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मुख्य सड़कों के गड्ढों से निजात दिलाने, आमला में पंडोले का दुखी प्रदर्शन, चलने लायक सड़क की कर रहे मांग ।

Demand for relief from potholes on main roads, sad protest by Pandola in Amla, demanding a walkable road. हरिप्रसाद गोहेआमला । आमला नगर की प्रमुख एवं मुख्य सड़कों में व्याप्त जानलेवा गड्डो से लोग दुखी है वहीं सड़क समस्या आमला शहर में लोगों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुईं है। दो पहिया, चार पहिया वाहन हो या फिर पैदल सफर करने वाले लोगों को बदहाल एवं खस्ताहाल सड़कों पर आवागमन करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बतादे शहर की प्रमुख एवं मुख्य सड़कों में पड़े बड़े एवं जानलेवा गड्डे किसी गंभीर एवं अप्रिय घटना को आमंत्रण दे रहे है। सबसे ज्यादा परेशनी गंभीर रूप से बीमार मरीजों को वाहनों से शहर से बाहर उपचार कराने ले जाते समय हो रही है। बावजूद इस और शासन, प्रशासन एवं जनता द्वारा चुने गए जन सेवकों की नजर नहीं पड़ रही है । इतना ही नही जन हितैषी गंभीर सड़क समस्या का निराकरण करने में जिम्मेदार विभाग प्रमुख भी अपनी उदासीनता दिखा रहे है । जिस कारण भी आमला शहर में लोगों को जान जोखिम में डाल शहर की सड़कों पर आवागण करने मजूबूर होना पड़ रहा है । ऐसे में शहर को पूर्व में मिली सौगात आमजन की नजरों में महज औपचारिकता पूर्ण करती प्रतीत हो रही है । नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर लोग प्रशासन से पूछ रहे सवाल साहब कब सुधरेंगे आमला की सड़कों के हालत जिसका रहेगा हमे इंतजार । गोरतलब हो की संपूर्ण आमला शहर की उखड़ी, गड्डो युक्त खस्ताहाल , बदहाल सड़को की समस्या से न खुश होकर समाज सेवक चंद्रशेकर पंडोले ने जन हितैषी मुद्दे को दृष्टिगत रख शहर की उखड़ी सड़को के गड्डो पर शासन प्रशासन का ध्यानाकर्षण कराने दुखी प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इसके पूर्व भी ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन का ध्यानाकर्षण शहर में व्याप्त सड़क समस्या पर पंडोले द्वारा कराया गया था जिस पर अनुविभागीय अधिकारी ने उन्हें जूस पिलाकर सुव्यवस्थित चलने लायक सड़क का सुधार कार्य कराने आस्वासन दिया गया था। बावजूद महज सड़क के गड्ढों में गिट्टी भर औपचारिकता पूर्ण कर दी गई जो गिट्टी अब निकल कर लोगों को चोटिल कर आवागमन में बाधा उत्पन्न कर रही है। हमारे प्रतिनिधि से चर्चा के दौरान चंद्रशेखर पंडोले ने बताया मुझे बड़े दुखी मन से कहना पड़ रहा है हवाई पट्टी से एडीएन बंगला, बोड़खी पहुंच मार्ग से लोकों, हनुमान मंदिर होते हुए लक्ष्मण नगर, पहुंच मार्ग इधर जनपद चौक से पीर मंजिल पहुंच मार्ग उखड़ने से बड़े, बड़े गद्दे बीच सड़क में हो गए हैं । जिस कारण आम जनता को आवागम में परेशानी हो रही है उन्होंने कहा क्षेत्र की जनता दुखी हैं। जन हितैषी सड़क समस्या के चलते मेरे द्वारा शासन प्रशासन से सड़क सुधार, निर्माण की मांग की गई सड़क समस्या का निराकरण नहीं होने से दुखी मन से दुखी प्रदर्शन करना पड़ रहा हे आगामी दिनों में प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव जी का विधानसभा क्षेत्र के सारणी में आगमन होना है जहा पहुंच मेरे द्वारा उन्हें आमला की सड़क समस्या से अवगत कराया जायेगा। वहीं आमला से सारणी सवारी बस चलने लायक सड़क बनाने मांग की जाएगी ।

उत्तर प्रदेश को इको टूरिज्म के हब के तौर पर किया जा रहा विकसित

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक वन एवं वन्य जीव विभाग उत्तर प्रदेश को इको टूरिज्म के हब के तौर पर विकसित कर रहा है. वन एवं वन्य जीव विभाग के संबंधित अधिकारियों ने बताया कि विभाग प्रदेश के प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता को संरक्षित करते हुए बफर में सफर योजना शुरू की जा रही है. जिसके तहत प्रदेश के टाइगर रिजर्वों में नए सफारी रूटों के साथ भीरा और मोहम्मदी जैसे क्षेत्रों में ईको टूरिज्म की नई संभावनाओं को विकसित किया जा रहा है. साथ ही स्थानीय लोगों को गाइड, रेस्टोरेंट संचालक के रूप में प्रशिक्षित कर स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इन प्रयासों का परिणाम है कि यूपी में पिछले वर्षों में ईको टूरिज्म के पर्यटकों की संख्या में भी तीव्र वृद्धि हुई है. सीएम योगी के विजन के मुताबिक उत्तर प्रदेश को ईको टूरिज्म के हब के तौर पर विकसित किया जा रहा है. इस दिशा में प्रदेश के वन एवं वन्य जीव विभाग ने मानसून के दौरान “बफर में सफर” योजना शुरू करने जा रही है. प्रदेश के टाइगर रिजर्वों के बफर जोन में सफारी के नए रूटों को विकसित किया जा रहा है. इस योजना के तहत दुधवा, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, और उत्तर खीरी बफर जोन में नए सफारी रूट विकसित किए जा रहे हैं. इसके तहत सोहागीबरवा, उत्तर खीरी और पीलीभीत में बफर जोन क्षेत्रों के नए मार्गों का चयन किया गया है. होगा जंगल के रोमांच का अनुभव इन बफर जोन में पर्यटक बरसात के दिनों में भी सफारी का आनंद ले सकेंगे. साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए टाईगर रिजर्वों को अधिक दिन खोलने की भी व्यवस्था की जा रही है. बफर में सफर योजना का सबसे बड़ा लाभ मानव और वन्य जीवों के संघर्ष में कमी लाते हुए पर्यटकों को जंगल के रोमांच का अनुभव प्रदान करना है. नई संभावनाएं की जा रही हैं विकसित वन एवं वन्य जीव विभाग प्रदेश में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए टाइगर रिजर्व और अभ्यारण्यों के अतिरिक्त अन्य नई संभावनाओं को भी विस्तार दे रहा है. इस दिशा में लखीमपुर खीरी के भीर और मोहम्मदी के क्षेत्रों को भी ईको टूरिज्म के स्पाट के तौर पर विकसित किया जा रहा है. दक्षिणी खीरी के गोला, मोहम्मदी रेंज और भीर में टूरिस्ट सर्किट का निर्माण किया गया है. साथ ही इस क्षेत्र में पड़ने वाली सेमराई झील, जो पक्षियों के प्रवास के लिए प्रसिद्ध है, इसको भी सर्किट में पर्यटकों के मनोरंजन के लिए शामिल किया जाएगा. नेपाल सीमा से सटे हुए कर्तनिया घाट के बफर जोन में भी जंगल सफारी की शुरुआत की गई है।.इन क्षेत्रों में प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता के साथ वन्य जीवों की समृद्धि पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी. ईको टूरिज्म के हब के तौर पर किया जाएगा विकसित वन एवं वन्य जीव विभाग सीएम योगी के विजन के मुताबिक उत्तर प्रदेश को ईको टूरिज्म का हब बनाने की दिशा में कई और नवीन प्रयास कर रहा है. इस दिशा क्रम में दुधवा पर्यटन परिसर में एक आधुनिक सूचना केंद्र की स्थापना की गई है, जो पर्यटकों को क्षेत्र की जैव विविधता, वन्य जीव, और स्थानीय संस्कृति की जानकारी प्रदान करेगा और लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुक भी करेगा. इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए नेचर गाइड, कैंटीन कर्मियों, और खानसामों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यह प्रशिक्षण न केवल उनकी कौशल क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि पर्यटकों को उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं भी सुनिश्चित करेगा. साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी प्रदान करेगा. इन प्रयासों के चलते उत्तर प्रदेश जल्द ही देश और दुनिया के नक्शे पर इको टूरिज्म के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है.

ये 5 गैजेट्स कोरोना में आपकी फैमिली की करेंगे सुरक्षा

नई दिल्ली पिछले कुछ समय से मुंबई, चेन्नई और अहमदाबाद जैसे शहरों में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी देखने को मिली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक तमिलनाडु और पुडुचेरी में कोविड-19 के 12-12 नए मामले सामने आए हैं। वहीं कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने भी जानकारी दी थी कि कर्नाटक में कोविड-19 के 16 सक्रिय मामले सामने आए हैं। ऐसे में भले WHO ने 2023 में ही इस महामारी के खत्म होने की घोषणा कर दी हो लेकिन वैश्विक स्तर पर यह बीमारी लगातार फैल रही है। ऐसे में स्थिति बिगड़ने से पहले ही अगर हम कुछ बेसिक तैयारियां कर लें, तो खुद को और अपने परिवार को कोरोना की आहट से बचा सकते हैं। आज हम आपको 5 ऐसे गैजेट्स के बारे में बता रहे हैं जिनकी मदद से आप अपने घर में कोरोना को आने से रोक सकते हैं। ऑटोमैटिक हैंड सैनेटाइजर डिस्पेंसर पिछली बार जब कोविड फैला था, तो हैंड सैनेटाइजर हर घर में इस्तेमाल होने लगा था। हालांकि जैसे-जैसे यह बीमारी दूर हुई लोगों ने हैंड सैनेटाइजर का इस्तेमाल कम कर दिया। अब जब कोरोना के मामले फिर से सामने आने लगे हैं, तो अपने घर में एक ऑटोमैटिक हैंड सैनेटाइजर डिस्पेंसर रख लेना समझदारी होगी। इससे कोरोना के फैलने की रिस्क काफी हद तक कम हो जाती है। इस डिवाइस को अपने घर के एंट्री गेट पर लगा दें और हर आने-जाने वाले को इसका इस्तेमाल करने को कहें। UV-C स्टरलाइजेशन बॉक्स या बैग कोराना के बढ़ते मामलों के बीच UV-C स्टरलाइजेशन बॉक्स या बैग को घर में रखना समझदारी भरा फैसला हो सकता है। यह एक स्मार्ट गैजेट है जो कि उन सामानों को वायरस और बैक्टीरिया से मुक्त करने में मदद करता है जो आपके साथ रोज घर से बाहर जाते हैं। इस डिवाइस में खास तरह की UV-C लाइट होती है, जो कोरोना वायरस जैसे सूक्ष्म जीवों को नष्ट कर देती है। इस डिवाइस में आप अपना मोबाइल, चाबी, वॉलेट, पैसे या छोटे पार्सल को रखकर कुछ ही मिनटों में पूरी तरह से सैनिटाइज कर सकते हैं। इसमें किसी तरह के कैमिकल का इस्तेमाल नहीं होता और यह कोरोना के खिलाफ एक बहुत ही कारगर हथियार है। नॉन-कॉन्टैक्ट थर्मामीटर कोरोना की आहट के बीच घर में एक नॉन-कॉन्टैक्ट थर्मामीटर रखना फायदेमंद हो सकता है। दरअसल अगर इस दौरान घर का कोई भी सदस्य बीमार होता है, तो शरीर के किसी हिस्से को छुए बिना तापमान मापा जा सकता है। कोरोना के लक्षणों में बुखार सबसे आम है, और इस थर्मामीटर से आप खुद या घर आने वाले लोगों का तापमान दूर से ही जांच सकते हैं। इससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है क्योंकि किसी को छूने की जरूरत ही नहीं पड़ती। यह तेज, सुरक्षित और आसान तरीका है कोरोना की पहचान और उसे फैलने से रोकने के लिए। HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर कोरोना हवा के जरिए भी फैलता है। ऐसे में एक HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर घर में रखना अच्छा हो सकता है। यह हवा को साफ करने में बहुत कारगर होता है और हवा में मौजूद वायरस, बैक्टीरिया, धूल, एलर्जी फैलाने वाले कणों को 99.97% तक सोंख लेने मे सक्षम होता है। कोरोना जैसे संक्रमण के समय जब हवा के जरिए वायरस फैल सकता है, तब यह डिवाइस घर के अंदर की हवा को शुद्ध और साफ रखता है। डोर ओपनर रिंग यह एक बहुत ही प्रैक्टिकल गैजेट है जिसे साथ में कैरी करना भी बेहद आसान है। दरअसल कोरोना वायरस अक्सर दरवाजों के हैंडल, लिफ्ट के बटन, एटीएम या अन्य पब्लिक जगहों पर छूने वाली सतहों से फैलता है। जब हम इन्हें हाथों से छूते हैं और फिर उसी हाथ से चेहरा या नाक-मुंह छू लेते हैं, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यह गैजेट हमें यही सब करने से रोकता है। इसकी मदद से आप दरवाजे खोलने और एटीएम के बटन दबाने जैसे काम आसानी से कर सकते हैं। इतना ही नहीं इसकी मदद से आप अपने फोन को भी ऑपरेट कर सकते हैं, ताकि आपको फोन की स्क्रीन को भी अपने हाथों से छूना न पड़े। इसे आप चाबी के छल्ले की तरह अपने साथ कैरी भी कर सकते हैं। इस डिवाइस के इस्तेमाल से संभव है कि आप कोरोना के वायरस अपने घर तक न ला पाएं।

राजस्थान में हीट स्ट्रोक का जबरदस्त असर, 48 डिग्री पहुंचा तापमान

जयपुर राजस्थान इस वक्त मौसम विभाग के रडार पर लाल नजर आ रहा है। यहां पारा हर रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है। शुक्रवार का दिन सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। जैसलमेर में सर्वाधिक तापमान 48 डिग्री दर्ज किया गया। पश्चिमी राजस्थान इस वक्त धधक रहा है और मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 48 घंटों तक दिन के साथ यहां रात के समय भी जबरदस्त हीट वेव्स चलेंगी। पाकिस्तान की सीमा से सटे राजस्थान के बीकानेर, बाड़मेर और जैसलमेर में शनिवार को हीट वेव्स का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और हल्की बारिश होने की संभावना है। इससे यहां पर तापमान में कुछ कमी आ सकती है। पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में आज तेज आंधी व वज्रपात का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां 40 से 60 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चल सकती है। बीते 24 घंटों में प्रदेश के 7 शहरों में अधिकतम तापमान 45 डिग्री से अधिक रहा। इसमें जैसलमेर में सर्वाधिक 48 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। मौसम विभाग का कहना है कि 48 घंटों में बीकानेर, जोधपुर संभाग व शेखावाटी के कुछ भागों में अधिकतम तापमान में राहत मिलने के आसार नहीं हैं और इस दौरान यहां दिन के साथ रात में भी तेज लू चलेगी। सीमावर्ती क्षेत्रों में धूल भरी हवाएं चलेंगी। राजधानी जयपुर में शुक्रवार के मुकाबले तापमान में दो डिग्री की गिरावट आई है। यहां गुरुवार को अधिकतम तापमान 43.2 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार राजधानी जयपुर में अगले कुछ दिन तापमान में गिरावट आ सकती है लेकिन पश्चिमी राजस्थान में अगले 4 से 5 दिन जबरदस्त हीट वेव्स चलेंगी। बीते 24 घंटों में प्रदेश के अधिकतम तापमान की स्थिति इस प्रकार रही। अजमेर में 43.1, भीलवाड़ा में  41.1, वनस्थली 46.1, अलवर में 40.5, जयपुर में 43.2, पिलानी में 45.7, कोटा में 42.3, बाड़मेर में 47.5, जैसलमेर में 48, जोधपुर में 44.5, चूरू में 45.6 तथा बीकानेर में 46.4 व गंगानगर में 44.1 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया।

4 जून तक मध्य भारत में भी शुरू हो जाएगी झमाझम बारिश, 26-27 मई के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, तेलंगाना में अलर्ट

नई दिल्ली दक्षिण पश्चिम मानसून शनिवार को केरल पहुंच गया। 16 साल में यह पहला मौका है जब मानसून ने 8 दिन पहले दस्तक दी है। आमतौर पर 1 जून से केरल में मानसून की बारिश शुरू होती है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, सब कुछ ठीक रहा तो 4 जून से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात सहित मध्य भारत के बड़े हिस्से में भी बारिश शुरू हो जाएगी। पिछली बार केरल में मानसून इतनी जल्दी 2009 और 2001 में आया था, जब 23 मई से बारिश शुरू हो गई थी। केरल में मानसून के आगमन से पहले अनुकूल परिस्थितियां विकसित हो गई थीं। पिछले दो दिनों में केरल के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई है। इसका कारण निम्न दबाव का क्षेत्र और आगे बढ़ रहा मानसून सिस्टम है। आईएमडी ने मुताबिक, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश के साथ ही दक्षिण, मध्य और उत्तर बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों और पूर्वोत्तर राज्यों में 22 से 27 मई के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। 29 मई से 4 जून के दौरान मानसून के दक्षिण प्रायद्वीपीय और पूर्वोत्तर भारत के शेष हिस्सों के साथ ही पूर्व और मध्य भारत के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ जाएगा। इस दौरान देश के अन्य हिस्सों मे प्री-मानसून बारिश जारी रहेगी। इस तरह आगे बढ़ेगा मानसून मौसम विभाग के अनुसार, 28 मई तक मानसूनी हवा को सही तरीके से साथ आगे बढ़ाने के सिस्टम बन रहे हैं। अरब सागर में कोंकण-गोवा तट पर एक कम दबाव का क्षेत्र बन रह है। वहीं तेलंगाना और मध्य प्रदेश में कम दबाव के बीच चलने वाली दो ट्रफ भी मानसून को आगे बढ़ने में मदद करेगी। पंजाब और असम में चक्रवाती तूफान की स्थिति भी मानसून की मदद करेगी। शनिवार तक अरब सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र उत्तर की ओर बढ़ने लगेगा। आईएमडी के अधिकारियों ने कहा कि इससे मानसूनी हवाएं मजबूत हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के चक्रवात में बदलने की संभावना कम है।

अगर आप अपने आधार विवरण को अपडेट करने में देरी कर रहे हैं, तो 14 जून से पहले मुफ्त में अपडेट करें अपना आधार

नई दिल्ली अगर आप अपने आधार विवरण को अपडेट करने में देरी कर रहे हैं, तो अब समय आ गया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) 14 जून, 2025 तक मुफ्त ऑनलाइन अपडेट की सुविधा दे रहा है। उसके बाद, आपको किसी भी बदलाव के लिए 50 रुपये का मामूली शुल्क देना होगा। आप बिना किसी केंद्र पर जाए, अपने घर बैठे myAadhaar पोर्टल के माध्यम से अपना आधार अपडेट कर सकते हैं – लेकिन केवल चुनिंदा जनसांख्यिकीय विवरणों के लिए। और UIDAI के नियमों के अनुसार, आपको हर 10 साल में अपनी पहचान का प्रमाण (PoI) और पते का प्रमाण (PoA) अपडेट करना होगा। आप मुफ्त में ऑनलाइन क्या अपडेट कर सकते हैं? पोर्टल के माध्यम से, आप बिना किसी शुल्क के निम्नलिखित जानकारी अपडेट कर सकते हैं: नाम (कुछ वर्ण सीमा के भीतर) – जन्म तिथि – पता – लिंग – भाषा वरीयताएँ नोट: बायोमेट्रिक डेटा – जैसे उंगलियों के निशान, आईरिस स्कैन और तस्वीरें आप UIDAI वेबसाइट पर अपना पिन कोड दर्ज करके निकटतम केंद्र का पता लगा सकते हैं।

UPSC CSE प्रारंभिक परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी, प्रारंभिक परीक्षा 25 मई को होगी आयोजित

नई दिल्ली 25 मई, 2025 को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा आयोजित होगी। UPSC CSE प्रारंभिक परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी, पहली पाली सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक होगी। परीक्षा से पहले देख लें ये दिशा-निर्देश     उम्मीदवारों को परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना सुनिश्चित करना होगा अन्यथा उन्हें परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी।     अभ्यर्थियों को अपना एडमिट कार्ड परीक्षा केंद्र पर अवश्य लाना होगा, इसके बिना उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।     अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर अपना वैध पहचान पत्र लाना होगा तथा पहचान पत्र पर दी गई जानकारी प्रवेश पत्र पर दी गई जानकारी से मेल भी खानी चाहिए।     यदि एडमिट कार्ड पर फोटो स्पष्ट नहीं है, तो उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर एक नया पासपोर्ट आकार का फोटो लाना होगा।     यूपीएससी द्वारा सलाह दी जाती है कि अपनी ओएमआर शीट भरने के लिए काला बॉलपॉइंट पेन का उपयोग करें। अपनी परीक्षा शीट भरने के लिए, नीले बॉलपॉइंट पेन का उपयोग किया करना होगा। किन-किन चीजों की नहीं होगी अनुमति?     महंगी वस्तुओं की अनुमति नहीं है।     किसी भी प्रकार का बैग या हैंडबैग ले जाने की अनुमति नहीं है।     परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन ले जाना सख्त मना है।     स्मार्ट वॉच जैसे डिजिटल उपकरणों की अनुमति नहीं है।     नोट्स, किताबें जैसी किसी भी तरह की सामग्री की अनुमति नहीं है। एडमिट कार्ड में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर उम्मीदवारों को तुरंत प्राधिकरण को सूचित करने की सलाह दी जाती है। उम्मीदवार uscsp-upsc@nic.in पर अपनी समस्या ईमेल कर सकते हैं।

एस-400 ने 300 KM से ज्यादा की दूरी पर हवाई लक्ष्य को मार गिराकर सबसे लंबे समय तक मार करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया

नई दिल्ली  यूक्रेन युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों की मीडिया ने रूसी S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को बदनाम करने की हर मुमकिन कोशिश की। उसे नाकाम बताया, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ S-400 ने जैसा कमाल किया है, उसे देखकर पश्चिमी देश परेशान है। भारत के रूसी हथियारों ने जिस तरह से पाकिस्तान को धूल चटाया है, वो पश्चिमी देशों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। एक वजह ये भी है कि पश्चिमी देशों की मीडिया ने पाकिस्तान के समर्थन में उसका भोपूं बन जाने का फैसला किया। एस-400 के पराक्रम के बारे में धीरे धीरे खुलासे होने लगे हैं और यूरेशियन टाइम्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की लंबी दूरी की मिसाइलों के खिलाफ एस-400 सौ फीसदी कामयाब और प्रभावी साबित हुआ है। एस-400 ने पाकिस्तान के कई क्रूज मिसाइलों और विनाशकारी ड्रोन को मार गिराया, जिससे भारत को अपने सैन्य ठिकानों को सुरक्षित रखने में मदद मिली। आपको बता दें कि भारत ने 5.4 अरब डॉलर की लागत से रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के पांच यूनिट खरीदे थे। जिनमें से रूसे ने अभी तक तीन एस-400 की ही डिलीवरी दी है। दो एस-400 की डिलीवरी मिलना अभी बाकी है। रूस से एस-400 खरीदने की वजह से अमेरिका ने CAATSA के तहत प्रतिबंध लगाने की भी धमकी दी थी, लेकिन भारत एस-400 खरीदने के फैसले से पीछे नहीं हटा। S-400 ने कैसे गिराया पाकिस्तानी AWACS एयरक्राफ्ट? यूरेशियन टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारतीय S-400 ने 314 किलोमीटर की दूरी पर किसी हवाई लक्ष्य को भेदकर एक रिकॉर्ड बनाया है। अधिकारी ने कहा कि एस-400 ने 300 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पर हवाई लक्ष्य को मार गिराकर SAM (सरफेस टू एयर मिसाइल) द्वारा सबसे लंबे समय तक मार करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इस दौरान एस-400 ने पाकिस्तान वायु सेना की आंख माने जाने वाले SAAB Erieye-2000 फ्लाइंग रडार, यानि AWACS एयरक्राफ्ट को मार गिराया था। ऐसा करके भारतीय एस-400 ने एक अनोखा रिकॉर्ड बना दिया है। अधिकारी का नाम नहीं छापने की शर्त पर यूरेशियन टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि SAAB Erieye-2000 का ये दूसरा नुकसान था। इससे पहले, पाकिस्तान के एयर मार्शल मसूद अख्तर (सेवानिवृत्त) ने खुलासा किया था, कि 9-10 मई की रात को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल से पाकिस्तान वायु सेना के एक AWACS विमान को मार गिराया था। लेकिन भारतीय अधिकारी ने कहा है कि AWACS को ब्रह्मोस से नहीं, बल्कि एस-400 से मारा गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक किसी भी SAM ने इतनी ज्यादा दूरी से किसी हवाई लक्ष्य को नष्ट नहीं किया है। लेकिन एस-400 ने 314 किलोमीटर से पाकिस्तानी AWACS एयरक्राफ्ट को मार गिराकर पूरी दुनिया में एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। एस-400 की वजह से बाद में पाकिस्तान के फाइटर जेट्स ने उड़ान भरना ही बंद कर दिया था। जिसकी वजह से भारतीय वायुसेना के विमानों ने एक के बाद एक पाकिस्तानी वायुसेना के एयरबेस को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हमले किए थे और भारी नुकसान पहुंचाया था। एस-400 के नये ऑर्डर दे सकता है भारत भारत के पास फिलहाल एस-400 के तीन यूनिट्स हैं। जिनमें से दो को भारत ने पश्चिमी मोर्चे पर जबकि एक को पूर्वी मोर्चे पर तैनात कर रखा है। भारत अभी भी रूस से 2 और यूनिट की डिलीवरी का इंतजार कर रहा है। लेकिन यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस डिलीवरी देने में देरी कर रहा है। इस बीच भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल जल्द ही मॉस्को का दौरा करने वाले हैं। इस दौरान वो रूस से बाकी बचे 2 यूनिट्स की डिलीवरी के अलावा कुछ और एस-400 डिफेंस सिस्टम का भी ऑर्डर दे सकते हैं। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि एस-400 की जगह भारत एस-500 ‘प्रोमेथियस’ को खरीदने का भी फैसला कर सकता है, जिसकी क्षमता धरती के लोअर ऑर्बिट तक मार करने की है। S-500 प्रोमेथियस रूस की अगली पीढ़ी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है। अल्माज़-एंटे ने इसे डेवलप किया है और इसका ऑपरेशनल रेंज 600 किमी तक है। यह हाइपरसोनिक हथियारों, बैलिस्टिक मिसाइलों और यहां तक कि लोअर-ऑर्बिट में स्थिति सैटेलाइट्स को भी मार गिराने की क्षमता रखता है। हालांकि इसकी कीमत काफी ज्यादा होने की संभावना है। रूस ने अभी तक एस-500 की कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इसकी कीमत 4 से 5 अरब डॉलर के बीच होने की संभावना है। एस-500 खरीदकर भारत, चीन और पाकिस्तान के स्टील्थ फाइटर जेट को न्यूट्रल कर सकता है।

महाकाल मंदिर में दान की जांच होगी, स्वर्ण-रजत टेस्टिंग मशीन लगेगी

उज्जैन देश के अन्य बड़े मंदिरों की तरह महाकाल मंदिर (Mahakaleshwar Temple Ujjain) में भी लगभग प्रतिदिन श्रद्धालुओं द्वारा बड़ी संख्या में दान किया जाता है। यह क्रम वर्षभर जारी रहता है। इसी को देखते हुए महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने निर्णय लिया है कि दान में मिलने वाली वस्तुओं का भौतिक सत्यापन मंदिर में ही टंच मशीन लगाकर किया जाएगा। इसके अलावा वर्तमान वाली प्रक्रिया को भी बंद नहीं किया जाएगा। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने लिया निर्णय गत दिनों हुई महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि देश के अन्य बड़े मंदिरों की तरह महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान स्वरूप दी जाने वाली सोने और चांदी की वस्तुओं की शुद्धता की जांच के लिए ‘टंच मशीन’ लगाकर की जाए। इस टंच मशीन की मदद से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जो आभूषण या धातुएं दान की जाती हैं, वे वास्तव में सोना या चांदी हैं या नहीं और उनकी कितनी शुद्धता है। इससे मंदिर प्रशासन को दान की गई वस्तुओं का सही मूल्यांकन करने में आसानी होगी और पारदर्शिता भी बनी रहेगी। 23 साल से बिना मशीन के जांच रहे शुद्धता महाकाल मंदिर में लगभग 23 साल से सोना और चांदी की शुद्धता की जांच करने वाले अशोक जड़िया (सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष) उनका कहना है कि हम लोग अपनी नजरों से देखकर ही बता सकते हैं कि यह शुद्ध है या खोटा है। कोई भी मशीन 100त्न एक्यूरेसी नहीं बता सकती, जबकि इंसान द्वारा जांची गई सोने चांदी की शुद्धता 100त्न मानी जाती है, क्योंकि डॉक्टर का काम एक डॉक्टर ही करेगा, मशीन नहीं। क्या प्रक्रिया है सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं की शुद्धता की जांच कई तरीकों से की जाती है। इनमें से कुछ परंपरागत हैं और कुछ आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों पर आधारित हैं। यह कहना है अशोक जड़िया के पुत्र अतिन जड़िया का, जो महाकालेश्वर मंदिर से आने वाले दान वस्तुओं की जांच करते हैं। उन्होंने कहा- 1. टंच मशीन यह एक सबसे आधुनिक और लोकप्रिय तरीका है। मशीन में वस्तु को रखकर X-Ray की मदद से उसकी धातु संरचना का विश्लेषण किया जाता है। यह जांच कुछ ही सेकंड में हो जाती है और धातु में मौजूद सोना, चांदी, तांबा, जस्ता आदि का प्रतिशत स्क्रीन पर आ जाता है। बिना धातु को नुकसान पहुंचाए जांच संभव होती है। 2. एसिड टेस्ट यह पुराना और सस्ता तरीका है, परन्तु इसमें वस्तु को थोड़ा खरोंचना पड़ता है। धातु पर अलग-अलग एसिड की बूंदें डालकर उसकी प्रतिक्रिया देखी जाती है। रंग बदलने से शुद्धता का अनुमान लगाया जाता है, लेकिन यह तरीका पूरी तरह सटीक नहीं होता। 3. कैरट माप यह पारंपरिक तरीका है, जिसमें काली पत्थर (टच स्टोन) पर आभूषण को रगड़ा जाता है और फिर एसिड से परीक्षण किया जाता है। इससे लगभग अंदाजा लग जाता है कि सोने की कितनी कैरट की शुद्धता है (जैसे 22 कैरट, 18 कैरट आदि)। 4. फायर एस्से यह सबसे विश्वसनीय और शुद्धता वाला परीक्षण होता है, लेकिन प्रक्रिया लंबी और महंगी होती है। इसमें धातु को उच्च तापमान पर पिघलाकर उसके तत्वों को अलग किया जाता है। इसका उपयोग आमतौर पर सरकारी मानक प्रयोगशालाओं में किया जाता है। 5. अल्ट्रासोनिक टेस्ट इसका उपयोग आभूषणों की भीतरी संरचना देखने के लिए किया जाता है ताकि यह पता चले कि अंदर कोई मिलावट या नकलीपन है या नहीं। क्या होगा लाभ नकली या मिलावटी धातु की पहचान दान प्रक्रिया में पारदर्शिता मंदिर संपत्ति का सही लेखा-जोखा अभी अप्रूवल मिला है, जल्द ही टंच मशीन खरीदी जाएगी अधिकतर दुकानों और मंदिरों में XRF आधारित टंच मशीन का ही उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह तेज, सटीक और बिना नुकसान के काम करती है। अभी तो सिर्फ अप्रूवल मिला है, जल्द ही मशीन क्रय की जाएगी, उस मशीन से यह फायदा होगा कि हाथों हाथ वैरिफिकेशन होगा, उसमें तत्काल मालूम होगा कि वस्तु कितनी शुद्ध है। –प्रथम कौशिक, प्रशासक, महाकाल मंदिर

राज्य में ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी को ऐतिहासिक रूप से 99.47 % के उच्चतम स्तर तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त हुई

प्रदेश में पारेषण उपलब्धता का नया कीर्तिमान 98 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले हासिल किया 99.47 प्रतिशत मध्यप्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग पारेषण उपलब्धता बढ़कर 99.47 प्रतिशत तक हो गई राज्य में ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी को ऐतिहासिक रूप से  99.47 % के उच्चतम स्तर तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त हुई भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के विद्युत क्षेत्र में ट्रांसमिशन नेटवर्क (पारेषण प्रणाली) की अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तारीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इसके फलस्वरूप राज्य में पारेषण उपलब्धता (ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी) को ऐतिहासिक रूप से  99.47 प्रतिशत के उच्चतम स्तर तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त हुई है। ऊर्जा मंत्री तोमर ने जानकारी दी है कि मध्यप्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2024-25 के लिये निर्धारित 98 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले इस वित्तीय वर्ष में पारेषण उपलब्धता (ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी) बढ़कर 99.47 प्रतिशत तक हो गई है।  वर्ष 2023-24 में पारेषण उपलब्धता (ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी) 99.42 प्रतिशत के मुकाबले यह उल्लेखनीय सुधार है, जो राज्य विद्युत कंपनियों की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रदेश के विद्युत क्षेत्र की यह सफलता राज्य के लिए गर्व की बात है, इस उपलब्धि के लिये उन्होंने विद्युत कार्मिकों को बधाई दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह उपलब्धि न केवल मध्यप्रदेश में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगी, बल्कि उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी सहायक सिद्ध होगी। विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता होगी बेहतर तोमर ने  कहा है कि एम.पी. ट्रांसको द्वारा किए गए नवाचारों, उन्नत तकनीकी समाधानों जैसे स्काडा प्रणाली, विद्युत ग्रिडों की निगरानी और समय-समय पर रख-रखाव के चलते यह सफलता संभव हो पाई है। कंपनी द्वारा विद्युत नेटवर्क के आधुनिकीकरण और क्षमतावर्धन की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पारेषण उपलब्धता अधिक होने के फायदे किसी भी ट्रांसमिशन सिस्टम में ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी (पारेषण उपलब्धता) अधिकतम होने से विद्युत आपूर्ति में बाधाएँ कम होती हैं, जिससे उपभोक्ताओं को निरंतर बिजली मिलती है। इससे औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि होती है और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है। यह प्रणाली की विश्वसनीयता और दक्षता को भी सुनिश्चित करता है। साथ ही आपात स्थितियों में शीघ्र बिजली आपूर्ति संभव होती है।  

अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले सेवा प्रदाताओं और टट्टुओं के पंजीकरण में तेजी

जम्मू/श्रीनगर   वार्षिक श्री अमरनाथ जी यात्रा-2025 के निर्बाध और शांतिपूर्ण संचालन के लिए उन्नत ढांचा स्थापित करने के लिए मंडलायुक्त कश्मीर विजय कुमार बिधूड़ी ने अधिकारियों की एक बैठक बुलाई, जिसमें आधार शिविरों और पवित्र गुफा के रास्ते में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंडलायुक्त ने अधिकारियों को आवश्यक विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से निष्पादित करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर उन्हें पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने मौसम संबंधी आपात स्थितियों का सामना करने के लिए आधार शिविरों की क्षमता बढ़ाने का भी आह्वान किया। साथ ही, मंडलायुक्त ने श्रम और पशुपालन विभागों से यात्रा शुरू होने से पहले लक्ष्य को पूरा करने के लिए सेवा प्रदाताओं और टट्टुओं के पंजीकरण में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने यात्रियों को सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी देने के लिए प्रमुख स्थानों पर साइनेज लगाने के लिए भी कहा। विभिन्न स्थानों पर यात्रियों के पंजीकरण के संबंध में मंडलायुक्त ने अन्य स्थानों के अलावा नौगाम और अनंतनाग रेलवे स्टेशनों पर आर.एफ.आई.डी. काऊंटर स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने बी.आर.ओ. को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पवित्र गुफा तक जाने वाले मार्ग गड्ढों से मुक्त हों। बैठक के दौरान श्रीनगर, अनंतनाग, बड़गाम, गांदरबल और बांदीपोरा के उपायुक्तों के अलावा के.पी.डी.सी.एल., एफ.सी.एस. एंड सी.ए., पी.एच.ई., आर. एंड बी., एस.एम.सी., स्वास्थ्य, पर्यटन, सोनमर्ग विकास प्राधिकरण, पहलगाम विकास प्राधिकरण सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने श्री अमरनाथ जी यात्रा-2025 के तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए चल रहे कार्यों और योजनाओं के बारे में बैठक में जानकारी दी।

प्रदेश में संविदा कर्मचारियों, अधिकारियों के तबादलोें की प्रक्रिया को स्थान परिवर्तन का नाम दिया

भोपाल मध्यप्रदेश में ट्रांसफर पर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य के संविदाकर्मियों को भी अब हटाकर इधर से उधर किया जा सकेगा। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। संविदा कर्मचारियों, अधिकारियों को नई जगह पर पदस्थापना के लिए वर्तमान स्थल पर पदस्थापना का अनुबंध समाप्त कर नई पदस्थापना का अनुबंध करना होगा। हालांकि नई पदस्थापना के लिए उन्हें भत्ता और छुट्‌टी का लाभ नहीं मिलेगा। विभाग ने संविदा कर्मचारियों, अधिकारियों के तबादलोें की इस प्रक्रिया को स्थान परिवर्तन का नाम दिया है। जिले में कार्यरत संविदा कर्मचारियों में से केवल 10 प्रतिशत को ही स्थान परिवर्तित किया जा सकेगा। एमपी में कर्मचारियों, अधिकारियों के तबादलों के लिए ​30 मई तक का समय नियत है। राज्य के नियमित कर्मचारियों, अधिकारियों के जैसे ही संविदा कर्मचारियों के लिए भी नई तबादला प्रक्रिया लागू की गई है। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए प्रावधान जारी किए हैं। अभी तक इनके तबादलों के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई थी। संविदा कर्मचारियों के तबादलों के प्रावधान नई जगह पर पदस्थापना के लिए पुराना अनुबंध निरस्त करना होगा। नई पदस्थापनास्थल पर नियोक्ता नया कार्य सौंपेगा। स्थान परिवर्तन होने पर पांच साल तक वहीं रहना होगा। नए पदस्थापना स्थल के लिए यात्रा भत्ता या छुट्‌टी का लाभ नहीं मिलेगा। आदेश जारी होने के दो सप्ताह में संविदाकर्मी को कार्यमुक्त करना होगा। नगर निगम कमिश्नर ने लिया बड़ा एक्शन, शुरू की बदलाव की तैयारी…  नगर निगम में वार्ड कर्मचारियों का रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होने और टैक्स कलेक्शन में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद कमिश्नर ने अब नगर निगम में अंगद की तरह जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। जोनल अधिकारियों को बदलने के बाद अब इंजीनियर और बाबुओं की लिस्ट तैयार की गई है जिन्हें एक ही विभाग में नौकरी करते कई वर्ष बीत चुके हैं। सूची में कई अधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने वर्ष 2003 में नगर निगम में नौकरी मिलने के बाद एक ही विभाग में पूरी सर्विस निकाल दी। अधिकारी इसलिए सुनवाई नहीं करते नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने नगर परिषद की बैठक में आरोप लगाया था कि नगर निगम में पिछले कई सालों से एक ही विभाग में इंजीनियर अधिकारी और कर्मचारी जमे हुए हैं। भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है और जनप्रतिनिधियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। 10 से 25 साल तक नौकरी करने वालों पर गाज इंजीनियर लालजी चौहान ने वर्ष 2010 से अब तक बिल्डिंग परमिशन सेल में ही पूरी नौकरी की। एई महेश सिरोहिया ने 22 साल, राजाराम अहिरवार ने वर्ष 2003 से अब तक, नंदकिशोर डेहरिया ने भी 2003 से अब तक एवं डीके सिंह राजधानी परियोजना प्रशासन से प्रतिनियुक्ति पर आकर वर्ष 2018 से अब तक एक ही विभाग में जमे हैं। इसी प्रकार सब इंजीनियर गोपी लाल चौधरी 22 साल से, अंकित शाक्य, अमित दुबे, श्रीपदा दीक्षित ने 2018 में नौकरी ज्वाइन करने के बाद भवन अनुज्ञा से संबंधित काम संभाले हुए हैं। एक ही विभाग में जमे बाबुओं में सुनील जैन 30 साल, राकेश लहरिया 30 साल, मोहमद साबिर 20 साल, तपेंद्र सिंह 10 साल, रामचरण मालवीय 15 साल, सरिता बर्वे 22 साल, साधु प्रसाद खंडित 22 साल, सिद्दीकी हसन को 25 वर्ष का समय एक ही विभाग में हो चुका है। अब होगा बदलाव जोनल अफसरों के प्रभारों में परिवर्तन किया गया है। एक ही विभाग में बरसों से जमे अन्य स्टाफ भी बदला जाएगा। –हरेंद्र नारायण, निगमायुक्त

4 राशि वालों की किस्मत को शनि जयंती से लगेंगे पंख, शुरू होंगे अच्छे दिन-बढ़ेगा बैंक बैलेंस

इस बार शनि जयंती का पर्व 27 मई, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन कईं शुभ योग भी बनेंगे जिसके चलते 4 राशि वालों की किस्मत चमक सकती है। इन्हें धन लाभ के साथ दूसरे फायदे भी होंगे। शनि जयंती 2025 पर किसका होगा भाग्योदय?  धर्म ग्रंथों के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 27 मई, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुकर्मा नाम का शुभ योग दिन भर रहेगा। साथ ही इस दिन ज्येष्ठ मास का तीसरा मंगल भी रहेगा, जिसके चलते इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन से 4 राशि वालों की किस्मत चमक सकती है और अच्छे दिन भी शुरू होंगे। आगे जानिए कौन-सी हैं ये 4 राशियां… वृषभ राशिफल शनि जयंती 2025 इस राशि के स्वामी शुक्र हैं, जो शनि के मित्र हैं। इस राशि के लोगों के जीवन में अचानक खुशियों का आगमन होगा। जिस काम के लिए लंबे समय से इंतजार था वो हो सकता है। पहले किए गए इन्वेस्टमेंट का लाभ भी इस समय मिल सकता है। लव लाइफ से जुड़े मामलों में सफलता मिलेगी। बैंक बैलेंस में अचानक वृद्धि हो सकती है। कन्या राशिफल शनि जयंती 2025 इस राशि के स्वामी बुध हैं। ये भी शनि के मित्र हैं। इस राशि वालों पर शनि की कृपा बनी रहती है। शनि जयंती से इस राशि के लोगों के अच्छे दिन शुरू हो सकते हैं। नौकरी-बिजनेस में लाभ की स्थिति बनेगी। पुश्तैनी संपत्ति से धन लाभ संभव है। राजनीति से जुड़े लोगों को बड़ा पद मिल सकता है। संतान से सुख मिलेगा। मकर राशिफल शनि जयंती 2025 इस राशि के स्वामी स्वयं शनिदेव हैं। कुछ दिनों पहले ही मकर राशि पर से शनि की साढ़ेसाती खत्म हुई है जिसके चलते इस राशि के लोगों की लाइफ बहुत ही खुशहाल रहेगी। प्रॉपर्टी से धन लाभ होगा। नया काम शुरू करने के लिए समय बहुत ही शुभ है। परिवार में कोई शुभ प्रसंग जैसे विवाह, सगाई आदि हो सकती है। सेहत से जुड़ी परेशानी दूर होगी। कुंभ राशिफल शनि जयंती 2025 इस राशि के स्वामी भी चंद्रदेव हैं। इस राशि पर अभी शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है जो शुभ फल देने वाला है। स्टूडेंट्स के लिए समय अनुकूल फल देने वाला रहेगा। अविवाहितों का विवाह तय हो सकता है। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। अतिरिक्त आय होने के योग भी बन रहे हैं। शेयर बाजार से जुड़े लोगों को लाभ होगा।

ग्वालियर से भोपाल के बीच यात्रा करने वाले के लिए अच्छी खबर, अब दिन में भोपाल आएंगे शाम को वापस ग्वालियर लौट सकेंगे, जाने कैसे

भोपाल ग्वालियर से भोपाल के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है. अब वो जिस दिन भोपाल आएंगे, उसी दिन वापस ग्वालियर भी लौट सकेंगे. रेलवे प्रशासन ने यह निर्णय भोपाल-ग्वालियर के बीच यात्रियों के दबाव को कम करने और लंबे समय से की जा रही मांग के बाद लिया है. अब सप्ताह में प्रतिदिन ट्रेन की सुविधा मिलने से ग्वालियर और भोपाल के बीच आवागमन और भी सुगम होगा. इसका सबसे अधिक फायदा प्रतिदिन अप डाउन करने वालों को होगा. अब प्रतिदिन मिलेगी भोपाल इंटरसिटी की सुविधा मंडल रेल प्रबंधक देवाशीष त्रिपाठी ने बताया कि “भोपाल मंडल द्वारा यात्रियों की सुविधा और मांग को ध्यान में रखते हुए ट्रेन सेवाओं में लगातार सुधार किया जा रहा है. इसी क्रम में रेल प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ट्रेन संख्या 12197/12198 ग्वालियर-भोपाल-ग्वालियर एक्सप्रेस (भोपाल इंटरसिटी) की सेवा को 5 दिन से बढ़ाकर प्रतिदिन कर दिया गया है.” बुधवार और रविवार को नहीं चलती थी ट्रेन वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि “यह गाड़ी अभी तक सप्ताह में 5 दिन (बुधवार और रविवार को छोड़कर) संचालित होती थी. अब यह गाड़ी दिनांक 26 मई 2025 से ग्वालियर और भोपाल दोनों दिशाओं से प्रतिदिन चलाई जाएगी. इस निर्णय से न केवल यात्रियों को अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे, बल्कि इन दोनों शहरों के बीच आवागमन और अधिक सुगम होगा.” इन स्टेशनों पर होगा भोपाल इंटरसिटी का स्टाप भोपाल इंटरसिटी दोनों दिशाओ में ग्वालियर जंक्शन, मोहना, शिवपुरी, कोलारस, बदरवास, गुना, शाढोरा गांव, अशोकनगर, पिपराइगांव, मुंगावली, बीना जंक्शन, गंज बासौदा, विदिशा, भोपाल जंक्शन पर ठहराव लेती है. इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. अभी यह ट्रेन (12198) ग्वालियर जंक्शन से सुबह 6:20 बजे चलती है और दोपहर 2:35 बजे भोपाल जंक्शन पहुंचती है. भोपाल से ग्वालियर जाने वाली इंटरसिटी ट्रेन 12197, भोपाल जंक्शन से दोपहर 3:15 से चलती है और ग्वालियर जंक्शन पर देर रात 11:58 बजे पहुंचती है. सिंधिया ने की थी मांग, रेलवे ने किया खंडन बता दें कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवपुरी-ग्वालियर-भोपाल सुपरफास्ट एक्सप्रेस को सातों दिन चलाने की मांग थी. जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने यह ट्रेन प्रतिदिन चलाने का निर्णय लिया है. इसको लेकर सिंधिया के कार्यालय से 22 मई को प्रेस नोट भी जारी किया गया था. हालांकि 23 मई को रेलवे ने अधिकारिक प्रेस नोट जारी कर बताया कि भोपाल रेल मंडल के यात्रियों की सुविधा और मांग को देखते हुए भोपाल -ग्वालियर इंटरसिटी को प्रतिदिन चलाने का निर्णय लिया गया है.

देश का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन अहमदाबाद में बनकर तैयार, 2029 से दौड़ेगी ट्रेन…

 अहमदाबाद  भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अब नई ऊँचाइयों पर पहुंच चुकी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 300 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट लगभग पूरा हो चुका है, जिससे यह प्रोजेक्ट अपनी मंजिल के और करीब आ गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और गुजरात के राज्य परिवहन मंत्री ने हाल ही में इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी फोटो और वीडियो के साथ साझा की है। यह बुलेट ट्रेन का पहला स्टेशन गुजरात के सूरत शहर में बनाया गया है। बुलेट ट्रेन के लिए 300 किलोमीटर का मजबूत वायाडक्ट तैयार मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन का मार्ग करीब 500 किलोमीटर का होगा। अब तक इस मार्ग पर 300 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट तैयार हो चुका है। वायाडक्ट एक ऊँचा पुल जैसा ढांचा होता है जो ट्रेन को सड़क, नदियों और अन्य बाधाओं के ऊपर से गुज़रने में मदद करता है। इस 300 किलोमीटर में से 257.4 किलोमीटर का निर्माण फुल स्पैन लॉचिंग तकनीक से किया गया है, जो एक आधुनिक और तेज़ तरीका है। यह तकनीक पारंपरिक तरीकों की तुलना में 10 गुना तेजी से काम करती है। इस विधि से गर्डर (लंबे लोहे या कंक्रीट के टुकड़े) को सीधे उसके स्थान पर स्थापित किया जाता है। हर एक गर्डर लगभग 970 टन वजन का होता है। इस वजह से काम तेजी से पूरा हो पा रहा है। अब तक का काम कितना हुआ पूरा? इस बड़े प्रोजेक्ट में अब तक:     383 किलोमीटर पियर्स (उठाए गए खंभे)     401 किलोमीटर फाउंडेशन (नींव)     326 किलोमीटर गर्डर कास्टिंग (गर्डर बनाने का काम) पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा कई नदी पुल, स्टील और पीएससी ब्रिज, और स्टेशन बिल्डिंग भी बनाए जा चुके हैं। इस बुलेट ट्रेन के रास्ते में कुल 12 स्टेशन बन रहे हैं, जिनमें से सूरत में देश का पहला बुलेट ट्रेन स्टेशन लगभग तैयार है। जापान दो बुलेट ट्रेन गिफ्ट करेगा बीते महीने खबर आई कि जापान भारत को दो शिंकानसेन ट्रेन E5 और E3 गिफ्ट करेगा. जापान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इनकी डिलीवरी 2026 की शुरुआत में हो सकती है. जापान इस वक्त शिंकानसेन की E10 सीरीज पर काम कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, जापान और भारत 2030 की शुरूआत में एक साथ E10 सीरीज की ट्रेन भी पटरी पर उतारने की योजना बना रहे हैं. भारत में इस प्रोजेक्ट का जिम्मा भारतीय रेलवे की सहायक कंपनी ‘नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन (NHSRC) को दिया गया है. गुजरात में बिछा दिया गया ट्रैक बेड गुजरात के लगभग 157 किलोमीटर हिस्से में ट्रेन के लिए ट्रैक बेड (रेल पटरी के नीचे की सतह) बिछा दिया गया है। ये एक बड़ा संकेत है कि ट्रेन के ट्रायल रन की तैयारी हो रही है। उम्मीद है कि अगले साल यानी 2026 में ट्रायल रन शुरू हो सकता है। 2029 तक ट्रेन शुरू होने की उम्मीद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि पूरी बुलेट ट्रेन सेवा 2029 तक शुरू हो जाएगी। इसके बाद मुंबई से अहमदाबाद तक की यात्रा केवल 2 से 3 घंटे में पूरी हो सकेगी, जो अभी कई घंटों तक लगती है। यह भारत की यात्रा की दुनिया में एक बड़ी क्रांति होगी। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए जरूरी उपकरण और मशीनरी भारत में ही बनाए जा रहे हैं। लॉन्चिंग गैंट्री, ब्रिज गैंट्री, और गर्डर ट्रांसपोर्टर्स जैसे भारी मशीनें देश में ही निर्मित की जा रही हैं। इससे भारत की आत्मनिर्भरता और टेक्नोलॉजी में भी मजबूती आई है। बुलेट ट्रेन के वायाडक्ट के दोनों ओर कुल 3 लाख से ज्यादा नॉइज़ बैरियर लगाए जा रहे हैं। ये बैरियर ट्रेन के तेज आवाज को कम करते हैं जिससे आसपास के इलाके शांति से रह सकें। महाराष्ट्र और गुजरात दोनों में बुलेट ट्रेन के लिए विशेष डिपो भी बन रहे हैं जहां ट्रेन का रखरखाव और मरम्मत होगी। इसके अलावा जापान से शिंकासेन ट्रेन के कोच आने की उम्मीद है। अगर सब ठीक रहा तो अगस्त 2026 तक सूरत से बिलीमोरा के बीच ट्रेन चलाने की योजना है। क्या खास है फुल स्पैन लॉचिंग तकनीक? फुल स्पैन लॉचिंग तकनीक एक ऐसी नई विधि है जिससे पुल के गर्डर को बड़े पैमाने पर और तेज़ी से स्थापित किया जा सकता है। इस तकनीक से निर्माण की गति बढ़ जाती है, जिससे समय और लागत दोनों बचती हैं। भारत में पहली बार इस तकनीक का इतना बड़ा उपयोग किया जा रहा है।

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