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अतिक्रमणकारियों का मुकाबला फ्रंट में नहीं बल्कि समुदाय विरुद्ध समुदाय के जरिए करें

Confront the encroachers not from the front but through community against community भोपाल। आईएफएस अफसरों की दो दिन चली मंथन का समापन शनिवार को हो गया। मंथन में अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल ने फील्ड के अवसरों को दो मूल मंत्र बताएं। पहला यह कि अतिक्रमणकारियों का मुकाबला फ्रंट में रहकर नहीं करे, बल्कि उसे समुदाय वर्सेस समुदाय को आगे कर करें। जंगल बचाने वाले समुदाय का सपोर्ट करें और उन्हें ताकतवर बनाएं। दूसरा मंत्र टीम भावना से काम करने का दिया।  अपैक्स भवन में दो दिन चली मैराथन मंथन में फील्ड के अफसरों ने जितने भी प्रेजेंटेशन दिए, वे सभी प्रस्तुति एसीएस वर्णवाल के मानक पर खरे नहीं उतरे। शनिवार को सतना डीएफओ मयंक चांडीवाल ने वन अधिकार अधिनियम को लेकर प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। चांडीवाल ने बताया कि अधिनियम में दो गवाह के आधार मानकर पट्टा देने की अनुशंसा कर दिया जाता है। जबकि दो साक्ष्य के आधार पर हो, जिसमें एक सैटलाइट इमेजरी होना चाहिए। इस पर एसीएस वर्णवाल बोले कि आप अपने ढंग से अधिनियम के प्रावधानों का प्रजेंटेशन करेंगे। अधिनियम का इंटरप्रिटेशन अपने हिसाब से ना करें। वर्णवाल ने यह भी कहा कि यदि आप सहमत नहीं है तो अपनी आपत्ति लिखित में कलेक्टर के समक्ष दर्ज कराएं। आपकी आपत्ति को कलेक्टर इग्नोर नहीं कर सकता। इसी मसले पर एपीसीसीएफ भी कुछ कहना चाहते थे किन्तु एसीएस ने उन्हें बोलने नहीं दिया। पन्ना नेशनल पार्क की फील्ड डायरेक्टर अंजना तिर्की ने एसीएस के समक्ष जानवर मुआवजा का अधिकार फॉरेस्ट अफसर को देने की बात रखी। इस पर वर्णवाल ने कहा कि राजस्व अधिकारी को अधिकार इसलिए दिया गया है क्योंकि उनके पास मुआवजा आकलन करने का अनुभव है। उन्होंने यह भी कहा कि शाजापुर जैसे वन मंडलों में स्टाफ की कमी होती है तो मुआवजा का काम कैसे कर पाएंगे।  टीम भावना से करें काम एसीएस वर्णवाल ने दो दशक पहले देवास जिले के मेहंदीखेड़ा में हुई गोलीचालन को लेकर एक रिपोर्ट केस स्टडी के रूप में फॉरेस्ट अफसर के बीच वितरित की। तब वर्णवाल देवास के कलेक्टर थे। फॉरेस्ट के अफसर से सवाल किया कि इसमें आप बताएं क्या किया जा सकता था? इसके बाद उन्होंने अफसर के समक्ष कहा कि इस गोलीचालन में चार लोगों की मौत हुई थी। इसकी मजिस्टिकल जांच हुई थी। तब देवास में डीएफओ महेंद्र धाकड़ थे। उन्होंने बताया कि मजिस्ट्रियल जांच में कलेक्टर एसपी और डीएफओ के बयान एक जैसे ही थे। हम लोगों ने टीम भावना के साथ घटना और मजिस्ट्रियल जांच का सामना किया। इसलिए डीएफओ कलेक्टर और एसपी के साथ मिलकर काम करें।  नए अफसरों को परोसा झूठ एसीएस वर्णवाल ने देवास के मेहंदीखेड़ा गोलीकांड के मामले में कुछ झूठ भी परोसा है। बड़वाल ने एनजीओ तक का नाम नहीं बताया जबकि आदिवासी मुक्ति संगठन के नाम से जनता को वर्ग लाया जा रहा था और इसके संचालक राहुल बनर्जी और माधुरी बेन थे, जो आज भी सक्रिय है। वर्णवाल ने फील्ड से आए अफसर से यह बताया कि इस घटना को लेकर विधानसभा क्वेश्चन तक नहीं हुई। जबकि गोली कांड को लेकर सदन में खूब हंगामा हुआ स्थगन लाये गए थे और विधानसभा की कार्रवाई बाधित भी हुई। इसके चलते सरकार को कलेक्टर, एसपी और डीएफओ को हटाना भी पड़ा था। इस पूरी घटना को लेकर तत्कालीन पीसीसीएफ आरडी शर्मा के कहने पर मैंने ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की थी। मैंने दैनिक नई दुनिया में तीन दिन तक रिपोर्टिंग का एपिसोड चलाया। अपनी रिपोर्टिंग में मैंने यह  स्पष्ट कर दिया था कि तत्कालीन प्रमुख सचिव वन बनर्जी और एनजीओ संचालक कर्ता राहुल बनर्जी के बीच दोस्ताना संबंध रहे और उनमें टेलिफोनिक बातचीत भी होती रही। राहुल पुलिस की नजरों में फरार था पर वल्लभ भवन में अधिकारियों से मिलता जुलता रहा। मेरे द्वारा खबर प्रकाशित करने के बाद वन विभाग प्रमुख सचिव से बनर्जी को हटा दिया गया था। तत्कालीन पीसीएफ आरडी शर्मा आज भी जीवित है।

छोटे बच्चों को पिलाते हैं बॉटल से दूध तो जान लें खतरे, हो सकती हैं ये बीमारियां

Baby Bottle Feeding Risks : छोटे बच्चों के लिए मां का दूध सबसे पौष्टिक माना जाता है. यह उनकी ओवरऑल हेल्थ की ग्रोथ में अहम रोल निभाता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चा मां का दूध जितना ज्यादा करेगा, उसका विकास उतना ही ज्यादा होता है. इससे बीमारियों का खतरा भी कम होता है. हालांकि, आजकल बिजी लाइफस्टाइल की वजह से कई बार वर्किंग वुमन अपने बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कीबजाय बॉटल का दूध पिलाती हैं, जो बच्चे की सेहत (Child Health) के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है. यह उन्हें कई तरह से प्रभावित कर सकती है और ग्रोथ में भी समस्याएं पैदा कर सकती है. इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. कितने समय बाद बच्चे को दे सकते हैं बॉटल का दूध वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, न्यूबॉर्न बच्चे को पहले 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध (mother’s milk) ही पिलाना चाहिए. इससे बच्चों का डेवलपमेंट सही तरह होता है. उनकी बॉडी स्ट्रॉन्ग होती है और इम्यूनिटी बढ़ती है.अगर किसी वजह से मां को दूध कम बन रहा है या नहीं मिल पा रहा है यानी ब्रेस्ट फीडिंग पॉसिबल नहीं हो पा रहा है तो जन्म के दो या तीन हफ्ते बाद बॉटल का दूध दे सकते हैं. हालांकि, यह सिर्फ अस्थायी उपाय ही है, कम से कम छह महीने तक इससे बचने की ही कोशिश करनी चाहिए. बच्चे को बॉटल का दूध पिलाने के खतरे बच्चे जब मां का दूध पीते हैं तो उनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है. जब बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग की बजाय बॉटल से दूध पिलाया जाता है, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है. जिससे वह बार-बार सर्दी-खांसी, बुखार जैसी समस्याओं की चपेट में आ सकता है. छोटे बच्चों को बॉटल का दूध पिलाने से उनमें मोटापा बढ़ सकता है. खासकर तब जब बच्चों को जानवरों या पाउडर वाले दूध ही पिलाए जाए. दरअसल, जानवरों के दूध में फैट ज्यादा होती है,जो बच्चे के वजन को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है. बॉटल का दूध पीने से बच्चों की ग्रोथ धीमी हो सकती है. बॉटल दूध से बच्चों के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक प्रवेश कर सकता है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास को स्लो कर सकता है. इससे उनकी ओवरऑल हेल्थ कमजोर हो सकती है. रबड़ के निप्पल वाले बॉटल से दूध पीने से बच्चों के फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. इससे लंग्स कमजोर हो सकते हैं. जिससे बच्चे को सांस की समस्याएं हो सकती हैं. कई मामलों में यह निमोनिया का खतरा भी बढ़ा सकता है. Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

खाटू श्याम से इंदौर जा रही बस सुसनेर में पलटी, 17 यात्री हुए घायल… नीचे दबे पिता और बेटे को बचाया

आगर-मालवा (Bus Accident in Susner)। रविवार सुबह 6:30 बजे सुसनेर थाना इलाके के गणेशपुरा जोड़ गांव के पास सड़क हादसा हो गया। घने कोहरे की वजह से अज्ञात वाहन से टकराकर स्लीपर कोच बस पलट गई। हादसे में 17 यात्री घायल हो गए। इसमें एक डेढ़ साल का बच्चा और उसके पिता भी बस के नीचे फंस गए थे। बस देव नामक एक प्राइवेट कंपनी की बताई जा रही है। सूचना मिलने पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की क्रेन मौके पर पहुंची व बच्चे और पिता को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बता दें की बस खाटूश्याम से इंदौर जा रही थी। 2 गंभीर घायलों को इंदौर रेफर किया गयासूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह भी मौके पर पहुंचे। सभी घायलों को उपचार के लिए 108 एंबुलेंस डॉ शहजाद खान की मदद से सुसनेर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनका उपचार जारी है। 2 गंभीर घायल को उपचार के लिए इंदौर रेफर किया गया है। इधर… दो बाइक की टक्कर में चार लोग घायल, तीन आगर रैफरशनिवार की शाम को 4 बजे के लगभग उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित खजूरी जोड के पास 2 बाइक की भिड़ंत हो गई, जिसमें चार लोग घायल हो गए। सभी घायलों को पुराना बस स्टैंड स्थित शासकीय सिविल अस्पताल लाया गया। डॉ. भारद्वाज व स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा चार चारों घायलों भंवरलाल और उनके पिता धन्ना निवासी लखोनी, नारायण पिता शंकर, रेखा बाई पति नारायण का प्राथमिक इलाज किया। इसके बाद उचित इलाज के लिए भंवरलाल, नारायण और रेखाबाई को आगर जिला अस्पताल रैफर किया गया है। शाजापुर में पहिया निकलने से शिक्षिकाओं से भरा ऑटो खाई में गिरा, पांच घायलशाजापुर शहर में दुपाड़ा रोड पर शिक्षिकाओं से भरा एक ऑटो रिक्शा अनियंत्रित होकर शनिवार सुबह खाई में गिर गया। हादसा तब हुआ जब शिक्षिकाएं शाजापुर से ग्राम जादमी स्थित एक स्कूल में पढ़ाने जा रही थीं। दुर्घटना का कारण ऑटो का पहिया अचानक निकल जाना बताया जा रहा है। ऑटो में सवार पांच शिक्षिकाओं की पहचान कविता, माया, छाया, सविता और ललिता सिसौदिया के रूप में हुई। सभी को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया। इनमें ललिता सिसौदिया की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है, जबकि अन्य चार शिक्षिकाओं को मामूली चोटें आई हैं और प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।

धरने को असफल करने के लिए सांसद का कुत्सित असफल प्रयास है बयान: पंकज उपाध्याय     

  The statement is a disgusting failed attempt by the MP to make the protest unsuccessful: Pankaj Upadhyay  हमने कई अखबारों में पढ़ा और सुना कि माननीय सांसद शिवमंगल सिंह तोमर अपने बयान में  कह रहे हैं कि शक्कर कारखाने को चालू करने के लिए योजना बन गई है कार्यवाही प्रारंभ हो गई है मेरा सांसद महोदय से अनुरोध है कि अगर कल रात में ऐसी कोई योजना बनी हो तो मुझे उपलब्ध करा दे क्योंकि मैंने मुख्यमंत्री सहकारिता मंत्री कृषि मंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष को कलेक्टर को पत्र लिखकर यह मांग करी की शक्कर कारखाने की भूमि नीलामी रोककर कारखाने को पुनः प्रारंभ करने हेतु कार्रवाई करें परंतु अभी तक माननीय मुख्यमंत्री जी सहकारी मंत्री जी विधानसभा अध्यक्ष एवं कलेक्टर महोदय का जवाब मुझे नहीं मिला है आपके द्वारा यह बयान निश्चित रूप से किसानों एवं कर्मचारियों को बरगलाने के लिए जो किसानों द्वारा अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है उसे असफल करने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है आपसे अनुरोध है आपको मुरैना की जनता ने किसानों के हितों के लिए चुना था ना कि किसानों को बरगलाने के लिए अतः आगे आकर  धरने में अपना साथ दे और अगर सांसद जी आगे आकर हमारे बंद शक्कर कारखाने को प्रारंभ करते हैं तो हम सब शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति के लोग उनका नागरिक अभिनंदन करेंगे

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