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आयुष्मान योजना से हृदय की बीमारी का हुआ मुफ्त इलाज

 रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत आमजन को लाभ मिल रहा है। शासन की जनकल्याणकारी आयुष्मान भारत योजना के तहत कोण्डागांव जिले के एक गरीब परिवार के मासूम बच्चे के गंभीर रोग का निशुल्क उपचार संभव हो सका, जिससे बच्चे को नई जिंदगी के साथ परिवार को बड़ी राहत मिली है। इस योजना से न केवल बच्चे का उपचार हुआ, बल्कि इससे पूरे परिवार के सदस्यों के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई। कोण्डागांव विकासखण्ड के ग्राम मड़ानार निवासी श्रीमती सुगन्तीन नाग और श्री खेलसिंह नाग के आठ वर्षीय पुत्र मनराज नाग को बचपन से ही लगातार सर्दी-खांसी की समस्या बनी रहती थी। बच्चे की इस बीमारी का स्थानीय अस्पतालों में कई बार उपचार कराने के बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिल रही थी और आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय स्तर पर कोई राहत नहीं मिलने पर बेहतर चिकित्सा की तलाश में उनके परिवार ने आंध्र प्रदेश के एक निजी अस्पताल में पहुंचे, जहांँ डॉक्टरों ने आवश्यक परीक्षण के बाद बताया कि मनराज के हृदय में छेद है और सर्जरी ही इसका एकमात्र समाधान है। लेकिन सर्जरी का खर्च वहन कर पाना परिवार के लिए संभव नहीं था, जिसके कारण वे निराश होकर पुनः अपने गाँव लौट आए। अपने बच्चे को हो रही परेशानी को देखेते हुए आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। गांव के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से संपर्क करने पर उन्हें आयुष्मान भारत योजना की जानकारी मिली। यह योजना उनकी आशा की किरण बनी। जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में मनराज को रायपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां नवंबर 2024 में उनकी कार्डियोथोरेसिक और वेस्कुलर सर्जरी सफलतापूर्वक की गई, जिसके लिए आयुष्मान योजना से 01 लाख 59 हजार रूपए की आर्थिक सहायता मिली।  हृदय की सर्जरी के बाद आज मनराज पूरी तरह स्वस्थ है और एक नया जीवन जी रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप सरकार राज्य के नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति बेहद संवेदनशील है। जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से दूरस्थ अंचलों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। शासन के आयुष्मान भारत योजना के बेहतर क्रियान्वयन का परिणाम है कि इस योजना ने न केवल एक मासूम बच्चे को जीवनदान दिया, बल्कि उसके परिवार को भी एक नई आशा और विश्वास से भर दिया।

सेहत पर उल्टा असर डालता है केले के साथ ये फूड्स खाना

केला एक बहुत ही हेल्दी फ्रूट माना जाता है और ये आसानी से पच भी जाता है। ये इंस्टेंट एनर्जी देने वाला और हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। हालांकि, इसे कुछ फूड्स के साथ खाना हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। खुद हेल्थ एक्सपर्ट्स भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि कुछ फूड्स के साथ केला खाने से हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम पर नेगेटिव असर पड़ता है। इसकी वजह से पेट में गैस, एसिडिटी, एलर्जी के साथ-साथ अन्य हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। आइए विस्तार से जानें कि किन फूड्स को केले के साथ खाने से बचना चाहिए और इसके पीछे का कारण क्या है- दूध आमतौर पर लोग अक्सर केला और दूध साथ में खाते हैं, लेकिन आयुर्वेद की माने तो ऐसा करना हानिकारक हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह शरीर में टॉक्सिन्स पैदा कर सकता है, जिससे शरीर में कफ, एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए इसे खाने से पेट में भारीपन के साथ-साथ सुस्ती महसूस हो सकती है। दही दही और केला दोनों ही ठंडी तासीर वाले होते हैं। इसलिए इन्हें एक साथ खाने से डाइजेस्टिव सिस्टम कमजोर पड़ सकता है और कफ बढ़ सकता है। यह सर्दी-जुकाम और गले की खराश को भी बढ़ावा देता है। तरबूज तरबूज में बहुत ज्यादा पानी होता है, जबकि केले में नेचुरल शुगर और फाइबर। दोनों का कॉम्बिनेशन डाइजेस्टिव सिस्टम में असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे गैस,भारीपन और एसिडिटी की समस्या हो सकती है। आलू आलू और केले दोनों में स्टार्च की मात्रा ज्यादा होती है। इन्हें एक साथ खाने से डाइजेशन धीमा हो जाता है, जिससे गैस,पेट फूलना और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सिट्रस फ्रूट्स विटामिन-सी से भरपूर एसिडिक फ्रूट्स जैसे संतरा, नींबू और केले दोनों की संरचना अलग-अलग होती है। इसकी वजह से इन्हें साथ में खाने से पेट में एसिडिटी, जलन और अपच जैसी प्रॉब्लम हो सकती है। मांस और मछली केले को हाई प्रोटीन फूड जैसे मांस या मछली के साथ खाने से डाइजेस्टिव सिस्टम पर नेगेटिव असर पड़ता है। यह पेट में भारीपन और सुस्ती का कारण बन सकता है।     केले को अकेले खाएं या हल्के स्नैक्स जैसे ओट्स, अखरोट या अन्य फलों के साथ मिलाएं।     केला खाने के तुरंत बाद भारी भोजन से बचें।     दूध या दही के साथ केला खाना हो, तो इसे स्मूदी के रूप में संतुलित मात्रा में लें।  

अक्षय ओबेरॉय अपनी साउथ डेब्यू फिल्म टॉक्सिक के लिए सीख रहे हैं कन्नड़ भाषा

मुंबई, बॉलीवुड अभिनेता अक्षय ओबेरॉय अपनी साउथ डेब्यू फिल्म टॉक्सिक के लिए कन्नड़ भाषा सीख रहे हैं। अपने दमदार अभिनय के लिए मशहूर अक्षय ओबेरॉय अब कन्नड़ फिल्म टॉक्सिक से साउथ इंडस्ट्री में कदम रखने जा रहे हैं। इस बहुप्रतीक्षित एक्शन-थ्रिलर में वह सुपरस्टार यश के साथ नज़र आएंगे। अपने किरदार को पूरी तरह से वास्तविक और प्रभावी बनाने के लिए अक्षय इस समय कन्नड़ भाषा पर गहन प्रशिक्षण ले रहे हैं। फिल्म के प्रोडक्शन टीम ने अक्षय के लिए भाषा प्रशिक्षकों की व्यवस्था की है, जिससे वह न सिर्फ कन्नड़ उच्चारण को सही तरीके से सीख सकें, बल्कि अपने किरदार की भावनाओं को भी पूरी गहराई और सटीकता के साथ व्यक्त कर सकें। उनकी यह मेहनत न सिर्फ उनके अभिनय के प्रति समर्पण को दर्शाती है, बल्कि कन्नड़ सिनेमा के प्रति उनके सम्मान को भी दिखाती है। अपने इस नए सफर के बारे में अक्षय ने कहा, “नई इंडस्ट्री और भाषा में कदम रखना मेरे लिए रोमांचक और चुनौतीपूर्ण दोनों है। मेरे लिए यह सिर्फ कन्नड़ संवाद याद करने का नहीं, बल्कि इस भाषा और संस्कृति को गहराई से समझने का अवसर है, जिससे मैं अपने किरदार को वास्तविकता से निभा सकूं। प्रोडक्शन टीम ने मुझे बेहतरीन भाषा प्रशिक्षक दिए हैं, जो मेरे उच्चारण, शब्दों की ध्वनि और भावनाओं को संवारने में मदद कर रहे हैं। यश जैसे प्रेरणादायक सह-कलाकार के साथ काम करना भी एक शानदार अनुभव है। मैं इस फिल्म में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहता हूं और कन्नड़ दर्शकों से एक गहरा जुड़ाव बनाना चाहता हूं।” टॉक्सिक के साथ अक्षय ओबेरॉय अपने करियर के एक नए रोमांचक अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं। वह पूरी शिद्दत के साथ इस नई सिनेमाई दुनिया को अपना रहे हैं, और उनके प्रशंसक बेसब्री से उनके कन्नड़ डेब्यू का इंतेज़ार कर रहे हैं।  

मनरेगा रामलाल जैसे अनेको कृषकों के चेहरे पर खुशी लाने का पर्याय

रायपुर, किसान रामलाल बताते हैं कि खरीब फसल के पकने के बाद अच्छे उत्पादन की गारण्टी तो मिली ही, अब वे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता होने से धनिया, आलू, प्याज, टमाटर जैसे साग-सब्जी लगाकर रोज की सब्जी-भाजी के खर्च को बचा भी रहा है। आज रामलाल आत्मविश्वास से भरा है और कूप के बन जाने से परिवार के चेहरे में मुस्कान है। खेती में सिंचाई की उपलब्धता तथा उचित कृषकीय प्रबंध से रामलाल अब उन्नत कृषक बनने की ओर अग्रसर हैं। जिले में मनरेगा रामलाल जैसे अनेको कृषकों के चेहरे पर खुशी लाने का पर्याय बन चुका है। बलरामपुर जिले के विकासखंड राजपुर के ग्राम पंचायत करमडीहा निवासी श्री रामलाल अपने मनरेगा से बने कुंए के जरिए दो एकड़ खेतों में पर्याप्त सिंचाई कर रहें हैं, वही समय पर धान की खेती के लिए रोपा भी तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा वे कुछ हिस्सों में साग-सब्जी की खेती कर इससे अतिरिक्त आमदनी भी कमा रहे हैं। गौरतलब है कि किसान रामलाल पहले सिंचाई के साधन नहीं होने से बरसात के दिनों में भी केवल धान के ही फसल ले पाते थे, वे भी वर्षा के जल पर ही निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन मनरेगा से बने कुए ने उसके जीवन में खुशी ला दी है और वे साल में दो सफल ले रहे हैं। वहीं उन्होंने बताया कि स्वयं के लिए कुंए निर्माण से उन्हें 10 हजार रूपए का मजदूरी भी मिला। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन के मार्गदर्शन एवं कुशल प्रबंधन से मनरेगा अपने वास्तविक उद्देश्यों को पूरा कर रही है, वहीं श्रमिक व कृषक वर्ग को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।     मनरेगा के अधिकारियों ने बताया कि रोजगार सृजन और स्थाई परिसंपत्तियों का निर्माण कर मनरेगा एक सफल योजना के रूप में जिले में स्थापित हो चुकी है। रामलाल जनपद पंचायत राजपुर के ग्राम पंचायत करमडीहा के निवासी हैं तथा अनेकों अन्य हितग्राहियों की तरह रामलाल के खेत में मनरेगा के तहत कूप निर्माण की स्वीकृति मिली थी। कूप निर्माण के लिए रामलाल के खेत का चयन किया गया तथा निर्धारित समय पर कूप तैयार भी हो गया। कूप के माध्यम से रामलाल के 02 एकड़ खेत की सिंचाई है तथा वे बरसात के साथ-साथ गर्मियों में भी फसल लेने के लिए उत्साहित हैं। धान की खेती के साथ ही भविष्य में पानी की आवश्यकता वाले अन्य फसलों की खेती का विचार कर रहे हैं, जो पहले संभव नहीं था।

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने वक्फ बिल की वकालत करते हुए बताया कि ‘बाबा साहब का संविधान चलेगा, मुगलिया फरमान नहीं’

नई दिल्ली लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 (Waqf Amendment Bill) पेश हो गया है। बिल पर चर्चा करते हुए भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने वक्फ बिल की वकालत करते हुए बताया कि आखिर सरकार की ओर से ये बिल क्यों लाया गया। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, “यह विधेयक नहीं बल्कि उम्मीद (एकीकृत वक्फ प्रबंधन सशक्तिकरण, दक्षता और विकास) है। इस उम्मीद में सशक्तिकरण, दक्षता और विकास है। इसे देखते हुए देश के लोग इसका समर्थन कर रहे हैं। कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया, चर्च ऑफ भारत, केरल काउंसिल ऑफ चर्चेज और केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल, ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच जैसे कई संगठनों ने इसका समर्थन किया है। मैं इन सभी संस्थानों को धन्यवाद देता हूं। वक्फ भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है: अनुराग ठाकुर अनुराग ठाकुर ने आगे कहा,” वक्फ में संशोधन करने का समय आ गया है क्योंकि यह अत्याचार और भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। इसे खत्म करने और संशोधित करने का समय आ गया है। भारत को वक्फ के डर से मुक्ति चाहिए क्योंकि कांग्रेस के शासन में बने वक्फ कानून का मतलब था ‘खाता न बही, जो वक्फ कहे वही सही”। अनुराग ठाकुर ने कहा कि आपको तय करना है कि वक्फ के साथ रहना है या बाबा साहब के संविधान के साथ। ये वक्फ बिल इस बात का साफ संदेश है कि यहां बाबा साहब का संविधान चलेगा, मुगलिया फरमान नहीं। ये बिल तुष्टिकरण की राजनीति का अंतिम संस्कार करने वाला है। ये बिल मुस्लिम विरोधी नहीं: ललन सिंह बता दें कि एनडीए के सभी सांसदों ने इस बिल की पैरवी की है। जेडीयू सांसद ललन सिंह ने कहा कि ये बिल मुसलमान विरोधी नहीं है। ऐसा नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है। मोदीजी को कोस रहे हैं, उनका चेहरा पसंद नहीं आ रहा है तो मत देखिए उनकी तरफ। 2013 में आपने जो पाप किया था, उसे समाप्त करके पारदर्शिता लाने का काम किया है।

गर्मी के मौसम में खरबूजा खाना बेहद फायदेमंद

खरबूजा एक स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है, जिसे गर्मियों में खाना बहुत फायदेमंद   माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खरबूजे के बीज भी सेहत के लिए बहुत लाभदायक होते हैं? अक्सर लोग इन बीजों को फेंक देते हैं, लेकिन इनमें कई पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं। आइए जानते हैं खरबूजे के बीज खाने के फायदे। पोषक तत्वों से भरपूर खरबूजे के बीज प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-ए, सी और ई, मिनरल्स (जैसे मैग्नीशियम, पोटैशियम, जिंक और आयरन) और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं। ये सभी तत्व शरीर की फंक्शनिंग को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं खरबूजे के बीज में डाइटरी फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। यह कब्ज की समस्या को दूर करता है और आंतों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इन बीजों को भूनकर या पीसकर खाने से पेट संबंधी समस्याएं कम होती हैं। इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार खरबूजे के बीज में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं। नियमित रूप से इन्हें खाने से सर्दी-जुकाम और इन्फेक्शन का खतरा कम होता है। दिल की सेहत के लिए फायदेमंद इन बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड और पोटैशियम होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने और दिल की बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करता है। यह ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करने में मदद करता है। वजन घटाने में सहायक खरबूजे के बीज में प्रोटीन और फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो भूख को कंट्रोल करते हैं। इससे ज्यादा खाने की इच्छा कम होती है और वजन घटाने में मदद मिलती है। त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद इन बीजों में मौजूद विटामिन-ई और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को ग्लोइंग बनाते हैं और झुर्रियों को कम करते हैं। साथ ही, इनमें जिंक और प्रोटीन होता है, जो बालों को मजबूत बनाने और झड़ने से रोकने में मदद करता है। डायबिटीज में फायदेमंद खरबूजे के बीज ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। इनमें मौजूद फाइबर और हेल्दी फैट्स शुगर के अब्जॉर्प्शन को स्लो करते हैं, जिससे डायबिटीज के मरीजों को फायदा होता है। एनर्जी बूस्टर इन बीजों में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन होता है, जो शरीर को तुरंत एनर्जी देता है। थकान और कमजोरी महसूस होने पर इन्हें खाना फायदेमंद हो सकता है। खरबूजे के बीज को डाइट में कैसे शामिल करें?     बीजों को धूप में सुखाकर भून लें और नमक के साथ स्नैक्स की तरह खाएं।     इन्हें पीसकर स्मूदी या दही में मिलाकर लें।     बीजों को पानी में भिगोकर उनका छिलका निकालकर भी खाया जा सकता है।  

बलौदाबाजार-भाटापारा में नाबालिग की लाश, इलाके में सनसनी,, जांच में जुटी पुलिस

बलौदाबाजार-भाटापारा बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के लवन थाना क्षेत्र में एक नाबालिग की लाश मिलने से हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन कुछ दिन पहले दर्ज की गई गुमशुदगी की रिपोर्ट से मामला जुड़ा हो सकता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम डोंगरीडीह स्थित महानदी पुल के पास ग्रामीणों को रेत में दफन एक लाश दिखाई दी। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची लवन थाने की पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। आशंका है कि यह लाश उसी नाबालिग की हो सकती है, जिसकी कुछ दिन पहले गुमशुदगी की रिपोर्ट स्थानीय थाने में दर्ज कराई गई थी। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि यह शव उसी नाबालिग का है या कोई और मामला है। लवन थाना पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाकर आगे की जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है, जिससे मौत के कारणों का पता लगाया जा सके। पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा करने की संभावना है। पुलिस ग्रामीणों से पूछताछ कर रही है और आसपास के इलाकों की छानबीन कर रही है।  

RBI को मिल गया चौथा डिप्टी गवर्नर, इकोनॉमिस्ट पूनम गुप्ता को किया नियुक्त, तीन साल का रहेगा कार्यकाल

नई दिल्ली सरकार ने प्रतिष्ठित शोध संस्थान नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लॉयड इकनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की महानिदेशक पूनम गुप्ता को तीन साल के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का डिप्टी गवर्नर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। माइकल देबव्रत पात्रा के जनवरी में पद छोड़ने के बाद आरबीआई में डिप्टी गवर्नर का पद खाली हो गया था। सूत्रों ने कहा कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने गुप्ता की आरबीआई में डिप्टी गवर्नर पद पर नियुक्ति को उनके कार्यभार संभालने की तारीख से तीन साल के लिए मंजूरी दी है। वर्तमान में, गुप्ता एनसीएईआर की महानिदेशक हैं। वह प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य और 16वें वित्त आयोग की सलाहकार परिषद की संयोजक भी हैं। वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक में लगभग दो दशक तक वरिष्ठ पदों पर काम करने के बाद वह 2021 में एनसीएईआर में शामिल हुईं। गुप्ता ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स, यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड (अमेरिका) में पढ़ाया और आईएसआई (भारतीय सांख्यिकी संस्थान), दिल्ली में ‘विजिटिंग फैकल्टी’ के रूप में काम किया। वह राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) में आरबीआई चेयर प्रोफेसर और आईसीआरआईईआर में प्रोफेसर भी रही हैं। गुप्ता के पास अमेरिका के मैरीलैंड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नात्कोत्तर डिग्री और पीएचडी तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र पर पीएचडी के लिए 1998 में एक्जिम बैंक पुरस्कार जीता था।

गुजरात के कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीता, पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया

नई दिल्ली आईपीएल में आज भारतीय क्रिकेट के वर्तमान और भविष्य का मुकाबला है। मौजूदा समय में भारतीय क्रिकेट का बड़ा नाम विराट कोहली की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू अपने घर में भारत का भविष्य माने जाने वाले शुभमन गिल की कप्तानी वाली गुजरात टाइटंस से टकराएगी। विराट कोहली को किंग कहा जाता है तो गिल को प्रिंस। आज प्रिंस अपने किंग के घर में जंग जीतने के इरादे से उतरेंगे। गुजरात ने अपने पिछले मैच में मुंबई इंडियंस को मात दी थी। वहीं आरसीबी ने चेन्नई सुपर किंग्स को बड़े अंतर से हराया था। इस सीजन आरसीबी की टीम शानदार लय में नजर आ रही है और गुजरात भी अच्छा खेल दिखा रही है। नजरें इस बात पर होंगी कि किंग के घर में प्रिंस हावी हो पाते हैं या नहीं। गुजरात टाइटंस की प्‍लेइंग 11 शुभमन गिल (कप्‍तान), साई सुदर्शन, जोस बटलर, शाहरुख खान, राहुल तेवतिया, अर्शद खान, राशिद खान, आर साई किशोर, मोहम्‍मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्‍णा और ईशांत शर्मा। बेंच – शेरफेन रदरफोर्ड, ग्‍लेन फिलिप्‍स, अनुज रावत, महिपाल लोमरोर, वॉशिंगटन सुंदर। आरसीबी की पहले बैटिंग गुजरात के कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीता है और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। गुजरात ने एक बदलाव किया है। कगिसो रबाडा बाहर गए हैं और अरशद खान की टीम में एंट्री हुई है। आरसीबी बिना बदलाव के साथ उतरी है। चिन्नास्वामी में किंग के सामने प्रिंस बेंगलुरू के एम. चिन्नस्वामी स्टेडियम में आज मेजबान रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू का सामना गुजरात टाइटंस से होना है। इस मैच को किंग बनाम प्रिंस के मुकाबले के तौर पर देखा जा रहा है। मौजूदा समय में भारतीय क्रिकेट के किंग कहे जाने वाले विराट कोहली प्रिंस कहे जाने वाले शुभमन गिल के सामने होंगे। इस मैच में किसका बल्ला ज्यादा रन उगलता है और किस टीम को जीत मिलती है, इस पर सभी की नजरें हैं।

घरेलू क्रिकेट में मुंबई टीम का साथ छोड़ेंगे यशस्वी, अब मुंबई के बजाए गोवा के लिए खेलने की इच्छा जताई

मुंबई मुंबई क्रिकेट संघ ने यशस्वी की इस मांग को स्वीकार कर लिया है। यशस्वी आखिरी बार मुंबई के लिए जम्मू कश्मीर के खिलाफ 23-25 जनवरी के बीच रणजी ट्रॉफी के लीग मैच में खेले थे। भारतीय टीम के सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने घरेलू क्रिकेट में मुंबई टीम का साथ छोड़ने का फैसला लिया है। यशस्वी इसी टीम की बदौलत राष्ट्रीय टीम में अपनी पहचान स्थापित कर सके हैं। उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए मुंबई टीम छोड़ने का फैसला लिया है। यशस्वी ने मंगलवार को मुंबई क्रिकेट संघ को पत्र लिखा और मुंबई के बजाए गोवा के लिए खेलने की इच्छा जताई। मुंबई क्रिकेट संघ ने मांग स्वीकार की मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए) ने यशस्वी की इस मांग को स्वीकार कर लिया है। 23 वर्षीय सलामी बल्लेबाज यशस्वी अब 2025-26 सीजन में गोवा के लिए खेलेंगे। मुंबई क्रिकेट संघ के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई के हवाले से कहा, हां, यह आश्चर्यजनक है। उसने कुछ सोचकर ही यह कदम उठाया होगा। उसने हमने कहा कि उसे रिलीज कर दिया जाए और हमने उसका अनुरोध मान लिया।   जम्मू कश्मीर के खिलाफ खेले आखिरी मैच यशस्वी आखिरी बार मुंबई के लिए जम्मू कश्मीर के खिलाफ 23-25 जनवरी के बीच रणजी ट्रॉफी के लीग मैच में खेले थे। उन्होंने चार और 26 रन बनाए, जबकि मुंबई को टूर्नामेंट के इतिहास में पहली बार जम्मू कश्मीर ने पांच विकेट से हराया था। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने सभी भारतीय खिलाड़ियों से राष्ट्रीय जिम्मेदारी से मुक्त रहने पर घरेलू क्रिकेट में खेलने के लिए कहा था जिसके बाद यशस्वी मुंबई के लिए खेले थे। यशस्वी जायसवाल ने जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था और तभी से वह ओपनर के तौर पर पहली पसंद बने हुए हैं। यशस्वी ने डेब्यू करने के बाद से भारत के लिए 19 मैच खेले हैं और बड़े मंच पर शानदार प्रदर्शन किया है। टेस्ट में उनका 52 से ज्यादा का है और उन्होंने इस प्रारूप में भारत के लिए खेलते हुए चार शतक और 10 अर्धशतक लगाए हैं।  

भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती हेतु ऑनलाईन आवेदन 10 अप्रैल तक आमंत्रित

उत्तर बस्तर कांकेर, भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती 2025 हेतु वेबसाईट www.joinindionarmy.nic.in पर ऑनलाईन आवेदन 10 अप्रैल तक आमंत्रित किया गया है। जिला रोजगार अधिकारी ने बताया कि अग्निवीर की भर्ती जनरल तकनीकी क्लर्क, ट्रेड्समैन आठवीं, दसवीं पास, महिला सैन्य पुलिस और रेगुलर कैडर भर्ती धर्मगुरू नर्सिंग सहयोगी और सिपाही फार्मा के पदों के लिए जारी किया गया है। अभ्यर्थी इस बार अग्निवीर के दो पदों के लिए अपनी योग्यता अनुसार आवेदन कर सकते हैं। अग्निवीर क्लर्क के अभ्यर्थियों को ऑनलाइन परीक्षा (सीईई) के समय टायपिंग टेस्ट भी देना होगा तथा परीक्षा आगामी जून में होने की संभावना है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए सेना भर्ती कार्यालय रायपुर के टेलीफोन नंबर 0771-2965212, 0771-2965214 पर संपर्क किया जा सकता है।

वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी – बांद्रा टर्मिनस साप्ताहिक ग्रीष्मकालीन विशेष गाड़ी शुरू

  भोपाल रेल प्रशासन द्वारा ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान यात्रियों की सुविधा हेतु विशेष ट्रेनों के संचालन की श्रृंखला में गाड़ी संख्या 02199/02200 वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी – बांद्रा टर्मिनस – वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी साप्ताहिक ग्रीष्मकालीन विशेष ट्रेन चलाई जा रही है। यह ट्रेन अब भोपाल मंडल के शिवपुरी, गुना, रूठियाई, चाचौड़ा बीनागंज एवं ब्यावरा राजगढ़ स्टेशनों पर भी ठहरेगी। गाड़ी संख्या 02199 वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी – बांद्रा टर्मिनस (13 ट्रिप) गाड़ी संख्या 02199 वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी – बांद्रा टर्मिनस विशेष ट्रेन दिनांक 03 अप्रैल 2025 से 26 जून 2025 तक प्रत्येक गुरुवार को वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी स्टेशन से शाम 16:50 बजे प्रस्थान कर, (उसी दिन) मार्ग के अन्य स्टेशनों से होते हुए 20:23 बजे शिवपुरी, 22:10 बजे गुना, 22:32 बजे रूठियाई, 23:10 बजे चाचौड़ा बीनागंज, 23:43 बजे ब्यावरा राजगढ़ एवं अन्य स्टेशनों पर ठहराव के बाद अगले दिन शाम 16:10 बजे बांद्रा टर्मिनस स्टेशन पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 02200 बांद्रा टर्मिनस – वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी (13 ट्रिप) गाड़ी संख्या 02200 बांद्रा टर्मिनस – वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी विशेष ट्रेन दिनांक 05 अप्रैल 2025 से 28 जून 2025 तक प्रत्येक शनिवार को सुबह 05:10 बजे बांद्रा टर्मिनस स्टेशन से प्रस्थान कर, उसी दिन मार्ग के अन्य स्टेशनों से होते हुए 19:30 बजे ब्यावरा राजगढ़, 19:58 बजे चाचौड़ा बीनागंज, 20:58 बजे रूठियाई, 21:55 बजे गुना, 23:13 बजे शिवपुरी एवं अन्य स्टेशनों पर ठहराव के बाद अगले दिन सुबह 05:00 बजे वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी स्टेशन पहुंचेगी। यात्रियों से अनुरोध है कि यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व रेलवे की आधिकारिक पूछताछ सेवा NTES/139 या वेबसाइट www.enquiry.indianrail.gov.in अथवा NTES ऐप के माध्यम से गाड़ी की समय-सारणी एवं ठहराव की पुष्टि अवश्य कर लें।

अवैध बजरी खननकर्ता की कुर्क होगी संपत्ति, पुलिस ने कोर्ट में दायर किया इस्तगासा

जोधपुर जिला पश्चिमी पुलिस टीम ने अवैध बजरी खनन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ 107 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई को लेकर कोर्ट में इस्तगासा पेश किया है। इस संबंध में पुलिस की विशेष टीम ने आसूचना एकत्रित की, जिसके आधार पर फिंच गांव के हमीर नगर निवासी अमराराम की अवैध बजरी खनन से अर्जित संपत्ति की जानकारी निकाली गई, जिसमें एक डंपर, एक जेसीबी, एक कैंपर और एक मोटर साइकिल के अलावा मकान और बैंक बैलेंस मिलाकर कुल 1.35 करोड़ रुपये की संपत्ति सामने आई। इस पर अमराराम के खिलाफ 107 बीएनएसएस के तहत इस्तगासा कोर्ट में पेश किया गया है। आगे की कार्रवाई कोर्ट की ओर से की जाएगी। अवैध खनन करने वालों पर संभवतया प्रदेश में इस तरह की यह पहली कार्रवाई है। चार इंस्टाग्राम आईडी भी बंद करवाई डीसीपी वेस्ट राजर्षि राज वर्मा ने बताया कि अवैध बजरी खनन करते हुए रील्स बनाने वालों के अकाउंट चिन्हित किए गए हैं और इनमें 6 लोगों के खिलाफ कोर्ट में 107 बीएनएसएस और दो के खिलाफ 126 /135 बीएनएसएस के तहत इस्तगासा तैयार किया गया है। इनमें से चार की इंस्टाग्राम आईडी बंद करवाई गई है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो में दिखाई दे रहे वाहनों को चिन्हित करते हुए उन पर भी कार्रवाई की गई है। पुलिस कमिश्नर राजेंद्र सिंह एवं डीसीपी पश्चिम राजर्षि राज वर्मा के निर्देश पर एडीसीपी पश्चिम निशांत भारद्वाज और एसीपी बोरानाडा आनंद सिंह राजपुरोहित के सुपरविजन में लुणी थाना अधिकारी हनुमत सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में गठित टीम ने यह कार्रवाई की। गौरतलब है कि अवैध बजरी खनन को लेकर लगातार शिकायतें आ रही हैं और पुलिस भी इस संबंध में लगातार कार्रवाई कर रही है लेकिन अवैध बजरी खनन करने वाले की संपत्ति कुर्क किए जाने संबंधी संभवतया यह पहली कार्रवाई है।

प्रदेश को 4,302.87 करोड़ लागत की सड़क परियोजनाओं की केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिलने से मध्यप्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होगी: मंत्री राकेश सिंह

भोपाल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा है कि प्रदेश को 4,302.87 करोड़ रुपये लागत की 4 महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिलने से मध्यप्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होगी। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार व्यक्त किया है। मंत्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय मंत्री गडकरी के मार्गदर्शन में देश का अधोसंरचना क्षेत्र अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में विकास यात्रा की गति और तेज हो रही है। संदलपुर से नसरुल्लागंज बायपास तक बनेगा 43.200 किमी का 4 लेन राष्ट्रीय राजमार्ग भोपाल जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-146बी के संदलपुर से नसरुल्लागंज बायपास तक के 43.200 किलोमीटर लंबे खंड को 1535.66 करोड़ रुपये की लागत से 4 लेन में परिवर्तित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह खंड एक महत्वपूर्ण धमनी मार्ग के रूप में कार्य करता है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-47, राष्ट्रीय राजमार्ग-46 और राष्ट्रीय राजमार्ग-45 को आपस में जोड़ता है। यह क्षेत्र अत्यधिक भीड़-भाड़ वाला है, जिसे पेव्ड शोल्डर सहित 4 लेन किए जाने से यातायात की समग्र दक्षता में सुधार होगा। मालवाहन और आमजन के लिए यह मार्ग अब और भी सुचारू, सुरक्षित और समय बचाने वाला होगा। राहतगढ़ से बेरखेड़ी तक बनेगा 10.079 किमी का 4 लेन कॉरिडोर विदिशा और सागर जिलों में राष्ट्रीय राजमार्ग-146 के राहतगढ़ से बेरखेड़ी तक के 10.079 किमी हिस्से को 731.36 करोड़ रुपये की लागत से 4 लेन में विकसित करने की स्वीकृति दी गई है। यह परियोजना भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा है, जो न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी, बल्कि राहतगढ़ जैसे घनी आबादी वाले शहर को बायपास कर एक तेज़ और निर्बाध मार्ग प्रदान करेगी। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और राष्ट्रीय राजमार्ग-346 को जोड़ेगी। इसके साथ ही मार्ग के ज्यामितीय सुधार एवं रि-अलॉयमेंट से सामान और लोगों की आवाजाही और भी सुरक्षित व कुशल हो सकेगी। इससे क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। लहदरा से बेरखेड़ी गुरु तक बनेगा 20.193 किमी लंबा 4 लेन ग्रीनफील्ड बायपास राष्ट्रीय राजमार्ग-146 पर लहदरा गांव जंक्शन से राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के बेरखेड़ी गुरु गांव जंक्शन तक 20.193 किमी लंबे 4-लेन ग्रीनफील्ड सागर पश्चिमी बायपास के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना पर कुल 688.31 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग-146 शहरी बस्तियों और अत्यधिक ट्रैफिक वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। नए बायपास के बनने से सागर शहर में यातायात का दबाव कम होगा, साथ ही यात्रा का समय और दूरी दोनों घटेंगे। यह परियोजना क्षेत्र के नागरिकों को सुगम यातायात सुविधा उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगी। पश्चिमी ग्वालियर के लिए 28.516 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड 4-लेन बायपास को स्वीकृति ग्वालियर शहर के पश्चिमी हिस्से में 28.516 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड 4 लेन बायपास के निर्माण को केंद्र सरकार ने 1347.6 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत मुरैना और ग्वालियर जिलों के साथ-साथ रास्ते में आने वाले अन्य प्रमुख ब्लॉकों और तहसील मुख्यालयों को जोड़ा जाएगा। यह नया सड़क खंड एक धमनी मार्ग की तरह कार्य करेगा, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-46, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और आगामी आगरा-ग्वालियर एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे से कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा। इसके विकास से भारी माल ढुलाई और लंबे मार्ग की यातायात व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा। परियोजना के पूर्ण होने के बाद यातायात का सुगम और सुरक्षित प्रवाह सुनिश्चित होगा तथा यात्रा के समय में काफी कमी आएगी। यह बायपास न केवल क्षेत्रीय विकास को गति देगा बल्कि आर्थिक और परिवहन संबंधी गतिविधियों को भी बल प्रदान करेगा। इन परियोजनाओं से न केवल मध्यप्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी, बल्कि यातायात सुरक्षा, मालवहन दक्षता, समय की बचत, और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। आने वाले वर्षों में ये सड़कें प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।  

पीएम मोदी थाईलैंड और श्रीलंका की यात्रा करेंगे, बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में करेंगे शिरकत

नई दिल्ली बंगाल इनिशिएटिव फॉर सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकॉनोमिक कोऑपरेशन (BIMSTEC) का छठा शिखर सम्मेलन 4 अप्रैल को बैंकॉक में आयोजित होने जा रहा है. इस सम्मेलन से पहले दो अप्रैल को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और 3 अप्रैल को विदेश मंत्रियों की बैठक होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मेलन में शामिल होने के लिए गुरुवार को बैंकॉक के लिए रवाना होंगे. बैंकॉक में छठा शिखर सम्मेलन कोलंबो में हुए पिछले शिखर सम्मेलन (30 मार्च, 2022) के तीन साल बाद आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का विषय ‘समृद्ध, लचीला और खुला बिम्सटेक’ तय किया गया है, जो क्षेत्रीय एकीकरण और आर्थिक सहयोग के लिए इस मंच की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. एक व्यापक एजेंडे के साथ, शिखर सम्मेलन का मसकद साझा सुरक्षा और विकास संबंधी चुनौतियों को हल करके सात सदस्य देशों, यानी बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के बीच सहयोग को मजबूत करना है. शिखर सम्मेलन की मुख्य विशेषताओं में 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन घोषणापत्र को अपनाना शामिल है, जो नेताओं के दृष्टिकोण और निर्देशों को हाईलाइट करेगा. साथ ही ऐतिहासिक बैंकॉक विजन 2030, भविष्य के सहयोग को बढ़ाने के लिए पहला रणनीतिक रोडमैप होगा. क्षेत्रीय संपर्क की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सभी देशों के नेता समुद्री परिवहन सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर करेंगे, जिसका उद्देश्य बंगाल की खाड़ी में व्यापार और यात्रा का विस्तार करना है. बिम्सटेक का क्या मकसद बढ़ती भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन से बंगाल की खाड़ी में सहयोग के लिए प्राथमिक क्षेत्रीय मंच के तौर पर संगठन की भूमिका को मजबूत करने की उम्मीद है. पांच दक्षिण एशियाई और दो दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ, बिम्सटेक क्षेत्रीय मामलों में एक अधिक गतिशील और प्रभावशाली खिलाड़ी बनने के लिए तैयार है. साल 1997 में अपनी स्थापना के बाद से बिम्सटेक ने पांच शिखर सम्मेलन आयोजित किए हैं. बैंकॉक (2004), नई दिल्ली (2008), नेपीडॉ (2014), काठमांडू (2018) और कोलंबो (2022). संगठन सात प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है जिनमें कृषि और खाद्य सुरक्षा, कनेक्टिविटी, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन, लोगों से लोगों का संपर्क, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, व्यापार और निवेश, साथ ही आठ उप-क्षेत्र, जिनमें ब्लू इकोनॉमी, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य शामिल हैं. भारत सबसे प्रभावशाली सदस्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिम्सटेक का यह शिखर सम्मेलन इसकी रणनीतिक दिशा को आकार देने में मददगार साबित होगा. साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि यह बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक विकास, सुरक्षा सहयोग और सतत विकास के लिए एक यह मंच महत्वपूर्ण ताकत बना रहे. भारत, बिम्सटेक के चार संस्थापक सदस्यों में से एक है, जो सुरक्षा, ऊर्जा और आपदा प्रबंधन में क्षेत्रीय सहयोग का नेतृत्व करता है. बिम्सटेक सचिवालय के बजट में सबसे बड़ा योगदानकर्ता (32 प्रतिशत) होने के नाते, भारत दो बिम्सटेक केंद्रों की मेजबानी करता है. नोएडा, उत्तर प्रदेश में बिम्सटेक मौसम और जलवायु केंद्र और बेंगलुरु में बिम्सटेक ऊर्जा केंद्र. साथ ही कृषि, आपदा प्रबंधन और समुद्री परिवहन में उत्कृष्टता के तीन और नए केंद्रों का प्रस्ताव दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिम्सटेक के पीछे सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति रहे हैं, उन्होंने गोवा में बिम्सटेक नेताओं की रिट्रीट (2016) की मेज़बानी की और संस्थागत क्षमता को मज़बूत करने के लिए 5वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में एक मिलियन डॉलर के वित्तीय अनुदान की घोषणा की थी. भारत ने जुलाई 2024 में दूसरे बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की रिट्रीट की मेज़बानी की, जिसमें नए केंद्रों, अंतरिक्ष सहयोग और लोगों के बीच आदान-प्रदान को लेकर पहल की गई थी. साथ ही भारत ने न्यूयॉर्क में 79वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक की अध्यक्षता भी की. चीन को चुनौती देने की तैयारी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी, एक्ट ईस्ट पॉलिसी और सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) विजन, बिम्सटेक देशों के साथ भारत के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाते हैं. बंगाल की खाड़ी क्षेत्र एक चौराहे पर खड़ा है, भारत की प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करती है कि बिम्सटेक एक एक्टिव फोरम के तौर पर विकसित हो, जो साझा-समृद्ध भविष्य के लिए संस्कृतियों और अर्थव्यवस्थाओं के बीच सामंजस्य स्थापित कर सके. भारत ने सार्क को पीछे छोड़ते हुए अब अपना फोकस बिम्सटेक की तरफ मोड़ लिया है. सार्क सदस्यों में पाकिस्तान के शामिल होने की वजह से लगातार बाधाएं पैदा होती थीं और साल 2016 में उरी हमले के बाद सार्क का कोई भी सम्मेलन आयोजित नहीं हुआ है. ऐसे में अब सार्क को एक तरह से निष्क्रिय मंच माना जा रहा है. उधर, बंगाल की खाड़ी से सटे देशों पर चीन का प्रभुत्व खत्म करने और उसके विस्तारवाद को चुनौती देने के मकसद से भी भारत बिम्सटेक को प्राथमिकता दे रहा है. अगर भारत इस मंच का नेतृत्व अच्छी तरह से करता है तो सदस्य देशों को चीन का साथ देने में मुश्किल होगी और ऐसे में भारत न सिर्फ बिम्सटेक बल्कि एशिया का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है. सदस्य देशों के साथ मजबूत संबंध भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और बिम्सटेक में सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति है. ऐसे में बिम्सटेक के मंच का इस्तेमाल करके सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने से भारत अपनी पूर्वी सीमा से सटे इन देशों के साथ मजबूत संबंध स्थापित कर सकता है जिससे चीन को कड़ी चुनौती मिलेगी. अगर इन देशों के साथ भारत के संबंध मजबूत होंगे तो ये सदस्य देश भी भारत के हितों को चीन से ऊपर रखेंगे और वहां ड्रैगन के किसी प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले अपने रिश्तों के बारे में जरूर विचार करेंगे. 2015 के बाद से मोदी की द्वीप राष्ट्र की चौथी यात्रा 2015 के बाद से यह प्रधानमंत्री मोदी की द्वीप राष्ट्र की चौथी यात्रा होगी। इससे पहले पीएम मोदी ने 2015, 2017 और 2019 में श्रीलंका का दौरा किया था। यह यात्रा ऐसे वक्त हो रही है, जब भारत और श्रींलका के बीच मछुआरों की गिरफ्तारी का मुद्दा गरम है। इस कारण से दोनों देशों के बीच तनातनी चल रही है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कई बार विदेश मत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर मुद्दे के स्थायी हल निकालने के लिए काम करने को कह चुके हैं। इस साल करीब 150 से … Read more

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