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14 अप्रैल से विवाह के कई शुभ योग

14 मार्च 2025 से खरमास की शुरुआत हो चुकी है, जो 13 अप्रैल 2025 तक रहने वाला है। हिंदू धर्म में इस समय को बेहद खास और महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि खरमास सूर्य उपासना के लिए शुभ है। परंतु इस अवधि को शुभ मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक जब भी सूर्यदेव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो खरमास लगता है। यह समय पूरे साल में दो बार आता है, जो एक माह तक बना रहता है। दरअसल, सूर्य देव गुरु बृहस्पति के घर जाते ही अपने तेज को कम कर लेते हैं, इसलिए खरमास में सूर्य की स्थिति कमजोर हो जाती है। सूर्य की स्थिति कमजोर होने के कारण घरों में शादी-विवाह, खरीदारी, सगाई, मुंडन, यात्राएं व जनेऊ जैसे कार्यों को करने की मनाही होती हैं। ऐसे में 13 अप्रैल को खरमास समाप्त हो रहा है। इसके समापन के बाद 14 अप्रैल से विवाह के कई शुभ योग बन रहे हैं, जो शादी-विवाह के लिए उत्तम है। आइए इनके बारे में जानते हैं… अप्रैल विवाह मुहूर्त 2025     अप्रैल 14, 2025, सोमवार     अप्रैल 16, 2025, बुधवार     अप्रैल 17, 2025, बृहस्पतिवार     अप्रैल 18, 2025, शुक्रवार     अप्रैल 19, 2025, शनिवार     अप्रैल 20, 2025, रविवार     अप्रैल 21, 2025, सोमवार     अप्रैल 25, 2025, शुक्रवार     अप्रैल 29, 2025, मंगलवार     अप्रैल 30, 2025, बुधवार मई विवाह मुहूर्त 2025     मई 1, 2025, बृहस्पतिवार     मई 5, 2025, सोमवार     मई 6, 2025, मंगलवार     मई 8, 2025, बृहस्पतिवार     मई 10, 2025, शनिवार     मई 14, 2025, बुधवार     मई 15, 2025, बृहस्पतिवार     मई 16, 2025, शुक्रवार     मई 17, 2025, शनिवार     मई 18, 2025, रविवार     मई 22, 2025, बृहस्पतिवार     मई 23, 2025, शुक्रवार     मई 24, 2025, शनिवार     मई 27, 2025, मंगलवार     मई 28, 2025, बुधवार जून विवाह मुहूर्त 2025     जून 2, 2025, सोमवार     जून 4, 2025, बुधवार     जून 5, 2025, बृहस्पतिवार     जून 7, 2025, शनिवार     जून 8, 2025, रविवार नवंबर विवाह मुहूर्त 2025     नवंबर 2, 2025, रविवार     नवंबर 3, 2025, सोमवार     नवंबर 6, 2025, बृहस्पतिवार     नवंबर 8, 2025, शनिवार     नवंबर 12, 2025, बुधवार     नवंबर 13, 2025, बृहस्पतिवार     नवंबर 16, 2025, रविवार     नवंबर 17, 2025, सोमवार     नवंबर 18, 2025, मंगलवार     नवंबर 21, 2025, शुक्रवार     नवंबर 22, 2025, शनिवार     नवंबर 23, 2025, रविवार     नवंबर 25, 2025, मंगलवार     नवंबर 30, 2025, रविवार दिसंबर विवाह मुहूर्त 2025     दिसंबर 4, 2025, बृहस्पतिवार     दिसंबर 5, 2025, शुक्रवार     दिसंबर 6, 2025, शनिवार  

29 मार्च को जयपुर में होने वाले हनी सिंह के शो के वीआईपी टिकट्स लगभग खत्म

जयपुर मशहूर रैपर और सिंगर हनी सिंह 29 मार्च को जयपुर में अपने ‘मिलियनेयर इंडिया टूर’ के तहत लाइव परफॉर्मेंस देने वाले हैं। यह कॉन्सर्ट जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर में होगा, जहां फैंस को उनके सुपरहिट गाने ‘ब्राउन रंग’, ‘डोप सोप’, ‘लुंगी डांस’ और ‘लव डोज’ जैसे ट्रैक सुनने को मिलेंगे। इससे पहले हनी सिंह मुंबई, लखनऊ और बेंगलुरु में हाउसफुल शोज कर चुके हैं। वीआईपी टिकट हुए खत्म इस ग्रैंड इवेंट के टिकट 2,499 से लेकर 2 लाख तक के हैं। पहले फेज में 1,500 के टिकट लॉन्च किए गए थे, जो कुछ मिनटों में ही खत्म हो गए। दूसरे फेज में 2,000 से टिकट की बिक्री शुरू हुई, जो कुछ दिन तक चली। फिलहाल तीसरे फेज के कुछ टिकट ही बचे हैं, जबकि वीआईपी लाउंज के टिकट पूरी तरह बिक चुके हैं। भव्य स्टेज और शानदार विजुअल्स ‘मिलियनेयर इंडिया टूर’ को इंटरनेशनल लेवल पर डिजाइन किया गया है, जिसमें शानदार स्टेज, हाई-क्वालिटी लाइटिंग, जबरदस्त साउंड और स्पेशल म्यूजिक बैंड का अनुभव मिलेगा। शो की शुरुआत शाम 7:30 बजे से होगी, जबकि इससे पहले एक प्री-परफॉर्मेंस भी रखी गई है। शाम 6 बजे से गेट ओपन होंगे लेकिन 16 साल से कम उम्र के बच्चों को इस इवेंट में एंट्री नहीं मिलेगी। दर्शकों को फोटो आईडी साथ लानी होगी और वेन्यू में सिक्योरिटी चेकिंग के बाद ही एंट्री दी जाएगी, ताकि कोई गलत चीज अंदर न ले जा सके। जेईसीसी में इससे पहले आईफा अवॉर्ड्स, दिलजीत दोसांझ और करण औजला जैसे बड़े इवेंट हो चुके हैं। अब हनी सिंह का यह ग्रैंड शो जयपुर के म्यूजिक लवर्स के लिए एक यादगार अनुभव बनने जा रहा है।  

रोरबैंक रुपे क्रेडिट कार्ड में 62 दिन तक का इंटरेस्ट-फ्री पीरियड मिलेगा.

नई दिल्ली  देश में बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों तक में क्रेडिट कार्ड की पॉपुलरिटी बढ़ती जा रही है. इसके जरिए लोग खूब शॉपिंग करते हैं और फिर बाद में बिल चुकाते हैं. क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा इसमें मिलने वाला इंटरेस्ट फ्री पीरियड है. भारत में क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर 45-55 दिन तक का इंटरेस्ट-फ्री पीरियड मिलता है. हालांकि अब आपको 62 दिन तक का इंटरेस्ट-फ्री पीरियड मिलने वाला है. दरअसल, मार्केट में एक नया क्रेडिट कार्ड आने वाला है, जिसमें आपको पैसे चुकाने के लिए 62 दिन तक का समय मिलेगा. हम जिस क्रेडिट कार्ड की बात कर रहे हैं, उसका नाम रोरबैंक रुपे क्रेडिट कार्ड (Roarbank RuPay Credit Card) है. इस कार्ड को यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (Unity Small Finance Bank) ने लॉन्च करने जा रहा है. फिलहाल इसके लिए अप्लाई प्रोसेस शुरू नहीं हुआ है लेकिन आप वेटलिस्ट ज्वाइन कर सकते हैं. क्रेडिट कार्ड से मिलेगी UPI पेमेंट की सुविधा यह क्रेडिट कार्ड एनपीसीआई के रुपे नेटवर्क पर आ रहा है और इसे उन सभी ऑनलाइन वेबसाइट्स और मर्चेंट आउटलेट्स में इस्तेमाल किया जा सकता है, जो रुपे कार्ड स्वीकार करते हैं. इसके जरिए आप यूपीआई सुविधा का भी लाभ उठा सकते हैं. इस क्रेडिट कार्ड को यूपीआई ऐप्स से लिंक कर सकते हैं और पड़ोस की छोटी दुकानों पर लगे मर्चेंट यूपीआई क्यूआर कोड को स्कैन कर पेमेंट कर सकते हैं. इसके अलावा आप इस कार्ड के जरिए ऑनलाइन मर्चेंट्स को भी यूपीआई पेमेंट्स कर सकते हैं. रोरबैंक रुपे क्रेडिट कार्ड के फीचर्स     यह लाइफ टाइम फ्री क्रेडिट कार्ड है. इसका मतलब हुआ कि इस कार्ड में कोई जॉइनिंग या एनुअल चार्ज नहीं देना होगा.     इस क्रेडिट कार्ड में 62 दिन तक का इंटरेस्ट-फ्री पीरियड मिलने वाला है.     हर महीने चुनी गई कैटेगरीज पर 20 फीसदी तक कैशबैक मिलेगा.     अपने नजदीक खड़े दोस्तों को फोन हिलाकर तुरंत पैसे भेज सकते हैं. कार्ड नंबर या फोन डिटेल्स की जरूरत नहीं होगी.  

लखनऊ के मुंह से आशुतोष-विपराज ने छीनी जीत, आखिरी पांच ओवरों में पलट दी हारी हुई बाजी, पंत हुए मायूस

 नई दिल्ली  आशुतोष शर्मा और विपराज निगम ने हैरतअंगेज बल्लेबाजी करते हुए सोमवार को लखनऊ सुपरजायंट्स के मुंह से जीत छीन दिल्ली कैपिटल्स को दे दी। इन दोनों की तूफानी पारियों के दम पर दिल्ली ने आईपीएल-2025 के अपने पहले मैच में लखनऊ को 1 विकेट से हरा दिया। दिल्ली को जीत के लिए 210 रन चाहिए थे। उसने अपने पांच विकेट 65 रनों पर ही खो दिए थे। ट्रिस्टन स्टब्स ने कुछ लड़ाई लड़ी। हालांकि वह 13वें ओवर की तीसरी गेंद पर 113 के कुल स्कोर पर आउट हो गए। यहां से आशुतोष और विपराज ने जो अटैकिंग बैटिंग की है उसने सभी को हैरान कर दिया और दिल्ली को वहां से जीत दिलाई जहां से किसी को उम्मीद नहीं थी। ये दिल्ली की लखनऊ के खिलाफ रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे बड़ी जीत है। लखनऊ के लिए निकोलस पूरन ने 30 गेंदों पर 75 रनों की तूफानी पारी खेली जिसमें छह चौके और सात छक्के शामिल रहे। उनके अलावा मिचेल मार्श ने 36 गेंदों पर 72 रनों की पारी खेली जिसमें छह चौके और इतने ही छक्के जड़े। दिल्ली के लिए कोई भी मार्श और पूरन वाला काम नहीं कर सका। नहीं मिली अच्छी शुरुआत दिल्ली के पास जैक फ्रेसर मैक्गर्क और फाफ डु प्लेसी की सलामी जोड़ी है। ये दोनों अपनी तूफानी बैटिंग के लिए जाने जाते हैं, लेकिन शार्दुल ठाकुर ने दिल्ली का पूरा गेम बिगाड़ दिया। नीलामी में ठाकुर को किसी ने नहीं खरीदा था। मोहसिन खान के चोटिल होने के बाद वह टीम में आए और इस मैच में खेले। पहले ही ओवर की तीसरी गेंद पर उन्होंने मैक्गर्क (1) को बड़ोनी के हाथों में कैच कराया। इसके बाद उन्होंने अभिषेक पोरेल को पवेलियन की राह दिखाई। वह खाता तक नहीं खोल सके। समीर रिजवी को एम सिद्धार्थ ने अपना शिकार बनाया और दिल्ली को तीसरा झटका दिया। अक्षर और डुप्लेसी भी फेल उम्मीद अब डुप्लेसी और कप्तान अक्षर से थी। दोनों ने कुछ अच्छे शॉट्स मार उम्मीद भी जगाई। ज्यादा तेजी दिखाने के चक्कर में अक्षर, दिग्वेश राठी का शिकार बने। अक्षर ने 11 गेंदों पर 22 रन बनाए जिसमें तीन चौके और एक छक्का शामिल रहा। रवि बिश्नोई ने डुप्लेसी को डेविड मिलर के हाथों कैच करा दिल्ली तो पांचवां झटका दिया। डुप्लेसी ने 18 गेंदों पर 29 रन बनाए। ट्रिस्टन स्टब्स आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए टीम को रास्ते पर लाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ज्यादा आगे नहीं जा सके। सिद्धार्थ की गेंद ने उनके डंडे उड़ा दिए। स्टब्स ने 22 गेंदों पर 34 रन बनाए। आशुतोष और विपराज निगम ने बांधा दिल्ली की टीम ने अभी भी हार नहीं मानी थी। आशुतोष शर्मा और विपराज निगम तेजी से रन बना टीम को जीत दिलाने की कोशिश में लगे हुए थे। इन दोनों ने 22 गेंदों पर 55 रन जोड़े। तभी 16वें ओवर के बाद टाइम आउट हुआ और इसके बाद पहली गेंद पर विपराज गलत शॉट खेल दिग्वेश का शिकार बने। उन्होंने 15 गेंदों पर पांच चौके और दो छक्कों की मदद से 39 रन बनाए। 18वें ओवर की पहली गेंद पर बिश्नोई ने स्टार्क को आउट कर दिल्ली को आठवां झटका दिया। आशुतोष ने 18वें ओवर की आखिरी तीन गेंद पर छक्का, चौका और छक्का मार एक बार फिर दिल्ली को मैच में ला दिया। आखिरी दो ओवरों में दिल्ली को जीत के लिए 22 रन चाहिए थे। कुलदीप 19वें ओवर की पहली गेंद पर चौका मार तीसरी गेंद पर रन आउट हो गए। चौथी गेंद पर दो रन लेकर आशुतोष ने अपना अर्धशतक पूरा किया। आखिरी ओवर की तीसरी गेंद पर आशुतोष ने छक्का मार अपनी टीम को जीत दिलाई। लखनऊ का तूफान इससे पहले, पहली पारी खेलने उतरी लखनऊ ने विशाखापट्टनम के एसीए-वीडीसीए स्टेडियम में तूफान ला दिया। मिचेल मार्श और एडेन मार्करम की जोड़ी ने टीम को तेज शुरुआत दी। पहले विकेट के लिए दोनों ने 46 रन जोड़े। विपराज निगम ने मार्करम को आउट कर दिल्ली को पहली सफलता दिलाई। उन्होंने 15 रन बनाए। इसके बाद आया असली तूफान। मार्श और पूरन ने फिर दिल्ली के गेंदबाजों की अच्छे से खबर ली। मार्श ने 21 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया। दोनों ने टीम का स्कोर 133 रनों तक पहुंचा दिया। मुकेश कुमार ने मार्श को 12वें ओवर की चौथी गेंद पर आउट कर लखनऊ को दूसरा झटका दिया। उनके बाद आए कप्तान पंत खाता तक नहीं खोल सके। हालांकि, पूरन एक छोर से मार रहे थे और लग रहा था कि लखनऊ आसानी से 230 के पार जाएगी। पूरन को मिचेल स्टार्क ने 15वें ओवर की पांचवीं गेंद पर बोल्ड कर लखनऊ को चौथा झटका दिया। यहां से फिर दिल्ली ने वापसी की। मिलर ने पहुंचाया 200 पार दिल्ली ने फिर बडोनी (4), ठाकुर (0), शाहबाज अहमद (9) के विकेट जल्दी खो लिए और यहां लगने लगा कि लखनऊ अब 200 के पार भी नहीं जा पाएगी। 19वें ओवर की आखिरी गेंद पर रवि बिश्नोई भी आउट हो गए और उनके रूप में लखनऊ ने अपना आठवां विकेट खोया। आखिरी ओवर में डेविड मिलर ने दो छक्के मार टीम का स्कोर 200 के पार पहुंचाया। दिल्ली के लिए स्टार्क ने तीन विकेट लिए। कुलदीप के हिस्से दो विकेट आए। निगम और मुकेश कुमार को एक-एक सफलता मिली।

आरजी कर मामला, क्या सामूहिक दुष्कर्म या सबूत मिटाने की संभावना के एंगल पर भी की जांच: हाईकोर्ट

  कोलकाता आरजीकर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले में सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच से संबंधित केस डायरी अगली सुनवाई पर पेश करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई ये यह भी पूछा कि क्या केंद्रीय एजेंसी अपनी जांच में सामूहिक दुष्कर्म या मामले में सबूतों को नष्ट किए जाने की संभावना के एंगल पर भी जांच कर रही है। वहीं, मृतका के परिजन और मामले में याचिकाकर्ता ने इस दौरान अदालत की निगरानी में जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया कि ट्रायल कोर्ट में आरोप-पत्र दाखिल करते समय सीबीआई ने कहा था कि अपराध में बड़ी साजिश शामिल थी। ऐसे में उन्होंने मामले की आगे की जांच के लिए प्रार्थना की। जिस पर न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की प्रार्थनाओं पर जांच के वर्तमान चरण और सीबीआई द्वारा पेश की जाने वाली केस डायरी को देखने के बाद विचार किया जाएगा। उन्होंने सीबीआई को अगली सुनवाई की तारीख 28 मार्च को केस डायरी पेश करने का भी निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त, न्यायमूर्ति घोष ने सीबीआई के वकील से अदालत को यह भी बताने को कहा कि क्या एजेंसी अपनी आगे की जांच में सामूहिक बलात्कार या सबूतों के विनाश की संभावना की जांच कर रही है। पूर्व नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को पीड़िता के साथ बलात्कार और हत्या के आरोप में कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जनवरी में रॉय को दोषी करार देते हुए सत्र न्यायालय ने उसे उसके प्राकृतिक जीवन के अंत तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। न्यायमूर्ति घोष ने उप महाधिवक्ता (डीएसजी) को यह साफ करने का निर्देश दिया कि क्या सीबीआई ने कभी भी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 70 (सामूहिक बलात्कार) के तहत अपराध की जांच करने पर विचार किया था। चूंकि इस मामले में एक व्यक्ति को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। ऐसे में न्यायमूर्ति घोष ने आगे पूछा कि क्या सीबीआई ने अपने आरोप-पत्र में इस बात पर विचार किया था कि अपराध एक अकेले अपराधी द्वारा किया गया था या यह सामूहिक दुष्कर्म का मामला था।   इससे पहले, याचिकाकर्ताओं के वकील ने दावा किया कि केंद्रीय एजेंसी मामले की जांच में रुचि नगीं दिखा रही है। उन्होंने न्यायालय से सीबीआई से अपनी आगे की जांच पर प्रगति रिपोर्ट मांगने का भी आग्रह किया। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि राज्य को आगे की जांच पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा कि क्या कानून किसी आरोपी को दोषी ठहराए जाने और सजा सुनाए जाने के बाद ऐसी जांच की अनुमति देता है। बनर्जी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ट्रायल कोर्ट को मुकदमे के समापन के बाद आगे की जांच की अनुमति देने का अधिकार है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीबीआई ने बेहद धीमी गति से मामले की जांच की है। इस पर डीएसजी ने इस दावे का विरोध करते हुए तर्क दिया कि एजेंसी के खिलाफ कोई भी अनुचित आरोप नहीं लगाया जाना चाहिए।

आश्वासन पर बैंक कर्मचारियों ने की स्थगित हड़ताल — साथी प्रमोद चतुर्वेदी

Bank employees postponed the strike on assurance — Comrade Pramod Chaturvedi हरिप्रसाद गोहेआमला। अखिल भारतीय कर्मचारी संघ की 24 और 25 मार्च को प्रस्तावित हड़ताल स्थगित हो गई है । जीस कारण सोमवार बैंक खुले रहे खंडवा यूनिट यूनियन के अध्यक्ष प्रमोद चतुर्वेदी ने बताया कि वित्त मंत्रालय और आईबीए द्वारा कर्मचारियों को उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है। इसलिए 25 मार्च को भी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक खुले रहेंगे । हमारे आंदोलन के लिए जो केन्द्रीय नेतृत्व से प्रोग्राम मिला था उसके सफलतापूर्वक संचालन में यू एफ बी यू के सभी घटक दलों के साथियों ने अपनी पूर्ण निष्ठा एवं ताकत से साथ देकर इसे कामयाब बनाया। यू एफ बी यू के बैंकिंग घटकों के सभी साथियों ने भविष्य में भी अपना पूर्ण समर्थन एवं सहयोग का आश्वासन दिया । उन्होंने कहा अभी हड़ताल पूर्णतः निरस्त नहीं हुई है वरन् केवल आइ बी ए एवं सभी घटक बैंकों के प्रबंधन और सेंटल लेबर कमीशन के आश्वासन मिलने के कारण स्थगित हुई है । अभी तो यह अंगड़ाई है अगर हमारी मांगे नहीं मानी गई तो फेर से हड़ताल का रास्ता अपनाया जा सकता है ।

रूसी तेल पर अमेरिकी बैन बेअसर, रूस के तेल का भारत में फिर से आयात बढ़ गया

नई दिल्ली रूसी तेल पर अमेरिकी बैन बेअसर नजर आ रहा है। भारत ने रूस से तेल खरीदना फिर से तेज कर दिया है। जनवरी और फरवरी के मुकाबले मार्च में इसमें तेजी आई है। जनवरी में अमेरिका ने रूस पर कुछ बैन लगाए थे। इसमें भारत और चीन बेचे जाने वाला कच्चा तेल भी शामिल था। यह बैन जो बाइडेन के प्रशासन ने लगाए थे। डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद भी ये बैन लगे हुए हैं। हालांकि रूस ने मार्च में तेल बेचने की रफ्तार बढ़ाई है। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक भारत ने मार्च में रूस से काफी मात्रा में तेल खरीदा है। इसकी वजह ये है कि रूस का तेल आसानी से मिल रहा है। वहीं ज्यादातर तेल 60 डॉलर प्रति बैरल से कम कीमत पर मिल रहा है। इससे भारत को तेल लाने के लिए बिना पाबंदी वाले जहाज आसानी से मिल जा रहे हैं। रूस के पास तेल ज्यादा होने की एक बड़ी वजह ये भी है कि यूक्रेन ने रूस के तेल कारखानों पर ड्रोन से हमले किए हैं। इससे रूस में तेल की खपत कम हो गई है और वो तेल बाहर बेचने को मजबूर है। कितना खरीदा तेल? तेल बाजार पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर (Kpler) ने कुछ आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार मार्च के पहले 21 दिनों में भारत ने रूस से हर दिन औसतन 1.85 मिलियन बैरल तेल खरीदा है। फरवरी में ये आंकड़ा 1.47 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) था। वहीं जनवरी में यह 1.64 मिलियन bpd था। इसका मतलब है कि भारत ने मार्च में रूस से ज्यादा तेल खरीदा है। मार्च में भारत ने जितना भी तेल खरीदा है, उसमें से रूस की हिस्सेदारी 35 फीसदी से ज्यादा रही है। फरवरी में ये हिस्सेदारी 31% और जनवरी में 33% थी। भारत और चीन सबसे आगे जनवरी से मार्च के महीने में भारत ने रूस से हर दिन औसतन 1.75 मिलियन bpd तेल खरीदा है। पिछले दो सालों में भी भारत ने लगभग इतना ही तेल खरीदा था। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद पश्चिमी देशों ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया। तब से भारत और चीन, रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देश बन गए हैं। बाइडेन प्रशासन ने लगाया था बैन रूसी तेल पर जनवरी में जो बाइडेन प्रशासन ने बैन लगाया था। बाइडेन ने यह फैसला डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने से कुछ दिनों पहले ही लिया था। इस दौरान बाइडेन प्रशासन ने 183 जहाजों पर भी बैन लगाया था। ये जहाज रूस से तेल लाने-ले जाने का काम करते थे। इसके अलावा उन्होंने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों और बीमा कंपनियों पर भी पाबंदी लगाई थी। जब बैन तो फिर क्यों आई तेजी? अब सवाल है कि जब अमेरिका ने रूसी तेल पर बैन लगाया है तो फिर ऐसे में रूस तेल क्यों बेच रहा है। दरअसल बैन के कारण भारत के तेल कारखानों को रूस से तेल लाने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी। वे ऐसे जहाजों और बीमा कंपनियों के साथ काम नहीं करना चाहते थे, जिन पर पाबंदी लगी हुई थी। लेकिन अब रूस के तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से कम हो गई है। ऐसे में जहाजों और बीमा की दिक्कत दूर हो गई। G7 देशों और उनके साथियों ने एक नियम बनाया है कि अगर रूस के तेल की कीमत 60 डॉलर से कम है तो पश्चिमी देशों के जहाज और बीमा कंपनियां रूस से तेल लाने-ले जाने में मदद कर सकती हैं। Kpler के डेटाबेस के अनुसार रूस से भारत आने वाले सभी जहाज बिना पाबंदी वाले हैं।

वोडाफोन आइडिया को सरकार से फिर मदद की दरकार, राहत के लिए लगाई गुहार

मुंबई वोडाफोन आइडिया एक बार फिर सरकार से मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि कंपनी अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू को लेकर काफी मुश्किलों का सामना कर रही है और उन्हें अपने पुराने स्पेक्ट्रम का भी पेमेंट चुकाना है, जिसे लेकर उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुश्किल का सामना करने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार से राहत की मांग की है। कंपनी की ओर से टेलीकॉम सेक्रेटरी नीरज मित्तल ने 11 मार्च को केंद्र सरकार को एक लेटर लिखा, जिसमें उन्होंने सरकार से अपने कर्ज के एक बड़े हिस्से को इक्विटी में बदलने के लिए गुहार लगाई। यदि यह प्रस्ताव सरकार द्वारा मान ली गयी , तो सरकार की वोडाफोन आइडिया में मौजूद हिस्सेदारी, जो कि 22.6% है, से बढ़कर लगभग 49% हो जाएगी। इससे कंपनी को जो अपने फाइनेंशियल कंडीशन को लेकर जो समस्याओ का सामना करना पड़ रहा है, उसमें कंपनी को कुछ राहत मिलेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के ऊपर कुल बकाया लगभग 36,950 करोड़ रुपए है, जिसमें से कंपनी को 13,089 करोड़ रुपए आने वाले कुछ ही हफ्तों में देना होगा। सरकार के मानने पर 52,000 करोड़ रुपए तक की मिल सकती है राहत यदि केंद्र सरकार वोडाफोन आइडिया द्वारा मांगी गई इस सहायता को स्वीकार कर लेती है, तो वोडाफोन आइडिया को तकरीबन 52,000 करोड़ रुपए की राहत मिल सकती है। हालांकि, मीडिया की कुछ खबरों के अनुसार, यह भी वक्त आया गया है कि सरकार बकाया राशि में किसी भी तरह की छूट देने के मूड में नहीं है। वोडाफोन आइडिया द्वारा देखा जा रहा यह मुश्किल समय सिर्फ उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके ग्राहकों और टेलीकॉम सेक्टर के लिए भी हानिकारक साबित हो सकता है। यदि वोडाफोन आइडिया अपने फाइनेंशियल में जल्द ही सुधार नहीं करती है, तो टेलीकॉम सेक्टर में कॉम्पिटिशन कम हो सकता है। इस कम होती हुई कॉम्पिटेटिव चुनौती की वजह से टेलीकॉम सेक्टर में मौजूद अन्य कंपनियां ग्राहकों से अपनी मनमानी भी कर सकती हैं। कंपनी ने 2021 टेलीकॉम राहत पैकेज के तहत सहायता मांगी रिपोर्ट के मुताबिक, वोडाफोन-आइडिया 36,950 करोड़ रुपए के AGR और स्पेक्ट्रम बकाया के लिए राहत की मांग कर रही है। इसमें आने वाले हफ्तों में 13,089 करोड़ रुपए का तत्काल भुगतान भी शामिल है। फाइनेंशियल दिक्कतों से जूझ रही VI ने संकेत दिया है कि उसके पास इन पेमेंट्स को पूरा करने की क्षमता नहीं है। वोडाफोन आइडिया ने 2021 टेलीकॉम राहत पैकेज के तहत सहायता मांगी है। इस मामले में कंपनी की तरफ से अब तक कोई बयान सामने नहीं आया है। VI को 52 हजार करोड़ रुपए की राहत मिल सकती है वोडाफोन-आइडिया ने ऐसे समय में रिक्वेस्ट की है कि जब मीडिया रिपोर्ट्स के दावे के मुताबिक सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर बकाए में कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया है। अगर कंपनी की रिक्वेस्ट को सरकार मान लेती है तो एनालिस्ट्स का अनुमान है कि VI को 52 हजार करोड़ रुपए की राहत मिल सकती है, जो इसके आउटस्टैंडिंग AGR लायबिलिटी का करीब 75% घटा देगा और टोटल कर्ज का 25% कम हो जाएगा। सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की याचिका खारिज की थी वोडाफोन आइडिया ने पिछले साल जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट में एक क्यूरेटिव याचिका दायर कर AGR के बकाए के कैलकुलेशन को चुनौती दी थी। जिसमें नॉन-कोर रेवेन्यू को भी शामिल किया गया था और कंपनी इसके खिलाफ थी। हालांकि, सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम ऑपरेटर की याचिका खारिज कर दी थी। तीसरी तिमाही में वोडाफोन-आइडिया को ₹6,609 करोड़ का लॉस वोडाफोन-आइडिया को वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में 6,609 करोड़ रुपए घाटा (कॉन्सोलिडेटेड नेट लॉस) हुआ है। एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी को 6,986 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। सालाना आधार पर कंपनी का घाटा 5.40% कम हुआ है। टेलीकॉम सेक्टर में तीन ही बड़ी कंपनियां हैं आपको बता दें कि हाल-फिलहाल टेलीकॉम सेक्टर में तीन ही बड़ी कंपनियां हैं, जिनका नाम है रिलायंस जिओ, भारतीय एयरटेल और वोडाफोन आइडिया। अगर वोडाफोन आइडिया अपनी फाइनेंशियल स्थिति को सुधार नहीं पाती है, तो भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में एक बहुत बड़ी मुश्किल पैदा हो सकती है। वोडाफोन आइडिया ने सुप्रीम कोर्ट में पिछले एक क्यूरेटिव पेटिशन दायर कर के एजीआर की गणना में गैर कोर राजस्व को शामिल करने पर विरोध जताया गया था. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कंपनी को एक बड़ा झटका दिया.

खुशखबरी NIOS से कोर्स करने पर आशा वर्करों को मिलेंगे 5000 रूपये

मंडला स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा वर्करों और पर्यवेक्षकों के ज्ञान को परखने के लिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) दिल्ली के माध्यम से तीन चरणों में परीक्षा आयोजित की गई। इस परीक्षा में मंडला जिले के पांच विकासखंडों से चयनित 271 आशा वर्करों और पर्यवेक्षकों ने भाग लिया। परीक्षा के अंतिम चरण की लिखित परीक्षा में 266 परीक्षार्थियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। तीन चरणों में हुई परीक्षा स्वास्थ्य विभाग द्वारा चयनित परीक्षा केंद्र केंद्रीय विद्यालय मंडला में आयोजित परीक्षा में बम्हनी, मोहगांव, नारायणगंज, बिछिया और नैनपुर विकासखंडों की चयनित आशा वर्करों और पर्यवेक्षकों ने भाग लिया। परीक्षा शासन द्वारा निर्धारित पैटर्न पर डेढ़ घंटे की लिखित परीक्षा के रूप में संपन्न हुई। इससे पहले, प्रथम चरण में आंतरिक ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई थी। द्वितीय चरण में फील्ड कार्य से संबंधित प्रायोगिक परीक्षा ली गई, जिसमें आशा वर्करों और पर्यवेक्षकों के कौशल का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद तीसरे चरण में लिखित परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें 271 में से 266 प्रतिभागियों ने भाग लिया। परीक्षा का आयोजन केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य की निगरानी में हुआ। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने की पहल मंडला जिले में आशा वर्कर शिशु से लेकर बुजुर्गों तक की स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाती हैं। उनके ज्ञान को परखने और सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से यह परीक्षा आयोजित की गई। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) द्वारा परीक्षा के लिए मानक तय किए गए थे। इस परीक्षा में सफल होने पर आशा वर्करों को प्रमाण पत्र और 5000 रुपए का नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। स्कूल के दिन याद आए परीक्षा में शामिल होने आईं कई आशा वर्करों ने कहा कि वर्षों बाद इस तरह बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर परीक्षा देना उनके लिए एक अनोखा अनुभव था। परीक्षा शुरू होने से पहले सभी परीक्षार्थियों ने अपने कक्ष और रोल नंबर देखे। परीक्षा केंद्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, जहां मोबाइल फोन समेत अन्य सामग्रियों को बाहर रखवाया गया। यह माहौल देखकर आशा वर्करों को अपने स्कूल के दिनों की याद आ गई। संपूर्ण तैयारी के साथ दी परीक्षा डीसीएम हिमांशु सिंगौर ने बताया कि फील्ड में आशा वर्करों का योगदान महत्वपूर्ण होता है। इस परीक्षा का उद्देश्य उनके ज्ञान को बढ़ाना और सेवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। परीक्षा में शामिल होने से पहले आशा वर्करों ने पूरी तैयारी की और परीक्षा को लेकर काफी उत्साहित नजर आईं। पहले दो चरणों की परीक्षा में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और अब लिखित परीक्षा के परिणाम के बाद उनकी काबिलियत साबित होगी।

देश में 14 टोल प्लाजा की सालाना कमाई 200 करोड़ रुपये, राजस्थान में सबसे ज्यादा 156 टोल, लेकिन कमाई में UP नंबर 1

नई दिल्ली हाईवे-एक्सप्रेसवे पर चलते हुए आपको टोल प्लाजा पर रुककर टोल टैक्स भरना पड़ता है. टोल टैक्स से आपकी जेब कटती है तो सरकार का खजाना भरना भरता है. इन टोल टैक्स से सरकारी खजाने में मोटा पैसा आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का सबसे कमाऊ टोल प्लाजा कौन सा है? इसकी कमाई इतनी है कि सालभर में यह 400 करोड़ रुपये आपकी जेब से वसूल लेता है. देश का सबसे कमाऊ टोल प्लाजा   देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला टोल प्लाजा गुजरात के भरथाना गांव में बना है, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर बना यह टोल प्लाजा कमाई के मामले में अव्वल है.  राजधानी दिल्ली को मुंबई से जोड़ने वाले इस हाईवे पर बने टोल प्लाजा की गिनती सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टोल प्लाजा के तौर पर होती है.बता दें कि NH-48 देश के सबसे व्यस्त हाईवे में से एक है. क्या आप जानते हैं कि देश में सबसे ज्यादा कमाई किस टोल प्लाजा पर होती है? इसका जवाब है गुजरात के भरथाना गांव में बना टोल प्लाजा। यह टोल प्लाजा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर बना है जो राजधानी दिल्ली को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से जोड़ता है। यह देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला टोल प्लाजा है। यह टोल प्लाजा हर साल लगभग 400 करोड़ रुपये कमाता है। यह पिछले पांच साल का औसत है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 देश का सबसे व्यस्त रूट है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने लोकसभा में कुछ जानकारी दी। एनएच-48 के जरिए उत्तरी भारत के राज्यों से सामान पश्चिमी तट के पोर्ट्स तक जाता है। देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला दूसरा टोल प्लाजा भी इसी एनएच पर है। राजस्थान के शाहजहांपुर में NH-48 पर बना टोल प्लाजा हर साल 378 करोड़ रुपये कमाता है। सरकारी जानकारी के अनुसार भारत में 1,063 टोल प्लाजा हैं। इनमें से 14 टोल प्लाजा हर साल 200 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाते हैं। अभी देश में 1.5 लाख किलोमीटर के एनएच नेटवर्क में से लगभग 45,000 किलोमीटर पर टोल लगता है। इसमें नए बने एक्सप्रेसवे भी शामिल हैं। कैसे बढ़ी कमाई पिछले पांच साल में कई नए राजमार्ग बने हैं जिन पर टोल लगता है। FASTag के इस्तेमाल से टोल की चोरी भी कम हुई है। इसलिए टोल से होने वाली कमाई बहुत बढ़ गई है। साल 2019-20 में टोल से 27,504 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। पिछले साल यह कमाई बढ़कर 55,882 करोड़ रुपये हो गई। सरकार के आंकड़ों के अनुसार लोगों ने पिछले पांच साल में टोल के रूप में 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दिए हैं। लेकिन यह रकम राजमार्गों के विकास और रखरखाव के लिए खर्च होने वाले बजट का सिर्फ पांचवां हिस्सा है। सरकार केवल उन्हीं राजमार्गों पर टोल लगाती है जो कम से कम ढाई लेन के हों। सरकार ज्यादा से ज्यादा राजमार्गों पर टोल लगाना चाहती है ताकि उसकी कमाई बढ़ सके। किस राज्य में हैं सबसे ज्यादा टोल प्लाजा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में 97 टोल प्लाजा हैं। इन टोल प्लाजा ने पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा 22,914 करोड़ रुपये की कमाई की है। वहीं राजस्थान में सबसे ज्यादा 156 टोल प्लाजा हैं। इन टोल प्लाजा ने 20,308 करोड़ रुपये की कमाई की है। आमतौर पर, उन टोल प्लाजा पर ज्यादा कमाई होती है जो पोर्ट्स और इंडस्ट्रियल एरिया क्षेत्रों को जोड़ने वाले NH पर बने होते हैं।  एक रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने कहा, ‘इन टोल प्लाजा पर ज्यादातर कमर्शियल गाड़ियां आती हैं। ये गाड़ियां निजी वाहनों की तुलना में ज्यादा टोल देती हैं। इसलिए ये प्रोजेक्ट निजी कंपनियों के लिए फायदेमंद होती हैं।’ FASTag के आने से टोल संग्रह में पारदर्शिता आई है और टोल प्लाजा पर लगने वाला समय भी कम हुआ है। इससे यात्रियों को भी सुविधा हुई है और सरकार की कमाई भी बढ़ी है। बढ़ी टोल प्लाजा की कमाई   फास्टैग आने के बाद से टोल प्लाजा की कमाई बढ़ गई है. फास्टैग की मदद से टोल टैक्स की चोरी कम हुई है, जिसकी वजह से रेवेन्यू बढ़ा है.  सरकार ज्यादा से ज्यादा राजमार्गों पर टोल लगाना चाहती है ताकि उसकी कमाई बढ़ सके. वहीं एनएच-48 के जरिए उत्तरी भारत के राज्यों से सामान पश्चिमी तट के बंदरगाह तक पहुंचते हैं. ट्रकों और गाड़ियों को इस टोल प्लाजा से होकर गुजरना पड़ता है, जिसकी वजह से इस टोल प्लाजा की कमाई अधिक, वहीं निजी वाहनों के मुकाबले कॉर्मिशियल गाड़ियों का टोल भी अधिक है.   कमाई में ये भी अव्वल   इसी एचएच-48 पर बना राजस्थान के शाहजहांपुर टोल प्लाजा कमाई के मामले में दूसरे नंबर पर है. यहां हर साल 378 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन होता है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल का जलाधुलागोरी टोल प्लाजा कमाई में तीसरे नंबर पर है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में बाराजोर टोल प्लाजा चौथे नंबर पर है. बता दें कि  उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा टोल प्लाजा है. इस राज्य में करीब 97 टोल प्लाजा हैं.  

गोटेगांव : बच्चों की घटती संख्या के चलते ये सरकारी स्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच गए

नरसिंहपुर नरसिंहपुर जिले के अंतर्गत जन शिक्षा केंद्र गोटेगांव के अंतर्गत संचालित एक से आठवीं तक के सरकारी स्कूलों की संख्या लगभग 300 है। इनमें से 20 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों की दर्ज संख्या एक से दस के बीच रह गई है। बच्चों की गिरती संख्या के चलते ये स्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होगा, लेकिन इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। तीन मुख्य कारण जिम्मेदार ग्रामीण अंचलों में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति के पीछे तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं—     बिना मापदंड निजी स्कूलों को मान्यता– ग्रामीण क्षेत्रों में बिना उचित मापदंड के निजी स्कूलों को मान्यता दी जा रही है। इसके कारण अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाने के बजाय निजी स्कूलों में भेज रहे हैं।     आरटीई के तहत मुफ्त शिक्षा– राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत बच्चों को निशुल्क प्रवेश देने का प्रावधान है, जिसका खर्च सरकार उठाती है। इससे भी सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या घट रही है।     सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और शैक्षणिक गतिविधियों की कमी- सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी, विज्ञान और गणित विषय के शिक्षकों की सबसे अधिक कमी देखी जा रही है। वहीं, कई स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों का अभाव रहता है। दूसरी ओर, निजी स्कूलों में प्रारंभ से ही विषय-विशेषज्ञ शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं और वहां शैक्षणिक गतिविधियां नियमित रूप से संचालित की जाती हैं। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाना ज्यादा उचित समझते हैं। सीएम राइज स्कूल से मिलेगी राहत? गोटेगांव में सीएम राइज स्कूल भवन का निर्माण कार्य जारी है। इसके पूर्ण होते ही इस स्कूल के तहत शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। सीएम राइज स्कूलों में विषय-विशेषज्ञ शिक्षक तो उपलब्ध होंगे, लेकिन उनकी संख्या कितनी होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या और गुणवत्ता में सुधार किया जाए, तो सरकारी स्कूलों की गिरती स्थिति को संभाला जा सकता है। सरकारी स्कूलों का भविष्य अधर में सरकारी स्कूलों में बच्चों की घटती संख्या से शिक्षा विभाग चिंतित है। यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो कई सरकारी स्कूल बंद हो सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के उन बच्चों पर प्रभाव पड़ेगा, जो निजी स्कूलों की फीस वहन करने में असमर्थ हैं।

इंदौर में ग्रीन बेल्ट की जमीन की गाइडलाइन का अलग से निर्धारण होगा

इंदौर   इंदौर में कलेक्टर गाइडलाइन लगभग तैयार हो चुकी है। इस पर पंजीयन विभाग ने दावे-आपत्तियों को मंगाया था। डेढ़ सौ से अधिक आपत्तियां  आई है। जिसका निराकरण किया जा रहा है। इसके बाद गाइडलाइन का प्रारुप राज्य सरकार को भेजा जाएगा। 1 अप्रैल ले नई कलेक्टर गाइड लाइन तैयार हो जाएगी। इंदौर में 3200 लोकेशनों पर गाइडलाइन बढ़ाई जा रही है, जबकि 240 नई काॅलोनियों को गाइडलाइन के दायरे में लिया गया है। इस बदलाव से प्राॅपर्टी के कीमतों में भी वृद्धि होगी। सालभर हुए सौदों के आधार पर गाइडलाइन में बदलाव किया गया। इंदौर में सबसे ज्यादा तेजी खंडवा रोड़ और उज्जैन रोड़ पर देखने को मिली है। खंडवा रोड पर फोरलेन निर्माण हो रहा है, जबकि इंदौर उज्जैन रोड पर छह लेन बन रहा है। इंदौर में बड़े ग्रुप भी रियल इस्टेट सेक्टर में आ चुके है। 32 लोकेशनों के ज्यादातर इलाके शहरी सीमा से सटे है। इनमे बाइपास, सुपर काॅरिडोर, गांधी नगर जैसे क्षेत्र शामिल है। ग्रीन बेल्ट की जमीन की गाइडलाइन का अलग से निर्धारण पंजीयन विभाग के पास अलग-अलग तरह की आपत्तियां आई है। कुछ आपत्तियां ग्रीन बेल्ट को लेकर भी है। जिसमें कहा गया है कि ग्रीन बेल्ट की जमीनों के ज्यादा सौंदे नहीं होते है। इसकी गाइडलाइन का निर्धारण अलग से किया जाना चाहिए। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की खरीदी बिक्री में छूट को बहाल करने की मांग भी की गई है। मास्टर प्लान में 89 गांवों को जोड़ा गया है। वहां भी प्राॅपर्टी गाइडलाइन में बदलाव हुए है। इंदौर में कुछ लोकेशनों पर 30 से लेकर 40 प्रतिशत तक गाइड लाइन बढ़ाई गई है। इंदौर एक में 531,इंदौर दो में 596, इंदौर तीन में 658, इंदौर चार में 425, महू में 429, सांवेर में 348,देपालपुर में 329 लोकेशनो पर गाइडलाइन बदली है। अब समिति के इस प्रस्ताव को प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही एक अप्रैल से नई गाइडलाइन के हिसाब से पंजीयन विभाग में रजिस्ट्रियां होगी।

Ladli Behna Yojana की अप्रैल में आएगी 23वीं किस्त, फिर खाते में आएंगे 1250 रुपए, क्या बढ़ेगी राशि?

भोपाल मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 1.27 करोड़ लाड़ली बहनों के लिए अपडेट है। योजना के लिए नए पंजीयन कब से शुरू होंगे? कब राशि बढ़ाई जाएगी? विधानसभा में विपक्ष द्वारा पूछे गए इस सवाल पर महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल लाडली बहना योजना की राशि बढ़ाने और नई लाडली बहनों के नाम जोड़ने का विभाग स्तर पर कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्री ने आगे कहा कि अब तक 15,748 महिलाओं के नाम उनकी मृत्यु के बाद हटाए गए हैं, जबकि 60 वर्ष की उम्र पूरी करने वाली 3,19,991 महिलाओं के नाम स्वतः पोर्टल से हट गए हैं। हालांकि राशि 1250 रुपए से बढ़ाकर 3 हजार रुपए तक करने को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव कई बार ऐलान कर चुके हैं। कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल ने विधानसभा में सवाल किया था कि क्या सरकार दोबारा से नए पंजीयन शुरू करेगी और ₹3,000 की राशि देने का वादा कब पूरा होगा?इस पर मंत्री ने यह जवाब दिया है। 8 मार्च शनिवार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सीएम मोहन यादव ने 1.27 करोड़ बहनों के खाते में 22वीं किस्त के 1552.73 करोड़ की राशि और 26 लाख बहनों के खाते में सिलेंडर रीफिलिंग के लिए 55.95 करोड़ की राशि अंतरित कर दी है।अब अप्रैल में 23वीं किस्त जारी की जाएगी।इसके तहत फिर 1.27 करोड़ लाड़ली बहनों के खाते में 1250 रुपए भेजे जाएंगे।चुंकी आमतौर पर हर माह की 10 तारीख को योजना की राशि जारी होती है हालांकि कई बार त्यौहार और विशेष अवसर पर समय से पहले भी पैसे भेजे जाते है।अब देखना है कि इस बार अगली राशि कब आएगी। लाड़ली बहना योजना में हर माह मिलते है 1250 रु     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से मार्च 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 22 किश्तों का अंतरण किया गया है।     जनवरी 2024 से फरवरी 2025 तक लाड़ली बहनों के खाते में 22 हजार 227.89 करोड़ की राशि जारी की गई है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। इन लाड़ली बहनों को मिलता है योजना का लाभ     इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है।     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी।     विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं।जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए।     जिनके परिवार का कोई सदस्य वर्तमान अथवा भूतपूर्व सांसद, विधायक हो या फिर किसी सरकारी पद का लाभ ले रहा है, उस परिवार की महिलाएं भी लाड़ली बहना योजना के लिए पात्र नहीं होंगी।     यदि महिला के पति के पास सरकारी योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता नहीं है। ऐसे करें चेक अबतक की अपडेट     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

मोहन यादव आज 25 मार्च को अपने जन्मदिन के दिन उज्जैन में रहेंगे, शहर में आयोजित होंगे कई कार्यक्रम

उज्जैन  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज 25 मार्च को जन्मदिन है. मुख्यमंत्री के शहर उज्जैन में सड़के पोस्टर से पट गई है. यह भी संभावना जताई जा रही है कि भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने के लिए मुख्यमंत्री आज मंगलवार को उज्जैन आ सकते हैं. जिला प्रशासन द्वारा इसकी तैयारी की जा रही है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 मार्च को अपने जन्मदिन के दिन उज्जैन में रहेंगे। वे कालिदास संस्कृत अकादमी में आयोजित विक्रमोत्सव के पौराणिक फिल्म महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्री राम तिवारी ने इस बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में कई विदेशी राजनयिक शिरकत करेंगे। इनमें वेनेजुएला के एच.ई. कैपाया रोड्रिग्ज गोंजालेज, राजदूत अल्फ्रेडो जीसस काल्डेरा गुज़मैन और क्यूबा की काउन्सलर मैलेना रोजास मदीना शामिल हैं। समारोह में मुंबई की सीमा कपूर की आत्मकथा ‘यूं गुजरी है अब तलक’ का लोकार्पण भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर शहर के विभिन्न स्थानों पर उनके स्वागत और सम्मान के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मोहन यादव का आज मंगलवार (25 मार्च) को जन्मदिन है. उनके जन्मदिन के पहले ही उज्जैन में बीजेपी नेताओं ने बधाई और स्वागत के पोस्टर से सड़कों को भर दिया है. मुख्यमंत्री भगवान महाकाल की पूजा अर्चना करने और आशीर्वाद लेने के लिए मंगलवार को उज्जैन भी आ सकते हैं. हालांकि, अभी इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह प्रयास लगाए जा रहे हैं कि वे अपने व्यस्ततम समय में से कुछ समय भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने आने के लिए निकाल सकते हैं. सुरक्षा की दृष्टि से हर दिन रहती है तैयारी उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के मुताबिक अभी आज मंगलवार (25 मार्च) के दौरे के संबंध में औपचारिक जानकारी नहीं आई है, मगर जिला प्रशासन द्वारा पूरी तैयारी रहती है. मुख्यमंत्री का उज्जैन गृह नगर है. ऐसे में कभी भी आ सकते हैं. पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के मुताबिक मुख्यमंत्री मोहन यादव के डर आने वाले दिनों में भी प्रस्तावित है, इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से हर दिन तैयारी रहती है. पूरा परिवार साथ मनाता है जन्मदिन मुख्यमंत्री मोहन यादव का परिवार हर साल उनके जन्मदिन एक साथ एकत्रित होकर मानता है, क्योंकि वे भोपाल के सीएम हाउस में अकेले रहते हैं. उनका पूरा परिवार उज्जैन में रहता है, इसलिए परिवार के साथ भी वे समय व्यतीत करने के लिए उज्जैन आ सकते हैं. उज्जैन की सड़कों पर बड़ी संख्या में समर्थकों ने पोस्टर लगा दिए हैं. इससे भी यह संभावना है कि वे उज्जैन आ सकते हैं.

मध्य प्रदेश सरकार अंगदान करने वालों के स्वजन को एक और बड़ी सुविधा देने जा रही, मिलेगा इस योजना का लाभ

भोपाल अंगदानियों को अंतिम संस्कार के समय ‘गार्ड आफ आनर’ देने का निर्णय लेने के बाद मध्य प्रदेश सरकार उनके स्वजन को एक और बड़ी सुविधा देने जा रही है। उन्हें आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जाएगा, जिसमें प्रति परिवार वर्ष में पांच लाख रुपये तक निश्शुल्क उपचार की सुविधा रहेगी। इसमें आय सीमा का कोई बंधन नहीं रहेगा। इसके प्रचार-प्रसार व जागरूकता के लिए 18 लाख रुपये से डाक्यूमेंट्री बनवाई जा रही है। ब्रेन डेड रोगियों के अंगदान के लिए स्वजन को प्रोत्साहित करने को प्रदेश सरकार यह कदम उठाने जा रही है। इसके अलावा स्टेट आर्गन एवं टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन एक पोर्टल भी तैयार कर रहा है, जिसमें अंगदान करने वाले और जरूरतमंद दोनों पंजीयन करा सकेंगे। पोर्टल में अंगदान के नियम प्रक्रिया की भी जानकारी दी जाएगी। तमिलनाडु अंगदान में सबसे आगे बता दें कि नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन की वर्ष 2023 में अंगदान की रिपोर्ट के अनुसार अंगदान के मामले में तमिलनाडु देश में अव्वल है। जहां वर्ष 2023 में 500 से अधिक अंग प्रत्यारोपण हुए। इसके बाद तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात का नंबर है। एमपी में 2016 से अब तक 243 अंगदान हुए मध्य प्रदेश में वर्ष 2016 से अब तक करीब 65 ब्रेन डेड लोगों के 243 अंगदान हुए हैं। इस लिहाज से यहां जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। प्रदेश के कुछ बड़े निजी और सरकारी अस्पतालों में हार्ट सहित सभी अंगों के प्रत्यारोपण की सुविधा है। दरअसल, ‘आयुष्मान भारत’ केंद्र की योजना है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों मिलकर प्रीमियम देते हैं, पर राज्य आवश्यकता के अनुसार कुछ समूहों को अलग से जोड़ सकते हैं। इनका प्रीमियम राज्य सरकार चुकाती है। ब्रेन डेड के अंगदान जब किसी व्यक्ति का ब्रेन(दिमाग) काम करना बंद कर देता है, पर दिल काम करता रहता है, तो इसे ब्रेन डेड की अवस्था कहा जाता है। ऐसे रोगियों का कुछ घंटे बाद दिल भी काम करना बंद कर देता है। उसके पहले उसके अंग निकाले जाते हैं। फेफड़ा, हार्ट, दो किडनी, लिवर, पैंक्रियाज, कार्निया दान की जा सकती है। डाक्यूमेंट्री भी तैयार कराई जा रही     अंगदान करने वालों के स्वजन को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जाएगा। शीघ्र ही इस संबंध में शासन स्तर पर निर्णय हो जाएगा। लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कई प्रयास किए जा रहे हैं। डाक्यूमेंट्री तैयार कराई जा रही है। – डॉ. एके श्रीवास्तव, संचालक चिकित्सा शिक्षा मप्र।  

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