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67वीं नेशनल शॉटगन चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश ने जीते 4 पदक

भोपाल नई दिल्ली में 11 दिसंबर 2024 से 19 जनवरी 2025 तक आयोजित 67वीं नेशनल शॉटगन चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी के खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 1 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य सहित कुल 4 पदक जीते। पदक विजेता खिलाड़ी और श्रेणियाँ     जूनियर स्कीट व्यक्तिगत (महिला)     वंशिका तिवारी ने रजत     सीनियर स्कीट टीम (महिला)     शिवानी रायकवार, वंशिका तिवारी, मानसी रघुवंशी ने कांस्य     जूनियर स्कीट टीम (महिला)     शिवानी रैकवार, काजल सिंह बघेल, मानसी रघुवंशी ने स्वर्ण     जूनियर स्कीट टीम (पुरुष)     ज्योतिर्दित्य सिंह सिसोदिया, दुष्यंत विजय भारद्वाज, उदयमान ने रजत कुल 4 पदक: स्वर्ण: 1,रजत: 2 और कांस्य: 1 खेल मंत्री की बधाई खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने टीम और खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा, “मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शॉटगन चैम्पियनशिप में अपने प्रदर्शन से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। इनकी सफलता हमारे खेल अकादमी के उत्कृष्ट प्रशिक्षण और खिलाड़ियों की मेहनत का परिणाम है।” खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की मेहनत से मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर फिर से अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है।  

अटल जी: आधुनिक भारत के राष्‍ट्रपुरूष

भारत रत्‍न स्‍व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर विशेष अटल जी: आधुनिक भारत के राष्‍ट्रपुरूष कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः। स बुद्धिमान्मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत्। श्रीमद्भगवद्गीता 4/18 धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी भोपाल अर्थात जो मनुष्य कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म को देखता है, वह सभी मनुष्यों में बुद्धिमान और सर्वश्रेष्ठ है। वह कर्म प्रवृत्ति रह कर भी सर्वदा दिव्य स्थिति में रहता है। भारतरत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी भी एक ऐसे ही कर्मशील युगपुरुष थे, जो जीवनपर्यंत नि:स्वार्थ और अनासक्त भाव से अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर रहे। उनके कार्यों में व्यक्तिगत भाव किंचित मात्र भी नहीं रहा है। उनके प्रत्येक कर्म में सदैव राष्ट्रहित सर्वोपरि था। वे केवल राष्ट्र के लिए हीं जीते थे,उनकी हर श्‍वास के लिए थी। इसलिए उनका कर्तव्य पथ उन्हें मोक्ष के मार्ग पर लेकर जाता है। व्यक्तिगत उपबंध से स्वाधीन अटल जी का चिंतन और चिंता का विषय सदैव संपूर्ण राष्ट्र रहा है। भारत और भारतीयता की संप्रभुता एवं उसके संवर्धन की कामना ही उनके चिंतन और दर्शन में सर्वोपरि रही है। उन्होंने राष्ट्र के सम्मान और समृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और कभी भी किसी भी संकट से विचलित नहीं हुए। उनकी कविताओं में राष्ट्रीयता की भावना,जिस ओजस्विता, तेजस्विता और वीरता के स्वरों के साथ व्यक्त हुई, वह राष्ट्र के गौरव को रेखांकित करती है। अटल जी कहते हैं- आज सिंधु में ज्वार उठा है, नगपति फिर ललकार उठा है, कुरुक्षेत्र के कण–कण से फिर, पांचजन्य हुँकार उठा है। शत–शत आघातों को सहकर, जीवित हिंदुस्तान हमारा, जग के मस्तक पर रोली-सा, शोभित हिंदुस्तान हमारा। दुनियाँ का इतिहास पूछता, रोम कहाँ, यूनान कहाँ है? घर–घर में शुभ अग्नि जलाता, वह उन्नत ईरान कहाँ है? दीप बुझे पश्चिमी गगन के, व्याप्त हुआ बर्बर अँधियारा, किंतु चीरकर तम की छाती, चमका हिंदुस्तान हमारा। अटल जी का राष्ट्रवादी चिंतन उनकी राजनीति, लेखनी और व्यक्तित्व में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वह भारतीय सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव के प्रबल समर्थक थे। उनके विचारों के केंद्र में सदा भारत रहा है। उनका राष्ट्रवाद ‘’सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’’ के सिद्धांत पर आधारित था। उनका मानना था कि भारतीय सभ्यता की नींव में सहिष्णुता, विविधता और समानता के मूल्य निहित हैं। वे कहते हैं- भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जागता राष्ट्र पुरुष है। हम जिएंगे तो इसके लिए, मरेंगे तो इसके लिए। अटल जी एक आदर्शवादी राजनेता के साथ एक काव्य साधक भी थे। उनकी काव्य साधना में मानव समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी व्यक्तिगत संवेदनशीलता आद्योपांत प्रकट होती है। वह एक ऐसे भारत के निर्माण का स्वप्न देखते थे, जो भूख, भय, गरीबी, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो। उनकी काव्य साधना में एक कर्मयोगी की कर्तव्य-परायणता और राष्ट्रवाद की दृढ़ भावना की झलक दिखाई देती है। वह कहते हैं – पंद्रह अगस्त का दिन कहता, आजादी अभी अधूरी है। सपने सच होने बाकी है,रावी की शपथ न पूरी है। दिन दूर नहीं खंडित भारत को, पुनः अखंड बनाएंगे। गिलगित से गारो पर्वत तक, आजादी पर्व मनाएंगे। वाजपेयी जी एक अदम्‍य साहसिक व्यक्तित्व के धनी थे, वे जो सोच लेते थे उसे करके ही मानते थे। उनके राजनीतिक निर्णय में यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनका राष्ट्रवाद ‘’आत्मनिर्भर भारत’’ की अवधारणा पर आधारित था। वह भारत को आर्थिक, सामरिक और वैज्ञानिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे। पोखरण परमाणु परीक्षण और कारगिल विजय जैसे अद्वितीय कार्य उनकी इस कविता को चरितार्थ करते हैं – टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी, अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी, हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा काल के कपाल पर, लिखता हूं, मिटाता हूं गीत नया गाता हूं । वे भारत की एकता और अखंडता के लिए कितने सजग और संघर्षशील थे। यह बात उनकी कविताओं में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। वे कहते हैं – आहुति बाक़ी यज्ञ अधूरा, अपनों के विघ्नों ने घेरा। अंतिम जय का वज्र बनाने, नव दधीचि हड्डियाँ गलाएँ। आओ फिर से दिया जलाएँ।। अटल जी का राष्ट्रवाद समावेशी था। वे धर्मनिरपेक्षता के पक्षधर थे, किंतु इसका आशय तुष्टीकरण नहीं था। उनका मानना था कि सभी धर्म का सम्मान होना चाहिए और किसी भी धर्म को विशेष लाभ नहीं मिलना चाहिए। वह भारत के सभी वर्गों, धर्म और जातियों के लिए समान अवसर और समान अधिकार सुनिश्चित करना चाहते थे। वाजपेयी जी एक आदर्शवादी और सिद्धांतवादी राजनेता थे। उनके चिंतन में राजनीति और नैतिकता का गहरा संबंध था। उनका मानना था,कि राजनीति में नैतिक मूल्यों का पालन किया जाना आवश्‍यक है। वह कहते थे – ‘’राजनीति में विरोध हो लेकिन विरोधी को शत्रु न माने।’’ उनका मानना था कि, राजनीति में विचारों का संघर्ष हो सकता है लेकिन उसे व्यक्तिगत वैमनस्‍य में नहीं बदलना चाहिए। इन्हीं राजनीतिक आदर्श ने उन्हें भारतीय राजनीति का अजातशत्रु बना दिया है।दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उनके सर्वांगीण राष्ट्रवादी चिंतन के कारण ही वर्ष 1994 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री व्‍ही०पी० नरसिम्हा राव द्वारा विशेष आग्रह कर अटल जी को जिनेवा में मानवाधिकारों के सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा था। भारत जैसे बड़े गणतांत्रिक राष्ट्र के नेता प्रतिपक्ष द्वारा सरकार का पक्ष प्रस्तुत किए जाने की यह घटना अपने आप में आश्चर्यजनक थी। इस घटना के कारण भारत के लोकतंत्र के प्रति विश्व में निष्ठा और विश्वास और अधिक दृढ़ हुआ। यह घटना अटल जी की योग्यता और उत्कृष्टता का प्रमाण है अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राष्ट्रवादी राजनेता नहीं ही नहीं थे, बल्कि एक गहरे दार्शनिक चिंतक भी थे। उनका दार्शनिक चिंतन, जीवन, राजनीति, समाज और राष्ट्रीयता के व्यापक आयाम को समेटे हुए था। उनकी विचारधारा, मानवीय मूल्य, सहिष्णुता और सत्य निष्ठा पर आधारित थी। उनका दार्शनिक दृष्टिकोण मानवता के प्रति करुणा और मानव कल्याण की भावना से ओत-प्रोत था। उनकी कविता ‘जीवन की ढलान पर’,’मिले दो पल आराम के’ इस विचारधारा को सहज ही अभिव्यक्त करती है। अटल जी का दार्शनिक चिंतन समाज और अर्थव्यवस्था के समावेशी विकास पर केंद्रित था। उनका मानना था कि देश का विकास तभी संभव है,जब समाज के सभी वर्गों को सामान अवसर प्राप्त होंगे एक अवसर पर अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा था कि, ‘’हमने समाज के एक बड़े वर्ग को समाज की मुख्य धारा से … Read more

अटल जी के नदी जोड़ो स्वप्न से मिली जनगण को सौगात: डॉ. मोहन यादव

भोपाल उजियारे में, अंधकार में, कल-कछार में, बीच धार में, क्षणिक जीत में दीर्घ हार में, जीवन के शत-शत आकर्षक, अरमानों को ढलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा।। कदम मिलाकर चलने का उद्गोष करने वाले भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की आज 100वीं जयंती है। भारत निर्माण के दृष्टा श्रद्धेय अटल जी को शत-शत नमन। श्रद्धेय अटल जी ने संघ के स्वयंसेवक से लेकर राष्ट्रधर्म के संपादक, जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के दायित्वों के बीच कार्यकर्ताओं की पीढ़ियां निर्मित कीं। व्यक्ति निर्माण, समाज निर्माण, राष्ट्र निर्माण की उनकी परिकल्पना के सभी पक्षों ने देश को आधार प्रदान किया। धरती को सुजलाम् सुफलाम् करने और समृद्धि के नये आयाम स्थापित करने के लिये श्रद्धेय अटल जी ने लगभग 20 वर्ष पूर्व नदी जोड़ो अभियान की संकल्पना की थी। उन्होंने देशभर की नदियों को जोड़कर बिखरी पड़ी जलराशि के समुचित प्रबंधन का सपना देखा था।उनका सपना था, देशभर की नदियां आपस में जुड़ें और जल की एक-एक बूंद का उपयोग समाज और राष्ट्र के लिये हो। श्रद्धेय अटल जी 100वीं जयंती पर आज मध्यप्रदेश में केन-बेतवा से विश्व की पहली नदी जोड़ो परियोजना द्वारा जल सुरक्षा का स्थायी समाधान करने की दिशा में महती कदम उठाया जा रहा है। मुझे यह बताते हुये प्रसन्नता है कि आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री और वर्तमान पीढ़ी के भागीरथ नरेन्द्र मोदी जी खजुराहो में देश की पहली, महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना का शिलान्यास करेंगे। इसी के साथ श्रद्धेय अटल जी का नदियों को आपस में जोड़ने का संकल्प और समृद्धि का सपना मूर्तरूप लेगा।मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, सैकड़ों नदियों की विपुल जलराशि से समृद्ध है। प्रदेश की नदियों के आशीर्वाद से यह बहुउद्देशीय परियोजना बुंदेलखंड की जीवन रेखा साबित होगी। यह परियोजना छतरपुर और पन्ना जिले में केन नदी पर विकसित की जा रही है। इसमें पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचाई एवं 2.13 किलोमीटर लंबाई के दौधन बांध एवं 2 टनल का निर्माण होगा। बांध में 2 हजार 853 मिलियन घन मीटर जल का भंडारण किया जायेगा। इसमें दाब युक्त सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से मध्यप्रदेश के 10 जिले पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, छतरपुर, निवाड़ी, सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी और दतिया के लगभग 2 हजार ग्रामों में 8.11 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो सकेगी और लगभग 7 लाख किसान परिवार लाभान्वित होंगे। मध्यप्रदेश की 44 लाख और उत्तर प्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा मिलेगी और 103 मेगावॉट जल विद्युत एवं 27 मेगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा। इसका लाभ संपूर्ण मध्यप्रदेश को मिलेगा। केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना से बुंदेलखंड के हर खेत तक सिंचाई के लिये पानी पहुंचेगा। प्रदेश में बिजली, कृषि, उद्योग और पेयजल के लिये भरपूर पानी उपलब्ध होगा। खेत को पानी मिलने से फसलों का अमृत बरसेगा। किसानों के जीवन में खुशहाली आयेगी और बुंदेलखंड की तस्वीर तथा तकदीर बदलेगी। इस परियोजना से खेती-किसानी, उद्योग, व्यवसाय और पर्यटन को गति मिलेगी जिससे पलायन रुकेगा और नागरिकों का जीवन खुशहाल होगा। जलराशि की विपुलता के साथ बाढ़ तथा सूखा, दोनों समस्याओं का समाधान होगा। हमारा संकल्प है विरासत के साथ विकास। इसी लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते हुएपरियोजना में ऐतिहासिक चंदेलकालीन 42 तालाबों को सहेजने का कार्य किया जायेगा।यह तालाब वर्षाकाल में जल से भर जायेंगे। इससे धरती का जल स्तर बढ़ेगा जिसका लाभ लोगों को मिलेगा। मध्यप्रदेश कृषि बाहुल्य प्रदेश है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 50 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर एक करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचाने का हमारा लक्ष्य है। मुझे विश्वास है कि केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना से हम इस लक्ष्य को पूर्ण करने में सफल होंगे और बुंदेलखंड की प्रगति के नये द्वार खुलेंगे। इसी विश्वास के साथ मैंने बुंदेलखंड के किसानों से यह आग्रह किया था कि यहां के सूखे का तोड़ निकल जायेगा, किसी भी हाल में अपनी जमीन मत बेचना। मुझे खुशी है कि मेरा वह विश्वास सही साबित हुआ। यह हमारे लिये प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश, इस समय जनकल्याण पर्व मना रहा है। अटल जी के 100वीं जयंती पर त्रिपक्षीय अनुबंध से केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना की सौगात प्रदेशवासियों को मिलना अद्भुत संयोग है। मुझे बताते हुए हर्ष है कि कुछ दिनों पूर्व हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना की सौगात दी थी। इस परियोजना में 21 बांध, बैराज निर्मित किये जाएंगे। परियोजना से प्रदेश के 3217 ग्रामों को लाभ मिलेगा। मालवा और चंबल क्षेत्र में 6 लाख 13 हजार 520 हेक्टेयर में सिंचाई होगी और 40 लाख की आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा। एक साथ प्रदेश में दो नदी जोड़ो परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाना ऐतिहासिक अवसर है। यह हमारे लिये गर्व की बात है कि इतिहास में बुंदेलखंड शौर्य, पराक्रम, वीरता और बलिदान का प्रतीक है। वीरों की भूमि बुंदेलखंड अब नदी परियोजना से विकास की भूमि के रूप में जानी जायेगी। मुझे बताते हुये आनंद है कि आज ही के दिन प्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रीन ऊर्जा के प्रति किये गये प्रयास धरातल पर उतरने वाले हैं। पुण्य सलिला मां नर्मदा पर विकसित ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकार्पण करेंगे। परियोजना के प्रथम चरण में इस वर्ष अक्टूबर माह से पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन प्रारंभ हो गया है। लोकतंत्र की प्रथम इकाई, ग्राम पंचायत से आरंभ होती है। अटल जी ने गांव को सुशासित और सशक्त बनाने का अभियान चलाया था। प्रधानमंत्री मोदी ने, श्रद्धेय अटलजी के स्वप्न को साकार करने के लिये गांव को आत्मनिर्भर, स्वच्छ, समृद्ध और सुशासित बनाने का संकल्प लिया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत का अपना भवन हो, इसके लिये प्रधानमंत्री आज मध्यप्रदेश में 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमि-पूजन करेंगे। श्रद्धेय अटल जी की 100वीं जन्म जयंती पर आज शुरू होने वाली ऐतिहासिक परियोजनाओं और कार्यों से प्रगति के नये द्वार खुलेंगे। बुंदेलखंड जलशक्ति से संपन्न हो जायेगा और किसान समृद्ध होंगे। इससे समूचे क्षेत्र में खुशहाली आयेगी और युवाओं को नौकरी के लिये पलायन नहीं करना पड़ेगा। सौभाग्य से यह सब संभव हुआ है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और डबल इंजन की सरकार से। हमारी सरकार ने पहली बार रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कर उद्योगों को छोटे शहरों तक पहुंचाने का नवाचार किया है। … Read more

महाकुंभ के कारण भोपाल मंडल से होकर गुजरने वाली कई यात्री ट्रेनों को निरस्त कर दिया, 12 जनवरी तक 16 गाड़ियां कैंसिल

भोपाल दक्षिण मध्य रेलवे, सिकंदराबाद मंडल के काजीपेट-विजयवाड़ा खंड के मोटूमारी जंक्शन स्टेशन पर इंटरलाकिंग कार्य चल रहा है। इस कारण भोपाल मंडल से होकर गुजरने वाली कई यात्री ट्रेनों को निरस्त कर दिया गया है। यह ट्रेनें हुईं निरस्त ट्रेन 22646 कोच्चुवेली-इंदौर एक्सप्रेस 28 दिसंबर से चार जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 22645 इंदौर-कोच्चुवेली एक्सप्रेस 30 दिसंबर से छह जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 12511 गोरखपुर-कोचूवेली एक्सप्रेस 26 दिसंबर से पांच जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 12512 कोचूवेली-गोरखपुर एक्सप्रेस 31 दिसंबर से आठ जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 12521 बरौनी-एर्नाकुलम एक्सप्रेस 23 दिसंबर से छह जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 12522 एर्नाकुलम-बरौनी एक्सप्रेस दिनांक 27 दिसंबर से 10 जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 01927 कानुपर-मदुरै स्पेशल 25 दिसंबर से आठ जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 01928 मदुरै-कानुपर स्पेशल 27 दिसंबर से 10 जनवरी तक निरस्त रहेगी। ट्रेन 04717 हिसार-तिरुपति स्पेशल 28 दिसंबर एवं चार जनवरी को निरस्त रहेगी। ट्रेन 04718 तिरुपति-हिसार स्पेशल 30 दिसंबर एवं छह जनवरी को निरस्त रहेगी। ट्रेन 06509 केएसआर बेंगलुरू – दानापुर एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेन 30 दिसंबर एवं छह जनवरी को निरस्त रहेगी। ट्रेन 06510 दानापुर – केएसआर बेंगलुरू एक्सप्रेस स्पेशल ट्रेन एक जनवरी एवं आठ जनवरी को निरस्त रहेगी। भोपाल मंडल की पैसेंजर, मेमू ट्रेनें हुईं निरस्त महाकुंभ के कारण भोपाल मंडल में यात्री ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया है। रेल प्रशासन ने अपरिहार्य कारणों से कई पैसेंजर और मेमू ट्रेनों को अस्थायी रूप से निरस्त करने का निर्णय लिया है। यात्री यात्रा करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति के बारे में रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल एप के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ये ट्रेनें हुईं निरस्त 27 दिसंबर से 28 फरवरी तक ट्रेन 06603-06604 – बीना-कटनी मुडवारा-बीना पैसेंजर स्पेशल मेमू ट्रेन 06623-06624 – कटनी-बरगवां-कटनी मेमू स्पेशल ट्रेन 11606-11605 – भोपाल-बीना मेमू ट्रेन 06632 – बीना-भोपाल पैसेंजर स्पेशल मेमू 28 दिसंबर से 1 मार्च तक ट्रेन 06631 – भोपाल-बीना पैसेंजर स्पेशल मेमू  

अगर 31 दिसंबर तक आचार संहिता नहीं लगी, तो निगम चुनाव पर लग सकता है मतदाता सूची का ग्रहण

रायपुर  नगरीय निकायों में होने वाले चुनाव को लेकर दावेदार और मतदाता पूरी तरह से तैयार हो चुके हैं। अब इसमें सबसे बड़ी बात जो निकलकर सामने आ रही है, उसमें अगर 31 दिसंबर तक आचार संहिता नहीं लगी, तो वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण करना पड़ेगा। इससे चुनाव दो से तीन माह तक टल सकता है। दरअसल, आयोग को एक जनवरी 2025 के हिसाब से नई मतदाता सूची तैयार करनी पड़ सकती है। निगम के चुनाव विशेषज्ञों की मानें, तो नई मतदाता सूची एक जनवरी 2024 के आधार पर तैयार की गई है। वहीं, एक जनवरी 2025 से फिर 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले युवाओं के लिए लिस्ट का पुनरीक्षण करना पड़ेगा। साथ ही पांच जनवरी से निगम की शहरी सरकार का कार्यकाल भी पूर्ण होने जा रहा है। ऐसे में छह जनवरी 2025 को महापौर एजाज ढेबर का इस्तीफा देना तय है। लिहाजा, कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर सरकार को चुनाव कराना होगा, तो 31 दिसंबर से पहले अचार संहिता लग जाएगी। अगर ऐसा नहीं होता है 29 वर्ष बाद फिर निगम में एक बार प्रशासक बैठने की पूरी संभावना है। नगर निगम में महापौर के बराबर प्रशासक का ओहदा होता है। वहीं, पहले निगम में प्रशासक के तौर पर काम करने वाले अधिकारियों ने भी शहर को बहुत कुछ दिया था। इसमें 1985 से 1995 तक सात प्रशासक कार्य किए थे। इस दौरान रायपुर निगम की प्रशासनिक बागडोर भारतीय और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के हाथों में रही। इन प्रशासकों ने शहर को बहुत कुछ दिया है। 1985 में शासन द्वारा नगर निगम में ओंकार प्रसाद दुबे को प्रशासक नियुक्त किया था। वे 1985 से 1987 तक प्रशासक के तौर पर जिम्मेदारी संभालते रहे। 1987 से 88 तक अजयनाथ को प्रशासक की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने रायपुर को सबसे बड़ा होलसेल सब्जी मार्केट शास्त्री बाजार दिया। मनोज श्रीवास्तव भी 1990 से 93 तक प्रशासक रहे। वहीं, राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी जीएस मिश्रा 1993 से 95 तक रायपुर निगम में प्रशासक के तौर पर जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इनके अलावा बजरंग सहाय, बीएस श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव भी प्रशासक रह चुके हैं। 27 को होगा महापौर का आरक्षण नगर निगम के वार्डों का आरक्षण होने के बाद अब 27 दिसंबर को महापौर के लिए आरक्षण होगा। आरक्षण की प्रक्रिया पं. दीनदयाल उपाध्याय आडोटोरियम में सुबह 10 बजे होगा। वहीं, इस बार चक्रानुगत तरीके से आरक्षण की प्रक्रिया होने की संभावना है। ऐसे में महापौर पद के लिए ओबीसी की सीट आरक्षित हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो बीते पांच वर्षों से महापौर बनने के लिए तैयारी कर रहे निगम के कई दिग्गज नेताओं की मेहनत पर पानी फिर सकता है। दो से तीन माह के लिए बैठा सकते हैं प्रशासक नगर निगम में इस बार प्रशासक बैठने की संभावना लगभग तय लग रही है। 29 वर्ष बाद ऐसा होगा जब निगम की कमान प्रशासन संभालेंगे। हालांकि, इस बार अगर प्रशासक बैठाया जाएगा, तो वह दो से तीन माह के लिए ही बैठेगा। निगम के उच्चाधिकारियों की माने तो रायपुर कलेक्टर या संभाग आयुक्त को प्रशासक के तौर पर बैठाया जा सकता है। हालांकि, निगम आयुक्त अबिनाश मिश्रा को भी यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, क्योंकि शासन स्तर उन्हें प्रशासक के तौर जिम्मेदारी सौंपने की चर्चा है।

नाबार्ड की ओर से स्पेशलिस्ट पदों पर भर्ती निकाली गई, 5 जनवरी तक कर सकते हैं अप्लाई, जाने डिटेल

नई दिल्ली सरकारी नौकरी की तलाश में लगे युवाओं के लिए खुशखबरी है। नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट की ओर से स्पेशलिस्ट पदों पर भर्ती निकाली गई है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन प्रॉसेस 21 दिसंबर से शुरू कर दी गई है जो निर्धारित अंतिम तिथि 5 जनवरी 2025 तक जारी रहेगी। जो भी अभ्यर्थी इस भर्ती के लिए पात्रता पूरी करते हैं वे बिना देरी करते हुए तुरंत ही ऑफिशियल वेबसाइट www.nabard.org पर जाकर या इस पेज पर दिए डायरेक्ट लिंक पर क्लिक करके फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन से पहले अभ्यर्थी पात्रता की जांच अवश्य कर लें। कौन ले सकता है भर्ती में भाग इस भर्ती में भाग लेने के लिए अभ्यर्थी का पदानुसार ग्रेजुएट/ बीई/ बीटेक/ एमटेक/ एमसीए/ एमएसडब्ल्यू आदि किया हो। इसके साथ ही अभ्यर्थी न्यूनतम उम्र 24 वर्ष से कम और अधिकतम आयु 55 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। कैसे होगा चयन इस भर्ती में चयनित होने के लिए उम्मीदवारों को इंटरव्यू प्रक्रिया में भाग लेना होगा। इंटरव्यू के लिए उम्मीदवारों को एक्सपीरियंस, शैक्षिक योग्यता आदि के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जायेगा। भर्ती विवरण इस भर्ती के माध्यम से कुल 10 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसमें से ETL डेवलपर के लिए 01 पद,डाटा साइंटिस्ट के लिए 02 पद, सीनियर बिजनेस एनालिस्ट के लिए 01 पद, बिजनेस एनालिस्ट के लिए 01 पद, UI/UX डेवलपर के लिए 01 पद, स्पेशलिस्ट डाटा मैनेजमेंट के लिए 01 पद, प्रोजेक्ट मैनेजर- एप्लीकेशन मैनेजमेंट के लिए 01 पद, सीनियर एनालिस्ट- नेटवर्क / SDWAN Operations के लिए 01 पद, सीनियर एनालिस्ट- साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन के लिए 01 पद आरक्षित है। कैसे करें आवेदन     इस भर्ती में आवेदन करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट www.nabard.org पर विजिट करें।     वेबसाइट के होम पेज पर करियर बटन पर क्लिक करके अगले पेज पर भर्ती से सम्बंधित अप्लाई लिंक पर क्लिक करें।     अब आप Click here for New Registration पर क्लिक करके पंजीकरण कर लें।     इसके बाद अन्य जानकारी के साथ हस्ताक्षर एवं फोटोग्राफ अपलोड करें।     अंत में निर्धारित आवेदन शल्क जमा करें और पूर्ण रूप से भरे हुए फॉर्म का प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें।  

वृंदावन ग्राम योजना से गोवंश संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा, दुग्ध उत्पादन, मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर फोकस

भोपाल  ग्रामीणों को पशुपालन से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने और जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए मध्य प्रदेश के 313 विकासखंडों में एक-एक वृंदावन ग्राम बनाए जाएंगे। इसके लिए राज्य सरकार उन ग्रामों का चयन करेगी, जहां न्यूनतम जनसंख्या दो हजार और कम से कम पांच सौ गोवंश होंगे। इसका एक आधार पशुओं के लिए चारे, पानी के साथ परिवहन की अच्छी व्यवस्था भी रखा गया है। ग्राम का चयन प्रभारी मंत्री के परामर्श से कलेक्टर करेंगे। योजना के पर्यवेक्षण के लिए जिला अधिकारियों की समिति भी बनाई जाएगी। देश में दूध का तीसरा बड़ा उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश है। प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित खेती रोजगार देने के साथ अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है और इसे विस्तार देने के लिए सरकार ने कार्ययोजना बनाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा के अनुसार प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में सरकार ने प्रत्येक विकासखंड में एक वृंदावन ग्राम बनाने का निर्णय लिया है। गोवंश संरक्षण, संवर्धन इस ग्राम में गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए नस्ल सुधार के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, प्राकृतिक खेती के लिए जैविक खाद के उपयोग, उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग, कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। योजना के क्रियान्वयन के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को ग्राम चिन्हित करने और पर्यवेक्षक के लिए समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। मार्केटिंग के साथ ब्रांडिंग पर रहेगा जोर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वृंदावन ग्राम में गाय से प्राप्त उत्पाद की मार्केटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए स्व-सहायता समूह तैयार किए जाएंगे। इन्हें प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा। स्थानीय, राष्ट्रीय मेल, किसान बाजारों और प्रदर्शनी में उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। चारा उत्पादन के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा चारा उत्पादन के लिए कृषि विभाग किसानों को प्रोत्साहित करेगी। इसके लिए फसल की जानकारी दी जाएगी। गोचर भूमि का संरक्षण और विस्तार पर ध्यान दिया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को क्रियान्वित कराया जाएगा। राज्य बजट के साथ सीएसआर का होगा उपयोग वृंदावन ग्राम के लिए वित्तीय आवश्यकता की पूर्ति राज्य के बजट के अलावा विभिन्न कंपनियों के सीएसआर फंड से कराई जाएगी। इसके लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग जिलों से प्राप्त विभिन्न कंपनियों के कार्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के प्रस्तावों पर समन्वय करेगा।

2024 में Swiggy से सबसे ज्यादा मंगाया गई डिश, हर सेकंड मिले 2 ऑर्डर

मुंबई स्विगी ने 2024 के लिए अपनी साल के अंत की रिपोर्ट जारी की है, जो विभिन्न खाद्य-संबंधी रुझानों के बारे में जानकारी देती है। (ध्यान दें कि सभी आँकड़े 1 जनवरी, 2024 और 22 नवंबर, 2024 के बीच एकत्र किए गए डेटा पर आधारित हैं)। पिछले साल की तरह, बिरयानी भारत में ऑर्डर की जाने वाली सबसे लोकप्रिय डिश बन गई है – विशेष रूप से इस डिलीवरी ऐप के माध्यम से। स्विगी ने 2024 में 83 मिलियन बिरयानी ऑर्डर किए। इसने बताया कि इसका मतलब है कि देश में प्रति मिनट 158 बिरयानी ऑर्डर की गईं (लगभग हर सेकंड में 2 ऑर्डर)। बिरयानी के बाद, स्विगी ने डोसा की लोकप्रियता पर प्रकाश डाला, जिसके इस साल 23 मिलियन ऑर्डर किए गए। स्विगी ने सबसे पसंदीदा डिश के बारे में अन्य आँकड़े भी दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चिकन बिरयानी इस व्यंजन का सबसे पसंदीदा संस्करण है। इस साल स्विगी को इसके लिए 49 मिलियन ऑर्डर मिले। इन स्विगी ऑर्डर्स का एक बड़ा हिस्सा भारत के दक्षिणी राज्यों के लोगों का है। हैदराबाद 2024 में 9.7 मिलियन बिरयानी ऑर्डर के साथ “बिरयानी लीडरबोर्ड” में सबसे ऊपर है। इसके बाद बेंगलुरु (7.7 मिलियन ऑर्डर) और चेन्नई (4.6 मिलियन) का स्थान है। हर मिनट 158 बिरयानी ऑर्डर साल 2024 खत्म होने वाला है और नए साल (New Year 2025) की शुरुआत होने वाली है. इस बीच फूड डिलिवरी प्लेटफॉर्म स्विगी ने साल 2024 खत्म होने से पहले अपनी एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें 1 जनवरी 2024 से 22 नवंबर 2024 के बीच किए गए ऑर्डर में सबसे फेवरेट व्यंजनों के बारे में बताया गया है. 8.3 करोड़ ऑर्डर्स के साथ Biryani इस साल भी भारत में ऑर्डर किए जाने वाले सबसे पसंदीदा डिश बनी है. स्विगी के मुताबिक, देश में हर मिनट 158 प्लेट बिरयानी के ऑर्डर मिले हैं.  बिरयानी के ऑर्डर में सबसे आगे हैदराबाद रहा है, जहां पर 97 लाख बिरयानी ऑर्डर की गईं. डोसा दूसरे पायदान पर पहुंचा बिरयानी के बाद सबसे ज्यादा जो डिश ऑर्डर की गई है, वो Dosa है, जिसके ऑर्डर का आंकड़ा 1 जनवरी से 22 नवंबर के बीच 23 मिलियन या 2.3 करोड़ ऑर्डर रहा है. Swiggy की रिपोर्ट के अनुसार, प्लेटफॉर्म की क्विक डिलीवरी सर्विस, बोल्ट ने भी सुर्खियां बटोरीं. बीकानेर में, मिठाई के शौकीन व्यक्ति को महज 3 मिनट में आइसक्रीम के तीन फ्लेवर मिले, जो स्विगी के संचालन की गति को प्रदर्शित करता है. इस साल मिठाइयों में रसमलाई और सीताफल आइसक्रीम पसंदीदा रहे. एक व्यक्ति खा गया ₹50000 का पास्ता बिरयानी में चिकन बिरयानी सबकी पहली पसंद बनी. तो इसके साथ ही स्विगी के ग्राहकों के फेवरेट फूड लिस्ट में पास्ता को भी शामिल किया गया है, इसकी लोकप्रियता ऐसी रही, कि बेंगलुरु के एक अकेले यूजर ने ही अलग-अलग टेस्ट की पास्ता डिश पर 49,900 रुपये खर्च डाले. रिपोर्ट के मुताबिक, आधी रात को 12 से 2 बजे के बीच ऑर्डर की जाने वाली सबसे पसंदीदा डिश में चिकन बर्गर पहली, जबकि बिरयानी दूसरी थी. मुंबई के कपिल ने पहुंचाए सबसे ज्यादा ऑर्डर स्विगी के फूड मार्केटप्लेस के चीफ बिजनेस ऑफिसर सिद्धार्थ भाकू ने कहा कि साल 2024 वास्तव में स्वादिष्ट रोमांच से भरपूर वर्ष रहा. हमें अपनी इस यात्रा के केंद्र में होने पर गर्व है, जिससे भारत भर में लाखों लोगों को उनके पसंदीदा व्यंजनों का स्वाद लेने का मौका स्विगी के जरिए मिला. उन्होंने कहा कि स्विगी के डिलीवरी पार्टनरों (Swiggy Delivery Partners) वास्तव में 2024 के गुमनाम नायक बने, जिन्होंने सामूहिक रूप से 1.96 अरब किलोमीटर की यात्रा डिलीवरी करने के दौरान की. स्विगी ने अपनी रिपोर्ट में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स की लिस्ट में टॉप पर कपिल कुमार पांडे रहे, जिन्होंने मुंबई में 10,703 डिलीवरी पूरी की और कोयंबटूर की कलीश्वरी एम 6,658 ऑर्डर के साथ महिला डिलीवरी पार्टनर्स में सबसे अव्वल रहीं. स्विगी के अनुसार, रात 12 से 2 बजे के बीच की भूख मिटाने के लिए बिरयानी दूसरी सबसे लोकप्रिय पसंद थी। चिकन बर्गर पहली पसंद थे। ट्रेनों में सबसे ज़्यादा ऑर्डर किए जाने वाले खाने में बिरयानी भी शामिल थी (स्विगी ने IRCTC के साथ मिलकर ट्रेन रूट पर खास स्टेशनों पर डिलीवरी के लिए एक समर्पित फीचर का इस्तेमाल किया है)। साल की शुरुआत में, स्विगी ने यह भी खुलासा किया था कि भारत में रमज़ान 2024 के दौरान प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए बिरयानी की लगभग 6 मिलियन प्लेटें ऑर्डर की गईं। सबसे ज़्यादा ऑर्डर हैदराबाद शहर में किए गए, जहाँ इस अवधि के दौरान स्विगी पर बिरयानी की एक मिलियन से ज़्यादा प्लेटें ऑर्डर की गईं (अधिक जानकारी यहाँ पढ़ें )। स्विगी की साल के अंत की रिपोर्ट से एक और दिलचस्प जानकारी एक ख़ास खाने के शौकीन के इस व्यंजन के प्रति प्रेम के बारे में थी। कोलकाता में एक स्विगी उपयोगकर्ता ने 1 जनवरी, 2024 को सुबह 4.01 बजे बिरयानी ऑर्डर की, जिसने साल की एक स्वादिष्ट शुरुआत को चिह्नित किया!

गणतंत्र दिवस नहीं इस बार ‘वीर बाल दिवस’ पर बहादुर बच्चों को मिलेगा पुरस्कार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी सम्मानित

नई दिल्ली पहली बार गणतंत्र दिवस के बजाय देश के बाल पुरस्कार आगामी 26 दिसंबर को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के अवसर पर दिए जाएंगे। इस बार पुरस्कृत होने वाले सभी 17 बच्चों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सम्मानित करेंगी। राष्ट्रपति मुर्मु करेंगी सम्मानित यह सम्मान सिर्फ वीरता के लिए ही नहीं बल्कि कला-संस्कृति, अन्वेषण, विज्ञान व तकनीकी, समाज सेवा, खेल और पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भी दिए जाएंगे। हालांकि इस समारोह का मुख्य केंद्र ‘वीर बाल दिवस’ ही होगा। 17 बच्चों को मिलेगा पुरस्कार केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री ने मंगलवार को एक बयान जारी करके बताया कि भारत के बच्चों की उपलब्धियों और साम‌र्थ्य को सम्मानित करते हुए आगामी गुरुवार को वीर बाल दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रव्यापी गतिविधियों के लिए इस साल 14 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 17 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार समारोह में सात श्रेणियों में उल्लेखनीय योगदान के लिए सात लड़कों और दस लड़कियों को सम्मानित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में स्थापित ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर परियोजना का भी उद्घाटन करेंगे

नईदिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के अवसर पर कल मध्य प्रदेश जायेंगे और खजुराहो में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार श्री मोदी केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना की आधारशिला रखेंगे। यह राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य के दृष्टिकोण से देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। इस परियोजना से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सिंचाई की सुविधा मिलेगी, जिससे लाखों किसान परिवारों को लाभ मिलेगा। इस परियोजना से क्षेत्र के लोगों को पेयजल की सुविधा भी मिलेगी। इसके साथ ही, जलविद्युत परियोजनाएं हरित ऊर्जा में 100 मेगावाट से अधिक का योगदान देंगी। इस परियोजना से रोजगार के कई अवसरों का सृजन होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी की 100वीं जयंती के अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी करेंगे। वह 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों की आधारशिला भी रखेंगे। ये भवन स्थानीय स्तर पर सुशासन के लिए ग्राम पंचायतों के कार्य और जिम्मेदारियों के व्यावहारिक संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ऊर्जा की आत्मनिर्भरता और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता के अनुरूप, प्रधानमंत्री मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में स्थापित ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर परियोजना का भी उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना कार्बन उत्सर्जन को कम करेगी और वर्ष 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के सरकार के मिशन में योगदान देगी। यह जल वाष्पीकरण को कम करके जल संरक्षण में भी मदद करेगी।

मध्य प्रदेश में 12वीं पास के लिए बिजली कंपनी में नौकरी का मौका, फटाफट कर दें अप्‍लाई

भोपाल मध्‍यप्रदेश राज्‍य विद्युत बोर्ड में नौकरी का सुनहरा मौका है. अगर आप भी निर्धारित मापदंड पूरा करते हैं, तो ऑफ‍िस असिस्‍टेंट समेत अन्‍य पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं. इन पदों पर आवेदन प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है. इस वैकेंसी के बारे में पूरी डिटेल्‍स mponline.gov.in पर देखी जा सकती है. इस बात का ध्‍यान रखें कि 23 जनवरी 2025 से पहले इन पदों के लिए अप्‍लाई कर दें.  कितने पदों पर वैकेंसी मध्‍यप्रदेश राज्‍य विद्युत बोर्ड ने कुल 2573 पदों पर भर्तियां निकाली हैं. इसमें कुछ वैकेंसी जनरेशन कंपनी ट्रांसमिशन कंपनी और पॉवर मैनेजमेंट कंपनी आदि के लिए है. कई रिपोर्ट में बताया गया है कि इन कंपनियों में ग्रुप सी और ग्रुप डी की भर्तियां निकली हैं. इसके तहत कार्यालय सहायक श्रेणी 3, लाइन परिचालक, सुरक्षा उप निरीक्षक, सीनियर इंजीनियर मैकेनिकल, सीनियर इंजीनियर सिविल आदि के पदों पर नियुक्‍तियां होनी हैं. इसके अलावा टेक्‍निशियन, रेडियोग्राफर, ईजीसी टेक्‍निशियन, अग्निशमक आदि पदों पर भी नौकरियां हैं.  कौन कर सकता है अप्‍लाई मध्‍यप्रदेश राज्‍य विद्युत बोर्ड में निकली इन भर्तियों के लिए सामान्‍य योग्‍यता 12वीं पास रखी गई है मतलब इंटरमीडिएट परीक्षा पास अभ्‍यर्थी इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं. लेकिन कुछ पदों के लिए उससे संबंधित योग्‍यता मांगी गई है. अगर आपके पास संबंधित विषय में डिग्री डिप्‍लोमा है, तो ही आवेदन कर सकते हैं. अलावा अभ्‍यर्थी की उम्र 18 से 40 साल के बीच होनी चाहिए. आवेदन mponline.gov.in के माध्‍यम से की जा सकती है.  सेलेक्‍शन और सैलेरी मध्‍यप्रदेश राज्‍य विद्युत बोर्ड इन पदों के लिए ऑनलाइन टेस्‍ट कराएगा. इसके बाद फ‍िजिकल टेस्‍ट भी होगा, जिसके आधार पर फाइनल सेलेक्‍शन होगा. सेलेक्‍ट होने वाले उम्‍मीदवारों को 19500 से लेकर 42700 तक की सैलेरी मिलेगी.

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया नमन

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के 25 दिसंबर को जन्मदिन पर उन्हें नमन किया है। उन्होंने कहा कि 25 दिसंबर को छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मशती है। अटल जी का छत्तीसगढ़ से और छत्तीसगढ़ के लोगों से हमेशा आत्मीय लगाव रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण में अटल जी की भूमिका को याद करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी ने छत्तीसगढ़वासियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए छत्तीसगढ़ के विकास और यहां के लोगों की समृद्धि के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया।  अटल जी के  सपनों को पूरा करने की दिशा में राज्य सरकार बड़ी तेजी से काम कर रही है। छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। हमने अटल जी की स्मृति में इस रजत जयंती वर्ष को “अटल निर्माण वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है जिसके अंतर्गत राज्य में अधोसंरचना विकास के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अटल जी कुशल राजनीतिज्ञ होने के साथ एक ओजस्वी वक्ता और कवि हृदय सरल व्यक्तित्व थे। अटल जी की याद में उनका जन्मदिन ’सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। अटल जी का सपना था – एक सशक्त, समृद्ध और खुशहाल भारत। उसी सपने को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ आज शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन दिवस के अवसर पर हम सभी को अटल जी के दिखाए रास्तों पर चलकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपना योगदान देकर अटल जी के स्वर्णिम भारत के स्वप्न को पूर्ण करने में सहभागी बनने के लिए दृढ़संकल्पित होना चाहिए।

नए साल पर महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को लेकर यातायात व्यवस्था में कई बड़े बदलाव

उज्जैन  मध्यप्रदेश समेत देशभर के श्रद्धालुओं की पसंदीदा तीर्थ में शामिल है उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर। रोजाना यहां 1 लाख से अधिक भक्त बाबा महाकाल के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। वहीं नए साल पर भक्तों का सैलाब उमड़ने वाला है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार नए साल पर यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 10 लाख के पार हो सकती है। अगर आप भी नए साल पर महाकाल के दर्शन करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो ये खबर आपके बड़े काम की है, क्योंकि नए साल में श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखते हुए महाकाल दर्शन की व्यवस्था की गई है… ताकि भक्त आसानी से दर्शन कर सकें। उज्जैन पुलिस का ट्रैफिक नियम जरूर करें फॉलो नए साल पर उज्जैन महाकाल(Ujjain Mahakal darshan) मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को लेकर यातायात व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। यातायात पुलिस ने लगभग 12 मार्गों को प्रतिबंधित करने की तैयारी कर ली है। वहीं मंदिर क्षेत्र के प्रेशर पॉइंट्स भी चिन्हित किए गए हैं। भीड़ के चलते होने वाली अव्यवस्थाओं को रोकने के लिए 11 जगहों पर वाहनों की पार्किंग बनाई जाएगी। ये सारा प्लान 30 दिसंबर से लागू किया जा सकता है। इन रास्तों पर वाहन रहेंगे प्रतिबंधित बता दें कि हरिफाटक टी से महाकाल घाटी चौराहे की ओर वाहनों का प्रवेश 31 दिसंबर की शाम से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। हरिफाटक टी से इंटरप्रिटेशन की तरफ वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। वहीं जंतर-मंतर से जयसिंघपुरा, चारधाम पार्किंग की ओर वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। इसके अलावा शंकराचार्य चौराहे से नृसिंहघाट की ओर, शंकराचार्य चौराहे से दानीगेट की ओर, भूखी माता टर्निंग से नृसिंहघाट की ओर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। दौलतगंज से लोहे का पुल वाहन नहीं जा सकेंगे। ये रहेगी पार्किंग की नई व्यवस्था उज्जैन यातायात डीएसपी विक्रम कनपुरिया और दिलीप सिंह परिहार के मुताबिक, इंदौर,देवास और मक्सी की ओर से आने वाले सभी वाहन हरिफाटक चौराहा होते हुए जंतर-मंतर पुल टर्निंग से होकर कर्कराज पार्किंग और भील समाज धर्मशाला पार्किंग में अपने वाहन खड़े कर सकेंगे। पार्किंग भर जाने के बाद हरिफाटक हाट बाजार, मन्नत गार्डन एवं इम्पीरियल होटल के पीछे की पार्किंग में वाहन खड़े करने की व्यवस्था की जाएगी। बड़नगर से आने वाले वाहन मोहनपुरा ब्रिज के नीचे, भैरूपुरा तिराहे के पास, नागदा की ओर से आने वाले वाहन साडू माता की बावड़ी, रातड़िया रोड से कार्तिक मेला मैदान व तेली समाज मैदान में पार्क होंगे।

गरीबों को आजीविका के साधन उपलब्ध कराने स्व-सहायता समूहों को आर्थिक सहायता, 81 करोड़ रूपये का वितरण

भोपाल प्रदेश में शहरी क्षेत्रों के गरीबों को आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के लिये नगरीय निकाय बैंकों के साथ मिलकर स्व-सहायता समूहों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। अब तक प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में 9318 स्व-सहायता समूहों का गठन कर 9000 से अधिक शहरी गरीब परिवारों को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया है। इसके साथ ही स्व-सहायता समूह को आर्थिक रूप से मजबूती देने के लिये 642 एरिया लेवल फेडरेशन का गठन और 34 सिटी लेवल फेडरेशन का गठन किया गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 6720 स्व-सहायता समूहों को आवर्ती निधि राशि के रूप में करीब 6 करोड़ 75 लाख रूपये की राशि प्रदाय की है। स्वरोजगार कार्यक्रम अंतर्गत पूर्व से स्वीकृत व्यक्तिगण ऋण में 5723 हितग्राहियों को लगभग 77 करोड़ रूपये और समूहगत ऋण के रूप में 396 स्व-सहायता समूहों को 11 करोड़ रूपये मंजूर किये हैं। प्रदेश में शहरी क्षेत्र के 3581 स्व-सहायता समूहों का बैंक लिंकेज कर 21 करोड़ 50 लाख रूपये का ऋण बैंकों के माध्यम से वितरित किया गया है। स्व-सहायता समूह योजनाओं में भी कर रहे मदद शहरी स्व-सहायता समूहों को नगरीय विकास विभाग और अन्य केन्द्रीय योजनाएं जिनमें अमृत 2.0 में अमृत मित्र के रूप में जोड़ा गया है। स्व-सहायता समूह के सदस्य जल गुणवत्ता परीक्षण कार्य, स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और सेनीटेशन जैसी गतिविधियों में भी मदद कर रहे हैं। अमृत 2.0 योजना में अमृत मित्र कार्यक्रम के अंतर्गत 10 नगरीय निकाय जबलपुर, भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, छतरपुर, ग्वायिर, रीवा, छिंदवाड़ा, धार और देवास में 20 स्व-सहायता समूहों को 56 लाख रूपये के कार्यादेश दिये गये हैं। दूसरे चरण में प्रदेश के 45 निकायों का चयन किया जा चुका है। इन महिला स्व-सहायता समूहों को जल गुणवत्ता परीक्षण और सार्वजनिक पार्क संचालन और संधारण की जिम्मेदारी का कार्य सौंपा गया है। स्वच्छ भारत मिशन में 166 स्वसहायता समूह सेनिटेशन और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कार्य से जुड़े हुए हैं। उद्यानिकी विभाग की योजना से भी जुड़े स्व-सहायता समूह प्रदेश में शहरी स्व-सहायता समूहों को केन्द्र सरकार की उद्यानिकी विभाग की योजना प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना (पीएमएफएएमई) से भी जोड़ा गया है। योजना में सीड केपिटल घटक में 126 स्व-सहायता समूह के 708 सदस्यों को एरिया लेवल फेडरेशन के माध्यम से 3 करोड़ रूपये खाद्य प्र-संस्करण संबंधी गतिविधियों के लिये दिये जा चुके हैं। नगरीय निकायों ने इसी योजना में दूसरे चरण में 103 स्व-सहायता समूहों के 600 सदस्यों को फेडरेशन के माध्यम से उद्यानिकी गतिविधियों के लिये करीब 2 करोड़ रूपये राशि के प्रस्ताव स्वीकृती के लिये भेजे हैं। शहरी क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों को खाद्य प्र-संस्करण से संबंधित गतिविधियों का लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही इन समूहों में शहरी क्षेत्र की महिलाओं को अधिक से अधिक जोड़ने के प्रयास किये जा रहे हैं।  

प्रधानमंत्री मोदी आज खजुराहो आएंगे, केन बेतवा लिंक परियोजना का भूमि पूजन करेंगे

 खजुराहो  देश की प्रथम नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास आज 25 दिसंबर बुधवार को खजुराहो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। 44 हजार 605 करोड़ रुपये लागत वाली इस परियोजना से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। मप्र के 10 जिले और उत्तर प्रदेश के चार जिलों में पेयजल की व्यवस्था सुदृढ़ होगी। परियोजना में होने वाले व्यय का 90 प्रतिशत भार केंद्र सरकार उठाएगी। प्रदेश के ऊपर वित्तीय भार मात्र 10 प्रतिशत आएगा। इस परियोजना से 103 मेगावाट जल विद्युत एवं 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा, जिसका पूरा लाभ मध्य प्रदेश को मिलेगा। बुंदेलखंड का आर्थिक व सामाजिक विकास होगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। परियोजना के प्रति लोगों को किया जा रहा जागरूक     इस बीच, प्रभावित जिलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को परियोजना के प्रति जागरूक किया जा रहा है। गुन्नौर विधायक डॉ. राजेश वर्मा ने कहा कि यह बुंदेलखंड अंचल के लिए महत्वाकांक्षी योजना है।     उन्होंने कहा, ‘बुंदेलखंड की दो दशक पुरानी आस अब पूरी हो रही है। 18 साल से लंबित केन-बेतवा लिंक परियोजना का शुभारंभ क्षेत्र की प्यास के बुझने के साथ ही जीवन बदलने का ऐतिहासिक पड़ाव भी है।’     ‘चार दशके से बुंदेलखंड की जनता को जिस दिन का बेसब्री से इंतजार था, वह दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़संकल्प से आ गया है। साथ ही भारत देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी का सपना पूरा हुआ।’     लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से कलश यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है एवं कार्यक्रम में पहुंचने के लिए निमंत्रण दिया जा रहा है। सभी जगह ग्राम पंचायतों में कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।     इस योजना को लेकर सभी गावों में दीवार लेखन के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं नुक्कड़ नाटक और गीत संगीत के माध्यम से भी लोगों में केन बेतवा लिंक परियोजना के बारे में बताया जा रहा है। खजुराहो पुलिस ने जारी किया रूट प्लान पीएम मोदी के आगमन को लेकर छतरपुर पुलिस द्वारा यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए पार्किंग व्यवस्था एवं डायवर्सन प्लान बनाया गया है, जिसका रूट चार्ट जारी किया जा रहा है। डायवर्सन प्लान के तहत छतरपुर, दमोह, सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी से कार्यक्रम में आने वाले वाहन की मंजू नगर रोड में फेस्टिवल ग्राउंड, लालगांव, प्रेम गिरी मंदिर, एएसआई ग्राउंड में पार्किंग रहेगी। महोबा, राजनगर, चंदला, गौरीहार, लवकुशनगर की तरफ से कार्यक्रम में आने वाले वाहन बलवंत सिंह महाविद्यालय परिसर पार्किंग, एमपीटी पार्किंग विवेकानंद चौराहा, टूरिस्ट ग्राउंड, आदिवर्त पार्किंग में पार्क करेंगे, जिला दमोह तरफ से आने वाली जो बसे छतरपुर होकर आएंगी वह गंज से राजनगर रोड एवं पन्ना तरफ से आने वाली बसें टोरिया टेक से डायवर्ट होकर आएंगी। पन्ना, चंद्रनगर तरफ से कार्यक्रम में आने वाले समस्त वाहन टोरिया टेक से सूरजपुरा रनेह फॉल, अचनार बाईपास से होते हुवे पायल तिराहा तक आएंगे, विक्रमपुर तरफ से आने वाले वाहन गोकुल धाम होते हुए खजुराहो आएंगे, रानेहफॉल चंद्रनगर से आने वाले वाहन अचनार बाईपास से पायल तिराहा तक आएंगे। पुलिस ने जारी की प्रतिबंधित सामग्री की सूची शिलान्यस समारोह हेतु सभास्थल, मार्ग एवं क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की दृष्टि से छतरपुर पुलिस द्वारा व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था एवं जनसामान्य की सुविधा हेतु छतरपुर पुलिस द्वारा कई घेरे की सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई है। सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम स्थल पर ड्रोन अथवा ड्रोन कैमरे पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम धन्यवाद पत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम छतरपुर जिले के जनपदों एवं ग्राम पंचायतों की जनता ने केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात के लिए 443 धन्यवाद पत्र दिए हैं। छतरपुर जिले में आगामी 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री, स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 100 वीं जयंती पर केन बेतवा लिंक परियोजना के भूमिपूजन के लिए बुन्देलखण्ड की धरती पर खजुराहो में स्वयं पधार रहे हैं। यह परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिससे बुन्देलखंड के लोगों की पानी की समस्या का निदान होगा। 

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