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सुनील शेट्टी ने ‘फादर्स डे’ पर अपने ‘पहले हीरो’ को किया याद

मुंबई,  ‘फादर्स डे’ के अवसर पर, सुनील शेट्टी ने अपने दिवंगत पिता वीरप्पा शेट्टी को याद किया। अभिनेता ने उन्हें ‘पहले हीरो’ का टैग दिया। दिल की बात बेहद कम शब्दों में लिखी। अभिनेता सुनील शेट्टी ने बचपन की एक तस्वीर शेयर करते हुए, कैप्शन में लिखा, “कोई बड़ी पोस्ट नहीं। कोई दिखावटी शब्द नहीं। बस दिल से धन्यवाद कहना चाहूंगा उस इंसान को जिसने कभी बदले में कुछ नहीं मांगा। हैप्पी फादर्स डे, मेरे पहले हीरो।” पिता को याद करते हुए अभिनेता ने अपने बचपन की एक प्यारी सी झलक दिखाई। बचपन की तस्वीर में अभिनेता अपने पिता की गोद में बैठे नजर आ रहे हैं। सुनील शेट्टी के पिता वीरप्पा शेट्टी का 28 फरवरी, 2017 को निधन हो गया था। 93 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। अभिनेता के पिता को 2013 में स्ट्रोक पड़ा था। ‘हेरा फेरी’ अभिनेता अक्सर पिता को याद कर भावुक होते हैं। उन्होंने एक बार अपने पिता वीरप्पा के बारे में बात करते हुए कहा था कि उनके “असली हीरो” वही हैं। सुनील ने याद किया कि कैसे उनके पिता ने बहुत कम उम्र में काम करना शुरू किया और लगन से जीवन को संवारा। पिता के शुरुआती संघर्ष को याद करते हुए बताया था कि कैसे उन्होंने एक रेस्टोरेंट में वेटर की नौकरी की और जूठी प्लेट्स को धोने का काम किया। उन्हें यह भी याद है कि कैसे उनके पिता सरसों के बोरे पर सोते थे और दूसरे बोरे को तकिए की तरह इस्तेमाल किया करते थे। अथिया शेट्टी ने भी इंस्टाग्राम स्टोरी सेक्शन में सुनील शेट्टी की फोटो लगाकर ‘फादर्स डे’ की शुभकामनाएं दीं। अथिया ने सलमान खान के प्रोडक्शन से फिल्म ‘हीरो’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। उसके बाद अभिनेत्री ने फिल्म ‘मुबारकां’ और ‘मोतीचूर चकनाचूर’ जैसी फिल्मों में काम किया। उन्होंने क्रिकेटर केएल राहुल से शादी की। इसी साल अथिया ने एक बेटी को जन्म दिया है। इसके बाद उन्होंने फिल्मी करियर पर विराम लगाने का निर्णय लिया। इस बात की जानकारी भी उनके ‘पापा’ सुनील शेट्टी ने एक इंटरव्यू के दौरान दी थी।  

विधानसभा क्षेत्र बेलसंड लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के तहत आता है, RJD और JDU में होगी कड़ी टक्कर

पटना  बिहार के दो सौ 43 विधानसभा सीटों में से एक बेलसंड विधानसभा सीट भी है…सीतामढ़ी जिले में स्थित यह विधानसभा क्षेत्र बेलसंड लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के तहत आता है। इस सीट पर 1957 और 1962 में हुए चुनाव में पीएसपी के रामानंद सिंह को जीत मिली थी। 1967 में कांग्रेस कैंडिडेट सी.पी सिंह विधायक चुने गए थे। 1969 में यह सीट फिर पीएसपी के खाते में गई और रामानंद सिंह एक बार फिर से विधायक बने। 1972 में कांग्रेस कैंडिडेट राम सूरत सिंह को जीत हासिल हुई थी। 1977 और 1980 में जनता पार्टी के टिकट पर रघुवंश प्रसाद सिंह विधायक चुने गए थे। 1985 के चुनाव में भी एलकेडी कैंडिडेट रघुवंश प्रसाद सिंह को ही जीत मिली थी। इसके बाद 1990 में कांग्रेस की टिकट पर दिग्विजय प्रताप सिंह बेलसंड के विधायक बने थे। 1995 में जनता दल के नेता रघुवंश प्रसाद सिंह को फिर से जीत हासिल हुई थी। 1996 में इस सीट पर समता पार्टी के वृषण पटेल विधायक चुने गए थे। वहीं 2000 में हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार राम स्वार्थ राय विधायक बने थे। 2005 के फरवरी महीने में हुए चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी की टिकट पर सुनीता सिंह को जीत हासिल हुई थी। 2005 के अक्टूबर महीने में राष्ट्रीय जनता दल के संजय कुमार गुप्ता ने बाजी पलट दी थी। 2010 और 2015 में दोनों बार इस सीट पर जेडीयू कैंडिडेट सुनीता सिंह चौहान विधायक चुनी गईं थीं, लेकिन 2020 के चुनाव में आरजेडी लीडर संजय कुमार गुप्ता ने जेडीयू को शिकस्त दे दिया था। इस बार भी यहां आरजेडी और जेडीयू उम्मीदवारों में कड़ी टक्कर होगी। वहीं 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी कैंडिडेट संजय कुमार गुप्ता ने जीत हासिल की थी। संजय कुमार गुप्ता 50 हजार एक वोट लाकर पहले स्थान पर रहे थे। वहीं जेडीयू उम्मीदवार सुनीता सिंह चौहान 36 हजार 70 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहीं थीं तो आरएलएसपी कैंडिडेट ठाकुर धर्मेंद्र सिंह 19 हजार 34 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। 2015 के विधानसभा चुनाव में बेलसंड सीट पर जेडीयू उम्मीदवार सुनीता सिंह चौहान ने जीत हासिल की थी। सुनीता सिंह चौहान ने लोजपा कैंडिडेट मोहम्मद नासिर अहमद को 5 हजार पांच सौ 75 वोटों से हराया था। सुनीता सिंह चौहान को कुल 33 हजार सात सौ 85 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे मोहम्मद नासिर अहमद को कुल 28 हजार दो सौ दस वोट मिले थे तो वहीं तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय कैंडिडेट बैद्यनाथ प्रसाद को कुल 11 हजार तीन सौ 66 वोट मिले थे। वहीं 2010 में बेलसंड सीट पर जेडीयू कैंडिडेट सुनीता सिंह ने आरजेडी को शिकस्त दे दिया था। सुनीता सिंह ने आरजेडी कैंडिडेट संजय कुमार गुप्ता को 19 हजार पांच सौ 80 वोटों से हराया था। सुनीता सिंह को कुल 38 हजार एक सौ 39 वोट मिले थे। जबकि दूसरे नंबर पर रहे संजय कुमार गुप्ता को कुल 18 हजार पांच सौ 59 वोट मिले थे तो वहीं तीसरे स्थान पर रहे कांग्रेस कैंडिडेट ताहिर अनीस खान को कुल 13 हजार नौ सौ 96 वोट मिले थे। बेलसंड विधानसभा सीट के चुनावी नतीजों को तय करने में यादव,राजपूत,वैश्य और मुस्लिमों की अहम भूमिका है। 2020 में जेडीयू कैंडिडेट को हराने में आरएलएसपी कैंडिडेट की बड़ी भूमिका थी, लेकिन इस बार उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए में शामिल होने से बेलसंड सीट पर जेडीयू उम्मीदवार को थोड़ा फायदा जरूर मिलेगा।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने वरिष्ठ पत्रकार जगदीप सिंह बैस के निधन पर व्यक्त किया शोक

भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने वरिष्ठ पत्रकार “नया इंडिया” भोपाल के संपादक श्री जगदीप सिंह बैस के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने दिवंगत आत्मा को शांति और परिजन को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।  

मौसमी बुखार जरा संभलकर

बदलते मौसम में वायरल फीवर होना आम बात है। मौसम बदलने और तापमान के उतार-चढाव के कारण हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर हो जाता है और वायरस से शरीर संक्रमित हो उठता है। आमतौर पर लोग वायरल फीवर को आम बुखार समझ कर घर में पडी कोई भी दवा खा लेते हैं लेकिन इसे ज्यादा दिनों तक नजरअंदाज कर देने से गंभीर परेशानियां भी हो सकती हैं। गले में दर्द या खराश, शरीर में टूटन और खांसी का रह-रह कर आना वायरल फीवर के शुरुआती लक्षण हैं। इन लक्षणों को इग्नोर करने पर इसके वायरस पनपने लगते हैं। इसके बाद सप्ताह भर तक शरीर बुखार की चपेट में घिरा रहता है वायरल फीवर के लक्षण… 1. गले में दर्द होना 2. बदन दर्द या मसल्स पेन 3. खांसी आना 4. सिरदर्द या त्वचा में रैशेज होना 5. सर्दी-गर्मी लगना 6. आंखों में जलन 7. थकान महसूस होना 8. तेज बुखार। आम फीवर से अलग:- वायरस शरीर पर हमला करता है तो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता उस वायरस को खत्म करने की कोशिश करती है। संक्रमित व्यक्ति के छींकने और खांसने से हवा में फैलने वाले वायरस के संपर्क में आने से दूसरा व्यक्ति भी इसकी चपेट में आ जाता है। ऐसे कई तरह के वायरल फीवर होते हैं, जिनमें प्रमुख हैं डेंगू, चिकनगुनिया और मच्छरों के काटने से होने वाले कई तरह के बुखार आदि। क्या है इसका इलाज:- वायरल होने पर शरीर में थकान का एहसास होता है और बहुत कमजोरी महसूस होती है। तेज बुखार होने पर पैरासिटामोल जैसी दवा ही लेनी चाहिए। बुखार के दौरान गला काफी सूखता है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए और खूब पानी पीना चाहिए। गले में खराश या दर्द हो तो गर्म पानी में नमक डाल कर उससे गरारा करें। सुबह-शाम ऐसा करने पर राहत महसूस होगी। जितना हो सके, आराम करें। इसके अलावा दिन भर हलका गुनगुना पानी पीते रहें। ध्यान रखें कि इस दौरान किसी भी एंटीबायोटिक दवा का सेवन न करें क्योंकि एंटीबायोटिक लेने से बुखार पर इसका असर नहीं होता, बल्कि शरीर में थकान और कमजोरी का एहसास ज्यादा होने लगता है। तीन दिन से अधिक बुखार रहे तो अपने नजदीकी चिकित्सक से जांच कराएं। बरतें सावधानी… -विटमिन सी का सेवन अधिक करें। यह हमारे इम्यून सिस्टम को सही रखता है। -हलका खाना ही खाएं -पत्तेदार सब्जियां, फूलगोभी और अरबी न खाएं -हल्दी, अजवाइन, अदरक और हींग का अधिक सेवन करें -ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी पिएं -रेस्ट करें और बासी खाना न खाएं -गर्म पानी की भाप लें -छींकते वक्त मुंह पर रूमाल बांधें -घर पर इलाज न करें, तुरंत चिकित्सक को दिखाएं  

करण जौहर ने पिता को किया याद, लिखा ‘पापा ने जिंदगी और सिनेमा दोनों का सबक सिखाया’

मुंबई,  फादर्स डे के मौके पर फिल्म निर्माता करण जौहर ने अपने पिता यश जौहर को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट शेयर किया। ये पोस्ट बताती है कि पिता-पुत्र का रिश्ता बेहद खास था। करण ने अपने पिता की एक पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर शेयर की, जिसमें वह अपने पिता यश जौहर के पास बैठे हुए नजर आ रहे हैं। यह फोटो किसी फिल्म की शूटिंग के दौरान ली गई प्रतीत होती है। इस पोस्ट में करण ने बताया कि पिता यश जौहर ने उन्हें जो जिंदगी से जुड़े सबक सिखाए, वह सिर्फ फिल्में बनाने तक सीमित नहीं थे, बल्कि असल जिंदगी को समझने और जीने में भी मददगार थे। यही नहीं, उन्होंने गहराई से महसूस करने की ताकत भी दी और उन भावनाओं को फिल्मों के जरिए दिखाने की हिम्मत भी दी। करण जौहर ने याद किया कि उनके पिता यश जौहर ने दिल से फिल्में बनाई थीं और उससे भी ज्यादा अर्थपूर्ण जिंदगी जी थी। उन्होंने कहा कि एक अच्छी कहानी तभी बनती है जब दिल साफ और भावनाओं से भरा हो। करण जौहर ने अपने पोस्ट में लिखा, “उन्होंने दिलोजान से फिल्में बनाई और दूसरों के दिलों को छूने के लिए बनाई… उन्होंने अपनी जिंदगी को सच्चाई और भावनाओं से जिया। उन्होंने मुझे सिखाया कि एक अच्छी कहानी वहीं से शुरू होती है जहां आपका दिल सच्चा होता है। धन्यवाद पापा, आपने मुझे गहराई से महसूस करने की ताकत दी और उन भावनाओं को फिल्मों के जरिए दिखाने की हिम्मत भी दी। हैप्पी फादर्स डे पापा।” उनकी इस पोस्ट को सोनाली बिंद्रे, आयशा श्रॉफ, महीप कपूर, फराह खान जैसी हस्तियों ने लाइक किया और कमेंट में हार्ट इमोजी भेजे। यश जौहर एक जाने-माने फिल्म निर्माता थे, जो शानदार फिल्मों और भारतीय मूल्यों को दिखाने के लिए मशहूर थे। उन्होंने धर्मा प्रोडक्शंस शुरू किया था। 26 जून 2004 को उनका कैंसर के चलते निधन हो गया।  

स्कूल शिक्षा में संस्कृत और संस्कृति का उदय

भोपाल प्रदेश में स्कूल शिक्षा में नई शिक्षा नीति वर्ष 2020 में संस्कृत के व्यापक प्रसार की अनुशंसा की गई है। इसके अनुरूप मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड एवं महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान ने 53 चयनित एजुकेशन फॉर ऑल (ईएफए) विद्यालय में कक्षा एक के पूर्व एलकेजी एवं यूकेजी के स्थान पर अरूण एवं उदय कक्षाएं प्रारंभ की हैं। इन कक्षाओं का माध्यम संस्कृत किया गया है। संस्कृत भाषा एक बीज भाषा है, जो सभी भाषाओं की जननी है। जो विद्यार्थी प्रारंभ से संस्कृत बोलते हैं, वह बाद के वर्षों में विश्व की किसी भी भाषा को बोलने की क्षमता रखते हैं। बच्चों के मस्तिष्क के उचित विकास और शारीरिक वृद्धि को सुनिश्चित करने के लिये उसके आरंभिक 6 वर्षों को महत्वपूर्ण माना गया है। 

फिल्म ‘कंतारा-1’ की शूटिंग के दौरान नाव पलटी, अभिनेता ऋषभ शेट्टी और 30 अन्य लोग बाल-बाल बचे

शिवमोगा/कर्नाटक  कन्नड़ फिल्म ”कंतारा : चैप्टर 1” की शूटिंग के दौरान एक नाव जलाशय में पलट गई, हालांकि अभिनेता-निर्देशक ऋषभ शेट्टी और फिल्म निर्माण में शामिल 30 अन्य लोग बाल-बाल बच गए। पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि यह घटना शिवमोगा जिले के मस्ती कट्टे क्षेत्र में मणि जलाशय में फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई। यह दुर्घटना जलाशय के उथले क्षेत्र में हुई, जिससे संभावित त्रासदी टल गई। हालांकि, माना जा रहा है कि कैमरे और अन्य शूटिंग उपकरण पानी में डूब गए हैं। नुकसान का आकलन किया जाना अभी बाकी है। मौके पर पहुंची तीर्थहल्ली पुलिस के अनुसार, नाव पर सवार लोग बाल-बाल बच गए। पुलिस मामले की जांच कर रही है।  

ईरान में रह रहे भारतीयों के लिए जारी परामर्श, देश में व्याप्त स्थिति के मद्देनजर तेहरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें

ईरान ईरान में रह रहे भारतीयों के लिए रविवार को जारी परामर्श में कहा गया है कि वे घबराएं नहीं, सावधानी बरतें और इजराइल द्वारा हमले के बाद देश में व्याप्त स्थिति के मद्देनजर तेहरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें। भारतीय दूतावास द्वारा जारी परामर्श में सभी भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के व्यक्तियों से सतर्क रहने, सभी अनावश्यक गतिविधियों से बचने, दूतावास के सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर रखने और स्थानीय अधिकारियों की ओर से दी गई सलाह के अनुसार सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा गया है। दूतावास ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर एक गूगल फॉर्म उपलब्ध कराया तथा भारतीय नागरिकों से इसे भरकर अपना विवरण देने को कहा है। इसमें कहा गया, ‘‘कृपया याद रखें, घबराने की जरूरत नहीं है, सावधानी बरतें और तेहरान में भारतीय दूतावास से संपर्क बनाए रखें।” तेहरान स्थित भारतीय मिशन ने एक टेलीग्राम लिंक (TG) भी उपलब्ध कराया तथा भारतीय नागरिकों से मिशन से हालात पर अद्यतन जानकारी प्राप्त करने के लिए इससे जुड़े को कहा। दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘कृपया ध्यान दें कि यह टेलीग्राम लिंक (TG) केवल उन भारतीय नागरिकों के लिए है जो वर्तमान में ईरान में हैं।”   भारतीय दूतावास ने आपात स्थिति के लिए कुछ हैल्पलाइन (HL) नंबर भी जारी किए हैं। इजराइल ने शुक्रवार तड़के ईरान पर हमला कर उसके परमाणु, मिसाइल और सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। बाद में, ईरान ने इजराइल पर जवाबी हमले किए। इजराइल ने और भी जोरदार हमला करने की धमकी दी है। वहीं, ईरान की कुछ मिसाइलें इजराइल की हवाई सुरक्षा प्रणाली को भेदकर रिहायशी इमारतों पर गिरी हैं।   

चंद मिनटों में ऐसे करें करप्ट पेनड्राइव को रिकवर

लगभग हर व्यक्ति अपना अहम डाटा, फोटोज, वीडियोज आदि को अपनी पेनड्राइव में रखता है, पर तब क्या हो जब आपकी पेनड्राइव करप्ट हो जाए और आपके पास उसे ठीक करने का कोई उपाय भी न हो। क्या हुआ ये सोचकर ही परेशान हो गए न आप। अरे अब चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है क्योंकि हम आपके लिए लेकर आएं हैं एक ऐसा तरीका जिससे आप अपनी करप्ट पेनड्राइव को रिकवर कर सकते हैं। ऐसे करें करप्ट पेनड्राइव को रिकवर… 1. सबसे पहले अपनी पेनड्राइव को कंप्यूटर से कनेक्ट कर दें। 2. अब अपने कंप्यूटर के स्टार्ट बटन पर जाएं और राइट क्लिक कर दें। 3. आपके सामने कुछ ऑप्शन्स आएंगे जिसमें से आपको क्लिक कमांड प्रमोप्ट पर क्लिक करना है। 4. फिर आपके पीसी पर एक सीएमडी विंडो ओपन होगी जिसमें आपको डिस्कपार्ट टाइप करना होगा और एंटर प्रेस करना होगा। 5. अब जो भी डिवाइस आपके पीसी से कनेक्ट हैं वो सभी आपको यहा दिखाई देंगी। 6. यहां से अपनी पेनड्राइव की डिस्क को सेलेक्ट कर एंटर करें। (नोटः ध्यान रहे कि आप बिल्कुल सही डिस्क नंबर को सेलेक्ट कर रहे हैं, अगर ऐसा नहीं होता है तो आपका इंटरनल हार्ड ड्राइव भी फॉर्मेट हो सकती है। कुछ भी सेलेक्ट करने से पहले उसे पूरी तरह जांच लें या हो सके तो उस नंबर या सिंबल को कहीं नोट कर लें।) 8. अब आपको क्लिक टाइप पर टैप करना है और फिर पार्टीशन प्राइमरी टाइप करना है। 9. फिर एक्टिवेट टाइप कर दें और उसके बाद पार्टीशन 1 को सेलेक्ट करें। 10. इसके बाद फॉर्मेट एफएस-एफएटी32 टाइप करें और एंटर कर दें। 11. बस चंद मिनटों में ही फॉर्मेट प्रोसेस पूरा हो जाएगा। 12. इसके बाद अगर आप 4 गीगाबाइट्स से बड़ी फाइल लेना चाहते हैं तो एनटीएफएस टाइप करें। 13. मेमोरी फॉर्मेट होते ही आपकी पेनड्राइव रिकवर हो जाएगी।  

सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम जाने वाले मार्ग को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया, यात्रा पर फिलहाल रोक

सोनप्रयाग केदारनाथ धाम जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी जानकारी सामने आई है। पुलिस ने सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम के लिए यात्रा पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है। पुलिस ने रविवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि जंगलचट्टी के पास मलबा और पत्थर गिरने से श्री बाबा केदारनाथ धाम जाने वाला मार्ग खराब हो गया। ऐसे में सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम जाने वाले मार्ग को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। पुलिस ने बताया क पैदल मार्ग से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं, जिनमें सड़क क्षतिग्रस्त होने से पहले केदारनाथ धाम के लिए रवाना हो चुके श्रद्धालु भी शामिल हैं, की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। इसी के साथ पुलिस ने केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं से सुरक्षित रहने की अपील की है।  

सिद्ध शक्तिपीठ है कामाख्या मंदिर, हर तंत्र, हर कामना पूरी होती है यहां

कामाख्या देवी मंदिर में ना तो कोई प्रतिमा दिखेगी और ना ही कोई तस्वीर यहां बस पत्थरों में योनी आकार का भाग है। यह मंदिर अपने आप में एक बेहद ही रहस्यमयी मंदिर है। कामाख्या देवी तांत्रिको के लिए सबसे महत्वपूर्ण देवी है। इसलिए यहां तांत्रिक अपनी सिद्धियां प्राप्त करने आते है। भारत देश रहस्यों से भरा पड़ा है। देश में ऐसे कई रहस्यमयी मंदिर है जिनके आगे विज्ञान तक फेल हो गया है। आज हम आपको भारत के 10 प्रमुख रहस्यमयी मंदिरों में से एक एवं 51 शक्तिपीठों में प्रमुख कामाख्या देवी मंदिर के बारे में आपको बताने जा रहें है। असम राज्य की राजधारी दिसपुर के समीप गुवाहाटी से 8 किलोटिर दूर कामाख्या देवी का मंदिर है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख मंदिर है। जहां सती देवी का योनि भाग गिरा था। आज भी यहां देवी के मासिक धर्म के कारण 3 दिन तक पानी लाल पड़ जाता है। यहां पर सैकड़ों तांत्रिक अपने एकांतवास से बाहर आते है और अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करते है। मंदिर से काफी रहस्य जुड़े हुए है। यहा हर वर्ष अपनी मनोकामना लेकर लाखों की तादात में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते है। काले जादू एवं श्राप से मुक्ति भी यही पर मिलती है। यहां गिरा था देवी का योनि भाग, आज भी बहती है जल की धार बताया जाता है कि भगवान शिव से क्रोधित होकर सती ने विनाशकारी तांडव नृत्य धारण किया था। सती ने धरती को नष्ट करने की चेतावनी दी थी। क्रोध में आकर भगवान विष्णु ने सती के 51 टुकड़े कर दिए थे। जो पृथ्वी के अलग-अलग भागों में जाकर गिरे। इन्हीं में से सती का योनि भाग यहां गिरा था। यहां पर मंदिर में चट्टान के बीच बनी आकृति देवी की योनि को दर्शाता है। जिसके पास में एक झरना मौजूद है। योनि भाग से जल धार हल्की बहती रहती है। श्रद्धालुओं की मानें तो इस जल का पान करने से हर प्रकार के रोग एवं बीमारी दूर होती है।   लगता है अम्बुबाची का मेला, देवी के मासिक धर्म के कारण लाल पड़ जाता है कपड़ा कामाख्या देवी मंदिर पर हर वर्ष अम्बुबाची मेला लगता है। इस दौरान यहां का पानी लाल पड़ जाता है। पानी का लाल होना कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होना बताया जाता है। इसलिए तीन दिन तक मंदिर के पट (द्वार) बंद कर दिए जाते है। इन तीन दिनों के बाद द्वार खोल जाते है तो यहां लाखों की तादात में भक्त दर्शन करने पहुंचते है। देवी के मासिक धर्म से गिले हुए वस्त्रों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। इस गिले कपड़े को अम्बुबाची कहते है। इसलिए मेले का नाम भी अम्बुबाची दिया गया है। तांत्रिकों के लिए महत्वपूर्ण है कामाख्या देवी, पशु की बली देकर करते है प्रसन्न कामाख्या देवी मंदिर में ना तो कोई प्रतिमा दिखेगी और ना ही कोई तस्वीर यहां बस पत्थरों में योनि आकार का भाग है। यह मंदिर अपने आप में एक बेहद ही रहस्यमयी मंदिर है। कामाख्या देवी तांत्रिको के लिए सबसे महत्वपुर्ण देवी है। इसलिए यहां तांत्रिक अपनी सिद्धियां प्राप्त करने आते है। तांत्रिकों के लिए काली और त्रिपुर सुंदरी देवी के बाद कामाख्या सबसे महत्वपूर्ण देवी है जो तांत्रिको को सिद्धियां प्रदान करने में सहायक है। जब व्यक्ति पूरी तरह तांत्रिक नहीं बनता जब तक वो कामाख्या के सामने मत्था नहीं टेकता है। नहीं तो देवी नाराज हो जाती है। यहां का तांत्रिक मेला अपने आप में रहस्यमीय है। इसलिए कामाख्या देवी मंदिर को सबसे शक्तिशाली मंदिर माना गया है। यहां पर बकरे या भैंसे की बलि देकर भंडारा करने से कामाख्या देवी प्रसन्न होती है। इतना ही नहीं अगर किसी पर काला जादू या श्राप का साया है तो उसे यहीं से छुटकारा मिलता है।  

फिल्म कन्नप्पा का ट्रेलर रिलीज

मुंबई,  विष्णु मांचू, अक्षय कुमार, प्रभास और मोहनलाल जैसे सितारों से सजी बहुप्रतीक्षित फिल्म कन्नप्पा का ट्रेलर रिलीज हो गया है। फिल्म कन्नप्पा में विष्णु मांचू लीड रोल में हैं। यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है। फिल्म कन्नप्पा की कहानी तिन्नाडु (विष्णु मंचू) नाम के एक ऐसे शख्स पर आधारित है जो एक महान योद्धा और धनुर्दारी है। उसके गांव और कबीले पर बुरे लोगों की नजर है जिनसे बचाने के लिए वह कुछ भी करने के लिए तैयार है। गांव के लोगों को भगवान में आस्था है लेकिन थिन्नन नास्तिक है लेकिन एक वक्त आता है जब उसे भगवान शिव पर इस कदर आस्था हो जाती है कि उससे बड़ा कोई भक्त ही नहीं। ट्रेलर में दिखाया गया है कि शिवलिंग को कई लोग चुराने की कोशिश करते हैं, लेकिन ‘तिन्नाडु’ यानी विष्णु मांचू इसकी रक्षा करता है। तिन्नाडु उन लोगों को मार देता है जो शिवलिंग चुराने आते हैं और वह वहां के लोगों की रक्षा भी करता है। हालांकि वह भगवान में विश्वास नहीं रखता, उसके लिए शिवलिंग बस एक पत्थर है, तब भगवान शिव (अक्षय कुमार) तिन्नाडु को भक्ति की राह पर लाने के लिए रूद्र यानी प्रभास को भेजते हैं।फिल्म ‘कन्नप्पा’ में विष्णु मांचू के पिता मोहन बाबू ने प्रोड्यूस किया है।  इस फिल्म का निर्देशन मुकेश कुमार सिंह ने किया है। इस फिल्म में विष्णु मंचू,अक्षय कुमार, प्रभास, मोहनलाल (कैमियो), मोहन बाबू, काजल अग्रवाल, नयनतारा, प्रीति मुखुंदन और ब्रह्मानंदन अहम भूमिका में हैं। इस फिल्म से अक्षय कुमार तेलुगु फिल्म में शुरुआत कर रहे है। यह फिल्म 27 जून को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी।  

दमोह, धार और मैहर जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से 6 लोगों की मौत

भोपाल, मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में पिछले दो दिनों में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से 6 लोग मारे गए हैं। कई झुलसे हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। दो दिनों में दमोह, धार और मैहर जिलों में बेमौसम आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने की ये घटनाएं दर्ज की गईं। दमोह जिले के मगरोन थाने के अंतर्गत सिमरी बड़ौदा गांव में शनिवार शाम को तीन बच्चों पर बिजली गिरी। एक नारायण अहिरवार नाम के व्यक्ति का 14 वर्षीय बेटा अमित अपने दोस्त मदन (15) और अनिल (17) के साथ खेत पर गया था। खराब मौसम के बीच आकाशीय बिजली उन पर गिर गई। पुलिस ने बताया कि कमोदा अहिरवार का बेटा मदन बेहोश था, जब उसे सिविल अस्पताल ले जाया गया तो वहां डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया। घायल अमित और अनिल का इलाज चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मदन की छाती पर बिजली गिरने के निशान थे और कपड़े फटे हुए थे, जिससे पता चलता है कि बिजली गिरने की घटना कितनी गंभीर थी। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। धार के सरदारपुर क्षेत्र में तीन अलग-अलग घटनाओं में खेत में काम कर रहे मजदूरों की जान चली गई। रुंडी गांव की वरदी बाई और नाहरपुरा जोलाना गांव के सुखराम खेत से लौटते समय बिजली की चपेट में आए। अमझेरा थाने के राताकोट गांव में सोहन सिंह डामोर की पत्नी मुन्नी पर भी खेत में काम करते हुए बिजली गिरी और उनकी मौत हो गई। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से कई मवेशी भी मर गए। अमझेरा क्षेत्र में बख्तावर के पास बिजली गिरने से 7 बकरियां मर गईं और पशुओं की देखभाल कर रहा 25 वर्षीय नितेश झुलस गया। अमझेरा स्वास्थ्य केंद्र में उसका इलाज चल रहा है। मैहर में बिजली गिरने से मड़ई गांव के 35 वर्षीय सूरज रावत की मौत हो गई, जो पेड़ के नीचे आराम कर रहा था। आसपास के गांवों में भी अन्य लोगों के घायल होने की खबर है। 13 वर्षीय अतुल और उसके 23 वर्षीय चाचा महाजन बकरियां चराते समय बिजली की चपेट में आ गए, जबकि 32 वर्षीय कल्पना सिंह और 8 वर्षीय किशन सिंह सोनवारी में खेतों में काम करते समय झुलस गए।  

गर्मी में हीटस्ट्रोक का रहता है खतरा, ऐसे करें बचाव

इस मौसम में गर्मी से बचने का आसान तरीका है कि आप धूप के संपर्क में कम से कम आएं। कोशिश करें कि आप गर्म मौसम में बाहर न जाएं। अगर आपका जाना जरूरी हो तो सुबह जल्दी या शाम के समय जाने का प्रयास करें। अगर आप घर पर हैं तो भी घर को ठंडा रखने का प्रयास करें। गर्मी के मौसम में जिन लोगों को ज्यादातर बाहर रहना पड़ता है, उन्हें हीटस्ट्रोक का खतरा काफी अधिक होता है। दरअसल, गर्म हवाएं और शरीर के निर्जलीकरण के कारण व्यक्ति को हीटस्ट्रोक होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर इस मौसम थोड़ी भी लापरवाही बरती जाए तो इससे व्यक्ति की जान भी जा सकती है। आपको भी इस मौसम में लू न लगे, इसके लिए आपको कुछ बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में- पीएं पर्याप्त पानी इस मौसम में लू से बचने के लिए शरीर को निर्जलीकृत होने से बचाना बेहद आवश्यक है। इसके लिए अपने साथ पानी की बोतल कैरी करें और हर थोड़ी देर में पानी या अन्य पेय पदार्थ जैसे छाछ, लस्सी, नींबू पानी, नारियल पानी, आम का पन्ना आदि पीएं। हालांकि इस बात का ध्यान रखें कि वह बहुत अधिक ठंडा न हो क्योंकि इससे पेट में दर्द या ऐंठन होने की संभावना बढ़ जाती है। धूप से बचाव इस मौसम में गर्मी से बचने का आसान तरीका है कि आप धूप के संपर्क में कम से कम आएं। कोशिश करें कि आप गर्म मौसम में बाहर न जाएं। अगर आपका जाना जरूरी हो तो सुबह जल्दी या शाम के समय जाने का प्रयास करें। अगर आप घर पर हैं तो भी घर को ठंडा रखने का प्रयास करें। इसके लिए परदे आदि का प्रयोग करें ताकि धूप की तेज रोशनी घर के भीतर प्रवेश न कर सके। कपड़े व खानपान तपिश भरे इस मौसम में बाहर का खाना खाने से बचें। घर पर ही लाइट भोजन ही करें। कभी भी खाली पेट घर से बाहर न निकलें। साथ ही आपके कपड़े भी ऐसे होने चाहिए जो आरामदायक, हल्के रंग के व नेचुरल फैब्रिक जैसे कॉटन व लिनन के बने हों। वहीं गर्मी के मौसम में बाहर निकलते समय खुद को धूप से बचाएं। इसके लिए आप हैट, सनग्लासेज आदि का प्रयोग करें। खुद को रखें ठंडा शरीर का तापमान भीतर से बनाए रखने के लिए तरल पदार्थों पर अधिक फोकस करें। वहीं अगर बाहर से आपकी बॉडी गर्म हो रही हैं तो आप तौलिए को गीला करके उसे अपने पैरों या सिर पर रख सकते हैं। वहीं पैरों को ठंडे पानी की बाल्टी में कुछ देर के लिए रखें। इससे भी शरीर का तापमान सामान्य होता है।  

फिजियोथेरेपी में अपना कॅरियर बनाकर कमाएं पैसा और नाम

एक फिजियोथेरेपिस्ट सिर्फ अलग-अलग तरीकों से मरीजों का इलाज ही नहीं करता, बल्कि वह पेंशेंट को यह भी यकीन दिलाता है कि वह जल्द ठीक हो सकते हैं और वह भी बिना किसी दवाई के। मरीजों में आत्मविश्वास जगाने के लिए पहले आपके भीतर आत्मविश्वास होना जरूरी है। कहते हैं कि दूसरों की सेवा करने में जो आनंद आता है, वह दुनिया की किसी चीज में नहीं हो सकता। आमतौर पर लोग दूसरों की मदद कम ही करते हैं, लेकिन अगर आप दूसरों की तकलीफ नहीं देख सकते तो अपने इस मनोभाव के जरिए ही अपना भविष्य बना सकते हैं। दरअसल, फिजियोथेरेपी एक ऐसा ही क्षेत्र है, जिसमें दूसरों की सेवा करने का आनंद तो प्राप्त होता है ही, साथ ही व्यक्ति काफी अच्छा पैसा और प्रतिष्ठा भी प्राप्त करता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में- क्या है फिजियोथेरेपी फिजियोथेरेपी वास्तव में चिकित्सा विज्ञान की ही एक शाखा है। फिजियोथेरेपी की खासियत यह है कि इसमें इलाज के दौरान किसी भी तरह की दवाई का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि एक फिजियोथेरेपिस्ट व्यायाम, इलेक्ट्रोथेरपी व मसाज जैसे तरीकों का इस्तेमाल करके व्यक्ति को उसकी स्वास्थ्य समस्या से निजात दिलाता है।   स्किल्स एक फिजियोथेरेपिस्ट सिर्फ अलग-अलग तरीकों से मरीजों का इलाज ही नहीं करता, बल्कि वह पेंशेंट को यह भी यकीन दिलाता है कि वह जल्द ठीक हो सकते हैं और वह भी बिना किसी दवाई के। मरीजों में आत्मविश्वास जगाने के लिए पहले आपके भीतर आत्मविश्वास होना जरूरी है। इतना ही नहीं, इस क्षेत्र में कम्युनिकेशन स्किल व प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल मील का पत्थर साबित होते हैं। एक फिजियोथेरेपिस्ट को अपने काम के दौरान कई तरह के मरीजों की समस्याओं को देखना, समझना व उससे निपटना होता है, इसलिए आपकी सहनशक्ति अधिक होनी चाहिए और आपके भीतर दूसरों की मदद करने का जज्बा होना चाहिए। साथ ही अपने कार्य के प्रति प्रेम होना भी उतना ही जरूरी है। योग्यता अगर आप फिजियोथेरेपिस्ट बनना चाहते हैं तो आप बीपीटी यानी बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी, एमपीटी यानी मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। आजकल गवर्नमेंट व प्राइवेट दोनों तरह के कॉलेज में फिजियोथेरेपी कोर्स संचालित किए जाते हैं। लेकिन अगर आप सरकारी कॉलेज में दाखिला लेना चाहते हैं तो पहले आपको स्टेट या सेंट्रल लेवल के एंट्रेंस एग्जाम पास करना होना। वहीं प्राइवेट कॉलेजों में डायरेक्ट और परीक्षा द्वारा दोनों ही तरह से एडमिशन लिया जाता है। संभावनाएं आजकल जिस तरह बीमारियां पैर पसार रही हैं, उसे देखते हुए फिजियोथेरेपिस्ट की मांग भी बढ़ती जा रही है। एक फिजियोथेरेपिस्ट विभिन्न अस्पतालों व क्लिनकि से लेकर, रिहैबिलिटेशन सेंटर, ओल्ड एज होम्स, हेल्थ सेंटर्स, नर्सिंग होम्स एंड डे सेंटर्स, स्पोर्ट्स क्लिनकि, क्लब, जिम सेंटर्स आदि में काम की तलाश कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ समय के अनुभव के बाद आप खुद का फिजियोथेरेपी सेंटर भी चला सकते हैं।   आमदनी इस क्षेत्र में आमदनी आपके अनुभव के साथ बढ़ती जाती है। वैसे शुरूआती दौर में आप दस से बीस हजार रूपए प्रतिमाह आसानी से कमा सकते हैं। कुछ समय बाद जब आपका अनुभव बढ़ता है और आप किसी अच्छे हॉस्पिटल या हेल्थ सेंटर के साथ जुड़कर काम करते हैं तो आप महीने के 40000 से 50000 रूपए भी आसानी से कमा सकते हैं। वहीं अगर आप अपना प्राइवेट फिजियोथेरेपी सेंटर खोलते हैं तो आप पर सिटिंग के हिसाब से चार्ज कर सकते हैं।   प्रमुख संस्थान… पं दीनदयाल उपाध्याय इंस्टिट्यूट फॉर फिजिकली हैंडिकैप्ड, नई दिल्ली के जे सौम्या कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, मुंबई इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एजूकेशन एंड रिसर्च, पटना सांचती कॉलेज ऑफ फिजियोथैरेपी, पुणे अपोलो फिजियोथेरेपी कॉलेज, हैदराबाद निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, तेलंगाना नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ रिहेबिलिटेशन ट्रेनिंग एंड रिसर्च, उड़ीसा एसडीएम कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, कर्नाटक जे एस एस कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी, मैसूर महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल एजुकेशन, केरल डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन, तमिलनाडु  

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