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उमंग सिंघार को मंत्री गोविंद राजपूत ने भेजा 20 करोड़ का मानहानि का नोटिस, नेता प्रतिपक्ष बोले-डरेंगे नहीं

minister govind rajput sent defamation notice of rs 20 crore to umang singhar case related to saurab मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब इस मामले में मंत्री गोविंद राजपूत ने नेता प्रतिपक्ष को मानहानि का नोटिस भेजा है। बता दें नेता प्रतिपक्ष ने गोविंद सिंह राजपूत पर परिवहन मंत्री रहने के दौरान भ्रष्टाचार करने और करीब 1500 करोड़ रुपए की जमीन खरीदने के आरोप लगाए थे। अब इस मामले में मंत्री गोविंद राजपूत ने उमंग सिंघार केपर उनकी छवि धूमिल करने का आरोप लगा कर जवाब देने 15 दिन का समय दिया है। वहीं, नोटिस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी प्रतिक्रिया दी है। न डरें है न डरेंगे, नोटिस का जवाब देंगे वहीं, नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि नोटिस का जवाब भी देंगे और कोर्ट भी जाएंगे। न डरे हैं, न डरेंगे। बता दें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने फरवरी माह में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर परिवहन विभाग के घोटाले को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे, उन्होंने कहा कि इस घोटाले से हर माह राजपूत को 150 करोड़ रुपए पहुंचे। उन्होंने दस्तावेज दिखाते हुए गोविंद राजपूत पर अपने परिचितों और रिश्तेदारों के नाम से भ्रष्टाचार के पैसों से जमीन खरीदने के आरोप लगाए थे। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि परिवहन विभाग के घोटाले में एक पूरा रैकेट काम कर रहा था। उन्होंने 1500 करोड़ रुपए का लेखा जोखा होने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मंत्री ने परिवहन मंत्री रहते मध्य प्रदेश समेत के कई शहरों समेत दिल्ली के पॉश इलाके में बिल्डिंग में थर्ड फ्लोर और टैरिस अपने परिचितों के नाम से खरीदने का आरोप लगाया था। आरटीओ आरक्षक सौरभ से जुड़ा है पूरा मामला मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकानों से करोड़ों रुपए की नगदी, सोना-चांदी और संपत्ति के दस्तावेज मिले है। शर्मा के करीबी के नाम पर रजिस्टर्ड एक कार में 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपए नगद मिले थे। इस दौरान आरोप है कि सौरभ परिवहन विभाग की चौकियां से वसूली करता था, जिसको मंत्री गोविंद सिंह के इशारे पर किया जा रहा था। इस मामले में लोकायुक्त, ईडी से लेकर आयकर विभाग की टीमें जांच कर रही है। फिलहाल उनको कोई खास जानकारी नहीं मिलने की बात कहीं जा रही है। सौरभ शर्मा और उसके करीबी चेतन सिंह गौर और शरद जयसवाल फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।

इन आसान तरीकों से आसानी से करें लॉक आधार कार्ड

नई दिल्ली आधार कार्ड आज के वक्त का सबसे जरूरी दस्तावेज है। आधार कार्ड में बॉयोमेट्रिक डिटेल मौजूद होती है, जिसकी मदद से फ्रॉड को अंजाम दिया जा सकता है। ऐसे में आधार कार्ड को लॉक करना जरूरी हो जाता है। अगर आप आधार की बायोमेट्रिक डिटेल को लॉक कर देते हैं, तो आपको एक एक्स्ट्रा लेयर सिक्योरिटी मिल जाती है। आधार कार्ड लॉक करने पर आपकी परमिशन के बिना आपके प्रिंट और आईरिस स्कैन का वेरिफिकेशन किया जा सकेगा। यह आपके आधार से जुड़ी एक्टिविटी पर कंट्रोल रखने में मदद करता है। आधार लॉक के प्रॉसेस को आसानी से ऑनलाइन किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर इस फीचर को कैसे एक्टिवेट किया जाए? आधार बायोमेट्रिक लॉक आधार बायोमेट्रिक लॉक आपके फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन और फेस डेटा के दुरुपयोग से बचाने के लिए शुरू किया गया है। यह एक सिक्योरिटी फीचर है। इस लॉक को एक्टिवेट करने से कोई भी आपकी परमिशन के बिना आईडी वेरिफिकेशन, वित्तीय लेनदेन या सिम कार्ड जारी नहीं कर पाएगा। यूजर UIDAI पोर्टल या mAadhaar एप्लीकेशन के जरिए किसी भी समय बायोमेट्रिक्स को लॉक या अनलॉक कर सकते हैं। आधार बायोमेट्रिक्स को ऑनलाइन कैसे लॉक करें अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करने के लिए आपको सबसे पहले एक आधार वर्चुअल ID (VID) जेनरेट करना होगा। ऐसा करने के लिए आप UIDAI की ऑफिशियल वेबसाइट पर लॉग इन कर सकते हैं और ‘VID जेनरेटर’ ऑप्शन पर क्लिक कर सकते हैं।   सबसे पहले UIDAI myAadhaar पोर्टल पर जाएं।     इसके बाद नीचे स्क्रॉल करें और ‘लॉक/अनलॉक आधार’ ऑप्शन पर क्लिक करें।     फिर आपको ‘Next’ ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।     आधार वर्चुअल ID (VID)     पूरा नाम     पिन कोड     कैप्चा कोड     फिर OTP वेरिफाई करें। वेरिफिकेशन के बाद आपका आधार बायोमेट्रिक्स लॉक हो जाएगा।     यह सिक्योरिटी फंक्शन आपके आधार डिटेल को सुरक्षित रखता है। साथ ही प्रोटेक्शन की एक एडिशनल लेयर देता है। mAadhaar ऐप से आधार बायोमेट्रिक्स कैसे करें लॉक     सबसे पहले Google Play Store या Apple ऐप स्टोर से mAadhaar ऐप डाउनलोड करें।     इसके बाद ऐप पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।     फिर ‘my aadhaar’ आइकन पर क्लिक करें।     अपना आधार नंबर, कैप्चा कोड दर्ज करें और OTP वेरिफिकेशन पूरा करें।     अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करने के लिए ‘बायोमेट्रिक लॉक’ ऑप्शन चुनें।     एक बार चालू होने पर, यह फीचर आपके फिंगरप्रिंट, आईरिस और फेस डेटा को गैरजरूरी एक्सेस से बचाता है। SMS से बायोमेट्रिक्सकैसे करें लॉक अगर आप अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करना चाहते हैं, लेकिन आपके पास इंटरनेट एक्सेस नहीं है, तो आप SMS की मदद से आसानी से बायोमेट्रिक लॉक कर सकते हैं।     अपने आधार से लिंक मोबाइल नंबर से 1947 पर एक [GETOTP (space) aadhaar Last 4 digits] मैसेज भेजें।     फिर SMS से ओटीपी वेरिफाई करें।     अगर आपका फोन नंबर कई आधार नंबर से लिंक है, तो लास्ट 4 की जगह आखिरी 8 अंकों का यूज करें।     इस तरह आपका बायोमेट्रिक्स लॉक हो जाएगा।

हाई कोर्ट बोला- स्कूल शिक्षा विभाग निजी स्कूलों में नहीं लेगा 5वीं और 8वीं की परीक्षा

रायपुर स्कूल शिक्षा विभाग को हाई कोर्ट से झटका लगा है. विभाग के आदेश को दरकिनार करते हुए पांचवी एवं आठवीं की केंद्रीयकृत परीक्षाओं से निजी स्कूलों को अलग कर दिया है. हाई कोर्ट जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने यह फैसला छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के साथ अन्य दो याचिकाओं पर दिया है. वक़ील शरद मिश्रा ने बताया कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग निजी स्कूलों में पांचवी एवं आठवीं की परीक्षाएं नहीं लेगा. हमेशा की तरह निजी स्कूल ही परीक्षा आयोजित करेंगे. इसके अलावा जो निजी स्कूल केंद्रीयकृत परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं, वे शामिल हो सकते हैं. दरअसल, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से मान्यता प्राप्त स्कूलों में इसी सत्र से 5वीं और 8वीं की परीक्षा लेने का शिक्षा विभाग का आदेश के खिलाफ निजी स्कूल के साथ अभिभावकों ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई थी. मामले में निजी स्कूल एसोसिएशन का कहना था कि उन्होंने पहले ही शिक्षा विभाग को लिखकर दिया था कि वो सीजी समग्र एवं मूल्यांकन पैटर्न पर बच्चों को पढ़ा रहे हैं. अब तक इन कक्षाओं के होम एग्जाम हुआ करते थे, लेकिन सत्र के आखिर में पांचवीं और आठवीं की परीक्षा आयोजित करने की बात कही गई थी, जिसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है. बता दें कि 2010-11 में कक्षा पांचवी, आठवीं की बोर्ड परीक्षा को समाप्त किया गया था. लेकिन बोर्ड परीक्षा बंद करने से विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर को देखते हुए फिर से केंद्रीयकृत परीक्षा लेने का फैसला लिया गया था. इस संबंध में प्रदेश सरकार के फैसले के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने 3 दिसंबर 2024 को कक्षा 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षा लेने सभी कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश जारी किया था.

मध्यप्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र 2025-26 की शुरुआत 1 अप्रैल से होगी

भोपाल मध्यप्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र 2025-26 (academic session 2025-26) की शुरुआत 1 अप्रैल से होगी। इस अवसर पर सभी हायर सेकंडरी और हाईस्कूलों में प्रवेशोत्सव मनाया जाएगा। स्कूलों को सजाया जाएगा और छात्रों के स्वागत के लिए बाल सभा का आयोजन होगा। शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि 25 मार्च तक कक्षाओं में नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। 10 मार्च को प्राचार्यों की बैठक जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) डी.डी रजक ने बताया कि 10 मार्च को प्राचार्यों की बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें नए सत्र की गतिविधियों को समय पर संचालित करने और कक्षा 8 से 11 तक के परीक्षा परिणाम 20 मार्च तक घोषित करने के निर्देश दिए जाएंगे। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों को विशेष प्रयास करने होंगे। गणित, हिंदी और अंग्रेजी पर स्पेशल फोकस शैक्षणिक कैलेंडर academic session 2025-26 calendar) के अनुसार, कक्षा 9 और 10 के छात्रों को गणित, हिंदी और अंग्रेजी विषयों का स्पेशल अभ्यास कराया जाएगा। गणित में गुणा, भाग, भिन्न और ज्यामिति से जुड़े प्रश्नों का अभ्यास होगा। हिंदी में श्रुतलेख, मात्रा की त्रुटियों में सुधार कराया जाएगा, जबकि अंग्रेजी में शब्दकोष (dictionary) से शब्द, अपठित गद्यांश (unread passages) और व्याकरण पर ध्यान दिया जाएगा। छात्रों की सुविधाओं का ध्यान शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि पात्र विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक, छात्रवृत्ति, साइकिल आदि सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। ये सभी सुविधाएं पोर्टल पर अपडेशन के बाद प्रदान की जाएंगी। साथ ही, उन छात्रों की पहचान कर स्कूल वापस लाने के प्रयास किए जाएंगे, जो पिछले दो सालों से पढ़ाई से दूर हैं। प्रत्येक शिक्षक को ऐसे 10 छात्रों की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिनका भौतिक सत्यापन 10 अप्रैल तक पूरा किया जाना है। पेरेंट्स की बैठक 17 मार्च को शाला प्रबंध समिति और पेरेंट्स की बैठक 17 मार्च को आयोजित की जाएगी। इसमें प्रत्येक विद्यार्थी के माता-पिता को बुलाकर उनके बच्चे की प्रगति पर चर्चा की जाएगी। राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने कहा कि सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएंगी ताकि नए सत्र की शुरुआत सुचारू रूप से हो सके।

MP के खेतों में अभी गेहूं की फसल हरी, दाना परिपक्व नहीं, तापमान बढ़ने पर समय से पहले पकने की आशंका

भोपाल  मौसम का सबसे बड़ा ग्राहक किसान होता है। मौसम जब मौज में होता है, तो किसानों का मन प्रफुल्लित हो उठता है। मौसम का मिजाज बिगड़ने का सीधा प्रभाव भी सबसे पहले किसान पर ही होता है। मौसम विभाग ने मार्च में ही लू जैसे हालात बनने की चेतावनी दी है। आशंका है कि अगर मार्च में ही इतनी गर्मी बढ़ी तो गेहूं की फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है। इससे गेहूं का उत्पादन 15 से 20 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। फसलों की कटाई अब होगी शुरू जिले में रबी फसलों की कटाई का दौर मार्च माह में शुरू होगा। इसके तहत 10 से 15 मार्च के बीच फसलों की कटाई प्रारंभ होगी, जो 15 अप्रेल तक चलेगी। हालांकि अगेती फसलों की कटाई इस माह के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। गेहूं का दाना छोटा रहने पर समर्थन मूल्य पर खरीद में परेशानी होती है। पिछले साल भी काश्तकारों को इसी परेशानी का सामना करना पड़ा था। उत्पादन में पडेगा फर्क, जल्दी पक जाएगी फसल तापमान में बढ़ोतरी के कारण गेहूं और जौ की फसल में फर्क पड़ेगा। दाना तो बन जाएगा, लेकिन जल्दी पक जाएगा। इससे उत्पादन में 5-7 प्रतिशत घट सकता है। इसके अलावा अन्य फसलों में कुछ फर्क नहीं पड़ेगा। अच्छी पैदावार की उम्मीदों पर फिर सकता है पानी     भोपाल के ग्राम सलैया निवासी कामता पाटीदार ने बताया कि उन्होंने विदिशा जिले के ग्राम दुलई में अपनी 50 एकड़ जमीन में गेहूं की बोवनी की है। धान की फसल लेने के कारण बोवनी जनवरी में हो सकी थी। अभी खेत में गेहूं की हरी फसल खड़ी है। अब बढ़ती धूप देखकर फसल के जल्दी पकने की आशंका है।     खजूरीकला के किसान मिश्रीलाल राजपूत ने बताया कि जनवरी में ठीक ठाक ठंड पड़ने के कारण इस बार गेहूं की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन हरी फसल के दौरान धूप के तीखे तेवर देखकर अरमानों पर पानी फिरता दिख रहा है।     मध्य प्रदेश के किसानों ने वर्ष 2024-25 के रबी सीजन में 138.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसल लगाई है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा गेहूं का है। सामान्य मौसम में सरकारी एजेंसियों ने इस साल 80 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया है। नहीं हो पाता है दानों का पूरा विकास बढ़ते तापमान से गेहूं की बढ़वार रुक जाती है. फसल की लंबाई कम होती है और यह जल्दी पक जाती है. गेहूं में बालियां लगने के बाद दाना भरने के लिए कुछ समय चाहिए होता है. मौसम परिवर्तन के कारण तेज हवा चलती है और तापमान बढ़ जाता है, तो पुष्पन क्रिया शीघ्र हो जाती है. गेहूं की बालियों में दाने नहीं भर पाते हैं. दानों को मजबूती नहीं मिल पाती है, क्योंकि तापमान में तेजी से वृद्धि के कारण दानों का पूरा विकास नहीं हो पाता है और समय से पहले ही दाने परिपक्व हो जाते हैं. दाना कमजोर पड़ जाता है. इससे गेहूं की गुणवत्ता और उपज दोनों पर असर पड़ता है. गेहूं की फसल में ये काम करें गेहूं और जौ की फसलों को बढ़ते तापमान प्रभाव से बचाने के लिए दाना भराव और दाना निर्माण की अवस्था पर सीलिसिक अम्ल 15 ग्राम प्रति 100 लीटर का फॉलियर स्प्रे करना चाहिए. सीलिसिक अम्ल का पहला छिड़काव बलियां निकलते समय और दूसरा छिड़काव दूधिया अवस्था पर करने से काफी लाभ मिलेगा. सीलिसिक अम्ल गेहूं को प्रतिकूल परिस्थितियों में लड़ने की शक्ति प्रदान करता है और निर्धारित समय पूर्व पकने में मदद करता है. इससे उपज में गिरावट नहीं होती है. गेहूं और जौ की फसल में जरूरत के अनुसार, बार-बार हल्की सिंचाई करनी चाहिए. इसके अलावा, 0.2 प्रतिशत म्यूरेट ऑफ पोटाश या 0.2 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट का 15 दिनों के अंतराल पर दो बार छिड़काव किया जा सकता है. तापमान से नुकसान से बचने के उपाय गेहूं और जौ की फसलों में बाली आने पर एस्कॉर्बिक अम्ल के 10 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी का घोल छिड़काव करने से अधिक तापमान होने पर भी नुकसान नहीं होगा. गेहूं की पछेती बोई फसल में पोटेशियम नाइट्रेट 13:0:45, चिलेटेड जिंक, चिलेटेड मैंगनीज का छिड़काव भी फायदेमंद होता है. वातावरण में बदलाव के कारण गेहूं की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप दिखाई दे रहा है तो इसके नियंत्रण के लिए किसानों को प्रोपिकोनाजोल की एक मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी के घोल को दो बार 10 से 12 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए. दाना पतला पड़ने से पैदावार प्रभावित होगी     मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में किसानों का रुझान धान की खेती की तरफ बढ़ा है। धान की कटाई दिसंबर तक होने के कारण गेहूं की बोवनी भी देरी से हो पाती है। इस वजह से अभी गेहूं की फसल हरी है। यह समय दाना के परिपक्व होने का है। तापमान बढ़ने के कारण फसल जल्दी पकने लगेगी। इससे गेहूं का दाना पतला रह जाएगा। इससे गेहूं के उत्पादन में भी 15 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट होने की संभावना है। – डॉ. जीएस कौशल, पूर्व संचालक, कृषि विभाग, भोपाल  

ऊर्जा मंत्री नहीं पहनेंगे प्रेस किए कपड़े, क्यों लिया प्रण? कांग्रेस बोली- ये नौटंकी वेब सीरीज का भाग

Energy Minister will not wear ironed clothes, why did he take the vow? Congress said- this drama is part of a web series मध्य प्रदेश में अपने अनोखे बयानों और अंदाज के लिए सुर्खियों में रहने वाले ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर एक बार फिर चर्चाओं में हैं। इस बार उन्होंने ऐसा अनोखा प्रण लिया है, जिसकी चर्चा हर कोई कर रहा है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने प्रण लिया है कि वे 1 साल तक बिना प्रेस किए हुए कपड़े पहनेंगे। उनके इस बयान को लेकर अब सियासत गरमा गई है। कांग्रेस इसे मंत्री की नौटंकी वेब सीरीज का अगला भाग बताया है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि वे एक साल तक बिना प्रेस किए हुए कपड़े पहनेंगे, जिससे रोज आधा यूनिट बिजली बचेगी। उन्होंने कहा कि अब वे बेटी की शादी के दिन ही प्रेस किए हुए कपड़े पहनेंगे। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को पीठ पर सिलेंडर न लादना पड़े, इसलिए यह निर्णय लिया। कांग्रेस ने बताया नौटंकीऊर्जा मंत्री के इस बयान पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे मंत्री की नौटंकी करार दिया है। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष आरपी सिंह ने कहा कि ऊर्जा मंत्री हमेशा सुर्खियों में रहने के लिए नौटंकी करते हैं और यह उनकी वेब सीरीज का अगला पार्ट है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर मंत्री जी को बिजली बचाने की इतनी चिंता है, तो वे अपनी 10-10 गाड़ियों को छोड़कर साइकिल से चलना शुरू करें, जिससे वायु प्रदूषण भी कम होगा। क्या वास्तव में बिजली बचेगी?ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर के इस फैसले से मध्य प्रदेश में कितनी बिजली बचेगी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल यह बयान उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ले आया है।

मध्यप्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में RTE के तहत पढ़ रहे बच्चों को कक्षा 12वीं तक मुफ्त शिक्षा का लाभ मिलने की संभावना

भोपाल  मध्यप्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत पढ़ रहे बच्चों को कक्षा 12वीं तक मुफ्त शिक्षा का लाभ मिलने की संभावना है. अभी शिक्षा का अधिकार कानून के तहत कक्षा 8 वीं तक ही बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है. अब बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मुख्यमंत्री के सामने प्रदेश में इसका दायरा 12 वीं तक किए जाने और परिवार के साथ पलायन करने वाले आदिवासी बच्चों को दूसरे जिलों में शिक्षा का लाभ दिलाने की व्यवस्था शुरू करने की मांग की है. इस मामले में मुख्यमंत्री ने कहा “कार्यक्रम में मंत्री मौजूद हैं, वह इन विषयों को गंभीरता से समझेंगी.” कार्यशाला में मुख्यमंत्री के सामने रखी मांग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अनिनियम, पॉस्को को लेकर आयाजित कार्यशाला के शुभारंभ में पहुंचे. कार्यक्रम में मंत्री निर्मला भूरिया भी मौजूद थीं. इसी कार्यक्रम में बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष देवेन्द्र मोरे ने सरकार से मांग की “नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिनियम के तहत बच्चों को अभी कक्षा 8 वीं तक लाभ दिया जाता है, लेकिन इसके दायरे को बढाकर कक्षा 12 वीं तक किया जाना चाहिए. इससे कक्षा 8 वीं के बाद बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं होना पड़ेगा. प्रदेश में अभी 15 लाख बच्चे आरटीई से लाभान्वित हो रहे हैं. प्रदेश में इस 84 हजार से ज्यादा बच्चे 8 वीं क्लास में पढ़ रहे हैं. हालांकि यह विषय केन्द्र का है, लेकिन राज्य सरकार इसे अमल में लाकर नवाचार कर सकती है.” आदिवासी इलाकों के बच्चों के लिए भी मांग बाल संरक्षण आयोग का कहना है “इसके अलावा मध्यप्रदेश के 89 ब्लॉक ट्राइबल के हैं. ट्राइबल बच्चों के बच्चे मजबूरी के चलते परिवार के साथ पलायन करते हैं. सरकार को पलायन के बाद दूसरे जिले या प्रदेश में पहुंचने पर बच्चे को शिक्षा का लाभ मिल सके, इसकी व्यवस्था की जाए. हालांकि पिछले साल राज्य शिक्षा केन्द्र ने मध्यप्रदेश से गुजरात पहुंचने आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के लिए गुजरात 12 हजार किताबों के सेट पहुंचाए थे.” मुख्यमंत्री ने विभागीय मंत्री पर छोड़ा मामला कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा “2018 से 2024 के बीच मध्यप्रदेश में महिला एवं बाल अपराध के मामले में 48 प्रकरण में मृत्युदंड दिया गया है. राज्य सरकार हमेशा ऐसे मामलों को लेकर बेहद सख्त है. जिस समाज में यदि बच्चे, बच्चियां, महिलाएं सुरक्षित हैं, तभी देश का भविष्य है. ऐसे अपराधों से निपटने के लिए सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है. समाज भी अपनी जिम्मेदारी निभाए.” मुख्यमंत्री ने बाल अधिकार आयोग की मांग को लेकर कहा “जो मुद्दा आपने उठाया है, उस क्षेत्र की मंत्री निर्मला भूरिया कार्यक्रम में मेरे जाने के बाद भी मौजूद रहेंगी, वह इसे और अच्छे से समझेंगी.”

मध्यप्रदेश को वुल्फ स्टेट का दर्जा दिलाने में नौरादेही का अहम योगदान, यहां पर भेड़ियों पर रिसर्च भी चल रही

सागर  देश में सबसे ज्यादा भेड़िये मध्यप्रदेश में है. खास बात ये है कि मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) भारतीय भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के तौर पर जाना जाता है. मध्यप्रदेश को वुल्फ स्टेट का दर्जा दिलाने में नौरादेही का अहम योगदान है. खास बात ये है कि यहां पर भेड़ियों पर रिसर्च भी चल रही है. जबलपुर स्थित स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (SFRI) पर रिसर्च कर रही है. तीन भेड़ियों पर होगी रिसर्च 2023 में शुरू हुआ ये प्रोजेक्ट दो साल के लिए है. इसी कड़ी में नौरादेही टाइगर रिजर्व ने यहां के भेड़ियों पर रिसर्च के लिए तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाने की अनुमति एनटीसीए (National Tiger Conservation Authority) से मांगी है. अनुमति मिलते ही नौरादेही टाइगर रिजर्व के तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाया जाएगा और रिसर्च को आगे बढ़ाया जाएगा. इस रिसर्च का उद्देश्य बाघ और तेंदुए जैसे जानवरों के बीच भेड़ियों का जीवन, उनका पसंदीदा खान पान, रहवास और उनकी दिनचर्या के बारे में जानना है. नौरादेही भारतीय भेड़िये और ग्रे वुल्फ का प्राकृतिक आवास नौरादेही को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिले फिलहाल एक साल ही बीता है. अगर नौरादेही की बात करें, तो टाइगर के पहले इसकी पहचान भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के रूप में थी. नौरादेही को 1975 में भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के रूप में अभ्यारण्य का दर्जा दिया गया था. करीब 1197 वर्ग किमी वाले नौरादेही वन्य जीव अभ्यारण्य के लोगो (Logo) में भी ग्रे वुल्फ नजर आता था. नौरादेही टाइगर रिजर्व में भेड़ियों पर रिसर्च देशभर में 2022 में भेड़ियों की गणना करायी गयी थी. जिसमें सबसे ज्यादा भेड़ियों के साथ मध्यप्रदेश को पहला स्थान मिला था. मध्‍य प्रदेश में 772, राजस्‍थान में 532 और गुजरात में 494 भेड़िए पाए गए थे. इसके अलावा अन्य राज्यों में इनकी संख्या काफी कम थी. भारतीय वन्य जीव संस्थान द्वारा की गयी इस गणना में भारत में कुल 3170 भेड़िए पाए गए थे. जिनमें से करीब 20 प्रतिशत मध्य प्रदेश में ही थे. भेड़ियों पर दो साल की रिसर्च नौरादेही में राज्य वन अनुसंधान संस्थान द्वारा फरवरी 2024 में भारतीय भेड़ियों पर रिसर्च नौरादेही टाइगर रिजर्व में शुरू की गयी थी. जानकार बताते हैं कि, ”मध्यप्रदेश में ग्रे वुल्फ का सबसे बड़ा आवास नौरादेही टाइगर रिजर्व है. यहां पर भेड़िए आसानी से देखे जा सकते हैं. यहां बाघों की संख्या बढ़ने के बाद ये रिसर्च शुरू की गयी. जिसका एक उद्देश्य ये भी है कि बाघों के यहां आने के बाद इनके रहन-सहन,जीवन, खान पान पर क्या असर हुआ है.” तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाने की मांगी अनुमति नौरादेही टाइगर रिजर्व में चल रही रिसर्च के लिए तीन भेड़ियों को पहली बार रेडियो काॅलर पहनाने की अनुमति एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) से मांगी गयी है. अनुमति मिलते ही तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाया जाएगा. एसएफआरआई के शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने तय किया है कि नौरादेही में भेड़िए झुंड में रहते हैं. अलग-अलग झुंड वाले तीन भेड़ियों का चयन करके रेडियो काॅलर पहनाया जाएगा. रेडियो काॅलर पहनाने के बाद उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी. इस शोध से टाइगर रिजर्व के मैनेजमेंट में मिलेगी मदद नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. एए अंसारी बताते हैं कि, ”मध्य प्रदेश शासन के आदेश पर SFRI (State Forest Research Institute) ने भेड़ियों के अध्ययन के लिए शोध परियोजना स्वीकृत की. दो वर्ष में होने वाले इस अध्ययन के तहत तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाकर मॉनीटरिंग की जानी है. इसका उद्देश्य नौरादेही का जो एरिया है, इसमें भेड़ियों के व्यवहार पर अध्ययन किया जाए. कैसे वह शिकार करता है, शिकार में क्या पसंद है, कब और कितने दिन में शिकार करता है. इनके रहवास, ये किस तरह झुंड में रहते हैं और कैसी इनकी दिनचर्या है. इन सबका अध्ययन करने के लिए रेडियो काॅलर पहनाया जाएगा.” ”इससे हमें ये फायदा होगा कि नौरादेही टाइगर रिजर्व का मैनेजमेंट करने में हमे मदद मिलेगी. इसलिए तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाने की अनुमति मांगी गयी है. अनुमति मिलते ही एसएफआरआई और टाइगर रिजर्व प्रबंधन ये काम करेगा. मध्यप्रदेश में पहली बार भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाया जा रहा है.”

रेल मंत्री ने IRCTC, IRFC को मिला नवरत्न दर्जा मिलने पर दी बधाई

नई दिल्ली सरकार ने भारतीय रेलवे कैटरिंग और टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) और भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC) को नवरत्न कंपनियों के रूप में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा सार्वजनिक उद्यम विभाग (Department of Public Enterprises) ने अपने X पोस्ट के माध्यम से की। पोस्ट में कहा गया कि IRCTC 25वीं और IRFC 26वीं नवरत्न कंपनी बनी है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने IRCTC और IRFC की टीम को नवरत्न दर्जा प्राप्त करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी 7 सूचीबद्ध रेलवे पीएसयू अब नवरत्न का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं, और यह उपलब्धि 2014 के बाद संभव हुई है। सभी 7 सूचीबद्ध रेलवे पीएसयू जो नवरत्न बने: CONCOR: जुलाई 2014 RVNL: मई 2023 IRCON और RITES: अक्टूबर 2023 RailTel: अगस्त 2024 अब IRCTC और IRFC रेल मंत्री ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में रेलवे के संपूर्ण परिवर्तन और विकास पर केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस अवसर पर उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री का भी आभार व्यक्त किया। IRCTC: रेलवे की नवरत्न कंपनी IRCTC, जो रेल मंत्रालय का केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (CPSE) है, ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में ₹4,270.18 करोड़ का वार्षिक टर्नओवर, ₹1,111.26 करोड़ का शुद्ध लाभ (PAT), और ₹3,229.97 करोड़ की शुद्ध संपत्ति हासिल की। IRCTC को नवरत्न का दर्जा तब मिला है जब कंपनी 2025 में अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रही है। यह कंपनी की कैटरिंग, पर्यटन और ऑनलाइन टिकटिंग सेवाओं में उत्कृष्टता को दर्शाता है। नवरत्न दर्जा मिलने से अब IRCTC अपने यात्रा, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में विस्तार कर सकेगी और अपनी सेवाओं को और बेहतर बना सकेगी।   IRFC: रेलवे वित्त का मजबूत आधार भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC), जो रेल मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख वित्तीय संस्थान है, को भारत सरकार द्वारा नवरत्न का दर्जा प्रदान किया गया है। यह दर्जा IRFC की मजबूत वित्तीय स्थिति और रेलवे अवसंरचना के वित्तपोषण में इसके योगदान को मान्यता देता है। IRFC की स्थापना 12 दिसंबर 1986 को 100% सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी के रूप में हुई थी। यह भारतीय रेलवे के विस्तार और आधुनिकीकरण के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में IRFC का राजस्व ₹26,644 करोड़ और शुद्ध लाभ (PAT) ₹6,412 करोड़ रहा, जबकि इसकी शुद्ध संपत्ति ₹49,178 करोड़ तक पहुंच गई। आज, IRFC भारत की तीसरी सबसे बड़ी सरकारी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) बन चुकी है। नवरत्न दर्जे के लाभ नवरत्न पीएसयू (PSU) को कई विशेष अधिकार और स्वायत्तता मिलती है, जिनमें शामिल हैं: 1. वित्तीय स्वायत्तता सरकार की अनुमति के बिना संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures), सहायक कंपनियां (Subsidiaries) बनाने और विलय या अधिग्रहण करने की शक्ति। 2. परिचालन स्वतंत्रता स्वतंत्र व्यावसायिक और निवेश निर्णय लेने की क्षमता, जिससे निजी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में आसानी होती है। एचआर प्रबंधन में लचीलापन, जिससे कंपनी बाजार दर पर पेशेवरों की भर्ती कर सकती है। 3. वैश्विक विस्तार की संभावना अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश कर सकती हैं, रणनीतिक गठबंधन कर सकती हैं और ग्लोबल स्तर पर विस्तार कर सकती हैं। 4. बेहतर बाजार स्थिति वित्तीय रूप से स्थिर कंपनियों के रूप में निवेशकों का अधिक विश्वास प्राप्त होता है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के कारण शेयरधारकों को अधिक लाभ प्रदान कर सकती हैं।   IRCTC और IRFC को नवरत्न दर्जा मिलने से रेलवे क्षेत्र में बड़े वित्तीय और परिचालन सुधारों की संभावनाएं बढ़ेंगी। यह भारतीय रेलवे के आर्थिक और व्यावसायिक विकास में एक बड़ा कदम है और इससे रेलवे को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थान मिलेगा।

कूनो की रानी कहलाने वाली मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावक पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण बने हुए

श्योपुर मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में विदेशी और भारतीय चीते अब न केवल जंगल में दौड़ते नजर आ रहे हैं, बल्कि पर्यटकों को भी खुली आंखों से दिखाई दे रहे हैं. वर्तमान में कूनो के खुले जंगल में 12 चीते स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं, जिससे पार्क में आने वाले पर्यटकों को इनका लगातार दीदार हो रहा है. चीतों की मौजूदगी से न सिर्फ पर्यटकों का रोमांच बढ़ रहा है, बल्कि उनकी संख्या में भी इजाफा देखा जा रहा है.   कूनो की रानी कहलाने वाली मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावक पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण बने हुए हैं. बीते शुक्रवार को पार्क में आए पर्यटकों का उत्साह उस समय चरम पर पहुँच गया, जब यह चीता परिवार उनके सामने आ गया. कुछ पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों ने अपने मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो कैद किए, जो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं. इन तस्वीरों में ज्वाला और उसके शावकों की जंगल में चहलकदमी और मस्ती साफ दिखाई दे रही है. यह चीता परिवार अहेरा पर्यटन जोन में घूम रहा है, जो खुले जंगल में रिलीज किए गए 12 चीतों का हिस्सा है. पर्यटकों का अनुभव कूनो में चीतों को देखने आए निवेश यादव ने बताया, “हमारा अनुभव बेहद शानदार रहा. कूनो नेशनल पार्क का जंगल बहुत अच्छा है. हमें मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावकों को देखने का मौका मिला. निजी सफारी संचालक आदर्श गुप्ता के साथ हमने पाँच चीतों को देखा और उनके फोटो-वीडियो भी बनाए. पिछले दो साल से हम चीतों का दीदार करने को उत्सुक थे, आज हमारा इंतजार पूरा हुआ.” पर्यटकों का कहना है कि चीतों को इतने करीब से देखना उनके लिए एक यादगार पल रहा. कूनो में चीतों की स्थिति कूनो नेशनल पार्क में वर्तमान में कुल 26 चीते हैं. इनमें से 12 चीते खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से घूम रहे हैं और अपना शिकार कर रहे हैं, जबकि शेष 14 चीते अभी बड़े बाड़ों में रखे गए हैं. पार्क के अधिकारियों का कहना है कि चीतों की बढ़ती संख्या और उनकी जंगल में मौजूदगी से पर्यटन को नई गति मिल रही है. पर्यटन को बढ़ावा चीतों के आने से कूनो नेशनल पार्क में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है. ज्वाला और उसके शावकों की मौजूदगी ने पार्क को वन्यजीव प्रेमियों के बीच और आकर्षक बना दिया है. यह प्रोजेक्ट न केवल चीतों की संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा दे रहा है.  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार नई पर्यटन फिल्म पॉलिसी नीति से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में फिल्म मेकिंग और सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए नई पर्यटन फिल्म नीति (mp tourism film policy) की घोषणा की है। इस नीति के तहत अब मध्य प्रदेश में फिल्म, वेब सीरीज, टीवी शो आदि की शूटिंग के लिए निर्माताओं को अधिक अनुदान (Grant Amount) दिया जाएगा। सीएम मोहन यादव के मुताबिक, इस नीति से राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इतना ही नहीं, इस नीति से राज्य के पर्यटन को भी फायदा होगा। इससे स्थानीय भाषाओं और संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा। आपको बता दें कि तेलुगु इंडस्ट्री पहले ही फिल्म शूटिंग के लिए मध्य प्रदेश को टारगेट कर चुकी है। फिल्म निर्माण के लिए अनुदान में बढ़ोतरी नई नीति के तहत विभिन्न श्रेणियों की फिल्मों और वेब सीरीज के निर्माण पर सरकार आर्थिक सहायता (Grant Amount) देगी:     फीचर फिल्म: ₹5 करोड़ तक     वेब सीरीज: ₹2 करोड़ तक     टीवी सीरियल: ₹5 करोड़ तक     डॉक्यूमेंट्री फिल्म: ₹50 लाख तक     अंतर्राष्ट्रीय फिल्म: ₹12 करोड़ तक     शॉर्ट फिल्म: ₹20 लाख तक स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता सरकार ने मालवी, बुंदेली, निमाड़ी, बघेली और भीली भाषाओं में बनने वाली फिल्मों को 15% अतिरिक्त अनुदान देने का प्रावधान किया है। इसके अलावा, महिलाओं और बच्चों पर केंद्रित फिल्मों को भी 15% अधिक अनुदान मिलेगा, जिससे सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा सके। पिछले प्रोजेक्ट्स को भी मिला लाभ नई नीति की घोषणा से पहले ही सरकार ने 15 हिंदी फिल्मों, 2 तेलुगु फिल्मों और 6 वेब सीरीज को 30 करोड़ रूपए से अधिक का अनुदान दिया है। इनमें शामिल प्रमुख प्रोजेक्ट स्त्री-1 और स्त्री-2 , भूल-भुलैया-3, लापता लेडीज, द रेलवे मैन, पंचायत, कोटा फैक्ट्री, गुल्लक और सिटाडेल हैं। सीएम का विजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य मध्य प्रदेश को फिल्म निर्माण का केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा कि ‘हमारी कोशिश है कि प्रदेश की खूबसूरत लोकेशंस का फायदा फिल्म उद्योग को मिले और स्थानीय कलाकारों व तकनीशियनों को रोजगार के नए अवसर मिलें।’

दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए :CM यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की समृद्ध कृषि परंपरा और सतत विकास की नीति अब वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में निवेशकों ने कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और दुग्ध उत्पादन क्षेत्र में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे प्रदेश की हरित और श्वेत क्रांति के लिए मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि जीआईएस भोपाल में प्राप्त निवेश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भारत को वैश्विक “फूड बास्केट” बनाने के संकल्प को साकार करने में मध्यप्रदेश अहम भूमिका निभाएगा। जैविक खेती में अग्रणी मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश पहले ही देश का सबसे बड़ा जैविक खेती वाला राज्य बन चुका है। देश की कुल जैविक खेती में 40% योगदान देने वाले राज्य ने अब इस क्षेत्र का विस्तार कर 17 लाख हेक्टेयर से 20 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। सरकार किसानों को निःशुल्क सोलर पंप उपलब्ध करा रही है ताकि वे पर्यावरण अनुकूल तरीकों से उत्पादन कर सकें। राज्य में उद्यानिकी क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बीते वर्षों में बागवानी फसलों का रकबा27 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 32 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इससे राज्य के फल-सब्जी उत्पादकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। मध्यप्रदेश बनेगा दुग्ध उत्पादन का हब प्रदेश दूध उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। वर्तमान में देश के कुल दुग्ध उत्पादन में 9% योगदान देने वाला मध्यप्रदेश अब इसे 20% तक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सांची ब्रांड ने राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना ली है। प्रदेश में वर्तमान में प्रतिदिन 591 लाख किलो दूध का उत्पादन हो रहा है। इससे प्रदेश देश में तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य बन गया है।  नवाचार और खाद्य प्र-संस्करण में निवेश की बाढ़ जीआईएस-भोपाल में “सीड-टु-शेल्फ” थीम पर केंद्रित एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें निवेशकों ने प्रदेश की अपार संभावनाओं को पहचाना। राज्य में 8 फूड पार्क, 2 मेगा फूड पार्क, 5 एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टरऔर एक लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्र-संस्करण योजना के तहत 930 करोड़ रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। यहां 70 से अधिक बड़ी औद्योगिक इकाइयां और 3,800 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयाँ पहले ही सक्रिय हैं। इनके जरिए कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। सिंचाई परियोजनाओं से होगा कृषि क्षेत्र का विस्तार प्रदेश में सिंचित रकबा तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2003 में केवल 3 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित थी, जो अब 50 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक इसे 1 करोड़ हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। नर्मदा, चंबल, ताप्ती, बेतवा, सोन, क्षिप्रा, कालीसिंध और तवा जैसी सदानीरा नदियों पर बनी सिंचाई परियोजनाओं से यह लक्ष्य संभव हो सकेगा। जीआईएस-भोपाल से रोजगार के नए अवसर जीआईएस-भोपाल में खाद्य प्र-संस्करण क्षेत्र में आये 4,000 करोड़ रुपये के निवेश से प्रदेश में 8,000 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के बढ़ने से किसान सीधे अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकेंगे, जिससे राज्य की आर्थिक मजबूती को और बढ़ावा मिलेगा। जीआईएस-भोपाल में हरित और श्वेत क्रांति को लेकर मिले निवेश प्रस्तावों ने मध्यप्रदेश को देश का “फूड बास्केट” बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाने का अवसर दिया है। कृषि, जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण और दुग्ध उत्पादन में हुए ये निवेश प्रदेश के विकास की नई इबारत लिखने को तैयार हैं।  

रमजान में भोपाल में सिर्फ भाईजान की दुकान से सामान खरीदे, वायरल मैसेज से गर्माया सियासी पारा

भोपाल मध्य प्रदेश में रमजान का पवित्र महीना शुरू होते ही सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है, जिसमें मुस्लिम समुदाय से सिर्फ मुस्लिम दुकानदारों से सामान खरीदने की अपील की जा रही है. इस मैसेज ने सूबे की सियासत को गरमा दिया है. हालांकि, मुस्लिम समाज के कई लोगों ने इसे गलत परंपरा करार देते हुए कहा है कि वे ऐसे संदेशों पर ध्यान नहीं देंगे और समाज को बांटने की कोशिशों को नाकाम करेंगे.   रमज़ान की शुरुआत के साथ अगले 30 दिन तक रोज़ेदार अल्लाह की इबादत में जुटे रहेंगे और ईद के साथ इसे पूरा करेंगे. इस बीच, भोपाल में मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए मुस्लिमों से केवल मुस्लिम दुकानदारों से खरीदारी करने का अभियान चलाया जा रहा है. एक ‘X’ यूज़र इबरार अहमद ने लिखा, “अस्सलामुअलैकुम. रमज़ान का मुबारक महीना आ गया है. खरीदारी सोच-समझकर करें, खास तौर पर उनसे जो आपकी खरीदारी से रमज़ान और ईद खुशी से मना सकें.” आजतक की टीम ने भोपाल में कई लोगों से बात की, जिन्होंने ऐसे मैसेज दिखाए लेकिन कहा कि वे इन पर अमल नहीं करेंगे. सियासी बवाल इस मैसेज पर सियासत भी शुरू हो गई है. बीजेपी विधायक और पूर्व प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने तंज कसते हुए कहा, “जब हिंदुओं के कुंभ में मुस्लिमों को दुकान लगाने से रोकने की बात होती है, तो खूब हल्ला मचता है. लेकिन अब ये पार्टियां चुप क्यों हैं?” वहीं, कांग्रेस ने इसे चिंताजनक बताया. MP कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा, “पिछले 10 सालों में माहौल इतना खराब हो गया है कि लोग धर्म के आधार पर खरीदारी की बात कर रहे हैं. यह समाज के लिए खतरनाक है.” पहले भी हुई थी ऐसी अपील पिछले साल दिवाली पर भी हिंदुओं से ‘अपना त्यौहार, अपनों के साथ’ हैशटैग के साथ हिंदू दुकानदारों से खरीदारी की अपील हुई थी. अब रमज़ान में इसी तरह का कैंपेन सामने आने से दोनों पक्षों में बहस छिड़ गई है. बीजेपी इसे विपक्ष की चुप्पी से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बता रही है. भाईचारे पर सवाल त्यौहार आमतौर पर भाईचारे का प्रतीक होते हैं, लेकिन इस तरह के मैसेज से समाज को बांटने की कोशिशें चिंता का विषय बन गई हैं. सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी हरकतों पर लगाम लगाना जरूरी है, वरना सामाजिक तनाव बढ़ सकता है. फिलहाल, यह मामला मध्य प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है.  

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख भागवत आज 4 मार्च को भोपाल में 700 कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण शिविर उद्घाटन करेंगे

भोपाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत आज  भोपाल में रहेंगे। वे विद्या भारती के देशभर से आने वाले 700 से ज्यादा पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं के अभ्यास वर्ग का उद्घाटन करेंगे।दरअसल, इस अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के लगभग 700 कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है. संघ के एक पदाधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण शिविर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित सरस्वती विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय में आयोजित किया जाएगा. संघ के इस पदाधिकारी ने बताया कि आठ मार्च को शिविर के समापन सत्र को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और आरएसएस के विचारक और विद्या भारती के वरिष्ठ सलाहकार सुरेश सोनी भी संबोधित करेंगे. मंत्री विश्वास सारंग ने प्रदर्शनी का किया  उद्घाटन उद्घाटन से एक दिन पहले यानी सोमवार 3 मार्च को मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री विश्वास सारंग और अन्य गणमान्य व्यक्ति सोमवार को उसी स्थान पर भारत के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य की झलक पेश करने वाली एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया . उन्होंने बताया कि पूरे प्रशिक्षण शिविर के दौरान आरएसएस के संयुक्त महासचिव कृष्ण गोपाल मौजूद रहेंगे. केरवा डैम रोड स्थित शारदा विहार में 5 दिन चलने वाले अभ्यास वर्ग में एनसीईआरटी, सीबीएसई डायरेक्टर, भाषा भारती अध्यक्ष सहित शिक्षा के क्षेत्र से जुडे़ अधिकारी और विशेषज्ञ सत्रों में शामिल होंगे। कार्यकर्ता पिछले 3 महीनों से इस अभ्यास वर्ग के लिए तैयारियां कर रहे थे। संघ के अनुसार, आरएसएस से संबद्ध विद्या भारती, एक गैर-सरकारी शैक्षणिक संगठन है, जो 1952 से देश में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है. तब उसने गोरखपुर में अपना पहला स्कूल स्थापित किया था. इस वक्त विद्या भारती देश भर में 22,000 स्कूल चलाती है. इन विद्यालयों में सामूहिक रूप से 1,54,000 शिक्षक और लगभग 36 लाख विद्यार्थी हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक्नोलॉजी पर फोकस राव ने बताया विद्या भारती के करीब 22 हजार औपचारिक और अनौपचारिक विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में शैक्षणिक, प्रबंधन और तमाम कामों को करने वाले 700 से ज्यादा पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को अभ्यास वर्ग में प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के सभी जिलों में एक अच्छा स्किल डेवलपमेंट सेंटर तैयार हो। कल्पना यही है कि स्किलिंग बाय स्कूलिंग यानि शिक्षा के साथ निपुणता की व्यवस्था हो। अपडेटेड नॉलेज से समृद्ध बने। इस दृष्टि से हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक्नोलॉजी में हमारे शिक्षक गण दक्ष हों। हमारे पास 1 लाख 6 हजार आचार्य हैं उनको सशक्त करने के लिए यह अभ्यास वर्ग चला रहे हैं। वर्ग में कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सामाजिक परिवर्तन के प्रयासों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे। जिला स्तर पर देंगे प्रशिक्षण पूर्ण रूप से विद्याभारती के लिए काम करने वाले जिला और उससे ऊपर के कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण वर्ग आयोजित हो रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले नए परिवर्तन पर प्रशिक्षण लेकर यह जिला स्तर पर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देंगे। प्रदर्शनी में भारत की सांस्कृतिक झलक आयोजन स्थल को पर्यावरण-संवेदनशील बनाते हुए पूर्णतः प्लास्टिक मुक्त रखने का संकल्प लिया गया है। भारत के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य की झलक डिजिटल व मैन्युअल प्रदर्शनियों का नियोजन किया जाएगा। ये प्रदर्शनियां भारत की संस्कृति, विज्ञान, शिक्षा और राष्ट्रसेवा के अद्वितीय पहलुओं को प्रस्तुत करेंगी। स्कूल से ओलंपिक तक जाते हैं विद्या भारती के विद्यार्थी विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के महामंत्री अवनीश भटनागर ने बताया कि विद्याभारती के 22 हजार स्कूलों में 35 लाख विद्यार्थी पूरे देश में अध्ययनरत हैं। विद्यालय से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर तक स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया जो भारत के स्कूली खेलों का आयोजन करती है। इसने 29वें राज्य के रूप में विद्या भारती को मान्यता दी। हमारे विद्यार्थी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक खेलने जाते हैं। उसके बाद ओलंपिक तक में सहभागिता करते हैं।

दमोह – सागर जिले की जनता के लिए बड़ी सौगात, फोरलेन हाईवे की मिली मंजूरी, साल के अंत तक निर्माण कार्य आरंभ

 दमोह/ सागर सफर को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए सरकार लगातार सड़क परियोजनाओं पर काम कर रही है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के दमोह और सागर जिले के लोगों के लिए बड़ी सौगात मिलने जा रही है। दमोह-सागर रोड को फोरलेन (Damoh-Sagar Four lane highway) करने की मंजूरी स्टेट लेवल इंपावर्ड कमेटी (एसएलईसी) से मिल चुकी है। अब कैबिनेट की स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी और उम्मीद है कि साल के अंत तक निर्माण कार्य भी आरंभ हो जाएगा। चार बायपास होंगे शामिल दमोह-सागर फोरलेन सड़क परियोजना करीब 2,196 करोड़ रुपए की लागत से पूरी होगी। 76.83 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण के दौरान चार बायपास भी बनाए जाएंगे, जिससे पारसोरिया, गढ़ाकोटा, रोन और बांसा जैसे आवासीय क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और इन क्षेत्रों का विकास भी होगा। परियोजना के प्रमुख बिंदु     सड़क की चौड़ाई 45 मीटर होगी।     वर्तमान में यह सफर दो घंटे में तय होता है, जो फोरलेन बनने के बाद एक घंटा कम हो जाएगा।     सड़क का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर किया जाएगा।     परियोजना का 40% खर्च अग्रिम रूप से एमपीआरडीसी (MPRDC) वहन करेगा, जबकि शेष 60% राशि राज्य सरकार द्वारा 15 वर्षों तक एन्युटी भुगतान के रूप में दी जाएगी। बहेरिया से मारुताल तक होगा निर्माण राज्य सरकार ने इस परियोजना को एसएच-63 (स्टेट हाईवे 63) के अपग्रेडेशन के रूप में मंजूरी दी है। इस सड़क का निर्माण सागर के बहेरिया से लेकर दमोह के मारुताल बायपास तक किया जाएगा। इससे आसपास के गांवों और कस्बों को भी तेज और सुरक्षित परिवहन सुविधा मिलेगी, जिससे क्षेत्र का विकास होगा। कैबिनेट से मंजूरी के बाद शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया एसएलईसी से मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा गया है। मुख्यमंत्री पहले ही इस परियोजना को मंजूरी का संकेत दे चुके हैं। जैसे ही कैबिनेट से स्वीकृति मिलेगी, टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी, जिसे चार महीनों में पूरा करने की योजना है। यदि सब कुछ सुचारू रूप से चलता रहा, तो नवंबर-दिसंबर तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। एमपीआरडीसी सागर के जीएम नितिन वार्वे ने बताया कि ‘सागर-दमोह रोड को फोरलेन किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही टेंडर जारी किया जाएगा। उम्मीद है कि साल के अंत तक निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।’ इस परियोजना से क्या होंगे फायदे?     दमोह और सागर के बीच यात्रा का समय घटेगा।     सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और सफर सुरक्षित होगा।     हाईवे से जुड़े गांवों और कस्बों का आर्थिक विकास होगा।     क्षेत्र में परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी और ट्रैफिक की समस्या दूर होगी।

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