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यूएस: एच-1 बी वीजा, डोनाल्ड ट्रंप का बना सर दर्द , एलन मस्क ने किया समर्थन

US: H-1B visa, Donald Trump’s headache, Elon Musk supported अमेरिका में एच-1बी वीजा को लेकर बहस जारी है। ट्रंप समर्थक इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं, वहीं ट्रंप के करीबी उद्योगपति एलन मस्क ने एच-1बी वीजा का समर्थन किया है। अब इस बहस में अमेरिका के वरिष्ठ और प्रभावशाली सांसद बर्नी सैंडर्स भी शामिल हो गए हैं। बर्नी सैंडर्स ने मस्क पर आरोप लगाया है कि वह एच-1बी वीजा का समर्थन सिर्फ विदेशों से सस्ते कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए कर रहे हैं। एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशों से कुशल कर्मचारियों को नौकरी पर रख सकते हैं। ‘श्रम लागत कम करना चाहते हैं मस्क’ बर्नी सैंडर्स लंबे समय से कर्मचारियों के अधिकारों के समर्थक रहे हैं। गुरुवार को एक बयान में कहा कि एच-1बी वीजा कुशल कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए नहीं है बल्कि सस्ते कर्मचारियों को नौकरी पर रखने और श्रम लागत कम करने के लिए है। बर्नी सैंडर्स ने दावा किया कि इस वीजा के जरिए अमेरिकी अरबपतियों को फायदा हो रहा है और टेस्ला जैसी कंपनियां कुशल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशों, जैसे भारतीय कर्मचारियों को नौकरी दे रही हैं। बर्नी सैंडर्स ने मांग की कि एच-1बी वीजा में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि अमेरिकी कर्मचारियों को इसका नुकसान न झेलना पड़े। अमेरिकी सांसद ने कहा कि मस्क की कंपनी में बीते साल करीब साढ़े सात हजार अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया, जबकि एच-1बी वीजा धारक कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकाला गया। एलन मस्क ने एच-1बी वीजा का किया था समर्थन गौरतलब है कि एलन मस्क एच-1बी वीजा के समर्थक हैं और उन्होंने इसका समर्थन करते हुए कहा था कि अमेरिका में कुशल कर्मचारियों की कमी है और इस कमी को पूरा करने के लिए एच-1बी वीजा जरूरी है। मस्क ने कहा कि कई इंजीनियर्स इस वीजा के जरिए अमेरिका आए और उन्होंने अमेरिका के विकास में अहम योगदान दिया। मस्क के इस दावे पर भी बर्नी सैंडर्स ने पलटवार किया और कहा कि टेस्ला में कई एच-1बी वीजा धारक अकाउंटेंट और मैकेनिकल इंजीनियर हैं और ये उच्च प्रशिक्षित कर्मचारियों की श्रेणी में नहीं आते हैं। ट्रंप समर्थक भी कर चुके हैं इसका विरोध उल्लेखनीय है कि बीते दिनों ट्रंप समर्थक लॉरा लूमर और स्टीव बैनन आदि ने एच-1बी वीजा का विरोध किया था और दावा किया कि इससे अमेरिकी लोगों की नौकरियां छिन रही हैं। इस पर मस्क ने एच-1बी वीजा का समर्थन किया। डोनाल्ड ट्रंप ने भी मस्क का समर्थन करते हुए एच-1बी वीजा को जारी रखने की बात कही थी।

पानी का टैक्स नहीं भरने वालों के खिलाफ इंदौर नगर निगम दर्ज कराएगा एफआईआर, लगेगा जोर का झटका

इंदौर इंदौर नगर निगम अब जलकर के बकायादारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएगा। इसके लिए छह जनवरी से विशेष मुहिम शुरू की जा रही है। जिन बकायादारों ने बार-बार नोटिस देने के बावजूद जलकर जमा नहीं किया है, ऐसे बड़े बकायादारों की सूची भी तैयार कर ली गई है। अब इनके खिलाफ निगम पुलिस कार्रवाई करेगा। इंदौर निगम सीमा में करीब एक लाख 89 हजार जल कनेक्शन हैं। लगभग 60 हजार कनेक्शन ऐसे हैं जो अनियमित हैं। यानी इन कनेक्शनधारियों ने सालों से नगर निगम में जलकर जमा ही नहीं किया है। यही वजह है कि बकाया राशि करोड़ों रुपये में पहुंच गई। वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की थी इंदौर नगर निगम ने ऐसे कनेक्शनधारियों को राहत देते हुए वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की थी। इसके तहत बकायादारों को बकाया राशि का 50 प्रतिशत भुगतान करके अपना खाता नियमित करवाने की सुविधा दी गई थी। निगम को बकायादारों से जलकर के रूप में 400 करोड़ रुपये से ज्यादा वसूलने हैं। निगम को उम्मीद थी कि वन टाइम सेटलमेंट योजना को अच्छा प्रतिसाद मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और सिर्फ 45 करोड़ रुपये ही निगम के खाते में पहुंचे। शिविर लगाकर जलकर जमा करवाएंगे इसके बाद भी निगम ने बकायादारों को कई अवसर दिए ताकि वे अपना जलकर खाता नियमित करवा सकें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब निगम ने सख्ती बरतते हुए जलकर बकायादारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर ली है। निगम छह जनवरी से इसके लिए विशेष अभियान भी शुरू करेगा। नगर निगम अलग-अलग क्षेत्रों में शिविर लगाकर जलकर जमा कराएगा।

प्रदेश में निवेश बढ़ रहा है, इसके साथ ही हजारों लेागों को रोजगार भी मिल रहा है, तीन महीने में पूरे होंगे दो अहम प्रोजेक्ट

इंदौर मध्यप्रदेश में इंदौर रीजन में तेजी से औद्योगिक इकाईयां पैर पसार रही है। इससे न केवल प्रदेश में निवेश बढ़ रहा है, इसके साथ ही हजारों लेागों को रोजगार भी मिल रहा है। यही कारण है कि मप्र औद्योगिक विकास निगम(एमपीआइडीसी) द्वारा इंदौर रीजन में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रही है। दो वर्ष पूर्व इंदौर में हुई सातवीं ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में तिलगारा(धार) और मोहना(धार) औद्योगिक पार्क प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ था। 282 हेक्टेयर में विकसित हुए इस प्रोजेक्ट 3 हजार करोड़ रुपए के निवेश से 10 लोगों को राेजगार मिलेगा। मोहना औद्योगिक पार्क फरवरी और तिलगारा औद्योगिक पार्क मार्च में पूरा हो जाएगा। धार जिले के आदिवासी अंचल में इस वर्ष इन दोनों प्रोजेक्ट के शुरू होते ही 10 हजार से अधिक लोगाें को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। जहां इंदौर से धार के बीच रेल मार्ग शुरू हो जाएगा। जिले के पेटलावद-बदनावर मार्ग से करीब चार किमी दूर तिलगारा औद्योगिक पार्क आकार ले चुका है। 79 करोड़ रूपये से यह प्रोजेक्ट मार्च माह में पूरा कर लिया जाएगा। कुल मिलाकर आदिवासी अंचल धार में इस प्रोजेक्ट पूरा होते ही 5 हजार से अधिक लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। इस बहुउद्देशीय पार्क में अलग-अलग सेक्टर के उद्योग संचालित होंगे। 10 हेक्टेयर क्षेत्र में हरियाली विकसित की जाएगी। 1.6 हेक्टेयर में पार्किंग बनेगी। लाजिस्टिक के लिए 3.3 हेक्टेयर जमीन आरक्षित की गई है। हालांकि अभी यहां प्लाट आवंटन शुरू नहीं हुआ है। 147.39 हेक्टयर जमीन पर 60 इकाईयां विकसित होगी इंदौर से 25 किमी दूर धार जिले के मोहना में औद्योगिक पार्क काम जनवरी 2022 में शुरू हुआ था। दो फेस में तैयार हो रहे इस प्रोजेक्ट को 61.5 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसमें 147.39 हेक्टयर जमीन पर 60 प्लाट निकाले गए है। जिसमें से 16 प्लाट का आवंटन किया जा चुका है। इस क्षेत्र बहुउद्देशीय पार्क के रूप में विकसित किया गया है, जिसके चलते यहां अलग-अलग कार्य क्षेत्र की इकाईयां शुरू हो सकेगी। एप्रोच रोड, सड़क, बिजली आदि काम पूरे हो चुके है। इस प्रोजेक्ट में 1500 करोड़ रुपये के निवेश आने की संभावना है। इससे 5 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। प्रोजेक्ट फरवरी अंत तक पूरा हो जाएगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीमती शर्मा के स्वास्थ्य का हालचाल जाना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीमती शर्मा के स्वास्थ्य का हालचाल जाना नर्मदा अस्पताल में भर्ती मरीजों से चर्चा भी की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार शाम भोपाल के नर्मदा अस्पताल पहुंचकर वरिष्ठ नेता शैलेन्द्र शर्मा की माता जी और पूर्व मंत्री स्व. लक्ष्मी नारायण शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती लक्ष्मी देवी शर्मा के स्वास्थ्य का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अस्पताल के चिकित्सकों से श्रीमती शर्मा के बेहतर उपचार के संबंध में चर्चा की। उन्होंने श्रीमती शर्मा के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अस्पताल में दाखिल अन्य रोगियों और उनके परिजन से भी चर्चा कर चिकित्सकों को उपचार के लिए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने गुना जिले से चार धाम यात्रा पर गए श्रद्धालुओं में से दुर्घटना में घायल और अस्पताल में भर्ती होकर उपचाररत श्रद्धालु को भी समुचित चिकित्सा सहायता प्रदान करने के निर्देश डॉक्टर्स को दिये।  

महाकुंभ के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया गया, श्रद्धालुओं के लिए तैयार प्रयागराज

महाकुंभ नगर कभी संकरी और खस्ताहाल सड़कों के लिए पहचाने जाने वाले प्रयागराज का आज कायाकल्प हो चुका है। पहले कुंभ 2019 और अब महाकुंभ 2025 को देखते हुए योगी सरकार ने यहां की सूरत ही बदल दी है। 2019 कुंभ के दृष्टिगत जो विकास कार्य हुए, उसे 2025 महाकुम्भ में और विस्तार देते हुए स्थाई कार्यों पर जोर दिया गया है। सनातन आस्था के सबसे बड़े समागम महाकुंभ के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार किया गया है। आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो, इसको देखते हुए इस बार 200 सड़कों का निर्माण और विकास किया गया है। इन सड़कों को 3 लाख पौधों और एक लाख हॉर्टिकल्चर सैंपलिंग से सजाया गया है। कुल मिलाकर महाकुंभ के दौरान जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आएंगे तो यहां की सड़कों और उनके सौंदर्यीकरण की मनमोहक छवि के साथ यादगार अनुभव लेकर वापस जाएंगे। प्रयागराज में महाकुंभ के महा आयोजन को देखते हुए कुल 200 ऐसी सड़कें हैं, जिनका उन्नयन किया गया है। इसमें नई सड़कों का भी निर्माण हुआ है, जबकि सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण भी किया गया है। सड़कों के निर्माण और विकास में तीनों विभागों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें सबसे ज्यादा काम प्रयागराज नगर निगम की ओर से किया गया है, जिसने कुल 78 सड़कों का नव निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण करने में सफलता प्राप्त की है। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 74 और प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने कुल 48 सड़कों का विकास किया है। इसके साथ ही सड़कों का सौंदर्यीकरण भी किया गया है। खासतौर पर विभिन्न तरह के पौधों को यहां सजाया गया है, जबकि हॉर्टिकल्चर सैंपलिंग्स भी की गई है। इन 200 सड़कों पर कुल मिलाकर तीन लाख पौधों को रोपित किया गया है, जबकि एक लाख हॉर्टिकल्चर सैंपलिंग्स को प्लांट किया गया है। इन्हीं सड़कों के माध्यम से श्रद्धालुओं का संगम तक आवागमन सुगम हो सकेगा और उन्हें दिव्य आनंद की अनुभूति प्राप्त होगी। इन सड़कों का निर्माण तीनों विभागों के लिए कतई आसान नहीं रहा है। इसके लिए इन्हें कई तरह की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। उदाहरण के तौर पर निर्माण के दौरान कई ऐसे स्थल थे, जहां पर एंक्रोचमेंट था जिन्हें हटाया गया है। श्रद्धालुओं के साथ ही प्रयागराज वासियों की सुविधा के लिए निर्मित इन सड़कों के विकास के लिए कुल मिलाकर 4426 एंक्रोचमेंट को ध्वस्त किया गया है। इसी तरह, कई स्थलों पर निर्माण को लेकर कोर्ट केस का भी सामना करना पड़ा है। कुल मिलाकर 82 कोर्ट केसेस को रिजॉल्व किया गया है। वहीं, निर्माण के दौरान 4893 इलेक्ट्रिक पोल्स को भी यहां से शिफ्ट करने में सफलता प्राप्त हुई है। इतना ही नहीं, सड़कों के निर्माण के साथ-साथ 170 किमी. लंबी अंडरग्राउंड केबलिंग भी की गई है।  

यूनियन कार्बाइड कचरा जलाने का विरोध: युवक बुरी तरह झुलसे ,कमलनाथ ने चिंता व्यक्त की

Protest against burning of Union Carbide garbage: Youth badly burnt, Kamal Nath expressed concern भोपाल। यूनियन कार्बाइड के कचरे को जलाने के विरोध में आज दो युवकों ने आत्मदाह का प्रयास किया, जिससे वे गंभीर रूप से झुलस गए। घटना ने प्रदेश में एक बार फिर इस विवादित मुद्दे को गर्मा दिया है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए दोनों युवकों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि इस मामले में सभी पक्षों को विश्वास में लेकर ही कोई निर्णय लिया जाए। कमलनाथ ने कहा, “यह मामला अत्यंत संवेदनशील है। मुख्यमंत्री मोहन यादव से मेरा आग्रह है कि जनभावनाओं और जन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही कोई कदम उठाया जाए।” इस मुद्दे पर इंदौर और पीथमपुर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के नेता कचरा जलाने की कार्यवाही का विरोध कर रहे हैं। गौरतलब है कि यूनियन कार्बाइड का यह कचरा लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों का मानना है कि इसे जलाने से पर्यावरण और जन स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है। जनभावनाओं को देखते हुए यह देखना होगा कि सरकार इस विवाद का समाधान कैसे करती है।

केंद्र सरकार ने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर साइन बोर्डों के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए, 24 जनवरी से हाईवे के नियम बदल जाएंगे

नई दिल्ली नए साल की शुरूआत होते ही केंद्र सरकार ने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर साइन बोर्डों के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। ये दिशा-निर्देश 24 जनवरी से प्रभावी होंगे, जिनका उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट, मानकीकृत और समय पर जानकारी प्रदान करना है। इन परिवर्तनों के जरिए दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात को अधिक सुव्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है। स्पीड लिमिट और चेतावनी संकेतक नई व्यवस्था के तहत रंबल स्ट्रिप्स जैसे संभावित खतरनाक स्थानों से पहले संकेतक लगाए जाएंगे, ताकि ड्राइवर को अपनी गति समायोजित करने का समय मिल सके। स्पीड लिमिट की जानकारी हर पांच किलोमीटर पर साइन बोर्डों के माध्यम से दी जाएगी। इन बोर्डों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वाहन चालकों के लिए पढ़ना और समझना आसान हो। मानकीकरण और एकरूपता सड़क परिवहन मंत्रालय ने साइन बोर्डों पर उपयोग किए जाने वाले अक्षरों और संख्याओं के आकार और रंग को मानकीकृत कर दिया है। इस कदम से संकेतकों की एकरूपता बढ़ेगी और उन्हें समझने में आसानी होगी। साथ ही, अलग-अलग वाहनों की गति सीमा को एक ही बोर्ड पर स्पष्ट रूप से दर्शाने की व्यवस्था की गई है। No parking और पैदल यात्री सुरक्षा दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए “नो पार्किंग” बोर्ड हर पांच किलोमीटर पर लगाए जाएंगे। इसके अलावा, पैदल यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, क्रॉसिंग की जानकारी पहले से देने की व्यवस्था की गई है। समग्र सुरक्षा के प्रयास इन दिशा-निर्देशों को तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया गया, जिसने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों और सड़क सुरक्षा के आंकड़ों का गहराई से अध्ययन किया। इसके आधार पर मार्ग संकेतकों को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया: अनिवार्य, चेतावनी और सूचना संबंधी संकेतक।

भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में

मुंबई  भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में हैं। हिंदू बिजनसलाइन की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अंबानी ने रिलायंस जियो के आईपीओ की तैयारियां शुरू कर दी है। कंपनी का आईपीओ 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक इसमें ऑफर ऑफ सेल के साथ-साथ ताजा शेयर भी जारी किए जाएंगे। यह आईपीओ साल की दूसरी छमाही में आ सकता है। हुंडई मोटर इंडिया पिछले साल 27,870.16 करोड़ रुपये का आईपीओ लाई थी जो देश में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस जियो के आईपीओ के लिए प्री-आईपीओ प्लेसमेंट पर शुरुआती बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है। इनवेस्टमेंट बैंकर्स का कहना है कि यह इश्यू बड़ा हो सकता है और इसमें सब्सक्रिप्शन की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। प्री-प्लेसमेंट की राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि इसमें फ्रेश इश्यू का साइज क्या होगा। ओएफएस और फ्रेश इश्यू का हिस्सा कितना होगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। इस बारे में रिलायंस को भेजे ईमेल का कोई जबाव नहीं आया। किस-किस की है हिस्सेदारी सूत्रों का कहना है कि रिलायंस जियो के आईपीओ में ओएफएस कंपोनेंट अहम होगा क्योंकि इससे कई मौजूदा निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचने का मौका मिलेगा। कंपनी में विदेशी निवेशकों की 33 फीसदी हिस्सेदारी है। रिलायंस ने साल 2020 में अबू धाबी इनवेस्टमेंट फंड, केकेआर, मुबादला और सिल्वर लेक जैसे विदेशी फंड्स से 18 अरब डॉलर जुटाए थे। कई ब्रोकरेज का कहना है कि रिलायंस जियो की वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर हो सकती है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कंपनी की नजर 120 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर है। अंबानी एआई सेक्टर में भी बड़ा दांव खेल रहे हैं। एआई लेंग्वेज मॉडल विकसित करने के लिए जियो प्लेटफॉर्म्स ने हाल ही में एनवीडिया से हाथ मिलाया है। टेक के साथ-साथ एआई पुश से रिलायंस जियो दूसरी स्टार्टअप कंपनियों से आगे निकल सकती है। कंपनी को सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज शुरू करने के लिए भी रेगुलेटरी मंजूरी मिल गई है। रिलायंस ने अपने टेलीकॉम, इंटरनेट और डिजिटल बिजनस को मजबूत करने के लिए पिछले पांच साल में अधिग्रहण पर 3 अरब डॉलर खर्च किए हैं। रिलायंस जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर है। अक्टूबर के अंत तक कंपनी के 46 करोड़ सब्सक्राइबर थे। पिछले साल जून में कंपनी ने टैरिफ बढ़ाया था जिसके कारण उसके सब्सक्राइबर्स की संख्या में गिरावट आई है। लेकिन इसके बावजूद वह नंबर 1 बनी हुई है। टैरिफ बढ़ाने से सितंबर तिमाही में कंपनी के मुनाफे में काफी तेजी आई है। इसे लिस्टिंग से पहले 5जी सर्विसेज को मॉनीटाइज करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

सफलता प्राप्त करने के लिए आप को उपयुक्त साफ्टवेयर की आवश्यकता

सफलता की विशेषताओं के बारे में जानना एवं विश£ेषण करना सरल है, परंतु इनको अपने व्यक्तित्व में समाहित करना एक वास्तविक चुनौती है। सफलता की विशेषताओं में सकारात्मक सोच, स्वयं पर विश्वास, साहस, लक्ष्य के प्रति समर्पण, कुशल समय प्रबंधन, ऊर्जा प्रबंधन आदि गुण सम्मिलित होते हैं। इनसे एक सजग व्यक्ति भली-भांति परिचित होता है। हर व्यक्ति इन गुणों को स्वयं में उतारने एवं बनाए रखने का इच्छुक होता है। किंतु जब उसका वास्तविकता से सामना होता है, तो पता चलता है कि इनका अभ्यास करना कठिन है। ऐसा आकांक्षा एवं इच्छाशक्ति के बीच एक बड़ा अंतर होने की वजह से होता है। सफलता के कारकों की सूची काफी लंबी हो सकती है, यदि इनको विभिन्न शीर्षकों-उपर्शीषकों में रखा जाए, परंतु सरल बनाने के क्रम में उनको चार शीर्षकों के अंतर्गत रखना पसंद करता हूं। जिनको सफलता के पहिए की चार तीलियां कहा जा सकता है। ये हैं-मस्तिष्क, समय, ऊर्जा एवं मानवीय संबंध। ईश्वर द्वारा मनुष्य को प्रदान किए गए इन चार बेशकीमती उपहारों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन कर आप जीवन की किसी भी ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं। सफलता की शुरुआत आप के स्वयं की पहचान के साथ होती है। प्रत्येक व्यक्ति जीवन में सफलता, शांति एवं प्रसन्नता हासिल करने एवं उसका अभिवर्धन हासिल करने की असीम क्षमता के साथ ईश्वर का एक अद्वितीय सृजन होता है। स्वयं की क्षमता एवं अद्वितीयता की समझ एवं पहचान एक अद्भुत अनुभव है। मैक्स लुकाडो कहते हैं-आप एक दुर्घटना नहीं हो सकते। आप थोक में पैदा नहीं हुए। आप जैसे तैसे पुर्जों को जोडकर बनाए गए उत्पाद नहीं हैं। आप सर्वशक्तिमान स्त्रष्टा द्वारा जानबूझकर नियोजित, विशिष्ट उपहार में दिए गए तथा बड़े प्यार से इस धरती पर उतारे गए हैं। हममें से हरेक व्यक्ति का इस धरती पर आने का एक उद्देश्य होता है और हर व्यक्ति में अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कुछ अद्वितीयता होती है। फिलहाल इस आलेख में मैं मस्तिष्क प्रबंधन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाल रहा हूं। मानव मस्तिष्क में असीम स्मरणशक्ति और सोचने की क्षमता होती है। विश्व का कोई भी कंप्यूटर एक स्वस्थ मस्तिष्क की बराबरी नहीं कर सकता। यहां तक कि महान वैज्ञानिक आइंस्टीन भी अपने मस्तिष्क के 15 प्रतिशत से अधिक इस्तेमाल का दावा नहीं कर सके थे। इस विश्व में हमारे मस्तिष्क के परे कुछ भी नहीं है। वास्तव में, सिर्फ हमारे मस्तिष्क की वजह से ही हमारे लिए इस विश्व का कोई अर्थ है। हमें बचपन से ही खाना, पहनना, जीवन जीना, बातचीत करना, काम करना और आनंद लेना तो सिखाया जाता है, लेकिन यह नहीं सिखाया जाता कि हमें अपने मन व मस्तिष्क को कैसे इस्तेमाल करना चाहिए, जो हमारे लिए हर चीज को संचालित करता है। कल्पना करें, बिना हमारे मस्तिष्क के इस विश्व में हमारे अधीन अथवा हमारे आसपास की चीज का क्या अर्थ रह जाएगा? निस्संदेह, हमारे लिए अपने मस्तिष्क से परे किसी भी चीज का कोई अर्थ नहीं है। इसलिए हमारी सभी उपलब्धियां हमारे मस्तिष्क के कौशलपूर्ण इस्तेमाल से सीधे संबंधित होती हैं। सफलता की कला वास्तव में हमारे मस्तिष्क के दक्षतापूर्ण संचालन की एक कला है। यहां, यह समझना महत्वपूर्ण है कि साक्षरता एवं शिक्षा में बहुत बड़ा अंतर होता है। एक व्यक्ति बिना साक्षर हुए भी पूर्ण रूप से शिक्षित हो सकता है। अकबर महान इसका एक सर्वोत्तम उदाहरण हैं। बहुत से संत महात्मा एवं धार्मिक गुरु निरक्षर थे, किंतु वे काफी ज्ञानी थे। दूसरी ओर, हमारे देश में या विश्व में कहीं भी साक्षर और उच्च डिग्री प्राप्त लोगों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन उन लोगों की संख्या काफी कम होती है जो उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने तथा इस विश्व को कुछ अर्थपूर्ण योगदान दे जाने के लिए वास्तविक रूप से स्वयं को शिक्षित होने का दावा करते हैं। सच्चे अर्थ में शिक्षा का सीधा संबंध आत्मबोध से होता है। अकादमिक शिक्षा हमें साक्षर और सूचनाओं एवं ज्ञान से समृद्ध बना सकती है, लेकिन उनका इस्तेमाल एवं अर्थवत्ता हमारी वास्तविक शिक्षा की शक्ति पर निर्भर करती है। गैलीलियो का कहना है कि आप व्यक्ति को कुछ भी नहीं सिखा सकते। आप उसे स्वयं के अंदर ढूंढने में केवल सहायता कर सकते हैं। ईश्वर ने पहले से ही हमारे मस्तिष्क को शक्ति प्रदान कर रखी है, हमें सिर्फ इस बात की खोज करनी है कि हम अधिकतम लाभ के लिए उसका कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं। एक सच्चा शिक्षक वही है, जो अपने विद्यार्थी के मस्तिष्क की मौलिकता को मारे नहीं, बल्कि उसे आत्मानुभूति करने में सहायता प्रदान करे। मैं इस संबंध में गौतम बुद्ध के दर्शन में काफी विश्वास करता हूं। वे कहते हैं कि किसी भी चीज पर तब तक विश्वास मत करो, जब तक कि वह तुम्हारे अपने विवेक एवं अपनी सहज बुद्धि को स्वीकार्य न हो, चाहे जहां से तुमने उसे पढ़ा हो, या जिसने भी कहा हो, यहां तक कि मैंने भी कहा हो। इस प्रकार सफलता की मेरी कला का उद्देश्य आप सबको उन गुणों को याद दिलाना है जो पहले से ही आप के मस्तिष्क में गहरे बैठे हुए हैं। आप को सिर्फ अनुभव करने और अपनी उच्च उपलब्धियों के लिए गति प्रदान करने की जरूरत है। यहां यह समझना प्रासंगिक होगा कि हम किसी भी चीज या उससे संबंधित चीज को सही परिप्रेक्ष्य में पहचान, समझ और व्यायाख्यित करने में असमर्थ होंगे, जिससे संबंधित सूचना हमारी स्मृति में न हो। दूसरे शब्दों में, हमें अपने मस्तिष्क से इच्छित परिणाम प्राप्त करने के लिए उपयुक्त मानव साफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार कंप्यूटर बिना उपयुक्त साफ्टवेयर के इच्छित परिणाम नहीं दे सकता, ठीक ऐसी ही स्थिति हमारे मस्तिष्क की होती है। जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए आप को उपयुक्त साफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। सिविल सेवा के परीक्षा के मामले में, आप के व्यक्तित्व में प्रशासनिक गुणों वाले मानव साफ्टवेयर की जरूरत होगी।  

प्रधानमंत्री मोदी आज दिल्ली में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज  दिल्ली में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। वह अशोक विहार के स्वाभिमान अपार्टमेंट में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 1,675 नवनिर्मित फ्लैटों का उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी दो शहरी पुनर्विकास परियोजनाओं-नौरोजी नगर में विश्व व्यापार केंद्र और सरोजिनी नगर में जीपीआरए टाइप-II क्वार्टरों का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा वह द्वारका में सीबीएसई के एकीकृत कार्यालय परिसर का उद्घाटन करेंगे और नजफगढ़ के रोशनपुरा में वीर सावरकर कॉलेज की आधारशिला रखेंगे। पीएम मोदी सभी के लिए आवास की प्रतिबद्धता प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार पीएम मोदी ‘सभी के लिए आवास’ (हाउसिंग फॉर ऑल) की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप 3 जनवरी 2025 को दोपहर करीब 12 बजकर 10 मिनट पर दिल्ली के अशोक विहार स्थित स्वाभिमान अपार्टमेंट में इन-सीटू स्लम पुनर्वास परियोजना के अंतर्गत झुग्गी झोपड़ी (जेजे) समूहों के निवासियों के लिए नवनिर्मित फ्लैटों का दौरा करेंगे। इसके बाद करीब 12 बजकर 45 मिनट पर प्रधानमंत्री दिल्ली में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे झुग्गी बस्तियों के निवासियों के लिए 1,675 नवनिर्मित फ्लैटों का उद्घाटन करेंगे आपको बता दें अशोक विहार में पीएम मोदी झुग्गी बस्तियों के निवासियों के लिए 1,675 नवनिर्मित फ्लैटों का उद्घाटन करेंगे। वह लाभार्थियों को स्वाभिमान अपार्टमेंट की चाबियां भी सौंपेंगे। नवनिर्मित फ्लैटों के उद्घाटन से दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा दूसरी सफल इन-सीटू स्लम पुनर्वास परियोजना को पूर्ण किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली में झुग्गी बस्तियों के निवासियों को उचित सुख-सुविधाओं से सुसज्जित बेहतर और स्वस्थ परिवेश प्रदान करना है। सरकार द्वारा फ्लैट के निर्माण पर खर्च किए गए प्रत्येक 25 लाख रुपये के लिए, पात्र लाभार्थी कुल राशि का 7 प्रतिशत से भी कम भुगतान करते हैं, जिसमें 1.42 लाख रुपये का नाममात्र योगदान और पांच साल के रखरखाव के लिए 30,000 रुपये शामिल हैं। नौरोजी नगर और सरोजिनी नगर में टाइप-II क्वार्टर का उद्घाटन करेंगे प्रधानमंत्री दो शहरी पुनर्विकास परियोजनाओं-नौरोजी नगर में विश्व व्यापार केंद्र (डब्ल्यूटीसी) और सरोजिनी नगर में जनरल पूल आवासीय आवास (जीपीआरए) टाइप-II क्वार्टर का भी उद्घाटन करेंगे। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ने 600 से ज़्यादा जीर्ण-शीर्ण क्वार्टरों को अत्याधुनिक वाणिज्यिक टावरों में बदला नौरोजी नगर में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ने 600 से ज़्यादा जीर्ण-शीर्ण क्वार्टरों को अत्याधुनिक वाणिज्यिक टावरों से बदलकर इस क्षेत्र का कायाकल्‍प कर दिया है। इससे उन्नत सुविधाओं के साथ लगभग 34 लाख वर्ग फ़ीट प्रीमियम वाणिज्यिक स्‍थल उपलब्‍ध हुआ है। सरोजिनी नगर में जीपीआरए टाइप-II क्वार्टर में 28 टावर शामिल हैं, जिनमें 2,500 से अधिक आवासीय इकाइयां हैं, जिनमें आधुनिक सुविधाओं और स्‍थल का कुशल उपयोग किया गया हैं। परियोजना के डिजाइन में वर्षा जल संचयन प्रणाली, सीवेज और जल उपचार संयंत्र तथा सौर ऊर्जा से चलने वाले अपशिष्ट कॉम्पैक्टर शामिल हैं जो पर्यावरण के प्रति जागरूक जनजीवन को प्रोत्साहित करते हैं। द्वारका में सीबीएसई के एकीकृत कार्यालय परिसर का भी उद्घाटन करेंगे इसके अलावा प्रधानमंत्री दिल्ली के द्वारका में सीबीएसई के एकीकृत कार्यालय परिसर का भी उद्घाटन करेंगे, जिस पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें कार्यालय, ऑडिटोरियम, उन्नत डेटा सेंटर, व्यापक जल प्रबंधन प्रणाली आदि शामिल हैं। पर्यावरण के अनुकूल इस इमारत का निर्माण उच्च पर्यावरणीय मानकों के अनुसार किया गया है और इसे भारतीय हरित भवन परिषद (आईजीबीसी) के प्लेटिनम रेटिंग मानकों के अनुसार निर्मित किया गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय में 600 करोड़ रुपये की 3 नई परियोजनाओं की रखेंगे आधारशिला शुक्रवार को पीएम मोदी दिल्ली विश्वविद्यालय में 600 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली तीन नई परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इसमें पूर्वी दिल्ली के सूरजमल विहार के पूर्वी परिसर में एक अकादमिक ब्लॉक और द्वारका के पश्चिमी परिसर में एक अकादमिक ब्लॉक शामिल है। इसमें नजफगढ़ के रोशनपुरा में वीर सावरकर कॉलेज का भवन भी शामिल है, जिसमें शिक्षा के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी।  

Maha Kumbh में 4500 टन लोहे से बना ब्रिज तैयार, श्रद्धालुओं को होगी सहूलिययत… संगम तट पर सीधे पहुंचेंगे

 प्रयागराज महाकुंभ के दृष्टिगत फाफामऊ में सिक्सलेन पुल के विकल्प के रूप में स्टील ब्रिज बनकर तैयार हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस ब्रिज का दो जनवरी को शुभारंभ कर सकते हैं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर तैयारी तेजी से चल रही है। अब इस समय मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआइटी) के विशेषज्ञों की पुल की लोड टेस्टिंग का काम कर रही है। लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से यह अस्थायी ब्रिज बनाया गया है। गंगा पर लगभग 1948 करोड़ रुपये की लागत से सिक्सलेन पुल का निर्माण चल रहा था, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका। इसलिए लगभग चार माह पहले पुल के विकल्प के रूप में स्टील ब्रिज के निर्माण का निर्णय लिया गया था। लगभग 450 मीटर लंबे दो लेन के इस स्टील ब्रिज में 4500 टन लोहे का प्रयोग हुआ है। इसके लिए तीन किमी का एप्रोच रोड का भी निर्माण कराया गया है। पश्चिमी यूपी के श्रद्धालुओं को होगी सहूलियत स्टील ब्रिज से पश्चिमी यूपी, अयोध्या, गोरखपुर, लखनऊ, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान की ओर से महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को काफी सहूलियत मिलेगी। उन्हें शहर नहीं जाना पड़ेगा। गंगा किनारे रिवर फ्रंट टाइप रोड से ये वाहन सीधे महाकुंभ मेला में प्रवेश कर सकेंगे। पुल का काम देखने मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह व मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी शनिवार को आए थे। मुख्य सचिव ने रायबरेली-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण का भी काम देखा था। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री भी रायबरेली से कार फाफामऊ आ सकते हैं, जहां से स्टील ब्रिज से उनका काफिला गुजरेगा। इसके बाद मुख्यमंत्री कई अन्य परियोजनाओं का निरीक्षण करेंगे। महाकुंभ मेला क्षेत्र में चल तैयारियों का भी वह जायजा लेंगे। इसके बाद प्रयागराज मेला प्राधिकरण के सभागार में समीक्षा बैठक करेंगे। क्यों पड़ी पुल बनाने की जरूरत 26 नवंबर 2020 से गंगा नदी पर 10 किलोमीटर लंबे देश के दूसरे सबसे बड़े 6 लेन ब्रिज को बनाने का काम शुरू हुआ. ये पुल मलाका से शहर के त्रिपाठी चौराहे तक बनाया जा रहा है. इसमें करीब 4 किमी का पुल गंगा नदी पर बनना था. ये पुल NH-19: भदरी गांव (मलाका) से शुरू होकर गंगा नदी पार कर शहर के त्रिपाठी चौराहा तक बन रहा है. शिलान्यास के समय इसकी कुल लागत 980.77 करोड़ रुपए तय की गई थी. पुल की कुल लंबाई 9.9 किलोमीटर है. जर्मन तकनीक केबल और बॉक्सेस से बनने वाले देश के आधुनिकतम पुलों में से एक इस पुल के निर्माण के लिए 3 साल का लक्ष्य तय किया गया था लेकिन ये तय समय मे पूरा नहीं हो पाया. विकल्प के तौर पर बनाया जा रहा ये पुल महाकुंभ-2025 के लिए यह पुल बहुत जरूरी था. वजह गंगा नदी पर बने 50 साल पुराने पुल का जर्जर होना. दूसरा यह कि एक रास्ते से करोड़ों श्रद्धालुओं का संगम तक पहुंचना भी आसान नहीं है. इस पुल को फरवरी 2024 में बनकर तैयार हो जाना चाहिए था लेकिन जब ये पता चला कुंभ मेले तक ये पुल बनकर तैयार नहीं हो पाएगा तो विकल्प के तौर पर इस स्टील ब्रिज को बनाने की योजना तैयार की गई. फिलहाल स्टील के ब्रिज के निर्माण का काम अंतिम चरण में है. एक हफ्ते के अंदर पुल चालू हो जाएगा. हाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पुल का निरीक्षण कर इसे जल्द शुरू करने के निर्देश दिए हैं. इस स्टील ब्रिज का निर्माण वही एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है, जो 10 किलोमीटर लंबे सिक्स लेन ब्रिज का निर्माण कर रही है. 6 लेने ब्रिज समय पर पूरा नहीं हो पाया जिसके बाद कंपनी को कुंभ से पहले विकल्प के तौर पर ये स्टील ब्रिज खड़ा करना पड़ा है. अब तक 98 % तक काम पूरा हो चुका है. 4500 टन के इस ब्रिज की चौड़ाई 16 मीटर है लिहाजा पुल के एक एक पिलर की पुख्ता जांच के बाद ही इसे कार्य में लाया जाएगा. 60 दिन बाद मिट जाएगा पुल का नामों निशान कुंभ खत्म होने के बाद इस पुल को तोड़ दिया जाएगा. अब सवाल उठता है कि पुल को तोड़ने के बाद उसमें लगे 4500 टन लोहे का क्या होगा तो एसपी सिंगला कंपनी के इंजीनियर ने बताया कि काम के बाद सरकार और हमारी कंपनी की सहमति से तय किया जाएगा कि इस लोहे का क्या होगा. कंपनी के लोग कहते हैं कि ये सच है कि जब सिक्स लेन ब्रिज का काम पूरा नहीं हो पाया तो उन्हें विकल्प के तौर पर इसे बनाना पड़ा लेकिन इसको बनाने के पीछे एक मकसद यह भी है कि मेला प्रशासन को पुल के पास बड़ी पार्किंग मिल जाएगी. लखनऊ-अयोध्या समेत पश्चिमी यूपी की तरफ से आने वाली गाड़ियों को इधर ही पार्क किया जाएगा. यहां करीब डेढ़ लाख गाड़ियों को एक साथ पार्क किया जा सकता है. यहां से संगम की दूरी 10 से 12 किमी होगी. श्रद्धालुओं को शाही स्नान और महत्वपूर्ण दिनों पर पैदल ही जाना होगा. इससे पहले गाड़ियों को फाफामऊ पुल से पहले ही रोकने की कोशिश होती थी, उस वक्त इस इलाके में भीषण जाम लग जाता था. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि स्टील ब्रिज अपने आप में अनोखा है. प्रदेश में पहली बार ऐसा हो रहा कि कोई स्टील ब्रिज सिर्फ 2 महीने के लिए बनाया जा रहा. 2 महीने बाद यहां से इस पुल का नामोनिशान मिट जाएगा. उम्मीद की जानी चाहिए कि बगल में बनने वाला सिक्स लेन ब्रिज जल्द आम लोगों को समर्पित किया जाएगा. सिक्सलेन पुल का भी तेजी से चल रहा निर्माण फाफामऊ में गंगा पर सिक्सलेन पुल का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। हालांकि इसका काम जुलाई तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 26 नवंबर 2020 को इसका शिलान्यास किया। 9.9 किमी लंबे पुल के लिए 1948 करोड़ रुपये का बजट है। जर्मन टेक्नोलॉजी से सिक्सलेन पुल को केबल और बाक्स के जरिए बनाया जा रहा है। लगभग 3840 मीटर का हिस्सा गंगा नदी और कछार एरिया पर बनना है। इसके लिए 67 पिलर तैयार किए गए।

पेट्रोकेमिल प्लांट की जगह सुरक्षित करने बाउंड्रीवॉल का निर्माण तेज गति से

बीना  बीपीसीएल के पेट्रोकेमिल प्लांट के कार्य की गति इस वर्ष तेज होगी और नई कंपनियां यहां कार्य करने आएंगी। वर्तमान में सिविल वर्क का कार्य चल रहा है, जिसमें पेड़ कटाई, जमीन लेवलिंग की जा रही है। भांकरई, मूडरी गांव तरफ प्लांट की जगह सुरक्षित करने के लिए बाउंड्रीवॉल का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है और उसी तरफ नए गेट भी तैयार हो रहे हैं। भांकरई के पास जमीन समतलीकरण के बाद प्लांट की मशीनें लगाने के लिए पिलर खड़े किए जाने लगे हैं। साथ ही रिफाइनरी परिसर में जहां मुख्य प्लांट बनना है, वहां अभी ब्लास्ंिटग कर जमीन को समतल कर रहे हैं और पेड़ों की कटाई भी की जा रही है। यह कार्य होने के बाद प्लांट की मशीनों को लगाने के लिए फाउंडेशन बनाने के कार्य में तेजी आएगी। इस वर्ष में बड़ी कंपनियां आकर कार्य शुरू करेंगी, जिससे पांच साल में यह कार्य पूरा हो सके।  जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया होगी तेज उद्योग विभाग यहां 500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर बीपीसीएल को देगी। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया इस वर्ष तेज होगी। जमीन अधिग्रहण को लेकर किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और मांगें पूरी होने पर ही जमीन देने के बात कर रहे हैं। इसको लेकर एसडीएम न्यायालय में किसानों ने आपत्ति भी दर्ज कराई है। काम में तेजी आने से मिलेगा रोजगार नई कंपनियां आने पर जैसे-जैसे प्लांट के काम में तेजी आएगी, वैसे ही स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने लगेगा। इसका इंतजार लोग लंबे समय से कर रहे हैं। अभी जो कार्य चल रहा है, उसमें कम लोगों को ही रोजगार मिला है। आसपास लोग चाय, नाश्ता, खाना की दुकानें भी खोल रहे हैं।

मध्य प्रदेश में अध्यक्ष पद को लेकर बीजेपी के सवर्ण दांव की चर्चा फिर से तेज

भोपाल नए साल की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 15 जनवरी तक मध्य प्रदेश में नए अध्यक्ष की ताजपोशी हो सकती है, क्योंकि दिल्ली से लेकर भोपाल तक कई संगठनात्मक बैठकें हो चुकी हैं, जिसमें अध्यक्ष पद को लेकर रायशुमारी हुई है. फिलहाल खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा मध्य प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वह 2020 से लेकर 2025 तक की पारी खेल चुके हैं. अध्यक्ष पद को लेकर कई तरह की अटकलें लग रही है, क्योंकि इस पद के लिए कई नेता दावेदार नजर आ रहे हैं. वीडी शर्मा को मिला था विस्तार वीडी शर्मा को बीजेपी ने 2020 में मध्य प्रदेश का अध्यक्ष बनाया था, जिसके बाद 2023 में उनका कार्यकाल पूरा हो गया था, क्योंकि बीजेपी में अध्यक्ष पद का कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन विधानसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से उनके कार्यकाल को विस्तार दिया गया था, जिसके बाद से वह चार साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं. हालांकि वीडी शर्मा अब भी अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल माने जा रहे हैं, क्योंकि उनके नेतृत्व में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया है. हालांकि चर्चा यह भी है कि वीडी शर्मा को पार्टी कोई दूसरी जिम्मेदारी सौंप सकती है, ऐसे में उनकी जगह कोई और नेता ले सकता है. क्या मध्य प्रदेश फिर दिखेगा बीजेपी का सवर्ण दांव मध्य प्रदेश में अध्यक्ष पद को लेकर बीजेपी के सवर्ण दांव की चर्चा फिर से तेज हो गई है. क्योंकि फिलहाल प्रदेश में बीजेपी की राजनीतिक व्यवस्था को देखा जाए तो पार्टी ने सभी वर्गों को साधने का काम किया है. बीजेपी ने ओबीसी से आने वाले डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाया है, जबकि डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा एससी वर्ग से आते हैं. ये दोनों ही नेता मालवा जोन से आते हैं, इसी तरह राजेंद्र शुक्ला को भी डिप्टी सीएम बनाया गया है जो ब्राह्राण हैं और विंध्य अंचल से आते हैं. जबकि सवर्ण वर्ग के नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया है जो चंबल रीजन से आते हैं. सवर्ण वर्ग से आने वाले वर्तमान अध्यक्ष वीडी शर्मा बुंदेलखंड रीजन से सांसद हैं, ऐसे में उनकी जगह बीजेपी किसी सवर्ण वर्ग के नेता पर ही दांव लगा सकती है. नरोत्तम मिश्रा के साथ ये नेता दावेदार मध्य प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में सूबे के पूर्व गृहमंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता नरोत्तम मिश्रा के नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है, वह पिछले कुछ दिनों में तेजी से राज्य की राजनीति में एक्टिव भी दिख रहे हैं, जबकि हाल में उन्होंने कई बार वीडी शर्मा से मुलाकात भी की है. मिश्रा के दिल्ली दौरे की भी चर्चा है. इसके अलावा भोपाल की हुजूर सीट से तीन के बार के विधायक रामेश्वर शर्मा के नाम की चर्चा भी चल रही है. शर्मा इस बार मंत्री पद के भी दावेदार थे, लेकिन उन्हें जगह नहीं मिली थी, जिसके बाद उनके नाम की चर्चा अध्यक्ष पद के लिए भी चल रही है. वहीं पूर्व मंत्री अरविंद सिंह भदोरिया का नाम भी इस रेस में शामिल हैं, भदोरिया को संगठन का कुशल रणनीतिकार माना जाता है. ये नाम भी चौंका सकते हैं बीजेपी राजनीतिक अपने सरप्राइज के लिए भी जानी जाती है. 2014 के बाद से ही बीजेपी ने अब तक कई चौंकाने वाले फैसले किए हैं, ऐसे में इस बात की भी पूरी संभावना है कि किसी अनजाने चेहरे की एंट्री भी हो सकती है. पन्ना से विधायक और पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह, बैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल का नाम भी तेजी से अध्यक्ष पद की रेस में शामिल हुआ है. माना जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान की दिल्ली में हुई बैठक में भी इन दोनों की चर्चा हुई है. वहीं भोपाल से पार्टी सांसद आलोक शर्मा भी अध्यक्ष की दौड़ में शामिल माने जा रहे हैं. आदिवासी वर्ग की भी चर्चा बीजेपी का फोकस हमेशा आदिवासी वर्ग पर भी रहा है. मोहन सरकार में आदिवासी वर्ग से आने वाले मंत्रियों की संख्या अच्छी खासी है, जिनके पास बड़े विभागों की जिम्मेदारियां हैं. ऐसे में अगर बीजेपी आदिवासी वर्ग से आने वाले नेता पर दांव लगाती है तो इस लिस्ट में मंडला से आठ बार के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का नाम भी रेस में शामिल हैं. वह अटल और मोदी सरकार में मंत्री रह चुके हैं. इसके अलावा राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी के नाम की चर्चा भी कई बार हो चुकी है. जबकि अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले नेता पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य के नाम की चर्चा भी तेज है. 15 जनवरी तक मिल सकता है नया अध्यक्ष मध्य प्रदेश में फिलहाल बीजेपी के संगठन चुनावों की प्रक्रिया जारी है, जिसके तहत मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियां हो चुकी हैं, जबकि जिला अध्यक्षों के लिए रायशुमारी का दौर जारी है. वहीं माना जा रहा है कि 15 जनवरी तक प्रदेश में नए अध्यक्ष की ताजपोशी भी हो सकती है. क्योंकि जिला अध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया इस हफ्ते में पूरी होने की उम्मीद है, ऐसे में फिर नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति हो सकती है.

MP में ठंड, कोहरा और बारिश का कहर, मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट

भोपाल मध्य प्रदेश के कई इलाकों में सर्दी और कोहरे का प्रकोप शुक्रवार को भी जारी रहा। इस दौरान रायसेन, राजगढ़ और शाजापुर में शीतलहर का असर देखा गया और वहां कड़ाके की सर्दी पड़ी। जबकि भोपाल, नर्मदापुरम, सीहोर, मरुखेड़ा (नीमच) में भी बेहद ठंडा दिन रहा। इस दौरान प्रदेश में सबसे कम तापमान पचमढ़ी (नर्मदापुरम) में 3.4 डिग्री दर्ज किया गया। सुबह साढ़े आठ बजे तक पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के सभी संभागों के जिलों में मौसम मुख्यत: शुष्क रहा। गुरुवार सुबह इन जिलों में रहा कोहरा आज मौसम की बात करें प्रदेश के श्योपुरकलां, नीमच, आगर, मंदसौर, उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, राजगढ़, जबलपुर, भोपाल, भिंड एवं मुरैना जिलों में मध्यम से घना कोहरा छाया रहा, जबकि रतलाम, झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, ग्वालियर, दतिया, गुना, छतरपुर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, नरसिंहपुर, रायसेन, अशोकनगर एवं विदिशा जिलों में हल्का कोहरा छाया रहा। प्रदेश में शुक्रवार सुबह सबसे कम तापमान पचमढ़ी (नर्मदापुरम) में 3.4 डिग्री दर्ज किया गया। इसके अलावा पिपरसमा (शिवपुरी) में 4.4 डिग्री, मरुखेड़ा (नीमच) में 4.6 डिग्री, कल्याणपुर (शहडोल) में 4.8 डिग्री और आगर-मालवा (आगर) में 5.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल और जबलपुर एयरपोर्ट पर सबसे कम यानी सिर्फ 50 मीटर की दृश्यता दर्ज की गई। शुक्रवार को ज्यादातर जिलों रहेगा कोहरा, 5 जगह गिर सकता है पाला मौसम विभाग ने शुक्रवार को रायसेन और शाजापुर जिले में कहीं-कहीं घना कोहरा छाने, शीतलहर चलने और पाला पड़ने की संभावना जताई है। इसके अलावा विदिशा, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा जिले में भी कुछ स्थानों पर घना कोहरा छाने और पाला पड़ने की उम्मीद जताई है। भोपाल, राजगढ़, आगर जिलों में भी कहीं-कहीं घना कोहरा छाने और ठंडा दिन रहने की उम्मीद है। इसके अलावा सीहोर, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, नीमच, मंदसौर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, बैतूल, हरदा, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर और निवाड़ी जिलों में कहीं कहीं मध्यम से घना कोहरा छाने की उम्मीद है। वहीं नीमच, नर्मदापुरम, भोपाल, राजगढ़, आगर जिलों में कहीं-कहीं बेहद ठंडा दिन रहने की उम्मीद है। कैसा रहा बीता दिन? बीते दिन प्रदेश के नर्मदापुरम संभाग के जिलों में न्यूनतम तापमान विशेष रूप से गिरा। इसके अलावा इंदौर, उज्जैन, रीवा और शहडोल संभागों के जिलों में भी न्यूनतम तापमान में गिरावट देखी गई। भोपाल और नर्मदापुरम संभागों के जिलों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहा, जबकि शेष सभी संभागों के जिलों के तापमानों में विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। अधिकतम तापमान की बात करें तो उज्जैन व रीवा संभाग के जिलों में इसमें काफी गिरावट देखी गई। वे सामान्य से काफी कम रहे यानी यहां ठंड का ज्यादा असर देखा गया। जबकि इस दौरान इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और सागर संभागों के जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहे और शेष सभी संभागों के जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य ही रहा। सिनोप्टिक मौसमी परिस्थितियां पश्चिमी विक्षोभ, जम्मू एवं संलग्न उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर माध्य समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवातीय परिसंचरण के रूप में स्थित है। पश्चिमोत्तर भारत के ऊपर माध्य समुद्र तल से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 222 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से उपोष्ण जेट स्ट्रीम हवाएं बह रही हैं। मध्य ईरान के ऊपर माध्य समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच अवस्थित पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवातीय परिसंचरण के रूप में सक्रिय है।

2023-24 में लड़कियों के स्कूली नामांकन में 16 लाख की कमी, जबकि लड़कों के नामांकन में 21 लाख की गिरावट दर्ज

नई दिल्ली भारत में स्कूलों जाने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2023-24 में करीब 37 लाख छात्रों ने स्कूली पढ़ाई छोड़ी दी है, जिनमें 16 लाख लड़कियां शामिल हैं. साल 2022-23 के मुकाबले 2023-24 में स्कूली छोड़ने वाली छात्रों की संख्या अधिक है. शिक्षा मंत्रालय की एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (UDISE) की एक रिपोर्ट में यह डेटा में सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में कुल 25.17 करोड़ छात्र स्कूलों में नामांकित थे, जबकि 2023-24 में यह संख्या घटकर 24.80 करोड़ रह गई और 2021-2022 में करीब 26.52 करोड़ था. इसके अनुसार, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में छात्रों के नामांकन में 37.45 लाख की गिरावट आई है. इस तरह2023-24 में लड़कियों के नामांकन में 16 लाख की कमी आई, जबकि लड़कों के नामांकन में 21 लाख की गिरावट दर्ज की गई. अल्पसंख्यकों की भागीदारी UDISE 2023-24 ने पहली बार छात्रों का व्यक्तिगत डेटा और स्वैच्छिक आधार पर उनके आधार नंबर जुटाए. 2023-24 तक 19.7 करोड़ छात्रों ने अपने आधार नंबर शेयर किए. कुल नामांकन में 20% छात्र अल्पसंख्यक समुदायों से थे. इनमें 79.6% मुस्लिम, 10% ईसाई, 6.9% सिख, 2.2% बौद्ध, 1.3% जैन और 0.1% पारसी समुदाय से थे. जातीय वर्गीकरण रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल लेवल पर पंजीकृत (UDISE डेटा के अनुसार), 26.9% छात्र सामान्य वर्ग से, 18% अनुसूचित जाति से, 9.9% अनुसूचित जनजाति से और 45.2% अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अलग-अलग राज्यों में स्कूलों, शिक्षकों और नामांकित छात्रों की उपलब्धता अलग-अलग है। ‘घोस्ट स्टूडेंट्स’ की पहचान व्यक्तिगत डेटा से फर्जी छात्रों (‘घोस्ट स्टूडेंट्स’) की पहचान और सरकार की योजनाओं का लाभ सही छात्रों तक पहुंचाने में मदद मिली. इससे सरकारी खर्च में बचत और बेहतर प्रबंधन संभव हुआ. एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि यह पहली बार है जब राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्तिगत छात्र डेटा जुटाया गया. इसलिए, यह डेटा 2021-22 या उससे पहले के आंकड़ों से तुलनात्मक नहीं है. यह प्रक्रिया स्कूल-वार डेटा से अलग है, जिससे शिक्षा प्रणाली की वास्तविक स्थिति सामने आती है. राज्यों में स्कूल और छात्रों का अनुपात उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान में स्कूलों की संख्या छात्रों की तुलना में अधिक है. वहीं, तेलंगाना, पंजाब, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और बिहार में छात्रों की संख्या स्कूलों से ज्यादा है. यह रिपोर्ट बताती है कि नई डेटा प्रणाली से छात्रों के ड्रॉपआउट और शिक्षा में प्रगति को सटीकता से ट्रैक किया जा सकेगा, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा.

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