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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- जीआईएस भोपाल से ग्लोबल हुआ प्रदेश का स्टार्ट-अप इको सिस्टम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जीआईएस-भोपाल में देश के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न पर काम करते हुए मध्यप्रदेश भी तेजी के साथ एक मजबूत स्टार्ट-अप हब के रूप में उभर रहा है। प्रदेश सरकार नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए युवा उद्यमियों की आकांक्षाओं के अनुकूल स्टार्ट-अप कल्चर को विकसित करने की दिशा में प्रभावी रणनीति अपना रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रयास मध्यप्रदेश को “स्टार्ट-अप और नवाचार का केंद्र” बनाना है, जहां युवा उद्यमियों के आइडियाज को सफल व्यवसायों में बदलने के लिए अनुकूल माहौल और पूरा सहयोग मिले। जीआईएस-भोपाल में आयोजित ‘फ्यूचर-फ्रंटियर : स्टार्ट-अप पिचिंग’ सेशन नें प्रदेश के स्टार्ट-अप्स इकोसिस्टम को पंख दे कर ग्लोबल बना दिया है। आधुनिक तकनीक के इस युग में देश के स्टार्ट-अप जगत में मध्यप्रदेश बहुत तेजी से अपनी उपस्थिति दर्ज चुका है। जीआईएस-भोपाल में 20 से अधिक यूनिकॉर्न के संस्थापकों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है। स्टार्ट-अप पर फोकस्ड सेशन ‘फ्यूचर-फ्रंटियर : स्टार्ट-अप पिचिंग’ में शामिल होने के लिए कुल 180 स्टार्ट-अप्स ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 25 हाईली पोटेंशियल स्टार्ट-अप्स ने प्रस्तुतियां दीं। प्रस्तुतियों के विश्लेषण के बाद उन्हें जरूरी मार्गदर्शन और निवेश के अवसर भी मिले। इस सेशन में कुल 47 स्टार्ट-अप शामिल हुए थे। इनमें से 19 स्टार्ट-अप्स को एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट प्राप्त हुए।   मध्यप्रदेश में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिये महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति के उद्यमियों के स्टार्ट-अप्स को पहले निवेश पर 18 फीसदी, अधिकतम 18 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता मिल रही है। अन्य स्टार्ट-अप्स को पहले निवेश पर 15 प्रतिशत सहायता, अधिकतम 15 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इसके साथ इन्क्यूबेटर विस्तार के लिए 5 लाख रुपये का एक मुश्त अनुदान, स्टार्ट-अप्स के ऑफिस किराए में 50 फीसदी राशि की वापसी (तीन वर्षों तक प्रतिमाह 5,000 रुपये) की भी व्यवस्था की गई है। नीति में पेटेंट कराने पर 5 लाख रुपये तक की सहायता और पेटेंट फाइल करने की प्रक्रिया में आवश्यक सहायता का भी प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमियों के स्टार्ट-अप्स को विशेष प्रोत्साहन मध्यप्रदेश में इस समय 4,900 से अधिक स्टार्ट-अप संचालित हो रहे हैं। इनमें से करीब 44 प्रतिशत स्टार्ट-अप्स महिलाओं द्वारा संचालित हैं। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि हमारा लक्ष्य ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ के तहत पंजीकृत स्टार्ट-अप्स की संख्या को 100 प्रतिशत तक बढ़ाना और कृषि एवं खाद्य क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स को 200 प्रतिशत तक बढ़ावा देना है। इसके लिए प्रदेश में 72 इनक्यूबेटर कार्यरत हैं और उत्पाद-आधारित स्टार्ट-अप्स को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार की स्टार्ट-अप नीति और क्रियान्वयन योजना के अंतर्गत स्टार्ट-अप्स को वित्तीय मदद, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में सहायता और नीतिगत मदद मुहैया कराई जा रही है। नई स्टार्ट-अप नीति के तहत वित्तीय अनुदान के पात्र स्टार्ट-अप्स को कुल निवेश का 18 फीसदी (अधिकतम 18 लाख रुपये) का अनुदान दिया जा रहा है। नई नीति में वित्तीय प्रोत्साहन, अधोसंरचना सहायता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शामिल हैं।  

प्रबंध संचालक ने बिजली उपभोक्ताओं के परिसरों का किया औचक निरीक्षण

भोपाल यही कोई शाम साढ़े 4-5 बजे का समय था, प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल अपने दफ्तर से उठे और सीधे पहॅुंच गए इंडस्ट्रियल गेट जोन के अंतर्गत शहंशा गार्डन मकान नंबर 14 में निवासरत सुश्री सालेहा के घर पर। इस उपभोक्ता पर 2 लाख 81 हजार से अधिक रूपये का बिजली बिल बकाया था। उन्होंने परिसर का मुआयना किया और देखा कि परिसर में ताला लगा हुआ है और बिजली कनेक्शन कटा हुआ है। तहकीकात से पता चला कि इस उपभोक्ता को गलत राशि का बिल मिला था। उन्होंने मौके पर ही उपभोक्ता को राहत प्रदान करते हुए मीटर टेस्टिंग लैब की रिपोर्ट के आधार पर दो दिन के भीतर पुनरीक्षित बिल जारी करने के निर्देश दिए। इसी जोन के अंतर्गत मकान नंबर 201, सुदामा नगर में निवासरत उपभोक्ता श्री दीपक कुमार के घर का प्रबंध संचालक ने मुआयना किया और देखा कि उपभोक्ता के कनेक्शन में पड़ोसी के बिजली मीटर से लाइन जोड़कर बिजली उपयोग की जा रही है जबकि कंपनी के रिकार्ड में उपभोक्ता पर 35 हजार से अधिक राशि का बिल बकाया होने के कारण कनेक्शन काटा जाना दर्ज है। प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघन ने उपभोक्ता पर सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए और विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 138 के अंतर्गत प्रकरण बनाने के निर्देश दिए। इस दौरान प्रबंध संचालक ने चांदबढ़ अंतर्गत नव बहार कॉलोनी स्थित गैर घरेलू उपभोक्ता श्री दुलारे खान के कनेक्शन पर 61 हजार 260 बकाया राशि पाए जाने पर उपभोक्ता द्वारा एक दिवस के भीतर राशि जमा नहीं करने पर कनेक्शन काटने के निर्देश दिए। इसी प्रकार भानपुर के शिवनगर स्थित गैर घरेलू उपभोक्ता श्री रिज़वान मलिक के कनेक्शन पर 78 हजार 057 बिजली बिल बकाया होने तथा घरेलू उपभोक्ता श्री विवेक कुमार साहू के कनेक्शन पर 1 लाख 87 हजार से अधिक बकाया होने पर ड्यूज रिक्व्हरी एक्ट के तहत कार्यवाही करने के निर्देश दिये। निरीक्षण के दौरान मुख्य महाप्रबंधक भोपाल क्षेत्र श्री अमृतपाल सिंह एवं महाप्रबंधक भोपाल शहर श्री बी.बी.एस. परिहार उपस्थित थे। दरअसल कंपनी के सूचना प्रौद्योगिकी अनुभाग द्वारा आरसीडीसी मॉडयूल बनाया गया है जिससे बकायादार उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटने की कार्यवाही की जाती है और यदि कोई उपभोक्ता बिजली बिल जमा किये बगैर कनेक्शन जोड़ लेता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाती है। वैसे तो उपभोक्ता को अगर कटा हुआ कनेक्शन जुड़वाना है तो उसे निर्धारित रीकनेक्शन चार्ज जमा करना होता है। यह एक निर्धारित प्रक्रिया है और इसकी पूर्ति हर उपभोक्ता को करना होती है। प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने अधिकारियों से कहा कि उपभोक्ताओं को जारी गलत बिल में सुधार किया जाए। बकाया राशि जमा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटें तथा अनधिकृत रूप से विद्युत का उपयोग और बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करें।  

व्हील चोर गैंग ने रात के अंधेरे में उड़ाए 2 कारों के टायर

बिलासपुर शहर में इन दिनों ‘व्हील चोर गैंग’ सक्रिय है. रात के अंधेरे में बड़ी सफाई से शातिर चोरों ने दो कारों के टायर उड़ा लिए. चोरी की पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई है, लेकिन चेहरे ढके होने से पहचान करना मुश्किल हो रहा है. सिटी कोतवाली पुलिस चोरों की तलाश में जुटी. लेकिन चोरों के चेहरे ढके होने के कारण उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है. पुलिस मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है. जानकारी के अनुसार, घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के गीतांजली नगर कश्यप कॉलोनी की है. शातिर चोर देर रात मौके पर पहुंचे और आराम से कारों के टायर खोलकर फरार हो गए. जब सुबह वाहन मालिकों को घटना का पता चला, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई. पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर चोरों की तलाश में जुट गई है.

श्रीनगर : 25 जून से शुरू हो जाएगी अमरनाथ यात्रा, 9 अगस्त तक होगी यात्रा अवधि….

श्रीनगर  इस साल अमरनाथ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। श्री अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए तारीख सामने आ गई है। श्रद्धालुओं के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई शुरू होगी और 9 अगस्त तक चलेगी। 39 दिनों तक चलने वाली यात्रा के लिए प्रशासन ने खास इंतजाम किए हैं। श्री अमरनाथ यात्रा का शेड्यूल जारी हो गया। इसे लेकर श्रद्धालु 3 जुलाई से 9 अगस्त तक बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे। अमरनाथ यात्रा 39 दिनों तक चलेगी। जानकारी के मुताबिक श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (Shri Amarnath Ji Shrine Board) जल्द ही एडवांस पंजीकरण के लिए अधिकृत किए जाने वाले बैंकों की शाखाओं की विस्तार से जानकारी उपलब्ध करवाएगा। चूंकि पंजीकरण के लिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जरूरी है। इसलिए देश भर के राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य प्रमाणपत्र बनने वाले अस्पतालों व डॉक्टरों की टीमों की सूची जारी की जाएगी। आम तौर पर पंजाब नेशनल बैंक, यस बैंक और जम्मू कश्मीर बैंकों की करीब साढ़े पांच सौ शाखाओं से पंजीकरण करने की व्यवस्था होती है। बोर्ड जल्द ही ग्रुप पंजीकरण के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा। साथ ही ऑनलाइन पंजीकरण को भी खोला जाएगा। कितनी ऊंचाई पर हैं अमरनाथ गुफा? यात्रा स्कंद षष्ठी के शुभ अवसर पर शुरू होती है और श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर समाप्त होती है। वर्ष के इस समय के दौरान, तीर्थयात्रियों के लिए मौसम काफी सुखद रहता है। यह क्षेत्र वर्ष के बाकी समय बर्फ से ढका रहता है, इसलिए उन महीनों के दौरान यहां नहीं जाया जा सकता है। अमरनाथ की यात्रा श्रीनगर और पहलगाम से शुरू होती है और अमरनाथ गुफा तक जाती है जो 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इन मार्गों से होती है अमरनाथ यात्रा 38 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से होती है। एक एास्ता अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम मार्ग का है जबकि दूसरा रास्ता गांदेरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबा बालटाल से होते हुए है। श्रीनगर से 141 किलोमीटर दूर और समुद्र तल से 12,756 फीट की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ यात्रा करने के लिए हर साल लाखों की तादाद में भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन करने पहुंचते हैं। अमरनाथ यात्रा के लिए कहां से करें रजिस्ट्रेशनबाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। ऐसे में भक्त श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट https://jksasb.nic.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके अलावा अमरनाथ श्राइन बोर्ड की मोबाइल एप्लिकेशन से भी अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। यात्रा का मार्ग      मंद‍िर तक पहुंचने वाले मार्ग पर बेहद ही कठ‍िनाई होती है। लिहाजा इसल‍िए अमरनाथ यात्रा मार्ग को जुलाई-अगस्त के आसपास श्रावण के महीने में ही जनता के लिए खोला जाता है। सड़क के रास्ते अमरनाथ पहुंचने के लिए पहले जम्मू तक जाना होगा फिर जम्मू से श्रीनगर तक का सफर करना होता है। श्रीनगर से तीर्थयात्री पहलगाम या बालटाल पहुँचते हैं। पहलगाम या बालटाल तक आप किसी भी वाहन से पहुंच सकते हैं लेकिन इससे आगे का सफर आपको पैदल ही करना होता है। क्योंकि पहलगाम और बालटाल से ही श्री अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होती है और पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए यहाँ से दो रास्ते निकलते हैं। पहलगाम से अमरनाथ की पवित्र गुफा की दूरी जहाँ करीब 48 किलोमीटर है वहीं बालटाल से गुफा की दूरी 14 किलोमीटर है। यहाँ से तीर्थयात्रियों को पैदल मार्ग से ही गुफा तक यात्रा करनी होती है।   चूँकि बालटाल से अमरनाथ गुफा तक की दूरी कम है और यह छोटा रूट है लिहाजा तीर्थयात्री कम समय में गुफा तक पहुंच सकते हैं। लेकिन यह रास्ता काफी कठिन और सीधी चढ़ाई वाला है इसलिए इस रूट से ज्यादा बुजुर्ग और बीमार नहीं जाते हैं। जबकि बात करें पहलगाम रूट की तो यह अमरनाथ यात्रा का सबसे पुराना और ऐतिहासिक रूट है। इस रूट से गुफा तक पहुंचने में करीब 3 दिन लगते हैं। लेकिन यह ज्यादा कठिन नहीं है। पहलगाम से पहला पड़ाव चंदनवाड़ी का आता है जो पहलगाम बेस कैंप से करीब 16 किलोमीटर दूर है यहां तक रास्ता लगभग सपाट होता है इसके बाद चढ़ाई शुरू होती है। इससे अगला स्टॉप 3 किलोमीटर आगे पिस्सू टॉप है। तीसरा पड़ाव शेषनाग है जो पिस्सू टॉप से करीब 9 किलोमीटर दूर है। शेषनाग के बाद अगला पड़ाव पंचतरणी का आता है जो शेषनाग से 14 किलोमीटर दूर है। पंचतरणी से पवित्र गुफा केवल 6 किलोमीटर दूर रह जाती है। पिछले साल 29 जून से शुरू हुई थी यात्रा पिछले साल अमरनाथ यात्रा के लिए पहला जत्था 29 जून को रवाना हुआ था. यह यात्रा रक्षाबंधन के दिन यानी 19 अगस्त तक चली थी. पिछले साल श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. जम्मू-कश्मीर पुलिस की सुरक्षा विंग ने जम्मू में अमरनाथ बेस कैंप के आसपास के इलाके में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए थे.

मुहम्मद यूनुस ने कहा- शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करते हुए भारत को औपचारिक पत्र भेजे थे, लेकिन नहीं दिया भाव

ढाका बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में रह रही हैं। उनकी वतन वापसी के लिए मोहम्मद यूनुस सरकार ने ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया है, लेकिन भारत बिल्कुल भी भाव नहीं दे रहा। एक इंटरव्यू में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने कहा है कि ढाका ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करते हुए भारत को औपचारिक पत्र भेजे थे, लेकिन नई दिल्ली से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। ब्रिटेन स्थित स्काई न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में, यूनुस ने कहा कि हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराध के लिए मुकदमा चलाया जाएगा। 77 वर्षीय शेख हसीना पिछले साल 5 अगस्त से भारत में रह रही हैं। वे छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश से भाग गई थीं, जिसने उनकी अवामी लीग की 16 साल की सरकार को गिरा दिया था। बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने हसीना और कई पूर्व कैबिनेट मंत्रियों, सलाहकारों, तथा सैन्य और नागरिक अधिकारियों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। हसीना से जुड़े लोगों पर भी चलेगा केस मोहम्मद यूनुस ने कहा, “एक मुकदमा चलेगा। न केवल उनके खिलाफ, बल्कि उनके साथ जुड़े सभी लोगों – उसके परिवार के सदस्यों, उनके सहयोगियों के खिलाफ भी।” बांग्लादेश ने उसके लिए दो गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। यूनुस ने कहा कि उन्होंने औपचारिक पत्र भेजे थे, लेकिन नई दिल्ली से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। पिछले साल भारत ने नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग से ‘नोट वर्बल’ या राजनयिक संचार प्राप्त करने की पुष्टि की थी, लेकिन इस पर टिप्पणी करने से इनकार किया था। हालांकि, यूनुस ने जोर देकर कहा कि हसीना को अदालत का सामना करना होगा, चाहे वह बांग्लादेश में शारीरिक रूप से मौजूद हों या भारत में अनुपस्थित हों। कुख्यात जेल का यूनुस ने किया जिक्र यूनुस ने कहा कि वह अब कुख्यात गुप्त जेलों में से एक में जो कुछ भी देखा, उससे वह हैरान रह गए, जिसका कोड नाम ‘हाउस ऑफ मिरर्स’ है। उन्होंने कहा, “यह सबसे भयावह चीज है जिसे आप देख सकते हैं, महसूस कर सकते हैं या देख सकते हैं।” हसीना पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं के अपहरण, यातना और हत्या की निगरानी के लिए अपने सुरक्षा बलों और पुलिस का इस्तेमाल करने का आरोप है। वह आरोपों से इनकार करती हैं और कहती हैं कि उन्हें राजनीतिक रूप से सताया जा रहा है। यूनुस ने कहा कि कथित अपराधों में शामिल लोगों की संख्या और सीमा का पता लगाने में समय लग रहा है।

धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा- पर्यटन किसी भी राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ़ है

भोपाल पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि पर्यटन किसी भी राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ़ है। वर्तमान में पर्यटन उद्योग वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पर्यटन अधोसंरचनाओं के निर्माण और पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए सतत प्रयास किए जा रहे है। राज्य मंत्री श्री लोधी ने ITB बर्लिन 2025 में भारत पवेलियन और मध्यप्रदेश पवेलियन का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर जर्मनी में भारत के राजदूत श्री अजीत गुप्ते, अपर प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड सुश्री बिदिशा मुखर्जी भी उपस्थित रही। राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि ITB बर्लिन पर्यटन उद्योग के लिए एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्किंग और व्यापार मंच है, जो विगत 60 वर्षों से विश्व पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।  राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि मध्यप्रदेश के पर्यटन को ITB बर्लिन में वैश्विक बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश, अपनी प्राकृतिक, ऐतिहासिक, पुरातात्विक, सांस्कृतिक और धार्मिक संपदा के लिए प्रसिद्ध है। 8 टाइगर रिज़र्व, 12 राष्ट्रीय उद्यान, और 25 से अधिक वन्यजीव अभयारण्य इसे देश का टाइगर स्टेट बनाते हैं। ऐतिहासिक धरोहरों की बात करें तो खजुराहो, सांची और भीमबेटका जैसे तीन महत्वपूर्ण स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं, जबकि 11 अन्य स्थलों को अस्थायी सूची में स्थान मिला है। ITB बर्लिन में मध्यप्रदेश पवेलियन को विशेष रूप से प्रदेश के नैसर्गिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मंच प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक निवेशकों और ट्रैवल ऑपरेटर्स के समक्ष प्रस्तुत करने का बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। वैश्विक पर्यटन कंपनियों के साथ संवाद राज्यमंत्री श्री लोधी ने इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय ट्रैवल टूर ऑपरेटर्स, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के प्रतिनिधियों और विभिन्न देशों के पर्यटन अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने मध्यप्रदेश की पर्यटन नीति और निवेश के अवसरों पर चर्चा करते हुए, सभी को मध्यप्रदेश आने और प्रदेश में पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए आमंत्रित किया। ITB बर्लिन में भागीदारी से मध्यप्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत स्थान मिलेगा। इस आयोजन के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने, पर्यटन निवेश को बढ़ावा देने और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर मिला है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अतिथि देवो भव: के भाव को किया चरितार्थ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के पर्यटन व संस्कृति पर केंद्रित सत्र में कहा था कि मेले का मतलब है मेल-जोल बढ़ाना और ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट, उद्योगपितयों-निवेशकों-उद्यमियों और सरकार व प्रदेशवासियों के बीच मेल-जोल बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। भोपाल में पहली बार आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में देश दुनिया के प्रमुख उद्योगपति, निवेशक, यंग इन्नोवेटर, जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुसार निवेश के इस महाकुंभ में पधार रहे सभी अतिथियों का स्वागत-सत्कार, भारतीय संस्कृति के “अतिथि देवो भव:” का भाव जीआईएस में साकार हुआ। उनका विचार था कि यह आयोजन परस्पर मेल-जोल, सद्भावना और सुखद अनुभूति के साथ हो और समिट की सुमधुर स्मृतियां, लंबे चलने वाले संबंधों का आधार बनें। अत: इस वैश्विक आयोजन में अतिथियों के आवागमन-आवास और भोजन की व्यवस्था के प्रति आरंभ से ही विशेष संवेदनशीलता रही। वैश्विक सम्मेलन में, विविधता से भरे हमारे देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ दुनिया के लगभग 60 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। भोजन, सभी की मूल आवश्यकता है, परंतु अलग-अलग सामाजिक -सांस्कृतिक-भौगोलिक परिवेश के कारण भोजन के लिए लोगों की आदतें, रुचियां और आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं। विभिन्न क्षेत्रों से आए इन विशिष्ट जन के लिए भोजन की व्यवस्था एक चुनौती थी। विविधता भरे समागम में सभी के स्वाद और संतुष्टि के अनुरूप भोजन की व्यवस्था करना, एक प्रकार से अपनी दक्षता का प्रमाण देने जैसा था। भोजन हमारी संपन्नता- सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध विरासत को अभिव्यक्त करने का माध्यम है। यह माना जाता है कि भोजन में लोगों को जोड़ने की अद्भुत क्षमता है। अच्छे स्वाद-सुगंध-स्पर्श और आकर्षक प्रस्तुतिकरण से भोजन की यह क्षमता और बढ़ जाती है। देश के दिल में बसे मध्यप्रदेश का भोजन, नए बदलावों को समरसता के साथ आत्मसात करने का प्रतीक है। स्वरुचि भोज परस्पर सौहार्द्र पैदा करने की सामर्थ्य रखते हैं। ग्लोबल समिट के लंच डिनर सेशन, प्रदेश की संपन्नता और आत्मीय तथा सर्व समावेशी व्यवहार के प्रकटीकरण का माध्यम बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए भोज देश-विदेश के उद्योग समूहों को मध्यप्रदेश के करीब लाने और उनमें राज्य के प्रति रुचि विकसित करने तथा परस्पर मेल-जोल बढ़ाने में सफल रहे। वैश्विक सम्मेलन में जापान से लेकर जर्मनी और अमेरिका, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका सहित लगभग सभी महाद्विपों के देशों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों से आए व्यापार-उद्योग जगत के प्रतिनिधि इस समागम को विविधता से परिपूर्ण बना रहे थे। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लंच-डिनर सेशन में सबकी रुचि-संस्कृति-क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता सब के स्वाद और स्वभाव अनुसार भोजन परोसा गया। खान-पान में मध्यप्रदेश और देश के प्रमुख व्यंजनों के साथ-साथ यूरोपियन, थाई, चाइनीस डिशेज शामिल थीं। जैन फूड, वीगन, मिलेट (श्री अन्न) और ग्लूटेन फ्री आहार लेने वालों का विशेष ध्यान रखा गया। भोजन तैयार करने में प्रदेश के प्रमुख शेफ, विशेषज्ञों, कारीगरों और इस क्षेत्र की प्रतिनिधि संस्थाओं की मदद ली गई। मध्यप्रदेश के व्यंजनों में हाउस ऑफ सैलाना के रॉयल क्यूज़ीन के अंतर्गत मोती के दाने, दाल बाफले, घुइयां की सब्जी, सिंघाड़े की चाट, मुरैना की गजक, झाबुआ का मालपुआ, उज्जैन की कुल्फी, हींग कचौड़ी, रिकमज की सब्जी, इंद्रहर, महुआ का मीठा, टेथरा की रबड़ी और भोपाली गोभी मुसल्लम खास रहे। देश के विभिन्न अंचलों के व्यंजनों में अमृतसरी छोले कुलचे, बिहारी लिट्टी चोखा, दक्षिण का डोसा-उत्तपम, मेरठ की रोटियां और पराठे, बंगाली चौम चौम और केसर अंगूरी रसमलाई परोसे गए। अन्तर्राष्ट्रीय व्यंजनों में पास्ता, टॉर्ट, रिसोटो, ग्नौची, क्लासिक ओपेरा, बास्किन-रॉबिंस की आइसक्रीम, इंडो चाइनीस वोक, नूडल्स, थाय करी और डिम्सिम अतिथियों के आकर्षण का केंद्र रहे। मिलेट फूड के अंतर्गत कुटकी की खीर, रागी बालूशाही, मिलेट खिचड़ी, बाजरे की टिक्की तो जैन फूड में बिना प्याज, लहसुन के व्यंजन और मिलेट थालीपीठ शामिल थे। अलग-अलग क्षेत्र से आए अतिथि, अपने क्षेत्र के मूल व्यंजनों के साथ-साथ अपनी रुचि और जिज्ञासा के अनुसार अन्य क्षेत्रों के व्यंजनों का आनंद लेते रहे। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लंच-डिनर सेशन ने भोजन के सम्मोहन और विविधता से एकाकार होने के अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशन में हुई सत्कार व्यवस्था की देश-विदेश के अतिथियों ने सराहना की। भोजन के विभिन्न सत्रों में नवाचार के साथ परोसी गई मिलेट (श्री अन्न) की डिशेज और मध्यप्रदेश के स्थानीय व्यंजनों की विशेष सराहना हुई। राज्य में पर्यटन गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है, पर्यटन को बढ़ाने में अतिथियों के स्वागत-सत्कार और उनके आवास,भोजन आवागमन आदि की संतोषजनक व्यवस्था का विशेष महत्व है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की व्यवस्थाओं ने इस क्षेत्र में प्रदेश की दक्षता और क्षमता को देश विदेश के अतिथियों के सामने प्रस्तुत किया। देश-विदेश के अतिथियों के मन-मस्तिष्क में बनी प्रदेश की इस छवि से समिट की व्यवस्थाओं और परोसे गए व्यंजनों के स्वाद की गूंज विश्व के कोने कोने में पहुंची है। 

रेलवे बोर्ड का ऐतिहासिक निर्णय: अब पदोन्नति परीक्षाएं पारदर्शी, डिजिटल और निष्पक्ष तरीके से होंगी!

भोपाल आज रेलवे बोर्ड द्वारा एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें निर्णय लिया गया कि सभी विभागीय पदोन्नति परीक्षाएं अब रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) या केंद्रीयकृत परीक्षा प्रणाली के माध्यम से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) द्वारा आयोजित की जाएंगी। परीक्षा कैलेंडर की व्यवस्था सभी ज़ोनल रेलों को एक वार्षिक परीक्षा कैलेंडर तैयार करने का निर्देश दिया गया है। परीक्षाएं केवल इस कैलेंडर के अनुसार आयोजित की जाएंगी, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित हो सके। RRB की निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली यह निर्णय हाल के वर्षों में RRB द्वारा आयोजित परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और प्रशंसनीय संचालन के अनुभव के आधार पर लिया गया है। 2015 से अब तक, RRB ने 7 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों की परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) के माध्यम से आयोजित की हैं, जिनमें पेपर लीक, प्रॉक्सी कैंडिडेट, रिमोट लॉग-इन और स्पाई डिवाइस जैसी किसी भी गड़बड़ी की कोई शिकायत नहीं मिली है। पारदर्शी परीक्षा संचालन की प्रमुख विशेषताएँ 1. परीक्षा एजेंसी का चयन ओपन टेंडर प्रक्रिया गुणवत्ता व लागत आधारित चयन प्रक्रिया (QCBS) ISO प्रमाणन, वित्तीय स्थिरता, CERT-IN एवं CMMI प्रमाणन न्यूनतम पात्रता मानदंड: परीक्षा केंद्रों की संख्या एवं पूर्व अनुभव 2. परीक्षा केंद्रों का ऑडिट रेलवे टीम द्वारा परीक्षा केंद्र का गहन निरीक्षण प्रत्येक केंद्र पर सुविधाओं की जाँच हेतु चेकलिस्ट परीक्षा केंद्र के बाहर शौचालय की अनुमति नहीं 100% CCTV कवरेज – रिकॉर्डिंग परीक्षा से 2 घंटे पूर्व और परीक्षा के 1 घंटे बाद तक IP आधारित CCTV निगरानी – उच्च गुणवत्ता एवं निर्बाध कनेक्शन सुनिश्चित करना केवल व्यावसायिक और रिहायशी क्षेत्रों से दूर स्थित न्यूनतम 250 सीटों की क्षमता वाले केंद्रों का चयन 3. तकनीकी बुनियादी ढांचा सर्वर : न्यूनतम 1.5 GHz CPU, 4GB RAM, स्क्रीन रिज़ॉल्यूशन 1024×768 नोड्स : न्यूनतम 2GB RAM, USB, प्रॉक्सी और इंटरनेट निष्क्रिय कुंजीबोर्ड लॉगिन के बाद निष्क्रिय सभी माउस और की-बोर्ड क्लिक का टाइम-स्टैम्प के साथ रिकॉर्डिंग 4. परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता और सुरक्षा परीक्षा शहर की जानकारी परीक्षा तिथि से 10 दिन पूर्व उपलब्ध कराई जाती है परीक्षा केंद्र की जानकारी परीक्षा से केवल 4 दिन पूर्व साझा की जाती है परीक्षा केंद्र का आवंटन कंप्यूटराइज्ड रैंडम जनरेशन द्वारा किया जाता है परीक्षा केंद्र के भीतर लैब और नोड्स का भी स्वचालित और रैंडम आवंटन परीक्षा से 2 घंटे पूर्व तक ही केंद्र संचालकों एवं परीक्षा दल को अभ्यर्थियों की जानकारी दी जाती है 5. कड़ी निगरानी व्यवस्था प्रवेश द्वार पर हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर से जांच बायोमेट्रिक उपस्थिति (फिंगरप्रिंट और डिजिटल) प्रवेश से पहले, परीक्षा के मध्य एवं प्रत्येक बायो ब्रेक के बाद अनिवार्य सभी परीक्षाओं के विभिन्न चरणों एवं दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान यह प्रक्रिया दोहराई जाती है आधार आधारित प्रमाणीकरण N:N तुलनात्मक विश्लेषण द्वारा परीक्षाओं के विभिन्न शिफ्ट और आयोजनों में सॉल्वर गैंग की पहचान 6. सुरक्षित प्रश्न पत्र और उत्तर कुंजी प्रश्न पत्र 256-बिट एन्क्रिप्शन के साथ पूरी तरह सुरक्षित अंतिम समय पर ही प्रश्न पत्र डिक्रिप्ट किया जाता है, जब उम्मीदवार लॉग इन करता है प्रत्येक अभ्यर्थी को प्रश्नों का क्रम और उत्तर विकल्प अलग और रैंडमाइज़ प्राप्त होते हैं उम्मीदवार की सभी गतिविधियों की लॉग रिपोर्टिंग 7. तीन स्तर की निगरानी प्रणाली ECA टीम की निगरानी रेलवे अधिकारियों एवं पर्यवेक्षकों द्वारा निगरानी रेलवे सतर्कता टीम द्वारा औचक निरीक्षण पहले और दूसरे निगरानी दलों को लैब्स और केंद्रों के बीच नियमित रूप से बदला जाता है 8. अभ्यर्थियों की पहचान और दस्तावेज़ सत्यापन आवेदन पत्र पर QR कोड द्वारा फर्जी आवेदन की पहचान प्रवेश पत्र (Admit Card) पर बारकोड जिससे अभ्यर्थी की वास्तविकता सुनिश्चित हो परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को उनके प्रश्न पत्र, उत्तर पुस्तिका और सही उत्तर कुंजी दिखाई जाती है अभ्यर्थियों को किसी भी प्रश्न या उत्तर कुंजी की सत्यता को चुनौती देने का अवसर प्रदान किया जाता है  इस नई प्रणाली से रेलवे की भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं पूर्णतः सुरक्षित होगी। रेलवे बोर्ड का यह निर्णय रेलवे भर्ती प्रक्रिया में एक नए मानक की स्थापना करेगा।

30 मार्च को छत्तीसगढ़ दौरे पर आएंगे पीएम मोदी, सीएम साय ने मंत्रियों के साथ की दौरे को लेकर बैठक

रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 मार्च को छत्तीसगढ़ दौरे पर आएंगे. वे बिलासपुर में आयोजित लोकार्पण एवं भूमिपूजन के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे. पीएम के दौरे की तैयारी को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बैठक ली. बैठक में डिप्टी सीएम अरुण साव, विजय शर्मा, मंत्री ओपी चौधरी, श्याम बिहारी जायसवाल, केदार कश्यप के अलावा धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, धर्मजीत सिंह, बिलासपुर रेंज के आईजी संजीव शुक्ला और एसपी रजनीश सिंह मौजूद थे.

भारत में जल्द सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस का शुरु होने वाली है, अब सैटेलाइट से चलेगा इंटरनेट

नई दिल्ली भारत में जल्द सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस का शुरु होने वाली है। इस साल जून की शुरूआत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू हो सकती है। दूरसंचार नियामक इस सर्विस के लिए बेस तैयार कर रहा है, जो दूरदराज और समंदर तक में इंटरनेट पहुंचाने में सक्षम है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) सैटेलाइट कम्युनिकेश के प्राइसिंग और उपयोग पर सिफारिशों के एक सेट को अंतिम रूप दे रहा है, जिसे पिछले दो सालों से तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे ही इसकी रूपरेखा तैयार होगी उसके बाद स्पेक्ट्रम एलोकेट किया जाएगा। रिलायंस जियो इन्फोकॉम, भारती एयरटेल और स्टारलिंक द्वारा सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज से जुड़ी सिफारिशें अंतिम रूप दिए जाने के करीब हैं। ब्रॉडबैंड की तुलना में यह सर्विस बहुत आगे है। खास बात है कि यह उन इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी देती है जहां केबल या मोबाइल टावर की सुविधा नहीं है। सैटेलाइट इंटरनेट में स्पेस में मौजूद सैटेलाइट्स का इस्तेमाल किया जाता है। दुनिया के कई देशों में सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह ब्रॉडबैंड इंटरनेट की तुलना में ज्यादा महंगा है, क्योंकि सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़ी लागत ज्यादा होती है।  

नारी सशक्तिकरण से ही राष्ट्र सशक्त होगा: मंत्री श्रीमती उइके

भोपाल लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कहा कि नारी सशक्तिकरण ही वास्तविक राष्ट्र सशक्तिकरण की आधारशिला है। जब महिलाएँ आत्मनिर्भर होंगी, तो समाज और देश की प्रगति स्वतः सुनिश्चित होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिलाओं, विशेष रूप से जनजातीय और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं के उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं को प्रभावी कदम बताया। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की उन्नति का मूल आधार भी है। महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने व्यापक नीतिगत पहल की हैं, जिनका सीधा लाभ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को मिल रहा है। प्रधानमंत्री वन धन योजना जनजातीय महिलाओं को स्वरोजगार और लघु उद्यमों से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है, जिससे वे अपने पारंपरिक ज्ञान और कौशल का उपयोग कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। आदिवासी छात्रवृत्ति योजना और एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय जनजातीय समाज की बेटियों को गुणवत्तापूर्ण और उच्च अध्ययन के अवसर प्रदान कर रहे हैं। स्टैंड अप इंडिया योजना के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए विशेष आर्थिक सहायता दी जा रही है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती और धात्री महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान कर स्वस्थ मातृत्व और पोषण को प्रोत्साहित कर रही है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के माध्यम से विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण को नीति-निर्माण की केंद्रीय धुरी बना रही है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना प्रदेश की 1.29 करोड़ महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करने की ऐतिहासिक पहल है। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे वे परिवार के आर्थिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। मुख्यमंत्री आदिवासी महिला उद्यमिता योजना जनजातीय महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने के लिये अनुदान और ऋण सहायता उपलब्ध करा रही है। हर घर नल जल योजना ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं को पेयजल आपूर्ति की कठिनाइयों से राहत दे रही है, जिससे उनका श्रम और समय बच रहा है और वे शिक्षा, रोजगार और सामाजिक गतिविधियों में अधिक भागीदारी कर पा रही हैं। पेसा अधिनियम जनजातीय महिलाओं को ग्राम सभाओं में सशक्त भूमिका प्रदान करने के लिए प्रभावी कानून है, जिससे वे स्वतंत्र निर्णय ले रही हैं और समुदाय के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल सरकारी योजनाओं से ही संभव नहीं है, बल्कि इसमें समाज की भागीदारी भी आवश्यक है। सरकार स्वरोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और वित्तीय सहायता के माध्यम से जनजातीय और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को सशक्त बना रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे। जब हर नारी सशक्त होगी, तभी राष्ट्र सशक्त होगा और यही हमारा संकल्प है।

शिक्षक द्वारा प्रेक्टिकल का रिजल्ट बिगाड़ने के नाम पर 12वीं की छात्रा से पचास हजार रुपये की मांगे, हुए गिरफ्तार

रतलाम/आलोट जिले के ताल नगर में स्थित न्यू आर्यवीर सीनियर सेकंडरी स्कूल के एक शिक्षक द्वारा प्रेक्टिकल का रिजल्ट बिगाड़ने के नाम पर 12वीं की छात्रा से पचास हजार रुपये की मांग करने तथा नहीं देने पर माता-पिता को जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। छात्रा के काका की रिपोर्ट पर ताल पुलिस ने आरोपित शिक्षक प्रदीप सिंह निवासी ग्राम लसुड़िया खेड़ी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार छात्रा के काका ने ताल थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई है कि उनकी बड़ी भतीजी 12वीं तथा छोटी भतीजी कक्षा नौवीं में न्यू आर्यवीर सीनियर सेकंडरी स्कूल ताल में पढ़ती है। घर के लेनदेन का काम बड़ी भतीजी करती है, उसे पता रहता है कि घर में किस जगह रुपये रखे रहते हैं।दो मार्च 2025 को बड़ी भतीजी ने उसके पिता से कहा कि उसे पचास हजार रुपये की आवश्यकता है। तब मैने व बड़े भाई ने उसुसे पूछा कि इतने रुपयों की क्यों आवश्यकता है, तब उसने बताया कि एक मार्च को स्कूल की एक्सट्रा कलास गई थी। तब स्कूल के शिक्षक प्रदीप सिंह निवासी ग्राम लसुड़ियाखेड़ी ने साइड में बुलाकर धमकी दी थी कि घर से पचास हजार रुपये लेकर आना। नहीं तो तेरी प्रेक्टिकल की परीक्षा का रिजल्ट खराब कर दूंगा, तेरा भविष्य भी खराब कर दूंगा। उसने कहा कि वह इतने रुपये कहां से लेकर आएगी तो प्रदीपसिंह ने कहा कि घर से यदि रुपये लेकर नहीं आई तेरी मम्मी व पापा को जान से खत्म कर देगा। जब भतीजी से पूछा कि छह माह पहले घर से 80 हजार रुपये गायब हुए थे, वह भी क्या प्रदीप सिंह को दिए थे तो उसने कहा कि उसने पहले भी धमकी देकर रुपये मंगाए थे। तब मम्मी-पापा की मृत्यु के डर के कारण उसने यह बात किसी को नहीं बताई थी।  

राहुल गांधी 7 और 8 मार्च को दो दिवसीय गुजरात दौरे पर रहेंगे, इस दौरान बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी 7 और 8 मार्च को दो दिवसीय गुजरात दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे अहमदाबाद में पार्टी पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे। राहुल गांधी का यह दौरा आगामी 2027 के गुजरात विधानसभा चुनावों की तैयारियों को मजबूती देने के लिए हो रहा है। वे पार्टी संगठन को पुनर्गठित करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर देंगे। इसके अलावा, वे कांग्रेस के प्रदेशभर के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर उनका मनोबल बढ़ाएंगे। कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन 8-9 अप्रैल को अहमदाबाद में आयोजित किया जाएगा। इससे पहले राहुल गांधी का दौरा यह संकेत देता है कि पार्टी गुजरात चुनावों को लेकर गंभीर है और रणनीति में बदलाव की संभावना है। राजनीतिक सरगर्मियां तेज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 7-8 मार्च को गुजरात के सूरत और नवसारी जिलों के दौरे पर रहेंगे, जिससे प्रदेश में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। कांग्रेस और बीजेपी, दोनों ही आगामी चुनावों को लेकर अपनी रणनीति को धार देने में जुटी हैं।  

कलेक्टर ने बैरसिया का दौरा कर विभिन्न विकास कार्यों और शासकीय योजनाओं की प्रगति का निरीक्षण किया

भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आज बैरसिया का दौरा कर विभिन्न विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की प्रगति का निरीक्षण किया। इस दौरान में एसडीएम बैरसिया आशुतोष शर्मा, मंडी सचिव  सुनील एवं सीएम राइज स्कूल के प्राचार्य एच. एन. मिश्रा भी उपस्थित रहे सीएम राइज स्कूल का निरीक्षण कलेक्टर श्री सिंह ने बैरसिया मैं निर्माणाधीन सीएम राइज स्कूल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण एजेंसी मध्य प्रदेश पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के साइट इंजीनियर को निर्माण कार्य को गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने एवं निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही, एसडीएम बैरसिया को निर्देशित किया कि स्कूल की बाउंड्री वॉल और उसके गेट के सामने का अतिक्रमण हटाया जाए। कृषि उपज मंडी का दौरा कलेक्टर श्री सिंह ने कृषि उपज मंडी बैरसिया का निरीक्षण किया, जहां उन्होंने ई-मंडी के कार्यों का स्वयं पोर्टल पर परीक्षण किया। उन्होंने आगामी उपार्जन कार्यों के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए एसडीएम और भारसाधक अधिकारी कृषि उपज मंडी बैरसिया को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। राजस्व कार्यों की समीक्षा कलेक्टर श्री सिंह ने तहसील बैरसिया में संपादित होने वाले राजस्व कार्यों का परीक्षण करते हुए एसडीएम बैरसिया को निर्देशित किया कि फार्मर रजिस्ट्री, आरओआर एंट्री, सीएम हेल्पलाइन सहित सभी कार्यों में एक सप्ताह के भीतर उल्लेखनीय प्रगति का लक्ष्य प्राप्त किया जाए। अतिक्रमण हटाने एवं सौंदर्यीकरण के निर्देश कलेक्टर श्री सिंह ने एसडीएम बैरसिया को निर्देश दिए कि बैरसिया की मुख्य सड़कों से एक सप्ताह के भीतर अतिक्रमण हटाया जाए। साथ ही, अनुविभागीय अधिकारी एवं तहसील कार्यालय बैरसिया के साथ-साथ शहर की प्रमुख सड़कों को नगरीय निकाय के सहयोग से अतिक्रमण मुक्त कर सौंदर्यीकरण किया जाए।

बोफोर्स घोटाले की जांच फिर से शुरू होने की संभावना, CBI ने अमेरिका से मदद के लिए ‘लेटर रोगेटरी’ भेजा

नई दिल्ली केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अमेरिका को एक न्यायिक अनुरोध भेजकर निजी जांचकर्ता माइकल हर्शमैन से जानकारी मांगी है, जिन्होंने 1980 के दशक के 64 करोड़ रुपये के बोफोर्स रिश्वत कांड के बारे में महत्वपूर्ण विवरण भारतीय एजेंसियों के साथ साझा करने की इच्छा व्यक्त की थी। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। ‘फेयरफैक्स ग्रुप’ के प्रमुख हर्शमैन 2017 में निजी जासूसों के एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे। अपने प्रवास के दौरान, उन्होंने विभिन्न मंचों पर आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने घोटाले की जांच को पटरी से उतार दिया था । उन्होंने कहा था कि वह सीबीआई के साथ विवरण साझा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में दावा किया था कि उन्हें 1986 में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने विदेशों में भारतीयों द्वारा मुद्रा नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन और धन शोधन की जांच और भारत के बाहर ऐसी संपत्तियों का पता लगाने के लिए नियुक्त किया गया था और उनमें से कुछ बोफोर्स सौदे से संबंधित थे। सीबीआई ने वित्त मंत्रालय से भी संपर्क कर हर्शमैन की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज मांगे थे तथा यह भी पूछा था कि क्या उन्होंने कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की है, लेकिन उस समय के रिकॉर्ड एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराए जा सके। एजेंसी ने कई साक्षात्कारों में हर्शमैन के दावों पर ध्यान दिया और 2017 में घोषणा की कि मामले की उचित प्रक्रिया के अनुसार जांच की जाएगी। ‘लेटर रोगेटरी’ की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि आठ नवंबर, 2023, 21 दिसंबर, 2023, 13 मई, 2024 और 14 अगस्त, 2024 को अमेरिकी प्राधिकारियों को भेजे गए पत्रों और स्मरणपत्रों से कोई जानकारी नहीं मिली। ‘लेटर रोगेटरी’ एक लिखित अनुरोध है जो एक देश की अदालत द्वारा किसी आपराधिक मामले की जांच या अभियोजन में सहायता प्राप्त करने के लिए दूसरे देश की अदालत को भेजा जाता है। इंटरपोल से किये गए अनुरोध का भी कोई परिणाम नहीं निकला। सीबीआई को इस साल 14 जनवरी को गृह मंत्रालय से अमेरिका को ‘लेटर रोगेटरी’ भेजने के लिए हरी झंडी मिल गई थी। एजेंसी ने विशेष अदालत को इसकी जानकारी दी, जिसने 11 फरवरी को सीबीआई के ‘लेटर रोगेटरी’ आवेदन को मंजूरी दे दी। एक विशेष अदालत ने ‘लेटर रोगेटरी’ जारी करने के सीबीआई के आवेदन को मंजूरी देते हुए टिप्पणी की, ‘‘माइकल हर्शमैन द्वारा उपर्युक्त साक्षात्कार में किए गए दावों से संबंधित तथ्य का पता लगाने के लिए दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य एकत्र करने के लिए अमेरिका में जांच करना आवश्यक है।” स्वीडन के एक रेडियो चैनल ने आरोप लगाया था कि बोफोर्स सौदे को हासिल करने के लिए भारत के राजनीतिक नेताओं और रक्षा अधिकारियों को रिश्वत दी गई थी जिसके तीन साल बाद सीबीआई ने 1990 में मामला दर्ज किया था। इन आरोपों ने राजीव गांधी सरकार के लिए बड़ा परेशानी खड़ी कर दी थी और प्रतिद्वंद्वी दलों ने कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए इसका इस्तेमाल किया था। यह घोटाला स्वीडिश कंपनी बोफोर्स के साथ चार सौ 155 मिमी फील्ड हॉवित्जर तोपों की आपूर्ति के लिए 1,437 करोड़ रुपये के सौदे में 64 करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोपों से संबंधित था। इन तोपों ने करगिल युद्ध के दौरान भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सीबीआई ने 1999 और 2000 में आरोपपत्र दाखिल किए थे। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2004 में राजीव गांधी को आरोप मुक्त कर दिया था। गांधी की लिट्टे के आत्मघाती हमले में हत्या किए जाने के करीब 13 साल बाद अदालत ने यह फैसला दिया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2005 में शेष आरोपियों के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि सीबीआई यह साबित करने में विफल रही कि बोफोर्स से इतालवी व्यापारी ओतावियो क्वात्रोची को मिला धन भारत में लोक सेवकों को रिश्वत के रूप में दिया जाना था। सीबीआई ने 2005 के फैसले के खिलाफ 2018 में उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की थी लेकिन देरी के आधार पर इसे खारिज कर दिया गया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने 2005 में अधिवक्ता अजय अग्रवाल द्वारा दायर अपील में सभी बिंदुओं को उठाने की अनुमति दी थी।  

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