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बच्चे के लिए गेमचेंजर साबित होगा AI ‘अप्पू’

नई दिल्ली भारत में प्रारंभिक शिक्षा बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. इसी दिशा में दिल्ली स्थित गैर-लाभकारी संगठन रॉकेट लर्निंग ने हाल ही में ‘अप्पू’ नामक एक AI-आधारित लर्निंग टूल लॉन्च किया है, जिसे Google के सहयोग से विकसित किया गया है. यह तीन से छह साल तक के बच्चों को व्यक्तिगत और संवादात्मक तरीके से सीखने में मदद करता है. खासतौर पर कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए इसे गेमचेंजर माना जा रहा है. रॉकेट लर्निंग के को-फाउंडर विशाल सुनील और अज़ीज़ गुप्ता के अनुसार, पारंपरिक एडटेक प्लेटफॉर्म अक्सर एक जैसी सामग्री दोहराते हैं, जिससे बच्चों की बौद्धिक जिज्ञासा प्रभावित होती है. अप्पू इसे बदलता है, क्योंकि यह बच्चों को संवाद के जरिए सीखने में मदद करता है. अगर कोई बच्चा किसी विषय को समझने में संघर्ष करता है, तो यह उसे नए उदाहरणों और तरीकों से सिखाने की कोशिश करता है. आवाज के ज़रिए सीखने पर जोर भारत में वॉयस नोट्स का उपयोग दुनिया में सबसे अधिक होता है. इसे ध्यान में रखते हुए अप्पू को आवाज़-आधारित लर्निंग टूल के रूप में डिजाइन किया गया है. फिलहाल यह हिंदी में उपलब्ध है, लेकिन जल्द ही मराठी, पंजाबी समेत 20 भाषाओं में लॉन्च किया जाएगा. AI का मानवीय पक्ष अप्पू को केवल ज्ञान देने वाली मशीन नहीं, बल्कि एक संरचित और संवादात्मक अनुभव देने वाला ट्यूटर बनाया गया है. रॉकेट लर्निंग ने इसे विकसित करने से पहले बेहतर शिक्षकों और देखभालकर्ताओं के तरीकों का अध्ययन किया, ताकि यह बच्चों के लिए संस्कृति-संगत और व्यावहारिक बन सके. गूगल का सपोर्ट गूगल के ग्लोबल प्रोग्राम डायरेक्टर एनी लेविन के अनुसार, गूगल ऐसी संस्थाओं को समर्थन देता है, जो बड़े सामाजिक मुद्दों को हल करने के लिए AI का उपयोग कर रही हैं. उन्होंने बताया कि गूगल ने अब तक $200 मिलियन से अधिक की राशि AI-आधारित सामाजिक परियोजनाओं को दी है. चुनौतियां और आगे की राह हालांकि, AI पर अत्यधिक निर्भरता से बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ सकता है. इसीलिए अप्पू को बच्चों के जिज्ञासु दिमाग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है. एक बड़ी चुनौती डिजिटल साक्षरता की कमी भी है. इसे देखते हुए अप्पू को व्हाट्सएप के जरिए उपलब्ध कराया गया है, ताकि माता-पिता इसे आसानी से उपयोग कर सकें. साथ ही, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को इसमें सक्रिय रूप से जोड़ा गया है. 50 मिलियन बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य रॉकेट लर्निंग का लक्ष्य 2030 तक 50 मिलियन परिवारों तक अप्पू को पहुंचाना है. संगठन का मानना है कि अगर AI-आधारित शिक्षा का फायदा केवल विशेष वर्ग तक सीमित रहा, तो समाज में AI डिवाइड बढ़ सकता है. इसे रोकने के लिए वे इसे एक सार्वजनिक डिजिटल संसाधन के रूप में विकसित कर रहे हैं. सरकार के सहयोग से आंगनवाड़ी केंद्रों को शुरुआती शिक्षा के मजबूत केंद्र में बदलने की योजना है. AI की मदद से भारत में प्रारंभिक शिक्षा को समावेशी और प्रभावी बनाने की यह एक बड़ी पहल है.

आज तड़के एक लड़की के उसके दोस्त गंभीर हालत में अस्पताल में एडमिट कराकर फरार हो गए

 इंदौर इंदौर शहर के महालक्ष्मी नगर में एक लड़की को आंख में गोली लगने की घटना सामने आई है। शुक्रवार तड़के दोस्त उसे गंभीर हालत में अस्पताल में एडमिट कराकर फरार हो गए। लड़की का नाम भावना है, जो मूलत: ग्वालियर की रहने वाली है। अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। लड़की का इलाज चल रहा है। लसूडिया पुलिस ने उस कार को ट्रेस कर लिया है, जिससे भावना के दोस्त भागे हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि पार्टी के दौरान गोली चली है, जो लड़की की आंख में लग गई।

कर्नाटक में MLA-MLC की सैलरी बढ़ाने के लिए बिल पास

बेंगलुरु कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच अल्पसंख्यकों के लिए सरकारी ठेकों में 4 फीसदी का आरक्षण देने वाला बिल पास हो गया है. इसके साथ ही मंत्रियों और विधायकों के वेतन से जुड़ा बिल भी पारित हो गया है. सदन के अंदर भारी हंगामा होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही को 01:30 बजे तक स्थगित कर दिया गया है. कर्नाटक के सरकारी टेंडर में मुस्लिमों को 4 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता साफ हो गया है. टेंडर की अधिकतम सीमा 2 करोड़ की गई है.कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम कॉन्ट्रैक्टर्स को सरकारी टेंडर में 4 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है. इसी के लिए आज विधानसभा में बिल पेश किया गया और पास हुआ. सिद्धारमैया सरकार ने कर्नाटक पब्लिक प्रोक्योरमेंट एक्ट, 1999 में संशोधन को मंजूरी दी. मंत्रियों और विधायकों की कितनी बढ़ेगी सैलरी? कर्नाटक विधानसभा में मंत्रियों और विधायकों की सैलरी से जुड़ा बिल भी पास हो चुका है. इसके बाद विधायकों की बल्ले-बल्ले हो सकती है. दरअसल, इस बिल में 100% बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है. आजतक के पास कर्नाटक विधानमंडल वेतन, पेंशन और भत्तों (संशोधन) विधेयक, 2025 का मसौदा हाथ लगा है, जिसमें विधायकों और अन्य महत्वपूर्ण अधिकारियों के वेतन और भत्तों में वृद्धि की योजना है. बिल पास होने जाने के बाद अब विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों (MLA और MLC) का वेतन दोगुना हो जाएगा, जबकि मुख्यमंत्री का वेतन 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये प्रति माह कर दिया जाएगा. यह कदम विधायकों द्वारा वित्तीय कठिनाइयों और 2022 में निर्धारित वेतन बढ़ोतरी के स्थगित होने को लेकर किए गए दबाव के बाद उठाया गया है. मंत्रियों को होगा कितना फायदा मंत्री और मुख्यमंत्री के वेतन और भत्तों में भी वृद्धि प्रस्तावित है. मुख्यमंत्री का वेतन 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है, जबकि एक मंत्री का वेतन 60 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये और उनके भत्तों को 4.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाएगा. कर्नाटक के विधायकों, मंत्रियों और विधानसभा नेताओं के लिए वित्तीय लाभ में भारी वृद्धि होगी, जो उनके वेतन और भत्तों में महत्वपूर्ण संशोधन को दर्शाता है. मंत्रियों का वेतन भी दोगुना होगा विधायकों के वेतन के अलावा कर्नाटक मंत्री वेतन और भत्ता अधिनियम, 1956 में भी संशोधन का प्रस्ताव है। इसके जरिए मंत्री का वेतन 60 हजार रुपए से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपए किया जाएगा। वहीं, सप्लीमेंट्री अलाउंस 4.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने का प्रस्ताव है। अभी मंत्रियों को HRA के रूप में मिलने वाले 1.2 लाख रुपए बढ़कर 2 लाख रुपए हो सकते हैं। 6 साल में 10 पेशों में सिर्फ सांसदों-विधायकों का वेतन बढ़ा नीति आयोग के जुलाई, 2024 में पब्लिश वर्किंग पेपर से पता चलता है कि देश में साल 2018 से 2023 के बीच के 6 साल में सिर्फ सांसदों-विधायकों के वेतन और भत्ते ही बढ़े हैं। इसमें कहा गया है कि सांसदों-विधायकों को पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के 10 विभिन्न पेशों की पहली श्रेणी में रखा गया है, जिनमें लैजिस्लेटिव प्रोफेशनल्स के अलावा सीनियर ऑफिसर्स और मैनेजर्स शामिल हैं। इसमें EPFO और अन्य आंकड़ों के बेस पर 6 साल में वेतन और भत्ते में हुई वृद्धि को आंका गया है। जनप्रतिनिधियों के अलावा प्लांट-मशीन वर्कर्स की श्रेणी में वेतन-भत्ते भी बढ़े हैं।  

107 गांवों के 211 तालाबों को भरेगा खूंटाघाट जलाशय, आज खुलेंगे गेट

बिलासपुर भीषण गर्मी को देखते हुए ग्रामीण इलाकों में निस्तारी तालाबों को भरने के लिए खूंटाघाट जलाशय से आज पानी छोड़ा जाएगा. इससे 107 गांवों के 211 तालाबों को भरा जाएगा. क्षेत्रवासियों की मांग के बाद जल संसाधन विभाग ने डेम से पानी छोड़ने के निर्देश दिए हैं. बता दें कि गर्मी को ध्यान रखते हुए जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि नहर किनारे बसे गांवों से प्राप्त आवेदनों, जन प्रतिनिधियों की मांग और ग्रामों में जल की आवश्यकता को देखते हुए निस्तारी के लिए तालाब भर जाएं. इसके लिए खूंटाघाट जलाशय के बांयी तट एवं दांयी तट नहरों से 21 मार्च को सुबह 11 बजे से पानी छोड़ा जाएगा. निस्तारी के लिए 107 ग्रामों के 211 तालाबों को भरा जाना प्रस्तावित है. इसके साथ ग्रामवासियों से अपील की गई है कि नहर के पानी का उपयोग केवल निस्तारी के लिए तालाबों को भरने के लिए हो. वहीं जल संसाधन विभाग के मैदानी अमलों को भी निर्देशित किया गया है कि निस्तारी के अलावा अन्य प्रयोजन के लिए पानी न दिया जाए और न ही पानी का अपव्यय हो.

CM यादव ने कांग्रेस की लीडरशिप पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सरकार के फैसले को हिंदू विरोधी करार दिया

भोपाल  कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा अल्पसंख्यक ठेकेदारों को 4 फीसदी आरक्षण देने को लेकर प्रदेश में सियासी बवाल खड़ा हो गया है. बीजेपी ने कांग्रेस की लीडरशिप पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सरकार के फैसले को हिंदू विरोधी करार दिया है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस मसले पर कांग्रेस पर निशाना साधा है. उन्होंने एक्स पोस्ट पर लिखा, “कर्नाटक में कांग्रेस सरकार द्वारा शासकीय कार्यों में ठेकेदारों को धर्म आधारित आरक्षण की व्यवस्था का प्रावधान करना अनुचित एवं निंदनीय है. लोकतांत्रिक देश में इस तरह किसी धर्म विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियम-प्रावधान कैबिनेट से पास कर लागू करना कांग्रेस के अनैतिक चरित्र का प्रतीक है.” उन्होंने आगे लिखा, “दलित, पिछड़े और समाज के वंचित लोगों के उत्थान के लिए भारतीय जनता पार्टी सरकार निरंतर काम कर रही है, जिससे सभी वर्गों को समाज में पूर्ण सम्मान और अधिकार मिल सके.” भारत तोड़ो की नीति पर काम कर रहे हैं कांग्रेसी नेता सीएम मोहन यादव ने आगे कहा है कि इतिहास साक्षी है कि कांग्रेस ने हमेशा संविधान के मूल्यों का सम्मान करने की बजाय जातिगत पक्षपात और समाज के विभिन्न वर्गों में भेदभाव की भावना पैदा करने में मुख्य योगदान दिया है. कांग्रेसी भारत जोड़ो नहीं, भारत तोड़ो की विचारधारा पर काम कर रहे हैं. कर्नाटक सरकार का यह फैसला इसी अपशिष्ट राजनीति का उदाहरण है. मोहन यादव ने लिखा ये भी कहा है कि इस तरह के धर्म आधारित फैसलों के विरुद्ध पूर्व में भी कई बार  न्यायालयों द्वारा निर्णय दिए गए हैं. इस बार भी कांग्रेस सरकार का यह फैसला न्यायालय में नहीं टिक पाएगा. सीएम मोहन यादव के मुताबिक, “मैं धर्म आधारित इस आरक्षण की कड़ी आलोचना करता हूं. कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में बैठे मल्लिकार्जुन खड़गे से कहना चाहूंगा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के तुष्टिकरण के फैसले को वापस कराने के लिए उचित कार्रवाई करें.”

Deepika Padukone को पीछे छोड़ ये हसीना बनी बॉलीवुड की हाइएस्ट पेड एक्ट्रेस, अपकमिंग मूवी के लिए वसूल रही मोटी फीस

मुंबई हिंदी सिनेमा में टॉप एक्ट्रेसेज की कमी नहीं है। इस वक्त बड़े पर्दे पर जिसका सिक्का चलता है, उनमें दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा, आलिया भट्ट, कटरीना कैफ और करीना कपूर खान जैसी अदाकारा हैं। मगर क्या आपको पता है कि इनमें से कौन सबसे ज्यादा फीस वसूलने वाली हीरोइन हैं? बॉलीवुड में अक्सर हीरो-हीरोइन की फीस में अंतर को लेकर बात की जाती है। हमेशा से हीरोइनों को हीरो के मुकाबले कम फीस मिलती है। मगर कुछ हीरोइनें हैं, जिन्होंने यह पैमाना बदला है और आज अपने किरदार के हिसाब से मोटी फीस ले रही हैं। पहले दीपिका हाइएस्ट पेड एक्ट्रेस थीं, लेकिन अब उनकी जगह देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) ने ले ली है। दीपिका से आगे निकलीं प्रियंका बॉलीवुड से हॉलीवुड तकअपनी एक्टिंग का लोहा मनवाने वालीं प्रियंका चोपड़ा की नेटवर्थ में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, खासकर हॉलीवुड में काम करने के बाद। आज वह सिर्फ विदेशी फिल्म नहीं बल्कि हिंदी फिल्मों के लिए भी मोटी फीस वसूल रही हैं। अपनी आगामी फिल्म के लिए वह मेकर्स से इतना पैसा ले रही हैं, जितना दीपिका ने भी किसी फिल्म के लिए नहीं ली है। प्रियंका ने ली मोटी फीस प्रियंका चोपड़ा से पहले दीपिका पादुकोण हाइएस्ट पेड एक्ट्रेस बताई जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने अपनी ब्लॉकबस्टर मूवी कल्कि 2898 एडी (Kalki 2898 AD) के लिए 20 करोड़ रुपये की फीस ली थी। अब प्रियंका हाइएस्ट पेड एक्ट्रेस बन गई हैं। बॉलीवुड हंगामा के मुताबिक, प्रियंका चोपड़ा दिग्गज निर्माता-निर्देशक एसएस राजामौली के निर्देशन में बनने वाली फिल्म एसएसएमबी 29 (SSMB 29) में करीब 30 करोड़ रुपये के आसपास फीस ले रही हैं। सिटाडेल के लिए ली थी मोटी फीस प्रियंका की इतनी मोटी फीस लेने की वजह से ही मेकर्स उन्हें कास्ट करने में उलझन में फंसे थे। मगर आखिरकार उन्हें कास्ट कर लिया गया। अगर यह सच है तो प्रियंका बॉलीवुड की हाइएस्ट पेड एक्ट्रेस हैं। हालांकि, इससे पहले प्रियंका ने अपनी हॉलीवुड वेब सीरीज सिटाडेल (Citadel) करीब 41 करोड़ रुपये वसूले थे जो किसी भी हीरोइन के लिए बड़ी बात थी। 6 साल बाद करेंगी कमबैक प्रियंका चोपड़ा ने बॉलीवुड में करीब दो दशक तक काम किया है, लेकिन आज वह हॉलीवुड मूवीज में एक्टिव हैं। खैर, 6 साल बाद एक्ट्रेस हिंदी सिनेमा में कमबैक करने जा रही हैं। वह इन दिनों महेश बाबू के साथ फिल्म SSMB 29 की शूटिंग कर रही हैं।

रायपुर : अग्निवीर भर्ती के परिणाम 22 मार्च को

रायपुर छत्तीसगढ़ में अग्निवीर भर्ती के परिणाम कल 22 मार्च 2025 को घोषित किए जाएंगे। परीक्षा में सफल अभ्यर्थी  किं इस साल भारतीय सेना में अग्निवीर बनकर देश की सेवा करेंगे। अभ्यर्थी परिणाम देखने के लिए जॉइन इंडियन आर्मी के साइट https://www.joinindianarmy.nic.in/   का अवलोकन कर सकते हैं।  परिणाम  सेना भर्ती कार्यालय रायपुर के नोटिस बोर्ड पर भी प्रदर्शित किए जाएंगे। सभी सफल अभ्यर्थियों को 24 मार्च को सुबह 06:30 बजे सेना भर्ती कार्यालय रायपुर शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय किकेट स्टेडियम, नया रायपुर में प्रारंभिक ब्रीफिंग और डिस्पैच प्रलेखन के लिए उपस्थित होना आवश्यक है। इन सभी सफल अभ्यार्थियों की ट्रेनिंग 01 मई 2025 से अलग-अलग ट्रेनिंग सेंटर में शुरू जाएगी। किसी भी अन्य जानकारी और समस्या के समाधान के लिए सेना भर्ती कार्यालय रायपुर के टेलिफोन नंबर 0771-2965212,0771-2965214 पर संपर्क किया जा सकता है।

महासमुन्द : नीति आयोग की महानिदेशक श्रीमती निधि छिब्बर ने आकांक्षी जिलों के प्रगति सूचकांकों की समीक्षा

महासमुन्द : नीति आयोग की महानिदेशक श्रीमती निधि छिब्बर ने आकांक्षी जिलों के प्रगति सूचकांकों की समीक्षा सूचकांकों की सतत समीक्षा होती रहे – श्रीमती छिब्बर महासमुन्द नीति आयोग की महानिदेशक व राज्य नोडल अधिकारी आकांक्षी विकास कार्यक्रम श्रीमती निधि छिब्बर ने आज शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला अधिकारियों की बैठक लेकर आकांक्षी सूचकांकों की प्रगति की समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि, कौशल, वित्तीय समावेश, और बुनियादी ढांचे में हुए कार्यों की समीक्षा की और रैंकिंग सुधारने के लिए अधिकारियों को बेहतर प्रदर्शन की दिशा में काम करने के निर्देश दिए। श्रीमती छिब्बर ने कहा कि सम्पूर्णता अभियान का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है और इसके लिए अधिकारियों को सक्रिय रूप से कार्य करना होगा। साथ ही, कार्यों की प्रगति सूचकांकों के अनुरूप तीव्र गति से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंकड़े लक्ष्य पूर्ति के पश्चात ही सतत समीक्षा करते रहे ताकि विकास की प्रक्रिया न रूके। उन्होंने कहा कि मैदानी अमलों को जो आंकड़े भरते हैं उनका प्रशिक्षण किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि जिले में पिथौरा विकासखंड को नीति आयोग द्वारा आकांक्षी जिला के रूप में चयन किया गया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस.आलोक ने विभागीय गतिविधियों से संबंधित प्रगति एवं लक्ष्य के संबंध में पावर पाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुति दी। समीक्षा में स्वास्थ्य एवं पोषण क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने, बीमारियों की पहचान के लिए अभियान चलाने और कुपोषित बच्चों के लिए सघन मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा, शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए विभिन्न सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सुधार करने की बात की गई और पारम्परिक व्यवसायों को कौशल विकास प्रशिक्षण के साथ जोड़ा जाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। श्रीमती छिब्बर ने डाटा एंट्री के लिए विशेष प्रशिक्षण की भी आवश्यकता बताई और बच्चों के कम वजन की समस्या पर ध्यान देते हुए एनआरसी में भर्ती कराने और पोषण ट्रेकर के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विकासखण्डों में एनआरसी खोले जाएं। वहीं किसानों को सशक्त बनाने के लिए किसान उत्पादक संघ का निर्माण भी किया जाए। महिलाओं को उनके रिवॉल्विंग फंड समय पर उपलब्ध कराएं ताकि फंड से अपने व्यवसायों को गति दे सकें। श्रीमती छिब्बर ने सूचकांकों के सुधार के लिए जन्म के समय बच्चों के कम वजन को ध्यान में रखते हुए एनआरसी में भर्ती कराने और पोषण ट्रेकर के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग करने कहा है। साथ ही महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य और मितानिनों को आपस में समन्वय कर डाटा एकत्र करने के  निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग को शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए नियमित वार्षिक कैलेण्डर का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए हैं। अध्यापकों को राज्य एवं जिला स्तर पर अलग-अलग विषयों पर प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। बैठक में अपर कलेक्टर रविराज ठाकुर, अनुविभागीय अधिकारी श्री हरिशंकर पैकरा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, महिला एवं बाल विकास एवं जिले के विभिन्न विभागों के ज़िला अधिकारी उपस्थित थे।

चढ़ते पारे ने बढ़ायी मुसीबत, 2024 सबसे गर्म वर्ष, टूटा 175 साल का रिकॉर्ड

नई दिल्ली  संयुक्त राष्ट्र (UN)के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) ने  अपनी एनुअल क्लाइमेट स्टेटस रिपोर्ट (Annual State of the Climate Report) जारी की। इसमें शुरुआती आंकड़ों की पुष्टि करते हुए संकेत दिया गया कि 2024 अब तक का सबसे गर्म साल रहा। 2024 ने 2023 में बनाए गए पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। WMO के अनुसार, 2024 में पहली बार वैश्विक तापमान 1850-1900 में निर्धारित आधार रेखा से 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसने पिछले 175 साल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। 10 सालों में हीटवेव से हालात खराब जबकि इससे पहले की रिपोर्ट में 2014 से 2023 का समय सबसे गर्म दशक के रूप में रिकॉर्ड किया गया था। इन 10 सालों में हीटवेव ने महासागरों को प्रभावित किया। साथ ही ग्लेशियरों (Glaciers) को रिकॉर्ड बर्फ का नुकसान हुआ। लाखों लोगों को छोड़ना पड़ा घर     2024 में चक्रवात, बाढ़, सूखा और अन्य आपदाओं ने 2008 के बाद से सबसे अधिक लोगों को विस्थापित किया,     ऐसे में 36 मिलियन लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा था।     सिचुआन भूकंप के बाद चीन में लगभग आधे 15 मिलियन विस्थापित हुए थे।     बाढ़ ने भारत में भी लाखों लोगों को प्रभावित किया।     सऊदी अरब सहित दर्जनों अभूतपूर्व हीटवेव दर्ज किए गए जहां हज यात्रा के दौरान तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया । मौसम वैज्ञानिक ने दी चेतावनी ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के फेनर स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एंड सोसाइटी की प्रोफेसर सारा पर्किन्स-किर्कपैट्रिक ने कहा कि दुनिया एक ऐसे प्वांइट पर पहुंच गई है जहां शुद्ध शून्य उत्सर्जन अब पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमें अपने अलार्म पर स्नूज बटन दबाना बंद करना होगा, जो कि अब नियमित रूप से होने वाले रिकॉर्ड तोड़ने वाले वैश्विक तापमान हैं। उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन हो रहा है, यह हमारी वजह से है, और बिना किसी गंभीर कार्रवाई के, यह और भी बदतर होता जाएगा? यह जितना लंबा चलेगा, चीजों को बेहतर बनाना उतना ही मुश्किल होगा।’

रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन को भी पटरियों पर उतारने की तैयारी में

नई दिल्ली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस का डेब्यू हुए 6 साल बीत चुके हैं। 2019 से शुरू हुई रफ्तार की यह कहानी अब 136 सेवाओं तक पहुंच चुकी है। इनमें लगातार इजाफा भी जारी है। अब रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन को भी पटरियों पर उतारने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही यात्री लंबी दूरी का सफर आराम से तय कर सकेंगे। वंदे भारत ट्रेनें अब कई शताब्दी ट्रेन मार्गों पर उपलब्ध हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की सबसे तेज ट्रेन है और 180 किमी/घंटा तक की गति तक पहुंचने में सक्षम है। अब तक, यह दिल्ली और वाराणसी जैसे छोटे और मध्यम दूरी के प्रमुख शहरों को जोड़ती है। कैसे हुई शुरुआत 15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली-कानपुर-इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई थी। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत इन ट्रेनों को पटरियों पर उतारा गया था। आम ट्रेनों के मुकाबले वंदे भारत एक्सप्रेस रफ्तार से लेकर सुरक्षा स्तर तक कई सुविधाओं से लैस है। क्या हैं विशेषताएं वंदे भारत एक्सप्रेस में एग्जीक्यूटिव क्लास में रिक्लाइनिंग एर्गोनोमिक सीटें, सभी कोच में सीसीटीवी और हर सीट पर मोबाइल चार्जिंग सॉकेट, ऑटोमैटिक दरवाजे, पेंट्री में हॉट केस, वॉटर कूलर, डीप फ्रीजर, हर कोच में आपातकालीन खिड़कियां, अलार्म पुश और टॉक बैक यूनिट्स हैं। ये ट्रेने 160 किमी की रफ्तार से दौड़ सकती हैं। स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस रेल मंत्रालय ने 3 जनवरी को बताया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने पिछले तीन दिनों में अपने कई परीक्षणों में 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति प्राप्त की है। जनवरी के अंत तक यह परीक्षण जारी रहेंगे। उसके बाद देश भर के रेल यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए यह विश्व-स्तरीय यात्रा उपलब्ध कराई जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका एक वीडियो भी एक्स पर पोस्ट किया था। क्या होगा खास इन वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को स्वचालित दरवाजे, बेहद आरामदायक बर्थ, ऑन बोर्ड वाई-फाई और विमान जैसी डिज़ाइन जैसी सुविधाओं के साथ डिज़ाइन किया गया है। देश में यात्री पहले से ही मध्यम और छोटी दूरी पर चलने वाली 136 वंदे भारत ट्रेनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

काम के बोझ से दबे हुए रेलवे के सभी विभागों के वरिष्ठ पर्यवेक्षकों को ग्रेड-पे 4800/- & ग्रेड-पे 5400/- (पे-लेवल -8, पे-लेवल -9 ) कैसे मिले ?

How did the Senior Supervisors of all departments of Railways, who are burdened with work, get Grade Pay 4800/- & Grade Pay 5400/- (Pay Level -8, Pay Level -9)? आमला/बैतूल (हरिप्रसाद गोहे) !लगभग दो वर्ष पूर्व जारी हुआ रेलवे का एक आदेश कार्यबोझ से दबे कर्मचारियों के विषाद का विषय बना हुआ है। यह प्रावधान रेलवे सुपरवाइज़रों को उच्चतम वेतनमान ग्रेड-पे 4800/- एवं ग्रेड-पे 5400/- (पे-लेवल -8, पे-लेवल -9 ) में पदोन्नति देने से संबंधित है, जिसमें एक अजीब शर्त जोड़ी गई है – उनके अपने विभाग से कुछ पदों को “मैचिंग-सरेंडर” करना। सतह पर यह नीति विभागीय संसाधनों के संतुलन और कुशलता को बढ़ाने का प्रयास लगती है, लेकिन गहराई में जाएं तो यह अव्यवस्था, अन्याय और कर्मचारियों के साथ भेदभाव की एक दर्दनाक कहानी बयां करती है। प्रावधान की दोहरी मार ………इस नीति के तहत, जिन विभागों में “फालतू कर्मचारियों” की भरमार है, वहां सुपरवाइज़रों को आसानी से उच्चतम वेतनमान में पदोन्नति मिल गई। उनके विभाग से कुछ पदों को सरेंडर कर दिया गया, और यह प्रक्रिया उनके लिए एक औपचारिकता मात्र बनकर रह गई। लेकिन दूसरी ओर, वे विभाग जहां स्टाफ की कमी है या कर्मचारी पहले ही अत्यधिक कार्यबोझ तले दबे हुए हैं, वहां यह शर्त एक अभिशाप बन गई। इन विभागों मे सरेंडर करना संभव ही नहीं है, क्योंकि हर कर्मचारी पहले से ही अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहा है। नतीजा? रेलवे के कुछ विभागों के सुपरवाइज़र अब तक उच्चतम वेतनमान ग्रेड-पे 4800/- & ग्रेड-पे 5400/- (पे-लेवल -8, पे-लेवल -9 ) से वंचित हैं।यहां सवाल उठता है – क्या मेहनती और समर्पित कर्मचारियों को दंडित करना और निकम्मेपन को पुरस्कृत करना नैसर्गिक न्याय है? क्या यह नीति कर्मचारियों के बीच समानता और प्रोत्साहन की भावना को बढ़ाती है, या इसे कुचलती है? नौकरशाही अव्यवस्था का नमूना …………यह प्रावधान नौकरशाही अव्यवस्था (Bureaucratic Chaos) का एक जीता-जागता उदाहरण है। नौकरशाही अव्यवस्था तब उत्पन्न होती है, जब नीतियां बनाते समय जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर दिया जाता है और एक समान नियम सभी पर थोप दिए जाते हैं, भले ही परिस्थितियां भिन्न हों। इस मामले में, नीति निर्माताओं ने यह नहीं सोचा कि हर विभाग की अपनी जरूरतें और चुनौतियां होती हैं। जहां एक विभाग में अतिरिक्त कर्मचारी हो सकते हैं, वहीं दूसरा विभाग न्यूनतम स्टाफ के साथ संचालित हो रहा हो। एक ही छड़ी से सबको हांकने की कोशिश ने व्यवस्था को और उलझा दिया है। प्रभावित कर्मचारियों का दर्दकल्पना करें उस सुपरवाइज़र की मन:स्थिति का, जो दिन-रात मेहनत करता है, अपने सीमित संसाधनों के साथ विभाग को चलाता है, और फिर उसे पता चलता है कि उसकी मेहनत का इनाम नहीं, बल्कि सजा मिलेगी। दूसरी ओर, वह अपने समकक्ष को देखता है, जिसके विभाग में काम का बोझ कम है और कर्मचारी अधिक हैं, और उसे आसानी से पदोन्नति मिल जाती है। यह केवल पदोन्नति का मामला ही नहीं है, बल्कि एक भावनात्मक आघात भी है।“हम दिन-रात काम करते हैं, छुट्टियां तक नहीं लेते, फिर भी हमें पीछे छोड़ दिया जाता है। क्या हमारा मेहनत करना ही हमारी गलती है?” – यह कहना है हर एक प्रभावित सुपरवाइज़र का, जिसकी आवाज में निराशा और गुस्सा साफ झलकता है। ऐसे कर्मचारी न केवल अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और मनोबल पर भी गहरा असर पड़ रहा है। नैसर्गिक न्याय कहां है ? ……..नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत कहता है कि हर व्यक्ति को उसकी योग्यता और परिस्थिति के आधार पर समान अवसर मिलना चाहिए। लेकिन इस प्रावधान में तो उल्टा हो रहा है। जहां कार्य बोझ कम और स्टाफ़ अधिक है उन्हें इनाम मिला, और जहाँ स्टाफ़ कम और कार्य बोझ अधिक उन्हें दंड। यह नीति कर्मचारियों के बीच असमानता को बढ़ावा दे रही है और मेहनत करने की भावना को कुचल रही है। क्या यह उचित है कि पदोन्नति का आधार आपकी मेहनत न हो, बल्कि यह हो कि आपके विभाग में कितने “फालतू” कर्मचारी हैं ? निष्कर्ष और सुझाव …….यह प्रावधान न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि नैतिक रूप से भी गलत है। इसे तत्काल संशोधित करने की जरूरत है। विभागों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लचीले नियम बनाए जाने चाहिए। उदाहरण के लिए, जिन विभागों में स्टाफ की कमी है, वहाँ सरेंडर की शर्त को हटाया जा सकता है या वैकल्पिक मानदंड तय किए जा सकते हैं। साथ ही, कर्मचारियों की मेहनत और योगदान को मापने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि कोई भी अपने अधिकारों से वंचित न हो।अंत में, यह सवाल पूछना जरूरी है – क्या हम ऐसी व्यवस्था चाहते हैं, जहां मेहनत की सजा और निकम्मेपन का इनाम मिले? अगर नहीं, तो इस जारी नौकरशाही अव्यवस्था को खत्म करने का समय आ गया है, ताकि प्रभावित कर्मचारियों के साथ न्याय हो सके और उनका दर्द सुना जा सके।वीरेंद्र कुमार पालीवालसेवानिवृत्त स्टेशन प्रबंधक(लेखक स्वयं इस अव्यवस्था का शिकार हुआ है)

बादल यादव ने कोर्ट से स्टे लेने के बाद भूमि पर कब्जा कर शुरू कर दी प्लॉटिंग, मेयर ने खड़े होकर हटवाया कब्जा

गाजियाबाद  गाजियाबाद में विजय नगर क्षेत्र के वार्ड-7 सुदामापुरी डूंडाहेड़ा में करीब 35 करोड़ रुपये की जमीन को निगम ने गुरुवार को कब्जामुक्त करवाया है। ऐसा बताया जा रहा है कि नगर निगम की भूमि पर बादल यादव नामक व्यक्ति ने कोर्ट में केस डालकर अपनी भूमि बताते हुए स्टे ले लिया था और अपना कब्जा कर प्लॉटिंग करनी शुरू कर दी थी। इसमें नगर निगम भी स्टे के खिलाफ कोर्ट गया। कोर्ट ने बुधवार को इस प्रकरण में निगम के पक्ष में फैसला सुनाया। इस क्रम में गुरुवार को मेयर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य मलिक की उपस्थित में यहां जमीन को कब्जा मुक्त करवाने के लिए बुलडोजर चलवाया गया। अवैध कब्जे का ध्वस्तिकरण की कार्यवाही करते हुए 5500 वर्गमीटर भूमि खाली कराई है। इसकी कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये है। निगम की टीम ने सुबह 9:30 बजे से 4 बजे तक कब्जा हटाने की कार्यवाही की गई है। इसमें 10 बुलडोजर 10 डंपर को लगाया गया। भूमि खाली कराने साथ के साथ तारों से फेंसिंग भी की गई है। बादल यादव के खिलाफ FIR की कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। इस मौके पर इस दौरान अपर नगर आयुक्त अरुण यादव, सहायक नगर आयुक्त पल्लवी सिंह, सहायक नगर आयुक्त अंगद गुप्ता, मुख्य अभियंता एन के चौधरी, एसीपी कल्पना पांडेय, सिटी जोनल प्रभारी महेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता मिश्रा, कर्नल दीपक शरण, पार्षद पति थान सिंह समेत पुलिस के जवान उपस्थित रहे। खाली जगह पर बनेगा बालिका इंटर कॉलेज मेयर ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में नगर निगम की एक इंच भूमि भी नहीं कब्जाने दी जाएगी। बल्कि गाजियाबाद को भूमाफियाओं मुक्त कराने की कार्यवाही की जाएगी। आज सुदामापुरी में बुलडोजर गरजा है तो जल्द ही नंदग्राम में भी गरजेगा। इसके साथ ही सुदामापुरी की भूमि पर बालिकाओं के लिए 12वीं तक का विद्यालय भी बनाया जाएगा। इसके लिए कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। इसमें नगर आयुक्त ने भी सहमति से साथ अग्रिम कार्यवाही के निर्देश दिए।

4 टीमें आईपीएल 2025 प्लेऑफ में पहुंचेंगी वीरेंद्र सहवाग ने की भविष्यवाणी, जाने नाम

नई दिल्ली  आईपीएल 2025 शुरू होने में अब बस कुछ ही घंटे बचे हैं। टूर्नामेंट में हर टीम एक से बढ़कर धाकड़ खिलाड़ियों के साथ मैदान पर उतर रही है। अब दौर है टूर्नामेंट के प्लेऑफ की भविष्यवाणी का। टीम इंडिया के पूर्व विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग, इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन और ऑस्ट्रेलिया पूर्व विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट जैसे पूर्व क्रिकेटरों ने क्रिकबज से बात करते हुए अपनी टॉप 4 टीमें बताई। कौन-कौन-सी 4 टीमें आईपीएल 2025 प्लेऑफ में पहुंचेंगी? वीरेंद्र सहवाग ने हालांकि सबसे रोचक 4 टीमों को चुना है। सहवाग ने अपनी टॉप 4 टीमें बताई हैं- मुंबई इंडियंस (MI), सनराइजर्स हैदराबाद (SRH), पंजाब किंग्स (PBKS) और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG)। इसका सीधा मतलब है कि सहवाग को विराट कोहली की टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और एमएस धोनी की टीम चेन्नई सुपर किंग्स के अलावा अपनी डोमेस्टिक टीम बेस्ट फ्रेंचाइजी यानी दिल्ली कैपिटल्स पर भी भरोसा नहीं है। मुंबई और हैदरबाद जीत चुके हैं आईपीएल का खिताब मुंबई इंडियंस ने 5 बार रोहित शर्मा की कप्तानी में आईपीएल का खिताब जीता है, जबकि फिलहाल टीम के कप्तान हार्दिक पंड्या हैं। उन्होंने पिछले सीजन हिटमैन को रिप्लेस किया था। सनराइजर्स हैदराबाद ने 2016 में विराट कोहली की कप्तानी वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को हराकर डेविड वॉर्नर की लीडरशिप में कमाल किया था। टीम के कप्तान पैट कमिंस हैं। पिछले सीजन उसने फाइनल तक का सफर तय किया था। पंजाब और लखनऊ नए कप्तान के साथ रचना चाहेंगे इतिहास प्रीति जिंटा की सहमालिकाना हक वाली पंजाब किंग्स को अपने पहले खिताब का इंतजार है। अच्छी बात यह है कि टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर हैं। अय्यर की कप्तानी में कोलकाता नाइटराइडर्स ने आईपीएल 2024 का खिताब अपने नाम किया था। हालांकि, अय्यर को उतना श्रेय नहीं मिला, जितना मिलना चाहिए था। सहवाग की आखिरी पसंद लखनऊ सुपर जायंट्स है। केएल राहुल की कप्तानी में टीम का हाथ खाली रहा था और इस बार ऋषभ पंत टीम को लीड करेंगे।

अबूझमाड़ वर्षों तक विकास की धारा से वंचित रहा, लेकिन हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर नारायणपुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र अबूझमाड़ के 120 बच्चों ने आज विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तथा वनमंत्री केदार कश्यप से मुलाकात की। ये बच्चे ‘स्वामी विवेकानंद युवा प्रोत्साहन योजना’ के तहत राजधानी रायपुर के शैक्षणिक भ्रमण पर आए थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से संवाद किया और उन्हें विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार अबूझमाड़ के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अबूझमाड़ वर्षों तक विकास की धारा से वंचित रहा, लेकिन हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि यहां के हर गांव तक शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचे।  उन्होंने भ्रमण पर आए बच्चों से कहा कि आपका उज्ज्वल भविष्य ही हमारी प्राथमिकता है। अबूझमाड़ में तेजी से हो रहे विकास कार्य मुख्यमंत्री साय ने बताया कि अबूझमाड़ के गांवों में सड़क निर्माण, मोबाइल टावर लगाने, स्कूलों के विकास और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ‘नियद नेल्ला नार योजना’ के तहत वहां तेजी से बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय ने यह भी बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक में अबूझमाड़ सहित पूरे बस्तर क्षेत्र के विकास को लेकर व्यापक चर्चा हुई। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस क्षेत्र में शिक्षा और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए ठोस कार्ययोजनाओं पर काम कर रही हैं। आपकी शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य हमारी जिम्मेदारी- उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बच्चों से बातचीत करते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि अबूझमाड़ के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले, ताकि वे अपने क्षेत्र और प्रदेश के विकास में योगदान दे सकें। उन्होंने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सरकार आपके साथ है और हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आश्वस्त किया कि अबूझमाड़ में बेहतर स्कूल, छात्रावास, स्वास्थ्य केंद्र और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

भोपाल की 17 चुनिंदा टीमों के बीच होगा रोमांचक मुकाबला

भोपाल  स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी के फुटसल अरेना का भव्य शुभारंभ 21 मार्च को स्कोप फुटसल लीग के आगाज के साथ किया जाएगा। यह रोमांचक टूर्नामेंट 21 से 24 मार्च तक विश्वविद्यालय परिसर में हाल ही में निर्मित फुटसल अरेना में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर आज स्कोप फुटसल लीग में भाग लेने वाली क्लब टीमों की आधिकारिक जर्सी लॉन्च की गई। जर्सी लॉन्चिंग कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय सिंह, कुलसचिव डॉ. सितेश सिन्हा और मुख्य वित्त लेखा अधिकारी श्री विनीत शुक्ला ने संयुक्त रूप से क्लब टीमों की जर्सी लॉन्च की। इस दौरान सभी क्लब टीमों के कैप्टेन्स भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुलपति डॉ. विजय सिंह ने कहा स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी न केवल अकादमिक उत्कृष्ट के लिए समर्पित है बल्कि खेलों और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी प्रतिबद्ध है। फुटसल अरेना के शुभारंभ के साथ हमें विश्वास है कि यह युवा खिलाड़ियों के लिए एक शानदार प्लेटफॉर्म साबित होगा। इस रोमांचक प्रतियोगिता के साथ स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी खेल जगत में एक नई पहचान बनाने के लिए तैयार है। टूर्नामेंट के विजेता और उपविजेता को नगद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस टूर्नामेंट में भोपाल की 17 सर्वश्रेष्ठ फुटसल टीमें हिस्सा ले रही हैं, जिन्हें चार पूलों में विभाजित किया गया है।   पूल A: गोरखा एफसी, रॉ एफसी, नवाब एफसी, मैदान एफसी। पूल B: कसोल टाइगर एफसी, अंकुर एफसी, गॉडज़िला एफसी, पीस मेकर एफसी। पूल C: टीटीएनएस जूनियर एफसी, स्मैश एफसी, आरएनटीयू एफसी, एसजीएसयू एफसी। पूल D: सेंट्रल बे एफसी, एस्पीरियन एफसी, शूटिंग स्टार एफसी, गेम ऑन एफसी, एटॉमिक एफसी।

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