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आईटीआई पास आउट युवाओं को मिलेगा रोजगार के लिए पांच लाख तक का लोन

उत्तर प्रदेश आईटीआई पास आउट और कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिए अच्छी खबर हैं। उन्हें नौकरी के लिए अब दौड़ भाग करने की जरूरत नहीं है। नौकरी की बजाय वह खुद का रोजगार स्थापित करने को ऋण ले सकते हैं। यह अवसर मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान में दिया गया है। ऋण मुहैया होने के बाद कारोबार के माध्यम से आईटीआई पास आउट आर्थिक रूप से मजबूत हो सकेंगे। जनपद में जिला मुख्यालय समेत तहसील क्षेत्रों में चार राजकीय आईटीआई हैं। इसके साथ ही कई मिनी आईटीआई भी हैं जो कि निजी स्तर पर संचालित हो रही हैं। आईटीआई में विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद भी पास आउट को नौकरी के अवसर अपेक्षानुरूप नहीं प्राप्त हो रहे हैं। रोजगार मेलों के माध्यम से जो भर्तियां होती हैं उनमें इतनी पगार भी नहीं होती है कि परिवार को सही तरीके से गुजारा हो सके। ऐसे में पास आउट रोजगार मेले के माध्यम से विभिन्न संस्थानों में नौकरी तो पा जा जाते हैं। मगर कुछ ही समय बाद उनके पास वापस लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता है। युवाओं को पांच लाख रुपये तक का ऋण ऐसे में अब शासन स्तर से आईटीआई और कौशल विकास मिशन से पास आउट युवाओं के लिए खुद के रोजगार के अवसर पैदा करने पर फोकस किया गया है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान में पास आउट युवाओं को ऋण प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाएगा। रोजगार के लिए ऐसे युवाओं को पांच लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाएगा। योजना का लाभ लेने को आईटीआई पास आउट या कौशल विकास प्रशिक्षण् प्राप्त युवा एमएसएमई पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

इंस्पेक्टर और दरोगा समेत पांच पुलिस कर्मचारियों को भारी पड़ा युवक को झूठे केस में फ़साना, एडीजी के निर्देश पर ऐक्शन

फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में इंस्पेक्टर और दरोगा समेत पांच पुलिस कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच तत्कालीन सीओ अरुण कुमार ने की। जिन्हें पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली थी। फर्रुखाबाद में वाहन ठीक कराने के बहाने बुलाए गए बाइक मैकेनिक को तमंचा बरामद दिखाकर जेल भेजने के मामले में एडीजी के निर्देश पर मोहम्मदाबाद कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर मनोज भाटी, दरोगा महेंद्र सिंह, सिपाही अंशुमन चाहर, राजन पाल और यशवीर सिंह पर एफआईआर दर्ज की गई है। पिपरगांव निवासी कृष्ण कुमार की ओर से सीओ को शिकायत की गई थी कि उसके भाई बाइक मैकेनिक नंदू को प्रधान और मोहम्मदाबाद कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने षड़यंत्र करके 18 अगस्त को बाइक सही कराने के बहाने बुलाया। अगले दिन नंदू को पुलिसकर्मी नदी किनारे ले गए। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने नंदू को तमंचा पकड़ाकर भागने के लिए कहा। धमकी दी कि यदि नहीं भागे तो गोली मार देंगे। इस पर नंदू भागने को मजबूर हो गया। पुलिस ने उसके भागने का वीडियो बनाया और पकड़कर वापस थाने ले आए। नंदू के खिलाफ धारा 25 में मुकदमा दर्जकर उसे जेल भेज दिया। मामले की जांच तत्कालीन सीओ अरुण कुमार ने की। जिन्हें पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली थी। वर्तमान सीओ राजेश द्विवेदी ने आरोपी पुलिसकर्मियों पर रविवार को न्यायिक कार्य में गलत साक्ष्य देने के तहत बीएनएस की धारा 229 में मोहम्मदाबाद कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई। इसमें अधिकतम सात वर्ष की सजा हो सकती है। वाराणसी में थाना प्रभारी प्रमोद पांडेय हाजिर वाराणसी में फरियादियों से अभद्रता की शिकायत पर पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने खुद जांच कराकर दशाश्वमेध थाना प्रभारी प्रमोद पांडेय को लाइन हाजिर कर दिया। उन्होंने यह कार्रवाई रविवार रात ट्रैफिक पुलिस लाइन सभागार में हुई अपराध समीक्षा बैठक में की। सीपी को बीते कई दिनों से थाने में आम जनता के साथ हो रहे दुर्व्यवहार की शिकायत मिल रही थी। इसके बाद उन्होंने खुद एक महिला को मोबाइल चोरी की शिकायत दर्ज कराने थाने भेजा था। प्रभारी ने उस महिला के साथ भी अशिष्टता की थी। बैठक में कार्रवाई करने के बाद उन्होंने अन्य थानेदारों को भी ताकीद की है। कहा कि इस तरह की कार्यशैली अक्षम्य है। पर्यटन थाना प्रभारी रहे योगेंद्र प्रसाद को दशाश्वमेध थाने की कमान दी गई है।

यूनियन कार्बाइड के 377 टन जहरीले कचरे को 250 KM दूर भेजने की तैयारी, बनेगा ग्रीन कॉरिडोर, 100 से ज्यादा पुलिस जवान तैनात

भोपाल  यूनियन कार्बाइड का कचरा भोपाल से पीथमपुर भेजने की तैयारी शुरू हो गया। रविवार से इसके पैकेजिंग की शुरुआत हो गई है। इस बीच भोपाल गैस त्रासदी राहत विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने रविवार को लोगों की चिंता दूर की। उन्होंने बताया कि यूनियन कार्बाइड प्लांट के जहरीले कचरे को पीथमपुर में जलाने से आसपास के गांवों की जमीन और मिट्टी पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। यह कचरा 1984 की भोपाल गैस त्रासदी का है। इसे पीथमपुर में सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाएगा। यूनियन कार्बाइड का है कचरा सिंह ने बताया कि पीथमपुर में जो रासायनिक कचरा नष्ट किया जा रहा है, वह यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में बने कीटनाशक का अवशेष पदार्थ है। उन्होंने कहा कि यह मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) जितना खतरनाक नहीं है। MIC का इस्तेमाल कीटनाशक बनाने में होता है। 2-3 दिसंबर, 1984 की रात को भोपाल में MIC गैस का रिसाव हुआ था, जिससे भयानक त्रासदी हुई थी। अलग से लैंडफिल का निर्माण किया गया सिंह ने आश्वासन दिया कि कचरे को जलाने के दौरान यह पानी या मिट्टी के संपर्क में न आए, इसके लिए लैंडफिल बनाया गया है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर विशेषज्ञों की निगरानी में 10 टन कचरा पहले ही नष्ट किया जा चुका है। इससे आसपास के इलाके में कोई नुकसान नहीं हुआ है। 337 मीट्रिक टन है कचरा 1984 की त्रासदी का लगभग 337 मीट्रिक टन पैक किया हुआ जहरीला कचरा सुरक्षित निपटान के लिए पीथमपुर ले जाया जाएगा। भोपाल के यूनियन कार्बाइड प्लांट से पीथमपुर के रासायनिक कचरा निपटान केंद्र तक 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा। सिंह ने बताया कि अभी सही समय नहीं बताया जा सकता। लेकिन, पैक किए गए कचरे के निपटान के बारे में 3 जनवरी को MP उच्च न्यायालय में एक हलफनामा पेश किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी कि उससे पहले कचरा पीथमपुर पहुंच जाए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के अनुसार पैकिंग सिंह ने कहा कि जहरीले कचरे की पैकिंग, लोडिंग, परिवहन और अनलोडिंग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशानिर्देशों के अनुसार की जाएगी। जहरीले कचरे को जलाने के लिए सुरक्षित रूप से उसके गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। लंबे समय से मुआवजे की मांग भोपाल गैस त्रासदी के बाद, ज़हरीले कचरे के निपटान और पर्यावरणीय मुआवजे की मांग लंबे समय से चली आ रही है। 1984 की त्रासदी के बाद, स्वास्थ्य देखभाल और आर्थिक पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित किया गया था। लेकिन पर्यावरणीय क्षति को अनदेखा कर दिया गया। 2004 में, आलोक प्रताप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें जहरीले कचरे के वैज्ञानिक निपटान की मांग की गई। उनके बेटे अनन्या अब इस लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। एनजीओ ZGKSM, जो त्रासदी पीड़ितों के लिए लड़ रहा था, को हाल ही में उसके परिसर से हटा दिया गया है। मिट्टी भी जहरीली अनुमान है कि फैक्ट्री के नीचे लगभग 1.5 मिलियन टन ज़हरीली मिट्टी दबी हुई है। 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद, ZGKSM नाम के एक NGO ने एक मार्मिक लोगो अपनाया। इस लोगो में “नो हिरोशिमा, नो भोपाल” लिखा था। साथ ही एक अज्ञात बच्चे के दफनाने की एक काली और सफेद तस्वीर भी थी। उस समय, पर्यावरण की चिंताएं गौन थीं। ऑर्गेनिक खाने का कोई महत्व नहीं था। इनका ध्यान रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल पर था। भोपाल प्लांट में भी ऐसे ही उर्वरक बनते थे। इनका इस्तेमाल वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए किया जाता था। विशेष पीपीई किट पहने कई कर्मचारी और भोपाल नगर निगम, पर्यावरण एजेंसियों, डॉक्टरों और भस्मीकरण यानी कूड़ा जलाने वाले विशेषज्ञों के अधिकारी साइट पर काम करते देखे गए. फैक्ट्री के आसपास पुलिस भी तैनात की गई थी. सूत्रों ने बताया कि जहरीले कचरे को भोपाल से करीब 250 किलोमीटर दूर इंदौर के पास पीथमपुर में एक भस्मीकरण स्थल पर ले जाया जाएगा. मप्र हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर को फैक्ट्री से जहरीले कचरे को हटाने के लिए चार सप्ताह की समय सीमा तय की थी. अदालत ने कहा था कि गैस त्रासदी के 40 साल बाद भी अधिकारी ‘निष्क्रियता की स्थिति’ में हैं, जिससे ‘एक और त्रासदी’ हो सकती है. इसे ‘दुखद स्थिति’ बताते हुए उच्च अदालत ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उसके निर्देश का पालन नहीं किया गया तो उसके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही की जाएगी. राज्य के गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने एक न्यूज एजेंसी से कहा, “भोपाल गैस त्रासदी का कचरा एक कलंक है, जो 40 साल बाद मिट जाएगा. हम इसे सुरक्षित तरीके से पीथमपुर भेजकर इसका निपटान करेंगे.” उन्होंने कहा कि भोपाल से पीथमपुर तक कचरे को कम से कम समय में ले जाने के लिए यातायात का प्रबंधन करके करीब 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा. स्वतंत्र कुमार सिंह ने कचरे के परिवहन और उसके बाद पीथमपुर में उसके निपटान की कोई निश्चित तिथि बताने से इनकार कर दिया, लेकिन सूत्रों ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश के मद्देनजर प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो सकती है और कचरा 3 जनवरी तक अपने गंतव्य तक पहुंच सकता है. अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में कचरे का कुछ हिस्सा पीथमपुर की निपटान इकाई में जलाया जाएगा और अवशेष (राख) की वैज्ञानिक जांच की जाएगी ताकि पता लगाया जा सके कि उसमें कोई हानिकारक तत्व तो नहीं बचा है. सिंह ने कहा, “अगर सब कुछ ठीक पाया गया तो कचरा तीन महीने में जलकर राख हो जाएगा. अन्यथा जलने की गति धीमी कर दी जाएगी और इसमें नौ महीने तक का समय लग सकता है.” उन्होंने बताया कि भस्मक से निकलने वाले धुएं को चार परत वाले विशेष फिल्टर से गुजारा जाएगा ताकि आसपास की हवा प्रदूषित न हो और इस प्रक्रिया का हर पल रिकॉर्ड रखा जाएगा. सिंह ने बताया कि जब कचरे को जलाकर हानिकारक तत्वों से मुक्त कर दिया जाएगा, तो राख को दो परतों वाली मजबूत ‘झिल्ली’ से ढक दिया जाएगा और ‘लैंडफिल’ में दफना दिया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह किसी भी तरह से मिट्टी और पानी के संपर्क में न आए. उन्होंने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की देखरेख … Read more

दिल्ली ड्रम सर्कल के ताल वादकों ने जाकिर हुसैन को दी श्रद्धांजली, राजस्थान-बीकानेर हाउस के संडे मार्केट में संगीत वाद्यों की गूंज

जयपुर। नई दिल्ली के बीकानेर हाउस में हर रविवार को लगने वाली संडे मार्केट में इस रविवार विभिन्न संगीत वाद्यो की गूंज ने उपस्थित आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दिल्ली की गुलाबी ठंड के इस मौसम में सैकड़ों पर्यटकों और आगंतुकों ने संडे मार्केट में आकर विभिन्न मनोरंजक कार्यक्रमों का आनंद लिया। आवासीय आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि इस साप्ताहिक संडे मार्केट में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के आकर्षण के लिए बीकानेर हाउस को नए वर्ष की थीम के अनुसार सजाया गया था। आगंतुकों के मनोरंजन के लिए प्रसिद्ध दिल्ली ड्रम सर्कल के तालवादकों द्वारा तबलों पर एक विशेष प्रस्तुति आयोजित की। यह प्रस्तुति तबला वादक जाकिर हुसैन को श्रद्धांजलि के रूप में आयोजित की गई थी। इसके अतिरिक्त इस संगीतमय प्रदर्शन में सैक्सोफोन वादक के साथ तालवादकों का एक समूह शामिल था। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के अंतिम रविवार को आयोजित इस साप्ताहिक बाजार में विभिन्न वर्गो की सैकड़ों की भीड़ और सर्दी की मौसम को देखते हुए विभिन्न प्रकार के व्यंजनों की भी व्यवस्था की गई थी। जिसके स्वाद को सभी लोगों ने खूब सराहा। उन्होंने बताया कि इस बाज़ार में जैविक उत्पाद, बैग, ऊनी कपड़े, टिकाऊ फैशन, कारीगर चॉकलेट, प्राचीन वस्तुएँ और अन्य उत्पादों के स्टॉलों के प्रति लोगों में बाजार के प्रति जबरदस्त उत्साह और उमंग दिखा। उन्होंने बताया कि 10 नवम्बर से शुरू हुए इस साप्ताहिक बाजार में आने वाले पर्यटकों और आगंतुकों की सप्ताह दर सप्ताह बढ़ती संख्या इसकी प्रसिद्धि का प्रमाण है।

रेस्क्यू टीम कमांडर बोले- जल्द पहुंचेगी टीम, राजस्थान-जयपुर में बोरवेल में अब डेढ़ फीट दूर है बच्ची

जयपुर। बीते 8 दिन से लगातार जिस मासूम चेतना को बोरवेल से निकालने लिए कोशिशें की जा रही है, वह आज लगभग पूरी होती नजर आ रही है। रेस्क्यू टीमें चेतना के करीब पहुंच चुकी है। करीब 170 फीट गहराई में मौजूद टीम के कमांडर का दावा है कि आज दोपहर तक चेतना तक हम पहुंच जाएंगे। एनडीआरएफ की टीम सोमवार सुबह 6:30 बजे तक करीब 7 फीट टनल की खुदाई कर चुकी है। अब सिर्फ 1.5 फीट चौड़े चट्टान को ड्रिल करना बाकी है। हालांकि चेतना किस स्थिति में है, इस पर अभी प्रशासन की तरफ से कोई अपडेट नहीं आया है। कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने दावा किया है कि ये राजस्थान का सबसे मुश्किल ऑपरेशन है। 23 दिसंबर को हुआ था हादसा बता दें कि 23 दिसंबर की दोपहर चेतना खेलते हुए बोरवेल में गिर गई थी। वह करीब 170 फीट की गहराई में फंसी थी। बोरवेल में गिरने के बाद से उसे पानी तक नहीं पहुंचाया जा सका है। इसके बाद बारिश के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन में कुछ दिक्कतें और आईं। मंगलवार (24 दिसंबर) शाम से वह कोई मूवमेंट भी नहीं कर रही है। अधिकारी बीते कई दिनों से उसके कैमरे की इमेज या विजुअल को भी नहीं दिखा रहे हैं।

आरक्षण कटौती से नाराज Obc समाज ने बस्तर में किया चक्काजाम, मांगें पूरी नहीं होने पर उग्र

जगदलपुर/कांकेर आगामी दिनों में छत्तीसगढ़ में होने वाले नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव में आरक्षण की प्रक्रिया बीते दिनों सभी जिलों में संपन्न हुई. आरक्षण में हुई कटौती को लेकर आज पिछड़ा वर्ग समाज ने बस्तर बंद बुलाया, जिसका बड़ा असर बस्तर में देखने को मिला. सुबह से सभी दुकानें बंद रही. वहीं बड़ी संख्या में समाज के लोग प्रदर्शन करते हुए माकड़ी के पास चक्काजाम कर सड़क पर बैठे हैं. वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है. पिछड़ा वर्ग समाज का कहना है कि सरकार द्वारा नगरीय निकाय चुनाव में जो आरक्षण तय किया गया है उसे निरस्त किया जाए. फिर से आरक्षण कराकर ओबीसी समाज को आरक्षण का लाभ दिया जाए. मांगें पूरी नहीं होने पर समाज ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है. वही पिछड़ा वर्ग समाज के इस प्रदर्शन का कांग्रेस ने भी समर्थन किया है. जगदलपुर में भी सुबह से ही बंद को सफल बनाने पिछड़ा वर्ग समाज के सदस्य रैली की शक्ल में हाथों में तख्ती लेकर जगदलपुर शहर का भ्रमण किया. शहर के संजय मार्केट, गोल बाजार और में रोड में अधिकतर दुकानें बंद रही. पिछड़ा वर्ग समाज के संभागीय अध्यक्ष तरुण सिंह धाकड़ ने कहा कि विधानसभा-लोकसभा के बाद छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव आगामी दिनों में होगा. इस चुनाव में पिछड़ा वर्ग समाज की सीटों को काटा गया है. आरक्षण की प्रक्रिया में पिछड़ा वर्ग समाज को नुकसान झेलना पड़ा है. इसके कारण पिछड़ा वर्ग समाज ने आज बस्तर संभाग बंद करने का आह्वान किया. यदि धरना प्रदर्शन, बस्तर बंद और चक्काजाम के बाद भी पिछड़ा वर्ग समाज की मांगों को सरकार पूरा नहीं करेगी तो आगामी दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा.

पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार, राजस्थान-बीकानेर में रंजिशन युवक की हत्या कर रेल की पटरियों पर रखा शव

बीकानेर। बीकानेर के महाजन थाना क्षेत्र में युवक की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। दरअसल शुक्रवार रात को रेल की पटरियों पर शेरपुरा निवासी सुनील मेघवाल का शव मिला था। पहले पुलिस आत्महत्या का मामला समझकर जांच कर रही थी। घटनास्थल के पास मृतक की बोलेरो गाड़ी भी लावारिस हालत में मिली, जिसमें खून के धब्बे मौजूद थे। यह गाड़ी मोखमपुरा के पास से बरामद हुई। मृतक के पिता ओमप्रकाश मेघवाल ने इस मामले में हत्या की आशंका जताते हुए महाजन थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनका बेटा शुक्रवार शाम से लापता था और रात को उसका शव मिलने की सूचना मिली। पुलिस ने सुनील के दोस्तों से पूछताछ शुरू की तो सामने आया कि उसे आखिरी बार नेतराम जाखड़ के साथ देखा गया था। मामला संदिग्ध प्रतीत होने पर पुलिस ने आरोपी नेतराम जाखड़, निवासी शेरपुरा को गिरफ्तार कर लिया। महाजन थाना प्रभारी कश्यप सिंह ने जानकारी दी कि आरोपी से पूछताछ जारी है और जल्द ही हत्या के कारणों का खुलासा किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में आपसी रंजिश का मामला सामने आ रहा है। फिलहाल महाजन थाना पुलिस नेतराम जाखड़ से पूछताछ कर मामले की जांच में जुटी हुई है।

मदन राठौड़ का गहलोत पर तंज, राजस्थान-अल्पमत सरकार के सहयोगी विधायकों को खुश करने बनाए थे नए जिले

जयपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने गहलोत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि गहलोत अपनी अल्पमत सरकार को सहयोग करने वाले विधायकों को खुश करने के लिए आनन-फानन में नए जिलों की घोषणा कर दी थी। इतना ही नहीं, गहलोत ने पूर्व सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में समिति तो गठित की, लेकिन नए जिलों की घोषणा के बाद स्वयं रामलुभाया ने आश्चर्य व्यक्त किया था। इसका मतलब साफ है कि गहलोत ने समिति को भी अंधेरे में रखकर विधायकों को खुश करने के लिए जिलों की रेवडियां बांटी थी ताकि उनकी अस्थिर सरकार को सहारा मिल सकें। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि भाजपा सरकार ने सभी जिलों की समीक्षा करने के बाद भूपपूर्व प्रशासनिक अधिकारी ललित के पंवार की अध्यक्षता में समिति का गठन किया। मंत्रीमंडल की समिति बनाई और इनकी रिपोर्ट के बाद कैबिनेट बैठक में 9 जिलें एवं 3 संभाग समाप्त करने का प्रस्ताव किया है। समिति के साथ भाजपा सरकार ने राजस्थान की भौगोलिक, सांस्कृतिक और जनसंख्या के आधार पर जनता की मांग को देखते हुए 41 जिले और सात संभाग रखने का फैसला किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि गहलोत सरकार ने नए जिले तो घोषित कर दिए, लेकिन उन जिलों को चलाने के लिए ना तो आर्थिक प्रबंधन किया और ना ही उनके कार्यालय संसाधन आदि की व्यवस्था की। गहलोत तो 5 साल तक सरकार बचाने में जुटे रहे। सचिन पायलट के बीच शीत युद्ध जनता के सामने है। गहलोत और पायलट दोनों अपने खेमों के विधायकों को लेकर होटलों में कैम्प चलाते रहे। ऐसे में गहलोत विधायकों को संतुष्ट करने में जुटे रहे और गहलोत सरकार ने बिना गहन चिंतन किये चुनावी आचार संहिता लगने से एक दिन पूर्व अचानक नए जिलों की घोषणा कर दी। गहलोत ने ऐसे भी नए जिले बना दिए जिसकी कभी किसी ने कोई मांग तक नहीं की। क्या था अशोक गहलोत ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि हमारी सरकार द्वारा बनाए गए नए जिलों में से 9 जिलों को निरस्त करने का भाजपा सरकार का निर्णय अविवेकशीलता एवं केवल राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है। हमारी सरकार के दौरान जिलों का पुनर्गठन करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में 21 मार्च 2022 को समिति बनाई गई थी जिसको दर्जनों जिलों के प्रतिवेदन प्राप्त हुए। इन्हीं प्रतिवेदनों का परीक्षण कर समिति ने अपनी रिपोर्ट दी,. जिसके आधार पर नए जिले बनाने का निर्णय किया गया। मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य बन गया, परन्तु प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन उस अनुपात में नहीं हुआ था। राजस्थान से छोटा होने के बाद भी मध्य प्रदेश में 53 जिले हैं। नए जिलों के गठन से पूर्व राजस्थान में हर जिले की औसत आबाादी 35.42 लाख व क्षेत्रफल 12,147 वर्ग किलोमीटर था (हालांकि त्रिपुरा राज्य का क्षेत्रफल 10,492 वर्ग किलोमीटर, गोवा राज्य का क्षेत्रफल 3,702 वर्ग किलोमीटर, दिल्ली केन्द्र शासित प्रदेश का क्षेत्रफल 1,484 वर्ग किलोमीटर है) जबकि नए जिले बनने के बाद जिलों की औसत आबादी 15.35 लाख व क्षेत्रफल 5268 वर्ग किलोमीटर हो गया था। जिले की आबादी व क्षेत्र कम होने से शासन-प्रशासन की पहुंच बेहतर होती है एवं सुविधाओं व योजनाओं की बेहतर डिलीवरी सुनिश्चित हो पाती है। छोटी प्रशासनिक इकाई होने पर जनता की प्रतिवेदनाओं का निस्तारण भी शीघ्रता से होता है। भाजपा सरकार द्वारा जिन जिलों को छोटा होने का तर्क देकर रद्द किया है वो भी अनुचित है। जिले का आकार वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर होता है। हमारे पड़ोसी राज्यों के जिले जैसे गुजरात के डांग (2 लाख 29 हजार), पोरबंदर (5 लाख 85 हजार) एवं नर्बदा (5 लाख 91 हजार), हरियाणा के पंचकुला (5 लाख 59 हजार) एवं चरखी दादरी (लगभग 5 लाख 1 हजार), पंजाब के मलेरकोटला (लगभग 4 लाख 30 हजार), बरनाला(5 लाख 96 हजार) एवं फतेहगढ़ साहिब (6 लाख) जैसे कम आबादी वाले जिले हैं। कम आबादी वाले जिलों में सरकार की प्लानिंग की सफलता भी ज्यादा होती है। छोटे जिलों में कानून व्यवस्था की स्थिति को बहाल रखना भी आसान होता है क्योंकि वहां पुलिस की पहुंच अधिक होती है। परिस्थितियों के आधार पर जिलों की आबादी में भी अंतर होना स्वभाविक है जैसे उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले की आबादी करीब 60 लाख है जबकि चित्रकूट जिले की आबादी 10 लाख है। परन्तु सरकार के लिए प्रशासनिक दृष्टि से छोटे जिले ही बेहतर लगते हैं। सरकार की तरफ से एक तर्क यह दिया जा रहा है कि एक जिले में कम से कम 3 विधानसभा क्षेत्र होने चाहिए जबकि भाजपा द्वारा 2007 में बनाए गए प्रतापगढ़ मे परिसीमन के बावजूद भी केवल दो विधानसभा क्षेत्र हैं। सरकार द्वारा जहां कम दूरी का तर्क दिया जा रहा है वो भी आश्चर्यजनक है क्योंकि डीग की भरतपुर से दूरी केवल 38 किमी है जिसे रखा गया है परन्तु सांचौर से जालोर की दूरी 135 किमी एवंअनूपगढ़ से गंगानगर की दूरी 125 किमी होने के बावजूद उन जिलों को रद्द कर दिया गया। हमारी सरकार ने केवल जिलों की घोषणा ही नहीं की बल्कि वहां कलेक्टर, एसपी समेत तमाम जिला स्तरीय अधिकारियों की नियुक्ति दी एवं हर जिले को संसाधनों के लिए बजट भी दिया। हम भाजपा सरकार द्वारा उठाए गए इस अदूरदर्शी एवं राजनीतिक प्रतिशोध के कारण लिए गए निर्णय की निंदा करते हैं। “”हमारी सरकार द्वारा बनाए गए नए जिलों में से 9 जिलों को निरस्त करने का भाजपा सरकार का निर्णय अविवेकशीलता एवं केवल राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है।    हमारी सरकार के दौरान जिलों का पुनर्गठन करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में 21 मार्च 2022 को समिति बनाई गई…””     — Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) December 28, 2024

रायगढ़ में अवैध कबाड़ पर पुलिस ने कसा शिकंजा, 1.87 लाख रुपए का स्क्रैप किया जब्त, 2 गिरफ्तार

रायगढ़ जिले में अवैध कबाड़ परिवहन के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. कार्रवाई में आरोपियों के पास से 2 लाख रुपए के करीब का स्क्रैप जब्त किया गया है. पहली कार्रवाई 28 दिसंबर को  मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर  पुलिस टीम ने सलासर चौक के पास माजदा वाहन (क्रमांक CG11BM-6416) को रोका. जांच में वाहन में 4 टन 500 किलोग्राम कबाड़ पाया गया, जिसकी अनुमानित कीमत ₹1.41 लाख है. वाहन चालक परदेशी यादव (32 वर्ष), निवासी छिंदमुडा, जिला सक्ती, कबाड़ से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका. दूसरी कार्रवाई 29 दिसंबर को पुलिस ने ग्राम गेरवानी में मुखबिर की सूचना पर टाटा माजदा (क्रमांक CG13AR-1693) को रोका. वाहन में 2 टन 120 किलोग्राम कबाड़ मिला, जिसकी कीमत 46,000 रुपए है. वाहन चालक रायगढ़ निवासी नामधारी विश्वकर्मा (32 वर्ष) भी कबाड़ परिवहन के लिए वैध दस्तावेज नहीं दिखा सका. आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज दोनों मामलों में पुलिस ने कुल 6 टन 620 किलोग्राम कबाड़ और दो वाहनों को जब्त किया है. दोनों आरोपियों के खिलाफ पूंजीपथरा थाना में धारा 35(क)(ड) BNSS/303(2) BNS के तहत मामले दर्ज किए गए हैं.

सड़कों को लेकर विभाग जल्द शुरू करेगा पायलेट प्रोजेक्ट, छत्तीसगढ़-1 जनवरी से लागू होगा नया एसओआर

रायपुर। लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने सड़क एवं सेतु कार्य की नवीन दर अनुसूची (SOR) का विमोचन किया। राज्य शासन के लोक निर्माण विभाग द्वारा 2015 से प्रचलित पुराने एसओआर को अद्यतन किया गया है। नए एसओआर में नई मशीनरी और निर्माण की नई तकनीकों को भी शामिल किया गया है। इनसे गुणवत्तापूर्ण कार्यों के साथ ही ठेकेदारों का वित्तीय जोखिम कम होगा। राज्य में 1 जनवरी 2025 से नया एसओआर लागू होगा। सड़कों के प्रभावी संधारण के लिए छत्तीसगढ़ में भी पी.बी.एम.सी./ओ.पी.आर.एम.सी. (Peformance Based Maintenance Contract/Output and Performance Based Maintenance Contract) लागू किया जाएगा। इसके लिए विभाग द्वारा जल्दी ही पायलेट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने नए एसओआर के विमोचन के मौके पर आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और उन्हें समय-सीमा में पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नए एसओआर के लागू होने के बाद इनमें और आसानी होगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रचलित एसओआर 1 जनवरी 2015 से लागू है। उस समय इसमें 2014 में प्रचलित श्रमिकों की दर, सामग्री की दर एवं मशीनरी की दर शामिल की गई थी, जिनमें अब दस वर्षों के बाद बहुत अधिक परिवर्तन आ चुका है। नवीन दर अनुसूची वर्तमान में प्रचलित श्रमिकों की दर, सामग्रियों की दर एवं मशीनरी की दर के आधार पर तैयार किया गया है। उप मुख्यमंत्री साव ने बताया कि वर्ष-2015 में जारी की गई दर अनुसूची उस समय प्रचलित सभी टैक्सेस (Taxes) को समावेशित करते हुये तैयार की गई थी। नए एसओआर में देश में 1 जुलाई 2017 से लागू जी.एस.टी. को समाहित किया गया है। ठेकेदार अपनी निविदा दर जी.एस.टी. सहित देंगे जिससे ठेकेदार को पृथक से जी.एस.टी. का भुगतान नहीं करना होगा, परन्तु कार्य की लागत में जी.एस. टी. का प्रभाव सम्मिलित रहेगा। दरों को जी.एस.टी. के प्रभाव के बिना रखे जाने से समय-समय पर जी.एस.टी. की दरों में होने वाले परिवर्तन के कारण ठेकेदार को कार्य करने में जोखिम नहीं रहता है। जी.एस.टी. का प्रभाव सम्मिलित प्रचलित जी.एस.टी. की दरों को प्राक्कलन में जोड़ा जाएगा। ऐसा करने से ठेकेदारों पर वित्तीय जोखिम नहीं आएगा। साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि विगत 10 वर्षों में कई नवीन तकनीक (New technology), नए मटेरियल एवं आई.आर.सी. द्वारा विभिन्न कार्यों की कार्यविधि में परिवर्तन किया गया है। इन नवीन तकनीकों और मटेरियल्स के उपयोग का प्रावधान भी नवीन एस.ओ.आर. में किया गया है। इनमें सीमेंट एवं केमिकल से स्वाइल स्टेबलाईजेशन, पेव्हमेंट व्हाइट टॉपिंग, रोड साइनेज में एल्युमिनियम कम्पोजिट मटेरियल शीटिंग का उपयोग, प्रीकास्ट आर.सी.सी. ड्रेन, प्रीकास्ट बाक्स कल्वर्ट, फाउंडेशन कार्य में आर.सी.सी. के उच्च ग्रेड एम-40, एम-45, एम-50 का उपयोग, सब-स्ट्रक्चर कार्य में प्री-स्ट्रेसिंग, बम्बू क्रैश बैरियर और नॉइज बैरियर जैसी नई चीजें शामिल हैं। नवीन दर अनुसूची लागू होने से निर्माण कार्यों के डी.पी.आर./ प्राक्कलन में कार्य लागत का आंकलन वास्तविक होगा एवं कार्यों हेतु प्रशासकीय स्वीकृति की जाने वाली राशि कार्य करते समय पुनरीक्षित स्वीकृति की आवश्यकता कम होगी। कार्यों की गुणवत्ता एवं समय-सीमा में पूर्ण करने में सार्थक परिणाम मिलेगा। साव ने बताया कि सड़कों के संधारण के लिए वर्तमान पद्धति में सड़क के वर्षा ऋतु में क्षतिग्रस्त होने की संभावना के अनुसार पूर्वानुमान लगाकर निविदाएं आमंत्रित कर ठेकेदारों का चयन कर संधारण कार्य किया जाता है। कई बार ऐसी स्थिति होती है कि सड़क खराब रहती है, परन्तु संधारण हेतु एजेंसी उपलब्ध नहीं होने के कारण सड़कों के गड्ढे भरने एवं संधारण में विलम्ब होता है। कई बार एजेंसी निर्धारित होने के बाद भी ठेकेदार द्वारा संधारण कार्य समय पर नहीं करने के कारण भी सड़कें गड्ढायुक्त एवं क्षतिग्रस्त रहती हैं।

लैपटॉप या विंडोज कंप्यूटर में स्क्रीनशॉट लेने के स्मार्ट तरीके

हम सभी ने मोबाइल में स्क्रीन शॉट तो लिया हैं परन्तु आज हम माइक्रोसॉफ्ट के प्लेटफॉर्म में स्क्रीन शॉट की बात करेंगे। पहले पूरे स्क्रीन को कैपचर करना, फिर उसे माइक्रोसॉफ्ट पेंट ऐप में पेस्ट करना। कहीं से भी यह प्रक्रिया सुगम नहीं लगती। इसके बाद हमने स्क्रीनशॉट लेने के और तरीके के बारे में खोजबीन शुरू की। क्या आपको पता है कि विंडोज डिवाइस पर स्क्रीनशॉट लेने कई बेहतर तरीके हैं। 1. पूरे स्क्रीन के स्क्रीनशॉट को फाइल पर सेव करने का तरीका विंडोज पर पूरे स्क्रीन के स्क्रीनशॉट को सीधे फाइल में स्टोर ऐसे करें 1. विंडोज बटन के बाद प्रिंट स्क्रीन को दबाएं। ऐसे करने के बाद स्क्रीनशॉट आपके कंप्यूटर के पिक्चर्स लाइब्रेरी में स्टोर हो जाएगा। 2. स्क्रीनशॉट खोजने के लिए एक्सप्लोरर को लॉन्च करें। इसके बाद बायें वाले हिस्से में पिक्चर्स पर क्लिक करें। अब स्क्रीनशॉट फोल्डर को खोलें, यहां पर आपको स्क्रीनशॉट मिल जाएंगे। 2. स्क्रीनशॉट को क्लिपबोर्ड पर सेव करने का तरीका आसानी से स्क्रीनशॉट लेने के लिए इस तरीके को अपनाएं 1. प्रिंट स्क्रीन को दबाएं। यह स्क्रीन को क्लिपबोर्ड पर कॉपी कर लेता है। 2. अब एमस पेंट, वर्ड या किसी ऐसे ऐप को खोलें जो इमेज को हैंडल कर सकता है। 3. अब कण्ट्रोल प्लस वी को दबाएं। इसके बाद ऐप पर स्क्रीनशॉट को पेस्ट कर दें। 4. अब आप इस फाइल को अपनी पसंद की जगह पर स्टोर कर सकेंगे। 3. ओपन विंडोज का स्क्रीनशॉट लेने का तरीका अगर आप किसी ऐप, या विंडो का स्क्रीनशॉट लेना चाहते हैं तो इस तरीके को अपनाएं। 1. जिस ऐप का स्क्रीनशॉट लेना चाहते हैं उसे खोलें। सुनिश्चित करें कि वह ऐप बैकग्राउंट नहीं फोरग्राउंड में है, यानी उस ऐप का पेज दिख रहा है। 2. अब ऑल्ट प्लस प्रिंट स्क्रीन को दबाएं। 3. अब एमएस पेंट या अपनी पसंद के किसी भी ऐप खोलें। 4. कण्ट्रोल प्लस वी को दबाएं। 5. ऐसा करने के बाद ओपन विंडो का स्क्रीनशॉट पेंट में स्टोर हो जाएगा। इसके बाद आप स्क्रीनशॉट को अपनी पसंद के किसी भी जगह पर स्टोर कर सकेंगे।  

रोहित शर्मा सिडनी में लेंगे संन्यास, इस दिन खेलेंगे करियर का आखिरी मैच?

मुंबई मेलबर्न टेस्ट में टीम इंडिया की हार के बाद बड़ी खबर सामने आ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रोहित शर्मा जल्द टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने वाले हैं. दावा है कि रोहित शर्मा सिडनी टेस्ट के बाद संन्यास ले लेंगे. सिडनी टेस्ट का आगाज 3 जनवरी से होगा. ये मुकाबला अगर पूरे पांच दिनों तक चला तो 7 जनवरी रोहित शर्मा के टेस्ट करियर का आखिरी दिन हो सकता है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के उच्च अधिकारियों और चयनकर्ताओं के बीच रोहित की टीम में जगह को लेकर चर्चाएं चल रही हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कप्तान चयनकर्ताओं को मनाने की कोशिश करेंगे कि अगर भारत WTC फाइनल में पहुंचता है तो उन्हें खेलने दिया जाए. हालांकि, इसके होने की संभावना कम है, इसलिए सिडनी में उनका आखिरी मैच हो सकता है. रोहित का आखिरी टेस्ट सिडनी में? टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बीसीसीआई और चयनकर्ता रोहित शर्मा के संन्यास की बातें करने लगे हैं. लेकिन टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा सेलेक्टर्स को मनाने में जुटे हैं. रोहित शर्मा दरअसल वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलना चाहते हैं, अगर टीम इंडिया पहुंची तो वो मुकाबला उनका आखिरी मैच हो सकता है. वैसे इसकी संभावना कम है, ऐसे में सिडनी रोहित का आखिरी टेस्ट मैच हो सकता है. बड़ी बात ये है कि रोहित शर्मा पर ये रिपोर्ट मेलबर्न टेस्ट में हार के तुरंत बाद आई है. मेलबर्न टेस्ट में टीम इंडिया को 184 रनों से हार मिली. एक समय ऐसा था जब टीम इंडिया ये टेस्ट ड्रॉ करा सकती थी. टी ब्रेक तक भारतीय टीम के 3 ही विकेट गिरे थे लेकिन इसके बाद ऋषभ पंत एक खराब शॉट खेलकर आउट हुए और फिर भारतीय पारी ताश के पत्तों की तरह ढह गई. यशस्वी जायसवाल ने 84 रनों की पारी खेली उनके अलावा कोई और बल्लेबाज विकेट पर टिकने की ज़हमत नहीं दिखा सका. ढलान पर रोहित का टेस्ट करियर कप्तान रोहित शर्मा का खेल टेस्ट क्रिकेट में लगातार नीचे की तरफ जा रहा है. घर पर न्यूजीलैंड के खिलाफ 3 मैचों सीरीज में टीम इंडिया के क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा. इस सीरीज की 3 मैचों में कप्तान के बल्ले से महज 91 रन निकले थे. मौजूदा सीरीज में रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने तीन मैच खेला है और दो में हार मिली. 3 मैच की 5 पारी में उन्होंने सिर्फ 31 रन बनाए हैं. उन्होंने 3, 6, 10, 3 और अब 9 रन बनाए हैं. रोहित शर्मा के बल्ले से 15 रन तक का स्कोर नहीं आया. रोहित शर्मा का शर्मनाक प्रदर्शन रोहित शर्मा का ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बुरा हाल है. ये खिलाड़ी इस सीरीज में 3 मैचों में 31 ही रन बना सका है. रोहित का बैटिंग एवरेज 6.20 है. रोहित क्रीज पर टिकने के लिए काफी संघर्ष कर रहे हैं. मेलबर्न टेस्ट में तो उनका एक फैसला टीम इंडिया पर बहुत भारी पड़ा. उन्होंने केएल राहुल को ओपनिंग से हटाकर खुद वो जगह ली और ना तो वो चले और ना ही केएल राहुल रन बना पाए. केएल राहुल तीसरे नंबर पर खेलते हुए दोनों पारियों में फेल रहे. रोहित शर्मा की बैटिंग देखकर ऐसा लग रहा है कि अब टेस्ट क्रिकेट में उनके दिन ज्यादा बचे नहीं हैं. इसीलिए अब उनके संन्यास की खबरें आने लगी हैं.  

आंखों के नीचे डार्क सर्कल खत्म करने के घरेलू और असरदार उपाय

डार्क सर्कल पीछे कई कारण हो सकते हैं। जिनमें सोने, हार्मोन्स में परिवर्तन होने, अव्यवस्थित लाइफस्टाल होने या फिर हेरेडेट्री होने की वजह से भी आंखों के नीचे काले घेरे बन जाते हैं। इसके उपायों के लिए बाजार में कई बहुत से ऐसे रासायनिक उत्पाद मौजूद है जो डार्क सर्कल को खत्म करने में कारगर है परंतु सेंसटिव स्किसन वाले इन उत्पादों को यूज नहीं कर पाते हैं। ऐसे में इन घरेलू नुस्खों को अपनाकर डार्क सर्कल्स को दूर किया जा सकता है: 1. एक खीरा लें और इसे ब्लेंड कर लें। अब इसके गूदे में एक चम्मच एलोवेरा जेल मिलाएं और पेस्ट बनाने के लिए इसे फिर से ब्लेंड करें। अब इस पेस्ट को डार्क सर्कल पर लगाएं और 15 मिनट के लिए लगा रहने दें। अब पानी से धो लें। 2. डार्क सर्कल दूर करने के लिए टमाटर सबसे कारगर उपाय है. ये नेचुरल तरीके से आंखों के नीचे के काले घेरे को खत्म करने का काम करताहै. साथ ही इसके इस्तेमाल से त्वचा भी कोमल और फ्रेश बनी रहती है. टमाटर के रस को नींबू की कुछ बूंदों के साथ मिलाकर लगाने से जल्दी फायदा होता है. 3. डार्क सर्कल दूर करने के लिए आलू का भी प्रयोग किया जा सकता है. आलू के रस को भी नींबू की कुछ बूंदों के साथ मिला लें. इस मिश्रण को रूई की सहायता से आंखों के नीचे लगाने से काले घेरे समाप्त हो जाएंगे. 4. ठंडे टी-बैग्स के इस्तेमाल से भी डार्क सर्कल जल्दी समाप्त हो जाते हैं. टी-बैग को कुछ देर पानी में डुबोकर रख दें. उसके बाद इसे फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें. कुछ देर बाद इसे निकालकर आंखों पर रखकर लेट जाएं. 10 मिनट तक रोज ऐसा करने से फायदा होगा. 5. ठंडे दूध के लेप से भी आंखों के नीचे का कालापन दूर हो जाता है. कच्चे दूध को ठंडा होने के लिए रख दें. उसके बाद कॉटन की मदद से उसे आंखों के नीचे लगाएं. ऐसे दिन में दो बार करने से जल्दी फायदा होगा. 6. संतरे के छिलके को धूप में सुखाकर पीस लें. इस पाउडर में थोड़ी सी मात्रा में गुलाब जल मिलाकर लगाने से काले घेरे खत्म हो जाएंगे. 7. दही से काले घेरे कम करने के लिए दो चम्मच दही में दो चम्मच नींबू का रस मिलाएं। अब इस पेस्ट को आंखों के नीचे डार्क सर्कल पर लगाएं और 10-15 मिनट के लिए लगा छोड़ दें। अब पानी से इसे धो लें। बेहतरीन परिणाम के लिए इस पेस्ट को हफ्ते में दो बार लगाएं।  

RBI ने साल 2024 में इन बैंकों का किया लाइसेंस रद्द, यहाँ देखें पूरी लिस्ट

मुंबई  ग्राहकों के हित में और नियमों का उल्लंघन होने पर भारतीय रिजर्व बैंक हमेशा सख्त कदम उठाता है। इस साल आरबीआई ने 11 बैंकों का लाइसेंस रद्द कर दिया है। ये बैंक हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं। जमा राशि स्वीकार करने और लेनदेन पर भी रोक लग चुकी है। आरबीआई ने एक नोटिस जारी करते हुए इन सभी बैंकों का चालू रहना जमाकर्ताओं के लिए हानिकारक बताया था। इनके पास  प्राप्त पूंजी और कमाई की संभावनाएं नहीं थी। ऐसे में बैंकिंग में अधिनियम 1949 के कई प्रावधानों का उल्लंघन होता है। यह बैंक अपने वित्तस्थित के साथ जमा कर्ताओं को पुनर्भुगतान करने में भी असमर्थ थे। इसलिए सार्वजनिक हित को देखते हुए इन सभी बैंकों का लाइसेंस रद्द किया था। साल 2024 में इन बैंकों का लाइसेंस रद्द हुआ     दुर्गा को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड, विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश     श्री महालक्ष्मी मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, दाभोई, गुजरात     द हिरीयुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड हिरीयुर, कर्नाटक     जय प्रकाश नारायण नगरी सहकारी बैंक लिमिटेड, बसमथनगर, महाराष्ट्र     सुमेरपुर मर्केंटाइल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सुमेरपुर, पाली राजस्थान     पूर्वांचल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, गाजीपुर, यूपी     द सिटी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मुंबई, महाराष्ट्र     बनारस मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, वाराणसी     शिम्शा सहकारी बैंक नियमित, मद्दूर, मंडया, कर्नाटक     उरावकोंडा को-ऑपरेटिव टाउन बैंक लिमिटेड, आंध्र प्रदेश     द महाभैरब को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड, तेजपुर, असम क्या ग्राहकों को मिले पैसे? जानें नियम (RBI Rules) DICGC अधिनियम 1961 के प्रावधानों के तहत जब भी किसी बैंक का लाइसेंस रद्द होता है। तब प्रत्येक ग्राहक जमा बीमा और गारंटी निगम से 5 लाख रुपये की मौद्रिक सीमा तक जमा राशि की जमा बीमा दावा राशि प्राप्त करने का हकदार होता है।

योगा करने से पहले और बाद में इन बातों का रखें ध्यान

योग संस्कृत शब्द ‘यूजी’ से बना है। योग शब्द का शाब्दिक अर्थ- जुड़ना या मिलना होता है। योग से सेहत को बेशुमार लाभ पहुंचता है। नियमित योग करने से दिमाग को शांति मिलती है और तनाव कम होता है। लेकिन योग करते समय कुछ बातें ध्यान में रखना बेहद जरूरी होता है। शारीरिक और मानसिक व्यायाम के रूप में योग पूरी दुनिया में जोर-शोर से अपनाया जा रहा है। भारत में प्राचीन काल से लोग योग करते आए हैं। योग के लिए नियम और अनुशासन बेहद जरूरी हैं। नियमित रूप से और सही तरीके से योग करना सेहत के लिए न सिर्फ फायदेमंद होता है बल्कि घातक बीमारियों को खत्म करने में भी मददगार होता है। कठिन आसान से न करें शुरुआत हल्के आसन के चयन से योगासन की शुरूआत करनी चाहिए। पहले से प्रैक्टिस के बावजूद भी आसान योगासन शुरूआत करें। बिना शरीर को तैयार किए आप कठिन योग करने लगेंगे तो चोट लगने का डर रहता है। सही समय योग सूरज उगने से पहले और सूर्य डूबने के बाद किसी भी समय किया जा सकता है लेकिन दिन के समय योग न करें। योगासन सुबह के समय करने से अधिक लाभ मिलता है। मगर फिर भी अगर आप किसी कारण से सुबह योग नहीं कर पाएं तो शाम या रात को खाना खाने से आधा घंटा पहले भी कर सकते हैं। यह ध्यान रखें कि आपका पेट भरा न हो। इसलिए भोजन करने के 3-4 घंटे बाद और हल्का नाश्ता लेने के 1 घंटे बाद आप योगास करें। योगासन के दौरान न पीएं ठंडा पानी योग करते समय बीच में ठंडा पानी पीना आपके लिए खतरनाक हो सकता है। योग के दौरान शारीरिक गतिविधि के बाद शरीर गर्म हो जाता है। ऐसे में ठंडा पानी पीने से सर्दी जुकाम, कफ और एलर्जी की शिकायत हो सकती है। इसलिए योगासन के समय और बाद में नार्मल पानी ही पीएं। बीमारी में न करें अगर आपको कोई भी गंभीर समस्या, जोड़ों, कमर, घुटनों में अधिक दर्द है तो योग करने के लिए डॉक्टर से सलाह लें। इसके अलावा योग करने के दौरान बाथरूम नहीं जाना चाहिए बल्कि अपने शरीर का पानी पसीने के जरिए बाहर निकलना चाहिए। गलत पोज न करें इन्स्ट्रक्टर द्वारा बताए अनुसार ही योग करें। गलत आसन करने से कमर दर्द, घुटनों में तकलीफ या मसल्स में खिंचाव हो सकता है। इसके अलावा पीठ, घुटने या मसल्स की प्रॉब्लम हो तो योग करने से पहले ट्रेनर से सलाह जरूर ले। तुरंत बाद न नहाएं योगासन करने के तुरंत बाद न नहाएं बल्कि कुछ समय बाद स्नान करें। क्योकि किसी भी व्यायाम या अन्य शारीरिक गतिविधि के बाद शरीर गर्म हो जाता है और आप एकदम से नहाएंगे तो सर्दी-जुकाम, बदन दर्द जैसी तकलीफ हो सकती है। इसलिए योग करने के एक घंटे बाद ही नहाएं। योगासन के समय ध्यान केंद्रित करना योगासन करते समय अपने मोबाइल फोन ऑफ कर दें। क्योंकि इसे करते समय आपका ध्यान इधर-उधर नहीं होना चाहिए। इसके अलावा हंसी मजाक का माहौल न बनाए इससे आपसे योग में कोई गलत स्टेप हो सकता है। योग के लिए एक्सपर्ट से लें सलाह अक्सर लोग योग  करने के लिए टीवी या कोई किताब पढ़ने लगते हैं लेकिन योग हमेशा किसी एक्सपर्ट की सलाह से ही करना चाहिए। इसके अलावा अगर आप किसी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए योग कर रहें तो भी एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें।  

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