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‘वंडर वुमन’ गैल गैडोट ने किया चौंकाने वाला खुलासा

न्यूयॉर्क हॉलीवुड में डीसी सुपरहीरो वंडर वुमन का किरदार निभाकर पॉपुलर होने वाली इजरायली एक्ट्रेस गैल गैडोट चर्चा में हैं। इस साल की शुरुआत में उन्होंने अपने चौथे बच्चे को जन्म दिया। बेटी ओरी का वेलकम किया। अब उन्होंने खुलासा किया है कि उनके ब्रेन में ब्लड का थक्का जम गया था, जिसके कारण उन्हें तुरंत सर्जरी करानी पड़ी थी। Gal Gadot ने बताया कि उनकी पिछली प्रेग्नेंसी आसान नहीं थी। उन्हें सेरेब्रल वेनस थ्रोम्बोसिस (CVT) का पता चला था, जो ब्रेन में ब्लड क्लॉट है। एक्ट्रेस ने दावा किया कि 30 से ज्यादा उम्र की 100,000 प्रेग्नेंट महिलाओं में से 3 को ये डायग्नोस होता है। गैल गैडोट ने फोटो की शेयर गैल गैडोट ने सोमवार की सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल पर हॉस्पिटल से एक फोटो शेयर की, जिसमें वो अपनी नवजात बेटी के साथ दिख रही हैं। वो उनकी गोद में है और उनके दूसरे हाथ में कॉफी का कप है। चुनौतियों भरा रहा गैल गैडोट का ये पूरा साल उन्होंने कैप्शन में लिखा, ‘यह साल बहुत बड़ी चुनौतियों और गहरी चिंता का रहा है। मैं इस बात से जूझती रही कि कैसे, या क्या, एक पर्सनल कहानी शेयर करूं। अंत में मैंने अपने दिल की बात मानने का फैसला किया। मुझे उम्मीद है कि ये शेयर करके मैं जागरूकता बढ़ा सकती हूं और दूसरों का समर्थन कर सकती हूं।’ प्रेग्नेंसी के 8वें महीने में ब्लड क्लॉट का पता चला उन्होंने बताया, ‘फरवरी में प्रेग्नेंसी के 8वें महीने के दौरान मुझे पता चला कि मेरे ब्रेन में बहुत बड़ा ब्लड क्लॉट है। कई हफ्तों तक मुझे भयानक सिरदर्द हुआ। इस वजह से मैं बिस्तर पर ही सोती रही। जब मैंने एमआरआई करवाया, जिसमें भयानक सच्चाई पता चली। एक पल के लिए मुझे और मेरे परिवार को ये सामना करना पड़ा कि लाइफ कितनी नाजुक हो सकती है। मुश्किल भार एक साल। मैं बस इतना चाहती थी कि मैं टिकी रहूं और जीयूं।’ इमरजेंसी में करानी पड़ी सर्जरी गैल ने कहा, ‘हम हॉस्पिटल पहुंचे और कुछ ही घंटों में मेरी इमरजेंसी सर्जरी हुई। मेरी बेटी ओरी का जन्म अनिश्चितता और डर में हुआ। आज मैं पूरी तरह से ठीक हो गई हैं और मुझे मेरी लाइफ वापस मिली है।’ गैल ने बताया कि इस जर्नी ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। सबसे पहले अपने शरीर की बात सुनो और उस पर भरोसा करना बहुत जरूरी है। दर्द, बेचैनी या छोटा-सा भी बदलाव मायने रखता है।’ गैल गैडोट की चार बेटियां गैल गैडोट ने रियल एस्टेट डेवलपर जेरोन ‘यारोन’ वर्सन से शादी की है। उनकी चार बेटियां हैं। वह अगली बार ‘स्नो व्हाइट’, ‘इन द हैंड ऑफ डांटे’ और ‘द रनर’ में नजर आएंगी।

प्रेमी के साथ मुलकर लाठी डंडे से पीटकर उतारा मौत के घाट, छत्तीसगढ़-दुर्ग में त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग में पूर्व प्रेमी की हत्या

दुर्ग। पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग में हुई युवक के हत्या मामले में पुलिस ने तीन अपचारी बालक समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में युवती रोशनी को आरोपी बनाया। पद्मनाभपुर थाना प्रभारी केशव कोसले ने बताया कि कसारीडीह पुलिस लाइन निवासी चेतन साहू नाम के युवक का प्रेम प्रसंग घर के पास रहने वाली युवती के साथ चलता था। युवक और युवती दोनों की मां पुलिस विभाग में पदस्थ है। घटना के कुछ दिन पूर्व युवती की मां का ट्रांसफर सरगुजा हो गया। युवती भी उसके साथ सरगुजा चली गई, जहां सरगुजा निवासी युवक कुलेश्वर साहू के प्रति युवती रोशनी लकड़ा आकर्षित हो गई। इस दौरान चेतन भी युवती को फोन करता था। जिससे वह परेशान हो गई थी। 24 दिसंबर को रोशनी अपनी मां के साथ दुर्ग आई थी। चेतन रोशनी से मिलने के लिए बोला। लेकिन युवती ने उससे मिलने के लिए इनकार कर दिया। चेतन की बात रोशनी ने सरगुजा वाले प्रेमी कुलेश्वर साहू को बताई। जिसके बाद आरोपी रोशनी और कुलेश्वर ने चेतन की हत्या प्लानिंग की। प्लानिंग के तहत रोशनी ने चेतन को कॉल करने ग्राउंड के पास बुलाया। जहां पहले से कुलेश्वर और उसके साथी मौजूद थे। चेतन के पहुंचाने पर कुलेश्वर उसे रोशनी से बात करने को लेकर विवाद किया। विवाद बढ़ने पर तीन अपचारी बालक कुलेश्वर,आकाश देशलहरे ने मिलकर लाठी डंडे से चेतन की दौडा-दौड़ाकर पिटाई कर दी। घटना में अपनी जान बचाते हुए घर के बाउंड्रीवाल से कूद कर पहुंचा। लेकिन पैर सिल्प होने से आरोपियों के हत्थे चढ़ने पर उसे मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने इस घटना की प्रेमिका रोशनी लकड़ा, कुलेश्वर साहू,आकाश देशलहरे समेत तीन नाबालिग को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

‘बिग बॉस 18’ में दिखेगा फैमिली वीक, घरवालों को देख सभी के छलके आंसू

मुंबई रियलिटी शो ‘बिग बॉस 18’ का फिनाले धीरे-धीरे नजदीक आ रहा है। अब घर में सिर्फ 10 सदस्य ही रह गए हैं। 31 दिसंबर को नए साल का जश्न मनाने के बाद अब इमोशनल होने की बारी है, क्योंकि घर में कंटेस्टेंट्स के असली घरवालों की एंट्री होगी। शिल्पा शिरोडकर की बेटी, चाहत पांडे, ईशा सिंह और अविनाश मिश्रा की मां, विवियन डीसेना की बीवी नूरन अली आएंगे। अपने फैमिली मेंबर्स को देख सभी के आंसू छलक पड़ेंगे। इस प्रोमो में ये भी दिखाया गया है कि चाहत पांडे की मां अविनाश मिश्रा पर खूब भड़कती हैं। वो कहती हैं कि उनकी लड़की वैसी नहीं है, जैसा अविनाश ने बोला है। वो बताती हैं कि अविनाश की इस बात से उनका पूरा उन्हें कभी माफ नहीं करेगा। इसके अलावा वो अविनाश को ‘लड़कीबाज’ भी कहती हैं। वो रजत दलाल को भी फटकारती हैं कि वो चाहत को इस्तेमाल करके फेंक (यूज एंड थ्रो) देते हैं। घर में हुई थी खूब सारी मस्ती बीते एपिसोड में दिखाया गया कि साल की आखिरी शाम को घर में खूब मस्ती हुई। भारती सिंह, करण कुंद्रा, अभिषेक कुमार, समर्थ जुरेल ने घरवालों को खूब गुदगुदाया। तो मुनव्वर फारूकी ने कंटेस्टेंट्स को रोस्ट किया। कंगना रनौत भी अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ का प्रमोशन करने आईं। ये फिल्म कई दफा पोस्टपोन होने के बाद आखिरकार 17 जनवरी 2025 को थिएटर्स में रिलीज हो रही है। घर में कंगना पूरे तानाशाह मोड में दिखीं।

ठंडी हवाओं की कंपकंपी में अलाव बना सहारा, छत्तीसगढ़-कड़ाके की ठंड से नए साल का स्वागत

रायपुर। मैकल पर्वत श्रंखला और अमरकंटक की तराई में बसे पेंड्रा गौरेला मरवाही इलाके में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। नए साल के पहले दिन घने कोहरे से पूरा क्षेत्र कोहरे की चादर में लपटा नजर आया। मौसम साफ होते ही ठंड का एहसास कुछ ज्यादा ही हो रहा है। वहीं उत्तर भारत में हो रही बर्फबारी के चलते भी दिन के वक्त भी लोग गर्म कपड़े पहने नजर आ रहे हैं। मौसम खुलते ही तापमान नीचे की ओर लुढका और यहां न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में ओस की बूंदे भी जमने लगी है। तो लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे है। नये साल के पहले दिन पेंड्रा गौरेला मरवाही इलाके में कड़ाके की ठंड शुरू हो गई। उत्तर भारत में हो रही लगातार बर्फबारी का असर इस इलाके में भी देखने को मिल रहा है। इलाके का तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। यहां पर लगातार तापमान में गिरावट के साथ दिन के समय भी ठंडी-ठंडी हवाएं चल रही हैं। लोग दिन के समय भी गर्म कपड़े पहनने को मजबूर हैं। हालांकि दिन के वक्त धूप निकलने की वजह से ठंड से थोड़ी राहत जरूर मिल रही है। हालांकि, ठंड की वजह से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं। वहीं मैकल पर्वत श्रंखला और अमरकंटक की तराई में बसे ग्रामीण क्षेत्रों में ओस की बूंदे भी जमने लगी है। तो ठंड से बचने के लिए लोग चाय की चुस्की का सहारा भी ले रहे हैं। चाय की गर्म-गर्म चुस्कियां लेते लोग सुबह से ही ठेलो में नजर आने लग जाते हैं। हालांकि अब तक चौक चौराहों में प्रशासन के द्वारा अलाव जलाने की व्यवस्था नहीं की गई है। यह कहा जा सकता है कि उत्तर भारत में हो रही बर्फबारी के बाद उत्तरी हवाओं के असर के चलते ही इलाका कड़ाके की ठंड और शीतलहर की चपेट में है।

‘सुख,समृद्धि और खुशहाली लेकर आए नया वर्ष’, छत्तीसगढ़-सीएम साय ने दी नववर्ष की शुभकामनाएं

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को नववर्ष 2025 की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि नव वर्ष 2025 हम सभी के जीवन में तरक्की के नये अवसर लेकर लाये। सभी के जीवन में सुख-समृद्धि का वास हो। नए वर्ष में वो प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नव वर्ष हम सभी के लिए शुभ संकल्प लेने का समय है। पिछले साल हमने प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी को पूरा करने का संकल्प लिया था और प्रत्येक वर्ग को लाभ पहुंचाने में हमें सफलता मिली। नए वर्ष में भी हम प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि हम इस साल हम सभी छत्तीसगढ़ की स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं। इस वर्ष को हमने अटल निर्माण वर्ष के रूप में भी मनाने का निर्णय लिया है।  सभी की भागीदारी से हमें छत्तीसगढ़ को एक समृद्ध और विकसित राज्य बनायेंगे। नव वर्ष में हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ महतारी को संवारने के लिए और अधिक संकल्पित होकर कार्य करेंगे। हम सभी के शुभसंकल्प और मनोरथ नववर्ष में पूरे हों।

प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्रियों ने जो किया वही करने जा रहे हैं, सीएम मोहन

CM Mohan is going to do what the two former Chief Ministers of the state did. भोपाल ! मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव नए साल में नया प्रयोग करने जा रहे हैं। सीएम मोहन यादव, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और उमा भारती की तरह सीएम आवास पर जनता दरबार लगाएंगे। सीएम मोहन यादव लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और उसका समाधान करेंगे। सीएम आवास पर पहले जनता दरबार का आयोजन 6 जनवरी को होगा। इसके लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मोहन यादव से पहले राज्य के दो पूर्व सीएम उमा भारती और दिग्विजय सिंह जनता दरबार लगा चुके हैं। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस संबंध में कभी पहल नहीं की। सूत्रों के अनुसार, पहला जनता दरबार 6 जनवरी को सुबह 10 से 12 बजे तक होगा। सीएम हाउस पहुंचे लोगों से मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे। लोगों की समस्या के समाधान के लिए अलग-अलग विभाग के अधिकारी भी मौजूद करेंगे जो लोगों की समस्या का तुरंत समाधान करेंगे। बताया जा रहा है कि जनता दरबार में ट्रांसफर और पोस्टिंग जैसे मुद्दों की कोई सुनवाई नहीं होगी। यहां केवल केवल बीमारी और जरूरतमंदों के आवेदनों पर ही सुनवाई होगी। ग्रामीण इलाके के लोगों को प्राथमिकता बताया जा रहा है कि जनता दरबार में ग्रामीण इलाके से आए लोगों को प्राथमिकता मिलेगी। सीएम खुद उन लोगों की समस्या को सुनेंगे। पहले जनता दरबार में 500 से भी ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसके लिए विभाग स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। ये सीएम भी लगा चुके हैं जनता दरबार मोहन यादव से पहले पूर्व सीएम उमा भारती भी जनता दरबार लगा चुकी हैं। पूर्व सीएम उमा भारती 2003 में राज्य की मुख्यमंत्री बनीं थी। वह लोगों की समस्या सुनकर उसका समाधान करती थीं। कहा जाता है कि जनता दरबार में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायत लेकर पहुंचते थे जिस कारण से इसे बंद करना पड़ा था। मध्य प्रदेश में सबसे पहले दिग्विजय सिंह ने जनता दरबार लगाने की शुरुआत की थी। दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक लोगों की समस्या सीएम आवास पर खुद सुनते थे।

MP में ग्राहकों के लिए बैंकों के लेनदेन का समय सुबह 10 से शाम 4:00 बजे तक रहेगा

रतलाम  मध्य प्रदेश में नए साल के पहले दिन से ही बैंकों के समय में परिवर्तन हो जाएगा. इसे लेकर अब मध्य प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रचार प्रसार किया जा रहा है. अब ग्राहकों के लिए बैंकों के लेनदेन का समय सुबह 10 से शाम 4:00 बजे तक रहेगा. रतलाम कलेक्टर राजेश बाथम ने बताया कि राज्य स्तरीय बैंकिंग समन्वय समिति की बैठक के निर्णय अनुसार बैंकों का समय बदलने वाला है. इस संबंध में रतलाम की जिला स्तरीय बैंकिंग सलाहकार समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई जिसमें परिवर्तित समय लागू करने का निर्णय लिया गया है यह समय 1 जनवरी 2025 से लागू हो जाएगा. जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक एम एल मीणा ने बताया कि अब रतलाम जिले में समस्त बैंक शाखाओ में ग्राहक लेन-देन समय- प्रातः 10:00 से शाम 4:00 बजे तक और बैंको का कार्यालय कार्य समय प्रातः 10 बजे से शाम 5:00 बजे तक रहेगा. जिले की कृषि उपज मंडी अरनियापीठा स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया बैंक शाखा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया बैंक शाखा और कृषि उपज मंडी रतलाम स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा का ग्राहक समय दोपहर 12 से शाम 6 बजे तक एवं बैक कार्यालय समय दोपहर 12 से शाम 7बजे तक रहेगा. इसी तरह रतलाम रेलवे कॉलोनी की सेन्ट्रल बैक ऑफ इडिया शाखा का ग्राहक समय प्रातः 11 से शाम 5 बजे बैंक का व कार्यालय समय प्रातः11 से शाम 6 बजे तक रहेगा. देवास, इंदौर, उज्जैन में भी बदलेगा समय देवास कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बताया कि नए नियम को 1 जनवरी से लागू किया जा रहा है. इस संबंध में प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है. इसी प्रकार उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह ने भी बताया कि बैंकों का समय 1 जनवरी 2025 से बदलने वाला है. सुबह 10:00 से 4:00 बजे तक ग्राहकों का लेनदेन होगा.

पांचजन्य ने लिखा मस्जिद-मंदिर विवाद के फिर से उठने पर मोहन भागवत की टिप्पणी समाज से इस मामले में एक ‘समझदारी भरा रुख’

नई दिल्ली आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने पिछले दिनों एक भाषण में कहा था कि हमें हर मस्जिद में मंदिर खोजने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा था कि कुछ लोग हर राम मंदिर जैसा विषय खड़ा करके हिंदू नेता बनना चाहते हैं। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान का एक वर्ग ने समर्थन किया तो वहीं हिंदूवादी संगठनों और कुछ संतों ने राय को खारिज कर दिया। यही नहीं पिछले सप्ताह आरएसएस से जुड़ी पत्रिका ऑर्गनाइजर ने सोमनाथ से संभल तक की एक कवर स्टोरी लगाई थी और इसे सभ्यतागत न्याय का सवाल बताया था। लेकिन अब आरएसएस से ही जुड़ी मैगजीन पांचजन्य में मोहन भागवत की राय को सही बताया गया है। पांचजन्य के संपादकीय में कहा है कि मस्जिद-मंदिर विवाद के फिर से उठने पर संघ प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणी समाज से इस मामले में एक ‘समझदारी भरा रुख’ अपनाने का स्पष्ट आह्वान है। इसने इस मुद्दे पर ‘अनावश्यक बहस और भ्रामक प्रचार’ के प्रति भी आगाह किया। आरएसएस प्रमुख ने हाल में देश भर में मंदिर-मस्जिद विवादों के फिर से उठने पर चिंता व्यक्त की और कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ व्यक्तियों को ऐसा लगने लगा है कि वे ऐसे मुद्दों को उठाकर ‘हिंदुओं के नेता’ बन सकते हैं। 19 दिसंबर को पुणे में सहजीवन व्याख्यानमाला में ‘भारत: विश्वगुरु’ विषय पर व्याख्यान देते हुए भागवत ने समावेशी समाज की वकालत की और कहा कि दुनिया को यह दिखाने की जरूरत है कि भारत सद्भाव के साथ रह सकता है। आरएसएस के मुखपत्र ‘पांचजन्य’ के संपादक हितेश शंकर के 28 दिसंबर के संपादकीय में कहा गया है, ‘आरएसएस प्रमुख मोहनराव भागवत के मंदिरों पर दिए गए हालिया बयान के बाद मीडिया जगत में घमासान (वाकयुद्ध) छिड़ गया है। या यूं कहें कि यह जानबूझकर किया जा रहा है। एक स्पष्ट बयान के अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं। हर दिन नई प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।’ उन्होंने कहा कि इन प्रतिक्रियाओं में स्वतःस्फूर्त सामाजिक राय के बजाय “सोशल मीडिया विशेषज्ञों द्वारा उत्पन्न किया गया कोहराम और उन्माद” अधिक दिखाई देता है। संपादकीय में कहा गया कि भागवत का बयान समाज से इस मुद्दे के प्रति समझदारी भरा रुख अपनाने का स्पष्ट आह्वान है। ‘मंदिरों का राजनीतिक लाभ लेने का चलत गलत है’ इसमें कहा गया है, ‘यह सही भी है। मंदिर हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए उनका इस्तेमाल कतई स्वीकार्य नहीं है। आज के दौर में मंदिरों से जुड़े मुद्दों पर अनावश्यक बहस और भ्रामक दुष्प्रचार को बढ़ावा देना चिंताजनक प्रवृत्ति है। सोशल मीडिया ने इस प्रवृत्ति को और तेज कर दिया है।’ संपादकीय के अनुसार, ‘खुद को सामाजिक कहने वाले कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया मंचों पर स्वयंभू रक्षक और विचारक बन बैठे हैं। ऐसे अविवेकी विचारकों से दूर रहने की जरूरत है जो समाज के भावनात्मक मुद्दों पर जनभावनाओं का इस्तेमाल करते हैं।’ संपादकीय में कहा गया है कि भारत एक ऐसी सभ्यता और संस्कृति का नाम है, जिसने हजारों वर्षों से न केवल अनेकता में एकता के दर्शन का प्रचार किया, बल्कि उसे जीया और आत्मसात भी किया। संपादकीय में मीडिया पर लगाया सनसनी फैलाने का आरोप इसमें कहा गया है, ‘यह भूमि केवल भौगोलिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्यों का जीवंत स्पंदन है। ऐसे में मंदिरों का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और ऐतिहासिक भी है।’ संपादकीय में कहा गया है कि ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मूल्यों से रहित, लेकिन राजनीतिक स्वार्थ से भरे ‘कुछ तत्वों’ ने अपनी राजनीति को बढ़ावा देना, समुदायों को भड़काना और हर गली और इलाके में ‘हिंदू मंदिरों’ को बचाने की आड़ में खुद को सर्वश्रेष्ठ हिंदू विचारक के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है। इसमें कहा गया है, ‘मंदिरों की खोज को सनसनीखेज तरीके से प्रस्तुत करना शायद मीडिया के लिए भी एक चलन बन गया है और यह एक प्रकार का मसाला है, जो 24 घंटे चलने वाले (समाचार) चैनलों और समाचार बाजार की भूख को पूरा रखता है।’

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने आईटी आधारित वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को लागू कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की हासिल

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साथ के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए आईटी आधारित वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को लागू कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार ने इस डिजिटल सुधार की सराहना करते हुए राज्य को 250 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के रूप में प्रदान की है। छत्तीसगढ़ राज्य ने केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन के लिए “जस्ट इन टाइम” (जेआईटी) मॉडल और एसएनए स्पर्श प्रणाली को अपनाया है। यह प्रणाली वित्तीय प्रवाह को कुशल बनाते हुए निधियों के वितरण, ट्रैकिंग और भुगतान को आसान बनाती है। इसके तहत राज्य सरकार ने केंद्र की निधि को आरबीआई के ई-कुबेर नेटवर्क और राज्य की निधि को वित्तीय प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (एफएमआईएस) के माध्यम से समेकित किया है। इस पहल से निधि के सही समय पर उपयोग और वास्तविक समय में व्यय की रिपोर्टिंग भी सुनिश्चित हुई है। इस सुधार के तहत स्मार्ट भुगतान एल्गोरिथम का उपयोग किया गया है, जिससे भुगतान ट्रिगर नियमों के आधार पर वास्तविक समय में किया जाता है। इससे सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के परिणाम बेहतर हुए हैं। साथ ही, राज्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म और पोर्टल्स का निर्माण कर आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से और पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने डिजिटल इंडिया और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) को बढ़ावा देने के लिए अपने तकनीक आधारित सुधारों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक बनाया है। राज्य की अधोसंरचना परियोजनाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को इस प्रोत्साहन राशि से और अधिक मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि तकनीक आधारित सुधार और सुशासन ही छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास का मूलमंत्र है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है, बल्कि जनता के प्रति हमारी सरकार के सुशासन के संकल्प का प्रमाण है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास न केवल राज्य को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बनेगा। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने आईटी के प्रयोग को बढ़ावा दे रही है, इसी के तहत् केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए राशि जारी करने, वितरित करने एवं निधियों की ट्रैकिंग करने तथा बेहतर नकद प्रबंधन के लिए राज्य शासन द्वारा एसएनए स्पर्श के अंतर्गत जेआईटी (जस्ट इन टाईम) मॉडल को अपनाया गया है। इसके माध्यम से केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए नवीन सिस्टम के माध्यम से कार्य किया जा रहा है जिसका उद्देश्य केन्द्र और राज्य की समेकित निधि से राशि को उचित समय पर प्राप्त कर कुशल भुगतान प्रसंस्करण पर ध्यान केन्द्रित करते हुए निधि के उपयोग को अनुकूलित करना एवं व्यय की वास्तविक समय रिपोर्टिंग की सुविधा प्रदान करना है। इसमें केन्द्र प्रवर्तित योजना के राज्य की हिस्से की राशि एफएमआईएस (वित्तीय प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली) तथा केन्द्र के हिस्से की राशि आरबीआई के ई-कुबेर नेटवर्क के माध्यम से जारी की जाती है, जिससे रियल टाईम फण्ड यूटिलाईजेशन किया जा रहा है। केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए कुशल निधि प्रवाह प्रणाली के साथ भुगतान सह लेखा नेटवर्क की स्थापना कर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली की सुविधा प्रदान करने के लिए जस्ट इन टाईम के माध्यम से “सही समय पर” राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया अपनायी गई है। इसमें स्मार्ट भुगतान के तहत एल्गोरिदम के माध्यम से ट्रिगर नियमों पर आधारित वास्तविक समय में कुशल भुगतान किया जा रहा है जिससे सार्वजनिक क्षेत्र में वित्तीय प्रबंधन परिणामों को बेहतर बनाने में मदद मिली है। छत्तीसगढ़ शासन केन्द्र सरकार के डिजिटल इण्डिया पहल को मजबूत करने हेतु प्रतिबद्ध है। बेहतर नकद प्रबंधन एवं सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के लिए जस्ट इन टाईम मॉडल डिजिटल इण्डिया एवं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) को सहयोग प्रदान करता है। “तकनीक आधारित रिफॉर्म और सुशासन तीव्र आर्थिक विकास” वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट वक्तव्य में शामिल स्ट्रैटेजिक स्तंभों में से एक है। केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन प्रणाली अपनाने हेतु किये गये इस रिफॉर्म के लिए भारत सरकार द्वारा भी पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है। इस रिफॉर्म के लिए राज्य को भारत सरकार से 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के लिए प्रदान की है। इसके अतिरिक्त 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि प्राप्त होना संभावित है। इस राशि का उपयोग राज्य के अधोसंरचना निर्माण परियोजनाओं में इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने हेतु किया जा रहा है।

श्रीमती रूणा गुप्ता ने बिहान योजना का लाभ उठाते हुए डेयरी व्यवसाय शुरू किया

रायपुर केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बगीचा ब्लॉक के ग्राम झिक्की की रहने वाली श्रीमती रूणा गुप्ता इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं। बिहान योजना और मुद्रा लोन का लाभ उठाते हुए, उन्होंने डेयरी व्यवसाय शुरू किया और आज वह लखपति दीदी बनकर गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली श्रीमती रूणा का सपना था कि वह अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने परिवार का सहारा बनें। अपने इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने बिहान योजना के तहत साई स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपना सफर शुरू किया। समूह के माध्यम से उन्हें अब तक बैंक से 4.50 लाख रुपए का सहयोग मिला, जिससे उन्होंने दो साहीवाल और एक एच.एफ नस्ल की गाय खरीदी और डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। डेयरी व्यवसाय से मुनाफा कमाने के बाद श्रीमती रूणा ने मुद्रा लोन के तहत एक लाख रुपए का लोन लेकर एच.एफ नस्ल की एक और गाय खरीदी। वर्तमान में उनके पास चार गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन 22 लीटर दूध का उत्पादन होता है। दूध के साथ-साथ दही और पनीर बनाकर विक्रय करने से उन्हें हर माह लगभग 24 हजार रुपए की आय हो रही है। गायों के चारा, देखभाल और लोन चुकाने के बाद भी वह हर महीने 9 हजार रुपए का शुद्ध लाभ कमा रही हैं। डेयरी व्यवसाय से मिले अनुभवों का उपयोग करते हुए श्रीमती रूणा अब पशु क्रेडिट का कार्य भी कर रही हैं। वह बीमार गायों की देखभाल, इलाज और टीकाकरण का काम करती हैं, जिससे उन्हें हर माह अतिरिक्त 2 हजार रुपए की आमदनी हो जाती है। श्रीमती रूणा अपने इस सफर को बेहद खास मानती हैं। उन्होंने बताया कि इस आय से वह अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को पूरा कर रही हैं। खेती में भी उनका योगदान है। इसके साथ ही वह अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। श्रीमती रूणा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिहान योजना और सरकार की अन्य योजनाओं की मदद से ही वह आज इस मुकाम पर पहुंच पाई हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें महतारी वंदना योजना का भी लाभ मिला है। श्रीमती रूणा गुप्ता का यह सफर गांव की महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक कहानी है, मेहनत और सही मार्गदर्शन से कोई भी व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है।

महतारी वंदन योजना ने महिलाओं को न केवल आर्थिक संबल प्रदान किया

रायपुर महतारी वंदन योजना ने वनांचल क्षेत्र की महिलाओं के जीवन में आशा की एक नई किरण जगाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कमी और सीमित संसाधनों के कारण जीवन यापन करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। इस योजना ने महिलाओं को न केवल आर्थिक संबल प्रदान किया, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने में मदद की है। कोरबा जिले के बोड़ानाला गांव की निवासी सुखमत मंझवार का जीवन कभी अभाव और संघर्ष से भरा हुआ था। उनके गांव की खेती योग्य जमीन डुबान में चली गई थी, जिससे परिवार के पास आय का कोई स्थिर स्रोत नहीं था। उनके पति मजदूरी कर परिवार का गुजारा करते थे, लेकिन दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल था। महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता ने सुखमत के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया। इस योजना से प्राप्त राशि ने न केवल उनके घरेलू खर्चों को आसान बनाया, बल्कि उनके परिवार को भी आत्मनिर्भर बनने में मदद की। सुखमत ने साझा किया कि अब वह अपने परिवार की जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रही हैं और किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। बोड़ानाला की ही रहने वाली राजकुमारी मंझवार ने भी इस योजना के लाभ से अपने जीवन को सशक्त बनाया है। उन्होंने बताया कि हर माह मिलने वाली 1,000 रुपये की वित्तीय सहायता से वह अपने दैनिक खर्चों को आसानी से पूरा कर लेती हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, और अब उन्हें मुश्किल समय में किसी से मदद मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ती। महतारी वंदन योजना ने न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी महिलाओं को मजबूत बनाया है। इस योजना ने वनांचल क्षेत्र की महिलाओं को अपनी और अपने परिवार की खुशहाली सुनिश्चित करने में सक्षम बनाया है। यह पहल उनके जीवन में एक नई दिशा और उजाला लेकर आई है, जिससे उनका भविष्य बेहतर और सशक्त हो रहा है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की महिलाओं को वित्तीय सहारा देकर उनके जीवन स्तर को सुधारना और आत्मनिर्भर बनाना है। महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार साबित हो रही है।

कैसे हैं आपके प्रदेश के मुख्यमंत्री; किस पर कितने हैं केस दर्ज, कितनी है संपत्ति

how chief minister of your state how many cases registered against whom how much property there भारत के राजनीति में मुख्यमंत्री की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। वे न केवल राज्य के सबसे प्रभावशाली नेता होते हैं, बल्कि उनके खिलाफ चल रहे मामलों और उनकी संपत्ति भी चर्चा का विषय बनते हैं। how chief minister of your state हाल ही में लोकतांत्रिक सुधार संघ (ADR) और राष्ट्रीय चुनाव निगरानी (NEW) ने देशभर के 31 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और उनकी संपत्ति का विश्लेषण किया है। इस रिपोर्ट में यह सामने आया है कि कई मुख्यमंत्री गंभीर आपराधिक मामलों में घिरे हुए हैं, जबकि कुछ अपनी संपत्ति के मामले में काफी संपन्न हैं। क्या आपके राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई आपराधिक मामले दर्ज हैं? भारत में 31 मुख्यमंत्रियों में से 13 (42%) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 10 (32%) मुख्यमंत्रियों पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारतीय राजनीति में कई मुख्यमंत्री ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले हैं, फिर भी वे सत्ता में बने रहते हैं। किन मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कितने गंभीर आरोप हैं? तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंथ रेड्डी: इनके खिलाफ कुल 89 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 72 गंभीर आपराधिक मामले हैं। ये मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत दर्ज किए गए हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन: इनके खिलाफ 47 मामले हैं, जिनमें से 11 गंभीर आपराधिक मामले हैं। आरोपों में भ्रष्टाचार और जमीन कब्जाने के मामले शामिल हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू: इन पर कुल 19 मामले हैं, जिनमें 32 गंभीर IPC मामले हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते नायडू अक्सर विवादों में रहते हैं। कर्नाटका के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया: इन पर 13 मामले हैं, जिनमें 6 गंभीर IPC मामले शामिल हैं। भारत के मुख्यमंत्रियों की संपत्ति कितनी है? भारत के 31 मुख्यमंत्रियों की औसत संपत्ति 52.59 करोड़ रुपये है। कुछ मुख्यमंत्री अरबों की संपत्ति के मालिक भी हैं। चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश): उनकी संपत्ति 931.83 करोड़ रुपये है।-पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश): उनकी संपत्ति 332 करोड़ रुपये से अधिक है।सिद्धारमैया (कर्नाटका): उनकी संपत्ति 51 करोड़ रुपये से अधिक है। क्या मुख्यमंत्री की संपत्ति आम नागरिक से कहीं अधिक होती है?मुख्यमंत्री की संपत्ति और आय आम नागरिक की तुलना में काफी अधिक होती है। उदाहरण के लिए, भारत में औसत राष्ट्रीय आय लगभग 1.85 लाख रुपये सालाना है, जबकि मुख्यमंत्री की औसत आय 13.64 लाख रुपये सालाना होती है, यानी उनकी आय लगभग सात गुना अधिक होती है। क्या मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई फाइनैंशियल स्कैंडल या कर्ज है? कुछ मुख्यमंत्री ऐसे हैं जिनके पास बड़ी संपत्ति के साथ-साथ कर्ज भी है। उदाहरण के लिए: पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश): उनकी संपत्ति 332.56 करोड़ रुपये है, लेकिन उन्होंने 180.28 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। सिद्धारमैया (कर्नाटका): उनकी संपत्ति 51.94 करोड़ रुपये है, और उन्होंने 23.77 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश): उनकी संपत्ति 931.83 करोड़ रुपये है, लेकिन उन्होंने 10.32 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। भारत में कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं? भारत में महिला मुख्यमंत्री की संख्या बहुत कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मुख्यमंत्रियों में से सिर्फ 2 महिला मुख्यमंत्री हैं, जो केवल 6% हैं। यह आंकड़ा भारतीय राजनीति में महिला नेतृत्व की कमी को दर्शाता है। भारत के मुख्यमंत्रियों की संपत्ति और उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले दर्शाते हैं कि राजनीति में बहुत सी जटिलताएँ होती हैं। हालांकि कुछ मुख्यमंत्री अपनी संपत्ति और पारदर्शिता के मामले में काफी अग्रणी हैं, वहीं कई ऐसे भी हैं जिनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं।

राजनांदगांव जिले में 9.72 करोड़ से 324 केज इकाइयां स्थापित

रायपुर राजनांदगांव जिले के बंद पड़ी खदानों को आजीविका के लिए उपयोगी बनाते हुए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केज कल्चर तकनीक से मछली पालन का कार्य तेजी से लोकप्रिय और फायदेमंद साबित हो रहा है। यह नवाचार न केवल मत्स्य पालकों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हुआ है, बल्कि 150 से अधिक स्थानीय बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार का नया जरिया भी बन गया है। जिले के ग्राम जोरातराई में बंद पड़ी खदानों को जलस्रोत के रूप में उपयोग करते हुए 9.72 करोड़ रुपए की लागत से 18 इकाइयों में कुल 324 केज लगाए गए हैं। प्रत्येक केज इकाई की लागत 3 लाख रुपए है, जिसमें से 60 प्रतिशत अनुदान के रूप में 5.83 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है। केज कल्चर, जिसे नेट पेन कल्चर भी कहा जाता है, जलाशय में फ्लोटिंग केज यूनिट स्थापित करने की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें एक केज यूनिट में चार बाड़े होते हैं, जहां उंगली के आकार की मछलियों को पाला जाता है, जो  पांच माह में लगभग एक से सवा किलो वजन की हो जाती है। इस तकनीक में तिलापिया और पंगेसियस जैसी मछलियों का पालन किया जा रहा है। प्रत्येक केज से 2.5 से 3 टन तक मछली उत्पादन होता है, जिससे 6 से 8 हजार रुपए की मासिक आमदनी होती है। ग्राम मुढ़ीपार स्टेशन पारा की श्रीमती पूर्णिमा साहू ने बताया कि जय मां संतोष महिला स्वसहायता समूह के माध्यम से केज कल्चर तकनीक से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। समूह की महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार प्रकट किया है। जोरातराई की खदानों में 8 लाख से अधिक मछलियां पाली जा रही हैं। यह तकनीक न केवल मछलियों की तेज वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त है, बल्कि संक्रमण का खतरा भी कम रहता है। मत्स्यपालक अपनी जरूरत के अनुसार केज से मछलियां निकाल सकते हैं। राज्य सरकार की इस पहल ने बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध कराए हैं। मत्स्य पालन की इस नवीन तकनीक से अब ताजी और स्थानीय मछलियां बाजार में उपलब्ध हो रही हैं। केज कल्चर तकनीक ने जिले में मछली उत्पादन के नए आयाम स्थापित किए हैं। जलाशयों और बंद खदानों के जलस्रोतों का यह उपयोग स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के व्यापक मूल्य को मापकर छत्तीसगढ़ के सतत विकास में रेखांकित किया जाएगा

रायपुर वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को ग्रीन जीडीपी के साथ जोड़ने की पहल शुरू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है।  इस पहल  के द्वारा पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के व्यापक मूल्य को मापकर छत्तीसगढ़ के सतत विकास में रेखांकित किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 विज़न और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप विज़न डॉक्यूमेंट तैयार कर रही है, जिसमें वन विभाग द्वारा संचालित पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन की अवधारणा सम्मिलित की गई है। यह समग्र दृष्टिकोण राज्य में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित हो सके। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन न केवल बजटीय योजना को अधिक सुव्यवस्थित बनाएगा, बल्कि भविष्य की रणनीतियों को दिशा प्रदान करेगा, धन आवंटन को अधिक प्रभावी बनाएगा और वानिकी विकास के प्रयासों को सशक्त करेगा। यह प्रक्रिया सतत विकास और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य मे संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम ने स्थानीय समुदायों को और अधिक सशक्त बनाया है। गुरु घासीदास, कांगेर घाटी और इंद्रावती जैसे राष्ट्रीय उद्यानों के साथ, छत्तीसगढ़ में प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए असीम संभावनाएं हैं। स्थानीय निवासियों को जंगल सफारी, नेचर ट्रेल्स और इको-कैंपिंग जैसी सुविधाओं के प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल किया जा रहा है, जिससे न केवल सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी सशक्त किया गया है। छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। यह राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार हैं और लाखों लोगों की आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये वन विभिन्न प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ प्रदान करते हैं। वनों से प्राप्त होने वाले अन्य महत्वपूर्ण अमूर्त लाभ अक्सर उपेक्षित रहते हैं और उनका उचित मूल्यांकन नहीं हो पाता। इनमें जलवायु संतुलन बनाए रखने के लिए कार्बन अवशोषण, कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण परागण, पोषक तत्वों का चक्रण, मृदा उर्वरता में सुधार और जैव विविधता संरक्षण जैसी सेवाएं शामिल हैं। वनों का बाढ़ और रोग नियंत्रण, जल प्रवाह का प्रबंधन और वेक्टर जनित रोगों के जोखिम को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके अतिरिक्त, वनों से जल पुनर्भरण और शुद्धिकरण होता है, शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान कर वायु गुणवत्ता में सुधार होता है, और सुंदर प्राकृतिक दृश्य तथा जैव विविधता-समृद्ध क्षेत्रों के माध्यम से मनोरंजन के साथ-साथ भावनात्मक संतुष्टि भी प्रदान होती है। इन वनों का गहरा आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व भी है, क्योंकि पवित्र स्थलों और देवगुड़ी जैसे क्षेत्रों के माध्यम से ये आदिवासी विरासत और परंपराओं को संरक्षित रखते हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के वन अनेक नदियों का उद्गम स्थल हैं, जो सतत जल प्रवाह, जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण और कृषि तथा आजीविका के लिए आवश्यक जैविक पदार्थ से मृदा को समृद्ध करने में सहायक हैं। इन प्रत्यक्ष लाभों का राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ता है। ये सभी लाभ ग्रामीण उद्योगों और आजीविका को प्रोत्साहित करते हैं और राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।

अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश:अरुण साव

रायपुर : साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाएं छत्तीसगढ़ के शहरों को: अरुण साव साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाएं छत्तीसगढ़ के शहरों को उप मुख्यमंत्री ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा की अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रियाएं 10 जनवरी तक पूर्ण करने के दिए निर्देश आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को रोजाना वार्डों का भ्रमण कर निर्माण कार्यों, सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने कहा अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश रायपुर   उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों को अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रियाएं 10 जनवरी तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा अनुकम्पा नियुक्ति के लिए प्रदेशभर के नगरीय निकायों में 353 नए पद मंजूर किए गए हैं।     उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक में नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को रोजाना वार्डों का भ्रमण कर निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने नगरीय निकायों में बन रहे अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और इनके उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश दिए। साव ने अधिकारियों को गंभीरता और सक्रियता से काम करते हुए राज्य के शहरों को साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने को कहा। नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., विशेष सचिव आर. एक्का और संचालक कुंदन कुमार भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।       उप मुख्यमंत्री साव ने समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर के निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए अच्छी गुणवत्ता की उत्कृष्ट मूर्ति स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अटल परिसर का इस तरह निर्माण करें कि शहर में इसकी विशेष पहचान और दर्शनीय स्थल बनें। उन्होंने प्रदेश के 12 शहरों में बनाए जा रहे नालंदा परिसर के लिए निविदा की प्रक्रिया पूरी कर शीघ्र काम प्रारंभ करने को कहा। साव ने अधिकारियों से कहा कि नालंदा परिसर का शानदार और आइकॉनिक निर्माण होना चाहिए। नालंदा परिसर और अटल परिसर का निर्माण सरकार के महत्वाकांक्षी कार्य हैं। उन्होंने आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को खुद इनकी मॉनिटरिंग करने और प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।     उप मुख्यमंत्री साव ने बैठक में अधोसंरचना मद और 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत कार्यों के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत मिशन 2.0, एसटीपी निर्माण और आकांक्षी शौचालयों के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सभी नगरीय निकायों के अधिकारियों को रोजाना प्रातः भ्रमण कर निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने 01 जनवरी से ही इसकी शुरूआत कर शहरों में प्रकाश और सफाई की व्यवस्था दुरूस्त करने को कहा। साव ने इसमें किसी भी तरह की कोताही न बरतते हुए गंभीरता और सक्रियता से प्रतिदिन कार्यों की मॉनिटरिंग करने को कहा। इसमें किसी तरह का हीला-हवाला पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।        साव ने समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के निर्माणाधीन आवासों को आगामी मार्च महीने तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने गरीबों का आशियाना तैयार करने का काम संवेदनशीलता से करते हुए इनका निर्माण प्राथमिकता से पूर्ण करने को कहा।  उन्होंने किफायती आवास परियोजनाओं के तहत निर्मित आवासों का आबंटन हितग्राहियों को तत्काल करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री साव ने जनसमस्या निवारण पखवाड़ा के दौरान अनिराकृत प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर इन्हें जल्द से जल्द निराकृत करने को कहा।     साव ने नगरीय निकायों में नियमित और प्लेसमेंट कर्मचारियों के समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने ऊर्जा की अनावश्यक खपत पर रोक लगाते हुए विद्युत देयकों का भुगतान समय पर करने के निर्देश दिए। लंबित भुगतान के कारण विद्युत देयकों पर सरचार्ज लगने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। साव ने नगरीय निकायों में सेट-अप के पुनरीक्षण के लिए आवश्यक जानकारी संचालनालय को भेजने को कहा। उन्होंने आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को सभी कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के सीईओ शशांक पाण्डेय और नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य सहित सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक एवं नगरीय निकायों के अभियंता भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

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