौसम अगले 4 दिन यानी, 28 दिसंबर तक बना रहेगा। 27 दिसंबर को ओले-बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम बनेगा। जिसका भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन समेत पूरे प्रदेश में असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार-मंगलवार की रात में भिंड-सीहोर में बारिश हुई। वहीं, मंगलवार को पन्ना, दतिया, टीकमगढ़, बड़वानी, खजुराहो, निवाड़ी, मुरैना, भिंड, अशोकनगर, श्योपुर में हल्की बारिश दर्ज की गई। भोपाल में पूरे दिन बादल छाए रहे। वहीं, सर्द हवाएं चलीं। जिससे लोग ठिठुर गए। इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में भी ऐसा ही मौसम रहा। हालांकि, दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी हुई है। अगले 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम… 25 दिसंबर: गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर में हल्के से मध्यम कोहरा रहेगा। 26 दिसंबर: खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, रतलाम, मंदसौर और नीमच में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, अनूपपुर, शहडोल और उमरिया में हल्के से मध्यम कोहरा छाया रहेगा। 27 दिसंबर: इंदौर, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, देवास, भिंड, मुरैना, श्योपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सागर और पांढुर्णा में ओले गिरने के साथ बारिश और 40 से 50Km प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चल सकती है। इसी तरह भोपाल, राजगढ़, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, शहडोल, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और मैहर में कहीं-कहीं बारिश और तेज हवा चलने का अनुमान है। 28 दिसंबर: अनूपपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, नर्मदापुरम, बैतूल, बालाघाट, पांढुर्णा में ओले गिरने के साथ तेज हवा चल सकती है। इसी तरह रायसेन, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, पन्ना, दमोह, सागर, मैहर में गरज-चमक और बारिश होने का अनुमान है। भोपाल, सीहोर, राजगढ़, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर और नीमच में हल्के से मध्यम कोहरा रहेगा।

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