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अनूपपुर पुलिस ने चोरो से बरामद की तीन लाख के सोने चांदी के जेवरात न्यायालय आदेश पर फरियादी को सौंपे

अनूपपुर दिनांक 11 अगस्त 2024 को दीपक सोनी (उम्र 31 वर्ष), निवासी वार्ड नंबर 13, पुलिस कॉलोनी रोड, बस्ती रोड, अनूपपुर, ने कोतवाली थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि वह अपने परिवार के साथ मैहर दर्शन के लिए गया था, घर पर ताला लगा हुआ था। अगले दिन लौटने पर उसने देखा कि घर का ताला टूटा हुआ है और सोने-चांदी के जेवरात चोरी हो गए हैं। इस शिकायत पर कोतवाली थाना में अपराध क्रमांक 378/24, धारा 331(4) और 305 (A) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय अनूपपुर श्री मोती उर रहमान जी के निर्देशन में कोतवाली निरीक्षक अरविंद जैन के नेतृत्व में उपनिरीक्षक प्रवीण साहू, प्रधान आरक्षक महेंद्र सिंह, शेख रशीद, रितेश सिंह, महिला आरक्षक अंकिता सोनी और आरक्षक अब्दुल की टीम ने मामले की जांच करते हुए मुख्य आरोपी सोनू सिंह (उम्र 21 वर्ष), निवासी ग्राम छपराटोला, ग्राम लखनपुर, थाना कोतवाली, अनूपपुर को गिरफ्तार किया गया। चोरी के जेवरात खरीदने में शामिल राजेश सोनी (उम्र 48 वर्ष), निवासी वार्ड नंबर 15, सोनी मोहल्ला, पुरानी बस्ती, अनूपपुर, और उसकी पत्नी सुधा सोनी (उम्र 45 वर्ष) को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 03 लाख रुपए मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात बरामद किए, जिनमें पायल, पाजेब, करधन, हाथ की मेहंदी, बच्चों के हाथ और पैर के चूड़े, गले की चेन, ब्रेसलेट, बड़ों के कंगन और चूड़े, और सोने के कान के 5 जोड़ी टॉप्स शामिल हैं। दिनांक 11.02.25 को माननीय न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनूपपुर श्रीमती चेनवती ताराम द्वारा उक्त प्रकरण में कोतवाली पुलिस द्वारा जप्तशुदा सोने चांदी के जेवरात प्रकरण के प्रार्थी दीपक कुमार सोनी को सुपुर्दनामा पर दिये जाने का आदेश जारी करने पर थाना कोतवाली अनूपपुर पुलिस द्वारा उक्त सोने चांदी के जेवरात प्रकरण के प्रार्थी दीपक कुमार सोनी पिता छविलाल सोनी उम्र 25 साल निवासी वार्ड न. 03 पुरानी बस्ती अनूपपुर को सौंप दिये गये। घर का रात्रि में ताला तोड़कर चोरी किये गये सोने चांदी के जेवरात वापस पाने पर दीपक सोनी द्वारा अनूपपुर पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए सराहना की है।

16 से 28 फरवरी तक फिर सर्वेक्षण कराया जाएगा, तेलंगाना में जाति गणना के बाद कम हो गई पिछड़ों की आबादी

तेलंगाना तेलंगाना में हाल ही में हुए जाति सर्वेक्षण में हुई गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी पार्टियों, जिनमें भारत राष्ट्र समिति (BRS) भी शामिल है, की आलोचना का सामना कर रही कांग्रेस सरकार ने फैसला लिया है कि 16 से 28 फरवरी तक फिर सर्वेक्षण कराया जाएगा। यह सर्वे केवल उन 3.1 प्रतिशत परिवारों के लिए होगा जो पहले हुए जाति गणना में शामिल नहीं हो पाए थे। आपको बता दें कि तेलंगाना में हाल ही में जारी किए गए आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता को लेकर बहस छिड़ गई है। सबसे बड़ी चिंता राज्य के पिछड़ी जातियों की जनसंख्या में गिरावट को लेकर उठी थी। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भटी विक्रमार्का ने कहा, “3.1% परिवारों का कहना है कि वे फिर से विवरण देंगे। उनके लिए फिर से गिनती के लिए राज्य सरकार ने 16 से 28 फरवरी तक मौका देने का निर्णय लिया है। बचे हुई परिवारों के लिए एक टोल-फ्री नंबर भी घोषित कर रहे हैं।” लोग अपनी जानकारी ऑनलाइन, टोल-फ्री नंबर या मंडल कार्यालयों के माध्यम से प्रदान कर सकते हैं। डेटा की समीक्षा राज्य कैबिनेट द्वारा मार्च के पहले सप्ताह में की जाएगी। उपमुख्यमंत्री मल्लू भटी विक्रमार्का ने बुधवार को संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि मार्च में राज्य विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एक बिल पेश किया जाएगा, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों में 42 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान होगा। इस बिल के विधानसभा में पारित होने के बाद इसे केंद्र को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा और राजनीतिक सहमति प्राप्त करने की कोशिश की जाएगी। विपक्षी पार्टियों ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वह अपने जाति सर्वे में जानबूझकर पिछड़ी जातियों की जनसंख्या को कम दिखा रही है। BRS नेता रवुला श्रीधर रेड्डी ने कहा, “उनके सर्वे में कोई प्रतिबद्धता नहीं है। यह सर्वे पूरी तरह से दोषपूर्ण है। उन्होंने केवल 96.9% परिवारों को कवर किया है और अधिकांश परिवारों ने जानकारी नहीं दी।” बीजेपी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर ईमानदारी से काम नहीं कर रही है। BJP नेता के कृष्णा सागर राव ने कहा, “कांग्रेस जो भी लोगों के लिए प्रस्तावित करती है, उसमें सच्चाई नहीं होती है। इसी कारण लोग उन पर विश्वास करना बंद कर चुके हैं।” जाति सर्वे में मुस्लिम समुदाय को पिछड़ी जातियों में शामिल करने पर केंद्र सरकार के मंत्री बंदी संजय कुमार ने शनिवार को आरोप लगाया कि इस कदम से पिछड़ी जातियों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि हैदराबाद नगर निगम चुनावों में हिंदू उम्मीदवारों की हार का कारण पिछड़ी मुस्लिम जातियों को पिछड़ी जातियों के रूप में चार प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का था। बंदी संजय ने कहा कि राज्य सरकार को यह याद रखना चाहिए कि अन्य जातियों का भी मुस्लिमों को पिछड़ी जाति के रूप में शामिल करने के खिलाफ विरोध है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिला को कहा रखैल तो भड़का सुप्रीम कोर्ट, फैसले में लिखे थे कई आपत्तिजनक शब्द

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश पर आपत्ति जताई, जिसमें एक महिला के लिए ‘अवैध पत्नी’ और ‘वफादार रखैल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। अदालत ने कहा कि यह उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और ‘महिला विरोधी’ टिप्पणी है। जस्टिस एएस ओक, जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह बॉम्बे हाईकोर्ट का साल 2003 में दिया गया एक फैसला पढ़ रहे थे। उस दौरान उन्हें ये शब्द मिले और न्यायाधीशों ने आपत्ति दर्ज कराई। बेंच ने कहा, ‘दुर्भाग्यवश, बंबई उच्च न्यायालय ने ‘अवैध पत्नी’ जैसे शब्द का इस्तेमाल करने की कोशिश की। हैरानी की बात यह है कि उच्च न्यायालय ने 24वें पैराग्राफ में ऐसी पत्नी को ‘वफादार रखैल’ बताया है।’ सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पाया कि उच्च न्यायालय ने अमान्य विवाह के पतियों के मामले में ऐसे किसी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है। कोर्ट ने कहा, ‘एक महिला के बारे में इन शब्दों के जरिए बताना हमारे संविधान के आदर्शों और भावना के खिलाफ है। अमान्य शादी में पार्टी एक महिला के बारे में कोई भी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकता। दुर्भाग्य से हमें ऐसी आपत्तिजनक भाषा हाईकोर्ट के फुल बेंच के फैसले में मिली है।’ उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जिस महिला का विवाह अमान्य घोषित कर दिया गया था, उसे ‘अवैध पत्नी’ कहना ‘बहुत अनुचित’ था और इससे उसकी गरिमा को ठेस पहुंची। शीर्ष अदालत हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 24 और 25 के उपयोग पर परस्पर विरोधी विचारों से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी। अधिनियम की धारा 24 मुकदमे के लंबित रहने तक भरण-पोषण और कार्यवाही के खर्च से संबंधित है, जबकि धारा 25 में स्थायी गुजारा भत्ता और भरण-पोषण का प्रावधान है।

वनग्राम क्षेत्र के निवासरत अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को स्थाई पट्टा दिए जाने एवं पट्टा नवीनीकरण की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा ।

Scheduled Castes and Tribes residing in forest village areas हरिप्रसाद गोहे आमला । मध्य प्रदेश मेहरा समाज के प्रदेश प्रवक्ता छन्नू बेले ने बैतूल कलेक्टर के नाम तहसीलदार आमला के माध्यम से सौपे जापान में बताया गया कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा वनग्राम भूमि में निवासरत लोगों को स्थाई पट्टा देकर वनग्राम में कृषि योग्य भूमि आदिवासी परिवार को दो से ढाई एकड़ तक दिए जाने के आदेश शासन द्वारा कई वर्षों पूर्व जारी किए गए हैं लेकिन आज दिनांक तक कई अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के लोग हैं जिन्हें वर्षों से निवास करने के बाद भी वनग्राम में भूमि का पट्टा नहीं दिया गया है । और जिन लोगों को पूर्व में पट्टे दिए गए थे उनके पट्टे आज तक वन विभाग एवं आयुक्त आदिवासी विकास विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है । बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का आभाव होने के कारण आज भी आदिवासी वर्ग के छात्र शिक्षा से वंचित हो रहे है शासन स्तर पर कई उच्च पद आरक्षित वर्ग के लिए रिक्त होने के बाद भी शासन उन्हें अभियान के माध्यम से अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को पदों पर नियुक्त नहीं कर रही है जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले ग्राम के लोगों में आक्रोश है पट्टे के लिए वन विभाग के चक्कर लगाकर परेशान हो गए हैं लेकिन विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शासन द्वारा अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के लिए कई जन कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर वनों को बचाने का प्रयास कर रही है लेकिन वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही से उन्हें सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। जिसका मुख्य कारण है कि वन ग्राम के क्षेत्र में निवासरत अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के लोगों को रोजगार न मिलने के कारण अपने परिवार के लालन-पालन के लिए वनों से जलाऊ लकड़ी काटकर बेचने का कार्य किया जा रहा है बैतूल जिला एक आदिवासी बाहुल्य जिला है जहां पर अधिकांश वन ग्राम क्षेत्र में आदिवासी वर्ग निवास करता है जो आज भी अपनी सुविधाओं से वंचित है। अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से मध्य प्रदेश मेहरा समाज के प्रदेश प्रवक्ता छन्नू बेले पूर्व ब्लाक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कमल धुर्वे खुन्नु धुर्वे रतनसिंह धुर्वे बलवंत धुर्वे बिसन धुर्वे रघुनाथ दरसिमा उदल भादू सीरजलाल सदाराम रतन सोनी रूपलाल सहित अनेक ग्रामीण क्षेत्र के लोग उपस्थित थे बेले द्वारा बताया गया कि मांग पूरी न होने पर संगठन द्वारा आंदोलन की चेतावनी दी गई है ।

योगेंद्र यादव ने बताया कि पंजाब में भी आम आदमी पार्टी की हार की संभावना जताई, यदि ऐसा हुआ तो पार्टी कहा बचेगी

नई दिल्ली दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार के बाद एक बार फिर इसके भविष्य को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। करीब एक दशक पहले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की कोख से जन्मी पार्टी अपने सबसे बड़े गढ़ में 22 सीटों पर गई है और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल समेत तमाम बड़े चेहरे अपनी सीटें नहीं बचा सके। दिल्ली में इस हार के बाद पंजाब में पार्टी टूटने का खतरा बताया जाने लगा तो भविष्य को लेकर कई अटकलें लगने लगी हैं। इस बीच पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे योगेंद्र यादव ने भी आशंकाएं जाहिर की हैं। जानेमाने राजनीतिक विश्लेषक और स्वराज इंडिया पार्टी के सह संस्थापक योगेंद्र यादव ने एक इंटरव्यू के दौरान पंजाब में भी आम आदमी पार्टी की हार की संभावना जताई और कहा कि यदि ऐसा होता है तो पार्टी कहां बचेगी और कैसे बचेगी यह बड़ा सवाल है। 2015 में आम आदमी पार्टी से निकाले गए योगेंद्र यादव ने वह वजहें भी गिनाईं जिनको लेकर उनके मन में अरविंद केजरीवाल के दल को लेकर आशंकाएं हैं। पत्रकार दीपक शर्मा को दिए इंटरव्यू में योगेंद्र यादव ने कहा, ‘चुनौतीपूर्ण (समय) है, इसमें कोई संदेह नहीं है। वैसे जिस पार्टी के पास 40 पर्सेंट से ज्यादा वोट हो, 22 विधायक हों, अपने आप में पार्टी ध्वस्त नहीं हुई है। 10 साल राज के बाद एक बार चुनाव हार जाना ऐसी बात नहीं है कि जिससे आपकी पार्टी टूट जाए। लेकिन जिस तरह की पार्टी आम आदमी पार्टी है, जिस तरह से वह चुनाव पर निर्भर है, जिस तरह से वह अरविंद केजरीवाल पर निर्भर है, और जिस शक्ति से उसका मुकाबला है, और बीजेपी जिस तरह के काम करेगी, वह देखते हुए मेरे मन में आम आदमी पार्टी के भविष्य को लेकर सवालिया निशान है।’ योगेंद्र यादव ने आगे कहा, ‘गुजरात में कोई राह नहीं है, हरियाणा में कुछ हुआ नहीं। अब ले दे के पंजाब है। पंजाब पर निर्भर करके… और यदि पंजाब में आम आदमी पार्टी हार जाती है, जिसकी संभावना है, मैं भविष्यवाणी नहीं कर रहा, लेकिन हार सकती है इसमें कोई संदेह नहीं। अगर पंजाब में भी हार गई तो फिर आम आदमी पार्टी कैसे बचेगी और कहां बचेगी यह बहुत बड़ा सवाल है।’

रिजवान और सलमान की जुगलबंदी से दक्षिण अफ्रीका पस्त, पाक छह विकेट से जीता

कराची पाकिस्तान ने वनडे ट्राई सीरीज 2025 के फाइनल में एंट्री कर ली है। पाकिस्तान ने बुधवार रात को साउथ अफ्रीका के खिलाफ 6 विकेट से यादगार जीत दर्ज की। साउथ अफ्रीका ने कराची के मैदान पर 353 रनों का लक्ष्य दिया, जिसे पाकिस्तान ने 49 ओवरों में चार विकेट के नुकसान पर हासिल किया। पाकिस्तान ने कप्तान मोहम्मद रिजवान और सलमान आगा के शतक के दम पर यह पहाड़ जैसा टारगेट चेज किया और नया कीर्तिमान रच डाला। पाकिस्तान ने अपने वनडे इतिहास का सबसे बड़ा टारगेट किया है। पाकिस्तान टीम ने पहली बार 350 प्लस का लक्ष्य हासिल किया है। लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान ने सधी हुई शुरुआत की। फखर जमां (41) और बाबर आजम (23) ने पहले विकेट के लिए 57 रन जोड़े। मुल्डर ने सातवें ओवर में बाबर को एलबीडब्ल्यू किया। कोर्बिन बॉश ने दसवें ओवर में सऊद शकील (15) का शिकार किया जबकि मुल्डर ने 11वें ओवर में फखर को पवेलियन भेजा। पाकिस्तान 91 रन पर तीन विकेट खोकर संघर्ष की स्थिति में आ गया था मगर रिजवान और सलमान ने बखूबी मोर्चा संभाला। दोनों ने साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए चौथे विकेट के लिए 260 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी की। यह पाकिस्तान के लिए वनडे में तीसरी सबसे बड़ी पार्टनरशिप है। सलमान ने 103 गेंदों में 134 रन जुटाए, जिसमें 16 चौके और दो छक्के शामिल हैं। वह 49वें ओवर में लुंगी एनगिडी का शिकार बने। उन्होंने वनडे में पहली बार शतक लगाया। वहीं, रिजवान 128 गेंदों में 122 रन बनाकर नाबाद रहे। उन्होंने 9 चौके और 3 छक्के ठोके। रिजवान के वनडे करियर की यह चौथी सेंचुरी है। तैय्यब ताहिर 4 रन बनाकर नाबाद रहे। उन्होंने विजयी चौका लगाया और पाकिस्तान ने 355 रन बनाकर लक्ष्य हासिल किया। इससे पहले, साउथ अफ्रीका ने टॉस जीतने के बाद पांच विकेट पर 352 रन बनाए। साउथ अफ्रीका ने कप्तान तेम्बा बवूमा (82), मैथ्यू ब्रीत्जके (83) और हाइनरिक क्लासेन (87) की शानदार पारियों की मदद से चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया था। ऐसा लग रहा था कि मुकाबला रोमांच के चरम पर जाएगा मगर रिजवान और सलमान ने बड़े स्कोर को बौना साबित कर दिया। मेजबान पाकिस्तान का 14 फरवरी को वनडे ट्राई सीरीज के फाइनल में न्यूजीलैंड से आमना-सामना होगा। न्यूजीलैंड ने पाकिस्तान और साउथ अफ्रीका को रौंदने के बाद फाइनल में जगह बनाई। साउथ अफ्रीका को अपने दो मैचों में हार का मुंह देखना पड़ा। चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत 19 फरवरी से होगी।  

आतिशी ने कहा- तीन दिन में ही लोगों को अपनी ‘गलती’ का अहसास हो गया, बिजली पर बड़ा दावा

नई दिल्ली दिल्ली की कार्यवाहक मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के साथ ही राजधानी में पावर कट लगने शुरू हो गए हैं। आतिशी ने दावा किया कि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से सैकड़ों लोगों ने पावर कट की शिकायत की है और उन्हें इनवर्टर खरीदकर लाना पड़ रहा है। आतिशी ने कहा कि तीन दिन में ही लोगों को अपनी ‘गलती’ का अहसास हो गया है। आतिशी ने कुछ कागज दिखाते हुए दावा किया लोग सोशल मीडिया पर अपने इलाकों में बिजली कटने की शिकायत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कहा कि तीन दिन में पावर सेक्टर का 24 घंटे बिजली का ध्वस्त होना दिखाता है कि आम आदमी पार्टी की सरकार हर दिन, एक एक घंटे पर पूरे बिजली सेक्टर को मॉनिटर कर रही थी। यह दिखाता है कि जैसे ही आम आदमी पार्टी की सरकार हटी है, पूरा पावर सेक्टर ध्वस्त हो गया है। मुझे अलग अलग हिस्सों से कॉल आ रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘कल रात मयूर विहार में लाइट कटी, मुझे सुबह कई लोगों के फोन आए। उन्होंने बताया कि वे इनवर्टर खरीदकर लाए हैं।’ आतिशी ने कहा, ‘कई लोगों ने मुझे कॉल करके कहा कि तीन दिन में ही हमें अहसास हो गया कि शायद चुनाव में हमसे गलती हुई। आम आदमी पार्टी के जाते ही पता चल गया है कि भाजपा से सरकार नहीं चलती है। आज सुबह किसी ने मुझसे कहा कि आज तो हम इनवर्टर ले आए, लेकिन यदि फरवरी में इतने लंबे कट लग रहे हैं तो मई, जून, जुलाई में क्या होगा, जब साढ़े 8 हजार मेगावट से आगे पीक डिमांड जाएगी। भाजपा को सरकार चलानी नहीं आती। 1993 से 98 में पावर में थे, तब भी पावर सेक्टर का बुरा हाल था। आज 20 राज्यों में भाजपा की सरकार है और उन सब राज्यों में बिजली का यही हाल है।’ आतिशी ने कहा कि बहुत दुख की बात है कि भाजपा चुनाव जीतने के बाद दिल्ली को यूपी बना रही है। जिस तरह यूपी में बिजली जाती थी दिल्ली का भी तीन दिन में वही हाल हो गया। शायद यही दिखाता है कि पढ़े लिखे लोगों की सरकार, जहां अरविंद केजरीवाल इंजीनियर हैं, उन्हें पावर सेक्टर चालाना आता है और दूसरी तरफ बिना-पढ़े लिखे, फर्जी डिग्रीवालों की सरकार। कार्यवाहक सीएम ने कहा- 8 तारीख से ही भाजपा चला रही सरकार यह पूछे जाने पर कि वह अभी भी कार्यकारी मुख्यमंत्री हैं और भाजपा की सरकार बनी नहीं है, आतिशी ने कहा, ‘8 तारीख को ही काउंटिंग के समय इन लोगों ने आदेश जारी कर दिया था कि मंत्रियों के दफ्तरों पर ताला लगा दो, सचिवालय में ना घुसने दिया जाए, उनको कोई कागज-फाइल ना देखने दी जाए। अब साफ है कि भाजपा 8 तारीख से ही खुद सरकार चला रही है। इसका नतीजा दिल्ली वाले दिन में ही… दिल्लीवालों को अब साफ हो रहा है कि भाजपा को लाने का क्या नतीजा है।’

लोकसभा में वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स बिल को पटल पर रखा, पेश हुआ, टैक्सपेयर्स को होगा फायदा

नई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नए इनकम टैक्स बिल को लोकसभा में पेश कर दिया है। बीते सप्ताह केंद्र सरकार की कैबिनेट की मंजूरी के बाद गुरुवार को निर्मला सीतारमण ने नए बिल को पेश किया। लोकसभा में हंगामे के बीच वित्त मंत्री ने बिल को सदन के पटल पर रखा। अब इस बिल को आगे के विचार-विमर्श के लिए संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा। नया इनकम टैक्स बिल एक अप्रैल, 2026 से लागू होने की उम्मीद है। नए बिल में 536 धाराएं नए बिल में 536 धाराएं, 23 अध्याय और 16 अनुसूचियां हैं। यह सिर्फ 622 पृष्ठों पर अंकित है। इसमें कोई नया कर लगाने की बात नहीं की गई है। यह बिल मौजूदा आयकर अधिनियम, 1961 की भाषा को सरल बनाता है। बता दें कि छह दशक पुराने मौजूदा कानून में 298 धाराएं और 14 अनुसूचियां हैं। जब यह अधिनियम पेश किया गया था, तब इसमें 880 पृष्ठ थे। क्या हुए हैं बदलाव नए बिल में फ्रिंज बेनेफिट टैक्स से संबंधित अनावश्यक धाराओं को हटा दिया गया है। विधेयक के ‘स्पष्टीकरण या प्रावधानों’ से मुक्त होने की वजह से इसे पढ़ना और समझना आसान हो जाता है। इसके साथ ही आयकर अधिनियम, 1961 में कई बार इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द ‘बावजूद’ को नए विधेयक में हटा दिया गया है और उसकी जगह पर लगभग हर जगह ‘अपरिहार्य’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है। टीडीएस से सैलरी तक की है बात इनकम टैक्स बिल में छोटे वाक्यों का उपयोग किया गया है। इसके अलावा तालिकाओं और सूत्रों के उपयोग से इसे पढ़ने के अनुकूल बनाया गया है। टीडीएस, अनुमानित कराधान, वेतन और फंसे कर्ज के लिए कटौती से संबंधित प्रावधानों के लिए तालिकाएं दी गई हैं। नए बिल में ‘करदाता चार्टर’ भी दिया गया है जो टैक्सपेयर्स के अधिकारों एवं दायित्वों को रेखांकित करता है। इस बिल में टैक्स ईयर का कॉन्सेप्ट है। इसमें आयकर अधिनियम, 1961 के असेसमेंट ईयर के टर्म को हटा दिया गया है।

छत्तीसगढ़ और असम ने दिखाया दमखम, नेटबॉल मिश्रित श्रेणी में रोमांचक मुकाबले

देहरादून यहां जारी 38वें राष्ट्रीय खेलों के नेटबॉल मिश्रित श्रेणी में टीमों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खेल भावना और समन्वय का परिचय दिया। पुरुष और महिला खिलाड़ियों से बनी इन मिश्रित टीमों ने अपने शानदार खेल से दर्शकों को रोमांचित किया। पूल ए: छत्तीसगढ़ और दिल्ली ने किया प्रभावशाली प्रदर्शन पूल ए में छत्तीसगढ़ ने अपने जबरदस्त खेल का प्रदर्शन करते हुए हरियाणा को 33-32 से कड़े मुकाबले में मात दी। इसके बाद, टीम ने पुडुचेरी पर 34-27 से शानदार जीत दर्ज कर अपनी दावेदारी मजबूत कर ली। वहीं, दिल्ली ने भी पुडुचेरी को 37-17 से हराकर शानदार शुरुआत की, लेकिन हरियाणा के खिलाफ 30-39 से हार का सामना करना पड़ा। पूल बी: असम की मजबूत पकड़, तेलंगाना की वापसी पूल बी में उत्तराखंड ने कर्नाटक को 32-23 से हराकर बढ़त बनाई, जबकि असम ने तेलंगाना को 30-28 से हराकर अपने अभियान की शानदार शुरुआत की। हालांकि, तेलंगाना ने अगले मुकाबले में उत्तराखंड को 38-31 से हराते हुए जोरदार वापसी की। वहीं, असम ने कर्नाटक को 30-28 से मात देकर अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। टूर्नामेंट अंतिम चरण में, पदक की होड़ तेज नेटबॉल प्रतियोगिता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जहां सभी टीमें स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ अपनी रणनीति पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। आने वाले मुकाबले रोमांचक होने की उम्मीद है, जहां टीमें अपनी पूरी ताकत झोंकने को तैयार हैं।  

2034 फीफा विश्व कप: सऊदी अरब में कहीं भी शराब नहीं बेची जाएगी, राजदूत ने की पुष्टि

लंदन सऊदी अरब में 2034 फीफा विश्व कप के दौरान शराब की अनुमति नहीं दी जाएगी। ब्रिटेन में सऊदी राजदूत प्रिंस खालिद बिन बंदर अल सऊद ने इस बात की पुष्टि की। एलबीसी रेडियो स्टेशन को दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब में कहीं भी शराब नहीं बेची जाएगी। यह फैसला 2022 कतर विश्व कप से अलग है, जहां विशेष प्रशंसक क्षेत्रों और पांच सितारा होटलों में ऊंची कीमतों पर शराब उपलब्ध थी। प्रिंस खालिद ने कहा, फिलहाल, हम शराब की अनुमति नहीं देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि सऊदी अरब अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए विश्व कप की मेजबानी करेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा, हर किसी की अपनी संस्कृति होती है। हम अपनी संस्कृति की सीमाओं के भीतर लोगों को समायोजित करने के लिए तैयार हैं, लेकिन हम किसी और के लिए अपनी संस्कृति को बदलना नहीं चाहते। राजदूत ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्व कप सिर्फ सऊदी अरब का नहीं, बल्कि एक वैश्विक आयोजन है। उन्होंने कहा, हम उन सभी का स्वागत करेंगे जो इस टूर्नामेंट का हिस्सा बनना चाहते हैं। सऊदी अरब में 2034 फीफा विश्व कप की मेजबानी को लेकर पहले ही चर्चाएं तेज हैं। यह आयोजन खेल के साथ-साथ सऊदी अरब की संस्कृति और परंपराओं को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा।  

राज्यसभा में वक्फ बिल पर JPC की रिपोर्ट पेश, मचा हंगामा, बढ़ते हंगामे के चलते कार्यवाही स्थगित

नई दिल्ली वक्फ (संशोधन) बिल पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट गुरुवार को राज्यसभा में पेश कर दिया गया। बिल के पेश होते ही सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। विपक्षी दलों ने नारेबाजी की और सरकार पर वक्फ बोर्डों को कमजोर करने का आरोप लगाया। बढ़ते हंगामे के चलते सभापति को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। गौरतलब है कि इससे पहले 31 जनवरी को जेपीसी ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपी थी, जिसे समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने व्यक्तिगत रूप से संसद भवन में प्रस्तुत किया। विपक्षी सांसद पहले से हैं नाराज समिति ने अपनी रिपोर्ट 15-11 के बहुमत से पारित की, जिसमें सांसदों द्वारा सुझाए गए बदलाव शामिल किए गए। इन बदलावों को लेकर विपक्षी दलों ने तीखी आपत्ति जताई और सरकार पर वक्फ बोर्डों की स्वायत्तता पर हमला करने का आरोप लगाया। विपक्षी सदस्यों ने असहमति पत्र (डिसेंट नोट) भी सौंपे, जिसमें कहा गया कि सरकार एकतरफा ढंग से इस बिल को आगे बढ़ा रही है। मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला: विपक्ष विपक्ष का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है और वक्फ बोर्डों के कामकाज में अनावश्यक दखलंदाजी की जा रही है। वहीं, भाजपा सांसदों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए लाया गया है। उनके मुताबिक, इसमें किसी समुदाय के अधिकारों को कम करने का इरादा नहीं है, बल्कि यह वक्फ संपत्तियों की बेहतर निगरानी और प्रशासनिक सुधार के लिए आवश्यक है। गौरतलब है कि यह बिल पिछले साल अगस्त में लोकसभा में पेश किया गया था, जिसके बाद इसे जेपीसी को सौंपा गया था। अब जब समिति की रिपोर्ट पेश हो चुकी है, तो इसे लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष इसे धार्मिक अधिकारों पर हमला बता रहा है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक सुधार के तौर पर पेश कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह गर्म रहने की उम्मीद है।

Bhopal में भीख देने पर समाजसेवी की शिकायत पर दर्ज हुई पहली FIR, आरोपियों की तलाश

भोपाल भीख मांगने और भीख देने पर FIR दर्ज हुई है। यह पहली FIR है।  MP नगर थाने में यह मामला दर्ज किया गया। एक NGO से जुड़े व्यक्ति ने शिकायत की थी। जिला कलेक्टर ने शहर में भीख मांगने पर रोक लगाई है। इस आदेश के बाद यह कार्रवाई हुई। भीख मांगने वाले और भीख देने वाले ट्रक ड्राइवर की पहचान अभी नहीं हो पाई है। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। शिकायतकर्ता ने वीडियो बनाया था। उसी के आधार पर पुलिस जांच कर रही है। सरकारी आदेश की अवहेलना का मामला यह मामला BNS की धारा 223 के तहत दर्ज किया गया है। यह धारा सरकारी आदेश की अवहेलना करने पर लागू होती है। जांच अधिकारी SI कुलदीप खरे ने बताया कि शिकायतकर्ता मोहन सिंह सोनी एक NGO से जुड़े हैं। वह जिला कलेक्टर द्वारा गठित टीमों का हिस्सा हैं। ये टीमें शहर में भीख मांगने वालों पर नजर रखती हैं। सोनी ने बताया कि बुधवार दोपहर वह अपनी टीम के साथ MP नगर के बोर्ड ऑफिस स्क्वायर से गुजर रहे थे। तभी उन्होंने एक व्यक्ति को भीख मांगते और एक ट्रक चालक को उसे भीख देते देखा। उन्होंने घटना का वीडियो बनाया और MP नगर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दर्ज किया केस पुलिस ने अज्ञात भिखारी और भीख देने वाले व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। वीडियो की मदद से पुलिस उनकी तलाश कर रही है। जिला कलेक्टर के आदेश के बाद यह पहला मामला है। इससे पहले भीख मांगने वालों के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं हुई थी। यह आदेश शहर में भीख मांगने और भीख देने दोनों पर रोक लगाता है। इससे पहले भीख मांगने पर रोक तो थी, पर भीख देने पर कोई पाबंदी नहीं थी। इस नए आदेश के बाद, अब भीख देने वाले भी कानून के दायरे में आ गए हैं। अगर कोई व्यक्ति भीख मांगता या देता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बेगर फ्री सिटी की कवायद यह कदम शहर में भीख मांगने की समस्या को कम करने के लिए उठाया गया है। कई लोग इस कदम का स्वागत कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे शहर की छवि सुधरेगी। साथ ही, यह भीख मांगने वालों को पुनर्वास के लिए प्रोत्साहित करेगा। हालांकि, कुछ लोग इस कदम की आलोचना भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे गरीब और जरूरतमंद लोगों की समस्या बढ़ेगी। फिर भी, प्रशासन का मानना है कि यह कदम लंबे समय में शहर के लिए फायदेमंद साबित होगा। देखना होगा कि इस नए नियम का क्या असर होता है। क्या वाकई में शहर से भीख मांगने की समस्या कम होगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। भिक्षुकों को पकड़ने मैदान में उतरीं टीमें संस्थाएं दर्ज करवाएंगी एफआईआर भोपाल शहर में भिक्षावृत्ति को पूरी तरह से खत्म करने के लिए बुधवार को टीमें मैदान में उतरीं। टीमों के सदस्यों ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भिक्षुकों से पूछताछ की और उनसे आश्रय स्थल जाने के लिए कहा। हालांकि अधिकांश भिक्षुकों ने आश्रय स्थल जाने से मना कर दिया। वहीं अब भीख देने और लेने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की जिम्मेदारी संस्थाओं को सौंपी गई है। खासतौर से एयरपोर्ट से रोशनपुरा चौराहा तक भिक्षुकों की पहचान करने के लिए टीमों का गठन किया गया है। अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई इन टीमों को जिला पंचायत की सीईओ इला तिवारी ने बुधवार को आदेश जारी किए हैं। जिसमें बताया गया है कि एयरपोर्ट से रोशनपुरा चौराहा तक भिक्षुक की पहचान कर उनके खिलाफ आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस की धारा 223 के तहत कार्रवाई करने के लिए विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह अधिकारी अपने अधीनस्थ टीम के सदस्यों की ड्यूटी लगाकर भिक्षावृत्ति करने वालों के खिलाफ कार्रवाइ करेंगे। इनमें अशासकीय समाजसेवी संस्था के सचिव मोहन सोनी, संगीता नेल्लोर को अध्यक्ष बनाया गया है। पकड़ने पर भड़की महिलाएं, वापस लौटी टीम शहर में भीख मांगने और देने वालों पर एफआईआर कराने के आदेश के बाद टीमें भिखारियों की तलाश कर रही है। बुधवार को एक टीम बोर्ड आफिस चौराहा पहुंची, जहां बच्चे, महिलाएं और पुरुष सामान बेचते नजर आए। पहले तो टीम को देखकर यह लोग भागे, लेकिन बाद में टीम के सदस्यों से बहस शुरू कर दी। उनका कहना था कि सामान बेचकर अपना गुजारा करते हैं, हम भिखारी नहीं हैं। इसको लेकर उपायुक्त सामाजिक न्याय आरके सिंह ने लोगों को भिक्षुक गृह ले जाने की बात कही, तो वह भड़क गए। आखिरकार टीम को वापस लौटना पड़ा।  

भारतीय कोच गौतम गंभीर ने युवा खिलाड़ियों को समर्थन देने पर दिया जोर

अहमदाबाद भारतीय क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मुकाबले में 142 रनों की शानदार जीत दर्ज की। इस जीत में युवा बल्लेबाज शुभमन गिल के शतक ने अहम भूमिका निभाई। भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने मैच के बाद गिल की जमकर तारीफ की और युवा खिलाड़ियों को निरंतर समर्थन देने की जरूरत पर जोर दिया। गिल ने ऑस्ट्रेलिया दौरे की खराब फॉर्म को पीछे छोड़ते हुए इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला में जबरदस्त वापसी की। उन्होंने तीन मैचों में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी उपयोगिता साबित की। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पांच पारियों में मात्र 93 रन बनाने वाले गिल ने अहमदाबाद में अपने शतक से आलोचकों को करारा जवाब दिया। गंभीर ने गिल की प्रशंसा करते हुए कहा, “वह अभी भी युवा बल्लेबाज है और उसमें सभी प्रारूपों में सफल होने की क्षमता है। टेस्ट क्रिकेट कठिन होता है, लेकिन उसने वहां भी अच्छा प्रदर्शन किया है। हमें हर पारी के बाद किसी युवा खिलाड़ी का मूल्यांकन करने की बजाय उन्हें निरंतर समर्थन देना चाहिए। अगर हम ऐसा करेंगे, तो भारतीय क्रिकेट का भविष्य बेहद उज्ज्वल होगा।” श्रेयस अय्यर ने भी इंग्लैंड के खिलाफ श्रृंखला में महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। विराट कोहली की अनुपस्थिति के कारण पहले मैच के लिए टीम में शामिल किए गए अय्यर को लेकर गंभीर ने स्पष्ट किया कि उन्हें पूरे दौरे में मौका दिया जाना तय था। गंभीर ने कहा, “श्रेयस को बेंच पर नहीं बैठाया जाना चाहिए था। हमने पहले मैच में यशस्वी जायसवाल को मौका देना चाहा क्योंकि वह ऑस्ट्रेलिया में बेहतरीन फॉर्म में थे। लेकिन हमें पता था कि श्रेयस मध्यक्रम में हमारे लिए एक अहम खिलाड़ी साबित होंगे।” टीम इंडिया को चैंपियंस ट्रॉफी से पहले बड़ा झटका लगा जब तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह पीठ की चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो गए। हालांकि, भारतीय गेंदबाजों ने इंग्लैंड के खिलाफ प्रभावी प्रदर्शन किया। गंभीर ने कहा, “हर्षित राणा और अर्शदीप सिंह ने बेहतरीन गेंदबाजी की। बुमराह की कमी जरूर महसूस होगी, लेकिन मोहम्मद शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज की मौजूदगी से टीम को फायदा होगा। किसी खिलाड़ी की अनुपस्थिति नए खिलाड़ियों के लिए बड़ा अवसर हो सकती है।” भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी के लिए बांग्लादेश के खिलाफ पहले मैच में हर्षित राणा और वरुण चक्रवर्ती को 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया है। गंभीर ने इस फैसले के बारे में कहा, “वरुण को टीम में शामिल करने की वजह बीच के ओवरों में विकेट निकालने का विकल्प मजबूत करना है। वह विरोधी टीमों के लिए ‘एक्स-फैक्टर’ साबित हो सकते हैं, खासकर उन टीमों के लिए जिन्होंने उनके खिलाफ ज्यादा नहीं खेला है।” भारत अब चैंपियंस ट्रॉफी की तैयारियों में जुट गया है, जहां टीम को युवा खिलाड़ियों से बड़े प्रदर्शन की उम्मीद होगी।  

AIIMS Bhopal को ISN ने 2025 का प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय श्रियर पुरस्कार दिया

भोपाल किडनी रोग से पीड़ित बच्चों के इलाज करने में एम्स भोपाल ने कीर्तीमान रचा है। दरअल एम्स लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान बना रहा है। अब एम्स को इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (ISN) द्वारा 2025 का प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय श्रियर पुरस्कार दिया गया है। यह सम्मान बाल किडनी रोग के इलाज में उत्कृष्ट योगदान और 2018 से 2024 तक मैकगिल यूनिवर्सिटी, कनाडा के साथ सफल साझेदारी के लिए दिया गया है। साथ ही, एम्स भोपाल को पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी में आईएसएन क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में नामित किया गया। विश्व के 57 आईएसएन सिस्टर रीनल सेंटर जोड़ों शामिल   यह पुरस्कार डॉ. रॉबर्ट डब्ल्यू, श्रियर के नाम पर दिया जाता है, जो गुर्दा शोध और वैश्विक नेफ्रोलॉजी शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान के लिए जाने जाते है। यह सम्मान उन संस्थानों को दिया जाता है जो अंतर्राष्ट्रीय सहयोगों के माध्यम से नेफ्रोलॉजी इलाज, शिक्षा और शोध में अद्वितीय प्रगति दिखाते हैं। एम्स भोपाल अब विश्व के उन 57 आईएसएन सिस्टर रीनल सेंटर जोड़ों में से एक है, जिसने यह मान्यता प्राप्त की है। एक हजार से ज्यादा बच्चों का किया डायलिसिस एम्स बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा मलिक ने बताया कि बाल रोग डायलिसिस यूनिट ने पिछले वर्ष में 1000 से अधिक डायलिसिस सत्र और 150 प्लाज्मा एक्सचेंज सफलतापूर्वक पूरे किए हैं, जिससे अनेक बच्चों की जान बचाई गई है। यह पुरस्कार एम्स भोपाल की ओर से डॉ. गिरीश भट्ट ने विश्व नेफ्रोलॉजी कांग्रेस 2025 में प्राप्त किया। एम्स भोपाल ने बाल किडनी रोग देखभाल को और बेहतर बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाल नेफ्रोलॉजी संघ (IPNA) फैलोशिप और बाल रोग नेफ्रोलॉजी में डीएम कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें दो डीएम फेलो पहले ही नामांकित हो चुके हैं। इन पहलों का उद्देश्य अधिक विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करना और पूरे भारत में बाल रोग नेफ्रोलॉजी सेवाओं का विस्तार करना है। इस सम्मान से बढ़ी एम्स की प्रतिष्ठा एम्स के डायरेक्टर डॉ. अजय सिंह ने बाल रोग नेफ्रोलॉजी इकाई की समर्पित सेवाओं और अग्रणी कार्यों पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने डॉ. शिखा मलिक (बाल रोग विभागाध्यक्ष), डॉ. अंबर कुमार और डॉ. गिरीश भट्ट को बधाई देते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हमारी टीम के बाल किडनी रोग देखभाल को उन्नत बनाने के सतत प्रयासों का प्रमाण है। एम्स भोपाल को आईएसएन क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में मिली यह मान्यता न केवल हमारी प्रतिष्ठा को बढ़ाएगी, बल्कि भारत और अन्य देशों में विभिन्न चिकित्सा केंद्रों को सहयोग प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

कलेक्टर का बड़ा एक्शन, भिंड के 126 निजी स्कूलों की मान्यता निलंबित, स्कूल एसोसिएशन ने मांगा समय

भिंड  मध्यप्रदेश में एक बार फिर प्राइवेट स्कूलों की लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई की गई है। मामला भिंड जिले का है जहां कलेक्टर ने एक साथ 126 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता निलंबित कर दी है। स्कूल प्रबंधन द्वारा अपार आईडी बनाने में लापरवाही बरतने के कारण ये एक्शन लिया गया है। कलेक्टर ने ये भी साफ कर दिया है कि जब तक स्कूल प्रबंधन अपार आईडी निर्माण कार्य पूरा कर उसका प्रमाण प्रस्तुत नहीं करेंगे, तब तक उनकी मान्यता बहाल नहीं की जाएगी। कलेक्टर भिण्ड संजीव श्रीवास्तव ने अपार आई डी निर्माण शुरू नहीं किये जाने पर नाराजगी जताते हुए जिले के 126 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता निलंबित कर दी है। कलेक्टर ने आदेश जारी कर कहा है कि भारत सरकार की योजना अन्तर्गत नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के छात्र/ छात्राओं की अपारआईडी बनाई जा रही है जिसके लिये कई बार बैठकों एवं व्हाट्सएप के माध्यम से निर्देश दिए गए हैं, कई स्कूलों ने उनके यहाँ पढ़ने वाले छात्र/छात्राओं के अपार आईडी के निर्माण का कार्य 29 जनवरी 2025 तक प्रारंभ नहीं किया जिसपर 30 जनवरी 2025 को कार्यालयीन पत्र भेजकर नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया लेकिन आज दिनांक तक  उसका कोई जबाब प्राप्त नहीं हुआ। लापरवाह 126 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता निलंबित इसलिए अपार आई डी निर्माण का कार्य प्रारंभ न किये जाने पर जिले के 126 अशासकीय विद्यालय की मान्यता निलंबित कर दी गई है। कलेक्टर ने सभी 126 अशासकीय विद्यालयों के संचालकों को निर्देशित किया है कि वे अध्ययनरत विद्यार्थियों के अपार आईडी के निर्माण का कार्य पूर्ण करने के उपरान्त उसका प्रमाणीकरण प्रस्तुत करें तब ही मान्यता निलंबन से बहाल किये जाने पर विचार किया जायेगा। यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा। अपार आईडी ( APAAR ID) यानि छात्र का 12 अंकों का यूनिक आईडी नंबर अपार आईडी यानी ऑटोमेटिक परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री – APAAR ID। केंद्र सरकार के निर्देश को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों ने अपने यहां संचालित सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों से कहा है कि वे हर छात्र की एक अलग खास पहचान बनाने के लिए उनके माता-पिता से सहमति लें। केंद्र सरकार की “वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी” योजना के तहत यह अपार आईडी कार्ड बनाया जा रहा है। योजना के तहत प्रत्येक छात्रों को 12 अंकों का एक यूनिक आईडी नंबर जारी किया जा रहा है जिसे अपार आईडी का नाम दिया गया है। अपार आईडी के लिए छात्र आधिकारिक वेबसाइट apaar education.gov.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। हालांकि यह काम स्कूलों द्वारा पूरा किया जाना है। APAAR ID से छात्र को मिलेगी अलग पहचान अपार आईडी आधार नंबर की तरह ही एक तरह का आईडी है। योजना के तहत अपार आईडी में एक विद्यार्थी की बचपन से लेकर हायर एजुकेशन तक की शैक्षणिक गतिविधियों का पूरा ब्योरा दर्ज होगा। इस योजना के तहत हर विद्यार्थी को आजीवन एक खास अपार पहचान मिलेगी। अपार आईडी कार्ड में छात्र का नाम, लिंग, जन्मतिथि, पता, पैरेंट्स का नाम, फोटो के साथ-साथ उनकी शैक्षणिक योग्यता के प्रमाणपत्र , कैरेक्टर सर्टिफिकेट, स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट सहित अन्य कई दस्तावेज मौजूद होंगे। इसके अलावा विद्यार्थी की खेल प्रतियोगिता में हिस्सा, स्कॉलरशिप, जीते गए अवॉर्ड, स्किल ट्रेनिंग, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज, ओलिंपियाड में सहभागिता की जानकारी भी इस आईडी कार्ड में दर्ज कराई जाएगी। अपार आईडी में छात्र का ब्लड ग्रुप, ऊंचाई और वजन जैसी अतिरिक्त जानकारी भी शामिल हो सकती हैं।  

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