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ग्वालियर शहर में आवारा श्वानों के वैक्सीनेशन के लिये संचालित एबीसी सेंटर अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करे: कलेक्टर

ग्वालियर ग्वालियर शहर में आवारा श्वानों के वैक्सीनेशन के लिये संचालित एबीसी सेंटर अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करे। इसके साथ ही नगर निगम विशेष दल गठित कर शहर भर में आवारा श्वानों के टीकाकरण का विशेष अभियान चलाएँ। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने ग्वालियर नगर निगम द्वारा बिरलानगर पुल के नीचे संचालित एबीसी सेंटर का अवलोकन कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस मौके पर नगर निगम आयुक्त श्री संघ प्रिय, अपर आयुक्त श्री मुनीष सिकरवार, एबीसी सेंटर के संचालन में लगी एजेंसी के पदाधिकारी एवं निगम के अधिकारीगण उपस्थित थे।  कलेक्टर श्रीमती चौहान ने कहा कि ग्वालियर शहर में श्वानों के काटने की कई घटनायें सामने आई हैं। इनको देखते हुए एबीसी सेंटर अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करे। सेंटर में प्रतिदिन क्षमता के अनुरूप श्वानों को लाकर उनके वैक्सीनेशन एवं अन्य कार्य को किया जाए। सेंटर में आने वाले सभी श्वानों को मेडीकल उपचार के साथ-साथ निर्धारित रोस्टर के अनुरूप भोजन भी उपलब्ध कराया जाए। कलेक्टर श्रीमती चौहान ने कहा है कि एबीसी सेंटर के साथ-साथ शहर भर में आवारा श्वानों के टीकाकरण के लिये निगम विशेष अभियान चलाए। इसके लिये टीमों की संख्या बढ़ाकर शहर के सभी क्षेत्रों में वैक्सीनेशन का कार्य किया जाए। वैक्सीनेशन के कार्य को ट्रेंड स्टाफ के माध्यम से ही किया जाए, यह भी सुनिश्चित हो। एबीसी सेंटर के कर्मचारियों के साथ-साथ निगम का अमला भी इस कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।

ग्वालियर जिले के प्रवास पर आज रहेंगे केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विभिन्न कार्यक्रमों में होंगे शामिल

ग्वालियर केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 24 मार्च को ग्वालियर जिले के प्रवास पर रहेंगे। श्री सिंधिया इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार केन्द्रीय मंत्री श्री सिंधिया 24 मार्च को प्रात: 10.30 बजे विजयाराजे शासकीय कन्या महाविद्यालय मुरार के वार्षिकोत्सव में शामिल होंगे और विद्यार्थियों के साथ संवाद करेंगे। इसके बाद सड़क मार्ग से कल्याणी – छीमक होते हुए अपरान्ह 1.15 बजे भितरवार पहुँचेंगे और वहाँ पर भितरवार व डबरा क्षेत्र के विद्युत उपकेन्द्र और अन्य विकास कार्यों का लोकार्पण करेंगे। श्री सिंधिया इस कार्यक्रम के बाद सड़क मार्ग द्वारा ग्वालियर में कोटेश्वर पैलेस गार्डन पहुँचकर होली मिलन समारोह में शामिल होंगे।  केन्द्रीय मंत्री श्री सिंधिया 24 मार्च को ग्वालियर में रात्रि विश्राम करेंगे और 25 मार्च को दोपहर 12.20 बजे राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयर टर्मिनल से वायुमार्ग द्वारा नई दिल्ली के लिये प्रस्थान करेंगे।

शहीद दिवस पर विशाल रक्तदान शिविर का हुआ आयोजन ।

A massive blood donation camp was organised on Martyr’s Day. हरिप्रसाद गोहे आमला । रविवार भीमनगर क्षेत्र स्थित बचपन प्ले स्कूल में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन आयोजित किया गया। उक्त आयोजन बचपन प्ले स्कूल, एच पी एस आमला, जन सेवा कल्याण समिति एवं निफा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ । जिसमें रक्तदाताओं ने नि स्वार्थ सेवा का परिचय देते हुए रिकार्ड 154 यूनिट रक्तदान किया ।,यह रक्तदान शिविर वीरता,सहयोग व ममता को समर्पित था। वीरता का पर्याय भगत सिंह,राजगुरु व सुखदेव जी के बलिदान दिवस पर ये रक्तदान शिविर सहयोग व सेवाभाव के श्रेष्ठ उदाहरण स्वर्गीय पंकज उसरेठे एवं स्व. शशि टिकारे जी की स्मृति में आयोजित किया गया । आयोजन समिति के राहुल धेण्डे व नीरज बारस्कर ने बताया कि बचपन प्ले स्कूल में आयोजित इस रक्तदान शिविर में कुल 154 रक्तदाताओ ने रक्तदान कर निस्वार्थ सेवा का परिचय दिया ,उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी रक्तदाताओं का ये उत्साह हमारे लिए सुकून अनुभव करवाने वाला था। सागर चौहान ,डॉ शिशिरकांत गुगनानी व कैलाश ठाकरे ने जानकारी दी कि इस वर्ष रक्तदान शिविर में रक्तदाताओं को धन्यवाद के साथ निफा के प्रशस्ति पत्र व विशेष ट्रॉफी भी प्रदान की गई। रक्तदान को आमला में अब एक पर्व की तरह लिया जाता है,जिसे सभी मिलकर मनाते है। आयोजन समिति के अमित यादव, आकाश जैन व हर्षित ठाकरे ने बताया कि ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत हो चुकी है, इसके बावजूद भी जिस उत्साह व जोश के साथ शहर के रक्तदाताओं ने अपनी भागीदारी इस शिविर में सुनिश्चित की उसके लिए हम मन से आभारी है सभी रक्तदाताओं के नितिन ठाकुर,चंद्रकिशोर टीकारे व जितेंद्र भावसार आगे बताते है कि विभिन्न सामाजिक संस्थाओ व धार्मिक समितियों, व्यवसायिक संगठनो एवं सेवाभावी संगठनो के सदस्यों ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाई, शिविर में भी सभी सदस्य एवं समाजसेवियों ने पहुँचकर रक्तदाताओं का मनोबल बढ़ाया, क्षेत्रीय विधायक डॉक्टर योगेश पंडाग्रे एवं भाजपा पदाधिकारी भी रक्तदान शिविर में पहुँचे और आयोजन की सराहना की, वहीं कांग्रेस पार्टी से भी मनोज मालवे,नपाध्यक्ष नितिन गाडरे, उपाध्यक्ष किशोर माथनकर सहित विभिन्न नेता शिविर में पहुँचे। वहीं बैतूल से मां शारदा समिति के शैलेन्द्र बिहारिया, पिंकी भाटिया एवं परशुराम सेना के अनिल पेशवे की विशेष उपस्थिति भी रक्तदान शिविर मे रही।भावेश मालवीय, शुभम खातरकर व अनिल सोनी ने कहा कि युवाओं के साथ-साथ महिलाओं की भी बड़ी संख्या इस शिविर में दिखी, जिससे अंदाजा लगाना मुश्किल नही है कि आमला में रक्तदान को अब अपना कर्तव्य मान लोग सतत इस परोपकार में शामिल हो रहे है। एवं प्रतिवर्ष इस रक्तदान शिविर में सौ रक्तदाताओं से अधिक की संख्या इस बात को सत्य भी साबित करती है कि आमला में रक्तदान के प्रति अद्वितीय जागरूकता आ चुकी है।राजा राठौर व अनिल सोनपुरे बताते है कि जिले के साथ अब प्रदेश स्तर पर भी आमला को रक्तदान में विशेष सहयोग के लिए पहचाना जाने लगा है। चूंकि एक्सीडेंट तथा थैलेसीमिया, सिकलसेल व विभिन्न बीमारियों में रक्त की हमेशा आवश्यकता पड़ती है, पर रक्त के लिए अभी दूसरा कोई विकल्प भी नही है, सिर्फ मानव का रक्त ही मानव के काम आ सकता है, ऐसे में इस तरह के रक्तदान शिविर बहुत महत्वपूर्ण हो जाते है,एवं इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते है वे सभी रक्तदाता जो हाथ बढ़ाकर सहज भाव से रक्तदान के लिए तैयार रहते है। बचपन प्ले स्कूल में आयोजित इस रक्तदान शिविर में शहरवासियो का जोश देखकर बैतूल हॉस्पिटल से आई ब्लड बैंक की टीम भी खासी प्रभावित हुई। जानने योग्य बात है कि जिले में सबसे ज्यादा रक्तदान शिविर आमला में ही लगते है, एवं शहर की विभिन रक्तदान समितियां व सेवाभावी संगठन मिलकर इन शिविरों को सफल बनाते है।बचपन प्ले स्कूल के मैनेजमेंट सदस्यों व जनसेवा कल्याण समिति के सदस्यों द्वारा आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सभी परोपकारी नागरिकों, युवाओं, मातृ शक्तियों, व्यापारियों, समाजसेवियों के साथ उन सभी का मन से आभार जो समय निकालकर इस पुण्य अभियान का हिस्सा बने एवं रक्तदान कर हमारा व अपने शहर का मान बढ़ाया।

संभल जाओ नहीं तो हो जाएगा सब बर्बाद! इन गलतियों के कारण महिलाओं पर ज्यादा अटैक कर रहा कैंसर

नई दिल्ली भारत के प्रमुख चिकित्सा पैनल ने खुलासा किया है कि निदान के बाद पाच में से तीन लोग कैंसर से मर जाते हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की रिपोर्ट में पाया गया कि पिछले दशक में कैंसर की घटनाओं में वृद्धि हुई है, पुरुषों की तुलना में महिलाओं की स्थिति ज्यादा खराब है।  चिंता की बात तो यह है कि दुनियाभर में कैंसर से हो रही मौतों के 10% से ज्यादा मामले सिर्फ भारत में ही आ रहे हैं। दुनिया में हर मिनट में एक महिला की ब्रेस्ट कैंसर से मौत हो रही है. डब्ल्यूएचओ ने इसके लिए कई कारण भी बताए हैं, इसमें अनहेल्दी खानपान, बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती उम्र समेत कई समस्याएं शामिल हैं. ब्रेस्ट कैंसर की ज्यादा शिकार हो रही महिलाएं रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं में कैंसर के नए केस में करीब 30% मामले ब्रेस्ट कैंसर के हैं, इसके बाद गर्भाशय कैंसर के करीब 19% मामले हैं.। पुरुषों में सबसे ज्यादा माउथ कैंसर पाया गया है, जिससे 16% नए मामले दर्ज किए गए। रिसर्च टीम ने अलग-अलग एज ग्रुप में कैंसर बढ़ने के लेवल में भी बदलाव पाया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि कैंसर की सबसे ज्यादा बीमारी वृद्धावस्था में देखी गई है, इनमें 70 साल या इससे ज्यादा उम्र के लोग हैं। इसके बाद 15 से 49  साल की उम्र वालों में कैंसर के मामले पाए गए । खुलकर बात करने से बचती हैं महिलाएं हमारा समाज अभी भी स्त्री रोग संबंधी समस्याओं के बारे में नियमित रूप से बात करने में सहज नहीं है।  महिलाएं अभी भी इसे वर्जित मानती हैं और किसी भी स्त्री रोग संबंधी समस्या के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करने में झिझकती हैं, जिससे उपचार में देरी होती है। कभी-कभी उनके लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि उनके शरीर में क्या सामान्य है और क्या असामान्य। महिलाओं में कैंसर की स्क्रीनिंग कम होती है, जिससे बीमारी देर से पकड़ में आती है। देर से पहचान होने के कारण कैंसर के मामलों की संख्या और मृत्यु दर बढ़ जाती है।   महिलाओं को कैंसर अधिक क्यों होता है? स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) और ओवेरियन कैंसर महिलाओं में सबसे आम प्रकार हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें हार्मोनल बदलाव, जीवनशैली, जागरूकता की कमी, और जेनेटिक कारण शामिल हैं। महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन** के उतार-चढ़ाव से स्तन और ओवरी से जुड़े कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।  रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद कैंसर का खतरा अधिक होता है।   जिन महिलाओं के परिवार में स्तन या सर्वाइकल कैंसर का इतिहास रहा हो, उनमें इसकी संभावना बढ़ जाती है।   स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर का खतरा ज्यादा भारत में हर 8 में से 1 महिला को अपने जीवनकाल में स्तन कैंसर होने की संभावना रहती है। भारत में हर साल 1 लाख से अधिक महिलाओं को गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर होता है। इन दोनों प्रकार के कैंसरों की दर पुरुषों में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसरों (फेफड़े, लीवर, मुँह के कैंसर) की तुलना में अधिक होती है।  स्तन कैंसर की सेल्फ-चेकिंग, पैप स्मीयर टेस्ट, और नियमित हेल्थ चेकअप** की कमी के कारण महिलाओं को देर से डायग्नोस किया जाता है।   देरी से मां बनना भी खतरनाक  जो महिलाएं  30-35 की उम्र के बाद मां बनती हैं, उनमें स्तन और ओवेरियन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।  ब्रेस्टफीडिंग न करने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर की संभावना ज्यादा होती है। पुरुषों के मुकाबले कम प्रतिशत में सही, लेकिन जो महिलाएं शराब या तंबाकू का सेवन करती हैं, उनमें कैंसर की संभावना ज्यादा होती है। महिलाओं में धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर और गले का कैंसर बढ़ रहा है।   घरेलू और कॉस्मेटिक उत्पादों में मौजूदकेमिकल्स (BPA, पैराबेन्स, फॉर्मल्डिहाइड) से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।  पानी और खाने में मौजूद कीटनाशक (Pesticides) और भारी धातुएं महिलाओं के प्रजनन अंगों पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।      कैंसर से बचाव के लिए क्या करें? -40 वर्ष की उम्र के बाद स्तन कैंसर की जांच के लिए हर साल मैमोग्राफी करवाएं। -सर्वाइकल कैंसर की पहचान के लिए 21 साल के बाद हर 3-5 साल में पैप स्मीयर टेस्ट कराएं।   – हरी सब्जियां, फल, होल ग्रेन्स और एंटीऑक्सीडेंट युक्त फूड्स खाएं।   – रोज़ाना कम से कम 30 मिनट की एक्सरसाइज या योग करें और वजन को नियंत्रण में रखें।   – मेडिटेशन, योग और रिलैक्सेशन तकनीकों से मानसिक शांति पाएं।   -एचपीवी वैक्सीन (HPV Vaccine)सर्वाइकल कैंसर से बचाव में मदद कर सकती है।   इन बातों से अनजान हें महिलाएं जब 45 वर्षीय महिला गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से पीड़ित होती है, तो उसके कैंसर की प्रक्रिया कई साल पहले ही शुरू हो चुकी होती है। इसलिए गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी टीकाकरण की सिफारिश 9-14 वर्ष की बहुत कम उम्र में की जाती है (यानी एचपीवी वायरस के संपर्क में आने से पहले)।मो टापा अब एंडोमेट्रियल (गर्भाशय) कैंसर के लिए प्रमुख परिवर्तनीय जोखिम कारक के रूप में तंबाकू चबाने के समान है। एंडोमेट्रियल कैंसर के लगभग 50% मामले मोटापे के कारण होते हैं। और दुखद बात यह है कि ऐसी अधिकांश महिलाएँ अभी भी 30 वर्ष की आयु में हैं, इस प्रकार वे अपना गर्भाशय और आगे गर्भधारण करने की क्षमता खो देती हैं। लगभग 99.9% गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर विभिन्न प्रकार के HPV वायरस के कारण होता है, जिनमें सबसे आम HPV 16 और 18 प्रकार हैं। दस में से आठ महिलाएँ अपने जीवन में किसी न किसी समय HPV वायरस से संक्रमित होती हैं।

स्कूल शिक्षा विभाग पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण पर कर रहा है कार्य

भोपाल प्रदेश में नागरिकों, विशेषकर विद्यार्थियों को अध्ययन सुविधा उपलब्ध कराने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 5 केन्द्रीय पुस्तकालयों का संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही भोपाल के जीटीबी कॉम्प्लेक्स में विभाग द्वारा वित्तीय अनुदान से स्वामी विवेकानन्द लाइब्रेरी (पूर्व ब्रिटिश लाइब्रेरी) का संचालन किया जा रहा है। इन पुस्तकालयों में विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों की भी सुविधा दी जा रही है। शासकीय मौलाना आजाद केन्द्रीय पुस्तकालय भोपाल को सेंट्रल लाइब्रेरी के नाम से भी जाना जाता है। यह पुस्तकालय साहित्यिक पुस्तकों का भंडार भी है। पुस्तकालय में न्यूनतम शुल्क पर अधिकतम सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। वर्तमान में पुस्तकालय में करीब एक लाख से अधिक पुस्तकें हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, ऊर्दू, अरबी, फारसी आदि भाषाओं में उपलब्ध हैं। इसके साथ ही विभिन्न मासिक पत्रिका, समाचार पत्र, इंटरनेट सुविधा, निशुल्क सेमिनार की सुविधा भी उपलब्ध है। पुस्तकालय के 3 अध्ययन हॉल में प्रतिदिन औसत रूप से 600 छात्र-छात्राएं बैठकर अध्ययन करते हैं। इस वर्ष मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा पुस्तकालय का अनुरक्षण एवं विकास कार्य किया गया है। पुस्तकालय में अध्ययन सुविधाओं के लिये 32 केबिन मॉडल स्टडी रूम का विकास लोक शिक्षण संचालनालय के आवंटित बजट से किया गया है। पुस्तकालय में महिला स्व-सहायता समूह को ‘दीदी कैंटीन’ के संचालन का कार्य दिया गया है। अहिल्या केन्द्रीय पुस्तकालय इंदौर 60 वर्ष पुराना हैरीटेज भवन है। ‘पुस्तकें बुलाती हैं’ अभियान के अंतर्गत इस पुस्तकालय से अब तक 17 हजार से अधिक विद्यार्थी पुस्तकालय से जुड़ कर पुस्तकालय का भ्रमण कर चुके हैं। पुस्तकालय में प्रति 15 दिवस के अंतराल में एक प्रशासनिक अधिकारी द्वारा प्रतियोगी परीक्षार्थियों को मार्गदर्शन दिये जाने की सुविधा निर्धारित की गई है। यहां लाइब्रेरी साइंस के विद्यार्थी प्रशिक्षण लेने भी आते हैं। शासकीय केन्द्रीय पुस्तकालय ग्वालियर में आने वाले छात्र-छात्राओं को व्यक्तिगत सामान रखने के लिये 190 से अधिक क्षमता वाले लॉकर रैक लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा आवंटित बजट से क्रय किया गया है। पुस्तकालय की स्वशासी समिति की बैठक के लिये निर्णय अनुसार पुरानी सदस्यताओं को संशोधित कर 13 प्रकार की नई सदस्यताएं प्रारंभ की गई हैं। पुस्तकालय की संपूर्ण गतिविधियां भी डिजिटल रूप में प्रारंभ कर दी गई है। पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिये नवीन सुविधाओं के साथ कॉम्पिटिशन कॉर्नर प्रारंभ किया गया है। पुस्तकालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों में से 20 विद्यार्थियों का विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन भी हुआ है। शासकीय केन्द्रीय पुस्तकालय जबलपुर को उसके नजदीक शासकीय उ.मा.वि. द्वारा एक अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध कराया गया है। उक्त कक्ष में केन्द्रीय पुस्तकालय का वाचनालय पाठकों के लिये संचालित हो रहा है। जबलपुर के केन्द्रीय पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले एवं ग्रामीण अंचलों से आने वाले विद्यार्थी भी लाभान्वित हो रहे हैं। पुस्तकालय के प्रचार-प्रसार के लिये समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम भी नियमित रूप से आयोजित किये जा रहे हैं। शासकीय केन्द्रीय पुस्तकालय रीवा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिये प्रतिभागियों की संख्या में लगातार वृद्धि के कारण एक अतिरिक्त वाचनालय कक्ष विकसित किया गया है। पुस्तकालय परिसर में पाठकों के लिये फ्री वाई-फाई जोन की सुविधा भी उपलब्ध है। शासकीय केन्द्रीय पुस्तकालय रीवा के परिसर में उपलब्ध रिक्त स्थान 3 मंजिला नया भवन पुनर्घनत्वीकरण योजना के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा स्वीकृत किया गया है।  

मैहर मां शारदा मंदिर के मन्नत वाले पेड़ में लगी आग, सामने आ रही भक्तों की लापरवाही

maihar fire broke out in maa sharda temple wishing tree burned मैहर ! देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शुमार मां शारदा देवी मंदिर के कैंपस में अचानक आग लग गई. मां शारदा देवी के मंदिर परिसर में स्थित मान्यता वाले पेड़ में के पास ये आग लेगी, जो देखते-देखते मंदिर के घंटे तक पहुंच गई. आग की वजह से पेड़ के पास रखे मान्यता के नारियल भी जलकर खाक हो गए. मंदिर प्रबंध समिति ने तत्काल आग पर काबू पाया जिससे बड़ी दुर्घटना होने से बच गई. इस दौरान भारी संख्या में लोग मंदिर परिसर में मौजूद थे. भक्तों की लापरवाही से लगी आग? संभावना जताई जा रही है कि दर्शनार्थी द्वारा अगरबत्ती या दीपक जलाने के दौरान वहां बांधी गई मन्ना वाली चुनरी ने आग पकड़ ली, जिससे आग पेड़ के आसपास विकराल रूप धारण कर लिया. गनीमत रही कि हादसे के वक्त मंदिर परिसर में श्रद्धालु और मंदिर समिति के लोग मौजूद थे, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया. समय रहते समिति के लोगों ने दर्शनार्थियों की मदद से आग पर काबू पा लिया. समय रहते पा लिया गया आग पर काबू इस मामले में मैहर एसडीएम विकास सिंह ने बताया,” रविवार की शाम मंदिर परिसर में लगे वृक्ष के नीचे लोग दीपक जलाकर रखते हैं. ऐसे में अचानक पेड़ में लगे रक्षा सूत्र व छोटे-छोटे चुनर में आग लग गई. आग पर तुरंत ही काबू पा लिया गया था, जिससे किसी भी प्रकार की कोई बड़ी घटना या दुर्घटना नहीं हुई है. समय रहते दर्शनार्थियों को मौके से हटा दिया गया, जिससे जानमाल की हानि नहीं हुई.”

प्रदेश में नवीन सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण के समुचित प्रबंधन से सिंचाई रकबे में निरंतर वृद्धि हो रही: मंत्री सिलावट

भोपाल जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में नवीन सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण और जल संसाधन के समुचित प्रबंधन से सिंचाई रकबे में निरंतर वृद्धि हो रही है। हर खेत तक पानी पहुंचाना प्रदेश सरकार का संकल्प है। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि यह प्रसन्नता और गौरव का विषय है कि राजगढ़ जिले की मोहनपुरा-कुंडालिया सिंचाई परियोजना को जल संसाधनों के कुशल उपयोग, जल संरक्षण और कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए सीबीआईपी (सेंट्रल बोर्ड ऑफ इरिगेशन एंड पॉवर) अवॉर्ड्स- 2024 में ‘सर्वश्रेष्ठ समन्वित जल संसाधन प्रबंधन’ (बेस्ट आईडब्लूआरएम) पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके लिए विभागीय अमला तथा क्षेत्र के किसान बधाई के पात्र हैं। पुरस्कार नई दिल्ली में सेंट्रल बोर्ड ऑफ इरीगेशन एंड पॉवर के ज्यूरी सदस्य श्री ए.के. दिनकर, श्री घनश्याम प्रसाद एवं डॉ. एम.के. सिन्हा द्वारा गत दिवस दिया गया है। इसे मुख्य अभियंता एवं परियोजना निदेशक श्री जीपी सिलावट, अधीक्षण यंत्री एवं परियोजना प्रशासक श्री विकास राजोरिया, परियोजना निदेशक श्री शुभंकर बिस्वास ने प्राप्त किया। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि यह पुरस्कार मध्यप्रदेश की अभिनव जल प्रबंधन प्रणाली और सतत कृषि विकास में योगदान को मान्यता प्रदान करता है। यह सम्मान राज्य सरकार की दूरदर्शी जल प्रबंधन नीतियों और कुशल कार्यान्वयन का परिणाम है। पुरस्कार जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों के विस्तार को प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने बताया कि मोहनपुरा-कुंडालिया सिंचाई परियोजना की सबसे बड़ी खासियत ‘रिजर्वायर से सीधे खेत तक’ (रिजर्वायर टू फॉर्म) पानी पहुंचाने की नवीनतम तकनीक है। इस तकनीक में पारंपरिक नहरों के बजाय प्रेशराइज्ड पाइप लाइन नेटवर्क का उपयोग किया जाता है, जिससे पानी बिना किसी रिसाव और वाष्पीकरण के सीधे खेतों तक पहुँचता है। पाइप लाइन आधारित सिंचाई प्रणाली से जलाशय से निकलने वाला पानी बिना खुली नहरों के सीधे किसानों तक पाइपों के माध्यम से पहुँचाया जाता है, जिससे पानी का अपव्यय न के बराबर होता है। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि भू-जल स्तर संतुलन, पर्यावरणीय संतुलन, जलभराव, मिट्टी कटाव और जैव विविधता संरक्षण के साथ ही जल प्रबंधन में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मोहनपुरा-कुंडालिया सिंचाई परियोजना ने मध्यप्रदेश को जल प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बना दिया है। इस पुरस्कार से यह सिद्ध होता है कि नवीनतम तकनीकों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जल संसाधनों का उपयोग किया जाए, तो जल संरक्षण और सतत कृषि विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है। यह परियोजना अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बनेगी और जल संसाधन प्रबंधन में मध्यप्रदेश की भूमिका को और सशक्त बनाएगी। वे नवाचार जिनके चलते मिला पुरस्कार ऊर्जा दक्षता : पानी को खेतों तक पहुँचाने के लिए प्राकृतिक ढलान और पम्पिंग सिस्टम का उपयोग किया, इससे कम ऊर्जा खपत के साथ किसानों को सिंचाई में अतिरिक्त लागत नहीं लगती। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का समावेश : खेतों में ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक को बढ़ावा दिया, जिससे किसान कम पानी में अधिक उत्पादन कर सकते हैं। जलभराव और मिट्टी कटाव रोकथाम : पारंपरिक नहरों में होने वाले जलभराव और मिट्टी के कटाव की समस्या इस प्रणाली में समाप्त हो गई, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बना रहता। हर मौसम में जल उपलब्धता : यह प्रणाली रबी और खरीफ दोनों सीजन में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करती है, जिससे किसान अधिक आत्मनिर्भर बनते हैं। “आईडब्लूआरएम सिद्धांतों का सफल क्रियान्वयन परियोजना में जल संसाधनों के समुचित और समग्र प्रबंधन का एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। आईडब्लूआरएम के तहत जल की उपलब्धता, कुशल उपयोग और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित की गई है। पारंपरिक नहरों की जगह प्रेशराइज्ड पाइप लाइनों से जल सप्लाई की। सभी जल उपभोक्ताओं को परियोजना से कृषि, पीने के पानी का समान वितरण किया। साथ ही उद्योगों के लिए भी जल आरक्षित किया गया। किसानों को आधुनिक कृषि और जल प्रबंधन तकनीकों की जानकारी दी गई, ताकि वे जल का बेहतर उपयोग कर अधिक उत्पादकता हासिल कर सकें।  

आगामी एक अप्रैल से यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू होने वाली है, पेंशन फंड रेगुलेटरी स्कीम को अमल में लाने वाली अधिसूचना जारी

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बेहद काम की खबर है। अगले महीने 1 अप्रैल से नई स्कीम लागू होने जा रही है। यह स्कीम यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) है। आगामी एक अप्रैल से यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू होने वाली है। बता दें कि केंद्र द्वारा सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू की गई एक नई पेंशन योजना है। अब बीते दिन गुरुवार को पेंशन फंड रेगुलेटरी और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम को अमल में लाने वाली अधिसूचना जारी कर दी। पीएफआरडीए ने बयान में कहा कि यूपीएस से संबंधित नियम एक अप्रैल, 2025 से लागू हो जाएंगे। बता दें कि इसके लागू होने से लगभग 23 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ होगा। क्या है स्कीम की डिटेल यूपीएस का उद्देश्य सरकार की राजकोषीय नीति और कर्मचारी लाभों के बीच संतुलन बनाना है। इस योजना के तहत रिटायरमेंट से पहले के 12 महीनों में मिले औसत मूल वेतन की 50 प्रतिशत राशि को सुनिश्चित पेंशन के तौर पर देने का प्रावधान है। इनमें कम से कम 10 साल की सेवा वाले कर्मचारियों के लिए प्रति माह ₹10,000 की सुनिश्चित न्यूनतम पेंशन शामिल है। हालांकि, ओपीएस के तहत, जबकि कोई विशिष्ट न्यूनतम पेंशन राशि अनिवार्य नहीं थी, सेवानिवृत्त लोगों को आम तौर पर उनके अंतिम वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलता था। यह स्कीम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत एक विकल्प के रूप में उपलब्ध होगी, जिसमें कर्मचारी NPS और UPS में से एक को चुन सकते हैं। फैमिली पेंशन का लाभ इसके अलावा फैमिली पेंशन के तहत केंद्रीय कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को कर्मचारी की पेंशन का 60% मिलेगा। योजना में कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 10% योगदान देंगे। वहीं, सरकार का योगदान 18.5% होगा। बता दें कि NPS में सरकार 14% का योगदान देगी। यह योजना NPS में शामिल केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लागू है, जो इसे चुनते हैं। वहीं, न्यूनतम 10 साल की सेवा वाले कर्मचारी निश्चित न्यूनतम पेंशन के हकदार होंगे। नामांकन कैसे करें? – पात्र कर्मचारी 1 अप्रैल, 2025 से प्रोटीन सीआरए पोर्टल (https://npscra.nsdl.co.in) के जरिए अपना नामांकन और दावा फॉर्म ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। – वैकल्पिक रूप से वे फिजिकली जमा करने का विकल्प चुन सकते हैं। – सरकार ने पहले 24 जनवरी, 2025 को एनपीएस के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक नए पेंशन ढांचे के रूप में यूपीएस को अधिसूचित किया था।

राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने कहा- संस्कृति के सरंक्षण और संवर्धन में शिक्षक समाज का महत्वपूर्ण योगदान है

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि शिक्षक समाज का संस्कृति के सरंक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान है । शिक्षकों के प्रयास से एक ऐसी पीढ़ी का निर्माण हो, जिसमें राष्ट्रभक्ति की भावना प्रबल हो और जो राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का आधार बने। राज्य मंत्री श्रीमती गौर महारानी लक्ष्मी बाई कन्या महाविद्यालय भोपाल में मध्यप्रदेश शिक्षण संघ द्वारा आयोजित दायित्व बोध/ शपथ समारोह को संबोधित कर रही थी। राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि मध्यप्रदेश शिक्षक संघ बीते 55 वर्षों से पूर्ण समर्पण के साथ राष्ट्र हित, शिक्षा हित, शिक्षक हित और छात्र हित में सतत कार्यरत है। राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने पदाधिकारियों को शपथ भी दिलाई। राज्य मंत्री श्री नारायण सिंह पंवार, विधायक श्री भगवानदास सबनानी, डॉ. छत्रवीर सिंह राठौर, श्री राजीव शर्मा, नागेश पांडे सहित मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के नगर, महानगर विकासखंड, तहसील और जिलों से आए हुए सभी निर्विरोध निर्वाचित सामान्य पदाधिकारी मौजूद रहे।  

उधमपुर में विमान सेवा शुरू करने पर मिली सहमति, अब सीधे फ्लाइट से वैष्णो देवी जा सकते हैं श्रद्धालु

उधमपुर जम्मू संभाग के उधमपुर में विमान सेवा शुरू करने पर सहमति मिलने इस पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए सुखद है। इससे विमान सेवा से बाहर जाने वालों को तो राहत मिलेगी ही, उधमपुर व रियासी जिले के पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। अभी तक विमान सेवा सिर्फ जम्मू और श्रीनगर के राजधानी शहरों में ही उपलब्ध है। इस कारण अगर किसी को दिल्ली, मुंबई या फिर कहीं पर भी जाना पड़े तो उसे पहले जम्मू एयरपोर्ट पर आना ही पड़ता है। हालांकि, अभी उधमपुर में कब सेवा शुरू होगी और किस जगह से सीधे फ्लाइट उतरेगी, इस पर कोई भी फैसला नहीं हुआ है। अब सीधे फ्लाइट से वैष्णो देवी जा सकते हैं श्रद्धालु अभी एक उच्च स्तरीय टीम मूल्यांकन करने के लिए आ रही है और बहुत हद तक उनकी रिपोर्ट पर ही आगे की कार्रवाई होगी, लेकिन इससे इस जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में रहने वालों के लिए एक नई उम्मीद जग गई है। श्री माता वैष्णो देवी के दर्शनों के लिए हर वर्ष एक करोड़ के आसपास श्रद्धालु आते हैं। बहुत से श्रद्धालु हवाई मार्ग से जम्मू में आते हैं। अगर उन्हें यह सुविधा उधमपुर तक मिलेगी तो कटड़ा से नजदीक होने के कारण श्रद्धालु उधमपुर को प्राथमिकता दे सकते हैं। यही नहीं अपने धार्मिक व पहाड़ी पर्यटन के लिए जाने जाने वाले उधमपुर, रियासी, डोडा जैसे जिलों में भी पर्यटक जाने को प्राथमिकता दे सकते हैं। फ्लाइट सर्विस के लिए उधमपुर होगा तीसरा शहर लेकिन इसके लिए क्षेत्र में अभी आधारभूत ढांचा विकसित करने की आवश्यकता है। अच्छी बात यह है कि उधमपुर एक सैन्य क्षेत्र भी है। यहां पर सेना की उत्तरी कमान का मुख्यालय है। वायु सेना और सीमा सुरक्षा बल का प्रशिक्षण केंद्र भी कुछ ही दूरी पर स्थित है। जहाज उतारने से इन सभी को भी लाभ होगा। जहाज उतारने के लिए पहले से ही उधमपुर में सुविधा है। ऐसे में यह उम्मीद लगाई जा सकती है कि आने वाले दिनों में चाहे कुछ एक ही सही लेकिन जहाज सेवा शुरू हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो जम्मू-कश्मीर में जम्मू और श्रीनगर के बाद उधमपुर तीसरा ऐसा शहर हो जाएगा जहां पर जहाज सेवा होगी। इससे लोगों की यात्रा बेहद आसान होगी।

मध्यप्रेदश में न्याय व्यवस्था के सभी विभाग एक दूसरे से जुड़ेंगे, ऑनलाइन होगा क्राइम जस्टिस सिस्टम, शुरू होगी नई व्यवस्था

देवास अपराधिक न्याय व्यवस्था के अलग अलग स्तंभों के मध्य सूचनाओं का आदान-प्रदान डिजिटल प्लेटफार्म पर करने के लिए देवास जिला पायलेट जिले के रूप में चयनित किया गया है। पायलेट प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश का यह पहला जिला होगा, जिसमें विवेचकों के पास टेबलेट होंगे। अपराधिक न्याय से जुड़े सभी विभाग ऑनलाइन एक दूसरे से जुड़ेंगे। विवेचना, वारंट, समन, एमएलसी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच, न्यायालय, अभियोजन और जेल विभाग जानकारियां साझा करेंगे। इस व्यवस्था को प्रदेश में लागू करने के लिए देवास जिले को पायलेट जिले के रूप में लेकर यहां पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों, एफएसएल अधिकारी, अभियोजन के वकीलों विवेचकों की ट्रेनिंग करवाई जाएगी। सिस्टम पूरी तरह से लागू होने पर अपराधिक न्याय व्यवस्था सुलभ, पारदर्शी और तेज हो जाएगी। भारतीय दंड संहिता को भारतीय न्याय संहिता से बदलने के बाद अब दंड से ज्यादा न्याय पर जोर दिया जा रहा है। पहले कानून में दंड देने की बात होती थी, जो अब पीड़ित को न्याय देने की होती है। पुलिस विभाग पूरी अपराधिक न्याय व्यवस्था को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए अब सभी स्तंभों को ऑनलाइन करने पर जोर दे रहा है। इसके तहत एफआईआर होने से जेल जाने तक सबकुछ एक क्लिक पर लाने की कोशिश है। इस पूरी कसरत के लिए देवास जिला पायलेट जिले के रूप में चयनित हुआ है और काम शुरू हो चुका है। इसके तहत प्रकरणों की विवेचना करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को टेबलेट भी दिए जाएंगे। सब कुछ पेपरलेस और तेज हो जाएगा न्याय व्यवस्था में एफआईआर से प्रक्रिया शुरू होती है। इसके बाद एमएलसी के लिए डाक्टर से संपर्क किया जाता है। विवेचना सीसीटीएनएस के माध्यम से पूर्व से ऑनलाइन है, परंतु डाक्टरी रिपोर्ट हार्ड कापी में मिलती है और इसके लिए काफी समय भी लगता है। नई प्रक्रिया में थाने से ही ऑनलाइन रिक्वेस्ट संबंधित अस्पताल में जाएगी, जिस पर रिप्लाय भी ऑनलाइन होगा। सभी एमएलसी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट टाइप की हुई होगी। आमतौर पर डाक्टरों द्वारा लिखे गए पर्चे समझने में दिक्कत होती है, परंतु टाइप होने से आसानी से समझा जा सकेगा। यह काम सीसीटीएनएस और हेल्थ के मेडलेपार साफ्टवेयर को लिंक करने से होगा। इसी तरह, एफएसएल से भी रिपोर्ट हार्ड कापी में आती थी, जो ऑनलाइन आएगी। किसी भी पोस्टमार्टम के बाद विसरा एफएसल जाता है, जिसकी रिपोर्ट काफी समय बाद आती थी। अब एफएसएल सीसीटीएनएस से लिंक होगी, जिससे रिपोर्ट पोर्टल पर थाना प्रभारी को दिखने लगेगी। इससे एफएसएल के इंतजार में प्रकरण लंबित नहीं रहेंगे। विवेचना के दौरान चालान के पूर्व ई-प्रोसिक्यूशन पोर्टल अभियोजन से डायरी स्क्रूटनी होती है। नया सिस्टम लागू होने से सीसीटीएनएस से डायरी इप्रोसिक्यूशन पर चली जाएगी। चालान को सीसीटीएनएस में सबमिट कर प्रिंट आउट निकालकर देते हैं। इसके बजाय अब आनलाइन ही न्यायालय में चार्जशीट चली जाएगी। सबकुछ पेपरलेस और तेज हो जाएगा। अब ई-विवेचना नई व्यवस्था के तहत विवेचना भी ई-विवेचना हो जाएगी। पायलेट प्रोजेक्ट के तहत जिले के विवेचकों को करीब 300 टेबलेट मिलेंगे। इसके लिए विवेचकों की ट्रेनिंग भी करवाई जाएगी। पूरी व्यवस्था लागू होने से न्याय सुलभ, तेज और पारदर्शी हो जाएगा। इसके लिए कंट्रोल रूम में रविवार को उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के न्यायमूर्तिगण व अन्य सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ कार्यशाला की जाएगी। ई-समन और वारंट व्यवस्था जारी न्यायालय में विचारण में दौरान समन व वारंट जारी होते हैं। नई प्रक्रिया में कोर्ट से आनलाइन समन और वारंट जारी किए जाएंगे, जो थाना प्रभारी की सीसीटीएनपएस आइडी में दिखेंगे। थाने में पदस्थ सभी स्टाफ के नाम रहेंगे, जिनकी बीट के आधार पर समंस वारंट संबंधित पुलिसकर्मी को आनलाइन भेजे जा सकेंगे। हर पुलिसकर्मी के पास ई-रक्षक एप्लीकेशन रहेगा। संबंधित पुलिसकर्मी वारंट होने पर वहीं संबंधित का फोटो लेकर एप्लीकेशन में अपडेट कर देगा। कोर्ट का सीआइएस सॉफ्टवेयर (कोर्ट इंफरमेशन सिस्टम) में यह दिखेगा। देवास के पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद ने बताया कि वर्तमान में ई-समन और वारंट व्यवस्था को जारी कर दिया गया है। पायलेट प्रोजेक्ट में प्रत्येक विवेचक को टेबलेट दिए जाएंगे। इनके माध्यम से विवेचक घटनास्थल के फोटो, नक्शा मौका, लेटिट्यूट, लांगिट्यूट, बयान, जब्ती की रिकार्डिंग, जब्ती पत्रक आदि की डिटेल फीड कर देंगे। बंदियों का पूरा ब्योरा भी पोर्टल पर दिखेगा न्यायालय से जो भी फैसला होगा, वह भी सीसीटीएनएस में आए नए फार्म में दिखने लगेगा। किसी को सजा होने पर जेल में इप्रिजन साफ्टवेयर में जानकारी डाली जाती है। यह भी सीसीटीएनएस से लिंक हो जाएगा, जिससे जेल में बंद अपराधियों से मिलने कौन आया, वह केस अपराध में बंद है, कब रिहा होगा आदि जानकारियां रहेंगी। आईसीजेएस पोर्टल के माध्यम से यह जानकारी भी आसानी से मिल पाएगी।

सोनकच्छ की प्रसिद्ध मावाबाटी को जीआई टैग दिलाने की तैयारी, देश में अपनी अलग पहचान बना सकती है

देवास अपने बेहतरीन स्वाद व अन्य मिठाइयों की तुलना में अधिक दिनों तक सुरक्षित रहने वाली देवास जिले के सोनकच्छ की प्रसिद्ध मावाबाटी देश में अपनी अलग पहचान बना सकती है। इस मावाबाटी के लिए जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग हासिल करने की प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है। आगामी लगभग एक माह में सोनकच्छ की मावाबाटी से जुड़ी विभिन्न जानकारी सहित इसमें उपयोग आने वाली सामग्री दूध, मावा आदि की टेस्टिंग करवाकर रिपोर्ट के साथ फाइल वरिष्ठ स्तर पर सौंपी जाएगी। इस प्रक्रिया के लिए देवास के उद्यानिकी विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। दो दिन पूर्व उज्जैन में आयोजित जीआई टैग संबंधी प्रस्तुतीकरण व परिचर्चा में सोनकच्छ की मावाबाटी के संबंध में जानकारी दी गई। इस दौरान मावाबाटी बनाने वाले एक हलवाई कनछेदीलाल विश्वकर्मा को भी साथ ले जाया गया था। जीआई टैग मिला तो डेढ़ से दोगुना तक हो सकते हैं दाम मावाबाटी को जीआई टैग दिलाने के लिए प्रस्तुतीकरण देते समय प्रस्तावक रहे आभा फाउंडेशन देवास के आशीष राठौर के अनुसार जीआई टैग मिलने से मावाबाटी बनाने वाले परिवारों को फायदा मिलेगा। वर्तमान में 300-400 रुपये किलो मिलने वाली मावाबाटी का भाव 500 से 600 रुपये तक पहुंच सकता है। मिट्टी के पात्र में दी जाने वाली मावाबाटी 10-12 दिनों तक सुरक्षित रहती है। जीआई टैग मिलने से सोनकच्छ की अलग पहचान देश, विदेश में बनेगी। जहां भी मावाबाटी बेची जाएगी, सोनकच्छ के नाम का जिक्र रहेगा। किसी केमिकल का उपयोग नहीं सोनकच्छ में बनने वाली वास्तविक मावाबाटी में किसी प्रकार के केमिकल का उपयोग नहीं किया जाता है। इसमें मावे की छोटी गोली बनाकर अंदर सूखा मेवा का उपयोग किया जाता है। इसके बाद इस गोली को एक अन्य बड़ी गोली के अंदर डाला जाता है। पकाने के लिए लकड़ी की भटि्टयों का उपयोग किया जाता जिसमें आंच मध्यम या कम रखी जाती है। सोनकच्छ में मावाबाटी का इतिहास 100 साल से भी अधिक पुराना है।

माशिम का Result समय पर लाने के लिए की नई व्यवस्था, कॉपी चेक करने वालों की ऑनलाइन होगी अटेंडेंस

भोपाल माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) ने 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में इस बार काफी सख्ती बरती है। कई मूल्यांकनकर्ता समय से समन्वयक केंद्र नहीं पहुंच रहे हैं। निर्धारित नियम के अनुसार, प्रत्येक शिक्षक को हर दिन कम से कम 30 उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन करना है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। इस कारण मंडल ने इस बार मूल्यांकनकर्ताओं की उपस्थिति को आनलाइन दर्ज करने की व्यवस्था की है। इसके लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो सभी समन्वयक केंद्रों के पास होगा। सबसे पहले शिक्षकों को ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके लिए मंडल ने सभी समन्वयक केंद्रों को निर्देश जारी किए हैं कि एक कंप्यूटर सिस्टम और एक ऑपरेटर की व्यवस्था की जाए। 24 मार्च से सभी मूल्यांकनकर्ताओं को उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज करनी होगी। बता दें कि 10वीं व 12वीं के 17 लाख विद्यार्थियों की 90 लाख उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए करीब 40 हजार शिक्षकों को लगाया गया है।   जांची गई उतरपुस्तिकाओं की संख्या भी ऑनलाइन दर्ज करनी होगी मंडल ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक मूल्यांकनकर्ता मूल्यांकन केंद्र पर उपस्थित होने पर सर्वप्रथम मूल्यांकन केंद्र पर निर्धारित स्थान पर उक्त लिंक के माध्यम से अपने आईडी सिस्टम में दर्ज कराकर अपने आने का समय पंजीकृत कराएंगे। इसी तरह निकलने से पहले प्रत्येक मूल्यांकनकर्ता फिर आईडी से निकलने का समय ऑनलाइन दर्ज कराएंगे। साथ ही एक दिन में कितनी उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया। इसकी संख्या भी दर्ज करानी होगी। यह भी निर्देशित किया है कि अगर किसी मूल्यांकनकर्ता ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कराई तो उसे उस दिन अनुपस्थित मान्य किया जाएगा। दूसरे चरण का मूल्यांकन कार्य शुरू दूसरे चरण का मूल्यांकन कार्य शनिवार से शुरू हुआ है। सुबह 10.30 बजे से साढ़े पांच बजे तक मूल्यांकन कार्य संचालित किया जा रहा है। वहीं तीसरे चरण का मूल्यांकन कार्य 31 मार्च से शुरू होगा। अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक मूल्यांकन पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस बार मई के दूसरे सप्ताह में रिजल्ट घोषित होने की संभावना है।

पति ने लगाई फांसी, पत्नी और सास 44 मिनट तक ऑनलाइन देखती रहीं… पुलिस ने किया गिरफ्तार

man hanged himself on social media live streams wife and mother in law arrested रीवा । मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर थाना क्षेत्र के मेहरा गांव में 30 वर्षीय युवक शिव प्रकाश तिवारी ने इंटरनेट मीडिया पर लाइव आकर फांसी लगा ली। घटना के लिए उसने पत्नी और सास को जिम्मेदार बताया। दोनों ने पूरा घटनाक्रम लाइव देखा, परंतु उसे नहीं रोका। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने मृतक की पत्नी प्रिया तिवारी व उसकी सास गीता पत्नी विनायक दुबे के विरुद्ध आत्महत्या करने के लिए उकसाने व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का मामला पंजीबद्ध कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घटना 16 मार्च की है। पत्नी किसी ओर से बात करने लगीसिरमौर के एसडीओपी उमेश प्रजापति ने बताया कि सेल्समैन का काम करने वाले शिव प्रकाश की शादी दो साल पहले बैकुंठपुर के रिमारी की प्रिया तिवारी से हुई थी। कुछ महीनों बाद पत्नी छिप-छिपकर किसी और से बात करने लगी, जिससे दोनों में विवाद बढ़ता गया। लगभग दो माह पहले एक दुर्घटना में पैर टूटने पर शिव प्रकाश बैसाखियों पर आ गया। इसके बाद पत्नी नवजात बच्चे को लेकर मायके चली गई और लौटने से इन्कार कर दिया। दुर्घटना के बाद मृतक अपने गांव में रह रहा था। घटना को 44 मिनट तक सास व पत्नी ने देखा ऑनलाइनयुवक पति के लाइव आकर अपनी पीड़ा सुनाने से लेकर सुसाइड करने तक का 44 मिनट का घटनाक्रम पत्नी एवं उसकी मां ऑनलाइन देखती रही। उसने पति को रोकने की कोशिश नहीं की। घटना वाले दिन युवक पत्नी को मनाने के लिए ससुराल गया था, लेकिन वहां भी उसकी बेइज्जती और मारपीट की गई। इसके बाद वह अपने घर लौट आया और फांसी लगा ली। मामले की जांच अभी जारी है। इंटरनेट मीडिया वीडियो को सबूत के तौर पर सुरक्षित रखा गया है।

डुकरसता बीट के जंगल में भीषण आग, वन विभाग की मशीनें खराब, कर्मचारियों ने गीली टहनियों से बुझाई

the forest fire spread over one hectare दमोह ! जिले में तेंदूखेड़ा से 20 किलोमीटर दूर वन परिक्षेत्र की झलौन की डुकरसता बीट के जंगल में रविवार दोपहर अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग एक हेक्टेयर तक फैल गई। मशीन खराब होने के कारण वनकर्मी गीली झाड़ियों से आग बुझाते रहे। तेज हवाओं और जंगलों में सूखे घास-फूस और पत्तों के कारण आग कुछ ही देर में बड़े क्षेत्र में फैल गई। सूचना मिलते ही वन विभाग के द्वारा चौकीदारों की टीम को मौके पर भेजा गया। उन्होंने पेड़ की टहनियों से कुछ समय आग बुझाने का प्रयास किया गया, लेकिन तेज हवाओं में आग फैलती चली गई, जिसे बुझाना संभव नहीं था। आग बुझाने की मशीन खराब होने से कर्मचारी बेबस नजर आए और गीली पेड़ों की टहनियों से आग बुझाने का प्रयास करते रहे। चौकीदार ब्रजेश ठाकुर ने बताया चार महीने पहले आग बुझाने वाली मशीन विभाग द्वारा खरीदी थी, जो खराब हो गई है। इसलिए गीली टहनियों से आग बुझा रहे हैं। वन परिक्षेत्र अधिकारी सतीश मसीही ने बताया आग लगने का कारण अज्ञात है। आग बुझाने के लिए 15 कर्मचारी प्रयास करते रहे, लेकिन आग बुझाने वाली मशीन खराब हो गई थी। करीब एक हेक्टेयर क्षेत्र में आग लगी है। आग से पेड़ों को नुकसान नहीं हुआ है। सूखी घास की पत्तियों में आग तेजी फैल गई थी, जिसे सोमवार की सुबह तक काबू कर लिया गया है। वन विभाग के पास नहीं संसाधनबता दें गर्मी शुरू होते ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। खेतों में फसल कटाई के बाद किसान आग लगा रहे हैं, जिससे भी जंगल में आग लग रही है। जिस पर काबू पाने के लिए वन विभाग और शासन प्रशासन के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। आगजनी की घटनाओं से जंगलों का भारी विनाश हो रहा है। फायर ब्रिगेड की मदद से आग पर काबू करने का प्रयास किया जाता है, लेकिन जब तक फायर ब्रिगेड वाहन पहुंचता है। बड़े इलाके में आग लग चुकी होती है।

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