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मुख्यमंत्री डॉ. यादव हरदा जिले को देंगे 316.20 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव हरदा जिले को देंगे 316.20 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात नर्मदा तट पर घाट निर्माण कार्य का करेंगे लोकार्पण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार 4 फरवरी को हरदा जिले की टिमरनी तहसील के ग्राम छिपानेर स्थित चिचोटकुटी में 316 करोड़ 20 लाख रूपये के निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन करेंगे। इनमें 130.32 करोड़ रूपये लागत 21 कार्यों का भूमि पूजन और 185.87 करोड़ रूपये लागत के 97 कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्राम चिचोटकुटी में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा नर्मदा नदी के तट पर 11.07 करोड़ रूपये लागत से बनवाये गये घाट निर्माण का लोकार्पण भी करेंगे। कार्यक्रम में जिले के प्रभारी और सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग भी उपस्थित रहेंगे।  

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड स्कीम में कृषकों को 3 प्रतिशत ब्याज की छूट

भोपाल एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड स्कीम केन्द्र सरकार द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य देश में कृषि अवसंरचना का विकास एवं विस्तार करना है। इस योजना के माध्यम से कृषक, कृषि अवसंरचना निर्माण के लिये बैंक से प्राप्त राशि रुपये 2 करोड़ तक के ऋण पर 3 प्रतिशत ब्याज छूट का लाभ सात वर्षों के लिए से सकते है। इस योजना के अंतर्गत वेयरहाउस, साइलोस, कस्टम हायरिंग सेंटर, कोल्ड स्टोरेज, सॉर्टिंग व ग्रेडिंग इकाई, प्राथमिक प्र-संस्करण इकाई, एयरोफोनिक फार्मिंग, हायड्रोफोनिक फार्मिंग, वर्टिकल कार्मिंग, मशरूम फार्मिंग, स्मार्ट प्रिसीजन फार्मिंग के लिये अवसंरचना निर्माण की जा सकती हैं। योजनांतर्गत मध्यप्रदेश को वर्ष 2025-26 तक 7440 करोड़ रूपये का लक्ष्य दिया गया है। जिसके विरुद्ध 7,804 करोड़ रूपये के कुल 10.860 प्रकरण स्वीकृत किए जा चुके हैं, जो कि देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक है। इसके अतिरिक्त कुल 10.047 प्रकरणों में 5978 करोड़ रूपये का डिसबर्समेंट किया जा चुका है जो अन्य राज्यों की अपेक्षा कहीं अधिक है। केन्द्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश को 500 करोड़ रूपये का लक्ष्य दिया गया था जिसके विरुद्ध 1240 करोड़ रूपये के कुल 2152 प्रकरण स्वीकृत किये जा चुके हैं जो कि आवंटित लक्ष्य का 248 प्रतिशत है। साथ ही कुल 1745 प्रकरणों में 721 करोड़ रूपये का डिसबर्समेंट किया जा चुका है। केन्द्र सरकार की इस महत्वाकांशी योजना का देश में सर्वोत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश को वर्ष 2021-22, 2022-23 एवं 2023-24 में “अवार्ड” से सम्मानित भी किया गया है।  

परीक्षाओं में इस साल दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की संख्या होगी कम, वस्तुनिष्ठ और अति लघु उत्तरीय प्रश्नों की संख्या पहले से बढ़ेगी

भोपाल  माध्यमिक शिक्षा मंडल की पांचवी और आठवीं की वार्षिक परीक्षा के प्रश्नपत्रों की रूपरेखा और अंक योजना जारी हो गई है। इस परीक्षा में परीक्षार्थियों को प्रश्नों के छोटे-छोटे उत्तर अधिक देने होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि इस परीक्षा में वस्तुनिष्ठ, रिक्त स्थान भरो और अति लघु उत्तरीय प्रश्न अधिक पूछे जाएंगे। वहीं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की संख्या बेहद कम होगी।     मंडल की यह वार्षिक परीक्षा 24 फरवरी से शुरू होकर पांच मार्च तक चलेगी।     इस परीक्षा के लिए प्रदेश में 12 हजार केंद्र बनाए गए हैं।     दोनों कक्षाओं के करीब 24 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे।     इस सबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।     परीक्षा परिणाम के लिए अधिभार अंक भी निर्धारित कर दिया गया है।     इसके मुताबिक अर्द्धवार्षिक परीक्षा के लिए अधिभार अंक 20, वार्षिक परीक्षा लिखित अधिभार अंक 60 और वार्षिक परीक्षा प्रोजेक्ट कार्य के लिए अधिभार अंक 20 निर्धारित किए गए हैं।     प्रत्येक विषय में दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की संख्या चार होगी। वहीं पांच बहु विकल्पीय प्रश्न, पांच रिक्त स्थान भरो और छह अति लघुउत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे।     लघु उत्तरीय प्रश्नों की संख्या भी छह होगी। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा निर्धारित ब्लू प्रिंट के आधार पर प्रश्न-पत्र तैयार होंगे।     सरकारी स्कूलों के लिए प्रश्न-पत्र राज्य स्तर से तैयार कराए जाएंगे, जबकि निजी स्कूल निर्धारित ब्लू प्रिंट के आधार पर प्रश्न-पत्रों को स्वयं तैयार कराएंगे।     सरकारी स्कूलों में भाषा विषय (हिंदी, अंग्रेजी व संस्कृत) की राज्य स्तर के एससीईआरटी पाठ्यपुस्तक से और निजी स्कूलों में एनसीईआरटी से प्रश्न पूछे जाएंगे। अन्य विषयों के प्रश्नपत्र एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक से पूछे जाएंगे। भोपाल जिले के 68 हजार विद्यार्थी शामिल होंगे भोपाल जिले में दोनों कक्षाओं की परीक्षा में करीब 68 हजार विद्यार्थी शामिल होंगे। इसमें पांचवीं के 34,213 और आठवीं के 34,773 विद्यार्थी होंगे। जिले में करीब 250 केंद्र बनाए गए हैं। 33 प्रतिशत से कम अंक लाने पर होंगे फेल प्रत्येक विषय की लिखित परीक्षा व आंतरिक मूल्यांकन में अलग-अलग न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। प्रत्येक विषय के बाह्य एवं आंतरिक मूल्यांकन में न्यूनतम अर्हकारी अंक प्राप्त नहीं करने वाले परीक्षार्थी को फिर से परीक्षा देनी होगी। उसमें भी पास नहीं हुए तो उसी कक्षा में दोबारा पढ़ना होगा। परीक्षा अंक की योजना     छमाही परीक्षा-अधिभार 20 अंक     वार्षिक परीक्षा(लिखित) – 60 अंक     आंतरिक मूल्यांकन (प्रोजेक्ट कार्य) -20 अंक लिखित परीक्षा के प्रश्नों का पैटर्न ऐसा होगा     बहु विकल्पीय प्रश्न-पांच अंक (पांच प्रश्न)     रिक्त स्थान की पूर्ति वाले प्रश्न-पांच अंक (पांच प्रश्न)     अति लघुउत्तरीय प्रश्न -12 अंक (छह प्रश्न)     लघु उत्तरीय प्रश्न -18 अंक (छह प्रश्न)     दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-20 अंक (चार प्रश्न)  

अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा मिलने की तैयारी के पहले ही भोपाल के राजा भोपाल एयरपोर्ट पर लगातार यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी

भोपाल  अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा मिलने की तैयारी के पहले ही भोपाल के राजा भोपाल एयरपोर्ट पर लगातार यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है. जनवरी माह में राजा भोज एयरपोर्ट पर यात्रियों की ट्रेवलिंग का नया रिकॉर्ड बना है. जनवरी माह में भोपाल एयरपोर्ट से 1 लाख 51 हजार 139 यात्रियों ने हवाई यात्रा की है, जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. इसके पहले पिछले साल दिसंबर माह में 1 लाख 50 हजार 946 यात्रियों ने इस एयरपोर्ट पर मूवमेंट किया था. एयरपोर्ट अथॉरिटी यात्रियों की बढ़ती संख्या से खुश हैं. उनके मुताबिक आने वाले समर सीजन में यात्रियों की यह संख्या और बढ़ेगी. वहीं एयर इंडिया एक्सप्रेस की चार उड़ानें शुरू होने जा रही है. जनवरी 2025 में 1152 हवाई फेरे राजा भोज एयरपोर्ट के डायरेक्टर रामजी अवस्थी बताते हैं, ” एयरपोर्ट से उड़ानों की संख्या बढ़ी है. अभी भोपाल से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, रायपुर, उदयपुर, पुणे, रीवा और गोवा के लिए उड़ानें हैं. जनवरी 2025 में भोपाल एयरपोर्ट से कुल 1152 फ्लाइट्स आईं-गईं, जिसमें 1 लाख 51 हजार 139 यात्रियों ने यात्रा की. यानी हर रोज करीबन 4875 पैसेंजर्स का मूवमेंट हो रहा है. पिछले छह माह का रिकॉर्ड देखें तो 8 लाख 6 हजार 620 यात्रियों का भोपाल एयरपोर्ट पर मूवमेंट रहा है. जनवरी में भोपाल पहुंचीं 576 फ्लाइटें एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिक, ” जनवरी माह में देश के दूसरे शहरों से राजा भोज भोपाल एयरपोर्ट पर 576 फ्लाइट पहुंचीं और इन्हीं फ्लाइट्स से भोपाल एयरपोर्ट के यात्रियों ने दूसरे शहरों के लिए उड़ान भरी है. ऐसे यात्रियों की संख्या 78 हजार 170 थी. वहीं बाकी पैसेंजर्स इन्हीं फ्लाइटों से भोपाल पहुंचे. उड़ानों के फेरे बढ़ने के साथ भोपाल एयरपोर्ट से आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुई है.” गर्मियों की छुट्टियों में बढ़ेंगे यात्री और नई उड़ानें उधर मार्च के महीने में भोपाल एयरपोर्ट से यात्रियों की ट्रेवलिंग का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है. मार्च में स्कूलों की छुट्टियां शुरू होने के बाद से भोपाल एयरपोर्ट से यात्रियों की संख्या बढ़ने की पूरी संभावना बताई जा रही है. इसके साथ ही नई फ्लाइट्स शुरू होने की भी उम्मीद है. अभी भोपाल एयरपोट से 12 शहरों का कनेक्शन हो चुका है. अभी यहां फ्लाइट्स की कुल संख्या 36 है, जो समर सीजन में 50 तक पहुंच सकती है. इंटरनेशनल फ्लाइट्स की तैयारियां जोरों पर जल्द ही इकोनॉमिक एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस भी भोपाल से जुड़ने जा रही है. राजाभोज एयरपोर्ट सलाहकार समिति के सदस्य मनोज सिंह कहते हैं, ” जल्द ही भोपाल से इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू होने जा रही है. इसकी तैयारी की जा रही है. भोपाल एयरपोर्ट के इंफ्रस्ट्रक्चर को लेकर काम किया जा रहा है.”

विश्लेषण: प्रयागराज महाकुम्भ 2025 मेले में हुई त्रासदी के बाद उठ रहे हैं कई सवाल

Analysis: Many questions are being raised after the tragedy at the Prayagraj Maha Kumbh 2025 fair सम्पादकीय लेख भोपाल। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के समर्थक चाहे जितनी कोशिश कर लें, कुम्भ मेले में हुई त्रासदी के पीछे उनके प्रशासन की लापरवाही और कुप्रबंधन को छिपाया नहीं जा सकता। जैसे-जैसे नए विवरण सामने आ रहे हैं, हादसे की भयावहता बढ़ती ही जा रही है। यह भी पता चला है कि 29 जनवरी की सुबह पहली भगदड़ के बाद, कुछ ही घंटों के भीतर थोड़ी दूरी पर दूसरी भगदड़ भी हुई थी। इसके अलावा कुम्भ में कुछ मर्तबा आगजनी की घटनाएं भी हुई हैं, जिनमें सरकार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से बनाए गए दर्जनों आलीशान टेंट जलकर राख हो गए। आधिकारिक तौर पर मृतकों की संख्या 30 बताई गई है। लेकिन मौनी अमावस्या के दिन स्नान के लिए जिस पैमाने पर भीड़ उमड़ी थी, उसके मद्देनजर यह संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। कपड़ों, जूतों, कम्बलों और अन्य निजी सामानों के अवशेष हर जगह बिखरे पड़े थे, जो इस बात के जीवंत साक्ष्य थे कि भीड़ में कुचलने के भय से श्रद्धालु अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने पर मजबूर हो गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस त्रासदी के कुछ ही घंटों के भीतर एक्स पर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त कर दी थीं, लेकिन उत्तर प्रदेश प्रशासन बहुत समय तक यही दिखावा करता रहा कि कुछ हुआ ही नहीं है। इसके बाद मोदी ने यूपी सीएम से चार बार फोन पर बात की, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी एक्स पर पोस्ट किया, तब जाकर यूपी प्रशासन को अपनी चुप्पी तोड़ने और सच्चाई स्वीकारने के लिए मजबूर होना पड़ा। हादसे के पूरे 17 घंटे बाद, 29 जनवरी को शाम 7 बजे उन्होंने भगदड़ की जिम्मेदारी लेते हुए बयान जारी किया और ऐसी घटना दोबारा होने से रोकने के इंतजाम करने का वादा किया। उसके बाद से, यूपी सरकार ने भीड़ को सफलतापूर्वक प्रबंधित करने का प्रत्यक्ष अनुभव रखने वाले दो वरिष्ठ अधिकारियों को ड्यूटी पर लगाया है, अतिरिक्त बल तैनात किए हैं और वाहनों और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए नए सिरे से यातायात योजना बनाई है, लेकिन नुकसान पहले ही हो चुका था। जोशीमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हादसे के बाद योगी के इस्तीफे की मांग की है और उन पर इस मामले में देश को गुमराह करने का आरोप लगाया। अन्य प्रमुख संतों और साधुओं ने सार्वजनिक रूप से तो कुछ नहीं कहा, लेकिन माना जा रहा है कि कई लोग मन ही मन शंकराचार्य की भावनाओं को समर्थन करते हैं और वे इस बात से नाराज हैं कि मौनी अमावस्या का पवित्र दिन तीर्थयात्रियों के शवों से दागदार हो गया। शंकराचार्य ने कहा कि अगर उन्हें भगदड़ और उसके परिणामस्वरूप हुई मौतों के बारे में पता होता, तो वे मृतकों के लिए उपवास करते और आनुष्ठानिक रूप से तीर्थस्नान नहीं करते। यूपी के सीएम के रूप में आठ साल के अपने कार्यकाल में योगी ने खुद को हिंदुत्व के एक प्रखर चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया है। इससे न केवल उन्हें संघ का समर्थन मिला जिसने लोकसभा चुनावों में यूपी में भाजपा की करारी हार के बावजूद हर परिस्थिति में उनका साथ दिया बल्कि उन्हें खुद को देश भर में एक लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिली। आज वे मोदी के बाद भाजपा के दूसरे सबसे लोकप्रिय प्रचारक हैं। लेकिन कुम्भ हादसे के बाद एक सक्षम प्रशासक के रूप में उनकी छवि को झटका लगा कुम्भ का निर्बाध आयोजन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की साख को मजबूत कर सकता था। किंतु प्रयागराज में हुए हादसे के बाद अब यूपी प्रशासन से सवाल पूछे जा रहे हैं। यह किसी से छुपा नहीं है कि यूपी की भाजपा में अंतर्कलह है। है। ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि वे कुम्भ शुरू होने से पहले और बाद में लगभग हर दूसरे दिन प्रयागराज का दौरा कर रहे थे, वे व्यक्तिगत रूप से वहां की व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे थे और इस पर बारीकी से नजर रखे हुए थे कि कुम्भ के प्रबंधन के लिए जो प्रशासनिक मशीनरी उन्होंने लगाई थी, वह सुचारु रूप से काम कर रही है या नहीं। बीवीआईपी के लिए विशेष व्यवस्था, उनकी गाड़ियों की अनियंत्रित आवाजाही और आम श्रद्धालुओं को नदी तक पहुंचने के लिए 20 किलोमीटर से अधिक पैदल चलना, खाने-पीने की चीजों की ऊंची लागत आदि को लेकर भी अनेक श्रद्धालुओं में गुस्सा है। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम का निर्बाध आयोजन हिंदुत्व के प्रतीक और कुशल प्रशासक के रूप में योगी की साख को मजबूत करता, किंतु प्रयागराज में अफसरों की लापरवाही से हुए हादसे के बाद अब उनके नेतृत्व वाले प्रशासन से सवाल पूछे जा रहे हैं। यह किसी से छुपा नहीं है कि यूपी की भाजपा में अंतर्कलह है। 26 फरवरी को मेला समाप्त होने के बाद यूपी की राजनीति में बहुत कुछ देखने को मिल सकता है।

राज्य आनंद संस्थान और राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के बीच हुआ एमओयू

भोपाल राज्य आनंद संस्थान और राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के बीच मैनिट परिसर में मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैडिंग (समझौता ज्ञापन) किया गया। एमओयू के तहत दोनों पक्ष तीन वर्षों तक एक-दूसरे के सहयोगी के रूप में कार्य कर विभिन्न गतिविधियों का क्रियान्वयन करेंगे। एमओयू का उद्देश्य 1. एक दूसरे के सहयोगी के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् में सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर आधारित कार्यक्रम एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रस्तावों के अनुरूप वि‌द्यार्थियों में मानवीय मूल्य संवर्धन के लिये अध्ययन/कार्यक्रमों का क्रियान्वयन। 2. दोनों पक्षों के प्राध्यापक/कर्मचारियों/विद्यार्थियों का क्षमतावर्धन कर उनके माध्यम से अपनी-अपनी योजनाओं की पहुँच समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँचाना। 3. प्राध्यापक एवं विद्यार्थियों को नैतिकता, आत्म-चिंतन एवं सकारात्मक मानसिकता के विकास के लिये प्रशिक्षण एवं यथासंभव आवश्यक सहयोग प्रदान करना। 4. प्राध्यापक एवं विद्यार्थियों को स्वयंसेवी पहल के लिये एक सहयोग मंच प्रदान कर आनंद एवं इससे जुड़े कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना। 5. ज्ञान और संसाधन के प्रसार हेतु अन्य दीर्घकालिक मार्ग की खोज तथा सहयोग के बिन्दुओं को तलाशकर साझा रणनीति क्रियान्वयन।     प्रथम पक्ष के दायित्व 1. प्रथम पक्ष की प्रक्रिया के तहत चयनित ‌द्वितीय पक्ष के प्राध्यापकों के लिये प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। साथ ही प्रथम पक्ष संकाय विकास कार्यक्रम भी आयोजित करेगा ताकि प्राध्यापकों को स्वतंत्र रूप से सत्र का संचालन करने के लिये प्रशिक्षित किया जा सके। 2. प्रथम पक्ष सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों के पाठ्यक्रम निर्माण में ‌द्वितीय पक्ष की सहायता करेगा। 3. प्रथम पक्ष नियमित अंतराल पर पारस्परिक रूप से तय कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय पक्ष के प्राध्यापक एवं वि‌द्यार्थियों के लिए आनंद के कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। 4. प्रथम पक्ष विद्यार्थियों के लिये सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर आधारित कार्यक्रम आयोजित करेगा, जो या तो पूरे 7 दिनों तक लगातार आयोजित किये जायेंगे अथवा तीन माह के लिए 10 सत्रों की अवधिवार पाठ्यक्रम बनाया जाएगा। 5. प्रथम पक्ष प्राध्यापक एवं विद्यार्थियों के विकास, संस्थागत क्षमता निर्माण, अनुसंधान और नवाचार से संबंधित गतिविधियों में ‌द्वितीय पक्ष के ज्ञान सहभागी के रूप में कार्य करेगा एवं तद्‌नुसार संयुक्त कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने और उन्हें संचालित करने के लिये अपनी विशेषज्ञता प्रदान करेगा। 6. प्रथम पक्ष सभी निर्धारित कार्यक्रमों के लिए एक ऑनलाइन पंजीयन लिंक प्रदान करेगा और नामांकित/चिह्नित प्रतिभागियों को दिये गये लिंक के माध्यम से ऑनलाइन पंजीयन करेगा।     द्वितीय पक्ष के दायित्व : 1. द्वितीय पक्ष आनंद से संबंधित संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालायें और सम्‌मेलन आयोजित करने में प्रथम पक्ष को यथासंभव सहयोग प्रदान करेगा। 2. प्रथम पक्ष ‌द्वारा तैयार पाठ्य-पुस्तक अध्ययन सामग्री आदि को द्वितीय पक्ष अपनी आवश्यकतानुसार मुद्रित करवायेगा तथा प्रतिभागियों को उपलब्ध कराएगा। 3. द्वितीय पक्ष परस्परिक रूप तय समय सारणी के अनुसार आनंद से जुड़े कार्यक्रमों के लिये प्राध्यापक एवं विद्यार्थियों को नामांकित करेगा। 4. द्वितीय पक्ष आनंदसे जुड़े कार्यक्रमों में नामांकित प्रतिभागियों का नियमित अंतराल पर निरीक्षण करेगा तथा उनकी क्षमता व समझ के आधार पर उन्हें अगले स्तर के कार्यक्रमों के लिये चिहिन्त/नामांकित करेगा। 5. द्वितीय पक्ष अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रथम पक्ष द्वारा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों/आनंद शिविरों/प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आदि में सम्मिलित होने के लिए प्रोत्साहित करेगा तथा उन्हें आवश्यक अनुमति प्रदान करेगा। 6. प्रथम पक्ष द्वारा प्रदत्त प्रारूप में कार्यक्रम के पूर्व और पश्चात आवश्यकतानुसार मूल्यांकन/प्रथम रिपोर्ट द्वितीय पक्ष द्वारा तैयार किया जायेगा। 7. द्वितीय पक्ष, प्रथम पक्ष के कार्यक्रमों के संचालन के लिये आवश्यक सुविधाएँ एवं संसाधन उपलब्ध कराएगा।  

इंदौर में गीले कचरे से बायो सीएनजी तैयार करने की इकाई

भोपाल प्रदेश में नगरीय निकायों को वर्ष 2027 तक कचरा प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाने के लिये नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं। गीले कचरे को कंपोस्टिंग के लिये कटनी और सागर शहर में अत्याधुनिक स्वचालित इकाइयां लगाई गई हैं, जहां 16 शहरों से कचरा लाकर उसे कंपोस्ट में बदला जा रहा है। इंदौर में गीले कचरे से बायो सीएनजी तैयार करने के लिये 550 टन प्रतिदिन क्षमता की गोबरधन इकाई लगाई गई है। रीवा और जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने की इकाइयाँ भी संचालित हो रही है। इनमें प्रतिदिन 950 टन कचरे का प्र-संस्करण किया जाकर 18 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। प्रदेश के 10 नगरीय निकायों के लिये क्लस्टर आधार पर 1018.85 टन प्रतिदिन क्षमता की इकाइयों के लिये केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिल गयी है। इंदौर-उज्जैन में 607 टन कचरे से बिजली बनाने की यूनिट्स का काम प्रस्तावित है। इनके प्रारंभ होने से 12.15 मेगावॉट बिजली प्राप्त होगी।  

केन्द्र सरकार ने दी मंजूरी, एमपी के 10 शहरों में ‘कचरे’ से बनेगी ‘बिजली’

electricity will be produced from waste in 10 urban bodies of mp नगरीय विकास विभाग ने घरेलू कचरे के निस्तारण के मामले में बड़े जुर्माने से बचने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। इसके तहत कहीं कचरे से सीएनजी बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं तो कहीं कंपोस्टिंग के प्लांट लग रहे हैं। इसी सिलसिले में अब मध्यप्रदेश के 10 शहरों में कचरे से बिजली बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन्हें केन्द्र से अनुमति मिल गई है। यह वर्ष 2026 तक शुरू होने की संभावना है। सरकार ने प्रदेश में नगरीय निकायों को वर्ष 2027 तक कचरा प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया है। यहां पहले से बनाई जा रहीरीवा, जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने की यूनिट संचालित हैं। प्रतिदिन 950 टन कचरे का प्र-संस्करण कर 18 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। लीगेसी वेस्ट खत्म करने में मिलेगी मदद एनजीटी ने 2022 में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन में लापरवाही के लिए 3 हजार करोड़ का जुर्माना लगाया था। तत्कालीन सीएस ने छह माह में प्रबंधन करने का शपथ-पत्र दिया था। इसके बाद जुर्माना स्थगित किया गया, लेकिन अब भी निकायों की डंपिंग साइट पर 25 लाख टन से ज्यादा लीगेसी वेस्ट जमा है। बिजली प्लांट बनने से वेस्ट भी खत्म करने में मदद मिलेगी। जुर्माने से बचा जा सकेगा। हाल ही में गीले कचरे की कंपोस्टिंग के लिए कटनी, सागर में स्वचालित यूनिट लगाई गई हैं। इन 10 नई इकाइयों को अनुमति 10 नगरीय निकायों के लिए क्लस्टर आधार पर 1018.85 टन प्रतिदिन क्षमता की इकाइयों के लिए मंजूरी मिली है। इन निकायों में सांची, हरदा, नया हरसूद, शाहगंज, आलीराजपुर, देपालपुर, उन्हेल, बाबई, धारकोटि और इंदौर शामिल हैं। इनमें आसपास के स्थानों को भी जोड़ा गया है। जहां कचरा कम निकलता है वहां समीपस्थ अन्य शहरों को जोड़ा गया है। इंदौर-उज्जैन को मिलाकर 607 टन कचरे से बिजली बनाने की यूनिट्स का काम प्रस्तावित है। इसके शुरू होने से 12.15 मेगावाट बिजली बन सकेगी।

ड्राइविंग लाइसेंस होगा रद्द, ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की अब खैर नहीं

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गाड़ी चलाने वालों को यातायात नियमों में चूक भारी पड़ सकती है। परिवहन विभाग ट्रैफिक नियमों को लेकर भोपाल में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को पहले से अब और मजबूत बना रहा है। इसमें यातायात नियमों को तोड़ने वालों पर अब ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) निरस्त करने की भी कार्रवाई की जाएगी। निरस्त कर दिया जाएगा डीएल इसकी निगरानी राजधानी के 32 प्रमुख चौक-चौराहों में लगे अत्याधुनिक कैमरों से होगी। इन कैमरों से अभी नियम तोड़ने वालों पर नोटिस व जुर्माना लगता था। अब चार नोटिस के बाद पांचवीं बार चालक का सीधे डीएल निरस्त कर दिया जाएगा। इसके लिए स्मार्ट सिटी कंपनी भोपाल एवं टेक्नोसेस कंपनी के सॉफ्टवेयर को जल्द ही परिवहन विभाग से सर्वर से जोड़ा जाएगा। भोपाल के रजिस्टर्ड वाहनों से शुरुआत इंटीग्रेटेड सिस्टम से शुरुआत में भोपाल रजिस्टर्ड वाहनों पर इसे लागू किया जाएगा। नियम तोड़ने वाले वाहनों की सूचना परिवहन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। चालक की पहचान करने के बाद लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। फिलहाल इंदौर में भी इसी सिस्टम पर काम हो रहा है, जिसे अन्य बड़े शहरों में भी लागू किया जा सकता है।

रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में पैसेंजर रेवेन्यू के 16% की ग्रोथ के साथ 92,800 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया

नई दिल्ली  रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में पैसेंजर रेवेन्यू के 16% की ग्रोथ के साथ 92,800 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया है। रेलवे को उम्मीद है कि वंदे भारत समेत एसी3 क्लास और प्रीमियम ट्रेनों की बढ़ती मांग से यात्रियों से होने वाली इनकम में उछाल आएगी। इसके उलट माल ढुलाई से होने वाली आय 4.4% की मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद है। बजट दस्तावेजों के मुताबिक रेलवे के कुल रेवेन्यू में पैसेंजर इनकम का हिस्सा 2022-23 में 26.4% था जो चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान (RE) में बढ़कर 28.6% हो गया है और वित्त वर्ष 2026 में इसके 30.6% तक बढ़ने का अनुमान है। हालांकि माल ढुलाई से होने वाली इनकम रेलवे की कमाई का मुख्य जरिया बनी हुई है। डेटा से पता चलता है कि मार्च तक एसी3 टिकटों से होने वाली इनकम 30,089 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जो पिछले वित्त वर्ष से लगभग 20% अधिक है। रेलवे ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2026 में इस सेगमेंट से रेवेन्यू में 23% की बढ़ोतरी होगी और 37,115 करोड़ रुपये की इनकम होगी। दस्तावेजों के मुताबिक दो वर्षों में एक्जीक्यूटिव क्लास और एसी चेयर कार क्लास से होने वाली इनकम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और आगे भी इसमें तेजी आने का अनुमान है। सभी क्लास से फायदा मार्च तक एक्जीक्यूटिव क्लास में सफर करने वाले यात्रियों से राजस्व 698 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 42% अधिक है। वित्त वर्ष 2026 में इसके बढ़कर 987 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसी तरह एसी चेयर कार से रेवेन्यू मार्च तक 4,280 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो 2024-25 के बजट अनुमान (BE) को पार कर जाएगा और पिछले वर्ष की तुलना में इसमें 28.6% की वृद्धि होगी। वित्त वर्ष 2026 के अनुमान के अनुसार इनकम करीब 5,626 करोड़ रुपये होगी, जो 31% की वृद्धि है। रेल अधिकारियों ने कहा कि पैसेंजर रेवेन्यू में बढ़ोतरी सभी क्लास से होगी क्योंकि रेलवे गरीब और निम्न मध्यम वर्ग की यात्रा की मांग को पूरा करने के लिए सामान्य कोच वाली अधिक ट्रेन चलाएगा। आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 के लिए इंटर-सिटी ट्रेनों में जनरल कोच से अनुमानित राजस्व 1,517 करोड़ रुपये है, जो पिछले वित्त वर्ष से लगभग दोगुना है। किराया बढ़ेगा? रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किराये में बढ़ोतरी की किसी भी संभावना को खारिज किया है। उनका कहना है कि पैसेंजर रेवेन्यू में ग्रोथ यात्रियों की संख्या में वृद्धि से प्रेरित होगी। यात्रियों की संख्या हर साल बढ़ रही है और इस साल कुल यात्रियों की संख्या बढ़कर 7.5 अरब रहने की उम्मीद है। अगले साल यह संख्या 7.8-7.9 अरब यात्रियों के आसपास होगी। इसलिए रेवेन्यू ग्रोथ पूरी तरह से यात्रियों की संख्या पर निर्भर करेगी।  

अगर नहीं करवाई ई-केवाईसी तो ग्राहकों को सब्सिडी नहीं मिलेगी , कनेक्शन भी सस्पेंड हो सकता

ग्वालियर घरेलू गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी के लिए गैस कंपनियों ने ई-केवाईसी जरूरी कर दी है, लेकिन उपभोक्ता इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं। ग्वालियर में तीन गैस कंपनियों की 40 एजेंसियों पर करीब 5 लाख 44 हजार ग्राहक हैं, लेकिन अभी तक इनमें से 45 फीसदी ने ही ई-केवाईसी कराई है। ई-केवाईसी नहीं करवाने वाले ग्राहकों को सब्सिडी नहीं मिलेगी और उनका कनेक्शन भी सस्पेंड हो सकता है। उपभोक्ता नहीं ले रहे रूचि ई-केवाईसी की प्रक्रिया करीब 8 महीने से चल रही है। गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं से ई-केवाईसी कराने की गुजारिश कर रही हैं। साथ ही मोबाइल पर ई-केवाईसी कराने के मैसेज भी भेजे जा रहे हैं। इसके बावजूद उपभोक्ता इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं। केवाईसी कराने के लिए उपभोक्ताओं ने जिस गैस कंपनी का सिलेंडर ले रखा है, उन्हें उसकी एजेंसी पर आधार, गैस की डायरी और मोबाइल लेकर जाना होगा। वहां बायोमैट्रिक के जरिए ई-केवाईसी हो जाएगी। ई-केवाईसी के लिए ये है जरूरी इसमें ग्राहकों के फिंगर प्रिंट स्कैनर और फेस आइडी से ई-केवाईसी किया जा रहा है। ई-केवाईसी के लिए आधार कार्ड और गैस का उपभोक्ता नंबर चाहिए। जिन उपभोक्ताओं के नाम से कनेक्शन है, उनका होना आवश्यक है। इसके अलावा जो लोग एजेंसी नहीं जाना चाहते वे ऑनलाइन भी ई-केवाईसी करवा सकते हैं। इसके लिए उन्हें मोबाइल एप डाउनलोड करना होंगे। असल मकसद उपभोक्ताओं की पहचान करना गैस कंपनियों की ओर से ई-केवाईसी कराने का मुय मकसद यह है कि सही उपभोक्ताओं की पहचान हो सके। कई ऐसे उपभोक्ता हैं, जो अपने पते को छोड़ कर दूसरी जगहों पर चले गए हैं, लेकिन उनका कनेक्शन कोई अन्य व्यक्ति इस्तेमाल कर रहा है। ई-केवाईसी हर ग्राहक को कराना जरूरी एलपीजी के हर ग्राहक को ई-केवाईसी करना जरूरी है। इंडेन गैस कंपनी के शहर में 3 लाख 72 हजार ग्राहक हैं, इनमें से 36 फीसदी ग्राहकों ने ही अभी तक ई-केवाईसी कराया है।-श्यामानंद शुक्ला, कॉर्डिनेटर ग्वालियर-चंबल एलपीजी फेडरेशन

8वां वेतन आयोग- वेतन विसंगति दूर होगी, स्थाई, संविदा, दैनिक वेतन भोगी, आउटसोर्स कर्मचारियों को उम्मीद

भोपाल  केंद्र सरकार आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा कर चुकी है। उम्मीद है कि इसे 2026 में लागू कर दिया जाएगा। इससे पहले आयोग गठित होगा। वेतन वृद्धि की अनुशंसा करेगा। इसके बाद सरकार निर्णय लेगी। सबसे पहले केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों पर लागू करेगी। इसके बाद राज्य सरकार विचार करेगी। हालांकि हलचल प्रदेश में भी शुरू हो गई है। वह यह कि आठवें आयोग की सिफारिश लागू होने से पहले कर्मचारी वेतन विसंगति दूर करवाने की कोशिश में है। यहां आठ वर्ष पहले लागू सातवें वेतनमान की विसंगति बरकरार हैं। अदालत तक पहुंचे मामले प्रदेश में कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं, जो पांचवें और छठे वेतनमान पर ही अटके हैं। सातवां वेतनमान पाने को संघर्ष कर रहे हैं। ज्यादातर कर्मचारी निगम-मंडल, प्राधिकारण आदि के हैं। इनमें आवास संघ, उपभोक्ता संघ, हस्तशिल्प विकास निगम, औद्योगिक केंद्र विकास निगम, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड इत्यादि शामिल हैं। तिलहन संघ, परिवहन निगम के कर्मचारियों को तो पांचवां वेतनमान ही मिल रहा। हालांकि इन दोनों निगमों को सरकार बंद कर चुकी है, लेकिन यहां कुछ कर्मचारी पदस्थ हैं। कुछ मामले अदालत तक भी पहुंचे हैं। छठा वेतनमान केंद्र ने एक जनवरी 2006 से लाभ दिया। एमपी में 2008 से लागू हुआ। हालांकि लाभ 2006 से ही दिया गया। सातवां वेतनमान केंद्र ने अपने कर्मचारियों को लाभ एक जनवरी 2016 से दिया। एमपी में जुलाई 2017 से लागू हुआ। कर्मचारियों को 18 माह के एरियर का भुगतान किया गया। 8वां वेतनमान लागू हुआ तो एक लाख करोड़ तक पहुंचेगा खर्च एमपी में वर्तमान में रुपए 88581 करोड़ के लगभग वेतन-भत्तों पर खर्च होते हैं। यह राज्य के बजट का 16.65 प्रतिशत है। 8वां वेतनमान लागू होने पर खर्च एक लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। 8वें वेतनमान को लेकर राज्य कर्मचारियों को उम्मीद मध्यप्रदेश में 8वां वेतनमान चुनावी साल 2028 में लागू होगा। वहीं 31 दिसंबर 2025 सातवें वेतन आयोग की अवधि है। इसी से राज्य के कर्मियों को उम्मीद जगी है। सबकी अपनी-अपनी मांगें पहले सातवें वेतनमान की विसंगति दूर की जाए। संविदा कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ तो दिया गया, लेकिन भारी विसंगति है। वरिष्ठता में भेदभाव किया गया। वर्षो पूर्व सेवा में आए और मौजूदा कर्मचारियों को एक समान वेतनमान मिल रहा है। समयमान वेतनमान, पदोन्नति, क्रमोन्नति का लाभ भी नहीं मिल रहा। -रमेश राठौर, अध्यक्ष, संविदा कर्मचारी महासंघ राज्य के कर्मचारियों का बुरा हाल है। सातवें वेतनमान की विसंगतियां सात साल भी दूर नहीं हो पाई हैं। यह भारी विडंबना है। आठवां वेतनमान लागू होने के पहले वेतन विसंगतियां दूर की जाएं। इसके अलावा कर्मियों की अन्य लंबित मांगों पर भी सरकार विचार कर जल्द से जल्द दूर करे। -जितेंद्र सिंह, अध्यक्ष, एमपी अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा बात ऐसी है कि कर्मचारियों को अभी सातवां वेतनमान मिल रहा है। अब आठवें की तैयारी की जाएगी, लेकिन कुछ निगम मंडल ऐसे हैं जहां के कर्मचारी आज भी छठा वेतनमान पा रहे हैं। सरकार को इन कर्मचारियों पर भी ध्यान देना चाहिए। कर्मचारियों को सातवां वेतनमान का लाभ मिले और वेतन विसंगति भी दूर हो। -अनिल बाजपेयी, अध्यक्ष, अर्धशासकीय कर्मचारी फेडरेशन 35 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले राज्य के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को चतुर्थ समयमान वेतनमान का लाभ दिया जा चुका है, लेकिन विधानसभा सचिवालय के कर्मचारी इससे वंचित हैं। इसके अलावा सातवें वेतनमान की विसंगति भी दूर नहीं हुई है। -रामनारायण आचार्य, संरक्षक मप्र विधानसभा कर्मचारी संघ ये भी चाहते हैं कर्मचारी -पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए। -पदोन्नति शुरू की जाएं। -प्रदेश के अधिकारी, कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को केंद्र के समान महंगाई भत्ता देते हुए एरियर दिया जाए। -लिपिक संवर्ग को मंत्रालय कर्मियों की तरह समयमान वेतनमान दिया जाए। -सभी विभागों के कर्मियों को समयमान वेतनमान का लाभ, पदोन्नत वेतनमान के अनुसार दिया जाए। -पंचायत सचिवों, स्थाई कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ मिले। -पटवारियों का ग्रेड पे 2800 रुपए किया जाए। -स्वास्थ्य कर्मचारियों की लंबित मांगों का शीघ्र निराकरण किया जाए। अतिथि शिक्षकों एवं अतिथि विद्वानों को नियमित किया जाए। -दैनिक वेतनभोगी, संविदा कर्मचारी, स्थाई कर्मियों को विभाग में खाली पदों पर नियमितीकरण किया जाए। शेष पर सीधी भर्ती की जाए। -विभागाध्यक्ष को नियमितीकरण के अधिकार दिए जाएं। -प्रदेश में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी पदों पर आउटसोर्स से की जाने वाली भर्ती पर रोक लगाई जाए। -इसके अलावा कार्यभारित कर्मियों को अवकाश नकदीकरण का लाभ भी प्रदान किया जाना चाहिए। अनुकंपा प्रकरणों का करें निराकरण 1.प्रदेश के कर्मचारियों सहित पेंशनर्स, निगम-मंडलों इत्यादि में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ कैबिनेट के अप्रेल 2020 के निर्णय के तहत दिया जाए। 2. वाहन चालकों की नियमित भर्ती हो। पदनाम परिवर्तित कर टैक्सी प्रथा पर पूर्णत: प्रतिबंधित लगाया जाना चाहिए। 3. निर्माण विभागों में तृतीय समयमान वेतनमान प्राप्त करने के लिए विभागीय परीक्षा की बाध्यता समाप्त कर अन्य विभागों की भांति तृतीय समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाए। 4. आंगनबाड़ी सहायिकाओं, कार्यकर्ताओं को उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार नियमित वेतनमान का लाभ दिया जाए। 5. प्रदेश के सभी विभागों में अनुक्पा नियुक्ति के प्रकरणों का तत्काल निराकरण किया जाए।

MP में ग्रामीण क्षेत्रों में आगामी तीन वर्षों प्रति वर्ष चार लाख घर बनाए जाएंगे, शुरुआत 2025-26 से हो जाएगी

भोपाल मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आगामी तीन वर्षों में 12 लाख आवास बनाए जाएंगे। केंद्र सरकार इसकी सैद्धांतिक सहमति दे चुकी है। प्रति वर्ष चार लाख आवास बनेंगे। इसकी शुरुआत वित्तीय वर्ष 2025-26 से हो जाएगी। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए 54 हजार 832 करोड़ रुपये का प्रविधान रखा है। इससे निर्माण कार्य में गति आएगी। वहीं, जल जीवन मिशन को वर्ष 2028 तक संचालित किए जाने की घोषणा ने भी मध्य प्रदेश को राहत दी है। 20 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश में 77,952 करोड़ रुपये की 22 हजार 408 परियोजनाओं की प्रशासकीय स्वीकृति जारी हैं। मिशन के संचालन से प्रदेश को 20 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के क्रियान्वयन में देश में अव्वल है। लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य गरीब कल्याण मिशन में आवास को उच्च प्राथमिकता में रखा गया है। केंद्र सरकार के बजट से उम्मीद है कि राज्य को लक्ष्य के अनुरूप राशि प्राप्त होगी। इसके साथ ही नारी सशक्तीकरण के लिए लखपति दीदी बनाने का जो लक्ष्य रखा है, उसकी पूर्ति के लिए भी आर्थिक सहायता मिलेगी। राज्य बजट से अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई गई जल जीवन मिशन में वर्ष 2023-24 में 10,773 करोड़ रुपये व्यय किए गए थे। 2024-25 में 17 हजार करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है। अभी 2,622 करोड़ रुपये की किस्त मिली है। 1,422 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त मांगी गई है। राज्य बजट से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई गई है। लक्ष्य प्राप्ति में सहायता मिलेगी मिशन की अवधि बढ़ाने से मिशन के अपेक्षित लक्ष्य की प्राप्ति में सहायता मिलेगी। उधर, स्कूली बच्चों में साइंस, टेक्नोलाजी, इंजीनियरिंग और गणित के प्रति रुचि जगाने के लिए अटल टिंकरिंग प्रयोगशाला और माध्यमिक स्कूलों में ब्राडबैंड सुविधा के प्रविधान का लाभ भी मध्य प्रदेश को होगा। युवा, नारी और किसानों पर केंद्रीत बजट उप मुख्यमंत्री वित्त जगदीश देवड़ा ने कहा कि बजट गरीब कल्याण, युवा कल्याण, नारी शक्ति और किसानों की समृद्धि पर केंद्रित है। विशेष पूंजीगत सहायता योजना का विशेष लाभ होगा, क्योंकि पूंजीगत व्यय के मामले में मध्य प्रदेश का अच्छा प्रदर्शन रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आवास, किसान क्रेडिट कार्ड में ऋण की सीमा बढ़ाने, सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए ऋण गारंटी कवर दस करोड़ रुपये करने से प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों का विस्तार होगा।

प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई नाम चर्चा में , रेस में अब सबसे आगे बैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल का नाम

भोपाल  मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के सभी 62 जिला अध्यक्षों का चुनाव हो गया है। अब सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव ही बाकी है। पार्टी ने पहले ही केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है और उम्मीद जताई जा रही है कि वे जल्द ही मध्य प्रदेश का दौरा करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन रेस में अब सबसे आगे बैतूल से विधायक और पूर्व सांसद हेमंत खंडेलवाल का नाम तेजी से आगे आया है। खंडेलवाल को संघ, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पार्टी के अन्य नेताओं का समर्थन मिल रहा है। हेमंत खंडेलवाल के पिता स्व. विजय खंडेलवाल भी भाजपा के नेता थे, जिससे उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि मजबूत और पार्टी से बहुत गहरा जुड़ाव है। पार्टी सूत्रों के अनुसार हेमंत खंडेलवाल के संघ से जुडे होने और विवादों से दूर रहने के चलते पार्टी अब धीरे धीरे उनके नाम पर सहमति बना रही है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का कार्यकाल पांच साल का हो चुका है और उन्हें फिर से मौका मिलने की संभावना कम है। बताया जा रहा है कि अध्यक्ष पद के लिए हेमंत खंडेलवाल पहली पसंद बन गए हैं। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष के चुनाव के लिए भी जातिगत समीकरणों को साधना चाहेगी। ऐसे में संभावना है कि नया अध्यक्ष सामान्य, आदिवासी या महिला वर्ग से हो सकता है, क्योंकि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के बाद डिप्टी सीएम और मंत्रियों के लिए भी जातिगत समीकरणों का पूरा ध्यान रखा था। अभी अध्यक्ष पद की रेस में कई सीनियर नेता भी दावेदार हैं। ऐसे में देखना होगा कि भाजपा सीनियर नेता को कमान सौंपती है या फिर किसी नए चहेरे पर दांव लगाती है।   नरोत्तम मिश्रा- पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है। वह सवर्ण वर्ग से आते हैं और राज्य की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनकी केंद्रीय नेतृत्व से भी अच्छी ट्यूनिंग मानी जाती है। फग्गन सिंह कुलस्ते- पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता फग्गन सिंह कुलस्ते आदिवासी वर्ग से आते हैं और मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग की अहमियत को देखते हुए उनकी दावेदारी काफी मजबूत हो सकती है। वीडी शर्मा– वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का नाम भी रेस में हैं, क्योंकि उनके कार्यकाल में बीजेपी ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था। पार्टी एक बार फिर उनके नाम पर विचार कर सकती है। अरविंद भदौरिया- पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया संगठन के एक कुशल रणनीतिकार माने जाते हैं। हालांकि, वह 2023 के विधानसभा चुनाव में हार गए थे, लेकिन पार्टी उन्हें एक बार फिर सक्रिय करना चाहती है।    

केंद्रीय योजनाओं में सहायता अनुदान मध्य प्रदेश को 45 हजार करोड़ मिलेगा

भोपाल  केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार का असर अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगा है। वर्ष 2025-26 में केंद्रीय करों के हिस्से में 1,11,661 करोड़ रुपये मिलेंगे यानी वर्तमान वित्तीय वर्ष की तुलना में 15,908 करोड़ रुपये राज्य को अधिक मिलेंगे। इतना ही नहीं विभिन्न केंद्रीय योजनाओं में सहायता अनुदान 45 हजार करोड़ रुपये के आसपास मिलेगा। दोनों राशि को मिला दिया जाए तो प्रदेश को आगामी वित्तीय वर्ष में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक मिलेंगे। 5,247 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे वहीं, 2024-25 के पुनरीक्षित अनुमान के अनुसार केंद्रीय करों के हिस्से में अब 5,247 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त होंगे। उल्लेखनीय है कि नईदुनिया ने ‘डबल इंजन के भरोसे मोहन सरकार, जागी डेढ़ लाख करोड़ मिलने की उम्मीद’ शीर्षक से प्रकाशित खबर में पहले ही बता दिया कि आगामी वर्ष में प्रदेश को डेढ़ लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं। जीएसटी के बाद प्रदेश के बजट का मुख्य आधार केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता होता है। वर्ष 2024-25 के बजट में एक लाख 40 हजार करोड़ रुपये के आसपास केंद्रीय करों में हिस्सा और केंद्रीय सहायता अनुदान मिलने का अनुमान लगाया गया था। 7.82 प्रतिशत के हिसाब से राशि मिलती है अब इससे अधिक राशि राज्य को प्राप्त हो रही है। दरअसल, राज्यों को केंद्र सरकार कुल राजस्व का 41 प्रतिशत केंद्रीय करों में हिस्से के रूप में देती है। इसमें मध्य प्रदेश को 7.82 प्रतिशत के हिसाब से राशि मिलती है। वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए यह 95 हजार 753 करोड़ रुपये अनुमानित थी। केंद्रीय करों से प्राप्त राशि के अनुपात में अब राज्य को 5,247 करोड़ रुपये अधिक प्राप्त होंगे। इसका उपयोग सरकार विकास परियोजनाओं को गति देने में करेगी। यह राशि अगले वित्तीय वर्ष में 15,908 रुपये बढ़कर मिलेगी। केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सहायता अनुदान 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक मिलेगा। यह लगभग 600 करोड़ रुपये अधिक रहेगा। निश्चित ही इसका असर योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ेगा। 12 हजार करोड़ रुपये मिलेगी विशेष पूंजीगत सहायता बजट में सरकार ने अधोसंरचना विकास को गति देने के लिए विशेष पूंजीगत सहायता योजना को निरंतर रखने का निर्णय लिया है। प्रदेश में पूंजीगत व्यय लगातार बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 15 हजार करोड़ रुपये प्राप्त करने के लक्ष्य रखा गया था। 6,187 करोड़ रुपये मिल चुके हैं और सात हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि आगामी वित्तीय वर्ष में भी 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक इस योजना में प्रदेश को मिल जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में 64,738 करोड़ रुपये पूंजीगत निवेश का लक्ष्य रहा है। जीएसडीपी का तीन प्रतिशत तक ऋण ले सकती है सरकार राज्य सरकार ने बजट पूर्व बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के अनुपात में चार प्रतिशत तक ऋण लेने की अनुमति देने की मांग रखी थी, लेकिन इसे नहीं माना गया। प्रदेश जीएसडीपी के अनुपात में तीन प्रतिशत तक ही भारतीय रिर्जव बैंक के माध्यम से बाजार से ऋण ले सकता है। आधा प्रतिशत ऋण ऊर्जा के क्षेत्र में सुधार के लिए निर्धारित कदम उठाने के लिए लिया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि मार्च के प्रथम सप्ताह में जब 16वां वित्त आयोग आएगा तो एक बार फिर इस मुद्दे को बेहतर वित्तीय प्रबंधन का हवाला देकर उठाया जाएगा। अब बजट को अंतिम रूप देने को जुटेगी राज्य सरकार सूत्रों का कहना है कि आम बजट से प्रदेश को आगामी वित्तीय वर्ष में मिलने वाली राशि को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। इसके आधार पर अब प्रदेश सरकार अपने बजट को अंतिम रूप देने में जुटेगी। यह इस बार चार लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 15 फरवरी के पहले बजट को लेकर मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।

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