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सेवानिवृति पर दी अपर मुख्य सचिव केसरी को भावभीनी विदाई

भोपाल पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण एवं विमुक्त, घुमन्तु, अर्द्धघुमन्तु कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजीत केसरी का विदाई समारोह विन्ध्याचल भवन के द्वितीय तल पर विभागीय राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर की उपस्थिति में गुरुवार को हुआ। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अपर मुख्य सचिव अजीत केसरी को गुलदस्ता एवं शाल, श्रीफल देकर सम्मानित किया तथा प्रतीक चिन्ह के रूप में राजाभोज की प्रतिमा भेंट की। विभाग के आयुक्त एवं कार्यक्रम के संयोजक सौरभ कुमार सुमन ने राज्यमंत्री एवं अपर मुख्य सचिव केसरी का स्वागत गुलदस्ता एवं शाल, श्रीफल देकर किया। विभाग के अपर सचिव अनुराग चौधरी, डॉ. देवेश मिश्रा ने भी अपर मुख्य सचिव केसरी का स्वागत किया। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि अपर मुख्य सचिव केसरी बहुत ही सरल हृदय एवं सहज अधिकारी है। अपर मुख्य सचिव केसरी ने कहा कि विभाग के सभी अधिकारी/कर्मचारियों ने टीम भावना से कार्य किया है, जिसका परिणाम आज विभाग की प्रगति के रूप में सामने है। निःसंदेह विभाग उत्तरोत्तर प्रगति करेगा, मेरी शुभकामनाएं विभाग के साथ है। आयुक्त सुमन ने एक वर्ष के कार्यकाल में विभाग में हुई प्रगति का ब्यौरा दिया, जिसमें सीएम हेल्पलाइन में लंबित शिकायतों का निपटारा प्रमुख है। साथ ही पूर्व के वर्षों की लंबित छात्रवृत्ति का भी शत-प्रतिशत भुगतान किया गया है। विभाग पूरी तन्मयता से कार्य कर रहा है एवं अपर मुख्य सचिव केसरी ने बहुत ही सामंजस्य एवं सहजता से हमारा मार्गदर्शन कर कार्य करने में सहयोग किया है। इसके लिये विभाग उनका आभारी है। विभाग का कार्यालय भदभदा रोड स्थित प्रशिक्षण केन्द्र से विन्ध्याचल भवन में शुरू हुआ है। अपर सचिव अनुराग चौधरी ने अपर मुख्य सचिव केसरी के साथ कार्य करने के अपने अनुभव साझा किये। कार्यक्रम में प्रशिक्षण केन्द्र के संचालक डॉ. देवेश मिश्रा ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में उपसंचालक, वित्त सुमित कुमार जैन, म.प्र. पिछड़ा वर्ग आयोग के सचिव डॉ. नीलेश देसाई, विमुक्त, घुमन्तु कल्याण विभाग की उप सचिव, श्रीमती दीप्ति कोटस्थाने, सहायक संचालक श्रीमती ममता भट्टाचार्य, निरीक्षक नवीन गुप्ता एवं सभी जिलों के सहायक संचालक सहित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी की उपस्थिति रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. कुदउँ लारिया जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले के मकरोनिया रजाखेडी में पंचदेव मंदिर स्थित नरयावली विधायक इंजी. प्रदीप लारिया के निवास पहुंचकर उनके दिवंगत पिता स्व. कुदउँ लारिया जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधायक इंजी. लारिया के परिजनों के प्रति गहन शोक संवेदनाएं व्यक्त कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिये ईश्वर से प्रार्थना की। खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना, सांसद श्रीमती लता वानखेड़े, अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, श्याम तिवारी, समेत अन्य जन-प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।  

आज इंदौर में पुलिस द्वारा मंदिर में चल रही भजन संध्या बंद करवाने के मामले में हिंदू संगठन बंद करवाएंगे क्लब और पब

इंदौर पुलिस द्वारा मंदिर में चल रही भजन संध्या बंद करवाने के मामले में हिंदू संगठन सहित संत समाज शनिवार रात विजय नगर में एकत्र होगा और आस-पास के पब और क्लब को बंद करवाएगा। उल्लेखनीय है कि बुधवार रात करीब 10.45 बजे विजय नगर स्थित काली मंदिर में भजन संध्या चल रही थी। इसी बीच पुलिस ने प्रशासन के निर्देश का हवाला देकर भजन बंद करवा दिए थे। नाराज भक्तों ने पास ही संचालित हो रहे पब में घुसकर हनुमान चालिसा का पाठ कर विरोध जताया था। पुलिस की एकतरफा कार्रवाई पर उठे सवाल काली मंदिर के पुजारी राहुल यादव ने बताया कि महाशिव रात्रि पर मंदिर परिसर में भजन संध्या का आयोजन किया गया था। रात करीब 10.45 बजे विजय नगर थाने से पुलिसकर्मी आए तो भजन बंद करवा दिए। पूछने पर प्रशासन के आदेश का हवाला दिया। जबकि इसी क्षेत्र में देर रात पब और क्लब संचालित होते हैं, बावजूद पुलिस कार्रवाई नहीं करती है। इसके बाद हिंदू संगठन और आस-पास के मंदिरों के पुजारी और भक्त एकत्र हो गए। इसके बाद रात करीब 11.20 बजे हम सभी पास के एक पब में पहुंचे, जो कि संचालित हो रहे था। यहां पर हनुमान चालिसा का पाठ किया। यह है सरकारी नियम इसी माह कलेक्टर आशीष सिंह ने ध्वनि विस्तारक यंत्र काे लेकर आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया कि रात 10 से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर, डीजे आदि बजाने पर सख्ती कार्रवाई होगी। डीजे वाहन पर दो ही स्पीकर लगा पाएंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पांच अप्रैल तक लागू रहेगा। इसके साथ ही लाडडस्पीकर, डीजे, प्रेशर हार्न सहित अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग के लिए सक्षम प्राधिकारी से लेनी होगी अनुमति। वाहन में मध्यम आकार के दो लाउडस्पीकर लगाने की मिलेगी अनुमति। प्रेशर हार्न के रखने और बेचने पर प्रतिबंध।

प्रदेश में बनेगी साइंस सिटी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में साइंस सिटी विकसित की जाएगी। इस संबंध में राज्य सरकार विचार कर रही है। विज्ञान का अधिक से अधिक उपयोग कर प्रदेशवासियों के जीवन को सुगम और सरल बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जा रहा है। नवीन तकनीक का उपयोग करते हुए किसानों से जुड़ी व्यवस्थाओं का सरलीकरण किया जा रहा है। इसमें ड्रोन सर्वे, फसल सर्वे के कार्य शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के प्रति विद्यार्थियों सहित जनसामान्य की रूचि और जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने के लिए विज्ञान गतिविधियों का विस्तार संभाग स्तर तक किया जाएगा। आने वाले समय में मध्यप्रदेश विज्ञान के क्षेत्र में सम्पन्न और समृद्ध बनें इस उद्देश्य से राज्य सरकार नवाचारों तथा अन्य गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार विज्ञान भवन में मीडिया से चर्चा में व्यक्त किए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरूगन और आठवले ने की भेंट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार की शाम समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन और केंद्रीय सामाजिक न्याय तथा अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. मुरुगन एवं आठवले का स्वागत किया।  

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की 175वीं वर्षगांठ पर शहर में होगा वॉकथॉन का आयोजन

भोपाल भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की 175वीं वर्षगांठ के अवसर पर GSI द्वारा 02 मार्च 2025 सुबह 7:00 बजे 3.0 किलोमीटर की वॉकथॉन का आयोजन किया जा रहा है जो बिठ्ठल मार्केट से कैम्पियन स्कूल होते हुए मनीषा मार्केट रोड से वापस होगी व बिठ्ठल मार्किट पर समाप्त होगी। इस वॉकथॉन में रजिस्ट्रेशन के लिए  QR कोड के माध्यम से पंजीकृत कराया जा सकता है।  श्री विजय दुबे, सहायक पुलिस आयुक्त, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहेंगे । भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), वर्ष 2025 में अपनी 175वीं वर्षगांठ मना रहा है, जो एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस 175वीं वर्षगांठ के अवसर पर, GSI का भारत के प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आपदा तैयारियों में अत्यधिक प्रभाव रहा है, जो राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का प्रतीक है। GSI के निरंतर प्रयासों ने कई नीतियों और रणनीतियों को आकार दिया है, जो आज भी देश के लाभ में योगदान दे रही हैं, और इसे एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भूविज्ञान संस्था के रूप में स्थापित किया है। यह 175वीं वर्षगांठ न केवल GSI के समृद्ध इतिहास को दर्शाती है, बल्कि इसके भविष्य के प्रति भी प्रतिबद्धता को व्यक्त करती है, जो भारत के वैज्ञानिक और सामाजिक-आर्थिक विकास में निरंतर योगदान करता रहेगा। 175 वर्षों के इस मील के पत्थर पर, GSI भूविज्ञान के क्षेत्र में उन्नति, संसाधन विकास की स्थिरता, और भारतभर में समुदायों की सुरक्षा में अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखे हुए है।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने जीता उद्योगपतियों का भरोसा: संपतिया उइके

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति के मुख्य आतिथ्य में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में विगत दिनों आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की शानदार सफलता ने सारे देश का ध्यान आकर्षित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने समापन भाषण में इस भव्य समिट के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जिस तरह भूरि भूरि प्रशंसा की उसने समिट में पधारे उद्योग जगत की दिग्गज हस्तियों को मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया। इसमें दो राय नहीं हो सकती कि मुख्यमंत्री पद की बागडोर संभालते ही डॉ. यादव ने यह संदेश दे दिया था कि वे राज्य में औद्योगिक विकास के नये युग की शुरुआत करने के लिए कृत-संकल्प हैं। मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी विकसित राज्य बनाने का अपना सुनहरा स्वप्न साकार करने के लिए वे अद्भुत इच्छाशक्ति के साथ अथक परिश्रम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की पहल पर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन के पूर्व मध्यप्रदेश में जो संभाग स्तरीय क्षेत्रीय निवेशक सम्मेलन आयोजित किए गए उनकी सफलता ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन की पटकथा पहले ही लिख दी थी। जीआईएस की आशातीत सफलता इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश में डबल इंजन की सरकार में विकास को नई गति मिल रही है। राजधानी भोपाल में संपन्न हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 30 लाख 77 हजार करोड़ रूपये के ऐतिहासिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इस निवेश से प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को जबरदस्त प्रोत्साहन मिलेगा और लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 का उद्घाटन किया और उद्योग, स्टार्टअप और अन्य पर मध्यप्रदेश सरकार की 18 नीतियों का अनावरण किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही मध्यप्रदेश को निवेश केंद्र बनाएगी। विकसित मध्यप्रदेश से विकसित भारत की यात्रा में आज का ये कार्यक्रम बहुत अहम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 2 दशक में मध्यप्रदेश के लोगों के सपोर्ट से यहां की भाजपा सरकार ने शासन पर फोकस किया। दो दशक पहले तक लोग मध्यप्रदेश में निवेश करने से डरते थे। आज मध्यप्रदेश निवेश आकर्षित करने में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि बीते दशक में भारत ने आधारभूत संरचना के विकास में उछाल का दौर देखा है। इसका बहुत बड़ा फायदा मध्यप्रदेश को मिला है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश से ही होकर गुजर रहा है। यानी एक तरफ मध्यप्रदेश को मुंबई के पोर्ट के लिए तेज कनेक्टिविटी मिल रही है और दूसरी तरफ उत्तर भारत के बाजार को भी ये कनेक्ट कर रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का लक्ष्य भारत को विनिर्माण केंद्र बनाना है। भोपाल में दो दिवसीय वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन 2025 के समापन समारोह में शाह ने कहा कि कई व्यवसायी अब मध्यप्रदेश में निवेश कर रहे हैं और आने वाले दिनों में यह और बढ़ेगा। गृहमंत्री शाह ने इस बात पर भी जोर दिया कि शिखर सम्मेलन के दौरान 30 लाख 77 हजार करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।इस दो दिवसीय कार्यक्रम में 200 से अधिक भारतीय कंपनियां, 200 से अधिक वैश्विक सीईओ, 20 से अधिक यूनिकॉर्न संस्थापक और पचास से अधिक देशों के प्रतिनिधि मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आए और यह मध्यप्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस ऐतिहासिक निवेश को मध्यप्रदेश की प्रगति के लिए मील का पत्थर बताते हुए ट्वीट किया—”मेरे लिए यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि एक मिशन है। मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का मेरा प्रण और अनथक परिश्रम का प्रतिफल, इस निवेश रूपी वर्षा से ऊर्जा में बदल गया है।” उन्होंने आगे कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश के लिए 18 नई नीतियां बनाई गई हैं, जिनके प्रति निवेशकों का जबरदस्त रुझान देखने को मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश, जिसे हिंदुस्तान का दिल कहा जाता है, अपनी समृद्ध प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक विविधता के कारण देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो चुका है। राज्य सरकार के सतत् प्रयासों से मध्यप्रदेश ने पर्यटन क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी यह कह चुके हैं कि मध्यप्रदेश को एक विदेशी मैग्जीन ने दुनिया की श्रेष्ठ टूरिज्म डेस्टिनेशन में से एक माना है। सरकार की योजनाओं से प्रदेश की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को संरक्षण मिल रहा है, जिससे राज्य वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर रहा है। मध्यप्रदेश में 24 वन्यजीव अभयारण्य, 12 राष्ट्रीय उद्यान, 9 टाइगर रिज़र्व और 14 विश्व धरोहर स्थल हैं, जो इसे भारत के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले राज्यों में शामिल करते हैं। इसके अलावा, उज्जैन का दक्षिणमुखी महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। राज्य सरकार पर्यटन को नए आयाम देने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। पर्यटन परियोजनाओं के लिए 758 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई गई है, जिसमें से 358 हेक्टेयर भूमि 39 निवेशकों को आवंटित की जा चुकी है। इससे पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। राज्य अपनी प्राकृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण फिल्म निर्माताओं की पसंदीदा शूटिंग डेस्टिनेशन बन चुका है। अब तक 185 से अधिक फिल्मों और 40 अन्य प्रोजेक्ट्स की शूटिंग मध्यप्रदेश में हो चुकी है। पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने 1,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि चिन्हित की है, जिससे कई नए प्रोजेक्ट्स विकसित होंगे और लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। निवेशकों ने मध्यप्रदेश में सरकार की 18 नई नीतियों में गहरी रुचि दिखाई है, जिससे उन्हें श्रीमदभगवदगीता के 18 अध्यायों की कर्म और कर्तव्य की प्रेरणा याद आ गई। जीआईएस 2025 के शुभारंभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सानिध्य और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति निवेशकों के लिए सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी बन गई। मुख्यमंत्री ने सभी निवेशकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निवेश प्रदेश की प्रगति में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. … Read more

छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में लग रहे पंख, देश के सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में शामिल

रायपुर  छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ रही है और इस साल इसमें और भी तेज़ी देखने को मिलेगी. हाल ही में राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, इस साल छत्तीसगढ़ की आर्थिक वृद्धि दर 7.51% रहने का अनुमान है. इसका मतलब है कि व्यापार, उद्योग और खेती से होने वाली आमदनी में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे लोगों की आमदनी और जीवन स्तर बेहतर होगा. सकल राज्य घरेलू उत्पाद छत्तीसगढ़ की कुल आर्थिक उत्पादन यानी सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में इस साल अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. पिछले साल राज्य का GSDP 3,06,712 करोड़ था, जो इस साल 3,29,752 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है. यह संकेत देता है कि छत्तीसगढ़ में नए उद्योग, फैक्ट्रियां और व्यापार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं. कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र – सबमें जबरदस्त उछाल छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था तीन मुख्य स्तंभों – कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र पर टिकी हुई है. तीनों ही क्षेत्रों में इस साल बढ़िया प्रदर्शन की उम्मीद है.     खेती और इससे जुड़े कामों में बढ़ोतरी     छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में खेती की अहम भूमिका है. इस साल कृषि, पशुपालन और वानिकी क्षेत्र में 5.38% की वृद्धि होने का अनुमान है. 2023-24 में यह क्षेत्र 48,987 करोड़ का था, जो इस साल 51,621 करोड़ तक पहुंच सकता है. इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.     उद्योगों का विस्तार     राज्य में उद्योगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इस साल उद्योग क्षेत्र में 6.92% की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे इसका कुल आकार 1,47,172 करोड़ तक पहुंच सकता है. नई फैक्ट्रियों और कंपनियों के आने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को नौकरियां मिलेंगी.     सेवा क्षेत्र की जबरदस्त ग्रोथ     बैंकिंग, टूरिज्म और आईटी सेक्टर में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. इस साल सेवा क्षेत्र में 8.54% की वृद्धि होने का अनुमान है, जिससे यह 1,08,461 करोड़ तक पहुंच सकता है. छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते पर्यटन और डिजिटल सेवाओं के कारण इस क्षेत्र में और भी अधिक संभावनाएं हैं. आम जनता को कैसे मिलेगा फायदा? आर्थिक विकास का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ता है, क्योंकि जब राज्य की आमदनी बढ़ती है, तो लोगों की जिंदगी भी बेहतर होती है. नई नौकरियां: उद्योग और सेवा क्षेत्र में बढ़ोतरी से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. अधिक आय: जब अर्थव्यवस्था बढ़ती है, तो आम लोगों की कमाई में भी इजाफा होता है. बेहतर बुनियादी सुविधाएं: सरकार को ज्यादा टैक्स मिलेगा, जिससे नई सड़कें, अस्पताल और स्कूल बनाए जा सकेंगे. छत्तीसगढ़ की बढ़ती अर्थव्यवस्था – पूरे देश के लिए मिसाल! छत्तीसगढ़ की आर्थिक तरक्की यह साबित कर रही है कि राज्य तेजी से विकास कर रहा है. अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ देश के सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में शामिल हो सकता है. यह न सिर्फ राज्य के लोगों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है! क्यों तेजी से आगे बढ़ रहा है छत्तीसगढ़? औद्योगिक निवेश बढ़ा: राज्य में नए उद्योग लग रहे हैं, जिससे नौकरियां भी बढ़ रही हैं. कृषि और व्यापार को बढ़ावा: सरकार की योजनाओं से किसानों और व्यापारियों को सीधा फायदा मिल रहा है. बुनियादी ढांचे में सुधार: सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं तेजी से विकसित की जा रही हैं. तीनों सेक्टर मजबूत – हर क्षेत्र में ग्रोथ राज्य के विकास की यह रफ्तार हर सेक्टर में देखने को मिल रही है- कृषि और संबद्ध क्षेत्र: 2023-24 में 3.03% वृद्धि, अगले साल 5.38% की उम्मीद उद्योग और निर्माण: 2023-24 में 4.87% की ग्रोथ, अगले साल 6.92% की संभावना सेवा क्षेत्र: इस साल 10.43% की वृद्धि, अगले साल 8.54% बढ़ने का अनुमान आम आदमी की आय में भी बढ़ोतरी! छत्तीसगढ़ में सिर्फ अर्थव्यवस्था ही नहीं, लोगों की आमदनी भी बढ़ रही है.     2023-24 में प्रति व्यक्ति आय 1,48,922 रही.     2024-25 में यह 1,62,870 तक पहुंचने की उम्मीद है. यानि लोगों की कमाई 9.37% बढ़ेगी, जिससे उनका जीवन स्तर और बेहतर होगा.

सड़क पर जन्मदिन मनाने और सार्वजनिक यातायात को बाधित करने वालों पर होगी कड़ी कार्यवाही : मुख्य सचिव

रायपुर, मुख्य सचिव  अमिताभ जैन ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के मुख्य समिति कक्ष में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में सड़कों पर जन्मदिन मनाने, पंडाल लगाने, भंडारा आयोजित करने की प्रवृतियों को हतोत्साहित करने एवं सार्वजनिक यातायात को बाधित करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सार्वजनिक मार्गों पर अवरोध पर कठोर कार्रवाई मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी व्यक्ति यदि सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध करने वालों पर एंटी-एन्क्रोचमेंट एक्ट, मोटर व्हीकल एक्ट, नगर पालिका अधिनियम एवं अन्य सुसंगत अधिनियमों तथा भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत दंडात्मक कार्यवाही करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। मुख्य सचिव श्री जैन ने बैठक में कहा कि सड़कें केवल आवागमन के लिए हैं, निजी आयोजनों के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि जन्मदिन, पार्टियां तथा अन्य कोई भी निजी कार्यक्रम सार्वजनिक सड़कों पर आयोजित करने वालों के  खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी। उन्होंने ऐसे आयोजनों में शामिल वाहनों को जब्त करने और आयोजकों पर जुर्माना लगाने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि जिम्मेदार व्यक्तियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत उत्तरदायी ठहराया जाएगा। मुख्य सचिव श्री जैन ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे किसी भी अवैध आयोजन को तुरंत रोकें और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करें। मुख्य सचिव श्री जैन ने इस तरह की अवांछित गतिविधियों को रोकने और संबंधितों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करने एसओपी तैयार करने के निर्देश पुलिस विभाग के अधिकारियों को दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, जिससे नागरिकों को स्पष्ट संदेश मिले कि सार्वजनिक मार्गों पर अवैध आयोजन पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। उन्होंने जनसंपर्क विभाग को विभिन्न प्रचार माध्यमों का उपयोग करते हुए आमजन को इस सम्बन्ध में  जागरूक करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि यदि किसी क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएँ दोबारा होती हैं, तो संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने पुलिस विभाग के अधिकारियों  को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस सम्बन्ध में सख्त निगरानी रखें। मुख्य सचिव ने कहा  कि वे विशेष सतर्कता दल (विजिलेंस टीम) गठित करें, जो ऐसी घटनाओं पर नजर रखेंगे और तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय से कार्य करें और सुनिश्चित करें कि सार्वजनिक मार्गों का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में न हो। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज पिंगुआ, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, रायपुर एवं बिलासपुर के पुलिस महानिरीक्षक, रायपुर एवं बिलासपुर के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक, परिवहन, नगरीय प्रशासन, विधि विभाग और जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

विनायक चतुर्थी पर ऐसे करें पूजा गणेश जी की पूजा

हिन्दू धर्म में विनायक चतुर्थी का बहुत अधिक महत्व होता है. यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित है. यह हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों के जीवन में आने वाले सभी विघ्न और बाधाएं दूर हो जाती हैं. ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यह त्योहार ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि का प्रतीक है. विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों के जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं. पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 2 मार्च दिन शनिवार को रात 9 बजकर 1 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 3 मार्च दिन रविवार को शाम 6 बजकर 2 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, विनायक चतुर्थी का व्रत 3 मार्च को ही रखा जाएगा. इस दिन चन्द्रास्त रात 10 बजकर 11 मिनट पर होगा. विनायक चतुर्थी पूजा विधि     विनायक चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.     घर में किसी साफ स्थान पर एक चौकी रखें और उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.     पूजा की शुरुआत में, व्रत का संकल्प लें.     भगवान गणेश की प्रतिमा को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से स्नान कराएं.     भगवान गणेश को चंदन, रोली, कुमकुम और फूलों से श्रृंगार करें.     भगवान गणेश को मोदक, लड्डू या अपनी पसंदीदा मिठाई का भोग लगाएं.     भगवान गणेश के विभिन्न मंत्रों का जाप करें, जैसे कि “ॐ गं गणपतये नमः” और “ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा”.     भगवान गणेश की आरती करें और उन्हें फूल अर्पित करें.     दिन भर उपवास रखने के बाद, शाम को भगवान गणेश को भोग लगाकर व्रत खोलें. इन बातों का रखें खास ध्यान विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए. इस दिन किसी का भी अपमान नही करना चाहिए. इस दिन नकारात्मक विचारों से दूर रहें. और सकारात्मक विचार रखें. तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा आदि का सेवन नहीं करें और क्रोध नहीं करना चाहिए और शांत रहें. इस दिन किसी भी जानवर को परेशान नहीं करना चाहिए. हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए. विनायक चतुर्थी पूजा का महत्व विनायक चतुर्थी के दिन विधि-विधान से पूजा करने से लोगों के विघ्नों और बाधाओं का निवारण होता है. साथ ही बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है. इसके अलावा घर परिवार में सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है. विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों के जीवन में आने वाले सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उन्हें सुख-शांति प्राप्त होती है. इसके अलावा जीवन में आने वाले कष्टों से छुटकारा मिलता है.  

भारत के आर्थिक भविष्य की राह, 2047 तक ‘विकसित’ हो पाएगा भारत: World Bank

नई दिल्ली विश्व बैंक की  जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के लिए औसतन 7.8 प्रतिशत की दर से वृद्धि करनी होगी। विश्व बैंक ने पर अपनी टिप्पणी में कहा है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को वित्तीय क्षेत्र के साथ-साथ भूमि और श्रम बाजार में भी सुधार की आवश्यकता होगी। विश्व बैंक की रिपोर्ट का शीर्षक है – ‘एक पीढ़ी में उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनना’। भारत की पिछली उपलब्धियां भविष्य की महत्वाकांक्षाओं का आधार वर्ष 2000 से 2024 के बीच भारत की औसत 6.3 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि दर को मान्यता देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की पिछली उपलब्धियां उसकी भविष्य की महत्वाकांक्षाओं के लिए आधार प्रदान करती हैं। “हालांकि, 2047 तक उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंचना सामान्य स्थिति में संभव नहीं होगा… भारत को 2047 तक उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने के लिए, इसकी प्रति व्यक्ति जीएनआई (सकल राष्ट्रीय आय) को वर्तमान स्तरों से लगभग 8 गुना बढ़ाना होगा; विकास को और तेज करना होगा और अगले दो दशकों तक उच्च रहना होगा, एक ऐसी उपलब्धि जिसे कुछ ही देश हासिल कर पाए हैं। सुधारों को विस्तारित कर तेज करने की जरूरत विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है, “इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए, कम अनुकूल बाह्य वातावरण को देखते हुए, भारत को न केवल चल रही पहलों को जारी रखना होगा, बल्कि सुधारों को विस्तारित और तीव्र करना होगा।” हाल के वर्षों में, भारत ने देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र में बदलने, बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने, मानव पूंजी में सुधार करने और डिजिटलीकरण का लाभ उठाने के लिए कई संरचनात्मक सुधार शुरू किए हैं, जबकि इसके साथ ही व्यापक आर्थिक स्थिरता को भी बढ़ावा दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है, “वर्ष 2047 तक उच्च आय तक पहुंचने के लिए, भारत की विकास दर को आने वाले दशकों में वास्तविक रूप में औसतन 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने की आवश्यकता है… केवल ‘त्वरित सुधार’ पैकेज ही भारत को वर्ष 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के मार्ग पर ला सकता है।” चिली, कोरिया और पोलैंड से मिले सबक के साथ आगे बढ़ सकता है भारत विश्व बैंक के भारत निदेशक ऑगस्टे तानो कोउमे ने कहा कि चिली, कोरिया और पोलैंड जैसे देशों से प्राप्त सबक यह दर्शाते हैं कि किस प्रकार उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपने एकीकरण को गहन करते हुए मध्य आय वाले देशों से उच्च आय वाले देशों में सफलतापूर्वक परिवर्तन किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दशकों में भारत ने उस पैमाने और गति से विकास किया है जिसके बारे में बहुत कम लोगों ने सोचा होगा। वर्ष 2000 से लेकर आज तक, वास्तविक अर्थों में, अर्थव्यवस्था लगभग चार गुना बढ़ी है, और प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद लगभग तीन गुना हो गया है। चूँकि भारत बाकी दुनिया की तुलना में तेज़ी से बढ़ा है, इसलिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी वर्ष 2000 में 1.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2023 में 3.4 प्रतिशत हो गई है। भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, “इस उल्लेखनीय विकास की कहानी में अत्यधिक गरीबी में भारी गिरावट, तथा सेवा वितरण और आवश्यक बुनियादी ढांचे का व्यापक विस्तार भी शामिल है। इन उपलब्धियों के आधार पर, भारत ने 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।” विश्व बैंक ने 22 वर्षों में भारत की विकास गति का किया मूल्यांकन कौमे ने कहा कि भारत सुधारों की गति बढ़ाकर तथा अपनी पिछली उपलब्धियों के आधार पर अपना रास्ता स्वयं बना सकता है। रिपोर्ट में अगले 22 वर्षों में भारत की विकास गति के लिए तीन परिदृश्यों का मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के सह-लेखक एमिलिया स्क्रोक और रंगीत घोष ने कहा, “भारत मानव पूंजी में निवेश करके, अधिक और बेहतर नौकरियों के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करके और 2047 तक महिला श्रम बल भागीदारी दर को 35.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक बढ़ाकर अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठा सकता है।” इसमें कहा गया है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में भारत ने अपनी औसत वृद्धि दर को बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर लिया है।  

होलिका दहन 13 मार्च को प्रदोष काल में, 30 साल बाद होलिका दहन पर दुर्लभ शूल योग

 होलिका दहन इस बार 13 मार्च को प्रदोष काल में किया जाएगा। पंचांग गणना के अनुसार यह पर्व फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी के बाद पूर्णिमा तिथि पर पड़ेगा। इस दिन पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, धृति योग के बाद शूल योग, वणिज करण के बाद बव करण और सिंह राशि के चंद्रमा की साक्षी में होलिका दहन(Holika Dahan 2025) संपन्न होगा। तीन ग्रहों की विशेष युति ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस बार होलिका दहन के दिन सूर्य, बुध और शनि की कुंभ राशि में युति बन रही है। साथ ही शूल योग और गुरुवार का दिन इस पर्व को और भी विशिष्ट बना रहे हैं। ऐसा संयोग 30 साल पहले 1995 में बना था, जो अब 2025 में फिर से बनने जा रहा है। इस विशेष योग में की गई मंत्र, यंत्र और तंत्र साधना अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। यही कारण है कि इसे ‘सिद्ध रात्रि’ भी कहा जाता है। रात्रि 11:30 के बाद होगा होलिका दहन धर्मशास्त्रों के अनुसार होलिका दहन(Holi 2025) भद्रा समाप्त होने के बाद ही किया जाना चाहिए। अत: रात्रि 11:30 के बाद दहन शुभ रहेगा। हालांकि, कुछ स्थानों पर मध्यरात्रि या ब्रह्म मुहूर्त में भी होलिका दहन(Holika Dahan 2025) की परंपरा है, लेकिन रात्रिकाल में ही यह अनुष्ठान सर्वश्रेष्ठ माना गया है। भद्रा का रहेगा प्रभाव, पर प्रदोष काल रहेगा शुभ इस दिन सुबह 10:23 बजे से रात 11:30 बजे तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। हालांकि, धर्मशास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में किया पूजन शुभ फलदायी होता है। पंचांग गणना के मुताबिक, इस बार सिंह राशि का चंद्रमा भद्रा का वास पृथ्वी पर बता रहा है, पर बड़े पर्वों के दौरान भद्रा के पूंछ का विचार किया जाता है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, भद्रा के अंतिम भाग में होलिका पूजन से यश और विजय की प्राप्ति होती है।

‘बकरीद पर कुर्बानी से करें किनारा ‘, मुस्लिम देश के किंग को क्यों करनी पड़ी ऐसी अपील?

 रबात उत्तर अफ्रीकी इस्लामिक देश मोरक्को के राजा ने लोगों से इस साल बकरीद यानी ईद-उल-अज़हा (Eid Al-Adha) के मौके पर धार्मिक त्यौहार के दौरान भेड़ों की कुर्बानी नहीं देने का आह्वान किया है। राजा मोहम्मद-VI ने अपने देश के लोगों से कहा है कि देश लगातार सातवें साल सूखे की मार झेल रहा है। इस वजह से देश में पशुधन की आबादी कम हो गई है और मांस की कीमतें बढ़ गई हैं। ईद-उल-अज़हा के दौरान हर साल दुनिया भर में बसे मुसलमान लाखों भेड़, बकरियों और अन्य पशुओं की बलि देते हैं। इस साल ईद-उल-अज़हा 6 जून या 7 जून को मनाया जाएगा। यह इस्लाम के दो प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार, ईद-उल-अज़हा हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। इसे बकरीद, ईद उल जुहा, बकरा ईद अथवा ईद उल बकरा के नाम से भी जाना जाता है। बकरीद के मौके पर नमाज पढ़ने के साथ-साथ जानवरों की कुर्बानी देने की प्रथा है। कुर्बानी के बाद मुस्लिम समुदाय उस मांस को अपने परिजनों के बीच बांटकर खाता है और एक हिस्सा गरीबों में भी दान करता है। राष्ट्रीय टेलीविजन पर धार्मिक मामलों के मंत्री द्वारा पढ़े गए राजा मोहम्मद VI के भाषण में कहा गया है, “हमारा देश जलवायु और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप पशुधन में काफी गिरावट आई है। इसलिए ईद पर पशुओं की कुर्बानी से बचें।” ईद के त्यौहार के महत्व को स्वीकार करते हुए, राजा ने अपने लोगों से “कुर्बानी की रस्म निभाने से परहेज करने” का आह्वान किया। ईद उल-अजहा इस साल जून की शुरुआत में मनाया जाएगा. यह बलिदान का पर्व है जिसमें मुसलमान पशुओं की कुर्बानी देते हैं. मोरक्को में भेडों की कीमतें इतनी ज्यादा हो गई हैं कि पिछले साल देश के गैर सरकारी संगठन ‘मोरक्को सेंटर फॉर सिटिजनशिप’ द्वारा किए गए सर्वेक्षण में 55 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि उन्हें भेड़ों को खरीदने और कुर्बानी के बाद उन्हें पकाने के लिए बर्तन खरीदने तक में मुश्किलें आ रही हैं. भेड़ों की कीमतों में उछाल का कारण चरागाहों का कम होना है, जिससे इन्हें चारा खिलाने के लिए इनके मालिकों को ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. मोरक्को के कृषि मंत्री ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि इस मौसम में बारिश पिछले 30 वर्षों के वार्षिक औसत से 53 प्रतिशत कम हुई है और इस कारण भेड़ और मवेशियों की संख्या में कमी आई है. मोहम्मद VI के पिता हसन II ने 1966 में भी इसी तरह का आह्वान किया था, जब देश में लंबे समय तक सूखा पड़ा था। पशुधन की संख्या में गिरावट के कारण मांस की कीमतों में उछाल आया है – जिससे गरीबों पर बोझ बढ़ गया है, जिनकी न्यूनतम मजदूरी लगभग 290 यूरो प्रति माह है। मोरक्को इस बार लगातार सातवें साल सूखे का सामना कर रहा है। इस वजह से वहां 12 महीनों में पशुधन की संख्या में 38 फीसदी की गिरावट आई है। मोरक्को के कृषि मंत्रालय के अनुसार, पिछले 30 वर्षों के औसत से 53 फीसदी कम बारिश हुई है। बता दें कि मोरक्को में 99 फीसदी से अधिक आबादी सुन्नी मुस्लिमों की है, और 0.1 प्रतिशत से कम आबादी शिया मुस्लिमों की है। कुल आबादी का 1 प्रतिशत से कम हिस्सा बनाने वाले समूहों में ईसाई, यहूदी और बहाई भी शामिल हैं।

केवायसी प्रक्रिया में अब तक 06 लाख 73 हजार 534 उपभोक्ताओं ने सफलतापूर्वक केवायसी कराया

भोपाल राज्य की लाभकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बिजली उपभोक्ताओं को ईकेवायसी कराना अनिवार्य है। उपभोक्ता मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के उपाय ऐप से भी ईकेवायसी करा सकते हैं। गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध “उपाय” ऐप डाउनलोड कर बिजली उपभोक्ता समग्र केवायसी में अपना उपभोक्ता क्रमांक एवं समग्र क्रमांक दर्ज करने के बाद लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी को दर्ज कर केवायसी प्रक्रिया को पूर्ण कर सकते हैं। केवायसी प्रक्रिया में अब तक 06 लाख 73 हजार 534 उपभोक्ताओं ने सफलतापूर्वक केवायसी करा ली है। कंपनी ने बताया है कि नर्मदापुरम ग्रामीण क्षेत्र में 71 हजार 940, बैतूल ग्रामीण में 91 हजार 012, राजगढ़ ग्रामीण में 51 हजार 223, शहर वृत्त भोपाल में 61 हजार 271, भोपाल ग्रामीण में 38 हजार 656, गुना ग्रामीण में 32 हजार 353, विदिशा ग्रामीण में 49 हजार 230, सीहोर ग्रामीण में 24 हजार 130, ग्वालियर ग्रामीण में 21 हजार 086, शहर वृत्त ग्वालियर में 46 हजार 642, अशोकनगर ग्रामीण में 25 हजार 737, दतिया ग्रामीण में 25 हजार 233, रायसेन ग्रामीण में 44 हजार 009, शिवपुरी ग्रामीण में 25 हजार 791, हरदा ग्रामीण में 20 हजार 964, श्योपुर ग्रामीण में 09 हजार 652, मुरैना ग्रामीण में 23 हजार 730 एवं भिण्ड ग्रामीण में 10 हजार 875 बिजली उपभोक्ताओं की केवायसी की गई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्य क्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के अंतर्गत आने वाले 16 जिलों के बिजली उपभोक्ताओं के बिजली संबंधी व्यक्तिगत विवरण को कंपनी के रिकार्ड में अपडेट करने के लिए नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया शुरू की है। कंपनी द्वारा नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया के तहत बिजली उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी जैसे समग्र आईडी, मोबाइल नंबर एवं बैंक खाता इत्यादि की जानकारी को अपडेट किया जा रहा है। नो योर कंज्यूमर (केवायसी) प्रक्रिया से बिजली उपभोक्ताओं को जहां राज्य शासन की योजनाओं का लाभ सीधे लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के माध्यम से सुनिश्चित किया जा सकेगा वहीं दूसरी ओर प्रणाली में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। साथ ही केवायसी से वास्तविक उपभोक्ताओं के विद्युत संयोजन एवं उनके भार की स्थिति का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे कंपनी कार्य क्षेत्र में विद्युत संरचनाओं के भविष्य में विस्तार की योजना बनाने में आसानी होगी। केवायसी होने से कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं की सही पहचान और मोबाइल नंबर को सटीक रूप से टैग करने में मदद मिलेगी, जिससे कंपनी की सेवाओं का सुचारू संचालन  

आज से मध्यप्रदेश सरकार खरीदेगी समर्थन मूल्य पर गेहूं, 3 लाख किसानों ने कराया है पंजीयन

भोपाल मध्य प्रदेश में किसान साथियों के लिए अच्छी खबर है। राज्य में आज से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीद शुरू होने जा रही है। पहले चरण में, इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में खरीद आज से 18 अप्रैल तक चलेगी। अब तक तीन लाख से ज्यादा किसान गेहूं बेचने के लिए पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। खरीद का दूसरा चरण 17 मार्च से 5 मई तक चलेगा। किसानों को सुविधा देने के लिए, प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण रश्मि अरुण शमी ने बताया है कि किसान 31 मार्च तक एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में आसानी होगी और उन्हें उचित मूल्य मिलेगा। सरकार ने 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का टारगेट तय किया है। इसके लिए प्रदेश में 3600 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। केंद्र सरकार ने 2425 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तय किया है। सोमवार से शुक्रवार तक सुबह आठ से रात आठ बजे तक खरीदी होगी।

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