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देश-विदेश की 26 महिला विभूतियाँ हुईं ऊर्जस्विता सम्मान से अलंकृत

भोपाल महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकास के नये आयाम छू रहा है। इसमें महिलाओं का योगदान अहम है। आत्मनिर्भर भारत बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिये महिला सशक्तिकरण, अनुसंधान और उद्यमिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वे न केवल समाज को सशक्त बनाती हैं बल्कि देश को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। मंत्री सुश्री भूरिया भोपाल में आयोजित अनुनय, एजुकेशन एण्ड वेलफेर सोसायटी की 14वीं वर्षगांठ पर ऊर्जस्विता सम्मान-2025 कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास पर केन्द्रित अनेक योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। महिला शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने विकास में सभी की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिये प्रशासन के साथ हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि आज इस कार्यक्रम में उन महिलाओं को सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में इतने महत्वपूर्ण कार्य किये हैं, जिसकी गूंज देश-विदेश तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि संस्था पिछले 14 वर्ष से गरीब और वंचित तबके के बच्चों की शिक्षा एवं सर्वांगीण विकास के लिये कार्य कर रही है। संस्था ने ऐसे बच्चों को भी शामिल किया है, जो मजदूरी, भीख मांगना या कचरा बीनने का काम करते थे। मंत्री सुश्री भूरिया ने सभी सम्मानित महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे विभिन्न क्षेत्रों में महती भूमिका निभाकर समाज और देश को आगे ले जाने का काम कर रही हैं, जो वाकई काबिल-ए-तारीफ है। इन महिला विभूतियों का हुआ सम्मान डॉ. अनामिका जैन- उच्च शिक्षा (इंदौर), डॉ. पल्लवी तिवारी – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (यूएस), सुश्री संप्रिया पूजा- लोकनृत्य एवं गायन (छत्तीसगढ़), डॉ. वंदना अग्रवाल -स्कूल शिक्षा (छत्तीसगढ़), सुश्री ओरियल प्रिज़मैन – संरक्षण (यूके), डॉ. आरती सिन्हा- साउंड हीलर एवं वेलनेस कोच, सुश्री चंद्रकला परस्ते- जनजातीय संस्कृति (डिंडोरी), सुश्री प्रभाकर खलको- प्रशासन (छत्तीसगढ़), सुश्री मेघा मुक्तिबोध- शिक्षा, सुश्री मनीषा आनंद- मिसेज़ इंडिया, सुश्री शोमिता भट्टाचार्य- पर्यावरण (इंदौर), सुश्री रोली शर्मा-विपणन पेशेवर (नई दिल्ली), सुश्री आशा पठानिया- सत्कार उद्योग (हरियाणा), सुश्री दिव्या अत्रि- समाज सेवा, सुश्री भूमिका कलम- ज्योतिष (इंदौर), सुश्री अंजु तड़ियाल – कौशल विकास, सुश्री दक्षा वैदकर- प्रिंट मीडिया, सुश्री हुमेरा ख़ान – सामाजिक उद्यमी, सुश्री श्रुति सिंह – राजनीति, सुश्री विशाखा कवठेकर- आर्किटेक्ट, सुश्री अर्पणा चेंडके- उद्यमी (इंदौर), सुश्री दीक्षा पाटकर भदौरिया – नवाचार, सुश्री आराधना मालवी – आदिम कल्याण एवं खेलकूद (बैतूल), सुश्री मीरा – इंफ्लुएंसर (चीन) तथा सुश्री पूर्वा त्रिवेदी- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। बालाघाट में सामुदायिक विकास के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए सुश्री मार्गी वॉट्स कार्टर को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।  

इंदौर : एनडीपीएस और आईपीएस प्रबंधन को आया धमकी भरा ई-मेल, स्कूल खाली करवा दिया, आला अधिकारी मौके पर

इंदौर  मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में स्कूल में बम की धमकी का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, एनडीपीएस और आईपीएस स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। प्रिंसिपल को तमिलनाडु से भेजे गए ईमेल में धमकी दी गई है। तत्काल पुलिस को सूचित किया गया। बम स्क्वाड दस्ता भी मौके पर पहुंचा। स्कूल प्रबंधन ने तत्काल स्कूल खाली करवाया। बच्चों को घर भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार इंदौर के खंडवा रोड़ स्थित एनडीपीएस और राऊ स्थित आईपीएस कॉलेज को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। राउ स्थित इंदौर पब्लिक स्कूल परिसर में मंगलवार सुबह स्टूडेंट्स को अचानक घर जाने के लिए कहा गया। कोई कुछ समझ पाता उसके पहले ही बसों में बच्चों को बैठाकर घर रवाना कर दिया। कहा जा रहा है कि स्कूल और परिसर में लगने वाले कॉलेज के बच्चों ने अपने पेरेंट्स को फोन करके बताया कि संभवतः स्कूल को किसी तरह की धमकी मिली है। हजारों स्टूडेंट्स को ताबड़तोड़ बाहर निकाल दिया गया। बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स स्कूल के सामने की लाइन में स्थित मंदिर परिसर में जमा हो गए थे। अभी तक इस मामले को लेकर अधिकृत जानकारी नहीं मिल पाई है। एनडीपीएस में दूसरी शिफ्ट में आए बच्चों को स्कूल मैदान के बाद क्लास में नहीं जाने दिया और वापस बस में बैठाकर घर भेजा गया।

बुद्धिमान लोगों की कुछ आदतें जो उन्हे बनती है अलग

महान कूटनीतिक और विद्वान आचार्य चाणक्य की बातें आज भी लोगों के जीवन को वैसा ही सरल बनाने का काम कर रही हैं, जैसा कभी सदियों पहले किया करती होंगी। आचार्य ने अपनी नीतियों के जरिए जीवन से जुड़े लगभग हर एक पहलू पर अपने विचार रखे हैं। किस स्थिति में इंसान को क्या करना चाहिए उससे ले कर सफलता के शीर्ष पर पहुंचने के लिए क्या सूत्र अपनाएं जाएं, आचार्य की नीतियों में इन सभी का जिक्र है। आचार्य ने अपनी नीति में बुद्धिमान लोगों की आदतों का भी जिक्र किया है, जिन्हें अपनाकर कोई भी व्यक्ति सफलता प्राप्त कर सकता है। आज हम आचार्य की नीतियों से ही उन बातों के बारे में बता रहे हैं, जो उनके मुताबिक बुद्धिमान लोग कभी भी किसी दूसरे के साथ साझा नहीं करते हैं। आप भी इन सूत्रों को अपने जीवन पर लागू कर सकते हैं। अपनी आर्थिक तंगी का नहीं करते लोगों से जिक्र आचार्य चाणक्य के मुताबिक जो लोग वाकई बुद्धिमान होते हैं, वो किसी के भी सामने अपनी आर्थिक तंगी का जिक्र करते नहीं घूमते। खासतौर से अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के सामने वो ऐसी बातें कभी साझा नहीं करते। आचार्य कहते हैं कि जीवन में कभी भी अगर आप आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं, तो उसे अपने तक ही सीमित रखें। लोग आपको इस स्थिति में नीचा दिखाने और झूठी सांत्वना देने के अलावा कुछ नहीं करते। और तो और वो आपके पीठ पीछे आपका मजाक ही बनाते हैं। पर्सनल लाइफ से जुड़ी परेशानियां आचार्य चाणक्य के मुताबिक व्यक्ति की समझदारी इसी में है कि वो अपनी व्यक्तिगत समस्याओं का जिक्र हर किसी के आगे ना करे। जीवन में सुख-दुख और कई तरह की परेशानियां लगी ही रहती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी परेशानी आते ही आप आसपास के सभी लोगों के साथ शेयर कर दें। ज्यादातर लोग आपका मजाक बनाने और फायदा उठाने के अलावा कोई दूसरी मदद नहीं करने वाले। बुद्धिमान लोगों की यही खासियत होती है कि वो अपने व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी बातें ज्यादातर लोगों के सामने नहीं रखते और अपनी प्राइवेट लाइफ जीते हैं। अपनी पत्नी से जुड़ी चीजें नहीं करते शेयर आचार्य चाणक्य के अनुसार बुद्धिमान लोग अपनी पत्नी के बारे में भी लोगों से ज्यादा बाते साझा करने से बचते हैं। अपनी पत्नी का चरित्र, उसके विचार और पर्सनेलिटी जैसी चीजें दूसरे लोगों के साथ ज्यादा खुलकर कभी भी शेयर नहीं करनी चाहिए। आचार्य कहते हैं कि कभी लड़ाई-झगड़ा होने पर या यूं ही कई बार हो सकता है कि आप अपनी पत्नी के बारे में कुछ ऐसी बातों का जिक्र कर दें, जो कभी बतानी ही नहीं चाहिए थी। इस स्थिति में आपके रिश्ते और मान-सम्मान दोनों को खतरा हो सकता है। अपनी गरीबी का नहीं पीटते ढोल आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में इस बात का जिक्र कई बार किया है कि किसी भी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति समाज में उसका स्थान तय करती है। जो लोग आर्थिक स्थिति से जितने कमजोर होते हैं, समाज में उन्हें उतनी ही कमजोर नजरों से देखा जाता है। ऐसे में आचार्य के मुताबिक बुद्धिमान व्यक्ति कभी भी अपनी गरीबी का जिक्र बार-बार नहीं करते। ये बिना बेचारा बनें मेहनत करते हैं और अपने दम पर अपना नाम बनाते हैं। अपने अहंकार से जुड़ी बातें कुछ लोगों की आदत होती है कि वो चार लोगों में बैठकर सिर्फ अपने बारे में ही बात करते हैं। सिर्फ यही नहीं बल्कि खुद को ऊपर दिखाने के चक्कर में लंबी-लंबी फेंकने से भी परहेज नहीं करते। आचार्य चाणक्य के मुताबिक यह मूर्खों और कम आत्मविश्वास वाले लोगों की पहचान है। बुद्धिमान लोग कभी भी इस तरह ऊंची-ऊंची नहीं फेंकते बल्कि समझदारी और धैर्य के साथ लोगों से अपनी बात कहते हैं।

क्या आप जानते हैं कि आखिर नर्मदा नदी उल्टी क्यों बहती है?

भारत में नदियों से लोगों की धार्मिक आस्थाएं जुड़ी हैं. हमारे देश में लगभग 400 नदियां बहती हैं और इनमें से कुछ नदियों को देवी के समान पवित्र माना जाता है. इन पवित्र नदियों की विधि-विधान से पूजा भी की जाती है. गंगा, यमुना और सरस्वती की तरह ही नर्मदा नदी भी लोगों के लिए आस्था का केंद्र मानी जाती है. जहां एक ओर ज्यादातर नदियां पश्चिम दिशा से पूर्व दिशा की ओर बहती हैं वहीं, नर्मदा एक ऐसी नदी है जो पूर्व दिशा से पश्चिम की ओर जाती है और अरब सागर में मिल जाती है. आसान शब्दों में कहें तो नर्मदा नदी उल्टी दिशा में बहती है. नर्मदा नदी को ‘आकाश की बेटी’ भी कहते हैं. हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर नर्मदा जयंती मनाई जाती है, जो कि आज यानी 4 फरवरी को मनाई जा रही है. नर्मदा जयंती के मौके पर आपको बताते हैं कि आखिर नर्मदा नदी उल्टी क्यों बहती है. इन पुराणों में मिलता है नर्मदा का वर्णन रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ पुराणों में नर्मदा का उल्लेख मिलता है. वायु पुराण और स्कंद पुराण के रेवा खंड में नर्मदा नदी के अवतरण और महत्व की कथा का वर्णन किया गया है. इसी कारण नर्मदा को रेवा भी कहा जाता है. हिंदू धर्म में पवित्र नदी मानी जाने वाली नर्मदा का उद्गम स्थल अमरकंटक है. इसके अलावा, नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर कई देवस्थान भी स्थित है. वहीं, नर्मदा के तट पर कई महान ऋषियों जैसे अगस्त्य, भारद्वाज, भृगु, कौशिक, मार्कण्डेय और कपिल आदि ने तपस्या की थी. आइए यहां आपको विस्तार से जानें नर्मदा नदी के धार्मिक और पौराणिक महत्व के बारे में बताते हैं. साथ ही नर्मदा नदी क्यों उल्टी बहती है, इसकी पौराणिक कथा भी बताएंगे. नर्मदा नदी की उत्पत्ति कैसे हुई? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नर्मदा नदी की उत्पत्ति भगवान शिव से मानी जाती है. इसी कारण इसे शिव जी की पुत्री या शंकरी भी कहा जाता है. ऐसा कहते हैं कि नर्मदा के किनारे पाया जाने वाला हर पत्थर शिवलिंग के आकार का होता है. इन लिंग के आकार वाले पत्थरों को बाणलिंग या बाण शिवलिंग के नाम से जाना जाता है, जो कि हिंदू धर्म में अत्यधिक पूजनीय माने जाते हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान भोलेनाथ मैकल पर्वत पर तपस्या में लीन थे. इस दौरान देवताओं ने उनकी आराधना की और उन्हें प्रसन्न किया. शिवजी की तपस्या के दौरान उनके शरीर से कुछ पसीने की बूंदें गिरीं, जिससे एक सरोवर की उत्पत्ति हुई. इसी सरोवर से एक द्वितीय सौंदर्य कन्या प्रकट हुई. इस कन्या का सौंदर्य देख देवताओं ने उसका नाम ‘नर्मदा’ रखा. नर्मदा नदी उल्टी क्यों बहती है इसका क्या कारण है? नर्मदा उल्टी क्यों बहती है, इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा मिलती है. इस पौराणिक कथा के अनुसार, नर्मदा राजा मेकल की पुत्री थीं. जब नर्मदा विवाह योग्य हो गईं, तो राजा मेकल ने ऐलान किया की कि जो गुलबकावली का फूल लेकर आएगा, वह उनकी बेटी नर्मदा से विवाह करेगा. इस चुनौती को राजकुमार सोनभद्र ने पूरा किया और इसके बाद इसके बाद नर्मदा और सोनभद्र की शादी तय हुई गई. एक दिन नर्मदा ने राजकुमार को देखने की इच्छा व्यक्त की और नर्मदा ने इसके लिए अपनी सहेली जोहिला को सोनभद्र के पास संदेश लेकर भेजा. जब सोनभद्र ने जोहिला को देखा, तो उन्हें नर्मदा समझकर प्रेम प्रस्ताव रखा. जोहिला यह प्रस्ताव ठुकरा नहीं पाई और सोनभद्र से प्रेम करने लगीं. जब नर्मदा को इस बात का पता चला, तो वह बहुत क्रोधित हुईं और उन्होंने आजीवन कुंवारी रहने का प्रण लिया. उसी समय से नाराज होकर नर्मदा विपरीत दिशा में बहने लगीं और अरब सागर में जाकर मिल गईं. तब से ही नर्मदा नदी को एक कुंवारी नदी के रूप में पूजा जाता है. नर्मदा नदी के हर कंकड़ को नर्वदेश्वर शिवलिंग भी कहा जाता है. नर्मदा उल्टी बहने का वैज्ञानिक कारण हालांकि, नर्मदा नदी के विपरित दिशा में बहने को लेकर वैज्ञानिकों का मानना है कि नर्मदा नदी रिफ्ट वैली की वजह से उल्टी बहती है यानी नदी के प्रवाह के लिए जो उसका ढलान बनता है, वह उल्टी दिशा में है. ऐसे में जिस ओर नदी का ढलान होता है, वह नदी उसी दिशा में बहती है.  

प्रत्येक सोमवार अपडेटेड सूची दर्ज हो रही है वेबसाइट पर

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी ने कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्‍वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों के अंतर्गत आने वाले ऐसे बिजली उपभोक्‍ता जिनके द्वारा अपने बकाया बिजली बिलों का समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है, उनके नाम, पते और बकाया राशि की जानकारी को सार्वजनिक कर दिया है। कंपनी द्वारा बकायादारों के नामों की सूची कंपनी के पोर्टल पर सार्वजनिक की है, इन बकायादरों के नाम आमजन और उपभोक्‍ताओं द्वारा क्षेत्रवार देखा जा सकता है। इसके लिए कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in पर जाकर होम पेज पर Consumer Arrears List पर क्लिक करते ही वृत्त के आधार पर कुल बकायादारों की सूची उपलब्ध हो जाएगी। इसी लिंक को कंपनी के सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम आदि पर  भी साझा कर दिया गया है।  कम्पनी द्वारा इस सूची को प्रति सोमवार अद्यतन किया जा रहा है। जो उपभोक्ता अपने बिजली बिल की बकाया राशि जमा कर देते है उन उपभोक्ताओं के नाम पोर्टल पर जारी सूची से तथा सोशल मीडिया से हटा दिए जाते हैं। इसलिए बकाया राशि समय पर जमा करें, ताकि बकायादारों की सूची से नाम हटाया जा सके।       भोपाल शहर सर्किल के अंतर्गत सर्वाधिक राशि के 10 बकायादारों की सूची   (02/02/2025 तक अपडेटेड) क्र. वितरण केन्द्र उपभोक्ता का नाम श्रेणी बकाया राशि 1. मंडीदीप क्रेस्‍ट केपेसिटर निम्नदाब औद्योगिक 477310/- 2. कजलीखेडा राय होम्‍स यूनिवर्सल गैर-घरेलू 474389/- 3. गोपालपुर श्रीमती अयोध्‍याबाई गैर-घरेलू  440148/- 4. करोंद श्री हुकुमचंद शर्मा घरेलू  401559/- 5. कटारा हिल्‍स श्रीमती प्रवीना घरेलू 400681/- 6. छोला श्री रिजवान गैर-घरेलू 388098/- 7. बुदनी श्री देवेन्‍द्र शर्मा   गैर-घरेलू 384148/- 8. मंडीदीप श्रीनाथ सीमेंट निम्नदाब औद्योगिक 382659/- 9. गोपालपुर श्री नारायण एग्रीकल्‍चर 362566/- 10. छोला श्री मो. जाकिर गैर-घरेलू 356769/-  

9, 18 या 27 तारीख को जन्मे लोगों पर बनी रहती है हनुमान जी की कृपा

अंक ज्योतिष में, प्रत्येक मूल अंक किसी ग्रह या अंक के स्वामी से जुड़ा हुआ होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लोगों की जन्म की संख्याओं का सभी लोगों पर विशेष रूप से प्रभाव पड़ता है. इसी प्रकार अंक 9 को हनुमान जी से संबंधित माना जाता है. बजरंगबली अंक 9 के स्वामी माने जाते हैं.किसी भी माह की 9, 18 या 27 तारीख को जन्मे व्यक्तियों के लिए जन्म अंक 9 होता है. अंक 9 का स्वामी ग्रह मंगल होता है. 9, 18 या 27 तारीख को जन्मे लोगों पर हमेशा हनुमान जी की कृपा बनी रहती है. कष्ट निवारण हेतु अर्पित की जाने वाली पूजा, बजरंगबली, मंगल ग्रह से संबंधित है. हनुमान को मंगल ग्रह का देवता कहा जाता है. इसीलिए मंगलवार को हनुमान जी के साथ-साथ मंगल ग्रह की भी पूजा की जाती है. हनुमान मंगल ग्रह के प्रतीक हैं. यदि आप अपनी नौकरी या व्यवसाय में समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो इसका कारण मंगल ग्रह का अशुभ या खराब होना हो सकता है. जीवन में नहीं आती हैं समस्याएं यदि मंगल खराब हो तो स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं. परिवार में लोग बीमार हो सकते हैं. यदि आपका मंगल शुभ है तो परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ रहेंगे. मंगल ग्रह शुभता का प्रतीक है. जो लोग बिना किसी स्वार्थ के अपना काम करते हैं उन्हें मंगल और हनुमान का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में कभी कष्टों का सामना नहीं करना पड़ता है. इसके अलावा जीवन में आने वाली समस्याएं दूर रहती है. लोगों के प्राप्त होती है हनुमान जी की कृपा जो लोग शुद्ध मन रखते हैं, बिना किसी भेदभाव के लोगों की मदद करते हैं और निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करते हैं, उन्हें हमेशा हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त रहता है. इसी कारण मूलांक 9 वाले लोगों पर मंगल और हनुमान जी की कृपा होती है. अंकशास्त्रियों का कहना है कि ऐसे लोग निडर और सहनशील होते हैं. ऐसे लोग हर मुश्किलों का सामना करने की कोशिश करते हैं और अंत विजयी पाते हैं. यदि मंगल अशुभ हो तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. इसके साथ ही कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

मुख्य सचिव जैन के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कलेक्टरों को निर्देश

भोपाल मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा पुलिस व प्रशासन तालमेल के साथ काम करें। दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू की तरह काम करें। मुख्य सचिव जैन ने सोमवार को मंत्रालय में वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से कलेक्टर, कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षकों के साथ विभिन्न विषयों पर समीक्षा बैठक की। उन्होंने निर्देश दिये कि अवैध गतिविधियों पर रोक लगायी जायें। कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक निष्पक्ष रहकर मिलकर काम करें। उन्होंने निर्देश दिये कि अवैध शराब बिक्री पर रोक के लिए संयुक्त टीम बनाएं। राजस्व प्रकरणों में समय-सीमा एवं ईमानदारी से काम करें। जनता के जीवन को आसान बनाना हमारा दायित्व है। मुख्य सचिव जैन ने कानून व्यवस्था बनाये रखने और अपराध को रोकने के लिए, जुआं/सट्टा, अवैध शराब विक्रय, अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन, अपंजीकृत वाहनों, प्रदूषण के विरूद्ध, खाद्य पदार्थों में मिलावट के विरूद्ध और बोर्ड परीक्षाओं के दृष्टिगत नियम विरूद्ध लाउड स्पीकर बजने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव जैन ने नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, रिकार्ड सुधार के प्रकरणों पर कार्यवाही करने के निर्देश दिये। राजस्व महाअभियान में सभी निरस्त होने वाले राजस्व प्रकरणों का पुन: परीक्षण किया जाने एवं त्रुटिपूर्ण नक्शा सुधार का कैम्प लगाकर निराकरण किये जाने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव जैन ने खाद की कीमत निर्धारित मूल्य से अधिक में बेचने पर विक्रेता के विरूद्ध प्रभावी कार्रवाई किये जाने के निर्देश दिये। खाद, कीटनाशक मामले में गंभीर शिकायतों/अनियमितता होने पर जांच के बाद एफ.आई.आर. दर्ज कराने के निर्देश दिये। मंत्रालय एवं विभागाध्यक्ष कार्यालयों के बाद जिलों में भी ई-ऑफिस प्रणाली शुरू करने के निर्देश दिये गये। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि कानून व्यवस्था बनाने एवं अवैध शराब बिक्री रोकने के लिए गंभीरता से कार्य करें। अवैध खनिज उत्खनन पर पुलिस, राजस्व एवं खनिज विभाग मिलकर कार्यवाही करें। वाहनों में लगे अवैध हूटर एवं अवैध तरीके से प्रेस, पुलिस लिखे वाहनों पर कार्यवाही की जायें। साइबर फ्रॉड एवं सिक्योरिटी पर जनमानस को जागरूक करने का कार्य करें। अपर मुख्य सचिव गृह विभाग जे.एन.कंसोटिया ने कहा कि ट्रेक्टर से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मण्डी बोर्ड, स्थानीय निकाय के साथ मिलकर रिफ्लेक्टर लगाये जायें। बैठक में अपर मुख्य सचिव पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण अजीत केसरी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गुप्तवार्ता, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी, प्रमुख सचिव पर्यावरण एवं प्रमुख सचिव राजस्व भी उपस्थित रहे।  

मध्यप्रदेश भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र , मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हम सब इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे :मंत्री लोधी

भोपाल संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के नए “अकादमिक भवन” का लोकार्पण किया। राज्य मंत्री लोधी ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र है और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में हम सब इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। आने वाले समय में मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की तर्ज पर विकसित किया जायेगा।राज्य मंत्री लोधी ने बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजन कर भवन की गतिविधियों का शुभारंभ किया।  अकादमिक भवन के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान नाट्य विद्यालयों के विद्यार्थियों ने स्थानीय लोकगीतों की सुंदर प्रस्तुति दी। राज्य मंत्री लोधी ने युवा कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की और उनका प्रोत्साहन करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद कहा करते थे सारी शक्ति अपने अंदर समाहित है, जरूरत है उसे पहचानने की और अपने आत्मबल को जगाने की। मंत्री लोधी ने इस दौरान अकादमिक भवन का भ्रमण किया और सुविधाओं का जायजा लिया।  कार्यक्रम के दौरान प्रमुख सचिव संस्कृति एवं पर्यटन शिव शेखर शुक्ला, संचालक संस्कृति एन. पी. नामदेव, निदेशक टीकम चंद्र जोशी, विद्यालय के शिक्षकगण, अलग-अलग क्षेत्रों के कलाकार एवं कलाप्रेमी उपस्थित रहे।  

राज्य मंत्री जायसवाल ने नर्मदापुरम जिले के मढ़ई में शोरूम “प्राकृत” का किया शुभारंभ

भोपाल कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दिलीप जायसवाल ने सिल्क टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत नर्मदापुरम जिले के मढ़ई में “सिल्क शोरूम-प्राकृत’ का शुभारंभ किया। सांसद दर्शन सिंह चौधरी, राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया, विधायक विजयपाल सिंह, आयुक्त रेशम मोहित बुंदस उपस्थित रहे। इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों और रेशम प्रेमियों को मध्यप्रदेश में उत्पादित शुद्ध रेशम वस्त्रों से परिचित कराना और रेशम उद्योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। सिल्क एस्टेट में पर्यटक रेशम उत्पादन, बुनाई और डिजाइनिंग की प्रक्रिया को नजदीक से देख और समझ सकेंगे। इसके साथ ही, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म silkestatesmadai.com के माध्यम से पर्यटक सिल्क एस्टेट में ठहरने और कैंपिंग का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। कार्यक्रम में विधायक विजयपाल सिंह ने सिल्क एस्टेट में ठहरने की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और राज्य मंत्री, कुटीर एवं ग्रामोद्योग से सिल्क एस्टेट की ठहरने की क्षमता बढ़ाने का अनुरोध किया। राज्य मंत्री ने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही विस्तार प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सिल्क फेडरेशन अंतर्गत प्राकृत शोरूम का भी उद्घाटन किया गया, जिससे मढ़ई में आने वाले पर्यटक शुद्ध रेशम वस्त्रों की खरीदारी कर सकेंगे। यह नवाचार न केवल रेशम उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देगा, बल्कि प्रदेश के रेशम उत्पादकों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इस पहल को जिला प्रशासन का पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है और यह रेशम उद्योग के विस्तार में एक मील का पत्थर साबित होगा।  

खेल एवं सामाजिक गतिविधियों में अग्रणि र्भुमिका पर ऊर्जास्विता सम्मान से नवाजी गई आराधना

Aradhana awarded Urjaswita Samman for her leading role in sports and social activities हरिप्रसाद गोहेआमला। बैतूल जिले के आमला में संचालित सुषमा महिला जन कल्याण एवं बाल विकास शिक्षण समिति आमला के बैनर तले संस्था अध्यक्ष आराधना मालवीय द्वारा आमला शहर सहित अंचल के विभिन्न ग्रामों में पहुंच वहा निवासरत बालक बालिकाओं को शिक्षा खेल एवं अन्य गतिविधियों में प्रोत्साहित करने निरंतर कार्य किया जाता रहा है। उत्कृष्ट एवं बेहतर कार्य प्रणाली के चलते युवाओं का भी समर्थन संस्था को मिल रहा है । वहीं समिति अध्यक्ष आराधना मालवी द्वारा किए गए कार्यों की बदौलत उन्हें राजधानी भोपाल में निर्मला भूरिया जी द्वारा ऊर्जस्विता सम्मान से नवाजा गया । गौरतलब हो की अनुनय एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी की ओर से भारतीय होटल प्रबंधन संस्थान, भोपाल के साथ मिलकर ऊर्जस्विता सम्मान समारोह आयोजित आयोजित किया गया । जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत 26 महिलाओं का सम्मान किया गया । बतादे आराधना मालवी लड़कियों और लड़कों को खेलों में अवसर प्रदान करती हैं ।उन्होंने 100 से अधिक लड़कों और लड़कियों का समर्थन किया हैं । और उनके लिए मैच आयोजित करती हैं । वहीं सुषमा महिला जन कल्याण एवं बाल विकास शिक्षा समिति द्वारा पोषण का सही ज्ञान देती हैं। यह समिति लड़कियों और महिलाओं की क्षमता को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करती है, ताकि दीर्घकालिक परिवर्तन लाया जा सके। हम गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा, खेल कल्याण, शिक्षा, जीवनयापन को बढ़ावा देने पर नीतिगत रूप से जोर देते हैं। लिए तथा कोरोना काल के दौरान 45 से अधिक गांव मैं राशन तथा चिकित्सा सेवा प्रदान कि है इन्ही कार्यो के इन्हें कई सारे पुरस्कार भी मिले है।कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थीं। आईएचएम के प्राचार्य डॉ. रोहित सरीन, प्रफुल्लित तीर्थ के पीठाधीश स्वामी मनेश्वरानंद और छत्तीसगढ़ के पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) सुधीर अग्रवाल विशेष अतिथि थे। यहां मार्गी वॉट्स कार्टर को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया। स्वागत भाषण सोसायटी की अध्यक्ष माही भजनी ने दिया और अतिथियों को स्वागत भी किया। मौके पर सचिव आईएफएस अधिकारी (सेवानिवृत्त) डॉ. एके भट्टाचार्य भा मौजूद थे ।

अपर मुख्य सचिव डॉ.राजौरा ने उज्जैन संभाग की संभागीय समीक्षा बैठक ली

भोपाल अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने कहा है कि जल जीवन मिशन अंतर्गत कार्यरत एजेंसियों के कार्यों की सतत मॉनिटरिंग कर कार्य तीव्र गति से मापदण्ड व अनुबंध की शर्तों अनुसार करवाना सुनिश्चित करें। डिफॉल्टर एजेंसियों पर ब्लैक लिस्टेड करने के साथ व टर्मिनेशन की सख्त कार्रवाई की जाएं। एसीएस डॉ. राजौरा उज्जैन में संभाग की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि पूर्व में प्रगतिरत रोड़ रिस्टोरेशन के कार्य पूर्ण न होने तक नई खुदाई के कार्य प्रारंभ न किए जाए और प्रत्येक पखवाड़े में जल जीवन मिशन की जानकारी बैठक के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को प्रदान करें। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजौरा ने बैठक में संभाग के सभी जिलो के कलेक्टर, सीईओ जिला पंचायत, संभागीय व जिला अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता के हित से जुड़े सभी कार्यों पर सभी संबंधित अधिकारी विशेष ध्यान दे। जल जीवन मिशन के अंतर्गत रोड़ रिस्टोरेशन के कार्यों की सतत मॉनिटरिंग कर सभी रिस्टोरेशन कार्य मार्च 2025 तक पूर्ण किए जाएं। रोड़ रिस्टोरेशन के पूर्ण कार्यों का पुन: निरीक्षण अगले एक सप्ताह में जनप्रतिनिधियों एवं एसडीएम की टीम के साथ किए जाने के पश्चात ही कार्य पूर्णता का सर्टिफिकेट दिया जाए। जल जीवन मिशन अंतर्गत रोड़ रिस्टोरेशन, रोड़ खुदाई एवं योजना के संपूर्ण कार्यों की जानकारी सतत रूप से स्थानीय विधायकों को दी जाए। एसीएस डॉ.राजौरा ने संभागायुक्त संजय गुप्ता को निर्देशित किया कि सभी जिला कलेक्टर से सुनिश्चित करवाएं कि सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण व समयावधि में हो। कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। जिला कलेक्टर प्रत्येक माह जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सभी विभागों के प्रमुख मुददों पर समन्वय स्थापित करें। बैठक में ऊर्जा विभागांतर्गत केबल, ट्रांसफॉर्मर, डीपी को समय-समय पर बदले जाने के कार्य का भौतिक सत्यापन जनप्रतिनिधियों के साथ कराए जाने के निर्देश दिए गए। विद्युत संबंधी रख-रखाव की जानकारी आमजन को पहले से प्रदान की जाए। अस्थाई कनेक्शन के कारण अतिरिक्त दाब के कारण बार-बार डीपी को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए स्थाई हल निकाला जाए। प्रत्येक माह जिला सलाहकार समितियों के माध्यम से विद्युत विभाग जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक जानकारी प्रदान करें। बैठक में लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा में एसीएस डॉ. राजौरा ने निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटना से बचाव के लिए सड़क के दोनों तरफ लेबलिंग के कार्य पश्चात ही कार्य पूर्णता का प्रमाण-पत्र दिया जाए। वर्षा ऋतु में सड़कों के रख-रखाव की कार्ययोजना पर अभी से कार्य कर विशेष ध्यान दिए जाए। सड़क निर्माण में जो क्षेत्र वन विभाग के अधिकार में आ रहे हैं वहां निर्माण कार्य के लिए संबंधित विभाग से एनओसी समय पर प्राप्त कर ली जाए। बैठक में उज्जैन के विधायक तेजबहादुर सिंह चौहान, जितेन्द्र पण्ड्या, अनिल जैन कालूहेडा, महेश परमार, दिनेश जैन बोस, विधायक दिलीप सिंह परिहार, ओमप्रकाश सकलेचा, विधायक विपीन जैन, हरदीप सिंह डंग, चंदर सिंह सिसौदिया, विधायक माधव सिंह (मधु गेहलोत), विधायक श्रीमती गायत्री राजे पंवार, राजेश सोनकर, मनोज चौधरी, आशीष शर्मा, विधायक अरूण भीमावत, विधायक मथुरालाल डामर, राजेन्द्र पांडे, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल आदि उपस्थित थे। एसीएस डॉ. राजौरा ने सिहस्थ क्षेत्र की कार्य योजना का किया निरीक्षण अपर मुख्य सचिव डॉ. राजौरा ने महाकाल दर्शन कर मन्दिर में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया और महाकाल आने वाले श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था का अवलोकन किया। एसीएस डॉ. राजौरा ने सिंहस्थ-2028 के सुचारू संचालन के लिये विशेष स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये व्यवस्थित प्लान बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने महाकाल लोक में भी सिंहस्थ के मद्देनजर आवश्यक व्यवस्थाएं करने को कहा। इस अवसर पर संभाग आयुक्त संजय गुप्ता, आईजी उमेश जोगा, डीआईजी नवनीत भसीन, कलेक्टर नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा सहित संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।  

वर्ष 2025 में सरकार आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बना कर आगे बढ़ेगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल भारत का हृदय-प्रदेश मध्यप्रदेश, प्राकृतिक सौंदर्य, बहुरंगी पारिस्थितिकी तंत्र और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोये है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकासशील चिंतन के मार्गदर्शन में प्रदेश डॉ. मोहन यादव के कुशल और आत्मविश्वास से भरे नेतृत्व में विकास के पथ पर अग्रसर है। वर्ष 2025 में सरकार आर्थिक प्रगति और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बना कर आगे बढ़ेगी। स्वच्छ और हरित मध्यप्रदेश मात्र विमर्श नहीं है, अपितु वर्तमान और भावी पीढ़ियों की महती आवश्यकता है। स्वच्छ और हरित मध्यप्रदेश बनाए रखने के लिए सरकार, निजी क्षेत्र और जनभागीदारी के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। नागरिकों में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए रोडमैप तैयार कर निरन्तर आगे बढ़ रही है। नवकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना मध्यप्रदेश ने सौर और पवन ऊर्जा के उपयोग में महत्वपूर्ण प्रगति की है। रीवा में अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्रोजेक्ट नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश को देश के अन्य राज्यों के लिए रोल-मॉडल बनाने के लक्ष्य का प्रतीक है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के साथ ही पवन ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार करने पर भी फोकस कर रही है। नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में सरकारी के साथ ही निजी निवेश को भी बढ़ावा दिये जाने की रणनीति बना रही है। प्रदेश के आम नागरिकों को उनकी आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों के अंतर्गत घरों और व्यवसायिक संस्थानों के लिए रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यहां तक कि प्रदेश के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता अर्थात किसानों को भी सिंचाई के लिए सोलर-पंप जैसी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के इन प्रयासों से नागरिक तो ऊर्जा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनेंगे ही, उनका अतिरिक्त उत्पादन ग्रिड से जुड़ कर प्रदेश को विद्युत सर-प्लस राज्यों के शीर्ष पर बनाए रखने में सहयोगी होगा। इस तरह मध्यप्रदेश देश को क्लीन-एंड-ग्रीन एनर्जी सेक्टर में विश्व में अग्रणी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगा। कचरा प्रबंधन प्रणाली में सुधार प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय है राज्य बीते कई वर्षों से लगातार देश के स्वच्छतम प्रदेशों में सम्मिलित बना हुआ है। इंदौर देश का स्वच्छतम शहर और भोपाल देश की स्वच्छतम राजधानी बनी हुई है। प्रदेश की इस क्लीन-एंड-ग्रीन लिगेसी को बनाए रखने के लिए पहले से सक्रिय कचरा-प्रबंधन प्रणाली को और प्रभावी बनाए जाने के लिए प्रदेश सरकार रणनीतिक स्तर पर काम कर रही है। स्थानीय निकायों में सूखा-गीला कचरा पृथक्करण के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कचरा, चिकित्सालयों एवं लेबोरेटरीज का कचरा और सीवेज-वेस्ट के पृथक्करण एवं निष्पादन के लिये हाईटेक प्रणालियां विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके अंतर्गत प्रदेश की स्मार्ट-सिटी परियोजना में सम्मिलित शहरों के साथ ही दूसरे शहरों में भी आधुनिक री-साइक्लिंग प्लांट स्थापित किए जाने की योजना है। गांवों और कस्बों में जैविक कचरे की कंपोस्टिंग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए भी आम नागरिकों को जागरूक बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जनभागीदारी से बढ़ाई जायेगी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रीनरी सबसे अधिक वनावरण और वृक्षावरण के साथ प्रदेश लगातार देश में प्रथम स्थान पर बना हुआ है। इस तरह हम जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने की दिशा में सबसे आगे हैं। इससे हमारी जैव-विविधता में भी सुधार हो रहा है। हम इससे संतुष्ट होकर नहीं बैठे है प्रदेश की इस परंपरा को आने वाले वर्षों में भी बनाये रखने के लिए सरकार सामुदायिक भागीदारी के साथ बड़े पैमाने पर वनीकरण अभियान चलाती रहेगी। इसके साथ ही शहरों में ग्रीन-बेल्ट और पार्कों का विकास किया जा रहा है। विकास कार्यों के कारण वन भूमि को संभावित क्षति के दृष्टिगत उसकी सुरक्षा और पुनर्स्थापना के लिए भी योजनाबद्ध रूप से सरकार काम कर रही है। किसानों के बीच भी कृषि वानिकी की परंपरा बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्ष 2025 में मिले उपहार प्रदेश को बनाएं जल-समृद्ध कृषि, उद्योग और घरेलू आवश्यकताओं के लिए सतत जल प्रबंधन महत्वपूर्ण है। इसके लिए मध्यप्रदेश को वर्ष के आरंभ में ही प्रधानमंत्री मोदी की ओर से पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक और केन-बेतवा नदी लिंक परियोजनाओं का उपहार मिला है। ये परियोजनाएं प्रदेश की सिंचाई आवश्यकताओं के साथ ही नागरिकों के लिए पेयजल और उद्योगों को उनकी जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराएंगी। इसके साथ ही प्रदेश सरकार भूगर्भ में संचित जल स्तर को बढ़ाने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रेन-वाटर हार्वेस्टिंग प्रणालियों का विस्तार कर रही है, पारंपरिक जल-निकायों (कुएं, बावड़ी एवं तालाब) और नदियों को पुनर्जीवित किए जाने की योजनाओं पर भी काम कर रही है। खेती में पानी की बर्बादी को रोकने के लिए स्प्रिंकलर-सिस्टम और ड्रिप-इरिगेशन जैसी माइक्रो-इरिगेशन तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। एकीकृत कृषि के साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा, अर्थव्यवस्था बनेगी मजबूत पर्यावरण भी रहेगा संरक्षित देश के साथ ही मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाली कृषि के क्षेत्र में भी उत्पादन बढ़ाने के लिए इस तरह की तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है जो पर्यावरण के अनुकूल हों। इसके अंतर्गत जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे किसान रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशक के रूप में रसायनों का प्रयोग कम से कम करने के लिए प्रोत्साहित होंगे और खेतों की मिट्टी भी उर्वर एवं शस्य-श्यामला बनी रहेगी। इसके लिए किसानों को गांवों में पर्यावरण संरक्षण और प्रिसिजन फार्मिंग संबंधी प्रशिक्षण दिये जाएंगे। किसानों को समृद्ध बनाने की रणनीति के अंतर्गत बाजारों की जरूरतों के अनुरूप फसल विविधीकरण, उद्यानिकी और पशुपालन से एकीकृत खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वाहन-जनित प्रदूषण कम करने की रणनीतियों पर फोकस वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश सरकार यातायात के साधनों की पर्याप्तता बनाए रखते हुए पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए विशेष नीतियों पर काम कर रही है। इसके लिए सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों का विस्तार किया जा रहा है। सार्वजनिक परिवहन के लिए मध्यप्रदेश परिवहन निगम को पुनर्जीवित किया जा रहा है। प्रदेश में इंटर-सिटी कनेक्टिविटी और शहरी सार्वजनिक परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक बसें प्रारंभ की … Read more

भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के विजन को मूर्त रूप दिए जाने के उद्देश्य से प्रदेश में तेज गति से कार्य किया जा रहा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के विजन को मूर्त रूप दिए जाने के उद्देश्य से प्रदेश में तेज गति से कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में फ्यूचर रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है, जिससे यहां अधिक से अधिक निवेश आएं, उद्योग धंधे स्थापित हों और बड़ी संख्या में रोजगार सृजित हो। मध्यप्रदेश में रेल, सड़क और हवाई सेवाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य के आंतरिक मार्गों के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का भी विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश के शहरों में सड़क यातायात के सुधार के लिए इंदौर, भोपाल, देवास, ग्वालियर, जबलपुर और सतना में एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। इनमें से इंदौर एलिवेटेड कॉरिडोर पर 350 करोड़, ग्वालियर में 1100 करोड़, जबलपुर में 660 करोड़ और भोपाल में 306 करोड़ रुपए की लागत आएगी। साथ ही राज्य सरकार ने 724 किमी लंबी 24 सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया है, जिनकी कुल लागत 10 हजार करोड़ रूपये है। ये परियोजनाएं प्रदेश के शहरों की रोड-कनेक्टिविटी को बढ़ाएंगी, यात्रा समय को कम करेंगी और व्यापार को बढ़ावा देंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में मजबूत राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का निर्माण और उन्नयन केन्द्र सरकार से मिले 3,500 करोड़ रुपए से किया जा रहा है। विशेष रूप से उज्जैन-जावरा 4-लेन ग्रीनफील्ड हाइ-वे परियोजना को 5 हजार करोड़ रूपये से अधिक के निवेश के साथ मंजूरी दी गई है। यह हाइ-वे उज्जैन, इंदौर और आस-पास के क्षेत्रों को मुंबई-दिल्ली इंडस्ट्रियल कॉरीडोर से जोड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव में बताया कि प्रदेश में ग्रामीण यातायात को सुगम करने के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य 8,565 गांवों को 19,378 किमी लंबी सड़कों के नैटवर्क से जोड़ना है। यह पहल ग्रामीण कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ा जा सके और यात्री व वस्तुओं की आवाजाही सुगम हो सके। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रदेश में 2024-25 के वित्तीय वर्ष के दौरान 1 हजार किमी नई सड़कों का निर्माण और लगभग 2 हजार किमी सड़कों की नवीनीकरण किया जाएगा ताकि ग्रामीण यातायात नेटवर्क को और भी मजबूत किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू की गई हैं। प्रदेश में 133 रेलवे ओवरब्रिज और अंडरपास का निर्माण किया गया है, इससे यातायात की गति में सुधार होगा एवं यात्रा सुगम और सुरक्षित होगी। वंदे भारत एक्सप्रेस का शुभारंभ मध्यप्रदेश में हाई-स्पीड ट्रेन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, भोपाल में 100 करोड़ रुपए की लागत से एक नया कोच कॉम्प्लेक्स बन रहा है, जो राज्य की रेलवे सुविधाओं को और बेहतर बनाएगा और यात्रियों को बेहतर सेवाएं प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के अन्य राज्यों और विदेशों के साथ संपर्क में सुधार के लिए हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। रीवा में हवाई अड्डे का निर्माण और ग्वालियर में राजमाता विजयराजे सिंधिया हवाई अड्डे का विस्तार एवं आधुनिकीकरण राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ाने के महत्वपूर्ण कदम हैं। इनसे निवेशकों को सुविधाएं मिलेंगी और निवेश आकर्षित होगा। हवाई सेवाओं के विस्तार से मध्यप्रदेश में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।  

मुख्यमंत्री 5 फरवरी को स्कूलों के प्रतिभाशाली 7,900 बच्चों को नि:शुल्क स्कूटी प्रदान करेंगे

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 5 फरवरी बुधवार को प्रात: 11 बजे भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में शासकीय स्कूलों के प्रतिभाशाली 7,900 बच्चों को नि:शुल्क स्कूटी प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह एवं जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह भी उपस्थित रहेंगे। प्रदेश में संचालित शासकीय हायर सेकण्डरी विद्यालयों में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान पाने वाले विद्यार्थी को नि:शुल्क ई-स्कूटी प्रदान करने की योजना स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित की जा रही है। योजना में मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मण्डल की कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में शासकीय विद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को स्कूटी प्रदान की जाती है। शैक्षणिक सत्र 2023-24 में शासकीय विद्यालय के किसी भी संकाय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले करीब 7 हजार 900 विद्यार्थियों को नि:शुल्क ई-स्कूटी वितरित की जायेगी। कार्यक्रम का ईलेक्ट्रॉनिक चैनल के माध्यम सीधे प्रसारण की व्यवस्था भी की गई।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्री पाटिल को अवगत कराया कि रीवा संभाग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बहुती नहर के उन्नयन की महती आवश्यकता

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल से सौजन्य भेंट की। उन्होंने रीवा और सतना जिलों में संचालित बाणसागर परियोजना की बहुती नहर के उन्नयन के लिए केंद्र सरकार की “मॉडर्नाइजेशन ऑफ कैचमेंट एरिया डेवलपमेंट” योजना के तहत 1700 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने का अनुरोध किया। इस परियोजना के अंतर्गत 85,000 हेक्टेयर कृषि भूमि के आधुनिकीकरण और सिंचाई क्षमता का विकास होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने केंद्रीय मंत्री पाटिल को अवगत कराया कि रीवा संभाग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बहुती नहर के उन्नयन की महती आवश्यकता है, क्योंकि वर्तमान नहर संरचना के कारण कई स्थानों पर कमांड क्षेत्र ऊंचे स्तर पर स्थित है। इस स्थिति में सुधार के लिए नहर प्रणाली के आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता है। परियोजना के क्रियान्वयन से न केवल सिंचाई सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि कृषि उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह परियोजना न केवल किसानों के लिए समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी बल्कि प्रदेश के जल संसाधन प्रबंधन को भी सुदृढ़ बनाएगी। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री पाटिल ने केंद्र सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।  

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