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मुख्यमंत्री मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को विधायक डॉ अभिलाष पांडेय ने सौंपा प्रयागराज से लाया गंगा जल का कलश

MLA Dr. Abhilash Pandey handed over the urn of Ganga water brought from Prayagraj to Chief Minister Mohan Yadav and Assembly Speaker Narendra Singh Tomar भोपाल। आज मध्यप्रदेश विधानसभा के पहले दिन जबलपुर उत्तरमध्य के विधायक डॉ.अभिलाष पाण्डेय प्रयागराज महाकुंभ के संगम तट से लाए गए माँ गंगा के पावन जल का कलश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर एवं मुख्यमंत्री मोहन यादव जी एवं कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जी को प्रदान किया। इस पुण्य कार्य ने मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रथम दिवस को आध्यात्मिक बना दिया।इसके साथ ही डॉ अभिलाष पांडे ने विधानसभा में अन्य सभी मंत्री ,विधायक एवं विधानसभा के अधिकारी एवं कर्मचारियों को भी मां गंगा का पवित्र गंगाजल प्रदान किया। गौरतलब है कि जबलपुर उत्तर मध्य विधायक डॉ अभिलाष पांडेय पिछले सात दिनों से अपनी विधानसभा मैं प्रयागराज महाकुंभ से लाया गंगा जल वितरण कर रहे है विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र उत्तर मध्य विधानसभा जबलपुर मैं कुष्ठ रोगी आश्रम, वृद्ध आश्रम,अनाथ आश्रम ,केंद्रीय जेल ,हॉस्पिटल सहित लगभग पचास हज़ार घर तक गंगा जल स्वयं ने वितरण किया।विधानसभा के पहले दिन गंगाजल का वितरण एक शुभ और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक साबित होगा। सांस्कृतिक महत्व का यह अनुकरणीय कार्य मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को दर्शाता है साथ ही युवा विधायक की सनातन परम्परा , संस्कृति,संस्कार एवं गंगा मैया के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है। डॉ अभिलाष पांडे ने कहा कि आज से शुरू होने वाला विधानसभा का सत्र प्रदेश के सुख, शांति ,समृद्धि और विकास के लिए नए आयाम स्थापित करे ऐसी मां गंगा से प्रार्थना करता हूं और सभी सुखी और निरोगी रहें इसलिए मां गंगा के आशीर्वाद स्वरूप गंगाजल को लेकर आया हूं कुंभ के समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी के मार्गदर्शन में पूरे मध्यप्रदेश में सेवा,सत्कार और आतिथ्य के भाव के साथ सभी कुंभ जाने वालों का स्वागत किया है उसके लिए भी मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का अभिनंदन और आभार करता हूं।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर ईडी की कार्रवाई, पवन खेड़ा बोले – यह भुला नहीं जाएगा, हम भी याद रखेंगे

रायपुर  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के घर ईडी की छापेमारी की चर्चा दिल्ली तक है. इस पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य पवन खेड़ा ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि भाजपा का अंग बनकर ईडी काम कर रही है. यह भुला नहीं जाएगा, हम भी याद रखेंगे. कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य पवन खेरा ने कहा कि आज सुबह 6.30 बजे से भिलाई में भूपेश बघेल के यहां ईडी की रेड हो रही है. कोई हैरानी की बात नहीं है, विपक्ष के यहां ईडी को ही भेजने का एक परंपरा भारती जनता पार्टी ने शुरू कर रखी है. यह रेड किस केस में हैं, किसी को नहीं मालूम, क्यों हो रही है नहीं मालूम. कुछ दिनों पहले कोर्ट ने बघेल साहब के खिलाफ CBI का एक केस था, उसको खारिज कर दिया था. कोई केस बघेल साहब के खिलाफ अभी नहीं है, लेकिन फिर भी आज ED की रेड हो रही है. खेड़ा ने कहा कि हो सकता है, आज संसद का सत्र शुरू हो रहा है, चारों तरफ से घिरी हुई बीजेपी उसको एक डिस्ट्रेक्शन चाहिए. ध्यान हटाना है, हेडलाइन्स बदलनी हैं, यह उसी का एक पड़यंत्र बिल्कुल संभव है. यह भी हो सकता है कि भूपेश बघेल अब पंजाब में अपनी राजनितिक गतिविधियां शुरू कर रहे हैं, प्रभारी बने हैं, तो उनको वहां डिस्टर्ब करने की कोशिश की जा रही हो. जो भी हो, आज ईडी भारतीय जनता पार्टी का एक अंग बन कर जिस तरह का काम कर रही है, यह भुला नहीं जाएगा, हम भी याद रखेंगे.

उज्जैन के महाकाल की तर्ज पर ओंकारेश्वर लोक बनाया जाएगा, निर्माणाधीन एकात्मधाम के काम में तेजी लाई जाएगी

खंडवा  उज्जैन के महाकाल की तर्ज पर ओंकारेश्वर लोक बनाया जाएगा। निर्माणाधीन एकात्मधाम के काम में तेजी लाई जाएगी। नर्मदा परिक्रमावासियों से जुड़े क्षेत्रों का विकास होगा। घाटों का सौंदर्यीकरण करेंगे। ओंकारेश्वर पहुंचे सीएम डॉ. मोहन यादव ने रविवार को घोषणा धर्मसभा में की। सीएम ने पत्नी के साथ ब्रह्मपुरी घाट पर की पूजा-अर्चना इससे पहले सीएम ने पत्नी के साथ ब्रह्मपुरी घाट पर आयोजित अमृतस्य मां नर्मदा पद परिक्रमा कार्यक्रम में सहभागिता कर पूजा-अर्चना की। एकात्मधाम में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा को नमन किया। विकास से जुड़े कामों को देख रही एजेंसियों और अधिकारियों से काम में प्रगति की जानकारी ली। संत समाज और ट्रस्ट पदाधिकारियों से चर्चा की। संत विवेक ने कहा, प्राचीन धर्मस्थलों की रक्षा करना सबका दायित्व है। परिक्रमा स्थल व्यवस्थित रहे ताकि परिक्रमावासियों को कोई तकलीफ ना हो।. झाबुआ में पूर्व सांसद गुमान सिंह डामोर ने झाबुआ की अनास नदी को नर्मदा से जोड़ने की मांग रखी तो मुयमंत्री ने सर्वे करवाने के बाद नदी जोड़ो अभियान में इसे शामिल करवाने का भरोसा दिलाया। ओंकार लोक का होगा निर्माण सीएम ने मंच से एक बड़ी घोषणा भी कर दी। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर में महाकाल लोक से भी बेहतर ओंकार लोक विकसित किया जायेगा। सरकार आदिवासी अंचलों के विकास के लिए 7300 करोड़ रुपए का काम कर रही है। उन्होंने भगोरिया उत्सव को राजकीय उत्सव की मान्यता देने की बात कहते हुए कहा कि आदिवासी समाज को सरकार का हिस्सेदार बनने का संकल्प लिया गया है। दूध पर मिलेगा अनुदान सीएम ने कहा कि सोयाबीन, गेहूं, धान की तरह दूध उत्पादन पर भी ₹5 प्रति लीटर अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने गेहूं की ₹2600 प्रति क्विंटल खरीदी का जिक्र करते हुए कहा कि किसान समृद्ध होंगे तो जिंदगी बदलेगी। उन्होंने प्रतिमाह लाड़ली बहना योजना का जिक्र करते हुए इसे बहनों के प्रति स्नेह बताया और कहा कि बहन बेटी के हाथ पैसा आता है तो तकलीफ क्या है। उन्होंने पानसेमल के भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्याम बर्डे के आग्रह पर वहां अस्पताल खोलने की भी घोषणा की। अप्रैल से शराब की बिक्री पर प्रतिबंध मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि 1 अप्रैल 2025 से ओंकारेश्वर सहित प्रदेश के कई धार्मिक स्थलों पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लागू किया जाएगा। यह निर्णय तीर्थ स्थलों की पवित्रता और श्रद्धालुओं के लिए एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला धार्मिक स्थलों के माहौल को सुरक्षित और पवित्र बनाने के लिए लिया गया है और यह अन्य स्थानों पर भी लागू होगा। गौपालन और धर्म का संदेश मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए गोपालन को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने गौ माता की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि साधु संतों द्वारा दिया गया आध्यात्मिक संदेश सभी के जीवन में कल्याणकारी होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हम सब “कर्म में ही धर्म” पर विश्वास करते हैं और सरकार इस मार्ग पर जनता की सेवा कर रही है। संत विवेक का धर्म सभा में संदेश धर्म सभा में संत विवेक जी ने कहा कि प्राचीन धार्मिक स्थलों की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने मुख्यमंत्री की सराहना की, जो नर्मदा परिक्रमा स्थल और ओंकारेश्वर जैसे धार्मिक स्थलों की देखभाल के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। संत विवेक जी ने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से नर्मदा का जल हमेशा शुद्ध रहेगा और तीर्थयात्रियों को सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

रूप और अलीशा छत्तीसगढ़ राज्य युवा कवि सम्मान 2025 से सम्मानित

रूप और अलीशा छत्तीसगढ़ राज्य युवा कवि सम्मान 2025 से सम्मानित कोरिया जिला गौरवान्वित,साहित्यजगत ने दी बधाई रायपुर छत्तीसगढ़ मित्र, छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान तथा जय जोहार साहित्य संस्कृति संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में रविवार 9 मार्च को वृंदावन हॉल रायपुर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित युवा कविता कुंभ और नारी शक्ति सम्मान में कोरिया जिले के साहित्यकार कवि समाजसेवक एस.के.‘रूप’ और अलीशा शेख को “राज्य कवि सम्मान 2025” से सम्मानित किया गया। विदित हो कि पूर्व में भी श्री रूप और अलीशा को विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ के 50 युवा कवियों के राज्य कवि कुंभ में सुश्री अलीशा ने अपनी जगह बनाई। मुख्य अतिथि आईपीएस डॉ रतनलाल डांगी, छत्तीसगढ़ के साहित्य जगत के महान हस्ती श्री गिरीश पंकज, मैट्स यूनिवर्सिटी के कुलपति, आईएएस साहित्यकार इंद्रा मिश्रा रायपुर ने उक्त सम्मान से नवाजा इस अवसर पर आईपीएस डांगी ने कहा कि छत्तीसगढ़ सार्थक कविताओं का गढ़ है । अध्यक्ष कुलपति प्रो. यादव ने कहा कि आज राज्य के पचास कवियों ने यह साबित कर दिया कि वे कविता के आकाश में राज्य का नाम रौशन कर सकते हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ इंदिरा मिश्रा ने कहा कि रचनात्मक साहित्य जीवन को सार्थक दिशा देता है। साहित्यकार गिरीश पंकज ने कहा कि कविता कभी बूढ़ी नहीं होती। राष्ट्रीय भावनाओं की कविता देश को मजबूत बनाती है। शताब्दी पांडेय ने भी प्रेरक बातें कहीं। इस अवसर पर राज्य के विविध क्षेत्रों से चयनित चालीस से अधिक युवाओं ने काव्य पाठ किया। दूसरे सत्र में ग्यारह महिला प्रतिभाओं एवं 50 युवा कवियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ आईपीएस डॉ. रतनलाल डांगी, कार्यक्रम अध्यक्षता डॉ. के. पी. यादव कुलपति मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर, विशिष्ट अतिथि डॉ इंदिरा मिश्रा पूर्व आइएएस, देवेंद्र गोस्वामी संपादक पत्रिका भिलाई, डॉ सुशील त्रिवेदी संपादक छत्तीसगढ़ मित्र, गिरीश पंकज प्रख्यात व्यंग्यकार एवं संपादक सद्भावना दर्पण, निश्चय बाजपेई  समाजसेवी रहे। कार्यक्रम के संकलन में डॉ. सुधीर शर्मा, प्रबंध संपादक छत्तीसगढ़-मित्र, डॉ. सीमा निगम, अध्यक्ष, जय जोहार साहित्य संस्कृति संस्थान एवं शकुन्तला तरार, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान राज्य महिला इकाई की मुख्य भूमिका रही।

आबकारी विभाग को इस बार 12500 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिलना तय

भोपाल आबकारी विभाग द्वारा इस साल अपनाई जा रही शराब दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया से लगभग 26% अधिक रेवेन्यू मिला है। रविवार को बिडिंग से मिली दुकानों की नीलामी राशि की तुलना ई टेंडर में आई बोलियों से की गई। रिन्युअल और लाटरी के बाद बची दुकानों की नीलामी के लिए इस बार आबकारी विभाग ने नया फार्मूला तय किया था। ई टेंडर से बोलियां मांगी ई थी। साथ ही एक अन्य विकल्प में ई टेंडर के साथ बिडिंग करके बोली बढ़ाने का विकल्प था, जो शनिवार को हुआ था। इन मूल्यों की तुलना आज सिर्फ ई-टेंडर वाली बोलियों से की गई। जो भी अधिक मूल्य था, उस पर नीलामी कर दी गई। भोपाल, अनूपपुर और बुरहानपुर जैसे शहरों में रिजर्व प्राइस से काफी अधिक रेवेन्यू मिला। रिन्युअल में 5737 करोड़ तो लाटरी की प्रक्रिया में 1572 करोड़ रेवेन्यू मिला था। अभी जो समूह बचे हुए हैं, उनसे लगभग 4700 करोड़ रुपए रेवन्यू मिलना है। 3 जिलों में नीलामी नहीं जबलपुर में 4, राजगढ़ में 2 तो दमोह में 1 समूह ही बना था। इस वजह से नीलामी की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी, इसलिए अब जबलपुर में 29, राजगढ़ में 5 तो दमोह में 7 समूह बना दिए गए हैं ताकि छोटे ठेकेदार भी नीलामी में भाग ले सकें। 10 मार्च से दोबारा यही प्रक्रिया दोहराई जाएगी। 13 को बिडिंग और ई-टेंडर एक साथ फाइनल कर लिए जाएंगे। इस साल नीलामी में लगभग 17 हजार करोड़ रेवन्यू मिलने की उम्मीद है।  

70 ग्राम संगठन के आजीविका उपसमिति का आवासीय प्रशिक्षण दिया गया

एमसीबी/मनेंद्रगढ़ कलेक्टर डी राहुल वेंकट के दिशा निर्देश एवं जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन में 70 ग्राम संगठन के आजीविका उपसमिति का आवासीय प्रशिक्षण दिया गया। जिसमे कृषि/गैर कृषि/कृषि आधारित आजीविका के बारे में विस्तार से बताया गया। सदस्यों द्वारा इस प्रकार के आजीविका का चयन  करने से ही, गरीबी के कुचक्र से बाहर निकल कर लखपति दीदी की श्रेणी में आ सकते हैं। साथ ही 8 मुख्य विभाग  (मनरेगा/श्रम विभाग/क्रेडा/ कृषि/ उद्यान/मत्स्य/पशुधन विकास/उद्योग विभाग इत्यादि) के साथ अभिसरण के माध्यम से आजीविका को सुदृढ़ किया जाने की रणनीति तैयार करने पर चर्चा की गई। अलग अलग ग्राम से आई हुई ग्राम संगठन की महिलाओं ने प्राप्त जानकारी को किस प्रकार वापस जा कर ग्राम संगठन में रोलआउट करेंगे उसकी रोल-प्ले भी किया।               प्रशिक्षण  को  जिला कार्यक्रम प्रबंधक के द्वारा प्रदान की गया। इसी कड़ी में ग्राम संगठन के आये हुए पदाधिकारी सदस्यों को मनेन्द्रगढ़ की  एक संकुल संगठन के कार्य प्रणाली का एक्सपोजर विजिट का अवसर मिला। महिलाओं ने की शासकीय योजनाओं (महतरी वंदन, आवास योजना, धान बिक्री, स्वयं सिद्धा ऋण योजना) से संतृप्त हो कर गरीबी की कुचक्र को भेदने की अपनी सफलता की कहानी  भी साझा किया। एवं बिहान में जुड़कर साप्ताहिक बैठक में होने वाले चर्चाओं से जानकारी मिलने के कारण दूसरी योजना से पात्रता अनुसार लाभ मिलने पर सरकार को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत कार्यालय से श्री सिमेन्द्र सिंह, श्री रितेश पाटीदार, श्रीमती स्वेता शर्मा की उपस्थिति में प्रशिक्षण सम्पन्न किया गया।

सिकंदर बेहल: दिल्ली के संघर्षों के बीच आशा और मानवता की उत्कृष्टता का एक प्रकाशपुंज

नईदिल्ली भारत की धड़कन कही जाने वाली दिल्ली एक ऐसा शहर है जहाँ प्राचीन गौरवशाली इतिहास आधुनिक समस्याओं—प्रदूषण, चरम मौसम और सामाजिक-आर्थिक असमानता—के साथ गहराई से टकराता है। हाल के वर्षों में, दिल्ली ने प्रदूषण और प्रतिकूल मौसम की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी है, जिसने नागरिकों, विशेष रूप से हाशिए पर जीने वाले लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर प्रभाव डाला है। इन बढ़ती चुनौतियों के बीच, एक व्यक्ति आशा की किरण और सच्चे मानवतावादी नेता के रूप में उभरा है—सिकंदर बेहल। सिकंदर न केवल अपनी उत्कृष्ट व्यावसायिक समझ के लिए बल्कि सामाजिक कल्याण के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता के लिए भी व्यापक रूप से सम्मानित हैं। अपने पेशेवर उपलब्धियों से आगे बढ़कर, उन्होंने परोपकार को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया है और समाज के सबसे कमजोर वर्गों के प्रति करुणा और जिम्मेदारी की भावना को लगातार प्रदर्शित किया है। दिल्ली के बेघर और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की जरूरतों को समझते हुए, सिकंदर ने एक बड़े स्तर पर मानवीय सहायता अभियान की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य शहर की कठोर सर्दियों और खराब होती वायु गुणवत्ता से उत्पन्न कठिनाइयों को कम करना था। उन्होंने प्रमुख अस्पतालों और प्रतिष्ठित बंगला साहिब गुरुद्वारे के सहयोग से खाद्य एवं कंबल वितरण अभियान चलाया, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि समाज के सबसे असहाय वर्ग—बच्चे, बुजुर्ग और निराश्रित—ठंड के कठिन महीनों में गर्मी, पोषण और देखभाल प्राप्त कर सकें। उनकी पहल सिर्फ सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं रही; उन्होंने समाज में व्यापक स्तर पर जागरूकता और भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया, जिससे कई अन्य लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ने के लिए प्रेरित हुए। सिकंदर की जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता कोविड-19 महामारी के दौरान और अधिक स्पष्ट हुई, जब यह वैश्विक संकट करोड़ों लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर चुका था। उन्होंने तत्काल आवश्यक संसाधनों को जुटाया और जरूरतमंदों तक खाद्य सामग्री, मास्क और सैनिटाइज़र पहुँचाने का प्रबंध किया, ताकि महामारी से प्रभावित लोगों को जीवन की आवश्यक सुविधाएँ मिल सकें। उनकी सहायता केवल भौतिक संसाधनों तक सीमित नहीं थी; उन्होंने समाज में एकता और परस्पर सहयोग की भावना को भी बढ़ावा दिया, जिससे लोग इस कठिन समय में एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आएं। अपनी मानवीय सेवाओं के अतिरिक्त, सिकंदर नेतृत्व, दृढ़ संकल्प और उदारता के आदर्श उदाहरण हैं। उनकी उत्कृष्ट शिक्षा ने उन्हें व्यावसायिक सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचाया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सामाजिक कार्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को कभी कमजोर नहीं होने दिया। उनका वैश्विक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव उन्हें न केवल एक प्रेरणादायक व्यक्ति बनाता है बल्कि उन लोगों के लिए एक मार्गदर्शक भी, जिन्हें उन्होंने सहारा दिया है। एक प्रभावशाली वक्ता और परिवर्तन के प्रबल समर्थक, सिकंदर विभिन्न मंचों पर पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय रूप से चर्चा करते हैं। उनका मानना है कि सच्ची सफलता केवल वित्तीय उपलब्धियों से नहीं, बल्कि समाज पर छोड़ी गई सकारात्मक छाप से मापी जाती है। उनकी परोपकारी गतिविधियाँ केवल दान के रूप में नहीं, बल्कि एक संतुलित और न्यायसंगत समाज की उनकी दूरदृष्टि का प्रतीक हैं, जहाँ समृद्धि सबके लिए हो और कोई भी वंचित न रहे। सिकंदर बेहल की यात्रा महत्वाकांक्षा और निःस्वार्थता के समावेश की एक प्रेरणादायक मिसाल है। व्यवसाय में नेतृत्व हो या मानवीय सहायता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता, वे निरंतर लोगों को प्रेरित करते हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि जब साहस और करुणा एक साथ आती हैं, तो एक व्यक्ति भी समाज में सार्थक बदलाव लाने की शक्ति रखता है, जिससे सफलता का वास्तविक अर्थ पुनर्परिभाषित होता है।

नशा मुक्ति केंद्र का महापौर ने किया निरीक्षण

एमसीबी/चिरमिरी नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत नशे से गंभीर रूप से प्रभावित व्यक्तियों की देखरेख के लिए नगर के गोदरीपारा में संचालित नशा मुक्ति केंद्र की व्यवस्थाओं का जायजा नगर निगम के महापौर राम नरेश राय ने लिया, नशा मुक्ति केंद्र के निरीक्षण के दौरान केंद्र के संचालन संबंधी को आवश्यक दिशा निर्देश एवं मापदंडों के अनुरूप नशा मुक्ति केंद्र का संचालन किये जाने हेतु महापौर राय ने आवश्यक सुझाव दिए।        महापौर ने नशामुक्ति केंद्र में भर्ती सभी नशा पीड़ितो से व्यक्तिगत चर्चा कर पीड़ितों को नशे से होने वाले दुष्प्रभावो के संबंध में बताते हुए कहा कि नशे से नकारात्मक विचार, दुर्घटनाएं, स्वास्थ्य समस्या, आर्थिक तंगी, पारिवारिक तनाव, समय का दुरुपयोग होता है। महापौर राम नरेश राय ने नशा पीड़ितों से कहा कि मादक पदार्थ शरीर के लिए सही नहीं है, स्वयं में बदलाव की शुरुआत कर अन्य लोगों को भी नशा से मुक्त होने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने नशा पीड़ितों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि केंद्र से जाने के पश्चात सकारात्मक दिशा की ओर आगे बढ़ कर अपने सुनहरे भविष्य का निर्माण करें।। इस दौरान महापौर के साथ भाजपा नेता राज कुमार बधावन मौजूद रहे।

जमानत मिलने के बावजूद गरीब आरोपी आज भी जेल बंद , सिस्टम की नाकामी बताते हुए, इसमें सुधार की जरूरत: न्यायाधीश श्रीवास्तव

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव ने रविवार को एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गरीब व्यक्ति को जमानत मिलने के बावजूद वह जेल से बाहर नहीं आ पाता। मुख्य कारण उसकी आर्थिक तंगी है, जिसके चलते वह बेल बॉन्ड नहीं भर पाता और सिक्योरिटी जमा करने में असमर्थ रहता है। मुख्य न्यायाधीश श्रीवास्तव राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा लीगल एड डिफेंस कौंसिल के लिए आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गरीब आरोपी न्याय प्रणाली में लीगल एड मिलने के बाद भी न्याय से वंचित रह जाता है, क्योंकि वह जमानत की शर्तें पूरी नहीं कर पाता। मुख्य न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कौन-सा सिस्टम है, जो इस समस्या को समझ ही नहीं पाया। उन्होंने कहा- आरोपी को लीगल एड मिली, बेल का ऑर्डर हो गया, परिजनों को बेल ऑर्डर दे दिया गया लेकिन जब वे जेल अथॉरिटी के पास पहुंचे तो पता चला कि वे बेल बॉन्ड नहीं भर सकते। मामला वहीं खत्म हो गया और आरोपी जेल में ही रह गया। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर सिस्टम फेल्योर है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने लीगल एड क्लिनिक जेल प्रशासन और अदालतों को इस दिशा में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की सलाह दी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लीगल एड डिफेंस कौंसिल को सिर्फ बेल दिलाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आरोपी जेल से बाहर आ पाए। अगर वह जमानत की शर्तें पूरी नहीं कर पा रहा है तो कोर्ट को सूचित कर शर्तों में बदलाव करवाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोर्ट यह समझता है कि गरीब व्यक्ति 25 हजार रुपए की सिक्योरिटी नहीं दे सकता। अगर यह मामला कोर्ट के सामने रखा जाएगा तो इस संबंध में आदेश पारित किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने लीगल एड वकीलों से अपील की कि वे इस मिशन को सेवा भाव से लें और गरीबों को न्याय दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण इस दिशा में हर संभव सहायता प्रदान करेगा।

अभिनेत्री रान्या राव जांघ पर चिपकाकर दुबई से ले आईं 14 किलो सोना, पुलिस को ऐसे देती थीं चकमा

बेंगलुरु कन्नड़ फिल्म अभिनेत्री रान्या राव के सोना तस्करी मामले की जांच में नई जानकारी सामने आई है। खबर है कि वह अपने शरीर पर 10 किलो से ज्यादा सोना चिपकाकर भारत लेकर आई थीं। गुरुवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया था, जहां अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। DRI यानी राजस्व खुफिया निदेशालय ने अदालत में इस मामले का राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े होने का जिक्र किया है और राव की हिरासत की मांग की थी। आ गया पहला बयान खबर है कि राव की तरफ से अधिकारियों को बताया गया है कि उनके पास कुल 17 सोने की छड़ें मिली थीं। इसके अलावा उन्होंने दुबई के साथ-साथ यूरोप, अमेरिका, मिडिल ईस्ट के देशों की भी यात्रा की थी। कहा जा रहा था कि वह हर ट्रिप से करीब 12 लाख रुपये कमाती थीं। हालांकि, उनकी आय को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।  उन्होंने कहा, ‘मैंने यूरोप, अमेरिका और मिडिल ईस्ट, दुबई की यात्रा की है। मैं बताना चाहती हूं कि मैं अभी थक गई हूं, क्योंकि मुझे पर्याप्त आराम नहीं मिला है।’ उन्होंने एजेंसी के साथ सहयोग करने का भी वादा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, राव ने DRI को बताया, ‘मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है। मैं फिर बताना चाहती हूं कि मैं जारी जांच में पूरा सहयोग करूंगी और जब भी बुलाया जाएगा, पेश हो जाऊंगी। इस बयान को रिकॉर्ड करते समय धार्मिक भावनाओं को किसी तरह की चोट नहीं पहुंचाई गई है। मुझे समय-समय पर भोजन और पानी दिया गया, लेकिन मैं नहीं खाने फैसला किया, क्योंकि मुझे भूख नहीं लक रही थी और मैं पानी पी रही थी…।’ जांघ पर चिपकाकर लाईं सोना पहले कहा जा रहा था कि राव जैकेट के जरिए सोने की खेप लेकर आई थीं। वहीं, DRI ने संकेत दिए हैं कि अभिनेत्री के शारीरिक जांच के दौरान सोना होने का पता चला था। एजेंसी ने कहा था, ‘जांच में उनके शरीर पर 14.2 किलो सोना चालाकी से छिपाने का पता चला था।’ राव 3 मार्च को दुबई से लौटी थीं। त्रों के हवाले से बताया गया है कि 31 वर्षीय एक्ट्रेस कथित तौर पर अपनी जांघों पर टेप और बेंडेज की मदद से सोने की 14 छड़ें चिपकाकर लाई थीं, ताकि कस्टम अधिकारियों को इसका पता न चले। उन्होंने कहा कि राव ने कथित तौर पर 1-1 किलो के 14 सोने के बार अपनी जांघों पर टेप और बेंडेज की मदद से चिपका लिए थे और उन्हें छिपाने के लिए पेंट पहना था। ऐसे देती थीं पुलिस को चकमा खबरें हैं कि राव कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने के बाद भारत वापस आने पर बेंगलुरु एयरपोर्ट पर VIP चैनल का सहारा लेती थीं। उस दौरान एक प्रोटोकॉल अधिकारी बगैर गहन जांच के उनका बाहर निकलना सुनिश्चित करता था। कथित तौर पर वह कई बार पुलिस एस्कॉर्ट की मदद से एयरपोर्ट पर सिक्योरिटी चैक से बचीं। सोमवार को भी उन्होंने एक पुलिस कॉन्स्टेबल के साथ इसी तरह की कोशिश की थी। हालांकि, तब DRI ने उन्हें सोने के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें नागवारा स्थित DRI कार्यालय ले जाया गया और पूछताछ की गई। कितने करोड़ का खेल राव के पास केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मिले 14.2 किलो सोने की अनुमानित कीमत 12.56 करोड़ रुपये बताई जा रही थी। एयरपोर्ट पर हुई कार्रवाई के बाद राव के घर पर भी अधिकारियों ने दबिश दी थी। तलाशी के दौरान 2.06 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के आभूषण और 2.67 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए थे।

मुझे निर्देश दिए गए थे कि मैं आरएसएस के खिलाफ न बोलूं, क्योंकि इससे हिंदू नाराज हो सकते हैं:दिग्विजय सिंह

भोपाल कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पर्दे के पीछे से भाजपा का समर्थन करने वाले कांग्रेस नेताओं पर राहुल गांधी द्वारा एक दिन पहले की गई सख्त टिप्पणी की सराहना की है। उन्होंने कहा कि गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें हिंदुओं के नाराज होने के डर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ कुछ नहीं बोलने को कहा गया था। अहमदाबाद में  कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा था कि पार्टी का पहला काम कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के दो समूहों को अलग करना है – पहला जो पार्टी की विचारधारा को अपने दिल में रखते हैं और जनता के साथ खड़े हैं और दूसरे वो जो जनता से कटे हुए हैं, ‘जिनमें से आधे भाजपा के साथ हैं।’ उन्होंने ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की छंटनी करने की आवश्यकता पर बल दिया था तथा सख्त कार्रवाई यहां तक ​​कि निष्कासन की भी चेतावनी दी थी। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने गांधी को उनके बयान के लिए बधाई दी और कहा, “मुझे याद है कि जब मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चुनाव प्रचार करने गुजरात गया था, तब मुझे निर्देश दिए गए थे कि मैं आरएसएस के खिलाफ न बोलूं, क्योंकि इससे हिंदू नाराज हो सकते हैं।” दिग्विजय सिंह ने कहा कि आरएसएस के नेतृत्व वाला संघ परिवार हिंदुओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उन्होंने कहा कि वह केवल धर्म के नाम पर समुदाय को गुमराह करता है और उनका शोषण करता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा, “हिंदू धर्म गुरु शंकराचार्य जी की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और यह आज भी चलन में है। उनमें से कौन सा शंकराचार्य आज भाजपा, आरएसएस का समर्थक है? भाजपा शोषक तत्वों का एक समूह है जिसका एकमात्र उद्देश्य धर्म के नाम पर लोगों को लूटना और सत्ता हासिल करना है।”

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी का 9वें टाइगर रिजर्व के लिये माना आभार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 10 मार्च को मध्यप्रदेश के 9वें टाइगर रिजर्व का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस ऐतिहासिक अवसर पर एक बाघ एवं एक बाघिन को टाइगर रिजर्व में छोड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव टाइगर रिजर्व की 13 किलोमीटर लम्बी पत्थर की सेफ्टी वॉल का भी उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का माधव राष्ट्रीय उद्यान को देश के 58वें और मध्यप्रदेश के 9वें टाइगर रिजर्व की सौगात प्रदान करने पर आभार जताया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टाइगर रिजर्व बनने से वन्य-जीव संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन को नई ऊँचाई मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह मध्यप्रदेश को वन्य-जीव संरक्षण क्षेत्र में मिली एक बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माधव राष्ट्रीय उद्यान ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से बेहद समृद्ध है। टाइगर रिजर्व घोषित होने से वन्य-जीवों के संरक्षण के साझा प्रयासों को और अधिक मजबूती मिलेगी। शिवपुरी स्थित माधव नेशनल पार्क अब प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व बन गया है। देश के 58वें और प्रदेश के 9वें टाइगर रिजर्व पर जताई प्रसन्नता प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि वन्य जीव प्रेमियों के लिए एक आश्चर्यजनक समाचार प्राप्त हुआ है। भारत वन्य जीव विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण करने वाली संस्कृति से धन्य है। हम हमेशा हमारे वन्य प्राणियों की रक्षा करने और एक सतत् विकासशील ग्रह में जीवन कायम रखने में योगदान देने में सबसे आगे रहेंगे। 375 से अधिक वर्ग कि.मी. में फैला है टाइगर रिजर्व माधव टाइगर रिजर्व का आरक्षित वन क्षेत्र 32429.52 हेक्टेयर, संरक्षित वन क्षेत्र 2422.00 हेक्टेयर और राजस्व क्षेत्र 2671.824 हेक्टेयर है। इस प्रकार कुल क्षेत्र 37523.344 हेक्टेयर अथवा 375.233 वर्ग किलोमीटर है। टाइगर रिजर्व में अब बाघों की संख्या 7 हो जायेगी टाइगर रिजर्व में कुल बाघों की संख्या 5 है। इसमें 2 नर और 3 मादा शामिल हैं। बाघिन ने 2 शावकों को जन्म दिया है, जिनकी उम्र लगभग 8 से 9 माह है। सोमवार 10 मार्च को दो बाघ और छोड़े जाने से टाइगर रिजर्व में कुल बाघों की संख्या 7 हो जायेगी।  

ललित मोदी का वानूआतू का पासपोर्ट रद्द होगा, जयशंकर की वजह से साजिश हुई नाकाम

नई दिल्ली  भारत के भगोड़े और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व संस्थापक ललित मोदी ने अपना भारतीय पासपोर्ट जमा करने के लिए लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में आवेदन दिया था। कहा जा रहा था कि ललित मोदी ने प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश वानूआतू की नागरिकता हासिल कर ली है। उसने गोल्डन पासपोर्ट हासिल कर लिया था। हालांकि, इसके अगले ही दिन यह खबर आई कि वानूआतू के प्रधानमंत्री जोथम नापत ने नागरिकता आयोग को ललित मोदी के पासपोर्ट को रद्द करने का निर्देश दिया है। ललित मोदी ने 7 मार्च को अपना भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करने के लिए आवेदन दिया और बाद में विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की थी। जानते हैं कि ललित मोदी का खेल कैसे बिगड़ा? कैसे ललित मोदी का खेल बिगड़ा, जानिए मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, न्यूजीलैंड में भारत की उच्चायुक्त नीता भूषण ने कुछ अन्य द्वीपीय देशों के साथ मिलकर ललित मोदी के वानूआतू का पासपोर्ट रद्द कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इन दिनों लंदन दौरे पर थे। ऐसे में यह संभव है कि ललित मोदी का खेल बिगड़ गया हो। क्योंकि, भारत सरकर कतई यह नहीं चाहेगी कि ललित मोदी को किसी ऐसे देश में शरण मिले, जहां से उसे लाना मुश्किल हो। वानूआतू सरकार बोली-ललित मोदी के कारनामे नहीं पता थे दरअसल, वानूआतू सरकार ने ललित मोदी को दिए पासपोर्ट को रद्द करने का आदेश दे दिया है। इसको लेकर वानूआतू के प्रधानमंत्री जोथम नापत ने एक हाई लेवल मीटिंग की। वनुआतू सरकार के मुताबिक, उन्हें ललित मोदी के कारनामे के बारे में पता नहीं था। इस आदेश के बाद ललित मोदी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, वानूआतू के गोल्डन पासपोर्ट कार्यक्रम पर ललित मोदी की वजह से बुरा असर पड़ने की आशंका थी। यूरोप जैसे देश वानूआतू पर एक्शन ले सकते थे। कहां है ये देश, 82 द्वीपों में से 65 पर ही रहती है आबादी वानूआतू दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीप देश है। यह 82 द्वीपों से बना एक द्वीपसमूह है, जिनमें से केवल 65 पर ही आबादी है। ये ऑस्ट्रेलिया के पूर्व और न्यूजीलैंड के उत्तर में या ऑस्ट्रेलिया और फिजी के बीच में स्थित है। इसकी राजधानी और सबसे बड़ा शहर पोर्ट विला है, जो इफेट द्वीप पर स्थित है। वीजा इंडेक्स के अनुसार, वानूआतू पासपोर्ट होल्डर 56 देशों में बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं। इसका सिटीजनशिप-बाई-इंवेस्टमेंट प्रोग्राम एक अत्यधिक आकर्षक प्लान बन गया है। यह खुशहाल देशों में से एक है। ललित मोदी ने वानुअतु को क्यों चुना? भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने की कोशिश के अलावा एक संभावित कारण वानूआतू का गोल्डन पासपोर्ट कार्यक्रम हो सकता है। देश में निवेश द्वारा नागरिकता (सीबीआई) या गोल्डन पासपोर्ट कार्यक्रम बेहद पॉपुलर है, जो अमीर लोगों को अपना पासपोर्ट खरीदने की अनुमति देता है। वानूआतू ही क्यों, जानिए-इसकी वजह वानूआतू अपने नागरिकों पर कोई व्यक्तिगत कर नहीं लगाता है। इसका मतलब है कि आप जो भी आय कमाते हैं, चाहे वह स्थानीय हो या अंतरराष्ट्रीय वानूआतू सरकार की ओर से टैक्सेशन से पूरी तरह मुक्त है। देश में न तो विरासत कर है और न ही कॉर्पोरेट कर। इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति का व्यवसाय वानूआजू में रजिस्टर्ड है, लेकिन देश के बाहर से आय अर्जित करता है, तो उसे उन आय पर कॉर्पोरेट करों के अधीन नहीं होना पड़ेगा। विदेश मंत्रालय ने मामले पर क्या कहा था विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, ‘ ललित मोदी ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में अपना पासपोर्ट जमा करने के लिए आवेदन किया है। इसकी जांच मौजूदा नियमों और प्रक्रियाओं को देखते हुए की जाएगी। हमें यह भी जानकारी मिली है कि उसने वानूआतू की नागरिकता हासिल कर ली है। हम कानून के तहत उसके खिलाफ मामला आगे बढ़ाना जारी रखेंगे।’ ललित मोदी साल 2010 में भारत से भाग गया था और तब से लंदन में रह रहा है। 1 करोड़ में हासिल कर लेते हैं वानूआतू की नागरिकता वानूआतू एक इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम के तहत अपनी नागरिकता बेचता है। लगभग 1 करोड़ रुपए खर्च करके इस देश की नागरिकता हासिल की जा सकती है। इस प्रोग्राम के तहत 1 हफ्ते के अंदर पैसा जमा कराने के बाद आप यहां के नागरिक बन सकते हैं। इसके अलावा यहां दोहरी नागरिकता भी हासिल की जा सकती है। वानूआतू के पासपोर्ट पर इतने देशों में वीजा फ्री जर्नी वानूआतू के पासपोर्ट पर 55 देश वीजा फ्री एक्सेस देते हैं। वहीं 34 देश वीजा ऑन अराइवल की सुविधा देते हैं। इसके अलावा यह देश टैक्स हेवन भी है, जिसके चलते पिछले कुछ समय से यहां की नागरिकता लेने का चलन बढ़ा है। वानूआतू का नागरिक बनने के लिए इस देश में रहना भी जरूरी नहीं है। वानूआतू में पर्यटन मुख्य कारोबार वानुआतू की 60 फीसदी से ज्यादा आबादी खेती-किसानी से जुड़ी है। यहां का मुख्य कारोबार पर्यटन है। जरूरी विदेशी मुद्रा पर्यटन के माध्यम से आती है। वानूआतू को दक्षिण प्रशांत क्षेत्र की प्रवाल भित्तियों की खोज करने के इच्छुक गोताखोरों के लिए छुटियां बिताने वाले प्रमुख डेस्टिनेशन में से एक माना जाता है। देश में पेट्रोलियम का कोई भंडार नहीं है। 4,000 साल से शुरू हुई इंसानों की बसावट वानूआतू पर इंसानों के आने की कहानी 4,000 साल पहले से शुरू होत है। वानूआतू में मेलानेशियाई लोग सबसे पहले आकर बसे थे। यूरोप के लोगों ने 1605 में क्यूरॉस के नेतृत्व में स्पेनिश अभियान के एस्पिरिटू सैंटो में आने पर इन द्वीपों का पता लगाया था। 1880 के दशक में फ्रांस और इंग्लैंड ने देश के कुछ हिस्सों पर अपना दावा किया और 1906 में वे एक ब्रिटिश-फ्रांसीसी सहस्वामित्व के जरिये न्यू हेब्रिड्स के रूप में इस द्वीपसमूह के संयुक्त प्रबंधन के एक ढांचे पर सहमत हुए। 1970 के दशक में एक स्वतंत्रता आंदोलन ने जन्म लिया और 1980 में वानूआतू गणराज्य बनाया गया।

रमजान और इस्लाम धर्म पर आपत्तिजनक पोस्ट, मुस्लिम समुदाय के युवक सड़क पर, पुलिस ने लाठी चार्ज कर युवकों को खदेड़ा

सहारनपुर सहारनपुर जनपद के बेहट में पिछले कुछ दिनों से रमजान और इस्लाम धर्म के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर तनाव जारी है। सोमवार को इस मामले में नया मोड़ आ गया। मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने बस स्टैंड पर एकत्र होकर नारेबाजी की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए लाठीचार्ज किया। इसके बाद पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया। दरअसल, चार दिन पहले इस्माइलपुर पठानपुरा के रहने वाले एक युवक की फेसबुक आईडी से पोस्ट डाली गई थी, जो रमजान और इस्लाम धर्म को लेकर की गई थी। उसी दिन युवक कोतवाली में पहुंच गया था और पुलिस को बताया कि किसी ने उसकी फेसबुक आईडी को हैक कर लिया है। उसकी फेसबुक आईडी से लगातार आत्तिजनक पोस्ट डलती रही। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आपत्ति जताई। उनकी मांग है कि युवक को गिरफ्तार किया जाए। पुलिस ने युवक के खिलाफ केस कर दर्ज जांच शुरू कर दी थी, लेकिन सोमवार को मुस्लिम समुदाय के युवा भारी संख्या में बस स्टैंड पर पहुंचे। पता लगते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। भारी पुलिस बल तैनात कर दिया। माहौल को भांपते हुए पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज कर दिया। कुछ युवाओं को हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि भीड़ में कुछ बाहरी युवा शामिल है। स्थिति को नियंत्रित करते हुए गश्त बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। 

12वीं पास विद्यार्थी को अंडर ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए नहीं मिल रहा

भोपाल संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लगातार प्रयासों के बीच ये खबर हैरान करने वाली है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से उत्तर मध्यमा/प्राक्शास्त्री (कक्षा 11वीं और 12वीं) करने वाले स्टूडेंट्स न तो ग्रेजुएशन के लिए किसी दूसरे कॉलेज में एडमिशन ले पा रहे है कक्षा 12वीं तक की ये कक्षाएं किसी बोर्ड से संबद्ध नहीं हैं। हालांकि जो छात्र प्राक्शास्त्री के बाद इसी विश्वविद्यालय से शास्त्री यानी ग्रेजुएशन करता है या इससे आगे की पढ़ाई करता है तो उसे सब जगह मान्य किया जा रहा है। भोपाल कैंपस में प्राक्शास्त्री कोर्स में हर साल 60 छात्रों को प्रवेश मिलता है अब अन्य संस्थानों द्वारा इसे मान्यता न देने से ये चिंतित हैं। केंद्र सरकार सभी को सर्कुलर जारी कर चुकी, फिर भी मान्यता नहीं दे रहे बोर्ड     भोपाल के आर्यावर्त शर्मा ने 2024 में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, भोपाल कैंपस से कक्षा 12वीं (प्राक्शास्त्री) की पढ़ाई की, लेकिन इसे मान्यता न मिलने के कारण किसी कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल रहा। वे सीयूईटी और अग्निवीर भर्ती में आवेदन नहीं कर पाए, क्योंकि ऑनलाइन फॉर्म में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान और केंद्रीय संस्कृत विवि का नाम उपलब्ध नहीं। अब उन्हें प्राइवेट 12वीं की पढ़ाई करनी पड़ रही है। समाधान के लिए कैंपस में कई बार संपर्क किया, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली।     भारत सरकार ने 1970 में संस्कृत शिक्षा के विकास के लिए राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की स्थापना की थी। मई 2002 में इसे बहुपरिसरीय मानित विश्वविद्यालय घोषित किया गया, जिसका भोपाल कैंपस साल 2002-03 से संचालित है।     2020 में इसे केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में शामिल कर दिया गया। 2013 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों और बोर्ड को सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया था कि उत्तरमध्यमा/प्राक्शास्त्री 11वीं और 12वीं के समकक्ष है, फिर भी कई संस्थान इसे मान्यता नहीं दे रहे हैं। मामला उच्च स्तर पर संज्ञान में यह प्रकरण उच्च स्तर पर संज्ञान में लाया गया है। प्राक्शास्त्री को केंद्रीय मंत्रालय द्वारा हायर सेकंडरी के समतुल्य माना गया है। इसे मान्य किया जाना चाहिए। -प्रो. रमाकान्त पांडेय, निदेशक, भोपाल कैंपस, केंद्रीय संस्कृत विवि जल्द समाधान किया जाएगा विषय संज्ञान में है। पूर्व में राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान थे। तब समस्या नहीं थी। मंत्रालय स्तर पर चर्चा की जा रही है। जल्द समाधान होगा।-प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, कुलपति, केंद्रीय संस्कृत विवि, दिल्ली  

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