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अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर की कीमत 52-सप्ताह के निचले स्तर पर, 6 महीने पहले शेयर की कीमत थी 1863 रुपये थी

नई दिल्ली  क्या अंबानी, क्या अडानी… शेयर मार्केट की गिरावट ने बड़ी-बड़ी कंपनियों के शेयरों को धराशाई कर दिया है। इनमें कई शेयर ऐसे हैं जो पिछले 6 महीने में निवेशकों का आधे से ज्यादा नुकसान कर चुके हैं। यानी इनकी कीमत पिछले 6 महीने के मुकाबले आधे से ज्यादा गिर गई है। इसी में अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (Adani Green Energy Ltd) का शेयर भी शामिल है। गुरुवार को अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के शेयर में उतार-चढ़ाव रहा। यह तेजी के साथ खुला था, लेकिन बाद में गिरावट आ गई। इससे पहले बुधवार को यह शेयर बढ़त के साथ बंद हुआ था। गुरुवार को दोपहर 2:30 बजे यह शेयर करीब 0.25% की गिरावट के साथ 846.30 रुपये पर था। पिछले 6 महीने की रेकॉर्ड देखें तो इस शेयर ने निवेशकों की रकम आधी से भी कम कर दी है। 6 महीने में 50% से ज्यादा नुकसान इस शेयर में पिछले दो दिनों से बेशक तेजी आई हो, लेकिन पिछले काफी समय से यह शेयर निवेशकों का जबरदस्त नुकसान कर रहा है। पिछले एक महीने में इसमें 15 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। वहीं बात अगर 6 महीने की करें तो इसने निवेशकों की रकम को आधे से भी कम कर दिया है। 6 महीने पहले इसके शेयर की कीमत 1863 रुपये थी। अब करीब 846 रुपये है। ऐसे में इसमें 6 महीने में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। यानी निवेशकों का आधे से ज्यादा नुकसान हो गया है। 5 साल पहले भरी थी झोली इस शेयर ने 5 साल पहले यानी मार्च 2020 में निवेशकों की झोली भर दी थी। 6 मार्च 2020 को इसके शेयर की कीमत करीब 145 रुपये थी। दो साल में भी इसमें गजब की तेजी आ गई थी। 29 अप्रैल 2022 को यह 2883 रुपये पर पहुंच गया था। यानी निवेशकों को इन दो वर्षों में करीब 1888 फीसदी का फायदा हुआ था। अगर किसी ने मार्च 2020 में इसमें एक लाख रुपये निवेश किए होते तो दो साल बाद उनकी कीमत करीब 20 लाख रुपये हो चुकी होती। यानी उन दो वर्षों में अडानी के इस शेयर ने पैसों की बारिश कर दी थी। लेकिन अब स्थिति उलट गई है। क्यों आई गिरावट? अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर में गिरावट का सबसे बड़े कारण हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट और गौतम अडानी पर लगे कथित रिश्वत के आरोप रहे। अडानी पर जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। इससे इसके शेयर में बड़ी गिरावट आई। वहीं पिछले साल अमेरिकी कोर्ट ने आरोप लगाया था कि अडानी ने अधिकारियों को रिश्वत दी थी। रिश्वत के रूप में दी जिस रकम का इस्तेमाल किया गया, वह रकम अमेरिकी निवेशकों ने अडानी ग्रीन एनर्जी कंपनी में निवेश के लिए दी थी। इसके बाद इसमें एक और बड़ी गिरावट देखने को मिली।

बालाघाट कलेक्टर ने कहा यदि किसानों के बैंक खाते आधार से लिंक नहीं हुए, तो उन्हें योजना का लाभ नहीं मिलेगा

बालाघाट  मध्य प्रदेश के बालाघाट कलेक्ट्रेट सभागार में  कलेक्टर मृणाल मीना ने राजस्व अधिकारियों के साथ बैठक कर पीएम किसान सम्मान निधि योजना की समीक्षा की। उन्होंने किसानों के आधार लिंकिंग और पंजीकरण कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यदि किसानों के बैंक खाते आधार से लिंक नहीं हुए, तो उन्हें योजना का लाभ नहीं मिलेगा। बालाघाट शीर्ष पर कलेक्टर मीना ने बताया कि 4 मार्च को बालाघाट जिले में प्रदेश में सबसे अधिक 2929 किसानों के आधार लिंक किए गए। देवास, निवाड़ी और रतलाम जिलों में भी 2000 से अधिक आधार लिंकिंग हुई, लेकिन बालाघाट सबसे आगे रहा। उन्होंने एसडीएम और तहसील अधिकारियों को निर्देशित किया कि अगले दो सप्ताह में आधार लिंकिंग का कार्य पूरी तरह से पूरा हो जाए। बिना आधार लिंकिंग नहीं मिलेगी सम्मान निधि उन्होंने तहसीलदारों को निर्देश दिया कि समस्त पात्र किसानों के आधार बैंक से लिंक कराना सुनिश्चित करें। जिन किसानों के आधार लिंक नहीं हो पा रहे हैं, या जो मृत हो चुके हैं, उनके मामलों को भी विशेष प्राथमिकता दी जाए। आरसीएमएस पोर्टल पर लंबित मामलों की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने आरसीएमएस पोर्टल पर बंटवारे, अविवादित नामांतरण और सीमांकन के लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा की। उन्होंने किरनापुर, बालाघाट और लालबर्रा तहसील में लंबित नामांतरण प्रकरणों को पांच दिनों के भीतर निपटाने के निर्देश दिए। वनग्रामों का राजस्व ग्राम में पुनर्गठन बैठक में वनग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। 41 वनग्रामों के नक्शे एमपीएसईडीसी से प्राप्त हो चुके हैं, जिन्हें 15 दिन के भीतर स्वीकृत किया जाना है। बैठक में एसडीएम गोपाल सोनी, संयुक्त कलेक्टर केसी ठाकुर, राहुल नायक, एसएलआर स्मिता देशमुख सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

चैंपियंस ट्रॉफी में सर्वाधिक रनों का रिकॉर्ड पूर्व दिग्गज क्रिस गेल के नाम, नंबर-1 वन बनने के लिए विराट 46 रनों की जरूरत

दुबई भारत और न्यूजीलैंड के बीच 9 मार्च को चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल खेला जाएगा. मुकाबला दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में है. भारत ने ऑस्ट्रेलिया तो न्यूजीलैंड ने साउथ अफ्रीका को सेमीफाइनल मैच में शिकस्त देकर खिताबी जंग के लिए क्वालीफाई किया. 25 साल बाद इस टूर्नामेंट के फाइनल में ये दोनों टीमें आमने-सामने हैं. स्टार भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली 9 मार्च को अपने लिए एक ऐतिहासिक दिन बना सकते हैं. वह एक वर्ल्ड रिकॉर्ड को नाम करने से कुछ रन दूर हैं. इतिहास रचने की दहलीज पर विराट दरअसल, विराट कोहली न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में चैंपियंस ट्रॉफी इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन सकते हैं. उन्हें इसके लिए सिर्फ 46 रनों की जरूरत है. इतने रन बनाते ही वह क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ देंगे, जो 791 रनों के साथ इस टूर्नामेंट इतिहास के टॉप रन स्कोरर बने हुए हैं. विराट ने अब तक 17 मैचों में 746 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और 6 अर्धशतक शामिल हैं. चैंपियंस ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले 5 बल्लेबाज क्रिस गेल – 791 रन विराट कोहली – 746 रन महेला जयवर्धने – 742 रन शिखर धवन – 701 कुमार संगाकारा – 683 रन ऐसा करने वाले पहले बल्लेबज बन सकते हैं विराट न सिर्फ क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ चैंपियंस ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन सकते हैं, बल्कि उनके पास इस टूर्नामेंट में सबसे पहले 800 रन पूरे करने का मौका भी है. दुनिया का कोई भी बल्लेबाज इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाया है. विराट कोहली पाकिस्तान (नाबाद 100 रन) और ऑस्ट्रेलिया (84 रन) के खिलाफ शानदार लय में नजर आए हैं. उम्मीद है फाइनल में भी उनका यही अंदाज देखने को मिलेगा. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हासिल की बड़ी उपलब्धि 36 साल के कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की. उन्होंने वनडे में रन-चेज में 8000 रन का आंकड़ा पार कर लिया. उन्होंने इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए 159 पारियां लीं, जिससे 50 ओवर फॉर्मेट में लक्ष्य का पीछा करते हुए इतने रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बने गए. लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाने के मामले में सचिन तेंदुलकर पहले स्थान पर हैं. मास्टर ब्लास्टर ने 232 पारियों में 8720 रन बनाए हैं. रोहित शर्मा 6115 रनों के साथ इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर हैं. कोहली रन-चेज के दौरान सबसे तेज 8000 रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं. उन्होंने तेंदुलकर को इस मामले में पीछे छोड़ दिया.

1.21 करोड़ के नोटों से किया भगवान शिव का अद्भुत श्रृंगार

 उज्जैन हर साल महाशिवरात्रि के बाद आयोजित होने वाले मेले में इस बार श्री बुद्धेश्वर महादेव मंदिर का भव्य श्रृंगार किया गया। इस वर्ष भक्तों ने अपनी आस्था का अनोखा परिचय देते हुए 1 करोड़ 21 लाख रुपए के नोटों से मंदिर को सजाया। मंदिर के चारों ओर नोटों की माला, मुकुट और लड़ियां बनाई गईं, जिससे पूरा परिसर अद्भुत प्रकाशमान हो गया। मंदिर की इस अनूठी परंपरा ने क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई और इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आने लगे। यह आयोजन भक्तों की आस्था, प्रेम और समर्पण का प्रतीक बन गया है। परंपरा की शुरुआत     बता दें कि, इस भव्य श्रृंगार की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी, जब मंदिर को पहली बार 7 लाख रुपए के नोटों से सजाया गया था। इसके बाद हर साल भक्तों का योगदान बढ़ता गया। 2022 में यह राशि 11 लाख, 2023 में 21 लाख और 2024 में 51 लाख तक पहुंच गई। इस वर्ष भक्तों के उत्साह को देखते हुए यह रकम 1.21 करोड़ तक पहुंच गई, जिसे अब तक का सबसे बड़ा योगदान माना जा रहा है। फूलों की जगह नोटों से श्रृंगार पहले मंदिर को फूलों से सजाया जाता था, लेकिन श्री बुद्धेश्वर महादेव मित्र मंडली समिति के सदस्यों ने चार साल पहले एक नई परंपरा की नींव रखी। उनका मानना था कि फूल जल्द ही मुरझा जाते हैं, जबकि नोटों से किया गया श्रृंगार अधिक आकर्षक और भव्य दिखता है। इसके बाद से ही भक्तों के सहयोग से मंदिर को नोटों से सजाने की परंपरा शुरू हुई, जो अब भव्य रूप ले चुकी है। इस वर्ष मंदिर के श्रृंरगार में श्री बुद्धेश्वर महादेव मित्र मंडली समिति के 22 से अधिक सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन सदस्यों ने ही मंदिर की सजावट के लिए करोड़ों रुपए के नोटों का दान दिया। इस आयोजन ने भक्तों के बीच एक नई ऊर्जा का संचार किया और पूरे क्षेत्र में इसकी चर्चा जोरों पर रही। भक्तों के लिए आस्था का संगम यह मंदिर उज्जैन से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां हर साल महाशिवरात्रि के बाद विशेष मेला आयोजित किया जाता है। इस वर्ष यह मेला 28 फरवरी से 10 मार्च तक चलेगा। मेले के दौरान भक्तों का भारी जमावड़ा देखने को मिला रहा है। विशेष रूप से 3 मार्च से 5 मार्च तक, जब भगवान शिव का 1.21 करोड़ के नोटों से श्रृंगार किया गया तो मंदिर परिसर भक्तों से खचाखच भरा रहा। इस आयोजन को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भक्तों ने इसे न केवल भक्ति का प्रतीक माना है, बल्कि इसे एक अनूठी परंपरा के रूप में भी देख रहे हैं। इस तरह की सजावट से न केवल मंदिर की सुंदरता बढ़ रही है, बल्कि इससे श्रद्धालुओं की आस्था को भी एक नया आयाम देखने को मिल रहा है।

60 साल के व्यक्ति ने पत्नी और बच्चों पर घर से निकालने, मारपीट व जासूसी करने का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी लगाई

भोपाल एक 60 साल के व्यक्ति ने अपनी पत्नी और बच्चों पर घर से निकालने, मारपीट करने और जासूसी करने का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी लगाई है। यह मामला फैमिली कोर्ट में चल रहा है। 30 साल से शादीशुदा यह जोड़ा पिछले 10 सालों से अलग रह रहा है। व्यक्ति अपनी बुजुर्ग मां के साथ रहता है, जबकि पत्नी अपनी तीन बेटियों और दामाद के साथ रहती है। दोनों घर आदमी के नाम पर हैं। 1995 में हुई इस शादी में अक्सर झगड़े होते रहते थे। आदमी सरकारी फैक्ट्री में काम करता था और पत्नी पापड़ बनाती थी। पत्नी और बच्चों ने घर से निकाल दिया एक दिन झगड़े के बाद पत्नी और बच्चों ने आदमी को घर से निकाल दिया। उनका कहना था कि शराब पीकर वह मारपीट और गाली-गलौज करता है। दो घर होने की वजह से वह आदमी अपनी मां के साथ दूसरे घर में रहने लगा। इसके बावजूद पत्नी और बच्चे उस पर नजर रखते थे। पत्नी ने अपने दामाद को बुर्का और सैंडल पहनाकर पति की जासूसी करने भेजा। पड़ोसियों ने दामाद को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले करने से पहले उसकी पिटाई कर दी। तलाक का केस दायर किया इस जासूसी की घटना के बाद आदमी ने तलाक का केस दायर कर दिया। फैमिली कोर्ट काउंसलर शैल अवस्थी इस केस को देख रही हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पहले वह तलाक के बारे में नहीं सोच रहा था। वह अपनी बुजुर्ग मां के साथ खुशी से रह रहा था। पत्नी ने पति से गुजारा भत्ता भी मांगा है। लंबे समय से चल रहा झगड़ा आदमी और उसकी पत्नी के बीच लंबे समय से अनबन चल रही थी। रोजमर्रा के झगड़ों ने उनके रिश्ते को कमजोर कर दिया था। शराब पीकर मारपीट करने का आरोप गंभीर है। पत्नी और बच्चों ने उसे घर से निकाल दिया।

मेपकास्ट प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में पटेंट एंड टेक्नोलाजी सेंटर की स्थापना करने जा रहा

भोपाल बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करने और अपने आविष्कारों को पेटेंट कराने के लिए लोगों को मदद देने के लिए मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट) पिछले कई वर्षों से कार्य कर रही है। इसके लिए मेपकास्ट में एक पेटेंट सूचना केंद्र संचालित है। इस कार्य से आगे बढ़ते हुए मेपकास्ट प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में पटेंट एंड टेक्नोलाजी सेंटर (पीटीसी) की स्थापना करने जा रहा है। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों को प्रस्ताव भेजकर दो-दो फैकल्टी तय करने के लिए कहा गया है। योजना है कि 26 अप्रैल को बौद्धिक संपदा दिवस के मौके पर प्रदेश के सभी 64 विश्वविद्यालयों से इस संबंध में समझौता (एमओयू) कर लिया जाए। तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा इस समझौते के आधार पर विश्वविद्यालय से तय प्राध्यापकों को तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा और यही प्रशिक्षित प्राध्यापक अपने- अपने विश्वविद्यालय में (पीटीसी) का संचालन करेंगे। ये लोगों को तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराएंगे। मेपकास्ट के प्रधान वैज्ञानिक और पेटेंट सूचना केंद्र के प्रभारी विकास शेंडे ने बताया कि आमतौर पर देखने में आता है कि लोग कोई नवाचार या आविष्कार तो कर लेते हैं, लेकिन पेटेंट कराने से पूर्व ही इसकी जानकारी को सार्वजनिक कर देते हैं। काम मुकम्मल होने के बाद जब वे पेटेंट कराने पहुंचते हैं तो पता चलता है कि उनके आइडिया को चुराकर कोई और व्यक्ति पेटेंट करा चुका है। इसी प्रकार कई ऐसी बौद्धिक संपदाएं भी हैं, जिन्हें लोगों ने पेटेंट तो करा लिया है, लेकिन कोई काम नहीं कर रहे, उनके लिए ये विचार सिर्फ संपत्ति बनकर रह गए हैं। इन संपदाओं से ना तो पेटेंट कराने वालों ने खुद लाभ उठाया और ना ही दूसरों के लिए फायदेमंद साबित हुईं। इसकी वजह यह रही कि पेटेंट को बाजार में लाने के लिए उन्हें उचित प्लेटफार्म कभी मिला ही नहीं। पेटेंट सूचना केंद्र और पीटीसी के माध्यम से मेपकास्ट अब यह जिम्मेदारी निभाएगा। इस वजह से पड़ी जरूरत अधिकारियों का कहना था कि मेपकास्ट का पेटेंट सुविधा केंद्र सभी जानकारी और तकनीकी मदद मुहैया कराता है। लेकिन देखने में आया है कि यहां मदद मांगने बहुत कम लोग आ पाते हैं। इसके पीछे जानकारी का अभाव, दूरी और दूसरी वजहें हो सकती हैं। इसी समस्या को देखते हुए विश्वविद्यालयों में पीटीसी खोलने का फैसला हुआ है। पेटेंट का फायदा दिलाने की योजना अधिकारियों ने बताया कि मेपकास्ट उत्पादों का खरीदार उपलब्ध कराने के लिए नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनआइएफ), नेशलन रिसर्च डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनआरडीसी), डेवलपमेंट आफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च और उद्योग विभाग की मदद ले रहा है। पेटेंट ग्रांट होने के बाद उद्योग विभाग से पांच लाख रुपये की राशि दी जाती है। यह काम करेंगे पीटीसी यह केंद्र पेटेंट की खोज, आइपीआर को लेकर ट्रेनिंग, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नई तकनीक के बारे में बताना, ओरिएंटेशन प्रोग्राम का संचालन करेगा। इनोवेशन का प्रमोशन, एसएमई के लिए आइपीआर सल्युशन, पेटेंट डाफ्टिंग ट्रेनिंग, स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने का काम करेगा। वहीं प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण और इनोवेटर्स मीट का आयोजन भी करेगा। मध्य प्रदेश, भारतीय पेटेंट कार्यालय मुंबई के क्षेत्राधिकार में आता है। मेपकास्ट के जरिए पेटेंट के आवेदन मुंबई भेजे जाते हैं। यहीं कार्य अब सभी पीटीसी भी कर सकेंगे। क्या है बौद्धिक संपदा अधिकार किसी व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा सृजित कोई रचना- संगीत, साहित्यिक कृति, कला, खोज, नाम अथवा डिजाइन आदि उस व्यक्ति अथवा संस्था की बौद्धिक संपदा कहलाती है। अपनी कृतियों पर प्राप्त अधिकार को बौद्धिक संपदा अधिकार कहा जाता है। इसमें पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, डिजाइन, भौगोलिक संदेश (जीआई) आदि शामिल है। पीटीसी की स्थापना तीन महीने में होगी     शासन के निर्देश पर प्रदेश के युवाओं और शोधार्थियों को उनके किए गए कार्यों के लिए पेटेंट एवं तकनीकी कार्य में सहयोग के लिए पीटीसी की स्थापना होनी है। प्रदेश भर के विश्वविद्यालयो में पीटीसी की स्थापना तीन माह के भीतर हो जाएगी। – डॉ. अनिल कोठारी, महानिदेशक मेपकास्ट।  

15 अगस्त से एम्स से सुभाष नगर तक मेट्रो ट्रेन चलाने की तैयारी, ट्रायल रन में पहली बार प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो दौड़ी

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के रहवासियों के अच्छी खबर है। भोपाल में 15 अगस्त से मेट्रो ट्रेन दौड़ेगी। इसके लिए मेट्रो रेल कम्पनी ने समय सीमा तय कर दी है। इसी कड़ी में 15 अगस्त से एम्स से सुभाष नगर तक मेट्रो ट्रेन चलाने की तैयारी है। सबसे पहले 6.22 किमी में मेट्रो चलेगी।  ट्रायल रन हुआ था। कल सुभाष नगर से एम्स के बीच बने सभी स्टेशन पर मेट्रो रुकी थी। कल पहली बार प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो दौड़ी थी। सभी रूट पर मेट्रो ट्रेन शुरू होने में दो से तीन साल का समय लगेगा। यह रहेगा रूट विधायक भगवानदास सबनानी ने मेट्रो का निरीक्षण किया. उसके बाद उन्होंने कहा कि एम्स से सुभाष नगर तक 6.225 किमी के रूट पर जल्द मेट्रो दौड़ने वाली है. मेट्रो का काम तेज गति से चल रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि रूट का कई चरणों में ट्रायल रन पूरा हो चुका है. इस दिन से दौड़ेगी मेट्रो उन्होंने आगे कहा कि ऐसी उम्मीद जता रहे हैं कि बचा हुआ जितना भी काम है उसे 15 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा. इसके बाद मेट्रो को यात्रियों के हवाले कर दिया जाएगा. मेट्रो की सुविधा 15 अगस्त से यात्रियों को मिलने लगी है. बाकी रूट्स पर भी जल्द काम पूरा हो जाएगा. ट्रायल रन ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर का हिस्सा भोपाल में मेट्रो सेवा का विस्तार होता दिख रहा है। मंगलवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई जब मेट्रो पहली बार रानी कमलापति (RKMP) रेलवे स्टेशन से एम्स तक दौड़ी। यह ट्रायल रन ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर का हिस्सा है, जो सुभाषनगर से एम्स तक लगभग 7 किमी लंबा है। इस ट्रायल में मेट्रो ने 10 से 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 3 किमी की दूरी मात्र 12 मिनट में पूरी की। इस दौरान मेट्रो डीआरएम, अलकापुरी और एम्स स्टेशन पर रुकी। हर स्टेशन पर मेट्रो ने 2-2 मिनट का स्टॉपेज लिया। यह ट्रायल शाम को किया गया। पहली बार ROB से गुजरी मेट्रो मेट्रो का यह ट्रायल रन इसलिए भी खास था क्योंकि इसमें मेट्रो पहली बार हाल ही में बने रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) से गुजरी। RKMP स्टेशन से शुरू होकर, मेट्रो ROB, डीआरएम ऑफिस और अलकापुरी स्टेशन से होते हुए एम्स स्टेशन पहुंची। ROB का निर्माण कुछ महीने पहले ही पूरा हुआ है और उसके बाद ट्रैक बिछाने का काम किया गया। रेलवे ट्रैक और डीआरएम तिराहे पर दो स्टील ब्रिज भी बनाए गए हैं। 3 अक्टूबर को था पहला ट्रायल सुभाषनगर से आरकेएमपी तक का पहला ट्रायल रन 3 अक्टूबर 2023 को हुआ था। तब से लेकर अब तक टेस्टिंग का दौर जारी है, जिसमें मेट्रो पास भी हो चुकी है। आरकेएमपी से एम्स के बीच के ट्रायल के सफल होने के बाद अब मेट्रो सेवा के विस्तार की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब मेट्रो की स्पीड बढाने पर काम मेट्रो कॉरपोरेशन के अधिकारियों के अनुसार, RKMP से एम्स के बीच मेट्रो की स्पीड अब धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी। अधिकतम गति 90 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। कमिश्नर, मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम से कमर्शियल रन की मंजूरी मिलने के लिए रात में भी टेस्टिंग की जाएगी। मेट्रो ट्रेन के एक कोच की लंबाई लगभग 22 मीटर और चौड़ाई लगभग 2.9 मीटर है। ट्रेन में 3 कोच हैं और इसकी डिज़ाइन स्पीड 90 किमी प्रति घंटा है।  

PF के पैसे निकलेंगे यूपीआई और एटीएम से, सब्सक्राइबर्स को तुरंत ही अपनी राशि मिल जाएगी

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सात करोड़ से भी ज्यादा सब्सक्राइबर्स या लाभार्थी को बड़ी आसानी होने जा रही है। सरकार अब इस तरह की व्यवस्था कर रही है कि लाभार्थी घर बैठे यूपीआई के जरिए अपना पैसा निकाल सकते हैं। यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है क्योंकि कई बार कर्मचारियों को PF की राश निकालने में दिक्कत आती है। उनके दावे रद्द हो जाते हैं। तीन में से एक क्लेम नहीं मिलते साल 2024 में EPFO ने EPF final settlement claims रिपोर्ट जारी की थी। यह साल 2023 के लिए थी। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ईपीएफओ में दावा किया गए हर तीन फाइनल सेटलमेंट क्लेम में से एक पास नहीं हुए बल्कि डिनाई (Denied) कर दिए गए। इसलिए सरकार UPI के ज़रिए EPF निकासी शुरू करने की योजना बना रही है। इससे प्रक्रिया आसान और तेज़ हो जाएगी। तुरंत पैसे आएंगे अकाउंट में इस नए तरीके से, EPF मेंबर GPay, PhonePe और Paytm जैसे UPI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके तुरंत पैसा निकाल पाएंगे। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) इस सुविधा को शुरू करने के लिए नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ बातचीत कर रहा है। यह योजना मई या जून 2025 तक शुरू हो सकती है। कई सुविधाएं शुरू हो रही हैं केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इसी साल जनवरी में बताया था कि EPFO 3.0 पहल, जिसमें ATM से निकासी भी शामिल है, इस साल जून तक लागू हो जाएगी। EPFO 3.0 के ज़रिए और भी कई सुविधाएं मिलेंगी। देखा जाए तो UPI से EPF निकासी के कई फायदे होंगे। इससे पैसे तक तुरंत पहुंच मिलेगी। अभी EPF निकासी में 23 दिन लगते हैं, लेकिन UPI से यह कुछ ही मिनटों में हो जाएगा। यह नई प्रक्रिया ज़्यादा पारदर्शी होगी। और निकासी प्रक्रिया को बेहद आसान बना देगी। जरूरतमंद को आसानी यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी जिन्हें पैसे की तत्काल ज़रूरत होती है। मान लीजिये किसी मेडिकल इमरजेंसी में आपको पैसे की ज़रूरत है, तो आप तुरंत अपने EPF से पैसे निकाल सकेंगे। इससे आपको किसी से उधार मांगने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। या फिर अगर आपको कोई बड़ी खरीदारी करनी है, तो आप आसानी से अपने EPF से पैसे निकाल सकते हैं। यह सुविधा आपके लिए एक वरदान साबित होगी।

इसी महीने से रोड एक्सीडेंट में घायलों को मिलेगा फ्री इलाज, प्राइवेट-सरकारी दोनों ही हॉस्पिटल को देना होगा कैशलेस

नई दिल्ली जहां एक तरफ, भारत में सड़क एक्सीडेंट में इजाफा देखने को मिला है. वहीं इस मामले पर एक खबर के अनुसार, अब रोड एक्सीडेंट में घायलों को इसी महीने यानी मार्च 2025 से ही डेढ़ लाख रुपए तक का फ्री इलाज मिलने लगेगा. वहीं यह नियम प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए भी अनिवार्य होगा. देशभर में इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा, इस बाबत NHAI नोडल एजेंसी के रुप में अपनी सेवाएं देगा. कैशलेस इलाज की सुविधा जानकारी दें कि, इस योजना के लिए मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 162 में पहले ही जरुरी संशोधन हो चुका है. इस योजना को पूरी तरह से लागू करने से पहले बीते 5 महीनों में पुड्डूचेरी, असम, हरियाणा और पंजाब सहित छह राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया, जो कि बहुत ही सफल रहा. इस बाबत सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बीते 14 मार्च 2024 को रोड एक्सीडेंट पीड़ितों को कैशलेस इलाज देने के लिए एक जरुरी पायलट प्रोजेक्ट कैशलेस ट्रीटमेंट योजना शुरू किया था. इसके बाद बीते 7 जनवरी 2025 को गडकरी ने योजना को देशभर में ऑफिशियली लॉन्च करने की घोषणा की. प्राइवेट-सरकारी दोनों ही हॉस्पिटल को देना होगा कैशलेस वहीं मामले पर NHAI ने बताया कि, घायल को पुलिस या कोई आम नागरिक या संस्था जैसे ही हॉस्पिटल पहुंचाएगी, और उसका इलाज तुरंत शुरू हो जाएगा. इसके लिए कोई फीस भी नही जमा करनी पड़ेगी. इसके साथ घायलों के साथ चाहे उनके परिजन हो या नहीं, हॉस्पिटल उसकी समुचीत देखरेख करेंगे. प्राइवेट और सरकारी दोनों ही हॉस्पिटल को इस बाबत कैशलेस इलाज देना होगा. जिसका पूरा लेखा जोखा NHAI के पास रहेगा. इसके नियम के तहत देश में कहीं भी रोड एक्सीडेंट होने पर घायल व्यक्ति को इलाज के लिए भारत सरकार की ओर से अधिकतम 1.5 लाख रुपए की मदद दी जाएगी, जिससे वह आगामी 7 दिनों तक अस्पताल में इलाज भी करा सकेगा. एक समान टोल नीति पर भी हो रहा काम आपको बता दें कि बीते 3 फरवरी को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सड़क परिवहन मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों को राहत देने के लिए एक समान टोल नीति पर भी काम कर रहा है. तब गडकरी ने यह भी कहा था कि अब भारत का राजमार्ग बुनियादी ढांचा अमेरिका के बराबर है. वहीं बीते 10 साल में अधिक से अधिक खंडों पर टोल संग्रह शुरू होने से टोल शुल्क बढ़ा भी है, जिससे अक्सर यात्रियों में असंतोष बढ़ता है. जहां भारत में कुल टोल संग्रह बीते 2023-24 में 64,809.86 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो इससे पिछले वर्ष की तुलना में 35 % अधिक है. वर्ष 2019-20 में संग्रह 27,503 करोड़ रुपये था, वहीं तब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गडकरी ने भरोसा जताया था कि राजमार्ग मंत्रालय 2020-21 में प्रतिदिन 37 किलोमीटर राजमार्ग निर्माण के पिछले रिकॉर्ड को चालू वित्त वर्ष में पार कर जाएगा. चालू वित्त वर्ष में अबतक करीब 7,000 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण भी हो चुका है. लाज ना मिलने पर होती है मौत सड़क हादसों में इलाज समय पर ना मिलने के कारण सबसे ज्यादा मौत के मामले देखने को मिलते हैं। एक्सीडेंट के बाद बहुत से लोगों को अस्पताल तक नहीं पहुंचाया जाता है। अगर कोई अस्पताल पहुंच भी जाता है, तो उसे कई तरह की फॉर्मेलिटी पूरी करनी पड़ती है। इस सब में कई बार इलाज मिलने में ही काफी देर हो जाती है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक्सीडेंट में घायल लोगों को 1.5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त देने का फैसला लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सुविधा इसी महीने से मिलनी शुरू हो जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की भूमिका इस नए नियम के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अहम भूमिका निभाएगा। इस पूरी मामले में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण नोडल एजेंसी की तरह काम करेगा। पहले हरियाणा और पंजाब समेत कुल 6 राज्यों में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसकी सफलता को देखते हुए, इसे लागू करने का फैसला किया गया है। तुंरत मिलेगा इलाज इस फैसले के तहत अगर किसी की एक्सीडेंट होता है, तो उसे तुरंत किसी भी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया जा सकता है। उसके इलाज के लिए उसके परिवार को नहीं खोजा जाएगा। घायल के 1.5 लाख तक का इलाज का खर्च सड़क एवं परिवहन मंत्रालय उठाएगा। अगर खर्च 1.5 लाख से ऊपर आता है, तो इसके आगे का परिवार को बिल पे करना होगा। नितिन गडकरी ने कैशलेस ट्रीटमेंट योजना लॉन्च की थी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 14 मार्च 2024 को रोड एक्सीडेंट पीड़ितों को कैशलेस इलाज देने के लिए पायलट प्रोजेक्ट कैशलेस ट्रीटमेंट योजना शुरू किया था। इसके बाद 7 जनवरी 2025 को गडकरी ने योजना को देशभर में ऑफिशियली लॉन्च करने की घोषणा की। इससे देश में कहीं भी रोड एक्सीडेंट होने पर घायल व्यक्ति को इलाज के लिए भारत सरकार की ओर से अधिकतम 1.5 लाख रुपए की मदद दी जाएगी। जिससे वह 7 दिनों तक अस्पताल में इलाज करा सकेगा। डेढ़ लाख से ऊपर खर्च पर खुद पैसे देने होंगे अस्पताल को प्राथमिक उपचार के बाद बड़े अस्पताल में रेफर करना है तो उस अस्पताल को सुनिश्चित करना होगा कि जहां रेफर किया जा रहा है, वहां मरीज को दाखिला मिले। डेढ़ लाख तक कैशलेस इलाज होने के बाद उसके भुगतान में नोडल एजेंसी के रूप में NHAI काम करेगा, यानी इलाज के बाद मरीज या उनके परिजन को डेढ़ लाख तक की रकम का भुगतान नहीं करना है। यदि इलाज में डेढ़ लाख से ज्यादा का खर्च आता है तो बढ़ा बिल मरीज या परिजन को भरना होगा। सूत्रों का कहना है कि कोशिश यह हो रही है कि डेढ़ लाख की राशि को बढ़ाकर 2 लाख रुपए तक किया जा सके। दरअसल, दुर्घटना के बाद का एक घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाता है। इस दौरान इलाज न मिल पाने से कई मौतें हो जाती हैं। इसी को कम करने के लिए यह योजना शुरू की जा रही है।

आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमत में भी बड़ी गिरावट आएगी : एक्सपर्ट

नई दिल्ली  कच्चे तेल की कीमत में कमी आई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। यह अक्टूबर के बाद पहली बार हुआ है जब तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है। विदेशी बाजारों में कमजोर मांग को देखते हुए कच्चे तेल की कीमत में कमी आई है। अभी कई संकेत और ऐसे मिल रहे हैं जिनसे पता चलता है कि कच्चे तेल की कीमत में और कमी आ सकती है। इससे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत भी गिर सकती है। बुधवार को तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही। ब्रेंट क्रूड वायदा 0.3 फीसदी गिरकर 70.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.9 फीसदी गिरकर 67.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में गिरावट से भारत की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को फायदा हो सकता है। और कम हो सकती है कच्चे तेल की कीमत दुनियाभर में ऐसे कई संकेत मिल रहे हैं जिनके चलते आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमत और कम हो सकती है। तीन मुख्य संकेत इस प्रकार हैं: 1. रूस पर लगे बैन में ढील इस समय अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने पर लगा है। ऐसे में अमेरिका ने रूस पर जो बैन लगाए हैं, उनमें वह कुछ ढील दे सकता है। अमेरिका ने विदेश और वित्त मंत्रालयों से उन बैन की लिस्ट तैयार करने को कहा है जिनमें रूस को ढील दी जा सकती है। ऐसा होने पर रूस की ओर से तेल की सप्लाई बढ़ सकती है। ऐसे में तेल की कीमत में कमी आ सकती है। 2. OPEC+ ने बढ़ाया प्रोडक्शन OPEC+ ने अपने तेल प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला लिया है। रॉयटर्स की एक खबर के मुताबिक OPEC+ ने अप्रैल में तेल प्रोडक्शन को 138,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है। ऑयल प्रोडक्शन में यह वृद्धि साल 2022 के बाद पहली बार हो रही है। OPEC+ ग्रुप का कहना है कि यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ओपेक और सऊदी अरब पर कीमतें कम करने के लिए दबाव बढ़ाने के बाद उठाया गया है। 3. ट्रंप के टैरिफ का भी पड़ेगा असर डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आयातित उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। जानकारों के मुताबिक ये टैरिफ ग्लोबल इकोनॉमिक एक्टिविटी और फ्यूल डिमांड को प्रभावित कर सकते हैं। इसके चलते तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। यानी इसकी कीमत कम हो सकती है। क्या कम होगी पेट्रोल-डीजल की कीमत? कच्चे तेल की कीमत कम होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भारतीय तेल कंपनियां भी इस बारे में कुछ निर्णय ले सकती हैं। चूंकि अभी कच्चे तेल की कीमत कम हो चुकी है और आने वाले समय में इसमें और गिरावट के संकेत हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमत में भी कमी आ सकती है। हो सकता है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत में बड़ी गिरावट आए। अगर ऐसा होता है तो इससे देश में महंगाई पर भी कुछ काबू पाया जा सकता है।

ग्वालियर किला निजी हाथों में सौंपने शहरवासियों ने किया विरोध, बोले- दिल्ली तक जाएंगे

gwalior city residents protested against handing over gwalior fort to private hands Gwalior Fort Update: ग्वालियर के ऐतिहासिक किले को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी से शहरवासी आक्रोश में आ गए हैं। लोगों का कहना है कि ग्वालियर किला (Gwalior Fort) हमारी विरासत है, इससे छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। शहरवासियों का कहना है कि ग्वालियर किले पर बने ऐतिहासिक स्मारक हमारी पहचान हैं और किले के निजीकरण के बाद यहां मनमाने ढंग से वसूली प्रारंभ हो जाएगी। इसके विरोध में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा शुक्रवार को कलेक्टर और राज्य पुरातत्व विभाग को ज्ञापन देकर चेताएगी। बता दें, भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पर्यटन-संस्कृति विभाग ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) के साथ ग्वालियर किले के लिए एमओयू किया है। वहीं इंडिगो ग्रुप के 100 लोगों की टीम शुक्रवार 7 मार्च की शाम 4 बजे ग्वालियर फोर्ट पहुंच रही है। टिकट काफी महंगे हो जाएंगेग्वालियर किले पर जो स्मारक पूर्ण रूप से संरक्षित हैं और उनसे आमदनी भी हो रही है, ऐसे स्मारकों को निजी हाथ में देना ठीक नहीं रहेगा। क्योंकि उनके टिकट काफी बढ़ जाएंगे। ऐसे में आम आदमी स्मारकों को देखने से वंचित रह जाएगा और पुरातत्व महत्व भी समाप्त हो जाएगा।–लाल बहादुर सिंह, पूर्व क्यूरेटर (संग्रहाध्यक्ष) गूजरी महल संग्रहालयराष्ट्रपति भवन तक जाएंगे हम इस मुद्दे पर पूरी लड़ाई लड़ेंगे, किसी भी हालत में किले का निजीकरण नहीं होने देंगे। चाहे इसके लिए दिल्ली में राष्ट्रपति भवन तक क्यों ना जाना पड़े। हम हर स्तर पर इसका पुरजोर विरोध करेंगे। साथ ही दूसरे समाजों को भी इससे जोड़ेंगे। इससे पूर्व भी हमने यहां निजी होटल के निर्माण को नहीं होने दिया था।–पूरन सिंह राणा, एडवोकेट, सचिव, जाट समाज कल्याण परिषद ग्वालियरनिजीकरण बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे ग्वालियर का किला न सिर्फ शहर बल्कि प्रदेश-देश के लिए भी पुरातत्व धरोहर है। इसका निजीकरण किया जाना बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगा। पता नहीं इस ऐतिहासिक विरासत को पूंजीपतियों के हवाले क्यों किया जा रहा है। जो लोग इस काम को करवा रहे हैं, उन्हें गरिमा का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है। हम शुक्रवार को इसके लिए ज्ञापन भी देंगे।–सुनील शर्मा, कांग्रेस प्रदेश महासचिवकम हो जाएगी पर्यटकों की संख्या ग्वालियर किला हमारे ग्वालियर नहीं अपितु पूरे देश में प्रसिद्ध है, यहां हर कोई आना पसंद करता है। निजी हाथों में जाने के बाद यहां जाने के लिए अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा। वहीं राज्य पुरातत्व विभाग और केंद्रीय पुरातत्व विभाग इस किले का संरक्षण और देखभाल कर तो रहे हैं। निजीकरण से निश्चित तौर पर पर्यटकों की संख्या कम ही होगी।–ज्योति अग्रवाल, संस्थापक अध्यक्ष, अग्रकुल महिला समितिनिजीकरण बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए ग्वालियर किला हमारी ऐतिहासिक धरोहर है, इसका निजीकरण बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। इसे संरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि निजी कंपनियों को सौंपना। इससे आम जनता की पहुंच और सांस्कृतिक महत्व प्रभावित हो सकता है। किले का संरक्षण सरकार खुद करे, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान बनी रहे।–श्वेता बिंदल, चेयरपर्सन, जेसीआई ग्वालियरनिर्णय वापस लिया जाए ग्वालियर किला हमारे शहर की शान है। जो भी ऐतिहासिक धरोहर होती हैं उनकी देखभाल व संरक्षण करना सरकार का नैतिक कर्तव्य है। निजीकरण करना कोई विकल्प नहीं है, इसलिए अनुरोध है कि निजी कंपनी को किले को देने का निर्णय वापस लिया जाए। किले का जो पुराना इतिहास है उसको यथावत रखा जाए, क्योंकि यही हमारी पहचान भी है।-जुबैर रहमान, संस्थापक अध्यक्ष, लॉयंस क्लब दिशा

सीएम यादव बोले- प्रदेश में नक्सलियों का पूरी तरह खात्मा किया जाएगा, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

CM Yadav said- Naxalites will be completely eradicated from the state, gave necessary instructions to the officials मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को प्रदेश में नक्सल उन्मूलन अभियान पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए और नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिला स्तर, पुलिस मुख्यालय और राज्य शासन के स्तर पर निरंतर निगरानी रखी जाए। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 तक नक्सलियों का पूरी तरह खात्मा करने के संकल्प की पूर्ति के लिए मध्य प्रदेश की सक्रिय भूमिका की बात की। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण, दूरसंचार साधनों का विस्तार और आवश्यक जवानों की तैनाती से नक्सलियों पर नियंत्रण पाने में सफलता मिल रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विकास कार्य निरंतर जारी रखें और आधुनिक उपकरणों के उपयोग और क्षेत्र की निरंतर निगरानी से नक्सली तत्वों के खात्मे के लिए प्रयासों को तेज किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नक्सलवाद के पैर किसी भी कीमत पर जमने नहीं दिए जाएंगे। नक्सलवाद के समूल नाश के लिए कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव को हर 15 दिन में नक्सल उन्मूलन अभियान की समीक्षा के निर्देश दिए। चार नक्सलियों को मार गिराने पर दी बधाईमुख्यमंत्री ने बालाघाट और निकटवर्ती क्षेत्र में पुलिस और नक्सलियों की मुठभेड़ में चार नक्सलियों के मारे जाने की कार्रवाई की प्रशंसा की और पुलिस अधिकारियों को बधाई दी। बैठक में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों द्वारा संयुक्त अभियान के माध्यम से नक्सलवादियों के खात्मे के संकल्प पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के निर्देश

अब नेताओं की काले रंग की लग्जरी गाड़ियों पर नजर नहीं आएगा हूटर, जानिए क्या है इसका कारण

Now the hooter will not be seen on the black luxury cars of politicians, know the reason behind this सीहोर के जनप्रतिनिधियों की पहली पसंद बनी काले रंग की गाड़ियों पर अब हूटर नजर नहीं आएंगे। शासन के निर्देशों के बाद जनप्रतिनिधियों ने अपनी गाड़ियों से हूटर हटाने की शुरुआत कर दी है। सबसे पहले विधायक सुदेश राय ने अपनी लग्जरी गाड़ी से हूटर हटवाया, इसके बाद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जसपाल सिंह अरोरा ने गाड़ी से हूटर निकलवा दिया। गौरतलब है कि शहर में करीब आधा दर्जन जनप्रतिनिधियों के पास काले रंग की गाड़ी, जिनमें वे सफर करते हैं। विधायक सुदेश राय, भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जसपाल सिंह अरोरा, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर, युवा नेता शशांक सक्सेना सहित कुछ अन्य जनप्रतिनिधि भी काले रंग की गाड़ी में ही चलते हैं। अब इन जनप्रतिनिधियों ने शासन के नियमों का पालन करते हुए अपनी गाड़ियों से हूटर हटाने शुरू कर दिए हैं। उप पुलिस महानिरीक्षक ने दिए थे ये आदेशउप पुलिस महानिरीक्षक तुषारकांत विद्यार्थी ने आदेश जारी किए कि प्रदेश में मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के विरुद्ध निजी वाहनों में हूटर, फ्लेश लाइट (लाल, पीली, नीली बत्ती), वीआईपी स्टीकर चस्पा करना और गलत नंबर प्लेट के मामले विगत कुछ समय से लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे वाहनों पर कार्रवाई नहीं करने से ऐसा करने वालों को प्रोत्साहन मिल रहा है। इन अनाधिकृत वाहनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता है। कुछ दिन पूर्व एक जिले में वीआईपी भ्रमण के दौरान ऐसा ही एक अनाधिकृत वाहन पकड़ा गया था, जिस पर बीनएएस एवं मोटर व्हीकल एक्ट की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। निजी वाहनों में हूटर, फ्लेश लाइट लाल, पीली, नीली बत्ती, वीआईपी के स्टीकर, गलत नंबर प्लेट का दुरुपयोग करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध 15 मार्च तक विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए। यातायात पुलिस ने की कार्रवाईयातायात प्रभारी सूबेदार ब्रजमोहन धाकड़ के नेतृत्व में यातायात पुलिस ने एक प्राइवेट स्कॉर्पियो वाहन जिस पर चालक द्वारा अवैध रूप से हूटर और सायरन लगाए हुए था, जिस पर मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत चालानी कार्रवाई की गई। पुलिस ने वाहन चालक से समन शुल्क तीन हजार रुपये वसूला गया। यातायात पुलिस द्वारा प्राइवेट वाहनों पर अवैध हूटर एवं सायरन लगाकर वाहन चलाने वाले चालकों के विरुद्ध कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

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